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दिमाग अंडकोष में, मा$रचो# बॉलिंग, RSS से खौफ… अफगानिस्तान से हार के बाद पाकिस्तान में टूटी TV, बीवी चली गई होटल और मिल रही गालियाँ

विश्वकप क्रिकेट 2023 में हुए एक बड़े उलटफेर में सोमवार (23 अक्टूबर 2023) को चेन्नई में अफगानिस्तान की टीम ने पाकिस्तान को 8 विकेट से हरा दिया। इस जीत के हीरो रहे अफगानी बल्लेबाज इब्राहिम जारदान ने खुद को मिला प्लेयर ऑफ़ द मैच इनाम पाकिस्तान से निकाले गए अपने देश के शरणार्थियों को समर्पित किया है। इस उलटफेर के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के मीम्स शेयर हो रहे हैं। कई नेटिज़ेंस पाकिस्तान टीम का मजाक अलग-अलग तरीके से उड़ा रहे हैं।

X हैंडल @YearOfTheKraken ने 23 अक्टूबर को पाकिस्तानी यूजर्स के स्क्रीनशॉट शेयर किए। इन स्क्रीनशॉट में पाकिस्तानी खिलाड़ियों और खास कर बाबर आज़म को वहाँ के खेल प्रेमी गाली तक देते दिखाई दे रहे हैं। फिलिस्तीन का झंडा लगाए एक यूजर जेद (@angrybirdd__) ने लिखा कि उन्होंने 40 दर्शकों के आगे अपनी TV तोड़ डाली। इस घटना से नाराज होकर उनकी बीवी अपने बच्चों को लेकर हफ्ते भर के लिए होटल में रहने चली गई है।

वहीं एक अन्य यूजर @ahmeds4ys ने पाकिस्तानी टीम की खराब दशा की वजह खिलाडियों की नेतागीरी में रूचि को बताया है। उन्होंने सबूत के तौर पर कुछ तस्वीरों के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं। इन तस्वीरों में पाकिस्तानी खिलाड़ी अलग-अलग मौकों पर खेल के अतिरिक्त अलग-अलग गतिविधियों में शामिल होते दिख रहे हैं। अपनी टीम की करारी हार से आहत अब्दुल्लाह ने अपने स्पिनरों को डूब मरने की नसीहत दी है। उन्होंने लिखा, “हमारे स्पिनर एक विकेट भी नहीं ले पाए। अफगानिस्तान हम तुमको पाला हूँ रे। किसी को हँसाना सवाब (पुण्य) का नाम है और हमने वही किया।”

वहीं वेरिफाइड हैंडल वाली हरीन शाह का दावा है कि उनको विश्वस्त सूत्रों से खबर मिली है कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड पाकिस्तानी खिलाड़ियों के खाने में नींद की गोलियाँ मिला रहा है। हरीन शाह ने इसकी गहराई से जाँच करवाने की भी माँग की है।

पाकिस्तान की शहर शिनवारी ने अपने देश की हार की वजह खिलाड़ियों के सुरक्षा की चिंता बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ी चारों तरफ से RSS के लोगों से घिरे थे, जिससे उनमें डर बैठा था। हालाँकि कुछ ही देर बाद अपने किए गए एक अन्य ट्वीट में उन्होंने U टर्न लिया और अपने देश के सभी खिलाड़ियों को पूरी कौम की तरफ से लानत भेजी।

यामिना ने लिखा कि बाबर आज़म का दिमाग उसके अंडकोष में है और अंडकोष उनके दिमाग में। यामिना के मुताबिक अफगानिस्तान से इतनी बुरी हार की यही वजह है। वहीं नामालूम फराद ने हार के बाद अफगानी खिलाड़ियों को गले लगाने पर बाबर की निंदा की है। उन्होंने लिखा, “ये हमारा कैप्टन है या मोहब्बतें शाहरुख़ खान। भाई तो वहाँ वर्ल्ड कप खेलने गया है या गुरुकुल की हवाओं का रुख बदलने।”

एक अन्य यूजर @gayomarlic ने तो बाबर आज़म को इमरान खान के साथ जेल में डालने की अपील कर डाली है। उन्होंने कहा कि जेल में बाबर इमरान खान से कप्तानी के गुण सीखें। वहीं अहमद सलीम ने लिखा, “आधे टूर्नामेंट में ही कप्तानी छोड़ो बाबर आज़म। लं$ पर चढ़ाओ सबको। अपने लिए ही खेलो। इस मा$रचो* बॉलिंग से घंटा कुछ नहीं होगा।”

अजय यादव ने एक वीडियो शेयर करते हुए तालिबानियों को डांस करते दिखाया है। इस वीडियो के बैकग्राउंड में अफगान जलेबी गाने को मिक्स किया गया है। डांस करने वाले तालिबानियों के हाथों में बंदूकें दिखाई दे रही हैं।

इसके साथ सोशल मीडिया पर हैशटैग #PAKvsAFG लगातार ट्रेंड भी कर रहा है। इस ट्रेंड में कई अन्य लोगों ने भी अफगानिस्तान की जीत के बाद अलग-अलग तरह के मीन्स शेयर किए हैं।

