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अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन करने आएँगे दानिश कनेरिया, कहा – हिंदू पैदा हुआ, हिंदू ही मरूँगा

भगवान श्री राम का बुलावा आएगा तो दानिश कनेरिया अयोध्या के राम मंदिर में प्रभु के दर्शन करने आएँगे… पूरे परिवार के साथ! पाकिस्तान में रह कर, इस्लाम कबूलने का प्रेशर झेल कर, क्रिकेटिंग करियर तबाह कर दिए जाने के बाद भी दानिश कनेरिया हिंदू बने रहे, तो उसके पीछे प्रभु श्री राम में उनकी अटूट आस्था ही है। टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में कनेरिया ने दिल खोल कर बातें कीं – क्रिकेट पर, हिंदू होने पर, पाकिस्तान में भेदभाव पर, भारत-पाकिस्तान रिश्ते पर।

टाइम्स नाउ को दिए इंटरव्यू में दानिश कनेरिया ने राम मंदिर को लेकर अपनी आस्था के बारे में बताया। उनके अनुसार वो बचपन से भगवान राम और बजरंगबली के भक्त रहे हैं। राम मंदिर निर्माण और 22 जनवरी 2024 को उसके प्रांगण में प्रभु श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भावुक होते हुए कनेरिया ने कहा कि अगर भगवान ने मौका दिया तो वो अपने पूरे परिवार के साथ दर्शन करने आएँगे।

हिंदू पैदा हुआ, हिंदू ही मरूँगा

इंटरव्यू में दानिश कनेरिया ने बताया कि उन्हें हिंदू होने पर गर्व है। वो पैदा हिंदू धर्म में हुए और मरेंगे भी हिंदू के ही रूप में। भगवान राम के जीवन से सीख लेते हुए कनेरिया ने कहा कि हर परिस्थिति में संघर्ष करना चाहिए, कभी हार नहीं माननी चाहिए। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने सीख दी है कि बुरी से बुरी परिस्थितियाँ भी बदल जाती हैं अगर आपका विश्वास पक्का है।

‘जय श्रीराम’ नारे को लेकर कट्टर मुस्लिम और वामपंथी-कॉन्ग्रेसी जैसा माहौल बना रहे हैं, उनको जवाब देते हुए कनेरिया ने कहा कि यह एक वेलकम या स्वागत करने जैसा है। इस पर जो बवाल कर रहे हैं, कनेरिया की नजर में वो दिमागी संतुलन खो बैठे हैं। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के स्टेडियमों के आप-पास बनी मस्जिदों और उसमें से आने वाली अजान/नमाज की आवाज पर कभी किसी ने आपत्ति नहीं जताई, पाकिस्तान गए सभी खिलाड़ियों ने इसको इज्जत दी। इस पर आगे उन्होंने कहा:

“आप भारतभूमि में हैं… तो क्या होगा, जय श्रीराम ही होगा!”

आरफा को पाकिस्तान में बुलावा

पत्रकारिता के नाम पर प्रोपेगेंडा करने वाली आरफा खानम शेरवानी को दानिश कनेरिया ने पाकिस्तान आ जाने का बुलावा दिया था। इस पर टाइम्स नाउ के एंकर ने जब सवाल किया तो कनेरिया ने बहुत ही स्पष्ट जवाब दिया। कनेरिया के अनुसार किसी भारतीय को अगर भारत में रहने पर शर्म महसूस होती है तो फिर वहाँ रहना ही क्यों? छोड़ कर कहीं और रहने चले जाइए।

बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने आरफा खानम शेरवानी के समर्थन में ट्वीट किया था। दानिश कनेरिया को आड़े हाथों लिया था। इस सवाल के जवाब में कनेरिया ने कहा कि वो हिंदू धर्म को लेकर बात कर रहे थे, सनातन पर हो रहे अटैक को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे थे। ऐसे में गौरव भाटिया या किसी को भी सोच-समझ कर बोलना चाहिए, पूरी बात सुननी-पढ़नी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जनता सब कुछ जानती है, और उसी जनता ने गौरव भाटिया को जवाब भी दे दिया।

पाकिस्तान, जय श्रीराम, दर्शक और खिलाड़ी

भारत-पाकिस्तान के विश्व कप मुकाबले में अहमदाबाद के क्रिकेट स्टेडियम में ‘जय श्री राम’ का नारा लगा था। इसको लेकर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी में शिकायत दर्ज की। इस सवाल पर कनेरिया ने कहा कि यह नॉर्मल चीज है। उन्होंने कहा कि वो हिंदू हैं लेकिन खेलते पाकिस्तान की ओर से थे। ऐसे में बाउंड्री पर खड़ा दर्शक आपको कुछ-न-कुछ कहेगा ही, इसे प्रोफेशनल खिलाड़ी को नॉर्मल ढंग से लेना चाहिए न कि बात का बतंगड़ बनाना चाहिए।

आपको बता दें कि ‘जय श्री राम’ नारे पर भारत में रहने वाले भी वामपंथी भी पाकिस्तान प्रेम में रोने लगे थे। जिनके पिता खुद इंटरनेशनल क्रिकेटर रह चुके थे, उनके बेटे राजदीप सरदेसाई ने भी इस पर बवाल काटा था। लेकिन राजदीप को करारा जवाब मिला था एक पूर्व खिलाड़ी से ही। पूर्व भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ने कहा था कि यह सब नॉर्मल है क्योंकि उन्हें भी पाकिस्तान में गालियाँ मिलीं थी। उनके धर्म से लेकर देश और संस्कृति तक को गाली दी गई थी।

हिंदू होने की सजा मिली

दानिश कनेरिया ने बताया कि एक हिंदू होने के कारण पाकिस्तान में उनका करियर बर्बाद कर दिया गया। क्रिकेटिंग करियर के बाद भी उनको इतना परेशान किया गया कि एक जॉब तक उनको करने नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि इतनी विषम परिस्थिति में लेकिन वो भगवान श्री राम के सहारे रहे।

पाकिस्तान में हिंदू या अन्य अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव को लेकर उन्होंने कहा कि अगर वहाँ भेदभाव नहीं है तो कनेरिया के अवाले कोई अन्य खिलाड़ी (जो गैर-मुस्लिम हो) क्यों नहीं इंटरनेशनल स्टेज तक आ पाया?

