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चित्रकूट के तुलसी पीठ से बोले PM मोदी- संस्कृत हमारी प्रगति और पहचान की भाषा, स्वामी रामभद्राचार्य जी ने दिया आशीर्वाद

चित्रकूट प्रवास पर पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने श्री तुलसी पीठ पहुँचे और तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज से मुलाकात की। उन्होंने जगद्गुरु रामानंदाचार्य का भी आशीर्वाद लिया। पीएम मोदी ने कहा कि चित्रकूट के बारे में कहा गया है- ‘कामद भे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत विषादा’… अर्थात चित्रकूट के पर्वत, कामदगिरि, भगवान राम के आशीर्वाद से सारे कष्टों और परेशानियों को हरने वाले हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि चित्रकूट की ये महिमा यहाँ के संतों और ऋषियों के माध्यम से ही अक्षुण्ण बनी हुई है। पीएम ने आगे कहा, “मुझे आज कई राम मंदिरों में पूजा करने का सौभाग्य मिला। मुझे जगद्गुरु रामानंदाचार्य का भी आशीर्वाद मिला। चित्रकूट ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है।”

संस्कृत हमारी प्रगति और पहचान की भाषा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संस्कृत न केवल परंपराओं की भाषा है, बल्कि यह देश की प्रगति और पहचान की भी भाषा है। तुलसी पीठ के काँच मंदिर में संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, “संस्कृत कई भाषाओं की जननी है। संस्कृत हमारी प्रगति और पहचान की भाषा है।”

उन्होंने कहा, “दूसरे देश के लोग मातृभाषा जाने तो ये लोग प्रशंसा करेंगे, लेकिन संस्कृत भाषा जानने को ये पिछड़ेपन की निशानी मानते हैं। इस मानसिकता के लोग पिछले एक हजार साल से हारते आ रहे हैं और आगे भी कामयाब नहीं होंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने तीन पुस्तकों का किया विमोचन

चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अष्टाध्यायी भाष्य, रामानंदाचार्य चरितम और भगवान श्रीकृष्ण की राष्ट्रलीला का विमोचन किया। इनमें से दो पुस्तकें संस्कृत भाषा में हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि अष्टाध्यायी भारत की भाषा विज्ञान, भारत की बौद्धिकता और शोध संस्कृति का हजारों साल पुराना ग्रंथ है। उन्होंने अष्टाध्यायी के महत्व पर प्रकाश डाला, क्योंकि यह भाषा के व्याकरण और विज्ञान को सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करती है।

पीएम मोदी ने काँच मंदिर में की पूजा-अर्चना

प्रधानमंत्री मोदी ने चित्रकूट के काँच मंदिर में पूजा-अर्चना की। काँच मंदिर में राघव सत्संग भवन के साथ-साथ चित्रकूट बिहारी और बिहारिणी (भगवान राम और देवी सीता) का मंदिर भी शामिल है। यह तीन शिखरों वाला मंदिर है। गर्भगृह में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की सुंदर मूर्तियाँ स्थापित हैं, जिनकी सेवा पुजारी द्वारा की जाती है।

रामचरितमानस के बाद अब देवी दुर्गा के अपमान पर उतरी RJD, विधायक ने कहा- रात में महिषासुर के साथ कौन सा युद्ध लड़ने जाती थी, शंकर ने बेटी से शादी की

बिहार में राजद (RJD) के एक और विधायक ने हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला है। बिहार के रोहतास जिले के डेहरी से राजद विधायक फते बहादुर सिंह ने माँ दुर्गा पर सवाल उठाए और उन्हें काल्पनिक बताया है। फतेह बहादुर ने एक कार्यक्रम में कहा कि माँ दुर्गा जैसी कोई चीज नहीं थी, यह सब काल्पनिक बातें हैं। उन्होंने दुर्गा सप्तशती को एक मनगढ़ंत और बेकार कहानी बताया। इसके साथ ही उन्होंने खुद को महिषासुर का वंशज भी बताया है। 

कुशवाहा समाज से आने वाले फतेह बहादुर ने कहा कि महिषासुर एक प्रतापी राजा था और वह 90 प्रतिशत बहुसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करता था। उसे मारने के लिए दुर्गा का आविष्कार किया गया। इतना ही नहीं, फतेह ने दुर्गा और भगवान शंकर के संबंधों को लेकर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वह सिंदूर क्यों लगती हैं?

उन्होंने कहा कि शास्त्रों में बताया जाता है कि भगवान शिव ने अन्य देवताओं के साथ आह्वान कर देवी दुर्गा की उत्पत्ति की। एक तरह से भगवान शिव ने देवी दुर्गा का आविष्कार किया तो इस रिश्ते से देवी दुर्गा भगवान शिव की पुत्री हुईं। दूसरी ओर देवी दुर्गा को महागौरी के नाम से भी बुलाया जाता है। ऐसे में गौरी भगवान शिव की पत्नी थी, तो क्या भगवान शिव ने अपनी पुत्री से विवाह कर लिया था?

फतेह बहादुर ने कहा कि ये सब मनुवादियों का षड़यंत्र है। महिषासुर की हत्या करने के लिए दुर्गा का इन सबने उपयोग किया और महिषासुर का वध नहीं हत्या हुई। ये मनुवादी लोग बताने का काम करेगा कि कौन सा मैदान में महिषासुर के साथ दुर्गा ने युद्ध किया और रात्रि में कौन युद्ध करने जाती थी उसके यहाँ?

फतेह बहादुर ने माँ दुर्गा को ना सिर्फ काल्पनिक बताया, बल्कि यह भी कहा कि जब ब्रिटिश सरकार ने भारत को गुलाम बनाया तो माँ दुर्गा कहाँ थीं? मीडिया से बातचीत के दौरान राजद विधायक ने कहा कि मनुवादियों के अनुसार देश में 33 करोड़ देवी-देवता हैं। ब्रिटिश भारत में आए और गुलाम बनाने का काम किया उस समय भारतीयों की संख्या 30 करोड़ थी।

फतेह बहादुर ने पूछा, “मैं उन मनुवादियों से पूछना चाहता हूँ जिन्होंने ये लिखा कि महिषासुर की करोड़ों सेना के साथ माँ दुर्गा ने लड़ाई लड़ी और महिषासुर का नरसंहार कर दिया। जब मुट्ठी भर ब्रिटिश सरकार ने भारत को गुलाम बनाया तो माँ दुर्गा क्या कर रही थीं? दस हाथ का औजार कहाँ था?”

