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जॉनी लीवर को पेशाब पिलाने पर अड़ गए थे आमिर खान, सेट पर ही रोने लगे थे ‘मेला’ के डायरेक्टर: काजोल ने ठुकरा दी थी फिल्म

शूटिंग के दौरान हिरोइनों की हाथ पर थूकने वाले अभिनेता आमिर खान फिल्म ‘मेला’ में अश्लील सीन करने पर अड़ गए थे। यह सीन उनके और जॉनी लीवर पर फिल्माया गया था। इसमें जॉनी लीवर को शराब समझकर पेशाब पीते दिखाया गया था। यह खुलासा ‘मेला’ के डायरेक्टर धर्मेश दर्शन ने किया है।

मेला साल 2000 में रिलीज हुई थी। बॉक्स आफिस पर फिल्म फ्लॉप साबित हुई थी। बकौल धर्मेश दर्शन मेला की शूटिंग के समय आमिर खान फिल्म ‘राजा हिन्दुस्तानी’ सुपरहिट होने के कारण बड़ा नाम बन चुके थे। वे किसी की सुन नहीं रहे थे। वे मेला के जरिए अपने भाई फैसल खान का करियर बनाना चाहते थे।

‘लहरें रेट्रो’ को दिए इंटरव्यू में धर्मेश दर्शन ने बताया कि शूटिंग के दौरान आमिर खान ने जॉनी लीवर के साथ ‘यूरिन थेरेपी सीन (पेशाब पीने वाला दृश्य)’ करने की जिद्द पकड़ ली थी। यह यह सीन उन्होंने हॉलीवुड की एक फिल्म ‘डम्ब एंड डम्बर’ में देखा था। धर्मेश दर्शन के मना करने के बावजूद आमिर यह सीन फिल्म में करना चाहते थे।

बकौल धर्मेश दर्शन उन्होंने अभिनेता को समझाया था कि जनता उन्हें इस तरह का सीन करते हुए नहीं देखना चाहेगी। लेकिन वे नहीं माने। उन्होंने कहा कि इस सीन की शूटिंग के बाद उन्हें फिल्म के सेट पर रोना आ गया था। नीचे लगे वीडियो में आप फिल्म का वह दृश्य देख सकते हैं;

इस इंटरव्यू में धर्मेश दर्शन ने यह भी बताया है कि मेला पहले काजोल को ऑफर हुई थी। लेकिन उन्होंने मना कर दिया, क्योंकि आमिर एक सीन को पूरा करने में कई टेक लेते थे। वहीं काजोल एक टेक में सीन पूरा करती थींं। इसलिए वह आमिर खान के साथ काम नहीं करना चाहती थीं। नीचे लगे वीडियो पर क्लिक कर आप धर्मेश दर्शन का इंटरव्यू ​देख सकते हैं;

बाद में ट्विंकल खन्ना को इस फिल्म में आमिर के साथ लिया गया। आमिर के साथ इस फिल्म में उनके भाई फैसल खान भी थे। आमिर इस फिल्म के माध्यम से फैसल का करियर बनाना चाहते थे। उनका पूरा फोकस इसी पर था। हालाँकि, आमिर अपने भाई फैसल का करियर नहीं बचा सके। मेला बुरी तरह असफल रहीं। वहीं लगान जैसी फिल्मों की सफलता ने आमिर खान के करियर को बचा लिया।

बशीर के घर के आगे उड़ी अबीर तो हुआ बवाल; माँ दुर्गा के विसर्जन के जुलूस में दलितों पर हमला… रज़िया भी नामजद

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के जुलूस में हिंसा की खबर है। मोहम्मद बशीर के घर से आगे से गुजर रहे जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं के साथ पहले गाली-गलौज की गई और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई। विवाद की वजह मोहम्मद भूरा पर गुलाल पड़ जाना बताया जा रहा है। पुलिस ने FIR दर्ज करके 3 आरोपितों को हिरासत में ले लिया है। घटना मंगलवार (24 अक्टूबर 2023) की है।

मामला महोबा के श्रीनगर थाना क्षेत्र का है। इसकी शिकायत वीरेंद्र श्रीवास नाम के व्यक्ति ने दर्ज करवाई है। वीरेंद्र दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। शिकायत के अनुसार, मंगलवार को वीरेंद्र अपनी 2 बेटियों को लेकर मोहल्ले वालों के साथ माँ दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करने जा रहे थे।

दोपहर लगभग 11:50 पर यह जुलूस श्रीनगर बाजार में बशीर के घर से आगे से गुजरा। वहाँ मौजूद बशीर का बेटा भूरा अबीर-गुलाल उड़ाने पर आपत्ति जताने लगा। विरोध करने वालों में भूरा के साथ सानू, पप्पू, भइया टेलर्स, इक़बाल, साहिल, आशिक और रजिया भी शामिल हो गए।

