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‘G20 समिट के दौरान नशे में थे जस्टिन ट्रूडो, इसीलिए राष्ट्रपति मुर्मू ने भी भोज में नहीं बुलाया’: पूर्व राजनयिक का खुलासा – कनाडा के PM के विमान में भी मिली थी कोकीन

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का आरोप भारत की एजेंसियों पर लगाने वाले कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो एक नई समस्या में फँसते नजर आ रहे हैं। भारत के एक पूर्व राजनयिक ने दावा किया है कि 9-10 सितंबर, 2023 को नई दिल्ली में सम्पन्न हुए G20 के शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रूडो ड्रग्स के नशे में थे।

जस्टिन ट्रूडो ने 18 सितम्बर को कनाडा की संसद में यह कहा था कि जून में हुई खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत शामिल था और उनके पास इससे ‘विश्वसनीय सबूत’ भी है। ट्रूडो इससे मात्र एक सप्ताह पहले ही नई दिल्ली में थे।

कई सोशल मीडिया पर अफवाह के रूप में तैर रही खबर को लेकर पोलैंड और सूडान में भारत के राजदूत रहे पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा ने कहा है इस बात के ‘विश्वसनीय स्रोत’ हैं कि ट्रूडो के विमान में स्निफ़र डॉग ने कोकीन पकड़ी थी।

पूर्व राजनयिक वोहरा ने यह भी कहा है कि ट्रूडो इसीलिए भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा G20 देशों के राष्ट्रप्रमुखों के लिए आयोजित किए गए रात्रिभोज में नहीं गए क्योंकि वह नशे में थे।

दीपक वोहरा ने यह सारे दावे टीवी चैनल जी न्यूज पर एक बातचीत के दौरान पत्रकार दीपक चौरसिया से किए। गौरतलब है कि कनाडा के प्रधानमंत्री का विमान नई दिल्ली में खराब हो गया था जिसके कारण उन्हें दो दिन अतिरिक्त रुकना पड़ा था। विमान को लेकर सोशल मीडिया पर यह दावे किए गए थे कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इसके अंदर ड्रग्स जब्त की हैं इसलिए उसे रोका जा रहा है। हालाँकि, अभी ऐसी किसी भी बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने भी विमान सम्बंधित प्रश्न पूछे जाने पर कहा था कि ट्रूडो का विमान बिगड़ने पर उन्हें सभी सहायताएँ उपलब्ध करवाई गई थी और विमान तकनीकी खराब के चलते दो दिन नहीं उड़ सका। भारतीय एजेंसियों पर हत्या का आरोप लगाने के बाद से ट्रूडो की छवि लगातार खराब होती जा रही है। ड्रग वाले आरोप के अतिरिक्त, कनाडा की संसद में एक पूर्व नाजी सैनिक को सम्मान दिए जाने को लेकर भी उनकी सरकार की आलोचना हो रही है।

‘पाकिस्तानी’ लड़की पहुँची मुरादाबाद, ट्रेन में हिंदू लड़के से माँगी मदद… अंत में ले गया मेरठ वाला परिवार

वह न पाकिस्तान के कराची शह​र की रहने वाली है। न उसका नाम हया बी। वह असल में मेरठ की एक किशोरी है, जो अपने घर से निकलकर पहले देहरादून गई और फिर मुरादाबाद पहुँची। मानसिक तौर पर कमजोर बताई जा रही इस नाबालिग को उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया है।

यह लड़की 25 सितंबर 2023 को देहरादून से मुरादाबाद के बीच ट्रेन यात्रा के क्रम में सामाजिक कार्यकर्ता निखिल शर्मा को मिली थी। लड़की ने उनसे मदद माँगते हुए खुद को पाकिस्तानी बताया था। उसका कहना था कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद उसका सामान चोरी हो गया, जिसमें उसके पासपोर्ट, वीजा सहित अन्य दस्तावेज थे।

निखिल शर्मा के मुताबिक वे 25 सितंबर की रात को काठगोदाम एक्सप्रेस से देहरादून से मुरादाबाद आ रहे थे। इस यात्रा के दौरान उन्हें एक लड़की मिली जो खुद को पाकिस्तान के कराची शहर की रहने वाली बता रही थी। लड़की ने निखिल से मदद माँगते हुए बताया कि वह अपनी एक दोस्त से मिलने भारत आई थी, लेकिन उसका बैग और अन्य कागजात चोरी हो गए। लड़की ने मुंबई जाने की भी इच्छा जताई। निखिल ने लड़की को मदद का पूरा भरोसा दिया और रेलवे पुलिस मुरादाबाद से सम्पर्क किया।

पाकिस्तान नाम आते ही पुलिस के साथ अन्य सुरक्षा व जाँच एजेंसियाँ सक्रिय हो गईं। जब पुलिस ने लड़की से पूछताछ की तो मामला कुछ और ही निकल कर सामने आया। लड़की ने निखिल शर्मा से झूठ बोला था। वह मूल रूप से मेरठ के गुदड़ी बाजार इलाके की रहने वाली निकली। 3 दिन पहले वह घर से अचानक ही बिना किसी को बताए निकल गई थी। परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन वह नहीं मिली। आखिरकार मामले की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस अपने स्तर पर लड़की का पता लगाने की कोशिश कर रही थी।

