Home Blog Page 1535

शहवाज और अरबाज ने दुपट्टा खींचा, फैसल ने बाइक से कुचल दिया… स्कूल से घर लौट रही छात्रा की मौत, CCTV में कैद हुई घटना

उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर में छेड़खानी के कारण एक लड़की की मौत हो गई। मृतक छात्रा शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) की शाम साइकिल से स्कूल से घर लौट रही थी। इसी दौरान बाइक सवार शहवाज और अरबाज नामक युवकों ने उसका दुपट्टा खींच दिया। इससे वह गिर गई। इसी दौरान पीछे से आ रहे फैसल ने लड़की को बाइक से कुचल दिया। इससे उसकी जान चली गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला अंबेडकर नगर जिले के हँसवर थाना के हीरापुर बाजार क्षेत्र का है। यहाँ के रामराजी इंटर कॉलेज में 12वीं में पढ़ने वाली 17 वर्षीय लड़की स्कूल खत्म होने के बाद रोज की तरह घर लौट रही थी। इसी दौरान शहवाज और अरबाज उसका पीछा करते हुए आए और उसका दुपट्टा खींच दिया। लड़की साइकिल पर थी। इसलिए उसका संतुलन बिगड़ा और वह बीच सड़क में जा गिरी।

इसी बीच फैसल नामक बाइक सवार भी वहाँ से गुजर रहा था। लड़की के गिरते ही फैसल भी पीछे से आ गया और उस पर बाइक चढ़ा दी। इससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। सूचना पाकर लड़की के परिजन भी मौके पर पहुँचे और आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया। वहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह पूरी घटना पास में लगे एक सीसीटीवी में कैद हो गई। इसका फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

इस मामले में मृतक लड़की के पिता का कहना है कि छेड़खानी के चलते हुई सड़क दुर्घटना में उनकी बेटी का सिर और जबड़ा फट गया था। इससे ही उसकी मौत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बेटी ने उनसे कुछ लड़कों द्वारा परेशान और छेड़छाड़ करने की बात कही थी। छेड़छाड़ करने वाले लड़के शहवाज और अरबाज हैं।

पीड़ित परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने शहवाज, अरबाज और फैसल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करते हुए तीनों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का कहना है कि तीनों आरोपितों से पूछताछ कर जाँच की जा रही। घटना में प्रयुक्त बाइक जब्त की गई है। 

केदारनाथ में धरने पर बैठे पुरोहित, स्थानीय लोग और होटल-लॉज मालिक भी साथ: कहा – अब तक नहीं मिले घर और जमीन, 2013 की आपदा में सब हो गया था तबाह

उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में पुरोहितों और स्थानीय लोगों ने अपनी माँगों को लेकर अपनी दुकानें बंद कर दी हैं और धरने पर बैठ गए हैं। ये लोग वर्ष 2013 में आई आपदा के बाद उठाए गए क़दमों को लेकर संतुष्ट नहीं है। इस विरोध प्रदर्शन में पुरोहितों के साथ स्थानीय लोग, दुकानदार और होटल तथा लॉज मालिक भी शामिल हैं।

यह सभी सरकार से माँग कर रहे हैं कि उनके जो भवन 2013 की आपदा में बहे थे, उनके स्थान पर बनाए गए भवनों का कब्जा उन्हें दिया जाए और जमीन का अधिकार भी दिया जाए। इन लोगों को आपदा के 10 वर्षों के बाद भी जमीन का अधिकार नहीं मिल पाया है। इसके अतिरिक्त, केदारनाथ के पुरोहितों ने परिसर में चल रहे विकास कार्यों के विषय में भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

इस बंद के कारण केदारनाथ आने वाले श्रद्धालुओं को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। लॉज और होटल बंद होने से रुकने का स्थान भी नहीं मिल रहा है जबकि भोजन की भी समस्या हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आपदा में बहे भवनों पर भूमिधारी अधिकार के तहत उनको भवन मिलने चाहिए थे।

विरोध प्रदर्शन करते पुरोहित एवं समाज के अन्य लोग केदारनाथ
विरोध प्रदर्शन करते पुरोहित एवं समाज के अन्य लोग

इसके अतिरिक्त उनका कहना है कि जो भवन बच गए थे वह भी तोड़े जा रहे हैं। इन लोगों ने यह भी शिकायत की है कि धाम में चलने वाले कामों में उनकी कोई राय नहीं ली जा रही है और नए बनने वाले भवनों को मंदिर की ऊँचाई से अधिक बनाया जा रहा है जो कि परम्परा के विरुद्ध है।

केदारनाथ में आई 2013 की आपदा

वर्ष 2013 में उत्तराखंड के केदारनाथ, बद्रीनाथ समेत एक बड़े इलाके में भारी आपदा आई थी। एकाएक आई बाढ़ और भारी बारिश के कारण बड़ी संख्या में श्रृद्धालु फँस गए थे जबकि बड़ी संख्या में लापता हो गए थे। केदारनाथ मंदिर परिसर के पास एक शिला आ जाने से मंदिर को नुकसान नहीं पहुँचा था, लेकिन आसपास की सभी दुकानें और भवन बह गए थे। इस आपदा में हजारों व्यक्तियों की मृत्यु भी हो गई थी।

कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश के बाद झुकी कॉन्ग्रेस सरकार: ईदगाह मैदान में गणेश प्रतिमा स्थापित करने की मिली अनुमति, मुस्लिम संगठनों ने किया था विरोध

कर्नाटक की हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका के आयुक्त ईश्वर उल्लागड़ी ने ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी के कार्यक्रमों के आयोजन और गणेश मूर्ति स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इसके लिए कर्नाटक हाईकोर्ट ने महानगरपालिका को निर्देश दिया था। गणेश चतुर्थी आयोजन की अनुमति देने पर अंजुमन-ए-इस्लाम ने आपत्ति जताई थी।

कर्नाटक के प्रमुख शहर हुबली-धारवाड़ में हिन्दुओं ने ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी से सम्बंधित कार्यक्रम करने की अनुमति माँगी थी। इसकी अनुमति देने को लेकर महानगरपालिका के मेयर और सदस्यों ने 31 अगस्त 2023 को ही प्रस्ताव पारित किया गया था। हालाँकि, इसकी आधिकारिक अनुमति आयुक्त द्वारा दी जानी थी।

आयुक्त द्वारा अनुमति देने में देरी होने के पीछे नगरपालिका के आयुक्त ईश्वर उल्लागड़ी पर कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के दबाव के आरोप लग रहे थे। इसके विरोध में भाजपा के स्थानीय नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया था और धरने पर बैठ गए थे।