आपको बता दें कि शाहिद अफरीदी को लेकर ‘आजतक’ के इंटरव्यू में कनेरिया ने कहा था कि वो हमेशा इन्हें इस्लाम कबूल करने के लिए कहता था, सुबह की नमाज पढ़ने के लिए उठा देता था।

इससे पहले 24 अक्टूबर 2023 को दानिश कनेरिया ने एक ट्वीट किया था। इसमें उन्होंने लिखा कि मंदिर (अयोध्या का राम मंदिर) बन जाए… फिर दर्शन करने आएँगे। यह ट्वीट एक सवाल के जवाब में लिखा गया था। इस ट्वीट के रिप्लाई में कनेरिया को कट्टर मुस्लिम और वामपंथी टाइप के लोग गालियाँ और धमकी तक दे रहे हैं।

कॉन्ग्रेस कार्यालय में लालू यादव ने पहना सोने का मुकुट, RJD सुप्रीमो ने कबूला जेल से सोनिया गाँधी को कॉल कर करते थे पैरवी

नाम श्रीकृष्ण सिंह का। मंच कॉन्ग्रेस का। स्तुतिगान बिहार के सजायाफ्ता पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का। बिहार कॉन्ग्रेस के पटना स्थित प्रदेश कार्यालय सदाकत आश्रम में 27 अक्टूबर 2023 को हुए कार्यक्रम की खबर इन तीन लाइनों में भी सिमट सकती थी, यदि इस स्क्रिप्ट में सोने का मुकुट और जेल में फोन का इस्तेमाल करने का कबूलनामा नहीं आता।

सदाकत आश्रम में कार्यक्रम का आयोजन कॉन्ग्रेस ने बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री ‘बिहार केसरी’ श्रीकृष्ण सिंह की 136वीं जयंती पर किया था। मुख्य अति​थि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू यादव थे। जगजाहिर है कि वर्षों से कॉन्ग्रेस बिहार में लालू यादव की पिछलग्गू बनी हुई है। उसके खुद के पास राज्य में ऐसे नेता भी नहीं हैं जिनके नाम से वह अपने पार्टी कार्यालय में भी कार्यकर्ताओं का जुटान कर ले।

इसलिए लालू जरूरी थे। कॉन्ग्रेस ने भी इस जरूरत का मान रखा और जमकर उस नेता का स्तुतिगान किया जो स्वास्थ्य के आधार पर चिरौरी कर जेल से बाहर आया है। उसे सोने का मुकुट पहनाया। सोने का मुकुट बेगूसराय के बड़े कारोबारी रतन सिंह ने पहनाया। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि यह मुकुट पूरी तरह से सोने का है। इसमें चाँदी की मिलावट नहीं है। हालाँकि रतन सिंह ने मुकुट का वजन बताने से इनकार कर दिया। यह भी कहा कि इसके पीछे उनकी कोई राजनीतिक मंशा नहीं है। पर जानकार बताते हैं कि वे राजद से टिकट की ख्वाहिश रखते हैं।

दिलचस्प यह भी रहा कि खुद को गरीब-गुरबों का नेता बताने वाले लालू ने सोने के मुकुट को पहनने में संकोच भी नहीं किया। रतन सिंह का यह भी कहना है कि उनके लिए कॉन्ग्रेस और राजद में अंतर नहीं है। इससे पता चलता है कि इस कारोबारी को यह बखूबी पता है कि भले राजनीति कॉन्ग्रेस से करनी हो, होगा वही जो लालू यादव चाहेंगे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए लालू यादव ने कॉन्ग्रेसियों को अपनी इस ताकत के बारे में बकायदा बताया भी। राजद सुप्रीमो ने बताया कि जेल में रहकर भी वे सोनिया गाँधी को कॉल करते थे। कॉन्ग्रेस नेताओं की तकदीर लिखते थे।

लालू यादव ने कहा, “अखिलेश (अखिलेश प्रसाद सिंह) माँगकर नहीं बने हैं एमपी। इनको जबर्दस्ती हम बनाए हैं। हम राँची जेल में थे और ये मिलने आए थे। दूसरे के लिए आए थे कि इनको एमपी बना ​दीजिए कॉन्ग्रेस पार्टी से। हम कहे तुम ही बन जाओ। माननीय सोनिया गाँधी जी को वहीं से हमने टेलीफोन किया। कॉन्ग्रेस के शीर्षस्थ नेताओं को फोन किया। अहमद भाई (अहमद पटेल) को फोन किया कि इनको डिक्लियर करिए, हम इनको बनाते हैं। वही राज्यसभा के एमपी के रूप में ये अभी भी कंटीन्यू कर रहे हैं।” नीचे वीडियो में आप 13 मिनट से यह बात सुन सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि अखिलेश प्रसाद सिंह फिलहाल बिहार कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष हैं। लालू यादव जब मंच से कॉन्ग्रेसियों को राज्य के उनके सबसे बड़े नेता की ‘हैसियत’ बता रहे थे, तब ताली भी बज रही थी। लालू जिंदाबाद के नारे भी लग रहे थे। वैसे लालू के इस बयान के बाद से बीजेपी हमलावर है। कहा कि जेल से कॉल कर उन्होंने नियम तोड़े हैं और सुप्रीम कोर्ट को इसका संज्ञान लेना चाहिए।

एक दरगाह ने जानकारी देने से किया इनकार, अब उत्तराखंड के हर मस्जिद-दरगाह-मदरसे को देना होगा ब्यौरा: RTI के दायरे में वक्फ बोर्ड

उत्तराखंड में अब मस्जिद, दरगाह, मदरसों को भी अपनी आय और संपत्तियों की जानकारी देनी पड़ेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली बीजेपी शासित राज्य में वक्फ बोर्ड भी अब सूचना के अधिकार कानून (RTI) के दायरे में आ गया है। यह फैसला वक्फ बोर्ड के स्वामित्व वाली संपत्तियों और उनसे संबंधित फंडिंग के बारे में कम जानकारी होने की वजह से किया गया है।

