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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के गृहजिले में पहली बार दौड़ेगी एक्सप्रेस ट्रेन: 4 नई ट्रेनों की घोषणा, लंबे समय से हो रही थी माँग

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के गृह जिले मयूरभंज में पहली बार एक्सप्रेस ट्रेन भी चलेगी। रेल मंत्रालय ने इस बारे में फैसला किया है। मोदी सरकार इस आदिवासी बहुल जिले को ध्यान में रखकर काम कर रही थी। मोदी सरकार के इस फैसले के बाद अब ओडिशा का मयूरभंज जिला कोलकाता के साथ ही टाटानगर और राउरकेला से सीधे जुड़ जाएगा। इसके लिए चार ट्रेनों की मंजूरी दी गई है।

मयूरभंज को चार ट्रेनों की सौगात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पैतृक जिले मयूरभंज, ओडिशा से चार जोड़ी नई ट्रेनों को चलाने की मंजूरी दी है। ये नई ट्रेनें मयूरभंज को कोलकाता, राउरकेला और टाटानगर से जोड़ेंगी। नई ट्रेनों की मंजूरी मयूरभंज के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग है। मयूरभंज के लोग बेहतर रेल संपर्क की कमी का सामना कर रहे थे, जिससे उन्हें अन्य हिस्सों के साथ यात्रा करना मुश्किल हो रहा था।

नई ट्रेनों से मयूरभंज के लोगों को ओडिशा और भारत के अन्य हिस्सों में आसानी से यात्रा करने की सुविधा मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा और आदिवासी बहुल जिले के विकास में मदद मिलेगी।

रेलवे ने की इन ट्रेनों को चलाने की घोषणा

कोलकाता-बादामपहाड़-कोलकाता साप्ताहिक एक्सप्रेस

बादामपहाड़-राउरकेला-बादामपहाड़ साप्ताहिक एक्सप्रेस

राउरकेला-टाटानगर-राउरकेला (सप्ताह में 6 दिन)

टाटानगर-बादामपहाड़-टाटानगर (सप्ताह में 6 दिन)

आदिवासी क्षेत्रों के विकास को लेकर गंभीर मोदी सरकार

मयूरभंज से नई ट्रेनों की मंजूरी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इससे आदिवासी क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और विकास में बड़ा बढ़ावा मिलेगा। नई ट्रेनों की मंजूरी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लिए भी एक प्रतीकात्मक महत्व रखता है, जो भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति हैं। यह दर्शाता है कि सरकार आदिवासी समुदायों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। नई ट्रेनों की मंजूरी भारत सरकार की आदिवासी क्षेत्रों के विकास के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

नई ट्रेनों से मयूरभंज के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य अवसरों तक पहुँचने में आसानी होगी। नई ट्रेनों से स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे आदिवासी समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास में मदद मिलेगी।

‘जय श्री राम’ से भड़की इंजीनियरिंग कॉलेज की प्रोफेसर मैडम, छात्र को मंच से उतारा: कहा- ये बेकार की बातें

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एबीईएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के एक छात्र ने कॉलेज के सांस्कृतिक उत्सव के दौरान जय श्री राम से अभिवादन किया। जिससे एक सहायक प्रोफेसर भड़क गईं। उन्होंने न सिर्फ छात्र को डाँटा बल्कि मंच से भी नीचे उतार दिया। वहीं सोशल मीडिया यूजर्स इस प्रोफेसर को ममता गौतम बता रहे हैं।

यह घटना तब सामने आई जब प्रोफेसर का छात्र पर चिल्लाते हुए वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। महिला प्रोफ़ेसर ने छात्र को डाँटते हुए कहा, “तुमने जय श्री राम का नारा क्यों लगाया? ये बेकार की बाते हैं। क्या आप इसके लिए कॉलेज आते हैं? यह एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। बाहर चले जाओ।”

इस बीच, छात्र ने कहा कि वह सिर्फ दर्शकों के ‘जय श्री राम’ का जवाब दे रहा था।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, गाजियाबाद के एक प्राइवेट कॉलेज में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जहाँ एक छात्र को प्रस्तुति के लिए मंच पर बुलाया गया। जब छात्र मंच पर पहुँचा, तो उसके सामने दर्शक के रूप में बैठे कॉलेज के अन्य छात्रों में से किसी एक ने “जय श्री राम” कहा तो उसने भी जवाब में “जय श्री राम” कह कर अभिवादन किया। इस दौरान कॉलेज की महिला प्रोफ़ेसर जिन्हे सोशल मीडिया पर ममता गौतम बताया जा रहा है, ने छात्र पर उंगली उठाई, उसे रोक दिया और मंच से जाने के लिए कहा

हालाँकि, छात्र ने प्रोफ़ेसर को बताया कि पहले ऑडियंस में से किसी ने एक नारा दिया था, उसने तब नारा लगाया है। किसी ने इस पूरी घटना का वीडियो को बना लिया और सोशल मीडिया ‘एक्स’ (पहले ट्विटर) पर साझा कर दिया। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। 

वीडियो में स्पष्ट रूप से मंच पर कई छात्रों को “जय श्री राम” कहकर अभिवादन करते हुए देखा जा सकता है, जिस पर मंच पर मौजूद छात्र ने भी उसी तरह से जवाब दिया। इसके बाद पूरे कॉलेज स्टेडियम ने खुशी से ‘जय श्री राम’ का जयकारा लगाया जिससे नाराज होकर ममता गौतम अपनी सीट से खड़ी हो गईं और छात्र को मंच से बाहर कर दिया।

