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‘जिहाद का नारा बर्दाश्त नहीं’: सड़क पर उतरे 1 लाख मुस्लिम तो खुल कर यहूदी समाज के साथ खड़े हुए UK के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, बोले – महसूस करा देंगे कानून की ताकत

यूनाइटेड किंगडम (UK) के प्रधानमंत्री ऋृषि सुनक ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को ब्रिटेन की सड़कों पर ‘जिहाद का ऐलान’ करने वालों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हम अपने देश में यहूदी विरोधी भावना को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उनका ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब इज़रायल पर हमास के हमले में हजार से अधिक लोग अपनी जान गँवा चुके हैं और इजरायल-फिलिस्तीन के बीच जंग जारी है।

पीएन सुनक ने साफ लहजे में कहा, “जिहाद का ऐलान न केवल यहूदी समुदाय के लिए, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा है।” गौरतलब है कि शनिवार को मध्य लंदन में फिलिस्तीन समर्थक रैली में लगभग 100,000 लोग शामिल हुए। इस दौरान इन लोगों को जिहाद के नारे लगाते हुए सुना गया।

दरअसल लंदन की पुलिस पर आरोप लगा था कि उन्होंने जिहाद के समर्थन में नारे लगाते लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर पुलिस अधिकारियों ने अपना बचाव करते हुए कानूनों में रद्दोबदल की बात की थी।

इस दौरान मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ सर मार्क रोवले की इस बात के लिए आलोचना की गई कि उनके विभाग के अधिकारी फ़िलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन में जिहाद के नारे लगाने वालों को गिरफ़्तार नहीं कर रहे थे। गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन को भी मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ ने यही पट्टी पढ़ाई थी। इसे लेकर पीएम सुनक ने यूके की संसद में जोरदार तहरीर दी।

इसे लेकर पीएम ऋषि सुनक ने एक्स पर पोस्ट किया, “इस सप्ताहांत हमने अपनी सड़कों पर नफरत देखी। जिहाद का ऐलान न केवल यहूदी समुदाय के लिए, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा हैं। हम अपने देश में यहूदी विरोधी भावना को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। और हम उम्मीद करते हैं कि पुलिस इस उग्रवाद से निपटने के लिए सभी जरूरी कार्रवाई करेगी।”

पीएम ऋषि सुनक ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि जो प्रदर्शनकारी घिनौने उग्रवाद को दोहराते हैं, उन्हें अब कानून की पूरी ताकत महसूस होगी। यूके की संसद हाउस ऑफ़ कॉमन्स में पीएम सुनक ने जिहाद को लेकर काफी कुछ कहा।

दरअसल मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ सर मार्क रोवले ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए पुलिस की शक्तियों के बारे में बहस के बीच सुझाव दिया कि कानूनों को फिर से बनाने की जरूरत हो सकती है। इस पर पीएम सुनक ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा, “जहाँ भी कानून में कमियाँ हैं, हमें उन्हें संबोधित करने और उन पर गौर करने में खुशी होगी।

पीएम सुनक ने आगे कहा, “लेकिन हमारा मानना है कि इस समय पुलिस के पास उन लोगों को गिरफ्तार करने की शक्तियाँ हैं जो हिंसा या नस्लीय नफरत भड़का रहे हैं, हमारी सड़कों पर इस तरह व्यवहार के लिए कोई जगह नहीं है और हम इस पर अधिकारियों को मार्गदर्शन के लिए जमीनी तौर पर बड़े पैमाने पर काम करेंगे ताकि वो खुद को मिली शक्तियों और साधनों के बारे में अच्छे से जान सकें और कानून की ताकत को महसूस करें।”

उन्होंने कहा कि ‘जिहाद और मुस्लिम सेनाओं के खड़े होने’ का ऐलान करना यहूदी समुदाय के लिए खतरा नहीं है बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा है। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर से पुलिस अपना काम करने के लिए आजाद है, लेकिन गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन ने उनके सामने ये मुद्दा उठाया है।

इस बीच पीएम सुनक ने साफ इशारा किया कि वीकेंड में फिलिस्तीन रैली में टिप्पणियों के बाद चरमपंथी माने जाने नारों को लगाने वालों को रोकने के लिए पुलिस को और अधिक अधिकार दिए जाने की संभावना नहीं है। दरअसल, मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ ने मौजूदा चरमपंथ विरोधी कानून पर चिंता जताते हुए कहा था कि इन कानूनों को फिर से तैयार करने की जरूरत हो सकती है। मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ ब्रेवरमैन बताया था कि जिहाद के कई मतलब हैं।

ब्रेवरमैन ने ये भी कहा कि आतंकवाद विरोधी एक्सपर्ट अधिकारियों ने शनिवार को मिली खास वीडियो क्लिप (लंदन रैली) से किसी भी अपराध की पहचान नहीं की है। दरअसल, गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को सर मार्क रोवले से मुलाकात की थी। वहाँ उनके जिहाद का नारा लगाने वाले फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारी से निपटने के तरीके पर चर्चा हुई थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि वीकेंड में मध्य लंदन में प्रदर्शन की फुटेज में किसी भी अपराध की पहचान नहीं की गई थी।

वसीम अकरम के लिए गन्दगी का मतलब हिंदुओं की एक जाति: काफिरों से मल-मूत्र साफ़ करवाने वाली मानसिकता, किसी टीवी पैनलिस्ट को कोई दिक्कत नहीं

जिस ‘चमार’ शब्द को बोलने-लिखने तक आपको भारत में जेल हो सकता है, वसीम अकरम उसे नेशनल टीवी पर बोलते हैं। इसके पीछे की वजह है पाकिस्तान के पैदा होने की मजहबी कहानी। वहाँ काफिरों के साथ क्या-क्या किया जाएगा, किया जा रहा है, इसकी एक झलक भर है वसीम अकरम का ‘चमार’ बोलना। ये न सिर्फ दलित समाज का अपमान है, बल्कि एक जाति विशेष पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी है। लेकिन, निशाना हिन्दू हैं तो पाकिस्तान में इसकी अनुमति है।

