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एशियन गेम्स में 41 साल बाद भारत को घुड़सवारी में गोल्ड मेडल: इस चौकड़ी ने कर दिया कमाल: चीन को पछाड़ा

एशियन गेम्स 2023 (Asian Games) में भारत की घुड़सवारी टीम ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। भारत को घुड़सवारी में 41 साल बाद गोल्ड मेडल मिला है। इस तरह से अब 3 गोल्ड, 4 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज मेडल के साथ भारत के खाते में कुल 13 मेडल आ चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस जीत के लिए बधाई दी है।

चीन के हांगझोउ में चल रहे 19वें एशियन गेम्स के तीसरे दिन यानी 26 सितंबर को भी भारतीय खिलाड़ियों का बेहतरीन प्रदर्शन जारी है। अब, भारतीय घुड़सवार सुदीप्ति हजेला, दिव्यकीर्ति सिंह, अनुश अग्रवाल और हृदय छेड़ा की चौकड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए घुड़सवारी की टीम इवेंट में मेडल अपने नाम किया है। इससे पहले भारत ने आखिरी बार साल 1982 में घुड़सवारी में गोल्ड मेडल जीता था।

भारतीय घुड़सवारी टीम 209.205 अंकों के साथ टॉप पर रही। वहीं 204.882 अंकों के साथ चीन दूसरे और 204.852 अंकों के साथ हॉन्गकॉन्ग तीसरे स्थान पर रहा। इस तरह से भारत को गोल्ड, चीन को सिल्वर और हॉन्गकॉन्ग को ब्रॉन्ज मेडल मिला। इससे पहले सैलिंग (नौकायन) में नेहा ठाकुर ने सिल्वर और मेंस सैलिंग में इबाद अली ने ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया था।

इसके अलावा मेंस स्विमिंग (तैराकी) की 4 गुणा 100 मीटर मेडले रिले टीम नेशनल रिकॉर्ड के साथ फाइनल में पहुँच गई है। इससे भारत के लिए एक और पदक की उम्मीद है। यहाँ से फाइनल जीतने पर भारत को एक और गोल्ड मेडल मिलेगा। वहीं यदि भारतीय टीम दूसरे या तीसरे स्थान पर रहती है तो क्रमशः सिल्वर या ब्रॉन्ज मेडल से संतोष करना पड़ेगा।

एशियन गेम्स में भारत ने जीते 13 मेडल

एशियन गेम्स में भारत ने 3 गोल्ड, 4 सिल्वर और 6 ब्रॉन्ज के साथ अब तक 13 मेडल अपने नाम किए हैं। भारत को पहला गोल्ड मेडल 10 मीटर एयर राइफल में मिला था। वहीं दूसरा महिला क्रिकेट में और अब तीसरा घुड़सवारी में मिला है। गेम्स के पहले दिन यानी 24 सितंबर को भारत ने 5 मेडल जीते थे। वहीं दूसरे दिन यानी 25 सितंबर को भी 5 और अब 26 सितंबर को 3 मेडल भारत की झोली में गए हैं। 

भारत नहीं, कनाडा के साथ है गुरुद्वारा कमिटी: SGPC ने जस्टिन ट्रूडो के बयान का किया समर्थन, खालिस्तानी आतंकी निज्जर की हत्या पर माँगा ‘न्याय’

शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में कनाडा के भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों में पीएम जस्टिन ट्रूडो के साथ खड़ी हो गई। आनन-फानन में एसजीपीसी ने इसे लेकर एक प्रस्ताव पास कर डाला है। एक तरह से इसमें निज्जर को पीड़ित और भारत सरकार को खलनायक की तरह पेश किया गया है।

इसे लेकर सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किए बयान में एसजीपीसी ने कहा, “एसजीपीसी आज (25 सितंबर, 2023) हुई कार्यकारी बैठक में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के वहाँ की संसद में लगाए गए आरोपों पर गंभीर चिंता जताती है। वहाँ के निवासी सिख हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में भारतीय एजेंसियों के अधिकारियों की संलिप्तता है।”

‘यूँ ही नहीं लगाए पीएम ट्रूडो ने…’

एसजीपीसी कार्यकारिणी ने अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी कि अध्यक्षता में भारत-कनाडा मुद्दे पर ये विशेष प्रस्ताव पास किया गया। इसमें कहा गया है की कि प्रधानमंत्री का बयान किसी भी देश की संसद में आम नहीं माना जाता है बल्कि उसे संबंधित देश के संविधान की मर्यादा के दायरे में तथ्यों पर आधारित माना जाता है।

कनाडा के पीएम ट्रूडो ने भारतीय एजेंसियों पर जो आरोप लगाए हैं। उनकी सच्चाई को राजनीति से परे रखकर दोनों देशों को ईमानदार नजरिया बरतते हुए जनता के सामने लाना चाहिए। यदि इस मामले को केवल राजनीति की वजह से दबा दिया गया तो ये मानवाधिकारों के साथ अन्याय माना जाएगा।

सिखों के खिलाफ बंद हो नफरत का प्रचार

प्रस्ताव में सिखों और पंजाब के खिलाफ नफरत भरे दुष्प्रचार की कड़ी निंदा की गई। इस पूरी घटना के बाद मुख्यधारा के मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुलेआम सिखों और पंजाब के खिलाफ फैलाए जा रहे नफरत भरे प्रचार की लानत-मलामत की गई।

