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RSS के शताब्दी वर्ष में 6 निर्देशक मिल कर बनाएँगे सीरीज, सब के सब नेशनल अवॉर्ड विनर: प्रियदर्शन से लेकर विवेक अग्निहोत्री तक के नाम, पोस्टर हुआ रिलीज

देश के जाने-माने 6 राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डायरेक्टर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर एक सीरीज बनाएँगे। इसका निर्माण वर्ष 2025 में RSS के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में किया जा रहा है। सीरीज का नाम ‘एक राष्ट्र’ रखा गया है।

इसका पहला पोस्टर भी जारी कर दिया गया है, जिसे फिल्म समीक्षक तरन आदर्श ने साझा किया है। शो को जनता के बीच 2025 या उससे पहले ही लाया जा सकता है। संघ को लेकर यह पहला ऐसी तरह का शो होगा।

इस सीरीज को बनाने वाले डायरेक्टरों में प्रियदर्शन, विवेक रंजन अग्निहोत्री, डॉ चन्द्र प्रकाश द्विवेदी, मंजू बोरा, संजय पूरन सिंह चौहान और जॉन मैथ्यू मथान हैं। यह सभी मिल कर इस शो का निर्देशन करेंगे। यह सभी डायरेक्टर बॉलीवुड के सर्वश्रेष्ठ में से एक हैं।

इस शो के लिए जारी किए गए पोस्टर में एक व्यक्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गणवेश (खाकी हाफ पैंट और सफ़ेद शर्ट) पहने हुए दिख रहा है। हालाँकि, अब आरएसएस का गणवेश फुल पैंट भी हो चुका है। इस शो में 100 वर्षों में देश को एक रखने के लिए संघर्ष करने वालों की कहानियाँ दिखाई जाएँगी।

इस शो का पहला पोस्टर 24 अक्टूबर, 2023 यानी विजयादशमी वाले दिन जारी किया गया है। विजयादशमी के दिन ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का स्थापना दिवस होता है। इस दिन संघ मुख्यालय नागपुर में बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस बार के कार्यक्रम में गायक शंकर महादेवन नागपुर पहुँचे थे।

शंकर महादेवन के अतिरिक्त, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस और केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। मोहन भागवत ने इस दौरान सांस्कृतिक मार्क्सवादियों (वोक) पर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि ये लोग सुव्यवस्था, मांगल्य और संस्कार के विरोधी हैं। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन के दौरान पूरे देश में उत्सव मनाए जाने की अपील भी की।

‘मेरा ईश्वर से विशेष जुड़ाव’: विजयादशमी पर ISRO प्रमुख ने भद्रकाली मंदिर में कराया बच्चों का ‘विद्यारंभम’, बोले – ये हमारी संस्कृति का हिस्सा, यहाँ अक्षर भी पूजे जाते हैं

‘चंद्रयान 3’ की सफलता और हाल ही में ‘गगणयान’ के सफल ट्रायल से भारत में अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाले सभी लोग उत्साहित हैं। अब विजयादशमी के मौके पर मंगलवार (24 अक्टूबर, 2023) को ISRO प्रमुख S सोमनाथ ने केरल के तिरुवनंतपुरम स्थित पूर्णमिकवु मंदिर में पूजा-अर्चना करने पहुँचे। इस दौरान उन्होंने ब्रह्माण्ड के रहस्यों को लेकर चल रही आध्यात्मिक खोज का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक के रूप में वो स्पेस के रहस्यों को सुलझाने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि वो रॉकेट बनाते हैं। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि ब्रह्माण्ड के रहस्यों पर से पर्दा उठाने के लिए वो मन के भीतर और मन के बाहर, दोनों तरह से प्रयास करते हैं। एस सोमनाथ ने ईश्वर के साथ अपने एक ख़ास कनेक्शन की बात करते हुए कहा कि उनके हमेशा मंदिर आने का कारण यही है। इस दौरान उन्होंने मंदिर में ‘विद्यारंभम’ नामक एक विशेष कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। इसके तहत छोटे बच्चों को अक्षर ज्ञान के साथ उनकी शिक्षा-दीक्षा शुरू करवाई जाती है।

इस दौरान उन्होंने ‘गगनयान’ को लेकर भी बात की। ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद’ के अध्यक्ष ने कहा कि इसके लिए अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया जा चुका है और उनके प्रशिक्षण की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है, ऐसे में इसके शुरुआती अभियानों में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पाएगी। उन्होंने इस मिशन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि इसके तहत अंतरिक्ष में मनुष्यों को भेजा जाना है, फिर उन्हें सकुशल पृथ्वी पर लाना है। उन्होंने भविष्य में इस मिशन में महिलाओं की अधिक भागीदारी का आश्वासन दिया।

उन्होंने कहा कि ये उनकी भी प्राथमिकता है। ‘गगनयान’ मिशन में मनुष्यों से पहले आदमी की तरह ही दिखने वाले रोबोट, अर्थात ह्यूमनॉइड को भेजा जाएगा। उन्होंने इस दौरान ‘विद्यारंभम’ कार्यक्रम को भारतीय संस्कृति का हिस्सा बताते हुए कहा कि शिक्षा एक सतत प्रक्रिया है और अक्षर का इसमें खास महत्व है। उन्होंने कहा कि इस मंदिर में मलयाली अक्षरों की भी पूजा होती है। उन्होंने कहा कि विजयादशमी के दिन छात्रों को इस ज्ञान से परिचय कराया जाता है, ये उनके लिए एक आशीर्वाद है।

‘मातृभूमि की रक्षा के लिए शस्त्र पूजा’: विजयादशमी पर रामलीला में पहुँचे PM मोदी, बोले – पूरे विश्व को हर्षित करेगा अयोध्या में गूँजने वाला हर स्वर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली के द्वारका स्थित DDA ग्राउंड में रामलीला आयोजन में शामिल हुए और इस दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। विजयादशमी के दिन प्रधानमंत्री ने पहले रामलीला में प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का पूजन किया और उसके बाद जनता को संबोधित किया।

