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नवमी पर CM योगी ने किया कन्या पूजन, गोरखनाथ मंदिर में पखारे कन्याओं के पाँव; दुर्गा पूजा को बताया मातृशक्ति के सशक्तिकरण और सम्मान का पर्व

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को गोरखपुर के श्री गोरखनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर हवन के साथ शक्ति-स्वरूपा कन्याओं का पूजन किया।

सीएम योगी इस मौके पर माँ भगवती का रूप में पूजी जाने वाली कन्याओं के सामने याचक बने नजर आए। उन्होंने कन्याओं के चरण पखार कर उनका आर्शीवाद लिया और उन्हें अपने हाथों से प्रसाद खिलाया।

कन्या पूजन के इस पावन अनुष्ठान में सोमवार सुबह सीएम ने मठ के पहले तल पर भोजन कक्ष में श्रद्धा के साथ पीतल की परात में चाँदी के लोटे में जल भरकर नौ कुंवारी कन्याओं के चरण धोए। फिर उनके माथे पर रोली, चंदन, दही, अक्षत, दूर्वा का टीका लगाया और उनकी आरती की। इसके साथ ही चुनरी ओढ़ाकर, उपहार और दक्षिणा दी।

इस अवसर सीएम योगी ने प्रार्थना की कि शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माँ भगवती की कृपा संपूर्ण चराचर जगत पर बनी रहे और सभी का कल्याण हो। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्म ने सदैव मातृशक्ति के सम्मान और उनके सशक्तिकरण पर जोर दिया और इसलिए कुँवारी कन्याओं का पूजन किया जाता है।

सीएम योगी ने कहा, “ये मेरा सौभाग्य है कि कन्या पूजन के इस अनुष्ठान को संपन्न करने का मुझे अवसर मिला। ये मातृशक्ति के सम्मान और उनके सशक्तिकरण का बहुत अच्छा और सशक्त माध्यम भी है। जहाँ पूरे प्रदेश में नव दुर्गा के पूजन के कार्यक्रम संपन्न हो रहे हैं वहीं शासन के स्तर पर भी मिशन शक्ति का कार्यक्रम भी बहुत प्रभावी ढंग से आगे बढ़ रहा है।”

सीएम ने 100 से अधिक कन्याओं और छोटे बालकों को मंदिर की रसोई में पका भोजन अपने हाथों से परोसा। इस तरह से गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गोरखपीठ की परंपरा का निर्वाह किया। इस दौरान उन्होंने नाथ संप्रदाय की परंपरा के मुताबिक बटुक पूजन भी किया। जानकारी के मुताबिक, सीएम 24 अक्‍टूबर को भाजपा की परंपरागत शोभायात्रा में भी शामिल होंगे।

घोड़ी की लगाम पकड़कर खड़ा जीशान, सेक्स करता उसका साथी… Video वायरल होने के बाद 4 गिरफ्तार, बरेली की घटना

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक घोड़ी के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में कुल 5 लोगों को नामजद किया गया है। इनके नाम जीशान, रिज़वान, आमिर, भगवत और देवेंद्र हैं। इनमें से 4 आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। एक पुलिसकर्मी पर भी पैसे ले कर आरोपितों को छोड़ने के आरोप लगे हैं। घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रशासनिक अधिकारी सभी मामलों की जाँच करवा रहे हैं। मामले में शनिवार (21 अक्टूबर, 2023) को FIR दर्ज हुई है।

यह मामला बरेली के हाफिजगंज थानाक्षेत्र का है। इस मामले में शिकायत पुलिस की ही तरफ से दर्ज हुई है। शिकायतकर्ता सब इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया में वायरल एक वीडियो का हवाला दिया है। उन्होंने बताया कि वीडियो में कुछ लोग एक घोड़ी के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाते दिख रहे हैं। इस दौरान बरेली के ही अलीजान का बेटा जीशान घोड़ी की लगाम को पकड़े हुए है। भगवत नाम का आरोपित घोड़ी से यौन संबंध बना रहा है। घोड़ी को काबू करने में आमिर, देवेंद्र और रिज़वान सहयोग कर रहे हैं।

सब इंस्पेक्टर गजेंद्र के मुताबिक पाँचों आरोपितों की इस हरकत से क्षेत्र के स्थानीय निवासी काफी नाराज हैं। उन्होंने सभी आरोपितों पर कार्रवाई की माँग की है। इस शिकायत पर हाफिजगंज थाने में भगवत शरण, जीशान, देवेंद्र, रिज़वान और आमिर के खिलाफ IPC की धारा 377 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11 के तहत FIR दर्ज हुई है।

ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है। वहीं बरेली पुलिस ने अब तक कुल 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। पाँचवा आरोपित जीशान फरार है जिसकी तलाश में दबिश दी जा रही है।

वायरल वीडियो 2 मिनट 31 सेकेंड का है। वीडियो में सभी आरोपितों ने एक घोड़ी को एक सुनसान जगह बाँध रखा है और एक टोपी लगाया व्यक्ति उसके साथ दुष्कर्म कर रहा है। गैंगरेप के इन्हीं आरोपितों में एक व्यक्ति ने यह वीडियो बनाई है जो बाद में वायरल हो गई। ऑपइंडिया के पास वीडियो मौजूद है।

