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Rapidx: सुविधा प्लेन वाली, किराया ऑटो से कम, स्पीड राजधानी ट्रेन से ज्यादा – महिलाओं के लिए अलग डिब्बा, प्रीमियम कोच में कोट टाँगने वाला हुक भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (20 अक्टूबर, 2023) को देश के पहले रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के प्राथमिकता वाले सेक्शन का श्री गणेश करेंगे। इसके एक दिन बाद ही शनिवार (21 अक्टूबर, 2023) को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) यात्रियों के लिए इस पर ट्रेनों की रेगुलर सर्विस शुरू कर देगा।

फिलहाल, NCRTC दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के प्राथमिकता वाले 17 किलोमीटर लंबे सेक्शन पर ही RAPIDX का संचालन करेगा। ये सेक्शन साहिबाबाद से दुहाई डिपो तक फैला है। इस पूरे 82 किलोमीटर के कॉरिडोर के साल 2025 तक पूरा होने की संभावना है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों के लिए ये सर्विस किसी सौगात से कम नहीं हैं।

दरअसल, RRTS कॉरिडोर को देश की राजधानी से बाहर प्रमुख शहरों में रहने वाले लोगों के लिए दिल्ली और एनसीआर में काम के लिए किए जाने वाले रोजाना के सफर को आसान बनाना था। आइए जानते हैं इस सेक्शन की क्या खासियत है और कैसे ये यात्रियों को लिए फायदेमंद साबित होने जा रही है।

क्या है रैपिडएक्स

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी) ‘रैपिडएक्स’ नाम की सेमी-हाई-स्पीड क्षेत्रीय रेल सेवा के लिए कॉरीडोर का निर्माण कर रहा है। ये क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी RRTS कहलाता है। एनसीआरटीसी दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकारों के साथ केंद्र की एक संयुक्त कंपनी है। इसे ही दिल्ली और मेरठ के बीच भारत के पहले आरआरटीएस के निर्माण और रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है।

कितने होंगे कोच और आरक्षित सीटें

हर RAPIDX ट्रेन में एक प्रीमियम कोच समेत कुल 6 कोच होंगे। इसमें चार स्टैंडर्ड होंगे और एक कोच महिलाओं के लिए आरक्षित होगा। महिलाओं का ये आरक्षित कोच प्रीमियम कोच के बगल में होगा। अधिकारियों के मुताबिक, RAPIDX ट्रेन के हर कोच में सीटों को क्रमबद्धता से लगाया गया है। महिलाओं लिए आरक्षित कोच के अलावा अन्य कोचों में भी महिलाओं, खास तौर से दिव्यांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीटें आरक्षित होंगी।

कितने लोग कर सकेंगे सफर

हर RAPIDX ट्रेन में ट्रेनों के दोनों छोर पर पायलट केबिन होंगे और 407 लोगों के बैठने की क्षमता होगी। इसके साथ ही 1,061 अतिरिक्त यात्री खड़े होंगे। इसके कोचों में ओवरहेड सामान रैक के साथ 2X2 बैठने की सुविधा, ऑन-बोर्ड वाई-फाई, हर सीट के लिए चार्जिंग पॉइंट, एक पब्लिक उद्घोषणा और डिस्प्ले सिस्टम, डायनेमिक रूट मैप डिस्प्ले होगा। तो वहीं व्हीलचेयर के लिए निर्धारित जगह के साथ ही एक आपातकालीन अलार्म सिस्टम होगा जो इमरजेंसी के दौरान यात्रियों को इंटरकॉम के जरिए ड्राइवर के साथ बात करने की सुविधा देगा।

कैसा होगा प्रीमियम कोच

रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली से मेरठ की तरफ जाने वाला पहला कोच और मेरठ से दिल्ली तरफ आने वाला आखिरी कोच प्रीमियम कोच होगा। एक स्लाइडिंग दरवाजे के जरिए बगल के कोच से अलग किया जाएगा। इसके साथ ही प्रीमियम कोच में सीट का कलर कोड अन्य कोच के कलर से अलग होगा।

इसके साथ ही आरामदायक गद्देदार रिक्लाइनिंग सीटें, कोट हुक, मैगजीन होल्डर और फुटरेस्ट जैसी कई यात्रियों को ध्यान में रखकर दी गई सुविधाएँ प्रीमियम कोच को प्रीमियम बनाती हैं। मसलन एक प्रीमियम कोच की सीट में पैरों को रखने के लिए अतिरिक्त जगह होगी।

इस कोच में प्रीमियम लाउंज के जरिए ही चढ़ा जा सकेगा। आने वाले वक्त में इसमें वेंडिंग मशीन लगाने का भी प्लान है। जिससे कोच के अंदर ही स्नैक्स और पेय पदार्थ खरीदे जा सकेंगे।

रैपिडएक्स के स्टेशन पर मिलेंगी ये सुविधाएँ

रैपिडएक्स के हर स्टेशन पर कॉनकोर्स लेवल के पेड एरिया में पीने का पानी और वॉशरूम होंगी। छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले यात्रियों को ध्यान में रखते हुए हर स्टेशन के महिला शौचालय में डायपर बदलने के लिए जगह दी जाएगी। रैपिडएक्स के सभी स्टेशनों पर प्राथमिक चिकित्सा सुविधा दी जाएगी।

किसी भी मेडिकल इमरजेंसी के लिए एम्बुलेंस आसानी से मँगवाई जा सकेगी। इस सेक्शन में RAPIDX के गाजियाबाद स्टेशन पर एक ‘लॉस्ट एंड फाउंड सेंटर’ भी है। ये सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहेगा। यहाँ से खोई और पाई चीजों की जानकारी RAPIDX कनेक्ट ऐप पर मुहैया कराई जाएगी।

कितनी होगी स्पीड

RAPIDX भारत का सबसे तेज़ शहरी ट्रांजिट सिस्टम हैं। जो ब्रॉड गेज के रेलवे ट्रैक के लिए बनाई गई वंदे भारत ट्रेन की रफ्तार से मेल खाती है। वंदेभारत 180 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से चल सकती है। हालाँकि, RAPIDX की चलने की रफ्तार इससे कम होगी।

