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ब्लास्ट से केरल में मर रहे गैर-मुस्लिम, मुख्यमंत्री वामपंथी नेताओं के साथ गाजा को बचाने में जुटे

केरल में रविवार (29 अक्टूबर, 2023) को ईसाइयों की एक सभा में जोरदार ब्लास्ट हुआ है जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई है वहीं कई घायल बताए  जा रहे हैं। यह  धमाका कोच्चि के कलामस्सेरी इलाके में एक कन्वेंशन सेंटर में चल रही यहोवा की प्रार्थना सभा में हुआ है। कन्वेंशन सेंटर में 2000 के करीब लोग मौजूद थे मौजूद थे जबकि अभी तक घायलों की संख्या 35 बताई जा रही है। केरल में हाई अलर्ट है।  धमाके  की जाँच के लिए NIA  टीम रवाना हो गई है। एक तरफ जहाँ इसे आतंकी हमले के तौर देखा जा रहा है वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और वामपंथी गाजा के समर्थन में प्रदर्शन में शामिल होते नजर आए। 

गाजा के समर्थन में प्रदर्शन करते नजर आए मुख्यमंत्री सहित वामपंथी नेता

एक तरफ जहाँ केरल में सुबह से ही एक  के बाद एक ब्लास्ट हो रहे हैं वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और पार्टी नेता सीताराम येचुरी सहित सीपीआई-एम के नेता  इजराइल-हमास युद्ध पर एकेजी भवन के बाहर प्रदर्शन करते रहे। मुख्यमंत्री के साथ वामपंथी नेताओं ने गाजा पर इजरायल के नरसंहार और आक्रामकता को रोकने की माँग कर रहे हैं। 

बता दें कि केरल के ही मल्लपुरम में 27 अक्टूबर, 2023 को जमात-ए-इस्लामी की यूथ विंग ‘सॉलिडेरिटी यूथ मूवमेंट’ द्वारा भी फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली निकाली गई थी। इस रैली को आतंकी संगठन हमास के नेता राशिद मशेल ने वर्चुअली संबोधित किया था। इस रैली में ‘बुलडोजर हिंदुत्व और यहूदियों को उखाड़ फेंको’ जैसे नारे लगाए गए थे।और आज इस रैली के दूसरे ही दिन यानी 29 अक्टूबर को केरल में ब्लास्ट हुआ है। 

कब हुआ विस्फोट 

कलामस्सेरी के सी. आई. विबिन दास ने कहा कि पहला विस्फोट सुबह लगभग 9 बजे हुआ और उसके बाद अगले एक घंटे में कई विस्फोट हुए। मौके पर ही एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 35 घायलों को निकाल कर अस्पताल पहुँचाया  गया है. वहीं कहा जा रहहा है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। यह ब्लास्ट एर्नाकुलम के कलामासेरी स्थित जामरा कन्वेंशन सेंटर में हुआ है। यहाँ आयोजित तीन दिवसीय यहोवा विटनेस सम्मेलन के तीसरे दिन का कार्यक्रम चल रहा था। 

पुलिस को फोन कर माँगी मदद

ब्लास्ट के संबंध में आतंकी साजिश की आशंका जताई जा रही है। हालाँकि, केरल पुलिस की ओर से आधिकारिक तौर पर फिलहाल कोई बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन एक अधिकारी ने बताया कि सुबह 9 बजे विस्फोट के बाद पुलिस के पास मदद के लिए फोन आने लगा था। तुरंत ही पुलिस की टीम मौक़े पर पहुँचकर बचाव कार्य शुरू कर दिया। 

NIA  करेगी जाँच 

मीडिया रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस घटना का संज्ञान लिया है। वहीं ब्लास्ट की जाँच के लिए राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की फॉरेंसिक टीम,  पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, बम स्क्वॉयड मौके पर पहुँच गए हैं। वहीं इस घटना को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केरल के मुख्यमंत्री पिनारई विजयन से बात की है। गृहमंत्री शाह ने केंद्र से हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है। 

क्या है यहोवा प्रार्थना सभा 

दरअसल, यहोवा प्रार्थना सभा या यहोवा विटनेस (Jehovah’s Witnesses) ईसाई धर्म का एक पंथ है, जिसकी धार्मिक मान्यताएँ मुख्यधारा की ईसाईयत से थोड़ी अलग होती हैं। वैश्विक स्तर पर इसके कई कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं। इसमें भाग लेने वाले लोगों की संख्या भी बहुत ज़्यादा होती है। इन कार्यक्रमों में मुख्य रूप से बाइबल-आधारित बातचीत, नाटक और उनके प्रचार कार्य के वीडियो शामिल होते हैं।

हमास के नेेता ने केरल की रैली को किया था संबोधित

गौरतलब है कि आतंकी संगठन हमास के एक बड़े नेता खालिद मशेल ने जमात-ए-इस्लामी की एक रैली को मल्लपुरम में वर्चुअली संबोधित किया था। हालाँकि, हमास नेता के संबोधित और इस कथित विस्फोट के बीच आपसी संबंध है या नहीं है, यह बात जाँच के बाद ही सामने आ पाएगी। लेकिन, अगर यह आतंकी हमला है तो इसके तार बहुत दूर तक जुड़े हो सकते हैं।

