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QS वर्ल्ड रैंकिंग में भारत ने चीन को पछाड़ा: एशिया के टॉप 10 में 7 भारतीय संस्थान, 37 नए यूनिवर्सिटी की एंट्री

QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में भारत के 148 संस्थानों ने जगह बनाई है। इसी के साथ भारत ने चीन को पीछे छोड़ दिया है। यह रैंकिंग एशिया के संस्थानों के लिए जारी की गई है। इसमें भारत के बाद चीन और जापान का स्थान है। पिछली बार की तुलना में इस बार भारत के 37 और शिक्षण संस्थान इसमें शामिल किए गए हैं।

बीते वर्ष इस QS वर्ल्ड रैंकिंग में भारत के 111 शिक्षण संस्थान शामिल थे, जो कि इस बार बढ़कर 148 हो गए। QS की इस रैंकिंग में IIT दिल्ली और IIT मुंबई शीर्ष 50 में जगह बनाने में सफल रही हैं। वहीं, IIT मद्रास, IIT कानपुर और IISc बैंगलोर सहित पाँच अन्य संस्थान शीर्ष 100 में शामिल हैं।

इस रैंकिंग में कुल 25 देशों के 856 यूनिवर्सिटी को शामिल किया गया है। यह रैंकिंग पूरी दुनिया में उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता, उनमें हो रहे शोध, छात्रों में उनकी माँग और शिक्षा-जगत में उनके प्रदर्शन को आधार बनाकर तैयार की जाती है। इसे Topuniversities.com नाम की एक वेबसाइट द्वारा हर साल प्रकाशित किया जाता है।

यह रैंकिंग पूरी दुनिया के पाँच हिस्सों – एशिया, लैटिन अमेरिका, इमर्जिंग यूरोप, मध्य एशिया और अरब क्षेत्र के अतिरिक्त BRICS देशों के लिए जारी की जाती है। वर्तमान रैंकिंग, जिसमें भारत शीर्ष पर है, एशिया के लिए है। इस बार की रैंकिंग में चीन के कुल 133 यूनिवर्सिटी और जापान के 96 यूनिवर्सिटी शामिल हुए हैं।

इस रैंकिंग में ना सिर्फ भारत के अधिक संस्थानों ने जगह बनाई है, बल्कि उनकी पिछले वर्ष की रैंकिंग में भी सुधार हुआ है। भारत के कुल 21 संस्थानों ने अपनी रैंकिंग में सुधार किया है। वहीं, 15 यूनिवर्सिटी की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं हुआ है। IIT मुंबई, IIT दिल्ली और IIT मद्रास क्रमशः 40 और 46 तथा 53 की रैंकिंग के साथ पूर्ववत हैं।

वहीं, IISc बैंगलोर अब 58 से 52 और IIT खड़गपुर 61 से 59वें स्थान पर पहुँच गया है। IIT कानपुर की रैंकिंग 66 से 63 हो गई है। सबसे बड़ी छलांग IIT गुवाहाटी ने मारी है, जो कि 124 से सीधे 111वें स्थान पर पहुँच गई है। वहीं, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी 119 से 117वें स्थान पर पहुँच गया है।

भारत के लगातार बढ़ते संस्थानों की संख्या प्रदर्शित कर रही है कि देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बीते वर्षों में काफी सुधार हुआ है। वर्ष 2014 में इस रैंकिंग में भारत के मात्र 16 संस्थान शामिल थे। अब 9 वर्षों के बाद यह संख्या लगभग 10 गुनी हो गई है। हालाँकि, वैश्विक रैंकिंग में अभी भी भारत के संस्थान पिछड़ रहे हैं।

भारत अनुसंधान के क्षेत्र में असाधारण रुप से आगे आया है। प्रति संकाय पेपर के मामले में एशिया के 10 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में से 7 विश्वविद्यालय भारतीय हैं। वहीं, अन्ना विश्वविद्यालय ने अनुसंधान उत्पादकता में क्षेत्रीय श्रेष्ठता हासिल की है। इस सूचकांक में इसने पहला स्थान हासिल किया है।

तौलिया से कटरीना कैफ का सब कुछ ढका था, DeepFake से दिखा दिया: रश्मिका मंदाना और सारा तेंदुलकर भी बन चुकी हैं शिकार

रश्मिका मंदाना और सारा तेंदुलकर के बाद अब बॉलीवुड एक्ट्रेस कटरीना कैफ की डीपफेक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस फोटो में कटरीना की ही फोटो में उनके कपड़ों से छेड़छाड़ हुई है और उसे अश्लील दिखाने का प्रयास किया गया है।

कटरीना की जिस फोटो के साथ अभद्रता की गई है वो टाइगर-3 के एक सीन का स्क्रीनशॉट है। सीन में सिर्फ इतना है कि कटरीना की लड़ाई तौलिया लेकर एक विदेशी महिला से हो रही होती है इसी दौरान वो सीन आता है। मगर AI द्वारा जनरेट की गई फोटो में उन्हें बिकनी पहनाया गया है।

असली फोटो में कटरीना के शरीर पर तौलिया ढका है जिसके कारण उनका पेट और उनकी छाती के आसपास का हिस्सा बिलकुल नहीं दिखाई दे रहा है। लेकिन जो वीडियो एडिट करके उनकी शेयर हो रही है उसमें उन्हें ब्रा और पैंटी पहना दी गई है। देख सकते हैं कि उसमें किस तरह से उनके शरीर की फोटो के साथ छेड़छाड़ करके उसे घटिया दिखाने का प्रयास हुआ है।

