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‘हिन्दुओं को मारो, जुलूस रोको… कोई जिंदा नहीं जाना चाहिए’: कैसे मुस्लिमों की भीड़ ने किया शिव यात्रा पर हमला, ठासरा में क्या-क्या हुआ, FIR में सब कुछ

गुजरात के खेड़ा जिले के ठासरा में शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) को श्रावण के आखिरी दिन आयोजित भगवान शिव यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। यह हमला तब किया गया जब यात्रा मदरसे के पास से गुजर रही थी तभी अचानक से शिव यात्रा पर पथराव शुरू हो गया, जिससे वहाँ अफरा-तफरी मच गई और पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए। अब इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। 

घटना के संबंध में ठासरा पुलिस स्टेशन में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से सभी की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध हैं। एफआईआर से पता चलता है कि कैसे मुस्लिम भीड़ ने पहले डीजे को लेकर जुलूस पर हमला कर दिया। 

बता दें कि इस मामले में ठासरा पुलिस ने विजय परमार नाम के युवक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। जिसमें बताया गया कि हर साल की तरह इस बार भी शुक्रवार को श्रावण मास की समाप्ति पर भगवान शिव की शोभा यात्रा निकाली गई, जिसके लिए कानूनी मंजूरी भी ले ली गई थी। 

हर साल यह यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होती है और बाघी, बलियादेव मंदिर, रामचौक, टावर बाजार, हुसैनी चौक, होली चकला, तीनबत्ती और आशापुरी मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति रखकर नागेश्वर मंदिर वापस लौटती है।

जानकारी के मुताबिक यात्रा सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और ठासरा और आसपास के गाँवों से करीब 1000 हिंदू श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। जिसमें महिला-पुरुष, बच्चे सभी शामिल थे। यात्रा में दो डीजे बुलाये गए  थे तथा पूरे मार्ग पर ठासरा थाने से आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था। यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर तय रूट के अनुसार ही बालीदेव मंदिर, रामचौक, टावर बाजार, हुसैनी चौक, होली चकला होते हुए करीब साढ़े तीन बजे तीनबत्ती पहुँची। 

मुस्लिमों ने मदरसे का हवाला देकर बंद कराया डीजे 

यात्रा के दौरान लगातार भक्ति गीत बजते रहे। शिकायत में कहा गया है कि जब जुलूस तीनबत्ती चौक स्थित मदरसे के पास पहुँचा, तो ठासरा नगर पालिका सदस्य मोहम्मद अबरार रियाजुद्दीन सैयद, अस्पाक मजिम्मियान बेलीम और लगभग पचास अन्य मुस्लिम समुदाय के लोग जुलूस के पास पहुँचे और आयोजकों से कहा, “हमारा मदरसा बगल में है, अपना डीजे बजाना बंद करो।” और इतना कहने के बाद ही मारपीट कर डीजे बंद कर दिया गया।

मदरसे और आसपास के घरों की छतों से हुआ पथराव 

जैसा कि FIR में बताया गया है कि जब ये लोग लौट रहे थे, तो मदरसे और आसपास के घरों की छतों पर इकट्ठा हुए मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, ‘हिन्दुओं को रोको… हिन्दुओं के  जुलूस को रोको’ और ‘कोई हिन्दू जिन्दा नहीं जाना चाहिए। तभी पथराव शुरू हो गया था और जुलूस पर ईंटें और बड़े-बड़े पत्थर फेंके जाने लगे। 

इस बीच जुलूस में साथ चल रहे पुलिसकर्मियों और यात्रा के नेताओं ने पथराव रोकने की पूरी कोशिश की लेकिन उत्तेजित मुस्लिमों की भीड़ ने पथराव नहीं रोका। इससे ठासरा थाने के कई पुलिसकर्मी और यात्रा में शामिल कई लोग घायल हो गए। तभी हालात बिगड़ने पर अन्य पुलिसकर्मियों का काफिला भी मौके पर पहुँच गया, जिसे देखकर पथराव करने वाले लोग मदरसे और आसपास के घरों की छतों से उतरकर भाग निकले।

17 के खिलाफ नामजद और पचास अन्य की भीड़ के खिलाफ शिकायत

ठासरा में शिव यात्रा पर हमले के बाद इस मामले में कुल 17 मुस्लिमों को नामजद किया गया है और बाकी 50 मुस्लिम लोगों पर धारा 143, 147, 148, 149, 153A, 295A, 323, 324, 504, 505, 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ठासरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। जिनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है उनके नाम इस प्रकार हैं :

  1. मुहम्मद अबरार रियाज़ुद्दीन सैयद
  2. अस्पाक मजिम्मियान बेलीम
  3. ज़ैद अली मुहम्मद अली सैयद
  4. अतीक मालेक
  5. अहद सैयद
  6. हारून पठान
  7. रुकमुद्दीन रियाकतअली सैयद
  8. फ़िरोज़ मजीत खान पठान
  9. इदरीश
  10. नावेद
  11. जुनैद
  12. तनवीर सैयद
  13. फैजान सैयद
  14. फ़ोम बैटरी
  15. जाबिर खान इनायत खान पठान
  16. मुर्गा
  17. अल्ताफ खान मुख्तयार खान पठान

बता दें कि 15 सितंबर को, श्रावण के शुभ महीने के आखिरी दिन, गुजरात के खेड़ा जिले के ठासरा इलाके में भगवान शिव की बारात पर क्रूरता से हमला हुआ। खबरों के मुताबिक, जब हिंदू श्रद्धालु इलाके से जुलूस निकाल रहे थे तो एक मदरसे से पथराव किया गया। इस मामले में “शिवजी की सवारी” यात्रा के आयोजक विजय दास जी महाराज ने कहा कि हमला पूर्व नियोजित प्रतीत होता है। हमला इस तरह से किया गया कि इस शिव यात्रा में शामिल  श्रद्धालुओं को यात्रा बीच में ही छोड़कर अपनी जान बचाकर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं इस घटना में दो अधिकारी और एक पीएसआई समेत तीन पुलिस अधिकारियों को भी घायल हुए हैं। 

गुजरात के खेड़ा में हिंदू त्योहारों पर पथराव आम बात 

गौरतलब है कि खेड़ा गुजरात का वही इलाका है जहाँ पिछले साल नवरात्रि का उत्सव तब हिंसक हो गया था जब आरिफ और जहीर नाम के दो युवकों के नेतृत्व में मुस्लिम भीड़ ने हिंदू भक्तों पर पथराव किया था।

रिपोर्टों में कहा गया था कि आरिफ और जहीर के साथ आई मुस्लिम भीड़ ने नवरात्रि उत्सव के दौरान हंगामा किया था। इससे पहले, यह बताया गया था कि कैसे खेड़ा में एक मुस्लिम शिक्षक ने छात्रों को नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा करने के बजाय मुहर्रम-शैली के शोक में अपनी छाती पीटने और ‘या हुसैन’ का नारा लगाने के लिए कहा था। ऐसी भी खबरें आई थी कि जहाँ मुस्लिम पुरुषों ने फर्जी नामों के तहत नवरात्रि स्थल में प्रवेश करने की कोशिश की थी। साथ ही कुछ इलाकों में स्थानीय मुस्लिमों ने नवरात्रि मनाने का विरोध भी किया था।

असम सरकार ने बाल निकाह कराने वाले 17 फर्जी काजी को गिरफ्तार किया, 2026 तक इस प्रथा को खत्म करने का है लक्ष्य

