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रैली भारत में, भीड़ मुस्लिमों की, संबोधित किया हमास के आतंकी ने: जमात-ए-इस्लामी पर केरल भाजपा ने की कार्रवाई की माँग

केरल के मल्लपुरम में शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को फिलिस्तीन के समर्थन में रैली निकाली गई। इस रैली में ‘बुलडोजर हिंदुत्व को उखाड़ फेंको’ जैसे नारे लगाए गए। जमात-ए-इस्लामी की यूथ विंग ‘सॉलिडेरिटी यूथ मूवमेंट’ नाम के संगठन द्वारा आयोजित इस रैली को आतंकी संगठन हमास के नेता खालिद मशेल ने वर्चुअली सम्बोधित किया। इस पर भाजपा ने केरल पुलिस से कार्रवाई की माँग की है।

मल्लपुरम की रैली का पोस्टर भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पोस्टर में हमास के आतंकी नेता खालिद मशेल की बड़ी-सी फोटो दिख रही है, जो हाथ हिलाने की मुद्रा में है। पोस्टर में 27 अक्टूबर 2023 की तारीख दी गई है। बैकग्राउंड में काले रंग के झंडे दिख रहे हैं। शाम 4:30 पर हुई इस रैली का मकसद फिलिस्तीन के लिए एकजुटता दिखाना था।

इस रैली के दौरान एक बड़ी स्क्रीन पर इस्लामी आतंकी संगठन हमास का आतंकी खालिद मशेल दिखा। उसने हाथों में फिलिस्तीन का झंडा लिए लोगों को सम्बोधित भी किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस रैली में भीड़ द्वारा फिलिस्तीन के समर्थन और इजरायल के विरोध में नारेबाजी की गई।

बताते चलें कि इससे पहले भी सॉलिडेरिटी यूथ मूवमेंट फिलिस्तीन के समर्थन में रैलियाँ निकाल चुका है। पहले की रैलियों में उसने फिलिस्तीन के राजदूत को वर्चुअल तौर पर शामिल किया था। आतंकी संगठन हमास के किसी आतंकी नेता को भारत में हुई किसी रैली में इस तरह से पहली बार शामिल किया गया है।

रैली में हमास के आतंकी नेता को शामिल करने पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने रैली के पोस्टर को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। सुरेंद्र ने सवाल किया है कि कहाँ हैं मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और केरल की पुलिस?

भाजपा नेता सुरेंद्रन ने आरोप लगाया है कि फिलिस्तीन के समर्थन की आड़ में आतंकी संगठन हमास को महिमामंडित किया जा रहा है। सुरेंद्रन ने हमास को एक आतंकी संगठन बताते हुए उसके नेताओं को योद्धा साबित करने की कोशिश को कतई स्वीकार नहीं किए जाने का एलान किया है।

वहीं, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “हमास का आतंकी केरल में भाषण दिया है और हिन्दू को खत्म करने की बात कही है उसने वहाँ। मैं बता दूँ उन्हें कि भारत में कई आए, लेकिन कुछ नहीं कर पाए। वैसे ही हमास का भी नाश हो जाएगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) को केरल के ही कोझिकोड में फिलिस्तीन के समर्थन में एक रैली हुई थी। इस रैली को कॉन्ग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के प्रमुख सहयोगी आईयूएमएल (IUML) ने आयोजित किया था। रैली में कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर भी शामिल हुए थे। तब उन हमास को आतंकी संगठन कहने पर उनका काफी विरोध हुआ था।

केरल को केरलम करेंगे, लेकिन देश का नाम भारत नहीं पढ़ेंगे: NCERT अध्यक्ष ने वामपंथी प्रोपेगंडा का ऐसा दिया जवाब, बोले – मद्रास को भी किया गया चेन्नई

NCERT (राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद) ने अपनी सभी पाठ्य पुस्तकों में India की जगह देश का नाम भारत लिखने का निर्णय लिया है। NCERT के मुखिया सीआई इस्साक ने कहा कि भारत नाम बच्चों में गर्व की भावना पैदा करता है। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि सिलेबस में अब बच्चों को इंडिया की जगह भारत ही पढ़ाया जाएगा। हालाँकि, भारत के विपक्षी दल इस फैसले के विरोध में उतर आए हैं। इस्साक ने इसका भी कड़ा जवाब दिया है।

NCERT अध्यक्ष एवं प्रोफेसर ने कहा कि जो लोग इस सुझाव का विरोध कर रहे हैं, उनलोगों ने ही मद्रास का नाम बदल कर चेन्नई किया था और केरल का नाम केरलम रखे जाने की माँग कर रहे हैं। उन्होंने भारत नाम को कम से कम 7000 वर्ष पुराना बताते हुए कहा कि बच्चों को ये नाम सुन कर हमारी समृद्ध विरासत और इतिहास पर गर्व होगा। वहीं उन्होंने इंडिया नाम को महज 150 वर्ष पुराना करार दिया। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी भारत नाम सीखे, इसी भावना के साथ पाठ्य पुस्तकों में ये बदलाव किया जा रहा है।

कक्षा 7वीं से लेकर 12वीं तक के सिलेबस में देश का नाम भारत पढ़ाने का सुझाव दिया गया है। नई शिक्षा नीति बनने के बाद NCERT की समिति ने ये फैसला लिया। सीआई इस्साक ने कहा कि उनकी पीढ़ी को इंडिया सिखाया गया है और वो इंडिया ही कहते हैं। उन्होंने कहा कि वो ये नहीं कह रहे कि India शब्द का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनकी अध्यक्षता में 2021 में समिति गठित की गई थी, जिसने विभिन्न सिफारिशें दी हैं।