पूजा पर खर्चा करना नाजायज

जब पूजा-पाठ और पंडाल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पूजा-अर्चना करने को नाजायज खर्च बता दिया। उन्होंने कहा कि जब दुर्गा का कोई इतिहास ही नहीं है तो लोग क्यों इतना खर्च करते हैं? अगर वह तीनों लोक की देवी थीं तो क्या भारत में ही तीनों लोक स्थित है?

उन्होंने पूछा, “अगर दुर्गा देवी रहतीं और इनका अवतार हुआ रहता तो ये भारत में ही क्यों पूरे विश्व में क्यों नहीं हुआ? मैं कहता हूँ कि हम कौन से हिंदू हैं? जिन मनुवादियों ने देवताओं को काल्पनिक बनाया, उन्होंने ही ओबीसी एससी-एसटी को शूद्र बना दिया।”

विधायक के इस बयान से हिंदू संगठनों में आक्रोश है। बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद ने विधायक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। उन्होंने विधायक के पुतले का दहन भी किया है।

बिहार के शिक्षा मंत्री भी दे चुके हैं विवादित बयान

बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर यादव ने विवादित बयान देते हुए रामचरितमानस की तुलना बेहद खतरनाक जहर पोटैशियम साइनाइड से की थी। उन्होंने कहा था कि रामचरितमानस में पोटेशियम साइनाइड है। जब तक यह रहेगा, तब तक इसका विरोध करते रहेंगे। इससे पहले वे मानस को बाँटने वाला ग्रंथ बता चुके हैं।

चंद्रशेखर ने कहा था कि 55 तरह का व्यंजन परोस कर उसमें पोटैशियम साइनाइड मिला दीजिए तो क्या होगा? रामचरितमानस के साथ भी यही हाल है। बिहार हिंदी ग्रंथ अकादमी में कार्यक्रम में उन्होंने रामचरितमानस के अरण्य कांड की चौपाई ‘पूजहि विप्र सकल गुण हीना, शुद्र न पूजहु वेद प्रवीणा’ की चर्चा की थी।

वहीं, चंद्रशेखर ने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद को मर्यादा पुरुषोत्तम बताया था। उन्होंने कहा था कि शैतानों की संख्या अधिक होने के बाद परमात्मा ने पैगंबर मुहम्मद को पैदा किया। उन्होंने कहा था कि अगर बेईमान भी खुद को मुस्लिम कहते हैं तो खुदा इसकी इजाजत नहीं देता है।

उन्होंने कहा था, “जब शैतानियत बढ़ गई दुनिया में, ईमान खत्म हो गया, बेईमान और शैतान ज्यादा हो गए तो मध्य एशिया के इलाके में ईश्वर ने, प्रभु ने, परमात्मा ने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रोफेट मुहम्मद साहब को पैदा किया। ईमान लाने के लिए। इस्लाम ईमान वालों के लिए आया। इस्लाम बेइमानी और शैतानी के खिलाफ आया। मगर बेईमान भी खुद को मुस्लिम कहते हैं तो इसकी इजाजत खुदा नहीं देता है।”

संसद की आचार समिति ने बुलाया तो महुआ मोइत्रा ने रख दी कई डिमांड, बोले निशिकांत दुबे- दुबई दीदी… अखाड़ा की तैयारी है

पैसे लेकर लोकसभा में सवाल पूछने की आरोपित तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा ने संसद की आचार समिति (Ethics Committee) से पेश होने के लिए और समय माँगा है। इतना ही नहीं कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से जिरह की अनुमति माँगी है। कहा है उनसे आमना-सामना कराया जाना, मेरा अधिकार है। मैं उनसे कुछ जरूरी सवाल पूछूँगी।

हीरानंदानी ने अपने हलफनामे में माना है कि महुआ मोइत्रा उनसे दुबई में आकर मिलती थीं। उन्हें ब्लैकमेल करती थीं। उनका गलत फायदा उठाती थीं। गिफ्ट और पैसा देने की बात भी कही थी। इसको लेकर टीएमसी सांसद का कहना था कि पीएमओ ने हीरानंदानी से जबरन यह हलफनामा दिलवाया है।

इस संबंध में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी। इसके बाद मामला आचरण समिति को भेज दिया गया था। इस पर 26 अक्टूबर 2023 को सुनवाई करते हुए आचार समिति ने महुआ मोइत्रा को 31 अक्टूबर को पेश होने को कहा था। लेकिन अब टीएमसी सांसद ने कथित व्यस्तताओं का हवाला दे 31 अक्टूबर को पेश होने में असमर्थता जताई है। साथ ही उन उपहारों की सूची उपलब्ध कराने को कहा है जो हीरानंदानी ने उन्हें देने की बात कही है।

महुआ मोइत्रा के इस जवाब पर तंज कसते हुए बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट कर कहा है, “दुबई दीदी ने कुछ लोगों के क्रॉस एक्जामिनेशन के लिए कहा है। लोकसभा के नियमों ख़ासकर कौल-शकधर किताब के पेज 246 के तहत गवाह कोर्ट, कचहरी, हल्ला गुल्ला से सुरक्षित हैं। खाता ना बही, दुबई दीदी जो कहे वही सही। जबाब राष्ट्रीय सुरक्षा व भ्रष्टाचार का चाहिए, यहाँ तो अखाड़ा की तैयारी है।”

आचार समिति के अध्यक्ष विनोद सोनकर को भेजे जवाब में महुआ मोइत्रा टीएमसी सांसद मोइत्रा ने कहा है कि वे 5 नवंबर के बाद ही कमेटी के सामने पेश हो पाएँगी। टीएमसी सांसद का कहना है कि वह 4 नवंबर तक कार्यक्रमों में बिजी है। इसलिए उन्‍हें पेश होने के लिए 5 नवंबर के बाद की तारीख दी जाए।

महुआ मोइत्रा ने लिखा है, “मैं पश्चिम बंगाल राज्य का प्रतिनिधित्व करती हूँ, जहाँ दुर्गा पूजा सबसे बड़ा त्योहार है। मैं पहले से ही 30 अक्टूबर से 4 नवंबर 2023 तक अपने निर्वाचन क्षेत्र में कई पूर्व-निर्धारित विजयादशमी सम्मेलनों/बैठकों (सरकारी और राजनीतिक दोनों) में भाग लेने के लिए प्रतिबद्ध हूँ और मैं 31 अक्टूबर 2023 को दिल्ली में नहीं हो सकती।”