मेरठ से निकल कर लड़की देहरादून चली गई थी। वहाँ से मुरादाबाद जाने के दौरान वह निखिल के संपर्क में आई। उन्होंने लड़की को पुलिस के हवाले कर दिया था। मुरादाबाद रेलवे पुलिस ने लड़की को उसके घर वालों के सुपुर्द कर दिया है। मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

आतंकियों को पालता है कनाडा, ट्रूडो बकवास करने में माहिर: श्रीलंका ने किया नंगा, कहा- हमारे साथ भी किया था ऐसा ही गेम

खालिस्तानी आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का समर्थन करते हुए श्रीलंका ने पूरी दुनिया के सामने कनाडा को नंगा कर दिया है। कहा है कि कनाडा आतंकियों को पनाह देता है। उसके प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए कहा है कि वे बिना सबूत आरोप लगाने में माहिर हैं। खालिस्तानी राग अलापने पर कनाडा को भारत से मिली लताड़ को भी सही बताया है।

श्रीलंका के विदेश मंत्री अली साबरी ने 25 सितंबर 2023 को कनाडा को फटकार लगाई। उन्होंने कहा, “कुछ आतंकवादियों को कनाडा में सुरक्षित पनाहगाह मिल गई है। कनाडाई पीएम का यह तरीका है कि बगैर किसी सबूत के कुछ अपमानजनक आरोप लगाए जाएँ।”

साबरी ने कहा कि ट्रूडो ने ऐसा ही श्रीलंका के साथ भी किया था। उन्होंने कहा था कि श्रीलंका में एक भयानक नरसंहार हुआ था। यह सरासर झूठ है। हर कोई जानता है कि हमारे देश में कोई नरसंहार नहीं हुआ था।

श्रीलंका के विदेश मंत्री ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो पर यारोस्लाव हुंका को लेकर भी तंज किया। उन्होंने कहा, “मैंने कल देखा कि वो ऐसे शख्स के समर्थन और उसके जोरदार स्वागत में शामिल थे जो द्वितीय विश्व युद्ध में नाजियों के साथ जुड़ा था।”

उन्होंने ट्रूडो को संदेहास्पद शख्सियत बताते हुए कहा कि श्रीलंका अतीत में इससे निपट चुका है। जब भी ट्रूडो अपमानजनक और झूठे आरोप लगाते हैं तो श्रीलंका को हैरानी नहीं होती

वहीं फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट क्लब ऑफ साउथ एशिया (FCC South Asia) में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत में श्रीलंका के उच्चायुक्त मिलिंडा मोरागोडा ने जोर देकर कहा कि आतंकवाद को लेकर उनके देश की नीति जीरो टॉलरेंस है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर भारत की प्रतिक्रिया सख्त और बिना लाग-लपेट वाली रही है। कहा कि उनका देश इस मुद्दे पर भारत का समर्थन करता है।

श्रीलंकाई उच्चायुक्त ने कहा कि श्रीलंका पिछले चार दशकों में आतंकवाद के कई रूपों से पीड़ित रहा है, इसलिए उनका देश आतंकवाद को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करता। उन्होंने कहा कि अगर श्रीलंका को भारत से समर्थन नहीं मिला होता तो वह स्थिर नहीं होता। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि अगले साल मार्च तक एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।

गौरतलब है कि कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का दोष भारत पर मढ़ने की कोशिश की थी। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में खासा तनाव है। ट्रूडो वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं। घरेलू मोर्चे पर भी उनका विरोध हो रहा है।

कनाडा में खालिस्तानियों ने जलाया तिरंगा, PM मोदी का भी अपमान: ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर में भारत विरोधी प्रदर्शन, ट्रूडो की लगाई आग और धधकी

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने खालिस्तानी आतंकियों को प्रश्रय देकर जो आग भड़काई है उसकी लपटें तेज हो रही है। सोमवार (25 सितंबर 2023) को कनाडा के ओटावा, टोरंटो और वैंकूवर में खालिस्तान समर्थकों ने प्रदर्शन किया।

भारतीय हाई कमीशन के बाहर ओटावा में खालिस्तान लिखे पीले झंडे लहराए गए। टोरंटो में तिरंगे को आग के हवाले कर दिया गया। उधर वैंकूवर में भी भारत के वाणिज्यिक दूतावास के बाहर सौ से अधिक खालिस्तानियों ने प्रदर्शन किया।

सोमवार को खालिस्तान समर्थकों के एक समूह ने ओटावा में भारतीय उच्चायोग के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लगभग 100 खालिस्तानी समर्थकों ने उच्चायोग के बाहर ‘खालिस्तान’ शब्द लिखे पीले झंडे लहराए।

प्रदर्शनकारी रेशमा सिंग बोलिनास ने जस्टिन ट्रूडो के प्रति आभार जताते हुए कनाडा से इस जघन्य कृत्य के पीछे की सच्चाई को उजागर करने में कोई कसर नहीं छोड़ने और भविष्य में निर्दोष लोगों की हत्या को रोकने के लिए भारत पर दबाव बनाने का आग्रह किया।

वैंकूवर में भारत के वाणिज्यिक दूतावास के बाहर लगभग 200 खालिस्तानी समर्थक इकट्ठा हुए और प्रदर्शन किया। टोरंटो में भी करीब 100 खालिस्तान समर्थकों ने भारत के राष्ट्रीय ध्वज को जला दिया। उन्होंने पीएम मोदी के खिलाफ भी नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कट-आउट को जूते भी मारे।