दरअसल, पूरा मामला वसीम अकरम के एक वीडियो से जुड़ा हुआ है। अफगानिस्तान बनाम पाकिस्तान मैच में पाकिस्तान के हारने के बाद एक स्पोर्ट्स चैनल पर पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर वसीम अकरम चर्चा कर रहे थे। उनके साथ अन्य पाकिस्तानी खिलाड़ी मोईन खान, शोएब मालिक तथा मिस्बाह उल हक मौजूद थे।

वसीम अकरम इस दौरान मैदान से मैच के बारे में रिपोर्ट करने की बात कर रहे थे। उनका कहना था कि मैदान से एक-डेढ़ घंटे रिपोर्ट करने पर शर्ट पर पसीने के दाग आ जाते हैं और अच्छा नहीं लगता, इस स्थिति की तुलना वह एक विशेष जाति का होने से करते हैं।

वसीम अकरम का यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और भारत में इस पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं कि वह एक जाति को इस तरह से कैसे कह सकते हैं। हालाँकि, पाकिस्तान में जिस तरह की हालत ‘काफिरों’ की है उससे वसीम अकरम की बात पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हमें ध्यान देना चाहिए कि पाकिस्तान से भारत आए शरणार्थियों या फिर वहाँ अत्याचार झेल रहे हिन्दुओं में बड़ी संख्या में दलित शामिल हैं। वसीम अकरम ने इसी वीडियो में पाकिस्तानी टीम की भी काफी आलोचना की।

वसीम अकरम ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि जो भी व्यक्ति अच्छा नहीं दिख रहा या पसीने में भीग कर गंदा हुआ है, वह जाति विशेष जैसा है। पाकिस्तान में यह सच्चाई भी है। दरअसल, पाकिस्तान में आज भी हिन्दू और ईसाइयों को मात्र सफाईकर्मी का काम ही दिया जाता है। पाकिस्तान में मुस्लिमों को इस काम से बाहर रखा गया है। पाकिस्तान में रहने वाला दलित वर्ग अन्य कोई पेशा नहीं अपना सकता। पाकिस्तानियों के दिमाग में यह पक्षपात आजादी के बाद से चला आ रहा है और वर्तमान में लगातार जारी है।

पाकिस्तान में दलितों से तो सीवर, गटर और नालियां साफ़ ही करवाई जाती हैं बल्कि उन व्यक्तियों से भी यह काम करवाया जाता है जो कि अपना हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बन चुके हैं। वसीम अकरम के बयान पर इस पूरे प्रोग्राम में बैठे हुए अन्य चारों व्यक्तियों को कोई समस्या नहीं हुई। भारत में ऐसा बोलने पर जेल हो जाती है, सामाजिक बहिष्कार हो सकता है और सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में दलितों के अधिकारों पर काम किया गया है लेकिन पाकिस्तान में इन्हें बराबर के दर्जे के मनुष्य नहीं समझा जाता।

जुलाई 2019 में पाकिस्तान की फ़ौज ने एक विज्ञापन दिया जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा हुआ था कि उसे सफाईकर्मी के रूप में ईसाई चाहिए। हालाँकि, बाद में यह विज्ञापन विरोध के चलते वापस ले लिया गया। जिन मुस्लिम सफाईकर्मियों को पाकिस्तान में भर्ती भी किया गया वह नाली नहीं साफ़ करते।

इस काम में पाकिस्तान में केवल ईसाई या हिन्दू दलित समुदाय के लोग ही लगाए जाते हैं। उन्हें मल-मूत्र से भरे गटर में उतारा जाता है। ऐसा ना करने पर उन्हें अन्य कोई रोजगार के साधन भी उपलब्ध नहीं हैं। इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान में मुस्लिमों को तो अधिकार हैं लेकिन अन्य कोई भी धर्म नाली आफ करने से ऊंचे ना उठ सके इसके लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। वसीम अकरम का यह ताजा बयान इसी का एक उदारहण है।

ऐसा सिर्फ पाकिस्तान में हो यह भी नहीं है। भारत का सिरमौर कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटने से पहले वाल्मीकि समुदाय को राज्य का नागरिक तक नहीं माना जाता था। आरक्षण आदि तो दूर वह अन्य कोई नौकरियों में भी हिस्सा नहीं ले सकते थे।

इन वाल्मीकि समुदाय के लोगों को जम्मू कश्मीर में 1950 के दशक में ले जाया गया था। तब से इनकी पीढ़ियों को इसी काम में लगाए रखा गया। अधिकारों के नाम पर इन्हें हमेशा वंचित रखा गया। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद इन्हें जम्मू कश्मीर के नागरिक होने का दर्जा मिला और उन्हें सफाईकर्मी के अलावा अन्य कामों को करने की आजादी मिली।

मदरसे में मौलवी ने कई बच्चों के साथ किया कुकर्म, मालिश के बहाने बुलाता था: मुँह बंद रखने के लिए देता था पैसों का लालच, गुजरात पुलिस ने दबोचा

