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नज़ीर ने बेटी सबीना के साथ मंदिर में पढ़ी नमाज़, मौलवी ने कहा था – ये करने से खत्म हो जाएँगी समस्याएँ: यूपी पुलिस ने तीनों को पकड़ कर भेजा जेल

उतर प्रदेश के बरेली जनपद से जबरन हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएँ भड़काने का मामला सामने आया है। बरेली के भुता थाना क्षेत्र के एक गाँव केसरपुर में एक मुस्लिम महिला ने अपनी बेटी के साथ प्राचीन शिव मंदिर में नमाज अता की है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद इलाके में तनाव है।

अब पुलिस ने इस घटना पर कार्रवाई करते हुए माँ-बेटी के साथ ही उस मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है जिसने इनसे यह करने को कहा था। जानकारी के अनुसार, केसरपुर के शिव मंदिर में नजीरा (38) ने अपनी पुत्री सबीना (19) के साथ बैठ कर नमाज अता की। उन्होंने यह हरकत एक मौलवी के कहने पर की है।

मौलवी का नाम चमन शाह है जो कि एक मजार पर रहता है, इसके पास माँ-बेटी दोनों आती जाती रहती हैं। महिलाओं का कहना है कि मौलवी ने उनसे मंदिर में बैठ कर नमाज पढ़ने को कहा था। मौलवी ने उनसे बताया था कि यदि वह मंदिर में बैठ कर नमाज पढ़ती हैं तो उनकी सारी समस्याएँ खत्म हो जाएँगी। जानकारी के अनुसार, यह मामला शनिवार (16 सितम्बर 2023) का है।

मंदिर में नमाज पढ़ती महिलाऐं
मंदिर में नमाज पढ़ती महिलाऐं

दोनों महिलाओं के इस भड़काऊ कृत्य को कुछ लोगों ने रिकॉर्ड करके उनसे पूछताछ की है। इस बात स्थानीय पुलिस थाने में गाँव के प्रधान के पति ने मामला दर्ज करवा दिया है। पुलिस ने भी इस पर कार्रवाई करते हुए तीनों को गिरफ्तार किया है तथा पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) ने इस मामले की जाँच के आदेश दिए हैं।

मामले में भुता थाने के प्रभारी ने इन तीनों को जेल भेजने के साथ ही इन आपराधिक साजिश रचने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में मुकदमा दर्ज कर लिया है। गाँव में तनाव बना हुआ है, जिसे शांत करने के लिए पुलिस और पीएसी बलों की तैनाती की गई है।

कई हिन्दू संगठनों में इस मामले पर रोष जताया है। गाँव वालों का कहना है कि यह प्राचीन शिव मंदिर है जिसमें काँवड़ भी लाकर चढ़ाई जाती है।

ममता बनर्जी के बाद अब कॉन्ग्रेसी CM सिद्दारमैया ने तिलक लगवाने से किया इनकार, आरती भी नहीं ली: हाथ से इशारा कर महिला को रोका

सनातन धर्म को लेकर चल रहे विवाद के बीच कॉन्ग्रेस एक और विवाद में फँस गई है। इंडी एलायंस के नेताओं की तरफ से हो रही सनातन और हिंदू धर्म के खिलाफ बयानबाजी के बीच कर्नाटक के कॉन्ग्रेसी सीएम सिद्दारमैया का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो तिलक लगाने से इनकार करते दिख रहे हैं। इन वीडियो को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस पर करारा हमला बोलते हुए इसे ‘वोट बैंक’ और ‘तुष्टिकरण’ की राजनीति करार दिया है।

सिद्दारमैया का वीडियो शेयर करते हुए भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कॉन्ग्रेस की मानसिकता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि I.N.D.I. गठबंधन के लोग हिंदू धर्म पर चोट करके सिर्फ वोट बैंक की राजनीति कर रहे हैं।

बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो हैदराबाद में कॉन्ग्रेस की कार्य समिति की बैठक के दौरान का है। वीडियो में देखा जा सकता है कि वहाँ एक महिला पारंपरिक साड़ी पहने हुए कॉन्ग्रेसी नेताओं का स्वागत कर रही थी। महिला तिलक लगाकर और आरती करके उनका स्वागत कर रही है, लेकिन सिद्दारमैया जब आते हैं और वो महिला उन्हें तिलक लगाने के लिए आगे बढ़ती है, तो कर्नाटक के मुख्यमंत्री उसे हाथ से इशारा करके रुकने का संकेत करते हैं।

इसके बाद महिला आरती के लिए आगे बढ़ती है, तब भी मना कर देते हैं। वीडियो में मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह भी सिद्दारमैया के साथ खड़े दिख रहे हैं। हाल-फिलहाल ये दूसरा मौका है, जब I.N.D.I. गठबंधन के नेता तिलक लगाने से इनकार करते दिखे। कुछ दिनों पहले मुंबई में इस गठबंधन की बैठक के दौरान टीएमसी की मुखिया और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी तिलक लगाने से इनकार कर दिया था।

भाजपा ने बोला कॉन्ग्रेस पर करारा हमला

इस वीडियो को शेयर करते हुए भाजपा के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने करारा हमला बोला। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “ममता दीदी के बाद, अब सिद्दारमैया ने तिलक लगाने से इनकार कर दिया। टोपी लगाना ठीक है, लेकिन तिलक लगाना ठीक नहीं है?”