इस मामले में आरोपितों की बातचीत का एक ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल ऑडियो में एक आरोपित 15 हजार रुपए में खुद को एक पुलिसकर्मी द्वारा छोड़ देने की बात कह रहा है। ऑपइंडिया के पास ऑडियो मौजूद है। बरेली पुलिस के मुताबिक आरोपितों पर कार्रवाई के साथ अन्य आरोपों की भी जाँच की जा रही है।

बच्चों की देह पर टैटू गुदवा रहे फिलिस्तीनी, ताकि मरने के बाद पहचान सकें: इस्लाम में हराम है ये, हदीस में भी आदेश – अल्लाह के बनाए शरीर को बदलना गलत

इजरायल-हमास युद्ध सोमवार (23 अक्टूबर, 2023) को अपने 16वें दिन में प्रवेश कर गया। हमास के इजरायल पर हमले के बाद यहूदी मुल्क की जवाबी कार्रवाई में गाजा पट्टी में नागरिकों को खतरा बना हुआ है। यहाँ के अधिकतर लोग इजरायल की सलाह के बाद भी गाजा के उत्तरी हिस्से को खाली करके दक्षिणी हिस्से में जाने में नाकाम रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि गाजा में कई परिवार अपने बच्चों के शरीर पर उनके नाम के टैटू गुदवा रहे हैं, ताकि हमले में मारे जाने या घायल होने पर उनकी पहचान आसानी से की जा सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, माता-पिता बच्चों के हाथ-पैरों पर अरबी भाषा में नाम गुदवा रहे हैं। सोशल मीडिया पर बच्चों की लाशों और उनके अंगों पर नाम लिखे हुए कुछ वीडियो सामने आने के बाद ये खुलासा हुआ है। इस्लाम को मानने वाले फिलिस्तीनी पहचान के निशान के तौर पर टैटू बनवा रहे हैं, हालाँकि उनका मजहब इस प्रथा की इजाजत नहीं देता है।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर को इजरायल पर हुए भयंकर आतंकवादी हमले के बाद इजरायल गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास के ठिकानों पर बमबारी कर रहा है। इसमें अब तक 1400 से अधिक इजरायली और अन्य नागरिकों की जान चली गई थी। अब तक दोनों तरफ से 6000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में दोनों तरफ जान माल का नुकसान हो रहा है। बड़ी संख्या में लोगों की मौतें हो रही हैं।

ऐसे में हमले में मारे गए अपने परिवारों को खोजने में लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि गाजा पट्टी में लोग अपने बच्चों की पहचान करने के लिए उनके शरीर के अंगों पर टैटू गुदवा रहे हैं। अक्सर कई इस्लामी स्कॉलर और मौलवी शरीर पर टैटू बनवाने को हराम बताते हैं। उनका तर्क है कि इस्लाम शरीर को सुधारने या बदलने की मंजूरी नहीं देता क्योंकि ये अल्लाह ने बनाया है।

यह मनाही इस्लाम की मजहबी पुस्तकों, खास तौर से हदीस की व्याख्याओं पर आधारित है। भगोड़े इस्लामी मुबल्लिग़ जाकिर नाइक के मुताबिक, साहिह अल-बुखारी, हदीस 5943 में लिखा है, “अल्लाह ने उन औरतों को श्राप दिया है जो टैटू गुदवाती हैं या अपने लिए बनवाती हैं, और जो अपने चेहरे से बाल हटाती हैं, और जो खूबसूरत दिखने के लिए अपने दाँतों के बीच कृत्रिम तरीके से जगह बनाती है। ये औरतें ऐसा कर अल्लाह की बनाए नैन-नक्शों को बदल देती हैं।”

इसके अलावा, हदीस में गोदने के बारे में कई अन्य जिक्र भी हैं। साहिह अल-बुखारी, पुस्तक 72, हदीस 823 की हदीस के मुताबिक, पैगंबर मुहम्मद ने टैटू बनाने वालों और टैटू बनवाने वालों को श्राप दिया था। खास तौर से, साहिह अल-बुखारी हदीस के सबसे भरोसेमंद संग्रहों में से एक है। IIUM के साहिह अल-बुखारी से हदीस के संग्रह के मुताबिक, ऊपर जिक्र किए हदीस में लिखा है, “पैगंबर ने उस महिला को श्राप दिया है जो अपने बालों को कृत्रिम तौर से लंबा करती है और जो उसके बालों इस तरह से लंबा करता है, और उस महिला को भी जो टैटू बनाती है (खुद को या दूसरों को) ) और वह जो खुद टैटू बनवाती है।

साहिह मुस्लिम की हदीस के मुताबिक, एक और भरोसेमंद हदीस टैटू के मनाही के बारे में बताती है। हदीस संग्रह वेबसाइट के मुताबिक, साहिह मुस्लिम, पुस्तक 24, हदीस 5300 में लिखा है, “किसी के सिर पर नकली बाल लगाना या भौंहें उखाड़ना या दाँत अलग करना मना है। इब्न उमर ने बताया है कि अल्लाह के दूत ने उस महिला को श्राप दिया था जिसने नकली बाल लगाए थे और उस महिला को जिसने टैटू बनवाने के लिए कहा था।”