दरअसल जुलाई 2022 में वकील दानिश सिद्दीकी ने उत्तराखंड वक्फ बोर्ड से आरटीआई के तहत कलियर दरगाह के बारे में सूचना माँगी थी। उन्हें यह कहकर सूचना देने से मना कर दिया गया कि पिरान कलियर में कोई लोक सूचना प्राधिकारी नहीं है। जब उन्हें प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी से भी सूचना नहीं मिली तो वे राज्य सूचना आयोग पहुँच गए। सिद्दीकी की अपील पर राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने वक्फ बोर्ड के अधिकारियों से पूछताछ की। उनसे वक्फ अधिनियम और वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण को लेकर साफ और सही जानकारी देने को कहा गया।

इसके बाद यह बात सामने आई कि उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अधीन होने के बावजूद कलियर शरीफ दरगाह सहित अन्य वक्फ संपत्तियों को सूचना के अधिकार से बाहर रखा गया था। केवल बोर्ड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी ही वक्फ संपत्ति के दस्तावेजों आदि की जाँच-परख कर या करवा सकते हैं। इसके बाद सूचना आयुक्त ने इस मामले में पूर्व और मौजूदा मुख्य कार्यपालक अधिकारी से भी जवाब-तलब किया। इसके तहत पिरान कलियर दरगाह के प्रबंधन को आरटीआई एक्ट के दायरे में लाने के आदेश दिए गए। साथ ही यहाँ लोक सूचना अधिकारी को भी तैनात करने को कहा गया।

इस केस का निपटारा करते हुए राज्य सूचना आयुक्त योगेश भट्ट ने अन्य सभी वक्फ बोर्ड और वक्फ संपत्तियों को भी आरटीआई एक्ट के दायरे में लाने का आदेश दिया। छह महीने के अंदर आरटीआई एक्ट की धारा-4 के तहत मैनुअल बनाने का निर्देश दिया। आयोग के कड़े रवैये के बाद उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने वक्फ संपत्तियों को आरटीआइ एक्ट में दायरे में लाने के आदेश दिया है। राज्य में लगभग 2200 वक्फ संपत्तियाँ वक्फ बोर्ड में रजिस्टर्ड हैं।

इस फैसले को लेकर जमीयत उलेमा ए हिंद के मौलाना काब रशीदी का कहना है कि धर्म के आधार पर कानून में किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। अगर मस्जिद, दरगाह और मदरसों को इसके तहत लाया गया है तो फिर गुरुकुल और मंदिरों समेत सभी धर्म के धार्मिक स्थलों को भी इस कानून के तहत लाना चाहिए। केवल किसी एक धर्म के लिए कानून लाया जाना गलत है और यह संविधान के खिलाफ है।

‘साल 2036 में भारत करेगा ओलंपिक का आयोजन, तब तक भारत आर्थिक शक्ति होगा’: PM मोदी ने गोवा में 37वें राष्ट्रीय खेलों का किया उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) को गोवा में 37वें राष्ट्रीय खेलों का उद्घाटन किया। गोवा के मडगांव में 26 अक्तूबर से 9 नवंबर तक चलने वाले इस खेल महाकुंभ में 10 हजार से अधिक एथलीट भाग लेंगे। उद्घाटन समारोह में गोवा की विंडसर्फर कात्या इडा कोएल्हो ने प्रधानमंत्री को मशाल सौंपी। इस खेल महाकुंभ का पहला स्वर्ण पदक गोवा ने जीतर शानदार शुरुआत भी कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एकता की थीम पर आधारित समारोह में शामिल हुए। इस कार्यक्रम में 600 कलाकारों ने हिस्सा लिया। मडगांव के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल के क्षेत्र में भारत की सफलता देश की पूरी सफलता से अलग नहीं है। भारत खेल में हर दिन नए कीर्तिमान बना रहा है और सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भाजपा सरकार ने खेलो इंडिया से लेकर तमाम अभियानों के जरिये देश में खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए नया इकोसिस्टम बनाया गया है। उन्होंने कहा कि बीते नौ वर्षों में देश के गाँव-गाँव से टैलेंट की खोज कर उन्हें ओलंपिक पोडियम तक पहुँचाने का रोडमैप बनाया है। इसी का सुखद परिणाम आज पूरा देश देख रहा हैं।

अपने संबोधन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा के मडगाँव में मौजूद हजारों लोगों का अभिनंदन किया।

पीएम मोदी ने कहा, “मैंने आईओसी को आश्वासन दिया है कि भारत 2030 में युवा ओलंपिक और 2036 में ओलंपिक की मेजबानी करने के लिए तैयार है… 2036 तक भारत प्रमुख आर्थिक शक्तियों में से एक होगा और देश में एक बहुत बड़ा मध्यम वर्ग होगा। भारत का अंतरिक्ष से लेकर खेल तक हर जगह डंका बजेगा… आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने को तैयार है भारत और इसी लिए तब तक ओलंपिक भी हमारे लिए आसान हो जाएगा।”

गोवा ने की गोल्ड से शुरुआत

राष्ट्रीय खेलों के 37वें संस्करण की शुरुआत गोवा ने गोल्ड के साथ की है। मेजबान गोवा के बाबू गाओनकर ने मेन्स लेजर रन इवेंट का गोल्ड मेडल जीता। इसी प्रतिस्पर्धा के मिक्स्ड रिले में उन्होंने सीता गोसावी और पूरी टीम के साथ मिलकर सिल्वर मेडर भी जीता। इन खेलों में भारत की स्टार महिला तलवारबाज भवानी देवी ने केरल की एस. सोउमिया को 15-5 से हराकर गोल्ड मेडल जीता।

वहीं, 59 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग में पॉपी हजारिका ने असम को गोल्ड मेडल दिलाया। वेटलिफ्टिंग में ही 67 किलोग्राम भार वर्ग में मिजोरम की लालहुंथारा ने गोल्ड मेडल जीता। जिम्नास्टिक में हरियाणा के योगेश्वर सिंह ने गोल्ड मेडल जीता, जबकि ओडिशा की तरफ से प्रणति नायक ने महिलाओं के ऑल राउंड इंडिविजुअल में गोल्ड मेडल जीता।

