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केदारनाथ में मोदी-मोदी के नारों से जनता ने किया राहुल गाँधी का स्वागत, 5 राज्यों में चुनाव के बीच अचानक मंदिर क्यों पहुँचे पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष?

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी रविवार (5 नवंबर, 2023) को उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम पहुँचे, जहाँ जनता ने उनका स्वागत मोदी-मोदी के नारों से किया। वीडियो में देखा जा सकता है कि राहुल गाँधी जैसे ही वहाँ पहुँचते हैं, चारों तरफ से लोग मोदी-मोदी के नारे लगाना शुरू कर देते हैं। भाजपा के IT सेल के राष्ट्रीय प्रभारी अमित मालवीय ने भी ‘न्यूज़ तक’ चैनल का वीडियो शेयर किया, जिसमें उत्तराखंड में राहुल गाँधी का स्वागत मोदी-मोदी नारों से हो रहा है।

बता दें कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चल रही है और लगातार दूसरी बार पार्टी ने वहाँ बहुमत पाया है, ऐसे में कॉन्ग्रेस की हालत वहाँ खस्ताहाल है। अभी 5 राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में चुनाव प्रचार जोरों पर है और इन सभी में कॉन्ग्रेस मुख्य मुकाबले में है, ऐसे में राहुल गाँधी का अचानक पहाड़ों के बीच पहुँच जाना हैरत भरा है। राजस्थान और छत्तीसगढ़ में तो कॉन्ग्रेस सत्ता में है, वहीं तेलंगाना और मध्य प्रदेश में वो मुख्य विपक्षी दल है।

राहुल गाँधी ने केदारनाथ मंदिर में भी पूजा-अर्चना की और सोशल मीडिया पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा कि उन्होंने यहाँ दर्शन प्राप्त किया और आराधना की। साथ ही उन्होंने ‘हर हर महादेव’ भी लिखा। एयरपोर्ट पर पहुँचते ही पार्टी के नेताओं ने उनका स्वागत किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि मंदिर में दर्शन कर वहाँ 3 दिनों का प्रवास और फिर वापस दिल्ली लौटने का प्लान है। गढ़वाल गेस्ट हाउस को उनके रुकने के लिए बुक किया गया है।

ये पहली बार है जब राहुल गाँधी केदारनाथ में 3 दिनों तक रुकेंगे। इससे पहले वो पंजाब के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर भी पहुँचे थे और वहाँ जूते-चप्पल साफ़ कर के सेवा की थी। पंजाब में भी AAP के हाथों कॉन्ग्रेस की बुरी हार हुई है। अब राहुल गाँधी के सरप्राइज विजिट, वो भी चुनावों के बीच, चर्चा का विषय बन रहा है। हिन्दू त्योहारों पर भी वो कभी देवी-देवताओं की तस्वीरें नहीं डालते हैं। ऐसे में सवाल है कि क्या कॉन्ग्रेस हिन्दुओं की भावनाओं को भुनाना चाहती है?

मातृत्व और बच्चों की देखभाल के लिए महिला सैनिकों को भी अधिकारियों की तरह छुट्टियाँ, ‘अग्निवीर’ में भी यही सुविधाएँ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी मंजूरी

सुरक्षा बलों में महिला अधिकारियों की तरह ही महिला सैनिकों को भी अब मातृत्व, बच्चों की देखभाल और बच्चे गोद लेने के लिए छुट्टियाँ और अन्य सुविधाएँ समान रूप से मिलेंगी। दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महिला सैनिकों, नाविकों और वायु योद्धाओं को उनके समकक्ष अधिकारी के समान मातृत्व, बच्चों की देखभाल और बच्चे को गोद लेने की छुट्टी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मोदी सरकार द्वारा यह पहल सेना में महिला और पुरुषों की समान सहभागिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से दी गई हैं। 

रक्षा मंत्रालय ने रविवार (5 नवंबर, 2023) को कहा कि यह निर्णय सशस्त्र बलों में सभी महिलाओं की समावेशी भागीदारी है, चाहे उनकी रैंक कुछ भी हो। प्रस्ताव में कहा गया है कि इस उपाय से सेना में महिलाओं के लिए काम की स्थिति में सुधार होगा क्योंकि इससे उन्हें अपने पेशेवर और पारिवारिक जीवन को बेहतर तरीके से संतुलित करने में मदद मिलेगी

मंत्रालय ने कहा, “नियम जारी होने के साथ ही सेना में सभी महिलाओं के लिए ऐसी छुट्टी का नियम समान रूप से लागू होगा, चाहे वह अधिकारी हो या किसी अन्य रैंक पर।” बता दें कि अग्निवीर महिलाओं को भी यही सुविधाएँ मिलेंगी।