शिकायतकर्ता ने आगे बताया कि इन सभी आरोपितों ने पहले तो जुलूस रोक कर गाली-गलौज की। बाद में इन सभी ने जुलूस में शामिल लोगों की पिटाई करनी शुरू कर दी। इस पिटाई में जुलूस में शामिल महिलाओं और बच्चियों को भी निशाना बनाया गया। हमलावरों को काफी दबंग बताया जा रहा है।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने भूरा, सानू, पप्पू, भइया टेलर, इकबाल, साहिल, आशिक और रज़िया को नामजद किया है। इन सभी पर IPC की धारा 147, 323 और 504 के साथ SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(द), 3(1)(घ), 3(2)(va) के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

हिन्दू संगठनों का आरोप है कि जुलूस पर हमला करने वालों के हाथों में तलवारें और डंडे भी थे। आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने की दशा में पूरे जिले में मूर्ति विसर्जन रोकने का एलान भी किया गया था।

इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठन से जुड़े लोग थाने के बाहर जमा हो गए। सभी ने प्रदर्शन करते हुए आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की। महोबा की पुलिस अधीक्षक IPS अपर्णा गौतम ने बताया कि 3 आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

पराली की समस्या से निपटने में खट्टर सरकार अव्वल, 5 जिलों से एक भी मामला नहीं, अब पराली से बनेगी बायोगैस

हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार ने प्रदेश में पराली जलाने की समस्या ने निजात दिलाने के लिए स्मार्ट सॉल्यूशन निकाला है। प्रदेश में अब किसानों को पराली के पैसे भी मिलेंगे और पराली से कंप्रेस्ड बायोगैस बनाई जाएगी।

जानकारी के अनुसार, खट्टर सरकार पूरे प्रदेश में 120 कंप्रेस्ड बायोगैस प्लांट लगाएगी। एक प्लांट अपने आसपास के लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करेगा। किसान खेत में बची पराली को इकट्ठा करके इन प्लांट तक लाएँगे।

सबसे पहले खेतों में बची हुई इस पराली की गाँठे बनाई जाएँगी और फिर प्लांट पर लाकर इससे कम्प्रेस्ड बायोगैस बनेगी। पराली लाने वाले किसानों को इससे अतिरिक्त आय होगी और प्रदेश में प्रदूषण की समस्या भी हल हो जाएगी। पराली से ईंधन के अतिरिक्त डीएपी खाद बनाने की भी योजना है।

प्लांट लगने के पहले ही हरियाणा में खट्टर सरकार की मुस्तैदी के कारण पराली जलाने की घटनाओं में कमी आना शुरू हो गई है। इस वर्ष अभी तक पूरे हरियाणा से मात्र 714 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएँ सामने आई हैं, जबकि 2022 में यह संख्या 893 तथा 2021 में 1508 थी।

हरियाणा सरकार किसानों को पराली ना जलाने के एवज में 1,000 रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दे रही है। हरियाणा के गुरुग्राम, चरखी-दादरी, महेंद्रगढ़, मेवात और रेवाड़ी जिलों से पराली जलाने की एक भी घटना सामने नहीं आई है। हरियाणा के उलट पंजाब में पराली जलाने की घटनाएँ नहीं रोकी जा सकी हैं।

इस साल पंजाब से अब तक 1,794 जगहों से पराली जलाने की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। राज्य का कृषि विभाग किसानों को ऐसे उपकरण भी मुहैया करवा रहा है, जिससे पराली को निस्तारित किया जा सके।

प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं की मॉनिटरिंग के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। जहाँ पराली ना जलाने वाले किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं नियम तोड़ने वाले व्यक्तियों पर कार्रवाई भी हो रही है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा सरकार के प्रयासों के कारण पराली जलाने की समस्या से निजात मिलने के साथ ही अब किसानों को 4-6 हजार रुपए प्रति एकड़ का अतिरिक्त लाभ भी हो रहा है। इस पराली को पशुओं को चारा बनाने वाली और गत्ते आदि बनाने वाली फर्में खरीद रही हैं।

इस मामले में केंद्र की मोदी सरकार और PMO भी मॉनीटरिंग कर रहे हैं। अगले दो से तीन साल में पंजाब और हरियाणा में बायागैस प्लांट लगा दिए जाएँगे। पंजाब में 200 और हरियाणा में 120 प्लांट लगाए जाएँगे। वहीं, बेलर मशीनों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। सरकार को उम्मीद है अगले दो वर्षों में पराली जलाने की समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।

‘यहाँ रहना है तो सबको खुश करना होगा’: शौहर ने दिया तीन तलाक, भाई और बहनोई से कहा- अपनी इच्छा पूरी कर लो, हलाला भी हो जाएगा