भाजपा नेताओं का कहना है कि आयुक्त द्वारा अनुमति मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति के चलते रोकी जा रही है। भाजपा विधायक महेश तेंगिन्कई ने आयुक्त के इस रवैये का विरोध करते हुए कहा था कि ईदगाह की जमीन महानगरपालिका की ही है।

बीते वर्ष हुबली के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी पंडाल में केन्द्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी भी शामिल हुए थे
बीते वर्ष हुबली के ईदगाह मैदान में गणेश चतुर्थी पंडाल में केन्द्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी भी शामिल हुए थे (चित्र साभार: द टेलीग्राफ)

वहीं आयुक्त ईश्वर उल्लागड़ी ने कहा था कि वह अनुमति देने से पहले अन्य तथ्यों पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा था कि कानून व्यवस्था सम्बंधित राय के लिए पुलिस कमिश्नर से बात करेंगे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सिर्फ इस आधार पर अनुमति नहीं देने का विरोध किया था और आयुक्त दफ्तर के बाहर धरने पर बैठ गए थे।

हिन्दू कार्यकर्ताओं ने ईदगाह मैदान में गणेश मूर्ति लगाकर 11 दिनों तक कार्यक्रम के आयोजन करने की अनुमति की माँग की थी। महानगरपालिका की अनुमति के विरोध में अंजुमन-ए-इस्लाम नाम के मुस्लिम संगठन ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका देकर निर्णय रद्द करने का आग्रह किया था। हालाँकि, कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट का आदेश आने के बाद महानगरपालिका के आयुक्त ईश्वर उल्लागड़ी ने अनुमति पत्र आयोजन करने वाले मंडल के सदस्यों को सौंप दिया। हालाँकि, आयोजन की अनुमति मात्र तीन दिनों के लिए ही दी गई है। ईदगाह मैदान को लेकर लम्बे समय से विवाद होता आया है। अंजुमन इस्लाम इस जमीन पर 999 वर्षों के लीज का दावा करती है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यहाँ 1992 में भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद ने तिरंगा लहराने के प्रयास किए थे। अंजुमन-ए-इस्लाम ने इस आपत्ति जताई थी। उस दौरान राज्य में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और उसने इसकी अनुमति नहीं दी थी। वर्ष 1994 में भी कर्नाटक सरकार ने भाजपा नेता उमा भारती को तिरंगा लहराने से रोकने के लिए शहर में कर्फ्यू लगा दिया था। इसके बाद हुए दंगों में कई मृत्यु हुई थी।

अंजुमन-ए-इस्लाम का कहना है कि उसे वर्ष 1921 में इस मैदान की 999 सालों की लीज मिली थी, परन्तु 2010 में कर्नाटक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इस जमीन का मालिक हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका को माना था और अंजुमन का मालिकाना हक खत्म कर दिया था। तब से इसका उपयोग पार्किंग और बाजार लगाने के लिए किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें: जिस ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने पर कॉन्ग्रेस सरकार ने बहाया था खून, वहाँ अब होगा गणेश उत्सव: BJP शासित महानगरपालिका ने दी अनुमति, कॉन्ग्रेस-AIMIM ने किया विरोध

अरबी पढ़ाने के नाम पर आतंक की ट्रेनिंग, 30 ठिकानों पर NIA की छापेमारी: तमिलनाडु, तेलंगाना में ISIS के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, DMK पार्षद के पति से भी पूछताछ

भारत के दक्षिण क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (ISIS) के ट्रेनिंग सेंटरों का पर्दाफाश राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) कर रही है। इसके तहत एनआईए ने शनिवार (16 सितंबर, 2023) की सुबह तमिलनाडु और तेलंगाना में लगभग 30 संदिग्ध आईएसआईएस सेंटर्स पर छापेमारी शुरू की।

ISIS कट्टरपंथ और भर्ती मामले में एनआईए ने तमिलनाडु के कोयंबटूर में 21, चेन्नई में 3, तेनकासी में 1, तेलंगाना में हैदराबाद/साइबराबाद में 5 जगहों पर छापेमारी की।

बीते साल कोयंबटूर में कार बम धमाका हुआ था। इस मामले में ISIS मॉड्यूल के ताजा सबूत मिलने के बाद इससे जुड़े लोगों की अचल संपत्तियों पर NIA ये छापेमारी कर रही है। इसका संबंध कोयंबटूर के संदिग्धों से हो सकता है। गौरतलब है कि देश के दक्षिणी राज्यों में ISIS और उसके कारिदें युवाओं को अपने जाल में फँसा कट्टर इस्लामिक आतंकवाद के लिए हथियार बना रहे हैं। बीते साल कोयंबटूर में कार बम धमाका कर इन्होंने दहशत फैलाने की कोशिश की थी। NIA अब इन आतंकियों पर शिकंजा कस रही है।

भारतीय और विदेशी मुद्रा सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त

तमिलनाडु के कोयंबटूर में, एनआईए की तलाशी कोवई अरबी कॉलेज के आसपास केंद्रित रही। कॉलेज में पढ़ाई करने वालों और इससे जुड़े लोगों के घर एनआईए की जाँच के दायरे में आ गए हैं। कोयंबटूर निगम डीएमके पार्षद के पति से भी पूछताछ की गई। हालाँकि, एनआईए के अधिकारी पूछताछ के बाद कुछ ही घंटों में पार्षद के घर से चले गए।

NIA ने इस छापेमारी में भारतीय और विदेशी मुद्रा के नोटों सहित कई डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त किए। एनआईए के सूत्रों मुताबिक, “तलाशी के दौरान भारतीय मुद्रा में 60 लाख रुपए और 18,200 अमेरिकी डॉलर के अलावा स्थानीय और अरबी भाषाओं में कई आपत्तिजनक किताबें भी जब्त की गईं।” यह मामला “भोले-भाले युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए कुछ लोगों के एक समूह के गुप्त अभियान से जुड़ा है।

अरबी भाषा क्लास के बहाने कट्टरपंथ की पढ़ाई

एनआईए के अधिकारियों ने कहा, “उनके क्षेत्रीय अध्ययन केंद्रों में अरबी भाषा की कक्षाएँ आयोजित करने की आड़ में कट्टरपंथी गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। इस तरह की कट्टरपंथी गतिविधियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप्प और टेलीग्राम जैसे मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए से ऑनलाइन प्रसारित किया जा रहा था।