बता दें कि कटरीना कैफ की तस्वीर से पहले ऐसी ही छेड़छाड़ कई अन्य सेलीब्रिटीज की फोटोज के साथ हुई है। जैसे सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर की फोटो के साथ शुभमन गिल की फोटो एडिट करके जोड़ दी गई जबकि हकीकत में वो अपने भाई के साथ पोज में फोटो खिंचाई थीं।

इसी प्रकार हिरोइन रश्मिका मंदाना का चेहरा एडिट करके भी एक वीडियो वायरल हुई थी। उस वीडियो में उनका चेहरा जारा पटेल नाम की महिला की वीडियो में जोड़ा गया था जो यूजर्स को देखकर नहीं पसंद आया। बाद में पता चला वो रश्मिका का एडिटिड वीडियो है। इसे लेकर साउथ एक्ट्रेस में नाराजगी भी जाहिर की थी और अमिताभ बच्चन ने इस पर लीगल एक्शन लेने को भी जरूरी बताया था।

DeepFake क्या है?

डीपफेक के सम्बन्ध में ‘द गार्जियन‘ के एक लेख में जानकारी दी गई है कि यह सबसे पहले सोशल मीडिया एप रेडिट (Reddit) पर सामने आया था। तब एक Deepfake नाम के यूजर ने टेलर स्विफ्ट, गल गडोट जैसी अभिनेत्रियों के फर्जी पोर्न क्लिप डाल दिए। इसके बाद से ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई।

डीपफेक तकनीक से वीडियो बनाना एक लम्बी प्रक्रिया है। सबसे पहले जिन दो लोगों के चेहरे आपस में बदले जाने हैं उनके हजारों फोटो वीडियो ‘एनकोडर’ नाम के एक AI आधारित प्रोग्राम पर चलाए जाते हैं। यह तकनीक इन दो चेहरों की समानताएँ परखती है। इसके बाद यह तकनीक इन चेहरों को केवल उनकी समानताओं के आधार पर सीमित कर देती है और एक कंप्रेस्ड इमेज बनाती है।

इसके पश्चात एक और AI तकनीक ‘डीकोडर’ से चेहरा तलाशने को कहा जाता है। आसान भाषा में समझे तो इनकोडर को ‘A’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता और डीकोडर को ‘B’ का चेहरा पढ़ने के लिए तैयार किया जाता है। इसके पश्चात दोनों मशीनों से यह चेहरा बनाने को कहा जाता है लेकिन इस स्थिति में इनकोडर को B का और डीकोडर को A का चेहरा बनाने को कहा जाएगा। ऐसे में मान लीजिए कि B उस फोटो में रो रहा है तो नई फोटो में A रोता हुआ दिखेगा।

इसके अलावा एक अन्य तकनीक जिसका नाम ‘जनरेटिव एड्वर्सियल नेटवर्क’ (GAN) है उसके जरिए भी बनाई जाती हैं। इसमें एक गड़बड़ तस्वीर और एक सही तस्वीर डाली जाती है। AI तकनीक इन दोनों के कोड डिकोड करके फोटो को आपस में मिलाती है। इसमें समय लगता है।

फिलस्तीन जाकर खुद को उड़ाने वाला था झारखंड का आरिज हसनैन, ATS ने 2 ISIS आतंकियों को पकड़ा: पाकिस्तान से भी मिले लिंक

झारखंड पुलिस के आतंकरोधी दस्ते (ATS) ने दो आतंकियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान गोड्डा के आरिज हसनैन और हजारीबाग के मोहम्मद नसीम के तौर पर सामने आई है। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) से दोनों के तार जुड़े हुए हैं। हसनैन फिलस्तीन जाने की फिराक में था। वहाँ फिदायीन हमला कर अल अक्सा मस्जिद को यहूदियों से आजाद कराना उसका लक्ष्य था।

ATS ने पहले हसनैन को गिरफ्तार किया जो सोशल मीडिया के माध्यम से ISIS की विचारधारा का प्रचार कर रहा था। उसने पूछताछ में नसीम के बारे में खुलासा किया। इसके बाद नसीम की गिरफ्तारी हुई। इस्लामिक स्टेट के अलावा दोनों के पाकिस्तान के आतंकी संगठनों से संपर्क के भी सबूत मिले हैं।

हसनैन ने पूछताछ में खुलासा किया कि नसीम ने ही उसे हमास, ISIS और अन्य आतंकी संगठनों के विषय में जानकारी दी थी। उसे ‘जिहाद’ और ‘क्रुफ बीथ तागूत’ नाम की किताबें भेजी, जिससे वह आतंक की राह पर आगे बढ़ सके। ये पुस्तकें ISIS के पूरी दुनिया में इस्लामी शासन स्थापित करने जैसे विचारों के विषय में बताती हैं।

ATS के अनुसार हसनैन और नसीम दोनों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इस्लामिक आतंकी संगठनों से भी जुड़े हुए थे। इनका कश्मीर के भी कई युवक-युवतियों से कनेक्शन है। हसनैन सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार आतंकी विचारधारा को फैला रहा था।

अपने कट्टर विचारों को फैलाने और सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए हसनैन और नसीम टेलीग्राम एप का उपयोग करते थे। अब ATS ने इन पर आतंक फैलाने समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर इन्हें गिरफ्तार कर लिया है और आगे की पूछताछ कर रहे हैं।

गौरतलब है 7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला करके 1,400 लोगों को मार दिया था। इजरायल तब से ही हमास के ठिकानों पर गाजा में बमबारी कर रहा है। पूरी दुनिया के इस्लामी कट्टपंथी हमास का बचाव करने में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में हसनैन फिलस्तीन जाकर हमास के सम​र्थन में फिदायीन हमला करने की फिराक में था।