9 नवंबर तक चलेंगे राष्ट्रीय खेल

राष्ट्रीय खेलों का 37वाँ संस्करण 26 अक्टूबर से 9 नवंबर तक चलेगा। गोवा के पाँच शहरों मापुसा, मडगांव, पणजी, पोंडा और वास्को में इनका आयोजन हो रहा है। इसके लिए कई स्टेडियमों को अपग्रेड किया गया है। इस दौरान कैंपल इंडोर स्टेडियम में नेटबॉल, कबड्डी और टेबल टेनिस की मैच खेले जाएँगे।

वहीं, एथलेटिक्स और रग्बी के मुकाबले बम्बोलिम एथलेटिक्स स्टेडियम में होंगे। राष्ट्रीय खेलों का सीधा प्रसारण आप डीडी स्पोर्ट्स चैनल पर देख सकते हैं। वहीं, ई-स्ट्रीम के जरिए यूट्यूब पर भी इन खेलों का प्रसारण प्रसार भारती कर रही है।

‘सूत न कपास, जुलाहों में लट्ठमलट्ठा’: कॉन्ग्रेस-सपा में अभी से शुरू हो गया पोस्टर वार, राहुल गाँधी और अखिलेश यादव में कौन बनेगा प्रधानमंत्री?

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के जवाब में बना I.N.D.I. गठबंधन लोकसभा चुनाव से पहले मिलकर जोर-आजमाइश कर कर रहा था, लेकिन कॉन्ग्रेस पार्टी ने समाजवादी पार्टी को धकिया दिया। कॉन्ग्रेस ने सीधे कह दिया कि यहाँ तुम्हारी जरूरत नहीं है, जब यूपी में होगी तो देख लेंगे।

गुस्साए अखिलेश यादव खूब तमतमाए और बोले- अगर पहले पता होता कि ये गठबंधन सिर्फ पीएम मोदी को लोकसभा चुनाव में रोकने के लिए बना है तो हम मध्य प्रदेश में कदम भी नहीं रखते। अब तो हम लड़ेंगे। समाजवादी पार्टी ने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने एमपी में 6 सीटें देने पर हामी भरी थी, लेकिन दी एक भी नहीं। ऐसे में वो जितनी सीटों पर हो सकेगा, वो चुनाव लड़ेंगे। इसके बाद करीब 3 दर्जन सीटों पर समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवार उतार दिए।

ये तो बात हुई मध्य प्रदेश की, लेकिन मध्य प्रदेश की लड़ाई उत्तर प्रदेश में दिखनी शुरू हो गई। कमलनाथ ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के ‘अरे छोड़ो यार अखिलेश-वखिलेश’ कहा था, लेकिन उससे पहले ही उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश यादव को उनकी हैसियत दिखानी शुरू कर दी थी।

उन्होंने कह दिया कि समाजवादी पार्टी का मध्य प्रदेश में कोई जनाधार ही नहीं है, तो काहे का गठबंधन? ये बात सपाइयों को बुरी लग गई। बुरी लगी तो लगी, सपाइयों ने सीधे लखनऊ में ही पोस्टर लगा दिया कि 2024 में मोदी तो छोड़ो, राहुल गाँधी क्या चीज हैं। और काहे का गठबंधन? अखिलेश भईया बनेंगे प्रधानमंत्री…

पोस्टर साभार: X_journalistspsc

ये पोस्टर अभी लगे ही थे कि राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट की शुरुआत हो ही रही थी कि कॉन्ग्रेस ने नहले पर दहला मार दिया। कॉन्ग्रेस की ओर से और करारे और भयंकर पोस्टर लगाए गए। कॉन्ग्रेस ने तो 2024 में राहुल गाँधी के लिए प्रधानमंत्री पद का दावा तो ठोका ही, 2027 में यूपी के मुख्यमंत्री पद पर भी दावा ठोक दिया।

नाम भी किसका लिया, अजय राय का, जो पिछले कई चुनाव खुद हार चुके हैं। अजय राय लोकसभा का चुनाव भी हारे कई बार और विधानसभा का तो खैर कहना ही क्या… बाकी मुख्यमंत्री बनना है, किसी का मन है तो दूसरा कैसे रोके। यही बात राहुल गाँधी पर भी लागू होती है। वो खुद अपनी अमेठी की लोकसभा सीट हार गए। वो तो भला हो वायनाड की जनता का, जिसने राहुल गाँधी को लोकसभा भेज दिया।

पोस्टर साभार: X_journalistspsc

अरे, वायनाड का जिक्र आया तो ये भी बता दें कि राहुल गाँधी को वायनाड से शायद कोई लगाव नहीं रहा, क्योंकि वायनाड की जनता को कई महीनों तक बिना एमपी के ही रहना पड़ा। कारण तो सब जानते हैं कि राहुल गाँधी सजायाफ्ता हो गए थे। खैर, वो मामला दूसरा है।

हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश से दो अन्य नेताओं के प्रधानमंत्री बनने के दावों की। अब देखिए, उत्तर प्रदेश से ही नरेंद्र मोदी सांसद हैं। उनकी पार्टी के पास अब 64 सांसद (तीनों सीटों पर उप चुनाव हुए, जो सपा के कब्जे में थी, उसमें से एक पर सपा जीत पाई, बाकी दो सीटों को भाजपा ने जीत लिया। कन्नौज-सपा जीती, रामपुर और आजमगढ़ भाजपा)।

बात उत्तर प्रदेश की हो रही है तो आँकड़े भी बता ही देते हैं

इस समय उत्तर प्रदेश की कथित तौर पर सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी (भाजपा को छोड़कर) समाजवादी पार्टी है। अखिलेश यादव इसी पार्टी के मुखिया हैं। उनकी पार्टी के पास विधानसभा में 109 सीटें हैं। इससे पहले साल 2017 के चुनाव में पार्टी के विधायकों की संख्या 47 ही थी, जबकि 2012 में इनकी सरकार थी।

खैर, अभी लोकसभा में समाजवादी पार्टी के पास 3 सीटें बची हैं। क्योंकि पार्टी उप-चुनाव में दो पारिवारिक सीटें गँवा चुकी है। खुद अखिलेश यादव ने जो आजमगढ़ की सीट खाली की थी, वो भी समाजवादी पार्टी नहीं बचा पाई। आजम खान की रामपुर लोकसभा सीट भी भाजपा ने जीत ली। लोकसभा छोड़िए, विधानसभा सीट भी सपा नहीं बचा पाई थी। लेकिन अखिलेश भैया को बनना प्रधानमंत्री है और 2027 में फिर से विधायकी का चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनना है?

