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क्या है ‘इस्लामिक जिहाद’, जिसके रॉकेट से गाजा के अस्पताल में मरे 500: ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से निकला है PIJ, हमास की तरह ही इजरायल को नक़्शे से मिटाना है मकसद

गाजा शहर के अल-अहली अरब अस्पताल में मिसाइल हमले में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की सूचना के बाद मंगलवार (17 अक्टूबर, 2023) की रात को इजरायली सेना ने कहा कि ये हमला उसने नहीं किया है। साथ ही अपने दावे के समर्थन में पुख़्ता सबूत इजरायल डिफेंस फोर्स ने अपने एक्स हैंडल पर साझा किए।

इसके लिए इज़रायली रक्षा बलों ने गाजा के फिलिस्तीनी सशस्त्र विद्रोही गुट फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद (PJI) को दोषी ठहराया था। सेना का कहना था कि उनकी तरफ छोड़ा जा रहा रॉकेट मिसफ़ायर होकर अस्पताल पर गिरा था। वहीं गाजा में हमास से जुड़े स्वास्थ्य अधिकारियों ने विस्फोट को इज़रायली हवाई हमला करार दिया था। उन्होंने दावा किया कि देर शाम एक हवाई हमले में गाजा के शहर के इस अस्पताल को निशाना बनाया गया था। इजरायल ने इस हमले के लिए जिस गुट को जिम्मेदार ठहराया है वो क्या है, आपको जानने की ज़रूरत है।

इस्लामी जिहाद (PJI) क्या है?

अमेरिकी विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय मामलों में विशेषज्ञता वाले थिंक टैंक काउंसिल ‘ऑन फॉरेन रिलेशन्स (OFR)’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद‘ (PIJ) एक इस्लामी फ़िलिस्तीनी राष्ट्रवादी संगठन है। ये इज़रायल के अस्तित्व का हिंसक विरोध करता है। अमेरिकी विदेश विभाग की आतंकवाद पर 2006 की रिपोर्ट के मुताबिक, 1997 में PIJ के आतंकवादी संगठन होने का ऐलान किया था।

पीआईजे पूरे फिलिस्तीन में एक इस्लामी शासन लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता में इजरायली नागरिकों और सैन्य कर्मियों को निशाना बनाता है। हालाँकि, फतह या हमास के उलट पीआईजे राजनीतिक प्रक्रिया में शिरकत नहीं करता है।

कब वजूद में आया ये संगठन

फिलिस्तीनी इस्लामी जिहाद के संस्थापक फतेही शाकाकी (Fathi Shaqaqi) और अब्द अल-अजीज अवदा (Abd al-Aziz Awda) मिस्र में छात्र थे। ये दोनों 1970 के दशक के आखिर तक मिस्र ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के सदस्य थे। उन्हें लगा कि ब्रदरहुड बहुत उदारवादी होता जा रहा था और फिलिस्तीनी के फायदों के लिए उसकी प्रतिबद्धता काफी नहीं है। इसके बाद इन दोनों ने ‘फिलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ (पीआईजे) बनाने का फैसला किया।

इसके साथ ही पीआईजे इजराइल के उग्रवादी विनाश और एक संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य की पुनर्स्थापना के लिए प्रतिबद्ध एक अलग इकाई के तौर पर उभरा। ये बात गौर करने वाली है कि पीआईजे ने सुन्नी समूह होने के बावजूद 1979 की ईरानी क्रांति के दौरान अपनाए गए क्रांतिकारी, धार्मिक शिया नीतियों से प्रेरणा ली थी, जिसने एक इस्लामी शासन की स्थापना की।

इस इस्लामी जिहादी संगठन की स्थापना 1980 के दशक में गाजा पट्टी में इजरायली कब्जे से लड़ने और गाजा और वेस्ट बैंक में मौजूदगी बनाए रखने के लिए की गई थी। ये गाजा में दूसरा सबसे बड़े सशस्त्र समूह है। अक्सर इस्लामिक जिहाद बड़े आतंकी हमास संगठन के साथ मिलकर ही काम करता है।

हालाँकि, हमास ने 2007 से गाजा को काबू में कर यहाँ अपना शासन जमाया। बीते 35 साल में गाजा में हमास की ही तूती बोलती है। ईरान इन दोनों समूहों को फंडिंग करता है, साथ ही हथियारों की सप्लाई करता है। इज़रायल और ‘संयुक्त राज्य अमेरिका’ (USA) दोनों को आतंकवादी संगठन मानते हैं।

क्या है पीआईजे का मकसद

दरअसल, ‘फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद’ 1948 से पहले के जनादेश वाले फ़िलिस्तीन की भौगोलिक सीमाओं के साथ एक संप्रभु, इस्लामी फ़िलिस्तीनी राज्य को दोबारा से स्थापित करना चाहता है। पीआईजे हिंसक तरीकों से इज़रयल के विनाश की वकालत करता है।

यही नहीं, ये अरब-इजरायल संघर्ष को क्षेत्रीय विवाद के तौर पर नहीं बल्कि एक वैचारिक युद्ध के तौर पर देखता है। PIJ सदस्य हिंसा को मध्य पूर्व के नक्शे से इज़रायल को हटाने का इकलौता तरीका मानते हैं। पीआईजे इज़राइल और फिलिस्तीन के सह-अस्तित्व वाले किसी भी दो-राष्ट्रों वाली व्यवस्था को अस्वीकार करता हैं।

अन्य फिलिस्तीनी अलगाववादी समूहों के उलट पीआईजे बातचीत करने या राजनयिक प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार करता है। यह फिलिस्तीनी प्राधिकरण के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की माँग नहीं करता है। यही वजह है कि पीआईजे पर इजरायली ठिकानों पर कई आतंकवादी हमले कर 1993 के इजरायल और फिलिस्तीन ओस्लो समझौते की कोशिशों में रूकावट डालने की कोशिश करने का भी आरोप है।

ये देश है पीआईजे का स्पॉन्सर

अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, ईरान पीआईजे बजट के अधिकांश हिस्से की फंडिंग करता है। वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका ने सीरिया पर इस समूह के लिए “सुरक्षित शरणस्थल” देने और पीआईजे मुख्यालय को दमिश्क में रहने की रजामंदी देने का भी आरोप लगाया है।

पीआईजे हमास से कैसे है अलग

पीआईजे एक तरह से हमास का प्रतिद्वंद्वी उग्रवादी समूह है। ये अक्सर हमास से फ़िलिस्तीनियों के समर्थन के लिए प्रतिस्पर्धा करता रहता है। हालाँकि, पीआईजे कोई सामाजिक सेवाएँ नहीं देता है।

इसके अलावा ये इज़राइल के साथ किसी भी तरह की की राजनयिक बातचीत में शामिल होने का इरादा नहीं रखता है। हमास से बहुत छोटे इस आतंकी संगठन पीआईजे के सदस्य इस्लाम के लिए इसके ऐतिहासिक अहमियत की वजह से इस जमीन को बेहद पाक मानते हैं। यही वजह है कि ये समूह हिंसक तरीकों से इज़राइल का पूरी तरह से खात्मा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

पीआईजे के कौन हैं नेता

मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए फतेही शाकाकी गाजा से मिस्र चला गया। वहाँ ये मिस्र ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ के साथ सक्रिय हो गए। इसके बाद वो काफी वक्त से पीआईजे के आध्यात्मिक नेता रहे अब्द अल-अज़ीज़ अवदा के साथ साथ चला गया। सीरियाई संरक्षण के तहत दमिश्क में बसने से पहले शाकाकी देश निकाले की वजह से मध्य पूर्व में घूमता रहा था। आखिरकार सीरियाई संरक्षण के तहत वो दमिश्क में बस गया।

शाकाकी 1995 में कथित तौर पर इजरायली एजेंटों के हाथों माल्टा में मारे जाने तक इस संगठन का चीफ बना रहा था। इसके बाद उसकी जगह ब्रिटेन में पढ़े फ़िलिस्तीनी रमज़ान अब्दुल्ला शल्लाह ने ले ली। अब्दुल्ला शल्लाह 1990 से 1995 तक दक्षिण फ्लोरिडा के विश्वविद्यालय में मध्य पूर्वी कोर्स पढ़ाया करता था।

अमेरिका की संघीय जाँच एजेंसी के अधिकारियों ने फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद के आठ नेताओं को 2003 में 50 आरोपों में दोषी ठहराया गया था। इनमें से केवल एक सामी अल-एरियन को गिरफ्तार किया जा सका था और उस पर मुकदमा चलाया गया था। हालाँकि, अल-एरियन ने आतंकवाद से संबंध रखने से इनकार किया था।

क्या है पीआईजे का इतिहास

शाकाकी और अवदा ने 1970 के दशक के आखिर में ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से अलग हो गए। इसके बाद 1981 तक मिस्र से पीआईजे को तब-तक चलाते रहे जब-तक कि राष्ट्रपति अनवर सादात की हत्या के बाद मिस्र सरकार ने इस समूह को गाजा निर्वासित नहीं कर दिया।

पीआईजे 1987 तक गाजा में रहा। इसके बाद इस आतंकी समूह को गाजा से लेबनान निर्वासित कर दिया गया। इस दौरान लेबनान में रहते हुए पीआईजे के नेतृत्व ने हिज़्बुल्लाह के साथ रिश्ते बनाए। इसके तहत इस समूह ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से ट्रेनिंग ली।

साल 1989 में शाकाकी ने PIJ का आधिकारिक मुख्यालय सीरिया की राजधानी दमिश्क में स्थानांतरित कर दिया। तब से ये वहीं बना हुआ है। हालाँकि, अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, पीआईजे के नेताओं की एक छोटी टुकड़ी अभी भी लेबनान में मौजूद है। दक्षिण लेबनान में लगातार इसकी मौजूदगी में पीआईजे और हिजबुल्लाह 1990 के दशक में संयुक्त हमले करते रहे।