रिपोर्ट के मुताबिक, आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) से जुड़े प्रदर्शनकारियों में से एक ने आरोप लगाया कि भारत ने ‘कनाडा की संप्रभुता से समझौता किया’। भारत विरोधी ये प्रदर्शन SFJ के सरगना गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा अपने समर्थकों को भड़काने के बाद ही हुए है।

हालाँकि ये प्रदर्शन आतंकी संगठन के अनुमानों के अनुसार नहीं हुए। उस तरह का जमावड़ा देखने को नहीं मिला जिसका पन्नू ने अनुमान लगाया था। लेकिन विरोध-प्रदर्शनों की जो तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं उनमें देखा जा सकता है तिरंगे और भारतीय प्रधानमंत्री के अपमान के बावजूद कनाडा के पुलिसकर्मी मूकदर्शक बनकर सब कुछ देखते रहे।

यह विरोध-प्रदर्शन कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का दोष भारत पर मढ़ने की कोशिश के बाद भड़के हैं। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्तों में खासा तनाव है। ट्रूडो वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं। घरेलू मोर्चे पर भी उनका विरोध हो रहा है। लेकिन, इससे कनाडा में पश्रय ले रहे खालिस्तानी तत्वों के मंसूबों को बल मिला है।

गौरतलब है कि निज्जर की जून में ब्रिटिश कोलंबिया में एक गुरुद्वारे के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। भारत ने कनाडा पीएम के आरोपों को ‘बेतुका और प्रेरित’ बताते हुए खारिज कर दिया था। दोनों देशों ने राजनयिकों को भी निष्कासित किया था। कनाडा लगभग 7,70,000 सिखों का घर है, जो पंजाब के बाहर सबसे बड़ी सिख आबादी का प्रतिनिधित्व करता है। हाल के वर्षों में यहाँ भारत विरोधी गतिविधियों में लगातार तेजी देखी गई है।

मदरसे की नाबालिग छात्रा को लेकर भाग गया मौलाना, बच्चों संग थाने पहुँची बीवी: कहा- दोनों ने कर ली है निकाह, मुझे शौहर वापस दिलाओ

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में एक मदरसे के मौलाना पर अपनी ही नाबालिग छात्रा को लेकर फरार होने का आरोप लगा है। छात्रा की उम्र 15 साल बताई जा रही है। कहा जा रहा है कि मौलाना जुनैद आलम ने उससे निकाह कर लिया है। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

मौलाना जुनैद शादीशुदा और दो बच्चों का अब्बा है। पूरे प्रकरण का खुलासा उसकी बीवी की पुलिस को दी शिकायत से हुआ है। उसने अपने शौहर को वापस लाने की गुहार लगाई है। नाबालिग छात्रा की माँ ने भी 17 सितंबर 2023 को अपनी बेटी के अपहरण की FIR दर्ज करवाई थी।

यह मामला प्रतापगढ़ के आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र का है। इस मामले में पहली शिकायत 17 सितंबर को छात्रा की माँ ने दर्ज करवाई थी। उन्होंने बताया था कि 16 सितंबर को रात 10 बजे वो खाना खाने के बाद अपनी सभी बेटियों के साथ सोने चली गईं थीं। रात 1 बजे जब उनकी नींद खुली तब उनकी 15 वर्षीया बड़ी बेटी बिस्तर पर नहीं थी। उन्होंने आसपास काफी खोजबीन की, लेकिन बेटी नहीं मिली। पुलिस ने अज्ञात आरोपित के विरुद्ध यह केस IPC की धारा 363 में दर्ज कर लड़की की तलाश शुरू कर दी थी। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बीच 21 सितंबर 2023 को आसपुर देवसरा थाना क्षेत्र के ही वाजिदपुर के मदरसे में पढ़ाने वाले इस मौलाना की बीवी अपने बच्चों के साथ थाने पहुँच गई। महिला ने अपना नाम नुरुल निशा बताया। तहरीर देकर बताया कि उसके शौहर ने अपनी ही छात्रा से निकाह कर लिया है।

नुरुल निशा के अनुसार जुनैद से उसके चार बच्चे हुए थे। इनमें से दो की मौत हो चुकी है। अब निशा के पास अपने बच्चों के पालन-पोषण के लिए पैसे नहीं हैं। जुनैद काफी समय से अपनी बीवी-बच्चे से मिलने नहीं आया है। निशा का कहना है कि जुनैद के अपनी ही छात्रा से निकाह करने के बाद वह बेसहारा हो गई है।

प्रतापगढ़ के एडिशनल एसपी विद्यासागर मिश्रा ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि फरार मौलाना की तलाश में पुलिस टीमें बिहार व कुछ अन्य हिस्सों में दबिश दे रही हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही जुनैद को गिरफ्तार किया जाएगा। मौलाना जुनैद मूल रूप से झारखंड के गढ़वा का रहने वाला है।

हुई पूजा-अर्चना, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बनाया ॐ और स्वस्तिक का निशान: भारतीय वायुसेना को मिल रहे हैं 56 बेहतरीन ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, जानें खासियत

भारतीय वायुसेना को आधुनिकतम बनाने में जुटी मोदी सरकार एक तरफ तो फाइटर जेट्स खरीद रही है, तो दूसरी तरफ कम समय में सेना को कहीं भी ले जाने में सक्षम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट्स का सबसे बड़ा बेड़ा तैयार कर रही है। भारत सरकार को स्पेन से खरीदे मीडियम टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट सी-295 की पहली यूनिट मिल गई है, जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह औपचारिक तौर पर वायुसेना को सौंप दिया है। हिंडन एयरबेस पर औपचारिक कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने सी-295 को एयरफोर्स के अधिकारियों के सुपुर्द किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की पूजा