प्रधानमंत्री ने देशवासियों को याद दिलवाया कि हम ऐसे समय में विजयादशमी मना रहे हैं जब हमारा चंद्रयान-3 चन्द्रमा की सतह पर दो माह पहले उतर चुका है। उन्होंने कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन का विधान है, हमारे देश में शस्त्र की पूजा मातृभूमि की रक्षा के लिए की जाती है।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रामलला विराजने में कुछ ही महीने बाकी हैं। ऐसे में अगली रामनवमी पर अयोध्या में गूँजने वाला हर स्वर विश्व को हर्षित करेगा। उन्होंने राम मंदिर को ‘जीत’ के रूप में बताया।

इस दौरान प्रधानमंत्री को सुनने के लिए हजारों की भीड़ रामलीला में मौजूद थी। यह आयोजन द्वारका DDA ग्राउंड में किया गया था। प्रधानमंत्री के साथ दिल्ली भाजपा के बड़े नेता मौजूद रहे। मंच पर मौजूद रहने वालों में सांसद प्रवेश वर्मा भी थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम श्रीराम की मर्यादाओं को भी जानते हैं और अपनी सीमाओं की रक्षा करना भी जानते हैं। हम शक्ति पूजन के संकल्प और कोरोना जैसी बीमारी के दौरान ‘सर्वे सन्तु निरामया’ के नियम का पालन करने वाले लोग हैं।

उन्होंने भगवान राम के विचारों का भारत बनाने की अपील की। भगवान राम के विचारों के भारत को प्रधानमंत्री ने विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व में शान्ति का सन्देश देने वाला भारत बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने विजयादशमी के उत्सव को हर राष्ट्रभक्त की विजय का उत्सव बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान देश में जातिवाद और क्षेत्रवाद फ़ैलाने वालों पर करार प्रहार किया। उन्होंने कहा, “ये दहन हो उन शक्तियों का जो जातिवाद और क्षेत्रवाद के नाम पर माँ भारती को बाँटने का प्रयास करती हैं। ये दहन हो उन विचारों का जिनमें भारत का विकास नहीं स्वार्थ की सिद्धि निहित है।” उन्होंने भारत को विश्व की सबसे बड़ी और सबसे विश्वस्त डेमोक्रेसी भी बताया।

2 महीने से चीन के रक्षा मंत्री गायब, अब पद से हटा दिया: मई में भारत आए थे ली शिंगफू, इससे पहले गायब विदेश मंत्री को हटाया था

चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने रक्षा मंत्री ली शांगफू को उनके पद से हटा दिया है। इसका ऐलान चीनी सरकार के प्रोपेगंडा टीवी चैनल के माध्यम से किया गया। वह बीते दो महीने से गायब थे और किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखे थे।

ली शांगफू को पद से हटाने का फैसला विदेश मंत्री किन गांग को हटाने के फैसले के बाद आया है। किन गांग को भी कई महीने गायब रहने के बाद जुलाई में विदेश मंत्री के पद से हटा दिया गया था। यह दो महीने के भीतर चीनी सरकार में दूसरा बड़ा बदलाव है। 65 वर्षीय ली शांगफू पेशे से एयरक्राफ्ट इंजीनियर हैं और लम्बे समय से चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य रहे हैं। उनकी लम्बी सैन्य सेवा रही है। ली शांगफू मई में भारत भी आए थे। इस दौरान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ उनकी वार्ता हुई थी। यह गलवान घटना के बाद किसी चीनी विदेश मंत्री का पहला दौरा था।

ली शांगफू लगभग दो माह से सार्वजनिक कार्यक्रमों से गायब थे। ली शांगफू और किन गांग को इसी के साथ ‘स्टेट काउंसिलर’ और कैबिनेट से भी हटा दिया गया है। यह पद चीनी सरकार में काफी ऊँचे ओहदे वाले मंत्रियों को दिया जाता है।

ली शांगफू को हटाने का निर्णय चीन की पीपुल्स कॉन्ग्रेस ने लिया है। उनकी रक्षा मंत्री के तौर पर नियुक्ति मार्च 2023 में हुई थी। उनको वेई फेंग्हे की जगह पर रक्षा मंत्री बनाया गया था। वह भी सेना से ही आते थे। शांगफू के गायब होने और हटाए जाने के कारण अभी स्पष्ट नहीं है और हमेशा ही जानकारी छुपाने वाली चीनी सरकार ने भी कारण आधिकारिक तौर पर नहीं बताए हैं। हालाँकि, बीते माह कुछ रिपोर्ट में बताया गया था कि शांगफू के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप थे और उनकी जाँच की जा रही थी।

यह भी कहा गया था कि ली शांगफू को पूछताछ के लिए भी ले जाया गया था। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि शांगफू कोा मंत्री पद से हटाए जाने के बाद यह स्पष्ट नहीं है कि उन पर अब मुकदमा चलाया जाएगा या नहीं।

आश्चर्य की बात यह है कि किन गांग और ली शांगफू दोनों चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के करीबी माने जाते थे। उनकी नियुक्ति के समय दोनों को चीन की सरकार के नए चेहरों के रूप में देखा गया था लेकिन कुछ ही महीनों के भीतर दोनों का जनता से गायब होना और पद से हटाया जाना आश्चर्यजनक है।