असम में हिमंता विस्वा सरमा की सरकार ने बाल विवाह को खत्म करने के लिए जरूरी कार्रवाई शुरू किया है। इसके तहत राज्य के हैलाकांडी जिले में कम-से-कम 17 फर्जी काजी को गिरफ्तार किया है। ये काजी बच्चों का निकाह कराते थे। इन्हें जिले के अलग-अलग जगहों से पकड़ा गया है।

पकड़े गए काजियों की पहचान अजीरुद्दीन लश्कर, फरीजुद्दीन लश्कर, असदुल्ला लश्कर, अब्दुल जलाल लश्कर, नुरुल हक लश्कर, अफताबुद्दीन लश्कर, अब्दुल सलाम बरभुइया, अबु बकर बरभुइया, सरीफुद्दीन बरभुइया, कैसर अहमद, मुफ्ती अबुल हुसैन, अब्दुस्सलाम मजूमदार, मुजाकिर हुसैन मजूमदार, उबैदुल्लाह चौधरी और सईदुल हक के रूप में हुई है।

एक अधिकारी ने कहा कि इन काजियों के पास निकाह कराने के लिए जरूरी प्रमाण पत्र नहीं है। इसके साथ ही वे जिले में बाल विवाह में संलिप्त पाए गए हैं। दरअसल, काजी इस्लाम में निकाह कराने का काम करते हैं। इन काजियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने उनके कब्जे से दस ‘कबुलनामा’ जब्त किए हैं।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि गिरफ्तार लोगों में से एक आरोपित ने जिले में अवैध रूप से 150-200 निकाह करवाए हैं। इनमें से कुछ बाल विवाह भी शामिल हैं। हैलाकांडी के ASP समीर बरुआ ने बताया कि पुलिस ने आरोपितों से कई निकाह रजिस्टर जब्त किए हैं। इसके अलावा भी कई दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।

बताते कि इस महीने की शुरुआत में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि दिसंबर 2023 तक राज्य में बहुविवाह प्रथा को खत्म कर दिया जाएगा। इसके साथ ही 2026 तक बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करने की बात कही। उन्होंने कहा कि 1 सितंबर से बाल विवाह के खिलाफ फिर कार्रवाई की जाएगी।

असम सरकार बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के लिए दिसंबर में राज्य विधानसभा में एक विधेयक पेश कर सकती है। ख्यमंत्री सरमा ने घोषणा की है कि इसे अगले 45 दिनों में अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने एक कमिटी भी गठित की है। उस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी है।

सिलचर में मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम सरमा ने कहा, “मसौदा तैयार किया जा रहा है और दिसंबर तक असम में बहुविवाह खत्म हो जाएगा। 15 सितंबर के बाद राज्य में बाल विवाह पर गिरफ्तारी का एक और दौर देखने को मिलेगा।” सीएम ने कहा कि राज्य में बाल विवाह के खिलाफ हर 6 महीना पर कार्रवाई की जाएगी।

इसके पहले फरवरी 2023 में असम सरकार ने बाल विवाह कराने वालों पर बड़ी कार्रवाई की थी। इस संबंध में राज्य में अब तक 4 हजार से ज्यादा केस रजिस्टर किए गए हैं। वहीं 2200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई पर AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी और AIUDF के चीफ मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने सवाल उठाया था।

उस दौरान सीएम सरमा ने कहा था कि अब तक पूरे प्रदेश में बाल विवाह से संबंधित 4074 केस दर्ज किए गए हैं। कुल 8134 आरोपितों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और हमें लगभग 3500 लोगों को गिरफ्तार करना होगा।

2 मुस्लिम लड़कों के साथ हिंदू पत्नी होटल के कमरे में, बाहर पति लगाता रहा मदद की गुहार: कहा – ऐप से दोस्ती, इस्लाम कबूलने का दबाव

पत्नी होटल के एक कमरे में। कमरे में उसके साथ 2 मुस्लिम लड़के। दोनों लड़के किसी और शहर के। होटल के बाहर पति मदद की गुहार लगा रहा। यह अजीबोगरीब मामला कानपुर में हुआ। शुक्रवार (15 सितंबर 2023) को एक युवक ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को बताया कि उसकी पत्नी 2 मुस्लिम युवकों के साथ घंटाघर के एक होटल में है और ये युवक उस पर इस्लाम कबूल करने का दबाव बना रहे हैं। उसने यह भी कहा कि उसकी पत्नी घर से जेवर-नकदी सहित भागी है।

युवक की सूचना पर बजरंग दल के कार्यकर्ता होटल पहुँचे। होटल के मैनेजर ने शुरुआत में हालाँकि युवकों और महिला को उन्हें सौंपने से इनकार कर दिया। इसके बाद मौके पर उत्तर प्रदेश पुलिस के आने के बाद ही होटल ने वहाँ मौजूद इन तीन लोगों की पहचान उजागर की। दिलचस्प बात यह है कि होटल ने इन लोगों से आईडी प्रूफ ही नहीं लिए थे। पुलिस अब इन तीनों से पूछताछ कर रही है।

क्या है मामला?

पुलिस के मुताबिक ये वाकया हरबंश मोहाल थाना क्षेत्र का है। पूछताछ में पता चला है कि दोनों मुस्लिम युवक आगरा निवासी हैं। थाने में तीनों लोगों से पूछताछ की गई। महिला के पति का आरोप है कि उसकी पत्नी किसी ऐप के जरिए इन दोनों युवकों के संपर्क में थी।

उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उसकी पत्नी शुक्रवार की सुबह बच्चों के साथ मारपीट कर जेवर और कुछ पैसा लेकर घर से भाग गई थी। उसका पीछा करने के बाद पता चला कि वो घंटाघर के एक होटल में दो मुस्लिम युवकों के साथ है। पति ने आरोप लगाया कि दोनों मुस्लिम युवक उसे फोन कर परिवार सहित धर्म बदलने के लिए दबाव बना रहे थे।

थाना प्रभारी हरबंश मोहाल ने बताया कि महिला के पति ने सूचना दी थी। इसके आधार पर मौके पर मौजूद दो युवकों को हिरासत में ले लिया गया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। महिला के पति की तहरीर पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

वहीं एसीपी निशांक शर्मा के मुताबिक, युवक की सूचना पर पुलिस होटल गई थी। वहाँ एक महिला दो युवकों के साथ मिली। उसने बताया कि वह बालिग है और खुद मर्जी से यहाँ आई है। इसके बाद तीनों को पूछताछ के लिए चौकी पर लाया गया है। जो भी तथ्य निकल कर आएँगे, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हिंदू महिलाओं को बनाया जा रहा शिकार

बजरंग दल उत्तर संयोजक कृष्णा तिवारी के मुताबिक गोविंद नगर के युवक ने उन्हें अपनी पत्नी के घंटाघर के होटल में होने की जानकारी दी। इसके बाद इस युवक के साथ वो लोग होटल पहुँचे। उनका कहना है कि इस दौरान होटल संचालक यहाँ ठहरे इन तीन लोगों की पहचान बताने से बचता रहा। पुलिस के आने के बाद इनकी पहचान सामने आई। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को आरोप है कि ऐप के जरिए हिंदू महिलाओं को फँसाया जा रहा है।

इस पूरे मामले में महिला ने पुलिस को बताया है कि वो अपने पति से 4 साल से अलग रह रही है। साथ ही उसने सफाई दी है कि वो नौकरी के सिलसिले में दोनों युवकों से मिलने होटल गई थी।

तमिलनाडु में हिंदू कारीगरों की मूर्ति बनाने वाली इकाई सील, 4 दिन बाद है गणेश चतुर्थी: CM के मंत्री बेटे स्टालिन ने सनातन को खत्म करने की अपील की थी