मौजूदा वक्त में फ़िलिस्तीनी इस्लामिक जिहाद एक छोटा, लेकिन बेहद गोपनीय संगठन है। ये 1000 से कम सदस्यों और सीमित जन-समर्थन के साथ भूमिगत तौर पर संचालित होता है। हालाँकि, 2003 में समूह के आठ सीनियर सदस्यों पर अमेरिकी अभियोग ने इसकी ताकत कम कर दी।

किस तरह के हमले करता है पीआईजे

पीआईजे अक्सर आत्मघाती बम विस्फोट करता है जो नागरिकों और सैन्य कर्मियों को निशाना बनाते हैं। हालाँकि, गाजा के चारों ओर सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होने से इजरायली क्षेत्र के अंदर बार-बार होने वाले हमलों की संख्या कम हो गई है। इस दौरान पीआईजे ने अमेरिकी संपत्तियों या नागरिकों पर कोई सीधा हमला नहीं किया, हालाँकि, कुछ हमलों में अमेरिकी मारे गए। पीआईजे ने धमकी दी है कि अगर अमेरिकी दूतावास को तेल अवीव से यरूशलेम में स्थानांतरित किया गया तो वह अमेरिकी दूतावास पर हमला करेगा।

इस्लामिक जिहाद और हमास के बीच रिश्ता

इजरायली सेना ने मई में कहा कि उसने तीन इस्लामिक जिहाद नेताओं को निशाना बनाया और उन्हें मार डाला, उन्होंने कहा कि वे इजरायल के खिलाफ रॉकेट हमलों और वेस्ट बैंक में इजरायली नागरिकों के खिलाफ अन्य हमलों के लिए जिम्मेदार थे। अतीत में, इस्लामिक जिहाद जिहाद सहित फिलिस्तीनी सशस्त्र समूहों के दागे गए रॉकेट कभी-कभी खराब हो जाते थे और नागरिक इलाकों पर हमला करते थे। हमास और इस्लामिक जिहाद अक्सर इजरायल के खिलाफ एकजुट होते हैं।

वे संयुक्त अभियान में सबसे अहम सदस्य होते हैं। जो गाजा के छोटे से तटीय क्षेत्र में विभिन्न सशस्त्र समूहों के बीच अधिकांश सैन्य गतिविधियों का समन्वय करता है। लेकिन कभी-कभी यह एक तनावपूर्ण रिश्ता भी होता है, खासकर तब जब हमास इज़रायल के खिलाफ हमले या प्रतिशोध को रोकने के लिए इस्लामिक जिहाद पर दबाव डाला है।

इस्लामिक जिहाद अक्सर हमास से स्वतंत्र रूप से कार्य करता है और मुख्य रूप से सैन्य टकराव पर केंद्रित होता है। कुछ अवसरों पर, हमास किनारे पर रहा है क्योंकि इस्लामिक जिहाद का इज़राइल के साथ टकराव हुआ है। अन्य मामलों में, हमास इजरायली सेना से लड़ने में इस्लामिक जिहाद में शामिल हो गया है।

जूनागढ़ के ऐतिहासिक ‘ऊपरकोट किले’ में नमाज पढ़ रहे थे मुस्लिम, वीडियो वायरल: सयाजीराव यूनिवर्सिटी में भी हो चुकी हैं ऐसी कई घटनाएँ

गुजरात के जूनागढ़ में स्थित ऊपरकोट किले में मुस्लिमों के एक समूह द्वारा नमाज पढ़ने का वीडियो वायरल हुआ है। इस पर बजरंग दल ने नाराजगी जताई है। बजरंग दल ने ऐलान किया है कि वो उस जगह पर सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। बता दें कि जूनागढ़ में ऊपरकोट का किला बेहद महत्वपूर्ण है और यह सैकड़ों साल पुराना है। साल 2020 में गुजरात सरकार ने इसकी मरम्मत कराई थी।

संदेश समाचार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, घटना रविवार (15 अक्टूबर 2023) की है। जूनागढ़ के ऐतिहासिक किले ऊपरकोट में आदि कड़ी वाव (कुआँ) के पास 8 लोगों ने सार्वजनिक तौर पर नमाज पढ़ी। इसके बाद उस घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो गए।

इस घटना के बाद पुलिस भी हरकत में आ गई है और मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, ऊपरकोट किले में नमाज पढ़ने की घटना को लेकर पुलिस ने किला प्रबंधन से सीसीटीवी फुटेज माँगी है, लेकिन प्रबंधन ने फुटेज देने से इनकार कर दिया।

बजरंग दल ने किया तीखा विरोध, लगाया लैंड जिहाद का आरोप

मुस्लिमों द्वारा ऐतिहासिक स्थल ऊपरकोट में नमाज पढ़कर शांति भंग करने के प्रयास में बजरंग दल ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। बजरंग दल ने ऊपरकोट में बुधवार (18 अक्टूबर) शाम 6 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ करने का ऐलान किया है और लोगों से बड़ी संख्या में जुटने का अनुरोध किया है।

बजरंग दल के गुजरात क्षेत्र के समन्वयक भावेश ठक्कर ने कहा, “जूनागढ़ के भीतर एक ऐतिहासिक विरासत स्थल ऊपरकोट में आदि कड़ी वावनी के पास जिहादी विचारधारा वाले क्षेत्रवादियों द्वारा भूमि जिहाद शुरू किया गया है। बजरंग दल ऊपरकोट के अंदर सार्वजनिक स्थान पर नमाज पढ़ने की मानसिकता का पुरजोर विरोध करता है।”

महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी में कई ऐसे मामले

गौरतलब है कि जिस तरह जूनागढ़ में सार्वजनिक तौर पर नमाज पढ़ने की तस्वीरें वायरल हुई हैं, उसी तरह वडोदरा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (MSU) से भी ऐसे ही वीडियो सामने आए थे। इससे पहले भी विश्वविद्यालय में ऐसी कई घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। कई को लेकर बवाल हुआ था।

इससे कुछ समय पहले ही एमएसयू से ऐसी ही एक और घटना सामने आई थी, जिसमें जालीदार टोपी पहने तीन मुस्लिम युवक शिव मंदिर के पास सार्वजनिक रूप से नमाज/दुआ पढ़ रहे थे। इस घटना का वीडियो भी वायरल हो गया था। उससे पहले चादर ओढ़े एक छात्रा संस्कृत फैकल्टी के पास नमाज पढ़ते देखी गई थी।

जूनागढ़ में मुस्लिमों ने पुलिस पर हमला कर दिया

बता दें कि जूनागढ़ में 16 जून 2023 को हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान करीब 500 मुस्लिमों की भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया था। दरअसल, जूनागढ़ नगर निगम ने माजेवाडी गेट के पास स्थित मंदिरों और दरगाह समेत आठ धार्मिक स्थानों को नोटिस भेजा था, नोटिस मिलने के बाद मुस्लिम समुदाय ने रात 10 बजे के आसपास पुलिस पर हमला कर दिया।

इस दौरान उन्मादी भीड़ ने आसपास के वाहनों को निशाना बनाया था। भीड़ ने बस पर पथराव भी किया था। हिंसा में एक हिंदू की मौत हो गई, जबकि चार पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इस दौरान ‘पुलिसवालों को मार दो, सब जला दो, कोई जिंदा न बचे’ जैसे नारे लगाए जा रहे थे। जूनागढ़ हिंसा पर ऑपइंडिया की पूरी कवरेज यहाँ पढ़ी जा सकती है।

सरकार ने दलितों को दी जमीन, मुस्लिमों ने कर लिया कब्जा: कोर्ट में जीत के बाद भी झारखंड में नहीं हो रही सुनवाई, पुलिस आती है तो भगा देती हैं औरतें

झारखंड के गिरडीह जिले में दलित समुदाय के लोगों ने अपनी जमीन पर अवैध कब्ज़े का आरोप लगाया है। प्रशासन को दिए प्रार्थना पत्र में दलितों ने मुस्लिम पक्ष पर अपनी जमीनें हड़पने की शिकायत की है। अपनी जमीनों को वापस पाने के लिए पीड़ित परिवार 12 सितंबर से DC (जिला उपयुक्त) ऑफिस पर धरना दे रहे हैं जो अब तक जारी है। इन सभी पर अब रोजी-रोटी का भी संकट आ गया है। भाजपा ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार की आलोचना की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए स्थानीय भाजपा नेता ने बताया कि धरना अभी भी जारी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला गिरडीह जिले के जमुआ प्रखंड का है। यहाँ डीसी ऑफिस पर धरना दे रहीं सावित्री भारती, जीरा देवी, गुलाबी देवी आदि ने बताया कि साल 1986-87 में तत्कालीन बिहार सरकार द्वारा नावाडीह के कुछ दलित परिवारों को को जमुआ अंचल में 11 हजार एकड़ भूमि रहने के लिए आधिकारिक तौर पर दी गई थी। शुरुआत में पीड़ितों ने वहाँ पेड़-पौधे लगाए। नियमित तौर पर जमीन की रसीद भी कटवाई।

गिरिडीह: दलितों की जमीन पर मुस्लिमों का कब्ज़ा

इस बीच अब्दुल, मशरफ़, खलील, हामिद, अलीबख्श आदि ने उस जमीन पर जबरन कब्ज़ा कर लिया। आरोपितों ने पीड़ितों को मारा-पीटा और गालियाँ दे कर भगा दिया। इसकी शिकायत पीड़ितों ने कई बार पुलिस से की लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हुई।