हालाँकि, केरल के शिक्षा मंत्री शिवनकुट्टी ने इस मामले में विरोधी रुख अख्तियार करते हुए कहा था कि राज्य ने सामाजिक विज्ञान विषय के लिए NCERT द्वारा की गई सिफारिशों को ख़ारिज कर दिया है। वहीं अब शुक्रवार (27 अक्टूबर, 2023) को केरल सरकार ने केंद्र से कहा है कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। केरल के शिक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस संबंध में पत्र लिखा है। इसमें दावा किया गया है कि देश की एकता के लिए इंडिया नाम का इस्तेमाल किया जाना ही ठीक है।

केरल सरकार का दावा है कि छात्रों ने देश के इतिहास और विरासत के बारे में इंडिया नाम से ही पढ़ा है। साथ ही NCERT द्वारा एक खास विचारधारा को समर्थन दिए जाने का दावा करते हुए पत्र में कहा गया है कि किसी राजनीतिक या विचारधारा वाले उद्देश्य से ऐसे निर्णय लिए जाने की समीक्षा होनी चाहिए। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी इस पर आपत्ति जता चुके हैं। केरल में CPM के नेतृत्व में वामपंथी सरकार चल रही है।

यहाँ ये याद दिलाना ज़रूरी है कि ये वही सरकार है जिसने अगस्त 2022 में विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया था कि केरल का नाम बदल कर केरलम कर दिया जाए। खुद सीएम ये प्रस्ताव लेकर आए थे और केंद्र सरकार को सुझाव भेजा गया था कि 8वीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाओं में राज्य का नाम केरलम रखा जाए। केरल के कुछ लोगों का मानना है कि हिंदी में केरलम ही अंग्रेजी में केरला हो गया है। वहीं केरल का नाम मलनाडु रखने की माँग भी होती रही है, जो उनकी मलयाली पहचान पर आधारित है।

‘5 महीने से पाकिस्तानी क्रिकेटरों को सैलरी नहीं’: पूर्व-विकेटकीपर ने खोला राज… लेकिन वर्ल्ड कप में छक्के मारने के लिए प्रोटीन (मांस) चाहिए था इनको

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर राशिद लतीफ ने PCB (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड) और वर्तमान कप्तान बाबर आज़म के बीच मनमुटाव होने का दावा किया है। लतीफ का कहना है कि PCB के चेयरमैन अशरफ न तो बाबर आज़म का फोन उठा रहे हैं और न ही उनके मैसेज का जवाब दे रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों को पिछले 5 महीने से वेतन भी नहीं मिला है। पाकिस्तानी मीडिया में यह इंटरव्यू शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को वायरल हुआ है।

राशिद लतीफ ने यह आरोप PTV पर दिए गए इंटरव्यू के दौरान लगाए हैं। पाकिस्तानी खेल पत्रकार कादिर ख्वाजा ने इस इंटरव्यू में से 2 मिनट 7 सेकेंड के मुख अंश अपने X हैंडल पर शेयर किए हैं। इंटरव्यू की शुरुआत में ही राशिद लतीफ़ ने बताया कि बाबर आज़म 2 दिनों से चेयरमैन को मैसेज कर रहे हैं लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आ रहा है। चेयरमैन अशरफ के अलावा बाबर आज़म सलमान नासिर और उस्मान को भी मैसेज किया लेकिन उनको कोई जवाब नहीं मिला।

राशिद लतीफ ने बताया कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने एक प्रेसनोट जारी की है। इस प्रेसनोट में बोर्ड ने बताया है कि वो खिलाड़ियों के साथ किए गए अनुबंध की फिर से जाँच कर रहे हैं। राशिद के अनुसार PCB ने फिलहाल चल रहे कॉन्ट्रैक्ट को मानने से इनकार कर दिया है। राशिद ने आगे कहा:

“खिलाड़ियों को 5 महीने से सैलरी नहीं मिली। प्लेयर क्या ख़ाक खेलेंगे?”

पूर्व पाक क्रिकेटर राशिद लतीफ ने यह भी दावा किया है कि इसके अलावा भी कई बातें लोगों की जानकारी में नहीं हैं, जिसे बताने के लिए 1 या 2 घंटे के शो कम पड़ जाएँगे। राशिद लतीफ़ ने बाबर आज़म का बचाव करते हुए कहा कि बिना पूरी जानकारी के सारे आरोप उसी पर लग रहे हैं।

राशिद लतीफ ने दावा किया कि वर्ल्ड कप 2023 के खत्म होने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट जगत में और अधिक उथल-पुथल होगी। सितंबर 2023 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने खिलाड़ियों के साथ अनुबंध किया था। लतीफ के अनुसार अब अपने ही बनाए अनुबंध को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड मानने से इनकार कर रहा है।

बताते चलें कि विश्व कप 2023 में पाकिस्तान की हालत फिलहाल पतली चल रही है। भारत, अफगानिस्तान और अब दक्षिण अफ्रीका से मिली लगातार हार के बाद उसकी राह बेहद मुश्किल हो गई है। पाकिस्तानी समर्थक भी अपनी टीम को जी भर के कोस रहे हैं।

आपको बता दें कि जिन पाकिस्तानी खिलाड़ियों को उनके देश में 5 महीने से सैलरी नहीं मिली है वो भारत में आकर जब वर्ल्ड कप खेल रहे हैं तो प्रोटीन डायट (मांस) की डिमांड कर रहे थे। पाकिस्तानी बल्लेबाज इमाम उल हक की इस बात पर उन्हें लोगों ने लताड़ा भी है।

