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लोन चुकाने के लिए पड़ोसन की सवा साल की बच्ची का दबा दिया गला, बालियाँ और चेन नोंचने के बाद नदी में फेंकी लाश: बंगाल में नाएजा बीबी गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का उपखंड में बैंक का कर्ज चुकाने के लिए एक महिला ने पड़ोसी की नाबालिग बच्ची की हत्या कर दी। अरोपित का नाम नाएजा बीबी है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है। मृतका सहना खातून की उम्र सवा साल थी। अरोपित ने बच्ची के गले में पड़ी चाँदी की माला और कानों में सोने की बाली के लालच में उसे मार डाला। घटना शुक्रवार (22 सितंबर 2023) की है।

प्रभात खबर के मुताबिक, घटना मुर्शिदाबाद जिले के शमशेरगंज थाना क्षेत्र की है। सिकदरपुर की रहने वाली नाएजा बीबी ने बंधन बैंक से कर्ज लिया था। तय समय पर वो कर्ज चुकता नहीं कर पाई थी। इस बीच नाएजा बीबी की नजर पड़ोस में रहने वाली सीमा बीबी की सवा साल की बेटी सहना खातून पर पड़ी। सहना खातून के कानों में सोने की बालियाँ और गले में चाँदी की चेन थी।

बताया जा रहा है कि नाएजा बीबी इन गहनों को हासिल कर के उसी से अपने कर्ज को चुकता करने की साजिश रचने लगी। अपनी साजिश को अंजाम देने के लिए नाएजा बीबी 22 सितंबर को पड़ोसन सीमा बीबी के घर पहुँची। यहाँ थोड़ी देर सहना को गोद में खिलाने के बाद नाएजा उसे अपने साथ ले जाने लगी। पड़ोसन और परिचित होने के कारण सीमा ने नाएजा को मना नहीं किया।

नाएजा बच्ची को लेकर चली गई और शाम तक जब बच्ची घर लौटकर नहीं आई तो घर वालों ने उसकी खोजबीन शुरू कर दी। हर तरफ तलाश के बावजूद जब सहना नहीं मिली तब सबने मिलकर नाएजा बीबी से सवाल-जवाब शुरू किया। शुरुआत में नाएजा ने तमाम बहाने बनाए, लेकिन जब ग्रामीणों ने दबाव बनाया तब उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

नाएजा बीबी ने गाँव वालों को बताया कि वो बैंक का कर्ज चुकाने को ले कर काफी परेशान थी। शुक्रवार को वो बच्ची को अपने साथ ले गई। सुनसान में उसने बच्ची के कानों से सोने की बालियाँ और गले से चाँदी की चेन निकाल ली। बाद में नाएजा ने सहना का गला दबा कर हत्या कर दी। उसने बताया कि लाश को उसने नदी में फेंक दिया और घर चली आई।

इसके बाद बच्ची के परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। शमशेरगंज थाना की पुलिस ने गाँव पहुँचकर नाएजा बीबी को गिरफ्तार कर लिया। इसके साथ नदी में फेंके गए बच्ची के शव की तलाश शुरू कर दी गई है। खबर लिखे जाने तक लाश नहीं मिली थी।

9 वंदे भारत ट्रेन: जिन राज्यों में BJP की सरकार नहीं, वहाँ भी कनेक्टिविटी – ‘जहाँ के रेल मंत्री, वहाँ सबसे ज्यादा ट्रेन’ वाली मानसिकता खत्म

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (24 सितंबर 2023) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 9 नई वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। इनके शुरू होने से देश के 11 राज्यों को फायदा पहुँचेगा।

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि अब-तक देश में 25 वंदे भारत ट्रेनों की सुविधा थी और अब इसमें 9 ट्रेन और जुड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि वो दिन दूर नहीं है, जब वंदे भारत देश के हर हिस्से को कनेक्ट करेंगी।

दरअसल ये 9 ट्रेन 11 राज्यों राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, बिहार, पश्चिमी बंगाल, केरल, ओडिशा, झारखंड और गुजरात से चलेंगी। इन सुपरफास्ट ट्रेनों के चलने की वजह से यात्रियों के वक्त की बचत होगी।

अमृत काल के अमृत भारत स्टेशन

इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि नए भारत के नए लोग नए उत्साह और नई उमंग का प्रतीक हैं। ये वंदे भारत ट्रेनें नए भारत और उसके विश्वास का उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की खुशी है कि वंदे भारत का क्रेज बढ़ रहा है। इससे अब तक 1 करोड़ 11 लाख से अधिक यात्री सफर कर चुके हैं।

वंदे भारत ट्रेन आधुनिक कनेक्टिविटी और बुनियादी ढाँचे के विकास की गति का उदाहरण है। बुनियादी ढाँचे के विकास का पैमाना 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं से मेल खा रहा है। केंद्र ने भारतीय रेलवे का बजट भी बढ़ा दिया है। सरकार मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी पर भी काम कर रही है।

पीएम मोदी ने इस दौरान रेलवे स्टेशन के विकास पर कहा कि देश के कई रेलवे स्टेशन गुलामी के काल में बने थे। विकसित होते भारत को अपनी गुलामी के प्रतीक इन रेलवे स्टेशनों को भी विकसित करना होगा। अमृत काल में विकसित होने वाले रेलवे स्टेशन अमृत भारत स्टेशन कहे जाएँगे।

उन्होंने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं, जब देश का हर क्षेत्र वंदे भारत से जुड़ जाएगा। ये ट्रेन उन लोगों के लिए अहम है, जो ट्रेन का सफर कम से कम वक्त का रखना चाहते हें। ये ट्रेन उन लोगों की जरूरत बन गई है, जो एक शहर से दूसरे शहर जाकर एक ही दिन में काम पूरा करके लौटना चाहते हैं।

रेलवे स्टेशनों के जन्मदिन की परंपरा

इस मौके पर पीएम मोदी ने यह भी कहा कि कोई भी रेलवे स्टेशन हो, उसका स्थापना दिवस यानी जन्मदिवस होता है। मुंबई, पुणे, चेन्नई सहित कई शहरों में रेलवे स्टेशनों के जन्मदिवस मनाए जा रहे हैं। इस परंपरा को और आगे बढ़ाया जाएगा। इससे अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाएगा।

उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने रेलवे को उचित महत्व नहीं दिया। पहले की सरकारों में रेल मंत्रालय किसे मिलेगा, इस बात की अधिक ज्यादा चर्चा होती थी। ये सोच थी कि रेल मंत्रालय जिस राज्य से होगा, वहीं पर ज्यादा ट्रेन चलेंगी। ऐसा भी होता था कि नई ट्रेनों का ऐलान तो कर दिया जाता था, लेकिन वो ट्रेनें कभी चलती नहीं थीं।

पीएम मोदी ने कहा कि इस परंपरा ने देश का खासा नुकसान किया। उन्होंने ऐसी गलती नहीं दोहराने और किसी भी राज्य को पीछे नहीं छोड़ने का संकल्प लिया। उन्होंने बताया कि देश की आजादी से पहले हजारों स्टेशन बनाए गए थे, इसलिए स्टेशनों के आधुनिकीकरण का कार्यक्रम शुरू किया गया।

उन्होंने कहा कि सरकार ने रेल बजट में अभूतपूर्व बढ़ोतरी की है। 2014 में रेलवे का जितना बजट था, इस साल उससे आठ गुना ज्यादा बजट दिया गया है। सरकार ने यात्रा को आसान बनाने पर ध्यान केंद्रित किया है और वंदे भारत उसी कड़ी का एक हिस्सा है।

ये हैं 9 नई वंदे भारत ट्रेनें

पीएम मोदी ने 24 सितंबर 2023 को जिन वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई, वो हैं: कासरागोड – तिरुवनंतपुरम (केरल), जयपुर – उदयपुर (राजस्थान), विजयवाड़ा- रेनीगुंटा- चेन्नई (आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु), तिरुनेलवेली – मदुरै- चेन्नई (तमिलनाडु), जामनगर-अहमदाबाद (गुजरात), राँची – हावड़ा (झारखंड और पश्चिम बंगाल), हैदराबाद-बेंगलुरु (तेलंगाना और कर्नाटक), राउरकेला – पुरी (ओडिशा) और पटना – हावड़ा (बिहार और पश्चिम बंगाल)। इनके शुरू होने से इन स्टेशनों के बीच सफर के वक्त में 2 से 3 घंटे की कमी आएगी।

उदाहरण के लिए राउरकेला-भुवनेश्वर-पुरी वंदे भारत एक्सप्रेस और कासरगोड-तिरुवनंतपुरम वंदे भारत एक्सप्रेस इन शहरों के बीच चलने वाली मौजूदा ट्रेन से 3 घंटे तक कम वक्त लेगी। इसी तरह हैदराबाद-बेंगलुरु वंदे भारत एक्सप्रेस से इन शहरों के बीच सफर का वक्त करीब ढाई घंटे का होगा। वहीं तिरुनेलवेली-मदुरै-चेन्नई वंदे भारत एक्सप्रेस सफर को वक्त में 2 घंटे तक की कमी कर देगी।