‘आपत्तिजनक पोस्ट लाइक करना अपराध नहीं, शेयर/रीट्वीट करना अपराध’: इलाहाबाद हाईकोर्ट से इमरान को राहत, जामा मस्जिद की हिंसक भीड़ का मामला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि किसी आपत्तिजनक पोस्ट को लाइक करना अपराध नहीं है। हालाँकि अदालत ने ऐसी पोस्ट को रिट्वीट या शेयर करना अपराध की श्रेणी में बताया है। 18 अक्टूबर 2023 को उच्च न्यायालय ने यह आदेश मोहम्मद इमरान क़ाज़ी की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया। काज़ी पर आगरा के मंटोला थाने में 1 जुलाई 2019 को केस दर्ज हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण कुमार देशवाल की अदालत में हुई। आरोपित मोहम्मद इमरान काजी की तरफ से एडवोकेट जय राज ने बहस की। बहस के दौरान काजी के वकील ने अपने मुवक्किल के खिलाफ साल 2019 में आगरा के मंटोला थाने में दर्ज FIR को निरस्त करने की माँग की थी।

इस FIR में काजी पर फेसबुक फरहान उस्मान द्वारा की गई एक आपत्तिजनक पोस्ट लाइक करने का आरोप लगा था। इस FIR में 6 नामजदों के साथ 10 अन्य अज्ञात के भी नाम थे। इस पोस्ट की वजह से शहर का माहौल खराब होना बताया गया था।

FIR में दर्ज नामजद आरोपित इमरान क़ाज़ी ने अपने खिलाफ दर्ज केस को हाईकोर्ट में चैलेन्ज किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि इमरान क़ाज़ी के खिलाफ हिंसा में शामिल होने या उसके भड़काने का कोई सबूत पुलिस पेश नहीं कर पाई है। उन्होंने बताया कि मामले के विवेचक अनुज कुमार ने अपनी केस डायरी में इमरान काजी का रोल फरहान उस्मान की एक फेसबुक पोस्ट को लाइक करना बताया है। हालाँकि बाद में यह पोस्ट भी डिलीट कर ली गई थी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुनाया। फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि फेसबुक पर किसी पोस्ट को लाइक करना अपराध का आधार नहीं माना जा सकता है। इसी दौरान हाईकोर्ट ने आपत्तिजनक पोस्ट को शेयर या रीट्वीट करना अपराध की श्रेणी में बताया।

आरोपित इमरान काजी को बड़ी राहत देते हुए इस केस से उनका नाम हटाने के आदेश भी दिए गए। हालाँकि यह राहत इसी मामले में 5 अन्य नामजद और 10 अन्य अज्ञात आरोपितों के लिए नहीं होगी। हाईकोर्ट ने सेशन कोर्ट को निर्देश दिया है कि इस मामले में जिन अन्य आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं, वो केस चलाया जाए।

क्या था पूरा मामला

यह मामला है 1 जुलाई 2019 का। तब आगरा की जामा मस्जिद पर लगभग 600 की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बिना अनुमति भीड़ जुटा कर हिंसा की थी। पुलिस सब इंस्पेक्टर राकेश सिंह ने इस घटना की FIR दर्ज करवाई थी। तब उन्होंने भारतीय मुस्लिम विकास परिषद आगरा के अध्यक्ष समी अगाई, मुस्लिम महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष फरहान उस्मान, चंचल उस्मानी, इमरान उस्मान, इमरान काजी और इमरान खान पर केस दर्ज करवाया था। उन सभी पर सोशल मीडिया के माध्यम से भीड़ को भड़काने का आरोप था।

पुलिस ने यह केस IPC की धारा 147, 148 और 149 के साथ IT एक्ट की धारा 67 के तहत दर्ज किया था। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

प्रदूषण खतरनाक स्तर के पार, फेल हुई दिल्ली-पंजाब की AAP सरकार: पहले सिर्फ पराली जलता था, अब ट्रैक्टर चला कर सैटेलाइट को भी चकमा दे रहे किसान

दिल्ली से लेकर पंजाब तक आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार प्रदूषण रोकने में नाकाम हो रही है। लगातार कई तरह की योजनाएँ बनाने के दावों और तमाम प्रतिबंध लगाने के बाद भी राजधानी दिल्ली में हवा का स्तर खराब होता जा रहा है जबकि पंजाब में पराली जलने से रोकने में भी नाकामी मिल रही है।

सर्दियों का मौसम आते ही दिल्ली की हवा एक बार फिर एक बार खराब हो गई है। रविवार (29 अक्टूबर, 2023) को दिल्ली के सोनिया विहार इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 352 जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय के उत्तरी कैम्पस में 351 दर्ज किया गया। नेहरू नगर में तो AQI 400 के पार निकल गया।

दिल्ली के अन्य कई इलाकों में भी AQI 200-300 के बीच है। हवा में प्रदूषण का यह स्तर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है, विशेषकर साँस की बीमारियों से परेशान रोगियों के लिए यह घातक हो सकता है।

यह हालात तब हैं जब दिल्ली में निर्माण कार्यों समेत गाड़ियों और डीजल जनरेटर जैसी गतिविधियों पर आंशिक या पूर्ण रूप से कई प्रतिबंध लगाए गए हैं। दिल्ली की केजरीवाल सरकार प्रदूषण रोकने में नाकाम रहने पर अब अपने हाथ खड़े कर रही है। दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी मार्लेना ने 25 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रदूषण के स्रोतों को मापने के लिए कोई आधिकारिक डाटा मौजूद नहीं है। आतिशी के इस बयान को सोशल मीडिया पर हास्यास्पद बताया गया।

