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पाकिस्तान के एयर बेस पर बरसे गोला-बारूद, धमाकों वाली Video सामने आई: बलूचिस्तान में भी सेना के काफिले पर हमला, 14 फौजी मरे

पाकिस्तानी सेना पर हमले थमने का नाम नहीं ले रहे। शनिवार (नवंबर 4, 2023) की तड़के खबर आई है कि वहाँ पंजाब के मियांवाली में पाकिस्तान एयर फोर्स बेस पर ताबड़तोड़ गोलीबारी और बम धमाका हुए। कुछ लोग बेस पर हुए हमले की वीडियोज को सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं।

दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान एयर फोर्स बेस पर कई फिदायीन हमलावरों ने इस अटैक को अंजाम दिया है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-जिहाद पाकिस्तान ने ली है।

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर होती वीडियो में ज्यादातर अंधेरा नजर आ रहा है। लेकिन अगर ध्यान से सुनें तो साफ पता चल रहा है कि किस तरह से बेस कैंप पर गोलियाँ चलीं और धमाकों का धुआँ दूर तक उठता दिखाई दिया।

बता दें कि इससे एक दिन पहले यानी कल (3 नवंबर 2023) पाकिस्तानी फौज पर बलूचसिस्तान में बड़ा हमला होने की खबर आई थी। इस हमले में मुल्क के 14 फौजियों की जान चली गई थी। ये अटैक पाकिस्तानी सेना पर होने वाला इस साल का सबसे बड़ा हमला था। मीडिया में बताया गया कि घटना तब हुई जब पसनी से ग्वादर जा रही दो गाड़ियों पर हमला किया गया।

इसी तरह से एक दिन पहले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पाकिस्तानी पुलिस को निशाना बनाया गया था। वहाँ डेरा इस्माइल खान जिले में पुलिसकर्मियों के काफिले को निशाना बनाकर उसपर हमला हुआ था। हमले में 5 लोगों की मौत हो गई थी और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे।

गौरतलब है कि नवंबर 2022 में तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान और पाकिस्तान सरकार के बीच सीजफायर का समझौता खत्म हुआ था। इसके बाद से PAK फौज पर हमले की घटनाएँ बढ़ीं। जिसके कारण पाकिस्तान के कई फौजियों की जान गई।

‘किसी ग्रंथ में नहीं लिखा कि भगवान को खुश करने के लिए पटाखे फोड़ना जरूरी’: केरल हाईकोर्ट ने धार्मिक स्थानों पर रखे पटाखों पर रेड का दिया आदेश

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (3 नवंबर 2023) को एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश में राज्य के अधिकारियों को सभी धार्मिक स्थानों पर रेड डालकर अवैध रूप से रखे गए पटाखों को अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि देर रात धार्मिक स्थलों पर पटाखे नहीं फोड़े जाएँगे। भगवान को प्रसन्न करने के लिए पटाखे फोड़ने का आदेश किसी भी पवित्र ग्रंथ में नहीं है।

न्यायमूर्ति अमित रावल की एकल पीठ ने कहा, “मैं कोचीन और अन्य जिलों के पुलिस आयुक्त की सहायता से डिप्टी कलेक्टर को निर्देश देता हूँ कि वे सभी धार्मिक स्थानों पर छापेमारी करें और सभी धार्मिक स्थानों में अवैध रूप से रखे गए पटाखों को अपने कब्जे में लें। इसके साथ ही निर्देश जारी करें कि अब से कोई भी पटाखे न चलाए।”

केरल के सभी धार्मिक स्थलों पर पटाखे जलाने पर रोक लगाने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आगे कहा, “धार्मिक स्थानों पर देर रात (Odd Hours) में पटाखे नहीं फोड़े जाएँगे, क्योंकि प्रथम दृष्टया किसी भी पवित्र पुस्तक में भगवान को प्रसन्न करने के लिए पटाखे फोड़ने का कोई आदेश नहीं है।”

याचिका में दलील दी गई थी कि जिला कलेक्टर द्वारा विस्फोटक नियमों के तहत विस्फोटक लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं और सभी मंदिरों के पास पटाखे फोड़ने का लाइसेंस नहीं है। याचिका में आगे कहा गया कि अगर लाइसेंस जारी भी किए जाते हैं तो उन्हें विस्फोट के लिए जारी नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे ध्वनि और वायु प्रदूषण के साथ-साथ शांति भी भंग होती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार और धार्मिक प्रतिष्ठानों ने भी याचिकाकर्ता के रुख पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने भी आधी रात के बाद पटाखों की आवाज सुनी है। इसलिए, हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर की सहायता से डिप्टी कलेक्टर को सभी धार्मिक स्थानों पर छापेमारी करने और सभी धार्मिक स्थानों में अवैध रूप से संग्रहीत पटाखों को अपने कब्जे में लेने का निर्देश दिया।

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि आज के आदेश के बाद पटाखे फोड़े गए तो अदालत अवमानना की ​​कार्यवाही शुरू करने के लिए मजबूर हो सकती है। कोर्ट ने सरकारी वकील को अगली सुनवाई यानी 24 नवंबर 2023 से पहले इस पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।

बता दें कि प्रदूषण एवं अन्य कारणों को देखते हुए कोर्ट ने दिल्ली और हरियाणा में भी रात 10 बजे के बाद पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगा रखा है। अब केरल हाईकोर्ट ने इसे अपने राज्य में भी देर रात में पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया।

‘कॉन्ग्रेसी माँ और सजा काट रहे चाचा ने हड़पे ₹7 करोड़, बहन मेरे पति को रेप में फँसाने की दे रही धमकी’: उन्नाव पीड़िता ने MLA पर लगाया था आरोप, अब परिवार से ही जान को खतरा