खासतौर से मेहंदी या अन्य किसी रंग के बने अस्थायी टैटू बनाने की इस्लाम में मंजूरी दी गई है, लेकिन केवल तभी जब उसका डिजाइन शरिया कानून का पालन करता हो।

‘मुस्लिमों को कैसा लगेगा’: राम मंदिर जैसा दुर्गा पूजा पंडाल देख दशानन की तरह जला ‘द वायर’, वामपंथी प्रलाप के बाद आर्थिक बहिष्कार की माँग

वामपंथी प्रोपगैंडा पोर्टल द वायर में छपे एक लेख में एक बंगाली प्रोफ़ेसर ने ज्ञान दिया है कि कोलकाता में श्रीराम मंदिर की तर्ज पर बना दुर्गा पूजा पंडाल सही नहीं है। लेख लिखने वाले पार्थो सारथी रे का दावा है कि श्रीराम मंदिर एक समुदाय के शोषण का प्रतीक है और यह त्यौहार के मूल्यों के विरुद्ध है।

जैसा कि आप जानते हैं कोलकाता में हर वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान कई भव्य पंडाल बनाए जाते हैं जिनमें अलग-अलग तरह की थीम अपनाई जाती है। इस बार संतोष मित्रा चौराहे पर एक पंडाल ऐसा बनाया गया है जिसकी थीम अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर पर आधारित है। इस पंडाल का उद्घाटन केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया है।

यह पंडाल अब कोलकाता में लोगों को काफी पसंद आ रहा है और आमजन से लेकर राज्य के राज्यपाल सीवी आनंद बोस जैसी हस्तियाँ भी यहाँ दर्शन के लिए पहुँची हैं। यह वर्तमान में कोलकाता की दुर्गा पूजा के आकर्षण का केंद्र है।

हालाँकि, वामपंथी और हिन्दू विरोधी पोर्टल द वायर को हिन्दुओं की पहचान से जुड़ी किसी भी काम से समस्या होती है। लेख लिखने वाले पार्थो का दावा है कि यह पंडाल एक ऐसे स्थान के आधार पर बनाया गया है जो दूसरे धर्म के पूजा स्थल को तोड़ कर बनाया जा रहा है। यह कोलकाता के दुर्गा पूजा पंडालों के केंद्र में नहीं हो सकता।

द वायर के लेख का स्क्रीनशॉट

वामपंथी प्रोफेसर पार्थो का इशारा बाबरी मस्जिद की तरफ है जिसे 6 दिसम्बर, 1992 को कारसेवकों ने गिरा दिया था और उसी स्थान पर श्रीराम मंदिर का निर्माण हो रहा है। पार्थो का दावा है कि श्रीराम मंदिर एक अन्य मजहबी स्थल को तोड़ कर बनाया जा रहा है जो कई स्तर पर गलत है क्योंकि बाबरी मस्जिद स्वयं ही प्राचीन हिन्दू मंदिर तोड़ कर बनाई गई थी।

यह बात पुरातत्व विभाग की खुदाई में साबित हो चुकी है। ऐसे में असल शोषित तो हिन्दू समाज है। वहीं कौन सा पंडाल आकर्षण का केंद्र बनेगा और कौन नहीं इसका फैसला हिन्दू भक्त स्वयं करेंगे, इसमें भला उन्हें किसी वामपंथी से प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता क्यों है?

प्रोफ़ेसर सभी बातों को किनारे रखते हुए दावा करते हैं कि श्रीराम मंदिर का निर्माण ऐसी घटनाओं के आधार पर हो रहा है जो कि अपने आप में अवैध हैं। वह बात अलग है कि कोर्ट में सभी चीजों को आधार बना कर ही हिन्दू पक्ष को यह जमीन दी गई थी। इसमें वैध अवैध का प्रश्न कहाँ से उठता है यह वामपंथी प्रोफ़ेसर पार्थो ही बता सकते हैं। कौन सी घटनाएँ वैध और अवैध हैं इसका निर्धारण भला कोई वामपंथी प्रोफेसर कैसे कर सकता है जब देश की सर्वोच्च अदालत इस विषय में अपना निर्णय दे चुकी है।

आगे वह दावा करते हैं कि कोई भी ‘सही सोचने वाला हिन्दू’ श्रीराम मंदिर पर गर्व नहीं करेगा। यह वामपंथी गिरोह की पुरानी तकनीक रही है कि वह अपने जैसा ना सोचने वाले को गलत हिन्दू बताते हैं। हालाँकि, वामपंथी पार्थो किस हिन्दू को ‘सही सोच वाला’ मानते हैं उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया।

यह हास्यास्पद बात है कि धर्म को अफीम बताने वाले वामपंथी और मार्क्सवादी अब कोई हिन्दू कैसा है और वह अपने इष्ट और आराध्य के मंदिर के विषय में क्या सोचता है इसके लिए डिक्री जारी कर रहे हैं। यह एक प्रकार की खीझ ही दर्शाता है।

जहाँ तक सही सोचने वाले हिन्दुओं की बात है तो लेख लिखने वाला स्वयं को सोचने के पैमाने पर ठीक ही पाता है और उसे 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या नगरी में बन रहे श्रीराम मंदिर पर पूरा गर्व है।