गुजरात के एक मदरसे में छात्रों ने मौलाना पर अप्राकृतिक कुकर्म के आरोप लगाए हैं। पीड़ित छात्रों की कुल तादाद 7 बताई जा रही है। आरोपित 25 वर्षीय मौलाना का नाम मोहम्मद अब्बास है। कुकर्म के लिए मौलाना बच्चों को मालिश के बहाने कमरे में बुलाया करता था। इस मामले में मदरसे के ट्रस्टी दाऊद फकीरा पर भी शिकायत के बावजूद कार्रवाई न करने का आरोप है। पुलिस ने मौलाना और ट्रस्टी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी सोमवार (23 अक्टूबर 2023) को दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला जूनागढ़ में मांगरोल थाना क्षेत्र का है। यहाँ ‘मुफ़्ती साहेब दाऊद फकीरा के ट्रस्ट’ और ‘उलूम एजुकेशन ट्रस्ट’ के माध्यम से एक मदरसा संचालित होता है। इस मदरसे में स्थानीय बच्चों के साथ कुछ बाहर के छात्र भी पढ़ते हैं। लगभग 2 साल पहले यहाँ मौलाना मोहम्मद अब्बास बच्चों को उर्दू और दीनी तालीम देने के लिए आया था। आरोप है कि अब्बास छात्रों को अपने कमरे में मालिश के बहाने बुलवाया करता था। यहाँ वो छात्रों से अप्राकृतिक दुष्कर्म करता था।

अपनी हवस का शिकार बनाने के बाद मौलाना अब्बास बच्चों को मुँह बंद रखने की धमकी भी दिया करता था। कुछ बच्चों को संबंध बनाने के लिए पैसे का भी लालच दिया गया था। बच्चों ने मौलाना अब्बास की इस करतूत की शिकायत मदरसे के 55 वर्षीय ट्रस्टी दाऊद फकीरा से की थी। आरोप है कि उन्होंने इस शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया। ट्रस्टी दाऊद इस मदरसे के साथ ABSC नाम से एक इंग्लिश स्कूल भी चला रहा था।

इस बीच मौलाना द्वारा कुकर्म का शिकार एक 15 वर्षीय छात्र अपने घर में गुमसुम सा रहने लगा। छात्र के परिजनों ने इसकी वजह पूछी तो उसने सारी बात बता दी। बच्चे ने बताया कि वो पिछले 6 माह से मौलाना की हवस का शिकार बन रहा है। इस करतूत की जानकारी होने के बाद नाराज परिजन पुलिस में गए और उन्होंने मौलाना अब्बास और ट्रस्टी दाऊद के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इस शिकायत पर पुलिस ने IPC की धारा 377, 323, 506 और 144 के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया।

अपने खिलाफ केस दर्ज होने की भनक लगते ही मौलाना अब्बास फरार हो गया। पुलिस को उसकी लोकेशन सूरत में मिली। रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को पुलिस टीम में दबिश दे कर मौलाना अब्बास को सूरत से धर दबोचा। वहीं इस केस के दूसरे आरोपित मदरसे के ट्रस्टी दाऊद की गिरफ्तारी मदरसे से हुई। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि मौलाना अब्बास ने कुल कितने छात्रों को अपनी हवस का शिकार बनाया है। मामले की जाँच और आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

बंगाल की खाड़ी से उठा चक्रवाती तूफान ‘हामून’, ‘तेज’ ने यमन-ओमान के तटों को पार किया: भारत के मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी, जानें दोनों के बारे में सब कुछ

‘भारतीय मौसम विज्ञान विभाग’ (IMD) के मुताबिक, भारत से लगे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में एक साथ दो चक्रवाती तूफानों ‘तेज’ और ‘हामून ‘का साया मंडरा रहा है। आईएमडी ने इन दोनों चक्रवाती तूफानों को गंभीर बताते हुए चेतावनी जारी की है।

गंभीर चक्रवाती तूफ़ान में तब्दील हुआ ‘हामून’

चक्रवाती तूफान ‘हामून’ बंगाल की उत्तर-पश्चिमी खाड़ी के ऊपर ‘गंभीर’ चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है। इसे ये नाम ईरान ने दिया है। आईएमडी की मंगलवार (24 अक्टूबर, 2023 ) सुबह 11 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम और उससे सटे पश्चिम मध्य बंगाल की खाड़ी के ऊपर चक्रवाती तूफान हामून बीते 6 घंटों के दौरान 18 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ गया है।

वहीं मौसम विभाग ने चक्रवाती तूफान ‘हामून’ को लेकर पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मिजोरम और मेघालय सहित सात राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के मुताबिक, ‘हामून’ की वजह से केरल में भारी बारिश हुई। इस तूफान के 25 अक्टूबर की शाम तक खेपूपारा और चटगाँव के बीच बांग्लादेश तक को पार करने की संभावना है। इससे ओडिशा के तटीय इलाकों, मिजोरम और मणिपुर में भारी बारिश होने की आशंका है।

इसके साथ ही 25 अक्टूबर को नगालैंड, मणिपुर और त्रिपुरा में भी तेज बारिश हो सकती है। हालाँकि, इसे लेकर आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र का कहना था कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर मंगलवार सुबह तक हवा की रफ्तार 80-90 प्रतिघंटे से बढ़कर 100 किलोमीटर प्रति घंटा होने से हामून का ओडिशा पर सीधा असर नहीं पड़ेगा।

यमन-ओमान के तटों को पार कर गया चक्रवाती तूफान ‘तेज’

उधर दूसरी तरफ हिंद महासागर के दूसरी ओर अरब सागर से उठा चक्रवाती तूफान ‘तेज’ काफी वक्त से ओमान और यमन की सीमा के पास रुका हुआ था है। मौसम विभाग के मुताबिक, गंभीर चक्रवाती तूफान तेज के 24 अक्टूबर की दोपहर के करीब अल गैदाह (यमन) और सलालाह (ओमान) के बीच यमन-ओमान तटों को पार करने का अनुमान जताया गया।

इस दौरान इसकी रफ्तार 115- 125 किलोमीटर प्रति घंटे से 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुँच सकती है। मौसम एजेंसी ने कहा कि चक्रवात के 25 अक्टूबर की सुबह यमन में अल ग़ैदा और ओमान में सलालाह के बीच यमन-ओमान तट को पार करने की संभावना है।