साल 2017 के चर्चित उन्नाव रेप कांड की पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसकी कॉन्ग्रेस नेत्री माँ, सगी बहन, तिहाड़ जेल में 10 साल की सजा काट रहे चाचा और चाचा की महिला मित्र ने रुपयों को लेकर उसका जीना हराम कर दिया है। पीड़िता ने कहा कि इन लोगों ने रेपकांड कांड के बाद सरकार और विभिन्न जगहों से मिले करोड़ों रुपयों को हड़प लिया। इतना ही नहीं, पीड़िता को दिल्ली में मिली फ्लैट पर इन लोगों द्वारा कब्जे का आरोप लगाया।

पीड़िता ने इस संबंध में पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने कहा कि 8 माह की गर्भवती होने के बावजूद उसे फ्लैट से निकाल फेंका गया। पीड़िता ने आगे कहा, “मेरी बहन मेरे पति को रेप केस में फँसाने की कोशिश कर FIR कराने की धमकी दे रही है, ताकि मेरा आखिरी सहारा भी छिन जाए।” उन्नाव रेप पीड़िता ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर इन चारों आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है।

पीड़िता ने कहा है कि उसका चाचा आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है और इस समय वह हत्या के प्रयास में तिहाड़ जेल में 10 साल जेल की सजा काट रहा है। वहीं, उसकी माँ की राजनीतिक पहुँच ऊँची है। वह पिछले चुनाव में कॉन्ग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है। पीड़िता का कहना है कि ये सभी लोग उसे परेशान कर रहे हैं और उसे मिले 7 करोड़ रुपए को भी हड़प चुके हैं।

पीड़ित ने कहा है कि इस घटना के समय वो नाबालिग बताई गई थी, जिसकी वजह से सारा पैसा उसके चाचा और उसकी माँ के खातों में डाल दिए गए थे। उन लोगों ने ये सारे पैसे हड़प लिए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने अपने चाचा से पैसे माँगे तो उसने कहा कि केस लड़ने में इससे अधिक पैसे खर्च हुए हैं। ।

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर के मुताबिक, पीड़िता का कहना है कि उसके पति ने उसकी हालत को समझते हुए उसका पूरा साथ दिया है, इसलिए उसके परिवार के लोग ही पीछे पड़ गए हैं। पीड़िता ने पुलिस से खुद के लिए और अपने पति के लिए सुरक्षा की माँग की है। इसके साथ ही उसने सारे पैसे भी दिलाने की माँग कही है। पीड़िता है कि वह 8 माह की गर्भवती है और उसकी माँ-चाचा प्रभावशाली हैं, इसलिए वे उसे नुकसान पहुँचा सकते हैं।

बता दें कि उन्नाव रेपकांड काफी चर्चित मामला था। इस मामले में मुख्य आरोपित के तौर पर भाजपा के तत्कालीन विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें कोर्ट ने दोषी ठहराते हुए सजा भी सुनाई थी। अब पीड़िता के इस पत्र से मामले में नया मोड़ आता दिख रहा है। इसको लेकर पत्रकार दीपिका नारायण भारद्वाज ने सवालिया चिन्ह खड़े किए हैं।

दीपिका नारायण भारद्वाज ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मामले को लेकर कहा, “इस मामले में अभी बहुत कुछ सामने आना बाकी है। मुझे उम्मीद है कि एक दिन यह देश इस मामले की वास्तविक सच्चाई को जानेगा। पीड़ित ये परिवार नहीं है। उन्होंने हर किसी को अपराधी के रूप में पेश किया, जो असली पीड़ित हैं।”

क्या फिर शुरू होगा क्रूसेड वॉर? : आतंकी संगठन हिज्बुल्लाह के नेता नसरल्लाह ने इजरायल पर हमास के हमले को ठहाराया सही, बोला- सभी विकल्प खुले, लोगों में डर

गाजा पर इजरायल के हमले के बीच हिज्बुल्लाह के सैयद हसन नसरल्लाह के शुक्रवार (3 नवंबर, 2023) को दिए भाषण से लेबनान में तनाव बढ़ गया है। लेबनान वासी और विशेषज्ञों को डर है कि अगर वह इजरायल के खिलाफ हमले तेज करते हैं तो क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है। वहीं हिज्बुल्लाह के सैयद हसन नसरल्लाह ने अपने भाषण में लेबनान द्वारा सभी संभावनाओं के खुले होने पर जोर दिया। लेकिन युद्ध की कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की। नसरल्लाह ने अरब और मुस्लिम देशों से इजरायल को गाजा पर हमले करने से रोकने की अपील की है। 

अपने भाषण में नसरल्लाह ने हमास द्वारा इजरायल पर हमले की सराहना की। साथ ही कहा कि इजरायल अपने बंदियों को समझौते के बाद ही हासिल कर सकता है।

बता दें कि नसरल्लाह ने बार-बार इज़रायल को मान्यता देने से इनकार कर दिया है, यह कहते हुए कि वह इसके अस्तित्व को गैरकानूनी और अन्यायपूर्ण मानता है। जिससे पहले ही इस आतंकी संगठन और इजरायल के बीच टकराव होता रहा है। 

वहीं नसरल्लाह का यह भाषण तब आया जब हाल के सप्ताहों में हिज़्बुल्लाह और इज़रायल के बीच सीमा पर लेबनान सीमा पर लड़ाई तेज हो गई है। लेबनानी आतंकी समूह का दावा है कि उसके 47 लड़ाके मारे गए हैं जबकि इज़रायल का कहना है कि उसके छह सैनिक मारे गए हैं। वहीं कम से कम छह नागरिकों की भी मौत हो गई है। 

फिर भी, कुछ लोगों का मानना ​​है कि नसरल्ला दक्षिणी लेबनान में अपने आतंकियों को हमले तेज करने के लिए तैयार कर सकता है, भले ही कई लोग इस बात से डरे हैं कि है कि युद्ध उनके जीवन को प्रभावित कर सकता है जैसा कि पहले भी हो चुका है। 