अभी सेना में, महिला अधिकारियों को प्रत्येक बच्चे के लिए पूरे वेतन के साथ 180 दिनों का मातृत्व अवकाश मिलता है। यह सुविधा अधिकतम दो बच्चों के लिए लागू होती है। अधिकारियों के अनुसार,  महिला अधिकारियों को कुल सेवा करियर में 360 दिनों की चाइल्डकैअर छुट्टी दी जाती है। उन्होंने बताया कि एक वर्ष से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने की वैध तिथि के बाद 180 दिनों की बाल गोद लेने की छुट्टी दी जाती है।

वहीं रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “छुट्टी नियमों का विस्तार सशस्त्र बलों से संबंधित महिलाओं के काम के हालत को बेहतर बनाएगा और उन्हें सामाजिक और प्रोफेशनल जीवन में संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।”

मंत्रालय ने कहा कि नारी शक्ति (महिला शक्ति) के उपयोग के प्रति नरेंद्र मोदी सरकार की प्रतिबद्धता के अनुरूप, तीनों सेनाओं ने महिलाओं को सैनिकों, नाविकों और वायु योद्धाओं के रूप में शामिल करके एक आदर्श बदलाव की शुरुआत की है।

मंत्रालय ने इस बात पर ख़ुशी व्यक्त की कि दुनिया के सबसे ऊँचे युद्धक्षेत्र सियाचिन में सक्रिय रूप से तैनात होने से लेकर युद्धपोतों पर तैनात होने के साथ-साथ वायु सेना में भी, भारतीय महिलाएँ अब सशस्त्र बलों में लगभग हर क्षेत्र में बाधाओं को तोड़ रही हैं। इसी कड़ी में 2019 में, भारतीय सेना में सैन्य पुलिस कोर में सैनिकों के रूप में महिलाओं की भर्ती एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई है। 

पाकिस्तान में फ़ौज और एयरफोर्स बेस ही नहीं, पुलिस पर भी हमला: धमाके में 5 की गई जान, वीडियो में दिखा मंजर

पाकिस्तान से लगातार बम धमाकों की खबरें आ रही हैं। हाल में वहाँ एक मोटरसाइकल में बम प्लांट करके धमाका किया गया। ये ब्लास्ट पुलिस वाहन के नजदीक बाइक खड़ी करके हुआ। इसमें 5 लोगों की जान चली गई जबकि 20 लोग घायल हो गए।

ये धमाका खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के डेरा इस्माइल खान शहर में शुक्रवार (3 नवंबर 2023) को हुआ। पुलिस अधिकारी गुल शेर खान ने इस बात की पुष्टि की कि डेरा इस्माइल खान में बम धमाका हुआ। इसमें मरने वाले सारे स्थानीय थे। इस धमाके को बिजी स्टॉप (भीड़-भाड़) वाले इलाके पर किया गया था। जिसके कारण आसपास की जनता के साथ पुलिस वाले भी चोटिल हुए थे।

एपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस अधिकारी बिलाल फैजी ने बताया कि उन्होंने घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया, जहाँ 3 की हालत बेहद गंभीर बनी रही। पुलिस वाहन के आगे मोटरबाइक लगाकर इस धमाके को अंजाम दिया गया।

खबर की मानें तो घटना को लेकर किसी समूह ने शुरुआत में जिम्मेदारी नहीं ली थी। लेकिन संदेह पाकिस्तानी तालिबान पर ही था। दरअसल, नवंबर 2022 में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और पाकिस्तान सरकार के बीच सीजफायर का समझौता खत्म हुआ था। इसके बाद से PAK फौज पर हमले की घटनाएँ बढ़ीं। जिसके कारण पाकिस्तान के कई फौजियों की जान गई।

शुक्रवार को पाकिस्तानी फौज पर भी बलूचसिस्तान में बड़ा हमला होने की खबर आई थी। इस हमले में मुल्क के 14 फौजियों की जान चली गई थी। ये अटैक पाकिस्तानी सेना पर होने वाला इस साल का सबसे बड़ा हमला था। मीडिया में बताया गया कि घटना तब हुई जब पसनी से ग्वादर जा रही दो गाड़ियों पर हमला किया गया। इसके बाद शनिवार को भी पाकिस्तान एयर फोर्स बेस पर अटैक किया गया।

‘…उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जो मुझे पसंद नहीं आए’: युवराज सिंह बोले – MS धोनी मेरे करीबी दोस्त नहीं, वर्ल्ड कप से पहले कहा था – चयनकर्ता तुम्हारे नाम पर नहीं सोच रहे