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एयरबेस पर ही सी-295 की पूजा की। उसपर ॐ बनाया और स्वास्तिक का निशान भी बनाया। इस दौरान वायुसेना के वरिष्ठतम अधिकारी भी मौजूद रहे। सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट को दुनिया के बेहतरीन मीडियम वेट ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट में से एक माना जाता है और भारत में जब इसकी सारी यूनिट पहुँच जाएंगी, तो भारत की वायुसेना के पास इन एयरक्राफ्ट का सबसे बड़ा बेड़ा तैनात हो जाएगा।

भारत ने दिया है 56 एयरक्राफ्ट का ऑर्डर

सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट के लिए भारत सरकार ने सबसे बड़ा ऑर्डर दिया है। भारत ने कुल 56 एयरक्राफ्ट का ऑर्डर दिया है, जिसमें से पहले एयरक्राफ्ट की डिलीवरी अभी मिली है। इसके अलावा 15 अन्य एयरक्राफ्ट स्पेन से बनकर आएँगे। भारत ने साल 2020 में इन एयरक्राफ्ट को खरीदने का मन बनाया था। इसके लिए सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने मंजूरी 2020 में दी थी, लेकिन इसका ऑर्डर सितंबर 2021 में दिया गया था। इस ऑर्डर के मुताबिक, 16 एयरक्राफ्ट फ्लाई-अवे कंडिशन में भारत आने थे।

40 एयरक्राफ्ट भारत में बनेंगे

इन 16 एयरक्राफ्ट को ऑर्डर के 48 माह के अंदर मिल जाना है, जिसमें से पहला एयरक्राफ्ट आ चुका है, वहीं, बाकी के 40 एयरक्राफ्ट भारत में ही बनाए जाएँगे। भारत में मेक इन इंडिया के तहत इन 40 एयरक्राफ्ट का निर्माण अगले 10 साल में भारत में ही किया जाएगा, जिसके लिए भारतीय कंपनी टाटा एडवांस सिस्टम्स लिमिटेड काम करेगी।

ये है खासियत

सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट एक साथ 70 से अधिक सैनिकों को कहीं भी ले जा सकता है। इसके अलावा इसकी रेंज बहुत ज्यादा है। यही नहीं, इस एयरक्राफ्ट पर रडार की तैनाती भी की जा सकती है। ट्रांसपोर्स एयरक्राफ्स सी-295 को मल्टी यूटिलिटी माना जाता है। ये सी-130 हरक्यूलिस से आकार में थोड़े छोटे हैं और अपेक्षाकृत छोटे रनवे पर भी उतर सकते हैं। यही नहीं, ये एयरक्राफ्ट आगे चलकर भारत के अवाक्स रडार के लिए स्टेशन का भी काम कर सकते हैं।

इधर NDA में वापसी को खारिज करते रहे नीतीश कुमार, उधर आपस में ही लड़ गए ललन सिंह और अशोक चौधरी: JDU में भीतरखाने लड़ाई तेज

लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों में जुटी जनता दल (यूनाइटेड) के दो वरिष्ठ नेता आपस में ही भिड़ गए। ये भिड़ंत नीतीश कुमार की मौजूदगी में हुई, लेकिन उन्होंने जब देखा कि गहमा-गहमी बढ़ रही है, तो वो चुपचाप निकल गए। ऐसा मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है। जेडीयू में दरार की ये खबरें उस समय आ रही हैं, जब मीडिया में ऐसी अटकलें चल रही हैं कि नीतीश कुमार एक बार फिर से पाला बदल सकते हैं और भाजपा के साथ हाथ मिला सकते हैं। हालाँकि, इस बारे में नीतीश कुमार से जब सवाल पूछा गया, तो उन्होंने ऐसी अटकलों को खारिज कर दिया।

नीतीश चुपचाप खिसक गए

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नीतीश कुमार ने पटना में बिहार की सभी विधानसभा सीटों के प्रभारियों को बैठक के लिए बुलाया था, इस बैठक के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी में भिड़ंत हो गई। इस बैठक के बाद जमुई-बरबीघा में सक्रियता को लेकर अशोक चौधरी को ललन सिंह ने टोक दिया था। ललन सिंह का कहना है कि अशोक चौधरी लगातार जमुई-बरबीघा जाते रहते हैं, इसकी वजह से पार्टी के नेताओं में नाराजगी है।

ललन सिंह ने अशोक चौधरी से कहा कि अगर किसी को कहीं आना-जाना हो, तो वो मुख्यमंत्री से इजाजत लेकर जाए, क्योंकि खुद वो ऐसा करते हैं। ललन सिंह की हिदायत पर अशौक चौधरी भड़क गए। उन्होंने बरबीघा जाने से रोकने पर ललन सिंह को कड़ी प्रतिक्रिया दी। अशोक चौधरी ने ललन सिंह से पूछा ही लिया कि उन्हें टोकने वाले वो कौन होते हैं। अशोक चौधरी का कहना है कि बरबीघा उनकी पुरानी कर्मभूमि रही है, उनका उस जगह से लगाव है। हालाँकि ललन सिंह का कहना है कि स्थानीय विधायक ने उनकी शिकायत की है कि वो बरबीघा ज्यादा ही आते-जाते हैं, जबकि वो उस जगह के प्रभारी भी नहीं हैं।

बहस होते ही चले गए नीतीश कुमार?