New York Times = तवायफ फिल्म का गाना (हुजूर आते आते बहुत देर कर दी): इस्लामी आतंकियों के साथ फैलाई 500 लोगों के फर्जी मौत की खबर, अब दे रहा ज्ञान

हुजूर आते आते बहुत देर कर दी… तवायफ फिल्म का यह गाना ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ पर सही बैठ रहा है। पहले पूरी दुनिया में सैकड़ों लोगों की मौत की झूठी खबर फैलाई, अब कई दिनों के बाद ‘पत्रकारिता के आदर्श’ बाँच एक संपादकीय नोट जारी कर दिया।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने सोमवार (23 अक्टूबर,2023) को एक नोट प्रकाशित कर ये स्वीकार किया है कि गाजा के अस्पताल पर हुए हमले पर उनकी शुरुआती कवरेज हमास के दावों पर अधिक केंद्रित थी। उन्होंने माना (हालाँकि शब्द चयन ऐसा है, जिससे लग रहा कि आधे-अधूरे मन से माना) कि इसका कवरेज पत्रकारीय मानकों पर खरा होना चाहिए था।

गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के दौरान 17 अक्टूबर 2023 को गाजा शहर के अल-अहली बैपटिस्ट अस्पताल पर रॉकेट से हमला हुआ था। इसमें 500 लोगों के मारे जाने और कई के घायल होने का दावा किया गया था। यह दावा हमास के इस्लामी आतंकियों ने सोशल मीडिया पर खूब फैलाया।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने आतंकी हमास के इस दावे को बार-बार और अहमियत के साथ छापा था कि अल-अहली बैपटिस्ट अस्पताल में हुआ विस्फोट इजरायली हवाई हमले की वजह से हुआ। इस तरह की रिपोर्ट तब प्रकाशित की जा रही थी, जब इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) बार-बार सबूतों सहित कहती रही कि ये हमला फिलिस्तीन के इस्लामी आतंकियों के इजरायल की तरफ फेंके गए रॉकेट के मिसफायर होने से हुआ।

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक हफ्ते तक 500 लोगों की मौत की फेक न्यूज फैला कर अब माना कि 17 अक्टूबर को प्रकाशित खबर में संपादकीय गड़बड़ी हुई थी। ऐसा शायद इसलिए करना पड़ा होगा न्यूयॉर्क टाइम्स को क्योंकि अमेरिकी और अन्य अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों ने कहा है कि सबूत बताते हैं कि रॉकेट फिलिस्तीनी लड़ाकू ठिकानों से आया था।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है कि 17 अक्टूबर 2023 को हुए विस्फोट की उसकी शुरुआती कवरेज और उसके साथ हेडलाइन्स, न्यूज अलर्ट और सोशल पोस्ट हमास के दावों पर बहुत अधिक निर्भर थे। उन्होंने माना कि इस रिपोर्ट ने पाठकों को इस हमले की जानकारी को लेकर गलत धारणा दी।

फोटो साभार: न्यूयॉर्क टाइम्स

वेबसाइट के संपादकों ने माना कि संघर्ष के दौरान खबर की संवेदनशील प्रकृति और इसे मिले अहम प्रचार को देखते हुए टाइम्स संपादकों को शुरुआती न्यूज देने में अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी। इसके साथ ही इस बारे में अधिक सतर्क और साफ होना चाहिए था कि किस जानकारी को सत्यापित किया जा सकता है।

वो बल्लेबाज जिसने पाकिस्तान को दिया दोहरा दर्द: पहले गेंदबाजों को धोया, फिर ‘इस्लाम/मुस्लिम ब्रदरहुड’ करने वालों पर रगड़ा नमक

वर्ल्ड कप 2023 में अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को हरा कर बड़ा उलटफेर कर दिया। इस जीत में अफगानिस्तान की पूरी टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में एक यूनिट की तरह खेली। इसके उलट पाकिस्तान की टीम बैटिंग और बोलिंग दोनों ही मामले में फिसड्डी साबित हुई।

अफगान टीम के बल्लेबाज इब्राहिम जादरान ने सोमवार (23 अक्टूबर 2023) को अपने देश को जीत दिलाने में 87 रन बना कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस जीत के बाद प्लेयर ऑफ़ द मैच बने अफगानी ओपनर इब्राहिम जादरान ने अपना इनाम उन अफगानी शरणर्थियों को समर्पित किया है, जिन लोगों को पाकिस्तान ने वापस लौटा दिया था।

पाकिस्तान पर जीत के बाद मैच अफगानिस्तान के बल्लेबाज इब्राहिम जादरान ने ये बातें कहीं। जारदान ने पाकिस्तान पर मिली जीत और खुद को मिले इनाम को अपने व अपने देश के लिए बेहद ख़ुशी का पल बताया। इब्राहिम ने कहा:

“मैं इस मैन ऑफ द मैच पुरस्कार को उन लोगों को समर्पित करना चाहता हूँ, जिन्हें पाकिस्तान से अफगानिस्तान वापस भेजा गया है।”

मैदान में मौजूद दर्शकों ने तालियाँ बजा कर इस बयान का समर्थन किया। जादरान के इस बयान का 10 सेकेंड का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