पूनावाल ने कहा कि इस गठबंधन की मुंबई बैठक के दौरान ही हिंदुओं और सनातन धर्म को निशाना बनाने का फैसला किया गया था। उन्होंने लिखा, “उदयनिधि स्टालिन से लेकर ए राजा, जी परमेश्वर से प्रियांक खड़गे तक, राजद से लेकर सपा तक – रणनीति है ‘करो हिंदू आस्था पे चोट” और वोटबैंक का वोट लो’।”

बता दें कि इंडी गठबंधन के मुंबई बैठक के बाद से इस गठबंधन के नेताओं की ओर से हिंदू धर्म और सनातन परंपरा पर हमले अचानक बढ़ गए हैं। दक्षिण में डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन के बाद एनसीपी नेता से लेकर राजद नेता तक हिंदू धर्म और सनातन के खिलाफ विवादास्पद बयानबाजी कर रहे हैं।

‘यशोभूमि के कन्वेंशन सेंटर में खर्च हुए ₹27000 करोड़’: ममता बनर्जी के सांसद ने लंबा-चौड़ा पोस्ट लिख कर फैलाया झूठ, जान लीजिए सच 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2023 को भव्य ‘यशोभूमि’ के पहले चरण का उद्घाटन किया है। इसको लेकर फेक न्यूज फैलाने के मामले में जेल की चक्की पीस चुके तृणमूल कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद साकेत गोखले ने दावा किया है कि इसे बनाने में सरकार ने 27,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। ऑपइंडिया ने गोखले के इस दावे का फैक्ट-चेक किया है।

ममता बनर्जी की पार्टी के सांसद साकेत गोखले ने ट्विटर (अब एक्स) पर लंबी-चौड़ी पोस्ट लिखी है। इसमें उन्होंने दावा किया है कि पीएम मोदी ने अपना जन्मदिन मनाने के लिए दिल्ली के द्वारका में बने इंडिया इंटरनेशनल एंड एक्सपो सेंटर (IICC) का उद्घाटन किया। इस कन्वेंशन सेंटर के निर्माण में 27,000 करोड़ रुपए की लागत आई है।

इस पोस्ट में साकेत गोखले ने यशोभूमि को बनाने में आई लगात की तुलना अन्य कामों में हुए खर्च से की है। उन्होंने लिखा कि नए संसद भवन के निर्माण में 862 करोड़ रुपए की लागत आई। पूरे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट की लागत 20,000 करोड़ रुपए है। G20 के लिए केंद्र सरकार का बजट 990 करोड़ था। इस हिसाब से कन्वेंशन सेंटर की लागत नए संसद भवन की लागत से 3000% अधिक है। पूरे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट से 7,000 करोड़ रुपए अधिक है। साथ ही इस लागत में 2025 तक हर साल होने वाले G20 हो जाएँगे।

साकेत गोखले ने यह भी सवाल किया है कि जब G20 के लिए ‘भारत मंडपम’ बनाया जा चुका है तो फिर कन्वेंशन सेंटर क्यों बनाया जा रहा है? यही नहीं, उन्होंने 27 हजार करोड़ की लागत में से पीएम मोदी और भाजपा द्वारा 2024 के चुनाव के लिए कितने रुपए का गबन किया गया है, इसकी जाँच कराने की माँग की है।

साकेत गोखले के इस दावे का फैक्ट-चेक करते हुए ऑपइंडिया को प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की वेबसाइट पर ‘यशोभूमि’ को बनाने से जुड़ी जानकारी मिली। यहाँ हमने पाया कि साकेत गोखले का दावा पूरी तरह झूठा है। वास्तव में प्रधानमंत्री मोदी ने जिस कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन किया है, वह इंडिया इंटरनेशनल एंड एक्सपो सेंटर (यशोभूमि) का हिस्सा है।कन्वेंशन सेंटर को बनाने में ₹27,000 करोड़ रुपए नहीं, बल्कि ₹5400 करोड़ रुपए का खर्च आया है।

वहीं, इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत करोड़ ₹25,000 करोड़ रुपए है। पीएम मोदी ने पूरे प्रोजेक्ट का नहीं, बल्कि इसके पहले चरण के तहत बने कन्वेंशन सेंटर का उद्घाटन किया है। पूरे प्रोजेक्ट के साल 2025 तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है। पूरी परियोजना 8.90 लाख वर्गमीटर में फैली हुई है। वहीं, कंस्ट्रक्शन एरिया 1.80 लाख वर्गमीटर का होगा।

इस कन्वेंशन सेंटर का इस्तेमाल विश्वस्तरीय बैठकों, सम्मेलनों और प्रदर्शनियों के लिए किया जाएगा। इसमें 11,000 लोगों की क्षमता के साथ 15 कन्वेंशन सेंटर और 13 मीटिंग रूम बनाए गए हैं। इस कन्वेंशन सेंटर को 73,000 वर्गमीटर में बनाया गया है। इसमें मुख्य सभागार और ग्रैंड बॉलरूम भी है।

जब ‘यशोभूमि’ के सभी चरणों का काम पूरा हो जाएगा, तब ये एशिया का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर बन जाएगा। दिल्ली के प्रगति मैदान में स्थित ‘भारत मण्डपम्’, जहाँ G20 समिट का आयोजन किया गया, उससे ये दोगुना बड़ा होगा। इसे 25,703 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। इसके पहले चरण के काम में 5400 करोड़ रुपए लगे हैं।

इसमें 2 एक्सजिबिशन हॉल भी हैं। इसके प्लेनरी हॉल में 6,000 लोगों के बैठने की क्षमता है। इसके साथ ही भारत के सबसे अत्याधुनिक ऑटोमेटेड सिटिंग सिस्टम से भी ये लैस होगा। लकड़ी की फ्लोरिंग और दीवालों पर बने पैनल विशेष आकर्षण होंगे। द्वारका सेक्टर 25 में नए मेट्रो स्टेशन का भी उद्घाटन होगा, जिसे ‘यशोभूमि’ के नाम से ही जाना जाएगा।

मेट्रो की एक्सप्रेस लाइन, जो IGI एयरपोर्ट तक जाती है, उससे भी ये जुड़ जाएगा। साथ ही एक्सप्रेस लाइन पर मेट्रो ट्रेनों की गति 90 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी। ‘यशोभूमि’ का प्रदर्शनी हॉल भी विशेष आकर्षण होगा, जो 1.07 लाख वर्गमीटर में बना है।

