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अशरफ बेग ने हिंदू महिला के साथ किया ‘लव जिहाद’: जबरन अप्राकृतिक संबंध बनाए, इस्लाम अपनाने का डाला दबाव; कश्मीर से गिरफ्तार

बेंगलुरु में आईटी इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले 32 साल के मोगिल अशरफ बेग को कश्मीर से गिरफ्तार किया गया है। उस पर बेंगलुरु की एक आईटी कंपनी में काम करने वाली लड़की के साथ लव जेहाद का आरोप है। इस मामले में पीड़िता ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पुलिस से मदद माँगते हुए उस पर अप्राकृतिक यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। इसके बाद बेंगलुरु पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया था।

लव जेहाद का शिकार बनाकर किया अप्राकृतिक यौन शोषण

पीड़िता ने आरोप लगाया था कि अशरफ बेग ने उसे प्रेमजाल में फँसा लिया था। उसने कहा था कि वो उससे शादी करेगा और धर्म का बंधन नहीं मानेगा। इसके बाद अशरफ के दबाव के बाद उसके साथ लिव-इन में रहने लगी। इस दौरान अशरफ ने जबरन उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाए।

महिला ने ये भी आरोप लगाया कि जब उसने शादी करने के लिए कहा तो अशरफ उस पर धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाने का दबाव डालने लगा। उसने कहा कि जब उसे किसी तरह की मदद नहीं मिली तो उसने एक्स पर इस मामले की सार्वजनिक तौर पर शिकायत की। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, अशरफ बेग को गिरफ्तार कर लिया है।

बता दें कि पीड़ित ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा थ कि वह लव जिहाद और यौन शोषण की शिकार है। उसने खुद को खतरे में बताते हुए पुलिस से मदद माँगी थी। महिला ने सोशल मीडिया एक्‍स पर पोस्‍ट किया, “सर, मैं लव जिहाद, बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध और जबरन धर्म परिवर्तन का शिकार हूँ। कृपया मुझे बेंगलुरु में तुरंत पुलिस सहायता प्रदान करें क्योंकि मेरी जान खतरे में है।”

एक दूसरे पोस्ट में महिला ने कहा था, “कश्मीरी आदमी फेसबुक पर दोस्त बना, पैसे ले लिए और अब जब मैंने पैसे वापस माँगे तो वह मुझे नुकसान पहुँचाने की धमकी दे रहा है। बाद में मुझसे शादी करने का भरोसा दिलाकर पैसे माँगता रहा। मेरी मदद करें, मुझे कश्मीर पुलिस से कोई मदद नहीं मिल रही है।”

इस मामले में 7 सितंबर को कर्नाटक पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपित की तलाश तेज कर दी थी। इस मामले में महिला ने बेंगलुरु पुलिस के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय को भी टैग किया था। कर्नाटक पुलिस ने महिला के पोस्ट का संज्ञान लेते हुए उससे संपर्क किया था।

गौरतलब है कि पीड़िता ने 17 नवंबर 2022 को भी तत्कालीन बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर और वर्तमान भाजपा नेता भास्कर राव को भी एक पोस्ट में कहा था, “अगर मैं कहूँ कि एक हिंदू लड़की से शादी का वादा किया गया और फिर एक कश्मीरी मुस्लिम लड़के ने उसे छोड़ दिया तो क्या आप मदद करेंगे?”

महिंद्रा के बाद अब जिंदल ने दिया कनाडा को झटका: हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया पर लटकी तलवार, बौखलाहट में कनाडाई बाजार

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की कनाडा में हत्या के बाद से भारत और कनाडा के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया है, जिसका असर भी दिख रहा है। कनाडा से महिंद्रा ने अपना धंधा समेट लिया है। इस झटके से अभी बाजार उबर ही रहा था कि एक मामला सामने आ गया।

कनाडा की सबसे बड़ी स्टील कंपनी टेक रिसोर्सेज की कोल यूनिट में हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया से गुजर रही भारतीय कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील (JSW Steel) ने झटका दे दिया है। कहा जा रहा है कि उसने टेक रिसोर्सेज को खरीदने की प्रक्रिया को धीमी कर दी है। इसको लेकर बाजार में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

स्टील कंपनी के शेयर खरीदने की प्रक्रिया हुई धीमी

इस कंपनी से जुड़े एक सूत्र ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि क्षमता के हिसाब से भारत की सबसे बड़ी स्टील निर्माता जेएसडब्ल्यू स्टील और टेक रिसोर्सेज के बीच हिस्सेदारी पर चर्चा धीमी हो गई है। हालाँकि, कागजी कार्रवाई पर काम चल रहा है। सूत्र ने बताया, “हम मुद्दा शांत होने तक इंतजार करेंगे।”

दोनों कंपनियों ने बयान देने से किया मना

सूत्र ने कहा कि टेक रिसोर्स में जेएसडब्ल्यू 34-37 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने की कोशिश कर रहा है। टेक रिसोर्स ने वैश्विक खनन कंपनी ग्लेनकोर द्वारा दिए पूरी कंपनी के लिए दिए गए 22.5 अरब डॉलर (1.87 लाख करोड़ रुपए) के ऑफर को दो बार ठुकरा दिया था। माना जा रहा है कि JSW का ऑफर इससे अधिक ही होगा।