पीड़ितों का कहना है कि लगभग 37 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक उनको वहाँ बसाया नहीं जा सका है। आखिरकार सभी पीड़ित कोर्ट की शरण में गए। साल 2016 में यह जमीनी विवाद गिरडीह के उपायुक्त की अदालत तक पहुँच गया। इस मुक़दमे में दलित पक्ष की तरफ से मोहन तुरी थे जबकि मुस्लिम पक्ष का नेतृत्व खलील मियाँ कर रहे थे। 3 साल तक चले मुकदमे में दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें दीं और अपने कागजात पेश किए। आखिरकार 3 साल के बाद 2019 में उपायुक्त की अदालत ने मोहन तुरी के पक्ष में फैसला सुनाया और खलील मियाँ के दावे को अवैध घोषित कर दिया।

पीड़ितों का आरोप है कि साल 2019 में उन्हें मुकदमे में जीत हासिल होने के बावजूद 4 साल बाद तक प्रशासन उनको उनकी जमीन पर कब्ज़ा नहीं दिला पाया है। मुकदमे में जीती गई जमीन पर कब्ज़े से वंचित दलित परिवारों ने आखिरकार एक बार फिर से गिरडीह उपायुक्त से 12 सितंबर, 2023 को गुहार लगाई। उनकी माँग थी कि पुलिस बल लगा कर जमीन की पैमाइश करवाई जाए और अवैध कब्जेदारों को हटा कर उन सभी को मालिकाना हक दिया जाए। जब पीड़ितों की सुनवाई नहीं हुई तब पीड़ितों ने उपयुक्त कार्यालय पर ही धरना शुरू कर दिया।

पीड़ित परिवारों की सँख्या 11 है। 12 सितंबर से धरने के बाद जब लगभग 1 माह तक उनकी कोई सुध लेने नहीं आया तो पीड़ित परिवारों ने धरनास्थल पर ही अपनी रोजी-रोटी के काम शुरू कर दिए। पीड़ित परिवारों का कहना है कि जल्द ही उनके दीपावली और छठ जैसे त्योहार आ रहे हैं। ऐसे में उन सभी के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का गुजरा करने के लिए मंगलवार (10 अक्टूबर, 2023) से पीड़ित परिवार DC ऑफिस पर ही सूप और टोकरी बनाने लगा है। पीड़ितों का कहना है कि वो अपनी रोजी-रोटी कमाते हुए धरना जारी रखेगें।

भाजपा के चंदनक्यारी से विधायक अरुण कुमार ने ऐसी घटनाओं को अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने जिला प्रशासन से दोषियों को चिह्नित कर के कार्रवाई की माँग की है। भाजपा MLA के अनुसार इससे पहले भी पलामू में विशेष समुदाय के द्वारा महादलित परिवारों को उनके घर से बेघर करने की घटना हो चुकी है।

दी जाती है हत्या की धमकी

ऑपइंडिया ने इस मामले में स्थानीय भाजपा नेता कामेश्वर पासवान से बात की। कामेश्वर ने हमें बताया कि जिस स्थान पर मुस्लिम पक्ष ने अवैध कब्ज़ा किया है, वहाँ से कई बार पुलिस को भगाया जा चुका है। पुलिस को भगाने में मुस्लिम महिलाएँ भी शामिल थीं। बकौल कामेश्वर उस जगह पर मुस्लिमों ने अवैध तौर पर मकान भी बनवा लिए हैं जिसे हटाने की बात करने पर खुलेआम मर्डर होने की धमकी दी जाती है।

बताते चलें कि 29 अगस्त, 2022 को झारखंड के पलामू में 50 महादलित परिवारों ने मुस्लिम भीड़ पर अपनी पिटाई कर के जमीन को जबरन कब्ज़ाने का आरोप लगाया था। तब जिस जगह पीड़ित परिवार 40 वर्षों से रहने का दावा कर रहे थे, उसे मुस्लिम पक्ष अपने मदरसे की जमीन बता रहा था। उस समय पीड़ित परिवारों ने पुलिस पर कार्रवाई में ढिलाई का आरोप लगाया था।

संसद की आचार समिति ने महुआ मोइत्रा मामले में निशिकांत और जय अनंत से माँगा सबूत, TMC सांसद पर पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने का है आरोप

पैसे और तोहफा लेकर हीरानंदानी समूह के लिए संसद में सवाल पूछने को लेकर तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) घिरी हुई हैं। इस मामले में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से शिकायत की थी। इस शिकायत को संसद की आचार समिति को भेज दिया गया था। अब समिति ने सांसद दुबे और सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई को बुलाया है।

दरअसल, जय अनंत देहाद्राई द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर निशिकांत दुबे ने महुआ मोइत्रा की शिकायत ओम बिरला से की थी। अब संसद की आचार समिति ने दुबे और देहाद्राई को सबूत देने के लिए 26 अक्टूबर 2023 को बुलाया है। इसके लिए समिति ने दोनों को पत्र लिखा है।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई का हवाला दिया है। अपने पत्र में भाजपा सांसद ने टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा पर लोकसभा में सवाल पूछने के नाम पर घूस लेने का आरोप लगाया है। उसे सदन की अवमानना करार देते हुए उन्होंने लिखा कि इसकी तत्काल जाँच कर कार्रवाई की जाए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के लिखे गए पत्र में निशिकांत दुबे ने लिखा है, “मुझे अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई का एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने महुआ मोइत्रा पर सवाल के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।” उन्होंने पत्र में लिखा है कि एक प्रसिद्ध बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी के बिजनेस हितों को ध्यान में रखते हुए सवाल पूछे गए।

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पत्र में लिखा कि तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा हालिया में पूछे गए 61 सवालों में से 50 सवाल ऐसे हैं, जो दर्शन हीरानंदानी और उनकी कंपनी के व्यावसायिक हितों की रक्षा करने या उन्हें फायदा पहुँचाने के लिए पूछे गए हैं।

इसके बाद महुआ ने मंगलवार (17 अक्टूबर 2023) को निशिकांत दुबे, जय अनंत देहाद्राई और कई मीडिया संगठनों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया। सांसद निशिकांत दुबे ने वकील जय अनंत देहाद्राई की चिट्ठी के आधार पर गंभीर आरोप लगाए, जिसे मीडिया हाउसों ने खबर के तौर पर छापा।

महुआ मोइत्रा ने अपनी नोटिस में सभी मीडिया संस्थानों को उनके खिलाफ कंटेंट हटाने के लिए भी कहा था और 24 घंटे में ऐसा न करने पर कार्रवाई की धमकी दी थी। टीएमसी सांसद ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि आरोप झूठे हैं और राजनीतिक लाभ लेने और उनके खिलाफ व्यक्तिगत बदला लेने के लिए लगाए गए हैं।

महुआ मोइत्रा द्वारा भेजे गए नोटिस की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। मोइत्रा ने दुबे की शिकायत पर कई ट्वीट और समाचार रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा, “नोटिस नंबर 3 से 21 (मीडिया घरानों) द्वारा किए जा रहे ऐसे ट्वीट्स, वीडियो और समाचार रिपोर्टों में हमारे क्लाइंट्स पर लगाए गए मानहानिकारक आरोप शामिल हैं और प्रचारित किए जाते हैं, जो प्रथम दृष्टया झूठे, गलत हैं और राजनीतिक लाभ उठाने और व्यक्तिगत बदला लेने के लिए बनाए गए हैं। इसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।”

मोइत्रा ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के कारण उनका दुबे से टकराव होता रहा है। उनका दावा है कि मार्च 2023 में, उन्होंने दुबे की शैक्षिक योग्यता और उनके चुनाव नामांकन पत्रों में किए गए खुलासों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाकर उन्हें ‘परेशान’ कर दिया था।

महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने लोकसभा में सवाल पूछने के लिए रिश्वत ली थी और अपने कामों से हीरानंदानी ग्रुप को फायदा पहुँचाया। इस मामले में शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की कोर्ट में सुनवाई हो सकती है। निशिकांत दुबे ने रविवार (17 अक्टूबर, 2023) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखा था। दावा किया गया कि इनमें से कुछ सवाल अडानी समूह से संबंधित थे, जो हीरानंदानी का प्रतिस्पर्धी है।

गाजा की आग में जला अमेरिका का दूतावास, लेबनान में हमास समर्थकों ने फूँका-लहराए फिलस्तीनी झंडे: तुर्की की नौसेना ने शुरू किया ड्रिल

गाजा सिटी अस्पताल में हुए भीषण विस्फोट के जवाब में मंगलवार (17 अक्टूबर, 2023) की शाम को सैकड़ों लेबनानी प्रदर्शनकारियों ने लेबनान की राजधानी बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर धावा बोल दिया और इसे आग के हवाले कर दिया। इनमें से कुछ प्रदर्शनकारी फिलिस्तीनी झंडे लहरा रहे थे।

गौरतलब है कि गाजा के अस्पताल पर हुए इस हमले को लेकर लेबनानी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह ने ‘अभूतपूर्व आक्रोश दिवस’ (A Day Of Unprecedented Anger) मनाने का आह्वान किया था। इसके कुछ ही घंटे बाद लेबनान में प्रदर्शनों का सिलसिला चल पड़ा।

आतंकवादी संगठन हमास के साथ संघर्ष में यहूदी राष्ट्र के समर्थन में पड़ोसी देश इज़रायल में राष्ट्रपति जो बायडेन के आने से कुछ घंटे पहले ये प्रदर्शनकारी अमेरिकी दूतावास के बाहर इकट्ठा हो गए थे। इन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोले तक छोड़ने पड़े।

गौरतलब है कि इस मसले का समाधान निकालने और शांति वार्ता के लिए इजरायल सहित क्षेत्र के अन्य देशों के शीर्ष नेताओं से मिलने की अमेरिकी राष्ट्रपति बायडेन की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई। जॉर्डन के विदेश मंत्री ने उनकी राजधानी अम्मान में बुधवार को होने वाले क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन को रद्द करने का ऐलान किया।

इस सम्मेलन में ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन को जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय, फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी से मिलना था।

