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‘दूसरे लोगों को भी टाइप-7 बंगला आवंटित किया गया है, लेकिन मेरा छिन लिया गया’: कोर्ट के निर्णय पर AAP सांसद राघव चड्ढा ने रोया दुखड़ा

आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद राघव चड्ढा को दिल्ली में आवंटित टाइप-7 का सरकारी बंगला खाली करना पड़ा सकता है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने शुक्रवार (6 अक्टूबर) अपने पुराने आदेश को वापस ले लिया है। इस आदेश में राज्यसभा सचिवालय को कहा गया था कि राघव चड्ढा से बंगला खाली न करवाया जाए। मार्च में सचिवालय ने चड्ढा को बंगला खाली करने का नोटिस दिया था।

दरअसल, कोर्ट ने इस साल अप्रैल में उन्हें इस सरकारी आवास से बेदखल किए जाने पर रोक लगा दी थी। इस रोक को एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज सुधांशु कौशिक ने गुरुवार (6 अक्टूबर 2023) को हटा लिया। अदालत ने कहा कि राघव चड्ढा को आवंटित आवास एक विशेषाधिकार मात्र है, जो उन्हें एक सांसद के रूप में दिया गया है। इस पर वे कब्जे के अधिकार का दावा नहीं कर सकते। 

इस मामले में चड्ढा ने अजीबो-गरीब तर्क दिया है। AAP सांसद ने कहा, “मेरे कई पड़ोसी पहली बार सांसद बने हैं, जिनमें श्री सुधांशु त्रिवेदी, श्री दानिश अली, श्री राकेश सिन्हा और सुश्री रूपा गांगुली शामिल हैं। इन्हें भी इनकी पात्रता से ऊपर वाले आवास आवंटित है। मुझे भी इनके समकक्ष का ही आवास आवंटित किया गया।”

दरअसल, राज्यसभा सचिवालय का कहना है कि पहली बार सांसद बने राघव चड्ढा को टाइप-6 बंगला आवंटित करने का अधिकार है। टाइप-7 बंगला उन सदस्यों को है, जो पहले केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री या लोकसभा अध्यक्ष रह चुके हैं।

उधर, पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का कहना है कि राज्यसभा सचिवालय नियमों को ताक पर रखकर ये कार्रवाई की है। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये सब भाजपा के आदेश पर राजनीतिक उद्देश्यों और निजी स्वार्थों के लिए किया गया है, ताकि आम आदमी पार्टी की आवाज को दबाई जा सके।

राघव चड्ढा ने कहा कि यह बंगला नियमानुसार उन्हें आवंटित किया गया था और इसे बिना किसी सूचना के रद्द किया गया है। यह राज्यसभा सचिवालय का मनमाना रवैया है। उन्होंने कहा कि वे वे वर्तमान में राज्यसभा के सदस्य हैं और उनका कार्यकाल अभी 4 साल बाकी है। उन्होंने कहा कि इस तरह से आवास छिनना 70 से अधिक वर्षों के इतिहास की अप्रत्याशित घटना है।

दरअसल, राघव चड्ढा को 6 जुलाई 2022 को राज्यसभा सांसद के रूप में पंडारा पार्क में टाइप-6 बंगला आवंटित किया गया था। इसके बाद उन्होंने 29 अगस्त 2022 को राज्यसभा के सभापति से अनुरोध किया कि उन्हें टाइप-7 बंगला दी जाए। इसके बाद उन्हें राज्यसभा पूल से पंडारा रोड पर एक और बंगला आवंटित किया गया था।

इस साल 3 मार्च को राज्यसभा सचिवालय ने इस आवंटन को रद्द कर दिया। आवंटन रद्द करने के आदेश के खिलाफ राघव चड्ढा कोर्ट पहुँच गए। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में चड्ढा के आवास आवंटन को निलंबित करने पर रोक लगा दी। इसके बाद अब अपने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए कोर्ट ने आवास को खाली करने का आदेश दे दिया।

बंगला खाली कराने पर हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री परिणिति चोपड़ा से शादी करने वाले आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने हर्जाने की माँग की है। उन्होंने कहा कि बिना नोटिस दिए बंगला खाली कराने से उन्हें मानसिक पीड़ा हुई है। इसलिए उन्होंने राज्यसभा सचिवालय से 5.5 लाख रुपए हर्जाने की भी माँग की है।

UP में जमीन से जुड़ा कोई भी लफड़ा-विवाद 90 दिन में सुलटाओ: योगी सरकार का आदेश, जो ऑफिसर करेंगे देरी, उन पर गिरेगी गाज

देवरिया नरसंहार के बाद भूमि विवाद के मामलों को लेकर योगी सरकार एक्शन मोड में है। यूपी शासन 60 दिनों का विशेष अभियान संचालित करने जा रहा है, जिसमें जमीनी मामलों को लेकर लम्बे समय से लंबित केसों का निस्तारण किया जाएगा।

लंबित जमीनी मामलों के समाधान के इस अभियान में IGRS, समाधान दिवस व जनसुनवाई से जुड़े तमाम प्रार्थना पत्रों की जाँच व उस पर अब तक हुई कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी। ऐसे मामलों को निस्तारित करने की अधिकतम समय सीमा 3 माह तय की गई है। यह आदेश गुरुवार (5 सितंबर 2023) को जारी किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने उत्तर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DM) और पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीटिंग की। इस मीटिंग में उन्होंने संबंधित जिलों में लंबित जमीनी मामलों को प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए।