खैर, क्या सोच रहे हैं अखिलेश और अखिलेश के करीबी, ये वही जानें… लेकिन लोकसभा में 3 सांसदों वाली पार्टी के पास 3 ही सांसद राज्यसभा में भी हैं। जया बच्चन उनमें से हैं, तो प्रोफेसर राम गोपाल साहब के लिए एक सीट मानो हमेशा रिजर्व ही रहती है। बाकी तीन लोकसभा सांसदों में उनकी पत्नी डिंपल मैनपुरी की अपनी घरेलू सीट से उप-चुनाव जीतकर लोकसभा पहुँची हैं तो दो सीटें मुस्लिम बाहुल्य वाली मुरादाबाद और संभल उनके पास बची हैं। संभव वाले बर्क साहब किसी को खाक कुछ नहीं समझते, वो शरिया के आगे अखिलेश की क्या ही सुनेंगे। तो भईया, 3 लोकसभा सांसद लेकर प्रधानमंत्री पद का सपना तो देख ही सकते हैं।

अब बात कॉन्ग्रेस की कर लेते हैं। वैसे कॉन्ग्रेस की बात करने के लिए बचा ही क्या है? कॉन्ग्रेस के पास उत्तर प्रदेश से कोई राज्यसभा सांसद नहीं है। लोकसभा सांसद सिर्फ सोनिया गाँधी ही हैं। वह भी साल 2024 में चुनाव लड़ेंगी भी या नहीं, ये अभी तय नहीं है। बाकी प्रधानमंत्री पद के दावेदार राहुल भईया की बात तो निराली है ही। अपनी ही लोकसभा सीट अमेठी को वो गँवा चुके हैं। 2024 में अमेठी से वो खड़े भी होंगे या नहीं, ये भी किसी को पता नहीं है।

अगर बात विधानसभा की करें तो अखिलेश की पार्टी के कुल 2 ही विधायक 2022 में चुने गए थे। कितने अब भी पार्टी का झंडा थामे हुए हैं, ये बात मैं पक्के से नहीं कह सकता। भाई, इंसान हूँ, सब कुछ याद कैसे रखूँगा? बाकी रही बात अखिलेश यादव और राहुल गाँधी के प्रधानमंत्री बनने की तो दोनों ही कोशिश तो कर रहे हैं। ये अलग बात है कि न दोनों के पास ही ना सूत है और न ही कपास है, लेकिन लट्ठम-लट्ठा भयंकर मचाए हुए हैं।

कहाँ तो दोनों मिलकर चुनाव लड़ने वाले थे मोदी को हराने के लिए, कहाँ अब दोनों आपस में ही लड़ रहे हैं। वह भी सिर्फ उम्मीदवारी पाने के लिए। दोनों ही पार्टियों का उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में सिर्फ 4 सीटों पर कब्जा है। ये गिनती उन्हें प्रधानमंत्री कैसे बनाएगी, अभी यही नहीं समझ आ रहा। बाकी राहुल गाँधी अगले लोकसभा चुनाव में कहाँ से चुनाव लड़ेंगे ये भी बड़ा सवाल है।

‘मोदी सरकार और सीएम योगी की वजह से हिंदुओं का सपना पूरा हुआ’: फिल्म तेजस की रिलीज से पहले कंगना पहुँचीं अयोध्या, रामलला का दर्शन किया

बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत (Kangna Ranaut) गुरुवार (26 अक्टूबर 2023) को अयोध्या पहुँचीं। वहाँ पहुँचकर उन्होंने रामलला के दर्शन किए। इस दौरान कंगना रनौत ने मंदिर बनाने में लगे श्रमिकों को भगवान विश्वकर्मा का अवतार बताया। इसके साथ ही उन्होंने ‘जय श्रीराम’ का उदघोष भी किया।

कंगना रनौत ने मजदूरों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि ‘आप सब हमारे लिए हनुमान जी की सेना हैं, जो ये काम परिपूर्ण कर रही है’। इसके साथ ही उन्होंने आने वाली अपनी फिल्म ‘तेजस’ का भी प्रमोशन भी किया। उन्होंने इसे हिंदुओं का सदियों पुराना संघर्ष बताते हुए कहा कि वर्तमान पीढ़ी इसे साकार होते देख पा रही है।

कंगना ने कहा कि आखिरकार रामलला का मंदिर बन गया। उन्होंने कहा, “मैंने अयोध्या पर एक स्क्रिप्ट लिखी है। इस पर रिसर्च भी की है। इस सौभाग्यशाली दिन को देखने के लिए कितने हिंदुओं… कारसेवकों ने अपनी जान दे दी। ये हिंदुओं का 600 साल का लंबा संघर्ष है। ये दिन मोदी सरकार और सीएम योगी आदित्यनाथ की वजह से संभव हो पा रहा है।”

कंगना ने अयोध्या को ईसाइयों के वेटिकन के बराबर बताया। कंगना ने कहा, “ये हिंदुओं के लिए सबसे बड़ा तीर्थस्थल होगा, जैसे ईसाइयों के लिए वेटिकन है। ये दुनिया के सामने देश और सनातन संस्कृति का भव्य प्रतीक बनेगा। हमारी फिल्म ‘तेजस’ में भी राम मंदिर की अहम भूमिका है।”