वायरल वीडियो के अनुसार, यह घटना ‘नवतरंग 2023-24’ नामक एक कॉलेज सांस्कृतिक उत्सव के दौरान की है। दरअसल, गाजियाबाद के एबीईएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में बीटेक प्रथम वर्ष के छात्रों के स्वागत के लिए भी इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।

महिला प्रोफ़ेसर के खिलाफ कार्रवाई की माँग 

वहीं वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश फैला गया। जिसमें कई नेटिज़न्स ने ‘जय श्री राम’ अभिवादन के साथ दर्शकों को जवाब देने वाले छात्र की अनावश्यक रूप से आलोचना करने के लिए प्रोफ़ेसर को दंडित करने की माँग की। जिसके बाद गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट ने एक प्रतिक्रिया जारी की है। पुलिस कमिश्नरेट के ‘एक्स’ अकाउंट से दी गई प्रतिक्रिया में यह उल्लेख है कि इस मामले में क्रॉसिंग थाना प्रभारी को जाँच करके उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। 

वहीं लोगों ने भी सोशल मीडिया पर इस मामले की जाँच की भी माँग की थी। इस मामले में लोगों का कहना है कि इस घटना ने धर्मनिरपेक्षता की आड़ में वर्षों से छुपे लोगों को एक बार फिर बेनकाब कर दिया। 

‘सब कुछ वियना संधि के अनुसार’: राजनयिकों की डिप्लोमैटिक छूट खत्म करने के बाद कनाडा ने उठाए सवाल तो भारत ने दिया करारा जवाब

भारत के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (20 अक्टूबर 2023) को एक बयान जारी कर कनाडा के राजनियकों को वापस भेजने के अपने कदम को सही ठहराते हुए करारा जवाब दिया है। भारत ने कनाडा के 41 राजनयिकों और उनके साथ रह रहे 42 लोगों को मिली ‘डिप्लोमैटिक छूट’ को वापस लिया है।

दरअसल, कनाडा ने भारत की इस कार्रवाई को एकतरफ़ा करार दिया था। उसने भारत पर कूटनीतिक रिश्तों को लेकर वियना संधि के अंतरराष्ट्रीय नियम-कायदों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। कनाडा के इस आरोप का भारतीय विदेश मंत्रालय ने खंडन किया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, “हमने भारत में कनाडाई राजनयिकों की मौजूदगी संबंधित 19 अक्टूबर 2023 का कनाडा सरकार का बयान देखा। हमने ये फैसला हमारे द्विपक्षीय रिश्तों के हालात, भारत में कनाडाई राजनयिकों की बहुत अधिक संख्या और हमारे आंतरिक मामलों में उनकी लगातार दखलअंदाजी को लेकर फैसला लिया है।”

बागची ने आगे कहा, “नई दिल्ली और ओटावा में आपस में दोनों देशों में राजनियकों की मौजूदगी में समानता की बात है। कनाडा में भारत के मुकाबले भारत में कनाडा के राजनियकों की संख्या बहुत अधिक है। दोनों देशों में राजनियकों की समान संख्या रखने के तौर-तरीकों और इसे लागू करने के लिए हम बीते महीने से कनाडाई पक्ष के साथ बात कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इस समानता को लागू करने में हमारे काम पूरी तरह से तर्कसंगत हैं। राजनयिकों की समान संख्या को लेकर की गई हमारी कार्रवाई वियना संधि के अनुच्छेद 11.1 के मुताबिक है।” बागची ने कहा, “हमारे राजनियकों की समानता के नियम को लागू करने के प्रयास को अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन बताने की कोशिश को हम सिरे से नकारते हैं।”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वियना संधि का हवाला देते हुए कहा, “मिशन (राजनियकों) के आकार के बारे में विशिष्ट समझौते की गैर-मौजूदगी में अपने क्षेत्र में मिशन रखने वाले देश को उसकी जरूरतों, हालात और शर्तों को ध्यान में रखते हुए मिशन का आकार तय की गई सीमा के अंदर रखने की जरूरत हो सकती है। ये सही और सामान्य है।”

वहीं, भारत सरकार के बयान से कुछ समय पहले ही कनाडा की विदेश मंत्री मेलैनी जोली ने कहा, “भारत ने 20 अक्टूबर 2023 तक दिल्ली में 21 कनाडाई राजनयिकों और उनके आश्रितों को छोड़कर सभी के लिए गलत तरीके से राजनयिक छूट हटाने के बारे में औपचारिक रूप से बता दी है।”

जोली ने लिखा, “भारत ने मनमानी तारीख पर 41 राजनयिकों और उन पर आश्रित 42 लोगों की राजनयिक छूट को हटाने की एकतरफ़ा कार्रवाई की जानकारी दी है। इससे उनकी निजी सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।” उन्होंने कहा कि कनाडा के लोग ये देखकर हैरान हो सकते हैं कि भारत में काम करने का क्या मतलब है।

उन्होंने आगे लिखा, “इसमें कोई शक नहीं है कि भारत का ये फैसला दोनों देशों में वाणिज्य दूतावासों की सेवाओं के स्तर पर असर डालेगा। बदकिस्मती से हमें चंडीगढ़, मुंबई और बेंगलुरु में अपने वाणिज्य दूतावासों में सभी निजी सेवाओं पर रोक लगानी होगी।”