‘घुसाने-निकालने’ पर विदेशों में भी हो रही नीतीश कुमार की थू-थू, अमेरिकी सिंगर बोलीं- यदि मैं भारतीय होती तो बिहार जाकर लड़ती

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने आपत्तिजनक बयान के लिए माफी माँग ली है। लेकिन इससे जुड़ा विवाद उनका पीछा नहीं छोड़ रहा। देश ही नहीं, विदेश में भी उनकी निंदा हो रही है। अफ्रीकी-अमेरिकी अभिनेत्री और गायिका मैरी मिलबेन (Mary Millben) ने उनका इस्तीफा माँगा है। साथ ही कहा है कि यदि वह भारतीय नागरिक होती तो बिहार जाकर उनके खिलाफ चुनाव लड़तीं।

एक्स/ट्विटर के जरिए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए मैरी मिलबेन ने कहा है कि नीतीश कुमार के बयान का सबसे माकूल जवाब यह होगा कि कोई महिला बिहार की मुख्यमंत्री बने। उन्होंने उन्होंने भाजपा से किसी महिला को बिहार में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने की माँग की है। उल्लेखनीय है कि मिलबेन भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी प्रशंसक हैं।

मिलबेन ने एक अन्य ट्वीट में कहा है कि पूरी दुनिया में 2024 का चुनावी सीजन आ गया है। प्रधानमंत्री मोदी के प्रति अपने समर्थन और प्रेम का कारण उन्होंने उनका विकास के प्रति समर्पित होना बताया है। साथ ही कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी भारत और उसके नागरिकों के विकास के लिए सबसे अच्छे नेता हैं।

प्रधानमंत्री मोदी को उन्होंने महिला सशक्तिकरण को हमेशा मजबूत करने वाला नेता बताया है। इसके लिए उन्होंने द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति पद पर चुनाव और कैबिनेट में महिलाओं को महत्वपूर्ण पद देने के उदाहरण गिनवाए हैं।

मिलबेन ने कहा है कि बिहार में महिलाओं के मूल्यों को चुनौती दी जा रही है, ऐसे में नीतीश कुमार को सिर्फ एक ही तरीके से जवाब दिया जा सकता है। वह है नीतीश के सामने किसी महिला मुख्यमंत्री को उम्मीदवार बनाना। बिहार के लोगों से भी मिलबेन ने अपील की है कि वह बदलाव के लिए वोट दें और एक महिला को सत्ता में लाएँ। उनके इस बयान को भारत से लेकर अमेरिका तक काफी समर्थन मिल रहा है।

मिलबेन ने जून 2023 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान जन गण मन भी गाया था, उन्होंने उन लोगों की आलोचना भी की थी जो प्रधानमंत्री की इस यात्रा का विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी हमेशा भारत के लोगों की स्वतंत्रता के लिए लड़ेंगे।

गौरतलब है कि 7 नवंबर 2023 में महिलाओं की शिक्षा और जनसंख्या नियंत्रण पर बात करते हुए नीतीश कुमार ने विधानसभा में कहा था, “अगर पढ़ लेगी लड़की, और जब शादी होगा तब लड़का लड़की का तो जो पुरुष है वो तो रोज रात में शदिया होता है उसके साथ करता है ना उसी में और पैदा हो जाता है। लड़की पढ़ लेती है तो हमको मालूम था कि उ करेगा ठीक है! लेकिन अंतिम में भीतर मत घुसाओ उसको बाहर कर दो! करता तो है।”

विधान परिषद में उन्होंने कहा था, “उसी समय लड़की भी जब पढ़ी-लिखी रहती है तो कहती है कि ठीक है, रात में करो लेकिन अपना जो तुमको निकलने लगे तो बाहर निकाल कर फेंक दो। यही कर के लड़की सब अब सबको समझा रही है। ज़रा जान लीजिए। लड़की सब सभी को समझाती है कि अपने पति को कंट्रोल में रखिए।”

उनके इस बयान को ‘सेक्स एजुकेशन’ बताते हुए बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बचाव किया था। लेकिन विवाद बढ़ने के बाद नीतीश कुमार ने माफी माँग ली थी।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने मनाई दीवाली, PM आवास पर हुआ हिंदुओं का जुटान: कट्टरपंथी बोले- एक और मोदी आ गया

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने अपने आधिकारिक निवास 10 डाउनिंग स्ट्रीट में दीवाली से पहले हिंदू समुदाय के लोगों के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन करवाया। इस दौरान पीएम सुनक और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ कई हिंदू लोग दिखाई दिए।

कार्यक्रम की तस्वीरें एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की गई हैं। इन तस्वीरों में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी अक्षता मूर्ति दीप प्रज्वलित करती दिख रही हैं। इस दौरान उनके आसपास कई सारे लोग हैं जिन्होंने भारतीय परिधान धारण किए हुए हैं।

पोस्ट में लिखा गया है- आज प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने दीवाली- (अंधकार पर प्रकाश की विजय) के शुभ अवसर पर हिंदू समुदाय के लोगों का स्वागत किया। आगे पोस्ट में लिखा गया- ब्रिटेन या फिर विश्व में सबको शुभ दीवाली।

गौरतलब है कि दीवाली इस वर्ष 12 नवंबर को मनाई जानी है। ऐसे में सुनक के आवास पर ये आयोजन 9 नवंबर को हुआ। कई भारतीय यूजर्स ने उनके द्वारा आयोजित करवाए गए इस आयोजन पर खुशी जाहिर की। वहीं कुछ कट्टरपंथियों ने इसपर भी सवाल उठाए और घृणा दिखाते हुए लिखा कि आखिर गाजा पर प्रधानमंत्री ऋषि सुनक क्यों नहीं बोलते।