बता दे कि दक्षिण लेबनान को ऐतिहासिक रूप से इजरायल के साथ पहले के युद्दों में देश के किसी भी अन्य क्षेत्र की तुलना में काफी अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। जिसमें से 1985 और 2000 के बीच इजरायल द्वारा 15 साल तक लेबनान के कुछ क्षेत्रों पर नियंत्रण रहा। 

वहीं युद्ध की आशंका के बीच दक्षिण लेबनान के आम निवासी डरे हुए हैं।  लोगों का कहना है कि हम पहले से ही टूटे हुए हैं अभी फिर युद्ध हुआ तो हमारी रोजी रोटी को और भी नुकसान पहुँचेगा। हालाँकि लोग हिज्बुल्लाह के खिलाफ खुलकर बोलने से डर रहे हैं लेकिन वो नहीं चाहते हैं कि लेबनान फिर से इजरायल के साथ युद्ध में उलझे। क्योंकि पहले भी लेबनान को इजरायल के खिलाफ लड़ने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी है।

गौरतलब है कि हिज्बुल्लाह के नसरल्लाह का यह भाषण तब आया है जब हमास आतंकियों द्वारा इजरायल पर हमले के एक महीने बीत चुके हैं। वहीं गाजा में इजरायल के जवाबी हमले में करीब 9000 मारे गए हैं।

बता दें कि हमास के आतंकवादियों द्वारा 7 अक्टूबर को गाजा सीमा में घुसकर इजरायल के अंदर घातक हमला करने के बाद, 1,400 से अधिक लोगों की हत्या कर दी गई। उनमें से ज्यादातर आम नागरिक थे जो मारे गए और 240 से अधिक लोगों को गाजा में अपहरण कर लिया गया। साथ ही लेबनान की दक्षिणी सीमा पर गोलीबारी में वृद्धि देखी गई है। मुख्य रूप से इजराइल और हमास के सहयोगी हिज्बुल्लाह के बीच भी झड़प जारी है। वहीं अब नसरल्लाह के भाषण के बाद व्यापक टकराव की आशंका पैदा हो गई है।

‘राहुल गाँधी ‘राष्ट्रीय पप्पू’, नहीं मिलेगी एक भी सीट’: तेलंगाना CM के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री केटीआर ने कहा- कॉन्ग्रेस का ‘कर्नाटक मॉडल’ बकवास

तेलंगाना विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी है। इस बीच सत्ताधारी दल BRS के नेता और मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर (KCR) के बेटे केटीआर (केटी रामाराव) ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को ‘राष्ट्रीय पप्पू’ कहा है। केटीआर तेलंगाना सरकार में मंत्री हैं। हाल ही में राहुल गाँधी ने एक जल परियोजना में भ्रष्टाचार को लेकर केटीआर पर आरोप लगाया था।

तेलंगाना सरकार में कैबिनेट मंत्री केटीआर ने कहा कि राहुल गाँधी को बातों की समझ ही नहीं रही है। वो जो आरोप लगा रहे हैं, वो गलत है। केटीआर ने आगे कहा कि राहुल गाँधी जल परियोजना से जुड़े खंभों के पानी में डूबने को भ्रष्टाचार कह रहे हैं, जबकि वो एक्सटेंशन का हिस्सा है और वहाँ पर काम चल रहा है।

केटीआर ने रिपब्लिक से बातचीत में कहा, “कालेश्वरम परियोजना तेलंगाना के लोगों के लिए आशीर्वाद है, जबकि कॉन्ग्रेस तेलंगाना के लिए अभिशाप है। राहुल गाँधी को न तो तेलंगाना का इतिहास पता है और न ही उन्होंने राज्य के बारे में जानने का कोई प्रयास किया है। अब समय आ गया है कि वह अपना स्क्रिप्ट राइटर बदल लें और जो कुछ उनकी पार्टी के नेता उन्हें देते हैं, उसे पढ़ना बंद कर दें।”

केटीआर ने कहा कि राहुल गाँधी और तेलंगाना प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ए. रेवंत रेड्डी ने मेदिगड्डा बैराज के एक्सटेंशन को जोड़ने वाले बैराज के लिए बन रहे पिलर्स को बैराज के टूटने के सबूत के रूप में पेश करने की कोशिश की। इसके जरिए ये लोगों में डर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं कि यह बहने वाला है। उन्होंने राहुल गाँधी को ‘भारत का पप्पू’ और रेवंत रेड्डी को ‘तेलंगाना का पप्पू’ बताया।

केटीआर ने कहा कि ये लोग इंजीनियरों की तरह बात करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि उन्हें ये भी नहीं पता कि वो क्या कह रहे हैं। उन्होंने इंडिया टुडे से बातचीत में भी ये बाते दोहराई। केटीआर ने रेवंत रेड्डी को ‘नोट के बदले वोट मामले में रंगे हाथों पकड़ा गया ब्लैकमेलर और भ्रष्ट नेता बताया। साथ ही कहा कि ये अब पैसे के लिए पार्टी के टिकट बेचता है।

केटीआर ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी का नाम कॉन्ग्रेस नहीं, बल्कि ‘घोटाला’ होना चाहिए। उन्होंने कॉन्ग्रेस के कर्नाटक मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के गाँव तक में पानी की सप्लाई नहीं आती। ये कैसा मॉडल है? ये तो बकवास है।

राहुल गाँधी ने केटीआर को कहा था भ्रष्टाचारी

बता दें कि राहुल गाँधी ने ट्वीट करके केटीआर को घेरा था। उन्होंने कहा था कि केसीआर और उनके परिवार के लिए कालेश्वरम परियोजना ‘एटीएम’ है। उन्होंने इस परियोजना को एक लाख करोड़ रुपए का घोटाला करार दिया था। राहुल गाँधी ने कहा था कि केसीआर जनता का पैसा लूट रहे हैं।