गौरतलब है कि भारत ने दो हफ्ते पहले ही कनाडा से दिल्ली स्थित अपने उच्चायोग से दर्जनों कर्मचारियों को वापस बुलाने के लिए कहा था। ऐसा न करने पर भारत उनकी डिप्लोमैटिक इम्युनिटी मतलब राजनयिक सुरक्षा वापस लेने की चेतावनी दी थी।

ये विदेशी राजनयिकों को मिलने वाले विशेषाधिकारों की छूट होती है। इसमें वो स्थानीय कानूनों के दायरे से भी छूट पाते हैं। कनाडा ने भारत की इस चेतावनी को ‘अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों का उल्लंघन’ कहा था।

दरअसल, कनाडा में खालिस्तानी आंतकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद चल रहा है। कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो ने वहाँ की संसद में इसके लिए भारत को जवाबदेह ठहराया था। हालाँकि, भारत द्वारा बार-बार माँग करने के बाद भी उन्होंने कोई सबूत पेश नहीं किया है।

रास्ते में मस्जिद की वजह से RSS के मार्च को अनुमति देने से स्टालिन सरकार का इनकार: मद्रास हाई कोर्ट ने लगाई फटकार, पूछा- यह कैसा सेक्युलरिज्म?

तमिलनाडु की एम के स्टालिन सरकार के सेकुलरिज्म के नाम पर आरएसएस के मार्च पर प्रतिबन्ध लगा दिया। जिसपर मद्रास हाई कोर्ट ने फटकार लगाई है। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को बड़ी राहत देते हुए मद्रास उच्च न्यायालय ने उसे 22 और 29 अक्टूबर को तमिलनाडु में 35 स्थानों पर “रूट मार्च” आयोजित करने की अनुमति दे दी है। दरअसल, तमिलनाडु की स्टालिन सरकार ने रास्ते में मस्जिद और चर्च होने का हवाला देकर आरएसएस के मार्च को अनुमति देने से इनकार कर दिया था।  

मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु की स्टालिन सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को राज्य में मार्च और जनसभाएँ करने की अनुमति देने से इनकार करने का निर्णय संविधान द्वारा दी गई धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के खिलाफ है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन ने तमिलनाडु पुलिस को आरएसएस को अनुमति देने का निर्देश देते हुए की। कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को आदेश दिया कि सरकार आरएसएस को इस साल 22 और 29 अक्टूबर को राज्य में 35 स्थानों पर “रूट मार्च” आयोजित करने की अनुमति दें। कोर्ट ने कहा कि राज्य द्वारा अनुमति देने से इनकार करने की वजहों में कुछ प्रस्तावित मार्गों पर मस्जिदों, चर्चों और डीएमके के एक क्षेत्रीय कार्यालय की मौजूदगी और कुछ सड़कों पर संभावित यातायात की भीड़ को कारण बताया गया था। जो सही नहीं है और सेक्युलरिज्म के खिलाफ है।

16 अक्टूबर, 2023 के अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा कि राज्य सरकार लगभग एक महीने से इस तरह के रूट मार्च के लिए आरएसएस के सदस्यों और पदाधिकारियों द्वारा दिए गए आवेदन पर रोक लगाकर बैठी है। वहीं याचिकाकर्ताओं द्वारा मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने से ठीक पहले राज्य की पुलिस ने अंततः अनुमति देने से इनकार कर दिया था।

वहीं इस पूरे मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “आरएसएस के रुट मार्च को तमिलनाडु पुलिस द्वारा अनुमति न देना, निश्चित रूप से शासन के धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक तरीके के अनुरूप नहीं है। और न तो यह भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करना ही है। आरएसएस की विचारधारा का विरोध करने वाले कुछ संगठनों के ढाँचे, मस्जिद या कार्यालय का हवाला देकर, जुलूस और सार्वजनिक बैठक आयोजित करने के आरएसएस के अनुरोध को खारिज कर देना। यह धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत के विपरीत है जो हमारे भारत के संविधान की नींव है।”

इस मामले में न्यायालय ने आरएसएस के स्थानीय और राज्य-स्तरीय सदस्यों द्वारा ऐसी अनुमति माँगने के लिए दायर की गई कई याचिकाओं को अनुमति दे दी। वहीं कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों और रूट मार्च में भाग लेने वालों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया भी दिया है कि रूट मार्च शांतिपूर्वक आयोजित की जाएँ।”

गौरतलब है कि यही मुद्दा पिछले साल अक्टूबर में भी अदालत के सामने आया था जब आरएसएस ने गाँधी जयंती और भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राज्य भर में कई स्थानों पर अपना मार्च और जनसभाएँ करने की तमिलनाडु की राज्य सरकार से अनुमति माँगी थी।

तब भी राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था और खुफिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद आरएसएस ने पिछले साल भी मद्रास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
उस वर्ष 4 नवंबर को कोर्ट ने आरएसएस को कुछ शर्तों के साथ मार्च आयोजित करने की अनुमति दी थी। वहीं इस साल 10 फरवरी को उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने इन प्रतिबंधों को हटा दिया था और स्वस्थ लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के महत्व पर जोर दिया था।

‘सांसद के लॉगिन ID का इस्तेमाल गंभीर अपराध’: महुआ मोइत्रा मामले में आचार समिति के प्रमुख ने कहा- संसद के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ

संसद की आचार समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद विनोद सोनकर ने शुक्रवार (20 अक्टूबर 2023) को बताया कि ‘कैश फॉर क्वेरी’ स्कैंडल में उन्हें कारोबारी दर्शन हीरानंदानी का हलफनामा मिल गया है। दरअसल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर घूस लेकर संसद में सवाल पूछने का आरोप लगाया था। इसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने यह शिकायत समिति को भेजी थी।