बिहार के सरकारी स्कूल में परीक्षा संस्कृत की, सवाल- इफ्तार क्या होता है… बोले बीजेपी MLA- नीतीश की नाभि में मदरसा है

बिहार के 9वीं कक्षा की संस्कृत विषय की परीक्षा में इस्लाम से जुड़े सवाल पूछे जाने पर बवाल हो गया है। भाजपा ने इसको लेकर सवाल उठाया है। भाजपा विधायक ने कहा कि परीक्षा के पेपर को देखकर ऐसा लगता है कि यह किसी इस्लामी देश की परीक्षा का पेपर है।

इस प्रश्न-पत्र को लेकर कैमूर के मोहनिया से भाजपा के एमएलसी जीवन कुमार ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार राज्य में पाकिस्तान के शिक्षा विभाग का फॉर्मेट लागू करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे उर्दू के विषय में नहीं जानते हैं तो उसका जवाब कैसे देंगे। यह गलत है।

जीवन कुमार ने कहा, “नीतीश कुमार की नाभि में मदरसा बसा हुआ है। नहीं तो वे ऐसा नहीं करते। सिर्फ मुस्लिम ही उनके वोटर नहीं हैं। ऐसा करके वह दूसरे धर्म के लोगों को चिढ़ाने का काम कर रहे हैं। नीतीश सरकार पाकिस्तान और अरबी शिक्षा फॉर्मेट पर बिहार की शिक्षा को चलाना चाहती है। हमारे धर्म के साथ खिलवाड़ को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

दरअसल, 26 अक्टूबर 2023 को पूरे बिहार में संस्कृत विषय की परीक्षा ली गई थी। इसमें इस्लाम से संबंधित कई सारे सवाल पूछे गए थे। इसमें बहुविकल्पीय 25 सवालों में 3 सवाल इस्लाम से संबंधित थे। वहीं, 10 लघु उत्तरीय सवालों में 5 इस्लाम पर थे। इसके अलावा, 5 दर्घउत्तरीय प्रश्नों में 2 सवाल इस्लाम से थे।

जो सवाल पूछे गए थे, उनमें से कुछ इस तरह हैं- मुसलमानों का सर्वोत्तम पर्व कौन है? ईद में कौन सा पकवान प्रसिद्ध है? जकात किसे कहते हैं? इफ्तार क्या है? रोजा कब खोला जाता है? फितरा किसे कहते हैं? ईद कैसा पर्व है? ईद में क्या होता है? ईद पर्व क्या संदेश देता है? आदि

विवाद होने के बाद इस पर कोई जवाब देने के लिए तैयार नहीं है। पटना के अजीमचक गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल के संस्कृत शिक्षक जितेंद्र कुमार का कहना है कि इसमें विवाद की कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि नौवीं क्लास में ईद महोत्सव का एक अध्याय है और यह सबको पढ़ना है। इस सिलेबस को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने बनाया है।

जितेंद्र कुमार ने कहा कि मासिक परीक्षा में जो सवाल किए जाते हैं, वो उन्हीं चैप्टर से किए जाते हैं जो उस माह में पढ़ने हैं। अक्टूबर माह में ‘ईद महोत्सव’ समेत 3 चैप्टर की पढ़ाई हुई है। इसलिए इससे सवाल किए गए हैं। बता दें कि बिहार में कक्षा 9 से 12 तक की मासिक परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र BSEB द्वारा ही भेजे जाते हैं।

वहीं, मुंगेर से भाजपा विधायक प्रणव कुमार ने कहा कि आगामी शीतकालीन सत्र में विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया जाएगा और इस कोर्स को पाठ्यक्रम से हटाने की माँग की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और धर्म-संस्कृति का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है।

दरअसल, हमेशा विवादों में रहने वाले शिक्षा विभाग में केके पाठक के आने के बाद कई तरह के प्रयोग किये जा रहे हैं। शिक्षा विभाग के सचिव पाठक ने सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की हर महीने परीक्षा लेने का आदेश जारी कर रखा है। इसके तहत ही अक्टूबर माह की नौवीं कक्षा परीक्षा ली जा रही है।

‘हिंदुस्तानी मुस्लिमों के लिए सरहद खोले सरकार’: फिलिस्तीनी वीजा के लिए दिल्ली में आई अमीना शेख, ‘मजहब-जिहाद’ का दिखाया धौंस

भारत के कट्टरपंथी मुस्लिम इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा किए गए हमले के बाद से खुलकर इजरायल का विरोध कर रहे हैं। वो फिलिस्तीन के नाम पर हमास का समर्थन कर रहे हैं। कई तो इजरायल के सर्वनाश की कामना भी कर रहे हैं। इस तरह की कई तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें फिलिस्तीन का समर्थन किया जा रहा है।

कुछ दिनों पहले भारतीय मुस्लिम और वामपंथी सांसदों का एक दल फिलिस्तीनी दूतावास पहुँचा था और उसे समर्थन दिया था। इसके बाद अब अमीना शेख नाम की एक महिला फिलिस्तीनी दूतावास पहुँची और वीजा की माँग करने लगी। महिला का कहना है कि वो फिलिस्तीन जाकर अपने ‘धर्म वालों के लिए’ इजरायल के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी। अगर उसकी जान भी चली जाए तो कोई परवाह नहीं।

खोल दी जाएँ फिलिस्तीन-इजरायल की सरहदें

अमीना शेख नाम की महिला ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं अपॉइंटमेंट लेने आई थी सर से। मुझे फिलिस्तीन जाना है तो मैं वीजा के लिए अप्लाई करने आई थी। कुछ इश्यू की वजह से वीजा नहीं हो पा रहा है। मैं आप लोगों (मीडिया) के माध्यम से सरकार से कहना चाहती हूँ कि फिलिस्तीन की सरहदें हिंदुस्तानी मुस्लिमों के लिए खोल दी जाएँ।”

जब अमीना से पूछा गया कि वह फिलिस्तीन क्यों जाना चाहती हैं तो उसने कहा, ”मैं क्यों जाना चाहती हूँ? क्या आप लोग नहीं देख रहे कि वहाँ फ़िलिस्तीन में क्या हो रहा है? आप लोग तो न्यूज वाले लोग हैं? क्या आप नहीं देख पा रहे हैं कि वहाँ किस तरह से बच्चों को मारा जा रहा है और फ़िलिस्तीन की स्थिति कितनी गंभीर है?”