ये जुड़े हैं नए फीचर

9 वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों में यात्रा को और अधिक आरामदायक बनाने के लिए यात्रियों की प्रतिक्रिया के बाद कई नई सुविधाएँ शामिल की गई हैं। मसलन सीट के झुकाव का कोण 17.31 डिग्री से बढ़ाकर 19.37 डिग्री कर दिया गया है। कुशन की कठोरता को भी सही किया गया है।

वहीं एक्जीक्यूटिव क्लास कोच में सीट को रंग लाल से बदल कर आंखों को सुहाने वाला नीला कर दिया गया है। सीटों के नीचे मोबाइल चार्जिंग पॉइंट की बेहतर पहुँच की गई है। सीटों के लिए फ़ुटरेस्ट को बढ़ाया गया है।

एग्जीक्यूटिव क्लास कोच में सीटों के साथ मैगज़ीन बैग भी है तो शौचालयों में पानी के छींटों से बचने के लिए वॉश बेसिन की गहराई बढ़ाई गई है। शौचालयों में रोशनी को 1.5 वॉट से बढ़ाकर 2.5 वॉट कर दिया गया है। बेहतर पकड़ के लिए शौचालय के हैंडल को अतिरिक्त मोड़ा गया है।

ट्रेलर कोच चलाने में दिव्यांग यात्रियों की व्हील चेयर के लिए पॉइंट सुरक्षित करने की जगह है। पैनलों पर इन्सुलेशन के साथ बेहतर एयरकंडीशनिंग के लिए बेहतर एयर टाइटनेस है। कोचों के अंदर बेहतर एयरोसोल आधारित आग का पता लगाने और उसे रोकने का सिस्टम है।

DUSU चुनाव में वामपंथी दल AISA और SFI के उम्मीदवारों को NOTA से भी कम मिले वोट: 16559 विद्यार्थियों ने चुना ‘इनमें से कोई नहीं’ का विकल्प

इस साल हुए दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन यानी डूसू (DUSU) चुनावों में बड़ी संख्या में वोटर्स ने ‘इनमें से कोई भी नहीं’ (NOTA) विकल्प का इस्तेमाल किया। शुक्रवार (22 सितंबर) को वोट करने वाले 53,452 छात्र-छात्राओं में से 16,559 विद्यार्थियों ने नोटा का विकल्प चुना।

नोटा की संख्या में बढ़ोतरी दर्शाता है कि ताकत और पैसे के इस चुनावी खेल में विद्यार्थियों की दिलचस्पी कम होती जा रही है। वहीं, वामपंथी दलों की हालत और भी बुरी है। डूसू चुनाव के कुछ वामपंथी उम्मीदवारों को नोटा से भी कम वोट मिले हैं।

हैरानी की बात यह है कि स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) समेत वामपंथी दलों को मिले कुल वोटों के मुकाबले नोटा की संख्या बहुत अधिक रही।

नोटा ने बनाया मुकाबला कड़ा

शनिवार (23 सितंबर) को काउंटिंग के दौर में ये नोटा ही था, जिसकी वजह से एनएसयूआई और एबीवीपी के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। डीयू के 32 कॉलेजों में एबीवीपी (ABVP) की जीत हुई थी तो 9 कॉलेजों में क्लीन स्वीप किया। यानी कि इन 9 कॉलेजों के सभी पदों पर सिर्फ ABVP के ही उम्मीदवार जीते हैं। 

एबीवीपी ने यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष पद सहित 3 सीटों पर जीत दर्ज की है। एनसीयूआई (NSUI) के खाते में एक सीट गई है। ABVP के तुषार डेढ़ा अध्यक्ष (23460 वोट), अपराजिता सचिव (24543 वोट), सचिन बैसला संयुक्त सचिव (24,955 वोट) तथा NSUI के अभी दहिया (22331 वोट) को उपाध्यक्ष पद पर जीत हासिल हुई है।

नॉर्थ कैंपस में पीछे रह गई AISA

विद्यार्थियों का कहना है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनिंदा कॉलेजों में ही अब वामपंथी संगठन सक्रिय हैं। नॉर्थ कैंपस में ही उनकी तूती बोलती थी, लेकिन साल 2023 के चुनावों में वो यहाँ भी फीके पड़ गए। ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (आइसा) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआइ) ने सभी पदों पर चुनाव लड़ा था।

आइसा ने अध्यक्ष पद के लिए आयशा अहमद खान, उपाध्यक्ष के लिए अनुष्का चौधरी, सचिव के लिए आदित्य प्रताप सिंह और संयुक्त सचिव के लिए अंजलि कुमारी को मैदान में उतारा था। आयशा 3335 वोट लेकर तीसरे नंबर पर रही थीं। वहीं उपाध्यक्ष की उम्मीदवार अनुष्का को 3492 वोट पड़े। उनके मुकाबले नोटा को 3,914 वोट पड़े।

इसी तरह सचिव पद पर उतरे आदित्य प्रताप सिंह को 3884 वोट मिले। यहाँ भी नोटा उनसे 5108 वोट से बाजी मार ले गया। आइसा की संयुक्त सचिव पद की उम्मीदवार अंजलि को 4195 वोट मिले। उनकी तुलना में इस पद पर भी नोटा 4786 वोट से बाजी मार ले गया।

SFI को भी मुँह की खानी पड़ी

इसी तरह एसएफआई (SFI) के पैनल में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार आरिफ सिद्दीकी को नोटा के 2,757 वोट के मुकाबले महज 1,838 वोट पड़े। इसके उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार अंकित को 2,906 वोट मिले, जबकि नोटा को 3,914 वोट मिले। वहीं संगठन के संयुक्त सचिव को 3,311 वोट मिले जबकि नोटा को 4,786 वोट पड़े।

वामपंथी छात्र संगठनों में सबसे अधिक वोट हासिल करने वाली सचिव पद की एसएफआई की उम्मीदवार अदिति त्यागी रहीं। उन्हें 5150 वोट मिले, लेकिन वो तीसरे स्थान पर सिमटकर रह गईं। संयुक्त सचिव पर निष्ठा सिंह को 3311 वोट मिले। वे चौथे स्थान पर रहीं, लेकिन नोटा उनसे बाजी मार गया।

डूसू चुनावों में सचिव पद के लिए नोटा का विकल्प सबसे अधिक चुना गया। इस पद पर सबसे अधिक 5108 वोट नोटा को पड़े। उसके बाद संयुक्त सचिव पद के लिए 4786 नोटा को वोट पड़े। वहीं, उपाध्यक्ष पद के लिए 3914 और अध्यक्ष पद के लिए 2751 विद्यार्थियों ने नोटा को चुना।

निशिकांत दुबे के बाद अब BJP सांसद रवि किशन ने दानिश अली के खिलाफ लिखा पत्र, कहा- जनसंख्या कानून को लेकर की थी आपत्तिजनक टिप्पणी

भाजपा के लोकसभा सांसद रमेश बिधूड़ी और बसपा सांसद दानिश अली के बीच चल रहे विवाद में अब भाजपा सांसद रवि किशन शुक्ला की इंट्री हुई है। रवि किशन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को पत्र लिखा है। रवि किशन ने अपने पत्र में दानिश अली पर सभी सांसदों को अनावश्यक तौर पर टोकने का आरोप लगाया है।

रवि किशन के मुताबिक, दानिश अली ने साल 2022 में उन पर व्यक्तिगत और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। रवि किशन का कहना है कि उस समय वो एक प्राइवेट बिल को सदन में रख रहे थे। रविवार (24 सितंबर 2023) को लिखे गए इस पत्र में रवि किशन ने ओम बिड़ला से माँग की है कि वो अपनी जाँच में उनके द्वारा दी गई जानकारियों को भी शामिल करें।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने सांसद रवि किशन के इस पत्र को शेयर किया है। रवि किशन ने इस पत्र में 9 दिसंबर 2022 की तारीख का जिक्र किया है। इस दिन सदन में उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण कानून 2019 का प्राइवेट बिल पेश किया था। सांसद का आरोप है कि तब बसपा सांसद दानिश अली ने उन पर आपत्तिजनक और व्यक्तिगत टिप्पणी की थी। दानिश ने भरे सदन में कहा था, “जनसंख्या नियंत्रण कानून बिल वो संसद सदस्य पेश कर रहे हैं, जिनके खुद के 4 बच्चे हैं।”

रवि किशन ने रमेश बिधूड़ी और दानिश अली के बीच चल रहे विवाद पर अपनी राय भी रखी है। उन्होंने कहा कि इस मामले को जिस तरह से दानिश अली तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं, वह उनके द्वारा मीडिया में कवरेज पाने का हथकंडा लग रहा है। किशन ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से निवेदन किया है कि वो अपनी जाँच में उनके पत्र में लिखी बातों को भी शामिल करें।