इस बातचीच में संसदीय आचार समिति अध्यक्ष विनोद सोनकर ने कहा था कि अगर किसी ने सांसद के लॉग-इन आईडी का इस्तेमाल किया है तो ये बहुत गंभीर अपराध है। उन्होंने कहा, “संसद के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। यह बहुत ही अजीबोगरीब और गंभीर मामला है।”

भाजपा सांसद विनोद सोनकर ने कहा कि संसदीय आचार समिति 26 अक्टूबर 2023 को सभी सबूतों की जाँच करेगी। इसके लिए सभी शिकायतकर्ताओं को सबूत के साथ मौजूद रहने के लिए कहा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई दोनों पक्षों के समिति को दिए गए सबूतों पर निर्भर करेगी।

बता दें कि विनोद सोनकर ने कहा है कि उन्हें दर्शन हीरानंदानी से लेटर\हलफनामा मिल चुका है। इससे पहले सासंद सोनकर ने बताया था कि उन्हें अभी तक रियल एस्टेट से लेकर एनर्जी में कारोबार करने वाले हीरानंदानी ग्रुप के सीईओ दर्शन हीरानंदानी का कोई लेटर नहीं मिला है।

आचार समिति के अध्यक्ष विनोद सोनकर को भेजे गए तीन पेज के हलफनामे में दर्शन हीरानंदानी ने स्वीकार किया है कि उनकी टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा के साथ दोस्ती थी। इसमें उन्होंने ये भी दावा किया है कि लोकसभा सदस्य मोइत्रा ने मशहूर होने के लिए सबसे आसान रास्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमले का चुना।

हीरानंदानी ने हलफनामे में आगे लिखा है कि मई 2019 में सांसद बनी मोइत्रा को उनके दोस्तों ने जल्दी मशहूर होने के लिए पीएम मोदी पर हमला करने की सलाह दी थी। इसके बाद टीएमसी सांसद मोइत्रा ने सोचा कि पीएम मोदी पर हमला करने का इकलौता रास्ता गौतम अडानी और उनके समूह पर हमला करना है, क्योंकि दोनों ही गुजरात से थे।

दर्शन हीरानंदानी ने दावा किया कि इसके लिए सांसद मोइत्रा ने अपनी संसद की लॉग-इन आईडी और पासवर्ड भी उनके साथ शेयर किए थे, ताकि वे सूचना भेज सकें और महुआ इसे संसद में उठा सकें। हीरानंदानी ने कहा कि वह महुआ मोइत्रा के पेशकश को स्वीकार कर लिया।

इसके साथ ही दर्शन हीरानंदानी ने महुआ मोइत्रा पर फेवर और तोहफे माँगने का भी आरोप लगाया है। हालाँकि, मोइत्रा ने हीरानंदानी के हलफनामे में किए गए दावों को नकार दिया और आरोप लगाया कि यह हलफनामा बीजेपी के दबाव में तैयार किया गया है और प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पर हस्ताक्षर करने के लिए दर्शन हीरानंदानी को बाध्य किया है।

इस बीच, हाईकोर्ट में जस्टिस सचिन दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच ने महुआ मोइत्रा की दायर मानहानि मुकदमे पर सुनवाई की और मामले को 31 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सुरक्षित रख लिया। गौरतलब है कि टीएमसी सांसद ने मंगलवार (17 अक्टूबर 2023) को दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

इसमें उन्होंने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और वकील अनंत देहाद्राई के अलावा कई सोशल मीडिया प्लेटफार्मों और मीडिया हाउसों को उनके खिलाफ किसी भी कथित फर्जी और अपमानजनक सामग्री को पोस्ट करने, प्रसारित करने या प्रकाशित करने से रोकने की माँग की थी।

इस दौरान देहाद्राई ने खुली अदालत में आरोप लगाया कि मोइत्रा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने गुरुवार (19 अक्टूबर 2023) को उनसे संपर्क कर मोइत्रा के खिलाफ शिकायत वापस लेने को कहा था। इसके बाद शंकरनारायणन ने इस केस से खुद को अलग कर लिया।

बीजेपी सांसद दुबे ने अपनी शिकायत में मोइत्रा के दोस्त रहे वकील जय अनंत देहाद्राई से मिले एक पत्र का हवाला दिया है। लोकसभा अध्यक्ष को लिखे अपने इस पत्र में, दुबे ने दावा किया कि हाल तक लोकसभा में टीएमसी सांसद मोइत्रा के पूछे गए 61 में से 50 सवाल अडानी समूह पर केंद्रित थे।

हालाँकि हाईकोर्ट की अपनी याचिका में, मोइत्रा ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि संसद में सवाल पूछने के लिए रिश्वत के कथित आदान-प्रदान के लिए दुबे और देहाद्राई के उनके खिलाफ लगाए गए झूठे आरोप उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए लगाए गए थे।

वहीं इस बीच टीएमसी सांसद मोइत्रा ने अपने एक्स हैंडल पोस्ट में लोगों को ‘शुभो षष्ठी’ की शुभकामनाएँ दीं और कहा कि वह नदिया में दुर्गा पूजा का आनंद ले रही हैं।