प्रमुख सचिव ने सभी अधिकारियों को जिला स्तर पर 60 दिवसीय अभियान चला कर भूमि संबंधित लंबित तमाम मामलों की समीक्षा करके उनके निबटारे का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि जमीन विवाद के निबटारे में जिस भी स्तर पर देरी होगी, उसके लिए संबंधित अधिकारी को जिम्मेदार मान कर कार्रवाई की जाएगी।

प्रमुख सचिव की मीटिंग में जमीन से जुड़े मामलों को निस्तारित करने की अधिकतम समय सीमा 90 दिन तय हुई। इसमें निर्विवाद वरासत व उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में 45 दिनों के अंदर समाधान करने को कहा गया। इसके अलावा नामांतरण के विवादित मामलों के समाधान की अधिकतम समय सीमा 90 दिन रखी गई है।

इन सभी के अतिरिक्त जोत के बँटवारे से जुड़े लंबित केसों को छह महीने के अंदर ही निस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस अवधि में मामलों का निबटारा न कर पाने वाले अधिकारियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शासन का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी गरीब या व्यापारी आदि की जमीन पर कोई भी अन्य व्यक्ति कब्ज़ा न जमा पाए।

इस मीटिंग में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वो अपने जिले में अभी न्यायालयों व आइजीआरएस प्रकरणों में हुई कार्रवाई की समीक्षा हर दिन खुद ही करें। राजस्व से जुड़े मामलों को हफ्ते में 5 दिनों तक देखने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए हैं।

पुलिस बल को भी पैमाइश में हर प्रकार का सहयोग करने का आदेश दिया गया। सभी कमिश्नरों को अपने क्षेत्र में राजस्व संबंधी मामलों के निस्तारण की मॉनिटरिंग सोमवार और गुरुवार को करने के लिए कहा गया है। खुद मुख्य सचिव हफ्ते में हर मंगलवार को प्रदेश में राजस्व संबंधी वादों के निस्तारण की समीक्षा करेंगे।

कश्मीर-अरुणाचल भारत का हिस्सा नहीं, किसान आंदोलन में पैसे झोंक देश को अस्थिर करना, चीनी कंपनियों का बचाव: न्यूजक्लिक FIR में सब कुछ

चीन से फंड लेकर देश में अराजकता को बढ़ावा देने वालों का साथ देने वाले न्यूज पोर्टल न्यूजक्लिक को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पोर्टल के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ पर दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि संस्थान ने कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को विवादित बताया। इसके अलावा, कोरोना के खिलाफ भारत के प्रयासों को बदनाम करने की कोशिश और किसान आंदोलन को फंडिंग भी की गई। इस मामले में

दिल्ली पुलिस ने न्यूज़क्लिक पोर्टल के खिलाफ आतंकवाद विरोधी कानून UAPA के तहत FIR दर्ज की है। इसमें कहा गया है कि संस्थान के धन का एक बड़ा हिस्सा भारत की संप्रभुता को बाधित करने और बड़ी आपराधिक साजिश के हिस्से के तहत देश में असंतोष पैदा करने के लिए चीन से आया था। चीन से आई फंडिंग में वहाँ की टेलीकॉम कंपनी Xiaomi और Vivo का बचाव करना भी शामिल था।

FIR में कहा गया है कि 2018 से मेसर्स पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड को करोड़ों रुपए की धनराशि प्राप्त हुई थी। अमेरिका की मेसर्स वर्ल्डवाइड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी एवं अन्य संस्थानों से पाँच साल की इस अवधि में अवैध तरीकों से इन पैसों को भेजा गया। FIR में आगे कहा गया है, “चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रचार विभाग के सक्रिय सदस्य नेविल रॉय सिंघम द्वारा कई संस्थाओं के जरिए विदेशी धन को भेजा।”

एफआईआर में कहा गया है कि पुरकायस्थ 1991 से कुख्यात नक्सल समर्थक गौतम नवलखा के साथ जुड़े हुए थे। नवलखा एल्गार परिषद के मामले में भी आरोपित हैं। नेविल सिंघम द्वारा भेजा गया पैसा पुरकायस्थ और उनके सहयोगियों को अवैध रूप से भेजा गया था। इस राशि को पुरकायस्थ ने नवलखा और तीस्ता सीतलवाड़ के सहयोगियों को वितरित की थी।

एफआईआर में यह भी कहा गया है कि गुप्त सूचनाओं से पता चला है कि पुरकायस्थ, सिंघम और सिंघम की शंघाई स्थित कंपनी स्टारस्ट्रीम के कुछ कर्मचारियों ने ईमेल का आदान-प्रदान किया था, जो यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश भारत के हिस्से नहीं हैं।

इतना ही नहीं, केंद्र की मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि बिलों के खिलाफ कथित किसानों के आंदोलन को भी फंडिंग की गई। इस दौरान आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति को बाधित करने और संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने के साथ-साथ किसानों के आंदोलन को लम्बा खींचने की साजिश रची गई। दिल्ली पुलिस ने FIR में कहा, “आरोपित कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करना चाहते थे। उन्होंने कोविड-19 को रोकने के प्रयासों को बदनाम करने के लिए झूठी कहानी फैलाईं।”