अमित मालवीय ने भी यह पत्र शेयर करते हुए लिखा, “जिस प्रकार से दानिश अली के ख़िलाफ़ एक के बाद एक सांसद पत्र लिख रहे हैं, उससे ऐसा लगता है कि दानिश अली के लोकसभा पटल पर इस्तीफ़ा देकर कॉन्ग्रेस में शामिल होने के मंसूबे को बड़ा धक्का लगा है। साथ ही, राहुल गाँधी की ‘मोहब्बत की दुकान’ पर ताला भी लग गया है।”

बताते चलें कि रवि किशन से पहले भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी दानिश अली की संसद में की जाने वाली हरकतों को आपत्तिजनक बताया था। उन्होंने दानिश अली के आचरण की भी जाँच की माँग की है। भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने भी दानिश अली को सदन में हर किसी को बेवजह टोकने वाला सदस्य बताया है।

पाकिस्तान का अभी जो PM है, वो हिंदुओं से घृणा करता है: 3 साल पहले उसने लिखा था – ‘उस दिन का इंतजार, जब सभी हिन्दू इस्लाम समझ लेंगे’

सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के वर्तमान कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक का एक पुराना ट्वीट वायरल हो रहा है। इस ट्वीट में अनवारुल हक आने वाले समय में सभी हिन्दुओं के इस्लाम कबूल करने की उम्मीद जता रहे। हक के मुताबिक वो उस दिन (सभी हिंदू इस्लाम कबूल कर लेंगे) का इंतज़ार कर रहे हैं।

पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक का एक और ट्वीट भी वायरल हो रहा। इसमें वो अखंड भारत के नक्शे को देख कर पाकिस्तान को नारंगी सपने पूरे होने में बाधा बता रहे हैं। अनवारुल हक ने यह ट्वीट साल 2020 में किया था।

यह मामला सितंबर 2020 का है। तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान संयुक्त राष्ट्र की सभा को सम्बोधित कर रहे थे। हुआ यह था कि जैसे ही इमरान खान ने भारत के खिलाफ बदजुबानी शुरू की, वैसे ही भारतीय प्रतिनिधि उठ कर उस सभा से बाहर चले गए थे। इस पर इंडिया टुडे की पत्रकार गीता मोहन ने 25 सितंबर 2020 को ट्वीट किया था। इसी ट्वीट के नीचे पाकिस्तान के वर्तमान कार्यवाहक प्रधानमंत्री और तत्कालीन बलूचिस्तान आवामी पार्टी नेता अनवार उल हक ने अपनी कट्टरपंथी सोच दिखानी शुरू कर दी थी।

इमरान खान के सम्बोधन के दौरान भारतीय प्रतिनिधि के संयुक्त राष्ट्र सभा से उठ जाने के मुद्दे पर भी अनवार उल हक ने जहर उगला। उन्होंने कहा कि जैसे सभा छोड़ कर चले गए, वैसे ही भारतीय लोग कश्मीर भी छोड़ दें। ऐसा करना उन्होंने एशिया महाद्वीप में शांति के लिए जरूरी बताया था।

अनवारुल हक के इस बयान पर @Ashmytweets3 ने पाकिस्तान बनवाने वाले मोहम्मद अली जिन्ना को काफिर बताया। उन्होंने व्यंग्य करते हुए पूछा कि पाकिस्तान एक हिन्दू के खून से पैदा हुए जिन्ना को कैसे बर्दाश्त कर रहा है। इस पर अनवारुल हक ने कहा कि वो इंतज़ार उस दिन का कर रहे हैं, जब सभी हिन्दू इस्लाम के सत्य को समझ लेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वो इसके लिए हजार साल कर इंतजार कर सकते हैं, कोई जल्दबाजी नहीं है।

पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवारुल हक यहीं नहीं रुके। उनके थ्रेड के नीचे एक बार फिर @Ashmytweets3 ने अखंड भारत का नक्शा शेयर किया। यह नक्शा भगवा रंग में था। कैप्शन के तौर पर यूजर ने लिखा, “इंतज़ार करते रहिए सर।” इस ट्वीट के जवाब में अनवारुल हक ने लिखा कि पाकिस्तान नारंगी सपनों (अखंड भारत का सपना) को पूरा होने में सबसे बड़ी रुकावट है।

अपनी ऊल-जुलूल बयानबाजी के चलते पाकिस्तानी कार्यवाहक प्रधानमंत्री काफी ट्रोल हो रहे हैं। कई नेटिज़ेंस उन्हें भ$वा जैसे शब्दों से सम्बोधित करते हुए खुद के देश को सँभालने की सलाह दे रहे।

चित्र साभार- @Geeta_Mohan के ट्वीट और पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री की प्रतिक्रिया पर आए कॉमेंट

नायक नाम के यूजर से पाकिस्तान के कार्यवाहक प्रधानमंत्री को मूल रूप से खत्री गोत्र का बताया। वहीं आनंद ठाकुर ने पाकिस्तान के घर-घर में जय श्री राम का नारा गूँजने की बात कही। @Vagabond_shoes नाम के हैंडल ने लिखा, “आ** का न ** का, ज्ञान **दे सारे ब्रह्माण्ड का। बताओ माँ-बहन की सलवार पहनने वाले ज्ञान दे रहे हैं।”

जेल में बंद मनीष कश्यप की माँ ने जहानाबाद में 6 मजदूरों को दी आर्थिक मदद: कहा- तमिलनाडु में मारपीट के बाद बिहार लौटने को मजबूर हुए ये लोग

फर्जी वीडियो के जरिए माहौल खराब करने का आरोप लगाकर जेल में बंद किए गए बिहार के ट्यूबर मनीष कश्यप की माँ अब लोगों के बीच पहुँची हैं। उन्होंने तमिलनाडु में हिंसा के शिकार हुए मजदूरों की आर्थिक मदद की और अपने बेटे के लिए सहयोग माँगा। मनीष पर तमिलनाडु और बिहार में लगभग दर्जन भर केस दर्ज किए गए हैं।

पैसे बाँटते हुए मनीष कश्यप की माँ ने कहा, “अगर हमार बेटे रहतन त बहुत रोपेया दिआइत, अतने ना दियाइत। लेकिन, जवन रहल ह हमरा पर्स में तवन ले आके मदद कर तानी। (मेरा बेटा रहता तो और भी रुपए देता। हमारे पर्स में जो रुपया था वही लाकर मैं आप लोगों की मदद कर रही हूँ।”

दरअसल, X पर Sach Talk नाम के एक हैंडल ने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें एक महिला और एक युवा लड़़का कुछ लोगों को पैसे देते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो में लड़का कहता है, “हम लोग जहानाबाद में पहुँचे हैं। जहानाबाद के 6 मजदूर, जो मजदूरी करने तमिलनाडु गए थे उन्हें वहाँ अगवा करके बुरी तरह पीटा गया था।”

वीडियो में वो लड़का आगे कहता है, ये मनीष कश्यप की माता जी हैं। इन्हें जैसे ही पता चला तो यहाँ आई हैं और कुछ आर्थिक मदद भी लेकर आई हैं। ये खुद परेशान हैं, क्योंकि मनीष कश्यप अभी जेल में हैं और वो मजदूरों के लिए ही लड़े थे। इसकी वजह से उन पर दर्जनों केस हुए। तमिलनाडु में भी और बिहार में भी। एनएसए भी लगा। आज इनकी माँ दर-दर भटक रही हैं और इंसाफ की गुहार लगा रही हैं।”

इस दौरान वहाँ मौजूद 6 लोगों को 5-5 हजार रुपए दिए गए। कहा जा रहा है कि ये सभी लोग तमिलनाडु में मजदूरी करने के लिए गए थे और वहाँ पर उनके साथ मारपीट की गई। इस दौरान कैमरे पर कुछ लोगों ने अपने चोट भी दिखाए और बताया कि 19 सितंबर को वे लोग जान बचाकर तमिलनाडु से वापस बिहार आ गए।

बता दें कि शुक्रवार (22 सितंबर 2023) को पुलिस कस्टडी में कोर्ट लाए गए मनीष कश्यप ने पत्रकारों से बातचीत की थी। इस दौरान उन्होंने बिहार सरकार को ललकारा था और अपनी माँ से मिलते हुए कहा था कि जिस तरह से उनकी माँ आज रो रही है, जेल से बाहर आकर वे दूसरों की माँओं के आँसू पोछेंगे।

उस दौरान मनीष कश्यप ने कहा था, “मैं फौजी का बेटा हूँ, मर जाऊँगा लेकिन झुकूँगा नहीं। एक दिन हम सरकार बनाएँगे। चलाएँगे भी हम सरकार और दिखाएँगे भी हम सरकार को कि किस प्रकार से सरकार चलाई जाती है। (आप इसे 1:42 से 1:55 तक सुन सकते हैं।) इस दौरान मनीष कश्यप ने राज्य सरकार पर जातिवाद और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