गौरतलब है कि पंजाब में ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) की सरकार आने से पहले आतिशी स्वयं और केजरीवाल दिल्ली के प्रदूषण का पूरा भार हरियाणा और पंजाब में किसानों के पराली जलाने पर डालते रहते थे। उनका खुद का एक वर्ष 2020 का बयान इसी विषय में है।

दिल्ली के अलावा पंजाब में भी आम आदमी पार्टी की सरकार प्रदूषण को नियंत्रित करने में असफल साबित हो रही है। जहाँ हरियाणा की सरकार ने पराली जलाने की घटनाओं पर नियन्त्रण पाया है वहीं पंजाब में लगातार पराली जल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पंजाब में पराली जलाने के कारण दृश्यता कम हो गई है और शहरों का प्रदूषण स्तर भी बढ़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब में इस वर्ष 15 सितम्बर से लेकर 28 अक्टूबर तक पराली जलाने की 4186 घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। हरियाणा में यह इसकी एक चौथाई 1019 ही हैं।

पंजाब में किसान पराली जलाने के नायाब तरीके भी ढूँढ रहे हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पराली में आग लगाने के तुरंत बाद किसान उस पर ट्रैक्टर चला रहे हैं ताकि जलती हुई पराली दब जाए और उसका धुआँ ज्यादा ना उठे। इस तरीके से पंजाब की एजेंसियाँ सैटेलाइट में यह धुआँ नहीं देख पाती।

पंजाब के किसान यह कदम उठाने के लिए इस लिए भी मजबूर हैं क्योंकि उन्हें आम आदमी पार्टी की सरकार पराली का स्थायी निस्तारण अभी तक नहीं दे पाई है, ऐसे में किसानों के पास इसे जलाने के अलावा और कोई रास्ता भी नहीं बचता है भले ही यह पर्यावरण के लिए कितना ही हानिकारक क्यों ना हो।

दारू की दुकान में चोरी के लिए घुसा चमन, पैग पर पैग मार कर हुआ इतना टल्ली कि साथी भी छोड़ कर भाग निकले: दिल्ली पुलिस के हत्थे चढ़ा

देश की राजधानी दिल्ली में एक चोर के अजीबोगरीब कारनामे का मामला सामने आया है। यहाँ शराब की दुकान में चोरी के मकसद से घुसा चोर दारू की बोतलें देख कर लालच में आ गया। उसने जी भर के शराब पी, जिससे वो नशे में धुत हो कर दुकान में ही सो गया। बाद में पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। 27 साल के आरोपित का नाम चमन कुमार है। घटना शनिवार (28 अक्टूबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके का है। यहाँ शुक्रवार-शनिवार की रात चमन कुमार अपने 2 साथियों के साथ चोरी के इरादे से घूम रहा था। काफी देर की रेकी के बाद इन सभी ने कांति नगर एक्सटेंशन में एक शराब की दुकान में चोरी करने का फैसला किया। नकदी चुराने के लिए इन्होंने लोहे की रॉड साथ में ली। ये तीनों चोर रात के समय दुकान में आराम से घुस गए। दुकान के अंदर शराब की बोतलें देख कर चमन को लालच आ गया।

बताया जा रहा है कि चमन शराब पीने में जुट गया। एक के बाद एक वो कई पैग पर पैग मारता गया जिससे उसको तेज नशा हो गया। आखिरकार हालात ये बन गए कि वो उठने लायक भी नहीं रहा। चमन के बाकी दोनों साथियों ने उसको उठाने की काफी कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहे। इस बीच सुबह लगभग 5 बजे पुलिस की एक गश्ती टीम उधर से निकली। टीम में मौजूद स्टाफ ने एक दुकान का शटर खुला पाया तो उसी तरफ आगे बढ़े। पुलिस को आता देख कर चमन के बाकी दोनों साथी मौके से भाग निकले।

नशे में धुत चमन भाग नहीं पाया। पुलिस उसे उठा कर अपने साथ थाने ले कर आई। दुकान के मालिक को भी सूचना दे दी गई। चमन को चोरी के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके दुकान के अंदर आधे घंटे से अधिक रहने की बात कही जा रही है। चमन से उसके बाकी दोनों साथियों के बारे में भी पूछताछ की जा रही है। चमन मूल रूप से दिल्ली के नन्दनगरी का रहने वाला है। माना जा रहा है कि जल्द ही बाकी दोनों आरोपित भी पुलिस की गिरफ्त में होंगे।

केरल में गैर-मुस्लिम सभा में 3 ब्लास्ट: 1 महिला की मौत, कई घायल – 2 दिन पहले यहीं मुस्लिम भीड़ को हमास आतंकी ने किया था संबोधित