वह इसे अन्याय से लड़ कर अपने धर्म की रक्षा के लिए बनाया गया गया प्रतीक भी मानता है। ऐसे में वामपंथी पार्थो के खुद को ‘सही सोचने वाले हिन्दू’ की अकेली ‘लाइसेंसिंग अथॉरिटी’ घोषित करने को वह हास्यास्पद भी मानता है।

लेख में सबसे हास्यास्पद बात यह लिखी है कि आखिर इस पंडाल में आने वाले मुस्लिम परिवारों को कैसा लगेगा? इस पर प्रश्न उठाया जाना चाहिए कि आखिर कितने मुस्लिम परिवार दुर्गा पूजा में रुचि रखते होंगे क्योंकि बुत की पूजा करना तो इस्लाम में हराम है।

दूसरी बात यह है कि इसी आधार पर प्रश्न उठाया जाना चाहिए कि देश के करोड़ों हिन्दुओं को तब कैसा लगता होगा/है जब उनके तीन देवों के मंदिरों (काशी, मथुरा और अयोध्या) पर सदियों से मुस्लिम कब्ज़ा करके बैठे हैं।

असल में वामपंथियों की पूरी कवायद यह है कि ऐसा कोई भी त्यौहार जो कि हिन्दुओं को गर्व की अनुभूति करवाता है या फिर उन्हें एकता के सूत्र में बाँधता है उसकी छवि धूमिल की जाए। इसीलिए पूरे लेख में वामपंथी पार्थो दुर्गा पूजा को एक हिन्दू त्यौहार नहीं बल्कि ‘सेक्यूलर’ त्यौहार बताने की कोशिश करते हैं। ऐसे प्रयास इससे पहले ओणम और यहाँ तक दिवाली को ‘दक्षिण एशियाई तोहार’ बता कर किए जा चुके हैं।

“दुर्गा पूजा को सेक्यूलर त्यौहार बनाने के लिए उसमें राम मंदिर का समावेश ना हो, यहाँ मुस्लिमों की भावनाओं का ख्याल रखा जाए और इसे एक हिन्दू उत्सव की तरह ना मनाया जाए।” पार्थो के इस पूरे लेख का यही ध्येय है। वह बात अलग है कि पूर्व में ऐसे भी दुर्गा पूजा पंडाल बंगाल के भीतर ही बनाए गए हैं जिनमें नमाज तक पढ़ी गई है, आखिर तब हिन्दुओं की भावनाओं की चिंता क्यों नहीं की गई?

हिन्दू देवी देवताओं, रीति रिवाजों और परम्पराओं को धूमिल करने वाले त्योहारों पर हमला करने वाले किसी भी विचार को सबसे पहले प्लेटफार्म उपलब्ध करवाने में वायर जैसे पोर्टल आगे रहते हैं। अब सोशल मीडिया पर इनके आर्थिक बायकाट की माँग हो रही है।

‘गाना – प्रभु का नाम, सेक्सी ड्रेस में लड़कियाँ, बैकग्राउंड में लिंगनुमा आकृतियाँ’: सलमान खान के ‘Tiger 3’ के सॉन्ग को देख कर भड़के लोग, पूछा – ‘अल्लाह का नाम क्यों नहीं?’

सलमान खान की नई फिल्म ‘Tiger 3’ का एक गाना आया है। प्रोडक्शन कंपनी ‘यशराज फिल्म्स (YRF)’ द्वारा इस गाने को रिलीज किए जाने के बाद से ही ये विवादों में घिर गया है। इस गाने का नाम है – ‘लेके प्रभु का नाम’। हालाँकि, समस्या इससे नहीं है। असल में ‘लेके प्रभु का नाम’ गाने में अभिनेत्री कैटरीना कैफ सेक्सी कपड़ों में दिख रही हैं और साथ ही कई अन्य लड़कियाँ भी इसी तरह की ड्रेस में नाचती हुई दिख रही हैं।

संगीत निर्देशक प्रीतम द्वारा तैयार किए गए इस गाने को अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखा है और अरिजीत सिंह और निकिता गाँधी ने इसे आवाज़ दी है। मनीष शर्मा द्वारा निर्देशित ‘टाइगर 3’ में इमरान हाशमी मुख्य विलेन की भूमिका में हैं। गाने का वीडियो शेयर करते हुए ‘सब लोकतंत्र’ नामक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल ने लिखा, “क्या इस गाने में जो मुझे आपत्तिजनक दिख रहा है, वो केवल मुझे दिख रहा है, या आपको भी? याद रहे, काराचीवुड में कुछ संयोग नहीं होता!”

कई लोगों ये भी सवाल उठाया कि इस तरह के गाने में आखिर ‘प्रभु’ का नाम लेने की बात ही क्यों हो रही है, इस्लाम के ‘खुदा’ का नाम लेने की बात क्यों नहीं की जा रही?