युवराज सिंह T20 में एक ओवर में 6 छक्के मार चुके हैं और 2011 के वनडे वर्ल्ड कप में भी अपने ऑलराउंड परफॉर्मेंस की वजह से जाने गए। वहीं महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने कई बड़े ICC टूर्नामेंट्स अपने नाम किया। एक समय इन दोनों की जोड़ी को साथ बल्लेबाजी करते हुए देखने के लिए भीड़ उमड़ पड़ती थी। वहीं अब युवराज सिंह ने कह दिया है कि MS धोनी से कभी उनकी करीबी दोस्ती नहीं रही। हालाँकि, जब वो साथ खेलते थे तब दोनों के बीच अच्छी-खासी केमिस्ट्री देखने को मिलती थी। हालाँकि, युवराज के पिता योगराज हमेशा धोनी पर हमलावर रहे हैं।

युवराज सिंह और MS धोनी भले ही 2 विश्व कप की जीतों में साथ रहे हों, लेकिन अब पूर्व क्रिकेट ऑलराउंडर ने कह दिया है कि पूर्व कप्तान उनके करीबी दोस्त नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि उन दोनों की लाइफस्टाइल भी काफी अलग है। उन्होंने कहा, “मैं और माही करीबी दोस्त नहीं हूँ। हमारी लाइफस्टाइल एकदम अलग-अलग है। उनकी लाइफस्टाइल मेरे उलट है। हम सिर्फ क्रिकेट की वजह से दोस्त बने थे। ज़रूरी नहीं है कि जो टीम में आपके साथ हैं वो मैदान से बाहर भी आपके अच्छे दोस्त हों।”

युवराज सिंह ने ये भी कहा कि सभी की लाइफस्टाइल और स्किल सेट अलग-अलग होते हैं। उन्होंने युट्यूबर रणवीर अलहाबादिया के साथ बात करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि जब भी वो और एमएस धोनी मैदान पर गए, तब-तब उन्होंने देश के लिए शत प्रतिशत से अधिक देने की कोशिश की। उन्होंने याद दिलाया कि वो उप-कप्तान हुआ करते थे और धोनी कप्तान। युवराज सिंह ने कहा कि ऐसे में दोनों के बीच निर्णयों को लेकर मतभेद होना स्वभाविक है।

युवराज सिंह ने कहा कि MS धोनी ने कुछ ऐसे निर्णय लिए जो उन्हें पसंद नहीं आए। हालाँकि, उन्होंने कहा कि कई बार उन्होंने भी कई ऐसे फैसले लिए जो धोनी को पसंद नहीं आए। उन्होंने दावा किया कि ये हर टीम में होता है। उन्होंने बताया कि करियर के अंतिम दौर में उन्हें जब कुछ समझ नहीं आ रहा था तब उन्होंने धोनी से सलाह ली, जिन्होंने बताया कि चयनकर्ताओं का पैनल उन्हें विकल्प के रूप में नहीं देख रहा है। उन्होंने कहा कि इसके बाद करियर को लेकर तस्वीर तस्वीर साफ़ हुई।

युवराज सिंह का कहना है कि ये 2019 में हुए वर्ल्ड कप के पहले की बात है। उन्होंने कहा कि एक तरह के लोग एक तरह के लोगों के साथ दोस्ती करते हैं। वहीं टीम में कुछ लोग ईगो साथ लेकर आते हैं, कुछ नहीं। उन्होंने याद किया कि जब धोनी चोटिल थे तो वो उनके लिए रनर भी बने। उन्होंने याद किया कि एक बार वो 90s में थे तो रनर के रूप में उन्होंने डाइव किया, ताकि वो शतक पूरा करने के लिए धोनी को स्ट्राइक दिला सकें। इसी तरह उन्होंने याद दिलाया कि नीदरलैंड्स के खिलाफ वो 48 पर थे, तब धोनी ने 2 डॉट बॉल खेल कर उन्हें स्ट्राइक दी, ताकि वो फिफ्टी पूरा कर सकें।

‘जनजातीय समाज की बेटियाँ और जमीन- दोनों बांग्लादेशी घुसपैठियों के निशाने पर’: NIA से दखल की माँग, भाजपा ने CM हेमंत सोरेन को बताया साजिश का सूत्रधार

झारखंड भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि प्रदेश में जनजातीय लोगों के अस्तित्व को खत्म करने की साजिश रचा जा रहा है। संथाल क्षेत्र का विशेष तौर पर नाम लेते हुए उन्होंने बांग्लादेशी घुसपैठियों द्वारा जनजातीय महिलाओं से निकाह करने और उनकी जमीनें हड़पने का आरोप लगाया है। रविवार (5 नवंबर 2023) को अपने X हैंडल से केंद्रीय जाँच एजेंसी (NIA) और गृह मंत्रालय को टैग करते हुए मरांडी ने इस साजिश का सूत्रधार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बताया।