इन सब कामों के लिए विदेशों से फंड को अवैध रूप से हजारों शेल कंपनियों के जरिए भारत भेजा गया। इसमें आगे कहा गया है कि पुरकायस्थ, सिंघम, हरिहरन और गौतम भाटिया ने शाओमी और वीवो जैसी चीनी कंपनियों से लाभ के बदले में इनके पक्ष में अभियान चलाने और कानूनी मामलों में बचाने के लिए एक कानूनी नेटवर्क बनाने की साजिश रची।

बता दें कि न्यूजक्लिक के खिलाफ 17 अगस्त 2023 को एक प्राथमिकी दर्ज की थी और 3 अक्टूबर 2023 को राजधानी और सात अन्य राज्यों में कई जगहों पर छापेमारी की गई थी। उसी दिन, न्यूज़क्लिक के संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और मानव संसाधन प्रमुख अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार कर लिया गया। गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम की धारा 13, 16, 17, 18 और 22-सी और आईपीसी की 153-ए और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया था।

‘निर्णायक दौर में है वामपंथी उग्रवाद से लड़ाई, 2 साल में पूरी तरह खत्म हो जाएँगे नक्सली’: गृहमंत्री अमित शाह ने किया ऐलान

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सली हिंसा से जूझ रहे राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ दिल्ली में हाई लेवल मीटिंग की। इस मीटिंग में एनएसए अजीत डोभाल के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए।

इस मीटिंग के बाद अमित शाह ने ऐलान किया है कि अगले 2 साल के भीतर देश से नक्सली हिंसा को जड़ से मिटा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले कुछ सालों में वामपंथी उग्रवाद पर नकेल कसा गया है और अब इस लड़ाई निर्णायक दौर में आ चुकी है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि साल 2019 के बाद से नक्सलियों के इलाके तेजी से कम हुए हैं। इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि केंद्रीय बलों के 195 नए शिविर नक्सलियों से लड़ाई के लिए बनाए गए हैं। ऐसे 44 शिविर और बनाए जाएँगे, जहाँ से नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ी जाएगी।

नक्सली-वामपंथी हिंसा के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति

रिपोर्ट के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा से प्रभावित इलाकों के साथ-साथ उन इलाकों में भी कड़ी मॉनिटरिंग की जरूरत है जहाँ से नक्सलियों का उन्मूलन हो चुका है, ताकि वहाँ फिर से नक्सली पनप न सकें। अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने 2014 से ही वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।

केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा कि उग्रवाद को लेकर जीरो टोलरेंस की नीति के कारण साल 2022 में पिछले 4 दशकों के दौरान सबसे कम हिंसा और सबसे कम मौतें हुईं। साल 2014 से 2023 के बीच नक्सली हिंसा से जुड़े मामलों में 52 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, हिंसा की वजह से आम लोगों की मौत में 68 प्रतिशत और सुरक्षाबलों की मौत में 74 प्रतिशत की कमी आई है।

बैठक में शीर्ष अधिकारी भी हुए शामिल

बता दें कि केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (06 अक्टूबर 2023) को नई दिल्ली में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्री, उप-मुख्यमंत्री व अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ वामपंथी उग्रवाद (Left Wing Extremism) की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में केन्द्रीय मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, केन्द्रीय गृह सचिव, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के महानिदेशक, केन्द्र सरकार के सचिव, राज्यों के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

हिंदू लड़की को ‘लव जिहाद’ में फाँसकर संबंध बनाता रहा शहवाज खान, बोला- शादी से पहले मुस्लिम बनो; मना करने पर दी जान से मारने की धमकी

मध्य प्रदेश के दमोह में शहवाज खान नाम के युवक पर ‘लव जिहाद’ का आरोप लगा है। शहवाज पर 20 वर्षीय एक हिंदू युवती ने शादी के नाम पर दुष्कर्म करने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। युवती ने पुलिस को बताया कि वह करीब डेढ़ साल पहले आरोपित शहवाज से मिली थी।

ये मामला मध्य प्रदेश के दमोह कोतवाली इलाके का है। पीड़िता ने बताया कि धगट चौराहे के पास बाजार मोहल्ला में रहने वाले शहवाज खान पुत्र नसीर खान से डेढ़ साल पहले उसकी जान पहचान हुई थी। इसके बाद दोनों आपस में मिलने-जुलने लगे थे।

पीड़िता ने बताया कि शादी का झाँसा देकर शहवाज ने उसे जबलपुर नाका पर संचालित टाउनवैरी रेस्टोरेंट बुलाया। वहाँ उसने एक केबिन में बुलाकर शादी का वादा किया और उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का आरोप है कि इसके बाद शहवाज ने कई बार उससे संबंध बनाए।

शादी करने से पहले धर्म परिवर्तन का डाला दबाव

पीड़ित लड़की ने बताया कि कुछ समय बाद जब उसने शहवाज पर शादी के लिए दबाव डालना शुरू किया तो उसने धर्म परिवर्तन कर मुस्लिम बनने के लिए कहा। लड़की का कहना है कि जब उसने मना किया तो शहवाज ने उसे जान से मारने की धमकी दी।

लड़की ने आगे बताया, “शुरू में मैंने इस बारे में किसी को नहीं बताया, लेकिन राखी के त्योहार के समय भी उसने डरा-धमकाकर मुझसे संबंध बनाया और किसी को बताने पर फिर से धमकी दी। इसके बाद सारी घटना मैंने अपने माता-पिता को बता दी।”