एनआईए की जाँच से पता चला है कि आईएसआईएस से प्रेरित एजेंट खिलाफत विचारधारा का प्रचार कर रहे थे। ये विचारधारा भारत के धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के संवैधानिक रूप से स्थापित सिद्धांतों के लिए हानिकारक है।

एनआईए के एक अधिकारी के मुताबिक, “मामले में शामिल लोगों ने युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और भर्ती करने की साजिश रची थी, जो बाद में आतंकवादी और गैर-कानूनी कामों और गतिविधियों में शामिल पाए गए। ऐसा ही एक आतंकी हमला अक्टूबर 2022 के कोयंबटूर कार बम विस्फोट से जुड़ा है।”

प्राचीन मंदिर के सामने आतंकियों ने किया था बम धमाका

एनआईए ने सितबंर की शुरुआत में कोयंबटूर के आईएसआईएस से प्रेरित 2022 के कार आईईडी बम विस्फोट आतंकी हमले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया था। इसकी पहचान मोहम्मद अजरुद्दीन उर्फ अजर तौर पर हुई। वह इस मामले में गिरफ्तार होने वाला 13वां शख्स था। एनआईए ने 27 अक्टूबर 2022 को मामला अपने हाथ में लिया और फिर से मामला दर्ज किया।

बीते साल ये धमाका कोयंबटूर के उक्कदम में ईश्वरन कोविल स्ट्रीट पर एक प्राचीन मंदिर अरुल्मिगु कोट्टई संगमेश्वर थिरुकोविल के सामने 23 अक्टूबर को हुआ था। कार में मौजूद इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस को मृतक आरोपी जेम्सा मुबीन चला रहा था।

मुबीन और उसके सहयोगी ने स्वयंभू खलीफा अबू-अल-हसन अल-हाशिमी अल-कुरैशी के लिए ‘बायथ’ या शपथ ली थी। इसके बाद से ही वो साजिश रचने और आतंकी कामों अंजाम देने के लिए कट्टर ISIS विचारधारा के हिसाब से काम कर रहे थे। एनआईए की जाँच के मुताबिक, आरोपितों का इरादा इस आतंकी हमले के जरिए ‘काफिरों (इस्लाम को न मानने वाले) से बदला’ लेने का था।

एनआईए ने अब तक इस मामले में एनआईए कोर्ट, पूनामल्ली, चेन्नई में दो आरोपपत्र दायर किए हैं। इस साल 20 अप्रैल को छह आरोपितों और इसी साल 2 जून को 5 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया गया था। 12वें आरोपी मोहम्मद इदरीस को इसी साल 2 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था।

सिख परिवार में जन्म, अब करती हैं येशु-येशु: जानिए कौन है अभिनेत्री सोनम बाजवा, कहती है – येशु ने मेरा दिल चुरा लिया, ईसाई मजहब को करती हूँ फॉलो

पंजाबी फिल्मों की अभिनेत्री सोनम बाजवा सोशल मीडिया एक्स पर ट्रेंड कर रही हैं। हालाँकि, वह पंजाबी इंडस्ट्री और सोशल मीडिया अपनी बोल्ड तस्वीरों और अदाओं से पहले से ही काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर उनकी चर्चा का कारण उनका ईसाई होना बताया जा रहा है। एक्स पर ऐसे कई पोस्ट हैं जिनमें उनके क्रिप्टो क्रिश्चियन होने का दावा किया जा रहा है। 

सोशल मीडिया एक्स पर उज्जल राय ने लिखा, “यह सोनम बाजवा है। वह एक क्रिप्टो ईसाई है। उसके पुराने पोस्ट देखें, यीशु के बारे में सैकड़ों पोस्ट हैं। हमें ऐसे नए धर्मान्तरित ईसाइयों के प्रति जागरूक होना होगा।”

दरअसल, सोनम बाजवा के कई पुराने पोस्ट वायरल हो रहे हैं। जिसमें वह जीसस के प्रति अपना प्रेम जाहिर कर रही हैं। एक पोस्ट में कहती है, “मैं ईसाई मजहब को फॉलो करती हूँ लेकिन मैं ईसाई नहीं हूँ। मेरा उनसे एक खास रिश्ता है न कि मजहब से।”

पैनफैक्ट नाम के एक्स हैंडल ने एक साथ उनके कई पुराने पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “”सोनम बाजवा – यीशु ने मेरा दिल चुरा लिया, मैं यीशु का ऋणी हूँ। ऐसा माना जाता है कि उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया था। सोनम बाजवा (सोनमप्रीत कौर बाजवा) का जन्म उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक सिख परिवार में हुआ था लेकिन उनकी ईसा मसीह पर गहरी आस्था है।”

वहीं स्क्विंट निऑन नाम के एक्स हैंडल ने कई तस्वीरें शेयर करते हुए पोस्ट किया, “सोनम बाजवा फाइल्स: वह पादरी अंकित सजवान को अपना आध्यात्मिक पिता मानती हैं। अंकित सजवान वही “बोलने लगी” वाला पादरी हैं जिनके खिलाफ एफआईआर हुई थी। फिर भी उसने दिल्ली के सीएम केजरीवाल से मुलाकात की और बड़े पैमाने पर लोगों का धर्म परिवर्तन कराने के लिए पूरा तालकटोरा स्टेडियम बुक कर लिया।”

इसके अलावा भी सोशल मीडिया पर कई पोस्ट लोग शेयर करते हुए उनके क्रिश्चियन होने का दावा कर रहे हैं। कुमार नाम के हैंडल ने पोस्ट किया, “राइस बैग का एक और कमाल!” साथ में उन्होंने सोनम के कई पुराने पोस्ट को साझा किया है।

सोशल मीडिया पर लोग सोनम बाजवा को ट्रोल कर रहे हैं जिसे आप नीचे दिए गए पोस्ट में देख सकते हैं।

कौन है सोनम बाजवा 

सोनम बाजवा पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ा नाम है। पंजाबी फिल्मों के लिए सोनम सबसे ज्यादा रकम लेने वाली अभिनेत्रियों में शुमार है। मूल रूप से उत्तराखंड की रहने वाली अभिनेत्री सोनम बाजवा का जन्म 16 अगस्त, 1989 को उत्तराखंड के नानकमत्ता में एक सिख परिवार में हुआ था। उस वक्त ऊधमसिंह नगर नैनीताल जिले का हिस्सा था। सोनम की शुरूआती शिक्षा रुद्रपुर में हुई है। वहीं स्कूली पढ़ाई के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करते हुए मॉडलिंग स्टार्ट कर दिया था। हालाँकि, उनका परिवार ऑस्ट्रेलिया में रहता है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,अभिनेत्री सोनम बाजवा के पिता एक शिक्षक और उनकी माता रितु बाजवा भी एक अध्यापिका है और इसके साथ ही उनके जुड़वा भाई का नाम जयदीप बाजवा है। सोनम ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत साल 2013 के दौरान फिल्म ‘बेस्ट ऑफ लक’ से की। इस फिल्म में उन्होंने गाँव की मासूम छोरी बनकर हर किसी का दिल जीत लिया था। इसके बाद उन्होंने 2014 में ‘पंजाब 1984’ फिल्म में दिलजीत दोसांझ के साथ डेब्यू किया था। पंजाबी फिल्मों के साथ ही सोनम तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी डेब्यू कर चुकी हैं।