सूत्र ने आगे कहा, “हम यह उम्मीद नहीं कर रहे हैं कि चीजें हाथ से निकल जाएँगी। हम मूल्यांकन के लिए कागजी कार्रवाई कर रहे हैं, बैंकों से बात कर रहे हैं और यह अभी भी हो रहा है।” जेएसडब्ल्यू स्टील ने इस मामले में टिप्पणी से इनकार कर दिया।

वहीं, टेक रिसोर्सेज ने रॉयटर्स के प्रश्नों के ईमेल के जवाब में कहा, “हम बाजार की अफवाहों या अटकलों पर टिप्पणी नहीं करते हैं।” हालाँकि विदेशी निवेश सौदों को मंजूरी देने वाले कनाडा के उद्योग मंत्रालय ने कहा कि किसी विदेशी कंपनी द्वारा कनाडाई कंपनी का अधिग्रहण कनाडा अधिनियम के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा समीक्षा के अधीन होगा।

टेक रिसोर्सेज कंपनी के शेयर गिरे

मामले से जुड़े एक अन्य सूत्र ने कहा कि जेएसडब्ल्यू लेन-देन की फंडिंग के लिए स्टैंडर्ड चार्टर्ड और डॉयचे बैंक सहित कई निवेश बैंकों के साथ बातचीत कर रहा है। जेएसडब्ल्यू स्टील कंपनी इस कनाडाई कंपनी का 34-37 प्रतिशत शेयर खरीदना चाहती है। इस प्रक्रिया के धीमा होने की बात फैलते ही टेक रिसोर्सेज के शेयर 4 प्रतिशत से अधिक गिर गए हैं।

महिंद्रा ने कनाडाई कंपनी से तोड़ा रिश्ता, बंद हुई कंपनी

बता दें कि भारत की मशहूर कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) ने कनाडा की कम्पनी रेसन एयरोस्पेस से अपने संबंध तोड़ लिए थे, जिसमें महिंद्रा एंड महिंद्रा की 11.18% हिस्सेदारी थी। कंपनी ने इसकी जानकारी शेयर मार्केट नियामक SEBI को दी, जिसके बाद ये जानकारी सामने आई।

दरअसल, रेसन एरोस्पेस ने कनाडा में आवेदन करके अपना कारोबार बंद करने की घोषणा की है। रेसन खेती से जुड़े टेक सॉल्यूशन बनाती थी। महिंद्रा एंड महिंद्रा भी खेती से जुड़े कई कारोबार करती है। वह खेती के उपकरण बनाने से लेकर अन्य कार्यों में संलग्न है और विश्व की सबसे बड़ी ट्रैक्टर निर्माता है। महिंद्रा अमेरिका तथा कनाडा में भी अपना ट्रैक्टर आदि बेचती है।

MotoGP ने लाइव शो में भारत का दिखाया गलत नक्शा, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को किया गायब: विवाद बढ़ने पर मैप बदलकर माँगी माफी

मोटोजीपी (MotoGP) ने उत्तर प्रदेश के नोएडा में आयोजित की रही मोटरसाइकिल रेसिंग प्रतियोगिता में भारत का गलत नक्शा साझा कर दिया। इसको लेकर जब सोशल मीडिया पर बवाल हुआ तो उसने तुरंत माफी माँग ली। इसके साथ ही मोटोजीपी ने नक़्शे को भी बदल दिया। नोएडा में आज (22 सितम्बर) से बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट में यह आयोजन हो रहा है।

मोटोजीपी ने मोटरसाइकिल रेस की प्रैक्टिस सेशन को लाइव दिखाने दिखाया था। इसे देखने वाले कुछ लोगों ने शिकायत की कि इसमें भारत का ऐसा नक्शा दिखाया गया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख नहीं हैं। नेटिजेन्स ने सोशल मीडिया पर इसकी शिकायत मोटोजीपी से की और इसे तुरंत बदलने को कहा।

मोटोजीपी ने शिकायतों का संज्ञान लेते हुए X (पूर्व में ट्विटर) पर इसके लिए लोगों की माफ़ी माँगी। उसने लिखा, “हम भारत में अपने फैन्स से लाइव ब्रॉडकास्ट के दौरान गलत नक्शा दिखाने के कारण माफ़ी माँगते हैं। हमारी कभी भी मंशा हमारे मेजबान देश की तारीफ़ करने के अलावा और कुछ नहीं होती है। हम नोएडा में पहली बार आकर काफी प्रसन्न हैं।”

मोटोजीपी विश्व में मोटरसाइकिल रेसिंग की सबसे बड़ी प्रतियोगिता है। भारत में पहली बार मोटोजीपी रेस का आयोजन हो रहा है। यह आयोजन नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर हो रहा है। इस सर्किट पर पहले फार्मूला 1 रेसिंग का आयोजन हो चुका है।