हिंदुओं के प्रमुख त्योहार गणेश चतुर्थी में अब केवल 4 दिन शेष हैं। इस बीच तमिलनाडु की हिंदू से द्वेष रखने वाली DMK सरकार भगवान गणेश की मूर्ति बनाने वालों कहर ढाना शुरू कर दिया है। इन कारीगरों द्वारा जिन जगहों पर मूर्तियाँ बनाई जा रही थीं, उसे सील कर दिया गया है। इनमें से अधिकांश कारीगर राजस्थान से हैं और उन्होंने स्थानीय संस्कृति को अपना लिया है।

तमिलनाडु के करूर के सुंगागेट क्षेत्र में हिंदू समुदाय के मूर्ति कारीगरों के परिसरों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) द्वारा सील कर दिया गया। इसके जरिए हिंदुओं की भावनाओं पर चोट की जा रही है। PCB की इस कार्रवाई से मूर्ति निर्माताओं के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो गई है। उनके पास आय का कोई दूसरा जरिया नहीं है।

इस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसको लेकर नेटिज़न्स में गुस्सा फैल गया है। हिंदू मूर्ति निर्माताओं पर यह कार्रवाई तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन के ‘सनातन को जड़ से खत्म’ करने की अपील के कुछ ही दिनों बाद हुई है।

वीडियो में दिख रहा है कि राज्य के अधिकारी मूर्ति बनाने वाली इकाई को सील कर रहे हैं। वहीं, महिला कारीगर अधिकारियों के सामने गुहार लगा हैं कि यही उनके परिवार पालने का स्रोत है। इसे नुकसान ना पहुँचाया जाए। हालाँकि, अधिकारियों का दिल फिर भी नहीं पसीजता है।

तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने तमिलनाडु सरकार की इस कार्रवाई की निंदा की है। उन्होंने ऐसा ही एक वीडियो X (पूर्व में ट्विटर) पर शेयर किया है। इस वीडियो में एक कारीगर स्थानीय मीडिया से अपनी आपबीती सुनाता है। वह कहता है, “हम 10 साल से गणेश की मूर्तियाँ बना रहे हैं। मूर्तियाँ बनाने के लिए हम चॉकपीस पाउडर का उपयोग करते हैं। यह पानी में घुल जाता है।”

कारीगर आगे कहता है, “अधिकारियों ने आकर नमूने देखे थे। उन्होंने कहा कि मूर्तियाँ अच्छी गुणवत्ता की नहीं हैं। दो दिन पहले उन्होंने देखा था। पाउडर में जो पेंट है, वह वॉटर पेंट है। कोई रासायनिक मिश्रण नहीं है। कोई बाहरी मिश्रण नहीं है। कोई ऑयल पेंट रंग भी नहीं है। यह सामान्य वाटर पेंट है। इसके बावजूद उन्होंने हमारा शेड सील कर दिया है।”

कारीगर आगे कहता है, “लगभग 160 से 170 मूर्तियाँ यहाँ हैं। मैंने ब्याज पर लोन लेकर इसमें 10 लाख रुपए का निवेश किया था। इसके लिए मैंने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से उधार लिया है। अब खाने के लिए भी पैसे चाहिए।” इस दौरान उसी परिवार की एक महिला असहाय होकर रोने लगी।

महिला ने कहा, “इतने सालों से उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। इस बार ही वे ऐसा कह रहे हैं। अगर उन्होंने हमें 20 दिन पहले बताया होता तो हम मूर्तियाँ कहीं और ले जाते। अब हम उन्हें वहाँ नहीं ले जा सकते। इसके लिए हमने सूद पर रुपए लिए थे।” मूर्ति बनाने वाले कारीगरों का कहना है कि वे पिछले एक दशक से आलू के आटे और अन्य प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करके मूर्तियाँ बना रहे हैं। ये मूर्तियाँ पानी में आसानी से घुल जाती हैं।

तमिलनाडु पीसीबी ने राजस्व विभाग और पुलिस के अधिकारियों के साथ मूर्ति बनाने वाले कारीगरों के यहाँ औचक निरीक्षण किया और लगभग 400 गणेश मूर्तियों को सील कर दिया है। अधिकारियों ने इस कार्रवाई के लिए एक शिकायत को आधार बताया, जिसमें कथित तौर पर नियमों का उल्लंघन करते हुए प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है।

भाजपा अन्नामलाई ने डीएमके पर सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, “हमारे उत्सवों पर निर्भर लोगों के व्यवसाय को खत्म करके DMK न केवल सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुँचा रही है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नुकसान पहुँचा रही है।”

भाजपा और हिंदू समुदाय ने डीएमके पर हिंदुओं और हिंदू त्योहारों को कमजोर करने का आरोप लगाया है। हिंदू संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा है कि उन्होंने 120 गणेश मूर्तियों के लिए ऑर्डर दिया था और इकाई को अचानक सील करना हिंदू भावनाओं को आहत करने की साजिश है। डीएमके ने सनातन धर्म के खिलाफ अपने अभियान में सभी हदें पार कर दी हैं।

दरअसल, कुछ दिन पहले ही मूर्ति बनाने में पीओपी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाकर तेनकासी में मूर्ति फैक्ट्री के मालिक और मुरुगन नाम के बीजेपी कार्यकर्ता के परिसर पर छापा मारा गया था। कारीगर ने मजबूर होकर अपनी एक मूर्ति को तोड़ा और अधिकारियों को दिखाया कि यह बायोडिग्रेडेबल है, पीओपी नहीं। इसके बावजूद मुरुगन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

दरअसल, 2 सितंबर 2023 को सनातन उन्मूलन सम्मेलन में उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

इसको लेकर देश भर में बवाल हो गया। कई लोगों ने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने की माँग की। उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ दिल्ली और यूपी में एफआईआर भी दर्ज भी की गई, लेकिन उन्होंने माफी माँगने से इनकार कर दिया और यहाँ तक कह दिया कि वे अपनी बात पर कायम हैं और इसके लिए वे माफी नहीं माँगेंंगे।

नूहं में जहाँ हिंदुओं पर कातिलाना हमला, वहीं कॉन्ग्रेस MLA मामन खान की लोकेशन, था दंगा करने वालों के संपर्क में: मोबाइल-लैपटॉप में मिले सबूत

हरियाणा के फिरोजपुर झिरका से कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान 31 जुलाई को हुए नूहं हिंसा के मामले में पुलिस के शिकंजे में हैं। नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर हुए कातिलाना हमले की जाँच कर रही हरियाणा पुलिस की एसआईटी (SIT) को मामन खान के मोबाइल-लैपटॉप से पुख्ता सबूत मिले हैं।

मामले की जाँच कर रही एसआईटी (विशेष जाँच दल) के प्रमुख सतीश कुमार ने उनके गिरफ्तारी की पुष्टि की थी। जिसके बाद मामन खान को शुक्रवार (15 सितम्बर, 2023) दोपहर को एसआईटी ने कोर्ट में पेश किया। जहाँ से विधायक को दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। अब SIT उनसे पूछताछ कर उनके सोशल मीडिया पोस्ट, हिंसा के दौरान उनकी मोबाइल लोकेशन आदि की बाबत जानकारी जुटाएगी।

वहीं कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान की गिरफ्तारी पर नूहं के SP नरेंद्र बिजारणियाँ ने बयान में कहा, ”नूहं के बडकली चौक पर हुई हिंसक घटना में मामन खान की भूमिका मिली है। इसके साथ ही MLA खान दंगा फैलाने वालों के संपर्क में भी थे। 31 जुलाई को MLA की लोकेशन भी हिंसा वाली जगह के आसपास मिली है।”