दैनिक जागरण की रिपोर्ट में दावा किया है कि जब ये बहस हो रही थी, तब नीतीश कुमार ने किसी को नहीं टोका और चुपचाप बाहर निकल गए। इस बहस के दौरान दोनों नेताओं में जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई, जिसके बीच-बचाव के लिए वरिष्ठ नेताओं को सामने आना पड़ा। बताया जा रहा है कि ललन सिंह से नाराज अशोक चौधरी ने कहा कि वो जो कुछ भी करते हैं, मुख्यमंत्री से पूछ कर करते हैं। उन्होंने कहा – बाकी आप कौन होते हैं मुझसे ये पूछने वाले कि मैं कहाँ जाता हूँ, कहाँ नहीं।

एनडीए की तरफ झुकाव के सवाल पर ये बोले नीतीश कुमार

अशोक चौधरी और ललन सिंह के बीच तनातनी की खबर उस समय आ रही है, जब नीतीश कुमार के एक बार फिर से पाला बदलने की सुगबुगाहट मीडिया की सुर्खियाँ बटोर रही हैं। इस बारे में जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि इस बात में कितनी सच्चाई है कि आपका लगाव एनडीए की तरफ जा रहा है? इस पर सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि लोग जो अटकले लगाते हैं, लगाने दीजिए। हम विपक्षी दलों को एकजुट करने में लगे हैं।

कुछ ऐसा ही सवाल जब उनके पुराने साथी रहे बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और अब सांसद सुशील कुमार से पूछा गया, तो उन्होंने साफ कह दिया कि नीतीश कुमार का अब भाजपा में स्वागत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अमित शाह एक बार नहीं, बल्कि दो बार कह चुके हैं कि अब नीतीश कुमार के लिए भाजपा के दरवाजे बंद हो चुके हैं। हम 2024 और 2025 का चुनाव जीतेंगे और रही बात नीतीश कुमार की, तो उनके लिए अब भाजपा के दरवाजे बंद हो चुके हैं।

चौंकाते रहे हैं नीतीश कुमार

बता दें कि नीतीश कुमार भाजपा के साथ गठबंधन के दम पर कई बार मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने राजद के साथ अब दूसरी बार गठबंधन किया है। नीतीश कुमार की राजनीति के जानकार लोग इस बात को भलीभाँति जानते हैं कि नीतीश कुमार के बारे में अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल काम है। वो कई बार चौंकाने वाले कदम उठाते रहे हैं।

खासकर 2015 के विधानसभा चुनाव को देखें तो उन्होंने आरजेडी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और चुनाव के कुछ समय बाद ही उन्होंने आरजेडी को छोड़कर फिर से भाजपा के साथ सरकार बना ली थी। लेकिन, अगले चुनाव में भाजपा के साथ जीत हासिल करने के बाद उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ लिया था और वापस आरजेडी के साथ सरकार बना कर अभी मुख्यमंत्री पद संभाल रहे हैं।

‘झुग्गी खाली करें मुस्लिम, वरना होगा बहन-बीवी का बलात्कार’: गुरुग्राम में हिन्दू संगठनों के नाम से पोस्टर लगाने वाला निकला आसिफ, कॉन्ग्रेस-सपा ने हिन्दुओं को कहा भला-बुरा

गुरुग्राम के सेक्टर 69- A क्षेत्र में 26-27 अगस्त 2023 की रात लगे कुछ पोस्टरों से माहौल तनावपूर्ण हो गया था। इन पोस्टरों में ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) और ‘बजरंग दल’ के नाम से झुग्गी-झोपड़ी खाली करने की धमकी लिखी थी। धमकी में झुग्गियाँ खाली करने की डेडलाइन 28 अगस्त रखी गई थी। इन पोस्टरों को ले कर इस्लामी और वामपंथी समूहों सहित कॉन्ग्रेस पार्टी के नेताओं ने हिन्दू संगठनों को बदनाम करने की पूरी कोशिश की।

आखिरकार इस पूरी साजिश की जड़ में आसिफ नाम का एक कबाड़ी शामिल मिला। पुलिस ने आसिफ को गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को गिरफ्तार कर लिया।

कबाड़ कारोबार पर बादशाहत की चाहत

मामला गुरुग्राम के थाना क्षेत्र बादशाहपुर का है। 22 सितंबर, 2023 को गुरुग्राम पुलिस ने आसिफ की गिरफ्तारी की सूचना सार्वजनिक की। पुलिस ने बताया कि 26-27 अगस्त की रात लगे पोस्टरों की FIR 28 अगस्त को दर्ज हुई थी। मामले की जाँच क्राइम ब्रांच ने की थी। पुलिस ने धमकी भरे पोस्टरों को लगाने के आरोप में उत्तराखंड के उधमसिंहनगर के गाँव सरकहड निवासी आसिफ को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आसिफ ने बताया कि उसकी कबाड़ की दुकान गुरुग्राम के सेक्टर 69 के पास है। दुकान के पास एक अन्य कबाड़ी की भी दुकान है।

पुलिस के मुताबिक, आसिफ ने बताया कि वह कबाड़ के काम में आसपास कोई कम्पटीशन नहीं चाहता था। वह पड़ोस के दुकानदार को भगाना चाहता था। इसी साजिश के तहत उसने पड़ोसी की दुकान के आगे धमकी भरे पोस्टर चिपका दिए थे। आसिफ ने पुलिस के आगे अपना गुनाह कबूल कर लिया है। उसे जेल भी भेज दिया गया है। हालाँकि, केस में अभी जाँच जारी है।