इसमें कहा गया है कि मीडिया के एक बड़े हिस्से ने भारत-कनाडा मुद्दे को जानबूझकर केवल सिखों के चरित्र हनन पर केंद्रित कर दिया है। प्रस्ताव के माध्यम से एसजीपीसी कार्यकारिणी ने भारत सरकार से माँग की कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से लें और सिखों की छवि खराब करने वाली ताकतों के खिलाफ कार्रवाई करे।

‘सिख धर्म नहीं रखता बैर’

एसजीपीसी के प्रस्ताव में ये भी साफ किया गया कि सिख समुदाय सभी धर्मों का सम्मान करता है और किसी के लिए दुश्मनी नहीं रखता है। कुछ लोग मौजूदा हालात को समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं।

इससे पहले सोमवार को ही एसजीपीसी ने कहा था कि इस माहौल का इस्तेमाल कर सिखों को बदनाम किया जा रहा है। इसमें आरोप लगाया गया कि एक बार फिर वैसा ही माहौल बनाया जा रहा है जैसा 1984 के दंगों से पहले बनाया गया था। वोट बैंक के लिए सिखों के खिलाफ एजेंडा चलाया जा रहा है।

एसजीपीसी कार्यकारिणी ने भारत सरकार से इस मामले पर गौर करने को कहा और इसे तुरंत रोके जाने के लिए कहा। इसमें माँग की गई कि सिखों के बीच बढ़ते अविश्वास को खत्म करने के लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।

कंगना रनौत को भी लिया आड़े हाथों

एसजीपीसी ने सिखों पर बोलने के लिए अभिनेत्री कंगना रनौत पर भी निशाना साधा। एसजीपीसी ने रनौत पर सिख समुदाय का अपमान करने का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया है।

सिख समूह ने दुनिया भर के समुदायों से हालात पर नजर रखने को कहा है। इसके साथ ही भारत के अंदर और बाहर रहने वाले लोगों से हालात पर फिक्र करने की भी अपील की। यहाँ ये बात गौर करने लायक है कि एसजीपीसी पीएम ट्रूडो की बातों पर तो यकीन करती है, लेकिन भारत पर नहीं।

दरअसल, भारत ने इस साल की शुरुआत में खालिस्तानी आतंकवादी निज्जर की हत्या में किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है। भारत ने यह भी कहा है कि कनाडाई अधिकारियों ने जाँच के संबंध में कोई विश्वसनीय खुफिया जानकारी भारतीय अधिकारियों के साथ साझा नहीं की है।

कनाडा में तिरंगा जलाने पर साधी चुप्पी

एसजीपीसी ने कनाडा के भारत के खिलाफ पक्ष पर अप्रत्यक्ष समर्थन देने के साथ विक्टिम कार्ड भी खेल डाला है। हालाँकि, टोरेंटो में तिरंगे को जलाने, पीएम मोदी के कटऑउट को जूते मारने पर वो चुप्पी साधे रही।

भारतीय राजनयिकों के खिलाफ धमकियों और कनाडाई खालिस्तानियों के कनाडाई हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के खुले ऐलान के बारे में भी कुछ नहीं कहा है। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है कि एसजीपीसी ने ऐसी भाषा बोली है जो खालिस्तानियों का समर्थन करती है और भारत पर सवाल उठाती है।

बीते हफ्ते 23 सितंबर को अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल ने खालिस्तानी समर्थक कनाडाई सिंगर शुभ का समर्थन करते हुए उन्हें ‘पंजाब का गौरवशाली पुत्र’ कहा। भारत का विकृत नक्शा साझा करने की वजह से शुभ का भारत दौरा रद्द कर दिया गया था।

जब इस साल मार्च में पंजाब सरकार खालिस्तानी आतंकवादी अमृतपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी, तो एसजीपीसी ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की थी।

नोएडा के सिदकदीप सिंह को SGPC देगी सम्मान

इस विशेष प्रस्ताव के अलावा एसजीपीसी कार्यकारिणी ने कई अन्य फैसले लिए और कई विभागों के मामलों पर भी चर्चा की। एक प्रस्ताव में जोधपुर जेल में बंद सिखों के मामलों की पैरवी करने वाले वकीलों को खास तौर से सम्मानित करने का फैसला लिया गया।

जून 1984 में श्री अकाल तख्त साहिब पर सैन्य हमले के बाद मदद करने वाले लोगों को भी सम्मानित करने का फैसला लिया गया। यही नहीं उत्तर प्रदेश के नोएडा निवासी सिदकदीप सिंह को सम्मानित करने का भी फैसला लिया गया। गिनीज बुक रिकॉर्ड में उनके नाम सबसे लंबे बाल रखने का पुरुष टीनएजर का रिकॉर्ड है।

‘हर परंपरा में न घुसे सरकार’: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की DMK सरकार को दिया झटका, पुजारियों की नियुक्ति में मनमानी पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु की MK स्टालिन सरकार को बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आगमिक मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति में सरकारी ज़बरदस्ती पर रोक लगाते हुए ‘स्टे ऑर्डर’ दिया है और कहा है कि सरकार किसी भी परंपरा में जबरन घुसने की कोशिश न करे। सुप्रीम कोर्ट ने आगमिक मंदिरों में सरकारी गाइडलाइन्स के हिसाब से नियुक्तियों पर रोक लगाई है, और मद्रास हाई कोर्ट की एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखने को कहा है, जिसमें हाईकोर्ट ने कहा था कि आगमिक मंदिरों पर सरकार की गाइडलाइन्स लागू नहीं होंगी।

तमिलनाडु के मंदिर सरकार के हाथों में कैद!