उत्तर प्रदेश ने मोटोजीपी रेस के लिए अलग प्रबंध किए हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रेस के आखिरी दिन यानी 24 सितम्बर 2023 को सभी देशों से आए मेहमानों से मुलाक़ात करेंगे और विजेताओं को पुरस्कार बाँटेंगे। ‘मोटोजीपी भारत’ के लिए आ रहे टॉप कंपनियों के सीईओ के साथ मुख्यमंत्री योगी राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस (सीईओ कॉन्क्लेव) करेंगे।

मोटोजीपी में बीएमडब्ल्यू, मिशेलिन और पिरेली जैसी विदेश की बड़ी ऑटोमोबाइल कम्पनियाँ शामिल हो रही हैं। इस प्रतियोगिता में 11 टीमें हिस्सा ले रही हैं। इस इवेंट से उत्तर प्रदेश में टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा। इस प्रतियोगिता के टिकट 800 रुपए से लेकर 1.80 लाख रुपए तक में बिक रहे हैं।

यह खेल दोपहिया वाहन इंडस्ट्री को रिप्रजेंट करता है। सरकार के अनुसार, इस ग्लोबल रेसिंग इवेंट में कुल मिलाकर प्रतिदिन करीब 1.5 लाख लोग इंगेज होंगे। वहीं, विदेशों से 10,000 लोग इस इवेंट का हिस्सा बनने नोएडा आएँगे। इस इवेंट का 200 देशों में टेलीकास्ट भी किया जाएगा। इसमें 11 टीमें हिस्सा ले रही हैं।

महिला आरक्षण बिल पर संसद ने तो लगा दी मुहर, पर अब आगे क्या: जानिए कैसे और कब तक सदन में बढ़ेगी आधी आबादी की हिस्सेदारी

आधी आबादी की संसद में धमक बढ़ाने वाला महिला आरक्षण विधेयक 27 साल से अधर में लटका था। आखिरकार वो संसद के पाँच दिनों के खास सत्र में महज 3 दिनों में पास हो गया। इस ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर लोकसभा में 454 सांसदों ने पक्ष में वोट किया और विरोध में केवल दो वोट पड़े।

वहीं राज्यसभा में मौजूद सभी 214 सांसदों ने इस बिल का समर्थन किया। अब बस राष्ट्रपति की मंजूरी की देर है और ये अधिनियम कानून बन जाएगा। देखा जाए तो साल 2024 के आम चुनावों में लगभग 6 महीने ही शेष है।

ऐसे में आम जनता के मन में भी सवाल है कि अगले साल ही ये अधिनियम लागू हो जाएगा, लेकिन यहाँ हम आपको बताने जा रहे हैं कि ऐसा नहीं होने जा रहा है। इसमें टेक्नीकल लोचा है। इस वजह से ये 2029 के लोकसभा चुनावों में ही लागू हो पाएगा।

क्या है ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ 2023

लोकसभा और राज्यसभा में विधेयक पास होने के बाद ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के कानून बनने की राह साफ हो गई है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ये कानून का रूप ले लेगा, लेकिन इसके बाद भी ये कानून अगले साल 2024 में लागू नहीं होगा।

संविधान के 128वें संवैधानिक संशोधन के तहत जो विधेयक पेश किया गया था उसमें महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान है। इसके मुताबिक लोकसभा, विधानसभाओं सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की विधानसभा में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

यही नहीं संसद में एससी/एसटी के लिए आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए एक-तिहाई कोटा होगा। हालाँकि पुदुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित नहीं हैं।

कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने बिल पेश करते हुए कहा था कि इससे लोकसभा में महिलाओं की संख्या 82 से 181 हो जाएगी। इसमें 15 साल के लिए आरक्षण का प्रावधान है। संसद को इसे बढ़ाने का अधिकार होगा।

वहीं उन्होंने राज्यसभा में बिल पेश करते हुए गुरुवार 21 सितंबर को कहा था कि इसके तहत एससी-एसटी महिलाओं को भी आरक्षण मिलेगा। इसलिए जनगणना और परिसीमन महत्वपूर्ण हैं, जैसे ही विधेयक पारित होगा, जनगणना और परिसीमन होगा। यह एक संवैधानिक प्रक्रिया है; कौन-सी सीट महिलाओं को जाएगी, ये परिसीमन आयोग तय करेगा।

मौजूदा लोकसभा की कुल 543 सीटों पर महिला आरक्षण लागू होने के बाद कितनी महिलाएँ संसद में होगी उसे ऐसे समझ सकते हैं। अभी महिला सांसदों की संख्या 78 हैं। यदि 33 फीसदी आरक्षण के हिसाब से देखा जाए तो महिलाओं के लिए 181 सीट आरक्षित होंगी। इन्हीं 181 सीट में से जातिगत आरक्षण के कोटे के तहत भी महिलाओं की हिस्सेदारी होगी।