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से तीन तलाक का एक मामला सामने आया है। पीड़िता का दावा है कि उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाता था। शौहर के छोटे भाई और बहनोई के साथ सेक्स का दबाव डाला जा रहा था। ससुराल वाले उससे देह व्यापार कराना चाहते थे।

पीड़िता के अनुसार विरोध करने पर उसकी पिटाई होती थी। जान से मारने की धमकी दी जाती थी। केस दर्ज कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना मुरादाबाद के कटघर थाना क्षेत्र की है। करुला इलाके में रहने वाली महिला ने अपने शौहर और ससुराल के बाकी सदस्यों के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई है।

पीड़िता ने शिकायत में बताया है कि उसका निकाह फरवरी 2022 में संभल के एक युवक से हुआ था। निकाह के कुछ समय बाद ही पीड़िता को उसका शौहर, सास और ननद दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। देवर और शौहर का बहनोई उससे पर गलत नजर रखते थे। पीड़िता के अनुसार जब उसने यह बात सास को बताई तो उसने खामोश रहने की धमकी दी। उससे कहा, “यहाँ रहना है तो सबको खुश करना होगा।”

इस बीच महिला के शौहर ने उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो बना लिए। इसे दिखाकर वह उसे ब्लैकमेल करने लगा। पीड़िता का आरोप है कि प्रताड़ना के चलते उसे असमय एक बच्चा हुआ और जिसकी मौत हो गई। 30 अगस्त 2023 को ससुराल वालों ने बुरी तरह से पीट कर उसे घर से निकाल दिया।

शिकायत में पीड़िता ने बताया है कि घर से निकाले जाने के बाद वह मायके में रहने लगी। 10 सितंबर 2023 को उसका शौहर ससुराल के कुछ अन्य सदस्यों के साथ आ धमका। वे उसे जबरन अपने साथ ले जाना चाहते थे। जब उसने विरोध किया तो शौहर ने दुपट्टे से गला घोंट कर उसे मार डालने की कोशिश की। उसे तीन तलाक दे दिया।

पीड़िता का आरोप है कि घटना के समय उसका देवर और शौहर का बहनोई भी था। उसके शौहर ने इन दोनों से कहा, “दोनों अपनी इच्छा पूरी कर लो। हलाला भी हो जाएगा।” कथित तौर पर इसके बाद देवर और बहनोई ने पीड़िता के कपड़े फाड़ने की कोशिश की। किसी तरह उसने अपनी जान बचाई। महिला की शिकायत पर पुलिस ने रविवार (22 अक्टूबर 2023) को FIR दर्ज की।

डिग्री लेकर देश बेचा, चंद पैसों के लिए जमीर बेची’: महुआ मोइत्रा को निशिकांत दुबे ने फिर घेरा, पूछा- विदेश जाने के पैसे किसने दिए

महँगे गिफ्ट और पैसे लेकर संसद में अडानी समूह के विरुद्ध प्रश्न पूछने के मामले में तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा मुश्किल में है। इसकी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत करने वाले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मोइत्रा पर फिर से सवाल उठाए हैं। दुबे ने मोइत्रा को पैसे लेकर ज़मीर बेचने वाली बताया है।

झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद दुबे ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक ट्वीट किया। इसमें उन्होंने कहा कि मामला अडानी, डिग्री या चोरी का नहीं है, बल्कि मामला देश को गुमराह करने का है। उन्होंने इसे संसद की गरिमा और भारत की सुरक्षा से जुड़ा प्रश्न बताया है। उन्होंने महुआ को चंद पैसे के लिए जमीर बेचने वाली बताया।

दुबे ने अपने पोस्ट में कहा, ठसवाल संसद की गरिमा, भारत की सुरक्षा व कथित सांसद की, proprietary, corruption and criminality का है। जबाब देना है कि दुबई में NIC मेल खुला की नहीं? पैसे के बदले प्रश्न पूछे कि नहीं? विदेश जाने आने के खर्च किसने उठाए? कभी लोकसभा अध्यक्ष और विदेश मंत्रालय से विदेश जाने का permission लिया या नहीं? सवाल अडानी, डिग्री या चोरी का नहीं, देश को गुमराह कर आपके भ्रष्टाचार का है। #डिग्री वाली देश बेचे #चंद पैसे के लिए जमीर बेचे।”

दरअसल, महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने व्यापारी दर्शन हीरानंदानी से महंगे गिफ्ट और पैसे के बदले अडानी समूह के खिलाफ संसद में प्रश्न पूछे थे। यह भी सामने आया है कि संसद पोर्टल का लॉगइन भी उन्होंने हीरानंदानी को दे रखा था। इस मामले में महुआ ने निशिकांत दुबे और एडवोकेट जय अनंत देहाद्राई पर मानहानि का मुकदमा भी दायर किया है।

