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OBC आरक्षण का 97% लाभ मिला सिर्फ 25% जातियों को, 2633 जातियों में 983 को नहीं मिला एक भी फायदा

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि चाहे परमानेंट नौकरियाँ हों या ठेके पर, अगर कम से कम 45 दिन की नौकरी है तो एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलेगा। हालाँकि इस बीच रोहिणी आयोग की रिपोर्ट की चर्चा हो रही है।

रोहिणी आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 2633 जातियाँ OBC की श्रेणी में आती हैं। इनमें से 983 जातियों को अभी तक आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिला है। यानी, कुल OBC आबादी का लगभग 37% हिस्सा अभी भी आरक्षण के लाभ से पूरी तरह वंचित है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो रोहिणी आयोग ने नौकरियों और शिक्षा में 97 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का लाभ ओबीसी की 25 प्रतिशत जातियाँ उठा रही हैं। शेष 75 प्रतिशत जातियों की भागीदारी सिर्फ 3 प्रतिशत ही है। इसमें भी 983 ओबीसी जातियों की हिस्सेदारी शून्य है।

ओबीसी को चार वर्गों में बाँटने की सिफारिश

रोहिणी आयोग की रिपोर्ट करीब 1100 पन्नों की है, जिसे दो भागों में बाँटा गया है। इस रिपोर्ट के पहले हिस्से में आरक्षण का फायदा पा रही जातियों में उनकी हिस्सेदारी से जुड़ी बातें हैं तो दूसरे हिस्से में मौजूदा समय में ओबीसी में शामिल 2633 पिछड़ी जातियों से संबंधित है।

इसमें 2633 पिछड़ी जातियों की सामाजिक पहचान, जनसंख्या में उनके आनुपातिक प्रतिनिधित्व और अब तक आरक्षण नीतियों से उन्हें मिले लाभों की जानकारी है। हालाँकि कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 3000 जातियों की जानकारी इस रिपोर्ट में है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोहिणी आयोग ने ओबीसी की 3000 जातियों को 4 वर्गों में विभाजित करने का सुझाव दिया है। इन वर्गों में आरक्षण का पूरा लाभ, अधूरा लाभ, बिल्कुल लाभ नहीं ले पाने वाली और एकदम अक्षम जातियों का 4 वर्ग तैयार हो सकता है, जिन्हें 10 प्रतिशत, 5 प्रतिशत, 8 प्रतिशत, जो भी डाटा इस आयोग की सिफारिश के साथ होगा, उन्हें मिल जाएगा।

कोटे के अंदर कोटा सिस्टम से होगा कमजोर वर्गों को लाभ?

ओबीसी में आरक्षण की बात करें तो इसमें शामिल ऐसी कुछ जातियाँ हैं, जो सबसे ज्यादा फायदा उठा रही हैं। ऐसे में अभी ओबीसी जातियों की राजनीति को लेकर मुखर रहने वाली ताकतवर ओबीसी जातियों का कोटा इस सिस्टम की वजह से घट जाएगा। ऐसे में संभव है कि ये जातियाँ अपने पुराने रहनुमाओं को छोड़कर नए विकल्प तलाशें।

वहीं, जिन जातियों को आरक्षण का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है, या बहुत कम मिला है, रोहिणी आयोग की सिफारिशों की वजह से उनका कोटा बढ़ जाएगा। चूँकि जातियों की आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक स्थिति का अध्ययन करने और उसी अनुपात में कोटे के अंदर कोटा सिस्टम पर सलाह देने के लिए इस आयोग का गठन किया गया था।

ऐसे में कमजोर वर्ग के लोग आगे बढ़कर अपनी हिस्सेदारी क्लेम भी कर पाएँगे। अभी ओबीसी में सिर्फ दो वर्ग है- एक क्रीमी लेयर और दूसरा गैर-क्रीमी लेयर। इनमें से क्रीमी लेयर वाले आरक्षण का फायदा ज्यादा उठा पाते हैं, क्योंकि वो आर्थिक और शैक्षणिक स्तर पर मजबूत होते हैं।

ऐसे में इन वर्गों का 4 वर्गों में विभाजन होते ही उन कमजोर जातियों का फायदा होगा, जो वंचित हैं। चूँकि इस आयोग के आँकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, इसलिए पक्का नहीं बता सकते कि आयोग ने क्या सिफारिशें की हैं और किस तरह के डाटा का इस्तेमाल किया गया है।