इसके बाद पीड़िता परिजन के साथ गुरुवार (5 अक्टूबर 2023) को दमोह कोतवाली में शिकायत दर्ज करने गई। इसके बाद पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल कराया।

मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत भी केस दर्ज

इस मामले में थाना इंचार्ज विजय सिंह राजपूत ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद जरूरी जाँच पड़ताल की और फिर मामला दर्ज कर लिया गया। इस मामले में आरोपित शहवाज खान के खिलाफ IPC की धारा 376, 366, 506, 3-2-5, 3(1) W (।।) व एससी एसटी की धारा 3/5 और मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज की गई। उन्होंने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है।

दमोह में इस साल जनवरी में भी आया था लव जिहाद का मामला

बता दें कि इस साल जनवरी में भी लव जिहाद का मामला सामने आया था, जिसमें लड़की दमोह की थी और बेंगलुरु में नौकरी करने गई थी। वहाँ फारुख नाम के युवक ने खुद का नाम राजू बताकर उसे जाल में फँसा लिया था और युवती का शोषण करता था।

इस दौरान आरोपित ने इस हिंदू युवती के सारे दस्तावेज भी अपने कब्जे में ले लिए थे। उसने अश्लील फोटो वीडियो बनाकर लड़की को प्रताड़ित भी किया। लड़की किसी तरह से बेंगलुरु से भागकर दमोह पहुँची थी।

दमोह में 2021 में भी लव जिहाद का एक मामला हुआ था, जिसमें कॉलेज जाने वाली लड़की को मुस्लिम युवक ने जाल में फँसा लिया था। इसके बाद लड़की अपने घर से 3 लाख रुपए लेकर उस मुस्लिम युवक के साथ फरार हो गई थी।

‘हिंदुओं को फाँसने के मिलते हैं पैसे, ये कौम का काम’: रिजवान ने करन बनकर हिंदू लड़की को फाँसा, धर्मांतरण और दो बच्चे पैदा करने के बाद खोला राज

गुजरात के सूरत से लव जिहाद का नया मामला सामने आया है। यहाँ रिजवान गफ्फार खान नाम के मुस्लिम युवक ने खुद को करन बताकर एक हिंदू लड़की को अपने जाल में फाँस लिया। वो उसे दिल्ली लेकर गया और फिर पोल खुलने के डर से उसने लड़की को डरा धमकाकर मुस्लिम बना लिया, लेकिन इससे पहले ही उसने हिंदू रीति-रिवाज से लड़की से शादी की थी। शादी के बाद वो उसे दिल्ली लेकर आया और लड़की को अपने मुस्लिम होने की जानकारी दी, फिर उसका धर्म परिवर्तन कराकर निकाह भी कर लिया। वो उसे अपने गाँव लेकर गया और पूरी तरह से मुस्लिमों की तरह घर की चारदीवारी तक ही सीमित कर दिया।

इन सबके बीच उसके दो बच्चे भी हो गए। इसके कई साल बाद वो दूसरी हिंदू लड़कियों को इंस्टाग्राम के माध्यम से जाल में फँसाने लगा, तो हिंदू से मुस्लिम बनी पहली लड़की ने ऐतराज जताया। इसके बाद रिजवान ने जो खुलासा किया वो चौंकाने वाला है। रिजवान ने बताया कि वो ‘कौम का काम’ कर रहा है। उसे पैसों की जरूरत है। ऐसे में वो एक और हिंदू लड़की को फाँस कर ले आएगा, तो उसे पैसे मिलेंगे। इसके बाद लड़की किसी तरह से उसके चंगुल से भागकर सूरत पहुँची और पूरा वाकया घर वालों को बताया, जिसके बाद मामला दर्ज कराया गया।

ये पूरा मामला सूरत के पांडेसरा थाना इलाके का है। पीड़ित लड़की की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कराने के बाद सूरत पुलिस ने आरोपित रिजवान को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। इस मामले को लेकर सूरत पुलिस के एसीपी एमडी उपाध्याय ने मीडिया को जानकारी दी।

जानकारी के मुताबिक, पीड़ित लड़की साल 2018 में आरोपित रिजवान गफ्फार शाह के संपर्क में आई थी। उस समय उसकी उम्र 17 साल थी और रिजवान उसे करन के तौर पर मिला था। पीड़ित लड़की एक फैक्ट्री में काम करती थी और आरोपित ऑटोरिक्शा चलाता था और लड़की को लाने और छोड़ने का काम करता था। कुछ समय बाद दोनों के बीच दोस्ती हुई जो ‘प्रेम संबंध’ में बदल गई। इस दौरान उन दोनों ने शादी कर ली। शादी के समय लड़की नाबालिग थी। उसके बाद वो उसे दिल्ली लेकर चला गया। दिल्ली में उसने बताया कि उसका असली नाम रिजवान है। लेकिन तबतक पीड़िता गर्भवती हो गई थी। इसी वजह से वो रिजवान के साथ ही रहने लगी।

मूर्ति पूजा पर लगाया बैन, मुस्लिम बनाकर ले गया गाँव

पीड़िता की शिकायत है कि रिजवान ने उससे कहा कि वे (मुस्लिम) मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं करते हैं और इसलिए लड़की को पूजा नहीं करनी चाहिए। इसके साथ ही आरोपित ने उस पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। इसके बाद लड़की को जबरन इस्लाम में परिवर्तित कर दिया गया और रिजवान उसे उत्तर प्रदेश में अपने परिवार के पास ले गया। यूपी जाकर पीड़िता ने एक बेटी को जन्म दिया। आरोप है कि इसके बाद रिजवान ने पीड़िता से यह कहते हुए मारपीट की कि उसे बेटा चाहिए। लड़की ने शिकायत में यह भी कहा कि यूपी में उसे बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया गया और घर से निकलने पर भी रोक लगा दी गई।