इसी के साथ इब्राहिम ने गुरबाज के साथ हुई 130 रनों की साझेदारी को सकारात्मकता के साथ रनों का पीछा करने की सोच बताया। इब्राहिम ने बताया कि वो गुरबाज के साथ पहले भी काफी क्रिकेट खेल चुके हैं।

बताते चलें कि चेन्नई में हुए इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए पाकिस्तान ने अफगानिस्तान को 283 रनों का लक्ष्य दिया था। अफगानिस्तान ने यह लक्ष्य महज 2 विकेट गँवा कर 49 ओवरों में ही हासिल कर लिया। इससे पहले अफगान टीम इंग्लैंड को भी शिकस्त दे चुकी है।

गौरतलब है कि हाल के दिनों में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के शरणार्थियों को देश से बाहर करने का फैसला किया था। इस दौरान पाकिस्तान सरकार ने आदेश दिया था कि वो अपने देश में मौजूद बिना वीजा व वैध कागजात वाले अफगान नागरिकों को उनके देश वापस लौटाएगा। पाकिस्तान अब तक लगभग 13 लाख अफगानियों को वापस लौटा चुका है। मानवाधिकार आयोग के लोगों की अपील भी पाकिस्तान सरकार अनसुना कर रही है। पाकिस्तान एक इस्लामी मुल्क है, अफगानिस्तान से आए शरणार्थी भी इस्लाम को मानने वाले, ऐसे में ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ वाली बातें एक ढकोसले के अलावे शायद कुछ नहीं।

भारत-पाकिस्तान विभाजन के 76 साल बाद मिले भाई बहन… एक का नाम सुरिंदर कौर और एक ‘मोहम्मद इस्माइल’: बताइए कौन सीमा के इस तरफ और कौन उस पार

भारत-पाकिस्तान विभाजन को लगभग आठ दशक हो चुके हैं लेकिन अभी भी लाखों लोगों को विभाजन की विभीषिका के दौरान छूटे हुए अपनों के मिलने की आशा है। ऐसा ही एक मामला पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर से सामने आया है जहाँ 76 वर्षों के बाद विभाजन में अलग हुए भाई-बहन फिर से मिले।

रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय पंजाब के जालंधर की रहने वाली सुरिंदर कौर और पाकिस्तानी पंजाब के साहीवाल के रहने वाले मोहम्मद इस्माइल वर्ष 1947 में हुए विभाजन में अलग हो गए थे। वह एक बार फिर से 2023 में पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर में मिले हैं।

इस्माइल का कहना था कि वह विभाजन से पहले जालन्धर के शाहकोट कस्बे में रहते थे। सुरिंदर कौर उनकी चचेरी बहन थीं, विभाजन में दोनों परिवार अलग हो गए थे। दोनों मिलने पर भावुक हो गए और उनकी आँखों में आँसू थे। इन दोनों का मिलना करतारपुर कॉरिडोर और सोशल मीडिया के कारण संभव हो पाया है। इस्माइल ने बताया कि कुछ समय पहले एक स्थानीय यूट्यूबर द्वारा उनका वीडियो बनाया गया था जो कि वायरल हो गया।

इसके पश्चात ऑस्ट्रेलिया से सरदार मिशन सिंह ने सीमा के दोनों तरफ दोनों परिवारों से संपर्क किया और उन्हें मिलाने के प्रयास किए। हालाँकि, दोनों देशों के बीच राजनीतिक समस्याओं के कारण वीजा मिलने में समस्याएं आ रही थीं।

इसके लिए करतारपुर कॉरिडोर का रास्ता निकाला गया जहाँ भारतीय भी पाकिस्तान के भीतर करतारपुर साहिब में बिना वीजा जा सकते हैं। जालन्धर से सुरिंदर कौर इसी सुविधा का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान पहुँची जहाँ इस्माइल भी पहुँचे थे। दोनों के परिवार भी इस दौरान मौजूद थे।

हालाँकि, यह बात ध्यान देने वाली है कि सुरिंदर कौर जहाँ सिख हैं वहीं मोहम्मद इस्माइल मुस्लिम। इसका कारण यह हो सकता है कि पाकिस्तान में जाने के बाद इस्माइल को अपना सिख धर्म छोड़कर मुस्लिम बनना पड़ा हो क्योंकि पाकिस्तान में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना सदैव चरम पर रही है। करतारपुर में सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव ने अंतिम साँस ली थी। यहाँ एक भव्य गुरुद्वारा बना हुआ है। यह भारतीय सीमा से काफी निकट है। इस गुरूद्वारे में भारतीय श्रद्धालु जा सकें इसके लिए पाकिस्तान की सहायता से वर्ष 2019 में कॉरिडोर स्थापित किया गया था।

चेहरे पर जड़े मुक्के, बुजुर्ग सिख को मार डाला: अमेरिका के न्यूयॉर्क में फिर से हेट क्राइम, इससे पहले सिख युवक को पीट-पीट कर की थी पगड़ी उतारने की कोशिश

