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सब्जी छीली, बर्तन धोए, जूते उठाए… स्वर्ण मंदिर में राहुल गाँधी की ‘सेवा’ से नहीं पसीजा SGPC, पूछा- दादी-पिता के ‘कर्मो’ का प्रायश्वित करने आए हो

कॉन्ग्रेंस नेता राहुल गाँधी के अमृतसर स्वर्ण मंदिर जाने और सेवा देने पर शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) ने खासा एतराज जताया है। भले ही वहाँ उन्होंने महिला श्रद्धालुओं के साथ बैठकर सब्जियाँ छीलीं, श्रद्धालुओं को रोटियाँ परोसी, बर्तन धोए, जोड़ा घर से जूते उठाए, लंगर चखा और मत्था टेका हो। भले ही कुछ सिख विद्वानों ने उनकी सेवा को सराहा, लेकिन एसजीपीसी को उनका ये करना जरा भी रास नहीं आया।

एसजीपीसी ने कहा कि उसने दरबार साहिब की यात्रा के दौरान राहुल गाँधी को पूरा सहयोग दिया। हालाँकि एसजीपीसी के महासचिव हरचरण सिंह ग्रेवाल ने उनकी मंशा पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने 1984 का मामला उठाया और कहा कि ये किसी अन्य गैर-सिख राजनेता का यहाँ सबसे लंबा प्रवास है आखिर इसका मकसद क्या है?

दरअसल, कॉन्ग्रेस नेता दो दिनों तक स्वर्ण मंदिर में अपनी सेवा देते रहे। उन्होंने इसे लेकर अपने इंस्टाग्राम पर मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को तस्वीरे पोस्ट करते हुए लिखा, “आज,अमृतसर में स्वर्ण मंदिर, श्री हरमंदिर साहिब पहुँच कर मत्था टेका और सेवा आरंभ की।” वहाँ से निकलने से पहले उन्होंने अरदास भी की।

‘राहुल की दादी ने अकाल तख्त पर हमला करवाया’

भले अधिकांश सिख संगठन राहुल गाँधी के इस दौरे पर चुप्पी साधे रहे और इसे उनकी निजी और आध्यात्मिक यात्रा कहते रहे हों, लेकिन एसजीपीसी इस सबसे नहीं पसीजा। एसजीपीसी महासचिव हरचरण सिंह ग्रेवाल ने एक बयान में कहा, ”राहुल गाँधी की दादी ने अकाल तख्त पर हमला किया था। उनके पिता ने दिल्ली में सिखों के नरसंहार को जायज ठहराते हुए कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती काँप उठती है। किसी ने हमारे जख्मों पर मरहम नहीं लगाया। क्या हम उनके इस दौरे को पश्चाताप कह सकते हैं?”

हरचरण सिंह ग्रेवाल ने आगे कहा, “क्या वह (राहुल गाँधी) उन कॉन्ग्रेस नेताओं पर टिप्पणी करेंगे जिन्होंने सिखों का नरसंहार किया और फिर भी वो लोग कॉन्ग्रेस पार्टी की बैठकों में शामिल रहे? प्रियंका गाँधी जेल में उस महिला से मिलने गईं जो उनके पिता की हत्या में शामिल थी, लेकिन वे कभी दिल्ली की विधवा कॉलोनी में नहीं गए। क्यों?” जब तक इन सवालों का जवाब नहीं दिया जाता तब तक कुछ भी हमारे जख्मों का इलाज नहीं कर सकता।”

‘शायद उनको हो पछतावा’

इस बीच, अकाली दल की दिल्ली यूनिट के अध्यक्ष परमजीत सिंह सरना ने गाँधी की इस यात्रा और उनके स्वर्ण मंदिर में उनकी सेवा की तारीफ की। उन्होंने कहा, मैं उनके सद्भाव की इज्जत करता हूँ। एसजीपीसी को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि सिखो को इतिहास से भी सीख लेनी चाहिए। जहाँगीर ने गुरु अर्जन देव की हत्या करवाई थी, लेकिन गुरु हरगोबिंद सिंह ने इसके बावजूद उनसे अच्छे रिश्ते रखे।

उन्होंने कहा कि किसी के पूर्वजों की गलतियों के लिए उस पर दोष थोपना सिखों की परंपरा नहीं है। वहीं साल 1984 की राज्य की कार्रवाइयों की कड़ी आलोचना करने वाले लेखक अजमेर सिंह का कहना है, “कॉन्ग्रेस के साथ हमारा वैचारिक टकराव है। वह राजनीति है, लेकिन हमें निंदक नहीं होना चाहिए। एक मानवीय कारक भी है।”

उन्होंने आगे कहा हो सकता है कि राहुल गाँधी को अतीत में जो कुछ हुआ उसका पछतावा हो। एसजीपीसी को उन पर हमला नहीं करना चाहिए था। अगर उन्होंने कोई राजनीतिक बयान दिया होता तो बात अलग होती। शिरोमणि अकाली दल ने भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और अन्य की यात्रा की सुविधा दी थी।

नूहं हिंसा में कॉन्ग्रेस MLA मामन खान को अंतरिम जमानत, रिहाई के बाद जुटी समर्थकों की भारी भीड़: उधर हिन्दुओं की बैठक, पूछा – मोनू मानेसर जेल में क्यों?