इसी बीच लड़की दूसरी बार गर्भवती हो गई और उसे एक और बच्चा हुआ। पीड़ित ने बताया कि काफी बाद में उसे पता चला कि रिजवान अन्य हिंदू लड़कियों के भी संपर्क में था। जिसके बारे में पूछताछ करने पर रिजवान ने उसे बताया कि वह जितनी अधिक हिंदू लड़कियों को बहकाता है, उन्हें उतने ही अधिक पैसे दिए जाते हैं। उसने कहा, “मुझे अभी और पैसों की जरूरत है और हम जितनी ज्यादा हिंदू लड़कियाँ लाएँगे, इस्लाम का उतना ही ज्यादा प्रचार होगा। यह कौम की मजबूती का काम।”

आखिरकार जब प्रताड़ना असहनीय हो गई तो लड़की ने अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी और सूरत आकर पांडेसरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर सूरत पुलिस ने केस दर्ज कर लव जिहाद के आरोपित रिजवान गफ्फार शाह को गिरफ्तार कर लिया।

जिसे राखी बाँधती थी दिव्या, उसी शौकीन ने तलवार से किया हमला: विश्वासघाती को लोगों ने धूना, एनकाउंटर के बाद गाजियाबाद पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 16 साल की एक लड़की पर तलवार से हमला कर जान से मारने की कोशिश की गई। आरोपित की पहचान शौकीन के रूप में हुई है। पीड़िता उसे अपना भाई मानते हुए राखी बाँधती थी। पुलिस जब शौकीन को गिरफ्तार कर मेडिकल के लिए ले जा रही थी, तभी उसने पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की। इसके बाद एनकाउंटर में पुलिस ने उसे पकड़ लिया। उसके पैर में गोली लगी है। आरोपित के दूसरे समुदाय के होने के कारण इलाके में तनाव है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला गाजियाबाद के मोदीनगर इलाके की जगतपुरी कॉलोनी का है। यहाँ रहने वाले संजय उपाध्याय की बेटी दिव्या उपाध्याय 9वीं क्लास में पढ़ती है। गुरुवार (5 अक्टूबर 2023) की शाम वह रोज की तरह घर के पास रहने वाले टीचर के पास ट्यूशन पढ़ने जा रही थी। इसी दौरान 35 साल के शौकीन ने पीछे से आकर उस पर तलवार से ताबड़तोड़ वार किए।

मौके पर मौजूद लोगों ने ईंट-पत्थर से हमला कर पीड़िता को छुड़ाया। आसपास के लोगों ने पकड़कर शौकीन की पिटाई कर दी। इसी दौरान पुलिस को सूचित कर उसे सौंप दिया गया। तलवार से हुए इस हमले में दिव्या बुरी तरह से जख्मी हो गई है। उसके शरीर पर 9 जगह हमले के निशान हैं। सिर, गर्दन और हाथ में गंभीर घाव और कोहनी में फ्रैक्चर हुआ है।

पीड़िता के पिता संजय उपाध्याय और शौकीन अच्छे दोस्त हैं। दोनों का घर आमने-सामने है। संजय और शौकीन साथ में रँगाई-पुताई का काम भी करते हैं। शौकीन की पत्नी उससे अलग रहती है। संजय के परिजनों का कहना है कि अकेले रहने के कारण वह अक्सर उन्हीं के यहाँ खाना भी खाता था।

परिजनों का कहना है कि रक्षाबंधन पर दिव्या शौकीन को राखी बाँधती थी और वह उसे भाई मानती थी, लेकिन शौकीन इन सबका यह नतीजा देगा, किसी ने भी इसकी कल्पना नहीं की थी। पीड़िता के पिता संजय का कहना है कि कुछ दिन पहले दिव्या की स्कूल की एक लड़की किसी के साथ भाग गई थी। इस पर शौकीन दिव्या को भी स्कूल जाने से रोकने लगा।

परिजनों को लगा कि उनकी बेटी उसे भाई मानती है, इसलिए वह यह सब कर रहा है। यहाँ तक कि वह उसे कोचिंग भी अकेले नहीं जाने देता था। शौकीन ने ही संजय से बात कर दिव्या का स्कूल भी बदलवा दिया था। वह हर बात में दिव्या को टोकता था, लेकिन परिजन शौकीन की नीयत नहीं समझ पाए थे।

पीड़िता के एक परिजन का कहना है कि शौकीन को फाँसी की सजा होनी चाहिए। यदि पुलिस सजा नहीं दिला सकती तो शौकीन को उन्हें सौंप दिया जाए। वह न्याय कर देंगे। इसके बदले में जो सजा होगी वह भुगतने को तैयार हैं।

बता दें कि शौकीन को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस मेडिकल के लिए उसे हॉस्पिटल लेकर जा रही थी। इसी दौरान उसने पुलिस से बंदूक छीनकर भागने की कोशिश की। फिर पेड़ की ओट में छिपकर फायरिंग करने लगा। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फायरिंग की तो उसके दाएँ पैर में गोली जा लगी है। इसके बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया।