जेल व्यवस्था की पोल खोलते हुए उन्होंने कहा था, “जेल में पुलिस अधिकारी स्मैक, गाँजा और सिगरेट वगैरह पहुँचवाते हैं। कॉन्स्टेबल नहीं, ये स्टार वाले। वहाँ गाँजा-सिगरेट पीकर मेरे मुँह पर फूँक दिया जाता है। सुरक्षा का कोर्ट में कोई इंतजाम नहीं रहता है। पत्रकार की स्वतंत्रता की बात करने वाले नीतीश कुमार चेक कराएँ जेल में। 2 ग्राम स्मैक से सालों की सज़ा हो जाती है, लेकिन जेल में इतना स्मैक आता है और कुछ नहीं होता।”

ईसाई बनाने के लिए घर खाली करने का प्रेशर, फिर धक्का-मुक्की और मौत: पुलिस जिसे बता रही हार्ट अटैक, परिवार वाले YMCA पर लगा रहे गंभीर आरोप

मध्य प्रदेश के जबलपुर में मोहनलाल नाम के एक व्यक्ति की संदिग्ध मौत पर विवाद खड़ा हो गया है। परिजनों का आरोप है कि ईसाई न बनने पर मोहनलाल की हत्या कर दी गई है। पुलिस हालाँकि इसे हार्ट अटैक से हुई मौत बता रही।

इस घटना के विरोध में हिन्दू संगठनों ने विरोध दर्ज करवाते हुए पुलिस से आरोपित ईसाई संगठन से जुड़े लोगों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। घटना शनिवार (23 सितंबर 2023) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला जबलपुर के सदर इलाके का है। यहाँ मोहनलाल पासी का ईसाई संगठन यंग मेंस क्रिश्चियन एसोशिएशन (YMCA) से एक जमीन को लेकर विवाद था।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि शनिवार को ईसाई संगठन के लोग उनके घर पहुँचे। उनके साथ स्थानीय पुलिस भी थे। YMCA के सदस्यों ने पीड़ित परिवार पर तुरंत मकान खाली करने का दबाव बनाया। आरोपित अदालत के किसी आदेश का हवाला दे रहे थे। हालाँकि मोहनलाल ने मकान खाली करने से मना कर दिया। इसी बात पर दोनों पक्षों में तनातनी हो गई।

पीड़ित घर वालों का आरोप है कि ईसाई संगठन से जुड़े लोगों ने विवाद के दौरान मोहनलाल को धक्का दे दिया। इस धक्के से मोहनलाल को चोट लगी और थोड़े समय के बाद उनकी मौत हो गई। मोहनलाल की मौत के बाद पीड़ित परिजनों ने कैंट थाने पर हंगामा खड़ा कर दिया। मामले की भनक लगते ही हिन्दू संगठन से जुड़े लोग भी थाने पहुँचे। हिन्दू सेना ने इस घटना के पीछे ईसाई धर्मान्तरण की साजिश का आरोप लगाया।

पीड़ित परिजनों ने भी बताया कि उन पर लम्बे समय से ईसाई संगठन की तरफ से धर्म परिवर्तन का दबाव था, जिसे न मानने पर मोहनलाल के साथ ऐसी घटना को अंजाम दिया गया। हालाँकि पुलिस प्रथम दृष्टया मोहनलाल की मौत की वजह हार्ट अटैक को बता रही है।

ईसाई संगठन (YMCA) पर मृतक के परिवार की महिलाओं से छेड़खानी का भी आरोप है। पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने इस मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने मीडिया से बताया कि पूरे प्रकरण की गहनता से जाँच करवाई जा रही है।

उत्तराखंड की ‘घोडा लाइब्रेरी’ से लेकर राजस्थान में 30000 साँपों को बचाने वाले व्यक्ति तक, ‘मन की बात’ में PM मोदी ने बताई सच्ची कहानियाँ, बोले – देखने जाइए हेरिटेज साइट्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (24 सितंबर, 2023) को देश से मन की बात के 105वें एपिसोड में कहा कि उन्हें देश की सफलता को, देशवासियों की सफलता को, उनके प्रेरणा देने वाले जीवन को जनता से साझा करने का मौका मिला है। उन्होंने इसकी शुरुआत करते हुए कहा की इन दिनों सबसे अधिक पत्र और संदेश उन्हें 2 विषयों पर सबसे अधिक मिले हैं। पहला विषय चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग और दूसरा विषय दिल्ली में G20 का सफल आयोजन है।

पीएम ने कहा कि कहा कि जब चंद्रयान-3 का लैंडर चंद्रमा पर उतरने वाला था, तब करोड़ों लोग अलग-अलग माध्यमों के जरिए एक साथ इस घटना के पल-पल के साक्षी बन रहे थे। इसरो के यू ट्यूब लाइव चैनल पर 80 लाख से अधिक लोगों ने इसे देखा, ये अपने आप में ही एक रिकॉर्ड है। इससे पता चलता है कि चंद्रयान-3 से करोड़ों भारतीयों का कितना गहरा लगाव है।

उन्होंने कहा कि चंद्रयान की इस सफलता पर देश में इन दिनों एक बहुत ही शानदार Quiz Competition भी चल रहा है, प्रश्नस्पर्धा, और उसे नाम दिया गया है –‘चंद्रयान-3 महाक्विज’। उन्होंने जानकारी दी कि MyGov पोर्टल पर हो रही इस प्रतियोगिता में अब तक 15 लाख से ज्यादा लोग हिस्सा ले चुके हैं। MyGov की शुरुआत के बाद यह किसी भी क्विज में सबसे बड़ी भागीदारी है। उन्होंने अपील की कि अगर आपने अब तक इसमें हिस्सा नहीं लिया है तो अब देर मत करिए, अभी इसमें 6 दिन और बचे हैं।

पीएम मोदी ने देशवासियों को ‘मेरे परिवारजनों’ कह कर संबोधित करते हुए कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता के बाद G20 के शानदार आयोजन ने हर भारतीय की खुशी को दोगुना कर दिया। ‘भारत मंडपम’ तो अपने आप में एक सेलेब्रिटी की तरह हो गया है। लोग उसके साथ सेल्फी खिंचा रहे हैं और गर्व से पोस्ट भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत ने इस समिट में अफ्रीकन यूनियन को G20 में स्थायी सदस्य बनाकर अपने नेतृत्व का लोहा मनवाया है।

उन्होंने कहा, “आपको ध्यान होगा, जब भारत बहुत समृद्ध था, उस ज़माने में, हमारे देश में, और दुनिया में, सिल्क रूट की बहुत चर्चा होती थी। ये सिल्क रूट, व्यापार-कारोबार का बहुत बड़ा माध्यम था। अब आधुनिक ज़माने में भारत ने एक और आर्थिक कॉरिडोर, G20 में सुझाया है। ये है India-Middle East-Europe Economic Corridor. ये कॉरिडोर आने वाले सैकड़ों वर्षों तक विश्व व्यापार का आधार बनने जा रहा है, और इतिहास इस बात को हमेशा याद रखेगा कि इस कॉरिडोर का सूत्रपात भारत की धरती पर हुआ था। G20 के दौरान जिस तरह भारत की युवाशक्ति, इस आयोजन से जुड़ी, उसकी आज, विशेष चर्चा आवश्यक है। साल-भर तक देश के अनेकों विश्वविद्यालयों में G20 से जुड़े कार्यक्रम हुए। अब इसी श्रृंखला में दिल्ली में एक और रोचक कार्यक्रम होने जा रहा है –’G20 University Connect Programme’. इस कार्यक्रम के माध्यम से देश-भर के लाखों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी एक-दूसरे से जुड़ेंगे।”

पीएम मोदी ने बताय कि इसमें IITs, IIMs, NITs और मेडिकल कॉलेजों जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थान भी भाग लेंगे। उन्होंने अपील की कि अगर आप कॉलेज छात्र हैं, तो, 26 सितम्बर को होने वाले इस कार्यक्रम को ज़रूर देखें, इससे ज़रूर जुड़ें। पीएम मोदी ने कहा कि भारत के भविष्य में, युवाओं के भविष्य पर, इसमें, बहुत सारी दिलचस्प बातें होने वाली हैं। वो खुद भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उन्हें भी कॉलेज के छात्रों से संवाद का इंतजार है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “मेरे परिवारजनों, आज से 2 दिन बाद, 27 सितम्बर को ‘विश्व पर्यटन दिवस’ है। पर्यटन को कुछ लोग सिर्फ सैर-सपाटे के तौर पर देखते हैं, लेकिन पर्यटन का एक बहुत बड़ा पहलू रोजगार से जुड़ा है। कहते हैं, सबसे कम निवेश में, सबसे ज्यादा रोजगार, अगर कोई सेक्टर पैदा करता है, तो वो, पर्यटन सेक्टर ही है। पर्यटन सेक्टर को बढ़ाने में, किसी भी देश के लिए गुडविल, उसके प्रति आकर्षण बहुत मायने रखता है। बीते कुछ वर्षों में भारत के प्रति आकर्षण बहुत बढ़ा है और G20 के सफल आयोजन के बाद दुनिया के लोगों की रुचि भारत में और बढ़ गई है। G20 में एक लाख से ज्यादा प्रतिनिधि भारत आए। वो यहाँ की विविधता, अलग-अलग परंपराएँ, भाँति-भाँति का खानपान और हमारी धरोहरों से परिचित हुए। यहाँ आने वाले प्रतिनिधि अपने साथ जो शानदार अनुभव लेकर गए हैं, उससे पर्यटन का और विस्तार होगा।आप लोगों को पता ही है कि भारत में एक से बढ़कर एक वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स भी हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।”