चक्रवात तेज के मद्देनजर आईएमडी ने मछुआरों के लिए चेतावनी जारी की है और समुद्र में गए मछुआरों को तुरंत तट पर लौटने के लिए कहा है। उन्हें 25 अक्टूबर तक दक्षिण-पश्चिम अरब सागर में और 25 अक्टूबर की रात तक समुद्र के पश्चिम-मध्य हिस्से में न जाने की सलाह दी गई है।

शनिवार (21 अक्टूबर, 2023 ) को समाचार एजेंसी PTI ने मौसम विज्ञान केंद्र की निदेशक मनोरमा मोहंती के हवाले से खबर दी कि चक्रवात तेज का गुजरात पर कोई असर नहीं होगा. उन्होंने कहा, “गुजरात में अगले सात दिनों तक मौसम शुष्क रहेगा।”

तमिलनाडु के सब-इंस्पेक्टर ने कूड़ेदान में फेंका तिरंगा झंडा, फैंस को अंदर नहीं ले जाने दिया गया राष्ट्रध्वज: वायरल वीडियो के आधार पर आरोप, पाकिस्तान का था मैच

तमिलनाडु के चेन्नई से एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर द्वारा तिरंगे झंडे को कूड़ेदान में फेंकने और उसका अनादर करने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद अब सब-इंस्पेक्टर को ट्रांसफर कर दिया गया है।

सबसे पहले तमिल न्यूज ’24×7′ नाम के एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल ने एक वीडियो डाला जिसमें एक पुलिस वाला दो तिरंगों को एक कूड़ेदान से निकाल कर अपनी गाड़ी में डाल कर जाता हुआ दिखता है। हालाँकि, इस अकाउंट ने कुछ देर के बाद यह वीडियो हटा दी।

सोशल मीडिया पर मौजूद लोगों ने यह वीडियो डाउनलोड कर ली थी और उन्होंने इस मामले को उठाना चालू किया। मामले में सामने आया कि 23 अक्टूबर को चेन्नई के चेपक स्टेडियम में आयोजित अफगानिस्तान बनाम पाकिस्तान मैच के दौरान ड्यूटी पर लगे इस पुलिसकर्मी ने भारतीय तिरंगा अंदर ले जाने से मना किया था।

उसने तिरंगा कूड़ेदान में भी फेंका लेकिन आसपास मौजूद लोगों के विरोध के पश्चात उन्हें उठा कर लाया और अपनी गाड़ी में रख लिया। कई फैन्स ने यह भी आरोप लगाए कि उन्हें इस मैच के दौरान तिरंगा स्टेडियम के अंदर नहीं ले जाने दिया गया।

पुलिसकर्मी द्वारा तिरंगे के अपमान के इस मामले ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ लिया। तमिलनाडु भाजपा के प्रदेश मंत्री एसजी सूर्या ने इस मामले पर ट्वीट किया और कहा कि एक तो पुलिसकर्मी ने तिरंगा ले जाने नहीं दिया और फिर उसे कूड़ेदान में फेंक दिया। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से इस मामले पर कार्रवाई करने को कहा।

तमिलनाडु भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने भी इस मामले पर ट्वीट किया। उन्होंने कहा कि पहले उदय स्टालिन को मैच के दौरान ‘जय श्री राम’ के नारों से दिक्कत थी और अब ‘तमिलनाडु क्रिकेट असोसिएशन’ ने एक कदम आगे बढ़ कर तिरंगे का अपमान किया। अन्नामलाई ने इस पर कार्रवाई ना होने पर कड़े विरोध प्रदर्शन की चेतावनी भी दी।

क्रिकेट फैन्स और भाजपा नेताओं के इन आरोपों पर डीएमके समर्थक सफाई पेश करने लगे। ट्विटर पर मौजूद एक पेज ‘द्रविड़ियन इनसाइट्स’ ने दावा किया कि BCCI ने स्टेडियम के अंदर डंडे में लगा हुआ तिरंगा ले जाने पर प्रतिबन्ध लगा रखा है। इसी पेज ने भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष विनोद नेता का फोटो डाला जिसमें वह स्टेडियम के अन्दर झंडा पकड़े हुए खड़े हैं।

हालाँकि, लोगों ने स्पष्ट किया कि भाजपा नेता वहाँ पुलिसकर्मी वाले कांड के बाद पहुँचे थे। इस मामले में पुलिसकर्मी की पहचान कर उस पर कार्रवाई भी की गई है। भाजपा नेता एसजी सूर्या ने बताया कि पुलिसकर्मी की पहचान सब-इंस्पेक्टर नागार्जुन के रूप में हुई है। उन्होंने तिरंगे का अपमान करने वाले का मात्र ट्रांसफर करने और कोई कड़ी कार्रवाई न करने पर मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर प्रश्न भी उठाए।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि पुलिसकर्मी को कंट्रोल रूम में ट्रांसफर कर दिया गया है। तमिलनाडु पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टेडियम के अन्दर तिरंगा ले जाने पर कोई रोकटोक नहीं थी। फैन्स को अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत का झंडा ले जाने की अनुमति दी गई थी।

‘इतने-इतने मुँह हो रखे हैं, रोज आठ-आठ किलो खा रहे हैं’: वर्ल्ड कप में हार रही पाकिस्तान टीम की फिटनेस पर वसीम अकरम ने उठाए सवाल, फैंस कर रहे थू-थू

पूर्व पाकिस्तानी गेंदबाज और टीम के कप्तान रहे वसीम अकरम ने पाकिस्तानी टीम के प्रदर्शन की जम कर आलोचना की है। चेन्नई में विश्व कप टूर्नामेंट के तहत आयोजित मुकाबले में पाकिस्तान की अफगानिस्तान से हार के बाद उन्होंने पाकिस्तानी टीम की फिटनेस पर सवाल उठाए।