SIT इन सवालों पर करेगी पूछताछ

मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है विशेष जाँच दल ने विधायक से पूछ्ताछ के लिए सवालों की एक लम्बी सूचि तैयार की है। बता दें कि कॉन्ग्रेस विधायक पर बड़कली चौक पर हुई हिंसा के आरोप हैं। पुलिस के पास अभी जो पुख्ता सबूत हैं उसके आधार पर खान को नूहं हिंसा के एक साजिशकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। क्योंकि हिंसा वाले दिन मामन खान उस क्षेत्र से कहीं बहुत दूर नहीं बल्कि मात्र डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर थे। पुलिस ने कोर्ट में जो दस्तावेज सौपें हैं उनमें उनके दोनों गनर के बयान भी हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि हिंसा वाले दिन विधायक जहाँ-जहाँ गए वहाँ हिंसा हुई है। जबकि अपनी याचिका में मामन खान ने कहा था कि वह 26 जुलाई से 1 अगस्त के बीच अपने गुरुग्राम स्थित आवास पर थे और उन जगहों पर नहीं गए जहाँ हिंसा हुई थी। 

वहीं अभी तक रिपोर्ट में जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार मामन खान से SIT पुलिस रिमांड के दौरान जिन सवालों के जवाब तलाशेगी उनमें है कि हिंसा भड़काने के लिए मोबाइल से उस दिन कितने पोस्ट किया। हिंसा में उनके कितने समर्थक शामिल थे। विधायक के पपास कितने मोबाइल फोन और सिमकार्ड हैं। साथ ही उनके सोशल मीडिया अकाउंट इंस्टाग्राम, फेसबुक, यू ट्यूब, टेलीग्राम, व्हॉट्सएप्प आदि की जानकारी भी जुटाएगी।  इसके अलावा राजस्थान के घाटमिया गाँव निवासी नासिर-जुनैद से उनके संबंधों, आर्थिक मदद, हिंसा की योजना, वहीं अब तक गिरफ्तार हुए आरोपितों से मुलाकात को लेकर सवाल किये जाएँगे। 

बता दें कि नूहं जिले के नगीना थाने में मामन खान के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की थी। जिसमें हत्या का प्रयास, लूट, दुकानों में आगजनी सहित कई अन्य धाराएँ  लगाई हैं। खान पर तेल मिल में आग लगाने, लूटपाट करने और तोड़फोड़ के भी आरोप हैं। यह FIR 1 अगस्त, 2023 को दर्ज हुई थी। 

मामन खान के खिलाफ पुख्ता सबूत

रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा पुलिस के पास कॉन्ग्रेस विधायक पर आरोपों को साबित करने के लिए फोन कॉल रिकॉर्ड सहित कई अन्य सबूत हैं। वहीं मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी बुधवार को इसी मामले में चंडीगढ़ में संवाददाता सम्मेलन कहा था, “अगर जाँच के दौरान खान की संलिप्तता का पता चला तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।” जिसके एक दिन बाद ही मामन खान को गिरफ्तार कर लिया गया।

बता दें कि हरियाणा के अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक सभरवाल ने उच्च न्यायालय को बताया कि खान के खिलाफ सबूतों की जाँच के बाद ही उन्हें चार सितंबर को आरोपित बनाया गया था। बाद में उन्होंने बृहस्पतिवार (14 सितम्बर) को संवाददाताओं से कहा कि खान के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। 

एक आरोपित ने लिया था मामन खान का नाम

कोर्ट में महाधिवक्ता सभरवाल ने कहा था कि खान के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, उनके फोन टावर लोकेशन, उनके सुरक्षा अधिकारी (गनर) के बयान और अन्य सबूत विधायक के दावे को गलत साबित करते हैं कि वह हिंसा वाले दिन नूहं में नहीं थे। सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि सह-आरोपित तौफीक ने भी मामन खान का नाम लिया है।

बता दें कि तौफीक को 9 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। वहीं इस बारे में महाधिवक्ता सभरवाल ने कहा कि खान और तौफीक के फोन कॉल विवरण और टावर लोकेशन की जाँच की गई तो यह पाया गया कि 31 जुलाई की हिंसा से पहले 29 और 30 जुलाई को उनके बीच फोन पर बातचीत हुई थी। 

गौरतलब है कि इससे पहले हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज भी यह बयान दे चुके हैं कि 28, 29 और 30 जुलाई को मामन खान जिन जगहों पर गए थे, वहाँ-वहाँ हिंसा हुई थी। इसके अलावा दूसरे कई भाजपा नेता भी मामन खान को नूहं हिंसा का मास्टरमाइंड बता चुके हैं।

खालिस्तानी आतंकियों के आगे झुक गई कनाडा सरकार, मुक्त व्यापार समझौता पर लगाई रोक: मंदिर पर हमलों से लेकर गुरुद्वारे में भारतीयों की हत्या के पोस्टर

खालिस्तानी आतंकवाद का असर भारत और कनाडा के संबंधों का असर साफ दिखता है। दोनों देशों के बीच जारी मुक्त व्यापार समझौत वार्ता (Free Trade Agreement Negotiations) रुक गई है। कहा जा रहा है कि कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिनका असर इस वार्ता पर पड़ा है।

सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि दोनों देशों के बीच के कुछ राजनीतिक घटनाक्रमों का सीधा असर इस वार्ता पर पड़ा है। कहा जा रहा है कि जब इन मुद्दों को सुलझा लिया जाएगा, उसके बाद ये वार्ता फिर से शुरू की जाएगी। दरअसल, 2 सितंबर 2023 को कनाडा ने घोषणा की कि उसने समझौते के लिए बातचीत रोक दी है।

अधिकारियों का कहना है कि कनाडा अपने घरेलू राजनीति की वजह से भारत की चिंताओं को लगातार नजरअंदाज करता आ रहा है। ऐसी स्थिति में इस वार्ता को जारी नहीं रखा जा सकता है। हालाँकि, अधिकारी ने यह भी कहा कि दोनों सरकारों के बीच मुद्दे सुलझने के बाद बातचीत फिर से शुरू होगी। इसे सिर्फ एक विराम बताया है।

इससे पहले ये खबरें आ रही थीं कि भारत और कनाडा इस साल के अंत तक अंतरिम व्यापार समझौते पर पहुँच सकते हैं। इस तरह के समझौते में आमतौर पर समझौते में शामिल देश अपने बीच व्यापार की जाने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क को काफी कम या खत्म कर देते हैं। इससे देशों के व्यापार को गति मिलती है।

व्यापार समझौते पर दोनों देशों के बीच अब तक लगभग आधा दर्जन दौर की वार्ता हो चुकी है। पिछले साल मार्च में दोनों देशों ने एक अंतरिम समझौते के लिए बातचीत फिर से शुरू की थी। इस समझौता वार्ता को आधिकारिक तौर पर प्रारंभिक प्रगति व्यापार समझौता (Preliminary Progress Trade Agreement) का नाम दिया गया था।

इस साल मई में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश पर मंत्री स्तर की छठी वार्ता हुई की थी। इस बैठक की सह-अध्यक्षता वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के लघु व्यवसाय, निर्यात संवर्धन और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मैरी एनजी ने की थी।

जब जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो भारत में थे, उस दौरान भी खालिस्तानी अलगाववादियों ने वहाँ के एक राज्य ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में एक ‘जनमत संग्रह’ आयोजित किया था। खालिस्तानी अलगाववादियों ने उस दौरान भारतीय नेतृत्व के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल और भारत की अखंडता के खिलाफ टिप्पणी की थी।

