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दिल्ली में सड़क पर उतरे साधु-संत, पुलिस ने तमिलनाडु भवन तक नहीं जाने दिया: सनातन विरोधी बयानों पर उदयनिधि स्टालिन का फूँका पुतला

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के मंत्री बेटे उदयनिधि के खिलाफ सैकड़ों हिंदू संतों ने सोमवार (25 सितंबर 2023) को दिल्ली में प्रदर्शन किया। सनातन विरोधी बयानों को लेकर उदयनिधि का पुतला फूँका। प्रदर्शनकारियों ने उन राजनीतिक नेताओं के खिलाफ भी नारे लगाए जिन्होंने सनातन विरोधी बयान देते हुए द्रमुक नेता का समर्थन किया था।

दिल्ली संत महामंडल के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने उदयनिधि स्टालिन और अन्य नेताओं की निंदा करने वाली तख्तियाँ ले रखी थी। सरोजिनी नगर के एक मंदिर से तमिलनाडु भवन की ओर मार्च किया। पुलिस ने उन्हें अफ्रीका एवेन्यू पर रोक दिया। इसके बाद उन्होंने उदयनिधि और अन्य के पुतले फूँके। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की।

राज्य सरकारों की चुप्पी पर उठाए सवाल

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों को अपने नेताओं को ‘सनातन धर्म‘ के खिलाफ बयान जारी करने से रोकना चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन से अपने बेटे के बयानों के लिए माफी की माँग की। दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष नारायण गिरि महाराज ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि राज्य सरकारें इस मुद्दे पर चुप हैं।

नारायण गिरि महाराज ने कहा, “अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी सनातन धर्म के खिलाफ राजनेताओं के नफरत भरे भाषण का संज्ञान ले लिया है। सनातन धर्म के खिलाफ राजनेताओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करती है और ऐसे राजनीतिक नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”

बता दें कि तमिलनाडु सरकार में मंत्री उदयनिधि ने हाल ही में सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से किया था। इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए इसके उन्मूलन का आह्वान किया था।

उदयनिधि स्टालिन ने अपने बयान पर माफी माँगने से इनकार करते हुए कहा था कि वे अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था, “मैंने केवल इतना कहा था कि हमें सनातन धर्म के सिद्धांतों का विरोध करना चाहिए। मैं फिर से कह रहा हूँ कि हमें ऐसे सिद्धांतों को मिटा देना चाहिए। लेकिन यह हास्यास्पद है कि कुछ लोगों ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर यह कह दिया कि मैंने नरसंहार करने की बात कही थी।”

उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “तमिलनाडु में ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि द्रविड़वाद को खत्म कर देना चाहिए। क्या इसका मतलब यह है कि वे सभी डीएमके कार्यकर्ताओं को मारना चाहते हैं?”

कौन है करीमा बलूच, जिसकी हत्या पर घिरे कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो: मानवाधिकार संगठन ने कहा – ISI की धमकियों के बावजूद नहीं उठाया कदम, खालिस्तानी आतंकी पर दे रहे भाषण

कनाडा के बलूच मानवाधिकार परिषद ने पीएम जस्टिन ट्रूडो पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। बलूचों के अधिकार की बात करने वाले इस समूह का कहना है कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर तो ट्रुडो भारत से सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन, उन्होंने बलूचिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता करीमा बलूच की मौत पर चुप्पी साध रखी है।

‘बलूच ह्यूमन राइट्स काउंसिल’ ऑफ कनाडा ने जस्टिन ट्रुडो को एक पत्र लिखा है। इसमें कनाडा सरकार पर करीमा बलूच की मौत पर अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही कहा कि कनाडा सरकार व पुलिस को करीमा को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से मिल रही धमकियों के बारे में जानकारी थी, लेकिन सुरक्षा के कदम नहीं उठाए गए। खालिस्तानी आतंकी निज्जर की मौत पर तो ट्रुडो जोशीले भाषण दे रहे हैं। लेकिन करीमा बलूच की मौत के मामले में उन्होंने कुछ भी नहीं बोला था।

यही नहीं, इस पत्र में बलूच मानवाधिकार समूह ने यह भी कहा है कि कनाडा में बलूचों की जनसंख्या कम है और सांसदों के चुनाव में कोई बड़ा प्रभाव नहीं डाल सकते। इसलिए ऐसा लगता है कि चुनावों को देखते हुए कनाडा सरकार करीमा की मौत के मामले पर ध्यान नहीं दे रही है।

कौन हैं करीमा बलूच

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की रहने वाली करीमा बलूच बलूचिस्तान आंदोलन का सबसे बड़े चेहरों में से एक थीं। बलूचिस्तान वही प्रांत है जहाँ आज़ादी के लिए आंदोलन हो रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ता करीमा बलूच पाकिस्तानी हुकूमत को सीधे तौर पर टक्कर देकर बलूचों की आवाज बुलंद कर रही थीं।

वह बलूचों का इतना बड़ा चेहरा बन गई थीं कि पाकिस्तान सरकार और ISI ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया था। हालत यह थी कि बलूचिस्तान आंदोलन से जुड़े लोग धीरे-धीरे गायब होने लगे। इसका आरोप भी पाकिस्तान सरकार और ISI पर ही लगा। इस बीच करीमा बलूच को लगातार धमकियाँ मिलने लगीं। यही नहीं, पाकिस्तानी सेना और ISI ने उन पर आतंकवाद के आरोप मढ़ दिए। इससे तंग आकर वह कनाडा जाकर रहने लगीं।