कुछ लोग इससे भी नाराज़ दिखे कि इस गाने के बैकग्राउंड के लिए ‘लिंगनुमा आकृतियों’ का इस्तेमाल किया गया है। बता दें कि गाना किसी खण्डहर में फिल्माया गया लगता है, जिसके खम्भों और दीवारों को देख कर लोगों ने ये बातें कही।

बता दें कि इस गाने को तुर्की के कप्पाडोसिया में शूट किया गया है। हालाँकि, कई लोग इस गाने की तारीफ़ करते हुए भी दिखे। सलमान खान और अरिजीत सिंह के बीच खटपट की खबरें आई थीं, ऐसे में फैंस को दोनों के साथ आने का इंतज़ार था। सलमान खान की ‘Tiger 3’ में शाहरुख़ खान का भी कैमियो होगा। YRF की टाइगर सीरीज, ‘वॉर’ और ‘पठान’ के क्रम में ही ये फिल्म आ रही है, जिसे ‘स्पाई यूनिवर्स’ भी कहा जा रहा है।

‘प्रोटीन नहीं मिल रहा, इसीलिए नहीं मार पा रहे छक्के’: इमाम उल हक़ के अजीबोगरीब तर्क के बाद उड़ा पाकिस्तान टीम का मजाक, लोग बोले – खेल पर ध्यान दो, खाना पर नहीं

पाकिस्तानी बल्लेबाज इमाम उल हक ने मैच से पहले होने वाली कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनकी टीम के बल्लेबाज प्रोटीन नहीं खा रहे हैं इसलिए छक्के नहीं मार पा रहे। उन्होंने अजीबोगरीब तक दिया कि हमें अपने खाने में कार्बोहाइड्रेट की जगह प्रोटीन को शामिल करना होगा ताकि हम पावरप्ले के ओवर में छक्के मार पाएँ।

इमाम उल हक ने यह हास्यास्पद बातें रविवार (22 अक्टूबर 2023) को टीम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं जब टॉप आर्डर के बल्लेबाजों को लेकर उनसे प्रश्न पूछा गया। 23 अक्टूबर को पाकिस्तान को पड़ोसी अफगानिस्तान का सामना करना है। उनके इस बयान को लेकर अब ट्रोल किया जा रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2023 में अगानिस्तान के खिलाफ मैच से पहले पाकिस्तान के बल्लेबाज शुरुआती दस ओवर में छक्के नहीं मार पाए हैं और लगातार उनकी टीम बड़े स्कोर बनाने से चूक रही है। इमाम उल हक के इस बयान पर एक्स (पहले ट्विटर) पर लोगों ने उनका ख़ूब मजाक उड़ाया। हमजा नाम के एक अकाउंट ने लिखा कि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट खाने की बात वह व्यक्ति कर रहा है जो कि मैदान पर तीन रन नहीं दौड़ पाता है।

मिक्कू नाम के एक यूजर ने लिखा कि खाने के अलावा भी और कोई बात सोच लिया करो।

एक मारवाड़ी नाम के अकाउंट ने लिखा कि परफॉरमेंस पर ध्यान दो खाने पर नहीं।

‘क्रिकेट फ्रीक’ नाम के अकाउंट लिखा कि आपको रोहित शर्मा से कोचिंग लेने की आवश्यकता है।

माइकल मखाल ने लिखा कि भारत के आधे से ज्यादा क्रिकेटर शाकाहारी हैं लेकिन फिर भी पाकिस्तान की टीम से अच्छा प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कहावत याद की – “नाच ना जाने, आँगन टेढ़ा”

विक्रम नायक ने लिखा कि पिज़्ज़ा-बर्गर खाएँगे तो और क्या होगा?

इमाम उल हक की इस बात का जवाब देते हुए ‘सुनील द क्रिकेटर’ नाम के एक यूजर ने भारतीय बल्लेबाज और कप्तान रोहित शर्मा का पुराना वीडियो डाला जिसमें वह अपना पसंदीदा खाना दाल-चावल बता रहे हैं।

इमाम उल हक को ट्रोल करने के लिए एक यूजर ने लिखा कि हैदराबादी बिरयानी खाना बंद कर दोगे या नहीं।

गौरतलब है कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम लगातार खाने-पीने को लेकर ट्रोल की जाती रही है। इससे पहले भी कई बार ऐसे वीडियो चर्चा में आते रहे हैं जिनमें उनके फैन्स टीम की खाने-पीने की आदतों को लेकर उन पर तंज करते रहे हैं।

‘पंजाब में हलीउल्लाह वालों को नहीं रहने देना चाहते’: धर्मांतरण पर बागेश्वर बाबा के प्रहार से भड़के ईसाई संगठन, दर्ज कराई शिकायत

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने रविवार (22 अक्टूबर, 2023) को पंजाब के पठानकोट में अपना दरबार लगाया। इस दौरान उन्होंने पंजाब में सक्रिय ईसाई मिशनरियों को आड़े हाथों लिया। पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने पंजाब को धर्मान्तरण से मुक्त कराने की मुहिम चलाने पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने धर्म परिवर्तन करवाने वाली ताकतों के खिलाफ और अधिक कड़ा कानून बनाने की भी वकालत की। हालाँकि, ईसाई संगठनों ने पंजाब पुलिस में पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ अपनी भावनाओं को आहत करने की शिकायत दर्ज करवाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब के पठानकोट में रविवार को लगे अपने दरबार में पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने लोगों से धर्म परिवर्तन की साजिश के खिलाफ जागरूकता की अपील की। उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें मंदिरों और गुरुद्वारों में घुसना बंद करें। उन्होंने पंजाब में सक्रिय मिशनरियों को चेतावनी देते हुए कहा कि वो भोले भाले हिन्दुओं को बरगलाना बंद करें। भारत को बाबर नहीं बल्कि रघुवर का देश बताते हुए धीरेन्द्र शास्त्री ने सरकार से अपील की है कि वो धर्मान्तरण के खिलाफ बने कानून को और सख्त करें।