‘फ्री की रेवड़ी’ पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों से माँगा जवाब, बिहार में जातीय जनगणना की रिपोर्ट पर रोक से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और राज्य सरकारों से “फ्री की रेवड़ी” की राजनीति पर जवाब माँगा। कोर्ट ने कहा कि यह राजनीति देश के लिए हानिकारक है और इसे रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए बिहार की जातीय जनगणना के आँकड़ों को जारी करने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

मुफ्त की रेवड़ियों पर सख्त हुई सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने ‘मुफ्त की रेवड़ी‘ वाले कल्चर पर नाराजगी जताई है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ ही, मध्य प्रदेश, राजस्थान और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर शुक्रवार तक जवाब माँगा है। इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच कर रही है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने याचिका कर्ता से पूछा कि वो सीधे यहाँ क्यों पहुँचे, तो याचिकाकर्ता भट्टूलाल जैन की ओर से कहा गया कि दो राज्यों में चुनाव हैं। दोनों राज्यों पर काफी कर्ज है, उसके बावजूद बड़े वादे किए जा रहे हैं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उनकी याचिका को दूसरों मामलों के साथ जोड़ा जा सकता है, क्योंकि ऐसी याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में पहले से लंबित हैं, जिनपर सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों और चुनाव आयोग ने शुक्रवार तक जवाब माँगा है, साथ ही अगली सुनवाई के लिए 4 सप्ताह का समय भी दिया है।

बिहार की जातीय जनगणना के आँकड़ों को जारी करने की इजाजत

एक अन्य अहम मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को जातीय जनगणना के और आँकड़े प्रकाशित करने से रोकने से मना कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को नीतिगत फैसले लेने से नहीं रोका जा सकता। जस्टिस संजय खन्ना और जस्टिस एस एन भट्टी की बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई।

इसमें एक एनजीओ ने कहा है कि जातीय जनगणना के आँकड़ों को जारी करने से रोका जाए, क्योंकि इससे लोगों की निजी जानकारी बाहर आ जाएगी। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने जातिगत जनगणना पर रोक नहीं लगाई, ये जरूर किया है कि बिहार सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है।

जदयू ने किया फैसले का स्वागत

वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जदयू ने स्वागत किया है। बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि जातिगत जनगणना का समर्थन करने वालों के लिए ये खुशी का मौका है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इसका श्रेय जाता है। उन्होंने ही पंचायत राज सिस्टम में महिलाओं और दलितों को आरक्षण भी दिया था।

‘सर को 2 चप्पल मार के चला गया’: लाइव क्लास में स्टूडेंट ने की टीचर की पिटाई, ‘फिजिक्स वाला’ का Video हुआ वायरल

‘फिजिक्स वाला’ एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार कारण है एक वीडियो, जिसमें क्लासरूम के अंदर एक छात्र टीचर की चप्पलों से पिटाई करता नजर आ रहा है। यह सब लाइव स्ट्रीम के दौरान हुआ। कुछ स्टूडेंट्स ने वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो की शुरुआत में ‘फिजिक्स वाला’ का एक टीचर स्मार्टबोर्ड के सामने खड़े होकर पढ़ाते नजर आ रहे हैं। अगले ही सेकंड टीचर बाईं ओर देखता है। तभी एक छात्र हाथ में चप्पल लेकर उसे पीटना लगता है। वह टीचर को 2 बार चप्पल मारता है। इसके बाद उसकी पकड़ ढीली हो जाती है और चप्पल हाथ से छूट जाती है।

इसके बाद क्या हुआ और यह सब क्यों व कैसे हुआ यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन इस वीडियो को मोबाइल पर देख रहे शख्स को ‘सर को दो चप्पल मार के चला गया’ कहते सुना जा सकता है। इस वीडियो को लेकर अब तक टीचर और ‘फिजिक्स वाला’ की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

वायरल वीडियो को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ‘Ghar Ke Kalesh’ नामक यूजर ने 5 अक्टूबर 2023 को शेयर किया है। अब तक इसे 7 लाख से अधिक बार देखा चुका है। साथ ही इसको लेकर नेटिजेन्स अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। गणेश मौर्य नामक यूजर ने पूछा, “क्या मामला है? उसने टीचर को क्यों मारा?” इस पर सब्यसाची साधु नामक यूजर ने लिखा, “उसकी गर्लफ्रेंड को आई लव यू बोला था।”

एक यूजर ने वायरल मीम शेयर किया। इसमें लिखा था, “जी भर कर लड़ो। समाप्त कर दो एक-दूसरे को।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “आजकल टीचर की क्या हालत बन गई है। कोई गाली खा रहा कोई चप्पल।”