इस मामले में एडवोकेट देहाद्राई ने पत्र लिखकर मोइत्रा की सीबीआई से शिकायत की थी। इसी पत्र के आधार पर दुबे ने इसकी शिकायत लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से की। दुबे ने अपने पत्र में लिखा था कि उन्हें वकील देहाद्राई के माध्यम से उन्हें महुआ द्वारा हीरानंदानी से महंगे गिफ्ट लेने का पुख्ता सबूत मिला है।

इस मामले में बाद में दर्शन हीरानंदानी ने स्वयं एक पत्र जारी करके कहा था कि महुआ ने उनका गलत फायदा उठाया है। दर्शन ने बताया कि संसद में अडानी समूह पर प्रश्न उठाने के बदले उन्हें कई महंगे खर्चे महुआ पर करने पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि महुआ जल्दी अपनी पहचान बनाना चाहती थीं। इसलिए वह प्रधानमंत्री मोदी पर हमले कर रही थीं।

वहीं, एडवोकेट जय अनंत देहाद्राई दूसरी तरफ महुआ पर आरोप लगा रहे हैं कि महुआ ने उनके कुत्ते ‘हेनरी’ को चुरा लिया है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2021 में उन्होंने हेनरी को ₹75,000 में खरीदा था। देहाद्राई ने कहा है कि उनका रिश्ता हेनरी से अभिभावक जैसा है।

निशिकांत दुबे द्वारा उठाए गए मामले पर देश के केन्द्रीय रेल एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी चिंता जताई है। दरअसल, जो NIC संसद की वेबसाइट का काम देखता है, वह अश्विनी वैष्णव के मंत्रालय के अंतर्गत आता है।

पैसे लेकर प्रश्न पूछने के आरोपों पर महुआ की पार्टी टीएमसी ने भी उनसे किनारा कर लिया है। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद कुनाल घोष ने इस पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया था और कहा था कि सम्बंधित व्यक्ति खुद ही जवाब देगा।

इन्होंने बाल ठाकरे की विचारधारा से की दगाबाजी, ये हमास से भी कर सकते हैं गठबंधन: उद्धव ठाकरे पर दशहरा रैली में बरसे CM एकनाथ शिंदे

कभी विजयादशमी पर रैली से बाल ठाकरे अपनी और शिवसेना की ताकत का प्रदर्शन किया करते थे। शिवसेना में टूट के बाद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे दशहरा रैली के जरिए खुद को बाल ठाकरे की राजनीति का असली वारिस साबित करने की कोशिश करते हैं।

इसी क्रम में 24 अक्टूबर 2023 को रैली को संबोधित करते हुए शिंदे ने उद्धव गुट पर बाला साहेब की राजनीतिक विचारधारा से दगाबाजी करने का आरोप लगाया। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव होने के बाद पता चल जाएगा कि कौन असली शिवसेना है और कौन नकली।

मुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि उन्हें आश्चर्य नहीं होगा अगर अपने फायदे के लिए (उद्धव ठाकरे) लश्कर-ए-तैयबा और हमास से गठबंधन कर लें। उन्होंने खुलासा किया कि जब पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न उन्हें मिला तो उद्धव गुट ने शिवसेना के खाते में पड़े 50 करोड़ रुपए निकालने की कोशिश की थी। बैंक के इनकार करने के बाद पैसे के लिए उनको पत्र लिखा गया। शिंदे ने कहा कि मैंने तुरंत उन्हें पैसा दे दिया, क्योंकि उनको सिर्फ पैसों से प्यार है न कि बाला साहेब के विचारों से।

शिंदे ने एक और घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2004 में मणिशंकर अय्यर के पुतले को बाला साहेब जूतों से मारना चाहते थे, क्योंकि उन्होंने वीर सावरकर पर कोई विवादित बयान दिया था। लेकिन आज उद्धव उन्हीं के जूते उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे आज रावण जला है वैसे ही 2024 में जनता INDI गठबंधन नाम के रावण का दहन करेगी।

गौरतलब है कि जब तक शिवसेना एकजुट थी दशहरा रैली का आयोजन शिवाजी पार्क में होता था। इस बार उद्धव गुट की रैली शिवाजी पार्क में, जबकि शिंदे शिवसेना की रैली आजाद मैदान में हुई है। रैली के दौरान उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री शिंदे पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार मराठा लोगों पर अत्याचार कर रही है। उनके मुख्यमंत्री रहते हुए कभी मराठा प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज नहीं हुआ, जबकि शिंदे सरकार में ऐसा किया गया।