30 नवंबर को होंगे मतदान

गौरतलब है कि तेलंगाना विधानसभा चुनाव 2023 में 119 सीटों के लिए चुनाव होने हैं, जिसके लिए मतदान 30 नवंबर 2023 को संपन्न होंगे। इसकी मतगणना 3 दिसंबर 2023 को होगी। चुनाव में भारत राष्ट्र समिति (पूर्व में तेलंगाना राष्ट्र समिति), कॉन्ग्रेस और भारतीय जनता पार्टी मुख्य पार्टियाँ हैं। वहीं, बीआरएस की सहयोगी पार्टी के तौर पर असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM अहम भूमिका में है।

साँप के जहर से मजा! रेव पार्टियों में कैसे पहुँचता है स्नेकबाइट?: ‘मस्ती’ के लिए ड्रग्स की लत में फँसकर जान गँवा रहे हैं युवा

दिल्ली से सटे नोएडा में पुलिस और एक एनजीओ ने मिलकर एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो पार्टियों में साँप और साँप का जहर सप्लाई करते थे। उनके पास से लाखों रुपए की कीमत का 20 मिलीलीटर जहर भी बरामद हुआ है। इस जहर का इस्तेमाल रेव पार्टियों में होता है। ऐसी ही एक रेव पार्टी का जाल बुनकर 5 लोगों को साँपों के साथ पकड़ा गया है। इनका लिंक बिग बॉस ओटीटी के विजेता एल्विश यादव से जुड़ता पाया गया है। अब एल्विश यादव को भी इस मामले में आरोपित के तौर पर शामिल किया गया है।

सवाल ये उठ रहा है कि एल्विश यादव और 5 लोगों को साँप के जहर से संबंधित जिस मामले में आरोपित बनाया गया है उसका काम क्या है? क्यों उन लोगों ने अपने पास साँप रखे हुए थे? अगर ये पार्टी में इस्तेमाल होने थे तो पार्टी में इनका क्या काम होता है? ऐसे कई सवालों के जवाब लोग तलाश रहे हैं। हमारी कोशिश है कि इस बारे में लोगों को जागरुक किया जाए और ये बताया जाए कि लोग नशे के नाम पर अपनी जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं और कई मामलों में इस ‘मजे’ का अंत मौत होता है।

रेव पार्टियों का चलन भारत में तेजी से बढ़ा है। पिछले एक दशक में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें खतरनाक ड्रग्स के सेवन से लोगों की जान भी गई हैं। उन्हीं खतरनाक ड्रग्स में से एक है साँप का जहर, जिसका सेवन करने वाले इसे ‘स्नेक वेनम’ कहकर प्रचारित करते हैं और इसे मर्दानगी से जोड़कर देखते हैं। इन रेव पार्टियों में पैसा, नशा, सेक्स और ताकत का ऐसा कॉकटेल होता है, जो इसका सेवन करने वालों को कथित तौर पर ‘थ्रिल’ देता है। ये थ्रिल ही उनमें जोखिम लेने का जोश पैदा होता है।

जाहिर सी बात है कि साँप का जहर सीमित मात्रा में हो तो आपको कथित तौर पर ‘मजा’ दे सकता है, लेकिन मात्रा थोड़ी-सी भी ज्यादा हुई तो सीधे यमराज के पास भी भेज सकता है। इन सब बातों का प्रचार तो बॉलीवुडिया फिल्में लंबे समय से कर ही रही हैं।

रेव पार्टियों में साँप के जहर का इस्तेमाल कब से शुरू हुआ?

रेव पार्टियों में साँप के जहर का इस्तेमाल कब से शुरू हुआ, इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है। कुछ रिपोर्ट के अनुसार, भारत में यह प्रवृत्ति 2010 के दशक की शुरुआत में शुरू हुई थी। हालाँकि, अन्य रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रवृत्ति 2020 के दशक की शुरुआत में अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। 2010 के दशक की शुरुआत में, भारत में रेव पार्टियों की लोकप्रियता बढ़ने लगी थी।

इन पार्टियों में लोग अक्सर नशीले पदार्थों का उपयोग करते थे, जिनमें कोकीन, एमडीएमए और एक्स्टसी शामिल हैं। कुछ लोगों ने साँप के जहर का उपयोग करना शुरू किया, क्योंकि वे इसे एक नया और अधिक शक्तिशाली नशा मानते थे। इस दौरान भारत में साँप के जहर के उपयोग के बारे में अधिक जानकारी सामने आने लगी। इसने इस पदार्थ के उपयोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद की।

हालाँकि, इसने साँप के जहर के उपयोग को भी बढ़ावा दिया, क्योंकि कुछ लोगों ने इसे एक खतरनाक और चुनौतीपूर्ण नशा माना। 2022 में भारत में रेव पार्टियों में साँप के जहर के उपयोग की रिपोर्ट लगातार आ रही हैं। यह चिंता का विषय है, क्योंकि साँप का जहर अत्यधिक विषाक्त पदार्थ है और इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिसमें मृत्यु भी शामिल है।

रेव पार्टी क्यों प्रतिबंधित है?

रेव पार्टी को कई कारणों से प्रतिबंधित किया गया है। इसका एक कारण यह है कि उन्हें अक्सर अवैध नशीले पदार्थों के उपयोग के लिए एक स्थान माना जाता है। दूसरा कारण यह है कि उन्हें अक्सर अनियमित और खतरनाक माना जाता है। कई देशों में रेव पार्टी को कानूनी रूप से प्रतिबंधित किया गया है।

भारत में रेव पार्टी को एक ‘सार्वजनिक उपद्रव’ माना जाता है और इन्हें आयोजित करने या इसमें भाग लेने के लिए दंडित किया जा सकता है। इन पार्टियों में अक्सर सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज किया जाता है और यह भीड़ से भरा हो सकता है। रेव पार्टी अक्सर कानून-व्यवस्था के लिए चुनौतियाँ पैदा करती हैं। इन पार्टियों में अक्सर शोर, अव्यवस्था और हिंसा होती हैं।