इस मैच में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अफगानिस्तान को 283 रन का लक्ष्य दिया जो कि अफगानिस्तान ने मात्र 2 विकेट खो कर 1 ओवर शेष रहते हुए पा लिया। इस मैच के बाद पाकिस्तानी टीम के प्रदर्शन की चारों तरफ आलोचना हो रही है।

मैच के बाद एक प्रोग्राम के दौरान पूर्व गेंदबाज वसीम अकरम ने कहा, “आज का यह मैच बड़ा शर्मनाक था। 280-90 का बड़ा स्कोर होता है। फिटनेस लेवल आप देखें, हम चीखें मार रहे हैं तीन हफ्ते से। अब मैं लड़कों के इंडिविजुअली नाम लूँ, इतने-इतने इनके मुँह हो गए हैं, लगता है रोज कोई आठ-आठ किलो कढ़ाइयाँ खा रहे हैं, निहारियाँ खा रहे हैं।”

गौरतलब है कि पाकिस्तानी टीम की शारीरिक क्षमताओं पर लगातार प्रश्न उठते आए हैं। टीम की फील्डिंग की भी आलोचना हुई है। अफगानिस्तान के खिलाफ मुकाबले के दौरान पाकिस्तानी गेंदबाज अफगान बल्लेबाजों के सामने बेबस नजर आए और ऐसे कोई मौके नहीं निकाल सके जिससे मैच में वो दबदबा बना पाएँ।

वसीम अकरम ने पाकिस्तानी टीम में फिटनेस को लेकर होने वाली लापरवाही को भी इंगित किया। उन्होंने कहा, “कोई टेस्ट होना चाहिए, आप अपने देश के लिए खेल रहे हैं। कोई क्राइटेरिया तो होना चाहिए। इस मामले में मैं मिस्बाह (मिस्बाह-उल-हक) के साथ हूँ, जब वो कोच था तब उसने क्राइटेरिया रखा था।”

इसी प्रोग्राम के दौरान पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर मोईन खान ने भी पाकिस्ताई टीम और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की आलोचना की। उन्होंने कहा कि क्रिकेट बोर्ड में आने वालों को क्रिकेट का कुछ नहीं पता होता। उन्होंने पाकिस्तान के श्रीलंका में हाइब्रिड मॉडल में एशिया कप खेलने की आलोचना की। पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक ने बाबर आजम से कप्तानी छोड़ने की अपील की।

पूर्व पाकिस्तानी गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी पाकिस्तानी टीम की आलोचना की। उन्होंने पाकिस्तान की हार को शर्मनाक बताया। उन्होंने कहा कि उनके पास पाकिस्तान की हार को बताने के लिए उनके पास शब्द नहीं है।

अफगानिस्तान से पाकिस्तान की हार के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों का गुस्सा फूटा। पाकिस्तानियों ने कहा कि इस कप्तान (बाबर आजम) को जेल भेज दो और इसकी जगह जेल में बंद कप्तान (पूर्व क्रिकेटर इमरान खान) को लेकर आओ।

एक ने भारतीय क्रिकेट फैन्स के सामने स्वीकार किया कि पाकिस्तानी टीम लूजर है।

‘भारत की उन्नति का आधार बनेगा राम मंदिर’: विजयादशमी पर RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कट्टरपंथ को बताया वैश्विक समस्या, स्वदेशी अपनाने और आत्मनिर्भरता का दिया नारा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने मंगलवार (24 अक्तूबर, 2023) को विजयादशमी मौके पर महाराष्ट्र के नागपुर में अपना सम्बोधन दिया। इस सम्बोधन में उन्होंने ने दुनिया भर में बढ़ रही भारत की साख पर ख़ुशी जताई। अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को उन्होंने भारत के लिए उन्नति का आधार बताया। भारतीयों से आपसी एकता बनाए रखने की अपील के साथ डॉ मोहन भागवत ने देश को विदेशी ताकतों के दम पर तोड़ने वाली ताकतों से भी सावधान रहने की अपील की।

डॉ मोहन भागवत ने अपने सम्बोधन की शुरुआत देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामना देते हुए की। आगे उन्होंने न सिर्फ दुनिया भर में बल्कि अंतरिक्ष जगत में बढ़ती भारत की ताकत की चर्चा भी की। मोहन भगवत ने G-20 सम्मेलन की मेजबानी, एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन और चंद्रयान की सफलता का खासतौर पर जिक्र किया। डॉ भगवत के मुताबिक इन अभूतपूर्व कार्यों से न सिर्फ देशवासियों को अपार ख़ुशी मिली है बल्कि सभी वर्गों का आत्मबल भी बढ़ा है।

अपने सम्बोधन के अगले क्रम में मोहन भागवत ने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर का जिक्र किया। 22 जनवरी, 2024 को मंदिर के गर्भगृह में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के समय उन्होंने कहा कि उस मौके पर अयोध्या में लोगों की संख्या सीमित और मर्यादित होनी चाहिए। मोहन भागवत ने अयोध्या आने वाले लोगों से भक्तिभाव को मन में रखने के साथ आने में असमर्थ लोगों से अपने-अपने स्थानों पर भी छोटे-छोटे आयोजन करने की भी अपील की। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा देख पाना उन्होंने सौभाग्य बताते हुए इसे देश के आध्यात्मिक विकास का प्रतीक कहा।

अपने इसी संबोधन में आगे डॉ भागवत ने छत्रपति शिवाजी महाराज के 350वें राज्याभिषेक दिवस, महावीर स्वामी के 2550 वें परिनिर्वाण दिवस, महर्षि दयानन्द सरस्वती की 200 वीं, छत्रपति साहू जी महराज की 150वीं व महारानी दुर्गावती की 500वीं जन्मजयंती को याद किया। उन्होंने इन सभी विभूतियों के जीवन दर्शन पर प्रकाश डालते हुए लोगों से इनके आदर्शों को अपनाने की अपील की।