तमिलनाडु में करीब 42,500 मंदिर हैं, जिनमें पुजारियों की नियुक्ति सरकार करती है। इन मंदिरों में करीब 10 प्रतिशत मंदिर आगमिक परंपरा के हिसाब से हैं। ये मंदिर बहुत पुराने हैं और अपनी अलग विशेष परंपरा और समुदाय की नीतियों का पालन करते हैं। चूँकि तमिलनाडु की सरकार ने नियम बनाया है कि मंदिरों में तैनाती के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे ‘पुजारी डिप्लोमा’ हासिल करने वाले व्यक्ति ही पात्र होंगे। इस नीति के हिसाब से मंदिरों में भले ही कोई दशकों से पूजा कर रहा हो, लेकिन उसके पास तमिलनाडु सरकार का डिप्लोमा नहीं है, तो वो पुजारी के पद पर काम करने के लिए पात्र ही नहीं होगा।

बता दें कि तमिलनाडु के मंदिरों में चढ़ने वाले चढ़ाने, दान इत्यादि की सरकार ही बंदोबस्ती करती है। वही इन पैसों की मालिक होती है। इसके बदले में वो मंदिरों की व्यवस्था देखती है, पुजारियों व अन्य कर्मचारियों की वैतनिक नियुक्ति करती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कही ये बात

इस मामले में ‘अखिल भारतीय आदि शैव शिवाचार्यर्गल सेवा एसोसिएशन’ ने रिट याचिका दायर की थी, जिसपर जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए आगमिक मंदिरों में पुजारियों की नियुक्ति के मामले में यथास्थिति बनाए रखने को कहा है।

‘अखिल भारतीय आदि शैव शिवाचार्यर्गल सेवा एसोसिएशन’ की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट गुरु कृष्ण कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद राज्य सरकार मनमानी कर रही है और संप्रदाय के बाहर के लोगों की नियुक्तियाँ कर रही है। सरकार कह रही है कि लोग इसके लिए ट्रेनिंग कर चुके हैं और वो पूजा-पाठ कराने में सक्षम हैं, जबकि हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि आगमिक मंदिरों के अपने रीति-रिवाज और उनकी अपनी परंपराएँ हैं। ऐस में उस परंपरा को मानने वाले लोगों की ही नियुक्ति हो सकती है।

ये है पूरा मामला

तमिलनाडु सरकार ने साल 2020 में एक कानून बनाया था, जिसे तमिलनाडु हिंदू धार्मिक संस्थान कर्मचारी (सेवा की शर्तें) नियम, 2020 नाम दिया गया है। इसी नियम के तहत तमिलनाडु सरकार मंदिरों में पुजारियों (अर्चकों) की नियुक्ति करती है। लेकिन, अगस्त 2022 में मद्रास हाई कोर्ट की एकल खंडपीठ ने आगमिक मंदिरों को इस नियम के भाग 7 और 9 की व्याख्या करते हुए छूट दी थी और कहा था कि आगमिक मंदिरों पर सरकार का ये आदेश लागू नहीं होगा, क्योंकि वो मंदिर खास परंपरा के हिसाब से चलते हैं, उसमें सरकारी दखल की जरूरत नहीं है।

इसके बावजूद तमिलनाडु सरकार उस परंपरा के बाहर के पुजारियों की नियुक्ति आगमिक मंदिरों में करना चाहती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

क्या होते हैं आगमिक मंदिर?

तमिलनाडु में 8000 से अधिक आगमिक मंदिर हैं। इनके निर्माण की शैली से लेकर पूजा पाठ का तरीका भिन्न होता है। ये मंदिर शैव, वैष्णव या तांत्रिक परपंरा के पालक हो सकते हैं या फिर द्रविड़ परंपरा के भी। ये मंदिर आम मंदिरों से भिन्न होते हैं। इनकी माँग है कि सरकार इनकी परंपराओं के पालन में अड़ंगा न लगाए। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि तांत्रिक परंपरा के मंदिर में वैष्णव पुजारी की नियुक्ति कैसे हो सकती है? जबकि उस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कभी तांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा ही नहीं न लिया हो।

सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ

तमिलनाडु के मंदिरों पर सरकार के कब्जे के खिलाफ कई याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद इन पर सुनवाई हो रही है। ऐसी ही एक याचिका सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दायर की है, जिसमें उन्होंने मंदिरों को सरकार के कब्जे से मुक्त कराने की माँग की है। साल 2022 में स्वामी की याचिका पर सुनवाई भी हो चुकी है, जिसमें उन्होंने द्रमुक सरकार द्वारा नास्तिकों को पुजारियों के तौर पर नियुक्ति का विरोध किया था। इसके अलावा भी कई अहम याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं।

हिन्दुओं को ईसाई बना रहा सलमान धराया: पैसों से लेकर बच्चों के एडमिशन तक का दे रहा था लालच, लाउडस्पीकर और 10 बाइबिल भी बरामद

उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में पुलिस ने ईसाई धर्मान्तरण के आरोप में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपितों के नाम सलमान और त्रिभुवन राम है। इन दोनों के पास से बाइबिल और लाऊडस्पीकर बरामद हुए हैं। गाँव के ही एक शिकायतकर्ता ने इन सभी पर हिन्दुओं को ईसाई मत स्वीकार करने का दबाव और लालच देने का आरोप लगाया है। घटना रविवार (24 सितंबर, 2023) की है। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना आज़मगढ़ के मेहराजपुर थानाक्षेत्र की है। यहाँ के गाँव लालमऊ में रविवार को प्रार्थना सभा के नाम पर तमाम लोगों का जमावड़ा किया गया था। कार्यक्रम के दौरान बड़े-बड़े माईक भी लगा दिए गए थे। इसी गाँव के रहने वाले रविंद्र राम ने आरोप लगाया कि प्रार्थना सभा के नाम पर वहाँ हिन्दुओं को ईसाई बनाने की साजिश रची जा रही थी। गाँव के बाहर से आए कुछ लोग हिन्दुओं को पैसों का लालच दे रहे थे। साथ ही ईसाई बनने पर बच्चों की अच्छे स्कूल में शिक्षा का भी ऑफर दिया जा रहा था।