दिल्ली में तेजी से बढ़ रहा स्नेकबाइट का चलन

गल्फ न्यूज ने IANS की अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि स्नेकबाइट दिल्ली में युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, खासकर रेव पार्टियों में। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य ड्रग्स के मुकाबले महंगा होता है, फिर भी इसकी माँग तेजी से बढ़ रही है। हालाँकि, इसके इस्तेमाल की वजह से कई बार मौत तक हो जाती है। इसका नशा सीमित स्तर पर हो, इसके लिए पार्टियों के आयोजक अपनी तरफ से नशेड़ियों का ध्यान रखते हैं कि कहीं वो ज्यादा जहर का इस्तेमाल न कर बैठे।

कहा जाता है कि यह स्नेक बाइट इसका इस्तेमाल करने वालों को एक मजबूत नशा देता है, जिसकी वजह से वो लंबे समय तक पार्टी में डांस करते हैं, मजे करते हैं। नशीली दवाओं के नियंत्रण से जुड़े एक अधिकारी ने बताया है कि स्नेकबाइट दिल्ली में युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। अधिकारी ने यह भी कहा कि दवा का पता लगाना और इलाज करना मुश्किल है, क्योंकि इसकी जाँच के लिए कोई विशेष व्यवस्था ही नहीं है।

भारत में रेव पार्टियों में साँप के जहर के उपयोग के कुछ कारण

भारतीय जर्नल ऑफ साइकेट्री एंड फार्माकोलॉजी में ‘भारत में मनोरंजन के लिए साँप के जहर का उपयोग: केस रिपोर्ट और कुछ रिपोर्ट्स की समीक्षा’ नाम से एक लेख प्रकाशित हुआ है। ये पूरा शोध आधारित लेख मनोरंजन के लिए साँप के जहर के उपयोग से संबंधित है। इस लेख में बताया गया है कि एक 25 साल का लड़का पिछले 6 माह से साँप के जहर का इस्तेमाल नशे के रूप में कर रहा था। उसने दोस्तों से इस बारे में जानकारी ली थी और फिर वो इसका आदी बन गया, लेकिन एक घटना में उसे अस्पताल में दाखिल होने पर मजबूर होना पड़ा।

इसी लेख में बताया गया है कि आखिर क्यों मनोरंजन या मजे के लिए साँप के जहर का इस्तेमाल बढ़ा है। कुछ लोगों ने दावा किया है कि साँप के जहर से होने वाले तीखे नशे के गुलाम हैं तो कुछ ने कहा कि वे साँप के जहर का उपयोग ऊर्जावान महसूस करने या अपने यौन प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए करते हैं।

साँप का जहर एक बहुत ही शक्तिशाली उत्तेजक है और यह हृदय गति, रक्तचाप और श्वसन दर में वृद्धि का कारण बन सकता है। यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं या मृत्यु का कारण बन सकता है। साँप का जहर एक अपेक्षाकृत दुर्लभ नशीला पदार्थ है और इसकी गुणवत्ता को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। साँप का जहर एक बहुत ही नशे की लत वाला पदार्थ है।

स्नेकबाइट का इस्तेमाल!

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन पर मई-जून 2018 को प्रकाशित एक केस स्टडी में साँप के जहर का नशे के लिए इस्तेमाल करने के मामले में बड़ा खुलासा किया गया था। इस लेख में ऐसे 33 वर्षीय व्यक्ति के बारे में बताया गया है, जिसने छोटे-मोटे नशों से शुरुआत कर खुद को साँप के जहर का आदी बना लिया।

एक समय बाद जब अस्पताल में भर्ती हुआ, तब जाकर ये खुलासा हो पाया कि वो साँप के जहर का इस्तेमाल आखिर कर क्यों रहा था। इस रिपोर्ट में विस्तार से जानकारी दी गई है कि किस तरह से एक व्यक्ति जो नशे की गिरफ्त में होता है, उसने विकल्प के तौर पर स्नेकबाइट को चुना। रिपोर्ट के मुताबिक, राजस्थान में एक खास जगह पर लोग बंजारों और सपेरों की मदद से इस तरह का नशा करते है। चूँकि सपेरे साँपों को पालते हैं, इसलिए उन्हें उसके जहर के बारे में पता होता है।

साँप के जहर में कई अहम पदार्थ

वैज्ञानिकों ने साँप के जहर में विभिन्न प्रकार के विषाक्त पदार्थों की पहचान की है। इन विषाक्त पदार्थों में प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड और कार्बोहाइड्रेट का मिश्रण शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि साँप के जहर में एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। इन गुणों का उपयोग दवा बनाने के काम में किया जाता है। वैज्ञानिकों ने साँप के जहर के जीन की खोज की है। इस खोज से साँप के जहर के उत्पादन और अनुवांशिक रूपांतरण में मदद मिलेगी।

इन दवाओं का उपयोग कैंसर, एड्स और अन्य बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है। साँप के जहर का उपयोग चिकित्सा उपकरणों में सुधार के लिए किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, साँप के जहर का उपयोग एंटीबायोटिक युक्त नैनो-कैप्सूल बनाने के लिए किया जा सकता है। साँप के जहर पर शोध एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो चिकित्सा, रक्षा और अन्य क्षेत्रों में कई संभावित अनुप्रयोगों की पेशकश करता है।

नशे के लिए स्नेकबाइट के खिलाफ उठाएँ कदम, खतरे को कहें ‘न’।

स्नेकबाइट एक नया पार्टी ड्रग है, जो भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। स्नेकबाइट का उपयोग करने से गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं, जिनमें मतिभ्रम, दौरे और मृत्यु शामिल हैं। अधिकारियों ने लोगों से स्नेकबाइट का उपयोग करने से बचने का आग्रह किया है। ऐसे में नशीले पदार्थों का उपयोग न करें, विशेष रूप से उन नशीले पदार्थों का उपयोग न करें जो अज्ञात या अनियमित हैं।

यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति को स्नेकबाइट का उपयोग करते हुए देखते हैं तो उन्हें इसके बारे में बात करने की कोशिश करें और यदि आवश्यक हो तो चिकित्सा सहायता लें। यदि आपको संदेह है कि आपने या आपके किसी परिचित ने स्नेकबाइट का उपयोग किया है तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

औरंगाबाद के हनुमान मंदिर में फिर फेंका गया मांस, 4 महीने में ये तीसरी घटना: भड़के ग्रामीणों ने की नारेबाजी, मौके पर पुलिस बल तैनात

बिहार के औरंगाबाद जिले में असामाजिक तत्वों के मंदिर में प्रतिबंधित मांस फेंकने से वहाँ सांप्रदायिक तनाव की खबर है। फिलहाल वहाँ माहौल शांत हैं, लेकिन मौके की नजाकत को देखते हुए जिला प्रशासन ने वहाँ पुलिस बल तैनात कर दिया है।

गुरुवार सुबह (2 नवंबर, 2023) जिले के हसपुरा ब्लॉक की अमझर शरीफ पंचायत के तहत आने वाले बिगहा टोले सुखाड़ी बिगहा के हनुमान मंदिर में मांस फेंका गया था। इसके बाद वहाँ गाँव वाले जुटने लगे। इसके बाद गुस्से से भरी ग्रामीणों की भीड़ ने वहाँ नारेबाजी शुरू कर दी।

सूचना मिलने पर आनन-फानन में प्रशासन का अमला वहाँ पहुँचा और लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। सूचना मिलते ही दाउदनगर एसडीएम मनोज कुमार, एसडीपीओ कुमार ऋषिराज पुलिसकर्मियों सहित तुरंत मौके पर पहुँच गए थे।

गौरतलब है कि हसपुरा ब्लॉक की अमझर शरीफ पंचायत के तहत आने वाले मंदिर में मांस फेंकने की 4 महीने के अंदर ये तीसरी घटना है। इससे पहले भी यहाँ मंदिर में मांस के टुकड़े फेंकने की वारदातें होती रही हैं।

गाँव वालों ने अधिकारियों से डॉग स्कवायड की टीम बुलाने की माँग की थी। वहाँ पहुँचे प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉग स्कवायड टीम बुलाने का दिलासा दिया। इसके बाद मंदिर से मांस को हटाया गया।

वहीं इलाके में सांप्रदायिक तनाव की सूचना मिलते ही जिले के डीएम श्रीकांत शास्त्री, एसपी गौतम मेश्राम काफी संख्या में पुलिसबल लेकर घटना स्थल पर पहुँचे। वहाँ मंदिर के निरीक्षण के बाद आला अधिकारियों ने गाँव वालों उपप्रमुख सत्येंद्र चौधरी, मुखिया प्रतिनिधि ओमप्रकाश चौधरी, राकेश कुमार, मुखिया चुन्नु शर्मा, उपमुखिया विकास कुमार से घटना को लेकर बात की।

ग्रामीणों को संयम बरतने की सलाह देने के साथ ही अधिकारियों ने उनको आश्वासन दिया कि आरोपितों को पकड़ने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। तब कहीं जाकर ग्रामीण शांत हुए। वहीं एसपी ने कहा कि इस तरह की घटनाएँ बार-बार होना गंभीर हैं।

इस घटना पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने की बात कही है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है और नजदीकी सीसीटीवी खंगाल रही है। गाँव वालों ने डीएम और एसपी को बताया कि चार महीने में ये तीसरी घटना है जब मंदिर में मांस फेंका गया है।

गौरतलब है कि इस इलाके में एक जुलाई 2023 की रात हसपुरा के दो, अमझरशरीफ में एक मंदिर, एक दुकान के शटर तथा 20 जुलाई की रात बाला बिगहा के मंदिर में मांस फेंकने की तीन वारदातों में पुलिस ने अमझरशरीफ के तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

केरल में हुआ ब्लास्ट, मीडिया चैनल ने दिखाया… यासीन अराफात ने की शिकायत, केरल की पुलिस ने दर्ज किया ‘मजहबी सद्भाव बिगाड़ने’ वाला FIR

केरल के ईसाई समुदाय यहोवा की प्रार्थना सभा में 29 अक्टूबर, 2023 को हुए ब्लास्ट की मीडिया कवरेज को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए थ्रीक्काकारा थाने में लोकस टीवी चैनल के पत्रकारों और संपादकों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है। यह मामला कोच्चि के कलामासेरी में जहाँ ब्लास्ट हुआ था वहीं के निवासी यासीन अराफात की शिकायत के आधार पर 31 अक्टूबर, 2023 को दर्ज की गई थी। 

मजहबी सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश के तहत FIR 

मामले के बारे में जानकारी देते हुए केरल के पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 29 अक्टूबर को कोच्चि में ईसाई संप्रदाय यहोवा के साक्षियों की एक सभा में हुए विस्फोटों के कवरेज के माध्यम से विभिन्न मजहबी  समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने वाले रिपोर्टिंग के लिए एक मलयालम टीवी समाचार चैनल और कोऑर्डिनेटिंग एडिटर सुजॉय पार्वती (Sujaya Parvathy) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। 

उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता यासीन अराफात ने आरोप लगाया कि पत्रकार और टीवी चैनल ने आईईडी विस्फोटों को मौजूदा इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध से जोड़ने का प्रयास किया। इसके आधार पर राज्य में मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने की कोशिश की गई। 

वहीं इस मामले की जाँच कर रहे कोच्चि के थ्रीक्काकारा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया, “एफआईआर भारतीय दंड संहिता की धारा 153, 153 (ए) और केरल पुलिस अधिनियम की धारा 120 (ओ) के तहत दर्ज की गई है। हम मामले की जाँच कर रहे हैं कि IPC की ये धाराएँ सद्भावना बिगाड़ने और साजिश रचने के लिए लगायी जाती हैं। ये गैरजमानती हैं और कैद के साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। 