हालाँकि, करीमा कनाडा जाकर भी खामोश नहीं रहीं। बलूचिस्तान में चल रहे आंदोलन को कनाडा से ही सहयोग कर रहीं थीं। इसके चलते कनाडा में भी उन्हें धमकियाँ मिल रही थीं। एक दिन वो अचानक गायब हो गईं। इसके बाद 21 दिसंबर, 2020 को उनका शव टोरंटो की ओंटारियो नदी किनारे मिला था। 

कनाडाई पीएम ट्रुडो खालिस्तानी आतंकी की मौत पर आज हो-हल्ला मचा रहे हैं, लेकिन बलूच आंदोलन के इतने बड़े चेहरे की मौत पर कनाडा ने एक बयान भी जारी नहीं किया था। वहीं कनाडाई पुलिस ने एक बयान में हत्या के संदेह से इनकार किया था। इसका मतलब यह था कि करीमा बलूच ने आत्महत्या की थी।

करीमा बलूच के पति हम्माल हैदर का कहना है, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि उनकी पत्नी ने आत्महत्या की है। वह एक मजबूत महिला थी और अच्छे मूड में घर से निकली थी। इस हत्या में साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन्हें धमकियाँ मिल रहीं थीं।” इसके अलावा बलूचिस्तान आंदोलन से जुड़े लोग भी करीमा बलूच की मौत को आत्महत्या न मानकर हत्या ही मानते हैं। साथ ही इसके लिए पाकिस्तानी सेना और ISI को जिम्मेदार ठहराते हैं।

जिसने यहूदियों का किया कत्लेआम, उसे कनाडा की संसद में खड़े होकर सम्मान, पोलैंड बोला – माफ़ी माँगो: ट्रूडो के साथ-साथ यूक्रेन वाले जेलेंस्की को भी लोगों ने घेरा

कनाडा दुनिया भर के अलगाववादियों का सुरक्षित पनाहगार देश बन चुका है। हाल ही में कनाडा की संसद में एक ऐसे शख्स का सम्मान किया गया और उसे 2 बार स्टैंडिंग ओवेशन दिया गया, जो लाखों यहूदियों के कत्ल के जिम्मेदार नाजी सैनिकों के स्वयंसेवकों में शामिल था। उसे बेशक सोवियत रूस के खिलाफ लड़ाई लड़ी हो, लेकिन वो यहूदियों का कत्लेआम करने वाले नाजी सैनिकों में से था। इस शख्स का नाम यारोस्लाव हुंका है, और इसके उम्र 98 वर्ष है।

ट्रूडो-जेलेंस्की ने दिया स्टैंडिंग ओवेशन

यूक्रेन की संसद के अध्यक्ष एंथनी रोटा ने जस्टिन ट्रूडो, संसद के सदस्यों और यूक्रेन के राष्ट्रपति के सामने यारोस्लाव हुंका का परिचय रुसियों के खिलाफ लड़ने वाले शख्स के रूप में दिया और वॉर हीरो की तरह उनका सम्मान करवाया। इस दौरान ट्रूडो-जेलेंस्की सभी ने 2 बार हुंका को स्टैंडिंग ओवेशन दिया। इसके जवाब में हुंका ने सैल्यूट देकर सभी का अभिवादन स्वीकार किया।

यहूदियों को मारने वाले नाजियों के साथी का सम्मान

बाद में एंथनी रोटा ने कहा कि उन्हें हुंका के बारे में पता नहीं था। बाद में ये बात सामने आई कि हुंका हिटलर की सेना में शामिल नाजियों के स्वयंसेवकों में से थे और रूस के खिलाफ युद्ध में हिस्सा लिया था। हुंका नाजी सेना के फर्स्ट यूक्रेनियन डिविजन से थे, जो एसएस 14 वाफैन डिविजन भी कहलाती थी। ये स्वयंसेवकों की यूनिट थी, जिसकी सीधी कमान हिटलर के हाथों में थी। वो उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें कनाडा ने शरण दिया था, ये कहते हुए कि इस डिवीजन के खिलाफ युद्ध अपराध साबित नहीं हुए थे।

कनाडा के संसद के अध्यक्ष ने माँगी माफी

एंथनी रोटा ने कहा कि यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के भाषण के बाद मैंने देखा कि गैलरी में हुंका हैं। वो उनके इलाके ‘रोटा’ के ही रहने वाले हैं। उन्होंने कहा, “लेकिन मुझे या संसद में मौजूद किसी को भी हुंका के असली अतीत के बारे में नहीं पता था। ऐसे में मैंने जो कुछ भी किया, मैं उसकी जिम्मेदारी लेता हूँ। मैं कनाडा समेत दुनिया भर में रहने वाले यहूदियों से माफी माँगता हूँ।”

पोलैंड बोला – माफी के अलावा जिम्मेदारी भी तय हो

इस मामले में पोलैंड के राजदूत ने कनाडा की सरकार पर तीखा हमला बोला। पोलैंड के राजदूत ने कहा कि सिर्फ माफी माँगने से ही काम नहीं चलेगा, इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