कहाँ से कब तक चलेगी ये ट्रेन

साहिबाबाद और दुहाई डिपो के बीच प्राथमिकता वाले इस सेक्शन में पाँच स्टेशन साहिबाबाद, गाजियाबाद, गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो हैं। NCRTC के मुताबिक, साहिबाबाद से दुहाई डिपो तक सफर करने के लिए यात्रियों को सुबह 6 बजे से ट्रेन मिलनी शुरू हो जाएगी। एक पूरे दिन ट्रेन चलने का वक्त सुबह 06:00 बजे से शुरू होकर रात 11:00 बजे तक रहेगा।

RAPIDX के स्टैंडर्ड क्लास और प्रीमियम क्लास कोच की किराया लिस्ट (फोटो साभार: news18.com)

क्या होगा RAPIDX का किराया

RAPIDX ट्रेन में दो तरह के कोच स्टैंडर्ड क्लास और प्रीमियम क्लास हैं। इन कोच में 90 सेमी से कम लंबाई वाले बच्चों को मुफ्त में सफर करने को मिलेगा। किराए की बात करें तो स्टैंडर्ड क्लास के यात्रियों को जहाँ कम दूरी के रूट के महज 20 रुपए तो प्रीमियम क्लास के यात्रियों को इसी के लिए 40 रुपए देने होंगे।

इसी तरह सेक्शन के पहले स्टेशन से लेकर यदि कोई यात्री आखिरी स्टेशन तक यात्रा कर रहा है तो इस समान रूट के स्टैंडर्ड क्लास के यात्रियों को 50 रुपए देने होंगे तो वहीं प्रीमियम क्लास के कोच में इस रूट के लिए 100 रुपए किराया देना होगा।

उदाहरण के लिए यदि आप साहिबाबाद से दुहाई डिपो तक जाते हैं तो स्टैंडर्ड क्लास में सफर करने पर आपको इसके 50 तो प्रीमियम क्लास के कोच में 100 रुपए देने होंगे। इस कॉरिडोर के उद्घाटन के दिन RAPIDX स्मार्ट कार्ड लॉन्च होने की उम्मीद जताई जा रही है।

कैसे ले सकेंगे टिकट

रैपिड एक्स ट्रेन के टिकट लेने के लिए आपको लाइन में लगने की भी जरूरत नहीं है क्योंकि इसके टिकट के लिए डिजिटल क्यूआर कोड आधारित टिकट यात्री सिस्टम बनाया गया है। इसका नाम ‘RAPIDX कनेक्ट’ है। ये एक मोबाइल एप्लिकेशन है। इसका इस्तेमाल कर आसानी से टिकट खरीदा जा सकता है।

इसके साथ ही पेपर क्यूआर कोड पर आधारित यात्रा टिकट भी लिए जा सकते हैं। इन्हें टिकट वेंडिंग मशीन (टीवीएम) के जरिए या फिर स्टेशनों पर टिकट काउंटरों से खरीद सकता है।

टीवीएम कार्ड नकद पेमेंट मोड के अलावा गैर-नकद भुगतान लेनदेन के लिए रुपे/मास्टर/वीज़ा मानक के मुताबिक क्रेडिट/डेबिट/प्रीपेड कार्ड रीडर से लैस हैं। इसके लिए एनसीआरटीसी ने साहिबाबाद और गाजियाबाद में 4-4 टीवीएम और गुलधर, दुहाई और दुहाई डिपो में 2-2 टीवीएम बनाए हैं।

रैपिडएक्स में नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) के जरिए या फिर एनसीएमसी के मुताबिक चलने वाले किसी भी कार्ड साथ यात्री सफर कर सकते हैं। दरअसल, एनसीएमसी यात्रियों को यात्रा, टोल टैक्स, खुदरा खरीदारी के साथ-साथ पैसे निकालने तक की सुविधा देता है। जहाँ भी एनसीएमसी की सुविधा होती हैं लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

रैपिड एक्स ट्रेन के लिए कोई भी व्यक्ति इन कार्ड्स को स्टेशन के टिकट काउंटर से खरीद सकता है। इस कार्ड को न्यूनतम 100 रुपए से अधिकतम 2000 रुपए तक रिचार्ज किया जा सकता है। एनसीएमसी एक ओपन-लूप कार्ड है जो ‘वन नेशन, वन कार्ड’ पहल का नतीजा है। इस वजह से ये कार्ड देश की सभी परिवहन प्रणालियों में चलता है।

कितना ले जा सकते हैं सामान

रैपिड एक्स ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के सामान के आकार और उसके वजन की सीमा भी तय की गई है। इसमें यात्रा करने वाले यात्रियों के सामान का वजन 25 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए। 25 किलो से अधिक का सामान लेकर चलने वाले यात्रियों को या तो सफर या सामान में से एक का चुनाव करना होगा। इसके साथ यात्रियों को 80 सेमी x 50 सेमी x 30 सेमी लंबाई-चौड़ाई वाला सामान ही ले जाने की इजाजत होगी।

अपना लिंग हाथ में लिए हुए पुरुष, 11000 साल पुरानी मूर्ति: तुर्की में हुई खोज के बाद पुरातत्व वैज्ञानिक भी हैरान

तुर्की में पुरातत्वविज्ञानियों को एक ऐसी मूर्ति मिली है, जिसमें एक पुरुष अपना लिंग पकड़ कर खड़ा दिख रहा है। बताया जा रहा है कि ये मूर्ति 11,000 वर्ष पुरानी है। इतिहासकारों ने कहा है कि इस मूर्ति से कृषि के विकास से पहले के काल को समझने में मदद मिलेगी। साथ में एक जंगली सूअर की मूर्ति भी मिली है। इसे एक अभूतपूर्व आर्कियोलॉजिकल खोज बताया जा रहा है। इससे उस समय के समाज को समझने में भी मदद मिलेगी। गोबेली टेपे और कराहन टेपे के आसपास के इलाकों में ये मूर्तियाँ मिलीं।

इन्हें दुनिया के सबसे बड़े टेम्पल परिसरों में से गिना जाता है। गोबेली टेपे महापाषाण काल के T आकार के स्तंभों के लिए विख्यात है। साथ ही यहाँ कई ऐसी मूर्तियाँ मिली हैं जिनमें काफी पेचीदा काम किया हुआ है। बताया जा रहा है कि अंतिम संस्कार के कार्यों में इनका इस्तेमाल किया जाता था। UNESCO ने भी इसे अंतरराष्ट्रीय धरोहर की मान्यता दी हुई है। प्रागैतिहासिक काल को समझने के लिए ये महत्वपूर्ण है। जंगली सूअर वाली आकृति को लाइमस्टोन से बनाया गया है।