गौरतलब है कि सोनम जल्द ही दिलजीत दोसांझ के साथ अपनी नई फिल्म रन्ना च धन्ना में दिखने वाली हैं। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ, शहनाज गिल और सोनम बाजवा हैं। इससे पहले साल 2021 में रिलीज हुई फिल्म ‘हौसला रख’ में भी ये तीनों सितारे एक साथ नजर आए थे।

छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान, माँ सीता को अपशब्द… महाराष्ट्र के सतारा में यूँ ही नहीं हुआ था बवाल, हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान ‘ईशनिंदा’ नहीं?

(यह लेख किसी भी तरह की हिंसा को सही ठहराने या बढ़ावा देने के लिए नहीं है। यह केवल उन तथ्यों को बताने के लिए है कि महाराष्ट्र के सतारा जिले में हाल ही में हुई हिंसा की वजह क्या थी)

महाराष्ट्र में सतारा जिले के पुसेसावली गाँव में हुई हिंसा से क्षेत्र में दहशत फैल गई है और कानून-व्यवस्था के हालात बिगड़ गए हैं। यह हिंसा 10 सितंबर 2023 की रात को शुरू हुई और अगले दिन भी जारी रही। इस दौरान गुस्साई भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने कई स्थानीय लोगों की दुकानों और घरों में आग लगा दी थी।

भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने लगभग 16-17 लोगों को चोटें पहुँचाई हैं। पुलिस ने घटना का संज्ञान लेकर 28 नामजद और 100 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज किया है। इस मामले में कुल चार मुकदमे दायर किए गए हैं, जिनकी प्रतियाँ ऑपइंडिया को मिली हैं। यहाँ हम आपको यहाँ बताने जा रहे है कि इसकी असली वजह क्या थी?

हिंसा किस वजह से भड़की?

मीडिया में आई कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रविवार 10 सितंबर को पुसेसावली गाँव में हिंसा के दौरान और उसके बाद क्या हुआ। हम इस रिपोर्ट में बताएँगे कि उस क्षेत्र में पहली बार हिंसा किस वजह से शुरू हुई, जिसकी वजह से अल्पसंख्यक समुदाय के एक शख्स की मौत हो गई। सतारा के डीएसपी ने ऑपइंडिया से इस बात की पुष्टि की है।

फोटो खास तौर पर ऑपइंडिया ने प्राप्त की है

ऐसा कहा जा रहा है कि ये सब 18 अगस्त को शुरू हुआ। सतारा के औंध पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 295 ए (जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य, किसी के धार्मिक विश्वासों का अपमान करके उसकी धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने का इरादा) के तहत एक शिकायत दर्ज की गई थी।

इस शिकायत में जिक्र किया गया कि पुसेसावली के आदिल बागवान और एक अन्य शख्स, जिसका इंस्टाग्राम आईडी ‘officialsaffu80’ है, ने सोशल मीडिया पर भगवान राम और देवी सीता के बारे में अपमानजनक टिप्पणियाँ पोस्ट की थीं।

ऑप इंडिया की प्राप्त की गई एफआईआर की कॉपी

इसमें देवी सीता को गलत बताते हुए और रावण द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार करने की बात कहते हुए उन पर अपमानजनक टिप्पणी की गई थी। यह टिप्पणी मोटे तौर पर हिंदी में ‘यह सनातन धर्म की पहचान है’ पढ़ी गई। इस टिप्पणी से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हुई थीं और सनातन धर्म का अपमान हुआ था।

स्थानीय हिंदुओं ने इस घटना का संज्ञान लिया और पुसेसावली के आदिल और इंस्टाग्राम अकाउंट आईडी ‘officialsaffu80’ वाले एक अन्य शख्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। शिकायत में साफ जिक्र किया गया कि आरोपितों ने गाँव में सांप्रदायिक तनाव और हिंदू एवं मुस्लिम समुदायों के बीच खाई पैदा करने की जानबूझकर ये कोशिश की थी।

आरोपित मुस्लिमों की अपमानजनक पोस्ट का सिलसिला रहा जारी

इसके बाद 10 सितंबर को अल्तमश बागवान ने अपनी इंस्टाग्राम आईडी ‘al.tamash2069’ से सोशल मीडिया पर एक अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट की। इसमें भी देवी सीता का अपमान किया गया था। इस भयानक टिप्पणी ने कट्टर मुस्लिमों की मानसिकता की पोल खोल कर रख दी कि वो भारत में इस्लाम का राज कायम करने को किस तरह बेताब हैं।

फोटो खास तौर पर ऑपइंडिया ने प्राप्त की है

इसके अलावा एक शख्स मुज़्ज़मिल बागवान ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इस टिप्पणी में महाराष्ट्र के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज को कायर कहा गया था। इससे आहत होकर स्थानीय ग्रामीणों ने अल्तमश और मुज्जमिल के खिलाफ IPC की धारा 153ए और 295ए के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

10 सितंबर को झड़प एक की मौत

सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई अपमानजनक टिप्पणियों को लेकर 10 सितंबर को पुसेगांव क्षेत्र में झड़पें हुईं। इसमें एक शख्स की मौत हो गई। सतारा पुलिस ने छत्रपति शिवाजी महाराज और माता सीता का अपमान करने वाली आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले आरोपितों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

इस बीच, एक स्थानीय दैनिक अखबार तरुण भारत के पत्रकारों में से एक सरफराज ने तीसरी शिकायत दर्ज की। इसमें 28 लोगों के साथ ही 100 अन्य अज्ञात लोगों पर गाँव में हिंसा पैदा करने का आरोप लगाया गया।