केरल के मल्लपुरम में 27 अक्टूबर 2023 को जमात-ए-इस्लामी की यूथ विंग ‘सॉलिडेरिटी यूथ मूवमेंट’ द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली निकाली गई थी। इस रैली को आतंकी संगठन हमास के नेता राशिद मशेल ने वर्चुअली संबोधित किया था। इस रैली में ‘बुलडोजर हिंदुत्व और यहूदियों को उखाड़ फेंको’ जैसे नारे लगाए गए थे। इस रैली के दूसरे ही दिन यानी 29 अक्टूबर को केरल में ब्लास्ट हुआ है, जिसमें 1 व्यक्ति की मौत हो गई है और 23 से अधिक घायल हो गए हैं। इस विस्फोट को आतंकी वारदात के तौर पर देखा जा रहा है।

यह ब्लास्ट एर्नाकुलम के कलामासेरी स्थित जामरा कन्वेंशन सेंटर में हुआ है। यहाँ आयोजित तीन दिवसीय यहोवा विटनेस सम्मेलन के तीसरे दिन का कार्यक्रम चल रहा था। इसी दौरान सुबह 9:40 बजे धमका हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ मिनटों के अंतराल पर यहाँ तीन विस्फोट हुए हैं। विस्फोट के वजह के बारे में अभी जानकारी सामने नहीं आई है। हालाँकि, न्यूज 18 ने एक सोर्स के हवाले से कहा है कि विस्फोट का पैटर्न बताता है कि यह आतंकी हमला है।

यहोवा विटनेस के क्षेत्रीय प्रवक्ता टीए श्रीकुमार ने बताया कि प्रार्थना के कुछ सेकेंड बाद ही विस्फोट हो गया। पहला धमाका हॉल के बीच में हुआ। इसके कुछ सेकेंड बाद हॉल के दोनों तरफ धमाका हुआ। कहा जा रहा है कि जिस शख्स की जान गई है वह महिला है। वहीं, घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जा रहा है कि घायलों में कई हालत चिंताजनक है।

इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 2000 लोग शामिल हुए थे। कार्यक्रम में भाग लेने वालों महिलाएँ और छोटे-छोटे बच्चे भी थे। इनमें से ज्यादातर लोग अंगलामली से थे। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, फॉरेंसिक विभाग, बम स्क्वॉयड और NIA की टीम मौके पर पहुँच गए हैं। वहीं, नजदीकी कालामसेरी गवर्नमेंट हॉस्पिटल के डॉक्टरों की छुट्टियाँ रद्द कर दी गई हैं और उन्हें तुरंत ड्यूटी पर पहुँचने के लिए कहा गया है।

बता दें कि यहोवा विटनेस (Jehovah’s Witnesses) ईसाई धर्म का एक पंथ है, जिसकी धार्मिक मान्यताएँ मुख्यधारा की ईसाईयत से थोड़ी अलग होती हैं। वैश्विक स्तर पर इसके कई कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते हैं। इसमें भाग लेने वाले लोगों की संख्या भी काफी होती है। इन कार्यक्रमों में मुख्य रूप से बाइबल-आधारित बातचीत, नाटक और उनके प्रचार कार्य के वीडियो शामिल होते हैं।

हमास के नेेता ने केरल की रैली की किया था संबोधित

आतंकी संगठन हमास के एक बड़े नेता खालिद मशेल ने जमात-ए-इस्लामी की एक रैली को मल्लपुरम में वर्चुअली संबोधित किया था। हालाँकि, हमास नेता के संबोधित और इस कथित विस्फोट के बीच आपसी संबंध है या नहीं है, यह बात जाँच के बाद ही सामने आ पाएगी। लेकिन, अगर यह आतंकी हमला है तो इसके तार बहुत दूर तक जुड़े हो सकते हैं।

दरअसल, जिस राशिद माशेल ने जमात की फिलिस्तीन समर्थक रैली को वर्चुअली संबोधित किया था वह हमास का बड़ा नेता है। वह हमास के संस्थापक सदस्यों में से एक है। वह साल 2017 तक हमास पोलित ब्यूरो का चेयरमैन भी था। इजरायल को राशिद मशेल की भी तलाश है।

मल्लपुरम की रैली का पोस्टर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पोस्टर में हमास के आतंकी नेता खालिद मशेल की बड़ी-सी फोटो दिख रही है, जो हाथ हिलाने की मुद्रा में है। पोस्टर में 27 अक्टूबर 2023 की तारीख दी गई है। बैकग्राउंड में काले रंग के झंडे दिख रहे हैं। शाम 4:30 पर हुई इस रैली का मकसद फिलिस्तीन के लिए एकजुटता दिखाना था।

इस रैली के दौरान एक बड़ी स्क्रीन पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास का आतंकी खालिद मशेल दिखा। उसने हाथों में फिलिस्तीन का झंडा लिए लोगों को सम्बोधित भी किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रैली में भीड़ द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल के विरोध में नारेबाजी की गई। इस रैली में ‘बुलडोजर हिंदुत्व और यहूदियों को उखाड़ फेंको’ जैसे नारे लगाए गए।

बताते चलें कि इससे पहले भी सॉलिडेरिटी यूथ मूवमेंट फिलिस्तीन के समर्थन में रैलियाँ निकाल चुका है। पहले की रैलियों में उसने फिलिस्तीन के राजदूत को वर्चुअल तौर पर शामिल किया था। आतंकी संगठन हमास के किसी आतंकी नेता को भारत में हुई किसी रैली में इस तरह से पहली बार शामिल किया गया है।