आसिफ की साजिश को कट्टरपंथी, वामपंथी और राजनैतिक हवा

बड़े-बड़े शब्दों में सूचना हेडिंग के साथ इस पोस्टर में लिखा था, “सारे झुग्गी वालों को सूचित किया जाता है 28-08-2023 तक खाली कर के चले जाओ वरना इसका अंजाम बहुत बुरा होगा। अगर नहीं गए तो अपनी मौत का जिम्मेदार खुद होगा। जितना जल्दी हो सके तुम सब खाली कर दो। साले मुल्ले लोगों की बहन-बीवी का बलात्कार होगा। अगर इज्जत बचाना है तो बचा लोग। तुम्हारे पास दो दिन हैं। फिर मत चिल्लाना।” पोस्टर के अंत में बहन की गालियाँ देते हुए नीचे लिखा, “तुम्हारा बाप बजरंग दल।” लगभग इन्हीं शब्दों के साथ लिखे एक अन्य पोस्टर में नीचे विश्व हिन्दू परिषद लिख दिया गया था। हाथ से लिखे इन पोस्टरों को गोंद से चिपकाया गया था।

आफरीन नाम के हैंडल ने नूहं हिंसा के दौरान फर्जी ट्वीट कर के बिना माफ़ी माँगे डिलीट करने वाले पुनीत कुमार सिंह के ‘बोलता हिंदुस्तान’ की इस मुद्दे पर बनी खबर शेयर की। 31 अगस्त को कैप्शन में उन्होंने लिखा था, “ये ज़रूर सड़े हुए नारंगी संतरों के छिलकों का काम है क्या पुलिस इस मामले की जाँच करेगी? या जब यह मामला खराब हो जाएगा तब एक्शन लेगी पुलिस, वो भी सिर्फ़ मुसलमानों पर, क्योंकि धमकी मुस्लिमों को मिल रही हैं। अभी खामोश रहिए क्योंकि खट्टर सरकार और गुड़गांव (गुरुग्राम) पुलिस सो रही है।”

NDTV ने तो बाकायदा इस पर एक शो बना डाला। NDTV के एंकर मुसलमानों के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाने वालों की गिरफ्तारी की माँग जोर-शोर से उठाते दिखे। NDTV ने इसी शो में मुस्लिम कामगारों को डरा हुआ घोषित कर दिया। NDTV ने अपने शो में नफरती पोस्टर लगाने की वजह झुग्गी में रहने वाले ज्यादातर लोगों के मुस्लिम समुदाय का होना बताया। 3 मिनट से अधिक लम्बे इसी शो में यह भी बताते का प्रयास हुआ कि नूहं हिंसा में भी मुस्लिम ही पीड़ित हैं।

गुरुग्राम में रहने वाले बिहार के अररिया से कॉन्ग्रेस नेता बदरे आलम ने इस खबर को शेयर किया। 31 अगस्त को उन्होंने लिखा, “दिल्ली से सटे हुए हरियाणा गुरुग्राम में मुस्लिम कामगार डरे हुए हैं। गुरुग्राम के सेक्टर 70 के पास एक मुसलमान की झुग्गी में धमकी भरी पोस्टर लगाए गए। कहा जा रहा है कि वह यहाँ छोड़ कर चले जाएँ वरना झुग्गी जला दी जाएगी।”

लगातार हिन्दू संगठनों के खिलाफ भ्रामक खबरें छापने वाले पोर्टल ‘जर्नो मिरर’ ने तो 29 अगस्त को इस मामले में हिन्दू संगठनों को दोषी ठहरा दिया था। पुलिस जाँच का इंतज़ार किए बिना ही सीधे तौर पर मीडिया संस्थान ने इन पोस्टरों के पीछे VHP और ‘बजरंग दल’ वालों को जिम्मेदार बता डाला था।

चित्र- journomirror.com

इन सभी के अलावा सदफ आफरीन के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के नेता संतोष कुमार यादव और कॉन्ग्रेस नेता डॉ अरुणेश कुमार यादव ने भी इस मुद्दे पर बिना पुलिस की जाँच रिपोर्ट आए ही हंगामा मचाना शुरू कर दिया। कुछ के निशाने पर हरियाणा सरकार थी तो कुछ के हिंदूवादी संगठन। इन सभी के ट्वीट 28 अगस्त से 1 सितंबर के बीच सिलसिलेवार ढंग से आए।

चित्र साभार- ट्विटर पोस्ट के स्क्रीनशॉट्स

27 अगस्त को ही आ चुका था आसिफ का नाम

इस मामले में इस्लामी, वामपंथी हैंडलों, NDTV के अलावा कॉन्ग्रेसी और समाजवादी पार्टी नेताओं ने हंगामे की शुरुआत 28 अगस्त से की। लेकिन, ख़ास बात ये है कि घटना में आसिफ कबाड़ी का नाम एक दिन पहले 27 अगस्त को ही आ चुका था। 27 अगस्त, 2023 को ही मोजेद अली नाम के शिकायतकर्ता ने पुलिस में आसिफ के खिलाफ नामजद FIR दर्ज करवा दी थी। मोज़ेद अली की ही दुकान पर 26-27 सितंबर को आसिफ ने VHP और बजरंग दल के नाम से धमकी भरे पोस्टर चिपकाए थे। पुलिस में दर्ज कराई गई FIR में मोज़ेद अली ने पोस्टर चिपकाने के पीछे आसिफ के होने की आशंका जताई थी।