ऑपइंडिया द्वारा प्राप्त की गई एफआईआर की कॉपी

आईपीसी की धारा 302, 307, 324, 141, 143, 147, 148, 149, 427, 435, 449 और 450 के तहत ये शिकायत दर्ज की गई। इसमें शिकायतकर्ता ने कहा कि 28 लोग इलाके में मस्जिद के पास इकट्ठा हुए थे और कथित तौर पर उन्होंने मस्जिद में नमाज अदा करने के लिए आए अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों पर हमला किया था।

इस शिकायत में यह भी कहा गया कि भीड़ ने लाठी, डंडों और पत्थरों से हमला किया और मस्जिद के पास के इलाके में खड़े वाहनों में आग लगा दी। शिकायत में इस बात का भी जिक्र है कि भीड़ ने पुलिस जीपों पर हमला किया और गाँव के अंदर कानून व्यवस्था बदहाल कर डाली।

इस हिंसा के दौरान 32 साल के नुरुल हसन लियाकत शिकलगर की जान चली गई। इस मामले में शिकायत के आधार पर पुलिस ने 23 संदिग्धों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने मामले की जाँच के लिए इनकी 7 दिन की पुलिस हिरासत की माँग भी की।

वकील की दलील – संदिग्धों का घटना से नहीं था कोई लेना-देना

अदालत को बताया गया 23 संदिग्धों को पुलिस ने केवल संदेह के आधार पर गिरफ्तार किया था और प्रथम दृष्ट्या संदिग्धों अपराध में किसी भी तरह की संलिप्तता सामने नहीं आई है। संदिग्धों के वकील ने अदालत में दलील दी कि आरोपित आदतन अपराधी नहीं हैं और मौजूदा अपराध को लेकर उनसे कुछ भी बरामद नहीं किया गया है।

आरोपित पुसेसावली के रहने वाले हैं और वे 10 सितंबर की रात को क्या हुआ था, केवल ये देखने के लिए घटनास्थल पर गए थे। वकील ने कहा कि वो मस्जिद में नहीं गए थे और न ही उनको कथित अपराध से जोड़ा जा सकता है। हालाँकि कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इस घटना से लगभग 5000 घरों वाले गाँव में संपत्ति और कानून व्यवस्था को नुकसान पहुँचा है। कोर्ट ने संदिग्धों की चार दिनों की पुलिस हिरासत का आदेश दिया।

जिला प्रशासन ने सोमवार (1) तड़के से ही जिले में इंटरनेट बंद कर दिया था। दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा भी लागू की थी। बताया जाता है कि पुलिस ने घटना में दर्ज तीसरी पुलिस शिकायत के आधार पर 15 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है।

पैंगबर का अपमान गलत तो हिंदू देवी-देवताओं का अपमान कैसे सही?

हमारा ये लेख किसी भी तरह की हिंसा को जायज ठहराने और बढ़ावा देने के लिए नहीं है, लेकिन हाल में सतारा में हुई हिंसा को लेकर साफ तथ्यों और वजहों को लेकर है। मुख्यधारा की मीडिया रिपोर्टों में जोर-शोर से इस बात का जिक्र किया गया कि हिंसा की वजह कुछ ‘कथित’ अपमानजनक, आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट रही।

इनमें दावा किया गया कि युवक की मौत हिंसा में एक “ऐतिहासिक शख्सियत और पौराणिक चरित्र” के बारे में एक ‘आपत्तिजनक’ पोस्ट को लेकर हुई। यहाँ ये बात गौर करने लायक है कि भगवान राम और देवी सीता हिंदुओं के पूज्य हैं, लेकिन पक्के तौर पर वो पौराणिक पात्र नहीं हैं जैसा कि मेन स्ट्रीम मीडिया की रिपोर्ट्स में कहा गया है।

हिंदू देवी-देवताओं और महाराष्ट्र के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान करना ईशनिंदा से कम नहीं है। जब दुनिया भर में इस्लामवादी ईशनिंदा पर कथित तौर पर पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने वाले शख्स की मौत की माँग करते हैं।

उन्होंने इसे लेकर पूर्व भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा, कमलेश तिवारी, महाशय राजपाल, किशन भरवाड, हर्ष, श्रीलंकाई के प्रियंता कुमारा, कन्हैया लाल के मामले में ऐसा किया है और इसमें दो राय नहीं की ये लिस्ट बढ़ती रहेगी। यदि पैगंबर मुहम्मद का अपमान करना पाप माना है तो हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करना पाप है। यह एक अनैतिक काम है और इसकी भी देश और दुनिया भर में निंदा की जानी चाहिए।

इस्लामवादियों का दावा है कि इस्लाम शांति का धर्म है, लेकिन हिंदू धर्म है तो सबसे शांतिपूर्ण धर्म है, क्योंकि यह हिंदू देवताओं के अपमान पर भी ‘सर तन से जुदा’ की माँग नहीं करता है बल्कि न्याय पाने के लिए कानून की मदद लेता है।

इसका सबूत इस मामले में हिंदुओं की तरफ से दर्ज कराई गई दो एफआईआर हैं, जो कुछ स्थानीय लोगों ने आरोपित मुस्लिमों की अपमानजनक टिप्पणियाँ पोस्ट करने के बाद दर्ज कराई थी। कोई भी हिंदू सीधे सिर तन से जुदा करने नहीं निकला था। हालाँकि, गाँव में हिंसा भड़क उठी, जिसमें अज्ञात उन्मादी भीड़ ने गाँव में कानून व्यवस्था के हालात को बिगाड़ दिया और इससे एक शख्स की की मौत हो गई।

बताया गया कि भीड़ में से कुछ अज्ञात लोगों ने स्थानीय ग्रामीणों के घरों और दुकानों में भी आग लगा दी। इसे लेकर पुलिस 23 संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, लेकिन उनके वकील ने कहा था कि वो लोग सिर्फ यह देखने के लिए घटनास्थल पर गए थे कि 10 सितंबर की रात को क्या हुआ था।

स्थानीय लोगों का दावा न्याय के लिए लिया था कानून का सहारा

स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया से इस बातचीत में कहा कि लोगों ने न्याय पाने का कानूनी तरीका अपनाया गया था। उनका कहना है कि मुसलमानों ने हमला किया। उन्होंने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि 18 अगस्त को देवी सीता का अपमान करने वाली पहली पोस्ट वायरल होने के बाद से क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा था।

इसके बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर पुलिस की मौजूदगी में एक छोटा सा विरोध प्रदर्शन भी किया। पुलिस ने स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया की कि ऐसी कोई घटना दोबारा नहीं होगी।