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में एक 66 वर्षीय सिख बुजुर्ग जसमेर सिंह की हत्या कर दी गई है। जसमेर सिंह की गाड़ी एक 30 वर्षीय युवक गिल्बर्ट ऍगस्टीन की गाड़ी से लड़ गई थी। जिसके बाद गिल्बर्ट ने जसमेर सिंह पर हमला कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, जसमेर सिंह और गिल्बर्ट की गाड़ी न्यूयॉर्क के क्वींस इलाके में बृहस्पतिवार (18 अक्टूबर, 2023) को आपस में टकरा गईं थी। इस टक्कर में दोनों गाड़ियों को क्षति पहुँची थी। जसमेर सिंह ने इसके पश्चात 911 डायल करके पुलिस को बुलाने की कोशिश की। गिल्बर्ट ने पुलिस को बुलाने से रोक किया और जसमेर सिंह से उनका फोन छीन लिया। जसमेर सिंह अपनी गाड़ी से निकल कर उसके पीछे गए और अपना फोन वापस लेकर आने लगे। हालाँकि, गिल्बर्ट ने सुमेर जसमेर सिंह को फोन करने से रोकने के लिए उनके चेहरे पर तीन बार मुक्के जड़ दिए।

इस चोट से उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद गिल्बर्ट वहाँ से अपनी फोर्ड मुस्तांग गाड़ी में बैठ कर भाग गया। मौके पर पहुँची मेडिकल टीम ने जसमेर सिंह को बचाने का प्रयास किया लेकिन चेहरे पर तेज लगी चोट के कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका।

जसमेर सिंह की मृत्यु पर न्यूयॉर्क शहर के मेयर एरिक एडम्स ने दुःख जताया और कहा कि जसमेर सिंह न्यूयॉर्क शहर को प्रेम करते थे और इस पीड़ादायक मौत के हक़दार नहीं थे। मेयर एरिक एडम्स ने शहर में सिखों की रक्षा को लेकर भी बात की। गिल्बर्ट ऍगस्टीन को शुक्रवार को न्यूयॉर्क पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसका ड्राइविंग लाइसेंस पहले ही निलंबित किया जा चुका था। उसकी गाड़ी की नम्बर प्लेट फर्जी थी। ऍगस्टीन के ऊपर हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

न्यूयॉर्क में सिख समुदाय के व्यक्ति पर एक सप्ताह के भीतर हुआ यह दूसरा हमला है। पिछले सप्ताह एक 19 वर्षीय सिख युवक को एक बस में मारा पीटा गया था जब वह गुरुद्वारे जा रहा था। सिख युवक कि पगड़ी भी उतारने की कोशिश भी की गई थी और नस्लवादी टिप्पणियाँ की गई थीं।

फसलों में विविधता लाइए, सरकार से पैसा पाइए… हरियाणा की खट्टर सरकार का किसानों को तोहफा: 42000 करोड़ लीटर पानी भी बचेगा, पर्यावरण की होगी रक्षा

हरियाणा में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार प्रदेश के किसानों को फसलों में विविधता लाने पर सहायता उपलब्ध करवाएगी। इससे राज्य में भूजल स्तर को गिरने से रोकने में सहायता मिलेगी और साथ ही पर्यावरण के अन्य आयामों को भी सुरक्षित किया जा सकेगा। हरियाणा सरकार ने इस योजना का नाम ‘मेरा पानी- मेरी विरासत’ रखा है। इस योजना के तहत वर्ष 2023-24 में 42,480 करोड़ लीटर पानी बचाया जाएगा। इस योजना को सबसे पहले वर्ष 2020 में चालू किया गया था।

किसानों को इसके तहत कम पानी लेने वाली फसलों को लगाने पर 7000 रुपए प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वर्ष 2020 में प्रदेश के 41 हजार से अधिक किसानों ने इस योजना का लाभ लिया था। तब राज्य सरकार ने किसानों को 45 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि दी थी। इस पूरी कवायद में 22 हजार करोड़ लीटर से अधिक पानी की बचत की गई थी।

इस बार लक्ष्य है कि प्रदेश में 1.2 लाख एकड़ भूमि पर फसलों में विविधता लाई जाए। लगभग 84 करोड़ रुपए के बजट से इस बार 42 हजार करोड़ लीटर पानी बचाने की कवायद इस बार ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत की जाएगी। गौरतलब है कि हरियाणा और पंजाब में धान जैसी फसलों की खेती की अधिकता की वजह से कृषि भूमि का भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। यह समस्या पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी है। हरियाणा सरकार ने इससे निपटने के लिए अब फसल विविधता का निर्णय लिया है।

एक रिपोर्ट बताती है कि हरियाणा के अंदर 60% गाँवों में भूजल की स्थिति गंभीर है। जितना पानी हर साल बारिश के कारण नीचे जमीन में रिचार्ज हो रहा है उससे कहीं अधिक सिंचाई में उपयोग हो जा रहा है। भविष्य में यह बहुत बड़ी दिक्कत पैदा कर सकता है। इससे मात्र खेती ही नहीं बल्कि रोजगार के क्षेत्र में भी बड़ा असर पड़ेगा। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा में 61% जल स्रोतों से आवश्यकता से अधिक भूजल निकाला जा चुका है। इन्हीं सब चुनौतियों से लड़ने के लिए अब राज्य सरकार इन योजनाओं का सहारा ले रही है।