एक मीडिया रिपोर्ट बताती है कि ली को आखिरी बार 29 अगस्त को बीजिंग में एक कार्यक्रम में देखा गया था लेकिन उसके कुछ हो दिनों बाद उनकी वियतनाम यात्रा को रद्द कर दिया गया था। वियतनाम यात्रा रद्द होने के पीछे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया गया था। इसके बाद से वह कहीं नहीं देखे गए। चीन का राजनीतिक तंत्र तानाशाह और अस्पष्ट है। चीन में सारी शक्तियां कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और देश के राष्ट्रपति के पास होती हैं। यहाँ मंत्रियों की नियुक्तियाँ भी उसी के प्रसाद पर होती हैं। चीन में भ्रष्टाचार के आरोप में कई नेताओं को बड़ी सज़ाएँ देने के मामले सामने आए हैं।

विकास दिव्यकीर्ति के ‘दृष्टि’ समेत 20 UPSC कोचिंग संस्थानों को नोटिस, भरमाने वाला विज्ञापन के कारण जुर्माना: देखें लिस्ट में किस-किस के नाम

भारत में अब ऐसे IAS कोचिंग सेंटर चलाने वाले की खैर नहीं जो बेईमानी से कामयाबी दर का झूठा दावा कर लोगों को लुभाकर उन्हें अपने यहाँ बुलाते हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) इनके खिलाफ हरकत में आ चुका है। उसने ऐसे 20 कोचिंग सेटर को नोटिस थमाया तो 4 पर एक-एक लाख का जुर्माना लगा डाला है।

सीसीपीए के एक सीनियर अधिकारी ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को कहा कि भरमाने वाले विज्ञापन जारी करने वाले देशभर के 20 आईएएस कोचिंग संस्थानों को नोटिस भेजा है। सीसीपीए ने पाया है कि बड़े पैमाने पर धड़ल्ले से गलत तरीके से अधिकतर आईएएस कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापनों में उन छात्रों को दिखाकर यूपीएससी परीक्षा में अपनी ‘सफलता दर’ का दावा करते हैं, जिन्होंने उनके केंद्रों पर केवल मॉक इंटरव्यू दिए थे न कि पूरा सिलेबस पढ़ा था।

इन कोचिंग सेंटर के बढ़ा-चढ़ाकर किए गए दावों का पैमाना इस कदर बड़ा है कि ये यूपीएससी को ही झूठे साबित करते नजर आते हैं। दरअसल, जहाँ यूपीएससी 2022 में 933 उम्मीदवारों का चयन किया गया था। वहीं 10 कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों में दावा किया गया था कि उनके 3500 से अधिक ‘पूर्व छात्रों’ का चयन किया गया है।

सीसीपीए ऐसे ही दिल्ली के 20 कोचिंग सेटर गलत कारोबारी तरीके के खिलाफ जाँच कर रहा है। इसके साथ ही उसने 4 ऐसे सेंटर राउज आईएएस स्टडी सर्किल, चहल अकादमी,आईक्यूआरए आईएएस और आईएएस बाबा पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना ठोका है।

हालाँकि, दो संस्थानों ने सीसीपीए की कार्रवाई को चुनौती दी है। जुर्माने के आदेश के खिलाफ राउज आईएएस स्टडी सर्किल राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग में अपील दायर की है तो वहीं ‘आईएएस बाबा’ ने इसके खिलाफ स्टे ले लिया है।

वहीं सीसीपीए ने कहा है कि भ्रामक विज्ञापन आईएएस बनने के इच्छुक उम्मीदवारों के फैसले पर असर डालते हैं। उसने कोचिंग सेंटर्स से अपने दावों को साबित करने के लिए कहा है और उन पाठ्यक्रमों या विषयों के बारे में “ईमानदार खुलासा” भी करने को कहा है जिनके लिए सफल छात्रों ने उनसे कोचिंग ली है।

सीसीपीए की मुख्य आयुक्त निधि खरे के मुताबिक, “पिछले डेढ़ साल में कोचिंग सेंटर्स को अपने सफल छात्रों के बारे में जानबूझकर अहम जानकारी छिपाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। हम उनके विज्ञापनों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन्हें सभी जानकारी ईमानदारी से देनी चाहिए। यदि सही खुलासे होंगे तो धोखा कम होगा।”

उन्होंने आगे कहा कि सीसीपीए ने ऐसे विज्ञापनों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,2019 की धारा 2(28) के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए इन सेंटर्स के खिलाफ नोटिस जारी किया था।

सीसीपीए के मुताबिक, वाजीराव एंड रेड्डी इंस्टीट्यूट, चहल अकादमी, खान स्टडी ग्रुप आईएएस, एपीटीआई प्लस, एनालॉग आईएएस, शंकर आईएएस, श्रीराम आईएएस, बायजू आईएएस, अनएकेडमी, नेक्स्ट आईएएस, दृष्टि आईएएस,आईक्यूआरए आईएएस, विजन आईएएस, आईएएस बाबा, योजना आईएएस,प्लूटस आईएएस,एएलएस आईएएस, राउज आईएएस स्टडी सर्किल को नोटिस भेजा गया।

खरे ने आगे बताया, “सीसीपीए के कोचिंग सेंटर्स को उनके दावों का विवरण माँगने के लिए जारी स्वत: संज्ञान नोटिस के जवाब में अधिकांश ने जवाब दिया हैं। इसमें उन्होंने स्वीकार किया है कि उनके विज्ञापनों में दिखाए गए यूपीएससी के कामयाब उम्मीदवारों केवल मॉक इंटरव्यू और इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में शामिल हुए थे। सीसीपीए ने पाया कि कोचिंग सेंटर्स ये सब मुफ्त में करते हैं क्योंकि यह उनके (सेंटर्स) फायदे में है।”

सीसीपीए की मुख्य आयुक्त ने आगे कहा कि उदाहरण के लिए, एक सेंटर ने दावा किया कि 2022 यूपीएससी परीक्षा में चयनित 933 में से 682 उसके पूर्व छात्र थे। हालाँकि, CCPA नोटिस के जवाब में सेंटर ने कहा कि 673 छात्रों ने केवल मॉक इंटरव्यू दिया था और बाकि नौ ने टेस्ट सीरीज़ और सामान्य अध्ययन जैसे पाठ्यक्रम लिए थे।