बाबूलाल मरांडी ने अपने ट्वीट में कहा, “जिस प्रकार से घुसपैठियों को जाली दस्तावेज, आधार और वोटर कार्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं, यह हेमंत सरकार की मौन स्वीकृति के बिना संभव नहीं है।” हेमंत सोरेन पर मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति का आरोप लगाते हुए बाबूलाल ने आरोप लगाया कि जनजातीय अस्मिता के नाम पर वोट माँगने वाले हेमंत सोरेन झारखंड में उनकी पहचान मिटाने में लगे हुए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने ट्वीट के साथ दैनिक भास्कर की एक पेपर कटिंग भी अटैच की है। इस अख़बार की कटिंग में ख़ुफ़िया विभाग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया गया है कि संथाल में बांग्लादेशी घुसपैठिए न सिर्फ आधार और वोटर कार्ड बनवा रहे, बल्कि उन्होंने जमीनें भी खरीद ली हैं।

बांग्लादेशी घुसपैठियों ने जो जमीनें खरीदीं हैं, उनमें से कई जमीनें जनजातीय लोगों की हैं। अखबार की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जहाँ घुसपैठिए कानूनी अड़चनों के चलते जमीनें नहीं खरीद पा रहे हैं, वहाँ वो अपनी असल पहचान छिपाकर जनजातीय महिलाओं से निकाह कर रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी द्वारा शेयर की गई पेपर कटिंग में बंगलादेशी घुसपैठियों को आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बताते हुए हुए प्रशासन से उनके सत्यापन और कार्रवाई की अपेक्षा की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय गृहमंत्रालय ने 30 साल पहले ही संथाल क्षेत्र के कुछ जिलों में 25 हजार बांग्लादेशी घुसपैठिए चिन्हित किए थे। इन सभी के नाम वोटर लिस्ट में भी जुड़ गए थे, जिन्हें बाद में हटवाया गया था।

जनजातीय लोगों की जमीन हड़पे जाने का आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने इस सिस्टम में CM हेमंत सोरेन और उनके राजनैतिक सगे-संबंधियों को शामिल बताया है। अंत में NIA और केंद्रीय गृह मंत्रालय को टैग करते हुए उन्होंने झारखंड के मुख्यमंत्री को नकारा नेता बताया और मामले का संज्ञान लेकर कार्रवाई माँग की।

चंदनकियारी से भाजपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार ने इसे संथाल क्षेत्र की डेमोग्राफी बदलने की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अपनाई गई मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के चलते जनजातीय बच्चियाँ बलि चढ़ रही हैं। भाजपा MLA ने राज्य में अपराध और तस्करी को अपने चरम पर बताया है।

दफ्तर में लाश डालने वाले थैले, ब्रिटेन पुलिस ‘सूअर’ और ‘हराम’: जिन इस्लामी कट्टरपंथियों के गुण गाता है BBC, उन्होंने ही हजारों की संख्या में किया हमला

UK का सरकारी मीडिया संस्थान BBC अक्सर इस्लामी कट्टरपंथियों और आतंकियों के महिमामंडन के लिए जाना जाता रहा है। अब यही इस्लामी कट्टरपंथी BBC के दफ्तरों के बाहर पहुँच कर हंगामा करने में लगे हुए हैं। न सिर्फ लंदन, बल्कि स्कॉटलैंड में भी सैकड़ों लोग बीबीसी के दफ्तर के बाहर पोस्टर-बैनर लेकर जुटे। स्कॉटलैंड के ग्लासगो के पैसिफिक क़्वे स्थित बीबीसी के दफ्तर के बाहर अफरातफरी का माहौल रहा। इसी तरह एडिनबर्ग रेलवे स्टेशन पर भी कट्टरपंथियों का कब्ज़ा रहा।’

सबसे पहले ग्लासगो के सेन्ट्रल रेलवे स्टेशन पर हमास समर्थकों ने कब्ज़ा जमाया। उसके बाद भीड़ बीबीसी के ब्रॉडकास्टिंग स्टूडियो की तरफ बढ़ चली। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री ऋषि सुनक की सरकार पर ‘नरसंहार करने वालों के समर्थन’ का आरोप लगाया। उन्होंने फिलिस्तीन को मुक्त करने और युद्ध विराम के लिए नारेबाजी की। साथ ही उन्होंने इजरायल को भी ‘आतंकी देश’ करार दिया। इजरायल ने गाज़ा में जमीनी हमले भी तेज़ कर दिए हैं और अंदर तक सेना घुस चुकी है।

इसके साथ ही हमास समर्थक भीड़ बीबीसी के दफ्तर के बाहर कई बॉडी बैग्स भी छोड़ गई। बता दें कि लाशों को रखने के लिए इन बैग्स का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रदर्शन में महिलाओं और बच्चों का खूब इस्तेमाल किया गया। प्रदर्शनकारियों की संख्या 300 से अधिक बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी झंडों के साथ-साथ फेस मास्क और स्कार्फ भी बड़ी संख्या में लेकर आए थे। उन्होंने ‘इंतिफाद’ (विद्रोह) की नारेबाजी भी की। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और किंग्स कॉलेज के ‘नरसंहार में शामिल’ होने का आरोप लगाया गया।