जुलाई 2023 के अंत में हरियाणा के नूहं में हुई हिन्दू विरोधी हिंसा के मामले में कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान को अंतरिम जमानत मिल गई है। वहीं हिन्दू कार्यकर्ताओं ने उसकी रिहाई का विरोध किया है। फिरोजपुर झिरका से विधायक मामन खान का नाम मेवात के नल्हड़ मंदिर पर हुए हमले और उसके बाद भड़की हिंसा में सामने आया था। मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) को नूहं की अदालत ने उसे 2 मामलों में अंतरिम जमानत दे दी। 18 अक्टूबर को इस पर अगली सुनवाई होगी, तब तक के लिए उसे अंतरिम राहत मिली है।

मामन खान को इसके बाद रिहा कर दिया गया है। एडिशन डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशन जज अजय शर्मा ने उसे अंतरिम जमानत दी। मामन खान को 15 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। आपको याद होगा कि कैसे मेवात में हिन्दू कार्यकर्ताओं द्वारा निकाली जा रही शोभा यात्रा पर हमला किया गया था। पत्थरबाजी से वारदात शुरू हुई और बाद में भीड़ अस्पताल तक में घुस गई। सोहना, गुरुग्राम, फरीदाबाद और पलवल तक में हिंसा फ़ैल गई थी। मेवात में ‘लव जिहाद’ की कई घटनाएँ भी सामने आती रही हैं।

अब गोरक्षक मोनू यादव के गाँव मानेसर में मामन खान की रिहाई के आदेश के बाद हिन्दुओं की पंचायत बैठी। गाँव स्थित भीष्म मंदिर में ये बैठक हुई। बता दें कि राजस्थान में नासिर-जुनैद हत्याकांड में मोनू यादव का नाम आया था, जिसके बाद हरियाणा पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर के राजस्थान पुलिस को सौंप दिया। 7 अक्टूबर को दोबारा हिन्दू कार्यकर्ताओं की बैठक होगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने पूछा कि जब कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान को जमानत मिल सकती है तो फिर मोनू मानेसर को क्यों नहीं?

अंतरिम जमानत के बाद मामन खान अपने समर्थकों के साथ कॉन्ग्रेस नेता आफताब अहमद के आवास पर पहुँचा। कुछ दिनों पहले VHP की बैठक में इमरान नाम का एक संदिग्ध युवक मिला था, जिसके बाद पत्रकारों और बाहरी लोगों को बैठक में एंट्री नहीं दी जा रही है। पटौदी पुलिस भी एक मामले को लेकर मोनू मानेसर को राजस्थान से लाने की जुगत में लगी है। वहीं अब नूहं हिंसा में मामन खान की रिहाई के बाद ये सवाल भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद उसके साथ नरमी क्यों बरती जा रही है?

‘रामसेतु को विरासत घोषित कर उस पर बनाई जाए दीवार’: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका में टैग से भी इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (3 अक्टूबर 2023) को रामसेतु के समुद्र वाले हिस्से में कुछ किलोमीटर तक दीवार बनाने की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता ने इसके पीछे तर्क दिया था कि इससे लोग वहाँ जाकर ‘दर्शन’ कर सकेंगे। इसके साथ ही याचिका में राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की भी प्रार्थना की गई है।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ इस याचिका को खारिज कर दिया। पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि यह एक प्रशासनिक मामला है और याचिकाकर्ता को इसके बजाय सरकार से संपर्क करना चाहिए।

याचिकाकर्ता अशोक पांडे ने अपनी याचिका में पीठ से अनुरोध किया था कि उनकी याचिका को सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के साथ टैग किया जाए। दरअसल, स्वामी ने ‘राम सेतु’ को राष्ट्रीय विरासत का दर्जा देने की माँग की है, जो कि लंबित है। स्वामी ने सुप्रीम कोर्ट को कहा था कि इसे राष्ट्रीय विरासत का दर्जा देने की प्रक्रिया जारी है।

याचिकाकर्ता से जस्टिस कौल ने सवाल किया कि इस मसले पर सुब्रमण्यम स्वामी की एक याचिका लंबित है। उन्होंने कहा कि अगर एक याचिका लंबित है तो एक और याचिका की क्या आवश्यकता क्या है। उन्होंने याचिकाकर्ता पांडे से पूछा, “आप क्या चाहते हैं? अदालत दीवार बनाने का निर्देश कैसे दे सकती है? ये प्रशासनिक मामले हैं।”

इसके बाद याचिकाकर्ता ने अदालत से अनुरोध किया कि इस याचिका को सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका के साथ टैग कर दिया जाए। इस पर जज ने कहा, “नहीं, हम इसे नहीं जोड़ रहे हैं… हम याचिकाकर्ता द्वारा माँगे गए किसी भी निर्देश देने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। खारिज की जाती है।”

बता दें कि इस बिंदु पर सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका कोर्ट में लंबित है। उस याचिका पर केंद्र सरकार (Central Government) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया था कि इस ऐतिहासिक धरोहर को राष्ट्रीय विरासत स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया संस्कृति मंत्रालय में चल रही है।

अशोक पांडे की याचिका पर मार्च 2023 में सुनवाई हुई थी। याचिका में यह भी कहा गया था कि रामसेतु पर दीवार बनाए जाने से करोड़ों लोगों की इच्छा पूरी होगी। वे उस ऐतिहासिक और पौराणिक पुल पर चल सकेंगे, जिस पर चलकर भगवान राम अपनी सेना के साथ लंका गए गए थे और वहाँ जाकर जाकर अत्याचारी रावण को मारकर राम राज्य की स्थापना की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी को कहा था कि अगर उनके पास इससे संबंधित कोई अन्य दस्तावेज या सामग्री है तो वो संस्कृति मंत्रालय को दे सकते हैं। कोर्ट ने यह भी कहा था कि स्वामी चाहें तो मंत्रालय के समक्ष अतिरिक्त बातें रख सकते हैं। इस पर स्वामी था ने कहा कि वे अपनी बातें रख चुके हैं।

बता दें कि भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद सु्ब्रमण्यम स्वामी (Subramaniyan Swamy) ने रामसेतु को ऐतिहासिक स्मारक के रूप में मान्यता देने की माँग वाली याचिका दाखिल की थी। इसके बाद उन्होंने साल 2020 में इस याचिका पर जल्द सुनवाई की माँग की थी।