एक ने कहा- शायद ये ब्रिटेन के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने संसद की और उसके लोगों की न सुनकर इनका अपमान किया है। ब्रिटेन ने एक और मोदी को प्रधानमंत्री चुन लिया है जो अपने देश में अल्पसंख्यकों को नहीं देखना चाहता। ये सबसे गंदा दौर है।

बता दें कि भारतीय मूल के ऋषि सुनक जब से ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने हैं तभी से वो अक्सर पूजा-पाठ करने, मंदिर जाने, गौसेवा करने, जय श्रीराम का नारा लगाने आदि के लिए चर्चा में आते रहते हैं। एक बार उन्होंने बताया था कि उनके डेस्क पर हमेशा गणेश भगवान रहते हैं।

इसके अलावा जी20 के वक्त जब वो अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति के साथ नई दिल्ली आए थे तब भी उन्होंने अक्षरधाम मंदिर में पूजा-अर्चना की थी और उनकी तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं। उन्होंने बिना हिचकिचाए ये भी कहा था कि उन्हें हिंदू होने पर गर्व हैं, उनकी परवरिश इसी तरह हुई है और वो भी ऐसे ही हैं। हिंदू त्योहारों को धूमधाम से मनाने की बात भी उन्होंने बताई थी।

20 साल की सौमिनी दास पति को छोड़ रहने लगी 29 साल के अबिल अब्राहम के साथ, एक फोन कॉल के बाद दोनों जल कर मरे

कर्नाटक के कोथानुर स्थित डोडागुब्बी में एक घर से आग की लपटें निकल रही थी। अंदर दो लोग जल रहे थे – कोलकाता की सौमिनी दास और केरल का अबिल अब्राहम। आस-पड़ोस के लोग जब तक आग बुझाते, उससे पहले ही सौमिनी की मौत हो गई। अबिल अब्राहम की साँसे चल रही थीं, अस्पताल ले जाया गया लेकिन बच न सका।

20 साल की सौमिनी दास और 29 साल का अबिल अब्राहम दोस्त थे। 3 महीने पहले ही दोस्ती हुई थी। 3 महीने में ही दोस्ती ऐसी कि साप्ताहिक छुट्टी वाले दिन शादीशुदा सौमिनी के कमरे में अब्राहम आता था, साथ रहता था। दोस्ती को एक स्टेप आगे ले जाते हुए दोनों फिर लिव-इन में रहने के लिए कोथानुर स्थित डोडागुब्बी में चौथी मंजिल पर एक फ्लैट लेकर रहने लगते हैं। इसी फ्लैट में आग लगाकर मर भी जाते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता की सौमिनी दास की शादी 2021 में हुई थी। फिलहाल वो बेंगलुरु के पास मराठहल्ली स्थित एक प्राइवेट कॉलेज से बीएससी नर्सिंग की कोर्स कर रही थीं। सेकंड ईयर की स्टूडेंट थीं। इसी कॉलेज से लगभग 17 किलोमीटर दूर कोथानुर में केरल के अबिल अब्राहम ने अपना नर्सिंग एजेंसी खोल रखा था। अब्राहम के इसी नर्सिंग एजेंसी में सौमिनी दास पार्ट-टाइम जॉब भी करती थी। 3 महीने पहले दोनों पहली बार यहीं मिले और दोस्ती हुई, फिर प्यार भी।

शादीशुदा सौमिनी दास 3 महीने पहले कोलकाता गई थीं। उस समय उन्होंने अपने पति पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया था। तलाक लेने की बात भी अपने घर वालों को बता कर वो वापस बेंग्लुरु आ गई थी। उसने अपने पति को यह बताया था कि वो अब साथ नहीं रह सकते। सौमिनी ने यह कारण दिया था कि उसका पति उसे आजादी के साथ जीने नहीं देता है, फैसले लेने नहीं देता है। उसने यह भी कहा था कि वो अब अपने प्रेमी अब्राहम के साथ ही जीवन भर रहेगी।

सौमिनी दास और अबिल अब्राहम के प्रेम-प्रसंग की बात को लेकर उसके पति ने घटना वाले दिन 5 नवंबर 2023 को अपनी पत्नी को कॉल किया था। इस कॉल के बाद ही दोनों ने कहीं से पेट्रोल खरीदा और आग लगा कर आत्महत्या की।

कोथानुर पुलिस के अनुसार जिस फ्लैट में आग लगाकर आत्महत्या की गई, वहाँ से कोई सुसाइड नोट नहीं मिली है। घटना वाली जगह से पेट्रोल की खाली बोतलें और अन्य सामान पुलिस को मिले, जिससे प्रथम दृष्ट्या यह आत्महत्या का मामला माना जा रहा। सौमिनी दास और अबिल अब्राहम दोनों के फोन लॉक हैं, इसलिए साइबर एक्सपर्ट की मदद से इनके फोन लॉग, कॉल और मैसेज तक पहुँच कर आगे की जाँच जारी है।

500 पन्नों की रिपोर्ट, क्या जाएगी महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता: जानिए TMC सांसद पर कार्रवाई की एथिक्स पैनल ने क्यों की सिफारिश

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लोकसभा की आचार समिति (Ethics Committee) ने उनकी सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की है। टीएमसी सांसद के खिलाफ जाँच कर रही समिति ने 500 पन्नों की रिपोर्ट पेश की है। मोइत्रा पर कारोबारी से पैसे और गिफ्ट लेकर सवाल पूछने का आरोप है।