फिल्म तेजस का प्रमोशन करते हुए उन्होंने कहा कि यह फिल्म भारतीय वायुसेना पर आधारित है और इसके रिलीज होने से पहले वह आशीर्वाद लेने के लिए यहाँ आई हैं। कंगना ने इस विजिट की फोटो अपने इंस्टा अकाउंट पर शेयर पर साझा किया है। साथ ही भगवान का गुणगान किया है।

उन्होंने इंस्टाग्राम अकाउंट पर लिखा, “आओ मेरे राम। वाह! मैं श्री हरि विष्णु की कृपापात्र हूँ, उनकी भक्त हूँ और आज मुझपे उनकी इतनी कृपा हुई कि मुझे श्री हरि विष्णु अवतार परम पूजनीय, महान धनुर्धार, तेजस्वी योद्धा, तपस्वी राजा, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि के दर्शन करने को मिला। मेरी फ़िल्म तेजस में रामजन्मभूमि की विशेष भूमिका है तो ऐसा मन हुआ की रामलला के दर्शन करूँ। धन्य भाग मेरे राम…।”

अयोध्या आने से पहले दिल्ली के रामलीला मैदान में कंगना ने दशहरा के दिन रावण दहन किया था। इसके लिए वामपंथियों ने उन्हें ट्रोल भी किया था। कंगना के अभिनय से सजी फिल्म ‘तेजस’ शुक्रवार (27 अक्टूबर 2023) को रिलीज होने जा रही है। ये एक एक्शन थ्रिलर फिल्म है। इसे सर्वेश मेवाड़ ने लिखा और डयरेक्ट किया है। रोनी स्क्रूवाला इसके निर्माता हैं।

इस फिल्म में कंगना रनौत लीड रोल में हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना की अधिकारी ‘तेजस गिल’ का किरदार अदा किया है। वो खतरनाक रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देने वाली एक सिख महिला अधिकारी हैं, जो आतंकवादियों का खात्मा करती हैं।

सूरत में हिंदू व्यापारी की बच्ची से लव जिहाद: ऑटो चालक मुसीब जमशेद अगवा कर ले गया अजमेर, इंस्टाग्राम पर ‘कट्टर मुस्लिम’ नाम से है ID

गुजरात के सूरत में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो ‘लव जेहादियों’ के मंसूबों को खोलकर रख दे रहा है। सूरत के वेसू इलाके के एक हिंदू व्यापारी की 15 साल की बेटी को मुसेब जमशेद मनियार नाम का ‘कट्टर मुस्लिम’ लव जेहाद में फाँसने में सफल हो गया। वो महाराष्ट्र के औरंगाबाद का रहने वाला है और वहाँ पर ऑटोरिक्शा चलाता है। गुजरात पुलिस ने जमशेद को गिरफ्तार कर लिया है।

जमशेद ने ‘कट्टर मुस्लिम’ नाम से इंस्टाग्राम पर आईडी बना रखी है। उसने सोशल मीडिया के जरिए 15 साल की नाबालिग हिंदू लड़की को अपने प्यार के जाल में फँसा लिया। इसके बाद वह औरंगाबाद से सूरत पहुँचकर एक होटल में रूका और वहाँ उसने लड़की को अपने जन्मदिन मनाने के लिए बुलाया। इसके बाद वह लड़की को लेकर फरार हो गया।

वहाँ से वह लड़की को लेकर मुंबई चला गया। इसके बाद वह राजस्थान के अजमेर चला गया। अजमेर से वह महाराष्ट्र लौटने के दौरान सूरत पुलिस ने दोनों को गुजरात के अहमदाबाद रेलवे स्टेशन से पकड़ लिया। ताया जा रहा है कि मुसेब जमशेद मनियार ने लड़की को अपने पास 15 दिन से रखा था।

जानकारी के मुताबिक, लड़की 9वीं कक्षा की छात्रा है। वहीं, आरोपित मुसेब की उम्र 22 साल है। औरंगाबाद से आकर वह सूरत के एक होटल रूका और यहाँ उसने अपना जन्मदिन भी लड़की के साथ मिलकर मनाया। इसके बाद उसका अपहरण कर लिया लड़की के परिजनों ने वेसू थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया है।

नाबालिग के परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस 2 टीमें बनाकर सक्रिय हो गई और आखिरकार आरोपित को पकड़ लिया। छात्रा को बरामद करने के उसे मेडिकल के लिए भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि जाँच में रेप की पुष्टि होती है तो आरोपित मुसेब के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) का मामला भी जोड़ा जाएगा।

सबसे बड़ी बात ये है कि मुसेब जमशेद ने हिंदू लड़की को जिस आईडी से अपने जाल में फाँसा, वो ‘कट्टर मुस्लिम’ नाम से बना हुआ था। गुजरात मित्र ने अपनी रिपोर्ट में उसकी प्रोफाइल की पुष्टि की है। इस घटना को लेकर स्थानीय हिंदू संगठनों में गुस्सा देखा जा रहा है।

कतर में भारत के 8 पूर्व नौसेना अधिकारियों को मौत की सजा, इजरायल के लिए जासूसी का है झूठा आरोप: विदेश मंत्रालय बोला- हम इसे चुनौती देंगे

कतर (Qatar) की एक अदालत ने गुरुवार (26 अक्टूूबर, 2023) को भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है। इस पर विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया दी है। बता दें कि साल 2022 में कतर की एक कंपनी में काम करने वाले इन अधिकारियों पर जासूसी का आरोप लगाकर वहाँ की इस्लामी सरकार ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

ये सभी पूर्व अधिकारी वहाँ की अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज (ADGTCS) नाम की कंपनी के लिए काम कर रहे थे। कतर सरकार ने इन भारतीयों पर इजरायल के लिए जासूसी करने का आरोप लगाया था। हालाँकि, इन अधिकारियों का साफ कहना है कि इस्लामी सरकार द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह मनगढंत है।

कतर की अदालत के इस फैसले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि कतर के इस फैसले से भारत हैरान है और वो पीड़ितों को हरसंभव कानूनी मदद देने के साथ इस फैसले को चुनौती देंगे। विदेश मंत्रालय ने कहा, “मौत की सजा के फैसले से हम गहरे सदमे में हैं और विस्तृत फैसले का इंतजार कर रहे हैं।”