डॉ मोहन भागवत ने अपने इसी सम्बोधन के अगले चरण में दुनिया के आगे मौजूद चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कट्टरपंथ, आतंकवाद, उन्माद और जलवायु परिवर्तन को वैश्विक समस्या बताया। इसी सम्बोधन में यूक्रेन और गाजापट्टी में चल रहे युद्धों को भी शामिल किया गया और उसके समाधान के मार्ग निकालने पर जोर दिया गया। भारतवासियों से उन्होंने सनातन मूल्यों पर कायम रहने और दुनिया को एक नई राह दिखाने की भी आशा जताई। डॉ भागवत के मुताबिक, चीन जैसे देशों से भारत की सीमाओं की रक्षा हमारी प्रमुखता में होना चाहिए।

सम्बोधन की समाप्ति से पहले डॉ मोहन भागवत ने सभी भारतीयों से स्वदेशी अपनाने और उसके ही प्रचार-प्रसार की अपील की। उन्होंने कृषि सहित अन्य क्षेत्रों में भारत को अधिक से अधिक आत्मनिर्भर बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया। आधुनिकता के नाम पर विदेशी चीजों को अपनाने की प्रथा को मोहन भागवत ने जड़ता के समान बताया जो कि लोगों को धीरे-धीरे पतन की तरफ ले जाता है। देश में उन्माद और विभाजन फैला कर अस्थिरता की साजिश रचने वालों से उन्होंने विशेष तौर पर सावधान रहने की अपील की। डॉ भागवत के अनुसार, ऐसे विभाजनकारी तत्व विदेशी ताकतों के इशारे पर काम करते हैं।

मणिपुर में घटी हिंसक घटनाओं पर भी डॉक्टर मोहन भागवत ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मणिपुर में हिंसा को सांप्रदायिक रंग देने की साजिश जिसने भी रची हो उसकी जाँच होनी चाहिए। मोहन भागवत के अनुसार मणिपुर में दोनों पक्ष शांति चाहते हैं लेकिन कुछ साजिशकर्ता इस मामले को परोक्ष तौर पर तूल दे रहे हैं। देश के कई हिस्सों में भड़की हिंसा के पीछे उन्होंने टूल किट्स का हाथ बताया और उनसे सावधान रहने की अपील की। सम्बोधन का समापन उन्होंने मंदिर से ले कर श्मशान तक हिन्दू समाज में समरसता की अपील के साथ किया।

‘इजरायली महिलाओं की लाशों से करो बलात्कार, जिस्म ही तो है’: वीडियो में सामने आई हमास आतंकियों की क्रूरता, हर एक बंधक पर ₹8 लाख का वजीफा

गाजा पट्टी से इजरायल पर हमले करने वाला आतंकी संगठन कितना खतरनाक और वहशी है, इसका खुलासा खुद उसके ही आतंकियों ने कर डाला है। पकड़े गए इन आतंकियों ने कबूल किया कि उन्हें इजरायली बच्चों, औरतों और मर्दों पर ऐसे जुल्म ढाने के निर्देश थे कि इंसानियत की रूह काँप उठे।

इज़राइल सिक्योरिटीज अथॉरिटी‘ (आईएसए) ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023 ) को एक वीडियो क्लिप जारी किया। इसमें कथित तौर पर हमास आतंकवादियों को 7 अक्टूबर को दक्षिणी इज़राइल में घातक आतंकवादी हमलों में अपनी सक्रिय भागीदारी कबूल करते हुए दिखाया गया है।

इस वीडियो को लेकर ISA ने कहा है कि उसके कम्युनिकेशन सेल को की दी गई एक वीडियो फ़ाइल 7 अक्टूबर के हमलों में शामिल हमास आतंकवादियों के बयानों के साथ पूछताछ के दौरान की है। वीडियो में हमास के आतंकवादी यह कहते हुए सुने जा रहे हैं कि उन्हें नागरिक बंधकों को इजरायल से गाजा ले जाने के लिए वजीफा का वादा किया गया था।

हमास के एक आतंकवादी को वीडियो में कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है,”जो कोई बंधक का अपहरण करेगा और उन्हें गाजा लाएगा, उसे 10,000 अमेरिकी डॉलर का वजीफा और एक अपार्टमेंट मिलेगा।”

उन्हें यह कहते हुए भी सुना जाता है कि उनके आकाओं ने उन्हें खास तौर से बुजुर्ग महिलाओं और बच्चों का अपहरण करने का निर्देश दिया था। आतंकवादियों में से एक ने कहा, “हमें घरों में लूटपाट करने और जितना संभव हो सके उतने लोगों को बंधक बनाने के लिए अपहरण करने के लिए भी कहा गया था।”

आतंकवादी को वीडियो में आगे कहते हुए सुना जा सकता है, “उसका (पीड़ित का) कुत्ता बाहर आया और मैंने उसे गोली मार दी।” वीडियो में हमास आतंकी आगे कहता है, “उसका शरीर फर्श पर पड़ा था, मैंने उसे भी गोली मार दी।”

उसने बताया कि इस पर कमांडर ने मुझ पर चिल्लाते हुए कहा (कि) मैं एक लाश पर गोलियाँ बर्बाद कर रहा हूँ।” हमास के एक अन्य आतंकवादी ने कहा कि अपने आका की आज्ञा का पालन करने के बाद, उसने दो घरों को जला दिया। उसने कहा, “हम जो करने आए थे उसे पूरा किया और फिर दो घरों को जला दिया।”