महुआ मोइत्रा पर संसद में पैसे लेकर प्रश्न पूछने और संसद पोर्टल की लॉगइन आईडी-पासवर्ड कारोबारी दर्शन हीरानंदानी को देने के आरोप हैं। समिति ने महुआ के इन कामों को गंभीर आपराधिक, संदेहास्पद और अनैतिक बताया है। उसने कहा है कि उन पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। समिति ने महुआ पर लगे आरोपों की जाँच की समयबद्ध तरीके से जाँच करने की अनुसंशा भी की है।

गौरतलब है कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने अक्टूबर में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिख कर महुआ मोइत्रा के खिलाफ जाँच की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि मोइत्रा के पूर्व पार्टनर जय अनंत देहाद्राई ने उन्हें इस विषय से अवगत कराया है।

निशिकांत दुबे ने कहा था कि TMC सांसद ने जितने भी प्रश्न बीते दिनों में लोकसभा में पूछे हैं उनमें से अधिकांश अडानी समूह के विरुद्ध हैं और ऐसा दर्शन हीरानंदानी के व्यापार को फायदा पहुँचाने के लिए किया गया था। यह सब हीरानंदानी से महँगे गिफ्ट और पैसे लेने के बदले किया गया।

समिति ने माना है कि महुआ ने अपनी संसद आईडी ‘अनाधिकारिक व्यक्ति’ से साझा की। महुआ ने दर्शन हीरानंदानी से महँगी वस्तुएँ और सुविधाएँ ली। समिति ने इसे गंभीर दुराचार बताते हुए गंभीर कार्रवाई की सिफारिश की है।

अब इस रिपोर्ट को संसद के शीतकालीन सत्र में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपा जाएगा। इसके बाद वह महुआ मोइत्रा पर कार्रवाई का निर्णय लेंगे। समिति ने इससे पहले निशिकांत दुबे की शिकायत पर जय अनंत देहाद्राई, महुआ मोइत्रा को पूछताछ के लिए बुलाया था।

महुआ ने पहले समिति के सामने तय तारीख पर पेश होने से इनकार कर दिया था। बाद में जब वह 2 नवम्बर 2023 को समिति के सामने पेश हुईं तो बैठक छोड़ कर चली गईं। महुआ के साथ समिति में शामिल विपक्ष के सांसदों ने भी खूब हंगामा काटा था।

आचार समिति ने महुआ के इस आचरण पर भी प्रश्न उठाए हैं और उनसे सहयोग ना मिलने की बात कही है। यदि समिति की अनुशंसा पर लोकसभा स्पीकर एक्शन लेते हैं तो महुआ की सदस्यता जा सकती है। निशिकांत दुबे की शिकायत के आधार पर लोकपाल ने भी महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई जाँच के आदेश दिए हैं।

मोहम्मद शमी की दूसरी बीवी बनने को तैयार है हिरोइन, पर अंग्रेजी सीखने की रखी शर्त: नेटीजन्स बोले- कोलकाता वाली लड़कियों से दूर रहना

वर्ल्ड कप 2023 में अपनी शानदार गेंदबाजी से सबका दिल जीतने वाले भारतीय क्रिकेट टीम के गेंदबाज मोहम्मद शमी इन दिनों एक शादी के प्रपोजल के कारण से चर्चा में है। उन्हें एक एक्ट्रेस ने कहा है कि वो उनसे निकाह करने को तैयार हैं, बस उनकी एक शर्त है।

एक्ट्रेस का नाम पायल घोष है। पायल ने शमी से शादी करने की इच्छा सोशल मीडिया पर खुल्लमखुल्ला जताई है। नीचे पोस्ट में देख सकते हैं कि पायल घोष ने लिखा-

“शमी तुम अपना इंग्लिश सुधार लो। मैं तुमसे निकाह के लिए तैयार हूँ।”

पायल ने यह पोस्ट 2 नवंबर को किया था। लेकिन चर्चा में ये ट्वीट अब आया है। कुछ यूजर्स ने ऐसी बात सोशल मीडिया पर लिखने पर पायल घोष का मजाक भी उड़ाया है।

किसी ने कहा, “तुम उससे निकाह करना चाहती हो, पर वो तुमसे निकाह नहीं करेगा क्योंकि तुम उसके लायक नहीं हो।”

एक यूजर ने कहा किसी का मजाक बनाना अच्छा नहीं है और वैसे भी कोलकाता की लड़कियों से तो शमी अब दूर ही रहने वाले हैं।

शमी के ऊपर बीवी हसीन जहाँ के तंज

बता दें कि मोहम्मद शमी की पहली पत्नी कोलकाता से ही है। उनके साथ विवादों के चलते शमी पर कुछ समय पहले काफी उंगलियाँ उठी थी। आज भी रह रहकर हसीन जहाँ सोशल मीडिया या मीडिया के जरिए शमी पर तंज कसती रहती हैं।

कुछ दिन पहले उन्होंने एक पोस्ट डाला था जिसमें एक भैंसा दिखाकर उसे कहा था- ये अमरोहा का भैंसा है। लोगों ने अंदाजा लगाया था कि चूँकि शमी अमरोहा से हैं तो इसीलिए पोस्ट के लिए हसीन जहाँ उन्हीं का मजाक उड़ा रही हैं।

इसी तरह शमी के वर्ल्ड कप परफॉर्मेंस को देखते हुए भी हसीन जहाँ का कमेंट आया था। उन्होंने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा था- “कुछ भी है वो अच्छा परफॉर्म कर रहा है। अच्छा खेलेगा, टीम में बना रहेगा तो अच्छा कमाएगा और हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। मैं टीम इंडिया को शुभकामनाएँ दूँगी लेकिन उसे नहीं।”