हालाँकि, लगभग 10 दिनों के अंतराल के अंदर ही एक पोस्ट सोशल मीडिया पर छत्रपति शिवाजी महाराज और देवी सीता का अपमान को लेकर की गई। स्थानीय लोगों में से एक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बार भी एक पुलिस शिकायत दर्ज की गई।

इस बीच एक दूसरे स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि घटना के दिन कुछ पत्रकारों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पुलिस को यह नहीं बताया कि मुस्लिमों की भीड़ ने भी हमला किया था। उन्होंने कहा, “कुछ भी एकतरफा नहीं है।

कथित तौर पर, पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 353 और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 की धारा 3 के तहत एक और प्राथमिकी दर्ज की है। 15 अन्य गिरफ्तारियाँ भी की गई हैं। इलाके में शांति कायम रहे इसके लिए गाँव में पुलिस की गश्त जारी है। इंटरनेट और अन्य सेवाएँ बहाल कर दी गई हैं। आगे की जाँच चल रही है।

‘कॉन्ग्रेस और टुकड़े-टुकड़े गैंग का एक ही एजेंडा, चीन से क्या समझौता?’: राहुल गाँधी की पार्टी ने शेयर किया भारत का खंडित नक्शा, नॉर्थ-ईस्ट को किया गायब

कॉन्ग्रेस द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को लेकर शेयर किए गए वीडियो पर बवाल मचा हुआ है। इस वीडियो में भारत का अधूरा नक्शा दिखाया गया है। इसको लेकर भाजपा कॉन्ग्रेस पर हमलावर है। पार्टी नेताओं का कहना है कि कॉन्ग्रेस और टुकड़े-टुकड़े गैंग का एक ही एजेंडा है। दोनों नॉर्थ-ईस्ट को अलग कर चीन को देना चाहते हैं।

दरअसल, कॉन्ग्रेस के ऑफिशियल सोशल मीडिया अकाउंट्स से शनिवार (16 सितंबर, 2023) को एक एनिमेशन वीडियो शेयर किया गया। इस वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गाँधी को बात करते दिखाया गया है। साथ ही कैप्शन में लिखा, “नरेंद्र मोदी: मेरे पास ED है, पुलिस है, सत्ता है, पैसा है, दोस्त है…क्या है तुम्हारे पास? राहुल गाँधी: मेरे साथ पूरा देश है।”

इस वीडियो की शुरुआत में ही राहुल गाँधी की फोटो वाला ‘भारत का नक्शा’ दिखाई दे रहा है। लेकिन यह नक्शा अधूरा है। दरअसल, इस नक्शे में नॉर्थ ईस्ट के राज्य गायब हैं। इसको लेकर बीजेपी के आईटी सेल प्रभारी अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है।

कॉन्ग्रेस ने शेयर किया देश का गलत नक्शा, भाजपा ने किया पलटवार

अमित मालवीय ने एक्स (ट्विटर) पर लिखा, “कॉन्ग्रेस ने अपने ऑफिशियल वीडियो में कश्मीर के बाद अब पूरे नॉर्थ-ईस्ट को भारत के नक्शे से काट दिया है। क्या नॉर्थ-ईस्ट को चीन को सौंपना राहुल गाँधी द्वारा चीनियों के साथ किए गए समझौते का हिस्सा है? भारत के टुकड़े-टुकड़े करना राहुल गाँधी का अघोषित एजेंडा है। वह खरतनाक और कपटी हैं।”

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा, “कॉन्ग्रेस और टुकड़े-टुकड़े गैंग का एक ही एजेंडा है। दोनों नॉर्थ-ईस्ट को काटकर क्या इसे चीन को उपहार में देना चाहते हैं? इस तरह की नापाक राजनीति भारत की संप्रभुता और अखंडता के लिए खतरनाक है। राहुल गाँधी खतरनाक और कपटी हैं।”

वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी इस वीडियो को लेकर कॉन्ग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने आधिकारिक फोटो/वीडियो/पोस्टर्स में पहले भारत के मानचित्र से कश्मीर को गायब किया था। अब कॉन्ग्रेस द्वारा जारी इस आधिकारिक वीडियो में भारत के मानचित्र से पूरे नॉर्थ-ईस्ट को ही हटा दिया गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस पार्टी बताए कि नॉर्थ-ईस्ट को भारत के मानचित्र से क्यों हटाया? जिस देश के साथ कॉन्ग्रेस पार्टी ने MOU साइन किया है क्या उस देश के दबाव में हटाया है? क्या वो नॉर्थ-ईस्ट को भारत का हिस्सा नहीं मानते? यह घोर आपत्तिजनक और भारत की एकता व अखण्डता को तोड़ने वाला वीडियो है। यही कॉन्ग्रेस पार्टी की मानसिकता और चाहत भी है।”

गौरतलब है कि भाजपा नेता अमित मालवीय और संबित पात्रा ने राहुल गाँधी पर चीन के साथ हुए समझौते या MOU साइन करने का आरोप लगाया है। इससे पहले भी राहुल पर इस तरह के आरोप लगते रहे हैं। दरअसल, साल 2008 में कॉन्ग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गाँधी और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते में कॉन्ग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ने उच्च स्तरीय सूचनाओं और उनके बीच सहयोग करने की बात कही गई थी।

खास बात यह है कि इस समझौता ज्ञापन को तत्कालीन कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्य सचिव राहुल गाँधी ने सोनिया गाँधी की उपस्थिति में साइन किया था। जबकि चीन की ओर से इसे स्वयं वहाँ के वर्तमान प्रधानमंत्री शी जिनपिंग ने हस्ताक्षर किया था। उस समय जिनपिंग पार्टी के उपाध्यक्ष थे। 

इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने से पहले सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी की शी जिंनपिंग के साथ आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए लंबी बैठक हुई थी। साल 2008 में सोनिया गाँधी अपने बेटे राहुल, बेटी प्रियंका, दामाद रॉबर्ट वाड्रा और दोनों के बच्चों को साथ लेकर ओलंपिक खेल देखने पहुँची थीं। इसके अलावा उन्होंने और राहुल गाँधी ने चीन में कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया था।

राहुल गाँधी और चीन के संबंध पर उठते रहे हैं सवाल

इस समझौते के अलावा राहुल गाँधी और चीन के संबंध साल 2017 में हुए डोकलाम विवाद के समय भी उजागर हुए थे। उस समय उन्होंने चीनी राजदूत लुओ झाओहुई के साथ बैठक की थी।  इस बैठक के संबंध में पहले तो कॉन्ग्रेस ने साफ इंकार कर दिया था। लेकिन जब चीन की एंबेसी ने खुद इसका खुलासा किया, तो कॉन्ग्रेस को इस मुद्दे पर काफी जिल्लत झेलनी पड़ी थी। यह बैठक विशेष रूप से संदिग्ध इसलिए भी थी, क्योंकि उस समय कॉन्ग्रेस पार्टी और राहुल गाँधी, चीन के साथ चल रहे सैन्य गतिरोध पर अपने रुख पर कायम रहते हुए भारत सरकार पर तीखे हमले कर रहे थे।