रकीबुल हसन ने मारा पीटा, भूखा रखा, कुत्ते से कटवाया, रेप, दूसरे मर्द के साथ सुलाने की धमकी… : नेशनल शूटर तारा शाहदेव की दर्दनाक कहानी, 9 साल बाद मिला इंसाफ

झारखंड की नेशनल शूटर तारा शाहदेव के मामले फैसला आ चुका है। किस तरह से रकीबुल हसन ने खुद को हिंदू रंजीत कोहली बताकर उन्हें धोखा दिया और शादी की थी। बाद में उन पर इस्‍लाम कबूलने का दबाव बनाया गया और ऐसा नहीं करने पर उनकी पिटाई की जाती थी और कई बार कुत्ते से भी कटवाया गया। उन्हें कई-कई दिनों तक भूखा रखा जाता था। उनके साथ रेप और जबरदस्ती की जाती रही।

लव जिहाद इसी मामले में हाल ही में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दोषी रकीबुल हसन उर्फ रंजीत कोहली को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही रकीबुल की अम्मी कैशर रानी को 10 साल और साजिश रचने के आरोपित रहे हाईकोर्ट के बर्खास्त रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद को 15 साल कैद की सजा सुनाई है। सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। बता दें कि मुस्ताक अहमद ही वो शख्स था जिसने रकीबुल को रंजित कोहली बनाकर तारा से मिलवाया था। 

वहीं इस फैसले के बाद तारा शाहदेव ने कहा, ”मैं कोर्ट और सीबीआई को धन्यवाद देना चाहती हूँ, जिन्होंने मुझे न्याय दिलाया। ये न्याय सिर्फ मेरे लिए नहीं है, देश की हर बेटी को ये भरोसा मिलेगा कि जो भी उनके साथ ऐसा करेगा, उसे सजा मिलेगी।”

अभी तक आपको तारा शाहदेव के इस मामले की झलक मिल गई होगी कि कितनी बुरी तरह से एक राष्ट्रीय शूटर को सताया गया, उसने क्या-क्या सहा इसी पर हम आगे बात करने जा रहे हैं। हाल ही में जब इस मामले में 9 साल बाद फैसला आया है तो आइए जानते हैं तारा शाहदेव की दर्दनाक कहानी।

क्या हुआ था उस दिन जब वह शादी के जोड़े में अपने पति के घर पहुँची? कैसे उन्हें शादी के दो दिन बाद ही उस समय झटका लगा जब ये कहा गया कि अपना धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल करो और तारा से सारा बन जाओ। इस तरह से देश के लिए गोल्ड जीतने वाली राष्ट्रीय खिलाड़ी अब लव जिहाद के एक ट्रैप में फँस चुकी थी। 

कैसे हुई रकीबुल हसन से मुलाकात

नेशनल शूटर तारा शाहदेव के माँ की 2014 में ही मौत हो गई थी। वो अपनी माँ की मौत से टूट गईं थी लेकिन शूटिंग कैंप में जाती रहीं। इसी दौरान पीली बत्ती लगे वाहन में विजिलेंस रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद (हाईकोर्ट में पदस्थापित) व रंजीत कुमार कोहली उर्फ रकीबुल हसन उनका प्रैक्टिस देखने आते थे। मुस्ताक की मदद से रंजित कोहली से यहीं उनकी मुलाकात हुई। कहते हैं रंजित ने मुस्ताक अहमद की मदद से तारा को सहारा दिया और फिर कुछ ही दिनों में शादी के लिए प्रपोज भी कर दिया।

लव जिहाद ने बर्बाद किया तारा का जीवन

सब कुछ बहुत तेजी से हो रहा था। 20 जून, 2014 को ही मुश्ताक की मौजूदगी में सगाई हुई और 7 जुलाई, 2014 को तारा की शादी रंजीत से हो गई। इससे पहले कि तारा इस शादी की खुशियाँ भी मना पातीं कि 8 जुलाई यानी शादी के अगले दिन ही तारा को पता चला कि रंजित कोहली दरअसल मुस्लिम है और उसका असली नाम रकिबुल हसन है।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा

तारा ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि ससुराल में शादी के अगले ही दिन मंत्री हाजी हुसैन अंसारी के यहाँ से इफ्तार पार्टी का निमंत्रण मिला। जिसमें जनाब रकीबुल हसन खान के नाम का संबोधन था। यह कार्ड भी तारा ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया था। तारा ने बताया कि उनके बुरे दिन की शुरुआत तब हुई जब 9 जुलाई, 2014 को रंजीत 20-25 हाजी को लेकर घर आया और जबरन इस्लाम कबूलने के लिए दबाव बनाने लगा।

इस दौरान विरोध करने पर उनके साथ बुरी तरह मारपीट की गई। इस्लाम कबूल करवाने के लिए रकीबुल हसन ने दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी थीं। करीब डेढ़ महीने तक उसने अपने कब्जे में रखते हुए तारा को न तो खाना-पीना दिया और न ही किसी से मिलने देता था। वह बार-बार कहता था कि इस्लाम धर्म कबूल करना होगा। ऐसा नहीं करने पर तारा का चेहरा सलामत नहीं रहेगा। उन्हें कई बार कुत्ते से कटवाया गया, ताकि वह डर से धर्म परिवर्तन कर लें। यह सिलसिला लगातार एक महीने से अधिक समय तक चलता रहा और शारीरिक और मानसिक तौर पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता रहा है। 