क्या है मलयाली न्यूज़ चैनल का जवाब

बम ब्लास्ट से जुड़ी रिपोर्टिंग को लेकर चैनल की ओर से कहा गया है कि पुलिस की इस प्राथमिकी के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। यह तुष्टिकरण के लिए मीडिया की स्वतंत्रता को बाधित करने का प्रयास है। इसे किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके खिलाफ हर तरह के कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी। 

गौरतलब है कि 28 अक्टूबर को केरल में मुस्लिम समुदाय की एक बड़ी जनसभा फिलिस्तीन और गाजा के समर्थन में और इजरायल के खिलाफ हुई थी। उसमें फिलिस्तीन के चरमपंथी गुट हमास के आतंकी ने भी संबोधन किया था।

इसके अगले ही दिन केरल में जब ईसाई समुदाय की प्रार्थना सभा में धमाके हुए तो शुरू में इसे, एक दिन पहले की जनसभा से जोड़ा जा रहा था। हालाँकि,  बाद में पता चला कि ब्लास्ट को अंजाम देने वाला शख्स डोमिनिक मार्टिन भी यहोवा विटनेस समुदाय से ही जुड़ा हुआ है। और इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए उसने केरल पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था। 

22 जनवरी 2024: ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ विजय मंत्र का 108 बार सामूहिक जाप, पूरे विश्व में करोड़ों हिंदू घरों में दीपोत्सव – ऐसे होगा प्रभु श्रीरामलला का स्वागत

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य जोर-शोर से जारी है। 22 जनवरी 2024 को नव निर्मित इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीराम के बाल रूप वाले विग्रह का प्राण प्रतिष्ठा किया जाएगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम बेहद भव्य होगा, जिसे दुनिया भर के श्रद्धालु लाइव देख चुके हैं।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्राण-प्रतिष्ठा का समय सुबह 11 बजे से 1 बजे के बीच होगा। इस अवसर पर देश-विदेश के हिंदुओं को अपने-अपने गाँव और मोहल्ले में या उसके नजदीक स्थित मंदिरों में श्रद्धालुओं को एकजुट होकर भजन-कीर्तन करने का आह्वान किया गया है। इसके साथ यह भी कहा गया है कि जो जहाँ है वहीं से टीवी पर अयोध्या में भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा का लाइव प्रसारण वीडियो देखे।

अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा के दौरान मंदिर में हवन-पूजन, शंख ध्वनि, घंटानाद, आरती और प्रसाद वितरण का भी आह्वान किया है। इस दौरान श्रद्धालुओं से ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’ का विजय मंत्र 108 बार जपने के लिए भी कहा गया है। इसके अलावा, इस दौरान श्रीराम रक्षा स्त्रोत, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का आदि का सामूहिक पाठ किया जा सकता है।

प्राण-प्रतिष्ठा के दिन शाम को अपने-अपने घरों के सामने दीप जलाने और दीपमालिका बनाने के लिए कहा गया है। ट्रस्ट की ओर से इन आयोजनों को मंदिर केंद्रित बनाए रखने का आह्वान किया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है, “इससे देवी-देवता प्रसन्न होंगे। संपूर्ण भारत का वातावरण सात्विक और राममय हो जाएगा।”

कैसा होगा अपना राम मंदिर

इस मंदिर को परंपरागत नागर शैली में बनाया गया है। मंदिर की लंबाई (पूर्व से पश्चिम की ओर) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट और ऊँचाई 161 फीट है। यह मंदिर तीन मंजिल का होगा, जिसमें प्रत्येक मंजिल की ऊँचाई 20 फीट होगी। पूरी मंदिर में 392 खंभे और 44 दरवाजे होंगे। इन खंभों पर देवी-देवताओं एवं देवांगनाओं की मूर्तियाँ होंगी।

इसमें भूतल यानी गर्भगृह में भगवान रामलला विराजेंगे, जबकि प्रथम तल पर राम दरबार होगा। राम दरबार में भगवान राम अपने तीनों भाइयों, धर्म पत्नी सीता और अपने प्रिय भक्त हनुमान के साथ विराजेंगे। मंदिर में कुल पाँच मंडप होंगे- नृत्य मंडप, रंग मंडप, गढ़ मंडप (सभा मंडप), प्रार्थना मंडप और कीर्तन मंडप।

पूर्व की ओर से प्रवेश करने के बाद 32 सीढ़ियाँ चढ़कर सिंहद्वार होगा। दिव्यांगजनों के लिए यहाँ रैम्प और लिफ्ट की व्यवस्था की जाएगी। मंदिर के चारों ओर प्रकोटा होगा। इन प्रकोटा के चारों कोनों पर चार मंदिर होंगे। यहाँ भगवान सूर्य, भगवान शंकर, गणपति, देवी भगवती होंगे। परकोटे के दक्षिणी ओर भगवान हनुमान और उत्तरी ओर माता अन्नपूर्णा का मंदिर है।

मंदिर के दक्षिण में पौराणिक सीताकूप स्थित है। परकोटा के बाहर दक्षिण में जिनके प्रस्तावित मंदिर हैं, वे हैं- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि वसिष्ठ, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी और देवी अहिल्या। दक्षिण-पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीले पर भगवान शिव के मंदिर का जीर्णोद्धार और रामभक्त जटायु की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।

गाजा में मर रहे बच्चों पर दुनिया चुप क्यों? दुखी हो इरफान पठान ने पूछा, जवाब मिला – इजरायली बच्चों की मौत पर 1 महीने तक खुद क्यों थे चुप, क्यों नहीं लिखा

भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान को गाजा की फ्रिक्र सताने लगी है। इस युद्ध के कारण गाजा में जो बच्चे मारे जा रहे हैं, उन सबको लेकर इनका दिल दुख रहा है। ये दुनिया भर के नेताओं से अपील करके कह रहे हैं कि युद्ध रोकने में वे लोग मदद करें। गाजा के बच्चों के मारे जाने पर दुनिया भर के लोग शांत हैं, चुप हैं… इरफान पठान को इस बात का दुख है।