वहीं लेबनान में प्रदर्शनों को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए वीडियो में एक प्रदर्शनकारी को अमेरिकी दूतावास के झंडा फहराने वाले स्तंभ पर फ़िलिस्तीनी झंडा लगाने के लिए इमारत के चारों ओर काँटेदार तार की बाड़ पर चढ़ते हुए देखा गया, जबकि साथी प्रदर्शनकारी नीचे से उसका उत्साह बढ़ा रहे थे।

लेबनानी प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी दूतावास की बाड़ पर फ़िलिस्तीनी झंडा और चिह्न लटकाए (फोटो साभार: nypost.com)

लेबनानी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह के आह्वान के बाद हुए प्रदर्शनों में अमेरिकी दूतावास को आग के हवाले करने के बाद हमास और फलिस्तीन के समर्थन में आए प्रदर्शनकारियों का हौसला कम नहीं हुआ। ये प्रदर्शनकारी बेरूत में दूसरी जगह फ्रांसीसी दूतावास पर भी गए।

इससे पहले सोमवार (15 अक्टूबर, 2023 ) को इजरायल की सेना IDF ने लेबनानी सीमा के पास रहने वाले 28 समुदायों को ये इलाका खाली करने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि हिजबुल्लाह ने यह नहीं कहा है कि वह इजरायल के साथ युद्ध करेगा या नहीं, लेकिन बीते हफ्ते इजरायल-हमास संघर्ष शुरू होने के बाद से दोनों देशों ने एक दूसरे पर कई हमले किए हैं। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ (WHO) ने सोमवार को कहा कि उसने लेबनान-इज़रायल सीमा पर संभावित हमलों की वजह से बेरूत में चिकित्सा आपूर्ति की दो खेप भेजी हैं।

इजरायल ने अपने लोगों को तुर्की से बाहर निकलने के लिए भी बोल दिया है, क्योंकि वहाँ उन्हें निशाना बनाए जाने की आशंका है। इजिप्ट में पहले ही 2 इजरायली नागरिक और उनके गाइड की हत्या की जा चुकी है। तुर्की ने नौसेना ड्रिल भी शुरू कर दी है। वहीं ईरान के भी सुप्रीम लीडर ने धमकाया है कि इजरायल ने अपनी कार्रवाई नहीं रोकी तो मुस्लिमों को फिर रोकने वाला कोई नहीं होगा।

जिस प्रोफेसर अफीफुल्लाह को AMU ने छात्रा के यौन शोषण में दी क्लीनचिट, वह पुलिस की जाँच में निकला दोषी: चार्जशीट दाखिल

‘अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी’ (AMU) के प्रोफेसर अफीफुल्लाह के खिलाफ पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। उन पर एक पीएचडी छात्रा ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। पुलिस ने अपनी जाँच में अफीफुल्लाह को दोषी माना है। लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अपनी आंतरिक जाँच में इस प्रोफेसर को क्लीनचिट दी थी।

3 अक्टूबर 2023 को अलीगढ़ के जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने इस आरोप-पत्र स्वीकार करते हुए पुलिस को प्रोफेसर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की अनुमति प्रदान की। पीड़िता छात्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए निष्पक्ष जाँच के लिए योगी सरकार और यूपी पुलिस का आभार जताया है। साथ ही एएमयू प्रशासन पर आरोपित प्रोफसर की करतूतों को छिपाने का आरोप लगाया है।

अलीगढ़ पुलिस ने पीड़िता को 1 सितंबर 2023 को ही IGRS के माधयम से माँगी गई सूचना पर चार्जशीट दाखिल होने की जानकारी दे दी थी। चार्जशीट में अलीगढ़ पुलिस ने अदालत में यह स्वीकार किया है कि छात्रा ने व्हाट्सएप और कुछ अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स सबूत जमा किए हैं। इनसे प्रथम दृष्टया यौन उत्पीड़न के आरोप प्रमाणित होते हैं।

अदालत ने चार्जशीट का लिया संज्ञान

3 अक्टूबर 2023 को अलीगढ़ के जुडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में इस चार्जशीट पर संज्ञान लिया गया। अदालत ने केस दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अब प्रोफेसर अफीफुल्लाह को ट्रायल का सामना करना पड़ेगा। अफीफुल्लाह पर IPC की धारा 354 (क) (लैंगिक उत्पीड़न) के तहत चार्जशीट दाखिल हुई है। दोषी पाए जाने पर इस केस में अधिकतम 3 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

बिना अनुमति देश नहीं छोड़ सकता अफीफुल्लाह

अपने ऊपर दर्ज FIR में प्रोफेसर अफीफुल्लाह को अलीगढ़ की सेशन कोर्ट से 28 जून 2023 को अग्रिम जमानत लेनी पड़ी थी। अपने आवेदन में अफीफुल्लाह ने पीड़िता पर ही दोष मढ़ने का प्रयास करते हुए खुद को बेगुनाह बताया था। सेशन कोर्ट ने इस याचिका पर अफीफुल्लाह को सशर्त जमानत दी थी। जमानत की शर्तों में पुलिस को जाँच में सहयोग करना, पीड़िता या गवाहों को न तो धमकाना और न ही उन पर दबाव बनाना, बिना अनुमति देश न छोड़ना आदि शामिल हैं। हालाँकि पुलिस ने अफीफुल्लाह की अग्रिम जमानत का विरोध किया था।

अफीफुलाह की अग्रिम जमानत में रिवॉल्वर

अफीफुल्लाह को 1 लाख रुपए के मुचलके पर अग्रिम जमानत मिली है। इसमें जमानतदार अबरार अहमद खान हैं। अबरार अहमद खान ने जमानत के तौर पर अपनी लाइसेंसी रिवॉल्वर लगाई है।

AMU प्रशासन ने दी थी क्लीनचिट

आरोपित प्रोफेसर अफीफुल्लाह AMU के वाइल्ड लाइफ विज्ञान विभाग में चेयरमैन के पद पर कार्यरत हैं। पीड़िता ने 2 मई 2023 को ई मेल के जरिए AMU प्रशासन से अफीफुल्लाह के करतूतों की शिकायत की थी। शिकायत में छात्रा ने अफीफुल्लाह पर 5 साल से गंदे ऑफर देने, अश्लील हरकतें करने, ऊल-जुलूल माँगे करने, लिपस्टिक व कपड़ों पर आपत्तिजनक कमेंट करने का आरोप लगाए थे। इस शिकायत पर AMU ने 8 सदस्यों की एक आंतरिक कमेटी बनाई थी।

इस कमेटी में सीमा हाकिम, संगीता सिंघल, फ़ाज़िला शाहनवाज, सुबूही अफ़ज़ल, आदिला सुल्ताना, अल्विया फरहीन, मारिया शाहिद और जावेद सईद शामिल थे। इन सभी ने 26 मई 2023 को अपनी जाँच रिपोर्ट में प्रोफेसर अफीफुल्लाह को अच्छे चरित्र वाला बताया था। रिपोर्ट में पीड़िता पर अंग्रेजी में कमजोर होने का आरोप लगा दिया गया था। जाँच दल ने इस विवाद की जड़ में 25 हजार रुपए का लेन-देन बताया था। AMU प्रशासन के ज्वाइंट रजिस्ट्रार मोहम्मद इमरान ने 1 अगस्त को एक और पत्र जारी करते हुए अफीफुल्लाह को 26 मई को मिली क्लीनचिट को सही बताया था।

AMU से क्लीनचिट तो पुलिस में शिकायत

26 मई 2023 को AMU प्रशासन द्वारा प्रोफेसर अफीफुल्लाह को क्लीनचिट मिलने के बाद पीड़िता ने अलीगढ़ पुलिस में FIR दर्ज करवाई। यह FIR IPC की धारा 354 के तहत महिला थाने में दर्ज हुआ था। महिला पुलिस इंस्पेक्टर सरिता द्विवेदी द्वारा लगभग 5 माह की जाँच के बाद आखिरकार अफीफुल्लाह पर IPC 354 (क) के तहत चार्जशीट दाखिल हुई है।

योगी आदित्यनाथ और UP पुलिस को दिया धन्यवाद

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता ने योगी आदित्यनाथ और UP पुलिस का धन्यवाद दिया। उन्होंने हमें बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने उनके ही नहीं बल्कि कई अन्य लड़कियों के साथ हुई ऐसी ही उत्पीड़न की घटनाओं को दबाने की कोशिश की है। पीड़िता के मुताबिक यूनिवर्सिटी प्रशासन अफीफुल्लाह जैसे लोगों को इसलिए बचाता है, क्योंकि वहाँ उसी के सोच वालों की भरमार है। एक पर एक्शन होने के बाद बाकियों पर भी कार्रवाई करनी पड़ेगी।

हमसे बातचीत में पीड़िता ने यह भी बताया कि उनकी पढ़ाई दाँव पर लगी है। AMU प्रशासन बार-बार निवेदन के बावजूद उनको पीएचडी पूरी करने के लिए महिला प्रोफेसर गाइड नहीं दे रहा। पीड़िता का यह भी कहना है कि जब AMU में आतंकियों का समर्थन किया जाता है तब वहाँ का प्रशासन चुप रहता है, लेकिन अपने लिए न्याय माँगती एक लड़की के खिलाफ सभी लोग उठ खड़े होते हैं।

चोटी काटी, पूजा की घंटी से नफरत… पिता का दावा- बच्चे को ईसाई बनाने के लिए आधी रात को गंदे मैसेज भेजती थी महिला टीचर, सेक्स के लिए डालती थी दबाव

मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाले एक नाबालिग बच्चे ने पहले अपनी शिखा (चोटी) काटी। फिर उसे पूजा की घंटी से भी नफरत होने लगी। एक दिन परिजनों ने उसके मोबाइल की पड़ताल की तो पता चला कि स्कूल की एक महिला टीचर उसे ईसाई बनाने की कोशिश कर रही थी। देर रात उसे गंदे मैसेज भेजती थी। कथित तौर सेक्स करने को भी कहती थी। मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर के सेंट एलॉयसिस हाई स्कूल का है।

परिजनों का आरोप है कि स्कूल में हिंदुओं को भिखारी बताकर बच्चों का ब्रेनवॉश किय जा रहा था। धर्मांतरण की इस साजिश का सूत्रधार स्कूल के प्रिंसिपल वाल्टर डिसिल्वा को बताया गया है। 16 अक्टूबर 2023 को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इस घटना को लेकर प्रदर्शन किया। पुलिस को मामले की तहरीर दी गई है, जिसकी जाँच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला कानपुर के कैंट थाना क्षेत्र का है। पीड़ित सेंट एलॉयसिस हाई स्कूल का 10वीं कक्षा का छात्र है। पीड़ित परिजनों के अनुसार हिन्दू धर्म में आस्था रखने वाला उनके बेटे को घर में पूजा के दौरान बजने वाली घंटियों से भी चिढ़ हो गई थी। करीब एक साल से वो वह देवी-देवताओं का सम्मान करना बंद कर चुका था। जब परिवार वालों ने इसकी वजह पूछी तो उसने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

करीब चार महीने पहले बच्चा घर लौटा तो उसकी शिखा कटी हुई थी। काफी पूछताछ के बाद उसने बताया कि स्कूल की एक महिला टीचर उसे चर्च ले गई थी। उसने शिखा कटवा दी। पीड़ित पिता के अनुसार हाल में उन्होंने बेटे का फोन चेक किया तो पाया कि महिला टीचर आधी रात में उनके बेटे से अश्लील बातें करती थी। शारीरिक संबंध बनाने का दबाव देती थी।

जिन टीचर पर यह आरोप लगा है वो लगभग 37 साल से स्कूल में पढ़ा रही हैं। उनकी उम्र लगभग 60 साल है और वो रिटारयमेंट के करीब हैं। पीड़ित परिजनों ने इस हरकत को अपने बच्चे के खिलाफ प्यार के बहाने धर्मान्तरण की साजिश करार दिया है। इस साजिश में आरोपित टीचर के पति और भाई को भी शामिल बताया है। पीड़ित छात्र के पिता ने पुलिस में से 11 अक्टूबर 2023 को शिकायत की थी। ABVP का आरोप है कि प्रशासन मामले को दबाना चाहता है, जिसके चलते FIR दर्ज करने में देरी की जा रही है।

मामले के सामने आने के बाद स्कूल प्रशासन ने महिला टीचर को सस्पेंड कर दिया है। 16 अक्टूबर को ABVP के प्रांत संगठन मंत्री अंशुल विद्यार्थी के नेतृत्व में स्कूल प्रशासन पर कठोर कार्रवाई की माँग के साथ जुलूस निकला। जुलूस में पीड़ित छात्र के पिता भी शामिल हुए। छात्र के पिता ने स्कूल के प्रिंसिपल को पूरी साजिश का सूत्रधार बताया है।

महापुरुषों के अध्याय पर लगा दिया गया क्रॉस

छात्र के पिता ने बताया कि स्कूल की एक पी व्हाइट मैडम उनके बेटे से कहती हैं कि हिन्दू लोग भीख माँगते हैं। स्कूल में टीका लगाना और कलावा बाँधने पर भी प्रतिबंध होने की बात कही गई। आरोप यह भी है कि पीड़ित छात्र के परिजनों पर इस मामले को रफा-दफा करने का दबाव भी बनाया गया। वहीं ABVP के पदाधिकारी विक्रांत अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि स्कूल के अंदर छात्रों को जो सिलेबस की किताबें पढ़ने को दी जाती हैं उसमें आज़ादी दिलाने वाले महापुरुषों के चैप्टर पर क्रॉस लगा दिया गया है।

कानपुर पुलिस के मुताबिक मामले की जाँच की जा रही है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि जाँच के बाद निकल कर सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गाजा के अस्पताल पर रॉकेट गिरने से 500 की मौत, इस्लामिक जिहाद को इजरायल ने बताया जिम्मेदार: बोले नेतन्याहू- बर्बर आतंकी अपने बच्चों की भी हत्या करते हैं

रॉकेट हमले की चपेट में आने से गाजा के एक अस्पताल में कम से कम 500 लोगों की मौत की खबर है। इजरायल ने गाजा में सक्रिय इस्लामिक जिहाद को इसका जिम्मेदार बताया है। वहीं इस्लामी आतंकी संगठन हमास इसका दोष इजरायल पर मढ़ रहा है।

17 अक्टूबर 2023 को हमले की चपेट में आया अल-अहली अल-अरबी बापटिस्ट हॉस्पिटल मध्य गाजा में स्थित है। इजरायली सुरक्षा बल ने एक्स/ट्विटर पर पोस्ट कर बताया है कि इस हमले का जिम्मेदार इस्लामिक जिहाद है। IDF ने कहा है कि इजरायल को निशाना बनाते हुए कई रॉकेट लॉन्च किए गए थे। इनमें से एक रॉकेट मिसफायर हो गया और उसकी चपेट में एक अस्पताल के आने से सैकड़ों लोगों की मौत हो गई।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि पूरी दुनिया को यह पता होना चाहिए कि गाजा में जो बर्बर हमला हुआ है, उसे आतंकवादियों ने अंजाम दिया है, न कि इजरायली सेना ने। जिन लोगों ने हमारे बच्चों की बर्बर तरीके से हत्या की, वे अपने बच्चों की भी हत्या कर सकते हैं।

मुस्लिम मुल्क और अल जजीरा जैसे मीडिया संस्थान गाजा और हमास के बयानों का हवाला देकर इसके लिए इजरायल को ही जिम्मेदार बता रहे हैं। लेकिन आईडीएफ ने एक्स पर किए एक पोस्ट में समय की जानकारी देते हुए बताया है कि कैसे इजरायल को निशाना बनाकर रॉकेट दागा गया और वह मिसफायर होकर अस्पताल पर गिर गया।

उल्लेखनीय है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास के आतंकियों ने इजरायल पर अचानक हमला कर सैकड़ों लोगों की हत्या कर दी थी। बड़ी संख्या में इजरायली बंधक भी बनाए गए हैं। उसके बाद से इजरायल गाजा में आतंकी ठिकानों पर बमबारी कर रहा है। इजरायल की सेना ने गाजा की चारों तरफ से घेराबंदी भी कर रखी है।

अस्पताल पर हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन 18 अक्टूबर को इजरायल आ रहे हैं। बायडेन ने कहा है कि वे इस विस्फोट से क्षुब्ध और दुखी हैं। उन्होंने इस संबंध में जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से बात करने की जानकारी दी है। साथ ही बताया है कि अस्पताल पर हमला कैसे हुआ इसकी जानकारी इकट्ठा करने के निर्देश अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम को भी दिया है।

गौरतलब है कि हमास के हमलों में इजरायल के करीब 1400 लोगों की मौत हुई है। 3000 से ज्यादा घायल हैं। इजरायल के जवाबी कार्रवाई में करीब तीन हजार आतंकी मारे गए हैं। इजरायल वार टीम ने एक एक्स पोस्ट के जरिए बताया है कि इजरायल को टारगेट कर हमास के दागे रॉकेट में से 30 से 40% मिसफायर होकर गाजा पट्टी में ही गिरे हैं।

महुआ के सवाल, सरकार के जवाब, एक खास कारोबारी को फायदा… TMC सांसद के हर प्रश्न का पोस्टमॉर्टम पढ़िए यहाँ, जानिए निकाली कौन-कौन सी सूचनाएँ

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे ने रविवार (15 अक्टूबर) को तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा पर गंभीर आरोप लगाए। अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई की शिकायत के आधार पर दुबे ने आरोप लगाया कि व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी ने लोकसभा में मोइत्रा द्वारा पूछे गए अधिकांश प्रश्नों के लिए नकद और उपहार में भुगतान किया। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से महुआ मोइत्रा पर कार्रवाई की माँग की है।

इस पूरे मामले में ऑपइंडिया ने वकील जय अनंत देहाद्राई द्वारा दायर की गई शिकायत की एक प्रति हासिल की और लिस्ट में शामिल प्रश्नों की जाँच की। इन्हीं प्रश्नों को लेकर वकील जय अनंद देहाद्राई ने महुआ मोइत्रा पर हीरानंदानी ग्रुप को लाभ पहुँचाने का आरोप लगाया है। हम महुआ मोइत्रा द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवालों की खास लिस्ट आपके साथ साझा कर रहे हैं और बता रहे हैं कि उनसे किस तरह से हीरानंदानी ग्रुप को फायदा पहुँचा।

जुलाई 2019 में पहला सवाल : पारादीप पोर्ट से जुड़ा सवाल

लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने जुलाई 2019 में संसद में पहला सवाल पारादीप बंदरगाह को लेकर पूछा था। ये बंदरगाह ओडिशा के जगतसिंहपुर जिले में स्थित है और इसका महुआ मोइत्रा से कोई जुड़ाव नहीं। हाँ, महुआ मोइत्रा के सवाल का सीधा जुड़ाव हीरानंदानी ग्रुप की कंपनी से था, क्योंकि उस कंपनी ने पारादीप प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के लिए बोली जीती थी। महुआ मोइत्रा का सवाल इस लिंक के माध्यम से देख सकते हैं।

महुआ मोइत्रा ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) द्वारा शुरू में गैस टर्मिनल के लिए पारादीप पोर्ट ट्रस्ट के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए कहा। बाद में 2015 में इसे छोड़ दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने धामरा पोर्ट में हिस्सेदारी हासिल करने के लिए एक निजी संस्था के साथ गेल और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) की साझेदारी के बारे में जानकारी माँगी, जो पारादीप पोर्ट परियोजना से काफी महँगी थी।