खरे ने आगे बताया, “किसी भी विज्ञापन में यह जिक्र नहीं है कि सफल उम्मीदवारों ने केवल मॉक इंटरव्यू दिए। इससे ऐसी धारणा बनती है जैसे कि परीक्षा पास करने वाले सभी लोगों ने इन सेंटर्स में पूरा कोर्स किया है, जो भ्रामक है।” उन्होंने कहा कि भ्रामक विज्ञापन उम्मीदवारों को यह सोचने के लिए प्रेरित कर सकते हैं कि जब तक वे विज्ञापन देने वाले सेंटर में दाखिला नहीं होंगे, वे आईएएस, जेईई या एनईईटी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में कामयाब नहीं हो पाएँगे।

अधिकारियों ने कहा कि आईएएस कोचिंग सेंटर प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के बाद शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों को मुफ्त मॉक इंटरव्यू सत्र के लिए आमंत्रित करते हैं, ताकि उनके सफल होने के वो उनके सेंटर के पूर्व छात्र होने का दावा कर सकें।

कई मामलों में ये मॉक इंटरव्यू मुश्किल से कुछ घंटों के लिए होते हैं। इसलिए, सेंटर्स कम से कम कुछ ऐसे उम्मीदवारों का चयन करने में कामयाब हो जाते हैं जिन्होंने उनके मुफ्त मॉक इंटरव्यू वाले सेशन का फायदा उठाया था। सीसीपीए के मुताबिक, देश में कोचिंग कारोबार का मौजूदा राजस्व करीब 58,088 करोड़ रुपए है।

नगमा खान आई, छीन कर ले गई बुढ़ापे का इकलौता सहारा: जो काँवड़ लेकर जाता था वो अब पढ़ता है नमाज, रोते हुए पिता ने CM योगी से लगाई गुहार

उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक नगमा खान उर्फ़ रोशनी नाम की मुस्लिम महिला पर हिन्दू युवक का धर्मांतरण करवाने का आरोप लगा है। युवक का नाम गौरव है जिसके पिता ने अपने बेटे को वापस पाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है। ऑपइंडिया को दिए एक इंटरव्यू में पीड़ित के पिता इस घटना के बाद आरोपित महिला द्वारा खुद के ही खिलाफ शिकायत देने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। साथ ही उन्होंने कहा कि नगमा की वजह से उनका इकलौता बेटा और उनके बुढ़ापे का सहारा उनसे छिन गया है।

पीड़ित हिन्दू परिवार मूल रूप से अलीगढ़ के जवा थाना क्षेत्र का निवासी है। वह फिलहाल नोएडा के सेक्टर 44 में रहता है। लड़के के पिता का नाम मुकेश कुमार है। मुकेश के पास गौरव के अलावा एक बेटी है। वो एक शिक्षण संस्थान में काम कर के अपना परिवार पालते हैं। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने बताया है कि उनका बेटा गौरव बॉक्सिंग कोच है। पहले वो बेहद धार्मिक विचारधारा का था जो हर साल ‘हर हर महादेव’ कह कर काँवड़ लेकर हरिद्वार जाया करता था।

गौरव की एक पुरानी तस्वीर

मुकेश ने हमें आगे बताया कि परिवार के ख़र्च में हाथ बँटाने के लिए लगभग 22 वर्षीय गौरव नोएडा के पार्कों में बच्चों को आत्मरक्षा आदि के लिए बॉक्सिंग सिखाने लगा। गौरव अच्छा बॉक्सर था जो कई प्रतियोगिताओं में विजेता भी रहा है। पार्क में चलने वाली क्लास कई अभिभावकों ने अपने बच्चों को भेजना शुरू कर दिया। इनमें से एक नगमा खान नाम की भी महिला थी। नगमा की लगभग 7 वर्षीया बेटी भी गौरव से बॉक्सिंग सीखने अपनी अम्मी के साथ आया करती थी।

नोएडा का वो पार्क जहाँ बच्चों को बॉक्सिंग सिखाता था गौरव

बकौल मुकेश, नगमा उनके बेटे से कम से कम 15 साल बड़ी है और अपने 2 बच्चों के साथ पति से अलग रहती है। नगमा 4 बच्चों की अम्मी थी लेकिन किसी कारणवश 2 बच्चों की मौत हो गई थी। नगमा की दूसरी बेटी 1 साल की है। मुकेश ने हमें आगे बताया कि कुछ दिनों बाद पार्क में मिले गौरव और नगमा की आपस में बातें होने लगीं। आरोप है कि धीरे-धीरे नगमा ने गौरव को अपने चंगुल में फँसा लिया। गौरव के न सिर्फ धार्मिक सोच में बदलाव आने लगा था बल्कि वो अपने परिवार वालों से भी अलग रहने लगा था। वह बॉक्सिंग कम्पटीशन का बहाना बना कर कई-कई दिनों तक घर से बाहर रहता था।

मुकेश का दावा है कि उनका बेटा असल में बॉक्सिंग कम्पटीशन में नहीं बल्कि नगमा के साथ रहता था। थोड़े दिनों बाद गौरव घर में नमाज़ पढ़ने लगा और इस्लामी वेशभूषा में रहना शुरू कर दिया। जब मुकेश ने गौरव के इस बदले व्यवहार की जाँच की तब उन्हें नगमा के बारे में पता चला। हमसे बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया है कि नगमा सिर्फ उनके बेटे ही नहीं बल्कि कई और हिन्दू लड़कों को इसी तरफ से अपने जाल में फँसा चुकी है। हमसे बातचीत में गौरव के पिता ने बताया कि वो अपने बेटे को वापस लाने के लिए जब नगमा से बात किए तब आरोपित महिला द्वारा उनको ही धमकियाँ दी जाने लगीं।