गोबेली टेपे में में मिली ये मूर्ति 8700 BC से लेकर 8200 BC तक के बीच की है। जहाँ इसकी लंबाई 4.4 फ़ीट है, वहीं ऊँचाई 2.3 फ़ीट है। इसमें लाल, काला और सफ़ेद रंगों का इस्तेमाल किया गया है। इससे पता चलता है कि इसे पेण्ट भी किया गया था। वहीं इससे 22 मील की दूरी पर स्थित कराहन टेपे में पुरातत्वविदों को 7 फ़ीट लंबे एक पुरुष की मूर्ति मिली है। इसकी पसलियों, रीढ़ की हड्डी और और कंधों की बनावट स्पष्ट दिख रही है। इतिहासकारों का मानना है कि ये वहाँ स्थित इमारत से जुड़े किसी पूर्वज की मूर्ति हो सकती है।

इस मूर्ति की खासियत ये है कि ये व्यक्ति अपना लिंग अपने हाथ में पकड़ा हुआ दिख रहा है, जिसे इशारा मिलता है कि ये किसी समुदाय का प्रजनक रहा होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस इलाके में हर एक इमारत से जुड़ा कोई न कोई पूर्वज रहा होगा। इस व्यक्ति का चित्रण मृतक के रूप में किया गया होगा, ये कयास भी लगाए जा रहे हैं। कुछ ही दूर पर एक गिद्ध की मूर्ति भी मिली है। हालाँकि, इस पर और शोध और अध्ययन के बाद ही वैज्ञानिक अधिक जानकारी दे पाएँगे।

गोरखपुर के जिस दंगे के बाद गिरे थे योगी आदित्यनाथ के आँसू, 16 साल बाद उसके दोषी शमीम को सज़ा: भुगतेगा आजीवन कारावास, हिन्दू युवक की हत्या से शुरू हुई थी हिंसा

गोरखपुर की अदालत ने 2007 गोरखपुर दंगों के मुख्य आरोपित मोहम्मद शमीम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। शमीम को 16 साल बाद गिरफ्तार किया गया था। शमीम को 25 जनवरी, 2007 को मोहर्रम के जुलूस के दौरान राजकुमार अग्रहरि नाम के युवक की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया है, जिसके बाद उसे सजा सुनाई गई। इस बीच वो 15 साल तक फरारी भी काट चुका है। ये वही मामला है, जिसमें योगी आदित्यनाथ को जेल भी जाना पड़ा था।

जमानत मिलने के बाद फरार हो गया था शमीम

इस मामले में शमीम, उसके अब्बू शफीकउल्लाह को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन शमीम 16 अगस्त, 2007 को जमानत पा गया था और फरार हो गया था। इस मामले में उसके अब्बू शफीकउल्लाह को साल 2012 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, वो अब अपनी सजा काट रहा है। वहीं, शमीम फरार हो गया था और चेन्नई में पहचान छिपाकर रहता था। इस बीच, वो गोरखपुर शिफ्ट हो गया था, जिसके बाद मुखबिर की सूचना पर उसे 16 सितंबर, 2023 को पुलिस ने पूरे 15 साल बाद गिरफ्तार किया था। वो यहाँ भी पहचान छिपाकर किराए के घर में रहा था। इसके एक माह के बाद अब शमीम को कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

कोर्ट ने उम्रकैद के साथ ही लगाया अर्थदंड

इस मामले में गोरखपुर के अपर सत्र न्यायालय कोर्ट नंबर-छह में केस चल रहा था। न्यायाधीश पंकज कुमार श्रीवास्तव ने हत्या के मामले में उसे उम्रकैद की सजा के साथ ही 13,500 रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न चुका पाने की सूरत में उसे 13 माह अतिरिक्त सजा काटनी होगी। कोर्ट ने उसकी हत्या की संलिप्तता को माना और सभी साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए अपना फैसला सुनाया।

राजकुमार अग्रहरि की हत्या के बाद सुलगा था गोरखपुर

शमीम और उसके साथियों ने शादी समारोह से लौटते समय राजकुमार अग्रहरि नामक युवक को बुरी तरह से चाकुओ, तलवार से गोद डाला था, जिसकी दो दिन बाद अस्पताल में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पूरा गोरखपुर सुलग गया था। यही वो मामला है, जिसमें मुलायम सिंह यादव की सरकार में मौजूदा मुख्यमंत्री और तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ को भी आरोपित बनाया गया था, जिसमें उन्हें 11 दिन के लिए जेल भी जाना पड़ा था।

संसद में फूट-फूट कर रो पड़े थे योगी आदित्यनाथ

बता दें कि दंगों के बाद संसद सत्र में 12 मार्च 2007 को योगी आदित्यनाथ अपनी बात कहने के लिए खड़े हुए। संसद में खड़े होने के बाद वो फूट-फूटकर रोने लगे थे। साथी सांसदों ने उनके आँसू पोछे थे। इस मामले में उन्होंने बताया कि तत्कालीन राज्य सरकार ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया था। इस मामले में योगी आदित्यनाथ पर दंगे भड़काने के आरोप लगाए थे, लेकिन साल 2014 में वो सीडी फर्जी पाई गई, जिसमें योगी आदित्यनाथ के बयान को रिकॉर्ड करने का दावा किया गया था। इस मामले में 2017 में केस को बंद कर दिया गया था।

‘दोस्तिया कहियो खतम होगा, जब तक जीवित रहेंगे आपलोगों से संबंधे रहेगा’: BJP से ‘इश्किया का इशारा’ कर नीतीश कुमार ने खूब बटोरी ताली

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मंगलवार (19 अक्टूबर, 2023) को बिहार के पूर्वी चम्पारण स्थित ‘महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी’ (MGCUB) में पहुँचीं, जहाँ उन्होंने सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी के प्रथम दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और छात्र-छात्राओं को डिग्रियाँ प्रदान की। इस दौरान वहाँ बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्थानीय सांसद एवं भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राधामोहन सिंह भी मौजूद रहे। नीतीश कुमार ने छात्र-छात्राओं को कहा कि वो अपनी शिक्षा का इस्तेमाल राष्ट्रहित में करें।