हत्यारों का सेफ हैवेन बन चुका है कनाडा

बता दें कि साल 2014 में एक नाजी शिकारी स्टीव रैमबम ने कहा था कि कनाडा वॉर क्रिमिनल्स के लिए सेफ हैवेल की तरह है। भारत सरकार भी कनाडा को लेकर यही आरोप लगाती है। भारत सरकार ने कनाडा पर खालिस्तानी आतंकियों की शरणस्थली होने का आरोप लगाया है। इस मामले में अब रूस ने भी कनाडा को खरी-खोटी सुनाई है।

लाखों यहूदियों को उतारा गया था मौत के घाट

गौरतलब है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान लाखों यहूदियों को नाजी सेना ने मौत के घाट उतार दिया था। उन्हें गोलियों से भून दिया गया था, या गैस चैंबरों में डाल दिया गया था। इस घटना को होलोकास्ट का नाम दिया गया है, जिसमें यहूदियों पर नाजी सेना का कहर बरपा था। यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की खुद यहूदी हैं। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान उनके खुद के रिश्तेदार भी नाजियों के कहर का शिकार बने थे।

‘ये कहते हैं सनातन को जड़ से मिटा देंगे, ये तुष्टिकरण की पराकाष्ठा’: राजस्थान में गरजे PM मोदी, बोले – जहाँ सरेआम गला काटने की घटनाएँ हों, वहाँ कौन करेगा निवेश?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (25 सितंबर, 2023) को राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुँचे, जहाँ उन्होंने ‘परिवर्तन संकल्प महासभा’ में हिस्सा लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों, खासकर महिलाओं ने उनका स्वागत किया। पीएम मोदी ने इस दौरान जयपुर को गुलाबी नगरी से संबोधित करते हुए भव्य आदर-सत्कार के लिए राजस्थान की जनता को नमन किया। उन्होंने याद किया कि आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय की भी जन्म जयंती है। साथ ही उन्होंने बताया कि ये BJP के दिवंगत दिग्गज नेता भैरोंसिंह शेखावत का भी शताब्दी वर्ष है।

पीएम मोदी ने कहा कि हम आज भी उनकी प्रेरणा से आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के लोगों ने कॉन्ग्रेस के कुशासन से मुक्ति पाने का बिगुल फूँक दिया है। उन्होंने याद किया कि कैसे पिछले 5 वर्षों में कॉन्ग्रेस ने जिस तरीके से यहाँ सरकार चलाई है, वह जीरो नंबर पाने लायक है। गहलोत सरकार ने यहां के युवाओं के 5 महत्वपूर्ण वर्ष बर्बाद कर दिए। इसलिए राजस्थान के लोगों ने ठान लिया है कि कॉन्ग्रेस सरकार को हटाएँगे और भाजपा को वापस लाएँगे।

पीएम मोदी ने कहा कि राजस्थान में मौसम बदल चुका है। उन्होंने राजस्थान के हर भाजपा कार्यकर्ता को और प्रदेश की जनता को इन सफल यात्राओं के लिए बधाई दी। पीएम मोदी ने इस दौरान विपक्षी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने घोषणा की है कि ये सनातन को जड़ से मिटा देंगे, हमारी पहचान को मिटा देंगे। उन्होंने कहा कि कुछ वोटों के लिए तुष्टिकरण की पराकाष्ठा को राजस्थान का समाज अच्छे से समझ रहा है। उन्होंने स्पष्ट ऐलान किया कि राजस्थान के सिर्फ इस चुनाव में ही नहीं, आने वाले हर चुनाव में ‘घमंडिया’ गठबंधन को इसका नुकसान उठाना ही पड़ेगा। वे जड़ों से उखड़ जाएँगे।

प्रधानमंत्री ने कहा, “राजस्थान में भाजपा सरकार बनने के बाद पेपर लीक माफिया पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। राजस्थान में निवेश बढ़े, यहाँ नए कारखाने लगें, नई फैक्ट्रियाँ लगे, ये जरूरी है। लेकिन जहाँ कदम-कदम पर करप्शन हो, जहाँ लाल डायरी में काली करतूतें ​हों, हर कोई कट और कमीशन में व्यस्त हो, वहाँ कौन पैसा लगाना चाहेगा? जहाँ सरेआम गला काटने की घटनाएँ हों और सरकार मजबूर हो, वहाँ कैसे निवेश होगा?”

पीएम मोदी ने इस दौरान जनता को बताया कि हम वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम चला रहे हैं, राजस्थान इसका बड़ा लाभार्थी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के सीमावर्ती गाँवों में कॉन्ग्रेस ने सुविधाओं का निर्माण नहीं किया।साथ ही याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस वाले कहते थे कि सीमाओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बनना चाहिए, इससे दुश्मन को अंदर आने में आसानी हो जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस की इस नीति का हमें बड़ा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि लेकिन भाजपा सरकार अब सीमावर्ती गाँवों का ​विकास कर रही है।

उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की आदत है – झूठ बोलकर भूल जाओ। उन्होंने वहाँ उपस्थित महिलाओं से कहा कि हमारी बहनों को सतर्क रहना है। पीएम मोदी ने कहा – मोदी मतलब हर गारंटी के पूरा होने की गारंटी।उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी हवा-हवाई बातें नहीं करता, क्योंकि मोदी के पाँव पूरी मजबूती से ज़मीन पर ही रहते हैं। उन्होंने उदाहरण गिनाया कि बीते 9 वर्षों में हमने सामान्य से सामान्य लोगों की छोटी से छोटी कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि राजस्थान में भाजपा सरकार बनने के बाद पेपर लीक माफिया पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही ऐलान किया कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी माफिया को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने ध्यान दिलाया कि जो कॉन्ग्रेसी आज महिला आरक्षण की बात कर रहे हैं, ये काम वो 30 साल पहले कर सकते थे, जब-जब मौका मिला तब कर सकते थे। पीएम मोदी ने कहा कि लेकिन सच्चाई ये है कि कॉन्ग्रेसी कभी चाहते ही नहीं थे कि महिलाओं को 33% आरक्षण मिले।