इस बीच मुकेश ने अगस्त 2023 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक शिकायत भेज कर नगमा पर अपने बेटे को निकाह के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी बताया है कि नगमा अपने भाई आज़ाद खान को एक बड़ा गुंडा बताते हुए उनके परिवार को भी खत्म करवा देने की धमकी दिया करती हैं। शिकायतकर्ता ने अपने बेटे को नगमा से जान का खतरा बताया है और खुद से न मिलने देने की बात कही है। पीड़ित पिता ने अपने बेटे के धर्मांतरण की आशंका जताते हुए इस मामले में प्रशासनिक हस्तक्षेप की भी माँग की है।

शिकायत कॉपी

गौरव के पिता ने हमें आगे बताया कि उनके द्वारा दी गई शिकायत पर नोएडा पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलवाया था। हालाँकि, आखिर में उनके बेटे की तरफ से नगमा के साथ स्वेच्छा से रहने की इच्छा जताई गई। इस मामले में पुलिस ने नियमानुसार कार्रवाई की और दोनों पक्षों को विवाद से बचने की हिदायत भी दी। हालाँकि, इसके बाद गौरव नगमा के साथ ही रहा। पीड़ित पिता का आरोप है कि वो जिस भी नंबर से अपने बेटे से बात करने की कोशिश करते हैं उसे नगमा ब्लॉक कर देती है।

मुकेश के अनुसार, नगमा उनके बेटे से हिन्दू धर्म को पाखंड और इस्लाम को जन्नत वाला मज़हब बताती है। हमसे आगे बातचीत के दौरान मुकेश रोने लगे। उन्होंने अपने बेटे को ‘लव जिहाद’ और धर्मांतरण की एक बड़ी साजिश में फँसा बताया और कहा कि नगमा ने उनके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा भी छीन लिया। उनका दावा है कि अगर वो अपने बेटे से बात करें तो उसको समझा सकते हैं। हालाँकि, नगमा उन्हें गौरव से मिलने भी नहीं दे रही है। न तो मिलने दे रही है और न ही बात करने। थाने में नगमा की तरफ से बोलना उन्होंने अपने बेटे की मजबूरी और उस पर बने दबाव को बताया।

दिल्ली का मौलवी भी शामिल

हमसे बातचीत के दौरान मुकेश ने दावा किया है कि उनके बेटे के खिलाफ हो रहे धर्मांतरण के प्रयास में दिल्ली का एक मौलवी भी शामिल है। ये मौलवी गौरव की बीमारियों के झाड़-फूँक का दावा करता है। नगमा मुकेश से अपने अब्बा को भी पहुँचा हुआ मौलवी बताती है। वो कहती है, “मेरे अब्बा इंसान को बकरी बना सकते हैं।” मुकेश का यह भी दावा है कि नगमा ने अभी तक अपने पहले शौहर को तलाक भी नहीं दिया है। उन्होंने नगमा की माँ पर भी बीते समय में किसी हिन्दू से ही निकाह कर के उसके साथ अपने बेटे जैसी ही हरकत किए जाने का आरोप लगाया।

पहले हाथ में कलावा, अब सिर पर नमाजी टोपी

मुकेश ने हमें अपने बेटे की कई तस्वीरें और वीडियो भी भेजे। कुछ तस्वीरें नगमा के सम्पर्क में आने से पहले की हैं। इनमें गौरव के हाथ में मोटा कलावा और माथे पर तिलक देखा जा सकता है। एक तस्वीर में वो अपनी बहन के साथ काफी खुश नजर आ रहा है जबकि दूसरी में वो काँवड लिए दिख रहा। वहीं नगमा से मुलाकात के बाद वाली तस्वीरों में गौरव सिर पर नमाज़ी टोपी रख कर इस्लामी अंदाज में कोई मजहबी किताब पढ़ता दिखाई दे रहा है। इन वीडियो में गौरव के साथ नगमा भी दिख रहीं हैं जो उसे ये सब सिखाती नजर आ रहीं हैं।

गौरव और नगमा

नगमा ने मुकेश पर किया केस

मुकेश ने ऑपइंडिया को बताया कि नगमा ने न सिर्फ उन से उनका बेटा छीन लिया है बल्कि अब उल्टे उनके ही परिवार वालों के खिलाफ पुलिस में शिकायत करवा दी है। नगमा की शिकायत पर गौरव को नोएडा के महिला थाना में 16 सितंबर 2023 को हाजिर होने का निर्देश भी मिला था। मुकेश जब पुलिस के पास गए तो उन्हें फिर से किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से दूर रहने की हिदायत दी गई।

नगमा की शिकायत पर गौरव को मिली नोएडा पुलिस की नोटिस

नगमा का आरोप है कि मुकेश ने अपने बेटे यानि उनके पति गौरव को उनसे छीन कर अपने पास रख लिया है। हालांकि अपनी सफाई में मुकेश का कहना है कि उन्हें अपने बेटे के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मुकेश अब बेटे एकलौते बेटे की सुरक्षा को ले कर भी चिंतित हैं और इस शिकायत को नगमा की कोई बड़ी साजिश मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि 7 माह से वो अपने बेटे से मिल नहीं पाए हैं। शासन प्रशासन से उन्होंने अपने बेटे को वापस दिलाने की गुहार लगाई है।

किसी पिता को बच्चों के सामने ही गोलियों से भूना, किसी का फावड़े से काटा गला: हमास आतंकियों की बर्बरता से काँप जाएगी रूह, एक ने अम्मी को कॉल कर कहा – मैंने 10 यहूदी मारे