इसके बाद कैलाश मानसरोवर मामले पर चीन के नेताओं से हुई गुप्त बैठक के बारे में तो राहुल गाँधी ने खुद ही खुलासा कर दिया था। राहुल उस समय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। जिसके कारण उनका इस तरह चीन अधिकारियों व नेताओं से बैठक करने ने कई सवाल खड़े कर दिए थे।

सट्टेबाजी वाला एप, ₹5000 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग… ED की रडार पर ₹200 करोड़ की शादी में परफॉर्म करने वाली बॉलीवुड हस्तियाँ, हवाला के जरिए बाँटे गए पैसे

बॉलीवुड के कई सितारे ED (प्रवर्तन निदेशालय) के रडार पर हैं। दुबई में हुए एक आलीशान शादी के कार्यक्रम में ये सभी परफॉर्म करने गए थे। अब इस संबंध में ED इनसे पूछताछ कर सकती है। ये सारा मामला महादेव’ नामक सट्टेबाजी एप बनाने वाले सौरभ चंद्राकर से जुड़ा है। सौरभ ने प्राइवेट जेट भेज कर बॉलीवुड की हस्तियों को अपने शादी कार्यक्रम में दुबई बुलाया था। इस शादी में 200 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। उसने ‘महादेव’ नाम का एक ऑनलाइन बेटिंग अप्लीकेशन बनाया था।

इसके प्रोमोटर सौरभ चंद्राकर ने इसी साल फरवरी में शादी की थी। जिन सेलेब्स ने शादी में परफॉर्म किया था, वो हैं – सनी लियोनी, नेहा कक्कर, आतिफ असलम, राहत फ़तेह अली खान, अली असगर, विशाल डडलानी, एली अवराम, भारती सिंह, भाग्यश्री, कीर्ति खरबंदा, नुसरत भरुचा, कृष्णा अभिषेक और सुखविंदर सिंह। ‘महादेव’ बेटिंग एप को लेकर न सिर्फ ED जाँच कर रहा है, बल्कि कई राज्यों की पुलिस भी इसके पीछे लगी हुई है।

ED ने जो डिजिटल सबूत जुटाए हैं, उससे पता चला है कि हवाला के जरिए एक इवेंट मैनेजमेंट कंपनी को 112 करोड़ रुपए दिए गए थे, वहीं होटल बुकिंग के लिए 42 करोड़ रुपए कैश का इस्तेमाल किया गया था। इस शादी कार्यक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बॉलीवुड की हस्तियों को देखा जा सकता है। ये भी पता चला है कि इस एप की एक सक्सेस पार्टी भी हुई थी। सौरभ चंद्राकर और एप के दूसरे प्रोमोटर रवि उप्पल ने मिल कर सितंबर 2022 में इस पार्टी का आयोजन किया था।

इसमें भी बॉलीवुड के कई एक्टर और गायक पहुँचे थे। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि बॉलीवुड के कई बड़े नामों को हवाला के जरिए पैसों का भुगतान किया गया। एक बड़े अभिनेता को करोड़ों दिए जाने की बात कही जा रही है। इस बेटिंग एप से जुड़ी 417 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है। दुबई से संचालित इस अप्लीकेशन के जरिए यूजर्स जोड़े जा रहे थे और बेनामी बैंक खातों के जरिए यूजर आईडी बना कर मनी लॉन्डरिंग की जा रही थी।

सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को कई बैंक खातों में भेजा गया। भारत में इसके विज्ञापन और फ्रेंचाइजी आमंत्रित करने के लिए भी बड़ी मात्रा में पैसे खर्च किए गए। इस कंपनी के प्रमोटर्स छत्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले हैं। इस एप के जरिए सट्टेबाजी के कई प्लेटफॉर्म्स को एक साथ जोड़ा गया था। कुल मिला कर 5000 करोड़ रुपए के मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। बॉलीवुड सितारों को 7 सितारा होटलों में रुकवाया जाता था। इस एप को 30 सेंटरों के जरिए संचालित किया जा रहा था।

‘किसी को देश से प्यार नहीं करना चाहिए, माँ-बाप की सेवा गलत?’: सनातन धर्म पर बहस के बीच मद्रास HC की बड़ी टिप्पणी, कहा- यह कर्तव्यों का एक समूह

सनातन धर्म के खिलाफ आए दिन हो रही विवादित बयानबाजी के बीच मद्रास हाईकोर्ट ने 15 सितंबर 2023 को कहा कि सनातन धर्म शाश्वत कर्तव्यों का एक समूह है। इस में देश, राजा, माता-पिता और गुरुओं के प्रति कर्तव्य तथा गरीबों की सेवा समेत कई कर्तव्य शामिल है। इसलिए सनातन धर्म के विरोध का मतलब यह है कि ये सभी कर्तव्य खत्म हो जाएँगे।

रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले में स्थित गर्वनमेंट आर्ट्स कॉलेज के प्रिंसिपल ने एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें छात्रों से तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके पार्टी के संस्थापक अन्नादुरई की जयंती पर ‘सनातन का विरोध’ विषय पर अपने विचार रखने के लिए कहा गया था।

इसको लेकर एलांगोवन नामक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालाँकि कॉलेज के प्रिंसिपल ने पहले ही सर्कुलर वापस ले लिया था। इसलिए कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया, लेकिन जस्टिस एन शेषयासी की बेंच ने सनातन धर्म को लेकर कई अहम टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा कि सनातन धर्म को किसी एक ग्रंथ में नहीं खोजा जा सकता, बल्कि इसके अनेक स्त्रोत हैं। कोर्ट ने सनातन धर्म के कर्तव्यों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि कॉलेज द्वारा जारी किए सर्कुलर के विषय को सनातन के कर्तव्यों के परिपेक्ष्य में देखें तो इसका मतलब होगा कि ये सभी कर्तव्य खत्म करने लायक हैं।

कोर्ट ने सवालिया लहजे में आगे कहा कि क्या एक नागरिक को अपने देश से प्यार नहीं करना चाहिए? क्या उसका अपने राष्ट्र की सेवा करना कर्तव्य नहीं है? क्या माता-पिता की देखभाल नहीं की जानी चाहिए? वर्तमान समय में जो कुछ भी हो रहा है उसको लेकर चिंता थी। इसलिए अदालत ने इस याचिका पर विचार करने का फैसला किया।