धड़ से अलग था बच्चे का सिर, इजरायली माँ फिर भी उसे बचा रही थी… हमास आतंकियों ने पीठ में मारी गोली: उसी पोजिशन में दोनों की मिली लाश

इजरायल पर 7 अक्टूबर 2023 को आतंकी संगठन हमास का किया हमला दरिंदगी और वहशीपन का नंगा नाच था। इस हमले के बाद राहत और अभियान में लगे इजरायल डिफेंस फोर्स (IDF) के अधिकारियों और लोगों ने ऐसे खौफनाक मंजर देखे कि उनकी रूह काँप उठी। मंजर कुछ ऐसा था कि एक घर जल रहा था और माँ पीठ पर गोली लगने के बाद भी अपने सिर कटे बच्चे के शव को बचाती रही थी।

उस दृश्य को याद करते हुए इसे देखने वाले ही नहीं, बल्कि सुनने वाले सिहर उठते हैं। दक्षिणी इज़रायल में IDF के खोज और बचाव अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं कर्नल गोलन वाच (Golan Vach) का हाल भी कुछ ऐसा ही होता है जब वो कहते हैं, “मेरे हाथ में एक सिर कटा हुआ बच्चा था।” ये कहते हुए उनके चेहरे पर जो दर्द था, वो बगैर कहे ही हमास के आंतकियों की क्रूरता बयाँ करने के लिए काफी था।

कर्नल गोलन वाच के हाथ में हमास के आंतकियों की दरिंदगी की फोटो लिए एक तस्वीर को आर्सेन ओस्ट्रोव्स्की ने एक्स हैंडल पर शेयर किया है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार वकील आर्सेन ओस्ट्रोव्स्की लिखते है, “उन्होंने जो दिखाया वह इतना वीभत्स था कि मुझे तस्वीर धुंधली करनी पड़ी। बिल्कुल कल्पना से भी परे का कृत्य। फिर भी ऐसी बीमार लोग हैं, जो इससे इनकार करेंगी!”

कर्नल गोलन वाच के मुताबिक, हमलों के तीन दिन बाद बीरी किबुत्ज़ के मलबे में लोगों की खोज करते वक्त उन्होंने एक बच्चे को बचाती एक माँ की लाश देखी। कर्नल वाच ने किबुत्ज़ में मीडिया को बताया, “जब मैंने इसे (माँ) मलबे से खींचा तो मैंने एक सिर कटे बच्चे को देखा। मैंने इसे अपने हाथों से उठाया और अपने बॉडी बैग में डाल दिया। मैंने ये व्यक्तिगत तौर पर किया।”

घटनास्थल के वीडियो में वे कहते दिखते हैं, “जिस रास्ते पर हम अभी चले हैं, हमें 20 पीड़ित मिले हैं। सभी मारे गए थे। लेकिन, जब हम इस घर में पहुँचे तो मैंने ऐसा कुछ देखा, जिसका सामना मैंने पहले कभी नहीं किया था। यहाँ एक औरत लेटी पड़ी थी। ये घर अभी भी जल रहा था, इसलिए वो पहचानी जा सकी। उसे पीठ में गोली मारी गई थी और वो एक बच्चे को बचा रही थी। एक छोटा बच्चा… शायद एक या दो साल का था। उस बच्चे का सिर कटा था। उस बच्चे को मैंने खुद अपने हाथों में उठाया।”

हमास के हमलों को लेकर वाच ने कहा, “लोग मुझसे पूछते हैं कि आपने फोटो क्यों नहीं ली। मैंने कहा कि मुझे खेद है, मेरे बच्चे हैं। मेरी कुछ सीमाएँ हैं। मैं एक कटे हुए सिर वाले बच्चे की फोटो नहीं ले सकता।” कर्नल ने आगे कहा कि कफ़र अज़ा में एक सैनिक का सिर काट दिया गया। हालाँकि सैन्य अधिकारियों ने ये भी कहा कि सिर धड़ से अलग करने की कितनी घटनाएँ हुई हैं, कहना संभव नहीं है।

हमास के आतंकी हमले की तस्वीरों मीडिया में आती रही हैं। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने माना था कि हमास ने इजरायल पर किए हमले में में दरिंदगी की हदें पार कीं। हालाँकि, हमास बार-बार इससे इनकार कर रहा है कि उसने इजरायल में बच्चों का गला नहीं रेता, लेकिन अब साक्ष्य भी सामने आ रहे हैं।

गौरतलब है कि इज़रायल ने कहा है कि जब हमास आतंकवादियों ने दक्षिणी इज़रायल के किबुत्ज़ में लोगों के घरों और सैन्य ठिकानों पर हमला करके 1,400 लोग मार दिया और कम-से-कम 229 लोगों को बंधक बना लिया। उसने कहा है कि मरने वालों में कई औरतें और बच्चे थे। इनकी हत्या चौंकाने वाले तरीकों से की गई।

स्पॉन्ज बम: हमास आतंकियों को अब इसी से मारेगा इजरायल, सुरंग में बने मस्जिद-मदरसे सबको करेगा तबाह – जानिए इसकी खासियत

इजरायल ने इस्लामी आतंकी संगठन हमास द्वारा 7 अक्टूबर 2023 को अंजाम दिए बर्बर नरसंहार के बाद उसके खात्मे की दिशा में काम शुरू कर दिया है। हालाँकि, इजरायल के सामने सबसे बड़ी समस्या हमास द्वारा बंधक बनाए गए अपने 200 नागरिकों को छुड़ाना है। कहा जा रहा है कि हमास इन्हें अलग-अलग सुरंगों में छिपाकर रखा है। इसलिए इजरायल ने इसका तोड़ स्पॉन्ज बम (Sponge Bombs) के रूप में निकाला है।