इस्लामी आतंकी संगठन हमास के आतंकियों ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर किए गए अपने हमले में निर्दोष यहूदियों को उनके बच्चों के सामने मार दिया। इजरायल द्वारा जारी की गई एक नई फुटेज में दिखता है कि हमास के आतंकी एक यहूदी पिता को उसके बच्चों के सामने ग्रेनेड से उड़ा देते हैं।

पिता के घायल शरीर के खून के छींटे बच्चों के शरीर पर गिरते हैं। हमास के आतंकियों को स्पष्ट आदेश थे कि वह महिलाओं और बच्चों के गले काटें और उनकी हत्या करें। इस बात की पुष्टि हमास के एक आतंकी ने की है। इजरायल ने यह वीडियो हमास आतंकियों के शरीर पर लगे कैमरा से निकाले हैं और इजरायल के विरुद्ध फैलाई जा रही जानकारी का सामना करने के लिए पत्रकारों को दिखाई हैं। इसी वीडियो में यह भी दिखता है कि एक बच्चे की हत्या की गई जो कि एक मेज के नीचे छुपा है।

हमास के पकड़े गए आतंकी ने बताया कि उनको कमांडरों ने यह भी आदेश दिया गया था कि वह मरी हुई यहूदी महिलाओं से बलात्कार करें। इजरायल द्वारा दिखाई गई वीडियो और फोटो डरावनी हैं। जनता को दिखाने के जारी की गई एक वीडियो में दिखता है कि हमास आतंकी एक गाड़ी पर फायरिंग करते हैं जिसमें गाड़ी में बैठे लोगों की मौत हो जाती है।

वीडियो के एक अन्य शॉट में दिखता है कि हमास का आतंकी एक पीड़ित का गला फावड़े से काट देता है। हमास के आतंकी यहूदियों की इन हत्याओं को अपने घर भी गर्व से बताते हैं। एक वीडियो में एक आतंकी अपनी अम्मी को फ़ोन करके गर्व से बताता है कि उसने 10 यहूदी मार दिए हैं।

वीडियो के एक हिस्से में उस म्यूजिक फेस्टिवल की फुटेज है जहाँ हमास के इस्लामी आतंकियों ने 260 लोगों को मार दिया था। वीडियो में दिखता है कि हमास के आतंकी लोगों को गाड़ियों से खींच कर मार देते हैं और उसके बाद जश्न मनाते हैं। हमास के हमले में 1400 से अधिक इजरायलियों की मृत्यु हो गई है जबकि अभी भी 200 से अधिक लोग हमास के कब्जे में हैं। इजरायली सुरक्षा बलों ने इन हमलों को मानवता के विरुद्ध अपराध बताया है।

‘जिहाद का नारा बर्दाश्त नहीं’: सड़क पर उतरे 1 लाख मुस्लिम तो खुल कर यहूदी समाज के साथ खड़े हुए UK के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, बोले – महसूस करा देंगे कानून की ताकत

यूनाइटेड किंगडम (UK) के प्रधानमंत्री ऋृषि सुनक ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को ब्रिटेन की सड़कों पर ‘जिहाद का ऐलान’ करने वालों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हम अपने देश में यहूदी विरोधी भावना को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे।” उनका ये बयान ऐसे वक्त में आया है जब इज़रायल पर हमास के हमले में हजार से अधिक लोग अपनी जान गँवा चुके हैं और इजरायल-फिलिस्तीन के बीच जंग जारी है।

पीएन सुनक ने साफ लहजे में कहा, “जिहाद का ऐलान न केवल यहूदी समुदाय के लिए, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा है।” गौरतलब है कि शनिवार को मध्य लंदन में फिलिस्तीन समर्थक रैली में लगभग 100,000 लोग शामिल हुए। इस दौरान इन लोगों को जिहाद के नारे लगाते हुए सुना गया।

दरअसल लंदन की पुलिस पर आरोप लगा था कि उन्होंने जिहाद के समर्थन में नारे लगाते लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर पुलिस अधिकारियों ने अपना बचाव करते हुए कानूनों में रद्दोबदल की बात की थी।

इस दौरान मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ सर मार्क रोवले की इस बात के लिए आलोचना की गई कि उनके विभाग के अधिकारी फ़िलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन में जिहाद के नारे लगाने वालों को गिरफ़्तार नहीं कर रहे थे। गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन को भी मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ ने यही पट्टी पढ़ाई थी। इसे लेकर पीएम सुनक ने यूके की संसद में जोरदार तहरीर दी।

इसे लेकर पीएम ऋषि सुनक ने एक्स पर पोस्ट किया, “इस सप्ताहांत हमने अपनी सड़कों पर नफरत देखी। जिहाद का ऐलान न केवल यहूदी समुदाय के लिए, बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा हैं। हम अपने देश में यहूदी विरोधी भावना को कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। और हम उम्मीद करते हैं कि पुलिस इस उग्रवाद से निपटने के लिए सभी जरूरी कार्रवाई करेगी।”

पीएम ऋषि सुनक ने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि जो प्रदर्शनकारी घिनौने उग्रवाद को दोहराते हैं, उन्हें अब कानून की पूरी ताकत महसूस होगी। यूके की संसद हाउस ऑफ़ कॉमन्स में पीएम सुनक ने जिहाद को लेकर काफी कुछ कहा।

दरअसल मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ सर मार्क रोवले ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए पुलिस की शक्तियों के बारे में बहस के बीच सुझाव दिया कि कानूनों को फिर से बनाने की जरूरत हो सकती है। इस पर पीएम सुनक ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा, “जहाँ भी कानून में कमियाँ हैं, हमें उन्हें संबोधित करने और उन पर गौर करने में खुशी होगी।