धीरेन्द्र शास्त्री ने भारत में हो रहे धर्मान्तरण के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताया। पंजाब को गुरुओं और वीरों की धरती बताते हुए बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर ने वहाँ जाना अपना सौभाग्य बताया। पंजाब की जनता को प्यार और बड़े दिलवाले बता कर धीरेन्द्र शास्त्री ने लोगों को गुरुनानक के दिखाए मार्ग पर चलने की अपील की।

एक वायरल वीडियो में उन्होंने कहा कि वो पंजाब में ‘हलीउल्लाह’ वालों को नहीं रहने देना चाहते हैं। ईसाई मिशनरियों द्वारा कराए जा रहे धर्मपरिवर्तन को पंडित धीरेन्द्र शास्त्री ने सनातन को मिटाने की साजिश करार दिया।

बता दें कि बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर की पठानकोट में 3 दिवसीय भागवत कथा है जहाँ वो 21 से 23 अक्टूबर तक रहेंगे। इस दौरे पर वो अमृतसर के स्वर्ण मंदिर और दुर्गियाना मंदिर भी गए और पूजा अर्चना की।

ईसाई समुदाय द्वारा पुलिस में शिकायत

बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर के इस बयान पर पंजाब के ईसाई संगठनों ने नाराजगी जताई है। ऑल इंडिया क्रिश्चियन कमेटी ने इस मामले में अजनाला पुलिस में पंडित धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है।

विरोध करने वालों का कहना है कि पंडित शास्त्री ने उनके ‘हालेलुइया’ को ‘हलीउल्लाह’ कहा है जिस से उनकी भावनाएँ आहत हुईं हैं। शिकायत में पंडित शास्त्री के बयान को ईसाईयों का अपमान बताया गया है। साथ ही 2 दिन की समयसीमा देते हुए धीरेन्द्र शास्त्री को माफ़ी माँगने और बयान वापस लेने के लिए कहा गया है। 2 दिनों के बाद बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर के खिलाफ बड़े आंदोलन का ऐलान किया गया है।

मध्य प्रदेश की 22 सीटों पर मुस्लिम निर्णायक, इनके ही सहारे नैया पार लगाने की जुगत में कॉन्ग्रेस: 2018 में इनके साथ से ही आगे बढ़ी थी हाथ

मध्य प्रदेश की सत्ता में कॉन्ग्रेस की वापसी की आस मुस्लिम मतदाताओं पर टिकी हुई है। राज्य में 17 नवंबर 2023 को विधानसभा चुनाव के लिए वोट पड़ेंगे। नतीजे 3 दिसंबर को राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के साथ ही आने हैं।

2018 के विधानसभा चुनावों में जीतने के बावजूद कॉन्ग्रेस लंबे समय तक सत्ता पर काबिज नहीं रह सकी थी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में उसके दो दर्जन विधायक बागी होकर बीजेपी में शामिल हो गए थे। पिछले चुनावों में बीजेपी को 41.02 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन 40.89 फीसदी वोट पाकर भी कॉन्ग्रेस ने 230 में से 114 सीटें जीतने में कामयाब रही थी।

समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कॉन्ग्रेस ने सरकार बनाई थी। लेकिन यह सरकार मात्र 15 महीने ही चल पाई। कॉन्ग्रेस को उम्मीद है कि इस बार वह मध्य प्रदेश में सत्ता हासिल कर सकती है। लेकिन इस उम्मीद के केंद्र में ज्यादातर ‘मुस्लिम मतदाता’ ही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य की 230 विधानसभा सीटों में से 22 सीटें मुस्लिमों के प्रभाव वाली हैं।

मध्य प्रदेश में बीजेपी और कॉन्ग्रेस के बीच सीधा मुकाबला रहा है। इस द्विदलीय राजनीति में जीत का अंतर हमेशा 20 सीटों से कम रहा है। यही वजह है कि कॉन्ग्रेस मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने में लगी है। साल 2018 में कॉन्ग्रेस की जीत में भी मुस्लिम वोटर अहम थे। इनकी मदद से ही पार्टी अपना वोट शेयर 3-4 फीसदी तक बढ़ाने में कामयाब रही थी।

कॉन्ग्रेस से संबद्ध मध्य प्रदेश मुस्लिम विकास परिषद के समन्वयक मोहम्मद माहिर ने बताया कि अल्पसंख्यक वोटों में इजाफे से कॉन्ग्रेस को 2018 में मामूली अंतर से चुनाव जीतने में मदद मिली थी। दिलचस्प यह है कि कॉन्ग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कमलनाथ ने भी 2018 में कहा था कि अगर 90 फीसदी अल्पसंख्यक वोट कॉन्ग्रेस के पक्ष में हो, तो वे सरकार बना सकते हैं।

उनकी इस अपील ने कॉन्ग्रेस के पक्ष में काम भी किया था। इसके कारण ही 2008 और 2013 के चुनावों में हारने वाली 10-12 सीटें भी 2018 में कॉन्ग्रेस के हाथ लग गई थी।