हीरोइन रश्मिका मंदाना के बाद अब सचिन तेंदुलकर की बेटी बनी डीपफेक का शिकार, भाई के साथ थी फोटो, AI की मदद से गैर के गले में हाथ डाले दिखाया…

फेमस एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना के बाद अब क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा तेंदुलकर डीपफेक (Deep Fake) तकनीकी का शिकार बन गई हैं। उनकी एक तस्वीर को डीपफेक तकनीकी के दम पर एडिट कर दी गई है। इस तस्वीर में उनके साथ भाई हैं, लेकिन उनकी जगह किसी और की तस्वीर लगा दी गई।

असली तस्वीर में सारा अपने भाई अर्जुन तेंदुलकर के साथ हैं, लेकिन डीपफेक तकनीकी से अर्जुन तेंदुलकर के चेहरे पर इंटरनेशनल क्रिकेटर और सारा के रूमर्ड बॉयफ्रेंड शुभमन गिल का चेहरा लगा दिया गया। यही नहीं, उस तस्वीर को सोशल मीडिया पर ये कहकर प्रचारित किया गया कि सारा तेंदुलकर ने शुभमन गिल के साथ अपने रिश्ते पर मुहर लगा दी है।

ये तस्वीर की जा रही वायरल

एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक, सारा तेंदुलकर की डीपफेक तस्वीर पोस्ट करते हुए धोनी पोपा नाम के एक अकाउंट से ट्वीट किया गया। इस अकाउंट से लिखा गया कि सारा तेंदुलकर ने कंफर्म कर दिया है कि वो शुभमन गिल को डेट कर रही हैं। हालाँकि, सच्चाई कुछ और ही है।

सारा तेंदुलकर की डीपफेक तस्वीर, फोटो साभार : एबीपी न्यूज

क्या है इस फोटो की सच्चाई?

ये फोटो वास्तव में AI जेनेरेटेड डीपफेक तकनीकी की मदद से बनाई गई है। असली फोटो खुद सारा तेंदुलकर ने अपनी प्रोफाइल पर पोस्ट किया था, जिसमें उनके साथ उनके भाई अर्जुन तेंदुलकर हैं। ये तस्वीर अर्जुन तेंदुलकर के 24वें जन्मदिन के मौके पर सारा ने शेयर की थी।

इस तस्वीर में अर्जुन तेंदुलकर कुर्सी पर बैठे हैं और सारा तेंदुलकर ने उनके कंधों पर हाथ रखी हुई हैं। सारा ने कई तस्वीरें अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी पोस्ट की थी, जिसमें चौथी तस्वीर को डीपफेक की मदद से एडिट किया गया है।

बता दें कि हाल ही में रश्मिका मंदाना का डीपफेक वीडियो वायरल हुआ था। इस बारे में उन्होंने एक लंबा नोट शेयर किया था। अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने अपने फर्जी वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उनके लिए यह डरावना है और और दुखी करने वाला है।

रश्मिका ने कहा था कि यह सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि उन सबके लिए डरावना है जो तकनीक का उपयोग करते हैं। रश्मिका के इस फेक वीडियो पर अमिताभ ने भी अपनी आपत्ति जताई थी। इस घटना ने केंद्रीय आईटी मंत्रालय को जाँच शुरू करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया कि जल्द ही उनकी रिपोर्ट दी जाए।

फ्रेंच किताबें और अंग्रेजी सिनेमा देखने वाला ‘लाल कॉटेज’ का लाल ऐसे बन गया हिंदुत्व का सबसे बड़ा नायक: कहानी तब की जब ‘पाकिस्तान’ में लगती थी संघ की शाखा

भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी बुधवार (8 नवंबर, 2023) को 96 वर्ष के हो गए। मध्य प्रदेश में चुनावी रैलियों में व्यस्त रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शाम को उन्हें जन्मदिवस की बधाई देने के लिए नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर पहुँचे। लालकृष्ण आडवाणी ही वो नेता हैं, जिन्होंने रथयात्रा कर के राम मंदिर के मुद्दे को हवा दी थी और इसके 2 वर्ष बाद बाबरी ढाँचे को ध्वस्त कर दिया गया था। उन्हें राम मंदिर आंदोलन का नायक कहें तो ये अतिशयोक्ति नहीं होगी।

कराची में हुआ था लालकृष्ण आडवाणी का जन्म

लालकृष्ण आडवाणी के बारे में बता दें कि उनका जन्म 8 नवंबर, 1927 को सिंध (जो अब पाकिस्तान में है) के कराची शहर में हुआ था। उनका परिवार में उनके अलावा सिर्फ उनके माता-पिता और बहन ही थे। उनके जन्म के तुरंत बाद उनके परिवार ने जमशेद क्वार्टर्स (पारसी कॉलोनी) मोहल्ले में ‘लाल कॉटेज’ नाम का एकमंजिला बँगला बनवाया था। उसी मोहल्ले में कई समृद्ध पारसी समाज के लोग रहते थे। सिंधी हिन्दुओं की आमिल शाखा से उनका परिवार ताल्लुक रखता था।

आमिल समाज के बारे में बता दें कि ये लोग लोहानो वंश के 2 मुख्य भागों में से जुड़े थे जो वैश्य समुदाय से आते थे। मुस्लिम बादशाह भी अपने प्रशासकीय तंत्र में इनकी सहायता लेते थे। ये लोग नानकपंथी होते थे और सिख धर्म से इनकी नजदीकी थी। आगे चल कर सिंध में सरकारी नौकरियों में भी इनका दबदबा रहा। लालकृष्ण के दादा धरमदास खूबचंद आडवाणी संस्कृत के विद्वान थे और एक सरकारी हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक भी। उनके पिता किशिनचंद एक व्यापारी थे।