FIR कॉपी

मोज़ेद ने यह भी बताया था कि 3-4 दिन पहले आसिफ ने उन्हें धमकी दे कर कबाड़ी की दुकान बंद करने के लिए कहा था। FIR में आसिफ पर धार्मिक भावनाएँ भड़काने का आरोप लगाया गया। आसिफ को नामजद करते हुए पुलिस ने FIR में IPC की धारा 188, 294, 295- A, 504 और 506 लगाई थी। मोज़ेद अली उसी ऋषि पंडित की झुग्गी में रहते हैं जिसे खाली करने के पोस्टर लगाए गए थे। शिकायतकर्ता मोज़ेद मूल रूप से पश्चिम बंगाल के मालदा के रहने वाले हैं। वह सेक्टर 69 गुरुग्राम में चाय-पानी बेचते हैं और कबाड़ का काम करते हैं।

कई हिन्दू हुए हैं ऐसी साजिशों के शिकार

ऑपइंडिया ने इस मामले में गुरुग्राम निवासी और ‘हरियाणा प्रदेश शिवसेना युवा मोर्चा’ (शिंदे गुट) अध्यक्ष रितुराज अग्रवाल से बात की। ऋतुराज ने बताया कि भले ही इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने खुलासा करते हुए असल आरोपित आसिफ को पकड़ लिया लेकिन इस से पहले भी ऐसी कई साजिशें हो चुकी हैं। शिवसेना नेता का दावा है कि उन साजिशों के शिकार कई हिन्दू संगठन के सदस्यों को कानूनी कार्रवाई झेलना पड़ा है। उन्होंने यह भी बताया कि जिस जगह यह पोस्टर लगाए गए उसके आसपास के सेक्टरों में कुछ माह पहले खुले में नमाज़ को ले कर भी तनातनी हुई थी।

नूहं से जोड़ कर थी सनसनी फैलाने की साजिश

ऑपइंडिया से बात करते हुए ‘विश्व हिन्दू परिषद’ गुरुग्राम के जिला मंत्री यशवंत ने पोस्टर लगाने और उसे वायरल करने की टाइमिंग पर सवाल खड़ा किया। यशवंत ने हमें बताया कि हिन्दू संगठनों ने 28 अगस्त को अधूरी बृजमंडल यात्रा को पूरा करने का संकल्प लिया था। इस बीच 26-27 की रात ये पोस्टर लग गए। ऐसा तब हुआ जब पुलिस हाई अलर्ट पर थी। यशवंत ने आशंका जताई कि इस पूरे मामले को बृजमंडल यात्रा से जोड़ कर बड़ी सनसनी की साजिश रही होगी। उन्होंने हमें बताया कि वो जल्द ही पुलिस को ज्ञापन दे कर इस मामले की गहराई से जाँच करने की माँग करेंगे।

VHP नेता ने हमें यह भी बताया कि जैसे ही ये पोस्टर घटना के बाद वायरल हुए थे तभी उन लोगों ने खुल कर लोगों और मीडिया के साथ प्रशासन को भी बता दिया था कि ऐसी हरकतें VHP या बजरंग दल नहीं करते। यशवंत ने तनाव के माहौल में पुलिस द्वारा रखे धैर्य और अंत में सही कार्रवाई की तारीफ की।

दिल्ली में सड़क पर उतरे साधु-संत, पुलिस ने तमिलनाडु भवन तक नहीं जाने दिया: सनातन विरोधी बयानों पर उदयनिधि स्टालिन का फूँका पुतला

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के मंत्री बेटे उदयनिधि के खिलाफ सैकड़ों हिंदू संतों ने सोमवार (25 सितंबर 2023) को दिल्ली में प्रदर्शन किया। सनातन विरोधी बयानों को लेकर उदयनिधि का पुतला फूँका। प्रदर्शनकारियों ने उन राजनीतिक नेताओं के खिलाफ भी नारे लगाए जिन्होंने सनातन विरोधी बयान देते हुए द्रमुक नेता का समर्थन किया था।

दिल्ली संत महामंडल के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने उदयनिधि स्टालिन और अन्य नेताओं की निंदा करने वाली तख्तियाँ ले रखी थी। सरोजिनी नगर के एक मंदिर से तमिलनाडु भवन की ओर मार्च किया। पुलिस ने उन्हें अफ्रीका एवेन्यू पर रोक दिया। इसके बाद उन्होंने उदयनिधि और अन्य के पुतले फूँके। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की।

राज्य सरकारों की चुप्पी पर उठाए सवाल

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुखों को अपने नेताओं को ‘सनातन धर्म‘ के खिलाफ बयान जारी करने से रोकना चाहिए। उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन से अपने बेटे के बयानों के लिए माफी की माँग की। दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष नारायण गिरि महाराज ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि राज्य सरकारें इस मुद्दे पर चुप हैं।

नारायण गिरि महाराज ने कहा, “अब तो सुप्रीम कोर्ट ने भी सनातन धर्म के खिलाफ राजनेताओं के नफरत भरे भाषण का संज्ञान ले लिया है। सनातन धर्म के खिलाफ राजनेताओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करती है और ऐसे राजनीतिक नेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।”