2011 की जनगणना के मुताबिक मध्य प्रदेश में मुस्लिम आबादी 7 फीसदी है। अनुमान के मुताबिक अब इनकी संख्या बढ़कर 9-10 फीसदी हो गई है। एमपी की विधानसभा की 230 सीटों में 47 विधानसभा सीटों पर उनकी अच्छी खासी संख्या हैं। इनमें से 22 सीटों के नतीजे वे किसी के भी पक्ष में झुका सकते हैं।

राज्य में अल्पसंख्यकों की ये 22 सीटें किस पार्टी को जाएँगी यह इस बात पर निर्भर करता है कि मुस्लिम वोट कैसे करते हैं। रिपोर्टों से पता चलता है कि इन 22 सीटों पर मुस्लिम मतदाता 15,000 से 35,000 तक हैं, जो करीबी मुकाबले के हालात में उन्हें अहम बनाता है। इन निर्वाचन क्षेत्रों में से कुछ महत्वपूर्ण सीटों में भोपाल, इंदौर, बुरहानपुर, जावरा, जबलपुर और अन्य शामिल हैं।

हाल ही में कॉन्ग्रेस को राजनीति में अल्पसंख्यक समुदाय के साथ कथित विश्वासघात को लेकर भाजपा की आलोचना का सामना करना पड़ा है। हालाँकि कॉन्ग्रेस का लक्ष्य मुस्लिम वोटों का बड़ा हिस्सा हासिल करना है, लेकिन उसने विधानसभा चुनाव 2023 में सीमित संख्या में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि बैतूल जिले की आलमपुर सीट को छोड़कर कॉन्ग्रेस सभी सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान कर चुकी है।

दूसरी तरफ, भाजपा ने न केवल अल्पसंख्यकों को उम्मीदवार बनाया है, बल्कि मुस्लिम आबादी के सामाजिक और आर्थिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित किया है। दोनों अहम राजनीतिक दल बीजेपी और कॉन्ग्रेस आगामी विधानसभा चुनावों में अल्पसंख्यक वोटरों का समर्थन हासिल करने के लिए एक-दूसरे को टक्कर देने की कोशिश कर रहे हैं। वैसे आम आदमी पार्टी भी विधानसभा चुनाव में हिस्सा ले रही है, लेकिन उसकी मौजूदगी से बीजेपी या कॉन्ग्रेस में से किसी के भी वोट प्रतिशत पर असर पड़ने की उम्मीद कम ही है।

‘मर्दों से औरतें कमतर’: पाकिस्तान के प्रोफेसर से मौलानाओं ने कहलवाया, डार्विन का सिद्धांत पढ़ाने पर मँगवाई माफी

पाकिस्तान के बन्नू शहर से एक चौकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ सरकारी स्नातकोत्तर डिग्री कॉलेज के जीव विज्ञान के एक सहायक प्रोफेसर को स्टाम्प पेपर पर माफ़ीनामा देने के लिए मजबूर किया गया। सहायक प्रोफेसर शेर अली को ये माफीनामा जीव विज्ञान की एक बुनियादी अवधारणा चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने की वजह से देना पड़ा।

यही नहीं उन्हें मिश्रित-लिंग वाली यानी मर्द और औरतों के साथ होने वाली मीटिंग की निंदा करने और यह ऐलान करने के लिए भी मजबूर किया गया कि महिलाएँ पुरुषों से निम्नतर (नीचे) हैं। सहायक प्रोफेसर शेर अली को लेकर ये सब विवाद महज इसलिए खड़ा हुआ, क्योंकि उन्होंने इस महीने की शुरुआत में डोमेल क्षेत्र में संविधान और कानून के मद्देनजर औरतों के हकों पर आयोजित एक सेमिनार को संबोधित किया था।

सेमिनार के दौरान उनकी टिप्पणियाँ स्थानीय मौलवियों को अच्छी नहीं लगीं। इन लोगों ने प्रोफेसर शेर अली पर अय्याशी फैलाने और इस्लाम और स्थानीय संस्कृति के खिलाफ बोलने का आरोप लगाया और अधिकारियों से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग कर डाली।

हालाँकि, इसके इसके तुरंत बाद, प्रोफेसर अली ने पाठ्यक्रम के हिस्से के तौर पर डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने के मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ की। पाकिस्तान के अखबार डॉन ने उनके हवाले से कहा, “जीव विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का अध्याय 24 डार्विन के जैविक विकास के सिद्धांत पर चर्चा करता है और अगर किसी को इस विषय से परेशानी है, तो उन्हें पाठ्यक्रम से इस अध्याय को हटाने के लिए सरकार से संपर्क करना चाहिए।”

प्रोफेसर ने यह भी कहा कि अगर वह इस विषय को नहीं पढ़ाएँगे तो उनके छात्र उनकी पढ़ाने की काबिलियत पर सवाल उठाएँगे। उन्होंने ये भी कहा कि उन्होंने हमेशा अपने छात्रों की सहमति लेने के बाद डार्विन के जैविक विकास के सिद्धांत को पढ़ाया है।

जिला प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने डॉन को बताया कि शेर अली ने मौलवियों से कहा कि पर्दा या औरतों के हकों पर सोशल मीडिया पोस्ट उनके नहीं थे, उन्हें एडिट किया गया था।