कनाडा में स्थित एक गुरुद्वारा में भारतीय राजनयिकों की तस्वीरें लगा कर उनकी हत्या के लिए उकसाया है। साथ ही इसमें 2 खालिस्तानी आतंकियों की तस्वीरें भी लगी हैं। इनमें से एक तस्वीर 1985 में ‘एयर इंडिया’ की फ्लाइट में बम डाल कर 329 लोगों की जान लेने वाले आतंकी तलविंदर सिंह परमार की तस्वीर लगी है, जो ‘बब्बर खालसा’ का संस्थापक था। एक तस्वीर 2023 में संदिग्ध रूप से मार डाले गए खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की है।

शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन यानी 10 सितंबर 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो से खालिस्तानी आतंकियों की भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंता जाहिर की थी। भारत के आधिकारिक बयान में कहा गया था कि ये खालिस्तानी आतंकी कनाडा में भारतीय राजनयिकों के खिलाफ हिंसा को भड़का रहे हैं और भारतीय समुदाय के लोगों को धमकी दे रहे हैं।

बता दें कि इससे पहले भी खालिस्तानियों ने कई हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था। खालिस्तानी आतंकियों ने 7 सितंबर 2023 को तड़के एक मंदिर को निशाना बनाया था। स्थानीय निवासी जब मंदिर पहुँचे तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। माता भामेश्वरी दुर्गा मंदिर की दीवारों पर भारत विरोधी नारे लिखने के फोटो, वीडियो सामने आए थे। दीवारों पर ‘मोदी इज टेररिस्ट’ यानी ‘मोदी आतंकी है’ और ‘पंजाब इज नॉट इंडिया’ यानी ‘पंजाब भारत का हिस्सा नहीं है’ लिखा देखा गया था।

‘वो मेरे बाल खींचता था.. मेरा बदन नोंचता था’ : सहरसा में स्कूल संचालक के बेटे ने 2 साल तक किया नाबालिग का रेप, महिला प्रिंसिपल देती थी दरिंदगी में साथ

“वो मेरे बाल खींचता था.. मेरा बदन नोंचता था। मेरे साथ उसने 2 साल तक रेप किया।” 12 साल की उम्र में अपने साथ हुए रेप की भयावह घटना को बिहार के सहरसा की एक लड़की ने साझा किया है। हालाँकि, यह घटना तब हुई जब वह 2017 में कक्षा 6 में पढ़ती थी।

इतना ही नहीं दरिंदगी के इस अपराध में  आरोपित का साथ स्कूल की महिला प्रिंसिपल भी देती थी। लड़की ने रेप का आरोप प्राइवेट स्कूल के संचालक के बेटे पर लगाया है। दरिंदगी की इस घटना की शुरुआत उसके स्कूल की लाइब्रेरी में 6 साल पहले हुई। इसके बाद यह सिलसिला 2 साल तक चलता रहा।

क्या है पूरा मामला 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला बिहार के सहरसा के शांति शिक्षण संस्थान का है। इस मामले में स्कूल के डायरेक्टर अजीत विश्वास के बेटे सम्राट विश्वास पर दो साल तक एक नाबालिग लड़की से रेप का आरोप लगा है। सबसे पहले चार साल बाद 28 अगस्त, 2023 को इस मामले का खुलासा हुआ है। परिजन ने थाने में रेप की एफआईआर दर्ज कराई। 29 अगस्त को पुलिस ने आरोपित सम्राट को गिरफ्तार कर लिया। 

इस पूरे मामले में लड़की ने खुद ही आपबीती सुनाई है। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में करीब 17 साल की नाबालिग का आरोप है जब उसके साथ पहली बार रेप हुआ तब वह छठवी क्लास में पढ़ती थी। अभी वह पटना में नीट की तैयारी कर रही है। अपने साथ हुई रेप की घटना बयान करते हुए उसने कहा, “मेरे साथ साल 2017 से साल 2019 तक लगातार रेप हुआ। पहली बार मेरे स्कूल की टीचर अनीता मिश्रा मुझे लाइब्रेरी के बगल में एक कमरे में ले गई। फिर लाइट ऑफ कर दी और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया।”

पीड़िता ने कहा, “मैं चिल्लाई क्योंकि कमरे में मैं अकेली नहीं थी, स्कूल संचालक का बेटा मेरा इंतजार कर रहा था। वह मेरे करीब आया, मेरे बाल खींचे, मुझे चोट पहुँचाई, मेरे साथ बलात्कार किया और पूरी घटना का वीडियो बना लिया। जब वह मेरे साथ बलात्कार कर रहा था, तब मेरी शर्ट के बटन टूट गए।”

नाबालिग ने बताया कि एक बार जब उसका काम पूरा हो गया और उसकी पकड़ ढीली हो गई, तो वह बस भाग जाना चाहती थी। लेकिन प्रिंसिपल दरवाजे पर पहरा दे रहे थे। तब प्रिंसिपल ने उसे पकड़ लिया और बाल, कपड़े ठीक करने से पहले उसे थप्पड़ मारा…। उसने पीड़िता को क्लास में लौटने और घटना के बारे में किसी से कोई बात न करने को कहा।”

 पीड़िता ने पहले भी इस दरिंदगी को बताना चाहा लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हुई। घटना के बाद अब वह स्कूल जाने से कतराने लगी थी और स्कूल न आने के लिए नए-नए बहाने खोजती थी। लेकिन इन सब बहानों ने बहुत लंबे समय तक काम नहीं किया और उसे स्कूल वापस जाना पड़ा। उसने उसके साथ अगले दो वर्षों तक बार-बार बलात्कार किया, ज्यादातर पुस्तकालय के अंदर एक ही कमरे में।

एक समय ऐसा भी आया जब सदमे में डूबी लड़की ने अपने बलात्कारी और प्रिंसिपल का सामना करने की हिम्मत जुटाई और उनके बारे में शिकायत करने की धमकी दी। लेकिन वे बहुत आश्वस्त थे कि उनको कुछ नहीं होगा। पीड़िता ने बताया कि उन्होंने मुझसे कहा, “तुम क्या बताओगी?…. तुम्हारे माता-पिता तुम पर विश्वास नहीं करेंगे और जिस समाज में तुम रहती हो वह तुम्हारा बहिष्कार करेगा।”

उन्होंने बलात्कार के वीडियो लीक करने की धमकी भी दी। वह शिकायत से पीछे हट गई लेकिन अपने माता-पिता को 2018 में उसे लड़कियों के स्कूल में स्थानांतरित करने के लिए मना लिया।

दर्द होता तो रोती थी, मैडम थप्पड़ मारकर चुप करा देती

पीड़िता ने बताया, “मैं उस वक्त बहुत छोटी थी। मुझे दर्द होता तो मैं बैठ कर रोती रहती थी। टीचर अनीता से कुछ कहती तो वो मुझे थप्पड़ मारती थी। मैं घटना के बाद से ही डिप्रेशन में रहने लगी थी। बीमार पड़ी तो 2019 में शांति शिक्षण संस्थान को छोड़ दिया। सहरसा के ही दूसरे स्कूल में नाम लिखावाया। वहाँ  10वीं पास करने के बाद साल 2022 से मेडिकल की तैयारी के लिए पटना आकर रहने लगी। 

पीछा करते हुए पटना पहुँचा आरोपित 

लड़की ने बताया कि साल 2020 में मुझे उसके साथ लिव इन में रहने वाली एक लड़की ने कॉल किया था। कहती थी सम्राट तुमसे मिलना चाहता है। अभी कुछ दिन पहले भी उसका कॉल आया था। उसने कहा कि सम्राट पटना आया है, वो तुमसे मिलना चाहता है।