इससे पहले केंद्र सरकार ने 12 जनवरी 2023 को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि स्वामी की याचिका पर वह फरवरी के पहले सप्ताह में जवाब दाखिल करेगी। जस्टिस चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने सुनवाई फरवरी के दूसरे सप्ताह में करने की बात कही थी। हालाँकि, मामले को गुरुवार (19 जनवरी 2023) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर लिया गया।

भाजपा नेता ने स्वामी ने कहा कि वह मुकदमे का पहला दौर उसी समय जीत चुके थे, जब केंद्र सरकार ने रामसेतु के अस्तित्व को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि उनकी माँग पर विचार करने के लिए 2017 में बैठक संबंधित मंत्री ने बैठक बुलाई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

बता दें कि सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इससे पहले की कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली यूपीए सरकार के पहले कार्यकाल में सेतुसमुद्रम पोतमार्ग परियोजना के खिलाफ जनहित याचिका दायर किया था। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा और उसके बाद साल 2007 मे इस परियोजना पर रोक लगा दी।

गाँव, स्कूल, वन विभाग – सबकी जमीन पर प्रेम यादव का कब्ज़ा, वहीं दूसरों की गाड़ी चला कर परिवार चलाते थे सत्यप्रकाश दुबे: MLA बोले – देवरिया नरसंहार भू-माफिया बनाम गरीब

उत्तर प्रदेश के देवरिया में एक ही परिवार के 5 लोगों की हत्या कर दी गई, जिनमें 3 बच्चे थे। एक व्यक्ति की हत्या का बदला लेने के लिए ये सब किया गया। प्रेम यादव का शव मिलने के बाद उसके परिजनों समर्थकों ने मिल कर सत्य प्रकाश दुबे के घर पर हमला कर दिया गया। सत्य प्रकाश दुबे, उनकी पत्नी, 2 बेटियाँ और एक बेटे को मार डाला गया। अब देवरिया के विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि ये भू-माफिया बनाम एक गरीब परिवार की लड़ाई है। उन्होंने इसके सबूत के रूप में स्थानीय अख़बारों की कतरनें भी शेयर की।

सत्यप्रकाश दुबे के बेटे ने बताया है कि प्रेम यादव उनके घर आकर धमकी दे रहा था, फिर वो मारपीट करने लगा। उसने ये भी बताया कि प्रेम यादव ने उसकी बहन के साथ भी बदतमीजी की। वो थप्पड़ चलने लगे। उसने बताया कि उनके पिता को भीड़ ने घेर लिया और फिर हत्या की गई। प्रेम यादव के ज़िंदा बचे 2 बेटों में से बड़े वाले ने अपना दुःख बयाँ करते हुए कहा कि भीड़ ने सबके सामने उनके पिता को मार डाला। सोशल मीडिया में भी इस घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

जर्जर घर, ऊपर से मुकदमे: सत्यप्रकाश दुबे का परिवार था गरीब

इनमें से एक खबर ‘हिंदुस्तान’ की है, जिसमें बताया गया है कि सत्यप्रकाश दुबे का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। सत्यप्रकाश दुबे परिवार के भरण-पोषण के लिए प्राइवेट वाहन चलाया करते थे। उनकी बेटी प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी, ताकि परिवार के खर्चों में पिता का सहयोग कर सके। वहीं एक बेटा एक दुकान में काम करता था। दूसरा बेटा देवरिया में शास्त्री की पढ़ाई के साथ-साथ धार्मिक अनुष्ठान कर के अपना खर्च चलाता था। ऊपर से मुकदमों के कारण परिवार परेशान रहता था।

गरीबी का आलम ये था कि दुबे परिवार का घर भी जर्जर स्थिति में था। घर में से जब एक के बाद एक कर के 5 शव निकाले गए, तो लोगों ने घर की हालत देखी। सत्यप्रकाश दुबे और उनकी पत्नी किरण के 6 बच्चे थे – शोभिता, देवेश, सलोनी, नंदिनी, गाँधी और अनमोल थे। इनमें से सलोनी, नंदिनी और गाँधी को मार डाला गया। गाँधी जयंती के दिन जन्म होने के कारण एक बेटे का नाम गाँधी रखा गया था, और उसकी हत्या भी गाँधी जयंती के दिन ही कर दी गई।

सत्यप्रकाश दुबे के घर की ये स्थिति थी कि बरसात में सिर ढँकने के लिए भी आफत आ जाती थी। एक शेड में पूरा परिवार रहता था। शोभिता की जहाँ शादी हो गई थी, वहीं देवेश सबसे बड़ा बेटा था जो शास्त्री की पढ़ाई कर रहा था। सलोनी गाँव में ही एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती थी। गाँधी पकड़ी बाजार स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान में काम करता था। देवेश इसीलिए बच गए, क्योंकि हमले के वक्त वो एक अनुष्ठान कार्यक्रम के लिए बलिया गए हुए थे।

प्रेम यादव का सपा कनेक्शन, भू-माफिया होने के आरोप

वहीं एक अन्य अख़बार के स्थानीय संस्करण में प्रेम यादव के बारे में भी बताया गया है कि कैसे उसका समाजवादी पार्टी से कनेक्शन था। जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर प्रेम यादव अक्सर विवादों में रहता था। जमीं पर कब्जे के लिए वो धन और सियासी बल का इस्तेमाल करता था। कई महँगी जमीनों को दबंगई के जरिए कम दाम में खरीदने के आरोप उस पर लगे हैं। रुद्रपुर मोड़ पर उसने 3 कट्ठा विवादित जमीन खरीदी थी, उसे लेकर भी पंचायत बैठी थी।