पीएम सुनक ने आगे कहा, “लेकिन हमारा मानना है कि इस समय पुलिस के पास उन लोगों को गिरफ्तार करने की शक्तियाँ हैं जो हिंसा या नस्लीय नफरत भड़का रहे हैं, हमारी सड़कों पर इस तरह व्यवहार के लिए कोई जगह नहीं है और हम इस पर अधिकारियों को मार्गदर्शन के लिए जमीनी तौर पर बड़े पैमाने पर काम करेंगे ताकि वो खुद को मिली शक्तियों और साधनों के बारे में अच्छे से जान सकें और कानून की ताकत को महसूस करें।”

उन्होंने कहा कि ‘जिहाद और मुस्लिम सेनाओं के खड़े होने’ का ऐलान करना यहूदी समुदाय के लिए खतरा नहीं है बल्कि हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए भी खतरा है। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर से पुलिस अपना काम करने के लिए आजाद है, लेकिन गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन ने उनके सामने ये मुद्दा उठाया है।

इस बीच पीएम सुनक ने साफ इशारा किया कि वीकेंड में फिलिस्तीन रैली में टिप्पणियों के बाद चरमपंथी माने जाने नारों को लगाने वालों को रोकने के लिए पुलिस को और अधिक अधिकार दिए जाने की संभावना नहीं है। दरअसल, मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ ने मौजूदा चरमपंथ विरोधी कानून पर चिंता जताते हुए कहा था कि इन कानूनों को फिर से तैयार करने की जरूरत हो सकती है। मेट्रोपॉलिटन पुलिस चीफ ब्रेवरमैन बताया था कि जिहाद के कई मतलब हैं।

ब्रेवरमैन ने ये भी कहा कि आतंकवाद विरोधी एक्सपर्ट अधिकारियों ने शनिवार को मिली खास वीडियो क्लिप (लंदन रैली) से किसी भी अपराध की पहचान नहीं की है। दरअसल, गृह सचिव सुएला ब्रेवरमैन ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को सर मार्क रोवले से मुलाकात की थी। वहाँ उनके जिहाद का नारा लगाने वाले फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारी से निपटने के तरीके पर चर्चा हुई थी। पुलिस अधिकारियों ने कहा था कि वीकेंड में मध्य लंदन में प्रदर्शन की फुटेज में किसी भी अपराध की पहचान नहीं की गई थी।

वसीम अकरम के लिए गन्दगी का मतलब हिंदुओं की एक जाति: काफिरों से मल-मूत्र साफ़ करवाने वाली मानसिकता, किसी टीवी पैनलिस्ट को कोई दिक्कत नहीं

जिस ‘चमार’ शब्द को बोलने-लिखने तक आपको भारत में जेल हो सकता है, वसीम अकरम उसे नेशनल टीवी पर बोलते हैं। इसके पीछे की वजह है पाकिस्तान के पैदा होने की मजहबी कहानी। वहाँ काफिरों के साथ क्या-क्या किया जाएगा, किया जा रहा है, इसकी एक झलक भर है वसीम अकरम का ‘चमार’ बोलना। ये न सिर्फ दलित समाज का अपमान है, बल्कि एक जाति विशेष पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी है। लेकिन, निशाना हिन्दू हैं तो पाकिस्तान में इसकी अनुमति है।

दरअसल, पूरा मामला वसीम अकरम के एक वीडियो से जुड़ा हुआ है। अफगानिस्तान बनाम पाकिस्तान मैच में पाकिस्तान के हारने के बाद एक स्पोर्ट्स चैनल पर पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर वसीम अकरम चर्चा कर रहे थे। उनके साथ अन्य पाकिस्तानी खिलाड़ी मोईन खान, शोएब मालिक तथा मिस्बाह उल हक मौजूद थे।

वसीम अकरम इस दौरान मैदान से मैच के बारे में रिपोर्ट करने की बात कर रहे थे। उनका कहना था कि मैदान से एक-डेढ़ घंटे रिपोर्ट करने पर शर्ट पर पसीने के दाग आ जाते हैं और अच्छा नहीं लगता, इस स्थिति की तुलना वह एक विशेष जाति का होने से करते हैं।

वसीम अकरम का यह बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और भारत में इस पर प्रश्न उठाए जा रहे हैं कि वह एक जाति को इस तरह से कैसे कह सकते हैं। हालाँकि, पाकिस्तान में जिस तरह की हालत ‘काफिरों’ की है उससे वसीम अकरम की बात पर कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हमें ध्यान देना चाहिए कि पाकिस्तान से भारत आए शरणार्थियों या फिर वहाँ अत्याचार झेल रहे हिन्दुओं में बड़ी संख्या में दलित शामिल हैं। वसीम अकरम ने इसी वीडियो में पाकिस्तानी टीम की भी काफी आलोचना की।

वसीम अकरम ने यह सिद्ध करने का प्रयास किया है कि जो भी व्यक्ति अच्छा नहीं दिख रहा या पसीने में भीग कर गंदा हुआ है, वह जाति विशेष जैसा है। पाकिस्तान में यह सच्चाई भी है। दरअसल, पाकिस्तान में आज भी हिन्दू और ईसाइयों को मात्र सफाईकर्मी का काम ही दिया जाता है। पाकिस्तान में मुस्लिमों को इस काम से बाहर रखा गया है। पाकिस्तान में रहने वाला दलित वर्ग अन्य कोई पेशा नहीं अपना सकता। पाकिस्तानियों के दिमाग में यह पक्षपात आजादी के बाद से चला आ रहा है और वर्तमान में लगातार जारी है।

पाकिस्तान में दलितों से तो सीवर, गटर और नालियां साफ़ ही करवाई जाती हैं बल्कि उन व्यक्तियों से भी यह काम करवाया जाता है जो कि अपना हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बन चुके हैं। वसीम अकरम के बयान पर इस पूरे प्रोग्राम में बैठे हुए अन्य चारों व्यक्तियों को कोई समस्या नहीं हुई। भारत में ऐसा बोलने पर जेल हो जाती है, सामाजिक बहिष्कार हो सकता है और सोशल मीडिया पर कैम्पेन चलते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में दलितों के अधिकारों पर काम किया गया है लेकिन पाकिस्तान में इन्हें बराबर के दर्जे के मनुष्य नहीं समझा जाता।