इस दौरान कोर्ट ने अस्पृश्यता यानि छुआछूत को लेकर कहा कि देश में इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भले ही इसे सनातन धर्म के सिद्धांतों में कहीं न कहीं अनुमति के तौर पर देखा जाता है, फिर भी इसके लिए जगह नहीं हो सकती। संविधान के अनुच्छेद 17 में छुआछूत को खत्म करने के बारे में कहा गया है। इसलिए छुआछूत संवैधानिक नहीं हो सकती।

‘पूरे गाँव को हिन्दू विहीन कर दूँगा’: नूहं हिंसा में धराया है कॉन्ग्रेस का विधायक मामन खान, अब शिकायत करने वालों को निशाना बना रहे गुर्गे

कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान 31 जुलाई को हुए नूहं हिंसा के मामले में पुलिस के शिकंजे में हैं। नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर हुए कातिलाना हमले की जाँच कर रही हरियाणा पुलिस की एसआईटी (SIT) को मामन खान के मोबाइल-लैपटॉप से पुख्ता सबूत मिले हैं। वहीं नूहं दंगा शांत हो जाने के बाद भी मामन खान के गुर्गे उन हिंदुओं को खोज-खोज कर पीट रहे हैं जिन्होंने हिंसा के दौरान आरोपित दंगाईयो की जानकारी पुलिस को दी थी। उनके खिलाफ FIR दर्ज कराया था। 

ऐसा ही एक मामला इसी महीने 4 सितंबर, 2023 का है जिसमें मामन खान के गुर्गे शाहनवाज़ खान ने मेवात क्षेत्र के मूलथान गाँव की सरपंच के एक परिजन पर जानलेवा हमला कर दिया था। इस मामले में सरपंच ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि शहनवाज विधायक मामन के साथ नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर किए गए हमले में शामिल था। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है जिसमें मामन खान के साथ दिखने वाले शहनवाज खान ने नंद किशोर प्रजापति को जान से मार डालने की भी धमकी दी थी। शहनवाज नूहं हिंसा में अपनी सूचना पुलिस को देने से नाराज था।

क्या है पूरा मामला 

ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR और शिकायत की कॉपी में 4 सितम्बर को घटी घटना का पूरा व्यौरा है। दरअसल, नूहं के बड़कली चौक और पूरे जिले में 31 जुलाई को दंगा हुआ था जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दंगाइयों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसी मामले में नगीना थाना में हरियाणा के फिरोजपुर झिरका से कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान के खिलाफ भी FIR दर्ज हुआ था। जिसमें 14 सितम्बर को ही मामन खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं कल शुक्रवार (15 सितम्बर, 2023) को कॉन्ग्रेस MLA खान को दो दिनों के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जहाँ पुलिस इसी मामले से जुड़े सबूतों और हिंसा को लेकर पूछताछ कर रही है। बता दें कि नूहं हिंसा की जाँच के हरियाणा की खट्टर सरकार ने विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है।

नगीना थाना में दर्ज सरपंच के FIR के अनुसार, पुलिस को नूहं हिंसा में पाकिस्तान और कुछ कट्टरपंथी संगठनों का हाथ होने का अंदेशा था। जिसमें मूलथान गाँव निवासी शहनवाज पुत्र समसुद्दीन के पाकिस्तान व अन्य कई कट्टरपंथियों के साथ मिलीभगत की बात सामने आई है। शहनवाज को मामन खान का सपोर्टर बताया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि मामन खान शहनवाज के हर अपराध में साथ देता है शहनवाज को पाकिस्तान और सऊदी अरब के कई व्हाट्सप्प ग्रुपों से जुड़ा हुआ भी बताया गया है।

शिकायत मे यह भी कहा गया है कि क्योंकि नन्द किशोर प्रजापति ने ही नूहं हिंसा में आरोपित शहनवाज के खिलाफ पुलिस मे शिकायत की थी इसलिए आरोपित उससे पहले से ही रंजिश रखता आया है। 

शहनवाज खान के खिलाफ नगीना थाने में दर्ज FIR की कॉपी

अपनी शिकायत में नन्द किशोर के हवाले से कहा गया है, “आज 4 सितम्बर को शाम करीब 5 बजे मैं उस्मान की बैठक पर कुछ निजी काम से गया था तभी वहाँ पर शहनवाज आया और मुझ पपर जानलेवा हमला कर दिया और लात घूसों से मेरी पिटाई की। शहनवाज के पास अवैध कट्टा भी था लेकिन बचाओ-बचाओ का शोर सुनकर मौके पर कुछ साथी आ गए और किसी तरह मेरी जान बच पाई अन्यथा शहनवाज उस दिन मुझे मार ही डालता। क्योंकि, शहनवाज ने एक दिन धमकी देते हुए कहा था कि तुझे किसी दिन गोली मारूँगा और पूरे गाँव को हिन्दू विहीन कर दूँगा।”

बता दें कि इस FIR में शहनवाज को मामन खान के साथ दंगों मे शामिल होना बताया गया है। हरियाणा पुलिस से की गई शिकायत में नंदकिशोर ने यह बात साफ़-साफ़ कही है, “कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान से नजदीकी के चलते शहनवाज के हौसले बुलंद हैं जिससे हिन्दू वहाँ डरे हुए हैं। क्योंकि, उसे कानून का डर नहीं है ऐसे मे कभी भी मेरे साथ अनहोनी हो सकती है।”

शिकायत में आरोपित शहनवाज पर  मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की माँग की गई है। साथ ही नंदकिशोर ने अपने जान की हिफाजत के लिए अनुरोध किया है। FIR में  शहनवाज और मामन खान के बीच के दंगे से एक महीने पहले के व्हाट्सप्प कॉल डीटेल वगैरह की जाँच कर इस मामले में कार्रवाई की माँग की गई है।  

पुलिस ने कहा हो रही है कार्रवाई 

गौरतलब है कि इस मामले में FIR 5 सितम्बर को ही दर्ज कर लिया गया था। वहीं ऑपइंडिया ने जब इस मामले में नगीना थाने के SHO जगबीर सिंह से बात की तो उन्होंने कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि अभी तक शहनवाज खान की गिरफ्तारी नहीं हुई है, वह फरार बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले में छानबीन कर रही है। पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज हुई है और जल्द ही कानून सम्मत कार्रवाई होगी।