इससे पहले गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) को केरल के ही कोझिकोड में फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली हुई थी। इस रैली को कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के प्रमुख सहयोगी आईयूएमएल (IUML) ने आयोजित किया था। रैली में कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर भी शामिल हुए थे। तब उन हमास को आतंकी संगठन कहने पर उनका काफी विरोध हुआ था।

दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों में जिस दिलबर नेगी को हाथ-पैर काट आग में फेंक दिया था, उनकी हत्या के 11 आरोपितों को कोर्ट ने छोड़ा

2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में मारे गए दिलबर नेगी की हत्या के 11 आरोपियों को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने बरी कर दिया है। दिलबर नेगी की एक मिठाई की दुकान में जलाकर हत्या कर दी गई थी, जहाँ वह काम करते थे।

कोर्ट ने इस मामले में आदेश देते हुए कहा कि इन 11 लोगों की दंगे के अन्य मामलों में उपस्थिति उन्हें दिलबर नेगी की हत्या का आरोपी नहीं बनाती। दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने हालाँकि एक आरोपी मोहम्मद शाहनवाज पर हत्या, दंगे और भीड़ इकट्ठा करने के आरोप तय कर दिए।

जिन 11 आरोपितों को कोर्ट ने छोड़ा, उनके नाम हैं: मो. फैजल, आजाद, असरफ अली, राशिद (मोनू), शाहरुख, मो. शोएब (छुटवा), परवेज, राशिद (राजा), मो. ताहिर, सलमान, सोनू सैफी। इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचल ने कहा:

“यहाँ उपस्थित तमाम आरोपितों की पहचान दंगे के कई वीडियो में हुई है लेकिन इनमें से कोई शाहनवाज के साथ उस समय नहीं देखा गया, जब वह गोदाम में आग लगाने जा रहा था। इसीलिए शाहनवाज को छोड़ कर बाकी सभी लोगों को बरी किया जाता है।”

कोर्ट ने कहा कि शाहनवाज के विरुद्ध इस बात के सबूत पाए गए हैं कि वह भीड़ के साथ मिल कर हिन्दू समुदाय के लोगों के घरों और प्रतिष्ठानों को नष्ट करके उनमें आग लगा रहा था और दंगे फैला रहा था। शाहनवाज को मार्च 2020 में गिरफ्तार किया गया था।

दिलबर नेगी की हत्या के 6 आरोपितों को इससे पहले जनवरी 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी। दिलबर नेगी मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी जिले के रहने वाले थे और दिल्ली के बृजपुरी स्थित अनिल स्वीट हाउस में काम करते थे। वह हत्या से मात्र 6 माह पहले ही काम की तलाश में दिल्ली आए थे।

2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों की जाँच और मीडिया रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि दुकान में आग लगाकर उसमें फेंकने से पहले उनके हाथ-पैर काट दिए गए थे। उनके दो साथी इस दौरान दंगाइयों की भीड़ से बच कर भागने में कामयाब रहे थे।

वर्ष 2020 में हुए दिल्ली दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दिलबर नेगी के अलावा इस दंगे में इंटेलिजेंस ब्यूरो के अफसर अंकित शर्मा को भी मार कर एक नाले में फेंक दिया गया था।

17 साल की लड़की, स्कूल में चुम्मा, प्राइवेट पार्ट छुआ, अगले साल रेप: CPM नेता की भतीजी का केस, कोर्ट में वीडियो… चाचा पर गंभीर आरोप

केरल में कासरगोड का रहने वाला 20 साल का मोहम्मद अंजार पिछले 25 दिनों से न्यायिक हिरासत में है। उस पर 17 साल की नाबालिग लड़की से बलात्कार और यौन शोषण का आरोप है। पीड़िता को आरोपित की गर्लफ्रेंड बताया जा रहा है। अब आरोपित के परिवार ने इस केस को एक साजिश बताया है। साजिश किसने की? आरोपित के परिवार के अनुसार CPM नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) ने। आरोपित युवक के पिता द्वारा अदालत में सबूत के तौर पर एक वीडियो जमा की गई। वीडियो में 17 साल की पीड़ित लड़की ने खुद को बालिग बताते हुए मोहम्मद अंजार पर लगाए गए आरोपों को दबाव में उठाया गया कदम बताया है।

मनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक यह मामला कासरगोड के नीलेश्वर थानाक्षेत्र का है। यहाँ की रहने वाली और केस दर्ज करते समय अपनी उम्र 17 साल बताने वाली एक लड़की ने अक्टूबर के पहले सप्ताह में पुलिस में यौन शोषण की शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में लड़की ने अपने बॉयफ्रेंड मोहम्मद अंजार पर आरोप लगाया कि उसने साल 2022 में स्कूल के अंदर न सिर्फ जबरन उसे चुम्मा लिया बल्कि प्राइवेट पार्ट को गलत ढंग से छुआ भी। पीड़िता की शिकायत में आरोपित द्वारा जुलाई 2023 में उसके साथ रेड मून बीच पर रेप करना भी शामिल था।

लड़की की इस शिकायत पर पुलिस ने मोहम्मद अंजार के खिलाफ IPC में बलात्कार की धारा 376 (1) के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया। नवम्बर के पहले सप्ताह में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया। अब आरोपित के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मोहम्मद अंजार को सिर्फ लड़की से प्यार करने की वजह से फर्जी केस में फँसाया गया है। इस पूरी साजिश के सूत्रधार के तौर पर CPM पार्टी के नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) का नाम लिया गया है।

शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को मोहम्मद अंजार की जमानत अर्जी कासरगोड की अदालत में दाखिल हुई। अंजार के 57 वर्षीय अब्बा अबू बकर ने कोर्ट में लड़की का एक वीडियो बयान पेन ड्राइव के जरिए दाखिल किया। यह वीडियो लड़की ने खुद बना कर अपने एक दोस्त को भेजा था। वीडियो को अंजार के परिवार तक पहुँचाने की अपील भी की गई थी। वीडियो में पीड़िता ने अपने ही परिजनों पर खुद को जबरन बंधक बना कर रखने और स्कूल जाने से रोकने का आरोप लगाया है।

लड़की का यह भी दावा है कि अंजार ने उसके साथ कभी भी शारीरिक संबंध नहीं बनाए। गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) को रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में लड़की ने खुद को 18 साल की बालिग बताया। लड़की ने अपने चाचा और CPM नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) पर अपनी पिटाई का आरोप लगाते हुए बताया कि उन्होंने ही मोहम्मद अंजार पर फर्जी केस दर्ज करवाने का दबाव बनाया था। लड़की ने अदालत से अंजार के साथ खुद को भी अपने घर वालों से बचाने की गुहार लगाई है। बकौल पीड़िता उसे उनके ही घर वालों द्वारा ठीक से खाना भी नहीं दिया जा रहा है।

आरोपित अंजार के अब्बा अबू बकर ने भी CPM नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) पर गंभीर आरोप जड़े। उनका कहना है कि मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) ने उनके बेटे और उसके 3 साथियों को 2-3 अक्टूबर की रात में अपने घर में बंद करके बेरहमी से पीटा था। आरोप है कि जब वो अंजार से अपनी भतीजी का कोई अवैध संबंध साबित नहीं कर पाए तब फर्जी शिकायत दर्ज कर उसे जेल भिजवा दिया। इन आरोपों की पुष्टि अंजार के साथियों अलजाब, हसन और जामिन ने भी की है। उन्होंने बताया कि मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) ने अपने 10 साथी गुंडों के साथ उन्हें बंधक बना कर पीटा है।

CPM नेता मोहम्मद सलमान (बदला हुआ नाम) का दावा है कि अंजार और उसके साथियों के मोबाइल से उनकी भतीजी की आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरें मिली थीं। उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को भी गलत बताया है। हालाँकि पुलिस ने अदालत में अंजार की जमानत का विरोध किया है। पीड़िता के मेडिकल परीक्षण में भी यौन शोषण की पुष्टि नहीं हुई है। सभी दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने इस मामले में सुनवाई की अगली तारीख 30 अक्टूबर तय की है।

पाकिस्तान में फिलिस्तीन के समर्थन में रैली: पुलिस ने दौड़ा-दौड़ा कर मारा, फायरिंग और आगजनी, 43 गिरफ्तार

आतंकी संगठन हमास के समर्थन में रैली निकालकर फिलिस्तीन के प्रति एकजुटता का दिखावा दुनिया भर में किया जा रहा है, जबकि सीरिया-सूडान जैसे मुल्कों में मारे जा रहे मुस्लिमों को कोई इस्लामी देश आश्रय देने को तैयार नहीं है। फिलिस्तीन के प्रति ऐसा ही दिखावा पाकिस्तान में रैली के जरिए करने की कोशिश की जा रही थी। इस दौरान जमकर फायरिंग और आगजनी हुई।

कट्टरपंथी राजनीतिक दल जमात-ए-इस्लामी (JI) द्वारा शनिवार (28 अक्टूबर 2023) को रैली की तैयार कर रही थी। इस रैली के लिए सैकड़ों की संख्या में लोग जुटे थे। इसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस भारी दल के साथ घटनास्थल पर पहुँची और लाउडस्पीकर को जब्त कर लिया। इसके बाद पुलिस पर जमकर पत्थरबाजी की गई।

जमात ने यह रैली बिना जिला प्रशासन की अनुमति के आयोजित किया था। पुलिस ने शनिवार को श्रीनगर राजमार्ग पर दो अलग-अलग ‘झड़पों’ में जमात-ए-इस्लामी के 40 से अधिक कार्यकर्ताओं और तीन नेताओं को हिरासत में ले लिया। जिन नेताओं को हिरासत में लिया गया है उनमें इस्लामाबाद के JI प्रमुख नसरुल्ला रंधावा और उनके डिप्टी काशिफ चौधरी तथा डॉक्टर फारूक शामिल हैं।

JI के सूचना सचिव सज्जाद अहमद अब्बासी का दावा है कि पार्टी 29 अक्टूबर 2023 (रविवार) को होने वाले ‘गाजा मार्च’ की तैयारी कर रही थी। इसी दौरान पुलिस दल घटनास्थल पर पहुँचा और उनके शिविरों को उखाड़ फेंका। उन्होंने दावा किया कि लगभग दो सप्ताह पहले इस्लामाबाद प्रशासन से अमेरिकी दूतावास तक रैली आयोजित करने के लिए लिखित रूप में अनुमति माँगी गई थी।