बता दें कि तमिलनाडु सरकार में मंत्री उदयनिधि ने हाल ही में सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से किया था। इसे सामाजिक न्याय के खिलाफ बताते हुए इसके उन्मूलन का आह्वान किया था।

उदयनिधि स्टालिन ने अपने बयान पर माफी माँगने से इनकार करते हुए कहा था कि वे अपने बयान पर कायम हैं। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था, “मैंने केवल इतना कहा था कि हमें सनातन धर्म के सिद्धांतों का विरोध करना चाहिए। मैं फिर से कह रहा हूँ कि हमें ऐसे सिद्धांतों को मिटा देना चाहिए। लेकिन यह हास्यास्पद है कि कुछ लोगों ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर यह कह दिया कि मैंने नरसंहार करने की बात कही थी।”

उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “तमिलनाडु में ऐसे लोग हैं जो कहते हैं कि द्रविड़वाद को खत्म कर देना चाहिए। क्या इसका मतलब यह है कि वे सभी डीएमके कार्यकर्ताओं को मारना चाहते हैं?”

कौन है करीमा बलूच, जिसकी हत्या पर घिरे कनाडा के PM जस्टिन ट्रूडो: मानवाधिकार संगठन ने कहा – ISI की धमकियों के बावजूद नहीं उठाया कदम, खालिस्तानी आतंकी पर दे रहे भाषण

कनाडा के बलूच मानवाधिकार परिषद ने पीएम जस्टिन ट्रूडो पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। बलूचों के अधिकार की बात करने वाले इस समूह का कहना है कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर तो ट्रुडो भारत से सवाल पूछ रहे हैं। लेकिन, उन्होंने बलूचिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता करीमा बलूच की मौत पर चुप्पी साध रखी है।

‘बलूच ह्यूमन राइट्स काउंसिल’ ऑफ कनाडा ने जस्टिन ट्रुडो को एक पत्र लिखा है। इसमें कनाडा सरकार पर करीमा बलूच की मौत पर अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही कहा कि कनाडा सरकार व पुलिस को करीमा को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से मिल रही धमकियों के बारे में जानकारी थी, लेकिन सुरक्षा के कदम नहीं उठाए गए। खालिस्तानी आतंकी निज्जर की मौत पर तो ट्रुडो जोशीले भाषण दे रहे हैं। लेकिन करीमा बलूच की मौत के मामले में उन्होंने कुछ भी नहीं बोला था।

यही नहीं, इस पत्र में बलूच मानवाधिकार समूह ने यह भी कहा है कि कनाडा में बलूचों की जनसंख्या कम है और सांसदों के चुनाव में कोई बड़ा प्रभाव नहीं डाल सकते। इसलिए ऐसा लगता है कि चुनावों को देखते हुए कनाडा सरकार करीमा की मौत के मामले पर ध्यान नहीं दे रही है।

कौन हैं करीमा बलूच

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की रहने वाली करीमा बलूच बलूचिस्तान आंदोलन का सबसे बड़े चेहरों में से एक थीं। बलूचिस्तान वही प्रांत है जहाँ आज़ादी के लिए आंदोलन हो रहा है। मानवाधिकार कार्यकर्ता करीमा बलूच पाकिस्तानी हुकूमत को सीधे तौर पर टक्कर देकर बलूचों की आवाज बुलंद कर रही थीं।

वह बलूचों का इतना बड़ा चेहरा बन गई थीं कि पाकिस्तान सरकार और ISI ने उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया था। हालत यह थी कि बलूचिस्तान आंदोलन से जुड़े लोग धीरे-धीरे गायब होने लगे। इसका आरोप भी पाकिस्तान सरकार और ISI पर ही लगा। इस बीच करीमा बलूच को लगातार धमकियाँ मिलने लगीं। यही नहीं, पाकिस्तानी सेना और ISI ने उन पर आतंकवाद के आरोप मढ़ दिए। इससे तंग आकर वह कनाडा जाकर रहने लगीं।

हालाँकि, करीमा कनाडा जाकर भी खामोश नहीं रहीं। बलूचिस्तान में चल रहे आंदोलन को कनाडा से ही सहयोग कर रहीं थीं। इसके चलते कनाडा में भी उन्हें धमकियाँ मिल रही थीं। एक दिन वो अचानक गायब हो गईं। इसके बाद 21 दिसंबर, 2020 को उनका शव टोरंटो की ओंटारियो नदी किनारे मिला था। 

कनाडाई पीएम ट्रुडो खालिस्तानी आतंकी की मौत पर आज हो-हल्ला मचा रहे हैं, लेकिन बलूच आंदोलन के इतने बड़े चेहरे की मौत पर कनाडा ने एक बयान भी जारी नहीं किया था। वहीं कनाडाई पुलिस ने एक बयान में हत्या के संदेह से इनकार किया था। इसका मतलब यह था कि करीमा बलूच ने आत्महत्या की थी।

करीमा बलूच के पति हम्माल हैदर का कहना है, “मुझे विश्वास नहीं हो रहा है कि उनकी पत्नी ने आत्महत्या की है। वह एक मजबूत महिला थी और अच्छे मूड में घर से निकली थी। इस हत्या में साजिश से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि उन्हें धमकियाँ मिल रहीं थीं।” इसके अलावा बलूचिस्तान आंदोलन से जुड़े लोग भी करीमा बलूच की मौत को आत्महत्या न मानकर हत्या ही मानते हैं। साथ ही इसके लिए पाकिस्तानी सेना और ISI को जिम्मेदार ठहराते हैं।