इजरायली सैनिकों ने शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) से गाजा में जमीनी हमला शुरू कर दिया। दरअसल, फिलिस्तीनी क्षेत्र गाजा पट्टी में सुरंगों का जाल बिछा हुआ है। ये सुरंग रिहायशी इलाकों में जमीनों के नीचे बनाए गए हैं। हमास के आतंकी अपने ठिकाने के रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं। ये सुरंगें सैकड़ों किलोमीटर लंबी और करीब 80 मीटर गहरी बताई जा रही हैं। ये गाजा की लगभग 360 वर्ग किलोमीटर के इलाके में फैली हुई हैं।

इन सुरंगों का उपयोग हमास के आतंकी ना सिर्फ सैन्य ठिकाने के रूप में करते हैं, बल्कि तस्करी के लिए भी इसका इस्तेमाल करते हैं। साल 2000 के बाद से गाजा ने इन सुरंगों का इस्तेमाल गाजा और मिस्र के बीच माल और हथियारों की तस्करी के लिए एक चैनल के रूप में भी शुरू कर दिया।

एक दशक पहले इज़रायली अधिकारियों ने गाजा से इज़रायल तक करीब 1.5 मील लंबी और 66 फीट नीचे एक सुरंग की खोज की थी। उन्होंने अनुमान लगाया कि इसकी लागत लगभग 10 मिलियन डॉलर (लगभग 44 करोड़ रुपए) थी। इसमें 800 टन कंक्रीट का इस्तेमाल किया गया था। 2006 में वहाँ सत्ता में आने के बाद हमास ने सुरंगों का जाल बिछा दिया।

वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, इन सुरंगों के बारे में इजरायल सहित किसी भी देश को सटीक जानकारी नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि गाजा के नीचे एक पूरा शहर बसा हुआ है। यहाँ बनाई गईं सुरंगों के आकार अलग-अलग हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इनमें अधिकांश लगभग 6.5 फीट ऊँची और 3 फीट चौड़ी है।

संकरे रास्ते बड़े कमरों की ओर खुलते हैं, जिनमें हथियार, राशन रखने या आतंकियों के रहने की व्यवस्था है। यहाँ मोटरसाइकिलें और गाड़ियाँ भी चलती हैं। यहाँ ज्यादातर सुरंगें 150 फीट गहरी हैं, जो 14 तला बिल्डिंग के बराबर हैं। इनमें बिजली और बाथरूम आदि की भी व्यवस्था की गई है।

सुरंगों के जाल को खत्म करने के लिए स्पॉन्ज बम जरूरी

इन सुरंगों में इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने अपने सैन्य ठिकाने बना रखे हैं। इनमें हथियारों के जखीरा से लेकर आतंकियों के रहने की हर एक सुख सुविधा मौजूद है। इन सुरंगों में तेल और अनाज का विशाल भंडार भी है, ताकि महीनों तक यदि आतंकियों को छिपने की जरूरत पड़े तो उन्हें किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो। इतना ही नहीं, कहा तो यहाँ तक जाता है कि इन सुरंगों में मस्जिदें और मदरसे तक बने हुए हैं।

दरअसल, साल 1987 में हमास का गाजा में उदय हुआ। इसके बाद उसने साल 1990 से इजरायल के खिलाफ लड़ाई के लिए रणनीति बनानी शुरू कर दी। इसके लिए उसने इन सुरंगों की खुदाई कर दी। वेस्ट बैंक और गाजा में इन सुरंगों का जाल है। साल 2005 में इजरायल ने गाजा से अपने सैनिक हटा थे। इसके बाद 2006 में हमास ने चुनाव के जरिए गाजा की सत्ता पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सुरंगों का निर्माण हमास के लिए और आसान हो गया।

इन सुरंगों का पता लगाना इजरायल के लिए भी एक चुनौती का काम है। इसलिए इजरायल गाजा में जमीनी कार्रवाई से पहले फूँक-फूँक कर कदम रख रहा है। इजरायल ने इसका तोड़ स्पॉन्ज बम के रूप में निकाला है। विशेषज्ञों का कहना है कि स्पॉन्ज बम इन सुरंगों को पूरी तरह बेकार कर देंगे। फिर हमास के आतंकियों के पास बचने का कोई ठिकाना नहीं रहेगा।

कैसे काम करता है स्पॉन्ज बम

दरअसल, स्पॉन्ज बम एक विशेष प्रकार का उपकरण है, जो एक सुरक्षित प्लास्टिक कंटेनर में बंद होता है। इसके दो हिस्से होते हैं, जो दो अलग-अलग तरह के रसायन से भरे होते हैं। ये दोनों हिस्से एक धातु के जरिए जुड़े होते हैं। जब इस बम को सक्रिय किया जाता है तो इसके दोनों रसायन आपस में मिल जाते हैं और उनसे एक खास तरह का फोम बनकर निकलता है।

ये फोम आसपास बहुत तेजी से फैलता है और फिर ठोस हो जाता है। इससे सुरंग का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। इससे अंदर हवा का प्रवाह भी रूक जाता है। रास्ता बंद हो जाने के बाद सुरंग बेकार हो जाती है। इससे हमास के आतंकी सुरंग में घुट-घुटकर दम तोड़ देंगे। अगर दुश्मन अंदर से बंदूक या बम से भी इस फोम को तोड़ने या काटने की कोशिश करेगा, तब भी वह कामयाब नहीं हो पाएगा।