निखिल नामक यूजर ने लिखा, “सर WWE की क्लास भी लाइव देने लगे। बिजनेस बहुत अधिक बढ़ रहा है।”

मनोज चौबे नामक यूजर ने वायरल मीम शेयर किया। इसमें लिखा था, “ये सब क्या देखना पड़ रहा है। अच्छा है मैं अंधा हूँ।”

पीयूष प्रकाश नामक यूजर ने लिखा, “फिजिक्स लॉ ऑफ मोशन विद प्रैक्टिकल” यानी ‘फिजिक्स के गति के नियम प्रैक्टिकल के साथ।’

सलमा नामक यूजर ने लिखा, “फिजिक्स वाला से स्टूडेंट नहीं सँभल रहे।”

रुद्र नामक यूजर ने मीम शेयर किया। इसमें लिखा था, “ई तो साला होना ही था।”

अल्टीमेटम के बाद अपने राजनयिकों को निकालने में जुटा कनाडा, भेजे जा रहे हैं सिंगापुर और कुआलालंपुर: खालिस्तानी आतंकी की हत्या के आरोप पर भारत सख्त

भारत द्वारा अल्टीमेटम दिए जाने के बाद कनाडा से यहाँ से अपने राजनयिकों को वापस तय समय से पहले ही बुला लिया है। कहा जा रहा है कि कनाडा के ये राजनयिक या सिंगापुर चले गए हैं या मलेशिया की राजधानी कुआलालंमपुर चले गए हैं। कहा जा रहा है कि ये राजनयिक दिल्ली से बाहर तैनात थे।

दरअसल, खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर लगाया था। इसके बाद दोनों देशों के संबंध खराब हो गए थे। कनाडा ने एक भारतीय राजनियक को छोड़ने के लिए कहा तो भारत ने भी कनाडा के एक राजनयिक को भारत छोड़ने के लिए कह दिया।

भारत ने दो कदम आगे बढ़कर कनाडाई नागरिकों को वीजा देने पर भी पाबंदी लगा दी। इसके साथ ही भारत ने कनाडा से अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाने के लिए कहा था। भारत ने इसके लिए 10 अक्टूबर तक का समय दिया था। भारत ने कहा था कि इसके बाद इन राजनयिकों को राजनयिक छूट नहीं दी जाएगी।

भारत ने तर्क दिया था कि कनाडा में तैनात भारतीय राजनयिकों की संख्या से कहीं अधिक कनाडाई राजनयिकों की संख्या है। भारत ने कहा था यह संख्या बराबर करने के लिए कनाडा को भारत में तैनात अपने 41 राजनयिकों को वापस बुलाना होगा।

भारत के सख्त रूख को देखते हुए ही कनाडा ने ऐसे राजनयिकों को मलेशिया या सिंगापुर भेजना शुरू कर दिया। ये राजनयिक मुंबई, बेंगलुरु आदि जगहों पर तैनात थे। इससे पहले कनाडा की विदेश मंत्री ने भारत से बातचीत की गुहार लगाई थी, लेकिन भारत ने कह दिया थआ कि इन राजनयिकों को जाना ही होगा।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता अरिंदम बागची ने गुरुवार कहा कि राजनयिकों के भारत छोड़ने की समय सीमा को लेकर कनाडा के साथ बातचीत की जा रही है। उन्‍होंने कहा कि भारत चाहता है कि दोनों देशों में मौजदू राजनयिकों की संख्या में समानता आए।

बागची ने कहा कि भारत पहले ही कह चुका है कि यहाँ कनाडाई राजनयिकों की बहुत अधिक उपस्थिति है। प्रवक्ता ने कहा, “हमारे आंतरिक मामलों में उनके हस्तक्षेप को देखते हुए हमने अपनी संबंधित राजनयिक उपस्थिति में समानता लाने की माँग की है।”

इससे पहले कनाडा की विदेश मंत्री मेलानिए जोली ने कहा था कि कनाडा भारत के साथ विवाद को बढ़ाना नहीं चाहता है। यह कनाडा के लिए बहुत ही ज्‍यादा चुनौत‍ीपूर्ण समय है। उन्होंने कहा था कि यह बेहद महत्‍वपूर्ण है कि कनाडा के राजनयिक भारत में रहकर काम करते रहें।

बताते चलें कि भारत में कनाडाई राजनयिकों की संख्या लगभग 60 है और भारत चाहता है कि कनाडा इस संख्या में 41 राजनयिकों की कमी करे। रिपोर्ट के मुताबिक, कनाडा में भारतीय राजनयिकों की संख्या लगभग 20 है।