पीड़िता ने बताया कि ये सुनकर ही उसकी हालत खराब हो गई, वह डिप्रेशन में चली गई। वह पिछले सात साल से घुट-घुट कर जी रही थी। और एक बार फिर से आरोपित का कॉल आने के बाद उसका शरीर काँपने लगा। 23 अगस्त को जब उसकी तबीयत बहुत ज्यादा खराब हो गई तब उसे अस्पताल में भर्ती कराया। 

साइकियाट्रिस्ट के सामने हुआ रेप का खुलासा

पीड़िता ने बताया कि 24 अगस्त को उसे पटना के ही एक साइकेट्रिस्ट के पास ले जाया गया। वहाँ उसने अपने अतीत की सारी कहानी डॉक्टर से बताई। डॉक्टर ने रेप वाली बात मेरी फैमिली को बता दी। जैसे ही इस बात की जानकारी पीड़िता के परिजनों को लगी तो 28 अगस्त को सहरसा आकर सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। अगले दिन ही पुलिस ने पटना से आरोपित सम्राट को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। 

छोटी बच्चियों को सम्राट बनाता था शिकार

पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि सम्राट विश्वास क्लास 5वीं से लेकर क्लास 10वीं में पढ़ने वाली बच्चियों के साथ गंदा काम करता है। शर्म और परिवार की बदनामी के कारण कोई लड़की सामने नहीं आना चाहती है। उसने मेरी एक दोस्त के साथ भी रेप किया है। मैं चाहती हूँ कि सम्राट को फाँसी मिले। प्रिंसिपल अनीता मिश्रा को अरेस्ट किया जाए। इन लोगों ने मिलकर बहुत सारी बच्चियों के साथ रेप किया है।

मामले की छानबीन में जुटी बिहार पुलिस

वहीं इस मामले में पुष्टि करते हुए पुलिस अधीक्षक उपेंद्र नाथ वर्मा ने बताया कि रेप का मामला सामने आया है। मुख्य आरोपित को जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।

‘तुम्हारा भगवान झूठा है, धर्मांतरण कर लो’: इजरायल में ईसाई मिशनरी से जुड़ी महिलाओं को बच्चों ने दौड़ाया, ‘हेट क्राइम’ का रंग देने की कोशिश

इजरायल के ओल्ड यरुशलम शहर से 13 सितंबर 2023 का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें यहूदी समुदाय के बच्चों का एक ग्रुप दो ईसाई महिलाओं से लड़ रहा है। ये महिलाएँ टूरिस्ट के रूप में इजरायल आई थीं। कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि स्कूली बच्चों का ग्रुप महिलाओं से लड़ रहा है और उन पर थूक भी रहा है। हालाँकि इन रिपोर्ट्स में ये नहीं बताया गया है कि ऐसा क्यों है।

मिडिल ईस्ट मॉनिटर के एक वीडियो में बताया गया है कि यरुशलम पहुँची दो ईसाई पर्यटकों पर इजरायली बच्चों और कुछ लोगों ने हमला किया। महिलाएँ उन लोगों को शांत करने की कोशिश की। वे बच्चे एवं किशोर उन्हें लात-घूँसे मार रहे थे और उन पर सामान भी फेंक रहे थे।

इसको लेकर रशिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों महिलाओं को बच्चों के एक ग्रुप ने सिर्फ इसलिए पीटा, क्योंकि दोनों महिलाएँ उनसे यीशु का गुणगान कर रही थीं। सोशल मीडिया पर भी इस बात कतो लेकर बवाल किया जा रहा था कि क्रिश्चियन होने के कारण इन महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। हालाँकि सच सामने आ रहा है।

ये है वीडियो से जुड़ी सच्चाई

यरुशलम में दोनों महिलाओं पर बच्चों के हमले की खबर तो सच है, लेकिन इसके पीछे की वजह है और भी चौंकाने वाली है। मशहूर विश्लेषक और यहूदी कार्यकर्ता डेविड लैंग ने दुनिया को बताया है कि ये वीडियो एडिटेड है और घटना की पूरी जानकारी नहीं दे रही है।

उन्होंने अपने ब्लॉग इज़रायली कूल में लिखा है कि ये महिलाएँ ईसाई मिशनरी थीं और बच्चों का धर्मांतरण करने का प्रयास कर रही थीं। महिलाएँ चाहती थीं कि बच्चे ‘यीशु में विश्वास करें’, ताकि उनका धर्म परिवर्तन कराया जा सके। उन्होंने सिर्फ यहूदी ही नहीं, कई अन्य मुस्लिम बच्चों का भी धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि महिलाओं की इन सब बातों से बच्चे तैश में आ गए और उन्होंने उनके साथ झड़प की। हालाँकि, ब्लॉगर ने बच्चों के हमले को सही नहीं ठहराया, फिर भी ये जरूर कहा है कि दोनों महिलाओं ने बच्चों से उनके धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी और उनके ‘विश्वास को झूठा’ करार दिया था।

डेविड कोलियर नाम के व्यक्ति ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि ये महिलाएँ सारा वालिस के ईसाई मिशनरी ग्रुप का हिस्सा हैं, जो धार्मिक स्थानों पर जाकर गैर-ईसाइयों, विशेष रूप से यहूदियों और मुस्लिमों को धर्मांतरित करने की कोशिश करती हैं। सारा वालिस अपने सोशल मीडिया पोस्ट में खुलेआम सभी धर्मों और उनके भगवानों को झूठा कहती हैं।

घटना को ‘यहूदी बच्चों के प्रति ईसाई विरोधी नफरत’ का रंग दिया गया

इस बीच ट्विटर पर कुछ लोगों ने इस हमले को ईसाई धर्म के प्रति यहूदियों की नफरत का रंग देने की कोशिश की। अमेरिका के नैशविले की रहने वाली यूट्यूबर लॉरेन चेन ने बच्चों का धर्मांतरण कराने वाली दो महिलाओं का बचाव करते हुए कहा, “यह एक हेट क्राइम है।” उन्होंने ये स्वीकार किया कि महिलाएँ ईसाई मिशनरी हैं।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

लॉरेन चेन ने ये भी लिखा कि गैर-ईसाइयों को केवल ईसाई धर्म स्वीकार करना चाहिए और उन्हें अपने संबंधित आस्था एवं विश्वासों को त्यागना कर ‘यीशु’ का स्वागत करना चाहिए।

ट्वीट का स्क्रीनशॉट

अगले ट्वीट में लॉरेन ने कहा, “ऐसी जगहें जहाँ लोग यीशु को नहीं मानते, ऐसी जगहें यीशु के बारे में बात करने के लिए सबसे अच्छी जगह हैं।” उन्होंने यहूदी आस्था को ‘झूठा’ भी कहा और सुझाव दिया कि उन्हें ईसाई धर्म अपना लेना चाहिए।

लॉरेन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इस मुद्दे पर लॉरेन के पोस्ट की लोगों ने तीखी आलोचना की है।

लॉरेन का लोगों ने विरोध भी किया।

डेविड कोहेन ने उठाया ईसाइयों द्वारा हिंदुओं के जबरन धर्म परिवर्तन का मुद्दा

इस विवाद में निर्देशक और निर्माता डेविड कोहेन भी कूद पड़े। उन्होंने लॉरेन के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि ईसाई भारत में रहने वाले हिंदुओं तक का धर्मांतरण कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यदि यहूदियों, हिंदुओं आदि को यह बताना कि उनका विश्वास झूठा है और उन्हें धर्म परिवर्तन करना चाहिए, ये प्यार दिखाने का आपका तरीका है तो अपने प्यार को छोड़ दें और इसकी जगह हमारे साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करना सीखें। हमें आप जैसे धर्म परिवर्तन करने वालों से बचने की जरूरत है।”

मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में सिद्धि सोमानी द्वारा लिखी गई है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं।

तमिलनाडु के मंदिरों में महिला पुजारियों की नियुक्ति द्रविड़ियन नहीं, सनातनी मॉडल है मिस्टर MK स्टालिन

तमिलनाडु के मंदिरों में तीन महिला पुजारियों की नियुक्ति की गई है। इस नियुक्ति के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने बृहस्पतिवार (14 सितंबर 2023) को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अब महिलाएँ मंदिरों में पुजारियों की भूमिका निभाएँगी, जो द्रविड़ियन मॉडल का उत्तम उदाहरण है। स्टालिन ने दावा किया कि ऐसा करके ‘उन्होंने’ पेरियार के ‘दिल का काँटा’ निकाल दिया है। हालाँकि, ये सच नहीं है क्योंकि मिस्टर स्टालिन जो कुछ भी कह रहे हैं, वो तथ्यात्मक रूप से न सिर्फ गलत है, बल्कि इतिहास के साथ ही वर्तमान से भी छेड़छाड़ है।

सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि स्टालिन ने दावा क्या किया है। दरअसल, तीन महिलाओं ने श्रीरंगम के तिरुचिरापल्ली में श्री रंगनाथर मंदिर द्वारा संचालित अर्चाकर (पुजारी) प्रशिक्षण स्कूल में प्रशिक्षण पूरा किया है। उन्हें सरकार की तरफ से सर्टिफिकेट और नियुक्ति पत्र मिला है। इसके बाद स्टालिन ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट किया, “पायलट और अंतरिक्ष यात्री के तौर पर महिलाओं की उपलब्धियों के बावजूद, उनके मंदिर के पुजारी की पवित्र भूमिका निभाने पर रोक थी।”

स्टालिन ने आगे कहा, “उन्हें (महिलाओं को) अपवित्र माना गया है। यहाँ तक कि देवी मंदिरों में भी। लेकिन, अंततः परिवर्तन हुआ। तमिलनाडु में हमारी द्रविड़ मॉडल सरकार ने सभी जातियों के लोगों को पुजारी के रूप में नियुक्त करके थानथाई पेरियार के दिल से काँटा निकाल दिया है। महिलाएँ अब गर्भगृह में कदम रख रही हैं। इससे समावेशी और समानता का एक नया युग आ रहा है।”

दरअसल, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन उस बारे में बात कर रहे हैं, जिसमें ‘पेरियार’ ईवी रामासामी ने एक बार गैर-ब्राह्मणों को मंदिरों में पुजारी की भूमिका निभाने की अनुमति न दिये जाने को अपने दिल में ‘काँटा’ बताया था। पेरियार ने कहा था कि मंदिरों में सभी जाति के लोगों को पुजारी बनाना चाहिए।

एमके स्टालिन की मानें तो महिलाओं को पुजारी के तौर पर नियुक्त नहीं किया जा सकता, क्योंकि सनातन परंपरा ऐसी ही है। हालाँकि, स्टालिन की बात पूर्ण रूप से असत्य है। वर्तमान समय में ही पूरे देश के अलग-अलग जगहों पर महिला पुजारी हैं और वह ईश्वर की आराधना भी कर रही हैं। हम कुछ ऐसे ही मंदिरों के बारे में आपको बता रहे हैं।

बिहार के दरभंगा का अहिल्या मंदिर

इस लिस्ट में पहला नाम दरभंगा स्थित अहिल्या मंदिर का है। दरभंगा से 26 किलोमीटर दूर कमतौल में स्थित अहिल्या माता के इस मंदिर की मुख्य पुजारी अवंतिका मिश्रा हैं। इस मंदिर की परंपरा ही है कि यहाँ कोई पुरुष पुजारी हो ही नहीं सकता, क्योंकि माता अहिल्या को छूने की अनुमति किसी पुरुष को नहीं है।

यह मंदिर न सिर्फ बहुत पुराना है, बल्कि सनातन परंपरा के अनुसार त्रेता युग और भगवान राम से भी जुड़ा है। इस पुरुष सिर्फ दूर से दर्शन कर सकते हैं।

उत्तराखंड के चमोली में स्थित फ्यूंला नारायण मंदिर

उत्‍तराखंड के चमोली-गढ़वाल जिले में स्थित फ्यूंला नारायण मंदिर में पुरुषों का प्रवेश वर्जित है। यहाँ महिलाएँ ही भगवान की पूजा करती हैं और शृंगार करती हैं। हर साल सावन माह की संक्रांति पर मंदिर के कपाट खुलते हैं और डेढ़ माह बाद नंदा अष्टमी के दिन बंद हो जाते हैं। इस पूरे डेढ़ माह सिर्फ महिला पुजारी ही भगवान का शृंगार करती हैं।

पंढरपुर के विट्‌ठल-रुक्मिणी मंदिर

महाराष्ट्र के पुणे स्थित 900 साल पुराने पंढरपुर के विट्‌ठल -रुक्मिणी मंदिर में महिला पुजारी की नियुक्ति होती है। पारंपरिक तौर पर इस मंदिर में ब्राह्मण परिवार ही पुजारी बनते रहे हैं, लेकिन अब महिला पुजारी की भी नियुक्ति हो चुकी है। पिछले 9 वर्ष से अधिक समय से विट्ठल-रुक्मिणी मंदिर में महिला पुजारी अपनी जिम्मेदारी संभाल रही हैं।

जैसलमेर के लोकदेवता क्षेत्रपाल (खेतपाल) का मंदिर में दलित महिाल पुजारी

राजस्थान के जैसलमेर शहर से 6 किमी दूर बड़ाबाग में स्थित लोकदेवता खेतपाल जी के मंदिर में माली जाति की महिला पुजारी ही पूजा करा सकती हैं। ये परंपरा के साथ जुड़ा है। इस मंदिर की खासियत ये है कि यहाँ सिर्फ जोड़े ही पूजा कर सकते हैं। सभी रस्में भी सिर्फ माली समाज की महिला पुजारी ही कराती हैं। ये मंदिर एक हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है।

महोबा के विंदेश्वरी मंदिर में दलित महिला पुजारी

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में विंदेश्वरी (विंध्यवासिनी) मंदिर है। चरखारी स्थित इस देवी मंदिर में दलित महिला पुजारी पार्वती ही पूजा-पाठ कराती रही हैं। 30 वर्षों से वो पूजा कराती हैं। इससे पहले उनके ससुर इस मंदिर में पुजारी थे। उन्हीं विंध्यवासिनी का मुख्य धाम विंध्यांचल (मिर्जापुर) मंदिर में है, जो कई राज्यों में फैली आबादी की कुलदेवी भी हैं।

ओडिशा की माँ पंचुबरही मंदिर में दलित महिला पुजारी

ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में माँ पंचुबरही का सदियों पुराना प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर में पुजारी होने की शर्त ही है कि महिला दलित होगी। यहाँ पाँच शताब्दियों से, काले ग्रेनाइट में तराशी गई पाँच देवियों की पूजा होती है। ये मंदिर बागपतिया में स्थित है, जहाँ के स्थानीय लोग ही दलित महिला पुजारियों को अनाज, सब्जियाँ और फल आदि देते हैं।

दावा करना ही काफी नहीं, तथ्यों की जाँच-परख भी जरूरी

तो मिस्टर एमके स्टालिन, हमने महज कुछ ही मंदिरों के नाम और उनके पुजारियों के बारे में बताया है। इन मंदिरों में न सिर्फ महिला पुजारी हैं, बल्कि दलित महिला पुजारी भी अपना काम संभाल रही हैं। ऐसे में मिस्टर स्टालिन, आपका ये दावा कि सनातन मंदिरों में महिला पुजारी नहीं हैं, ये बिल्कुल गलत है।

इसके साथ ही आपका ये दावा भी कि तमिलनाडु में तीन महिला पुजारियों की नियुक्ति से द्रविड़ियन परंपरा जुड़ी है और ऐसा पहली बार है तो ये भी गलत है। मैं आपसे यही निवेदन करूँगा कि समाज को बाँटने वाला कोई भी दावा करने से पहले तथ्यों की जाँच और पड़ताल जरूर कर लें।

क्या है द्रविड़ियन मॉडल?