उन्होंने याद दिलाया कि सबसे पहले 2007 में केंद्र सरकार ने बिहार में सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी की स्थापना का निर्णय लिया था और 2009 में इस संबंध में अधिनियम पास किया गया। उन्होंने याद दिलाया कि उस दौरान भी वो ही मुख्यमंत्री थे और कॉन्ग्रेस की केंद्र सरकार को उन्होंने स्पष्ट कहा था कि राष्ट्रीय स्तर पर सबसे पहले केंद्रीय विश्वविद्यालय चम्पारण में बने। उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रपति कहे जाने वाले महात्मा गाँधी यहाँ के लोगों द्वारा आग्रह किए जाने के बाद आए थे और बड़ा अभियान चलाया।

उन्होंने इस दौरान राष्ट्रपति से कहा कि अगले दौर में वो उन्हें बापू से जुड़े स्थलों को दिखाएँगे। इस दौरान उन्होंने ये याद भी दिलाया कि उन्होंने कई यात्राएँ यहीं से शुरू की थी। उन्होंने याद दिलाया कि देश की आज़ादी से 30 साल पहले महात्मा गाँधी ने यहीं से आंदोलन शुरू किया था। नीतीश कुमार बोले, “मेरा बतवे नहीं सुनता है। हम तो बार-बार कहते हैं कि बापू का जो चम्पारण से अभियान शुरू हुआ, उसे राष्ट्रीय स्तर पर महत्व दिया जाए। इसीलिए, हम सबकी इज्जत करते हैं। वोटवा जिसको देना है उ दे, जो करे। लेकिन जब तक जीवित रहेंगे, यहाँ का हम इज्जत करते रहेंगे।”

नीतीश कुमार बोले, “आप जानते है, उस समय वो (तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल) बतवा नहीं माना। हमको कह दिया कि साहब अभी यहाँ नहीं कर सकते हैं। हम सबको समझाए कि वहीं करिए, त बोले अच्छा-अच्छा। हमने कह दिया कि आप कौन चीज के नेता हैं कि बापू की सिखाई चीजों को भुला रहे हैं। आप गया कह रहे हैं तो 2 तय कीजिए, गया में भी बनाइए। त मेरा स्वीकार किया। 2014 में ये स्वीकृति हो गई और 2016 से काम शुरू हुआ। हमलोग 135 एकड़ दे दिए हैं, लेकिन आपको 300 एकड़ चाहिए। हम उतना दे देंगे। अधिकारियों से कह दिया है कि एक महीने में तत्काल कर दीजिए।”

उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि जल्द से जल्द MGCUB की नई इमारत बने और राज्य सरकार भी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी का नाम महात्मा गाँधी के नाम पर रखने का भी सुझाव उन्हीं का था। उन्होंने आग्रह किया कि तेज़ी से निर्माण कार्य हो, सारी मदद की जाएगी। उन्होंने 3 दिन के भीतर मुख्य सचिव से रिपोर्ट लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि आने-जाने के रास्ते से लेकर एक-एक चीज बनवा दी जाएगी। उन्होंने रहने के लिए हॉस्टल की व्यवस्था की भी बात कही।

इसी दौरान उन्होंने मंच पर उपस्थित लोगों की तरफ इशारा करते हुए कहा, “जितने लोग हमारे हैं, सब साथी हैं। छोड़िए न भाई, हम अलग हैं और आप अलग हैं। हमरा त दोस्तिया कहियो ख़तम होगा? जब तक हम जीवित रहेंगे, आपलोगों के साथ मेरा संबंधें रहेगा। चिंता मत कीजिए।” ऊपर संलग्न किए गए वीडियो में आप 40 मिनट के बाद नीतीश कुमार का भाषण सुन सकते हैं। इसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार फिर से भाजपा के साथ किसी न किसी बहाने से नजदीकियाँ बढ़ाने की जुगत में लगे हैं।

फिलिस्तीन के समर्थन में खुलेआम उतरे पाकिस्तानी क्रिकेटर्स, शेयर किया झंडा; मोहम्मद रिजवान ने गाजा को समर्पित किया था शतक

पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के कई खिलाड़ियों ने इजरायल के खिलाफ ट्वीट किए हैं। इन ट्वीटों में उन्होंने फिलिस्तीनियों के समर्थन में आवाज उठाई है। विकेट कीपर बल्लेबाज मोहम्मद रिजवान ने अपने शतक को गाजा के लोगों को समर्पित किया था। उन्होंने ट्वीट किया, “यह शतक गाजा के मेरे भाइयों और बहनों के लिए है।” इसके बाद अब पिछले कुछ घंटों में लगभग सभी पाकिस्तानी खिलाड़ियों (कुछ को छोड़कर) ने फिलिस्तीन के समर्थन में फिलिस्तीन झंडे के साथ पोस्ट किया है।

फिलिस्तीन के समर्थन में उतरे पाकिस्तानी खिलाड़ी

इजरायल का विरोध करने और फिलिस्तीन का समर्थन करने के लिए पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने बुधवार (18 अक्टूबर, 2023) की रात का समय चुना, ताकि अधिक से अधिक लोगों में फिलिस्तीन को लेकर चल रहे ट्रेंड को आगे बढ़ाया जा सके। एक दो नहीं, बल्कि कई खिलाड़ियों ने फिलिस्तीन के समर्थन में पोस्ट किए। कई ने फिलिस्तीन के फोटो का इस्तेमाल किया, तो फहीम अशरफ ने फिलिस्तीन के झंडे वाली इमोजी का। उन्होंने हैशटैग का भी इस्तेमाल किया, जिसमें फिलिस्तीन के समर्थन की बात कही गई थी।

पाकिस्तानी खिलाड़ियों के एक्स पोस्ट का स्क्रीनशॉट

बता दें कि पाकिस्तान ने कुछ दिन पहले भी श्रीलंका को रिकॉर्ड रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए हराया था। उस मैच में पाकिस्तानी खिलाड़ी रिजवान ने शतक लगाया था। उस शतक और जीत के बाद उन्होंने प्रेजेंटेशन सेरेमनी में अपने शतक को गाजा के आतंकियों को समर्पित किया था। उस मैच में रिजवान को एक और बात के लिए लंबे समय तक याद किया जाएगा, कि उन्होंने मैदान में खिंचाव होने और चोट लगने का कई बार झूठा नाटक किया। इसका खुलासा भी उन्होंने खुद ही बातचीत में किया था।