अभी संसद में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण नहीं मिलता है। केवल अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए कोटा लागू है। इसके तहत 543 सीट पर 131 सांसद एससी/ एसटी से चुने जाते हैं। अब महिलाओं को इस एससी/ एसटी कोटे में भी 33 फीसदी आरक्षण मिलेगा।

एससी/ एसटी के 131 के 33 फीसदी के हिसाब से एससी की 28 और एसटी की 16 सीट महिलाओं को मिलेंगी। यानी कुल 44 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएगी और एससी/ एसटी के पुरुषों के लिए इस कोटे में 87 सीटें ही रहेंगी।

543 में से 131 का एससी/ एसटी कोटा घटाने पर इसमें ओबीसी और सामान्य वर्ग के लिए 412 सीट होंगी। इस 412 में से भी 33 फीसदी यानी 137 सीट ओबीसी और सामान्य कोटे की महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी।

इस तरह से एससी/एसटी की 44 और ओबीसी/सामान्य कोटे की 137 सीट मिलाकर लोकसभा में कुल 181 सीट महिलाओं के लिए होंगी। अगर परिसीमन के बाद लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ती है तो महिला आरक्षण कोटे की सीट भी उसी अनुपात में बढ़ जाएगी।

जनगणना और परिसीमन पर टिका महिला आरक्षण लागू होना

महिला आरक्षण बिल के मसौदे के मुताबिक, कानून बनने के बाद पहले जनगणना और परिसीमन में महिला आरक्षित सीटें तय की जाएगी। देखा जाए तो जनगणना और परिसीमन के बाद ही ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ कानून के तौर पर लागू हो पाएगा।

राज्यसभा में जब 2010 में पारित महिला आरक्षण बिल पास हुआ था तो इसमें परिसीमन की शर्त नहीं थी। जबकि इस नए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में महिला सीटों के आरक्षण के लिए अनुच्छेद 334 ए जोड़ा गया है। इसमें कहा गया है महिला आरक्षण के लिए परिसीमन जरूरी होगा।

ये बात भी तय है कि जब जनगणना होगी इसके बाद ही परिसीमन संभव हो पाएगा। गौरतलब है कि कोराना महामारी के चलते 2021 में होने वाली जनगणना ​अब तक नहीं हो सकी है। ऐसे में सरकार परिसीमन से पहले जनगणना कराएगी।

परिसीमन का अर्थ है किसी देश में आबादी का प्रतिनिधित्व करने हेतु किसी राज्य में विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं का निर्धारण करना है। हर जनगणना के बाद भारत की संसद अनुच्छेद-82 के तहत एक परिसीमन अधिनियम लागू करती है।

अगर सरकार 2021 की जनगणना न कराने का फैसला ले और देश में हुई आखिरी 2011 की जनगणना को आधार मानकर परिसीमन कराना चाहेगी तो उसमें एक मुश्किल पेश आएगी।

जैसा कि देश के संविधान में अनुच्छेद अनुच्छेद-82 के मुताबिक, सदन में 550 से अधिक निर्वाचित सदस्य नहीं होंगे। वहीं संविधान के अनुच्छेद 170 के मुताबिक हर राज्य की विधानसभा में 500 से अधिक और 60 से कम सदस्य नहीं होंगे।

अगर ऐसे में सीटों की संख्या बढ़ती है, तो संविधान संशोधन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि परिसीमन के बाद ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ 2023 कानून लागू हो पाएगा। इस हिसाब से मोटे तौर पर जनगणना में कम से कम 2 साल लगेंगे।

मौजूदा कानून के तहत अगला परिसीमन 2026 से पहले नहीं हो सकता। ऐसे में 2027 में होने जा रहे 8 राज्यों के चुनावों और 2029 के लोकसभा चुनाव से ही लागू हो पाएगा। इस हिसाब से देखा जाए तो 2026 के परिसीमन में तय होगा कि कौन-सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

क्यों लटका रहा 27 साल ये बिल?

महिला आरक्षण विधेयक पहली बार 12 सितंबर, 1996 को पीएम एचडी देवेगौड़ा की संयुक्त मोर्चा सरकार ने पेश किया था। संविधान के 81वें संशोधन के तहत पेश इस विधेयक में संसद और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण के प्रस्ताव के अंदर ही अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए उप-आरक्षण का प्रावधान था, लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं था।

इस बिल में प्रस्ताव रखा गया कि लोकसभा के हर चुनाव के बाद आरक्षित सीटें रोटेट की जाएँगी। इसमें आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन से दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। वहीं इसमें ये भी प्रस्ताव दिया गया था कि इस अधिनियम के लागू होने के 15 साल बाद महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण खत्म हो जाएगा। इसके बाद 1997 में इस विधेयक को पेश करने की फिर से एक नाकाम कोशिश हुई थी।

इसके एक साल बाद ही अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार ने 1998, 1999, 2002, 2003-04 में बिल को पास करवाने की कोशिश की, लेकिन इसमें वो कामयाब नहीं हो पाई। साल 2004 में कॉन्ग्रेस की अगुवाई में यूपीए सरकार आने के बाद मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली। तब 2008 में इस बिल को 108वें संविधान संशोधन विधेयक के तौर पर राज्यसभा में पेश किया गया।