ग्रामीणों के हवाले से बताया गया है कि प्रेम यादव ने एक सरकारी शिक्षण संस्थान और ग्राम सभा की जमीन तक कब्जा ली और उस पर आलीशान भवन खड़ा कर दिया। जिला पंचायत सदस्य रहते उसने गाँव की एक एकड़ जमीन कब्जा ली थी। गाँव में एक ऐसी जमीन है जो मानस विद्यालय नाम से दर्ज है, लेकिन उस पर कब्ज़ा प्रेम यादव का है। GS स्कूल और खलिहान के नाम से दर्ज जमीन पर भी उसका कब्ज़ा है। वन विभाग, स्कूल और गाँव – तीनों की जमीन पर उसने कब्जे किए।

ये भी आरोप लगा है कि राजस्व विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत से वो इन करतूतों को अंजाम देता था। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामाशीष निषाद ने कहा कि राजस्व विभाग में कई बार आवेदन दिए जाने के बावजूद कब्जा हटाने की कार्रवाई नहीं हुई। फतेहपुर गाँव में रहने वाले प्रेम यादव की माँ भी ग्राम प्रधान रह चुकी थीं। सत्यप्रकाश दुबे के भाई ज्ञानप्रकाश का कोई परिवार नहीं था, ऐसे में उन्हें अपने साथ रख कर उसने उनकी जमीन भी अपने नाम करा ली थी।

इन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा, “ग्राउंड ज़ीरो से सैकड़ों मील दूर बैठे जो लोग देवरिया की घटना का आकलन अपने अपने हिसाब से कर रहे है, उनके लिए प्रस्तुत है स्थानीय अखबारो की ये खबरें। ये जंग भूमाफ़िया बनाम एक बेहद गरीब परिवार की है, लिहाज़ा इंसाफ की जंग हर हाल में लड़ी जाएगी।” उन्होंने सत्यप्रकाश दुबे के घर जाकर उनके बेटे से मुलाकात की और स्थानीय लोगों से इस घटना के बारे में जाना, साथ ही सहयोग का आश्वासन दिया।

असम में बाल विवाह के खिलाफ हिमंता सरकार का एक्शन जारी, दूसरे चरण में 1039 गिरफ्तार: पहले फेज में पकड़े गए लोगों में 63% मुस्लिम

असम की हिमंता सरकार द्वारा बाल विवाह के खिलाफ चलाए गए एक बड़े अभियान में 1039 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पूरे राज्य में बाल विवाह के खिलाफ दूसरे चरण का ये अभियान मंगलवार (3 अक्टूबर, 2023) की सुबह चलाया गया। आगे भी इस अभियान के जारी रहने की खबर सामने आई है।

इस बीच राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है। बता दें कि इस साल फरवरी में भी असम सरकार ने राज्य में बाल विवाह के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई शुरू की थी। इसमें एक महीने में 3141 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

पंचायत सचिव सहित कई सोर्स से ली जानकारी

पिछली कार्रवाई में गिरफ्तार लोगों के रिकॉर्ड के इंडियन एक्सप्रेस के विश्लेषण से पता चला था कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से 62.24 फीसदी मुस्लिम थे, जबकि बाकी हिंदू या अन्य समुदाय के लोग थे।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दूसरे चरण में राज्य भर में 916 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस का कहना है कि इस अभियान के तहत 706 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 1,041 लोग आरोपित हैं।

गिरफ्तार लोगों में 551 पुरुषों पर कम उम्र की लड़कियों से शादी करने का आरोप है। वहीं 351 पति या पत्नी के रिश्तेदार हैं। इसके साथ ही 14 मौलवी आदि हैं जिन्होंने ये शादी करवाई थी।

अब तक 35 पुलिस जिलों में से 31 में गिरफ्तारियाँ हुई हैं। कामरूप (मेट्रो) के तहत आने वाले गुवाहाटी शहर में सबसे ज्यादा गिरफ्तारियाँ हुई हैं। इसके बाद धुबरी में 192 और बारपेटा जिले में 142 में लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इन जिलों के बाद हैलाकांडी 59, कामरूप में 50 और करीमगंज 47 लोगों को पकड़ा गया। बारपेटा के पुलिस अधीक्षक अमिताव सिन्हा ने कहा कि जिले में गिरफ्तार किए गए सभी 142 लोगों को रात के दौरान उठाया गया था।

उन्होंने आगे कहा, “हमने कई सोर्स से जानकारी इकट्ठा की थी। इसमें पिछले अभियान के दौरान बाल विवाह निषेध अधिकारी के रूप में नियुक्त पंचायत सचिव भी शामिल थे। उसके बाद ही गिरफ्तारियाँ शुरू की गईं।”

सीएम सरमा की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी

गौरतलब है कि सीएम सरमा की किसी भी सामाजिक बुराई के खिलाफ जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के ऐलान के बाद ही असम सरकार ने बाल विवाह के खिलाफ एक्शन शुरू किया। इस साल की शुरुआत में असम सरकार ने फरवरी में बाल विवाह के खिलाफ इस अभियान का पहला चरण चलाया था। तब उन्होंने प्रजनन और बाल स्वास्थ्य (आरसीएच) पोर्टल का हवाला देते हुए कहा था कि बीते साल असम में 6.2 लाख से अधिक गर्भवती महिलाओं में से लगभग 17 फीसदी किशोरियाँ थीं।

दरअसल, राज्य सरकार ने बाल विवाह के “पीड़ितों” के पुनर्वास पर एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया है। इसमें सीएम सरमा के कैबिनेट सहयोगियों रानोज पेगु, केशब महंत और अजंता नियोग को पैनल का सदस्य बनाया था। वहीं अब विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया ने इस अभियान की आलोचना करते हुए कहा कि हम पुलिस बल के जरिए बाल विवाह नहीं रोक सकते हैं।

बाल विवाह करने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर 11 सितंबर को ही राज्य के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने असम विधानसभा में बताया था कि बीते 5 साल में बाल विवाह से जुड़े मामलों में कुल 3907 गिरफ्तारियाँ की गईं।