रविंद्र राम ने इसकी शिकायत स्थानीय थाने पर की। वहीं पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लिया और घटनास्थल पर पहुँच गई। तलाशी के दौरान पुलिस को कार्यक्रम स्थल पर माइक लगे मिले जिसकी अनुमति नहीं ली गई थी। साथ ही बूफर, बाइक, लीड और लगभग 10 की संख्या में बाइबिल भी बरामद हुई जिसे लोगों को बाँटने के लिए लाया गया था।

बता दें कि इस मामले में पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पहले का नाम सलमान जबकि दूसरे आरोपित का नाम त्रिभुवन राम है। त्रिभुवन राम मेहराजपुर थानाक्षेत्र के खुन्दनपुर का रहने वाला है। वहीं दूसरा आरोपित सलमान पुत्र इसराइल पड़ोसी जिले गाजीपुर के थानाक्षेत्र खानपुर के सिधौना गाँव के निवासी है।

गौरतलब है कि आज़मगढ़ पुलिस ने सोमवार (25 सितंबर, 2023) को दोनों आरोपितों को उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म सम्परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 2021 के तहत गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद दोनों को जरूरी कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेज दिया गया है। वहीं पुलिस इस मामले की जाँच व आगे की विधिक कार्रवाई कर रही है।

26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ 405 पन्नों की चार्जशीट: अमेरिका से लाया जा सकता है भारत, लॉस एंजिल्स जेल में है बंद

साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले (26/11) के आरोपित कनाडाई नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ मुंबई पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है। 405 पन्नों की चार्जशीट में पुलिस ने कहा है कि तहव्वुर राणा ने आतंकी हमले के लिए रेकी में डेविड कोलमैन हेडली की मदद की थी। यही नहीं, हमले से कुछ दिन वह मुंबई में ही मौजूद था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुंबई क्राइम ब्रांच ने तहव्वुर हुसैन राणा के खिलाफ जो चार्जशीट दायर की है, उनमें से कई जानकारियाँ पहले से ही । साथ ही कहा कि तहव्वुर राणा 11 नवंबर से 21 नवंबर, 2008 तक भारत में था। इस दौरान वह दो दिन मुंबई के पवई इलाके में स्थित होटल रेनेसाँ में रुका था।

‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने संयुक्त पुलिस आयुक्त लखमी गौतम के हवाले से कहा है कि मुंबई आतंकी हमले की जाँच के दौरान उन्हें कई दस्तावेज मिले हैं। इनसे पता चला है कि तहव्वुर ने न केवल डेविड कोलमैन हेडली के साथ मिलकर हमले की साजिश रची बल्कि हमला खतरनाक हो इसके लिए भी उसने भरपूर प्रयास किए थे।

लखमी गौतम ने आगे कहा है, “तहव्वुर हुसैन ही वह व्यक्ति है जिसने डेविड हेडली को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भारतीय पर्यटक वीजा दिलाने में मदद की थी।” वहीं एक अन्य अधिकारी का कहना है कि आतंकी हमले से पहले तहव्वुर ने भारत से दुबई गया था। इसके बाद वहाँ से चीन और फिर शिकागो चला गया। इसके अलावा डेविड हेडली ने तहव्वुर राणा को मेल कर ISI एजेंट मेजर इकबाल की मेल आईडी माँगी थी। 26/11 आतंकी हमले में इकबाल भी साजिशकर्ता था।

इस चार्जशीट को लेकर मुंबई पुलिस के अधिकारी का कहना है कि भारत तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण के प्रयास में लगा हुआ है। इस चार्जशीट से उसके प्रत्यर्पण में मदद मिलेगी और उसके खिलाफ वॉरंट प्रक्रिया शुरू हो सकती है। गौरतलब है कि भारत ने तहव्वुर हुसैन राणा को भगोड़ा घोषित कर रखा है। NIA ने 28 अगस्त, 2018 को उसके खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट भी जारी किया था।

उल्लेखनीय है कि तहव्वुर हुसैन राणा को साल 2009 में शिकागो से गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह अमेरिका की लॉस एंजेल्स जेल में बंद है। इसी साल मई में अमेरिका की एक अदालत ने तहव्वुर हुसैन राणा के प्रत्यपर्ण को मंजूरी दे दी थी। लेकिन इसके बाद एक अन्य अदालत ने उसके प्रत्यर्पण पर रोक लगा दी थी।

बता दें कि 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस हमले में 6 अमेरिकियों, सहित कुल 166 लोगों की मौत हो गई थी। साथ ही 11 जवान बलिदान हो गए थे।

₹10 लाख कर्जा लो, ₹5 लाख ही वापस करो, ₹5 लाख भरेगी बिहार सरकार: ‘मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना’ पर नीतीश सरकार ने लगाई मुहर

बिहार सरकार ने अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार देने के नाम पर एक नई योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत 10 लाख रुपए का लोन मिलेगा। इसमें से केवल 5 लाख रुपए वापस करने होंगे। शेष 5 लाख रुपए बिहार सरकार अनुदान के तौर पर देगी। इसका सीधा मतलब यह है कि 10 लाख के कर्ज में से 5 लाख रुपए राज्य सरकार माफ कर देगी।