इस बीच पुलिस वहाँ पहुँचकर धारा 144 का हवाला दिया। टेंट उखाड़ दी और लाउडस्पीकर को जब्त कर लिया। पुलिस ने कहा कि उन लोगों को जिला प्रशासन से रैली आयोजित करने की अनुमति नहीं मिली है। इसके बाद जमात के कार्यकर्ताओं ने बवाल करना शुरू कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उन पर जमकर लाठी चार्ज किया। पुलिस को फायरिंग भी करनी पड़ी।

माना जा रहा है कि जमात पाकिस्तान की वर्तमान सरकार के खिलाफ लोगों में माहौल तैयार करने की कोशिश कर रही थी। इसके साथ अमेरिकी दूतावास तक प्रदर्शन के दौरान दूतावास पर हमले की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद लोगों ने फिलिस्तीन के समर्थन में इकट्ठा हुए थे।

जमात के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार करने की पुलिस कार्रवाई के खिलाफ पार्टी के नेता और कार्यकर्ता श्रीनगर राजमार्ग पर एकत्रित हो गए। इस दौरान पुलिस और कार्यकार्ताओं के बीच जमकर टकराव हो गया। पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि गिरफ्तारियाँ इसलिए की गईं क्योंकि कुछ लोग श्रीनगर राजमार्ग को अवरुद्ध करने का प्रयास कर रहे थे।

उन्होंने कहा, “राजमार्ग एक अंतर-प्रांतीय कनेक्टिविटी सड़क है और सड़क को अवरुद्ध करने से जनता के लिए समस्याएँ पैदा होती हैं।” पुलिस ने इन राजनीतिक कार्यकर्ताओं को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए प्रचलित प्रक्रियाओं का पालन करने की सलाह दी।

‘साँप तो साँप ही रहेगा…’: येरुशलम को लेकर 1000 साल पहले हुए ईसाई-मुस्लिम युद्ध को फिर दोहराने की तुर्किये की धमकी, एर्दोगन बोले- गाजा में नरसंहार के लिए पश्चिमी देश जिम्मेदार

फिलिस्तीन के इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा किए गए कत्लेआम के बाद इजरायल ने दूसरे चरण की कार्रवाई शुरू कर दी है। पहले चरण में उसने आतंकियों और उनके ठिकानों पर बम बरसाई और अब दूसरे चरण में गाजा में जमीनी सैनिकों को उतारकर आतंकियों का खात्मा शुरू कर दिया है। इजरायल की कार्रवाई में अब तक 7700 फिलिस्तीनी मारे गए। इस कार्रवाई पर अब तुर्की ने इजरायल को ‘क्रूसेड वार’ यानी धर्मयुद्ध की धमकी दी है।

तुर्किये के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdoğan) ने कहा कि कुछ देशों को छोड़ दिया जाए तो गाजा में फिलिस्तीनियों की हत्या में पश्चिमी देशों का सीधा हाथ है। आत्मरक्षा का अधिकार है, लेकिन इसमें न्याय कहाँ है? उन्होंने धमकी वाले अंदाज में कहा कि अगर गाजा में हमले नहीं रूके तो एक बार फिर से क्रूसेड वार शुरू हो जाएगा।

बताते चलें कि तुक्रिये के अलावा ईरान ने भी इस इस युद्ध के लिए अमेरिका सहित पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया है और सीधी धमकी दी है। वहीं, कतर सहित अधिकांश इस्लामी देश फिलिस्तीन के पक्ष में मजबूती से खड़े हैं। इन देशों में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में फिलिस्तीन के लोगों के समर्थन में रैलियाँ निकाली जा रही हैं।

तुर्किये के इंस्तांबुल में आयोजित एक रैली में एर्दोगन ने इज़रायल को ‘युद्ध अपराधी’ और ‘कब्जा करने वाला’ बताया। अपने लगभग एक घंटे के भाषण में एर्दोगन ने यह भी कहा कि इजरायल में घुसकर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का गर्दन रेतने वाला हमास आतंकवादी संगठन नहीं है। इसके साथ ही कुछ पश्चिमी देशों के इज़रायल के लिए बिना शर्त समर्थन देने की भी आलोचना की।

एर्दोगन के बयान की इजरायल ने निंदा की है और तुर्किये और उन्हें साँप कहा है। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत गिलाद एर्दान ने कहा, “साँप तो साँप ही रहेगा“। ऊर्जा मंत्री इजरायल कार्ट्ज ने कहा, “मुस्लिम ब्रदरहुड का आदमी हमास-दाएश आतंक का समर्थन कर रहा है।”

वहीं इजरायल ने तुर्किये के अपने राजनयिकों को वापस बुला लिया है। इजरायल के विदेश मंत्री एली कोहेन ने कहा, “तुर्किये के गंभीर बयानों को देखते हुए मैंने आपसी संबंधों के पुनर्मूल्यांकन के लिए तुर्किये से अपने राजयनिक प्रतिनिधियों को लौटने का आदेश दे दिया है।”

दरअसल, एर्दोगन ने जिस धर्मयुद्ध की बात कही है, वह साल 1000 से साल 1291 के बीच यरुशलम को लेकर ईसाइयों और मुस्लिमों के बीच चला था। हालाँकि, उसके बाद भी यह कई सदियों तक चलता रहा। येरुशलम यदूदी, ईसाई और मुस्लिम, तीनों के लिए महत्वपूर्ण है। यहूदी की शुरुआत इसी येरुशलम से हुई थी, जबकि ईसाइयों के ईसा मसीह को यहीं क्रूस पर लटकाया गया था। इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद भी यहाँ कुछ दिन ठहरे थे।