हमास के हमले में जा चुकी है करीब 1400 इजरायलियों की जान

गौरतलब है कि हमास के हमलों में इजरायल के करीब 1400 लोगों की मौत हुई है। वहीं 3000 से ज्यादा घायल हैं। हमास ने इस हमले में करीब 250 इजरायली नागरिकों को बंधक भी बना लिया था। इजरायली बंधकों को छुड़ाने और हमास को मिटाने के लिए गाजा की घेराबंदी कर दी गई है। इजरायल के जवाबी कार्रवाई में करीब तीन हजार आतंकी मारे गए हैं। इजरायल वार टीम ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करके बताया है कि इजरायल को टारगेट कर हमास के दागे रॉकेट में से 30 से 40% मिसफायर होकर गाजा पट्टी में ही गिरे हैं।

‘हमें मत पढ़ाओ सेक्युलरिज्म, ये देश हिन्दुओं का है और रहेगा’: छत्तीसगढ़ में गरजे CM सरमा, बोले – राम मंदिर तोड़ कर बाबरी मस्जिद बनाना सेक्युलरिज्म नहीं

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने एक संबोधन के दौरान कहा कि हम हिन्दू हैं, हमें सेक्युलरिज्म का पाठ मत पढ़ाइए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ये देश हिन्दुओं का देश है और ये देश हिन्दुओं की तरफ रहेगा। उन्होंने कहा, “ये सेक्युलरिज्म की भाषा हमें मत सिखाओ। हमें आपसे सेक्युलरिज्म की भाषा नहीं सीखनी है। हमलोग ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ को मानते हैं, ये सिद्धांत विश्व को हमने दिया है। सेक्युलरिज्म का अर्थ ये नहीं है कि कोई राम मंदिर को तोड़ कर बाबर के नाम पर मस्जिद बनाएगा।”

असम के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि इसे सेक्युलरिज्म नहीं कहा जाता। उन्होंने ये बातें छत्तीसगढ़ में एक चुनावी जनसभा के दौरान कही। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छत्तीसगढ़ को दिल से प्यार करते हैं, इसके लिए हमें किसी सबूत की ज़रूरत नहीं है। वहाँ मौजूद जनता से उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी विजयी ने ये प्रदेश आपके लिए बनाया था। उन्होंने ये भी कहा कि भाजपा के लिए इस प्रदेश का सम्मान माँ-बेटे का है।

वहाँ मौजूद जनसभा से असम के सीएम ने कहा कि आपलोग माँ हैं और भाजपा आपका बेटा है। उन्होंने कहा कि ऐसे ही हम आगे बढ़ेंगे और ऐसा ही हमारा संकल्प है। बता दें कि हाल ही में असम के मुख्यमंत्री ने NCP के संस्थापक शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले को लेकर इजरायल-हमास युद्ध के परिप्रेक्ष्य में बयान दिया था। हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि शरद पवार अपनी बेटी को हमास की तरफ से लड़ने के लिए गाजा भेजेंगे।

उन्होंने शरद पवार के उस बयान का विरोध करते हुए ये कहा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूरी जमीन फिलिस्तीन की है और इजरायल ने उस पर कब्ज़ा कर लिया है। उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी फिलिस्तीन के साथ है। हालाँकि, उनकी पार्टी का एक बड़ा धड़ा अलग हो चुका है और भाजपा के साथ महाराष्ट्र की सरकार में शामिल है। सीएम सरमा के बयान पर अब सुप्रिया सुले ने कहा है कि दोनों का DNA एक ही है क्योंकि पहले वो दोनों ही कॉन्ग्रेस में थे।

हमास के आतंकी पीट रहे थे सेफ हाउस का दरवाजा, बचाव में घंटों डटी रहीं केरल की नर्सें: बताया उस दिन क्या हुआ, भारतीय महिलाओं की बहादुरी के कायल हुए इजरायली

इजरायल हमास के युद्ध के बीच बर्बरता और हैवानियत के अनगिनत किस्से हैं तो इंसानियत और बहादुरी की मिसाल पेश करते हुए लोग भी हैं। भारत के केरल की दो नर्सों सबिता और मीरा मोहन की ऐसी ही बहादुरी और इंसानियत के इजरायली कायल हो गए हैं।

ये दोनों नर्स शनिवार (7 अक्टूबर, 2023) को हमास के हमले से बुजुर्गों को बचाने के लिए डटीं रही थीं। भारत में इजरायली दूतावास ने इन दोनों नर्सों की बहादुरी को धन्यवाद देने के लिए का एक वीडियो अपने एक्स हैंडल पोस्ट किया है। इसमें इन दोनों को इंडियन सुपरविमेन कहा गया है।

“भारतीय वीरांगनाएँ! मूलतः केरला की रहने वाली सबिता जी, जो अभी इजराइल में सेवारत हैं, बता रही हैं कि कैसे इन्होंने और मीरा मोहन जी ने मिलकर इजरायली नागरिकों की जान बचाई। हमास आतंकवादी हमले के दौरान इन वीरांगनाओं ने सेफ हाउस के दरवाजे को खुलने ही नहीं दिया,क्योंकि आतंकवादी अंदर आ कर नागरिकों को मारना चाहते थे।”

इस वीडियो में नर्स सबिता 7 अक्टूबर के हमले के बारे में बताती हैं, “मैं किबुत्ज की सीमा पर 3 साल से काम कर रही हूँ। हम यहाँ दो लोग केयर गिवर का काम करते हैं और एक बुजुर्ग महिला राहिल की देखभाल करते हैं। जो दिमागी बीमारी (ALS) से जूझ रही हैं। उस दिन मेरी रात की ड्यूटी थी और मैं इसे खत्म कर जाने ही वाली थी। 6.30 पर हमने सायरन सुना हम सेफ्टी रूम की तरफ भागे। सायरन नॉन स्टॉप बज रहा था।”