इसमें से 3319 के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) एक्ट 2012 के तहत आरोप तय किए गए थे। हालाँकि, अदालत ने बाल विवाह निषेध अधिनियम-2006 के तहत अब तक केवल 62 लोगों को दोषी ठहराया है।

चीन के जाल में फँसकर मर गए चीन के ही 55 नौसैनिक, पनडुब्बी में दम घुटने से हुई सबकी मौत: रिपोर्ट में बताया- अमेरिकी सबमरीन के लिए डाला था फंदा

अपनी ही जाल में फँसकर चीन के 55 नौसैनिकों के मारे जाने की आशंका है। चीन के नौसैनिकों की मौत परमाणु संपन्न पनडुब्बी के अंदर ऑक्सीजन खत्म होने के बाद दम घुटने से हुई है। यह दावा समाचारपत्र ‘द मिरर’ ने ब्रिटिश खुफिया रिपोर्ट के हवाले से किया है।

मिरर में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चीन की एक पनडुब्बी अपनी नौसेना द्वारा बनाए गए एक जाल में फँस गई। यह जाल अमेरिकी और ब्रिटिश जहाज़ों को फँसाने के लिए बुना गया था। यह घटना अगस्त की है। यह सारे दावे मिरर ने एक ब्रिटिश खुफिया रिपोर्ट के माध्यम से किए हैं।

जिन नौसैनिकों के मरने की आशंका जताई जा रही है, वे पनडुब्बी 093-417 पर तैनात थे। यह पनडुब्बी घटना के दौरान पीले सागर में थी। इस पनडुब्बी के समस्या में फँसने और इस पर तैनात नौसैनिकों के मरने की खबर को चीन की सरकार ने नकार दिया है।

ब्रिटिश रिपोर्ट में लिखा गया है, “21 अगस्त 2023 को स्थानीय समय सुबह 8:12 बजे इस पनडुब्बी में एक दुर्घटना हुई। उस समय वह पीले सागर में अपने मिशन पर थी। इस घटना में 55 नौसैनिकों की मृत्यु हुई है। इन नौसैनिकों में 22 ऑफिसर, 7 कैडेट ऑफिसर, 9 पेटी ऑफिसर और 17 नाविक थे।”

रिपोर्ट में आगे बताया गया है, “जिन नौसैनिकों की मृत्यु हुई है, उनमें इस पनडुब्बी के कप्तान जू-योंग-पेंग भी शामिल हैं। हमारा मानना है कि पनडुब्बी में ऑक्सीजन की कमी हो गई, जिससे उन सबकी मौत हो गई। पनडुब्बी जहाज रोकने के लंगर और चेन से टकरा गई, जिससे इसके कई सिस्टम खराब हो गए और इन्हें बनाने में 6 घंटे से अधिक लगे। इसी के कारण पनडुब्बी में अंदर जहरीली हवा फ़ैल गई और लोगों की मौत हो गई।”

जिस पनडुब्बी पर यह दुर्घटना हुई वह 093 टाइप की पनडुब्बी थी। इस पनडुब्बी के चलने पर काफी कम शोर होता है, जिससे दुश्मन आसानी से इन्हें पकड़ नहीं पाते। यह पनडुब्बी चीनी नौसेना के आधुनिकीकरण का हिस्सा है। यह परमाणु ईंधन से चलती है।

यदि यह खबर सही साबित होती है तो यह बीते वर्षों में हुए भीषण सैन्य हादसों में से एक होगा। हालाँकि, चीन ने इस रिपोर्ट को एकदम निराधार बताया है और ऐसी किसी भी घटना से इंकार किया है। ब्रिटिश ख़ुफ़िया एजेंसी ने भी इस रिपोर्ट पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार किया है।

जाति गिनने वाले बिहार से कमाने पंजाब आए सुशील मंडल, फिर भी पेट भरने को पड़े लाले तो तीन बेटियों को दूध में जहर देकर मार डाला

पंजाब के जालंधर से दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। जालंधर के कानपुर में बिहार के कटिहार से आया एक दंपती अपने 5 बच्चों, जिसमें 4 बेटियाँ और एक बेटा था, के साथ रहता था। इस दंपती ने अपनी तीन बड़ी बेटियों को जहर मिला दूध पिला दिया और उन्हें बक्से में बंद कर दिया। तीनों बच्चियों की तड़प कर मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने आरोपित माता-पिता को गिरफ्तार कर लिया है।

बिहार के कटिहार का रहने वाला है आरोपित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जालंधर के कानपुर में सुशील मंडल अपने परिवार के साथ रहता था। वो बिहार के कटिहार जिले के पोठिया ओपी क्षेत्र में आने वाले डुमर पंचायत का निवासी था और जालंधर में चार साल से मजदूरी करता था। सुशील शराब पीने का आदी था और कमाई कम थी। इस वजह से उसने अपनी तीन बड़ी बेटियों को पत्नी के साथ मिलकर मार डाला, क्योंकि वो पाँचों बच्चों का पालन-पोषण नहीं कर पा रहा था। मरने वाली बच्चियों के नाम अमृता कुमारी (9 वर्ष), साक्षी (7 वर्ष) और कंचन (4 वर्ष) थी।

पुलिस ने जाँच के बाद किया गिरफ्तार

जानकारी के मुताबिक, सुशील और उसकी पत्नी मंजू देवी ने अपने बचाव में बच्चियों के अगवा होने की झूठी कहानी रची, मगर ये पुलिस के आगे अधिक देर तक टिक नहीं सकी। जालंधर के एसएसपी (ग्रामीण) मुखविंदर सिंह भुल्लर और एसपी मनप्रीत सिंह ढिल्लों ने इस मामले में मीडिया से बातचीत की और बताया कि सूचना पाकर डीएसपी बलवीर सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे थे। उन्होंने शुरूआती जाँच के बाद हत्यारोपी सुशील मंडल और उसकी पत्नी मंजू देवी को गिरफ्तार कर लिया।