इस्लामी मुल्क में 2 महिला पत्रकारों को सज़ा, गुनाह – पुलिस हिरासत में मौत वाली खबर कवर की: महसा अमीनी की हत्या के बाद पूरे ईरान में हुआ था हिजाब विरोधी आंदोलन

ईरानी रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने बीते साल 2022 में कुर्दिश-ईरानी महिला महसा अमिनी की हिरासत में हुई मौत की कवरेज के लिए दो महिला पत्रकारों को वर्षों की जेल की सजा सुनाई। ये जानकारी इस मुल्क की सरकारी मीडिया समाचार एजेंसी आईआरएनए ने रविवार (22 अक्टूबर,2023) को दी।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, निलोफर हामेदी और इलाहे मोहम्मदी को अमेरिकी सरकार के साथ सहयोग करने और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने के आरोपों में 13 और 12 साल जेल की सजा सुनाई गई। हालाँकि, दोनों पत्रकारों और उनके वकीलों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

बीते 16 सितंबर 2022 में कथित तौर पर इस्लामी ड्रेस कोड का उल्लंघन करने के आरोप में नैतिकता पुलिस की हिरासत में 22 साल की अमिनी की मौत ने पूरे ईरान में कई महीनों तक बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। ये दशकों में ईरान के मौलवी नेताओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी।

सज़ा पाई दोनों महिला पत्रकारों ने पुलिस हिरासत में कुर्द छात्रा महसा अमीनी की मौत की रिपोर्टिंग में अहम भूमिका निभाई थी। छात्रा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद पूरे ईरान में विरोध प्रदर्शन शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही सितंबर 2022 में पत्रकारों, निलोफ़र हमीदी और इलाहे मोहम्मदी को गिरफ्तार किया गया था। उनका ट्रायल इस साल 2023 मई आखिर में शुरू हुआ।

बीते 13 महीनों तक दोनों पत्रकारों को हिरासत में रखने के बाद, तेहरान की क्रांतिकारी अदालत के 15वें चैंबर ने आखिरकार 22 अक्टूबर को अपनी सजा का ऐलान किया। हाम मिहान (Ham Mihan) की रिपोर्टर इलाहे मोहम्मदी के लिए 12 साल की जेल और शार्घ डेली (Shargh Daily) की रिपोर्टर निलोफर हामेदी के लिए 13 साल की जेल सुनाई।

इस अदालत ने उन्हें उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों का दोषी पाया। मोहम्मदी को संयुक्त राज्य अमेरिका की शत्रुतापूर्ण सरकार के साथ सहयोग करने के लिए छह साल जेल की सजा सुनाई गई थी। राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ अपराध करने की साजिश रचने और मिलीभगत करने के लिए पाँच साल और इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ प्रचार के लिए एक साल की सजा सुनाई गई थी। इस तरह से उन्हें कुल 12 साल की सजा मिली।

उधर हामेदी को इन्हीं आरोपों के तहत दोषी ठहराया गया था, लेकिन उनकी जेल की कुल सज़ा 13 साल थी, क्योंकि उन्हें दुश्मन अमेरिकी सरकार के साथ सहयोग करने के लिए सात साल की सजा मिली। इसमें उन्हें ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने’ के लिए पाँच साल की अतिरिक्त जेल और प्रचार के लिए एक साल की सजा दी गई।

इसके अलावा, हामेदी को राजनीतिक दलों या समूहों की सदस्यता, सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने या मीडिया में काम करने पर दो साल के प्रतिबंध की सजा सुनाई गई थी। वहीं ईरानी न्यायपालिका की आधिकारिक समाचार वेबसाइट ने रविवार को कहा कि हामेदी और मोहम्मदी को क्रमशः 13 साल और 12 साल की जेल हुई, लेकिन उन्हें पूरी सजा नहीं काटनी होगी।

न्यायपालिका की वेबसाइट में कहा गया है, “दोनों महिला पत्रकारों के मामलों में, अमेरिकी सरकार से जुड़ी कुछ संस्थाओं और लोगों के साथ संबंधों के सिद्ध सबूत हैं, जो जानबूझकर और सुरक्षा-विरोधी नीतियों को दरकिनार करते हुए किया गया काम है।”

वेबसाइट के मुताबिक, दोनों महिला पत्रकारों की सज़ाओं को संभावित रूप से कम किया जा सकता है। प्रारंभिक सज़ा के ख़िलाफ़ तेहरान की अदालत में 20 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है। यदि अपील अदालत अपने फैसले को बरकरार रखती है, तो हामेदी को कम से कम सात साल जेल की सजा काटनी होगी, और मोहम्मदी को कम से कम छह साल की सजा काटनी होगी।

हामेदी के पत्रकार के पति ने एक्स पर पोस्ट किया गया था, हामेदी को उसके जन्मदिन पर एक पारिवारिक सफर पर जाने के दौरान इस फैसले की सूचना मिली थी। हामेदी और मोहम्मदी 22 सितंबर, 2022 से प्री ट्रायल हिरासत में हैं, क्योंकि उन्होंने 16 सितंबर को 22 साल की महिला महसा अमिनी की मौत की सूचना दी थी। वे अमिनी के अस्पताल में भर्ती होने पर खबर देने वाले पत्रकारों में से थीं।