हमास के एक आतंकी ने कहा, “हम किबुत्ज में जीप से आए। हमने घरों के कमरों को खोला और बारी-बारी से एक के बाद वहाँ हमले की कार्रवाई को तब-तक अंजाम दिया जब तक की सब खत्म नहीं कर दिया। हमने ग्रेनेड फेंके, गोलियाँ चलाईं। हमारा मकसद एक ही था – सबको खत्म कर देना। हमें साफ निर्देश मिले थी कि घर में कोई भी हो बच्चा, बूढ़ा, जवान, औरत सबको जान से मारना है।”

आतंकी ने आगे बताया, “बटालिन कमांडर ने हमसे कहा था कि उनके सिर कुचलो, काट दो। तुम उनके साथ जो चाहो करो, उनके पैर काट दो। हमास ISIS बन गया है। उनका दिमाग नहीं है। वो इंसान नहीं जानवर बन गए है, क्योंकि कोई इंसान ये नहीं कर सकता है। हमें मारी गई युवा इजरायली महिलाओं की लाशों के साथ सेक्स करने के लिए कहा गया, क्योंकि वो केवल जिस्म भर हैं, इंसान नहीं।”

इस दौरान आईएसए ने अपने बयान में कहा कि 7 अक्टूबर की हत्याओं के मामले में चल रही जाँच के दौरान कई बातें (अपराधों की प्रकृति और तौर-तरीके) बार-बार सामने आई हैं। कथित तौर पर वीडियो क्लिप में आतंकवादियों ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों सहित नागरिकों को मारने और अपहरण करने के लिए हमास के खुले और साफ निर्देशों को स्वीकार कर इस हमले को अंजाम दिया।

हमास आतंकियों ने इस दौरान दक्षिणी इजरायल में 7 अक्टूबर के नरसंहार के कई खौफनाक और दर्द भरे वाकयों के बारे में भी बताया है। इस बीच, आईएसए ने कहा कि हमास के मिलिट्री विंग के सीनियर कमांडर ने अपने बंदूकधारियों को इज़रायल में लड़ने, मरने या गिरफ्तार होने के लिए भेजते वक्त सुरक्षित रहने के लिए घरों में छुपने के लिए आदेश दिए थे।

इज़रायल सुरक्षा बलों ने नरसंहार में शामिल सभी आतंकवादियों को खत्म करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। बयान में कहा गया है, “इज़रायल के सुरक्षा बल 7/10 को नरसंहार में शामिल आतंकवादियों के साथ सभी हिसाब-किताब बराबर करेंगे।”

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर के हमास के इस भयंकर और संगठित हमले में अनुमान के मुताबिक 2500 हमास आतंकवादी जमीन, आसमान और समुद्र के रास्ते इज़रायल में घुसे थे। यहाँ उन्होंने दक्षिणी इज़रायल में नागरिकों पर आतंक की दिल दहला देने वाली वारदातों को अंजाम दिया।

रिपोर्टों के अनुसार, हमलों में 1400 लोग मारे गए, जिनमें से अधिकांश नागरिक थे। ‘द टाइम्स ऑफ़ इज़राइल’ के मुताबिक, इनमें से कुछ आतंकवादियों ने कम से कम 222 नागरिकों को बंधक बना लिया और उन्हें गाजा ले आए।

खालिस्तानियों को वीजा, आतंकियों को समर्थन, किसान आंदोलन की फंडिंग: कनाडा के राजनयिकों को इसलिए भेजा गया वापस

कनाडा चाहे भारत से उसके डिप्लोमैट्स को वापस भेजने को लेकर कितना ही हो हल्ला मचा ले, सच तो ये है कि भारत सरकार के पास उसके डिप्लोमेट्स के गलत कामों में जुड़े होने के सबूत हैं। कनाडा के डिप्लोमैट्स ने भारत के आतंरिक मामलों में दखलअंदाजी की है, जिसके पुख्ता सुबूत हैं। इसी आधार पर भारत ने उन्हें देश छोड़कर जाने को कहा।

न्यूज़18 ने टॉप सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया है कि कनाडा के राजनयिक चंडीगढ़ और पंजाब के अन्य क्षेत्रों में विभिन्न वाणिज्य दूतावासों में अपनी शक्तियों का बेजा इस्तेमाल कर रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडाई राजनयिक वीजा देने के मामले में “बेहद नरम” थे और जानबूझकर ऐसे लोगों को वीजा देते थे, जो आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को जानते थे और खालिस्तानी आतंकियों का समर्थन करते थे। उन्होंने खालिस्तानी मुद्दे के लिए समर्थन बढ़ाने के लिए उन्हें वीजा दिया।

सूत्रों ने कहा, “कई मौकों पर कनाडाई राजनयिक वीज़ा प्रक्रिया को लेकर बहुत नरम रहे। जाँच के दायरे में आए कुछ लोगों को और जिन्हें एजेंसियों की तरफ से कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता था, उन्हें जानबूझकर कनाडा भेजने के लिए वीजा दिया गया था।”

न्यूज़18 ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा, “उन्होंने लोगों को उनकी पृष्ठभूमि जानने के बावजूद वीजा दिया। ऐसे वीजा पाने वाले कई लोग कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में शामिल हैं। ये वीज़ा सिर्फ खालिस्तानी उद्देश्य के समर्थन के लिए दिए गए थे ताकि आंदोलन को अधिक से अधिक मजबूती मिल सके।”

कथित तौर पर भारत सरकार के पास इस बात के सबूत हैं कि कैसे कनाडाई सरकार ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि यह उन विषयों में से एक था, जहाँ वे (कनाडाई पक्ष का जिक्र करते हुए) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर से शामिल थे और उन्होंने इसे लेकर कनाडा में प्रवासी भारतीयों और भारत में किसानों को भड़काया था।