दूसरा सवाल: नंबर 2019, टेलीकॉम कंपनियों द्वारा दी जा रही सेवाओं की गुणवत्ता के संदर्भ में

नवंबर 2019 में मोइत्रा ने टेलीकॉम कंपनियों की सेवा गुणवत्ता के बारे में एक सवाल पूछा था। इस मामले में हैरान करने वाली बात ये है कि ‘योट्टा’ नाम की हीरानंदानी की कंपनी ने सवाल उठने के एक दिन बाद ही रिलायसं की कंपनी जियो के एक एक्जीक्यूटिव को नौकरी पर रखा था। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने नवंबर 2019 में सरकार से टेलीकॉम कंपनियों की सेवाओं की गुणवत्ता की जानकारी माँगी, खासकर कॉल ड्रॉप दर को लेकर। उन्होंने बीते तीन साल का आँकड़ा माँगा। मंत्रालय ने इस बारे में डाटा भी दिया। सोचिए, ‘योट्टा’ के माध्यम से हीरानंदानी ग्रुप टेलीकॉम सेक्टर पर अपनी नजर जमाए हुई थी।

तीसरा सवाल : नवंबर 2019 में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की हैंडलिंग कैपेसिटी से जुड़ा सवाल

नवंबर 2019 में मोइत्रा ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की हैंडलिंग कैपेसिटी को लेकर सवाल पूछा था। खास बात ये है कि हीरानंदानी ग्रुप ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के साथ एक समझौता किया था और वो कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट से जुड़ी लाभान्वित पार्टी है। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने अपने सवाल में जहाजरानी मंत्रालय से कार्गो के प्रकार के आधार पर कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट को अर्जित कार्गो की मात्रा और आय से संबंधित जानकारी देने की माँग की। इसके अलावा, उन्होंने हुगली तट के किनारे बंदरगाह विकास को बढ़ावा देने के लिए कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट द्वारा किए गए उपाय और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी माँगी।

इस मामले में जहाजरानी मंत्रालय ने बिंदुवार जवाब दिया और बताया कि कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट ने किस तरह की सुविधाओं का विकास किया है और उसकी कितनी आय है।

सवाल नंबर-4 : भारत-बांग्लादेश सीमा पर स्पेशल चेक पोस्ट के बारे में

दिसंबर 2019 में तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से भारत-बांग्लादेश सीमा पर चेक पोस्ट के बारे में पूछा। यहाँ ध्यान देने वाली ये है कि हीरानंदानी ग्रुप बांग्लादेश में बड़ा निवेशक है और इन चेक पोस्ट से उसे फायदा पहुँचता। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने चौकियों के साथ ही भारत-बांग्लादेश के बीच व्यापार को बढ़ाने और सामानों की आवाजाही से संबंधित समझौतों के बारे में पूछा। इसके जवाब में सरकार ने बताया कि फरवरी 2016 में पश्चिम बंगाल के पेट्रापोल में एक एकीकृत चेक पोस्ट (आईसीपी) बनाई गई।

इसके अलावा सरकार ने दिसंबर 2018 में पाँच और इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट (ICPs) को मंजूरी दी। इन आईसीपी को घोजाडांगा, चांगराबाँधा, फुलबारी, महादीपुर और हिली में स्थापित किया जाना है। बता दें कि जून 2015 में भारत-भूटान-बांग्लादेश और नेपाल ने मोटर वाहन समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

पाँचवाँ सवाल : दिसंबर 2019 में एक निजी संस्था, पारादीप पोर्ट और गेल के बीच समझौते के बारे में

महुआ मोइत्रा ने दिसंबर 2019 में एक निजी संस्था, पारादीप पोर्ट और गेल के बीच समझौते को लेकर सवाल किया था। उन्होंने पूछा था कि क्या इस निविदा प्रक्रिया के लिए सीवीसी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया था या नहीं। ये सवाल हिंडनबर्ग रिपोर्ट में उठाए गए हैं।

खास बात ये है कि हीरानंदानी ग्रुप देश के पूर्वी समुद्र तट पर स्थित बंदरगाहों को बांग्लादेश से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के साथ वो काम कर ही रहा है, लेकिन इस निजी संस्था (अडानी समूह) की मौजूदगी से हीरानंदानी ग्रुप के कामों में समस्याएँ पैदा हो सकती हैं। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने ये सवाल इसलिए पूछा, क्योंकि उन्हें इस समझौते की रकम के बारे में जानकारी चाहिए थी। ये समझौता 46,500 करोड़ रुपए का था तो लंबी तकनीकी और कॉमर्शियल बातचीत के बाद हुआ था। इस समझौते में सीवीसी के दिशा-निर्देशों के बारे में पूछने का मकसद ये था कि अगर सीवीसी की नजर इस पर नहीं पड़ी है तो फिर उससे सवाल उठाए जा सकें।

उन्होंने निजी कंपनी, गेल और सरकार के मालिकाना हक वाले पारादीप पोर्ट के बीच 2500 करोड़ रुपए के समझौते के बारे में जानकारी हासिल की। मंत्रालय ने जवाब दिया कि हर समझौते में सीवीसी के दिशा-निर्देशों का पालन किया गया है। हालाँकि, गेल के मामले में कोई बाध्यकारी समझौता नहीं हुआ था। इसके बदले में 26 अक्टूबर 2013 को एक एमओयू साइन हुआ था, जो 26 जनवरी 2017 को समाप्त हो गया।

छठाँ सवाल : मार्च 2020 में जलमार्ग पर कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के अधिकार क्षेत्र के संबंध में सवाल

महुआ मोइत्रा ने मार्च 2020 में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट को लेकर एक और सवाल पूछा था। यहाँ फिर से ध्यान दें कि हीरानंदानी ग्रुप का कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (KPT) के साथ समझौता है। महुआ मोइत्रा ने इस बार एक बड़े जलमार्ग पर केपीटी के अधिकार क्षेत्र के बारे में जानकारी माँगी। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

उन्होंने सवाल किया कि क्या केपीटी की नीतियाँ और प्रक्रियाएँ हुगली नदी तट के किनारे बंदरगाहों के विकास में बाधा डालती हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केपीटी के पास बंदरगाहों के भविष्य के विकास के लिए जमीन है और क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए केपीटी और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण को विकास सुनिश्चित करने के लिए जहाजरानी मंत्रालय क्या कदम उठा रहा है।

इस सवाल के जवाब में मंत्रालय ने बताया कि कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के पास आगे की बंदरगाह गतिविधियों के लिए पर्याप्त जमीन है और यह रणनीतिक रूप से राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर स्थित है। तीन वर्षों में, उन्होंने 1,902.95 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाएं आवंटित कीं, जिससे इसकी क्षमता बढ़कर 82.57 एमटीपीए हो गई। 10 साल के अंतराल के बाद इसने 65 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा कमाया।

सातवाँ सवाल: फरवरी 2021 में भारत में 5G की तैयारी के बारे में पूछा

महुआ मोइत्रा ने फरवरी 2021 में देश में 5G की तैयारियों के बारे में सवाल पूछा। ध्यान देने वाली बात ये है कि हीरानंदानी समूह की कंपनी योट्टा ने सैटेलाइट लाइसेंस द्वारा ग्लोबल मोबाइल पर्सनल कम्युनिकेशंस के लिए आवेदन किया था। ऐसे में ये सवाल सीधे-सीधे हीरानंदानी ग्रुप को फायदा पहुँचाने वाला था। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने संचार मंत्रालय से भारत की 5जी तैयारी और सेवाओं के राष्ट्रव्यापी रोलआउट के लिए अपेक्षित समयसीमा के बारे में जानकारी प्रदान करने के लिए कहा। इसके अलावा उन्होंने आवश्यक फाइबर नेटवर्क की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों सहित 5जी सेवाओं के रोलआउट के लिए देशव्यापी फाइबर ऑप्टिक्स नेटवर्क स्थापित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी माँगी।

इस सवाल के जवाब में मंत्रालय ने बताया कि देश में मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर केबल नेटवर्क का उपयोग करते हुए 5जी सेवाओं को धीरे-धीरे शुरू करने की योजना बनाई गई थी। दूरसंचार सेवा प्रदाता और अवसंरचना प्रदाता श्रेणी-I अपनी व्यावसायिक रणनीतियों के आधार पर ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने और नीलामी के माध्यम से स्पेक्ट्रम प्राप्त करने के लिए जिम्मेदार थे। सरकार ने इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी के लिए भारतनेट प्रोजेक्ट भी लागू किया।

आठवाँ सवाल: फरवरी 2021 में ही प्रस्तावित ऊर्जा कोड के विवरण के बारे में जानकारी माँगी

महुआ मोइत्रा ने फरवरी 2021 में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्रस्तावित ऊर्जा कोड के बारे में पूछा, जिसका सीधा असर हीरानंदानी समूह के निर्माण व्यवसाय पर पड़ा। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने अपने सवाल में मंत्रालय से बिल्डिंग एनर्जी कोड लागू करने सहित इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान के उद्देश्यों के बारे में पूछा। नए मानकों की लागत, प्रभाव और समयसीमा पर विवरण माँगा गया था।

मंत्रालय ने बताया कि इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान (आईसीएपी) का लक्ष्य 20 वर्षों में बेहतर तकनीक, रेफ्रिजरेंट ट्रांजिशन और ऊर्जा दक्षता के माध्यम से कूलिंग माँग को कम करना है। आईसीएपी ने वाणिज्यिक भवनों में प्रासंगिक ईसीबीसी प्रावधानों को एकीकृत करने और थर्मल आराम के लिए आवास परियोजनाओं में ईसीबीसी-आर को बढ़ावा देने की सिफारिश की। दिसंबर 2020 तक 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने ईसीबीसी को उपनियमों में शामिल किया और 2037-38 तक 150 अरब यूनिट बचाने की उम्मीद थी।