मंत्रालय ने आगे कहा गया है, “हम इस मामले को बहुत महत्व देते हैं और इस पर करीब से नजर रख रहे हैं। हम सभी को कांसुलर और कानूनी मदद देना जारी रखेंगे। हम फैसले को कतर के अधिकारियों के सामने भी उठाएँगे। हम परिवार के सदस्यों और कानूनी टीम के संपर्क में हैं। हम सभी कानूनी विकल्प तलाश रहे हैं।”

गौरतलब है कि कतर में आठ महीने पहले भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को कथित जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अगस्त 2022 से पनडुब्बी कार्यक्रम को लेकर कथित जासूसी के आरोप में ये सभी कतर की जेल में है। हालाँकि, कतर की तरफ से इन लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की कोई जानकारी नहीं दी गई। उन्हें जेल में भी अकेला रखा गया है।

इन लोगों को कांसुलर पहुँच दी गई है। भारत सरकार उनकी रिहाई सुनिश्चित करने के लिए काम कर रही है। इन का पहला ट्रायल मार्च में शुरू हुआ था। हिरासत में लिए गए पूर्व अधिकारियों में से एक की बहन मीतू भार्गव ने अपने भाई को वापस लाने के लिए सरकार से मदद माँगी थी।

8 जून को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में दखल देने की अपील की थी। उन्होंने लिखा था, “ये पूर्व नौसेना अधिकारी देश का गौरव हैं और मैं फिर से हमारे माननीय प्रधानमंत्री से हाथ जोड़कर अनुरोध करती हूँ कि अब वक्त आ गया है कि उन सभी को बगैर किसी देरी के तुरंत भारत वापस लाया जाए।”

इसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को भी टैग किया गया था। गौरतलब है कि नौसेना में अहम भारतीय युद्धपोतों की कमान संभाल चुके ये सभी सम्मानित आठ पूर्व अधिकारी कतर निजी फर्म ADGTCS काम करते थे। यह कंपनी कतर के सशस्त्र बलों और सुरक्षा एजेंसियों को ट्रेनिंग और उससे जुड़ी सेवाएँ देती है।

कतर में इन पूर्व अधिकारियों की जमानत याचिकाएँ कई बार खारिज कर दी गईं। सजा पाने वालों में नौसेना के पूर्व अधिकारियों में कैप्टन नवतेज सिंह गिल, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर अमित नागपाल, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता और नाविक रागेश शामिल हैं।

हिरासत में लिए में लिए गए रिटायर्ड कमांडर पूर्णेंदु तिवारी अल दहरा कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। उन्होंने भारतीय नौसेना में सर्विस करते हुए कई युद्धपोतों की कमान संभाली थी। रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में एक भारतीय पत्रकार और उसकी पत्नी को इस मामले में रिपोर्टिंग करने के कारण कतर छोड़ने का आदेश दिया गया था।

इस देश की प्रधानमंत्री गईं हड़ताल पर, कामकाज किया बंद: लैंगिक समानता की माँग और घरेलू हिंसा के विरोध में आईं महिलाएँ

उत्तर-पश्चिम यूरोप का एक छोटा-सा देश है आइसलैंड। इस देश की जनसंख्या महज 3.80 लाख है। मंगलवार (24 अक्टूबर 2023) को इस देश में कामकाज ठप हो गया। दरअसल, हजारों औरतों के साथ देश की प्रधानमंत्री कैतरीना कोस्तोत्रई (Katrín Jakobsdóttir) भी हड़ताल पर चली गईं।

इस मुल्क की नारी शक्ति का ये विरोध यहाँ मर्दों और औरतों के वेतन में असमानता और लैंगिक हिंसा को लेकर था। कोस्तोत्रई दुनिया में हड़ताल पर जाने वाली किसी देश की पहली प्रधानमंत्री कही जा सकती हैं।

पीएम कोस्तोत्रई ने पहले ही आइसलैंड की मीडिया को बताया था कि उन्होंने ‘क्या आप इसे समानता कहते हैं?’ स्लोगन वाली हड़ताल के तहत काम पर नहीं जाने का प्लान बनाया था। इसके साथ ही मंगलवार को ‘वीमेन्स डे ऑफ’ के दिन देश की हजारों महिलाओं के साथ पीएम भी इस हड़ताल में शामिल हो गईं।

इसे लेकर पीएम कोस्तोत्रई ने कहा, “मैं इस दिन काम नहीं करूँगी और मुझे उम्मीद है कि सभी महिलाएँ (कैबिनेट में) भी ऐसा ही करेंगी। मैंने कल कैबिनेट की बैठक नहीं करने का फैसला किया है। आइसलैंड की संसद में केवल पुरुष मंत्री सवालों का जवाब देंगे। हम इस तरह से एकजुटता दिखाते हैं।”

हड़ताल के आयोजकों ने अभियान की आधिकारिक वेबसाइट पर कहा है, “24 अक्टूबर को आइसलैंड में आप्रवासी सहित सभी महिलाओं को भुगतान और अवैतनिक (घरेलू कामों सहित) दोनों तरह के काम बंद करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। पूरे दिन महिलाएँ समाज में अपने योगदान के अहमियत को दिखाने के लिए हड़ताल करेंगी।”

दरअसल, इस देश में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं को वेतन में असमानता को लेकर रोष है। इस वजह से महिलाओं ने ‘वीमेन्स डे ऑफ’ के दिन केवल बाहर का ही नहीं, बल्कि घर का काम भी नहीं किया। स्टाफ की कमी के कारण आइसलैंड के स्कूल-अस्पताल, ट्रांसपोर्ट आदि बुरी तरह प्रभावित रहे।

ये तब है, जब यह देश लैंगिक समानता के मामले में बीते 14 सालों से टॉप पर है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक, वेतन सहित अन्य कारकों में आइसलैंड के मुकाबले अन्य किसी भी देश ने समानता हासिल नहीं की है। फोरम ने इस देश को 91.2 फीसदी का स्कोर दिया है। इस देश को ‘फैमिनिस्ट हेवन’ के नाम से भी जाना जाता है।