उन्होंने बताया कि कुछ ही दिन पहले शान्ति निकेतन और कर्नाटक के पवित्र होयसड़ा मंदिरों को World Heritage Sites घोषित किया गया है। उन्होंने इस शानदार उपलब्धि के लिए समस्त देशवासियों को बधाई दी। साथ ही याद किया कि उन्हें 2018 में शान्ति निकेतन की यात्रा का सौभाग्य मिला था। उन्होंने ध्यान दिलाया कि शान्ति निकेतन से गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का जुड़ाव रहा है। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर ने शान्तिनिकेतन का मोटो संस्कृत के एक प्राचीन श्लोक से लिया था। वह श्लोक है – ‘यत्र विश्वम भवत्येक नीडम्’ अर्थात, जहाँ एक छोटे से घोंसले में पूरा संसार समाहित हो सकता है|

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ में ये जानकारी भी दी कि कर्नाटक के जिन होयसड़ा मंदिरों को UNESCO ने विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है, जिन्हें, 13वीं शताब्दी के बेहतरीन आर्किटेक्चर के लिए जाना जाता है। बकौल पीएम मोदी, इन मंदिरों को यूनेस्को से मान्यता मिलना, मंदिर निर्माण की भारतीय परंपरा का भी सम्मान है। भारत में अब वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की कुल संख्या 42 हो गई है।

पीएम मोदी ने बताया कि भारत का प्रयास है कि हमारे ज्यादा-से-ज्यादा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जगहों को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की मान्यता मिले। उन्होंने आग्रह किया कि जब भी आप कहीं घूमने जाने की योजना बनाएँ तो ये प्रयास करें कि भारत की विविधता के दर्शन करें, अलग-अलग राज्यों की संस्कृति को समझें, हेरिटेज साइट्स को देखें। बकौल प्रधानमंत्री, इससे आप अपने देश के गौरवशाली इतिहास से तो परिचित होंगे ही, स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने का भी आप अहम माध्यम बनेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय संस्कृति और भारतीय संगीत अब वैश्विक हो चुका है। दुनिया भर के लोगों का इनसे लगाव दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। उन्होंने इस दौरान एक बच्ची का ऑडियो भी सुनाया। पीएम मोदी ने कहा कि इसे सुनकर आप भी हैरान हो गए न! उन्होंने कहा कि कितनी मधुर आवाज है और हर शब्द में जो भाव झलकते हैं, ईश्वर के प्रति इनका लगाव हम अनुभव कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर वो ये सुरीली आवाज जर्मनी की एक बेटी की है, तो शायद आप और अधिक हैरान होंगे। फिर उन्होंने ही जानकारी दी कि इस बिटिया का नाम – कैसमी है। 21 साल की कैसमी इन दिनो इंस्टाग्राम पर खूब छाई हुई है।

प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि जर्मनी की रहने वाली कैसमी कभी भारत नहीं आई है, लेकिन वो भारतीय संगीत की दीवानी है, जिसने, कभी भारत को देखा तक नहीं, उसकी भारतीय संगीत में ये रूचि, बहुत ही प्रेरक है। उन्होंने बताया कि कैसमी जन्म से ही देख नहीं पाती है, लेकिन ये मुश्किल चुनौती उन्हें असाधारण उपलब्धियों से रोक नहीं पाई। संगीत और क्रिएटिविटी को लेकर उनका पैशन कुछ ऐसा था कि बचपन से ही उन्होंने गाना शुरू कर दिया।

पीएम ने बताया कि अफ्रीकन ड्रमिंग की शुरुआत तो उन्होंने महज 3 साल की उम्र में ही कर दी थी। भारतीय संगीत से उनका परिचय 5-6 साल पहले ही हुआ। भारत के संगीत ने उनको इतना मोह लिया, इतना मोह लिया कि वो इसमें पूरी तरह से रम गई। उन्होंने तबला बजाना भी सीखा है। बकौल प्रधानमंत्री, सबसे प्रेरक बात तो यह है कि वे कई सारी भारतीय भाषाओं में गाने में महारत हासिल कर चुकी हैं। संस्कृत, हिंदी, मलयालम, तमिल, कन्नड़ या फिर असमी, बंगाली, मराठी, उर्दू, उन्होंने इन सबमें अपने सुर साधे हैं। पीएम मोदी ने आप कल्पना कर सकते हैं, किसी को दूसरी अनजान भाषा की दो-तीन लाइनें बोलनी पड़ जाए तो कितनी मुश्किल आती है, लेकिन कैसमी के लिए जैसे बाएं हाथ का खेल है। साथ ही उन्होंने कन्नड़ में गाए उनके एक गीत भी शेयर किए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में कहा, “भारतीय संस्कृति और संगीत को लेकर जर्मनी की कैसमी के इस जुनून की मैं ह्रदय से सराहना करता हूँ। उनका यह प्रयास हर भारतीय को अभिभूत करने वाला है। हमारे देश में शिक्षा को हमेशा एक सेवा के रूप में देखा जाता है। मुझे उत्तराखंड के कुछ ऐसे युवाओं के बारे में पता चला है, जो, इसी भावना के साथ बच्चों की शिक्षा के लिए काम कर रहे हैं। नैनीताल जिले में कुछ युवाओं ने बच्चों के लिए अनोखी घोड़ा लाइब्रेरी की शुरुआत की है। इस लाइब्रेरी की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि दुर्गम से दुर्गम इलाकों में भी इसके जरिए बच्चों तक पुस्तकें पहुँच रही हैं और इतना ही नहीं, ये सेवा, बिल्कुल निःशुल्क है। अब तक इसके माध्यम से नैनीताल के 12 गाँवों को कवर किया गया है। बच्चों की शिक्षा से जुड़े इस नेक काम में मदद करने के लिए स्थानीय लोग भी खूब आगे आ रहे हैं। इस घोड़ा लाइब्रेरी के जरिए यह प्रयास किया जा रहा है, कि दूरदराज के गाँवों में रहने वाले बच्चों को स्कूल की किताबों के अलावा कविताएँ, कहानियाँ और नैतिक शिक्षा की किताबें भी पढ़ने का पूरा मौका मिले। ये अनोखी लाइब्रेरी बच्चों को भी खूब भा रही है।”

इस दौरान प्रधानमंत्री ने ये भी याद किया कि हैदराबाद में लाइब्रेरी से जुड़े एक ऐसे ही अनूठे प्रयास के बारे में पता चला। वहाँ 7वीं क्लास में पढ़ने वाली आकर्षणा सतीश महज 11 साल की उम्र में बच्चों के लिए एक-दो नहीं, बल्कि, सात-सात लाइब्रेरी चला रही है। आकर्षणा सतीश को दो साल पहले इसकी प्रेरणा तब मिली, जब वो अपने माता-पिता के साथ एक कैंसर अस्पताल गई थी। उसके पिता जरूरतमंदों की मदद के सिलसिले में वहाँ गए थे। बच्चों ने वहाँ उनसे कलरिंग बुक्स की माँग की, और यही बात उसे इतनी छू गई कि उसने अलग-अलग तरह की किताबें जुटाने की ठान ली। उसने, अपने आस-पड़ोस के घरों, रिश्तेदारों और साथियों से किताबें इकट्ठा करना शुरू कर दिया और पहली Library उसी कैंसर अस्पताल में बच्चों के लिए खोली गई।

प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के 105वें एपिसोड में बताया कि जरूरतमंद बच्चों के लिए अलग-अलग जगहों पर इस बिटिया ने अब तक जो सात लाइब्रेरी खोली हैं, उनमें अब करीब 6000 किताबें उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि छोटी-सी आकर्षणा जिस तरह बच्चों का भविष्य सँवारने का बड़ा काम कर रही है, वो हर किसी को प्रेरित करने वाला है। पीएम मोदी ने कहा कि ये बात सही है कि आज का दौर डिजिटल टेक्नोलॉजी और ई-बुक्स का है, लेकिन फिर भी किताबें, हमारे जीवन में हमेशा एक अच्छे दोस्त की भूमिका निभाती है। इसलिए, हमें बच्चों को किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान शास्त्रों में वर्णित ‘जीवेषु करुणा चापि, मैत्री तेषु विधीयताम्’ की भी याद दिलाई। अर्थात्, जीवों पर करुणा कीजिए और उन्हें अपना मित्र बनाइए। उन्होंने ध्यान दिलाया कि हमारे तो ज्यादातर देवी-देवताओं की सवारी ही पशु-पक्षी हैं। साथ ही इस पर दुःख जताया कि बहुत से लोग मंदिर जाते हैं, भगवान के दर्शन करते हैं, लेकिन जो जीव-जंतु उनकी सवारी होते हैं, उस तरफ़ उतना ध्यान नहीं देते। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये जीव-जंतु हमारी आस्था के केंद्र में तो रहने ही चाहिए, हमें इनका हर संभव संरक्षण भी करना चाहिए।