यशोभूमि की खासियत मीडिया रूम, VVIP लॉन्ज, अत्याधुनिक वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और सूचना केंद्र के अलावा टिकट काउंटर भी होगा। कन्वेंशन सेंटर का ग्रैंड बॉलरूम पत्ते के आकार का है। इसमें 2500 प्रतिनिधि एक साथ बैठ सकेंगे। ये कन्वेंशन सेंटर 8 फ्लोर का होगा। इससे थोड़ी ही दूरी पर कई 5 स्टार होटल भी हैं। ये 221.27 एकड़ में फैला हुआ है।

कौन है साकेत गोखले

साकेत गोखले स्वघोषित पत्रकार और आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। ममता बनर्जी ने उन्हें अपनी पार्टी TMC से राज्यसभा सांसद बनाया है। साकेत गोखले को ‘झूठ की मशीन’ कहना गलत नहीं होगा। इससे पहले भी वह कई बार झूठ फैलाते पकड़े गए हैं। यहाँ तक कि झूठ फैलाने को लेकर वह जेल भी जा चुके हैं।

गोखले ने एक समाचार रिपोर्ट शेयर कर दावा किया था कि साल 2022 में गुजरात के मोरबी में हुए हादसे के बाद आयोजित पीएम मोदी की यात्रा में 30 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। यह रिपोर्ट फर्जी साबित हुई और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया था।

मोहम्मद सिराज ने भारत की झोली में डाल दी जीत: तेज गेंदबाजों के दम पर भारत ने अपने नाम किया एशिया कप, ‘मियाँ भाई’ ने एक ही ओवर में झाड़ डाले 4 विकेट

अगर ये कहा जाए कि मोहम्मद सिराज ने अकेले एशिया कप के फाइनल मैच में जीत भारत की झोली में डाल दिया, तो ये अतिशयोक्ति नहीं होगी। जसप्रीत बुमराह ने पहले ही ओवर में कुसल परेरा को चलता किया, इसके बाद दूसरा ओवर डालने आए मोहम्मद सिराज ने एक भी रन नहीं दिया और मेडेन ओवर डाला। हालाँकि, जब वो अपने स्पेल का दूसरा ओवर और मैच का चौथा ओवर डालने आए तो उन्होंने कमल कर दिया और पूरी श्रीलंका की टीम इससे नहीं उबर पाई। बता दें कि मोहम्मद सिराज को उनके साथी ‘मियाँ भाई’ भी कहते हैं।

उन्होंने श्रीलंकाई पारी के चौथे ओवर में पहली, तीसरी, चौथी और छठी गेंद पर विकेट झटके। इससे पहले कि श्रीलंका संभाल पाता, मोहम्मद सिराज अपना तीसरा और पारी का छठा ओवर लेकर आए और एक और विकेट ले गए। उन्होंने अपना छठा विकेट कुसल मेंडिस के रूप में 12वें ओवर में लिया। इस तरह उन्होंने 7 ओवर में मात्र 23 रन देकर 6 विकेट झटक लिए और श्रीलंका की पारी 15.2 ओवर में मात्र 50 रनों पर ही सिमट गई। हार्दिक पंड्या ने उनका बखूबी साथ दिया, जिन्होंने मात्र 2.2 ओवर में केवल 3 रन देकर 3 विकेट झटक लिए।

इस तरह इन दोनों गेंदबाजों ने भारतीय बल्लेबाजों के लिए कोई खास काम छोड़ा नहीं।ये ODI में भारत के खिलाफ किसी भी टीम का सबसे छोटा स्कोर है। ये किसी भी वनडे प्रतियोगता की फाइनल का सबसे कम स्कोर भी है। मोहम्मद सिराज किसी वनडे मैच में भारत के लिए चौथा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले गेंदबाज बन गए हैं। इससे पहले स्टुअर्ट बिन्नी ने बांग्लादेश के खिलाफ, अनिल कुंबले ने वेस्टइंडीज के खिलाफ और जसप्रीत बुमराह के इंग्लैंड के खिलाफ क्रमशः 4, 12 और 19 रन देकर 6 विकेट झटके थे।

हाँ, श्रीलंका खिलाफ ये किसी भी गेंदबाज का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है किसी वनडे में। श्रीलंका के लिए ये दूसरा सबसे छोटा स्कोर है वनडे में। किसी ODI में सबसे कम ओवर में ऑलआउट होने के रिकॉर्ड में श्रीलंका दूसरे स्थान पर आ गया है। इससे पहले जिम्बाब्वे की टीम मात्र 13.5 ओवरों में ऑलआउट हुई थी। रन चीज करने उतरे ईशान किशन ने 18 गेंदों में 23 रन और शुभमन गिल ने 19 गेंदों में 27 रन बना कर मात्र ओवरों में ही भारत को जीत दिला दी। इस तरह भारत एशिया कप का चैंपियन बन गया। दोनों नाबाद रहे। भारत ने मात्र 6.1 ओवर में इस स्कोर को चेज कर लिया।

केरल के सहकारी बैंक में सैकड़ों करोड़ का घोटाला, पूर्व मंत्री मोइद्दीन सहित CPM नेताओं के खिलाफ ED को मिले सबूत: बहरीन से भी कनेक्शन

कम्युनिस्ट राज वाले केरल में त्रिसूर की करुवन्नुर सहकारी बैंक घोटाले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। सैकड़ों करोड़ रुपए के इस घोटाले में सत्तारूढ़ सीपीएम के नेताओं की बड़ी भूमिका सामने आ रही है। करुवन्नुर के इस घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) लगातार नए खुलासे कर रही है। पूर्व मंत्री मोइद्दीन सहित कई मंत्रियों के खिलाफ ED को सबूत मिले हैं।

अब इस मामले में सामने आया है कि घोटाले के मुख्य आरोपित सतीश कुमार ने बैंक के बोर्ड में शामिल सीपीएम नेताओं की मदद से बैंक से पैसा निकालकर अन्य बैंकों में जमा किया था। इन पैसों को रखने के लिए सतीश ने दूसरे बैंकों में खाते खुलवाए थे। कॉन्ग्रेस विधायक शफ़ी पराम्बिल ने बताया था कि यह घोटाला 350 करोड़ रुपए का है।

इस मामले में मुख्य आरोपित सतीश के सीपीएम नेताओं के साथ कॉल डिटेल सामने आए हैं। उसने मनी लॉन्ड्रिंग में बैंककर्मियों और दलालों सहित कम से 20 लोगों का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही सतीश ने विभिन्न खातों में लगभग 40 करोड़ रुपए के लेन देन किए थे। उन्हें ईडी ने सील कर दिया है। ये 5 बैंक अकाउंट सतीश और उसके परिजनों के हैं।

क्या है घोटाले का पूरा मामला?