हाथ और मुँह बाँधा, पकड़ कर ले गए… कपिल देव का हो गया अपहरण? गौतम गंभीर के ट्वीट के बाद पूछ रहे परेशान लोग, जानिए क्या है माजरा

क्या भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव का अपहरण हो गया है? सोशल मीडिया में ऐसी चर्चा चल रही है, खासकर पूर्व सलामी बल्लेबाज और पूर्वी दिल्ली से सांसद गौतम गंभीर के एक ट्वीट के बाद। उन्होंने एक वीडियो को शेयर कर के लिखा, “क्या किसी और के पास भी ये क्लिप आई है? आशा करता हूँ कि ये कपिल देव नहीं हैं और वो सुरक्षित हैं।” इस वीडियो में देखा जा सकता है कि दो लोग पूर्व क्रिकेटर कपिल देव को पकड़ कर कहीं ले जा रहे हैं।

कपिल देव का हो गया अपहरण? – सोशल मीडिया में दावा

उन्हें एक घर में ले जाया जा रहा है और आसपास काफी पेड़-पौधे हैं। साथ ही उस घर के बरामदे में कई बोरियाँ भी रखी हुई हैं। कपिल देव का हाथ और मुँह बाँध दिया गया है। एक अन्य व्यक्ति भी वहाँ पर खड़ा दिख रहा है। एक व्यक्ति ने लिखा कि कपिल देव को उनकी मर्जी के बिना कहीं ले जाया जा रहा है। वहीं कुछ लोगों ने कहा कि ये कपिल देव नहीं लग रहे। वहीं कुछ लोग पूछने लगे कि क्या कपिल पाजी का अपहरण हो गया? कुछ लोग पूछते नज़र आए कि ऐसा क्यों किया जा रहा उनके साथ?

सोशल मीडिया पर कई हैंडल ये पूछते हुए नज़र आए कि क्या कपिल देव अगवा हो गए हैं? वहीं कुछ हैंडल्स ये पूछते नज़र आए कि ये खबर सही है या गलत? कपिल देव के बारे में बता दें कि उनकी कप्तानी में ही टीम इंडिया ने 1983 में पहली बार वर्ल्ड कप जीता था। उन्होंने सेमीफाइनल में 175 रनों की धमाकेदार पारी भी खेली थी। 64 वर्षीय कपिल देव आजकल कमेंट्री में भी नज़र आते हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में वाराणसी में हुए क्रिकेट स्टेडियम के शिलान्यास में उन्हें देखा गया था।

कपिल देव के अपहरण वाले दावे का सच

असल में कपिल देव का जो वीडियो सामने आया है, वो असली नहीं है। मतलब, कपिल देव का अपहरण नहीं किया गया है। ये एक विज्ञापन की शूटिंग के दौरान का दृश्य है। आजकल ब्रांड्स की मार्केटिंग टीम इस तरह की आइडियाज लेकर आती रहती हैं। क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने भी एक इंस्टाग्राम इंटरव्यू के दौरान खुद के किडनैप होने का ड्रामा किया था, इसके बाद उन्होंने माफ़ी भी माँगी थी। इसी तरह कपिल देव का ये वीडियो भी प्रैंक ही है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रचा इतिहास, श्रीलंका को हरा जीता गोल्ड मेडल: एशियन और कॉमनवेल्थ में पदक जीतने वाली पहली टीम

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रचते हुए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। भारतीय क्रिकेट टीम पहली बार एशियन गेम्स में उतरी थी और सफलता हासिल कर ली। टीम इंडिया ने साल 2022 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता था। इस तरह से भारतीय महिला क्रिकेट टीम कॉमनवेल्थ और एशियन गेम्स में मेडल जीतने वाली पहली टीम बन गई है।

चीन के हांगझोउ में खेले जा रहे 19वें एशियन गेम्स में भारतीय महिला क्रिकेट टीम का विजयी अभियान फाइनल में जारी रहा। श्रीलंका के खिलाफ 25 सितंबर 2023 को हुए इस मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए 7 विकेट पर 116 रन बनाए। इसमें स्मृति मंधाना ने 46 और जेमिमा जेमिमा रोड्रिग्स ने 42 रनों की बेहतरीन पारी खेली।

117 रनों के टारगेट का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही। 14 रन पर 3 विकेट खोने के बाद श्रीलंका के विकेट गिरने का सिलसिला जारी रही। इसके चलते टीम 20 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर 97 रन ही बना सकी। इस तरह भारत ने इस मैच में 19 रन से जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया।

बेहद दिलचस्प बात यह है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम पूरे टूर्नामेंट में अजेय रही। मलेशिया के खिलाफ पहला मैच बारिश से बाधित रहा और इसका परिणाम नहीं निकल सका। वहीं दूसरे मैच में टीम इंडिया ने बांग्लादेश को 8 विकेट से रौंद दिया था। अब फाइनल मैच में भी महिला क्रिकेट टीम को जीत मिली है। महिला क्रिकेट में जहाँ भारत ने गोल्ड मेडल तो वहीं श्रीलंका ने सिल्वर और बांग्लादेश ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है।