पत्रकारों की सुरक्षा करने वाली समिति (CPJ) ने पत्रकार नीलोफर हमीदी को 13 साल और इलाहे मोहम्मदी को दी गई 12 साल की जेल की सजा के फैसले की निंदा की है और उनकी तत्काल रिहाई की माँग की है।

गौरतलब है कि सीपीजे की 2022 जेल जनगणना में बताया गया है कि ईरान की जेलों में सबसे ज़्यादा पत्रकार बंद हैं। इसमें 1 दिसंबर तक सलाखों के पीछे बंद लोगों का दस्तावेजीकरण किया गया है। कुल मिलाकर, ईरानी अधिकारियों को अमीनी की मौत के बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के मद्देनजर कम से कम 95 पत्रकारों को हिरासत में लेने के लिए जाना जाता है।

वहीं रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ईरानी रिवोल्यूशनरी कोर्ट के इस झूठे केस में दो महिला पत्रकारों को दी गई 12 और 13 साल की अपमानजनक जेल की सजा से खौफ और फिक्र में हैं। सीपीजे के मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम समन्वयक शेरिफ मंसूर ने कहा, “नीलोफर हामेदी और इलाहे मोहम्मदी की सजा एक मजाक है और अभिव्यक्ति की आजादी के क्षरण और पत्रकारिता को अपराधीकरण करने के ईरानी सरकार की हताश कोशिशों का एक साफ सबूत है।”

मैच छोड़ दिया लेकिन बेईमानी के आगे सरेंडर नहीं किया, जब बिशन सिंह बेदी ने वापस बुला लिए अपने दोनों बल्लेबाज: भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान का निधन

भारत के पूर्व स्पिन गेंदबाज बिशन सिंह बेदी का 23 अक्टूबर, 2023 को 77 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह जाने-माने पूर्व क्रिकेटर थे और अपने समय के प्रख्यात गेंदबाजों में से एक थे। बिशन सिंह बेदी की मृत्यु के साथ ही उनके क्रिकेट करियर के किस्से कहानी भी सामने आ रहे हैं। बिशन सिंह बेदी भारत के कप्तान भी रहे हैं। उनको अपनी टीम के लिए सदैव खड़ा रहने वाला कप्तान माना जाता था। इसी से जुड़ा एक किस्सा उनकी टीम के 1978 के पाकिस्तान दौरे का है जब उन्होंने जीता-जिताया मैच पाकिस्तानी अंपायरों की बेईमानी के चलते छोड़ दिया।

बिशन सिंह बेदी की कप्तानी और अंशुमान गायकवाड़, चेतन चौहान, कपिल देव और मोहिंदर अमरनाथ जैसे सितारों से सजी टीम पाकिस्तान के दौरे पर गई हुई थी। यह तीन एकदिवसीय (ODI) मैचों की एक श्रृंखला थी। पाकिस्तान की टीम में इमरान खान, जावेद मियाँदाद और ज़हीर अब्बास जैसे खलाड़ी शामिल थे।

3 नवम्बर, 1978 को खेला गया यह मुकाबला श्रृंखला का अंतिम मैच था। इससे पहले श्रृंखला 1-1 से बराबर हो चुकी थी। पहला मैच जो कि क्वेटा में खेला गया था वह भारत ने जबकि सियालकोट में खेला गया मैच पाकिस्तान ने जीता था।

तीसरा मुकाबला साहीवाल में हो रहा था। इस मैच में टॉस पाकिस्तान ने जीता और उनके कप्तान मुश्ताक मुहम्मद ने निर्णय लिया कि वह पहले बैटिंग करेंगे। भारतीय बॉलर्स के सामने आसिफ इकबाल (62) और माजिद खान (37) के अलावा अन्य कोई पाकिस्तानी बल्लेबाज चले नहीं।

इन दोनों बल्लेबाजों के अलावा अन्य कोई भी बल्लेबाज 30 रन के आँकड़े को पार नहीं कर सका। भारतीय गेंदबाजों कपिल देव, मोहिंदर अमरनाथ और वेंकटराघवन की कसी हुई गेंदबाजी के कारण तीनों को 2-2 विकेट मिले। इन सब की बदौलत पाकिस्तान 40 ओवर में 205 रन ही बना सका।

भारत के लिए यह लक्ष्य कोई बहुत मुश्किल नहीं था। ओपनर बल्लेबाज चेतन चौहान और अंशुमान गायकवाड़ ने पाकिस्तानी गेंदबाजों को खूब छकाया। अंशुमान गायकवाड़ ने 78 रन बनाए जबकि चेतन चौहान ने दूसरे छोर से उनका साथ देते हुए 23 रन जोड़े। चेतन के विकेटकीपर वसीम बार के हाथों कैच गँवा बैठने पर सुरिंदर अमरनाथ ने 75 गेंदों में 62 रनों की धुआँधार पारी खेली। उनके आउट होने के बाद गुंडप्पा विश्वनाथ आकर खेल रह थे, जब 38वें ओवर की शुरुआत हुई।