उन्होंने जानकारी दी कि बीते कुछ वर्षों में, देश में, शेर, बाघ, तेंदुआ और हाथियों की संख्या में उत्साहवर्धक बढ़ोतरी देखी गई है। कई और प्रयास भी निरंतर जारी हैं, ताकि इस धरती पर रह रहे दूसरे जीव-जंतुओं को बचाया जा सके। उन्होंने राजस्थान में हो रहे ऐसे ही एक अनोखे प्रयास के बारे में बताया, जहाँ सुखदेव भट्ट जी और उनकी टीम मिलकर वन्य जीवों को बचाने में जुटे हैं, और उनकी टीम का नाम है – कोबरा।

प्रधानमंत्री ने समझाया कि ये ख़तरनाक नाम इसलिए है, क्योंकि उनकी टीम इस क्षेत्र में खतरनाक साँपों का रेस्क्यू करने का काम भी करती है। इस टीम में बड़ी संख्या में लोग जुड़े हैं, जो सिर्फ एक कॉल पर मौके पर पहुँचते हैं और अपने मिशन में जुट जाते हैं। सुखदेव की इस टीम ने अब तक 30,000 से ज्यादा जहरीले साँपों का जीवन बचाया है। इस प्रयास से जहाँ लोगों का खतरा दूर हुआ है, वहीं प्रकृति का संरक्षण भी हो रहा है। ये टीम अन्य बीमार जानवरों की सेवा के काम से भी जुड़ी हुई है।

साथियों, तमिलनाडु के चेन्नई में Auto Driver एम.राजेंद्र प्रसाद जी भी एक अनोखा काम कर रहे हैं। वो पिछले 25-30 साल से कबूतरों की सेवा के काम में जुटे हैं। खुद उनके घर में 200 से ज्यादा कबूतर हैं। वहीं पक्षियों के भोजन, पानी, स्वास्थ्य जैसी हर जरुरत का पूरा ध्यान रखते हैं। इस पर उनका काफी पैसा भी खर्च होता है, लेकिन वो, अपने काम में डटे हुए हैं। साथियो, लोगों को नेक नीयत से ऐसा काम करते देखकर वाकई बहुत सुकून मिलता है, काफी खुशी होती है। अगर आपको भी ऐसे ही कुछ अनूठे प्रयासों के बारे में जानकारी मिले तो उन्हें जरुर Share कीजिए।

मेरे प्यारे परिवारजनों, आजादी का ये अमृतकाल, देश के लिए हर नागरिक का कर्तव्यकाल भी है। अपने कर्तव्य निभाते हुए ही हम अपने लक्ष्यों को पा सकते हैं, अपनी मंजिल तक पहुँच सकते हैं। कर्तव्य की भावना, हम सभी को एक सूत्र में पिरोती है। यूपी के  सम्भल में, देश ने कर्तव्य भावना की एक ऐसी मिसाल देखी है, जिसे मैं आपसे भी Share करना चाहता हूँ।

आप सोचिए, 70 से ज्यादा गाँव हों, हजारों की आबादी हो और सभी लोग मिलकर, एक लक्ष्य, एक ध्येय की प्राप्ति के लिए साथ आ जाएँ, जुट जाएँ ऐसा कम ही होता है, लेकिन, सम्भल के लोगों ने ये करके दिखाया। इन लोगों ने मिलकर जन-भागीदारी और सामूहिकता की बहुत ही शानदार मिसाल कायम की है। दरअसल, इस क्षेत्र में दशकों पहले, ‘सोत’ नाम की एक नदी हुआ करती थी।

अमरोहा से शुरू होकर सम्भल होते हुए बदायूँ तक बहने वाली ये नदी एक समय इस क्षेत्र में जीवनदायिनी के रूप में जानी जाती थी। इस नदी में अनवरत जल प्रवाहित होता था, जो यहाँ के किसानों के लिए खेती का मुख्य आधार था। समय के साथ नदी का प्रवाह कम हुआ, नदी जिन रास्तों से बहती थी वहां अतिक्रमण हो गया और ये नदी विलुप्त हो गई। नदी को माँ मानने वाले हमारे देश में, सम्भल के लोगों ने इस सोत नदी को भी पुनर्जीवित करने का संकल्प ले लिया।

पिछले साल दिसंबर में सोत नदी के कायाकल्प का काम 70 से ज्यादा ग्राम पंचायतों ने मिलकर शुरू किया। ग्राम पंचायतों के लोगों ने सरकारी विभागों को भी अपने साथ लिया। आपको ये जानकर खुशी होगी कि साल के पहले 6 महीने में ही ये लोग नदी के 100 किलोमीटर से ज्यादा रास्ते का पुनरोद्धार कर चुके थे। जब बारिश का मौसम शुरू हुआ तो यहां के लोगों की मेहनत रंग लाई और सोत नदी, पानी से, लबालब भर गई।

यहाँ के किसानों के लिए यह खुशी का एक बड़ा मौका बनकर आया है। लोगों ने नदी के किनारे बाँस के 10 हजार से भी अधिक पौधे भी लगाए हैं, ताकि इसके किनारे पूरी तरह सुरक्षित रहें। नदी के पानी में तीस हजार से अधिक गम्बूसिया मछलियों को भी छोड़ा गया है ताकि मच्छर न पनपें।साथियो, सोत नदी का उदाहरण हमें बताता है कि अगर हम ठान लें तो बड़ी से बड़ी चुनौतियों को पार कर एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं। आप भी कर्तव्य पथ पर चलते हुए अपने आसपास ऐसे बहुत से बदलावों का माध्यम बन सकते हैं।

मेरे परिवारजनों, जब इरादे अटल हों और कुछ सीखने की लगन हो, तो कोई काम, मुश्किल नहीं रह जाता है। पश्चिम बंगाल की श्रीमती शकुंतला सरदार ने इस बात को बिल्कुल सही साबित करके दिखाया है। आज वो कई दूसरी महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। शकुंतला जी जंगल महल के शातनाला गांव की रहने वाली हैं। लंबे समय तक उनका परिवार हर रोज मजदूरी करके अपना पेट पालता था। उनके परिवार के लिए गुजर-बसर भी मुश्किल थी।

फिर उन्होंने एक नए रास्ते पर चलने का फैसला किया और सफलता हासिल कर सबको हैरान कर दिया। आप ये जरुर जानना चाहेंगे कि उन्होंने ये कमाल कैसे किया! इसका जवाब है – एक सिलाई मशीन। एक सिलाई मशीन के जरिए उन्होंने ‘साल’ की पत्तियों पर खूबसूरत Design बनाना शुरू किया। उनके इस हुनर ने पूरे परिवार का जीवन बदल दिया। उनके बनाए इस अद्भुत Craft की माँग लगातार बढ़ती जा रही है। शकुंतला जी के इस हुनर ने, न सिर्फ उनका, बल्कि, ‘साल’ की पत्तियों को जमा करने वाले कई लोगों का जीवन भी बदल दिया है।

अब, वो, कई महिलाओं को Training देने का भी काम कर रही हैं। आप कल्पना कर सकते हैं, एक परिवार, जो कभी, मजदूरी पर निर्भर था, अब खुद दूसरों को रोजगार के लिए प्रेरित कर रहा है। उन्होंने रोज की मजदूरी पर निर्भर रहने वाले अपने परिवार को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है। इससे उनके परिवार को अन्य चीजों पर भी Focus करने का अवसर मिला है।

एक बात और हुई है, जैसे ही शकुंतला जी की स्थिति कुछ ठीक हुई, उन्होंने बचत करना भी शुरू कर दिया है। अब वो जीवन बीमा योजनाओं में निवेश करने लगी हैं, ताकि उनके बच्चों का भविष्य भी उज्जवल हो। शकुंतला जी के जज्बे के लिए उनकी जितनी सराहना की जाए वो कम है। भारत के लोग ऐसी ही प्रतिभा से भरे होते हैं – आप, उन्हें अवसर दीजिए और देखिए वे क्या-क्या कमाल कर दिखाते हैं।