इस्लाम में जान की कोई कीमत नहीं

जब पूछा गया कि क्या उसे अपनी जान का डर है तो उसने कहा, “भाई, मैं जिस मजहब से आती हूँ न, उसमें जान की कोई कीमत नहीं है। जान की कीमत से वो डरे, जो एक ही बार में खत्म हो सकता है। हम नहीं डरते। तो जान जो है न… देखिए, मौत जो है न बिस्तर पे भी आती है। जो ऐसी जंग लड़ते हैं न, उसे तारीख और इस्लाम याद रखता है।”

गाजा के लिए अपनी तैयारियों के बारे में विस्तार से बताते हुए महिला ने कहा, ”मैं यहाँ पूरी तैयारी के साथ आई हूँ। मैं अपने पासपोर्ट सहित अपने सभी दस्तावेज़ साथ लाई हूँ। मैं प्रधानमंत्री से भारत के लोगों के लिए दोनों देशों की सीमाएँ खोलने का आग्रह करती हूँ।”

गाजा के लिए इंडिया में क्राउड फंडिंग!

जब अमीन से पूछा गया कि क्या उसे इज़रायल में भारी बमबारी और युद्ध की स्थिति का डर है तो उसने कहा, “अगर मेरी किस्मत में वहाँ मरना लिखा है तो मैं निश्चित रूप से मरूँगी। और इसका मुझ पर कोई फर्क नहीं पड़ता। वहाँ पर लोगों की जितनी हेल्प हो सकती है हम उतना करेंगे। जो मुहिम हमने चालू किया है इंडिया के अंदर, मैं हिंदुस्तान के अंदर गाजा के लिए फंड इकट्ठा कर रहे हैं, हमारे माइनोरिटी कम्युनिटी के लोग।”

अमीना शेख ने इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दिए अपने संदेश में कहा, “उस लड़ाई के बारे में मत सोचो, जो तुम जीत नहीं सकते। मैं ऐसे शैतानों को यही कहूँगी कि उस जंग के बारे में कभी अपने दिल के अंदर ख्याल भी न लाओ, जिसे तुम जीतने के बारे में सोच भी नहीं सकते। इससे सिर्फ तुम्हारी ही बदनामी होगी।”

7 अक्टूबर को हमास ने किया था बर्बर हमला

बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर बर्बरतापूर्ण हमला करते हुए करीब 1400 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। वहीं, दो सौ से अधिक इजरायलियों को बंधक बनाकर अपने साथ गाजा पट्टी ले गए। इसके बाद से इजरायल ने गाजा पट्टी की घेरेबंदी करते हुए उसपर हमला बोल दिया है।

इजरायल सीधी जमीनी लड़ाई के लिए तैयार है और उसके फाइटर जेट गाजा पर बम बरसा रहे हैं। अभी तक 5 हजार से अधिक लोग इजरायली पलटवार में मारे जा चुके हैं। इजरायल ने लेबनान में हिज्बुल्ला के हमले के बाद उसके भी ठिकानों को निशाना बनाया है तो गाजा के अंदर वो हमास और इस्लामिक जेहाद की कमर तोड़ रहा है।

‘अपना ख्याल रखना क्योंकि UP में आपके अब्बू योगी आदित्यनाथ हैं’: शाहिद अफरीदी का सगा बन रहा था सपा का पूर्व मंत्री यासर शाह, दानिश कनेरिया ने धोया

दानिश कनेरिया कभी क्रिकेट के मैदान पर अपनी घूमती गेंदों से दुनियाभर के बल्लेबाजों का शिकार करते थे। आजकल वे एक्स/ट्विटर की पिच पर भारत के लिबरल गैंग की गिल्ली उड़ा रहे हैं। ‘द वायर’ की एजेंडाबाज पत्रकार आरफा खानम शेरवानी, प्रोपेगेंडाबाज वकील प्रशांत भूषण के बाद अब उन्होंने उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री रहे यासर शाह का शिकार किया है।

दरअसल, पूर्व विधायक यासर शाह ने ‘उम्माह प्रेम’ में पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी का बचाव करते हुए कनेरिया पर निशाना साधा था। इसका जवाब देते हुए कनेरिया ने कहा, “मैं बच गया क्योंकि मेरे साथ भगवान श्री राम का आशीर्वाद है। आप अपना ख्याल रखना क्योंकि यूपी में आपके अब्बू योगी आदित्यनाथ हैं।”

यासर शाह और दानिश कनेरिया के बीच सोशल मीडिया में भिड़ंत शा​हिद अफरीदी के एक इंटरव्यू का वीडियो शेयर करने से शुरू हुआ। इस वीडियो को शेयर करते हुए कनेरिया ने लिखा कि शाहिद अफरीदी ने टीवी इसलिए तोड़ दिया, क्योंकि उनकी बेटी पूजा कर रही थी। कल्पना कीजिए जब वे अपनी मासूम बेटी के साथ इस तरह कर सकता है तो मेरे साथ कैसा व्यवहार करता होगा।

यासर शाह ने कनेरिया के इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, “तुम बच गए क्योंकि तुमने उसे उसकी बेटी की तरह ‘अब्बू’ नहीं कहा। या आपने किया?” शाह के इस जवाब को रिट्वीट करते हुए कनेरिया ने उन्हें योगी आदित्यनाथ का जिक्र करते हुए जवाब दिया।

कनेरिया ने अफरीदी का जो वीडियो शेयर किया था वह एक चैट शो का है। इसमें महिला एंकर अफरीदी से पूछती हैं कि क्या उन्होंने कभी टीवी तोड़ा है? जिसका जवाब ‘हाँ’ में देते हुए अफरीदी ने बताया था कि एक बार वे अपने घर में आए, तो अक्शा या अंशा (उनकी बेटियाँ) में से कोई एक टीवी के आगे हाथ घुमाकर कुछ ‘यूँ-यूँ’ कर रही थीं और टीवी पर स्टार प्लस चल रहा था। अफरीदी जिसे ‘यूँ-यूँ’ बता रहे थे, उसे हिंदू परंपराओं में ‘आरती’ कहा जाता है।

अफरीदी के इस वीडियो को शेयर करने से पहले आज तक को दिए इंटरव्यू में कनेरिया ने बताया था कि उन पर पाकिस्तान की टीम में रहते हुए धर्मांतरण का दबाव डाला गया था। कनेरिया ने कहा था कि पाकिस्तान टीम के पूर्व कप्तान शाहिद अफरीदी ने उन पर कई बार इस्लाम कबूलने के लिए दबाव डाला था। उनसे कहा जाता था कि ऐसा करने पर वे लंबे वक्त तक पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में खेल पाएँगे।

उज्बेकिस्तान के ‘गुप्त मिशन’ से लौटे राहुल गाँधी, आखिर हर चुनाव से पहले ‘गायब’ होकर क्या गुल खिलाते हैं कॉन्ग्रेस के युवराज?