हालाँकि, साल 2008 में इस बिल को क़ानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति को भेजा गया था, लेकिन बात नहीं बनी। आखिरकार 9 मार्च, 2010 को यूपीए सरकार ने राज्यसभा में महिला आरक्षण बिल को एक के मुकाबले 186 वोट के भारी बहुमत से पास करवा लिया। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के सात सांसदों ने बिल को लेकर खासा हंगामा काटा। राज्यसभा अध्यक्ष ने उन्हें निलंबित कर दिया। ये दोनों यूपीए सरकार के साथी थे। वहीं सरकार गिरने का खतरा मंडराने की वजह से कॉन्ग्रेस ने इस बिल को लोकसभा में पेश नहीं किया।

पहली बार 13 साल बाद महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में ही पारित नहीं हुआ बल्कि मोदी सरकार ने इसे संसद के दोनों सदनों राज्यसभा और लोकसभा में पास करा लिया। इससे लोकसभा और विधानसभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी सीटें आरक्षित होने की राह खुल गई है।

‘पीएम मोदी चाहें तो आज लागू हो…’

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर एक बार फिर से पीएम मोदी को घेरने की कोशिश की है। उनका कहना है कि सरकार चाहे तो महिला आरक्षण बिल को आज ही लागू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण बिल में दो कमियाँ हैं। एनडीए सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जातीय गणना और परिसीमन की शर्त हटा लें।

उनका आरोप है कि सरकार इस बिल के जरिए महज ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गाँधी कहते हैं, “ऐसा क्या है जिससे आपका ध्यान ओबीसी जनगणना से हटाया जा रहा है? मैंने भारत सरकार के तहत चलाई जाने वाली संसद के कैबिनेट सचिव और सचिव से पूछा कि 90 में से महज 3 लोग ओबीसी समुदाय से क्यों हैं। मुझे समझ नहीं आता कि पीएम मोदी हर दिन ओबीसी की बात करते हैं लेकिन उन्होंने उनके लिए क्या किया?” अब ये तो राहुल गाँधी ही जाने की सरकार क्या कर रही है?

NDA में शामिल हुई कर्नाटक की JDS, कुमारस्वामी ने दिल्ली में की जेपी नड्डा और अमित शाह से मुलाकात, लोकसभा चुनाव पर नजर

कर्नाटक की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) ने एनडीए (NDA) का दामन थाम लिया है। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा इस पार्टी के अध्यक्ष हैं। उनके पुत्र और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके बाद JDS के NDA से जुड़ने की घोषणा की गई।

कुमारस्वामी से मुलाकात की पुष्टि करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट किया, “हमारे वरिष्ठ नेता और गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जद (एस) नेता एचडी कुमारस्वामी से मुलाकात की। मुझे खुशी है कि जेडीएस (एस) ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का हिस्सा बनने का फैसला किया है। हम एनडीए में उनका तहे दिल से स्वागत करते हैं। इस गठबंधन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और एनडीए के ‘नया भारत, मजबूत भारत’ के विजन को मजबूती मिलेगी।”

दरअसल, इस माह की शुरुआत में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदुरप्पा ने कहा था कि जनता दल (सेक्युलर) जल्द ही एनडीए का हिस्सा बन जाएगी। भाजपा और जद(एस) के बीच सीट शेयरिंग तक पर बात हो चुकी है। उन्होंने दावा किया था कि जद(एस) और भाजपा के बीच गठबंधन से एनडीए कर्नाटक की 25-26 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल होगी।

इस बारे में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने दिल्ली में भाजपा के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ कई बैठकें की थीं। देवगौड़ा ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि राज्य में क्षेत्रीय पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए भाजपा के साथ गठबंधन करना जरूरी है। दरअसल, साल 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनावों में जेडीएस को सिर्फ 19 सीटें मिली हैं। यह साल 1999 के बाद के अब तक का सबसे खराब प्रदर्शन था।

बता दें कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कर्नाटक में 28 में से 25 सीटें जीती थीं। एक निर्दलीय ने भी भाजपा के समर्थन से जीत दर्ज की थी। वहीं, कॉन्ग्रेस और जनता दल (सेक्युलर) ने गठबंधन कर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में कॉन्ग्रेस ने 21 सीटों पर और जेडीएस ने 7 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन सिर्फ एक-एक सीट ही दोनों पार्टियों को मिली थी। इस बार जेडीएस 7 की जगह 4 सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी और सीटों के बंटवारे को लेकर उसकी भाजपा के साथ सहमति बन चुकी है।

स्पर्म डोनेट कीजिए और पाइए ₹70 हजार: यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए चीन ने शुरू की अजीब प्रतियोगिता, घटती जन्मदर से परेशान है ड्रैगन

चीन तेजी से घटती जन्म दर समस्या से जूझ रहा है। इससे निजात पाने के लिए एक स्पर्म बैंक ने एक प्रतियोगिता आयोजित कर यूनिवर्सिटी के छात्रों को इसमें शामिल होने के लिए कहा गया। इसके लिए स्पर्म बैंक ने छात्रों को नकद पैसे देने की बात कही है।