मेरे परिवारजनों, दिल्ली में G-20 Summit के दौरान उस दृश्य को भला कौन भूल सकता है, जब कई World Leaders बापू को श्रद्धासुमन अर्पित करने एक साथ राजघाट पहुंचे। यह इस बात का एक बड़ा प्रमाण है कि दुनिया-भर में बापू के विचार आज भी कितने प्रासांगिक है। मुझे इस बात की भी खुशी है कि गांधी जयंती को लेकर पूरे देश में स्वच्छता से सबंधित बहुत सारे कार्यक्रमों का Plan किया गया है। केंद्र सरकार के सभी कार्यालयों में ‘स्वच्छता ही सेवा अभियान’ काफी जोर-शोर से जारी है। Indian Swachhata League में भी काफी अच्छी भागीदारी देखी जा रही है।

आज मैं ‘मन की बात’ के माध्यम से सभी देशवासियों से एक आग्रह भी करना चाहता हूं – 1 अक्टूबर यानि रविवार को सुबह 10 बजे स्वच्छता पर एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है। आप भी अपना वक्त निकालकर स्वच्छता के जुड़े इस अभियान में अपना हाथ बटाएँ। आप अपनी गली, आस-पड़ोस, पार्क, नदी, सरोवर या फिर किसी दूसरे सार्वजनिक स्थल पर इस स्वच्छता अभियान से जुड़ सकते हैं और जहाँ-जहाँ अमृत सरोवर बने हैं वहाँ तो स्वच्छता अवश्य करनी है। स्वच्छता की ये कार्यांजलि ही गाँधी जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मैं आपको फिर से याद दिलाना चाहूँगा कि इस गाँधी जयंती के अवसर पर खादी का कोई ना कोई Product ज़रूर ख़रीदें।

मेरे परिवारजनों, हमारे देश में त्योहारों का Season भी शुरू हो चुका है। आप सभी के घर में भी कुछ नया खरीदने की योजना बन रही होगी। कोई इस इंतजार में होगा कि नवरात्र के समय वो अपना शुभ काम शुरू करेगा। उमंग, उत्साह के इस वातावरण में आप Vocal For Local का मंत्र भी जरुर याद रखें। जहाँ तक संभव हो, आप, भारत में बने सामानों की खरीदारी करें, भारतीय Product का उपयोग करें और Made In India सामान का ही उपहार दें। आपकी छोटी सी ख़ुशी, किसी दूसरे के परिवार की बहुत बड़ी ख़ुशी का कारण बनेगी। आप, जो भारतीय सामान खरीदेंगे, उसका सीधा फ़ायदा, हमारे श्रमिकों, कामगारों, शिल्पकारों और अन्य विश्वकर्मा भाई-बहनों को मिलेगा। आजकल तो बहुत सारे Start-Ups भी स्थानीय Products को बढ़ावा दे रहे हैं। आप स्थानीय चीजें खरीदेंगे तो Start-Ups के इन युवाओं को भी फ़ायदा होगा।

पीएम ने अंत में कहा, मेरे प्यारे परिवारजनों, ‘मन की बात’ में बस आज इतना ही। अगली बार जब आपसे ‘मन की बात’ में मिलूँगा तो नवरात्रि और दशहरा बीत चुके होंगे। त्योहारों के इस मौसम में आप भी पूरे उत्साह से हर पर्व मनाएँ, आपके परिवार में खुशियां रहें – मेरी यही कामना है। इन पर्वों की आपको बहुत सारी शुभकामनाएँ। आपसे फिर मुलाकात होगी, और भी नए विषयों के साथ, देशवासियों की नई सफलताओ के साथ।आप, अपने संदेश मुझे ज़रूर भेजते रहिए, अपने अनुभव शेयर करना ना भूलें। मैं प्रतीक्षा करूँगा।”

‘एक कॉल पर PM मोदी के PR के लिए मुंबई से आ गए’: स्टेडियम के शिलान्यास में काशी पहुँचे सचिन तेंदुलकर तो भड़का लिबरल गिरोह, कहने लगा- ‘इनकी रीढ़ टूटी हुई’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (23 सितंबर 2023) को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का शिलान्यास किया। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में BCCI के सचिव जय शाह, पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, कपिल देव, सुनील गावस्कर, रवि शास्त्री, मदन लाल, रोजर बिन्नी समेत कई क्रिकेटर मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान तेंदुलकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टीम इंडिया की जर्सी भी भेंट की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेंट की गई इस जर्सी पर नमो लिखा हुआ था। अब इस बात लेकर कुछ मोदी विरोधी सोशल मीडिया पर हंगामा मचा रहे हैं और पीएम को जर्सी देते हुए उनकी तस्वीर सामने आने पर पूर्व राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर को ट्रोल कर रहे हैं।

सोशल मीडिया के कुख्यात ट्रोल्स में से एक डॉक्टर नीमो यादव के नाम वाले ट्विटर हैंडल @niiravmodi ने लिखा, “ये पूर्व आईसीटी (अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट टूर्नामेंट) खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर हैं। यूपीए शासन के दौरान वह महंगाई और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर आवाज उठाते रहते थे। इसके लिए यूपीए ने उन्हें राज्यसभा सांसद के रूप में नामित किया, ताकि वह संसद में अपनी आवाज उठा सकें लेकिन संसद में उनकी उपस्थिति सिर्फ 0.06% थी।”

इस हैंडल ने आगे लिखा, “2014 में भाजपा ने उन्हें दो विश्व कप फाइनल खेलने और उनमें 22 रन बनाने के लिए भारत रत्न दिया। तब से वह बीजेपी की कठपुतली बन गए हैं और जो मोदी कहते हैं वही करते हैं। हो सकता है कि उन्हें क्रिकेट के कारण उन्हें टेनिस एल्बो की बीमारी हो गई हो, लेकिन यह मोदी ही हैं जिन्होंने उन्हें रीढ़विहीन बना दिया है।”

जॉय नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा, “सचिन तेंदुलकर को टेनिस एल्बो चोट लगी थी। अफसोस की बात यह है कि इसका असर उनकी रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ा है।”

रोशन राय नाम के यूजर ने लिखा, “ये हैं पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर। उन्होंने कभी किसानों के लिए बात नहीं की। उन्होंने कभी भी पहलवानों के लिए बात नहीं की। उन्होंने कभी भी मणिपुर के लिए बात नहीं की। वह कभी मुद्दों के लिए नहीं बोलते।”

इस ट्रोलर ने आगे लिखा है, “जब वह राज्यसभा सांसद थे तो उन्होंने शायद ही कभी संसद गए हों, लेकिन आज सिर्फ एक कॉल पर मोदी के पीआर के लिए मुंबई से वाराणसी तक दौड़े चले आए। मैदान पर लीजेंड, मैदान के बाहर एक सरकारी कायर।”

वहीं, मिनी नायर नाम की यूजर ने लिखा, “आश्चर्य है कि सचिन तेंदुलकर क्रीज पर कैसे खड़े थे!!! एक चिकित्सा चमत्कार! #रीढ़विहीन।”

फिरोज, सज्जाद, कलीम, इमरान… सरकारी जमीन पर कब्ज़ा करने वालों में 90% के नाम ऐसे ही: केस दर्ज है लेकिन कोर्ट में आते नहीं, फिर होगा ‘हल्द्वानी कांड’?

हलीम अंसारी, मोहम्मद हसीन अंसारी, अहताशामुल हक़, मोहम्मद सज्जाद हुसैन, सबीना प्रवीण, ज़रीना खातून, मोहम्मद शाह आलम, मोहम्मद नसरुद्दीन अंसारी, आमीर हुसैन, मोहम्मद रियाज अंसारी, मोहम्मद शाहनवाज़ अंसारी, ताज खातून, कलामुल हक़, मोहम्मद फिरोज अंसारी, अरशद अंसारी, सौकत अंसारी, मोहम्मद निजामुद्दीन अंसारी, मोहम्मद नसरुद्दीन अंसारी, मोहम्मद मुख़्तार अंसारी, मोहम्मद शमशाद अंसारी, सैबुन निशा, रौशन खातून, आफताब आलम, मोहम्मद ताहिर अंसारी, इरशाद आलम, नूरी खातून, मोहम्मद वाशीद अंसारी, मोहम्मद अल्लाउद्दीन अंसारी, मोहम्मद इमामुद्दीन अंसारी, राजीया खातून, नरगिश नाज़, मोहम्मद तबरेज, गुलाम सरवर, मोहम्मद कलीम अंसारी, अब्दुल अंसारी, मोहम्मद कमल अंसारी, ज़रीना खातून, मोहम्मद इमरान अंसारी, मोहम्मद कलीम अंसारी, ऐनुल अंसारी, अनवर हुसैन, मोहम्मद सद्दाम, नूर आलम अंसारी, सैबुन निशा – इन नामों को देख कर आपको क्या लग रहा है?