जुलाई 2019 में पाकिस्तान की फ़ौज ने एक विज्ञापन दिया जिसमें स्पष्ट रूप से लिखा हुआ था कि उसे सफाईकर्मी के रूप में ईसाई चाहिए। हालाँकि, बाद में यह विज्ञापन विरोध के चलते वापस ले लिया गया। जिन मुस्लिम सफाईकर्मियों को पाकिस्तान में भर्ती भी किया गया वह नाली नहीं साफ़ करते।

इस काम में पाकिस्तान में केवल ईसाई या हिन्दू दलित समुदाय के लोग ही लगाए जाते हैं। उन्हें मल-मूत्र से भरे गटर में उतारा जाता है। ऐसा ना करने पर उन्हें अन्य कोई रोजगार के साधन भी उपलब्ध नहीं हैं। इस्लामी गणराज्य पाकिस्तान में मुस्लिमों को तो अधिकार हैं लेकिन अन्य कोई भी धर्म नाली आफ करने से ऊंचे ना उठ सके इसके लिए विशेष नियम बनाए गए हैं। वसीम अकरम का यह ताजा बयान इसी का एक उदारहण है।

ऐसा सिर्फ पाकिस्तान में हो यह भी नहीं है। भारत का सिरमौर कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के हटने से पहले वाल्मीकि समुदाय को राज्य का नागरिक तक नहीं माना जाता था। आरक्षण आदि तो दूर वह अन्य कोई नौकरियों में भी हिस्सा नहीं ले सकते थे।

इन वाल्मीकि समुदाय के लोगों को जम्मू कश्मीर में 1950 के दशक में ले जाया गया था। तब से इनकी पीढ़ियों को इसी काम में लगाए रखा गया। अधिकारों के नाम पर इन्हें हमेशा वंचित रखा गया। 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 हटने के बाद इन्हें जम्मू कश्मीर के नागरिक होने का दर्जा मिला और उन्हें सफाईकर्मी के अलावा अन्य कामों को करने की आजादी मिली।

मदरसे में मौलवी ने कई बच्चों के साथ किया कुकर्म, मालिश के बहाने बुलाता था: मुँह बंद रखने के लिए देता था पैसों का लालच, गुजरात पुलिस ने दबोचा

गुजरात के एक मदरसे में छात्रों ने मौलाना पर अप्राकृतिक कुकर्म के आरोप लगाए हैं। पीड़ित छात्रों की कुल तादाद 7 बताई जा रही है। आरोपित 25 वर्षीय मौलाना का नाम मोहम्मद अब्बास है। कुकर्म के लिए मौलाना बच्चों को मालिश के बहाने कमरे में बुलाया करता था। इस मामले में मदरसे के ट्रस्टी दाऊद फकीरा पर भी शिकायत के बावजूद कार्रवाई न करने का आरोप है। पुलिस ने मौलाना और ट्रस्टी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी सोमवार (23 अक्टूबर 2023) को दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला जूनागढ़ में मांगरोल थाना क्षेत्र का है। यहाँ ‘मुफ़्ती साहेब दाऊद फकीरा के ट्रस्ट’ और ‘उलूम एजुकेशन ट्रस्ट’ के माध्यम से एक मदरसा संचालित होता है। इस मदरसे में स्थानीय बच्चों के साथ कुछ बाहर के छात्र भी पढ़ते हैं। लगभग 2 साल पहले यहाँ मौलाना मोहम्मद अब्बास बच्चों को उर्दू और दीनी तालीम देने के लिए आया था। आरोप है कि अब्बास छात्रों को अपने कमरे में मालिश के बहाने बुलवाया करता था। यहाँ वो छात्रों से अप्राकृतिक दुष्कर्म करता था।

अपनी हवस का शिकार बनाने के बाद मौलाना अब्बास बच्चों को मुँह बंद रखने की धमकी भी दिया करता था। कुछ बच्चों को संबंध बनाने के लिए पैसे का भी लालच दिया गया था। बच्चों ने मौलाना अब्बास की इस करतूत की शिकायत मदरसे के 55 वर्षीय ट्रस्टी दाऊद फकीरा से की थी। आरोप है कि उन्होंने इस शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया। ट्रस्टी दाऊद इस मदरसे के साथ ABSC नाम से एक इंग्लिश स्कूल भी चला रहा था।

इस बीच मौलाना द्वारा कुकर्म का शिकार एक 15 वर्षीय छात्र अपने घर में गुमसुम सा रहने लगा। छात्र के परिजनों ने इसकी वजह पूछी तो उसने सारी बात बता दी। बच्चे ने बताया कि वो पिछले 6 माह से मौलाना की हवस का शिकार बन रहा है। इस करतूत की जानकारी होने के बाद नाराज परिजन पुलिस में गए और उन्होंने मौलाना अब्बास और ट्रस्टी दाऊद के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इस शिकायत पर पुलिस ने IPC की धारा 377, 323, 506 और 144 के साथ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया।

अपने खिलाफ केस दर्ज होने की भनक लगते ही मौलाना अब्बास फरार हो गया। पुलिस को उसकी लोकेशन सूरत में मिली। रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को पुलिस टीम में दबिश दे कर मौलाना अब्बास को सूरत से धर दबोचा। वहीं इस केस के दूसरे आरोपित मदरसे के ट्रस्टी दाऊद की गिरफ्तारी मदरसे से हुई। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि मौलाना अब्बास ने कुल कितने छात्रों को अपनी हवस का शिकार बनाया है। मामले की जाँच और आगे की कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।