साउथ चाइना मॉर्निग पोस्ट ने जियुपाई न्यूज के हवाले से रिपोर्ट किया है कि चीन के हेनान प्रान्त में स्थित स्पर्म बैंक ने यह प्रतियोगिता आयोजित की है। 10 सितंबर से शुरू हुई इस प्रतियोगिता का उद्देश्य सबसे अधिक और सबसे तेज स्पर्म वाले पुरुषों की तलाश करना है।

एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले छात्र 50 दिन के भीतर 20 बार स्पर्म दान कर सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक छात्र को 6,100 युआन यानी करीब 70 हजार रुपए का भुगतान किया जाएगा। यही नहीं स्पर्म डोनेट करने वालों को आने जाने में हुए खर्च समेत अन्य खर्चों का भी भुगतान किया जाएगा।

हालाँकि, इस प्रतियोगिता में भाग लेने वालों के लिए शर्त यह है कि उनकी उम्र 20-45 साल के बीच और कम से कम 1.65 मीटर यानी करीब 165 सेमी हाइट होनी चाहिए। इसके अलावा उन्हें धूम्रपान और शराब का आदी नहीं होना चाहिए। साथ ही नशीली दवाओं का सेवन करने वाला भी नहीं होना चाहिए।

चीनी सोशल साइट वीबो पर एक पोस्ट कर स्पर्म बैंक ने कहा, “पर्यावरण प्रदूषण और काम के दबाव के कारण लोगों के स्पर्म की गुणवत्ता खराब हो गई है। इससे कई विवाहित जोड़ों में बाँझपन आ गया है। इसके चलते उनके परिवार और समाज में असंतोष की भावना पैदा हो गई है। ब्लड की तरह ही लोगों को स्पर्म भी दान करना चाहिए। स्पर्म दान विवाहित जोड़ों के लिए अच्छी खबर ला सकता है। इसलिए, हम विश्वविद्यालय के छात्रों से समाज में योगदान देने के लिए शुक्राणु दान करने का आह्वान करते हैं।”

गौरतलब है कि चीन ने घटती जन्म दर से परेशान होकर साल 2015 में अपनी दशकों पुरानी एक बच्चे की नीति को खत्म कर दिया था। इससे सभी दंपतियों को दो बच्चे पैदा करने की अनुमति मिल गई थी। इसके बाद साल 2021 में इस सीमा को बढ़ाकर तीन कर दिया गया था। लेकिन इसके बाद भी चीन में प्रजनन दर में गिरावट ही देखने को मिल रही है।

शकील, नसीम, आसिफ, इरफान… अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि पर आतंकी हमले में काट रहे थे आजीवन कारावास, हाईकोर्ट ने दी जमानत

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर हमला करने के दोषी 4 आतंकियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी है। ये सभी दोषी पिछले 18 वर्षों से जेल में बंद थे और ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर 5 जुलाई 2005 को आतंकी हमला हुआ था। इसमें पाँच आतंकी तुरंत मारे गए थे, जबकि 1 नागरिक की भी मौत हो गई थी। ये सभी इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े हुए थे।

जिन दोषियों को जमानत दी गई है, उनका पता मारे गए आतंकियों के फोन से मिला था। उत्तर प्रदेश पुलिस की एंटी टेररिस्ट स्क्वाड ने मोबाइल फोन के IMEI नम्बर से इनके बारे में जानकारी जुटाई थी। इसके बाद कोर्ट ने इन लोगों को साजिश रचने का दोषी पाया था।

इन चारों दोषियों को न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस सैयद अफताब हुसैन रिजवी की खंडपीठ ने जमानत दी। जमानत पाने वाले व्यक्तियों के नाम शकील अहमद, मोहम्मद नसीम, आसिफ इकबाल और इरफ़ान हैं। ये वर्ष 2005 से ही जेल में बंद हैं।

कोर्ट ने इन दोषियों को सप्ताह में एक बार स्थानीय थाने में हाजिरी लगाने और जुर्माने की राशि जमा कराने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि इनमें से किसी के पास पासपोर्ट है तो उन्हें जमा करवा दिया जाए, ताकि कोई देश छोड़कर भाग ना सके।

दोषियों के वकील ने कोर्ट के सामने कहा कि इन चारों के विरुद्ध पहले से कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और जब से यह केस चालू हुआ है, तब से वे 18 वर्ष पहले ही जेल में काट चुके हैं। अब इनकी अपील सुनने में और देरी होगी, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए। हालाँकि, पुलिस के वकील ने इसका विरोध किया।

कौन हैं ‘भारत माता की जय’ पर बखेड़ा कर चुके दानिश अली, जिन्हें ‘मुल्ला आतंकवादी’ कहकर घिर गए हैं रमेश बिधूड़ी