रविवार सुबह जहरीला दूध पिलाया

एसएसपी ने बताया कि आरोपित सुशील मंडल शराब का आदी था। उसने रविवार की सुबह करीब साढ़े सात बजे बच्चियों को जहरीला दूध पिलाकर बक्से में बंद कर दिया और खुद काम पर चला गया। इसमें उसकी पत्नी मंजू देवी ने भी साथ दिया। वो सोमवार को घर छोड़कर भागने वाले थे, लेकिन बक्से की वजह से फँस गए। उन्होंने कहा कि दंपती के बाकी बचे दोनों बच्चों अनुष्का (2 वर्ष) और एक साल के बेटे शनि को चाइल्ड केयर होम भेजा जाएगा।

स्कूल में छोटे-छोटे बच्चों से पढ़वाई नमाज़, भड़के अभिभावकों ने किया प्रदर्शन: ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ के नाम पर पहनाई इस्लामी टोपी

गुजरात के अहमदाबाद में एक स्कूल ने ईद (मीलाद उन-नबी) के मौके पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में हिन्दू बच्चों से नमाज पढ़वाई है। इन बच्चों को नमाज की जालीदार टोपी और कुर्ता-पैजामा भी पहनाया गया। इस कार्यक्रम का वीडियो वायरल होने के बाद बच्चों के अभिभावकों ने प्रदर्शन किया है।

जानकारी के अनुसार, अहमदाबाद के घातलोडिया में स्थित कैलोरेक्स स्कूल में शुक्रवार (29 सितम्बर, 2023) को ईद (मीलाद उन-नबी) के मौके पर एक कथित सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर छोटे-छोटे बच्चों को नमाज़ वाली ड्रेस पहना कर उनसे ‘लब पर आती है दुआ’ वाला मजहबी तराना गवाया गया। उनको इस दौरान नमाज़ करना सिखाया गया।

यह पूरा कार्यक्रम बच्चों के अभिभावकों से अनुमति लिए बिना किया गया। जब इस घटना का वीडियो वायरल हुआ तो अभिभावक भड़क गए। यह सूचना हिन्दू संगठनों को भी मिली कि स्कूल में एक विशेष मजहब के तौर-तरीके छोटे बच्चों को सिखाए गए हैं।

हिन्दू संगठनों और अभिभावकों ने स्कूल में इस बात पर 3 अक्टूबर, 2023 विरोध प्रदर्शन किया और प्रधानाध्यापक के इस्तीफे की माँग की। बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल से अपने बच्चों का नाम कटवाने की भी बात की। उनका कहना था कि छोटे बच्चों को नमाज़ सिखाना उनके मस्तिष्क पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और वह इसकी कभी अनुमति नहीं देंगे।

नमाज़ पढ़वाने पर स्कूल ने माँगी माफ़ी

हिन्दू संगठनों और अभिभावकों का कड़ा विरोध देखकर स्कूल ने एक माफ़ीनामा जारी किया। इस माफ़ीनामे में उन्होंने इस कार्यक्रम को भूल बताया और कहा कि भविष्य में ऐसा कोई भी कृत्य वह नहीं दोहराएँगे। स्कूल के विरुद्ध अब शिक्षा विभाग भी एक्शन में आ गया है। अहमदाबाद के जिला शिक्षा अधिकारी रोहित चौधरी ने ऑपइंडिया को बताया कि स्कूल को इस वायरल वीडियो के मामले में एक नोटिस भेजा गया है।

उन्होंने कहा, “हमने स्कूल को नोटिस भेजकर इस मामले में जवाब माँगा है। उनका जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।” स्कूल को भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि उसका जो वीडियो वायरल हुआ है उससे लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे ही मामले

ऐसा नहीं है कि यह कोई पहला मामला है जिसमें हिन्दू बच्चों को दूसरे मजहबों के तौर-तरीके सिखाए गए हों। ईद-उल-मिलाद के मौके पर मध्य प्रदेश के गुना में ऐसा ही एक मामला हाल में ही सामने आया था। गुना के प्रिंस पब्लिक स्कूल में 27 सितम्बर, 2023 को ईद के लिए एक कथित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें हिन्दू बच्चियों को हिजाब पहना कर उनसे ‘भर दे झोली मेरी या मुहम्मद’ जैसे गीत गवाए गए थे।

इसके पश्चात हिन्दू संगठनों द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शन के कारण प्रधानाध्यापक और इस कार्यक्रम को आयोजित करने वाले शिक्षक को नौकरी से निकाल दिया गया था। स्कूल ने इस घटना पर माफ़ी माँगी थी और दोबारा ऐसी हरकत ना करने का वादा किया था। इससे पहले गुजरात के कच्छ से जून 2023 में एक मामला सामने आया था जहाँ ईद के मौके पर पर्ल हार्बर स्कूल में हिन्दू बच्चों को गोल टोपियाँ पहनाई गई थी। स्कूल ने विरोध के पश्चात माफ़ी माँगी थी।

जिस साध्वी को चमड़े के बेल्ट से पीटा, पुरुष कैदियों के साथ रख पोर्न वीडियो देखने को किया मजबूर, वह कोर्ट में हुईं भावुक: जानिए मामला

मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर मंगलवार (3 अक्टूबर 2023) को मालेगाँव धमाकों के संबंध में हो रही सुनवाई के दौरान भावुक हो गईं। साध्वी प्रज्ञा के भावुक होने के कारण कोर्ट ने अपनी कार्यवाही 10 मिनट के लिए रोक दी और उनके सामान्य होने पर फिर कार्यवाही शुरू की।

दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ठाकुर वर्ष 2008 में हुए मालेगाँव धमाकों के सम्बन्ध में NIA के विशेष कोर्ट के समक्ष अपना बयान दर्ज करवा रही थीं। उनके साथ मालेगाँव धमाके में आरोपित बनाए गए अन्य 7 व्यक्तियों का भी बयान दर्ज किया जा रहा था।

साध्वी प्रज्ञा के साथ जिन अन्य लोगों के बयान दर्ज किए गए उनमें लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, मेजर (रिटायर्ड) रमेश उपाध्याय, सुधाकर चतुर्वेदी, सुधाकर द्विवेदी, समीर कुलकर्णी और अजय राहिरकर शामिल हैं। इस दौरान साध्वी से लगभग 60 प्रश्न पूछे गए।

साध्वी से जब धमाके के बाद मृत और घायल लोगों को आई चोटों के सम्बन्ध में प्रश्न पूछे गए तो वह भावुक हो गईं। इसके पश्चात मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश एके लाहोटी ने कार्रवाई को 10 मिनट के लिए रोक दिया। मालेगाँव में 29 सितम्बर को हुए इन धमाकों में 9 लोगों की मृत्यु हुई थी और 100 से अधिक घायल हुए थे।

बताया गया था कि यह धमाके एक मोटरसाईकिल में बम लगाकर किए गए थे। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित समेत अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था। NIA द्वारा वर्ष 2016 में दाखिल अंतिम चार्जशीट में उनका नाम नहीं था और उन्हें जमानत मिल गई थी। उनको इस मामले में दोषी नहीं माना गया था।

साध्वी प्रज्ञा ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि कॉन्ग्रेस की ध्रुवीकरण की राजनीति के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया था जिसका नेतृत्व तत्कालीन गृह मंत्री पी चिदंबरम और नेता दिग्विजय सिंह कर रहे थे। उन्होंने दिग्विजय सिंह को आतंक का समर्थक भी बताया था। पी चिदंबरम को उन्होंने विधर्मी कहा था।

आतंकी साबित करने के लिए दी गई थी साध्वी प्रज्ञा को प्रताड़ना

साध्वी प्रज्ञा को मालेगाँव धमाका मामले में गिरफ्तार किए जाने के पश्चात उनको महाराष्ट्र ATS और पुलिसकर्मियों ने तरह-तरह की प्रताड़नाएँ दी थीं। इसका जिक्र उन्होंने स्वयं जनता के बीच दिया था। साध्वी प्रज्ञा ने बताया था कि उन्हें चमड़े की बेल्ट से पीटा जाता था। उन्हें 24 दिनों तक भूखा रखा गया था, उनको बिजली के झटके दिए जाते थे।

साध्वी ने बताया कि उनके साथ गाली-गलौज आम बात थी। उनको पुरुष कैदियों के साथ रखकर पोर्न वीडियो देखने पर मजबूर किया जाता था। उनको पीटने के लिए लगातार 5-6 पुलिस वाले लगाए जाते थे और जब वह थक जाते थे तो दूसरे पुलिसकर्मी उनको पीटने लग जाते थे।

इन सबके बाद जब उन्हें कोर्ट के आदेश पर डॉक्टर के पास ले जाया जाता था तो उन पर दबाव रहता था कि वह यह रिपोर्ट दे कि साध्वी एकदम ठीक हैं। 25 सितम्बर 2023 को NIA कोर्ट के सामने पेश हुईं साध्वी प्रज्ञा ने बताया था उनकी बीमारी की हालत के लिए कॉन्ग्रेस जिम्मेदार है।

साध्वी ने बताया कि जब उनको मालेगाँव धमाके के बाद पूछताछ के लिए बुलाया गया था तब वह पूरी तरह स्वस्थ थीं, लेकिन पुलिस की हिरासत में उनकी हालत बिगड़ी। उनको कैंसर और न्यूरो की बीमारी हो गई। शरीर में पस तक पड़ गया।

45 दिन, 450 छापेमार, गुप्त जाँच, तकनीकी निगरानी: ‘पुलिस का भी मोबाइल जब्त’ जैसी प्लानिंग के बाद जाल में फँसा NewsClick

IAS/IPS अधिकारियों को गिरफ्तार होते हम सबने देखा है। डॉक्टर-इंजीनियर-जज-नेता-सासंद-विधायक भी होते हैं। बवाल, प्राइम टाइम, दंगल, खबर पर खबर, संपादकीय… ये सब लेकिन सिर्फ तब होता है, जब बात पत्रकार की गिरफ्तारी की होती है। प्रेस क्लब इसके खिलाफ मोर्चा खोल देता है, एडिटर्स गिल्ड चिट्ठी-पत्री लिखने लगता है। ऐसी बवाली ‘जाति’ पर कार्रवाई करने से पहले पुलिस-प्रशासन क्या-क्या तैयारी करती होगी? किन-किन मुद्दों पर सोचती होगी? आरोप को साबित करने के लिए कहाँ-कहाँ से डेटा निकालती होगी? इन सब सवालों का जवाब है न्यूज क्लिक (NewsClick) पर की गई कार्रवाई।

न्यूज क्लिक (NewsClick) और इससे जुड़ी चायनीज फंडिंग के मामले में छापेमारी की गई 3 अक्टूबर 2023 को। कुल 46 पत्रकारों से पूछताछ की गई, 2 गिरफ्तार भी हुए। तथाकथित मीडिया और जंग खाए चंद कहानीकारों (खुद को पत्रकार कहते हैं) वाली फर्जी वेबसाइट न्यूज क्लिक पर हाथ डालने की शुरुआत लेकिन होती है 17 अगस्त से यानी 45 दिन पहले।

पुलिस के एक्शन से 12 दिन पहले न्यूज क्लिक (NewsClick) पोस्टमॉर्टम छपता है ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ में। 5 अगस्त को ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अमेरिकी व्यवसायी नेविल रॉय सिंघम के साथ चीनी सरकार के संबंध और ‘न्यूज क्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को मिल रही फंडिंग को लेकर खुलासा किया था।