एशियन गेम्स में भारत ने जीते 11 मेडल

एशियन गेम्स में भारत ने 2 गोल्ड, 3 सिल्वर, 5 ब्रॉन्ज साथ अब तक 10 मेडल अपने नाम किए हैं। सोमवार (25 सितंबर) एशियन गेम्स का दूसरा दिन है। भारत के लिए दिन की शुरुआत अच्छी रही थी। इससे पहले भारतीय शूटर्स ने 10 मीटर मेंस एयर राइफल में गोल्ड मेडल हासिल किया था। वहीं रोइंग मेंस कॉक्सलेस फोर में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था। 24 सितंबर को भारत ने 5 मेडल जीते थे। वहीं 25 सितंबर को भी 5 मेडल अपने नाम किए।

किसने देखी ‘जवान’, मुझे तो बूढ़े स्टारडम को सहारा देती नयनतारा दिखी: शाहरुख खान के फिल्म की कमाई को भूलिए, असली रिव्यू इधर पढ़िए

जिस ‘जवान’ के 500 करोड़ कमा लेने के दावे किए जा रहे हैं, उस फिल्म को 23 सितंबर 2023 को मैंने भी देख ली। क्या वाहियात प्लॉट है और क्या ही कहानी। दिल्ली-बंबई में मॉनेस्ट्री बना दिए हैं और विलेन के नाम पर जबरन सेतुपति ठूँस दिए गए हैं। इस पूरी फिल्म में इकलौता चमकता चेहरा नयनतारा का है, जिसका इस्तेमाल शाहरुख के बूढ़े स्टारडम को बचाने में किया गया है। ये सब कुछ पढ़कर लग रहा होगा कि यार, इतनी सुपरहिट फिल्म, जो 500 करोड़ रुपए से ज्यादा का ग्रॉस कनेक्शन कर चुकी हो, उसके बारे में ऐसी बातें?

ऐसे लोगों से मेरा सवाल है कि यदि आपने जवान देख ली है तो आपको क्या समझ आई? फिल्म में पबजी स्टाइल के एक्शन सीक्वेंस और हद घटिया स्तर की नौटंकी के अलावे क्या है? न कहानी का सिर है न कोई पैर, कि कहीं ये टिक भी जाए। यकीन मानिए, ये फिल्म इस बॉलीवुडिया कमाऊ फैक्ट्री की बर्बादी में एक कील ही साबित होने वाली है, भले ही आखिरी न हो। वैसे, इस दुनिया में बुरा कुछ भी नहीं होता, न भावनाओं का दोहन, न पॉलिटिकल स्टंट, न ब्रीड की मिक्सिंग, न घटिया सा गेटअप। कैसे क्या लिखूँ इस फिल्म के बारे में, जिसमें ट्रेन में सैकड़ों लोगों को पट्टी लपेट दिया वो भी गंदा सा। कहाँ से आई इतनी गंदगी?

इस फिल्म के प्लॉट के बारे में चर्चा करें, तो फिल्म में तीन मेन प्लॉट दिखाए गए हैं, जिन पर डायलॉगबाजी हुई है। पहला- किसानों के खाते में सीधे पैसे पहुँचाने वाला। इसमें लोन वाला एंगल घुसाया गया है। दूसरा प्लॉट है- सान्या मल्होत्रा वाला प्लॉट- इसमें गोरखपुर के डॉ. कफील वाला लाइनअप उड़ाकर जोड़ दिया गया है, वो भी बेहद घटिया तरीके से। तीसरा है बैकग्राउंड स्टोरी- बाप की। फिल्म का नाम जवान रख दिया और पूरी फिल्म में दिखा दी पबजी स्टाइल ऐसी फिल्म, जिसके किसी भी कैरेक्टर को विस्तार नहीं दिया गया।

सोचिए, एक रॉबिनहुड टाइप का आदमी है। हाइटेक विलेन हैं। अरबों रुपए का ट्रांसफर वो भी किसानों के खाते में सीधे और सुरक्षा के ऐसे इंतजाम कि तुरंत एनएसजी जैसी चीजें आ जाती हैं, लेकिन ‘बड़का जेलर’ सबके मुँह पर पट्टी बाँध कर निकल जाता है। इस फिल्म का प्लॉट चुराया गया है एक तेलुगू मूवी से। रेफरेंस देंगे, तो तुरंत आप लोग सर्च में लग जाएँगे। खैर, तेलुगु में एक एक्टर हैं। एनटीआर जूनियर के चचेरे भाई हैं। नाम है- कल्याण राम। डकैती, जनता के हित वाली जैसी फिल्में देखनी हो, असल जैसे कहानी के प्लॉट का फील लेना हो, तो कल्याण राम की पिछले कुछ सालों में आई उसकी डबिंग फिल्में देख डालिए, लाख गुना अच्छी फिल्में हैं।

इस फिल्म में विक्रम राठौड़ का नाम क्यों इस्तेमाल किया गया, ये भी समझ से परे है। दीपिका की प्रेग्नेंसी दिखा दी। जेल में माँ वाला एंगल डालने के लिए फाँसी भी दिलवा दी। वैसे, लॉजिक देखो- जेल में बच्चे का जन्म, फिर अचानक 5 साल का मामला बीत जाता है। फिर फाँसी दे दी जाती है। इत्तेफाक ये कि आजाद भारत में किसी महिला को फाँसी दिला दे रहे हैं शाहरुख खान और उसके बाद जेल में तैनात एक महिला कॉन्स्टेबल आजाद को पालकर उसी जेल का जेलर बना देती है।