इसी तरह लंदन में भी ऑक्सफोर्ड सर्कस और बीबीसी के दफ्तर के बाहर हजारों की भीड़ जुटी। प्रदर्शनकारियों में शामिल एक महिला ने तो ब्रिटेन की पुलिस को ही ‘सूअर’ बता दिया। उसने कहा कि पुलिस ‘हराम’ है। यहाँ तक कि प्रदर्शनकारियों ने 7 अक्टूबर को इजरायल में हुए नरसंहार के लिए भी इजरायली सरकार को ही दोषी ठहरा दिया। इसी तरह ट्राफलगर स्क्वायर पर बच्चों के नकली पुतले डाल कर विरोध प्रदर्शन किया गया। वहाँ जमा हुई भीड़ में से 11 को गिरफ्तार भी किया गया।

याद दिला दें कि ये वही BBC है, जो इस्लामी कट्टरपंथियों का गुणगान करता है और हिन्दू घृणा फैलाता है। बीबीसी की प्रधानमंत्री मोदी के विरोध रिपोर्टिंग खासतौर से गुजरात दंगों के डॉक्यूमेंट्री झूठ से भरे हुए थे। इसी तरह, बीबीसी द्वारा रिपोर्ट की गई लीसेस्टर हिंसा भी उतनी ही झूठी थी। उन्होंने ‘हिंदुत्व’ शब्द को इस तरह पेश करने की कोशिश की जैसे कि यह कुछ नकारात्मक हो। लेस्टर में भड़की हिंसा के बाद बीबीसी ने इस्लामी कट्टरपंथियों और दंगाइयों को क्लीन-चिट दी थी।

घर के सामने कुत्ते को शौच मत कराओ…इतना कहने पर पड़ोसी ने महिला पर छोड़ा पिटबुल, कुत्ते ने 5 जगह नोचकर खून निकाला

दिल्ली में शुक्रवार (नवंबर 3, 2023) को एक शर्मनाक घटना घटी जहाँ एक परिवार ने आपसी बहस के बीच अपने पिटबुल कुत्ते को दूसरी महिला के ऊपर छोड़ दिया। वाकया पूरा सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। पीड़िता ने पड़ोसी परिवार के खिलाफ केस करवा दिया है।

घटना स्वरूप नगर थाना इलाके के गली नंबर 14 की है। यहाँ एक महिला अपने पड़ोसियों से सिर्फ ये कहने गई थी कि उसके घर के आगे वो लोग अपने कुत्ते को शौच न कराएँ, लेकिन ये बात इतनी बढ़ गई कि पहले पड़ोसी उस औरत से खुद भिड़ गए और फिर कुत्ते को भी उस पर छोड़ दिया।

पीड़िता का नाम रिया देवी है। रिया ने देखा था कि पड़ोस से एक महिला रोज अपने कुत्ते को उनके घर के सामने शौच कराने लाती थी। जिससे परेशान होकर वो 3 नवंबर को सुबह पौने 9 बजे इस बात की शिकायत करने उनके दरवाजे गई। दरवाजा खुलते ही घर की महिला बाहर निकली और दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। इस दौरान कुत्ता रिया के ईर्द-गिर्द ही घूम रहा था।

शोर मचने पर महिला के परिवार के और लोग भी बाहर आते हैं। पहले तो एक लड़का पिटबुल को घर में ले जाता है लेकिन बाद में रिया को धक्का दिया जाता है और ये देख पिटबुल भी रिया को काटने लगता है। पीड़ित महिला के गिरते ही लड़की पिटबुल को पकड़ अंदर ले जाती है। लेकिन वो दोबारा से आकर झपट्टा मारता है और कई जगह काट भी लेता है।

जब घटना स्थल पर कई लोग जुट जाते हैं तब जाकर घर का युवक पिटबुल को पकड़ता है और रिया वहाँ से हट पाती है। रिपोर्ट के मुताबिक रिया को शरीर में पाँच जगह जख्म आए हैं। पीड़िता का कहना है कि कुत्ते को उकसाने पर ही उसने काटना शुरू किया।

घटना के बाद रिया ने पहले अपना इलाज कराया फिर पड़ोसियों के खिलाफ शिकायत दी। महिला का आरोप है कि पड़ोसी महिला ने जानबूझकर अपने कुत्ते को उनपर छोड़ा। पुलिस ने भी सीसीटीवी देखने के बाद केस को आईपीसी की धारा 289 के तहत दर्ज कर लिया है।