रहस्यमयी बीमारी से केन्या के स्कूल में हड़कंप, अचानक लंगड़ाकर चलने लगीं 95 छात्रा: सबके कमर से नीचे मार गया लकवा, Video वायरल

केन्या में एक ‘रहस्यमयी बीमारी’ से दहशत फैल गई है। काकमेगा के सेंट टेरेसा एरेगी गर्ल्स हाई स्कूल को अस्थायी तौर पर बीमारी के कारण बंद करना पड़ा है। यह स्कूल राजधानी नैरोबी से 374 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में है। कमर के नीचे लकवे जैसे लक्षण पैदा होने के बाद स्कूल की 95 छात्राओं को अस्पताल में एडमिट करवाना पड़ा है।

छात्राओं के लंगड़ाकर चलने के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हैं। शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए काउंटी कार्यकारी समिति के सदस्य (सीईसीएम) डॉ. बोनफेस ओकोथ ने बताया है कि इस अजीब और रहस्यमयी बीमारी के कारणों का पता लगाया जा रहा है। पीड़ित छात्राओं के खून, पेशाब और स्टूल के नमूने गहन जाँच के लिए नैरोबी और किसुमू में केन्या मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (केमरी) भेजे गए हैं।

काउंटी के शीर्ष अधिकारियों ने स्कूल का दौरा किया है। काकमेगा प्रांत के शिक्षा अधिकारियों ने बुधवार (4 अक्टूबर 2023) को छात्राओं के हंगामे की वजह से स्कूल को अस्थायी तौर पर बंद करने का फैसला लिया। साथी छात्राओं की हालत से डरी लड़कियाँ घर जाने की जिद कर रही थीं।

रिपोर्ट के मुताबिक 30 छात्रों को काकमेगा लेवल फाइव हॉस्पिटल, 20 को शिब्वे लेवल फोर हॉस्पिटल और 12 को इगुहु लेवल फोर हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। इहुगु अस्पताल के एक डॉक्टर के मुताबिक, प्रारंभिक प्रयोगशाला परीक्षणों से पता चला है कि छात्राओं में इलेक्ट्रोलाइट्स बढ़ गए थे।

इसका मतलब कि उनके शरीर में तरल पदार्थ की कमी हो गई थी। इलेक्ट्रोलाइट्स जीवन चलाने के लिए जरूरी हैं और मानव कोशिकाओं में इनका संतुलन शरीर के लिए जरूरी होता है, ताकि नसें और माँसपेशियाँ सही तरीके से काम कर सके। लंबे वक्त तक दस्त और पसीने के कारण इलेक्ट्रोलाइट्स नष्ट हो सकते हैं।

मदरसे और मौलानाओं से भी जुड़े हैं ISIS आतंकी के तार, प्रयागराज में नया टेरर मॉड्यूल बनाने में जुटा था रिजवान: मददगारों को तलाश रही एजेंसियाँ

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की गिरफ्तार में आए तीन आतंकियों में से एक रिजवान अशरफ का प्रयागराज कनेक्शन सामने आया है। रिजवान नैनी में रह चुका है। वह फतेहपुर में पैदा हुआ है और गाजियाबाद से उसने पढ़ाई की है। लखनऊ से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उसे गिरफ्तार किया था।

बताया जा रहा है कि इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकी रिजवान का प्रयागराज के नैनी में घर है और वो वहाँ लंबे समय तक रह चुका है। सुरक्षा एजेंसियाँ इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि वह नैनी में किस तरह का नेटवर्क बना रहा था।

हालाँकि अभी तक उस घर की पहचान नहीं हो पाई है। एजेंसियाँ पूरे इलाके की निगरानी कर रही हैं। उसके पास से प्रयागराज में रजिस्टर्ड मोटर साइकिल भी मिली है, जिसका इस्तेमाल वो आने-जाने में कर रहा था।

कई मौलानाओं, मस्जिदों, मदरसों के संपर्क में था रिजवान

आईएसआईएस मॉड्यूल का आतंकी रिजवान अशरफ लखनऊ जाने से पहले नैनी में रह रहा था और लखनऊ जाने के बाद भी उसका प्रयागराज आना जाना रहता था। वो कई मौलानाओं, मदरसों और मस्जिदों के संचालकों के संपर्क में था। इनके संबंधों को भी एजेंसियाँ खंगाल रही हैं।

उसे दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रिजवान के अलावा शाहनवाज उर्फ शैफी उज्जमा और अरशद वारसी को भी गिरफ्तार किया है। ये तीनों दिवाली से पहले देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमलों की तैयारी कर रहे थे। उनके निशाने पर अयोध्या का राम मंदिर भी था, जिसकी ये रेकी भी कर चुके थे।

करैली मॉड्यूल से कनेक्शन?