इरफान पठान ने ट्वीट कर अपने दुख को जाहिर किया है। उनके ट्वीट में सिर्फ गाजा में मारे जा रहे बच्चों की बात है। इसके लिए वो पूरी दुनिया को कोसने से भी गुरेज नहीं कर रहे। उन्होंने एक खिलाड़ी के तौर अपील तक कर डाली है कि दुनिया भर के नेता एकजुट होकर इन असंवेदनशील हत्याओं पर रोक लगाएँ।

अपने एक्स हैंडल पर इरफान ने पोस्ट किया, “गाजा में हर दिन 0-10 साल के मासूम बच्चों की जान जा रही है और दुनिया चुप है। एक खिलाड़ी के रूप में, मैं केवल कह सकता हूँ, लेकिन दुनिया के नेताओं के लिए एकजुट होने और इस संवेदनहीन हत्या को खत्म करने का वक्त आ गया है।”

3 नवंबर 2023 को इरफान पठान ने ट्वीट किया है। ट्वीट में गाजा के बच्चों की मौत का जिक्र है। लेकिन एक महीने पहले इस्लामी हमास आतंकियों ने 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में घुस कर कत्लेआम मचाया था। महिलाएँ-बच्चे सबको बेरहमी से मारा था। इरफान के एक्स हैंडल पर तब इससे संबंधित एक भी ट्वीट नहीं था… मतलब इजरायली बच्चों की मौत पर खुद इरफान चुप रहे, लगभग एक महीने तक। सोशल मीडिया के जमाने में नेटिजन्स ने तुरंत ही उनके टाइमलाइन का स्क्रीनशॉट शेयर कर दिया… और शुरू हो गया इरफान का छीछालेदर।

6 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक इरफान पठान के अंदर का इंसान नहीं जागा… जबकि इस्लामी हमास आतंकियों ने 7 अक्टूबर को मचाया था कत्लेआम

पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान इजरायल-हमास युद्ध के बीच सिर्फ गाजा में बच्चों की मौत पर दुनिया के चुप्पी साधने पर कोस रहे हैं, लेकिन कोई इनसे पूछे कि क्या इजरायल में इस्लामी हमास आतंकियों के हमले में मारे गए बच्चे क्या बच्चे नहीं थे? क्या वो असंवेदनशीलता का चरम नहीं था? इस दोगलेपन का जवाब शायद उनके पास न हो।

7 अक्टूबर 2023 को जब हमास ने इजरायल पर हमला किया तो तब उनकी जबान हमास के इस वहशीपन के नरसंहार के खिलाफ क्यों नहीं खुली, वो चुप्पी साधे क्यों बैठे रहे? इस हमले के दिन और उसके एक दिन बाद भी उनके अंदर का ये संवेदनशील इंसान नहीं जागा। वो कहीं किसी क्रिकेटर और कहीं टीम तो कही बॉलीवुड के सितारों के साथ मजा करते नजर आए।

7 से 8 अक्टूबर तक इरफान पठान लगातार विश्व कप 2023 के खिलाड़ियों की तारीफ में मशगूल रहे थे। उन्हें तब न तो इजरायल में मारे गए लोग दिख रहे थे, न बच्चे और न वो युवतियाँ जिनकी इस्लामी हमास आतंकियों ने मौत के बाद भी सड़कों पर नंगी परेड निकाली थी। तब उनकी इंसानियत शायद झपकी ले रही थी और उनका रहम दिल टाइप की धड़कनें किसी और के लिए धड़क रही थीं।

इरफान 9 अक्टबूर 2023 को जैकी श्रॉफ के बेटे टाइगर श्रॉफ और कीर्ति सेनन की मूवी गणपत का शो देखकर कह रहे थे कि मजा आ गया। 11 अक्टूबर 2023 तक भी उन्हें इजरायल के बच्चे याद नहीं आए, जब उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर अमिताभ बच्चन के जन्मदिन पर खिलखिलाती हुई अपनी तस्वीर पोस्ट की।

इरफान पठान के दोहरे रवैये पर सोशल मीडिया यूजर्स ने आईना दिखाने में देर नहीं की। इरफान पठान के फेसबुक अकाउंट पर गाजा के बच्चों के लिए की गई पोस्ट पर सूर्यभान ने लिखा, “इरफान सर यह जो हो रहा है, बिल्कुल गलत हो रहा है। हम आपकी बातों से सहमत हैं, लेकिन जो गाजा के लोगों ने किया, क्या वह सही था? जब पता है कि हम इतने ताकतवर नहीं हैं, इजरायल के साथ लड़ नही सकते हैं तो क्या जरूरत थी इजरायल के लोगों को मारने की? पहले शुरुआत गाजा के लोगों ने की है तो उसका अंजाम भुगत रहे हैं वह लोग।”

वहीं अजीत मित्रा ने लिखा, “मैं गाजा में अत्याचारों का समर्थन नहीं करता, लेकिन इजराइल में जो जानें गईं, वे भी महत्वपूर्ण हैं। उनके लिए कुछ शब्द कहें।”

इरफान पठान की पूरी टाइमलाइन देखने पर बच्चों की मौत को लेकर सिर्फ एक ट्वीट मिला। 20 अक्टूबर 2023 का। लेकिन जैसे गाजा के बच्चे को चिह्नित करते हुए उन्होंने आज ट्वीट किया, उसमें ऐसा कुछ नहीं।

इरफान पठान के इसी दोगलेपन का एक वाकया साल 2022 में सामने आया था। तब रामनवमी, हनुमान जयंती जैसे कई त्योहारों पर पत्थरबाजी और जहाँगीरपुरी सहित कई इलाकों में हिंसा और बुलडोजर एक्शन के बीच इरफ़ान ने भारत पर तंज कसते हुए एक ट्वीट किया था।