संसद के विशेष सत्र के दौरान गुरुवार (21 सितंबर, 2023) को लोकसभा में भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी चंद्रयान पर बात रख रहे थे। इसी दौरान वो टोकाटाकी से सांसद कुँवर दानिश अली पर उखड़ गए। उन्होंने सांसद दानिश अली को निशाने पर लेते हुए उग्रवादी जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। रमेश बिधूड़ी ने लोकसभा में दानिश अली को ‘ओए भड़&*’, ‘ओए उग्रवादी’, ओए कट&*, ‘ये आतंकवादी है, ये उग्रवादी है’, ‘ये मुल्ला उग्रवादी है’, ‘बाहर देखूँगा इस मुल्ले को’ जैसे संबोधनों से नवाजा

हालाँकि, इसके बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने खेद जताया और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रमेश बिधूड़ी को चेतावनी भी दी। बाद में रमेश बिधूड़ी के बयान को लोकसभा की कार्यवाही से बाहर निकाल दिया गया। संसद की कार्यवाही का वो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

संसद से शुरू हुए इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं दानिश अली। दानिश अली कौन हैं? उनका राजनीतिक इतिहास क्या रहा है? वो किस पार्टी से आते हैं और किस लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, ऐसे तमाम सवाल लोगों के मन में उठ रहे होंगे, जिसका जवाब हम विस्तार से दे रहे हैं।

बसपा के सांसद हैं कुँवर दानिश अली

दानिश अली बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर साल 2019 का लोकसभा चुनाव अमरोहा से जीतकर संसद पहुँचे हैं। वो पहली बार सांसद बने हैं। बहुजन समाज पार्टी में वो पिछले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले ही शामिल हुए थे, वो भी अपनी पुरानी पार्टी जनता दल (सेक्युलर) के मुखिया से आशीर्वाद लेकर।

जी हाँ, कुँवर दानिश अली पहले जनता दल (सेक्युलर) के नेता थे। वो पार्टी में महासचिव के पद पर थे। उन्होंने कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) और कॉन्ग्रेस के बीच तालमेल बिठाकर सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने साल 2019 में भाजपा के कँवर सिंह तँवर को हराकर मोदी लहर के बावजूद सपा-बसपा-कॉन्ग्रेस की जुगलबंदी का फायदा उठाकर जीत हासिल की थी।

विवादों से रहा है पुराना नाता

दानिश अली कई बार विवादों में रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विवादित टिप्पणी की थी, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भी जहरीले बयान दे चुके हैं। हालाँकि इस साल वो दो बार विवादों में आए। इस साल फरवरी माह में उन्होंने टीपू सुल्तान की कब्र का दौरा किया। उन्होंने कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष को ललकारते हुए खुद को टीपू सुल्तान का ‘प्राउड फॉलोवर’ बताया था।

‘भारत माता की जय’ का मंच से किया था विरोध

बीते अगस्त माह में ही कुँवर दानिश अली ने अमरोहा में ‘भारत माता की जय‘ के नारे पर आपत्ति जताई थी। यही नहीं उन्होंने एक कार्यक्रम में भारत माता की जय का नारा लगाने पर आपत्ति करते हुए जमकर हंगामा किया था। उन्होंने कहा कि चूँकि ये सरकारी कार्यक्रम है, इसलिए ‘भारत माता की जय’ का नारा न लगाया जाए। उनकी इस हरकत पर गुस्साई भाजपा ने उन्हें जिहादी करार दिया था।

हापुड़ में जन्म, दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक राजनीति

कुँवर दानिश अली का जन्म साल 1975 में हापुड़ में हुआ था। दानिश अली ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया से पढ़ाई की है और उनके तीन बच्चे हैं। कुँवर दानिश अली खुद को सेक्युलर विचारधारा का बताते हैं। उन्होंने कर्नाटक की पार्टी जनता दल (सेक्युलर) से अपनी राजनीति शुरू की और जल्द ही पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के करीबी हो गए। उन्होंने देवेगौड़ा का आशीर्वाद लेकर ही बहुजन समाज पार्टी ज्वॉइन की थी। उन्हें बसपा ने अपने संसदीय दल का नेता भी बनाया था, लेकिन दो साल के भीतर ही उन्हें पद से हटा दिया था। इस समय वो गृह मंत्रालय की एक समिति के सदस्य भी हैं।

उज्जैन में आकार लेगा 1000 साल पुराना परमार काल का मंदिर, 37 फीट होगी ऊँचाई: खुदाई में मिले थे अवशेष

मध्य प्रदेश में बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में महाकाल लोक की खुदाई के दौरान 2020 में एक हजार साल पुराने मंदिर का अवशेष मिला था। जाँच के बाद यह बात सामने आई है कि यह मंदिर परमार वंश के क्षत्रिय काल का है। अब इसे भव्य रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2020 में महाकाल मंदिर का विस्तार कर महाकाल लोक बनाने के लिए मंदिर परिसर में खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान करीब 25 फीट नीचे जीर्ण-शीर्ण अवस्था मे प्राचीन मंदिर मिला था। मंदिर के अवशेष में प्राचीन शिवलिंग, भगवान गणेश, नंदी, माँ चामुण्डा समेत अन्य प्रतिमाएँ मिलीं थीं। मंदिर और प्रतिमाओं की जाँच के बाद पुरातत्वविदों ने इसे परमार कालीन बताया है।