उन्होंने आगे बताया, अचानक बुजुर्ग महिला की बेटी ने कॉल किया और उसने कहा कि हालात हमारे काबू से बाहर हैं। हम को समझ नहीं आया कि हमें क्या करना चाहिए। हमने सामने और पीछे का दरवाजा लॉक कर दिया, लेकिन इसके कुछ ही मिनट बाद हमें आतंकवादियों के गोलीबारी करते हुए हमारे घर में आने की आवाजें सुनाई देने लगी। वो घर के शीशे तोड़ रहे थे।”

हमास के हमले के बारे में सबिता कहती हैं, “हमने बुजुर्ग महिला की बेटी को फिर से कॉल किया और उनसे पूछा कि अब हम क्या करें। फिर से उन्होंने कहा कि आप सेफ हाउस का दरवाजा पकड़े रहो कहीं मत जाओ चीजें हमारे काबू से बाहर हैं। हमें कुछ समझ नहीं आया। हम अपने स्लीपर छोड़ कर भागे और मजबूती से सेफहाउस के दरवाजे की कुंडी पकड़े हम आधे घंटे तक दरवाजे पर लटके रहे।”

उन्होंने आगे कहा, “आतंकी भी लगभग 7.30 तक बने रहे और लगातार सेफ हाउस का दरवाजा खोलने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन हमने पूरी कोशिश से अंदर से दरवाजे पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी। उन्होंने दरवाजे पर मारा, गोली दागी, उन्होंने सब बर्बाद कर दिया। हम नहीं जानते थे कि वहाँ क्या हो रहा है। लगभग 1 बजे हमने फिर से गोलियों की आवाज सुनी।”

नर्स सबिता ने आगे बताया, “बुजुर्ग महिला के पति शिमोलिक ने हमें बताया कि ये इजरायल की आर्मी है जो हमें बचाने आई है। वो सेफहाउस से घर की हालत देखने के लिए बाहर निकले। घर पूरा नष्ट कर दिया गया था वो सब लूटकर ले गए थे। हमारे पास कुछ नहीं था। वो मीरा का पासपोर्ट भी लूट कर ले गए। मेरा इमरजेंसी बैग भी लेकर चले गए।”

वो आगे बोलीं,”बॉर्डर पर होने की वजह से हम किसी इमरजेंसी के लिए अपने साथ अपने दस्तावेज भी लेकर चलते हैं, लेकिन ऐसा आतंकी हमला पहले कभी नहीं हुआ और न ही इसकी आशंका थी, लेकिन बॉर्डर होने की वजह से हमें पता था कि मिसाइल कभी भी गिर सकती हैं, इसलिए ऐसा होने की आशंका में हम सेफ्टी रूम में चले जाते और जब ये सब खत्म होता है तो अपने इमरजेंसी बैग को भी सेफ्टी रूम में लेकर वहाँ रख देते है, लेकिन उस दिन हमें ऐसा कुछ करने का मौका ही नहीं मिल सका।”

राहुल गाँधी की ‘नूरी’ के खिलाफ कोर्ट पहुँचा मुस्लिम नेता, कहा – यह नाम इस्लाम का अपमान: कॉन्ग्रेस नेता ने अपनी माँ को गिफ्ट की थी फीमेल डॉगी

कॉन्ग्रेस के नेता राहुल गाँधी ने अपनी माँ सोनिया गाँधी को एक फीमेल पप्पी गिफ्ट किया था। उसका नाम राहुल गाँधी ने ‘नूरी’ बताया। उनके द्वारा इस तरह से नाम रखने के बाद कई मुस्लिमों ने नाराज़गी भी जताई थी। ये मामला अब कोर्ट में भी पहुँच गया है, जिसमें प्रयागराज में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के प्रदेश प्रवक्ता ने शिकायत की है कि राहुल गाँधी ने उनकी मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाया है।

इस्लाम-कुरान से जुड़ा है ‘नूरी’ शब्द

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोहम्मद फरहान के वकील ने कहा, “ये ‘नूरी’ शब्द इस्लाम से जुड़ा है और इस्लाम मजहब में पैगंबर मुहम्मद साहब से संबंध रखता है। ‘नूरी’ शब्द का जिक्र कुरान की आयत में भी है और कई मुस्लिम बच्चियों के नाम भी ‘नूरी’ हैं।” AIMIM के प्रदेश प्रवक्ता मोहम्मद फरहान के मुताबिक, राहुल गाँधी को माफी माँगने के लिए कहा गया, लेकिन अब तक माफी नहीं माँगी गई। वकील ने ये भी कहा कि, “पिल्ली का नाम बदला जाना चाहिए क्योंकि बच्चियों, बुजुर्गों और खासकर हमारे पैगंबर साहब की तौहीन की गई है।”

मजहबी भावनाओं को ठेस पहुँचाने का मामला दर्ज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरहान के वकील मोहम्मद अली ने बताया है कि ये याचिका आईपीसी की धारा 295A (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना) में FIR दर्ज कराने के लिए दाखिल गई है, जिसे सोमवार (16 अक्टूबर, 2023) को दाखिल किया गया। कोर्ट से जुड़े सूत्रों ने याचिका मिलने की पुष्टि की है। वकील ने कहा कि AIMIM नेता को कुत्ते के नाम के बारे में समाचार पत्रों, राहुल के फेसबुक पेज और यूट्यूब चैनल से पता चला। अब कोर्ट ने फरहान को अपना बयान दर्ज कराने के लिए 8 नवंबर को बुलाया है।

गोवा से ‘नूरी’ को लाकर सोनिया गाँधी को दिया था गिफ्ट

बता दें कि कुछ दिनों पहले ही राहुल गाँधी गोवा से वापस लौटते समय अपनी माँ सोनिया गाँधी के लिए एक खास तोहफा लेकर आए थे। वो तोहफा फीमेल डॉगी ‘नूरी’ थी। अब अब यही ‘नूरी’ उनके लिए मुसीबत बढ़ाने का काम कर रही है। ‘नूरी’ मशहूर जैक रसेल टेरियर ब्रीड की है। इससे पहले भी AIMIM नेता ने राहुल गाँधी की इस प्रकरण को लेकर निंदा की थी।

‘कोई गॉड नहीं’: AltNews का सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा अपने साथी मोहम्मद ज़ुबैर के ही फॉलोवर्स से ही सुन रहा गाली, सब कह रहे – सिर्फ अल्लाह ही है गॉड