कहा जाता है कि इजरायल ने इस बम का प्रयोग साल 2021 में भी किया था। तब इजरायली सैनिक गाजा की सीमा के करीब त्ज़े’एलिम सैन्य अड्डे पर एक नकली सुरंग बनाकर इसका परीक्षण किया था। यह भी कहा जा रहा है कि इजरायल एक रासायनिक ग्रेनेड का भी परीक्षण कर रहा है, जो सुरंग के प्रवेश द्वार को सील कर देगा।

फिलिस्तीनी मर रहे, इसलिए इजरायल युद्ध रोके… लेकिन हमास आतंकियों ने इजरायल पर हमला नहीं किया: UN में वोटिंग से इसलिए दूर रहा भारत

भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उस प्रस्ताव की वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया, जो इजरायल और हमास के बीच चल रहे संघर्ष को रोकने की अपील पर था। इजरायरल पर हमला करने वाले इस्लामी आतंकी संगठन हमास का जिक्र तक इस प्रस्ताव में नहीं था, इसलिए भारत ने खुद को वोटिंग से दूर रखा। शुक्रवार (27 अक्टूबर, 2023) को यूएनजीए में जॉर्डन के पेश प्रस्ताव में गाजा पट्टी में बेरोकटोक मानवीय मदद पहुँचाने को लेकर भी अपील की गई।

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 193 सदस्य देश 10वें इमरजेंसी स्पेशल सेशन के लिए बुलाए गए थे। इस सेशन में जॉर्डन के पेश किए इस मसौदा प्रस्ताव पर वोटिंग की गई। ये प्रस्ताव बांग्लादेश, मालदीव, पाकिस्तान, रूस और दक्षिण अफ्रीका सहित 40 से अधिक देशों ने सह-प्रायोजित किया था।

फोटो साभार: एक्स हैंडल @UN_PGA

इजरायल और हमास के संघर्ष विराम को लेकर पेश किए गए इस प्रस्ताव का शीर्षक ‘नागरिकों की सुरक्षा और कानूनी और मानवीय दायित्वों को कायम रखना’ था। इसके पक्ष में 120 देशों ने वोट किया। वहीं 14 ने इसके खिलाफ वोट दिया तो 45 देशों ने वोटिंग में भाग ही नहीं लिया।

गौरतलब है कि इस प्रस्ताव पर वोटिंग से भारत सहित इटली, यूके, कनाडा, यूक्रेन, जर्मनी और जापान दूर रहे। वहीं अमेरिका ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। हालाँकि भारत के पड़ोसी देश नेपाल और पाकिस्तान समर्थन में उतरे और इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया।

इस प्रस्ताव से दूरी बनाने वाले देशों को जार्डन के तैयार किए गए प्रस्ताव में आतंकवादी समूह हमास का कोई जिक्र न होने से खासा रोष दिखा। अमेरिका ने बुराई का जिक्र न करने की इस चूक पर नाराजगी जाहिर की।

गौरतलब है कि इस प्रस्ताव पर आम सभा में वोटिंग से पहले इस मामले में कनाडा के प्रस्तावित और अमेरिका के सह-प्रायोजित एक संशोधन पर विचार किया गया। कनाडा के प्रस्तावित संशोधन में एक पैराग्राफ डालने के लिए कहा गया।

इस पैराग्राफ में कहा गया कि महासभा 7 अक्टूबर 2023 को इज़रायल में शुरू हुए हमास के हमले को आतंकवादी हमला मानती है, इसकी निंदा करती है। इन आतंकियों द्वारा जो बंधक बनाए गए हैं, उनकी सुरक्षा की माँग करती है। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत बंधकों की भलाई और उनसे मानवीय व्यवहार के साथ-साथ उनकी तत्काल और बगैर शर्त रिहाई की अपील करती है।

भारत और अन्य 87 देशों ने इस संशोधन के पक्ष में मतदान किया। वहीं 55 सदस्य देशों ने इसके खिलाफ मतदान किया और 23 गैरहाजिर रहे। लेकिन मौजूद रहे और वोट करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत न मिलने की वजह से इस संशोधन को अपनाया नहीं जा सका। हालाँकि यूएनजीए अध्यक्ष फ्रांसिस ने कहा, “इस वक्त सबसे तात्कालिक कदम स्पष्ट है कि हिंसा बंद होनी चाहिए और आगे रक्तपात को रोका जाना चाहिए। मैं सभी बंधकों की शीघ्र और बिना शर्त रिहाई, बिना शर्त मानवीय युद्धविराम और मानवीय मदद और राहत के लिए तत्काल, बगैर शर्त गलियारे खोलने का आह्वान करता हूँ।”

भारत ने जॉर्डन के पेश किए इस प्रस्ताव पर दूरी ही नहीं बनाई बल्कि आतंकवाद पर हमास को आड़े हाथों लिया। यूएन में भारत की उप दूत योजना पटेल ने इजरायल पर हमास के आतंकी हमले पर दुख जताते हुए कहा कि आतंकवाद का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने इजरायली बंधकों की तुंरत रिहाई की अपील की।

दरअसल 7 अक्टूबर को आतंकवादी समूह हमास के इजरायल पर किए खौफनाक हमलों में 1400 से अधिक लोगों के मारे जाने के बाद इज़रायल ने हमास के खिलाफ बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू की है। इसे लेकर ही हमास और इस्लामी आतंकियों के हिमायती यूएनजीए में प्रस्ताव लेकर पहुँचे थे।

इजरायल में हमास के नरसंहार को शशि थरूर ने कह दिया ‘आतंकी कृत्य’, नाराज इस्लामी संगठन ने कार्यक्रम से हटाया, फिलिस्तीन के समर्थन में है सभा