रिया कहती है कि वो इस घटना के बाद से इतने खौफ में है कि घर से बाहर भी नहीं निकलती। बाकी पड़ोसियों का भी यही हाल है। पुलिस केस होने के बाद इस मामले की जाँच कर रही है।

पंजाब में एक सप्ताह में पराली जलाने के 10000 मामले, टॉप पर CM भगवंत मान का गृह जिला: यूपी-हरियाणा को दोष दे रहे AAP के मंत्री, आँकड़े कह रहे कुछ और

दिल्ली में प्रदूषण का स्तर तो खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ है ही, साथ ही इस पर भरपूर राजनीति भी हो रही है। शनिवार (4 नवंबर, 2023) को पंजाब में पराली जलाने की 1360 घटनाएँ सामने आई हैं। सैटेलाइट की तस्वीरों में दिखा है कि पंजाब में किस तरह लगातार पराली जलाई जा रही है। केवल पिछले 4 दिनों की ही बात करें तो 6500 मामले अकेले पंजाब से सामने आ चुके हैं पराली जलाने के। इस साल पंजाब में अब तक पराली जलाने के 14,173 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

लेकिन, दिल्ली के पर्यावरण मंत्री गोपाल राय कह रहे हैं कि पंजाब में पराली जलाए जाने का दिल्ली के वातावरण पर ज़्यादा सर नहीं हो रहा है। उन्होंने सारा दोष हरियाणा और उत्तर प्रदेश पर मढ़ दिया। हालाँकि, आँकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि सबसे ज़्यादा पराली कहाँ जलाई जा रही है। पंजाब में भी दिल्ली की तरह AAP (आम आदमी पार्टी) की ही सरकार है, ऐसे में राजनीति के लिए दिल्ली के मंत्री अपनी पार्टी का बचाव करने में जुटे हुए हैं।

पिछले कुछ दिनों में आँकड़े किस तरह तेज़ी से बढ़े हैं, वो देखिए। 15 सितंबर से 31 अक्टूबर तक डेढ़ महीनों में पंजाब में पराली जलाने के 7673 मामले सामने आए थे। लेकिन, पिछले 4 दिनों में ही ये आँकड़ा दोगुना होने के करीब है। कई मामले तो सैटेलाइट की पकड़ में भी नहीं आते, क्योंकि पराली जला कर धुआँ रोकने के लिए ऊपर से ट्रैक्टर चला दिया जाता है। 3 नवंबर को पराली जलाने के 1551 और और 4 नवंबर को 1360 मामले सामने आए हैं।

इसका असर न सिर्फ दिल्ली, बल्कि पंजाब पर भी पड़ रहा है। बठिंडा वहाँ का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। वहाँ का AQI एक दिन में ही 338 से 385 पर पहुँच गया। पंजाब में अगले कुछ हफ़्तों में 40% किसान अपने खेत से धान की कटाई कर के गेहूँ बोने वाले हैं, ऐसे में पराली जलाने की घटनाओं में अभी और बढ़ोतरी आ सकती है। पराली जलाने की सबसे ज़्यादा घटनाएँ शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान के गृह जिले संगरूर में सामने आई।

यहाँ ऐसी घटनाएँ दर्ज की गईं। पिछले एक सप्ताह की बात करें तो पंजाब में पराली जलाने की 9987 मामले सामने आ चुके हैं। पंजाब के कृषि विश्वविद्यालय (PAU) ने बेहतर पैदावार के लिए 15 नवंबर तक किसानों को गेहूँ की बुआई कर लेने की सलाह दी है। यानी, तब तक पराली जलाने की घटनाएँ ऐसे ही बदस्तूर जारी रहेंगी। इस पूरे साल की भी बात करें तो सबसे ज़्यादा 2147 मामले संगरूर से ही सामने आए हैं। इसके बाद तरनतारन (1585), फिरोजपुर (1531), अमृतसर (1376) और पटियाला (1092) का नंबर आता है।

इसी बीच बीच सोशल मीडिया पर पंजाब के बठिंडा से एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में देखने को मिल रहा है कि कई किसान शर्ट-पैंट में खड़े दो व्यक्तिों को घेरकर उनसे तेज-तेज बात कर रहे हैं और उसके बाद उनमें से एक को देकर पराली में आग लगवा रहे हैं। वीडियो बनाने वाले को कहते सुना जा सकता है- ये देखो भाई ये आग बुझाने आए थे और अब खुद आग लगा रहे हैं। ये शर्ट पैंट में नजर आ रहे व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि सरकारी अधिकारी हैं। जो किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए गाँव गए थे।

‘सनातन के लिए हर घर से एक बच्चा कफ़न बाँध कर निकलेगा’: चादर और फादर पर बागेश्वर धाम वाले बाबा का वार, बोले – ये देश बाबर का नहीं, रघुवर का है