उद्धव ठाकरे इस दौरान देश में मिलीजुली सरकार की वकालत करते नजर आए। उनका कहना था कि देश में भाजपा जैसी प्रचंड बहुमत वाली सरकार नहीं होनी चाहिए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र में चुनाव कराने की चुनौती देते हुए कहा कि इसके बाद जनता बता देगी कि असली शिवसेना कौन सी है। वहीं उद्धव के करीबी सांसद संजय राउत ने महाराष्ट्र सरकार में एनसीपी के नेताओं के शामिल किए जाने पर भी प्रश्न उठाए।

बैग में कुरान भरकर दुर्गा पूजा पंडाल में घुस रहा था शाह आलम, हावभाव देख हिंदुओं ने पकड़ा: पुलिस ने ‘मानसिक बीमार’ बताकर छोड़ा

बांग्लादेश के चटगाँव में हिन्दू श्रद्धालुओं ने शनिवार (21 अक्टूबर 2023) एक मुस्लिम युवक को दुर्गा पूजा पंडाल में कुरान की प्रतियों से भरे बैग को लेकर घुसते हुए शाह आलम को पकड़ा। उसे पुलिस के हवाले कर दिया। लेकिन पुलिस ने आलम को मानसिक तौर पर बीमार बताते हुए बिना जाँच के उसे छोड़ दिया। हालाँकि बाद में जब उसे छोड़े जाने की खबर सोशल मीडिया में वायरल हो गई तो पुलिस ने दोबारा से उसे हिरासत में ले लिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक घटना चटगाँव के हथजारी इलाके की है। यहाँ के सोमपुरा इलाके में हिन्दू समुदाय ने श्रीश्री रक्षाकाली मंदिर में दुर्गा पूजा पांडाल लगाया था। 21 अक्टूबर को इस पांडाल में शाह आलम नाम का एक व्यक्ति रात के लगभग 8 बजे चुपके से बैग ले कर घुस रहा था। उसके हावभाव से पूजा उत्सव समिति के महासचिव गोबिंदा कांतिनाथ को शक हुआ। आलम को रोक कर उसकी तलाशी ली गई तो बैग में कुछ अन्य सामान के साथ कुरान की प्रतियाँ और मज़हबी किताबें भी मिली।

श्रद्धालुओं ने शाह आलम का नाम पूछा तो वह खामोश रहा। उसने खुद को पागल बताया। फ़ौरन ही इस मामले की जानकारी पुलिस को दी। हथाजारी थाने से आए सब-इंस्पेक्टर जसीम ने शाह आलम को हिरासत में ले लिया। पूजा उत्सव समिति के सदस्यों का आरोप है कि पुलिस ने बिना जाँच के ही आलम को मानसिक तौर पर कमजोर बता कर छोड़ दिया। दावा किया जा रहा है कि पुलिस की कस्टडी में भी आरोपित अजीब व्यवहार कर रहा था। पूजा समिति को आशंका है कि शाह आलम किसी गड़बड़ी की साजिश के साथ पंडाल में आया था।

आधिकारिक बयान में हथजारी पुलिस स्टेशन के प्रभारी एम डी मोनिरुज्जमान ने भी शाह आलम को मानसिक समस्या से ग्रसित बताया है। उन्होंने दावा किया है कि आलम के घर वालों ने उसके मेडिकल प्रमाण भी जमा किए हैं। इन सबूतों में 16 अक्टूबर 2023 को शाह आलम का ढाका के मेडिकल कॉलेज में इलाज करने का रिकॉर्ड भी शामिल है। पुलिस का कहना है कि शाह आलम होरोशाल से चटगाँव आ कर दरगाहों, मस्जिदों और मंदिरों के आसपास घूम रहा था।

आलम माइजभंडार शरीफ नाम की दरगाह का अनुयायी भी है। लगभग 8 बजे हिरासत में लिए गए आलम को रात 11 बजे पुलिस ने छोड़ दिया। यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। खुद पर सवाल खड़ा होता देख कर पुलिस ने रात लगभग 2 बजे फिर से शाह आलम को हिरासत में ले लिया। वह माइजभंडार शरीफ दरगाह इलाके में ही मिला। फिलहाल पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि वो क़ुरान की प्रतियों से भरा बैग लेकर दुर्गापूजा पंडाल में क्यों गया था।

कोमिला के हिंदू विरोधी दंगे

गौरतलब है कि 13 अक्टूबर 2021 को इकबाल हुसैन नाम के एक 35 वर्षीय व्यक्ति ने बांग्लादेश के कोमिला जिले में नानुअर दिघिर पार दुर्गा मंदिर में बजरंग बली के चरणों में कुरान की एक प्रति रख दी थी। इस घटना के बाद पूरे बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। तब हिन्दू समुदाय इस घटने में अपनी संलिप्तता से इनकार करता रहा, लेकिन उनकी एक न सुनी गई थी।