पूरा मामला केरल के त्रिसूर जिले की करुवन्नुर सहकारी बैंक से जुड़ा हुआ है। इस बैंक के गवर्निंग बोर्ड पर पिछले लगभग 4 दशकों से सीपीएम के नेताओं का कब्ज़ा है। बैंक में वित्तीय घोटाले का तब खुलासा हुआ, जब वर्ष 2020 के आसपास बैंक से लोन लेने वाले लोगों को नोटिस आने चालू हुए।

ऐसे लोगों को भी रिकवरी के नोटिस भेजे गए, जिनके लोन पूरी तरह जमा हो चुके थे या जो लगातार अपनी किश्तें जमा कर रहे थे। इसको देखते हुए बैंक का ऑडिट किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बाद में यह खुलासा हुआ कि बैंक के कर्मचारियों ने बैंक के सॉफ्टवेयर के साथ छेड़छाड़ करके फर्जी लोन लिए।

इन लोन को लेने के लिए अन्य ग्राहकों की जमीन एवं संपत्तियों को गांरटी के तौर पर बैंक में इस्तेमाल किया गया। इसके लिए फर्जी हस्ताक्षर आदि भी बनाए गए। बैंक से लोन के रूप में लिए गए इस पैसे जमीनें खरीदी गईं और बिल्डिंगों का निर्माण किया गया। यह भी सामने आया कि बैंक से लिए गए पैसे को सूदखोरी में इस्तेमाल किया गया।

बैंक घोटाले में सीपीएम के नेता शामिल?

इस खुलासे के बाद मामला जुलाई 2021 में प्रवर्तन निदेशालय को सौंपा गया। इसके बाद से लगातार नई जानकारियाँ सामने आ रही हैं। ईडी द्वारा जाँच शुरू करने के बाद से अब तक इसमें मुख्य आरोपित वी सतीश कुमार के अलावा सीपीएम के विधायक एसी मोइदीन से पूछताछ की जा चुकी है। वह सीपीएम सरकार में मंत्री भी रहे हैं।

मोइद्दीन कई बार पूछताछ को टालते आए। उनके ठिकानों पर ईडी कई बार छापे भी मार चुकी है। इस घोटाले में सीपीएम के कई बड़े नेताओं के नाम जुड़े हैं। जाँच में यह तक सामने आया कि राज्य कि क्राइम ब्रांच ने बड़े नेताओं का नाम छुपा लिया। घोटाले के मुख्य आरोपित सतीश कुमार के जिले के सीपीएम नेताओं से करीबी सम्बन्ध थे।

सीपीएम विधायक मोइद्दीन (चित्रसाभार: रिपोर्टर लाइव)
सीपीएम विधायक मोइद्दीन (चित्रसाभार: रिपोर्टर लाइव)

क्या क्या हुए खुलासे?

बैंक से निकाले गए पैसे के विषय में किए गए खुलासे चौंकाने वाले हैं। इस घोटाले में सिर्फ फर्जी लोन ही नहीं बाँटे गए, बल्कि अन्य ग्राहकों के ब्याज दरों में भी छेड़छाड़ की गई। बेनामी संपत्तियाँ खरीदी गईं। यह भी जानकारी सामने आई है कि घोटाले का मुख्य आरोपित सतीश कुमार बहरीन में अपनी सुपर मार्केट और ऑटो पार्ट के स्टोर चलाता है। उसकी सहायता से उसने बैंक में विदेशी मुद्रा सम्बंधित लेनदेन भी किया।

ईडी जाँच में यह भी सामने आया कि सतीश कुमार की सीपीएम नेताओं से लगातार बात होती आई है। इसके लिए जुटाए गए कॉल रिकॉर्ड सबसे अहम् हैं। इस मामले में सतीश को सीपीएम के नेताओं का नजदीकी बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि सतीश ने इन नेताओं के लिए बैंक में घोटाला किया, जबकि पीपी किरन नाम का एक व्यक्ति इस मामले में दलाल था, जिसने यह सारी कार्यवाही करने में मदद की।

मोइद्दीन के अलावा एक अन्य सीपीएम नेता पीके बीजू का भी नाम इस घोटाले में जोड़ा जा रहा है। इसको लेकर कॉन्ग्रेस ने आरोप भी जड़े हैं। घोटाले की इन सभी खबरों के बाहर आने से बैंक के जमाकर्ताओं का विश्वास टूट चूका है और लोग अपनी पूँजी बैंक से निकाल रहे हैं, जबकि सीपीएम लगातार अपने नेताओं को बचाने में जुटी है।

यह भी पढ़ें: मंदिर पर भगवा झंडा लगाने की अनुमति देने से केरल हाई कोर्ट का इनकार, कहा- राजनीति के लिए नहीं हो सकता मंदिरों का इस्तेमाल

आपस में लड़ती I.N.D.I. गठबंधन की सरकारें, मोदी सरकार से लगा रहे गुहार – ‘सुलह करा दो’: जानें क्या है कावेरी नदी वाला विवाद, कर्नाटक- तमिलनाडु में रार