सूत्रों ने कहा, “प्रवासी भारतीयों को भड़का कर उन्होंने भारत में आंदोलन के लिए फंडिंग का इंतजाम किया। यह बिल्कुल वैध लग रहा था, लेकिन अगर हम एक परिवार के लिए आने वाले नियमित पैसे को देखें तो अचानक वो 10 से 20 गुना बढ़ गया था।”

बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा, “पंजाब सरकार के कार्यालयों के साथ उनकी (कनाडाई राजनयिकों की) बैठकें लगातार होती थीं, जो गलत थीं। कुछ मौकों पर, कुछ लोगों ने कनाडाई अधिकारियों की मंशा के बारे में एजेंसियों को औपचारिक और अनौपचारिक तौर से जानकारी भी दी थी।

सूत्रों ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत ने काफी सोचने-विचारने, भारतीय खुफिया एजेंसियों के पेश सुबूतों की जाँच और जमीनी कार्रवाई के बाद ही कनाडाई सरकार से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाने के लिए कहा।

सूत्रों के मुताबिक, कनाडा कुछ मामलों में भारत को प्रत्यर्पण में मदद करने से भी इनकार करता रहा है। इसके अलावा वो भारत को उन लोगों की जाँच करने में मदद नहीं कर रहा था, जिन्होंने कनाडा में जाकर शरण ली थी।

यहाँ ध्यान देने कि बात यह है कि 22 अक्टूबर 2023 को विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बताया था कि भारत के पास कनाडा सरकार के भारत के मामलों में लगातार हस्तक्षेप के सबूत हैं। भारतीय मामलों में कनाडाई राजनयिक हस्तक्षेप के बारे में उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण मात्रा में जानकारी अभी तक जनता के साथ साझा नहीं की गई है। उनके अनुसार, समय के साथ और अधिक जानकारियाँ सामने आ सकती हैं, जिससे जनता को समझ में आ जाएगा कि भारत को ये कदम क्यों उठाना पड़ा।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, ”हमने उसमें से बहुत कुछ सार्वजनिक नहीं किया है। मेरा मानना है कि वक्त के साथ और भी चीजें सामने आएँगी और जो हमने किया, लोग समझेंगे कि हमें उनमें से कई लोगों के साथ उस तरह की असुविधा क्यों हुई।”

‘फ़ौरन लगाओ ताला, वरना रोज भरो ₹10000 का जुर्माना’: मुजफ्फरनगर के 1 दर्जन मदरसों को शिक्षा विभाग का नोटिस, विरोध में उतरा जमीयत और मदरसा बोर्ड

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करने के लिए प्रशासन द्वारा नोटिस भेजी जा रही है। इन नोटिसों में अवैध मदरसों को फ़ौरन बंद करने की हिदायत दी गई है। नोटिस में आदेश का पालन न करने वाले मदरसा संचालकों पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान है। अनुमान के मुताबिक, जिले में अवैध मदरसों की तादाद लगभग 100 है। शुरुआती चरण में अब तक 12 मदरसों को चिह्नित कर के नोटिस भेजी गई है। ‘जमीयत उलेमा ए हिन्द’ ने इस आदेश की आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने विदेशी फंडिंग से चल रहे मदरसों की लिस्ट तैयार करने के लिए एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। इसी क्रम में मुजफ्फरनगर जिले में भी बिना पंजीकरण के चल रहे मदरसों का डाटा जिले के अधिकारी तैयार कर रहे हैं। जिले में अब तक लगभग 100 ऐसे मदरसे ऐसे चिह्नित हुए है जिनके कागजात सरकारी मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसमें से प्रशासन द्वारा 12 मदरसा संचालकों को नोटिस भेज कर कहा गया है कि अगर उन्होंने मदरसा फ़ौरन बंद नहीं किया तो उन पर 10,000 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना लगाया जाएगा।

सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को मुजफ्फरनगर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी शुभम शुक्ला ने मीडिया से बातचीत के दौरान इस कार्रवाई की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि जुर्माने वाली नोटिस ब्लॉक शिक्षा अधिकारी की तरफ से जारी किए गए हैं। उन्होंने मुजफ्फरनगर जिला अल्पसंख्यक विभाग की तरफ से मिली जानकारी का हवाला देते हुए बताया कि जिले में गैर-पंजीकृत पाए गए 100 मदरसों के बारे में जरूरी कार्रवाई की जा रही है।

हालाँकि, ‘उत्तर प्रदेश मदरसा एजुकेशन बोर्ड’ इस नोटिस का विरोध कर रहा है। मदरसा बोर्ड साल 1995 में उत्तर प्रदेश सरकार के उस प्रावधान का जिक्र कर रहा है जिसमें मदरसों को स्कूलों की बनाई नियमावली से अलग कर दिया गया था। बोर्ड के अध्यक्ष इफ्तिखार अहमद जावेद के मुताबिक मदरसा मामलों में शिक्षा विभाग समेत किसी को भी हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने मदरसों को आम स्कूल न समझने की बात कहते उन्हें अल्पसंख्यक विभाग के अधीनस्थ बताया।

मदरसों को मिली नोटिस के मामले में जमीयत उलेमा ए हिन्द ने भी अपने विरोध के सुर बुलंद करने शुरू कर दिए हैं। जमीयत के जिला महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने इस मामले पर एक बैठक बुला ली। इस बैठक में उन्होंने कहा कि प्रशासन के इस आदेश को संविधान द्वारा मिली धार्मिक स्वतंत्रता का हनन बताया। उन्होंने कहा कि जिन मदरसों को नोटिस मिली है उनमे मज़हबी शिक्षा फ्री में दी जाती है और वहाँ क्लास नहीं चलते। मदरसा बोर्ड की तरह जमीयत भी इन मदरसों को शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र से बाहर मानता है।