द्रविड़ियन मॉडल एक सामाजिक और राजनीतिक सिद्धांत है, जो तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों में शुरू हुआ। इस सिद्धांत के अनुसार, द्रविड़ लोग भारत के मूल निवासी हैं, जबकि आर्य लोग बाहरी आक्रमणकारी हैं। द्रविड़ियन मॉडल के अनुसार, आर्य लोग ही भारत में जाति व्यवस्था लेकर आए।

इसके अनुसार, इस व्यवस्था में महिलाओं को हीन माना जाता है, इसलिए उन्हें मंदिरों में प्रवेश और पूजा की अनुमति नहीं थी। हालाँकि, इतिहास के प्रमाण बताते हैं कि तमिलनाडु के मंदिरों में महिला पुजारियों की नियुक्ति सदियों से चली आ रही है। उदाहरण के लिए, 11वीं शताब्दी में लिखे ग्रंथ में भी महिला पुजारी का उल्लेख है। ऐसे में सनातन परंपरा पर लगाए गए आरोप निरर्थक ही मालूम पड़ते हैं।

दावा गलत, लेकिन महिला पुजारियों की नियुक्ति का स्वागत

तमाम उदाहरणों के साथ, मेरा मानना है कि तमिलनाडु के मंदिरों में महिला पुजारियों की नियुक्ति द्रविड़ियन नहीं, बल्कि सनातनी मॉडल का हिस्सा है। इसका उदाहरण हम कई मंदिरों से दे ही चुके हैं। सनातन मॉडल के हिसाब से सभी लोग, चाहे वो किसी भी लिंग या जाति के हों, को धर्म का पालन करने का अधिकार है।

हालाँकि, हम मानते हैं कि तमिलनाडु के मंदिरों में महिला पुजारियों की नियुक्ति एक प्रगतिशील कदम है। यह कदम महिलाओं के अधिकारों और समानता को बढ़ावा देता है। ऐसे में मैं इसका तहेदिल से स्वागत भी करता हूँ।

बेटे ने कही थी सनातन को जड़ से खत्म करने की बात

यहाँ ये भी बता देना आवश्यक समझता हूँ कि एमके स्टालिन के मंत्री बेटे उदयनिधि स्टालिन ने कुछ दिनों पहले सनातन धर्म की तुलना डेंगू-मलेरिया से करते हुए इसके संपूर्ण नाश की बात कही थी। सीएम स्टालिन ने इस मामले में अपने बेटे उदयनिधि का बचाव भी किया था।

उदयनिधि ने कहा था, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

यहाँ बताना जरूरी है कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के पिता करुणानिधि भी हिंदी और हिंदुत्व विरोध की राजनीति करते रहे हैं। इतना ही नहीं, इनकी राजनीतिक चेतना के प्रमुख केंद्र पेरियार हिंदू धर्म के खिलाफ पूरा जीवन जहर उगलते रहे हैं।

‘पूछताछ के लिए हिरासत की जरूरत नहीं’: राज्य पुलिस से बोला कर्नाटक हाईकोर्ट- सुधीर चौधरी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई ना करें

स्वावलंबी सारथी योजना में कर्नाटक सरकार के झूठ को उजागर करने के बाद राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा टीवी एंकर सुधीर चौधरी दर्ज कराए गए मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुनवाई की। उच्च न्यायालय ने शुक्रवार (15 सितंबर 2023) की सुनवाई में एंकर के खिलाफ कठोर कार्रवाई पर रोक लगाते हुए उन्हें बड़ी राहत दी है।

हाईकोर्ट के न्यायधीश हेमंत चंदनगौदर ने कहा कि इस मामले पर वह अगले बुधवार (20 सितंबर 2023) को याचिका पर फैसला करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इस बीच पुलिस सुधीर चौधरी के खिलाफ कोई भी कठोर कदम न उठाया जाए। कोर्ट ने माना कि एंकर को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सभी जानकारी पब्लिक डोमेन में है।

हालाँकि, न्यायाधीश ने मौखिक रूप से कहा कि प्रथम दृष्ट्या सुधीर चौधरी के खिलाफ मामला बनता है, लेकिन वे इस पर बुधवार को निर्णय लेंगे। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में आगे कहा कि सुधीर चौधरी की न्यूज रिपोर्ट में किसी धर्म के खिलाफ नफरत को बढ़ावा दिया गया है या नहीं, इसकी जाँच की जा सकती है।

दरअसल, कर्नाटक सरकार की स्वावलंबी सारथी योजना को लेकर पत्रकार सुधीर चौधरी ने 12 सितंबर 2023 को आजतक पर एक शो किया था। इसमें उन्होंने योजना के बारे में बताया था कि कैसे इसे हिंदुओं के लिए नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों के लिए लागू किया जा रहा है। चौधरी ने अंबेडकर विकास निगम के प्रमुख पी नागेश के हवाले से कहा था कि यह योजना अभी सिर्फ अल्पसंख्यकों के लिए लागू है।

हालाँकि, नागेश का हवाला देते हुए ही एंकर ने यह भी कहा था कि इसे SC-ST समुदायों के लिए शुरू करने पर चर्चा चल रही है। शो का वीडियो सामने आते ही कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे ने ट्वीट किया कि सुधीर चौधरी गलत सूचना फैला रहे हैं और वह एंकर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। इसके बाद सुधीर चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया गया।

एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 505 (सार्वजनिक शरारत के लिए उकसाने वाले बयान) के तहत दर्ज की गई थी। इसे कर्नाटक राज्य अल्पसंख्यक विकास निगम लिमिटेड (KSMDC) के प्रशासनिक अधिकारी

हाईकोर्ट में सुधीर चौधरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता उदय होल्ला ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपने साथ होने वाले भेदभाव के बारे में बोलता है तो क्या इसे घृणास्पद भाषण कहा जा सकता है। इस पर न्यायाधीश ने पूछा कि क्या यह योजना सभी के लिए उपलब्ध है तो होल्ला ने बताया कि यह केवल अल्पसंख्यकों के लिए ही लागू है।

अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले के खिलाफ चौधरी की याचिका में कहा गया है कि लोकतंत्र में प्रेस और मीडिया को तत्कालीन सरकार से सवाल करने का अधिकार है। मीडिया द्वारा सरकार के खिलाफ सवाल उठाने पर आपराधिक मामले दर्ज हो रहे हैं और प्रेस की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है।

इस पर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने कहा, “मीडिया की भूमिका जानकारी देने है, लेकिन यह जानकारी देने का ये तरीका नहीं है। आम आदमी के मन में अल्पसंख्यकों के प्रति नफरत पैदा हो सकती है। वह कह सकता है कि उन्हें दिया गया है, मुझे नहीं।”