कॉन्ग्रेस पार्टी के ‘युवराज’ राहुल गाँधी भारत लौट आए हैं। अपनी सीक्रेट यात्रा पर वो इस बार उज्बेकिस्तान पहुँचे थे। यहाँ उन्होंने क्या कुछ किया, इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट करके बताया है कि राहुल गाँधी भारत लौट आए हैं। आज (27 अक्टूबर 2023) को वो उज्बेकिस्तान से दिल्ली पहुँचे। बता दें कि उज्बेकिस्तान एक पूर्व सोवियत देश है, जिसके उनकी नानी इंदिरा गाँधी के समय से ही भारत से मजबूत संबंध रहे हैं।

सोवियत संघ और भारत के बीच के संबंध किसी से छिपे नहीं हैं। हालाँकि, इतने सालों बाद राहुल गाँधी का उज्बेकिस्तान दौरा चौंकाने वाला जरूर है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर राहुल गाँधी ने इस बार अपने सीक्रेट दौरे के लिए उज्बेकिस्तान को ही क्यों चुना? वैसे, कॉन्ग्रेस के युवराज का चुनावी मौसम के दौरान या ऐसे समय जब उनकी पार्टी को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत है, जनता को बताए बिना छुट्टियों पर जाने का इतिहास रहा है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी अक्सर ‘गुप्त’ विदेश यात्राएँ करते हैं। इन यात्राओं के बारे में अक्सर बहुत कम या ना के बराबर जानकारी उपलब्ध होती है। उनकी यात्राओं के उद्देश्यों के बारे में कई तरह की अटकलें लगाई जाती हैं। साल 2019 से उन्होंने अमेरिका, यूरोप और एशियाई देशों की कई यात्राएँ की थीं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने विभिन्न राजनीतिक नेताओं, थिंक टैंक और मीडिया संस्थानों से मुलाकात की।

राहुल गाँधी की विदेश यात्राओं के बारे में कई तरह की अटकलें लगाई जाती हैं। कुछ लोगों का मानना ​​है कि वे अपने राजनीतिक करियर को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी हस्तक्षेप की तलाश कर रहे हैं। वहीं, कुछ लोगों का मानना ​​है कि वह भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी हस्तक्षेप को बढ़ावा दे रहे हैं।

राहुल गाँधी ने विदेश यात्राओं के दौरान कई बार भारत विरोधी तत्वों से मुलाकात की है। उदाहरण के लिए साल 2023 में ही उन्होंने अमेरिका की यात्रा के दौरान हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR) की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ से मुलाकात की। HfHR एक इस्लामवादी वकालत समूह है, जो भारत में हिंदुओं पर भेदभाव करने का आरोप लगाता है।

इन्फो-वॉरफेयर और साइ-वॉर की OSINT डिसइन्फो लैब ने एक जाँच की थी, जिसमें खुलासा हुआ था कि ‘हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR)’ ‘हिंदू बनाम हिंदुत्व’ की भ्रामक कहानी को बढ़ावा दे रहा था। इसी संगठन को ‘डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिंदुत्व’ कार्यक्रम का  समर्थन करते हुए भी देखा गया था।

डिसइन्फो लैब के मुताबिक, हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स की सह-संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ‘वीमेन फॉर अफगान वुमेन’ नाम से एक संगठन भी चलाती हैं, जिसे सोरोस ओपन सोसाइटी फाउंडेशन द्वारा पैसे दिए जाते हैं। ऑपइंडिया ने विस्तार से बताया था कि कैसे जॉर्ज सोरोस मीडिया और ‘सिविल सोसाइटी’ के माध्यम से एक खतरनाक भारत-विरोधी कहानी को हवा देने में शामिल हैं।

राहुल गाँधी ने इटली और ब्रुसेल्स की अपनी यात्राओं के दौरान भी भारत विरोधी तत्वों से मुलाकात की। इटली में उन्होंने भारत विरोधी इतालवी वामपंथी राजनेता फैबियो मास्सिमो कास्टाल्डो से मुलाकात की। फैबियो मास्सिमो कास्टाल्डो यूरोपीय संसद के पूर्व सदस्य हैं। इतालवी वामपंथी नेता कास्टाल्डो की इटली में आईएसआई के लिए काम करने वाले परवेज इकबाल लॉसर के साथ दोस्ती है और वो यूरोप में आईएसआई का महत्वपूर्ण हैंडलर है।

राहुल गांधी के साथ फैबियो कास्टाल्डो

यही नहीं, ब्रुसेल्स में उन्होंने भारत विरोधी यूरोपीय सांसदों से मुलाकात की, जिनमें अलविना अलमेत्सा और पियरे लारौटुरो शामिल थे। पियरे लारौटुरो बाद में मणिपुर के मुद्दे पर यूरोपीय संघ की संसद में सवाल उठाने वाला व्यक्ति निकला। यानि राहुल गाँधी की ये मुलाकात मणिपुर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाने में मददगार साबित हुई।

राहुल गाँधी और उनकी ‘गुप्त’ यात्राओं की जानकारी

साल 2022 के अप्रैल माह में प्रशांत किशोर को कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल करने की रिपोर्ट्स आ रही थी, लेकिन प्रशांत किशोर ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने से मना कर दिया था। इस घटना के तुरंत बाद राहुल गाँधी 10 दिनों के लिए ‘लापता‘ हो गए थे। उनके बारे में किसी को कोई खबर नहीं थी और कॉन्ग्रेस पार्टी बिना किसी नेता के ही काम करने को मजबूर हो गई थी, जबकि उस समय उनकी पार्टी संकट में थी।

राहुल गाँधी दिसंबर 2021 में अपनी निजी यात्रा के लिए इटली रवाना हो गए थे, वो भी जब पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव हो रहे थे। उनकी यात्रा की वजह से पंजाब के चुनावी मौसम में पार्टी की तैयारियों को झटका लगा, क्योंकि उनकी यात्रा की वजह से कई चुनावी रैलियाँ काफी समय बाद हो पाईं। तब तक पार्टी को पंजाब में बुरी तरह से पिछड़ जाना पड़ा। अंतत: आम आदमी पार्टी ने पंजाब में कॉन्ग्रेस का सफाया कर दिया।