नाम तो देख लिया आपने। अब झारखंड की एक कंपनी का नाम जानिए – ‘भारत कोकिंग कॉल लिमिटेड (BCCL)’। ये प्राइवेट नहीं, भारत सरकार की कंपनी है। कोयले के खदानों से जुड़ी ये कंपनी इंटीग्रेटेड स्टील सेक्टर के ज़रूरत के 50% कोकिंग कोयला की ज़रूरतों को पूरा करती है। इसकी स्थापना जनवरी 1972 में की गई थी। फ़िलहाल ये 36 कोयला के खदानों का प्रबंधन कर रही है देश भर में। इन खदानों को 13 अलग-अलग क्षेत्रों में चिह्नित कर के इनका वर्गीकरण किया गया है।

BCCL की संपत्ति पर अवैध कब्ज़ा, 90 प्रतिशत मुस्लिम

इन्हीं में से एक है – सिजुआ क्षेत्र (मोदिडीह कलियारी)। इस क्षेत्र में कंपनी को ‘लोक परिसर में अनधिकृत दखलकर के बेदखली अधिनियम’ के तहत न्यायालय में मुकदमा दायर करना पड़ा है। ऊपर जो नाम अभी आपने पढ़े हैं, ये वही लोग हैं जिनके खिलाफ ये मुकदमा दायर किया गया है। इन्हें नोटिस भी जारी किया गया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब देने की जहमत नहीं उठाई। इतना ही नहीं, उन्होंने कोट के आदेश के बावजूद वहाँ अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं कराई।

सिजुआ क्षेत्र स्थित भू-संपदा न्यायालय में इनके खिलाफ मुकदमा दायर किया गया है। अब BCCL ने अख़बार में विज्ञापन जारी कर के चेतावनी दी है कि न्यायालय के भू-संपदा पदाधिकारी ने कहा है कि अगर वो अगली सुनवाई में मौजूद नहीं रहे तो उनके खिलाफ आदेश पारित कर दिया जाएगा। इन्होंने BCCL की भूमि और फ्लैट्स कब्ज़ा रखे हैं। ऊपर से कोर्ट की सुनवाई में नहीं जा रहे। नोटिस का जवाब तक नहीं दे रहे। ऐसे 50 लोगों की सूची है, जिनमें से 45 मुस्लिम हैं – पूरे 90 प्रतिशत।

आखिर क्या कारण है कि सज्जाद, नसरुद्दीन और आमीर जैसे लोगों का ही नाम आता है, जब भी एक साजिश के तहत सामूहिक रूप से किसी सरकारी संपत्ति पर कब्जे की बात आती है? कोई वाशीद, इमरान या अनवर ही क्यों होता है, जब सरकारी संपत्ति पर कब्ज़ा कर के न्यायालय के आदेश तक की तौहीन की खबर सामने आती है? आखिर कोई ज़रीना, सबीना और राजिया ही क्यों होती है, जब सरकारी संपत्ति को बेशर्मी से कब्ज़ा कर के उल्टा ‘विक्टिम कार्ड’ निकाल लेने की बात सामने आ जाती है?

BCCL ने अख़बार में इश्तिहार के जरिए बताए सरकारी संपत्ति पर कब्ज़ा करने वालों के नाम

यहाँ ‘एक तो चोरी, ऊपर से सीनाजोरी’ वाली कहावत भी लागू होती है, क्योंकि न सिर्फ इन्होंने एक सरकारी संपत्ति पर कब्ज़ा कर के उसे अपना मानना शुरू कर दिया है बल्कि नोटिस का जवाब देने या फिर कोर्ट की सुनवाई में हाजिर होने तक से इनकार कर दिया। क्या ऐसे लोग ये समझने लगे हैं कि देश में उनके लिए अलग कानून है, या फिर जब कार्रवाई की बात आएगी तो NGO, नेताओं और पत्रकारों का गिरोह उनके साथ खड़ा हो ही जाएगा। वैसे ही, जैसे हल्द्वानी में हुआ?

अवैध अतिक्रमण, खाली करने के लिए कहने पर हिंसा: हल्द्वानी में क्या हुआ?

उत्तराखंड में एक जगह है – हल्द्वानी। इसे इस पहाड़ी राज्य की वित्तीय राजधानी भी कही जाती है क्योंकि अधिकतर कमर्शियल और औद्योगिक गतिविधियाँ इसी इलाके में होती हैं। स्पष्ट है कि आवागमन और माल ढुलाई की सुविधा भी यहाँ बेहतर होनी चाहिए। भारत में ये काम रेलवे के जरिए होता रहा है। लेकिन, यहाँ तो रेलवे की जमीन पर ही ऐसा सामूहिक अतिक्रमण या अवैध कब्ज़ा हुआ कि पुलिस तक नहीं छुड़ा पाई। देश भर के कई मुस्लिम नेता, वकील और पत्रकार इनके समर्थन में खड़े हो गए सो अलग।

पत्रकार, यहाँ इस गिरोह के पत्रकारों के बारे में बताना ज़रूरी है जो इस मानसिकता का साथ देते हैं। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया कि कैसे एक व्यक्ति भीड़ को गाइड कर रहा था कि क्या बोलना है, कैसे बोलना है। साथ ही बात रहा था कि ‘The Wire’ पर आरफा खानुम शेरवानी के वीडियो में ये सब चलाया जाएगा। जैसे ही अवैध कब्ज़ा खाली कराने की बारी आई, भीड़ जुट गई, दिल्ली के शाहीन बाग़ की तर्ज पर धरना-प्रदर्शन में महिलाओं-बच्चों का इस्तेमाल होने लगा और रोने-धोने के वीडियो सोशल मीडिया पर चलाए जाने लगे।

और अंत में, वकीलों का गिरोह है ही, NGO हैं ही, जो तुरंत सुप्रीम कोर्ट भागते हैं। यहाँ भी वही हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण खाली कराने के फैसले पर रोक लगा दी। अतिक्रमण करने वालों की संख्या सौ या दो सौ नहीं, बल्कि 50,000 है। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में स्थित गफूर बस्ती में रेलवे की भूमि पर हुए अतिक्रमण को हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया। वहाँ 4365 मामले हैं अतिक्रमण के, एक दर्जन मस्जिदें बना दी गई हैं।

यहाँ भी वही मामला, ठीक BCCL की तरह। कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया गया। भारतीय रेलवे को विस्तारीकरण के कार्य में दिक्कत आ रही, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इतना ही नहीं, ये लोग गोला नदी में अवैध खनन भी करते हैं जिससे रेलवे की पटरियों और पुल को खतरा है। आज से नहीं, 1975 से ये सब हो रहा। ताज़ा हिंसा के मामले में यहाँ हथियार इकट्ठा किए जाने तक की बात भी सामने आई। मदरसों के बच्चों को लाया गया। ये सब तिकड़म अब एक पैटर्न बन गया है।

कहाँ से आती है सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जे वाली मानसिकता?

सिर्फ धनबाद और हल्द्वानी ही नहीं, ये मानसिकता हमें हर जगह दिखाई देती है। जब एक भीड़ सड़क पर नमाज पढ़ने लगती है और उनके कारण ट्रैफिक रुकी रहती है, इससे उन्हें सह मिलती है। जब एक भीड़ शाहीन बाग़ में महीनों सड़क कब्ज़ा कर बैठी रहती है और दिल्ली के लाखों लोग रोज परेशान होने के बावजूद कुछ नहीं कर पाते, इससे उन्हें सह मिलती है। जब जगह-जगह सड़कों से लेकर जंगलों तक की भूमि पर दरगाह बना लिए जाते हैं और वहाँ चादर चढ़ाया जाने लगता है, इससे उन्हें सह मिलती है।

जब अवैध अतिक्रमण की घटनाएँ हों, इससे आमजनों को परेशानी हो, सरकारी संपत्ति का दुरूपयोग हो – तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कि ऐसा करने वाला हिन्दू है या फिर मुस्लिम। BCCL ने 2017-18 में अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया था कि कंपनी की 526 एकड़ जमीन ऐसी है जिस पर अवैध कब्ज़ा हुआ है, जिनमें से कई जमीनों पर अतिक्रमण छुड़ाया भी गया है। खदानों की सुरक्षा के लिए और लंबे समय तक संचालन के लिए ज़रूरी होता है कि आसपास जो अतिक्रमण या अवैध निर्माण हैं उन्हें खाली कराया जाए।

ऐसे में आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर धनबाद में भी हल्द्वानी की तरह हिंसा भड़क जाए और धरना प्रदर्शनों का दौर शुरु हो जाए। फिर कुछ लोग इनकी तरफ से दौड़ कर सुप्रीम कोर्ट जाएँगे और स्टे लेकर आएँगे। इसे मुस्लिमों पर अत्याचार बताया जाएगा, विदेशी मीडिया में बताया जाएगा कि भारत में मुस्लिमों को उजाड़ा जा रहा है। अवैध अतिक्रमण की बात दब जाएगी, पूरा मामला मुस्लिम बनाम मोदी सरकार बना दिया जाएगा। खैर, देखते हैं अब इस मामले में आगे क्या होता है।