येरुशलम पहले रोम साम्राज्य का अंग था। ये बाद में ईसाई हो गए। बाद में इस मुस्लिमों ने अधिकार कर लिया। फिर अधिकार को लेकर मुस्लिमों और ईसाइयों के बीच सात भीषण युद्ध लड़े गए थे। इन यु्द्धों में येरुशलम कभी इसाइयों को हाथ लगा तो कभी मुस्लिमों के। आखिर में येरुशलम पर तुर्की के इस्लामी ऑटोमन साम्राज्य का कब्जा हो गया था। इसी को लेकर एर्दोगन पश्चिमी देशों को धमकी दे रहे हैं।

इन सब तमाम बयानों के बीच इजरायल अपने लक्ष्य से बिना भटके हमास के आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई में जुटा है। इजरायल ने साफ कह दिया है कि वह गाजा में ऐसी कार्रवाई करेगा कि अगले पचास सालों तक इस्लामी आतंकी इजरायल पर हमले के बारे में सोचेंगे नहीं। इजरायल ने अब गाजा में जमीनी सैनिकों को भी उतार दिया है।

इजरायल की कार्रवाई में अब 7700 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इनमें हमास के प्रमुख कमांडर से लेकर उसके वायुसेना प्रमुख भी शामिल हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट कहा है कि यह लड़ाई इजरायल के अस्तित्व की लड़ाई है। इजरायल गाजा में हमास के सुरंगों को नष्ट करने के लिए भी स्पॉन्ज बम इस्तेमाल करने वाला है।

वहीं, इजरायल की कठोर कार्रवाई से सहमे हमास के आतंकियों ने कहा था कि अगर इजरायल अपने हमले रोकता है तो वह बंधकों को छोड़ देगा। उसने बंधकों को छोड़ने के लिए समय माँगा था, लेकिन इजरायल ने अपनी कार्रवाई नहीं रोकी। अब हमास ने दावा किया है कि इजरायल के हमलों में 50 बंधकों की मौत हो गई है।

बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल पर एक साथ लगभग 5000 रॉकेट दाग दिया था। इसके साथ ही चौतरफा जमीनी हमला करके निर्दोष इजरायली महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों सहित 1400 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके साथ ही लगभग 229 महिला, बच्चों और पुरुषों को बंधक बनाकर आतंकी अपने साथ गाजा लेकर चले गए हैं।

वकील बेटे ने 73 साल की माँ को बहुत मारा, पोते ने पानी गिरा जानबूझ कर लगाया था ‘पेशाब’ का आरोप: CCTV से धराया, बेटी ने कराया अरेस्ट

पंजाब के रोपड़ से एक बुजुर्ग महिला के साथ क्रूरता का मामला सामने आया है। बुजुर्ग महिला की पिटाई और उसको प्रताड़ित करने की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। मामले में आरोपित महिला का बेटा ही है, जिसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

जानकारी के अनुसार, रोपड़ के ज्ञानी जैल सिंह नगर में 73 वर्षीय बुजुर्ग आशारानी अपने बेटे, बहू और पोते के साथ रहती हैं। उनके साथ यह सभी मिलकर मारपीट करते हैं। एक वीडियो में सामने आया कि उन्हें उनका बेटा अंकुर वर्मा पीट रहा है।

अनुराग ने आरोप लगाया कि उसकी माँ ने बिस्तर पर पेशाब किया है। बाद में हालाँकि यह सामने आया कि बिस्तर पर बुजुर्ग महिला के पोते ने ही पानी फैलाया था और जानबूझ कर आरोप अपनी दादी पर लगाया, जिसके बाद बेटे ने अपनी ही माँ की पिटाई की।

यह पूरा मामला जब पीड़िता आशारानी की बेटी दीपशिखा को पता चला तो उन्होंने घर पर पहुँच कर अपनी माँ की हालत जानी और सीसीटीवी फुटेज निकलवाए। इसके पश्चात उन्होंने यह जानकारी पंजाब पुलिस को दी, जिन्होंने आरोपित अंकुर वर्मा को गिरफ्तार किया।

पीड़िता को घर से निकाल कर अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। अस्पताल में जाँच के दौरान के पीड़िता आशारानी के शरीर पर मारपीट के निशान मिले हैं। पीड़िता के बेटे पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 327, 342 और 323 के अतिरिक्त वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

पंजाब सरकार में मंत्री डॉ बलजीत कौर ने इस मामले का संज्ञान लिया है और इसकी निंदा की है। उन्होंने महिला एवं बाल संरक्षण मामले के विभाग से इस मामले की जाँच करने को भी कहा है। एक अन्य वायरल वीडियो में मीडिया से बात करते हुए आरोपित अंकुर वर्मा इन सभी आरोपों का जवाब देने से बचता हुआ दिखता है।

यह भी जानकारी सामने आई है कि अपनी माँ को पीटने वाले वकील अंकुर वर्मा की रोपड़ बार काउंसिल की सदस्यता रद्द कर दी गई है। अब वह वकालत नहीं कर पाएगा। अंकुर को रोटरी क्लब से बाहर का रास्ता दिखाया गया है।