प्रयागराज में दो साल पहले 2 आतंकी गिरफ्तार हुए थे। इनकी गिरफ्तारी करैली से हुई थी। ये आईएसआईएस से जुड़े आतंकी थे। उस समय भी रिजवान का प्रयागराज आना-जाना था। अब सुरक्षा एजेंसियाँ इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि रिजवान का कहीं करैली से जुड़े आतंकियों से कोई कनेक्शन तो नहीं?

दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने किया था गिरफ्तार

बता दें कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस सप्ताह की शुरुआत में आईएस से जुड़े आतंकियों की गिरफ्तारी के लिए व्यापक अभियान चलाया था। स्पेशल सेल ने शाहनवाज नाम के तीन लाख के ईनामी आतंकी को गिरफ्तार किया था, तो मुरादाबाद से अरशद वारसी को गिरफ्तार किया। वहीं, लखनऊ से रिजवान को गिरफ्तार किया गया।

इन तीनों का आईएस से जुड़ा रहा है। इनमें से अरशद वारसी जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पीएचडी कर रहा है और शरजील इमाम का करीबी है। उसी ने पुणे से भागे आतंकी शाहनवाज को दिल्ली में सुरक्षित ठिकाना दिया था। शाहनवाज एनआईए ने गिरफ्तार किया था, लेकिन वह भाग निकला था।

जो DMK पार्टी चाहती है सनातन को मिटाना, उसके मुखपत्र ने शेयर की पोर्न वीडियो, लिखा – और देखने के लिए क्लिक करें

तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके के मुखपत्र ‘मुरासोली’ के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट से अश्लील वीडियो शेयर की गई हैं। इसको लेकर सोशल मीडिया पर हंगामा मचा है। इस मामले में नेटिजेन्स का कहना है कि पेरियार की विचारधारा को मानने वाले लोग ऐसे ही होते हैं।

दरअसल, मुरासोली एक तमिल अखबार है। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने साल 1942 में इसकी शुरुआत की थी। इसके फेसबुक पेज पर 16 हजार लाइक्स और 22000 फॉलोअर्स हैं। 5 अक्टूबर को ‘मुरासोली’ के फेसबुक पेज पर दो स्टोरीज शेयर की गई हैं। इसमें महिलाओं को नग्न अवस्था मे दिखाया गया है।

इसको लेकर तमिलनाडु भाजपा के सचिव एसजी सूर्या ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “डीएमके के आधिकारिक समाचार पत्र मुरासोली के फेसबुक स्टेटस पर पोर्न वीडियो अपलोड किया गया है। यह क्या है सीएम एमके स्टालिन और उदयनिधि स्टालिन?”

बता दें कि एसजी सूर्या का ट्वीट सामने आने के बाद ऑपइंडिया ने मुरासोली की वेबसाइट चेक की। इसमें दाएँ कोने पर अखबार के सोशल मीडिया हैंडल मिले। फेसबुक आइकन पर क्लिक करने पर, ‘मुरासोली’ का आधिकारिक फेसबुक पेज खुल रहा है। इस पेज की स्टोरी खँगालने पर दो पोर्न क्लिप दिखाई दी। खबर लिखे जाने तक दोनों पोर्न वीडियो स्टोरी पर नजर आ रहे थे। इसको लेकर अब तक ‘मुरासोली’ या डीएमके की ओर से स्पष्टीकरण या माफीनामा जारी नहीं किया गया है।

डीएमके के मुखपत्र के फेसबुक पेज द्वारा अश्लील वीडियो शेयर करने पर एक यूजर ने लिखा, “अजीब बात यह है कि इन लोगों ने अब तक यह स्टोरी नहीं हटाई है। यह कैसी राजनीतिक पार्टी है। पेरियार की विचारधारा को मानने वाले दूषित लोग इस तरह की हरकतें करते हैं। यह आश्चर्य की बात नहीं है।”

एक अन्य एक्स यूजर ने भी लिखा, “दूषित पेरियार की विचारधारा का अनुसरण करने वाले दूषित लोग।”

बता दें कि डीएमके तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी है। सीएम एमके स्टालिन पार्टी के मुखिया हैं। यह वही पार्टी है जिसके मंत्री और एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया बताते हुए खत्म करने की बात कही थी।

‘भक्क साला, भागो, पिस्टल दिखाएँ’: नीतीश कुमार के MLA ने पत्रकारों को गरियाया, कहा- तुम लोग हमारे बाप हो; ‘चड्डी-गंजी’ वाले गोपाल मंडल ने अब दिखाए तेवर