यही नहीं, उसी समय एक बार फिर से वो गायब हो गए थे। बताया जाता है कि वो कथित तौर पर  लंदन चले गए थे। पार्टी ने 5 नवंबर को बताया था कि राहुल गाँधी ‘छुट्टी’ पर गए हैं। वो संसद में शीतकालीन सत्र शुरू होने से ठीक पहले वह करीब एक महीने बाद लौटे। उस वक्त बीजेपी ने गाँधी पर कटाक्ष किया था और उनकी लंदन यात्रा पर सवाल उठाए थे। सितंबर 2021 में जब पंजाब में कॉन्ग्रेस पार्टी अमरिंदर सिंह के इस्तीफे से संकट का सामना कर रही थी, गाँधी परिवार  शिमला में छुट्टियाँ मना रहा था ।

उससे पहले साल 2020 के दिसंबर में जब कॉन्ग्रेस पार्टी का 136वाँ स्थापना दिवस मनाया जा रहा था, तब भी वो इटली रवाना हो गए थे। अगर उससे भी पहले की बात करें तो अक्टूबर 2019 में हरियाणा और महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से ठीक 15 दिन पहले वो कथित तौर पर बैंकॉक चल गए थे। यही नहीं, उसी साल लोकसभा चुनाव होने के तुरंत बाद बिना नतीजो को जाने वो लंदन चले गए और छुट्टियाँ मनाने लगे। यहाँ तक कि वो सोनिया गाँधी की ओर से बुलाई बैठक में भी शामिल नहीं हुए।

यही नहीं, वो अपने साथ एसपीजी की सुरक्षा को लेकर विदेश नहीं जाते और बार-बार एसपीजी सुरक्षा को तोड़ते रहे। इसके बाद सरकार ने उनकी एसपीजी सुरक्षा हटा ली थी। इस मामले में राजनाथ सिंह ने संसद में उनसे सवाल भी पूछे थे।

विदेशी मदद के लिए परेशान हैं राहुल गाँधी?

भारत में अपने राजनीतिक लाभ के लिए राहुल गाँधी द्वारा ‘विदेशी मदद’ माँगने के कई उदाहरण हैं। एक के बाद एक चुनाव हारने के बाद लोकतांत्रिक तरीके से भारतीय जनता का विश्वास जीतने में नाकाम रहने के बाद उन्होंने वैश्विक वामपंथियों के सामने यह घोषणा करना शुरू कर दिया है कि भारत अराजकता में डूबा हुआ देश है, जहाँ लोकतंत्र का पतन हो रहा है और केवल वह ही इसे बहाल कर सकते हैं। अप्रैल 2021 में हार्वर्ड केनेडी स्कूल के इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स में बोलते हुए राहुल ने कहा कि अमेरिकी सरकारी प्रतिष्ठान को ‘भारत में क्या हो रहा है’ के बारे में ‘और अधिक बोलना’ चाहिए।

साल 2022 में यूनाइटेड किंगडम में ‘आइडियाज फॉर इंडिया’ सम्मेलन में राहुल गाँधी ने फिर से विदेशी हस्तक्षेप की माँग की थी। अपने विवादास्पद भाषण के दौरान राहुल गाँधी ने दो बार विदेशी हस्तक्षेप की अपनी इच्छा का संकेत दिया। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के मुद्दे पर भारत पर दबाव डालने के लिए कहा और भारतीय राजनयिकों की बुराई की। यही नहीं, लद्दाख की तुलना उन्होंने यूक्रेन से करते हुए अमेरिकी हस्तक्षेप की माँग की।

राहुल गाँधी ने कैंब्रिज विश्वविद्यालय में भी भाषण दिया है। हंगेरियन-अमेरिकी अरबपति जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशन (ओएसएफ) 2013 से कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के गिल्ड ऑफ बेनिफैक्टर्स का सदस्य है। उसी जॉर्ज सोरोस ने भारत में सत्ता परिवर्तन (मोदी को सत्ता से बाहर करने के लिए) के लिए 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर देने का वादा किया। सोरोस ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अडानी ग्रुप पर खुलकर निशाना साधा है।

इसका लिंक कॉन्ग्रेस के साथ देखें तो कॉन्ग्रेस अडानी विवाद को खूब उछाल रही है। ऐसे ऐसे सारे मुद्दे हैं, जिन्हें जोड़ने पर ये बात साफ तौर पर समझ में आती है कि कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए बेहद बेचैन हैं और इसके लिए वो किसी भी विदेशी मदद के लिए तैयार हैं। राहुल गाँधी की उज्बेकिस्तान यात्रा भी उसी कड़ी से जुड़ी हो सकती है। वैसे, ये बात जनता को भी सोचनी है कि अगले साल लोकसभा का चुनाव है और राहुल गाँधी सीक्रेट ‘मिशन्स’ पर विदेश यात्राएं कर रहे हैं।

1 रुपया देकर कुलभूषण जाधव की रुकवाई थी फाँसी, जानिए कतर में पूर्व नौसैनिकों को मिली मौत की सजा में भारत के पास क्या हैं कानूनी विकल्प

इस्लामी मुल्क कतर (Qatar) की एक अदालत ने जासूसी के झूठे आरोप में भारत के 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों को मौत की सजा सुना दी है। कतर ने भारत से स्पष्ट नहीं बताया है कि इन लोगों पर क्या आरोप हैं। वहीं, कतर की इस हरकत पर भारत के विदेश मंत्रालय ने हैरानी जताई है और इस फैसले को चुनौैती देने की बात कही है।

अब सवाल है कि एक देश की अदालत द्वारा दिए गए फैसले को कोई दूसरा देश कैसे चुनौती दे सकता है। इसको लेकर भारत सरकार के पास क्या विकल्प हैं। इसका एक उदाहरण पूर्व नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव का है। जाधव को पाकिस्तान ने ईरान से अपहरण कर लिया था और उन पर जासूसी का आरोप लगाकर जेल में बंद कर रखा है।

कुलभूषण जाधव को भी पाकिस्तान की अदालत ने फाँसी की सजा दी थी, लेकिन भारत इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पहुँच गया था। इसके बाद पाकिस्तान को फाँसी की सजा टालनी पड़ी थी। हालाँकि, कुलभूषण जाधव को अभी भी पाकिस्तान ने रिहा नहीं किया और वे पाकिस्तानी जेल में बंद हैं। उन्हें प्रताड़ना से गुजरना पड़ रहा है।