नेशनल शूटर को जबरदस्ती बना दिया गया सारा 

नेशनल शूटर तारा जो उस समय गोल्ड मेडल जीत चुकी थीं। उनके साथ रोज मारपीट होने लगी थी, एक दिन मौलवी बुलाकर जबरदस्ती तारा को सारा बना दिया गया। इसके बाद तारा अगर मुस्लिम रीति रिवाज मानने से इनकार करती तो उन्हें खूब पीटा जाता, भूखा रखा जाता। छुप छुपकर घर की नौकरानी उन्हें रोटी देती थी। तारा के साथ बेड पर जोर जबरदस्ती की जाती। रकीबुल तारा के साथ रेप करता, उनकी मर्जी के बिना उनके साथ बेड शेयर करता। इतना ही नहीं तारा को यह धमकी भी दी जाने की लगी कि उनके साथ गैर मर्दों को सुलाया जाएगा। 

9 साल बाद मिला तारा को इंसाफ

कई महीनों तक तारा ये सब सहती रही, लेकिन एक दिन मौका पाकर वो घर से बचकर बाहर निकली। इसके बाद तारा ने अपनी आपबीती पुलिस को बताई। इसके बाद ही तारा शाहदेव की दर्दनाक कहानी सबके सामने आई। इस मामले में तारा शाहदेव ने 2015 में झारखंड हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने अपने पति रकीबुल हसन और उसके परिवार के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन और प्रताड़ना के आरोप लगाए। हाईकोर्ट ने मामले की जाँच सीबीआई को दी। और अब 9 साल बाद जाकर तारा शाहदेव को इंसाफ मिला है।

31 साल की सजा भुगत रही ईरान की नरगिस मोहम्मदी को नोबेल शांति पुरस्कार: जिस लेखक ने एक वाक्य में लिख डाला उपन्यास, उसे साहित्य का नोबेल

स्वीडिश अकादमी ने शुक्रवार (6 अक्टूबर 2023) को नोबेल शांति पुरस्‍कार 2023 ईरान की मानवाधिकार कार्यकर्ता न‍रगिस मोहम्‍मदी को दिया। वहीं, गुरुवार (5 अक्टूबर 2023) को नॉर्वेजियन लेखक जॉन फॉसे को साहित्य में 2023 के नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया।

नरगिस को स्वतंत्रता सेनानी बताते हुए नोबेल समिति ने कहा कि वो ईरान में महिलाओं के दमन के खिलाफ डटकर खड़ी रहीं। मोहम्मदी साल 2010 से लगभग जेल में ही हैं। बताते चलें कि बीते साल नोबेल शांति पुरस्कार बेलारूस के मानवाधिकार एक्टिविस्ट एलेस बालियात्स्की को दिया गया था।

समकालीन रंगमंच के हैं उस्ताद

समिति ने 64 साल के फॉसे के काम की तारीफ करते हुए कहा कि उनके नए विचारों से ओतप्रोत नाटक और गद्य अनकहे को आवाज देते हैं। बीते साल साहित्य का नोबेल फ्रांसीसी लेखिका एनी एर्नाक्स को गया था। हालाँकि फॉसे इस पुरस्कार के मिलने से पहले ही साहित्य जगत में खासे मशहूर है। उन्हें केवल एक वाक्य में उपन्यास रचने वाले लेखक के तौर पर जाना जाता है।

पुरस्कार के लिए फॉसे ने आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार साहित्य का सम्मान है, जिसका सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य बिना किसी विचार के सिर्फ साहित्य होना है। पुरस्कार के तौर पर उन्हें 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना दिए गए। भारतीय मुद्रा में देखा जाए तो ये करीब राशि 8 करोड़ 30 लाख रुपए है।

साहित्य की दुनिया में उनके लेखन को लेकर कहा जाता है कि वो जिंदगी लिखते हैं। उनका लेखन इंसानी असुरक्षा और चिंताओं पर केंद्रित है। नॉर्वे के तटीय शहर हाउगेसुंड में 1959 में पैदा हुए जॉन फॉसे को सबसे अहम समकालीन यूरोपीय लेखकों में से एक माना जाता है।

उन्हें फ्रांसीसी डेली अखबार ले मोंडे ने ’21वीं सदी का बेकेट’ और कनाडा के द ग्लोब एंड मेल ने उन्हें समकालीन थिएटर में सबसे प्रभावी लेखकों में से एक बताया है। फॉसे का पहला उपन्यास ‘रेड, ब्लैक’ 1983 में आया था।

तब से उन्होंने कई उपन्यास, कहानियाँ, कविताएँ, निबंध संग्रह और यहाँ तक ​​कि बच्चों की किताबें भी प्रकाशित की हैं। उनका लिखा पहला अंग्रेजी नाटक टाइटल ‘एंड वी विल नेवर बी पार्टेड’ 1994 में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद उन्होंने लगभग 40 नाट्य रचनाएँ लिखीं।

एक वाक्य वाला महान उपन्यास

फॉसे की महान कृति उनकी ‘सेप्टोलॉजी’ है। ये 2019-2021 तक तीन खंडों में ‘द अदर नेम’, ‘आई इज़ अनदर’ और ‘ए न्यू नेम’ टाइटल से प्रकाशित हुई हैं। ये 1250 पेज का गद्य है। ये एक उम्रदराज़ कैथोलिक कलाकार एस्ले की जिंदगी के बारे में है। वो सुदूर दक्षिण-पश्चिम नॉर्वे में रहता है और वक्त, कला और अपनी पहचान के लिए जूझ रहा होता है।