देहरादून के परेड ग्राउंड स्थित खेल मैदान में शनिवार (4 नवंबर, 2023 ) को आयोजित दिव्य दरबार में बागेश्वर धाम मध्य प्रदेश के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने धीरेन्द्र शास्त्री का स्वागत किया। वहीं उत्तराखंड को सनातन का शीश बताते हुए धीरेन्द्र शास्त्री ने एक बार फिर हिन्दू राष्ट्र के संकल्प को दोहराते हुए धर्मान्तरण का विरोध किया। 

बता दें कि शनिवार को देहरादून के परेड ग्राउंड के खेल मैदान में पहली बार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का दरबार लगा। रात 8:20 बजे धीरेंद्र शास्त्री मंच पर पहुँचकर हनुमान जी के चरणों मे शीश नवाया। मंच पर सबसे पहले संतो ने सनातन को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया। वहीं धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि देवभूमि में कण कण में भगवान का वास है।

हालाँकि, देर से शुरू हुए दिव्य दरबार में तीन ही अर्जियाँ पढ़ी गईं। इसके साथ ही के पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देहरादून में 5 दिनों तक कथा करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि कथा के दौरान सनातन धर्म का झंडा बुलंद करने का संदेश दिया जाएगा। जिस तरह एक ब्लड ग्रुप वाला दूसरे ब्लड ग्रुप वालों को रक्त नहीं दे सकता, वैसे ही कैसे हम दूसरा मजहब स्वीकार सकते हैं।

धीरेन्द्र शास्त्री ने देव भूमि उत्तराखंड में तेजी से फैलते दरगाहों और मस्जिदों पर चिंता जताते  हुए कहा, “वो जमीनों पर कब्जा कर चादर डाल देते थे, अब जरूरत है बाबर को बेघर कर रघुवर का नाम बढ़ाया जाए। उत्तराखंड में यह काम होते दिख रहा है। जब उन्हें बागेश्वर नाम सुनायेंगे तो कोई चादर व फादर के निकट नहीं आएगा।”

उन्होंने मुख्यमंत्री धामी की तारीफ करते हुए कहा कि बाबर को बेघर कर दे ऐसा मुख्यमंत्री होना चाहिए। साथ ही उन्होंने धर्मनगरी उत्तराखंड में मदिरा बंद करने के संकल्प को भी दोहराया। 

धीरेंद्र शास्त्री ने आगे कहा कि सौभाग्य है कि आप लोगों को देवभूमि में जन्म मिला। अब हर घर से एक बच्चा सनातन का कफ़न बाँधकर निकलेगा। दुनिया की कोई भी शक्ति हनुमान जी के सामने टिक नहीं सकती। जब शरीर दूसरा खून स्वीकार नहीं कर सकता, तो हम दूसरे मजहब को क्यो स्वीकार करें। यह देश बाबर का नही, रघुवर का है।”

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भारत का मुकुट है। ऐसे में सिर सनातन से ऊपर होगा तभी भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा। उत्तराखंड अब सिर्फ सनातन-सनातन दिखेगा तभी भारत हिन्दू राष्ट्र बनेगा। उन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ों पर मस्जिद नहीं, बल्कि राम मंदिर के निर्माण का आह्वान भी किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे। 

गौरतलब है कि श्री पशुपतिनाथ मंदिर भारत चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से आयोजित इस दिव्य दरबार को शाम चार बजे से शुरू होना था, लेकिन मुंबई से देहरादून आने के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के विमान को दो बार इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी। लिहाजा वह रात आठ बजकर 20 मिनट पर परेड मैदान पहुँचे। उन्होंने देरी से आने का कारण बताते हुए भक्तों से इंतजार के लिए खेद भी व्यक्त किया।

इजरायली बॉयफ्रेंड की लाश के नीचे प्रेमिका ने छिप कर बचाई जान, प्रियंका गाँधी तुष्टिकरण की राजनीति में फिलिस्तीन पर दे रहीं ज्ञान

फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास ने 7 अक्टूबर को इजरायल में चौतरफा हमला करके बच्चे, महिलाएँ एवं बुजुर्ग सहित लगभग 1400 लोगों को मौत के घाट उतार दिए था। इसके बाद इजरायल ने हमास के खात्मे के लिए उस पर कार्रवाई कर रहा है। इसको लेकर कॉन्ग्रेस की महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा इजरायल को कठघरे में खड़ा कर रही हैं, जबकि हमास के वीभत्स कारनामों पर वह चुप रही थीं। हमास ने छोटेद-छोटे बच्चों के गले काट दिए थे। यहाँ तक कि उन्हें जिंदा जला दिया था।