‘ऑल्टन्यूज’ नाम की एक लेफ्टिस्ट-इस्लामी फेकन्यूज वेबसाइट है, जिसका काम है प्रोपेगंडा का प्रसार करना। इसके दो मुख्य सह-संस्थापकों के नाम प्रतीक सिन्हा और मोहम्मद जुबैर हैं। ये खुद को फैक्ट चेकर बताते हैं, इसमें से प्रतीक का दावा है कि वो नास्तिक है, वहीं जुबैर नाम का शातिर प्रोपेगेंडाबाज कई बार इस्लामी फेक न्यूज फैलाता पकड़ा गया है। इस बीच, प्रतीक सिन्हा ने एक्स पर ‘कोई गॉड नहीं’ लिखा, तो जुबैर की गैंग के लोगों ने उसे इस्लाम का पाठ पढ़ा डाला और बताया कि ‘तू नास्तिकों जैसी बातें मत फैला, अल्लाह ही इकलौता ‘गॉड’ है, तू भी इस बात को समझ जाएगा’।

दरअसल, प्रतीक सिन्हा ने हमास के प्रोपेगेंडा को ही आगे बढ़ाने की कोशिश में लिखा था ‘There is No God’, और उसके साथ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति के बारे में भी लिखा था, लेकिन ‘नो गॉड’ के बाद शायद जुबैर की गैंग के साथियों को कुछ दिखा ही नहीं। वो बस टूट पड़े। मोहम्मद जुबैर के अनुयायियों ने उन पर गलत सूचना देने का आरोप लगाया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। मामला बुधवार (18 अक्टूबर, 2023) को उस समय शुरू हुआ, जब प्रतीक सिन्हा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में दावा किया कि ‘कोई भगवान नहीं है’।

प्रतीक सिन्हा का दावा कर गया बैकफायर

प्रतीक सिन्हा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “रिमाइंडर: कोई गॉड नहीं है। धर्म एक बनाई गई चीज़ है। इंसान दूसरे इंसानों पर कितना अत्याचार कर रहा है, इसका हिसाब-किताब रखने वाला कोई नहीं है। कौन अच्छा है और कौन बुरा, इसका हिसाब-किताब कोई नहीं रख रहा। अमेरिका के राष्ट्रपति, जिन्होंने ऐतिहासिक रूप से दुनिया भर में निर्दोष नागरिकों की सबसे अधिक हत्याएँ की हैं, बहुत लंबा जीवन जीते हैं। डब्लूएमडी (Weapons of Mass Destruction) का इतिहास गढ़ने वाले वाले जॉर्ज बुश की उम्र 77 साल है और वो हजारों लोगों को मारने का आदेश देने के बावजूद एकदम स्वस्थ और मस्त जिंदगी जी रहे हैं।”

प्रतीक सिन्हा के एक्स पोस्ट का स्क्रीनशॉट

प्रतीक सिन्हा के इस पोस्ट के बाद इस्लामी प्रोपेगेंडावादी और फेक न्यूज की फैक्ट्री मोहम्मद जुबैर के साथी उस पर टूट पड़े। एक एक्स यूजर मुकर्रम ने लिखा कि प्रतीक सिन्हा फैक्ट-चेकिंग के नाम पर नास्तिकता फैला रहा है। इन सभी ट्विटर हैंडल्स की खास बात ये है या तो ये जुबैर को फॉलो करते हैं, या फिर जुबैर भी इन्हें फॉलो करता है।

जुबैर पर नास्तिकता फैलाने के आरोप

अजहर मलिक ने तो सीधे-सीधे प्रतीक सिन्हा के पेट पर ही लात मारने की अपील कर दी। खास बात ये है कि जब-जब हिंदुओं के खिलाफ जुबैर काम करता है, और इस्लामी प्रोपेगेंडा फैलाता है, तब-तब ‘ऑल्टन्यूज’ को मिलने वाला डोनेशन कई गुना बढ़ जाता है।

डोनेशन रोकने की अपील करता अजहर मलिक

‘एक्स’ यूजर scapereality47 ने सवाल किया कि क्या प्रतीक सिन्हा सोशल मीडिया पर गाली खाने के मूड में है?

एक अन्य एक्स यूजर सरफराज अहमद ने लिखा, “यह आपकी राय है, लेकिन हम सिर्फ एक ही ‘गॉड’ को मानते हैं। मुझे लगता है कि जब आप चंगेज़ खान आदि की क्रूरता का इतिहास पढ़ेंगे तो आप भी इसे स्वीकार कर लेंगे। एक समय दुनिया में उसका खौफ था, लेकिन अब क्या? कोई नहीं जानता कि उसकी कब्र कहाँ है, इसलिए हर क्रूर व्यक्ति बाद में भुला दिया जाएगा।” सरफराज जुबैर के साथ ही असदुद्दीन ओवैसी का भी फॉलोवर है।

सरफराज के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

‘अल्लाह के फरिश्ते रखते हैं सारा हिसाब-किताब, जुबैर से करो संपर्क’

एक अन्य एक्स यूजर अबू मोइन ने कहा , “रिमाइंडर: अल्लाह एक है और इकलौता बनाने वाला और पालने वाला है। इस्लाम को छोड़कर सभी धर्म मानव निर्मित हैं, जिसे अल्लाह के दूत ने बनाया। अल्लाह के बंदे (फ़रिश्ते) हैं जो हर काम का हिसाब रखते हैं।” इस मामले में उसने आगे लिखा कि इंसानी व्यवस्था बुश, नेतन्याहू और मैक्रौं को दंड देने में अक्षम है, इसीलिए मानवता को न्याय दिलाने के लिए ही इस्लाम की जरूरत है। इस बारे में और ज्यादा जानकारी चाहिए, तो अपने साथी और हमारे भाई जुबैर से संपर्क कर लो।