मोदी सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाने के लिए विपक्ष ने I.N.D.I. गठबंधन तो बना लिया है, लेकिन गठबंधन की पार्टियों के बीच एकता नजर नहीं आ रही। ताजा मामला कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद का है। दोनों ही राज्यों में कॉन्ग्रेस सत्ता में है। लेकिन इसके बाद भी केंद्र से झगड़ा सुलझाने की अपील की जा रही है। जहाँ कर्नाटक में कॉन्ग्रेस अकेले बहुमत में है, वहीं तमिलनाडु में वो अपने I.N.D.I. गठबंधन की सहयोगी DMK के साथ सत्ता में साझीदार है।

कावेरी जल विवाद को विस्तार से समझने से पहले इतना जान लीजिए कि दोनों राज्यों के बीच कावेरी नदी के पानी के बँटवारे को लेकर विवाद मचा हुआ है। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस सरकार है। वहीं तमिलनाडु में कॉन्ग्रेस-डीएमके गठबंधन सत्ता में है। कावेरी जल विवाद को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने शनिवार (16 सितंबर, 2023) को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को एक पत्र लिखा है।

इस पत्र में स्टालिन ने कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक सरकार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि कावेरी डेल्टा में पर्याप्त पानी है और तमिलनाडु में मानसून से पर्याप्त वर्षा होगी। इसलिए तमिलनाडु की माँग सही नहीं है, उसने अपना सिंचाई क्षेत्र बढ़ाया है। बकौल एमके स्टालिन, यह सब बातें पूरी आधारहीन हैं। कर्नाटक सरकार की रिपोर्ट ‘झूठी’ थी।

वहीं एक अन्य बयान में तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने कहा कि जल विवाद को लेकर राज्य की सभी पार्टियों के सांसद केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को एक ज्ञापन सौंपेंगे। इसके लिए राज्य से एक प्रतिनिधिमंडल भेजा जाएगा। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व तमिलनाडु के जल संसाधन मंत्री दुरईमुरुगन करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि इस ज्ञापन के जरिए केंद्र से आग्रह किया जाएगा कि वह कर्नाटक राज्य को तमिलनाडु के लिए कावेरी नदी का पानी छोड़ने की सलाह दें। स्टालिन ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी के पानी आनुपातिक बँटवारे को लेकर फैसला दिया था, लेकिन कर्नाटक उस फैसले का पालन नहीं कर रहा है। तमिलनाडु को 14 सितंबर तक कर्नाटक से 103.5 TMCFT पानी मिलना चाहिए था। स्टालिन का दावा है कि तमिलनाडु को केवल 38.4 TMCFT पानी मिला। इससे 65.1 TMCFT पानी की कमी हो गई है।

बता दें कि इससे पहले कर्नाटक सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस बैठक में तमिलनाडु को कावेरी नदी का पानी नहीं देने का निर्णय लिया गया था। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु ने कावेरी जल बँटवारे पर कर्नाटक के साथ बातचीत से इनकार कर दिया है। तमिलनाडु का कहना है कि कई बार बातचीत असफल होने के बाद ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के सुझाव में मामूली सुधार के साथ अपना फैसला सुनाया था। इस फैसले के हिसाब से जहाँ एक तमिलनाडु चाहता है कि कर्नाटक उसे हर महीने पानी दे। वहीं कर्नाटक का कहना है कि वह अपने लोगों और किसानों की जरूरतों को पूरा करने के बाद ही पानी छोड़ सकता है। 

क्या है कावेरी जल विवाद?

कावेरी जल विवाद 140 साल से भी अधिक पुराना है। इसकी शुरुआत साल 1881 में तब हुई जब मैसूर राज्य ने कावेरी नदी पर बाँध बनाने का फैसला किया। इस फैसले के बारे में सुनते ही मद्रास प्रेसिडेंसी ने आपत्ति जाहिर की। तब अंग्रेजों ने इसमें दोनों पक्षों में समझौता करा दिया। इसके बाद साल 1924 में मामला फिर उठा। इस बार मैसूर और मद्रास के साथ ही केरल और पुदुचेरी ने भी कावेरी के पानी में अपना हिस्सा बताया। मामला कोर्ट में पहुँचा और अंग्रेजों ने फिर से सुलह करा दी।

देश की आजादी के बाद भी कावेरी के पानी का मुद्दा समय-समय पर उठता रहा। स्थितियाँ बिगड़ती देख केंद्र सरकार ने 2 जून, 1990 को ट्रिब्यूनल का गठन किया। साल 1991 में ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में कहा कि कर्नाटक कावेरी के पानी का एक हिस्सा तमिलनाडु को देगा। साथ ही हर महीने पानी देने को लेकर भी फैसला हुआ। लेकिन बात अंतिम नतीजे तक नहीं पहुँच पाई। ट्रिब्यूनल के इस फैसले के खिलाफ कर्नाटक में हिंसक झड़प भी हुई थी।

इसके बाद साल 2007 में मामला फिर अदालत में पहुँच गया। कोर्ट की दखल के बाद ट्रिब्यूनल ने साल 2007 में कावेरी नदी  के पानी का बँटवारा कर दिया। इसके हिसाब से कावेरी का पानी सभी दावेदारों को देने का फैसला हुआ। ट्रिब्यूनल ने यह माना था कि कावेरी में 740 TMC पानी है। इसमें से तमिलनाडु को 419, कर्नाटक को 270, केरल को 30 और पुदुचेरी को 7 TMC पानी दिया जाना था। यही नहीं, विवाद सुलझाने के लिए कावेरी प्रबंधन बोर्ड और कावेरी जल नियमन समिति भी बनाई गई थी। लेकिन कर्नाटक और तमिलनाडु के अड़ियल रवैये के चलते मामला सुलझ नहीं पाया।

साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए कर्नाटक से कहा कि वह तमिलनाडु को और पानी दे। लेकिन, इस फैसले के बाद कर्नाटक में हिंसक झड़प शुरू हो गईं। मामला किसी तरह शांत कराया गया। इसके बाद साल 2016 में कर्नाटक सरकार ने सर्वसम्मति से कावेरी का पानी तमिलनाडु को न देने को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर दिया। तमिलनाडु ने इसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की।

इसके बाद कोर्ट ने कर्नाटक से फिर से तमिलनाडु को पानी देने के लिए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद फिर से हिंसक घटनाएँ हुईं। बसों और सार्वजनिक संपत्तियों में आग लगा दी गई। साल 2018 में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने का आदेश दिया। इस फैसले के हिसाब से तमिलनाडु को 404.25 TMC फीट पानी मिलना तय हुआ था। वहीं कर्नाटक को 284.75 TMC पानी मिलना था। लेकिन तमिलनाडु का आरोप है कि कर्नाटक उसे पर्याप्त पानी नहीं दे रहा है।

51 साल का नबी अहमद, 20 वर्ष की हिन्दू लड़की… शौहर ने कई बार बलात्कार किया, बीवी ने गर्भपात करवाया: पूरा परिवार मिल कर पीटता था

छत्तीसगढ़ में 51 साल के नबी आलम खान ने एक लड़की के साथ ‘लव जिहाद’ की घटना को अंजाम दिया है। यहाँ एक लड़की को अधेड़ ने काम का लालच और प्रेम की आड़ में फँसा कर न सिर्फ उसका रेप किया, बल्कि उसकी बीवी ने भी उसका गर्भपात कराया और मारपीट की घटनाओं को अंजाम दिया।

रायपुर में ‘लव जिहाद’ की वारदात

ये मामला रायपुर का है। यहाँ ग्रिल बनाने का काम करने वाले नबी आलम खान ने ब्यूटीशियन का काम करने वाली 20 साल की लड़की को फाँस कर पहले तो उसका रेप किया, फिर उसका मुँह बंद कर कराने के लिए उसे शादी का झाँसा दिया। उसके लिए अलग रहने की व्यवस्था की और मनमाने तरीके से हवस बुझाने उसके पास जाता रहा। यही नहीं, उसने हिंदू लड़की का नाम भी खुद से बदलकर ‘तरन्नुम’ कर दिया।

ये सब वो तब करता रहा, जबकि वो न सिर्फ शादीशुदा है, बल्कि उसके बच्चे भी बड़े हैं। इस बीच, जब लड़की प्रेग्नेंट हो गई, तो लड़की के पैरों तले जमीन खिसक गई। चूँकि उसने शादी की बात की थी, तो नबी खान की बीवी ने भी हैवानियत शुरू कर दी। उसकी बीवी और बच्चों ने उसके साथ न सिर्फ मारपीट की, बल्कि उसकी बीवी ने ही उसका गर्भपात भी करवा दिया।

लड़की का धर्म-परिवर्तन करने की भी कोशिश

लड़की दुर्ग की रहने वाली है और रायपुर में ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। यहीं पर नबी आलम खान ने उसे अपने पास काम करने के लिए लालच दिया और ज्यादा पैसे देने की भी बात कही। धीरे-धीरे वो बात करके लड़की के करीब पहुँचा और रेप किया। उसने इस मामले को दबाने के लिए उसे शादी का झाँसा दिया। यहाँ तक कि उसने लड़की का उर्दू नाम ‘तरन्नुम’ भी रख दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने पुष्टि की है कि उसने अपने मोबाइल में लड़की का नाम ‘तरन्नुम’ नाम से ही सेव किया है।

पुलिस ने आरोपित को किया गिरफ्तार

लड़की गर्भपात के बाद भी उसके परिवार के दबाव में रही। नबी आलम खान की बीवी और बच्चों ने भी उसके साथ मारपीट की। जब सब कुछ बर्दाश्त से बाहर हो गया, तब उसने पुलिस से शिकायत की। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में जाँच शुरू कर दी है।

कॉन्ग्रेस पर हमलावर अरविंद केजरीवाल, पत्रकारों पर ‘बैन’ से नीतीश कुमार का किनारा: I.N.D.I. गठबंधन में सीटों के बँटवारे से पहले ही दरार

लोकसभा चुनाव में इस बार प्रधानमंत्री मोदी से मुकाबला करने के लिए विपक्षी दलों ने मिलकर INDI गठबंधन बनाया है। इस गठबंधन में कुल 28 दल शामिल हैं लेकिन इनमें अब दरार साफ़ दिखाई दे रही है। गठबंधन में आम आदमी पार्टी और नीतीश कुमार की जदयू भी शामिल है। जहाँ गठबंधन की कई पार्टियाँ आपस में पहले ही सनातन धर्म को ख़त्म करने का ऐलान करते हुए देश की बहुसंख्यक जनता की भावनाओं को आहत कर चुकी हैं तो मौके की नजाकत को समझते हुए कई नेताओं ने इससे किनारा भी किया। कमलनाथ पहले ही पार्टी से अलग जाते हुए देश को सनातन का बता चुके हैं। 

वहीं अब तो सीधे-सीधे आम आदमी पार्टी के केजरीवाल और नीतीश कुमार खुलेआम गठबंधन की नीतियों को ठेंगा दिखाने लगे हैं। सोशल मीडिया पर भी इन दोनों नेताओं के बयानों के वीडियो वायरल हो रहे हैं। जितेंद्र कुमार नाम के एक एक्स यूजर ने गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए पोस्ट किया, “INDI गैंग में सबकी अपनी ढपली और अपना राग है! जहाँ INDI गैंग के सदस्य केजरीवाल छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेस को झूठी और मक्कार पार्टी बता रहे हैं। वहीं नीतीश कुमार INDI गैंग द्वारा पत्रकारों के बहिष्कार को गलत बताकर पत्रकारों के समर्थन में कहा उन्हें इस विषय के बारे में मालूम नहीं है।”