तीन ओवर शेष रहने पर भारत को मात्र 23 रन बनाने थे और अंशुमान गायकवाड़ अब भी बल्लेबाजी कर रहे थे और पाकिस्तानी गेंदबाजों की पिटाई कर रहे थे। 38वें ओवर में पाकिस्तानी गेंदबाज सरफराज नवाज गेंदबाजी करने आए। यहीं से पाकिस्तानी बेईमानी चालू हो गई। सरफराज नवाज ने एक बाउंसर फेंका जो कि किसी भी तरीके से वाइड थी। हालाँकि, पाकिस्तानी अंपायरों ने से वाइड करार नहीं दिया।

इसके बाद लगातार अगली तीन गेंदों तक यही हुआ। सरफराज ऊँची गेंद फेंकते, वह बल्लेबाज की पहुँच से बाहर होती और अंपायर उन्हें वाइड मानने से मना कर देता। पाकिस्तानी टीम और अंपायरों की इस बेईमानी को बिशन सिंह बेदी पवेलियन से देख रहे थे।

चार गेंदों के बाद उन्होंने अपने दोनों बल्लेबाज अंशुमान गायकवाड और गुंडप्पा विश्वनाथ को वापस बुला लिया। उन्होंने पाकिस्तानी बेईमानी के विरोध में अपने बल्लेबाज खिलाने से मना कर दिया। यह मैच और सीरीज पाकिस्तान जीत गया लेकिन बिशन सिंह बेदी अपनी टीम के पीछे चट्टान की तरह खड़े रहे।

एकदिवसीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौक़ा था जब किसी कप्तान ने मैच ने अपने बल्लेबाज वापस बुला लिए हों। हालाँकि, बिशन सिंह बेदी ही टेस्ट में ऐसा काम पहले कर चुके थे। वर्ष 1976 में बेदी ने वेस्टइंडीज के विरुद्ध किंग्स्टन मैदान पर अपने 5 बल्लेबाजों को दूसरी पारी में उतारने से मना कर दिया था क्योंकि वेस्टइंडीज के गेंदबाज खतरनाक गेंदबाजी कर रहे थे और लगातार उनकी टीम के सदस्य चोटिल हो रहे थे।

बिशन सिंह बेदी को उनकी तगड़ी गेंदबाजी के अलावा इन घटनाओं के लिए भी याद किया जाता है। उनकी टीम के पीछे लगातार खड़े रहने की आदत आगे चल कर भारतीय टीम का सूत्र बन गई। बिशन सिंह बेदी की मृत्यु पर तमाम क्रिकेट खिलाड़ियों समेत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

‘टाइमपास है लिव इन रिलेशनशिप’: परिवार की मर्जी के खिलाफ सोहिल के साथ भागी थी हिन्दू लड़की, याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुरक्षा देने से किया इनकार

इलाहबाद हाईकोर्ट ने अपनी एक टिप्पणी में लिव इन रिलेशनशिप जैसे रिश्तों को अस्थाई और नाजुक बताते हुए टाइम पास जैसा कहा है। न्यायाधीशों ने एक मुस्लिम युवक के साथ लिव इन रिलेशन में रहने की दलील दे कर पुलिस सुरक्षा चाह रही हिन्दू लड़की की माँग को अस्वीकार कर दिए। 25 सितंबर, 2023 को दिए गए इस फैसले में हाईकोर्ट ने प्रेमी जोड़े को जीवन को कठिनाइयों से भरा बताते हुए इसे फूलों का बिस्तर न समझने की भी नसीहत दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पूरा मामला मथुरा जिले के रिफायनरी थाना क्षेत्र का है। 17 अगस्त, 2023 को यहाँ एक हिन्दू महिला ने पुलिस ने अपनी भतीजी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने यह केस IPC की धारा 366 के तहत दर्ज करते हुए सोहिल नाम के युवक को नामजद किया। पीड़िता ने अपनी भतीजी के साथ किसी अनहोनी की भी आशंका जताई थी। यह FIR दर्ज कर के पुलिस ने सोहिल की तलाश शुरू कर दी थी। इस बीच आरोपित सोहिल ने रिश्तेदार एहसान फ़िरोज़ के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।

इसी याचिका में वह लड़की भी शामिल है जिसके अपहरण की जाँच मथुरा पुलिस कर रही थी। लड़की ने कोर्ट को बताया कि वह 20 साल की बालिग है और अपना भला-बुरा सोचने में सक्षम है। साथ ही वो सोहिल के साथ अपनी मर्जी से गई है। लड़की ने सोहिल के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहने की इच्छा जताते हुए अपने ही परिवार से खुद को खतरा बताया था और पुलिस सुरक्षा की माँग की थी। याचिकाकर्ताओं की तरफ से यह भी माँग की गई थी कि हाईकोर्ट पुलिस को निर्देश दे कि सोहिल पर दर्ज FIR निरस्त की जाए। साथ ही इन सभी प्रक्रियाओं के दौरान सोहिल को गिरफ्तार न किया जाए।

हालाँकि, लड़की के परिजनों ने इस माँग का विरोध किया। लड़की के परिवार की तरफ से एडवोकेट श्रवण कुमार ने बहस की। उन्होंने आरोपित सोहिल को FIR में किसी भी राहत देने की माँग का विरोध किया। एडवोकेट श्रवण ने अदालत को बताया कि आरोपित सोहिल का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उस पर साल 2017 में मथुरा के छाता थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत केस भी दर्ज हुआ था। पीड़ित परिजनों ने अदालत से बताया कि सोहिल के साथ लड़की का भविष्य सुरक्षित नहीं है।