जुबैर से संपर्क करने की सलाह देता अनु मोईन

बता दें कि मोहम्मद जुबैर कई बार न सिर्फ फेक न्यूज फैलाता पकड़ा गया है, बल्कि वो इस्लामी प्रोपेगेंडा को भी आगे बढ़ाता देखा जा चुका है। वो फैक्ट चेक की आड़ में कई लोगों की ‘ऑनलाइन लिंचिंग’ भी करा चुके हैं, जिसमें नुपूर शर्मा भी एक हैं। नूपुर शर्मा के खिलाफ उसने एडिटेड वीडियो शेयर किया था, जिसके बाद कन्हैया लाल और उमेश कोल्हे हत्याकांड हुआ। वहीं, अलीगढ़ के मामले में जब जुबैर पर केस दर्ज हुआ, तो प्रतीक सिन्हा उसके बचाव में उतर आया था। प्रतीक ने सोशल मीडिया पर ऐलान किया था कि ऑल्टन्यूज़ जुबैर के साथ खड़ा है।

‘दो मिनट के मजे’ की जगह ‘सेक्स की इच्छा’ पर कंट्रोल रखे लड़कियाँ: कलकत्ता हाई कोर्ट, लड़कों को भी नसीहत; नाबालिग से रेप में किया रिहा

कलकत्ता हाई कोर्ट ने कम उम्र में यौन संबंधों को लेकर किशोरों को नसीहत दी है। कहा है कि किशोर लड़कियों को यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखना चाहिए। दो मिनट के सुख के लिए सेक्स से बचना चाहिए। वहीं लड़कों से महिलाओं की गरिमा का सम्मान करने को कहा है।

हाई कोर्ट के जस्टिस चित्तरंजन दास और पार्थ सारथी सेन ने 18 अक्टूबर 2023 को नाबालिग से रेप के दोषी एक युवक को बरी करते यह यह टिप्पणी की। युवक को जिससे रेप का दोषी ठहराया गया था, उससे उसके ‘रोमांटिक सम्बन्ध’ रहे थे।

इस दौरान अदालत ने किशोरों को सेक्स की शिक्षा देने पर भी जोर दिया। कहा कि इसकी शुरुआत घर से होनी चाहिए। माता-पिता पहले शिक्षक होने चाहिए। बच्चों, खासकर लड़कियों को बैड टच, अश्लील इशारों के बारे में बताना आवश्यक है। कम उम्र में सेक्स से स्वास्थ्य और बच्चे पैदा करने की क्षमता पर पड़ने वाले दुष्परिणामों के बारे में बताया जाना चाहिए।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, हाई कोर्ट ने इस तरह के मामलों में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम (POCSO) के इस्तेमाल पर भी चिंता व्यक्त की। 16 साल से अधिक उम्र के किशोरों के बीच सहमति से सेक्स की स्थिति में इसे अपराध की श्रेणी से हटाने का सुझाव दिया।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में यह भी कहा, “हमें कभी यह नहीं सोचना चाहिए कि केवल एक लड़की ही दुर्व्यवहार का शिकार होती है। क्योंकि लड़के भी दुर्व्यवहार का शिकार होते हैं। माता-पिता के मार्गदर्शन के अलावा, इन पहलुओं और रिप्रोडक्टिव हेल्थ और हाइजीन पर जोर देने वाली यौन शिक्षा हर स्कूल के पाठ्यक्रम का हिस्सा होनी चाहिए।”

कोर्ट ने बताया यौन इच्छाओं के जागृत होने का कारण

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा, “प्रमुख एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन है, जो मुख्य रूप से पुरुषों में वृषण (Testicle) और महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) से और पुरुषों और महिलाओं दोनों में अधिवृक्क ग्रंथियों (Adrenal Glands) से थोड़ी मात्रा में स्रावित होता है। हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्लैंड्स टेस्टोस्टेरोन की मात्रा को नियंत्रित करते हैं, जो मुख्य रूप से (पुरुषों में) सेक्स या कामेच्छा के लिए जिम्मेदार होता है।

इसका अस्तित्व शरीर में है, इसलिए जब संबंधित ग्रंथि उत्तेजना से सक्रिय हो जाती है, तो यौन इच्छा जागृत होती है। लेकिन संबंधित जिम्मेदार ग्रंथि का सक्रिय होना स्वचालित नहीं है। क्योंकि इसे हमारी दृष्टि, श्रवण, कामुक सामग्री पढ़ने और विपरीत लिंग के साथ बातचीत से उत्तेजना की आवश्यकता होती है। यौन इच्छा हमारी अपनी क्रियाओं से जागृत होता है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में आगे यह भी कहा, “किशोरों में सेक्स सामान्य है लेकिन यौन इच्छा या ऐसी इच्छा की उत्तेजना व्यक्ति, शायद पुरुष या महिला, के कुछ कार्यों पर निर्भर होती है। इसलिए, यौन इच्छा बिल्कुल भी सामान्य और आदर्श नहीं है। अगर हम कुछ क्रियाएँ  बंद कर देते हैं, तो यौन इच्छा की उत्तेजना सामान्य नहीं रह जाती, जैसा कि हमारी चर्चा में वकालत की गई है।” इसलिए, पीठ ने इस मुद्दे पर ‘कर्तव्य/दायित्व आधारित दृष्टिकोण’ का प्रस्ताव रखा और किशोर महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए कुछ कर्तव्यों का सुझाव दिया। 

महिलाओं के लिए हाई कोर्ट के सुझाव 

यह प्रत्येक महिला का कर्तव्य/दायित्व है:

  1. वे अपने शरीर की रक्षा करें।
  2. अपनी गरिमा और आत्म-सम्मान की रक्षा करें।
  3. लैंगिक बाधाओं को परे रख अपने सम्पूर्ण विकास के लिए प्रयास करें।
  4. यौन इच्छाओं पर नियंत्रण रखें, क्योंकि समाज की नजरों में वे तब हार जाती हैं, जब मुश्किल से दो मिनट के यौन सुख का आनंद लेने के लिए तैयार हो जाती हैं।
  5. अपने शरीर की सीमाओं और उसकी निजता के अधिकार की रक्षा करें।

किशोर लड़कों के लिए हाई कोर्ट के सुझाव 

वहीं किशोर पुरुषों के हाई कोर्ट ने कहा, ”किसी युवा लड़की या महिला के उपरोक्त कर्तव्यों का सम्मान करना एक किशोर पुरुष का कर्तव्य है और उसे अपने दिमाग को एक महिला, उसकी मूल्यों, उसकी गरिमा, गोपनीयता और उसकी शारीरिक सीमाओं का सम्मान करना चाहिए।”