अब पहले बात करते हैं केजरीवाल के आम आदमी पार्टी की फिर आते हैं नीतीश कुमार पर जिन्होंने गठबंधन के सामूहिक निर्णय से किनारा करते हुए कहा, “मैं किसी पत्रकार के खिलाफ नहीं हूँ।”

केजरीवाल ने खड़ी कॉन्ग्रेस मुसीबत 

दरअसल, कई राज्यों में आम आदमी पार्टी ने सीधे-सीधे कॉन्ग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोलकर गठबंधन के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी है। जहाँ पहले पंजाब में AAP सरकार में मंत्री अनमोल गगन ने पंजाब की सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर गठबंधन को किनारे कर दिया वहीं हरियाणा को लेकर भी पार्टी के संगठन मंत्री संदीप पाठक ने कहा है कि सभी 90 सीटों पर आम आदमी पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। ऐसे में गठबंधन में दरार साफ़ दिखाई दे रही है।  

इतना ही नहीं रही-सही कसर अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल ने छत्तीसगढ़ के एक जनसभा को संबोधित करते हुए पूरी कर दी। उन्होंने शाहरुख़ खान की जवान फिल्म के सहारे शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर कॉन्ग्रेस पर निशाना साधा। साथ ही छत्तीसगढ़ मे आम आदमी पार्टी के प्रभारी संजीव झा ने भी कॉन्ग्रेस को धोने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 

छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए AAP प्रभारी संजीव झा ने कहा कि छत्तीसगढ़ बनने के बाद से ही बस्तर की जनता ने जिस दल पर भरोसा किया प्रदेश में उसी की सरकार बनी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने यहाँ के लोगों के उम्मीदों को ध्वस्त करने का काम किया।

पत्रकारों पर क्या कहा नीतीश कुमार ने 

बता दें कि हाल ही में INDI गठबंधन ने एक लिस्ट जारी कर 14 न्यूज़ एंकरों के बहिष्कार की अपील की थी। इसी मुद्दे पर गठबंधन की एक अहम् पार्टी जदयू के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कुछ पत्रकारों व एंकरों पर पाबंदी लगाए जाने के संबंध में शनिवार (16 सितम्बर, 2023) को सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हमें इसकी जानकारी नहीं है। वहीं मुख्यमंत्री ने पत्रकारों पर पाबंदी के संबंध में निर्णय के बारे में पूछे गए प्रश्न पर जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की तरफ इशारा करते हुए कहा कि यही बता पाएँगे। हम तो शुरू से ही पत्रकारों के पक्ष में रहे हैं।

दरअसल, बख्तियारपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के बाद संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “हम किसी पत्रकार के खिलाफ नहीं। पत्रकारों पर नियंत्रण नहीं किया जा सकता। पत्रकारों को आजादी मिल जाएगी तो जो उन्हें सच दिखेगा व अच्छा लगेगा, उस पर वह अपने-अपने ढंग से लिखेंगे। सभी का अपना अधिकार है।”

30 लाख परिवार, ₹1300 करोड़ का कोष… PM मोदी ने जन्मदिन पर शुरू की ‘विश्वकर्मा योजना’: सोनार-लोहार से लेकर मोची-मूर्तिकार तक, सब विश्व बाजार से जुड़ेंगे

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर देश के करोड़ों लोगों को उपहार दिया है। उन्होंने दिल्ली के नवनिर्मित यशोभूमि कन्वेेंशन सेंटर में रविवार (17 सितंबर 2023) को ‘विश्वकर्मा योजना’ को आधिकारिक रूप से शुरू कर दिया। इस योजना के तहत 13,000 करोड़ रुपए का कोष बनाया गया है, जो पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े कारीगरों को लाभ पहुँचाएगा। आज भगवान विश्वकर्मा की जयंती के साथ-साथ पीएम मोदी का 73वाँ जन्मदिन भी है।

पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना के तहत 18 पारंपरिक व्यवसायों को शामिल किया है, इससे 30 लाख परिवारों को सीधा लाभ होगा। इस योजना के तहत शिल्पकारों को 1 लाख रुपए तक का लोन 5 प्रतिशत के ब्याज पर दिया जाएगा। अगले चरण में यह रकम 2 लाख रुपए कर दी जाएगी। इसके साथ ही इन्हें ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसका पूरा नाम ‘पीएम विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना’ या ‘पीएम विकास योजना’ (PM Vishwakarma Kaushal Samman Yojana – PM VIKAS) है। 

यह योजना से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाएँ और कमजोर वर्ग को लाभ पहुँचाया जाएगा। इसका सीधा फायदा बढ़ई, लोहार, सोनार, मूर्तिकार, कुम्हार, दर्जी, मोची आदि को मिलेगा। इसके जरिए सरकार शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता को बढ़ाकर उन्हें घरेलू एवं वैश्विक बाजार के साथ जोड़ना चाहती है।

भगवान विश्वकर्मा और अपने जन्मदिन पर योजना को लॉन्च करते हुए पीएम ने कहा, “हमारे यहाँ कहा गया है- जो समस्त संसार की रचना और उससे जुड़े निर्माण कार्य करता है, उसे विश्वकर्मा कहते हैं। हजारों साल से जो साथी बनाने के मूल रहे हैं, वे विश्वकर्मा हैं। जैसे हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी की भूमिका होती है, वैसे ही सामाजिक जीवन में इन विश्वकर्मा साथियों की भूमिका होती है। समाज के विकास में विश्वकर्मा साथियों का बड़ा योगदान है।” 

प्रधानमंत्री ने कहा, “हमारी जिंदगी में लोहार, दर्जी, जूते वालों की अहमियत कभी खत्म नहीं हो सकती है। हम आज भी मटके और सुराही का पानी पीना पसंद करते हैं। शायद ही कोई गाँव होगा, जहाँ 18 प्रकार के काम करने वाले लोग नहीं होंगे। इस योजना में इस सभी लोगों को शामिल किया गया है। सरकार योजना के लिए 13,000 करोड़ खर्च करने वाली है।”