नौवाँ सवाल : जुलाई 2021 में एफपीआई निवेश के बारे में सवाल

लोकसभा में महुआ मोइत्रा ने जुलाई 2021 में वित्त मंत्रालय से अडानी समूह की कंपनियों में हिस्सेदारी रखने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के बारे में पूछा। खास बात ये है कि इसी के बाद अडानी समूह के खिलाफ सेबी (SEBI) ने जाँच शुरू की। आरोप हैं कि ये सवाल पूछने के लिए खास निर्देश सीधे हीरानंदानी से मिले थे। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

इस सवाल के जवाब में मंत्रालय ने बताया कि 30 जून 2021 तक अडानी समूह की छह कंपनियों का भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर कारोबार हुआ। इन कंपनियों में एफपीआई की हिस्सेदारी दैनिक उतार-चढ़ाव के अधीन थी। सेबी नियमों के अनुपालन के लिए अडानी समूह की कुछ कंपनियों की जाँच कर रही थी, जबकि डीआरआई समूह से जुड़ी विशिष्ट संस्थाओं की जाँच कर रही थी। आयकर अधिनियम के तहत कोई जाँच रिपोर्ट नहीं की गई और ईडी कोई जाँच नहीं कर रहा था।

सेबी ने जून 2016 में एक आदेश जारी कर डिपॉजिटरी को जीडीआर जारी करने के संबंध में अल्बुला इन्वेस्टमेंट फंड लिमिटेड, क्रेस्टा फंड लिमिटेड और एपीएमएस इन्वेस्टमेंट फंड लिमिटेड सहित कुछ एफपीआई के विशिष्ट लाभार्थी खातों को फ्रीज करने का निर्देश दिया। इन तीन एफपीआई के अन्य लाभार्थी खातों के लिए ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया था।

दसवाँ सवाल : जुलाई 2021 में भारतीय सौर ऊर्जा निगम के टेंडर के बारे में माँगी जानकारी

महुआ मोइत्रा ने जुलाई 2021 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री से सौर ऊर्जा निगम के टेंडरों के बारे में पूछा। यह आरोप लगाया गया है कि इस प्रश्न का उद्देश्य 2020 में नवीकरणीय ऊर्जा के माध्यम से डेटा केंद्रों को बिजली देने के लिए हीरानंदानी समूह की कंपनी “योट्टा” को लाभ पहुँचाना था। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई) द्वारा राउंड-द-क्लॉक (आरटीसी) हरित ऊर्जा के लिए निविदाएँ जारी करने के बारे में जानकारी माँगी, जो स्पष्ट रूप से प्राकृतिक गैस-संयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा के विपरीत कोयला-संयुक्त नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित है।

इसके अलावा, उन्होंने इस प्राथमिकता के विवरण और कारण भी पूछे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हरित ऊर्जा पर विशेष ध्यान देने के साथ व्यापक हरित परिवर्तन रणनीति के लिए सरकार की योजनाओं के बारे में पूछा और संबंधित विवरण प्रदान करने को कहा।

ग्यारहवाँ सवाल : जुलाई 2021 में स्टील की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में सवाल

महुआ मोइत्रा ने जुलाई 2021 में इस्पात मंत्रालय से देश में स्टील की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में पूछा था। ध्यान देने वाली बात ये है कि हीरानंदानी का रियल एस्टेट व्यवसाय स्टील की कम कीमत का सीधा लाभार्थी था। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा मंत्रालय से स्टील की कीमतें कम करने और इसे और अधिक किफायती बनाने के लिए सरकार के कार्यों की रूपरेखा के बारे में पूछा। उन्होंने कच्चे माल की कीमतें कम करने, निर्यात को हतोत्साहित करने और घरेलू उपयोग को प्रोत्साहित करने के उपायों के बारे में भी पूछा। अंत में, उन्होंने स्टील आयात पर संभावित टैरिफ कटौती के बारे में पूछताछ की।

बारहवाँ सवाल : अगस्त 2021 में देश के शहरों में गैस डिस्ट्रिब्यूशन से जुड़ा सवाल

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने अगस्त 2021 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से शहरों की संख्या और गैस डिस्ट्रीब्यूशन कवरेज के बारे में सवाल पूछा। गैस डिस्ट्रीब्यूशन के क्षेत्र में हीरानंदानी ग्रुप काम करता है। उसने कई शहरों में हाउसिंग सोसायटी भी विकसित की है। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने मंत्रालय से प्राकृतिक गैस की माँग के संबंध में जानकारी माँगी। विशेष रूप से पीएनजी के घरेलू कनेक्शन और सीएनजी स्टेशनों के सिटी गैस वितरण-बोली-5, 6, 7, 8, और 9 के बारे में विवरण। इसके साथ ही उन्होंने जुर्माना लगाने की प्रक्रिया और एक जैसा टैरिफ लगाने के साथ ही गैस की कीमतों को एक सीमा के अंदर रखे जाने को लेकर सवाल पूछा।

तेरहवाँ सवाल : अगस्त 2021 में पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक आईओसी, गेल और एच-एनर्जी द्वारा गैस पाइपलाइन के बारे में जानकारी माँगी

महुआ मोइत्रा ने अगस्त 2021 में विदेश मंत्रालय से पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश तक आईओसी, गेल और एच-एनर्जी गैस पाइपलाइनों पर जानकारी माँगी। हीरानंदानी समूह की कंपनी एच-एनर्जी इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी इच्छुक थी। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

चौदहवाँ सवाल : अगस्त 2021 में हवाई अड्डों के संचालन के संबंध में सवाल

महुआ मोइत्रा ने अगस्त 2021 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय से अडानी समूह को हैंडओवर किए गए हवाई अड्डों के बारे में पूछा। ये सवाल न सिर्फ अडानी ग्रुप पर सीधा हमला था, बल्कि इसका फायदा हीरानंदानी ग्रुप उठाना चाहता था। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने पीपीपी मॉडल के तहत एएआई से अडानी समूह को छह हवाई अड्डों के हस्तांतरण के बारे में जानकारी माँगी। मंत्रालय ने जवाब दिया कि एयरपोर्ट ऑथिरिटी ऑफ इंडिया ने पीपीपी मॉडल के तहत भारत में छह हवाई अड्डों के मैनेजमेंट-संचालन के लिए अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को 50 साल का पट्टा दिया है। उस कंपनी को ब्लैकलिस्टिंग करने जैसी कोई योजना नहीं है। इस समझौते से एयरपोर्ट अथॉरिटी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

पंद्रहवाँ सवाल : फरवरी 2022 में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट में RoRo नौकाओं और जहाजों के फँसने के बारे में जानकारी माँगी

महुआ मोइत्रा ने फरवरी 2022 में बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री से RoRo नौकाओं और जहाजों के पश्चिम बंगाल और देश के अन्य क्षेत्रों में फँसने के बारे में पूछा। यहाँ ये बताना जरूरी है कि खुद हीरानंदानी ग्रुप इस काम से जुड़ा हुआ है और उसका कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के साथ एक समझौता है। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने मंत्रालय से पश्चिम बंगाल और भारत के अन्य हिस्सों में RoRo नौकाओं और नौकाओं के फँसने के बारे में पूछा। इसके अलावा इस समस्या से संबंधित कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण द्वारा उठाए गए उपायों और रास्ते में गाद की रिपोर्ट की जानकारी माँगी। इसके जवाब में मंत्रालय ने कहा कि किसी भी जहाज के फँसने की कोई घटना नहीं हुई है, बल्कि परिवहन कार्य सुगमता से चले हैं।

सोलहवाँ सवाल : फरवरी 2022 में ई-स्पोर्ट्स के विकास से जुड़ा सवाल

महुआ मोइत्रा ने 8 फरवरी 2022 को युवा मामले और खेल मंत्री से भारत में ई-स्पोर्ट्स के विकास के बारे में सवाल पूछा। बता दें कि हीरानंदानी समूह कथित तौर पर इसका प्रत्यक्ष लाभार्थी था, क्योंकि उसका ‘तेज प्लेटफॉर्म’ ई-स्पोर्ट्स में डील करता है। इसके बाद हीरानंदानी ग्रुप ने करीब 14 फरवरी 2022 को 1,000 करोड़ रुपए के निवेश की घोषणा की थी। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने मंत्रालय से भारत को दुनिया का 16वाँ सबसे बड़ा ई-स्पोर्ट्स बाजार बताने वाली रिपोर्टों पर सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा। उन्होंने 2022 एशियाई खेलों में ई-स्पोर्ट्स को शामिल करने, राष्ट्रीय नियमों के लिए ई-स्पोर्ट्स योजनाओं पर सरकार के रुख, एशियाई खेलों में प्रतिभागियों के लिए समर्थन और भारत में ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के विवरण के बारे में जानकारी ली।

मंत्रालय ने जवाब दिया कि नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन किसी भी खेल को बढ़ावा देने और विकसित करने के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार है। मंत्रालय अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए मान्यता प्राप्त एनएसएफ को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इसके अलावा, मंत्रालय ने कहा कि ई-स्पोर्ट्स एक मान्यता प्राप्त प्रतिस्पर्धी खेल है और यह भारत के राष्ट्रीय खेल विकास संहिता, 2011 के तहत विनियमित है।

सत्रहवाँ सवाल : फरवरी 2022 में डीजल वाहनों को सड़कों से हटाने और इलेक्ट्रिक-एलएनजी वाहनों को लाने के संदर्भ में रोडमैप बनाने से जुड़ा सवाल