भारत के कुछ मुस्लिम संस्थान फिलिस्तीन के हमास को इस्लामी आतंकी संगठन मानने से साफ इनकार कर रहे हैं। ना ही हमास द्वारा इजरायल में महिलाओं एवं बच्चों की बर्बरतापूर्ण हत्या को वे नरसंहार मानते हैं। इजरायल में हमास ने जो किया, उसे कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने टेरर ऐक्ट कह दिया तो इस्लामी संगठनों ने उन्हें फिलिस्तीन के समर्थन में बुलाई गई सभा से बाहर कर दिया।

दरअसल, केरल में मुस्लिम जमातों के लिए काम करने वाले संगठन ‘महाल एम्पावरमेंट मिशन’ (MEM) ने फिलिस्तीन में इजरायल की दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ 30 अक्टूबर 2023 को एक कार्यक्रम का आयोजन किया है। यह कार्यक्रम फिलिस्तीन के समर्थन में था। इसमें केरल के तिरुवनंतपुरम से कॉन्ग्रेस के सांसद शशि थरूर को भी आमंत्रित किया गया था।

इसी बीच शशि थरूर ने कह दिया कि इजरायल में घुसकर हमास ने जो किया, वह आतंकी कृत्य था। उन्होंने इसके लिए हमास की निंदा थी। थरूर ने यह बयान फिलिस्तीन के समर्थन में एक अन्य संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ही दिया था। इसके बाद MEM ने उनको दिए गए आमंत्रण को रद्द कर दिया है। बता दें कि MEM केरल में मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख निकाय है, जिसमें सिटी कॉरपोरेशन में 32 जमातें शामिल हैं।

MEM के अध्यक्ष शाहजहाँ श्रीकार्यम ने कहा, “जब थरूर ने ऐसी टिप्पणी की तो हमारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। तमाम विवादों और विरोध के बावजूद थरूर ने अपना बयान वापस नहीं लिया या सुधार नहीं किया है। इसके बजाय, उन्होंने अपने बयान को सही ठहराया। हमने थरूर को सूचित कर दिया है कि हमने उन्हें कार्यक्रम से हटाने का फैसला किया है।” इस बीच, थरूर का कहना है कि उनके बयान के सिर्फ एक वाक्य को प्रसारित किया जा रहा है।

केरल में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चे (UDF) के प्रमुख घटक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) को फिलिस्तीन एकजुटता रैली का आयोजन किया था। इसमें भी शशि थरूर को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाया गया था। यहीं पर बोलते हुए शशि थरूर ने हमास की कार्रवाई को आतंकी कृत्य बता दिया।

इसमें शशि थरूर ने कहा था, “7 अक्टूबर को आतंकवादियों ने इजरायल पर हमला किया। इस दौरान 1,400 लोगों को मार डाला और 200 लोगों को बंधक बना लिया। इसके जवाब में इजरायल अब तक 6,000 लोगों को मार चुका है। गाजा को भोजन, पानी और ईंधन की आपूर्ति बंद कर दी है। अस्पतालों पर बमबारी की जा रही है। हर दिन निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। जो हो रहा है वह युद्ध कानूनों और जिनेवा संधि का उल्लंघन है।”

उन्होंने आगे कहा, “एक बात मैं कहना चाहता हूँ कि जब उन आतंकवादियों (हमास) ने निहत्थे लोगों का नरसंहार किया था तो दुनिया ने इसकी निंदा की थी। अब, हर कोई इजरायल की बमबारी की निंदा कर रहा है। दोनों तरफ से आतंकी हमले हुए। ‘आँख के लिए आँख’ की कार्रवाई पूरी दुनिया को अंधा बना देगी। अब हम जो देख रहे हैं वह एक जघन्य प्रतिक्रिया है।”

IUML की रैली में थरूर ने जो बात कही उसको लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) उन पर हमलावर है। माकपा के नेता और पूर्व विधायक एम स्वराज ने आरोप लगाया कि शशि थरूर की कुछ बातें इजरायल के समर्थन में थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस कार्यसमिति के सदस्य थरूर यह स्वीकार नहीं कर पाए कि इजरायल एक ‘आतंकवादी’ राष्ट्र है।

हालाँकि, बाद में शशि थरूर ने कहा कि वह हमेशा से फिलिस्तीन के लोगों के साथ हैं। इस संबंध में उनका एक वीडियो भी सामने आया है। आयोजक IUML के नेता पीके कुन्हालीकुट्टी ने शशि थरूर का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि इस रैली को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। थरूर ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलिस्तीनी लोगों के साथ हैं।

’21 रुपए का लिफाफा’ पर फँसी प्रियंका गाँधी, मंदिर के पुजारी बोले- PM मोदी की छवि खराब करने के लिए फैलाई अफवाह: चुनाव आयोग ने भी माँगा जवाब

राजस्थान के गुज्जर समाज के आराध्य स्थल मालासेरी डूंगरी मंदिर (भीलवाड़ा) में पीएम मोदी से जुड़े के मामले को कॉन्ग्रेस के नेता विवादित बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसकी सच्चाई की हवा पहले ही निकल चुकी है। इसके बावजूद प्रियंका गाँधी वाड्रा ने पिछले सप्ताह दौसा की एक रैली में उन बातों को दोहराया था। अब मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा है कि प्रियंका गाँधी जो कुछ भी बोल रही हैं, वो मनगढ़ंत बात है।