ट्रेन की बोगी में चड्ढी-बनियान पहनकर घूमने वाले बिहार की सत्ताधारी जदयू के विधायक गोपाल मंडल ने अब पत्रकारों के साथ गाली गलौच की है। अस्पताल में रिवॉल्वर लेकर घूमने को लेकर पटना में जब पत्रकारों को सवाल किया तो वो भड़क गए। उन्होंने कहा, “तुम लोग हमारा बाप हो? भाग साला।”

पटना में पत्रकारों ने गोपाल मंडल से पूछा, “विधायक जी आप पिस्टल क्यों रखते हैं अपने पास?” इस पर मंडल ने कहा, “अरे पिस्तौल तो अभियो है मेरे पास। दिखावे। दिखावे पिस्टल… क्या कहना चाहते हो… रखते हैं पिस्टल… तुम लोग हमारे बाप हो?… भक्क साला, भागो।”

जब पत्रकारों ने गाली देने का विरोध किया और पूछा कि JDU में गाली देने की ही ट्रेनिंग दी जाती है क्या। इस पर गलती मानने के बजाय गोपाल मंडल के मुँह से गालियों की बौछार शुरू हो गई। उन्होंने बेहद गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा, ‘भाग बु@#$@!!$$’।

दरअसल, कुछ दिन पहले गोपाल मंडल का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में मंडल हाथ में पिस्टल लेकर भागलपुर के अस्पताल में भर्ती अपने परिजन से मिलने के लिए गए थे। इस वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और लोगों ने तरह-तरह की टिप्पणी की।

गोपाल मंडल का पूरा नाम नरेंद्र कुमार नीरज है और वह गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से जदयू के विधायक हैं। इसके पहले साल 2021 में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह अंडरवियर और बनियान में ट्रेन की बोगी में घूमते हुए नजर आए थे। इसको एफआईआर भी दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने उन पर नशे में होने का आरोप लगाया था।

दरअसल, जेडीयू विधायक गोपाल मंडल ट्रेन से दिल्‍ली जा रहे थे। दिल्ली जाने के लिए वे पटना स्‍टेशन से तेजस पर सवार हुए थे। ट्रेन में सवार होते ही उन्‍होंने अपने कपड़े उतार दिए। इसके बाद वे केवल अंडरवियर और बनियान पहने शौचालय जाने लगे। आरोप है कि चलती ट्रेन में उनकी इस हरकत पर आपत्ति जताने वाले एक यात्री से उन्‍होंने गाली-गलौज तक कर डाली। हालात बिगड़ने पर RPF को हस्‍तक्षेप करना पड़ा था।

यात्रियों के अनुसार विधायक ने उनके साथ इस दौरान धक्‍का-मुक्‍की भी की थी। बाद में विधायक ने इस मामले में सफाई देते हुए कहा कि उनका पेट खराब था और जल्‍दबाजी में शौचालय जाने के दौरान वे तौलिया नहीं लपेट सके। अंडरवियर और बनियान वाली तस्वीर देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

इतना ही नहीं, पिछले साल उनका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वे डांसर के साथ ‘दिलबर-दिलबर और बुलेट पर जीजा’ गाने पर नाच करते हुए दिखे थे। भोजपुरी गाने पर डांसर को नाच करते देख वे अपने आपको रोक नहीं सके और कुर्ता उठाकर नाचने लगे थे। इस दौरान स्टेज पर वे बार-बालाओं का हाथ पकड़कर और उन्हें फ्लाइंग किस देकर डांस करते रहे। 

साल 2022 में जहरीली शराब पीने से बिहार में हुई मौैत पर गोपाल मंडल ने कहा था, “जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बोल रहे हैं, मना कर रहे हैं तो फिर आप दारू क्यों पीते हैं? नीतीश कुमार ने पहले ही कहा है कि पीयोगे तो मरोगे। लोग पीते क्यों हैं, मरने ही के लिए, जगह भी तो खाली होनी चाहिए।”

शराब पीने से होने वाली मौत के फायदे गिनाते हुए मंडल ने कहा था, “अगर ऐसे ही मरते रहेंगे तो जनसंख्या घटेगी। बॉर्डर सील कर दिए गए हैं इसलिए कम शराब आ रही है। खेत के रास्ते शराब लाई जाती है। गरीब आदमी के लिए ही शराब बंद की गई, ऐसे में बनाई हुई शराब पीएगा कोई तो मरेगा ही।”