महुआ मोइत्रा ने फरवरी 2022 में मोइत्रा ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय से डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक एलएनजी द्वारा चरणबद्ध तरीके से हटाने के लिए रोडमैप के बारे में पूछा। इससे भी दर्शन हीरानंदानी को फायदा मिला, क्योंकि वो अपने एलएनजी व्यवसाय का विस्तार करना चाहते थे। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

मोइत्रा ने मंत्रालय से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में डीजल वाहनों को इलेक्ट्रिक, एलएनजी, बायोगैस, हाइड्रोजन आदि जैसे वैकल्पिक साधनों में स्थानांतरित करने के लिए एक रोडमैप बनाने की सरकार की योजना के बारे में पूछा। उन्होंने इस योजना के बारे में अधिक जानकारी के लिए भी अनुरोध किया।

इसके जवाब में मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने परिवहन में वैकल्पिक ईंधन प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने के लिए अधिसूचनाएँ जारी की हैं। इसमें वाहनों में हाइब्रिड सिस्टम को फिर से लगाना, कृषि और निर्माण उपकरणों के लिए उत्सर्जन मानदंड और ईंधन के रूप में हाइड्रोजन को बढ़ावा देना शामिल है।

अठारहवाँ सवाल : मार्च 2022 में गेल को अनबंडल (अलग-अलग हिस्सों में बाँटना) के बारे में सवाल

महुआ मोइत्रा ने मार्च 2022 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री से गेल की अनबंडलिंग के बारे में पूछा। दिलचस्प बात यह है कि दर्शन हीरानंदानी ने ऑन रिकॉर्ड कहा था कि गेल को अलग करना बहुत जरूरी है। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

उन्नीसवाँ सवाल : मार्च 2022 में केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग के बारे में

महुआ मोइत्रा ने मार्च 2022 में वित्त मंत्रालय से केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग पर जानकारी माँगी थी। दिलचस्प बात यह है कि यह सवाल उस समय पूछा गया था, जब हीरानंदानी समूह पर इनकम टैक्स विभाग के छापे पड़े थे। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

मोइत्रा ने मंत्रालय से पीएमएलए के उपयोग के संबंध में ईडी को सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी के बारे में पूछा। उन्होंने पीएमएलए में बदलाव, ईडी के जब्ती प्रावधान के नियम और उन निर्दोष व्यक्तियों के मुआवजे पर सरकार के रुख के बारे में भी पूछताछ की, जिनकी संपत्ति ईडी द्वारा जब्त की गई थी।

इस सवाल के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पीएमएलए पर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच के लिए दिशा-निर्देश बनाए हैं। यदि संपत्ति मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल नहीं थी तो इसे सही मालिक को वापस दे दिया जाता है।

बीसवाँ सवाल : मार्च 2023 में अडानी द्वारा संचालित गंगावरम बंदरगाह के बारे में सवाल

महुआ मोइत्रा ने मार्च 2023 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय से अडानी द्वारा संचालित गंगावरम बंदरगाह के बारे में पूछा। दिलचस्प बात यह है कि हीरानंदानी समूह इस मामले में खुद के एक पक्ष था। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा ने मंत्रालय से गंगावरम बंदरगाह पर आईओसीएल (IOCL) और एपीएसईजेड (APSEZ) के बीच एमओयू के बारे में पूछा। साथ ही उन्होंने भुगतान के बारे में जानकारी माँगी। इस सवाल के जवाब में मंत्रालय ने कहा कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने गंगावरम पोर्ट लिमिटेड (GPL) और अडानी गंगावरम पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक गैर-बाध्यकारी टर्म शीट पर हस्ताक्षर किए हैं।

मंत्रालय ने बताया कि टर्म शीट को आईओसीएल के चेयरमैन ने मंजूरी दी थी, बोर्ड ने नहीं। जीपीएल के साथ कोई लेनदेन नहीं हुआ है, क्योंकि टर्मिनल अभी तक चालू नहीं हुआ है और कोई आयात नहीं हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि कोई निश्चित समझौता नहीं हुआ था और विजग बंदरगाह से गंगावरम बंदरगाह पर कारोबार स्थानांतरित करने का अंतिम निर्णय कई अन्य वजहों पर निर्भर था।

इक्कीसवाँ सवाल : अडानी द्वारा संचालित धामरा पोर्ट के बारे में सवाल

महुआ मोइत्रा ने मार्च 2023 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री से अडानी द्वारा संचालित धामरा पोर्ट के बारे में पूछा। गौरतलब है कि हीरानंदानी समूह के पास हल्दिया पोर्ट का स्वामित्व है और वह इसका विस्तार करना चाहता है। (ये सवाल यहाँ पढ़ सकते हैं)

महुआ मोइत्रा द्वारा लोकसभा में पूछे गए सवाल करीब-करीब वैसे ही हैं, जैसा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई ने दावा किया है। अब इन सारे आरोपों पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को फैसला लेना है।

मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में लिखी गई है, जिसका श्रवण शुक्ला ने हिंदी में अनुवाद किया। मूल लेख को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

हाईकोर्ट पहुँचीं महुआ मोइत्रा, भाजपा सांसद, अधिवक्ता और मीडिया के खिलाफ दर्ज कराया मानहानि का मुकदमा: मीडिया को धमकाया था – मेरे खिलाफ कंटेंट हटाओ, वरना…

तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने मंगलवार (17 अक्टूबर, 2023) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद निशिकांत दुबे, वकील जय अनंत देहाद्राई और कई मीडिया संगठनों के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में मानहानि का मुकदमा दायर किया। सांसद निशिकांत दुबे ने वकील जय अनंत देहाद्राई की चिट्ठी के आधार पर गंभीर आरोप लगाए, जिसे मीडिया हाउसों ने खबर के तौर पर छापा। महुआ मोइत्रा पर आरोप हैं कि उन्होंने लोकसभा में सवाल पूछने के लिए रिश्वत ली थी और अपने कामों से हीरानंदानी ग्रुप को फायदा पहुँचाया।

‘बार एंड बेंच’ की खबर के मुताबिक, इस मामले में शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की कोर्ट में सुनवाई हो सकती है। निशिकांत दुबे ने रविवार (17 अक्टूबर, 2023) को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि मोइत्रा ने नकदी और उपहारों के बदले बिजनेस टाइकून दर्शन हीरानंदानी की ओर से संसद में सवाल पूछे थे। दावा किया गया कि इनमें से कुछ सवाल अडानी समूह से संबंधित थे जो हीरानंदानी का प्रतिस्पर्धी है।

इस मामले में उनके खिलाफ शिकायत को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से संसद के आचार समिति के पास भेज दिया है। महुआ मोइत्रा ने अपनी नोटिस में सभी मीडिया संस्थानों को उनके खिलाफ कंटेंट हटाने के लिए भी कहा था और 24 घंटे में ऐसा न करने पर कार्रवाई की धमकी दी थी।

कानूनी नोटिस भेजने के बाद दर्ज कराया केस

इस मामले में महुआ मोइत्रा ने पहले निशिकांत दुबे, देहाद्राई और कई मीडिया संगठनों को कानूनी नोटिस भेजा था। टीएमसी सांसद ने सभी आरोपों से इनकार किया और कहा कि आरोप झूठे हैं और राजनीतिक लाभ लेने और उनके खिलाफ व्यक्तिगत बदला लेने के लिए लगाए गए हैं।

महुआ मोइत्रा द्वारा भेजे गए नोटिस की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। पनाग और बाबू लॉ ऑफिस के माध्यम से दायर अपने कानूनी नोटिस में, मोइत्रा ने इन सभी आरोपों का जोरदार खंडन किया है। उन्होंने दुबे की शिकायत पर कई ट्वीट और समाचार रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए कहा, “नोटिस नंबर 3 से 21 (मीडिया घरानों) द्वारा किए जा रहे ऐसे ट्वीट्स, वीडियो और समाचार रिपोर्टों में हमारे क्लाइंट्स पर लगाए गए मानहानिकारक आरोप शामिल हैं और प्रचारित किए जाते हैं, जो प्रथम दृष्टया झूठे, गलत हैं और राजनीतिक लाभ उठाने और व्यक्तिगत बदला लेने के लिए बनाए गए हैं। इसमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है।”

मोइत्रा ने कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न मुद्दों पर मतभेद के कारण उनका दुबे से टकराव होता रहा है। उनका दावा है कि मार्च 2023 में, उन्होंने दुबे की शैक्षिक योग्यता और उनके चुनाव नामांकन पत्रों में किए गए खुलासों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाकर उन्हें ‘परेशान’ कर दिया था।

महुआ पर लगे हैं गंभीर आरोप

बता दें कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे पत्र में सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत देहाद्राई का हवाला दिया है। अपने पत्र में भाजपा सांसद ने टीएमसी की सांसद महुआ मोइत्रा पर लोकसभा में सवाल पूछने के नाम पर घूस लेने का आरोप लगाया है। उसे सदन की अवमानना करार देते हुए उन्होंने लिखा कि इसकी तत्काल जाँच कर कार्रवाई की जाए।

‘संसद में सवाल पूछने के लिए लिए पैसे’

निशिकांत दुबे ने अपने पत्र में लिखा है, “मुझे जय अनंत देहाद्राई, अधिवक्ता का एक पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें उन्होंने महुआ मोइत्रा पर सवाल के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगाया है।” बीजेपी सांसद ने पत्र में लिखा है कि एक प्रसिद्ध बिजनेसमैन दर्शन हीरानंदानी के बिजनेस हितों को ध्यान में रखते हुए सवाल पूछे गए। निशिकांत दुबे ने पत्र में लिखा कि महुआ मोइत्रा के हालिया 61 सवालों में से 50 सवाल ऐसे हैं, जो दर्शन हीरानंदानी और उनकी कंपनी के व्यावसायिक हितों की रक्षा करने या उन्हें फायदा पहुँचाने के लिए पूछे गए।