उन्होंने कहा, “यदि सीबीआई और एथिक्स कमेटी (जिसमें भाजपा सदस्यों का पूर्ण बहुमत है) सवालों का जवाब देने के लिए मुझे बुलाती है तो मैं उनका स्वागत करती हूँ। अडानी के निर्देशित मीडिया सर्कस ट्रायल चलाने या बीजेपी ट्रोल्स को जवाब देने के लिए मेरे पास न तो वक्त है और न ही मेरी दिलचस्पी।”

इस हिंदू लड़की के शरीर को फिरोज ने दिए जो जख्म, उसे आपको देखना चाहिए… क्योंकि कई फिरोज आपके आसपास भी हैं

लव जिहाद और हिंदू लड़कियों पर अत्याचार की घटनाएँ आए दिन बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि भुज में फिरोज नाम के एक मुस्लिम युवक ने हिंदू लड़की जानकी को अपने जाल में फँसाया और उसे इस्लाम कबूल करवाकर निकाह कर ली। निकाह के बाद फिरोज ने लड़की को दूसरे लोगों के साथ संबंध बनाने को कहा और जब लड़की ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो फिरोज ने उसे पीट-पीटकर अधमरा कर दिया। पीड़ित महिला ने एक मीडिया से बात की और सच बताया जो अब वायरल हो गया है। 

जी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित लड़की ने इस मामले में कहा, ”वह मुझे ड्रग्स समेत अन्य बिजनेस में शामिल करना चाहता है, अगर मैं मना करती थी तो वह मेरे साथ मारपीट करता है। वह मुझे इस बुरे धंधे में फँसाना चाहता है, मैं इसमें फँस गई हूँ, किसी भी बहन को ऐसे विधर्मी के जाल में नहीं फँसना चाहिए।”

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कई लोगों द्वारा पोस्ट किए गए इस वीडियो में एक युवती को देखा जा सकता है। जिसके पीठ पर चोट के निशान हैं, काले धब्बे पड़ गए हैं और त्वचा भी कई जगह से फट गई है। वीडियो में दिख रहे दृश्य विचलित करने वाले हैं। साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि लड़की का नाम जानकी है और फिरोज नाम के युवक ने उसे झाँसा देकर निकाह किया।

एक्स हैंडल ‘द एनालाइजर (न्यूज अपडेट)’ ने इस वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा, ”अब समय आ गया है कि हिंदू लड़कियाँ अपनी जिद छोड़ दें कि ‘मेरा अब्दुल अलग है।” भुज में जानकी नाम की एक हिंदू लड़की को बहला-फुसलाकर ले जाया गया। जिहादी फ़िरोज़ ने उन्हें इस्लाम कबूल करवाकर और निकाह कर ली। फिर वह उसे दूसरों के साथ सोने के लिए मजबूर करना शुरू कर देता है, उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाता है और उसकी पिटाई करता है। इस लड़की की हालत तो देखो, इसे लोहे के पाइप से पीट-पीटकर क्या हाल कर दिया गया है।”

ऐसी ही एक पोस्ट अंग्रेजी साप्ताहिक ‘ऑर्गनाइज़र वीकली’ ने भी की थी। इसमें लिखा था, “गुजरात के भुज में, फ़िरोज़ नाम के एक मुस्लिम युवक ने कथित तौर पर एक हिंदू लड़की को फुसलाया और उसे उससे शादी करने के लिए मजबूर किया, जैसा कि जानकी ने आरोप लगाया, जिसने उसे दूसरों के साथ सोने के लिए मजबूर किया। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे जानकी को आरोपितों ने बेरहमी से पीटा है।

एक्स यूजर ‘मिस्टर सिन्हा’ ने भी आज लड़की के 2 वीडियो पोस्ट किए और लिखा, ”भुज में फ़िरोज़ नाम का एक मुस्लिम युवक एक हिंदू लड़की जानकी को बहकाता है, उसका धर्म परिवर्तन करवाता है और उससे निकाह करता है। फिर वह लड़की को अन्य लोगों के साथ संबंध बनाने के लिए मजबूर करता है, उसके साथ गलत तरीके से संबंध बनाता है और उसे बुरी तरह पीटता है, जरा उसकी हालत देखो… यह देखना बहुत दर्दनाक है… उसे पूरी रात लोहे के पाइप से पीटा गया है।”

गौरतलब है कि इन सभी यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में लड़की गंभीर रूप से घायल नजर आ रही है। इन सभी यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो और दी गई जानकारी एक जैसी है। इन सभी ने एक ही दावा किया है कि भुज में फिरोज नाम के मुस्लिम युवक ने हिंदू लड़की जानकी को फँसाकर उसके साथ रेप किया है। इस वीडियो में लड़की के शरीर का एक भी हिस्सा ऐसा नहीं है जहाँ चोट के निशान न हो।  प्रारंभ में, नेटिज़न्स इस वीडियो को लेकर संशय में थे। लेकिन अब जब पीड़िता ने खुद मीडिया के सामने आकर इस पूरी घटना पर बयान दिया है तो ये वीडियो सच साबित हो गया है। 

‘चिरकुट नेता, अखिलेश-वखिलेश’: MP में 0 सीट देने के बाद कमलनाथ ने दुत्कारा भी, कॉन्ग्रेस-सपा की खटास से अँधेरे में INDI गठबंधन का भविष्य

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव कहीं नरेंद्र मोदी के विरोध में बने I.N.D.I. गठबंधन के लिए कब्रगाह न साबित हो जाए। दरअसल, मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने कॉन्ग्रेस से सिर्फ 6 सीटें माँगी थीं, लेकिन कॉन्ग्रेस ने वह भी नहीं दी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है।