इस योजना को ‘मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना’ नाम दिया गया है। राज्य सरकार ने इसे मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अति पिछड़ा वर्ग/महिला/युवा उद्यमी योजना का विस्तार बताया है।

भले बिहार सरकार इस योजना को अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार मुहैया कराने का प्रयास बता रही है। भले इसे समाज के अन्य वर्गों के लिए चली आ रही योजना का विस्तार बता रही है। लेकिन जिस समय पर बिहार कैबिनेट ने इस पर मुहर लगाई है, इसे तुष्टिकरण की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

गौर करने वाली बात यह भी है कि नीतीश कुमार की मौजूदा सरकार उस राजद के भरोसे चल रही है जो खुलकर माय (मुस्लिम+यादव) समीकरण की राजनीति करती है। बीजेपी से अलग होने के बाद से नीतीश कुमार भी खुद को मुस्लिमों को सच्चा रहनुमा बताने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

‘बेरोजगारी कम करना चाहती है सरकार’

बिहार सरकार के अपर मुख्य सचिव (कैबिनेट सचिवालय) एस सिद्धार्थ ने इस योजना के लेकर कहा है कि राज्य में औद्योगिक विकास की गति को तेज करने और अल्पसंख्यक समुदाय के पुरुषों-महिलाओं के बीच बेरोजगारी कम करने और उन्हें स्वरोजगार की तरफ बढ़ाने के लिए यह योजना शुरू की गई है। इसका नाम मुख्यमंत्री अल्पसंख्यक उद्यमी योजना यानी एमएयूवाई है। बिहार सरकार की इस योजना का लाभ उठाने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से संपर्क करना होगा। इसके तहत मामूली दर पर कर्ज मुहैया कराया जाएगा।

गौरतलब है कि बिहार सरकार मुस्लिमों को ध्यान में रखकर कई योजनाएँ बना चुकी है। इसी साल जुलाई में नीतीश कुमार की सरकार ने तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को एकमुश्त 25 हजार रुपए मदद देने की घोषणा की थी। योजना का लाभ 18 से 50 साल तक की महिलाओं को मिलेगा।

‘आधार है दुनिया की सबसे भरोसेमंद डिजिटल आईडी’: मोदी सरकार ने खारिज किया मूडीज का दावा, अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने विश्वसनीयता पर उठाए थे सवाल

अमेरिका की रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने हाल ही में ‘आधार’ की विश्वसनीयता के बारे में सवाल उठाए हैं। उसका कहना है कि भारत की गर्म और आर्द्र जलवायु में इसकी बायोमेट्रिक तकनीक पर असर पड़ सकता है। वहीं मोदी सरकार ने अमेरिकी एजेंसी के दावे को आधारहीन बताते हुए ख़ारिज कर दिया है।

रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कहा कि आधार की वजह से अक्सर सेवा अस्वीकृत हो जाती है। इस वजह से सिस्टम की सुरक्षा, गोपनीयता और सुरक्षा उपायों पर सवाल उठते हैं। हालाँकि, केंद्र सरकार ने मूडीज के इन सवालों को खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह दुनिया की सबसे भरोसेमंद डिजिटल आईडी है। लगभग सभी भारतीय इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। मूडीज के इन दावों का भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने जोरदार खंडन किया है।

यूआईडीएआई को मूडीज का जवाब

यूआईडीएआई का कहना है कि मूडीज ने अपने दावों का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत मुहैया नहीं कराया है। एक अरब से अधिक भारतीयों ने खुद को प्रमाणित करने के लिए पिछले दशक में कुल 100 अरब से अधिक बार आधार का इस्तेमाल किया।

यूआईडीएआई का कहना है, “मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने यूआईडीएआई पर उठाए गए मुद्दों के संबंध में तथ्यों का पता लगाने की कोई कोशिश नहीं की है। रिपोर्ट में जिक्र किया एकमात्र संदर्भ यूआईडीएआई की वेबसाइट का हवाला देते हुए उसके बारे में है।”

क्रेडिट एजेंसी की रिपोर्ट में महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का संदर्भ देते हुए कहा गया है कि बायोमेट्रिक तकनीक के इस्तेमाल के चलते भारत में मजदूरों को सेवा से वंचित कर दिया जाता है।

इस पर सरकार ने कहा है कि रिपोर्ट लिखने वाले को ये नहीं पता कि मनरेगा डेटाबेस में आधार की सीडिंग श्रमिकों को उनके बॉयोमेट्रिक्स के इस्तेमाल के बगैर की गई है। इसके तहत श्रमिकों को सीधे भुगतान किया जाता है।

यूआईडीएआई का दावा है कि रिपोर्ट जारी किए गए आधार कार्डों की संख्या गलत तरीके से 1.2 बिलियन बताती है, जबकि वेबसाइट जारी किए गए आधार कार्ड्स की संख्या प्राथमिकता के तौर पर अपडेट करती है।

यूआईडीएआई और पीएम नरेंद्र मोदी सरकार दोनों ने आधार प्रणाली में फिंगरप्रिंटिंग के अलावा चेहरे और आँखों की पुतली की पहचान सहित प्रमाणीकरण के कई तरीकों पर जोर दिया है।

उन्होंने यह भी जिक्र किया कि मोबाइल फोन के जरिए वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) कई सेवाओं के लिए उपलब्ध हैं। ये यूजर को एक सेफ मैकेनिज्म मुहैया करवाता है। ये फ़ेल-सेफ़ इस तरह से बनाया गया है कि अगर उसका कोई हिस्सा गलत हो जाए तो भी कुछ भी खतरनाक नहीं हो सकता।