लालकृष्ण आडवाणी का पालन-पोषण संयुक्त परिवार वाले माहौल में हुआ और उन्हें उनके दादा और नानी का भरपूर प्यार मिला। उनके जन्म के समय सिंध अंग्रेजों के बॉम्बे प्रेसिडेंसी का हिस्सा हुआ करता था। उनके घर के मुख्य देवता गुरु ग्रन्थ साहिब ही हुआ करते थे। ‘गुरु मंदिर’ नामक स्थानीय गुरुद्वारा में हिन्दू और सिख अपने-अपने त्योहार पूरे उल्लास के साथ मनाया करते थे। उनके जन्मदिन पर कभी केक नहीं काटा जाता था, बल्कि गुरु ग्रन्थ साहिब का पाठ हुआ करता था।

फिल्मों से लालकृष्ण आडवणी को था विशेष प्यार

आपको ये जान कर सुखद आश्चर्य होगा कि लालकृष्ण आडवाणी बचपन में और युवावस्था में अंग्रेजी फ़िल्में देखा करते थे और खूब अंग्रेजी किताबें पढ़ते थे, ऐसे में बाद में यही लालकृष्ण आडवाणी हिंदुत्व के सबसे बड़े नायक के रूप में उभरे। उनकी शिक्षा-दीक्षा ‘सेंट पैट्रिक्स हाईस्कूल फॉर बॉयज’ में हुई थी। एक ऐसे स्कूल में, जिसकी स्थापना सन् 1845 में आयरलैंड से आए कैथोलिक मिशनरियों ने की थी। वहाँ एक चर्च भी था। पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे परवेज मुशर्रफ भी उसी स्कूल से पढ़े थे।

1936-42 तक की अवधि लालकृष्ण आडवाणी के जीवन में इसी स्कूल में गुजरी। सिनेमा और अंग्रेजी पुस्तकों से लालकृष्ण आडवाणी का लगाव उनके शुरुआती जीवन का एक विशेष हिस्सा है, जिसका जिक्र उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘मेरा देश, मेरा जीवन‘ में भी किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि कैसे वो अपने 4 मामाओं में सबसे छोटे सुंदर मामा के साथ अक्सर फ़िल्में देखने निकल जाते थे। उन्होंने ‘फेंकेंस्टाइन’ नामक एक डरावनी फिल्म का जिक्र किया है, जो उन्होंने उस जमाने में देखी थी।

ये 1931 की एक हॉरर फिल्म थी, जिसे पेबी वेबलिंग के एक नाटक के आधार पर बनाई गई थी। ये नाटक मैरी शेली की 1818 में आए उपन्यास पर आधारित थी। इसी के नाम पर फिल्म का नाम भी रखा गया। ‘यूनिवर्सल स्टूइडियोज’ ने इस फिल्म का निर्माण किया, जिसके के रीमेक बन चुके हैं। हालाँकि, लालकृष्ण आडवाणी के जीवन में एक ऐसा समय भी आया जब उन्होंने 15 वर्षों तक 1942-56 के दौरान कोई फिल्म नहीं देखी। फिर वो जब मुंबई अपने सुंदर मामा के यहाँ गए तो उन्होंने ‘हाउस ऑफ वेक्स’ नामक फिल्म देखी।

ये एक थ्रीडी फिल्म थी। ये भी एक मिस्ट्री हॉरर फिल्म थी। उस समय 3D बड़ी बात हुआ करती थी, ऐसे में फिल्म को लेकर खासी चर्चा थी। ऊपर से ये रंगीन फिल्म भी थी। जब 1942 में देश में अंग्रेजों के खिलाफ ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू हुआ, लालकृष्ण आडवाणी ने उसी साल सिंध वाले हैदराबाद स्थित दयाराम गिदूमल कॉलेज में एडमिशन लिया। उसी दौरान विदेशी साहित्य में उनकी रुचि जगी। कॉलेज की लाइब्रेरी में वो पुस्तकें पढ़ने में समय व्यतीत करने लगे।

उन्होंने साइंस फिक्शन लिखने वाले फ्रेंच लेखक जूल्स वर्न के सारे उपन्यास पढ़ डाले – ‘जर्नी टू द सेंटर ऑफ द अर्थ’, ‘ट्वेंटी थाउजेंड लीग्स अंडर द सी’, ‘अराउंड द वर्ल्ड इन 80 डेज’ इत्यादि। यूरोप के साहित्य में जूल्स वर्न का विशेष स्थान है, जो एडवेंचर से भरे उपन्यास लिखा करते थे और तकनीक का इस्तेमाल खूब करते थे। उनके साहित्य को विलियम सेक्सपियर से भी ज़्यादा बार अनुवादित किया गया है। 2010 के दशक में वो सबसे ज़्यादा अनुवादित किए जाने वाले फ्रेंच लेखक थे।

केवल उन्हें ही नहीं, बल्कि कॉलेज की लाइब्रेरी में लालकृष्ण आडवाणी ने चार्ल्स डिकेंस का ‘अ टेल ऑफ टू सिटीज’ और एलेक्जेंडर ड्यूमा का ‘द थ्री मस्केटियर्स’ नामक उपन्यास भी पढ़ी थी। इसमें पहले वाला उपन्यास एक फ्रेंच डॉक्टर की कहानी है, जो फ्रांस में हुई क्रांति से पहले के लंदन और पेरिस में सेट है। फ़्रांस के जेल में कैद उस डॉक्टर और इंग्लैंड में उसकी बेटी से उसके मिलने की ये कहानी है, जिसे उसने कभी नहीं देखा होता है।’