इस मामले में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय जाने का विकल्प भारत के मौजूद है। दूसरी तरफ, सजा पाए इन 8 अधिकारियों के परिजनों ने कतर के अमीर के पास दया याचिका लगा रखी है। कतर के अमीर चाहें तो अदालत द्वारा दी गई सजा को माफ कर सकते हैं। वे अक्सर रमजान और ईद पर माफी की घोषणा करते हैं।

हालाँकि, भारत सरकार कतर के लगातार संपर्क में है। कतर ने भारत के इन पूर्व अधिकारियों को पहले सिंगल सेल में अकेले में रखा था। भारत के कहने पर कतर ने अभी एक महीना पहले ही उन्हें एकांतवास से बाहर निकाला है। इसके साथ ही इन्हें काउंसर पहुँच भी दी गई है।

इंडिया टुडे को एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने बताया कि सरकार के पास एक तरीका यह है कि वह कतर की ऊपरी अदालत में फाँसी की सजा के खिलाफ अपील करे। अगर अपील नहीं सुनी जाती है तो भारत सरकार अंतरराष्ट्रीय अदालत का रुख कर सकती है।

एडवोकेट ग्रोवर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून और इंटरनेशनल कॉन्वेंट ऑन सिविल एंड पॉलिटिकल राइट्स (ICCPR) के प्रावधान कहते हैं कि कुछ मामलों को छोड़कर फाँसी की सजा नहीं दी जा सकती है। फाँसी रूक सकती है, लेकिन उन्हें छोड़ने का निर्णय कतर पर होगा।

इसके अलावा, कतर पर राजकीय अथवा अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाकर नागरिकों को मौत की सजा से बचाया जा सकता है। वहीं, संयुक्त राष्ट्र की मदद का भी एक विकल्प है। कुलभूषण जाधव के मामले में एडवोकेट हरीश साल्वे ने सिर्फ एक रुपए की फीस लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालत में लड़ाई लड़ी थी।

इस मसले को कूटनीतिक तरीके से भी सुलझाया जा सकता है। इसके लिए भारत सरकार कतर या उसके मित्र देशों से बातचीत करे। साल 2017 में भारत ने कतर की मदद की थी। बहरीन, मिस्र, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाकर कतर से राजनयिक संबंध खत्म कर लिए थे।

इसके कारण कतर को गंभीर संकट से गुजरना पड़ा था। आयात-निर्यात के लिए उसे सुदूर बंदरगाहों का इस्तेमाल करना पड़ा था। वहाँ गंभीर खाद्य संकट खड़ा हो गया था। उस समय भारत सरकार ने भारत-कतर एक्सप्रेस सेवा नामक समुद्री आपूर्ति लाइन के जरिए कतर की मदद की थी। कतर खाने-पीने के सामानों के लिए भारत पर निर्भर है। इतना ही नहीं, भारत यहाँ से सबसे अधिक LNG आयात करता है।

दरअसल, मई 2022 में पैगंबर मुहम्मद पर नुपूर शर्मा के बयान के बाद कतर पहला मुस्लिम देश था, जिसने प्रतिक्रिया जाहिर की थी। उसने भारतीय राजनयिक को तलब कर लिया था। इसको लेकर दोनों देशों के बीच रिश्तों में थोड़ी तल्खी आ गई थी। इसके तीन महीने बाद बिना किसी सूचना के कतर के अधिकारियों ने इन सभी भारतीयों को गिरफ्तार कर लिया था।

इनकी गिरफ्तारी को लेकर कतर के अधिकारियों ने औपचारिक तौर पर भारत को किसी तरह जानकारी नहीं दी। ये आज तक भारत को नहीं बताया गया है कि इन लोगों पर किस तरह के आरोप लगाए गए हैं। हालाँकि, मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि इन अधिकारियों पर इजरायल के साथ जासूसी करने का आरोप है।

भारतीय अधिकारियों पर आरोप

दरअसल, भारतीय नौैसेना के पूर्व अधिकारी कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और नाविक रागेश कतर की एक निजी फर्म दाहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज के लिए काम करते थे।

डिफेंस सर्विस प्रोवाइडर ऑर्गनाइजेशन दाहरा का स्वामित्व रॉयल ओमानी एयरफोर्स के एक रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर खामिस अल-अजमी के पास है। यह प्राइवेट फर्म कतर के सशस्त्र बलों को प्रशिक्षण और संबंधित सेवाएँ उपलब्ध कराती थी। अजमी को भी भारतीयों के साथ 30 अगस्त 2022 को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उन्हें फीफा वर्ल्ड कप के पहले नवंबर 2022 में रिहा कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक इन भारतीयों को इजरायल के लिए एक सबमरीन प्रोग्राम की जासूसी करने का दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कतर ने साल 2020 में इटली में बनी हाईटेक सबमरीन खरीदने के लिए एक समझौता किया था। ट्राइस्टे स्थित जहाज बनाने वाली कंपनी ‘फिनकेंटियरी एसपीए’ के साथ यह समझौता हुआ था।

कतर ने समझौते के तहत चार कॉर्वेट (जहाज़ का एक प्रकार) और एक हेलीकॉप्टर का ऑर्डर भी दिया था। इस प्रोजेक्ट के तहत कंपनी को कतर में नौसेना का एक बेस बनाना था। इसके साथ ही नौसैनिक बेड़े की देखरेख भी करनी थी। इसके लिए कतर ने जिस दाहरा कंपनी को यह काम दिया, उसमें ये सभी भारतीय काम कर रहे थे।

कतर के अधिकारियों का आरोप है कि ये 8 भारतीय अधिकारी इस प्रोग्राम की गोपनीय जानकारी इज़रायल से साझा कर रहे थे। कतर की इंटेलिजेंस एजेंसी ‘कतर स्टेट सिक्योरिटी’ ने दावा किया था कि उसने भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों के उस सिस्टम को इंटरसेप्ट कर लिया था, जिससे वो कथित रूप से जासूसी कर रहे थे। हालाँकि, कतर ने भारत के साथ कोई भी सबूत साझा नहीं किया है।

पत्नी/पति के रहते दूसरी शादी नहीं कर पाएँगे कर्मचारी, मजहब के आधार पर छूट नहीं: असम की सरमा सरकार का आदेश

पत्नी या पति के जीवित रहते असम के कर्मचारी अब दूसरी शादी नहीं कर पाएँगे। यह सभी कर्मचारियों पर लागू होगा। मजहब के हिसाब से छूट नहीं मिलेगी। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि असम सरकार दूसरी शादी की इजाजत किसी भी कर्मचारी को नहीं देगी, भले ही उनका मजहब इसकी इजाजत देता हो। विशेष परिस्थितियों में दूसरी शादी के लिए कर्मचारियों को सरकार से अनुमति लेनी होगी।