आईटी मंत्रालय का भी एतराज

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ने भी मूडीज की रिपोर्ट पर आपत्ति जताई है। मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी रिपोर्ट प्राईमरी और सेकेंडरी डेटा के साथ अपनी राय की पुष्टि किए बगैर तैयार की गई थी।

मंत्रालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आधार पर एक अरब से अधिक भारतीयों का भरोसा ये गवाही देने के लिए काफी है की कि ये प्रणाली विश्वसनीय है। यहीं नहीं आईएमएफ और विश्व बैंक सहित कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने आधार की भूमिका की सराहना की है।

इसके साथ ही दुनिया के कई देशों ने भारत की तरह इस डिजिटल आईडी सिस्टम को अपने देश में भी लागू करने के लिए यूआईडीएआई से संपर्क साधा है। मूडीज़ ने इस सिस्टम के केंद्रीकरण के बारे में फिक्र जताई थी।

इसे लेकर यूआईडीएआई और मंत्रालय ने साफ कहा है कि आज तक आधार डेटाबेस के उल्लंघन की कोई सूचना नहीं मिली है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधार का ऑर्किटेक्चर अत्याधुनिक सुरक्षा उपायों से मजबूत है।

इसके साथ ही इसका सिस्टम आईएसओ 27001:2013 और आईएसओ 27701:2019 जैसे वैश्विक सुरक्षा और गोपनीयता मानकों पर काम करता है।

जी-20 में आधार का जिक्र

दरअसल, सरकार ने हालिया जी-20 ग्लोबल पार्टनरशिप फॉर फाइनेंशियल इनक्लूजन (जीपीएफआई) रिपोर्ट का हवाला दिया। इसमें जिक्र किया गया है कि जन धन बैंक खातों और मोबाइल फोन के साथ-साथ आधार ने भारतीय एडल्ट्स के बीच लेनदेन खातों के स्वामित्व में काफी बढ़ोतरी की है। आधार की वजह से ये बढ़ोतरी हुई है वरना इसमें लगभग आधी शताब्दी लग सकती थी।

यूआईडीएआई और इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय दोनों ने मूडीज की आधार के खिलाफ की गई आलोचनाओं को निराधार बताया है। उनका कहना है कि आधार एक बेहद सुरक्षित और विश्वसनीय प्रणाली है। इसकी विश्वसनीयता को बड़ी संख्या में भारतीयों के साथ ही दुनिया ने भी स्वीकार किया है।

46 शहरों में रोजगार मेला, 51000 को PM मोदी ने बाँटे नियुक्ति पत्र: 9 मेलों में अब तक 6 लाख को दी जा चुकी है नौकरी, बोले प्रधानमंत्री – अगले 25 वर्ष अहम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश भर के 46 स्थानों पर आयोजित रोजगार मेला में 51,000 सफल अभ्यर्थियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियुक्ति पत्र बाँटे हैं। प्रधानमंत्री ने नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थी अब केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों में नियुक्त किए जाएँगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान अभ्यर्थियों से कहा कि उनके जीवन के नए अध्याय का श्रीगणेश हो रहा है। उन्होंने इस दौरान हाल ही में संसद के दोनों सदन से पारित हुए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के विषय में भी बात की और महिला सशक्तिकरण का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने कहा, “आज भारत की बेटियाँ स्पेस से स्पोर्ट्स तक अनेक नए कीर्तिमान बना रही हैं। मुझे नारी शक्ति की इस सफलता पर बहुत-बहुत गौरव होता है। सरकार की नीति भी यही है कि नारी शक्ति के लिए नए-नए द्वार खोले जाएँ।”

प्रधानमंत्री ने जहाँ इस कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया तो वहीं सरकार के कई मंत्री इन रोजगार मेला आयोजन स्थलों पर स्वयं मौजूद रहे और उन्होंने भी नियुक्ति पत्र बाँटे। केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी लखनऊ और पीयूष गोयल नवी मुंबई में मौजूद रहे। देश के कुल 46 शहरों में इस मेला का आयोजन किया गया था।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार लगातार रोजगार मेलों का आयोजन करती रहती है जिनमें सरकारी परीक्षाओं में सफलता पाने वाले अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाते हैं। केंद्र सरकार द्वारा रोजगार देने को लेकर यह नया प्रयास है। अब तक देश में 9 बार रोजगार मेलों का आयोजन हो चुका है जिसमें लगभग 6.01 लाख लोगों को रोजगार दिया जा चुका है। यह उपलब्धि केंद्र सरकार ने एक वर्ष के भीतर हासिल की है। केंद्र सरकार हर बार कई शहरों में एक साथ रोजगार मेलों का आयोजन करती है।

पहला रोजगार मेला अक्टूबर 2022 में आयोजित किया गया था, जब प्रधानमंत्री ने 75,000 से अभी अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए थे। इस दौरान सितम्बर 2023 तक 10 लाख पदों को भरे जाने की बात भी की गई थी, जिसका 60% लक्ष्य अब तक पूरा हो चुका है। केंद्र सरकार जल्दी से जल्दी अब खाली पदों को भरना चाहती है ताकि कार्यक्षमता पर प्रभाव ना पड़े।

प्रधानमंत्री ने नियुक्ति पाने वालों से यह भी अपील की कि वह नित नई तकनीक सीखते रहे और इसके लिए सरकारी पोर्टल IGOT- कर्मयोगी का उपयोग करें। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि जैसे देश के लिए अगले 25 वर्ष विकसित होने के लिए अहम हैं इसी तरह आपके लिए 25 वर्ष करियर के लिए भी अहम हैं।

‘राम मंदिर में बम ब्लास्ट कर मुस्लिमों को फँसाएँगे’: उद्धव के बाद कॉन्ग्रेस MLA ने उगला जहर, इस हिंदू घृणा के पीछे INDI गठबंधन की मंशा क्या?