पीएम कोस्तोत्रई ने 19 अक्टूबर 2023 के एक ट्वीट में कहा था, “हमें लैंगिक वेतन के अंतर को कम करने और लैंगिक समानता तक पहुँचने के लिए महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की जरूरत है। हमें ऐसी परिस्थितियों वाले समाज की जरूरत है, जहाँ बेहतरीन खुशहाली, माता-पिता की छुट्टी, डे-केयर और एक संस्कृति में बदलाव संभव हो।”

गौरतलब है कि इस देश में ये पहली बार नहीं है, जब ‘वीमेन्स डे ऑफ’ मनाया गया। यहाँ ये दिन लगभग 50 साल पहले यानी 1975 में हुई पहली बार हड़ताल के बाद आया है। तब आइसलैंड की 90 फीसदी महिलाओं ने केवेनफ्री यानी वीमेन्स डे ऑफ के हिस्से के तौर पर काम करने से इनकार कर दिया था। इस हड़ताल के कारण आइसलैंड में अहम बदलाव हुए।

आइसलैंड में जो प्रमुख बदलाव हुए, उनमें दुनिया के किसी देश की पहली महिला राष्ट्रपति का चुनाव भी शामिल है। साल 1975 के बाद इस हड़ताल को 1985, 2005, 2010, 2016 और 2018 में दोहराया गया है। 1975 की हड़ताल में भाग लेने वालों में से कुछ ने इस हड़ताल को आयोजित करने में मदद की। उनका मानना है कि मकसद पूरा नहीं हुआ है।

इसे लेकर आइसलैंडिक फेडरेशन फॉर पब्लिक वर्कर्स के हड़ताल आयोजक फ़्रीजा ने कहा, “हम इस बात की तरफ ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं कि हमें समानता का स्वर्ग कहा जाता है, लेकिन अभी भी लैंगिक असमानताएँ हैं। कार्रवाई की तत्काल जरूरत है। स्वास्थ्य सेवाओं और बच्चों की देखभाल जैसी महिलाओँ के नेतृत्व वाले काम को अभी भी कम अहमियत दी जाती है और बहुत कम भुगतान किया जाता है।”

आइसलैंड के सांख्यिकी विभाग ने कहा है कि वहाँ कुछ नौकरियों में औरतें अभी भी अपने पुरुष सहकर्मियों के मुकाबले कम-से-कम 20 फीसदी कम कमाती हैं। वहीं आइसलैंड विश्वविद्यालय की एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि यहाँ की 40 फीसदी औरतों को अपने जीवनकाल में लिंग-आधारित और यौन हिंसा का सामना करना पड़ता है।

महुआ मोइत्रा की बढ़ी मुश्किलें, लोकसभा की आचार समिति ने 31 अक्टूबर को पेश होने को कहा

लोकसभा की आचार समिति ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) को 31 अक्टूबर 2023 को पेश होने के लिए कहा है। महुआ पर पैसे और महंगे गिफ्ट लेकर संसद में प्रश्न पूछने के आरोप हैं। इस सम्बन्ध में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को शिकायत भेजी थी।

लोकसभा की आचार समिति ने मौखिक साक्ष्य के लिए 26 अक्टूबर 2023 को सांसद निशिकांत दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई को बुलाया था। निशिकांत दुबे ने देहाद्राई के पत्र के आधार पर ही लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी। उन्होंने महुआ को संसद से निलम्बित करने की माँग करते हुए एक जाँच समिति गठित करने की माँग की थी।

महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने उद्योगपति दर्शन हीरानंदानी से पैसे और महंगे गिफ्ट लेकर अडानी समूह के विरुद्ध संसद में प्रश्न पूछे थे। इतना ही नहीं, महुआ ने अपने संसद पोर्टल का लॉगिन दर्शन हीरानंदानी को दे दिया था। यह मामला तब सामने आया, जब महुआ के पूर्व पार्टनर देहाद्राई ने कु्त्ता हेनरी को लेकर विवाद बढ़ने पर महुआ के खिलाफ सीबीआई को पत्र लिखा था।

महुआ को लेकर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे का कहना था कि टीएमसी सांसद ने हाल में संसद में 61 प्रश्न पूछे थे, जिनमें से लगभग 50 अडानी समूह से जुड़े हुए हैं। दर्शन हीरानंदानी ने भी एक पत्र लिखकर यह खुलासा किया था कि महुआ ने उनसे लम्बे खर्चे करवाए। वहीं, देहाद्राई का कहना है कि महुआ ने उनका कुत्ता ‘हेनरी’ चोरी कर लिया है।

मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि इस मामले में संसद की वेबसाइट को ऑपरेट करने वाले नेशनल इन्फोर्मेशन सेंटर (NIC) ने भी अपनी जाँच पूरी कर ली है और उसने दुबई से 100 से अधिक बार लॉगइन पाया है। लॉगइन का समय भी महुआ द्वारा सदन में अडानी के संबंध में पूछे गए प्रश्नों से मेल खाता है।

दर्शन हीरानंदानी दुबई में बैठकर संसद में पूछे जाने वाले सवाल लिखते थे और उसे महुआ पूछती थीं। आचार समिति के अध्यक्ष एवं भाजपा सांसद विनोद सोनकर ने कहा है कि आज दो लोगों को समिति के सामने बुलाया गया था। अब यह निर्णय लिया गया है कि 31 अक्टूबर 2023 को महुआ मोइत्रा को बुलाया जाए।

समिति ने यह भी निर्णय लिया है कि वह गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय से भी इस विषय में जानकारी माँगी जाएगी। वहीं, सांसद निशिकांत दूबे और एडवोकेट देहाद्राई ने कहा कि समिति ने उनसे जो भी सवाल किए, उसका उन्होंने जवाब दिया है। इसके साथ ही आगे भी जानकारी साझा करने की बात कही। वहीं, सांसद दूबे ने कहा कि असली सवाल यह है कि महुआ चोर हैं या नहीं।