सहायक प्रोफेसर शेर अली ने बन्नू डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय को तीन पन्नों का हलफनामा दिया कि डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत सहित सभी वैज्ञानिक और तर्कसंगत विचार, जो इस्लामी शरिया का विरोध करते हैं वो झूठ हैं।

कट्टरपंथी मौलानाओं के दबाव में प्रोफेसर शेर अली को ये भी ऐलान करना पड़ा कि औरतें मर्दों से कमतर हैं और ऐलान किया कि महिलाओं को पुरुषों के साथ गैरजरूरी तौर पर घुलने-मिलने की मंजूरी नहीं है।

ये तब है जब सहायक प्रोफेसर शेर अली के पास पेशावर विश्वविद्यालय से एमएससी की डिग्री है। वो इस्लामाबाद में कायद-ए-आज़म विश्वविद्यालय से ह्यूमन जेनेटिक्स में एमफिल हैं।

‘द कर्स ऑफ गॉड-व्हाई आई लेफ्ट इस्लाम’ किताब के लेखक हैरिस सुल्तान ने इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया एक्स पर डाला था। इसके बाद ये सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो के साथ सुल्तान ने कैप्शन लिखा, “यही वजह है कि पाकिस्तान तीसरी दुनिया का नरककुंड बना रहेगा। अच्छी दाढ़ी रखने वाले ये कट्टरपंथी मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर शेर अली को विकासवाद के सिद्धांत की निंदा करने और रिकॉर्ड पर यह कहने के लिए मजबूर करते हैं कि कुरान और हदीस के मुताबिक, महिलाएँ पुरुषों के मुकाबले ‘बौद्धिक रूप से कमतर’ हैं।”

लेखक हैरिस सुल्तान ने आगे लिखा, “हालाँकि मौलवी ग़लत नहीं हैं। कुरान और पैगंबर मुहम्मद ने कहा था “औरतें मूर्ख हैं”।

गौरतलब है कि जीव विज्ञान के एक प्रोफेसर शेर अली का डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत को पढ़ाने के लिए सार्वजनिक माफी माँगने का मामला पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और वैज्ञानिक विचारों में इस्लामिक कट्टरपंथियों की दखलअंदाजी का उदाहरण हैं।

केमिकल हमले के बाद तबाह हो जाता पूरा इजरायल? हमास आतंकियों की अलकायदा वाली साजिश, तैयार था सायनाइड से बम बनाने का पूरा खाका

दक्षिणी इजरायल पर 7 अक्टूबर, 2023 को किए गए हमले में इस्लामी आतंकी संगठन हमास के आतंकी निर्दोष नागरिकों पर सायनाइड वाले केमिकल हथियारों का उपयोग करने वाले थे। यह खुलासा आतंकियों के पास मिली सामग्री में हुआ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायली ख़ुफ़िया एजेंसियों को दक्षिणी इजरायल के किब्बुत्ज़ में मारे गए आतंकियों के पास से कुछ USB पेन ड्राइव बरामद हुई हैं। इन पेन ड्राइव में आतंकी संगठन अलकायदा की तरह सायनाइड वाले केमिकल हथियार बनाने की विधि बताई गई है।

इस यूएसबी डिवाइस में पूरी तरीके से समझाया गया था कि सायनाइड वाले केमिकल बम कैसे बनाए जाएँ और उन्हें लगा कर ज्यादा से ज्यादा तबाही मचाई जाए। इजरायली सुरक्षा बलों ने पता लगाया है कि हमास आतंकियों के पास मिली यह जानकारी असल में आतंकी संगठन अलकायदा द्वारा वर्ष 2003 में तैयार की गई थी।

गौरतलब है कि इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर सबसे पहले दक्षिणी हिस्से में हमला किया था। इस इलाके में बसे गाँवों और मुहल्लों में आतंकियों ने घर-घर जाकर बच्चों, महिलाओं समेत एक-एक व्यक्ति को मार दिया था। इसी इलाके में आयोजित किए जा रहे एक म्यूजिक फेस्टिवल में 260 से अधिक लोगों को मार दिया था। इजरायल के राष्ट्रपति आइजैक हेर्जोग ने आतंकियों के पास से केमिकल बम की जानकारी मिलने पर कहा, “यह अलकायदा की सामग्री है। हम अल कायदा, ISIS और हमास का मुकाबला कर रहे हैं।”

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी लगातर यह कहते आए हैं कि हमास भी ISIS की तरह ही खतरनाक है और इसका खात्मा ISIS की तरह होना चाहिए। वह लगातार हमास का समर्थन करने वालों को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी से निष्कासित करने की मांग भी करते रहे हैं।

इजरायल की सरकार ने विदेशों में स्थित अपने दूतावासों को भेजे गए केबल में भी इन केमिकल हथियारों के विषय में जानकारी दी है। उन्होंने अपने दूतावासों को बताया है कि हमास ISIS की तरह ही हमले करना चाहता था। इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या अब बढ़ कर 1400 के पार हो चुकी है। इजरायल ने भी इस के जवाब में हवाई हमले किए हैं। इजरायल के हमलों में अब तक 4400 से अधिक आतंकियों के मारे जाने की सूचना है।