अखिलेश यादव ने कहा, “हम एमपी की बात को यूपी में भी ध्यान रखेंगे”। इसके बाद मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ का ऐसा बयान आया कि गठबंधन में बवाल मच गया। जब मीडियाकर्मियों ने कमलनाथ से अखिलेश यादव द्वारा ‘धोखा’ दिए जाने की बात पूछी तो उन्होंने बोल दिया ‘अरे छोड़िए अखिलेश-वखिलेश’ को। इसके बाद सियासत गरमा गई है।

अखिलेश यादव के मन में गुस्सा, लगातार अपमान से गुस्साए

अखिलेश यादव ने अब कहा है कि मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के लोग भाजपा से मिले हुए हैं। अगर उन्हें पता होता कि कॉन्ग्रेस विधानसभा चुनाव में गठबंधन ही नहीं करेगी तो वो कॉन्ग्रेस के लोगों का फोन भी नहीं उठाते। दरअसल, अखिलेश ने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने मध्य प्रदेश में उन्हें 6 सीट देने का वादा किया था, लेकिन सारे सीटों पर उसने अपने उम्मीदवार उतार दिए।

अखिलेश यादव ने कहा, ‘अगर कॉन्ग्रेस (मध्य प्रदेश में) सीटें नहीं देना चाहती थी तो उन्हें यह पहले ही बताना चाहिए था। आज सपा केवल उन्हीं सीटों पर लड़ रही है, जहाँ उसका अपना संगठन है। अब मध्य प्रदेश के बाद मुझे समझ में आया है कि इंडी अलायंस सिर्फ लोकसभा चुनाव के लिए है।”

प्रत्यक्ष रूप से कॉन्ग्रेस को भरोसे नहीं करने लायक पार्टी बताते हुए समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो ने कहा, “अगर कॉन्ग्रेस इसी तरह का व्यवहार करती रही तो उन पर भरोसा कौन करेगा? अगर हम मन में भ्रम लेकर भाजपा के खिलाफ लड़ेंगे तो हम सफल नहीं होंगे।”

बता दें कि मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में पहुँचे कमलनाथ ने कहा था कि राज्य में माहौल बहुत अच्छा है। टिकट घोषित होने के बाद फोन कॉल आ रहे हैं और लोग बता रहे हैं कि काफी उत्साह है। कॉन्ग्रेस उम्मीद से भी बेहतर प्रदर्शन करेगी।

इस दौरान मीडियाकर्मियों ने उनसे अखिलेश यादव के ‘विश्वासघात’ वाले आरोप पर सवाल पूछा। इस पर कमलनाथ ने अखिलेश यादव को लेकर कुछ ऐसे बोला, जैसे अखिलेश यादव की कोई हैसियत ही न हो। उन्होंने छूटते ही कहा, “अरे भई छोड़ो अखिलेश अखिलेश…”।

इस मामले में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस से भी प्रतिक्रिया आई है। उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने अखिलेश यादव पर सवाल उठाए हुए कहा, “अखिलेश यादव जी, जनता देख सकती है कि भाजपा के साथ कौन है। घोसी उपचुनाव में हमने उन्हें (समाजवादी पार्टी को) समर्थन दिया और वे जीत गए। उसी समय, उत्तराखंड में बागेश्वर उपचुनाव हुए।”

राय ने आगे लिखा, “उन्होंने (सपा ने) वहाँ अपना उम्मीदवार खड़ा किया, लेकिन भाजपा जीत गई और कॉन्ग्रेस हार गई। इससे पता चलता है कि कौन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की मदद कर रहा है। एमपी में भी यह साबित हो जाएगी। अगर सपा को लगता है कि भाजपा को जीतने से रोकना चाहिए तो उन्हें कॉन्ग्रेस का समर्थन करना चाहिए।”

बता दें कि 19 अक्टूबर 2023 को खबर आई कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने समाजवादी पार्टी को पूरी तरह से अपमानित करते हुए अखिलेश यादव को कोई भाव नहीं दिया। अपने वादे के मुताबिक 6 सीटें को तो छोड़िए, एक सीट भी कॉन्ग्रेस ने नहीं दी।

इस वाकये के बाद अब अखिलेश यादव ने कहा है कि अगर उन्हें पता होता कि राज्यों के स्तर पर गठबंधन नहीं है तो वो कभी किसी बैठक में जाते ही नहीं। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर भ्रम में रखने का आरोप लगाया।

ग्रुप सेक्स का ऑफर देने वाले पाटर्नर को इटली की PM ने छोड़ा, 10 साल से रिश्ते में थीं जियोर्जिया मेलोनी: जी20 में इनकी ही तस्वीरों ने मचा रखा था धमाल

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपने बॉयफ्रेंड एंड्रिया जियाम्ब्रुनो के साथ रिश्ते को खत्म करने की घोषणा की है। उनके बॉयफ्रेंड जियाम्ब्रुनो पत्रकार हैं और महिला विरोधी टिप्पणी की वजह से पिछले कुछ समय से चर्चा में हैं। वे इटली के पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी के परिवार द्वारा चलाए जा रहे एमएफई मीडिया समूह के लिए काम करते हैं।

कुछ समय पहले जियाम्ब्रुनो एक महिला सहकर्मी से ‘तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिली’ कहते सुने गए थे। यही नहीं, उन्होंने अपनी एक महिला सहकर्मियों को ‘ग्रुप सेक्स’ के लिए भी कहा था। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर वो लोग ‘ग्रुप सेक्स’ में शामिल होती हैं, तभी उनके साथ काम कर सकती हैं। ये स्पष्ट तौर पर कार्यस्थल पर यौन शोषण का मामला है।