सीएम सरमा ने बताया कि ऐसे मामले सामने आते रहते हैं जब मुस्लिम कर्मचारी दो शादी कर लेते हैं। बाद में उनकी दोनों बीवी पेंशन के लिए लड़ती रहती हैं। इसे देखते हुए यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कानून पहले से ही था। अब इसे लागू करने का फैसला किया गया है।

बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने का यह आदेश असम के चार लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए 58 साल पहले बनाए गए एक सेवा नियम के तहत आया है। इसके अनुसार सरकार की सहमति के बगैर कर्मचारी तब तक दूसरी शादी नहीं कर सकते जब तक पहला पति या पत्नी जीवित है।

असम सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 26 के तहत सरकार की मंजूरी के बगैर दूसरी शादी प्रतिबंधित है। यदि कोई कर्मचारी ऐसा करता है तो उसे कदाचार माना जाता है।

फोटो साभार: news18.com

मुस्लिमों का जिक्र किए बगैर इस परिपत्र में कहा गया है कि यह नियम उन पुरुषों पर भी लागू है, जिन्हें पर्सनल लॉ के तहत दूसरी शादी करने की इजाजत है। इस ‘ऑफिस मेमोरेंडम’ में कहा गया है कि इसी तरह, कोई भी महिला सरकारी कर्मचारी जिसका पति जीवित हो वो सरकार की मँजूरी लिए बगैर किसी भी शख्स से शादी नहीं कर सकेंगी।

ये अधिसूचना कार्मिक अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज वर्मा ने शुक्रवार (20 अक्टूबर,2023) को जारी की थी, लेकिन यह गुरुवार (26 सितंबर,2023) को सामने आई। इसमें कहा गया है कि दिशा-निर्देश असम सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 26 के प्रावधानों के तहत जारी किए गए हैं।

इस आदेश में कहा गया है, “इन प्रावधानों के संदर्भ में, अनुशासनात्मक प्राधिकारी इस नियम को न मानने वाले कर्मचारियों पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति सहित बड़ा जुर्माना लगाने के लिए तत्काल विभागीय कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।”

6 महीने से बोलने में हो रही थी दिक्कत, 7 दिन में 100 बार मिनी स्ट्रोक: दिमाग वाला नस ही हो गया था ब्लॉक, जानिए कैसे बची जान

65 साल के एक बुजुर्ग को एक सप्ताह में 100 बार मिनी स्ट्रोक आए। दिल्ली के एक अस्पताल में सर्जरी के बाद अब उनकी सेहत में सुधार आया है। बताया जा रहा है कि बुजुर्ग को करीब छह महीने से हाथ-पैर में कमजोरी महसूस हो रही थी। साथ ही बोलने और समझने में भी दिक्कत आ रही थी।

BLK मैक्स अस्पताल में इलाज के लिए आने से पहले बुजुर्ग ने कई डॉक्टरों से परामर्श किया था। लेकिन उनकी बीमारी पकड़ में नहीं आ रही थी। दरअसल स्मोकिंग की वजह से बुजुर्ग के दिमाग की एक नस में ब्लॉकेज हो गया था। जिसके कारण रक्त के प्रवाह में रुकावट आ रही थी। इसके कारण उन्हें बार-बार ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) यानी मिनी स्ट्रोक झेलना पड़ा।

दरअसल, स्ट्रोक दो तरह के होते हैं। इस्केमिक और हेमोरेजिक। इस्केमिक स्ट्रोक दिमाग में खून के प्रवाह में रुकावट की वजह से होता है और हेमोरेजिक या रक्तस्रावी स्ट्रोक दिमाग में धमनियों में ब्लीडिंग से होता है। डॉक्टरों ने बुजुर्ग के दिमाग की दाहिनी आंतरिक कैरोटिड धमनी में रुकावट को दूर करने के लिए इंट्राक्रैनियल स्टेंटिंग का इस्तेमाल कर उनकी जिंदगी को नया रूख दिया।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार हापुड़ के निवास जौहार (Niwash Johar) नाम के बुजुर्ग को एक हफ्ते में 100 से अधिक बार मिनी स्ट्रोक पड़े थे। बीएलके मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक एंजियोग्राफी (डीएसए) में पता चला कि स्मोकिंग की वजह से जौहर के दिमाग की रक्त वाहिकाएँ सिकुड़ गई थीं। दाहिनी ओर खून की आपूर्ति केवल 90 फीसदी थी और बाईं ओर से बंद थी। इसलिए, दिमाग में रक्त और ऑक्सीजन की कमी की वजह से बार-बार स्ट्रोक आ रहा था।

कमजोरी महसूस होने पर बुजुर्ग ने कई डॉक्टरों को दिखाया लेकिन कोई भी उनकी परेशानी का पता नहीं लगा सका। BLK मैक्स अस्पताल के एसोसिएट डायरेक्टर न्यूरोलॉजी और हेड न्यूरोवास्कुलर इंटरवेंशन डॉ विनित बंगा ने बताया कि बीते छह महीनों से निवाश जौहर को दाहिने हाथ और पैर में कमजोरी के साथ-साथ बोलने और समझने में मुश्किल हो रही थी।

डॉ बंगा बताया, “शुरुआत में, उन्हें हर हफ्ते 1-2 बार मिनी हार्ट स्ट्रोक आते थे और ये पाँच मिनट से भी कम वक्त का होता था। लेकिन धीरे-धीरे इन अटैक की संख्या हर दिन बढ़ने के साथ शरीर पर उनके असर का वक्त भी बढ़ता गया। जो अटैक पहले 5 मिनट तक रहते थे वो 10-15 मिनट तक होने लगे थे।”

डॉ बंगा ने बताया कि रक्त वाहिकाओं में सिकुड़न मधुमेह, उच्च रक्तचाप, धूम्रपान, खराब जीवनशैली के साथ-साथ हाई कोलेस्ट्रॉल के वजह से भी हो सकती है। उनका कहना था कि इस तरह अटैक का इलाज दवाओं और बेहतर जीवनशैली अपनाकर इसके खतरों को कम किया जा सकता है। हालाँकि उन केसों में स्टेंटिंग की जरूरत होती है, जब रक्त वाहिकाएँ बहुत सिकुड़ गई होती हैं।