‘टोपी पहनने से कोई गाँधी नहीं हो जाता’: एनसीपी नेता पर भड़के अन्ना हजारे, मानहानि केस की दी धमकी

अन्ना हजारे ने अपने खिलाफ बयान देने वाले लोगों को लेकर चुप्पी तोड़ी है और वकील से सलाह-मशविरा के बाद मानहानि का केस करने की धमकी दी है। उन्होंने एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड के उस एक्स (पूर्व में ट्विटर) पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी है, जिसमें जितेंद्र आव्हाड ने कहा था कि अन्ना हजारे की वजह से देश का बड़ा नुकसान हुआ है। इसके जवाब में अन्ना हजारे ने कहा कि हाँ, हो सकता है कि मेरी वजह से ‘कुछ लोगों का’ नुकसान हुआ हो।

अन्ना हजारे ने दी केस करने की धमकी

अन्ना हजारे ने एएनआई से कहा, “अगर यह कहा जाए कि मेरी वजह से देश को नुकसान हुआ है, तो मेरे ही कारण देश में कई सारे ऐसे कानून बनाए गए हैं, जिनसे देश के लोगों को फायदा हुआ है। बहुत फायदा हुआ है। हाँ, मैं इस बात को खारिज नहीं कर रहा हूँ कि मेरे कई आंदोलन के कारण, उनके कई लोगों को नुकसान हुआ है। कई लोगों को मेरी वजह से घर पर बैठना पड़ गया।”

अन्ना ने आगे कहा, “मेरे कारण ही उनका यह नुकसान हुआ है और शायद वह इसे झेल नहीं पा रहे हैं। हालाँकि, कुछ लोगों का काम ही है कि वह मेरे ऊपर झूठे आरोप लगाएँ। मुझे बदनाम करें लेकिन मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता। मैं इस बारे में अपने वकील से विस्तार से बात करूँगा। जिन्होंने मुझ पर आरोप लगाए हैं, उनके खिलाफ मैं मानहानि का केस करूँगा। वकील से बात करने के बाद मैं देखूँगा कि कहाँ पर और किस तरह का केस दर्ज कराना है।”

जितेंद्र आव्हाण ने कही थी ये बात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाड ने अन्ना हजारे की फोटो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में टि्वटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि इस आदमी ने देशभर की यात्रा की थी। टोपी पहनने से कोई गाँधी नहीं बन जाता। जितेंद्र आव्हाड ने अन्ना हजारे पर निशाना साधते हुए कहा था कि अन्ना हजारे के कारण देश को नुकसान हुआ है।

कौन हैं अन्ना हजारे?

अन्ना हजारे एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्हें आमतौर पर “अण्णा” के नाम से जाना जाता है। वे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के लिए जाने जाते हैं, जिसने भारत में व्यापक जन आंदोलन को जन्म दिया। अन्ना हजारे का जन्म 15 जून, 1937 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के एक छोटे से गाँव भींगर में हुआ था। उन्होंने सेना में भी 12 साल काम किया है।

साल 2011 में अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन शुरू किया। उन्होंने एक जन लोकपाल विधेयक की माँग की, जो भ्रष्टाचारियों को सजा देने के लिए एक स्वतंत्र और मजबूत संस्था होगी। उनके आंदोलन ने लाखों लोगों को प्रेरित किया, और सरकार को जन लोकपाल विधेयक पारित करने के लिए मजबूर किया। अन्ना हजारे के आंदोलन ने भारत में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को एक नई दिशा दी। उन्होंने दिखाया कि आम लोग भी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं और सरकार को बदल सकते हैं। हालाँकि, उनके ही आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी के कई नेता भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

अन्ना हजारे को उनके काम के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें पद्म भूषण, राजीव गाँधी राष्ट्रीय सेवा पुरस्कार और लोक सेवा पुरस्कार शामिल हैं। वो मौजूदा समय में रालेगण सिद्धी में रहते हैं और कई आंदोलनों को चला चुके हैं। फॉरेन पॉलिसी नाम की मैगजीन ने अन्ना हजारे को साल 2011 में दुनिया के शीर्ष 100 विचारकों में शामिल किया था।

हिजाब नहीं पहनने पर एक लड़की को उसकी अम्मी ने जलाया, दूसरी लड़की को पुलिस ने मारते-मारते पहुँचा दिया कोमा में

हिजाब पहनने को लेकर ईरान और अमेरिका से दो हैरान करने वाले मामले सामने आए हैं। जहाँ तेहरान मेट्रो में हिजाब कानून को तोड़ने पर 16 साल की लड़की मेट्रो में एजेंटों के साथ टकराव के बाद कोमा में चली गई