जियाम्ब्रुनो इटली के वरिष्ठ पत्रकार हैं और मेलोनी के साथ पिछले 10 साल से रिलेशनशिप में थे। दोनों की एक 7 साल की बच्ची भी है, जिसका नाम गिनेवरा है। वो मीडियासेट टीवी चैनल के लिए काम करते हैं। उन्होंने कई बार ऑन एयर महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है।

इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के तौर पर एक साल का कार्यकाल पूरा करने वाली 46 वर्षीया जियोर्जिया मेलोनी से पत्रकारों ने इस मामले पर उनसे सवाल किया था। इस पर जियोर्जिया मेलोनी ने कहा था कि वो अपने पार्टनर की टिप्पणियों के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए उनसे इस बारे में कोई सवाल न पूछा जाए।

महिलाओं पर अभद्र टिप्पणियाँ बनीं अलगाव की वजह

रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, एमएफई मीडिया समूह की मीडियासेट चैनल पर एंड्रिया जियाम्ब्रुनो एक शो होस्ट करते हैं। उस शो की होस्टिंग के दौरान जब ब्रेक हुआ था, तब उन्होंने महिला सहकर्मियों पर गलत टिप्पणी की थी। यही नहीं, उन्होंने कुछ समय पहले कहा था कि महिलाएँ ज्यादा शराब न पीकर ‘गैंगरेप’ से बच सकती हैं।

जियाम्ब्रुनो ने कहा था, “अगर आप डांस करने जाते हैं तो आपको नशे में होने का पूरा हक है, लेकिन नशे में होने के बावजूद आपको खुद को भुलाना नहीं है, वरना भेड़ियों के चंगुल में फँसने का खतरा रहेगा।” ऐसे ही एक अन्य सहकर्मी से उन्होंने कहा था कि ‘तुम मुझे पहले क्यों नहीं मिली’। उनके कहने का मतलब साफ था कि वो उसकी तरफ आकर्षित थे।

मेलोनी ने एक्स पर की अलगाव की घोषणा

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर अपनी और एंड्रिया जियाम्ब्रुनो के रिश्ते के खत्म होने की घोषणा की। मेलोनी ने ट्वीट में लिखा कि वह जियाम्ब्रुनो के साथ बिताए अच्छे समय के लिए आभारी हैं और उन्होंने उन्हें जिंदगी की सबसे महत्वपूर्ण चीज दी है, जो कि उनकी बेटी है।

हालाँकि, मेलोनी ने यह भी स्वीकार किया कि अब 42 वर्षीय एंड्रयू जियाम्ब्रुनो के साथ उनके रास्ते अलग हो गए हैं और यह समय है कि इसे स्वीकार कर लिया जाए। मेलोनी ने लिखा कि वह अपने रिश्ते, अपनी दोस्ती और अपनी बेटी की रक्षा करेंगी।

मेलोनी ने उन लोगों को एक संदेश भेजा जो उनके निजी जीवन पर हमला करके उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह मजबूत और लचीली हैं और उनके हमलों से वह नहीं टूटेंगी। मेलोनी का ट्वीट उनके रिश्ते के अंत के बारे में एक स्पष्ट और दिल की बात है।

जियोर्जिया मेलोनी और उनके बॉयफ्रेंड की मुलाकात साल 2014 में एक टीवी शो के दौरान ही हुई थी। एंड्रिया जियाम्ब्रुनो तब चैनल के शो की स्क्रिप्ट लिखते थे। इसके बाद दोनों करीब आए। दोनों ने शादी नहीं की थी, लेकिन साथ रह रहे थे। हालाँकि अब दोनों के रास्ते अलग हो चुके हैं।

हिंदू बन लड़कियों को मॉडलिंग का लालच दे फँसाता था मोहम्मद रेहान, फिर न्यूड फोटो से करता था ब्लैकमेल: सूरत पुलिस ने किया गिरफ्तार

गुजरात के सूरत जिले में मोहम्मद रेहान सोशल मीडिया पर हिंदू नाम से प्रोफाइल बनाकर लड़कियों को बहलाता-फुसलाता और फँसाता था। वह लड़कियों को मॉडलिंग दिलाने का झाँसा देता और उनसे न्यूड फोटो मंगवाता था। फिर इन्हीं फोटो के जरिए वह उन्हें ब्लैकमेल करता था। पुलिस ने मोहम्मद रेहान को गिरफ्तार कर लिया है।

दरअसल, मोहम्मद रेहान लड़कियों से मॉडलिंग के नाम उनकी तस्वीरें मँगाता था। फिर उनसे उन्हें ब्लैकमेल करता था। इस दौरान एक लड़की को उस पर शक हो गया। उसके परिवारवालों ने इस बारे में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद को बताया। इसकी वजह से इस धोखेबाज की गिरफ्तारी में खासी मदद मिली।

अदजान पुलिस ने आरोपित मोहम्मद रेहान के खिलाफ मामला दर्जकर बुधवार (18 अक्टूबर 2023) को गिरफ्तार कर लिया। हिंदू संगठनों ने आरोपित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस आरोपित से पूछताछ कर रही है। जब्त किए गए उसके मोबाइल फोन को जाँच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजने की तैयारी कर रही है।