अपने विदेशी दौरे के अपने अनुभवों को साझा करते हुए पीएम ने कहा, “मैं 30-35 साल पहले ब्रसेल्स गया था। मुझे एक मित्र ज्वेलरी मार्केट लेकर गए। उन्होंने बताया कि यहाँ मशीन से बनी ज्वेलरी की माँग कम और हाथ से बनी ज्वेलरी की माँग ज्यादा होती है। दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियाँ आपके दरवाजे पर खड़ी हों, हम ये सामर्थ्य पैदा करना चाहते हैं।”

पीएम ने कहा, “विश्वकर्मा साथियों के लिए ट्रेनिंग-टूल्स बहुत जरूरी है। ट्रेनिंग के दौरान भी उन्हें रोज 500 रुपए का भत्ता सरकार की ओर से दिया जाएगा। टूलकिट के लिए 15,000 का वाउचर भी मिलेगा। मार्केटिंग में भी सरकार मदद करेगी।” इसके साथ ही पीएम ने उनसे आग्रह किया कि वे सामान GST वाली दुकानों से खरीदें और इंडिया मेड खरीदें।

प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “इस विश्वकर्मा दिवस पर हमें लोकल के लिए वोकल होने का प्रण फिर दोहराना है। अब गणेश चतुर्थी, धनतेरस, दीपावली सहित अनेक त्योहार आने वाले हैं। मैं सभी देशवासियों से लोकल खरीदने का आग्रह करूँगा।”

विश्वकर्मा योजना के तहत जिन 18 व्यवसायों को शामिल किया गया है, उनके नाम हैं- बढ़ई, नाव बनाने वाले, अस्त्र बनाने वाले, लोहार, ताला बनाने वाले, हथौड़ा और घरेलू एवं छोटेे कृषि उपकरण बनाने वाले, सोनार, कुम्हार, मूर्तिकार एवं पत्थर तराशने वाले, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी-चटाई एवं झाड़ू जैसे छोटे सामान बनाने वाले, पारंपरिक गुड़िया और खिलौने बनाने वाले, नाई, मालाकार, धोबी, दर्जी और मछली का जाल बनाने वाले।

विश्वकर्मा योजना की लॉन्चिंग के मौके पर देश के चुनिंदा 70 स्थानों पर 70 मंत्री मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद, राजनाथ सिंह लखनऊ, अनुराग ठाकुर शिमला, गजेंद्र सिंह शेखावत चेन्नई, महेंद्र नाथ पांडे वाराणसी, स्मृति ईरानी झाँसी में रहे। वहीं, भूपेंद्र यादव जयपुर, नरेंद्र सिंह तोमर भोपाल, एस जयशंकर तिरुवनंतपुरम, नितिन गडकरी नागपुर और अश्विनी वैष्णव भुवनेश्वर में रहे।

प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर इस साल लाल किले से विश्वकर्मा योजना की घोषणा की थी। सरकार ने छोटे कामगारों, कौशल वाले लोगों की आर्थिक मदद के लिए इस योजना को लॉन्च करने की बात कही थी। इस योजना को तीन मंत्रालयों एमएसएमई, कौशल विकास और वित्त मंत्रालय मिलकर लागू करेंगे।

शहवाज-फैसल घायल, अरबाज की टूट गई टांग… यूपी पुलिस से हथियार छीन कर भाग रहे थे: स्कूली छात्रा का दुपट्टा खींचा, फिर बाइक से कुचल कर मार डाला था

उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में एक स्कूली छात्रा की बदमाशों ने हत्या कर दी थी। साइकिल से जाते समय शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) को शहवाज और अरबाज ने उसका दुपट्टा खींचा और वो साइकिल से गिर गई, इसके बाद फैसल ने उसपर बाइक चढ़ा दी थी। इस मामले में पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। इन तीनों आरोपितों ने पुलिसकर्मियों से हथियार छीनकर फरार होने की कोशिश की, जिसके बाद पुलिस को उनके पैरों में गोलियाँ दागनी पड़ी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तीनों ने पुलिस पर ही हथियार तान दिए थे, जिसके बाद पुलिस को गोलियाँ चलानी पड़ी। ये गोलियाँ दो आरोपितों को लगी, तो तीसरा हत्यारोपित भागते समय गिर गया और उसकी टांग टूट गई। पुलिस ने तीनों को फिर से अपनी गिरफ्त में ले लिया है और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है। ‘आज तक’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि पुलिस की गोली से शहवाज और फैसल घायल हुए हैं, तो अरबाज की टांट टूट गई।

शुक्रवार को छात्रा की गई थी जान

बता दें कि ये मामला अंबेडकर नगर जिले के हँसवर थाना के हीरापुर बाजार क्षेत्र का है। यहाँ के रामराजी इंटर कॉलेज में 12वीं में पढ़ने वाली 17 वर्षीय लड़की शुक्रवार को स्कूल खत्म होने के बाद रोज की तरह घर लौट रही थी। इसी दौरान शहवाज और अरबाज उसका पीछा करते हुए आए और उसका दुपट्टा खींच दिया। लड़की साइकिल पर थी। इसलिए उसका संतुलन बिगड़ा और वह बीच सड़क में जा गिरी। पीछे से आ रहे फैसल ने उसपर बाइक चढ़ा दी, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना की सीसीटीवी फुटेज भी सामने आई थी।

पिता का सहारा थी मृतक छात्रा

मृतका के पिता ने बताया है कि वो उनकी लड़की उनका आखिरी सहारा थी। करीब 8 साल पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई थी। वो बच्ची ही घर भी काम करती थी और पढ़ाई भी करती थी। पिता ने बताया कि बेटी पढ़ाई में होशियार थी और बायोलॉजी विषय की पढ़ाई कर रही थी। वो डॉक्टर बनना चाहती थी, लेकिन अब सबकुछ बर्बाद हो गया है।