इस हिंसा के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे। इन वीडियो में हिंदू समुदाय के घरों और मंदिरों को निशाना बनाती भीड़ को मूर्तियाँ तोड़ते और उन्हें तालाब में फेंकते देखा जा सकता है। बाद में पुलिस जाँच में इस घटना के पीछे एक मस्जिद के केयरटेकर इकबाल हुसैन की साजिश सामने आई थी। इकबाल को 21 अक्टूबर 2021 को गाज़ीपुर के टोंगी पुरबा पुलिस स्टेशन की टीम ने कॉक्स बाजार से विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर लिया था। 3 मार्च 2023 को हुसैन को 16 महीने कारावास की सजा सुनाई गई थी।

आप उनकी मस्जिद के लिए पैसा दें, वे चाहते हैं कि अयोध्या में मस्जिद की बुनियाद PM मोदी रखें और वे ₹15 लाख लेकर भी राम मंदिर में डालेंगे अड़ंगा

एक तरफ अयोध्या के धन्नीपुर में अरबी स्टाइल में बनने वाली मस्जिद के लिए हिंदू पैसा दे रहे हैं। दूसरी ओर कुछ मुस्लिम संगठन बद्र मस्जिद का अड़ंगा डालकर राम मंदिर को विवादों में लाना चाहते हैं। इन सबके बीच अयोध्या के मुस्लिमों की ख्वाहिश यह भी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब जनवरी 2024 में राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के लिए आएँ तो धन्नीपुर की मस्जिद की बुनियाद भी रख दें।

कुल मिलाकर यह उसी गंगा-जमुनी तहजीब का नमूना है जिसमें वर्षों से भारत का हिंदू पिसता रहा है। जिसके कारण उसे अपने अराध्य श्रीराम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बनाने के लिए करीब 500 साल की प्रतीक्षा करनी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी।

प्राण-प्रतिष्ठा से ठीक पहले राम मंदिर को लेकर विवाद खड़े करने की कोशिश वाला संगठन अंजुमन मुहाफिज मसाजिद व मकाबिर कमेटी है। इस समूह ने राम परिपथ में आने वाली उस मस्जिद को ले कर शिकायत दर्ज करवाई है, जिसको शिफ्ट करने का एग्रीमेंट सबकी सहमति से पहले ही लिखित तौर पर हो चुका है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला अयोध्या के पांजी टोला स्थित मस्जिद बद्र से जुड़ा हुआ है। यह मस्जिद अयोध्या से लखनऊ-गोरखपुर नेशनल हाईवे को जोड़ने वाले 13 किलोमीटर रामपथ के मार्ग पर मौजूद है। मुस्लिमों का दावा है कि यहाँ रोज इबादत होती है। गुरुवार (5 अक्टूबर 2023) को अंजुमन मुहाफिज मसाजिद व मकाबिर कमेटी के पदाधिकारी अध्यक्ष आजम कादरी के साथ अयोध्या के SDM राम कुमार शुक्ला के पास पहुँचे। एक ज्ञापन देते हुए इस मस्जिद को अवैध तरीके से राम जन्मभूमि ट्रस्ट को बेचे जाने का आरोप लगाया।

उपजिलाधिकारी को दी गई शिकायत में कमेटी के सदस्यों ने मस्जिद के मुतवल्ली रईस अहमद और गवाह नूर आलम पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि रईस अहमद और नूर आलम ने वक्फ की जमीन में बनी बद्र मस्जिद का 30 लाख रुपए में धोखाधड़ी व गुमराह करके समझौता किया है। इस समझौते के तहत इन दोनों को 15 लाख रुपए एडवांस भी मिलने का दावा कया गया है। शिकायत में तर्क दिया गया है कि वक्फ की जमीन बेचने का अधिकार रईस और नूर आलम को नहीं है।

अंजुमन मुहाफिज मसाजिद व मकाबिर कमेटी ने प्रशासन से रईस और नूर आलम पर FIR दर्ज कर कार्रवाई की माँग की है। कमेटी के ज्ञापन में मस्जिद की जमीन को खरीदने-बेचने पर भी रोक लगाने की अपील की गई है। कमेटी के अध्यक्ष आजम कादरी अयोध्या में सभी मस्जिद, कब्रिस्तान, दरगाह और मज़ार आदि की देखरेख का जिम्मा अपने ऊपर बताते हैं। उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वरिष्ठ अधिवक्ता आफताब अहमद ने भी मस्जिद की जमीन को बेचने या दान में देने का प्रयास अपराध बताया है। आफ़ताब ने भी रईस और नूर पर कार्रवाई की माँग उठाई है।