चलो, अब तकनीकी तौर पर बता देते हैं कि फिल्म क्यों नहीं देखने लायक है

जवान की कहानी: फिल्म में कहानी जैसा कुछ नहीं है। छोटी-मोटी अखबारी कटिंग को जोड़कर कुछ-नई पुरानी और दूसरी भाषा की फिल्मों का प्लॉट उधार लेकर जवान की कहानी को बुना गया है।

कोई कहाँ से आता है, कहाँ को जाता है? : जवान फिल्म में सभी लोग मिसफिट हैं। कौन कहाँ से आया है, कहाँ जाएगा। सालों खोया रहेगा, फिर अचानक आकर स्टंट करने लगेगा। टिपिकल तमिल एक्शन फिल्म, लेकिन कहानी के नाम पर हिंदी में बड़ा सा जीरो है। इस फिल्म में एक कैरेक्टर जो आपको बेहतर दिखेगा, वो है नयनतारा का निभाया नर्मदा राय का कैरेक्टर। लेकिन कब वो फोर्स वन की अधिकारी हो जाती हैं। कब बच्चा पैदा हो जाता है, वो भी इतना बोल्ड।

सिनेमैटोग्राफी: मैं अभी तक समझ नहीं पा रहा हूँ कि इस फिल्म में मॉनेस्ट्री कैसे आ गई? कैसे वहाँ पूरी की पूरी सेना ही पहुँच जाती है और कैसे सिर्फ एक आदमी पूरी फौज को मार गिराता है और दोबारा उसे खत्म करने के लिए कोई कोशिश ही नहीं की जाती। क्या रे एटली, क्या ही डायरेक्टर बनेगा रे तू? बहुत बार एक्शन सीक्वेंस दोहराव लिए सा दिखते हैं। कब फिल्म समंदर के किनारे से पुरानी कबाड़ वाली गोदाम और कब हाइवे से जेल की गली में पहुँच जाती है, इसका जवाब शायद ही कोई दे पाए।

एक्टिंग: सबसे जरूरी बात एक्टिंग की, इस मोर्चे पर फिल्म नौटंकी से ज्यादा कुछ नहीं लगती। कहीं पूरी फिल्म का प्लॉट हॉलीवुड की तर्ज पर जेल में शिफ्ट हो जाता है, तो कहीं सड़क पर। सान्या मल्होत्रा चुक गई लगती हैं। प्रियमणि की रेंज जैसे ‘चेन्नई एक्सप्रेस’ के वन-टू-थ्री-फोर जैसे गाने से निकालकर यहाँ अधेड़ उम्र की महिला तक दिखा दिया जाता है। चेहरे पर भाव भी नहीं हैं, एकदम सपाट दिखती हैं। मानों, जबरन उनसे काम कराया गया हो।

विजय सेतुपति ने सिर्फ शाहरुख खान के नाम पर फिल्म की है, तो बाकी चीजें समझ सकते हैं कि उस जैसी रेंज वाले एक्टर की क्या ही ऐसी-तैसी की गई है। दीपिका पादुकोण ने ये फिल्म क्यों किया, उनके हिस्से क्या आया? ये तो वही बता सकती हैं। संजीता भट्टाचार्य एथिकल हैकर हैं, तो ऐजाज खान को बॉडी दिखाने और मर जाने के लिए रखा गया है।

शाहरुख खान के बारे में इसलिए नहीं लिख रहे हैं, क्योंकि बाबू भइया, पैसा उसी आदमी ने लगाया है। एटली को भी उसी आदमी ने रखा है। नयनतारा से लेकर दीपिका और विजय सेतुपति से लेकर सनाया और प्रियमणि तक उसी के लिए आए हैं। वो आदमी खुद कहीं छिला आलू, तो कहीं बहरा और हकला… कहीं पट्टी लपेटी लाश बन गया है, तो कहीं पबजी वाला प्लेयर।

हाँ, शाहरुख खान के सामने नयनतारा जब-जब पड़ी हैं, वो शाहरुख को सहारा भी देती हैं और फिल्म को आगे भी बढ़ाती हैं। ये अलग बात है कि सुनील ग्रोवर वाला फालतू का कैरेक्टर उसे थप्पड़ मारकर पूरी सरकारी मशीनरी का लीडर बन जाता है। बात रही सुनील ग्रोवर की, तो संजय दत्त के साथ उसका भी काम सिर्फ इतना है कि वो शाहरुख का भौकाल टाइट रख सकें, बस।

गीत-संगीत : ये क्या होता है? ये सवाल जवान फिल्म के लिए नहीं है। एक बढ़िया पबजी स्टाइल गेम जैसा तगड़ा बैकग्राउंड स्कोर क्रिएट कर लो, उसमें सबको नचाते रहो। कुछ ऐसा ही है। मुझे एक भी गाना याद नहीं है और न ही सिचुएशन ऐसी बन पाई कि कुछ याद रखा जाए।

कुल मिलाकर जवान एक ऐसी अच्छी फिल्म है, लेकिन इसमें खामियाँ ही खामियाँ हैं। इस फिल्म से शायद आखिरी साँसें गिन रहे शाहरुख के करियर को एक-दो और फिल्मों का सहारा मिल जाए।