अंतररराष्ट्रीय मीडिया में ‘न्यूज क्लिक’ को लेकर छपी खबर के बाद भारत सरकार के मंत्री अनुराग ठाकुर ने 7 अगस्त को प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था। इसके 10 दिन के बाद दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल ने 17 अगस्त को यूएपीए (UAPA: Unlawful Activities Prevention Act, गैरकानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया और जाँच शुरू की गई।

शुरुआत में यह जाँच ईडी (ED: Enforcement Directorate, प्रवर्तन निदेशालय) के जुटाए फाइल, डॉक्यूमेंट्स के आधार पर आगे बढ़ रही थी। यह केस लेकिन इतना आसान भी नहीं था। बात यहाँ सिर्फ पैसों के लेन-देन की नहीं थी।

जाँच जैसे-जैसे आगे बढ़ती गई, इसमें चायनीज पैसा, चीनी षड्यंत्र, अमेरिकी कनेक्शन, वामपंथी संगठन, भारत-विरोधी गतिविधियाँ आदि तक इस केस में जुड़ते चले गए। भारत की संप्रभुता को खतरा जैसी षड्यंत्रकारी गतिविधियों को देखते हुए पूरी जाँच के लिए स्पेशल टीम का गठन किया गया। अच्छी तरीके से जाँच कर पूरे मुद्दे के तह तक जाने के लिए आरोपितों की तकनीकी निगरानी के लिए स्पेशल उपकरणों का उपयोग भी किया गया।

टारगेट पर 3 टीम, 100 लोकेशन, पुलिस वाले 450

न्यूज क्लिक (NewsClick) और इससे जुड़ी चायनीज फंडिंग के मामले में इसके संस्थापक प्रबीर पुरकायस्थ और HR हेड अमित चक्रवर्ती गिरफ्तार किए गए हैं। यह लेकिन इतना आसान नहीं था।

वित्तीय मामलों की जाँच कर रही स्पेशल टीम ने इनको दबोचने से पहले इनके बैंक डिटेल्स, इनकी संस्था से जुड़े कॉर्पोरेट बिल आदि से संबंधित हजारों पन्नों की खाक छानी। वित्तीय मामलों से अलग एक टीम सिर्फ यह जाँच कर रही थी कि ‘न्यूज क्लिक’ पर कैसे कॉन्टेंट पब्लिश किए गए, वीडियो कैसे-कैसे डाले गए। इस टीम को यह भी देखना था कि अगर कोई कॉन्टेंट या डेटा इनकी वेबसाइट से डिलीट किया गया है तो वो कब हुआ, उसका संदर्भ क्या था?

जाँच करने वाली स्पेशल टीम जब सारा काला चिट्ठा जुगाड़ लेती है, तब जाकर 2 अक्टूबर 2023 की आधी रात को दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम की मीटिंग होती है। इस बैठक में 200 से अधिक पुलिसकर्मी हिस्सा लेते हैं। किसी भी तरह की जानकारी लीक होने से रोकने के लिए सभी पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन इस मीटिंग से पहले जमा कर लिए गए थे। फिर 100 जगहों पर छापेमारी, कुल 46 पत्रकारों से पूछताछ आदि का खाका तैयार हुआ।

जिस पर आरोप गंभीर, दबोचने का तरीका भी लीक-प्रूफ

सभी आरोपितों से एक जैसा सवाल-जवाब किया गया, ऐसा नहीं था। आरोपितों को भी उनके चायनीज कनेक्शन/फंडिंग को देखते हुए ए, बी और सी कैटेगिरी में बाँटा गया। 3 अक्टूबर की सुबह से जब छापेमारी शुरू हुई, तो वो रात में बनाई गई प्लानिंग के तहत ही थी। इस प्लान का डिटेल आप ऐसे समझ सकते हैं कि गिरफ्तार किए गए प्रबीर पुरकायस्थ और अमित चक्रवर्ती ए कैटेगिरी में थे। इसी ए कैटेगिरी में 4 और आरोपितों पर स्पेशल पुलिस की रडार है।

ऐसे जाल में फँसा NewsClick

ए कैटेगिरी वाले हर आरोपितों को पकड़ने, पूछताछ करने के लिए 8 से 10 पुलिस वाले लगाए गए थे। 3 अक्टूबर की सुबह छापेमारी के वक्त तक इन पुलिस वालों को पता नहीं था कि इनका टास्क क्या है, किस पर हाथ डालना है। बस एक जगह बता दी गई थी कि फलां जगह पहुँचो। छापेमारी जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, जरूरत के हिसाब से पुलिस वालों को जानकारी दी जा रही थी।

देश के अलग-अलग शहरों जैसे दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद, मुंबई में न्यूज क्लिक (NewsClick) से संबंधित छापेमारी की गई। इन जगहों पर कुल 46 पत्रकारों से पूछताछ की गई,जिनमें से 9 महिलाएँ हैं। इन सभी के डिजिटल उपकरण (मोबाइल, लैपटॉप आदि), दस्तावेज आदि को जाँच के लिए जब्त कर लिया गया है।

आपको बता दें कि न्यूज क्लिक (NewsClick) पर जो एफआईआर की गई है, वो यूएपीए की धारा 13 (गैरकानूनी गतिविधियाँ); धारा 16 (आतंकवादी कृत्य); धारा 17 (आतंकवादी कृत्यों के लिए धन जुटाना); धारा 18 (षड्यंत्र रचना); धारा 22 (सी) (कंपनियों, ट्रस्टों द्वारा अपराध करना) के तहत की गई है। इनके अलावा आईपीसी की धारा 153ए (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 120बी (आपराधिक साजिश) भी जोड़ी गई है।