इस मामले पर अयोध्या के DM (जिलाधिकारी) नीतीश कुमार ने मीडिया से बातचीत में अंजुमन मुहाफिज मसाजिद व मकाबिर कमेटी द्वारा शिकायत मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि मामले की जाँच SDM प्रवर्तन अमित सिंह को सौंपी गई है। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं थाना प्रभारी रामजन्मभूमि ने भी मामले में जाँच जारी होने की बात कही है।

क्या है समझौते में

1 सितंबर 2023 को हुए इस फैसले में रईस अहमद द्वारा मस्जिद को 100 साल पुरानी बताया गया है। कागजातों में यह मस्जिद पैसे के अभाव में जर्जर होने की जानकारी दी गई है। मस्जिद को स्थानांतरित करने के लिए 6 माह की समय सीमा तय की गई थी। इसी के एवज में 15 लाख रुपए एडवांस के तौर पर रईस को दिए गए थे।

बहकावे में लगाए जा रहे आरोप

इस मामले में आरोपित किए जा रहे मस्जिद के मुतवल्ली रईस अहमद की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। दैनिक भास्कर से बात करते हुए उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। रईस का दावा है कि उनका एग्रीमेंट मस्जिद को हटाने का नहीं बल्कि उसे शिफ्ट करने के लिए हुआ था। रईस ने बताया कि मस्जिद का आधा हिस्सा पहले ही सड़क को चौड़ा करने में जा चुका है और सिर्फ बद्र मस्जिद ही नहीं बल्कि पूरा मोहल्ला ही रामजन्मभूमि ट्रस्ट अधिग्रहित करने वाला है।

बद्र मस्जिद के मुतवल्ली रईस के अनुसार 1 सितंबर 2023 को रामजन्मभूमि ट्रस्ट के साथ मस्जिद शिफ्ट करने का करार अकेले उनका नहीं, बल्कि सबकी सहमति से था। इस करार के दौरान मस्जिद में आने वाले नमाजी भी मौजूद बताए गए। रईस का दावा है कि जनवरी माह में वक्फ बोर्ड से जुड़े लोग भी आए थे, जब मस्जिद का आधा हिस्सा सड़क में जाने वाला था। दावा है कि तब वक्फ के अधिकारियों ने रईस अहमद से सरकार से जुड़े मैटर में मस्जिद की भलाई को देखते हुए फैसला करने को कहा था। रईस का दावा है कि कुछ लोग अब बहकावे में आ कर उन पर फर्जी आरोप लगा रहे हैं।

‘मैंने अपने हाथों से 10 यहूदियों को मारा है, आप WhatsApp खोलो और देखो’: बेटे ने कॉल कर बताया तो अब्बा बोला- अल्लाहू अकबर

7 अक्टूबर 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने अचानक हमला कर इजरायल में सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी थी। आतंकियों ने इस दौरान काफी बर्बरता दिखाई और ​आम लोगों की हत्या का जश्न भी मनाया। ऐसे ही एक आतंकी ने अपने घर फोन कर अब्बा को सूचना दी कि उसने अपने हाथों से 10 यहूदियों को मार दिया है। जवाब में उसके अब्बा ने ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे लगाए।

इजरायल के विदेश मंत्रालय ने इस फोन कॉल की रिकॉर्डिंग एक्स ट्विटर पर शेयर की है। कॉल करने वाले आतंकी की पहचान महमूद के तौर बताई है। इस आतंकी ने 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल में कत्लेआम मचाया था।

कत्लेआम के बाद अपने अब्बा को कॉल कर इस्लामी आतंकी कहता है, “मैं आपको किब्बुत्ज (जहाँ हमला हुआ था) से फ़ोन कर रहा हूँ। आप व्हाट्सएप खोलो और कत्ल किए गए लोगों को देखो। देखो मैंने कितने लोगों को अपने हाथों से मारा है। तुम्हारे बेटे ने यहूदियों को मारा है।”

आगे वह कहता है, “मैं तुम्हें एक मारे हुए यहूदी के फोन से कॉल कर रहा हूँ। मैंने उसे और उसके पति को मार दिया। मैंने अपने हाथों से 10 यहूदियों को मारा है। व्हाट्सएप खोलिए और देखिए मैंने कितने लोगों को मारा है।”

रिकॉर्डिंग सुनने से ऐसा लगता है कि इस बर्बरता से आतंकी का पिता भी प्रसन्न होता है। वह अपने बेटे की बातों के जवाब में ‘अल्लाहू अकबर’ बार बार दोहराता है। वह बेटे की सलामती की बात भी फोन कॉल के दौरान करता है। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को दक्षिणी इजरायल के किब्बुत्ज इलाके में हमास आतंकियों ने घर-घर में घुसकर लोगों को मारा था।