वहीं दूसरा वाला उपन्यास एक एडवेंचर वाला है, जिसमें 17वीं शताब्दी के एक युवक की कहानी है। सोचिए, लालकृष्ण आडवाणी उस समय फ्रेंच लेखकों के कितने दीवाने हो उठे थे। ये उस ज़माने की बात है जब भारत आज़ाद भी नहीं हुआ था। लालकृष्ण आडवाणी तब क्रिकेट के भी दीवाने थे और रेडियो पर स्थानीय भाषाओं में कमेंट्री सुना करते थे। लेकिन, उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण क्षण तब आया था जब 14 वर्ष की आयु में उन्होंने RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की सदस्यता ली।

RSS का लालकृष्ण आडवणी के जीवन पर विशेष प्रभाव

अपने एक दोस्त के माध्यम से वो शाखा में पहुँचे थे। वहीं उनकी जान-पहचान पूर्णकालिक प्रांत प्रचारक राजपाल पुरी से हुई जो उनके मार्गदर्शन भी बने। दीनदयाल उपाध्याय के अलावा उनका ही सबसे ज़्यादा प्रभाव लालकृष्ण आडवाणी पर रहा। स्कूली ज्ञान और घर के लाड़-दुलार में धनी रहे आडवाणी को देश-दुनिया की गतिविधियों के बारे में संघ की शाखा से ही पता चलता था। श्यामदास की बौद्धिक चर्चा में उन्हें आक्रांताओं से देश को आज़ाद कराने की लड़ाई में कूदने की प्रेरणा मिली।

उसी दौरान उन्हें द्विराष्ट्र वाले सिद्धांत के बारे में भी पता चला, जिसके तहत मुस्लिम नेता अपने लिए अलग इस्लामी मुल्क माँग रहे थे। विभाजन के बारे में सोच कर ही वो हैरान हो उठते थे। इसी दौरान उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप और गुरु गोविन्द सिंह के बारे में पुस्तकें पढ़ीं। राजस्थान यात्रा के दौरान उन्होंने जेम्स टॉड की ‘एन्नेल्स एन्ड एंटीक्विटिज ऑफ राजस्थान’ नामक पुस्तक भी पढ़ी। इन्हीं सब के कारण उनके भीतर बदलाव आए और वो राष्ट्रवाद की तरफ झुकते चले गए।

लालकृष्ण आडवाणी की प्रतिभा के बारे में भी जान कर आपको सुखद आश्चर्य होगा। मात्र 17 वर्ष की उम्र में एक शिक्षक के रूप में उन्होंने अपनी पहली नौकरी की, तब उनके कई छात्र उनकी ही उम्र के थे। यहाँ एक और पुस्तक का जिक्र करना पड़ेगा, जिसने लालकृष्ण आडवाणी के जीवन पर बड़ा प्रभाव डाला, जो है – डेल कार्नेगी की ‘How to Win Friends & Influence People’, यानी दोस्त कैसे बनाएँ और लोगों को प्रभावित कैसे करें।

लालकृष्ण आडवाणी, वीर सावरकर और एक सिख दोस्त

इसी दौरान लालकृष्ण आडवाणी ने राजपाल पुरी की सलाह के बाद वीर विनायक दामोदर सावरकर की 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम पर लिखी पुस्तक पढ़ी। इस पुस्तक को खरीदने के लिए उन्होंने अपनी जमापूंजी से 28 रुपए खर्च किए थे। इसी से उन्हें प्रेरणा मिली कि वो अपना जीवन राष्ट्रकार्य को समर्पित करें। नवंबर 1947 में ऐसा समय भी आया जब आडवणी सावरकर से उनके बम्बई स्थित आवास पर मिले और विभाजन को लेकर दोनों के बीच चर्चा हुई।

इसी दौरान उन्हें अपने एक सिख दोस्त की याद आई। कराची का उक्त सिख उनके घर के पास ही रहता था, RSS का समर्पित स्वयंसेवक भी था। विभाजन के पूर्व जब दंगे शुरू हो गए थे तब उसके परिवार को भी प्रताड़ित किया गया और उन्हें वहाँ से पलायन करना पड़ा। जान बचाने के लिए उसे अपने केस कटवाने पड़े और बाल मुँडवाने पड़े। इससे उसे इतना सदमा पहुँचा कि वो कई वर्षों तक मानसिक विक्षिप्त रहा। कराची में अपने अंतिम दिनों में लालकृष्ण आडवणी स्वामी रंगनाथानन्द द्वारा गीता व्याख्या सुनते थे, जिसका उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

ये थे लालकृष्ण आडवाणी के बचपन और शुरुआती युवावस्था के दिन। आज से 33 वर्ष पहले यानी 1990 में आडवाणी ने हिन्दुओं को जोड़ने और राम मंदिर निर्माण की माँग के लिए गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक के लिए रथ यात्रा निकाली। यह 25 सितम्बर को सोमनाथ से निकली थी और इसको अलग-अलग प्रदेशों से होते हुए 30 अक्टूबर, 1990 को अयोध्या पहुँचना था। इस यात्रा के सारथी वही नरेंद्र मोदी थे, जो आज देश के प्रधानमंत्री हैं। उस समय वे गुजरात भाजपा के संगठन महामंत्री हुआ करते थे। असल में, राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का अवतरण इसी रथ यात्रा के जरिए हुआ था।