बिहार में महादलित महिला को नग्न कर पेशाब पिलाया: अपहरण कर के ले गए फिर पीटा, पुलिस बोली – पैसों के लेनदेन का झगड़ा

बिहार की राजधानी पटना में एक महादलित महिला के साथ अमानवीयता किए जाने का मामला सामने आया है। यहाँ सूदखोर ने ब्याज के पैसे न लौटाने पर 45 वर्षीया पीड़िता को रात भर पीटा और निर्वस्त्र भी कर दिया। महिला को पेशाब पिलाने का भी आरोप है। पुलिस ने मामले में मिली शिकायत पर केस दर्ज कर के 2 आरोपितों को नामजद किया है। घटना शनिवार (23 सितंबर, 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना पटना के खुशरूपुर प्रखंड की है। यहाँ की एक महिला ने गाँव के सूदखोर से कुछ माह पहले 1500 रुपए उधार लिए थे। तय समय पर महिला ने सारे पैसे ब्याज सहित सूदखोर को लौटा भी दिए। हालाँकि, आरोपित इसके बाद भी और अधिक ब्याज माँग रहा था। पीड़िता ने जब और अधिक पैसे देने से मना कर दिया तब आरोपित ने शनिवार को उसका अपहरण कर लिया। पीड़िता का आरोप है कि न सिर्फ उसे निर्वस्त्र कर के बेरहमी से पीटा गया बल्कि जबरन पेशाब भी पिलाई गई।

आरोपित का नाम प्रमोद सिंह बताया जा रहा है। शिकायत में आगे बताया गया है कि अगले दिन रविवार को पीड़िता जैसे-तैसे आरोपित के चंगुल से छूट पाई। वह सीधे पुलिस स्टेशन गई और सूदखोर के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। पीड़िता का अस्पताल में इलाज करवाया गया। घर पर भी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। महिला की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। फिलहाल आरोपित प्रमोद सिंह पुलिस की पकड़ से बाहर है। उसकी तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।

पुलिस अधीक्षक सैयद इमरान मसूद के मुताबिक, आरोपित की गिरफ्तारी के लिए कई ठिकाने चिह्नित किए गए हैं जहाँ दबिश जारी है। उन्होंने कहा कि पैसे के लेन-देन को ले कर हुए विवाद में मारपीट की पुष्टि हुई है। हालाँकि, SP ने पीड़िता द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों की जाँच जारी होने की बात कही।

लात मारी, हाथ बाँधा, पीठ पर लिख दिया ‘PFI’: केरल में भारतीय सेना के जवान को पीटा, घर से उठा कर रबड़ के जंगल में ले गए

केरल के कोल्लम में भारतीय सेना के जवान पर हमला किया गया है। हमलावरों में 6 अज्ञात बदमाश शामिल थे। साथ ही पीड़ितों की पीठ की तरफ जबरन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) का नाम लिख दिया गया, जो कि एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है। भारतीय सेना के जवान शीने कुमार ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। ये घटना रविवार (24 सितंबर, 2023) की रात की है। पीड़ित के घर के पास ही एक रबड़ का जंगल है, जहाँ ये घटना हुई।

शीने कुमार ने बताया कि एक टेप की मदद से उनके हाथ बाँध दिए गए थे और पीठ पर पेण्ट का इस्तेमाल कर के PFI लिख दिया गया। इस मामले में धारा-143 (गैर-कानूनी जनसमूह का जुटान), 147 (दंगा), 323 (जानबूझकर चोट पहुँचाना), 341 (किसी को गलत तरीके से रोकना) और 153 (दंगे भड़काने के इरादे से उकसाना) के तहत FIR दर्ज की गई है। ये घटना तब हुई है, जब उसी दिन ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने केरल में PFI के कई ठिकानों पर छापेमारी की।

PFI के मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर प्रहार करने के लिए ED कार्रवाई कर रही है। एर्नाकुलम, मल्ल्पुरम, वायनाड और थ्रिस्सूर जिलों में ये रेड डाली गई। इस दौरान CRPF और केरल पुलिस के अधिकारी भी ED के साथ रहे। इसी साल जनवरी में NIA (राष्ट्रीय जाँच एजेंसी) ने PFI के मोहम्मद सादिक को कोल्लम से ही गिरफ्तार किया था। आतंकियों ने RSS नेताओं के डिटेल्स भी जमा कर रखे थे, ताकि उन्हें निशाना बनाया जा सके। फरवरी 2020 में सामने आया था कि नेताओं के डिटेल्स लीक करने वालों में इडुक्की का एक पुलिस कॉन्स्टेबल PK अनस शामिल था।

ये घटना कोल्लम के कडाईक्कल स्थित चनाप्पारा इलाके में हुई है। जवान की पीठ पर PFI लिखे जाने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। इससे पहले बुरी तरह उसकी पिटाई भी की गई। हलवील शीने राजस्थान में तैनात भारतीय सेना के ‘इलेक्ट्रॉनिक्स एन्ड मेकैनिकल (EME) कैडर’ में तैनात है। उसे कोल्लम स्थित उसके घर से 2 लोग उठा कर ले गए, उसके बाद इस घटना को अंजाम दिया। उसे पीछे से लात मारी गई। पीड़ित ने कहा है कि वो इस घटना को लेकर पेंगोडे स्थित मिलिट्री स्टेशन में शिकायत करेगा।

‘The Vaccine War’ की स्क्रीनिंग पर दिखीं नूपुर शर्मा, बजती रही तालियाँ: इस्लामी कट्टरपंथियों से खतरों के कारण सुरक्षा घेरे में रहने को हैं मजबूर

निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द वैक्सीन वॉर (The Vaccine War)’ गुरुवार (28 सितंबर, 2023) को सिनेमाघरों रिलीज होगी। इससे पहले राजधानी दिल्ली में फिल्म की स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली में भाजपा की पूर्व प्रदेश प्रवक्ता नूपुर शर्मा भी शामिल हुईं।

‘ऑल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा निशाना बनाए जाने के बाद से नूपुर शर्मा को बीते एक साल से जिहादियों द्वारा जान से मारने की धमकी दी जा रही हैं। जुबैर के उकसावे से पहले नूपुर शर्मा टीवी डिबेट का मुख्य चेहरा हुआ करती थीं। लेकिन, अब उन्हें सुरक्षा घेरे में रहना पड़ता है।

दिल्ली में ‘द वैक्सीन वॉर’ की स्पेशल स्क्रीनिंग के बाद विवेक अग्निहोत्री ने नूपुर शर्मा को मंच पर आमंत्रित किया। साथ ही कहा कि नूपुर शर्मा ने देश की लड़कियों को साहसी बनने के लिए प्रेरित किया है। विवेक अग्निहोत्री ने कहा, “मुझे पता है कि यह फिल्म विज्ञान को लेकर है। मैं इसे राजनीतिक नहीं बनाना चाहता। लेकिन, मैंने नूपुर को मंच पर इसलिए बुलाया क्योंकि उन्होंने बहुत सारी लड़कियों और भारतीयों को प्रोत्साहित किया है। वह आधुनिक भारत की साहसी महिला का प्रतीक हैं।”

वहीं फिल्म को लेकर बोलते हुए नूपुर शर्मा ने ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) के वैज्ञानिकों को धन्यवाद दिया और कहा, “मुझे आप सभी को धन्यवाद देना है। आप सभी की वजह से हम भारतीय आज भी जिंदा हैं। मैं आपको अपने दिल की गहराई से धन्यवाद देती हूँ। Bharat Can Do It.”

पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने स्क्रीनिंग के दौरान नूपुर शर्मा को देखकर खुशी जाहिर की। उन्होंने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “आज ‘द वैक्सीन वॉर’ फिल्म की स्क्रीनिंग पर नूपुर शर्मा को गेस्ट के रूप में देखकर सुखद आश्चर्य हुआ। कोरोना वैक्सीन पर विवेक अग्निहोत्री की फिल्म और नूपुर शर्मा को उनके द्वारा आमंत्रित किया जाना बहुत शानदार था। नूपुर ने बताया कि वह एक साल से अधिक समय के बाद थिएटर आई हैं।”


स्वाति गोयल शर्मा ने आगे लिखा, “थिएटर में मौजूद सभी लोग नूपुर शर्मा के लिए जब तालियाँ बजा रहे थे, वह क्षण बेहद मार्मिक था। भारतीय वैज्ञानिकों की ऐतिहासिक उपलब्धि पर एक महत्वपूर्ण फिल्म बनाने के लिए विवेक और उनकी टीम को बधाई। यह फिल्म अपने बच्चों को  दिखाएँ उन्हें इससे प्रेरणा मिलेगी।”

पत्रकार सागर कुमार ने ‘X’ पर लिखा, “न भूले हैं और न भूलेंगे। कल भी डंके की चोट पर नूपुर दीदी के साथ खड़े थे और आज भी। आज अच्छा लगा जब दीदी ने बोला सागर तेरे साथ फोटो लेनी है।”

अंकुर नामक यूजर ने लिखा, ” नूपुर शर्मा आप भारत की शेरनी हैं। मैं सभी से यह कह सकता हूँ कि हमें आपको इतने लंबे समय के बाद देखकर बेहद खुशी हुई। जब आपने ‘भारत माता की जय’ कहा तो हमारा आत्मविश्वास और भी अधिक बढ़ गया।”

गौरतलब है कि मई 2022 में काशी में स्थित ज्ञानवापी ढाँचे को लेकर एक टीवी डिबेट चल रही थी। इस दौरान तस्लीम अहमद रहमानी बार-बार हिंदू देवी-देवताओं को लेकर कमेंट कर रहा था। इसको लेकर BJP की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा ने रहमानी को जवाब देते हुए पूछा कि यदि इस्लामिक किताबों में जिन चीजों का जिक्र किया गया है। यदि वह सब यहाँ कह दें तो उसे कैसा लगेगा?

‘ऑल्ट न्यूज’ के संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने इस टीवी डिबेट की क्लिप से रहमानी का बयान काट दिया और नूपुर शर्मा के बयान को सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। साथ ही दावा किया कि वह पैंगबर मुहम्मद का अपमान कर रहीं थीं। इसके बाद इस्लामवादी नूपुर शर्मा को जान से मारने की धमकी समेत कई प्रकार की धमकी देने लगे। कुछ जगहों पर दंगे की भी खबरें सामने आई थीं। इसके बाद BJP ने उन्हें पार्टी से निलंबित कर दिया था। कई जगहों पर उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई।

यही नहीं, नूपुर शर्मा का समर्थन करने को लेकर कन्हैया लाल तेली और उमेश कोल्हे की हत्या कर दी गई। वहीं जिहादियों की धमकियों के चलते नूपुर शर्मा अब भी अज्ञात स्थान में रहने को मजबूर हैं।