सूरत का रहने वाला आरोपित मोहम्मद रेहान लड़किोयों को ‘काम चाहिए?’ जैसे मैसेज व्हाट्सएप पर भेजता था। इसकी एवज में आरोपित व्हाट्सएप पर मॉडलिंग की चाह रखने वाली इन लड़कियों और महिलाओं को से न्यूड वीडियो और तस्वीरों माँगता था। साथ ही इसके लिए 50,000 रुपए से 5 लाख रुपए की मॉडलिंग की पेशकश करता था।

आरोपित मोहम्मद रेहान ने हिंदू लड़कियों को फँसाने के लिए सोशल मीडिया पर खुद को हिंदू बताता था। उसने हिंदू नाम से कई प्रोफाइल बना रखे थे। वह जरूरतमंद परिवारों की लड़कियों को फँसाता था। उन्हें मॉडलिंग के नाम पर उनकी नग्न वीडियो और तस्वीरें मँगाता और उन्हें पोर्न वेबसाइटों पर अपलोड कर पैसे कमाता था।

इस दौरान आरोपित के संपर्क में आई महिलाएँ आईं। इन्हीं में से एक महिला को मोहम्मद रेहान की गतिविधियों पर शक हुआ। इसके बाद उसकी असलियत सामने आई तो उसने इसकी जानकारी अपने परिवार को दी। परिवार ने रेहान के बारे में बजरंग दल को भी जानकारी दी।

इसे लेकर ऑपइंडिया से बात करते हुए रांदेर के बजरंग दल संयोजक रवि गुप्ता ने कहा, “यह पूरी साजिश चार हफ्ते पहले हमारे ध्यान में लाई गई थी। आरोपित मोहम्मद रेहान की ब्लैकमेलिंग से परेशान पीड़ितों में से एक ने अपने परिवार को इस बारे में बताया। इसके बाद परिवार ने मदद के लिए हमसे संपर्क किया। घटना की जानकारी मिलने के बाद हमारी टीम ने जाल बिछाकर हमने आरोपित मोहम्मद रेहान को बुलाया और उसे रंगे हाथों धर लिया।”

रवि गुप्ता ने बताया कि आरोपित रेहान को पकड़ने के लिए कैसे जाल बिछाया था। गुप्ता के मुताबिक, उन्होंने आरोपित रेहान के पहुँचते ही उसे पकड़ लिया। इसके बाद उससे सवाल करने लगे। आरोपित रेहान से पूछताछ के दौरान उसका फोन जाँचा तो उसमें आठ अलग-अलग सोशल मीडिया प्रोफाइल मिले। इसने ये सभी हिंदू नामों से बनाए थे।

बजरंग दल के सदस्यों को इसके साथ ही पीड़ित लड़कियों के साथ रेहान की चैट भी मिली। इसमें उन्हें आरोपित के पीड़ितों को नग्न तस्वीरें भेजने के लिए ब्लैकमेल करने वाले मैसेज भी मिले। इसे लेकर जब आरोपित से सवाल किए गए तो वो भड़क गया। उन्होंने बताया कि आरोपित इतना शातिर था कि वो हिंदू लड़कियों की नग्न तस्वीरें इस तरह से लेता था कि उनका चेहरा दिखाई न दें।

रवि गुप्ता के मुताबिक, आरोपित इन नग्न तस्वीरों को भारत में प्रतिबंधित और अमेरिका एवं कनाडा से संचालित पोर्न वेबसाइटों पर अपलोड करता था। इसके बाद आरोपित मोहम्मद रेहान ऐसी अवैध वेबसाइटों पर हिंदू लड़कियों की नग्न तस्वीरें अपलोड कर उन्हें ब्लैकमेल करता था और बदनाम करने की धमकी देते हुए पैसे की माँग करता था।

मणिपुर कार ब्लास्ट के मास्टरमाइंड मोहम्मद इस्लाउद्दीन खान को में NIA ने पकड़ा, पुल पर हुए धमाके में नूर हुसैन की भी हो चुकी है गिरफ्तारी

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने गुरुवार (19 अक्टूबर, 2023) को मणिपुर पुलिस के सहयोग से मोहम्मद इस्लाउद्दीन खान को गिरफ्तार किया। इस पर 21 जून, 2023 को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले के क्वाक्टा इलाके में एक कार में हुए बम विस्फोट में शामिल होने का आरोप है।

इस केस में ये वांछित था। खान के खिलाफ पहले मणिपुर पुलिस ने केस दर्ज किया गया था। इसके बाद एनआईए ने जाँच अपने हाथ में लेकर जून में ही इंफाल में फिर से केस दर्ज किया था। एनआईए के मुताबिक आरोपित खान को इंफाल की एक अदालत में पेश किया गया। जहाँ से उसे सात दिन की एनआईए हिरासत में भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि इस कार बम विस्फोट मामले में ये दूसरी गिरफ्तारी है। इस केस में एनआई ने पहली गिरफ्तारी 16 अक्टूबर को की थी। तब जाँच एजेंसी ने असम के कछार जिले के सिलचर इलाके से नूर हुसैन को गिरफ्तार किया था।

इस मामले में एनआईए की जाँच में पता चला कि 21 जून को मणिपुर के बिष्णुपुर जिले में टिडिम रोड के किनारे फौगाकचाओ इखाई अवांग लीकाई और क्वाक्टा इलाके में एक पुल पर खड़े आईईडी से भरे वाहन में बम विस्फोट हुआ था। इस बम विस्फोट में इस्लाउद्दीन खान भी शामिल था। गौरतलब है कि इस बम विस्फोट की वजह से तीन लोग घायल हो गए और आसपास के घरों सहित पुल क्षतिग्रस्त हो गया था।