खुदाई के दौरान मिले इस मंदिर के अवशेषों से अब एक नया भव्य एवं दिव्य मंदिर बनाया जाना है। इस मंदिर की ऊँचाई 37 फ़ीट होगी और इसे बनाने में करीब 65 लाख रुपए की लागत आएगी। पुरातत्वविद डॉ. रमेश यादव का कहना है कि बारिश का सीजन खत्म होने के बाद मंदिर का आधार स्तंभ फिर से खोला जाएगा। इसके बाद नींव बनाने का काम शुरू होगा।

पुरातत्वविद यादव ने यह भी कहा कि मंदिर बनने में 6 महीने से 1 साल तक का समय लगने का अनुमान है। हालाँकि यह पूरा समय पत्थरों की उपलब्धता पर निर्भर है। वैसे तो 90% पत्थर उपलब्ध हैं, लेकिन अगर जरूरत पड़ेगी तो बाहर से भी पत्थर मँगवाए जाएँगे। मंदिर किस देवता का है, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।

यदि मंदिर के सिर दल पर गणेश जी की प्रतिमा है तो वह शिव मंदिर होगा। यदि सिर दल पर गरुड़ जी हैं तो वह विष्णु मंदिर होगा। मंदिर के आधार भाग को देखने पर स्पष्ट हो जाएगा कि यह प्राचीन मंदिर किस देवता का है। वैसे, अभी तक यहां से मिले अवशेष से यह शिव मंदिर ही हो सकता है।

बता दें कि मंदिर में मिले अवशेषों की विशेषज्ञों की निगरानी में नंबरिंग की गई है। इन नंबर्स के जरिए मंदिर निर्माण के समय जो भाग जिस स्थान का है। वहीं पर सेट यानि कि स्थापित किया जाएगा। पुरातत्व विभाग मंदिर के आधार से लेकर शिखर तक के भाग को जोड़कर प्राचीन मंदिर के स्वरूप में ही नए मंदिर के निर्माण का प्लानिंग कर रहा है।

‘पायलट के गद्दारों को गोली मारो…’: राजस्थान में कॉन्ग्रेस विधायक दानिश अबरार के खिलाफ कॉन्ग्रेसियों ने ही लगाए नारे, बुजुर्गों ने कसम देकर शांत करवाया

सवाई माधोपुर के कॉन्ग्रेस विधायक और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार दानिश अबरार को पायलट समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा। समर्थकों ने ‘पायलट के गद्दारों को गोली मारो, दानिश अबरार मुर्दाबाद-मुर्दाबाद के जमकर नारे लगाए। इससे माहौल बिगड़ता देख गुर्जर समाज के बड़े-बुजुर्गों ने किसी तरह मामले को शांत करवाने की कोशिश की। मामला गुरुवार 21 सितम्बर, 2023  का है। 

भगवान देवनारायण के वार्षिकोत्सव समारोह में लगे नारे 

दरअसल, विधायक दानिश अबरार को भगवान देवनारायण के वार्षिकोत्सव समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होना था। इस दौरान जैसे ही वे कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे, वहाँ पहले से मौजूद पायलट समर्थकों ने ‘पायलट के गद्दारों को गोली मारो’, ‘दानिश अबरार मुर्दाबाद’ का शोर मचाते हुए नारेबाजी करना शुरू कर दिया।

यह नारेबाजी गुर्जर समाज के युवाओं द्वारा की जा रही थी। जिसकी वजह से थोड़े देर के लिए तो कार्यक्रम स्थल पर ही अफरा तफरी मच गई। इसके बाद बड़े-बुजुर्गों ने युवाओं को भगवान देवनारायण की कसम देकर किसी तरह से शांत कराया।

नारेबाजी के बीच भी मंच पर बैठे रहे विधायक दानिश अबरार 

गुर्जर समाज के भगवान देवनारायण मंदिर के वार्षिकोत्सव समारोह में पहुँचे विधायक अबरार का जमकर विरोध हुआ। बता दें कि सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच विवाद में प्रदेश कॉन्ग्रेस भी दो खेमों में बँटी नजर आ रही है। विधायक दानिश अबरार के गहलोत खेमे में होने के कारण सचिन पायलट समर्थक उनके खिलाफ हैं। इसलिए कार्यक्रम की उनकी उपस्थिति का विरोध करने के लिए गुर्जर समाज के युवाओं ने अबरार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध किया। 

उल्टे पाँव लौटे विधायक

गौरतलब है कि गुर्जर समाज के युवाओं के विरोध के कारण विधायक दानिश अबरार पहले तो थोड़ी देर मंच पर बैठे रहे। लेकिन थोड़ी ही देर में माहौल बिगड़ने की आशंका के चलते वह कार्यक्रम से चले गए। वही उनके जाने के बाद युवाओं ने वापस से उनके खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।