वहीं अमेरिका के टेक्सास के किंगवुड में एक माँ ने अपनी बेटी को महज इसलिए मारा, पीटा, गला दबा डाला कि उसने इंस्टाग्राम पर बेटी को नंगे सिर देख लिया था। ईरान में अधिकारी इस घटना से इनकार कर रहे हैं और वहीं किंगवुड में बेटी को मारने वाली माँ को गिरफ्तार कर लिया गया है।

बात ईरान के तेहरान वाली घटना से शुरू करते हैं। यहाँ 16 साल की अर्मिता गेरावंद (Armita Geravand) को तेहरान मेट्रो में बगैर हिजाब के सफर करना भारी पड़ गया। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार (1 अक्टूबर, 2023 ) को अर्मिता की मेट्रो में इस्लामिक ड्रेस कोड लागू करने वाले अधिकारियों के साथ झड़प हो गई। इस ड्रेस कोड के मुताबिक महिलाओं को सिर ढकना जरूरी होता है। इस दौरान वो बुरी तरह से घायल होकर कोमा में चली गई। मेट्रो से ही उन्हें अस्पताल ले जाया गया।

ईरानी अधिकारियों ने ईरानी-कुर्द अधिकार समूह हेंगॉ के कार्यकर्ताओं की उन रिपोर्टों का भी सिरे से नकरा दिया है जिसमें जेरावंद के घायल होने और कोमा में जाने का दावा किया गया था। ये मामला यहीं पर ही नहीं थमा। हेंगॉ के मुताबिक, गुरुवार (5 अक्टूबर, 2023) को गेरावंद की माँ शाहीन अहमदी को उस अस्पताल के पास से गिरफ्तार कर लिया जहाँ उनकी बेटी का इलाज चल रहा है।

ईरान की न्यायपालिका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ईरानी-कुर्द अधिकार समूह हेंगॉ की रिपोर्ट का खंडन किया। देश की न्यूज एजेंसी आईआरएनए के मुताबिक, न्यायपालिका ने किसी भी गिरफ्तारी से इनकार किया है। इसमें कहा गया है कि अज्ञात लोग अपने फायदे के लिए गेरावंद के कोमा में होने की अफवाहें फैला रहे हैं।

अधिकार समूहों को डर है कि गेरावंद की किस्मत भी 22 साल की महसा अमिनी की तरह ही न हो। अमिनी की पुलिस की हिरासत में सितंबर 2022 में मौत हो गई थी। अमिनी की मौत से ईरान की सरकार के खिलाफ देश भर में बड़े विरोध प्रदर्शन हुए। विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए यहाँ खतरनाक कार्रवाई की गई।

बता दें कि राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी ने सख्त रुख अपनाते हुए एक नया हिजाब कानून लागू कर डाला जिसमें सार्वजनिक जगहों पर हिजाब न पहने वाली लड़कियों और औरतों को सजा दी जाती है। बीते महीने ही इस कानून को लेकर संयुक्त राष्ट्र के वहाँ तैनात मानवाधिकार अधिकारियों ने फ्रिक जताई थी।

उधर दूसरी तरफ अमेरिका के टेक्सास के पूर्वोत्तर ह्यूस्टन के किंगवुड में 36 साल की सितार मजहर खान ने हिजाब न पहनने को लेकर अपनी 14 साल की बेटी पर अमानवीय अत्याचार किया। सितार ने न सिर्फ पीटा बल्कि ब्रेड ठीक से गर्म न करने पर बेटी को गर्म ओवन रैक से जला भी डाला।

हैरिस काउंटी के प्रासीक्यूटर ने सितार पर परिवार के एक सदस्य पर हमला करने, बच्ची को शारीरिक चोट पहुँचाने का आरोप लगाया। सितार को बुधवार (4 अक्टूबर,2023) को इन आरोपों के तहत गिरफ्तार कर लिया गया।

कोर्ट में इस मामले की सुनवाई कर रहे एक अधिकारी के मुताबिक, सितार अपनी बेटी को इंस्टाग्राम पर बगैर हिजाब के देख अपना आपा खो बैठी और उसकी पिटाई के साथ ही गला दबाया। इससे उनकी बेटी बेहोश हो गई।

प्रॉसीक्यूटर ने कुल 75,000 डॉलर का बांड माँगा था, लेकिन अधिकारी ने दोनों आरोपों के लिए सितार खान पर 20,000 डॉलर का बांड तय किया। सुनवाई अधिकारी ने कहा कि पीड़ित बच्ची बाल सुरक्षा सेवा में है।