हमास के हमलों में बाल-बाल बची ऐसी ही एक पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाई है। नोआम मजाल बेन-डेविड ने बताया कि जब हमास के आतंकियों ने इजरायल पर हमला किया था, तब वह किबुत्ज में आयोजित फेस्टिवल में हिस्सा ले रही थीं। उस समय उनके साथ उनके बॉयफ्रेंड डेविड नेमन भी थे। आतंकियों ने नोआम के बॉयफ्रेंड को गोली मारकर हत्या कर दी और उन्हें बॉयफ्रेंड के शव के नीचे छिपकर अपनी जान बचानी पड़ी थी।

हालाँकि, प्रियंका गाँधी ने हमास के बर्बर अत्याचार का इतनी पीड़़ा के साथ कभी विरोध नहीं किया। लेकिन, फिलिस्तीन पर कार्रवाई से उनकी उपजी पीड़ा भारत के चुनावी मौसम में काटी जा रही वोट की फसल के रूप में देखा सकता है। इसके कॉन्ग्रेस की पुरानी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के रूप में भी समझा जा सकता है।

दरअसल, प्रियंका गाँधी ने रविवार (5 नवंबर 2023) को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट लिखा। इसमें उन्होंने कहा, “यह भयावह और शर्मनाक है, जिसे शब्दों बयां नहीं किया जा सकता कि लगभग 10,000 नागरिकों, जिनमें से लगभग 5000 बच्चे हैं, का नरसंहार किया गया है। पूरे परिवार को ख़त्म कर दिया गया है। अस्पतालों और एम्बुलेंसों पर बमबारी की गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “शरणार्थी शिविरों को निशाना बनाया गया है, फिर भी ‘मुक्त दुनिया’ के तथाकथित नेता फ़िलिस्तीन में नरसंहार का वित्तपोषण और समर्थन जारी रखे हुए है। युद्धविराम सबसे छोटा कदम है, जिसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा तुरंत लागू किया जाना चाहिए, अन्यथा इसका कोई नैतिक अधिकार नहीं बचेगा।”

27 साल की नोआम ने उस भयानक दिन की याद को साझा करते हुए कहा कि वे अपने बॉयफ्रेंड के साथ उत्सव में व्यस्त थीं। अचानक हर तरफ विस्फोट होने लगे तो उन्हें लगा पटाखे छूट रहे हैं। अचानक हमास के आतंकियों ने धावा बोल दिया और ऑटोमेटिक हथियारों से हर तरफ कहर बरपाने लगे।

नोआम बताती हैं, “हम वहाँ से निकलने के लिए अपनी कार में बैठे, लेकिन आतंकियों ने निकलने के सारे रास्ते बंद कर दिए थे। बाहर निकलना असंभव था। एक सुरक्षा गार्ड चिल्लाते हुए कि अपनी जान बचाने के लिए भागो।” नोआम और डेविड भागने लगे। उन्हें स्टील की दो कंटेनर दिखे। वे दोनों उसमें घुस गए।

इसी दौरान आतंकियों ने ग्रेनेड फेंक दिया। इसमें उनकी दाईं दरफ के लोग मारे गए। इस हमले में वे दोनों बचे रहे। लगभग तीन घंटे तक वे उसी कंटेनर में छिपे रहे। इस दौरान बाहर के भयावह मंजर को वे अपनी कानों से सुनते रहे। नोआम ने बताया, “मैंने एक लड़की को चिल्लाते हुए सुना ‘कृपया मुझे मत ले जाओ। बस मुझे अकेला छोड़ दो’। लेकिन उन लोगों ने लड़की के क्रूरता की हदें पार कीं।”

अचानक हमास का एक आतंकी कंटनेर में कूद गया और अल्लाह हू अकबर चिल्लातेे हुए लोगों पर गोलियाँ बरसाने लगा। नोआमी ने बताया कि वह कंटेनर में अंदर की तरफ चली गई थीं। इसी दौरान नोआम ने देखा कि उनके बॉयफ्रेंड डेविड के सीने में गोली लगी हुई है और वह मृत है। वहीं, पड़ी एक लड़की का कंधा ब्लास्ट में उड़ गया है।

नोआम ने मान लिया कि अब उनकी भी मौत निश्चित है। इसके बाद वह अपनी आँखें बंद करके मौत की प्रतीक्षा करने लगीं। हालाँकि, आतंकियों की गोली उनके पैर और हीप में लगी थी और खून बह रहा था, लेकिन वह हिली नहीं। आतंकियों को लगा कि वह मर गई हैं और वे वहाँ से चले गए।

कुछ घंटों के बाद इजरायल की सेना IDF वहाँ पहुँचीं तो इन्हें वहाँ से ले गई। उस कंटेनर में छिपे 16 लोगों में सिर्फ चार लोग ही बच पाए। बचे हुए सभी लोगों को ईलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ दिनों के ईलाज के बाद वह स्वस्थ हो गईं और दुनिया के सामने उस घटना का जिक्र किया।