शिवसेना (उद्धव गुट) के मुखिया उद्धव ठाकरे के अयोध्या में बन रहे श्रीराम मंदिर में को लेकर दिए गए बयान के बाद एक और कॉन्ग्रेसी नेता ने बम धमाके की आशंका जताई है। कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक बी आर पाटिल ने कहा है कि राम मंदिर पर लोकसभा चुनावों से पहले हमला हो सकता है। बी आर पाटिल का यह वीडियो भारतीय जनता पार्टी द्वारा साझा किया गया है। बीआर पाटिल कर्नाटक के कलबुर्गी जिले की अलंद सीट से विधायक हैं। बी आर पाटिल के इस विवादित बयान के पश्चात कॉन्ग्रेस की राम मंदिर को लेकर मंशा के ऊपर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं।

बी आर पाटिल इस वीडियो में कहते हैं कि आगामी लोकसभा चुनाव में मोदी को जिताने के लिए वह लोग (भाजपा) राम मंदिर में धमाका करेंगे और इसका दोष मुस्लिमों पर डाला जाएगा जिससे हिन्दू वोट इकट्ठा हो। ऐसे नेता इस तरह के बयान देकर ये जताना चाहते हैं कि जिन भी आतंकी घटनाओं में अपराधी मुस्लिम निकल जाते हैं, असल में उन्होंने कुछ नहीं किया होता है और वो ‘फँसाए गए’ होते हैं। याद कीजिए, पुलवामा में जिस आतंकी हमले में 40 CRPF जवान बलिदान हो गए थे, उन्हें लेकर भी इसी तरह की बातें की गई थीं।

कर्नाटक भाजपा ने इस वीडियो को साझा करते हुए लिखा है, “कॉन्ग्रेस के लोग हिंदुत्व के मूल पर प्रश्न खड़ा कर रहे थे और अब उनके निशाने पर राम मंदिर है। राम मंदिर को अस्थिर करके हिन्दू-मुस्लिम दंगे करवा कर सरकार को दोष देने के लिए कॉन्ग्रेस ने पहले ही मैदान तैयार कर लिया है।”

अयोध्या में प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि पर बन रहे श्रीराम मंदिर में जनवरी 2024 में प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी और इसके लिए भव्य कार्यक्रम के आयोजन की भी योजना है। इस बात की पूरी संभावना है कि प्रधानमंत्री मोदी 14 जनवरी, 2024 (मकर संक्रांति) के दिन मंदिर का लोकार्पण कर देंगे। राम मंदिर के शिलान्यास में पीएम मोदी के शामिल होने को ओवैसी जैसे नेताओं ने सेक्युलरिज्म की पराजय और हिंदुत्व की विजय बताया था।

जहाँ राम मंदिर देश के करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का केंद्र है वहीं विपक्षी दल इसे राजनीति में खींचने में जुटे हैं और मंदिर के लिए अनिष्ट की भविष्यवाणियाँ कर रहे हैं। इससे पहले उद्धव ठाकरे ने कहा था कि राम मंदिर के उद्घाटन के पश्चात करोड़ों हिन्दू पूरे देश से दर्शन के लिए जाएँगे और इस दौरान कोई गोधरा जैसा कांड हो सकता है। आखिर क्यों ये नेता चाहते हैं कि राम मंदिर की शुरुआत खून बहने से हो? क्या ऐसा कर के वो उन आतंकियों को क्लीन चिट नहीं दे रहे, जिन्होंने गुजरात के अक्षर धाम मंदिर से लेकर वाराणसी के संकट मोचन मंदिर तक में हमले कर कइयों का खून बहाया।

हालाँकि, यह कोई पहला मौका नहीं है जब कॉन्ग्रेस या उसके सहयोगी दल, जो कि अब I.N.D.I. गठबंधन में शामिल हैं, राम मंदिर को लेकर अड़ंगा लगा रहे हों। हाल ही में DMK नेता उदयानिधि स्टालिन द्वारा सनातन को डेंगू-मलेरिया बताना और इसे खत्म करने की बातें करना भी इसी कड़ी का एक हिस्सा है। सोचने वाली बात ये है कि राम मंदिर के उद्घाटन की चर्चाओं के बाद ही इस तरह के बयान आने क्यों शुरू हुए? राम मंदिर के लिए पूरे देश ने चंदा दिया, फिर इन नेताओं को क्यों दिक्कत हो रही?

कॉन्ग्रेस राम मंदिर निर्माण के लिए शुरुआत से ही समस्याएँ पैदा करते आई है। जहाँ जवाहर लाल नेहरू ने गर्भगृह से मूर्तियाँ हटवाने के लिए दबाव डाला था तो वहीं नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान पूजा स्थल अधिनियम लाया गया था। इसके तहत 1947 तक जिस धार्मिक स्थल की जो स्थिति थी, उसे बनाए रखने का कानून बनाया गया। कई मंदिरों को ध्वस्त कर उन्हें मस्जिदों में तब्दील किया गया था। इस कानून से मंदिरों को मुक्त कराए जाने के अभियान को धक्का लगा।

इसके अलावा कॉन्ग्रेस ने ही सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करके कहा था कि राम काल्पनिक हैं। कॉन्ग्रेस नेता श्रीराम ही नहीं बल्कि माता सीता पर भी भद्दे भद्दे बयान देते आए हैं। गुजरात कॉन्ग्रेस के नेता भरत सिंह सोलंकी ने कहा था कि राम मंदिर के लिए लाई गई ईंटों पर कुत्ते पेशाब करते हैं। रामसेतु को भी काल्पनिक बताते हुए DMK के मुखिया रहे करुणानिधि ने भी ये पूछा था कि भगवान श्रीराम को किस इंजीनियर कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री मिली?