इस केस की सुनवाई न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी और मोहम्मद अज़हर हुसैन इदरीसी की बेंच ने की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अंतर्धार्मिक जोड़े को लिव इन रिलेशनशिप के दौरान पुलिस सुरक्षा देने की माँग को अस्वीकार कर दिया। अपनी टिप्पणी ने हाईकोर्ट ने कहा कि जीवन कठिनता से भरा है जिसे फूलों का बिस्तर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। अदालत ने यह भी माना कि सुप्रीम कोर्ट ने कई मौकों पर लिव इन रिलेशनशिप को सही माना है पर ऐसे रिश्तों में अक्सर ईमानदारी से अधिक एक दूसरे का मोह होता है।

इसी टिप्पणी में न्यायाधीशों ने कहा कि 22 साल की उम्र में महज 2 माह के अंदर किसी रिश्ते की परिपक्वता नहीं आँकी जा सकती है। ऐसे रिश्तों को नाजुक और अस्थाई बताते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि उनकी टिप्पणी का कोई गलत अर्थ न लगाया जाए। अंतिम फैसले में हाईकोर्ट ने जाँच जारी होने की स्थिति में प्रेमी जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने के निर्देश से इनकार कर दिया।

शशि थरूर के लिए ‘बच्ची’ जैसी हैं महुआ मोइत्रा: कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा- वह मेरे से 20 साल छोटी, फोटो सीक्रेट मीटिंग की नहीं

पैसा लेकर संसद में सवाल पूछने को लेकर विवादों में घिरी तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा की पिछले दिनों कुछ तस्वीरें वायरल हुईं थी। इनमें वह कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के साथ जाम से जाम टकराती और सिगार को फूँक मारती नजर आईं थी। सोशल मीडिया में इन तस्वीरों को शेयर करते हुए यूजर्स ने पूछ था कि दोनों के बीच क्या पक रहा है

तिरुवनंतपुरम से शशि थरूर की इन तस्वीरों पर सफाई सामने आई हैं। उन्होंने कहा है कि ये तस्वीरें एक बर्थडे पार्टी की है। महुआ मोइत्रा उनके लिए बच्ची जैसी हैं। तस्वीरों को गलत नीयत और क्रॉप करके फैलाया जा रहा है। उन्होंने इसे घटिया राजनीति करार दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार केरल के कोट्टायम में थरूर ने कहा, “जो फोटो वायरल की जा रही हैं, वे महुआ मोइत्रा के जन्मदिन पर आयोजित पार्टी की है। यह फोटो उसी समय खींची गई थी। अब इस फोटो को लेकर कहा जा रहा है कि यह सीक्रेट मीटिंग की है, जोकि सरासर गलत है। महुआ मुझसे 10 से 20 साल छोटी हैं। उस पार्टी में 15 लोग मौजूद थे। मेरी बहन भी इस पार्टी में आई हुई थी। लेकिन कुछ लोगों ने तस्वीरों से दूसरे लोगों को निकालकर इसे ऐसे पेश किया जैसे कोई सीक्रेट मीटिंग हो।”

कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा, “यह सिर्फ एक घटिया राजनीति है। उस बच्ची की जन्मदिन पार्टी थी। खैर, वह एक बच्ची नहीं हैं, लेकिन मेरे लिए वह एक तरह से बच्ची ही हैं, क्योंकि वह (महुआ मोइत्रा) मुझसे करीब 20 साल छोटी हैं।” थरूर ने यह भी कहा कि वह ऑनलाइन ट्रोल को ज्यादा महत्व नहीं देते हैं और उनका मुख्य फोकस जनता के लिए काम करना है।

इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद महुआ मोइत्रा ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा था, “मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुई कि बीजेपी की ट्रोल सेना द्वारा मेरी कुछ निजी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं। मुझे सफेद ब्लाउज की तुलना में हरे रंग की पोशाक अधिक अच्छी लगती है। और क्रॉप करने की जहमत क्यों उठानी है – रात के खाने में बाकी लोगों को भी दिखाओ। बंगाल की महिलाएँ जीवन जीती हैं। झूठ नहीं।”

गौरतलब है कि इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के आरोप लगे थे। आरोप है कि उन्होंने कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से महंगे गिफ्ट लेकर अडानी समूह के विरुद्ध संसद में प्रश्न पूछे। यह भी सामने आया कि उन्होंने प्रश्न पूछने के लिए संसद के पोर्टल का लॉगइन भी हीरानंदानी को दिया हुआ था। इस संबंध में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की शिकायत के मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने मामले को सदन की आचार समिति के पास भेज दिया था।

हीरानंदानी ने माना है कि महुआ मोइत्रा उनसे दुबई में आकर मिलती थीं। उन्हें ब्लैकमेल करती थीं। उनका गलत फायदा उठाती थीं। हालाँकि इसको लेकर टीएमसी सांसद का कहना है कि पीएमओ ने जबरन यह हलफनामा हीरानंदानी से दिलवाया है।