उसे अपने वजूद के खत्म होने, याददाश्त कम होने जैसी परेशानी से दो-चार होना पड़ता है। ये कलाकार खुद से कला और भगवान पर बात करता है। उसकी इसी बात और सोच को बगैर किसी पूर्ण विराम के एक वाक्य में फॉसे ने लिखा है। इसे इस तरह से लिखने की वजह है कि रीडर इस बुजुर्ग कलाकार के जीवन में खुद जी के देख सके। इसकी खासियत ही ये एकालाप है।

नोबेल समिति ने नरगिस को ‘स्वतंत्रता सेनानी’ कहा

साल 2023 का नोबेल शांति पुरस्कार ईरान की 51 साल की नरगिस मोहम्मदी को दी गई। नोबेल समिति ने उन्हें ‘स्वतंत्रता सेनानी’ कहा। उन्हें ये नाम देश में महिलाओं के उत्पीड़न के खिलाफ उनकी लड़ाई के लिए दिया गया है। मोहम्मदी को पुरस्कार देते वक्त नोबेल समिति के चीफ ने कहा कि उन्होंने सिस्टम में रचे-बसे भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं के लिए लड़ाई लड़ी, जिसके लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी।

साल 2010 से जेल में रहने के बावजूद वहाँ की महिलाओं के खिलाफ हो रहे बुरे व्यवहार को दुनिया को बताने और उसके खिलाफ आवाज उठाने में कामयाब रहीं। नरगिस ईरान में डिफेंडर्स ऑफ ह्यूमन राइट्स सेंटर की उपाध्यक्ष हैं। इसकी स्थापना साथी नोबेल पुरस्कार विजेता शिरीन एबादी ने की थी। उनके पति बच्चों सहित निर्वासन में रहते हैं।

नरगिस मोहम्मदी को ईरान की इस्लामी शासन की पुलिस ने 13 बार गिरफ्तार किया। उन्हें पाँच बार दोषी ठहराया गया और कुल 31 साल जेल की सजा सुनाई गई। वह फिलहाल कथित प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में जेल में हैं। बीते साल उन्होंने महसा अमिनी को लेकर भी विरोध जताया।

तेहरान के एविन जेल से एक पत्र में नरगिस ने बताया कि कैसे देश भर में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिरासत में ली गई महिलाओं का यौन शोषण किया जा रहा था। दरअसल ईरान में सख्त ड्रेस कोड न मानने आरोप में गिरफ्तार की गई 22 साल महसा अमिनी की सितंबर 2022 में हिरासत में मौत के बाद वहाँ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था।

Asian Games 2023: हॉकी में भारत को गोल्ड, एशियाई खेलों में सबसे ज्यादा गोल्ड के साथ-साथ पहली बार मेडलों का ऐतिहासिक शतक!

भारतीय हॉकी टीम ने शुक्रवार (6 अक्टूबर 2023) को शानदार खेल दिखाते हुए एशियन गेम्स (Asian Games 2023) का गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। कप्तान मनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने जापान को 5-1 के बड़े अंतर से हराकर यह जीत दर्ज की।

इसके साथ ही हॉकी टीम पेरिस ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर गई है। एशियन गेम्स में भारत के खाते में अब तक 22 गोल्ड समेत कुल 95 मेडल आ गए हैं। इसके पहले एशियन गेम्स की हॉकी में 2014 में गोल्ड मिला था। 9 साल बाद भारत ने एक बार फिर से स्वर्ण पदक जीता है।

चीन के हांगझोउ में खेले जा रहे 19वें एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीम शुरुआत से बेहतरीन फॉर्म में थी। फाइनल में भी यह दबदबा कायम रहा। जापान के खिलाफ हुए इस मुकाबले में पहले हाफ में ही 3-0 की बढ़त हासिल कर ली थी, जो कि दूसरे हाफ में भी जारी रही।

भारत की ओर से हरमनप्रीत सिंह (32वें और 59वें मिनट), अभिषेक (48वें मिनट), अमित रोहिदास (36वें मिनट) और मनप्रीत सिंह (25वें मिनट) ने गोल दागे। वहीं, जापान की ओर से एकमात्र गोल एस तनाका ने 51वें मिनट में किया

एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय हॉकी टीम का अब तक शानदार इतिहास रहा है। टीम इंडिया ने हॉकी में रिकॉर्ड 16वीं बार मेडल जीता है। इस बार हासिल हुआ यह चौथा गोल्ड मेडल है। कुल मिलाकर देखें तो भारत ने हॉकी में अब तक 4 गोल्ड, 9 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं।

एशियन गेम्स में शतक के करीब भारत

एशियन गेम्स में भारत ने 22 गोल्ड, 34 सिल्वर और 39 ब्रॉन्ज के साथ अब तक 95 मेडल अपने नाम किए हैं। इसके अलावा विभिन्न खेलों में 5 मेडल पक्के हो चुके हैं। ऐसे में भारत का पदकों का शतक तय माना जा रहा है।

एशियन गेम्स मेडल टैली देखें तो 185 गोल्ड के साथ चीन पहले स्थान पर है। वहीं, 44 गोल्ड के साथ जापान दूसरे और 36 गोल्ड के साथ कोरिया तीसरे नंबर और 22 गोल्ड के साथ भारत चौथे नंबर पर है।