बयान देने के अलावा कॉन्ग्रेस कोषाध्यक्ष पवन बंसल ने राम मंदिर के लिए धन संग्रह को लेकर चलाए गए अभियान का भी मजाक उड़ाया था। पवन बंसल ने कहा था कि उनसे राम मंदिर को लेकर चंदा माँगा गया था लेकिन उन्होंने नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि मैं घर में हिन्दू हूँ केवल बाहर मैं सेक्युलर हो जाता हूँ। मंदिर उद्घाटन के बाद लोकसभा चुनाव भी होना है, ऐसे में इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर हिन्दू विरोधी बयानबाजी और बढ़ती हुई दिखे।

गौरतलब है कि वर्ष 2002 में अयोध्या से गुजरात लौट रही कारसेवकों की ट्रेन पर गोधरा शहर में मुस्लिम भीड़ ने हमला कर के दो डिब्बों में आग लगा दी थी जिसमें 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी। मरने वालों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे। हत्यारों में मुस्लिम भीड़ थी, फिर आज ‘भाजपा राम मंदिर में बम ब्लास्ट करवाएगी’ जैसी बातें कर के उन्हें क्लीन चिट नहीं दे रही? खास बात ये है कि कॉन्ग्रेस की संगत में जाकर उद्धव ठाकरे जैसे नेता भी ऐसी भाषा बोल रहे हैं, जो पहले कट्टर हिंदुत्व का चोला ओढ़ कर संविधान से सेक्युलर शब्द ही हटाने की बात करते थे।

बीच बाजार फाड़े कपड़े, भाई की दुकान में रेप, अश्लील वीडियो से ब्लैकमेलिंग: नाबालिग हिंदू लड़की को घर से उठाकर ले गया था जावेद, देहरादून पुलिस ने पकड़ा

उत्तराखंड के देहरादून में जावेद नाम के युवक ने नाबालिग हिन्दू लड़की को डराकर दुष्कर्म किया। मामला 19 सितंबर, 2023 का बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक जावेद ने एक नाबालिग हिन्दू लड़की को धमका कर अपने साथ ले गया और उसका रेप कर आरोपित ने पीड़िता की वीडियो बना ली और ब्लैकमेल भी करने लगा।

रिपोर्ट के अनुसार, जावेद ने नाबालिग के रेप के वीडियो के आधार पर दोबारा लड़की पर शारीरिक सम्बन्ध के लिए दबाव बनाने लगा। यह तब हुआ जब लड़की बाजार में खड़ी थी। जहाँ विरोध करने पर जावेद ने उसकी पिटाई की और और बीच बाजार कपड़े भी फाड़ दिए। वहीं इस मामले में शिकायत के बाद पुलिस ने FIR दर्ज कर आरोपित जावेद को गिरफ्तार कर लिया है।

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना देहरादून के प्रेमनगर थानाक्षेत्र की है। यहाँ के गढ़ी कैंट में रहने वाली पीड़िता की माँ ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता की माँ ने बताया कि जावेद आमवाला नाम का युवक उनकी 17 साल की नाबालिग बेटी पर कई दिनों से दोस्ती करने का दबाव बना रहा था।

हालाँकि, लड़की ने आरोपित को मना कर दिया था। फिर भी 19 सितंबर को जावेद ने रात 11 बजे लड़की को फोन कर के घर के बाहर आने के लिए कहा। जब लड़की ने मना कर दिया तो उसने पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी।

शिकायत में आगे बताया गया है कि जावेद की इन धमकियों से लड़की डर गई। वो घर से बाहर आई तो जावेद उसे अपनी बाइक पर बिठा कर अपने भाई की दुकान पर ले गया। यह दुकान प्रेमनगर में ही है। यहाँ आरोपित ने लड़की के साथ रेप किया और उसकी वीडियो बना ली।

इस वीडियो के आधार पर जावेद लगातार पीड़िता को ब्लैकमेल करने लगा। वह वीडियो वायरल करने की धमकी देते हुए पीड़िता पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव देता रहा। हालाँकि, लड़की किसी न किसी बहाने से बचती रही।

बताया जा रहा है कि 22 सितंबर, 2023 को लड़की अपनी सहेली से मिलने उसके घर निरंजनपुर जा रही थी। इस दौरान रास्ते में जावेद ने उसे फिर से रोक लिया। वह लड़की को अपने साथ कहीं ले जाने की कोशिश करने लगा। लेकिन लड़की ने इसका विरोध किया और शोर मचाया। शोर सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए।

लोगों ने मिलकर जावेद की पिटाई की और पुलिस को सौंप दिया। पुलिस ने पीड़िता की माँ को सूचना दे कर थाने बुलाया। और बाद में लड़की की माँ की तहरीर पर जावेद के खिलाफ रेप सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। फ़िलहाल, जावेद को पुलिस ने जेल भेज दिया है। वहीं इस मामले में आगे की जाँच जारी है।