हमास के इस हमले में करीब 1400 इजरायलियों की मौत हुई है। 3000 से अधिक लोग घायल हैं। हमास आतंकियों की कुछ फुटेज भी सामने आई थी, जिसमें हत्या के बाद वे जश्न मनाते दिखे थे।

हमास एक मजहबी तंजीम, लक्ष्य यहूदियों का खात्मा

हमास के आतंकियों की बर्बरता की नई कहानियाँ रोज सामने आ रही हैं। इस्लामी आतंकी संगठन हमास के संस्थापक शेख हसन युसूफ के पुत्र मोसाब हसन युसूफ ने हमास की प्लानिंग को दुनिया के सामने रखा है।

मोसाब ने बताया है कि हमास कोई राजनीतिक संगठन नहीं है। यह एक मजहबी संगठन है। उसने बताया बताया है कि उसके अब्बा यहूदियों को समाप्त कर दुनिया भर में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। मोसाब ने कहा कि हमास की असलियत कहने में आज का मीडिया डरता है। हमास इजरायल से मजहबी जंग लड़ रहा है। हमास ने ही यह जंग चालू की है और जब भी उन्हें पैसों की जरूरत होती है वह इजरायल पर हमला करते हैं।

मोसाब ने कहा कि इजरायल को बेरुत और दोहा में बैठे हमास के आतंकी सरगनाओं का सर साँप की तरह काट कर कुचल देना चाहिए, क्योंकि वह ISIS से भी खतरनाक है। मोसाब अपने पिता की जिहादी विचारधारा से ताल्लुक नहीं रखते और इजरायल के लिए जासूस का काम कर चुके हैं।

‘हमारी भाषा संस्कृत से सबसे करीब, शब्द और व्याकरण में समानताएँ’: रिसर्च के लिए भारत पहुँचे यूरोप के इस विकसित देश के विद्वान, देश भर में लेक्चर सीरीज की योजना

यूरोप में एक देश है – उच्च आय वाला, विकसित और मानवीय विकास में समृद्ध। उत्तर-पूर्वी यूरोप में बाल्टिक सागर के किनारे स्थित ये देश संस्कृति भाषा में खासी रुचि रखता है। कारण – इसका मानना है कि इसकी भाषा और संस्कृति का जुड़ाव भारत की संस्कृत से है। लुथियानिया में संस्कृत के विद्वान विटिस विदुनस भारत पहुँचे हुए हैं। वो 444 वर्ष पूर्व स्थापित विल्नियस यूनिवर्सिटी के एशियन एवं बहुसांस्कृतिक अध्ययन विभाग में स्कॉलर हैं। उन्होंने नई दिल्ली स्थित ‘इंडियन इंटरनेशनल सेंटर’ में एक लेक्चर दिया।

इस दौरान उन्होंने भारत और लिथुआनिया में भाषाई समानता के तथ्य सामने रखे। इस मामले में लिथुआनिया और रिसर्च करना चाहता है और भारत में ऐसे कई लेक्चर आयोजित किए जाने हैं जिनमें ये पहला था। इस कार्यक्रम के दौरान भारत में लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविसीन भी मौजूद थीं। उन्होंने इस दौरान कहा कि संस्कृत, लिथुआनियाई भाषा की सबसे करीबी बहन है। उन्होंने कहा कि ये दोनों देशों के बीच एक विशेष बॉन्ड का काम भी करता है।

उन्होंने जानकारी दी कि भारत में लिथुआनिया के दूतावास ने देश भर में दोनों भाषाओं के इस कनेक्शन को पहचान दिलाने के लिए सक्रिय प्रयासों की शुरुआत की है। इसी के तहत विद्वान विटिस विदुनस की लेक्चर सीरीज आयोजित की जा रही है। उन्होंने बताया कि दोनों भाषाओं की समानताएँ शब्दावली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि व्याकरण की संरचना में भी समानताएँ हैं। इसमें कई अन्य रहस्योद्घाटन भी हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसमें अभी ज़्यादा खोज नहीं हुई है, इसमें और भीतर घुसने की ज़रूरत है।

राजदूत डायना मिकेविसीन ने बताया कि इस प्रक्रिया में भारत और लिथुआनिया, दोनों देशों के विद्वानों और शोधकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। पहले जागरूकता बढ़ाई जाएगी, उसके बाद परस्पर सहयोग पर जोर दिया जाएगा। इसके बाद रिसर्च पर सारा जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों ही देशों के विद्वानों के लिए ये रोचक होने वाला है। बता दें कि 16वीं शताब्दी में लिथुआनिया के कुछ ईसाई मिशनरी भारत आए थे, तभी से दोनों देशों के संबंध हैं। फरवरी 1992 से दोनों देशों में कूटनैतिक संबंध हैं।