दरअसल, प्रियंका गाँधी ने दौसा की रैली में कहा था कि पीएम मोदी जब इस मंदिर में गए थे तो उन्होंने लिफाफे में सिर्फ 21 रुपए डालकर चढ़ाए थे। अब मुख्य पुजारी ने साफ कर दिया है कि प्रियंका गाँधी की बातों में कोई सच्चाई नहीं, वो सिर्फ मनगढ़ंत बात कर रही थीं। अब इस मामले में चुनाव आयोग ने संज्ञान लिया है और प्रियंका गाँधी वाड्रा को नोटिस जारी किया है।

मुख्य पुजारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताई सच्चाई

मालासेरी डूंगरी मंदिर के मुख्य पुजारी हेमराज पोसवाल ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। उन्होंने कहा कि मंदिर समिति और उन्होंने कभी ऐसा बयान नहीं दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दान-पात्र में कोई लिफाफा डाला था। न ही दान-पात्र खोलते समय ये बताया कि लिफाफा प्रधानमंत्री का है।

उन्होंने कहा कि 21 रुपए वाली बात पूरी तरह से अफवाह है। उन्होंने कहा कि प्रियंका गाँधी ने दौसा और झुंझुनूं में काल्पनिक कहानी बनाकर लिफाफे का जिक्र किया था। मंदिर के पुजारी की पुष्टि के बाद साफ हो गया कि राजनीतिक फायदे के लिए प्रियंका गाँधी झूठ बोल रही थीं।

चुनाव आयोग ने जारी किया नोटिस

इस मामले में चुनाव आयोग ने राजस्थान में चुनाव प्रचार के दौरान आदर्श आचार संहिता के दिशा-निर्देशों का कथित तौर पर उल्लंघन करने के लिए प्रियंका गाँधी वाड्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। भाजपा ने गुरुवार (26 अक्टूबर) को चुनाव आयोग को एक शिकायत सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने झूठे और असत्यापित आरोप लगाए हैं।

बता दें कि दौसा में एक सप्ताह पहले प्रियंका गाँधी ने रैली में कहा था, “मैंने टीवी पर देखा, पता नहीं सच है कि नहीं, देवनारायण जी के मंदिर में कुछ समय पहले प्रधानमंत्री गए थे और एक लिफाफा डाल आए। 6 महीने बाद प्रधानमंत्री जी की ओर से दिया लिफाफा खोला गया। जनता सोच रही थी कि भगवान जाने क्या होगा इस लिफाफे में। देश के इतने बड़े नेता आए थे, वह लिफाफा डालकर गए थे।”

स्थानीय नेताओं ने फैलाई अफवाह

इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पुजारी हेमराज ने कहा कि हर साल की तरह इस साल भी भादवीं छठ के अवसर पर दान-पात्र खोला गया था। जो समिति और सर्वसमाज के सामने खोला गया। इसमें कैश और लिफाफे मिले। इस दौरान उनकी और मंदिर समिति के लोगों से रंजिश रखने वाले आसींद-भीलवाडा के स्थानीय नेताओं ने अफवाह फैलाई।

पुजारी ने आगे कहा कि उन लोगों ने अफवाह फैलाई कि प्रधानमंत्री ने दान पेटी में लिफाफा डाला था, जिसमें 21 रुपए निकले थे। पोसवाल ने कहा कि मंदिर समिति या उन्होंने कभी ऐसा बयान दिया नहीं। उन्होंने कहा, “मैं साफ कर रहा हूँ कि प्रधानमंत्री मोदी ने न कोई लिफाफा दान-पात्र में डाला, न ही मैंने बताया कि यह प्रधानमंत्री का लिफाफा है।”

ऑपइंडिया ने बताई थी सच्चाई

इस मामले में ऑपइंडिया ने सच्चाई पहले ही सामने रख दी थी। ऑपइंडिया ने प्रधानमंत्री मोदी का वीडियो डालते हुए बताया था कि पीएम मोदी ने दान पेटी में किसी लिफाफे की जगह मुड़े हुए नोट डाले थे। वीडियो को ध्यान से देखें तो उनके हाथ में कोई लिफाफा नहीं था।

एप्पल आईफोन बनाने वाली पहली भारतीय कंपनी होगी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, ₹1040 करोड़ में कर्नाटक में विस्ट्रॉन प्लांट का किया अधिग्रहण

जल्द ही देश-दुनिया को ‘मेड इन इंडिया’ एप्पल आईफोन (Apple iPhone) मिलेगा। दरअसल टाटा ग्रुप (Tata Group) भारत में आईफोन को असेंबल करेगा। आईफोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए टाटा ग्रुप के साथ विस्ट्रॉन (Wistron) फैक्ट्री के अधिग्रहण की डील पक्की हो गई है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेक्नोलॉजी मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को सोशल मीडिया पर ये जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि टाटा ग्रुप ढाई साल के अंदर घरेलू और ग्लोबल मार्केट के लिए भारत में एप्पल आईफोन (iPhone 15) बनाना चालू कर देगा।

गौरतलब है शुक्रवार को ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली के प्रगति मैदान के भारत मंडपम में 7वें भारतीय मोबाइल कॉन्ग्रेस (India Mobile Congress) का उद्घाटन भी किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा, “भारत में 5G का सबसे तेज़ रोलआउट हुआ था। हम इस कामयाबी के बाद भी नहीं रुके। हमने 5G को भारत के हर नागरिक तक पहुँचाने का काम किया। हम ‘Roll-out stage’ से ‘Reach-out stage’ तक पहुँचे।”

केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर ने एक्स हैंडल की पोस्ट में लिखा, “पीएम नरेंद्र मोदी जी की दूरदर्शी पीएलआई योजना (Production Linked Incentive Scheme) ने पहले ही भारत को स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के लिए एक भरोसेमंद और अहम केंद्र बनने के लिए प्रेरित किया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “अब महज ढाई साल के अंदर टाटा कंपनी भारत से घरेलू और वैश्विक बाजारों के लिए आईफोन उपलब्ध कराना शुरू करेगी। विस्ट्रॉन का संचालन संभालने के लिए टाटा टीम को बधाई। धन्यवाद विस्ट्रोन आपके योगदान के लिए और भारतीय कंपनियों के नेतृत्व में भारत से ग्लोबल सप्लाई चेन बनाने में एप्पल का यह बहुत अच्छा कदम है।”

केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी मंत्रालय वैश्विक भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के समर्थन में खड़ा है। मंत्रालय बदले में उन वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक ब्रांडों का समर्थन करेगा, जो भारत को अपना विश्वसनीय विनिर्माण और प्रतिभा भागीदार बनाना चाहते हैं और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स शक्ति बनाने के प्रधानमंत्री के लक्ष्य को साकार करना चाहते हैं।

विस्ट्रॉन फैक्ट्री कर्नाटक के दक्षिण-पूर्व में है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2024 तक विस्ट्रॉन यहाँ लगभग 1.8 बिलियन डॉलर के एप्पल आईफोन बनाएगी। इस फैक्ट्री में टाटा ग्रुप ग्लोबल मार्केट के लिए iPhone 15 बनाएगा।

विस्ट्रॉन फैक्ट्री की कीमत करीब 600 मिलियन डॉलर की है। इस डील को लेकर लगभग एक साल से बात चल रही थी। ये फैक्ट्री आईफोन 14 मॉडल की मैन्युफैक्चरिंग के लिए मशहूर है। इस फैक्ट्री में करीब 10,000 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले गूगल ने भी एप्पल (Apple) और सैमसंग (Samsung) की राह पर चलते हुए अपने लेटेस्ट स्मार्टफोन बनाने के लिए भारत को चुना। गूगल (Google) के डिवाइसेज और सर्विस के सीनियर वाइस प्रेजिडेंट रिक ओस्टरलोह ने गुरुवार (19 अक्टूबर, 2023) को एक अहम ऐलान किया कि वो कंपनी का Pixel 8 स्मार्टफोन भारत में बनाएँगे।

चित्रकूट के तुलसी पीठ से बोले PM मोदी- संस्कृत हमारी प्रगति और पहचान की भाषा, स्वामी रामभद्राचार्य जी ने दिया आशीर्वाद

चित्रकूट प्रवास पर पीएम नरेन्‍द्र मोदी ने श्री तुलसी पीठ पहुँचे और तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज से मुलाकात की। उन्होंने जगद्गुरु रामानंदाचार्य का भी आशीर्वाद लिया। पीएम मोदी ने कहा कि चित्रकूट के बारे में कहा गया है- ‘कामद भे गिरि राम प्रसादा। अवलोकत अपहरत विषादा’… अर्थात चित्रकूट के पर्वत, कामदगिरि, भगवान राम के आशीर्वाद से सारे कष्टों और परेशानियों को हरने वाले हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि चित्रकूट की ये महिमा यहाँ के संतों और ऋषियों के माध्यम से ही अक्षुण्ण बनी हुई है। पीएम ने आगे कहा, “मुझे आज कई राम मंदिरों में पूजा करने का सौभाग्य मिला। मुझे जगद्गुरु रामानंदाचार्य का भी आशीर्वाद मिला। चित्रकूट ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है।”

संस्कृत हमारी प्रगति और पहचान की भाषा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संस्कृत न केवल परंपराओं की भाषा है, बल्कि यह देश की प्रगति और पहचान की भी भाषा है। तुलसी पीठ के काँच मंदिर में संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, “संस्कृत कई भाषाओं की जननी है। संस्कृत हमारी प्रगति और पहचान की भाषा है।”

उन्होंने कहा, “दूसरे देश के लोग मातृभाषा जाने तो ये लोग प्रशंसा करेंगे, लेकिन संस्कृत भाषा जानने को ये पिछड़ेपन की निशानी मानते हैं। इस मानसिकता के लोग पिछले एक हजार साल से हारते आ रहे हैं और आगे भी कामयाब नहीं होंगे।”

प्रधानमंत्री मोदी ने तीन पुस्तकों का किया विमोचन

चित्रकूट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन पुस्तकों का विमोचन भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने अष्टाध्यायी भाष्य, रामानंदाचार्य चरितम और भगवान श्रीकृष्ण की राष्ट्रलीला का विमोचन किया। इनमें से दो पुस्तकें संस्कृत भाषा में हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि अष्टाध्यायी भारत की भाषा विज्ञान, भारत की बौद्धिकता और शोध संस्कृति का हजारों साल पुराना ग्रंथ है। उन्होंने अष्टाध्यायी के महत्व पर प्रकाश डाला, क्योंकि यह भाषा के व्याकरण और विज्ञान को सारगर्भित रूप में प्रस्तुत करती है।

पीएम मोदी ने काँच मंदिर में की पूजा-अर्चना

प्रधानमंत्री मोदी ने चित्रकूट के काँच मंदिर में पूजा-अर्चना की। काँच मंदिर में राघव सत्संग भवन के साथ-साथ चित्रकूट बिहारी और बिहारिणी (भगवान राम और देवी सीता) का मंदिर भी शामिल है। यह तीन शिखरों वाला मंदिर है। गर्भगृह में भगवान राम, सीता और लक्ष्मण की सुंदर मूर्तियाँ स्थापित हैं, जिनकी सेवा पुजारी द्वारा की जाती है।