सनातन धर्म के खिलाफ आए दिन हो रही विवादित बयानबाजी के बीच मद्रास हाईकोर्ट ने 15 सितंबर 2023 को कहा कि सनातन धर्म शाश्वत कर्तव्यों का एक समूह है। इस में देश, राजा, माता-पिता और गुरुओं के प्रति कर्तव्य तथा गरीबों की सेवा समेत कई कर्तव्य शामिल है। इसलिए सनातन धर्म के विरोध का मतलब यह है कि ये सभी कर्तव्य खत्म हो जाएँगे।
रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले में स्थित गर्वनमेंट आर्ट्स कॉलेज के प्रिंसिपल ने एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें छात्रों से तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके पार्टी के संस्थापक अन्नादुरई की जयंती पर ‘सनातन का विरोध’ विषय पर अपने विचार रखने के लिए कहा गया था।
इसको लेकर एलांगोवन नामक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हालाँकि कॉलेज के प्रिंसिपल ने पहले ही सर्कुलर वापस ले लिया था। इसलिए कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया, लेकिन जस्टिस एन शेषयासी की बेंच ने सनातन धर्म को लेकर कई अहम टिप्पणी की।
कोर्ट ने कहा कि सनातन धर्म को किसी एक ग्रंथ में नहीं खोजा जा सकता, बल्कि इसके अनेक स्त्रोत हैं। कोर्ट ने सनातन धर्म के कर्तव्यों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि कॉलेज द्वारा जारी किए सर्कुलर के विषय को सनातन के कर्तव्यों के परिपेक्ष्य में देखें तो इसका मतलब होगा कि ये सभी कर्तव्य खत्म करने लायक हैं।
कोर्ट ने सवालिया लहजे में आगे कहा कि क्या एक नागरिक को अपने देश से प्यार नहीं करना चाहिए? क्या उसका अपने राष्ट्र की सेवा करना कर्तव्य नहीं है? क्या माता-पिता की देखभाल नहीं की जानी चाहिए? वर्तमान समय में जो कुछ भी हो रहा है उसको लेकर चिंता थी। इसलिए अदालत ने इस याचिका पर विचार करने का फैसला किया।
इस दौरान कोर्ट ने अस्पृश्यता यानि छुआछूत को लेकर कहा कि देश में इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। भले ही इसे सनातन धर्म के सिद्धांतों में कहीं न कहीं अनुमति के तौर पर देखा जाता है, फिर भी इसके लिए जगह नहीं हो सकती। संविधान के अनुच्छेद 17 में छुआछूत को खत्म करने के बारे में कहा गया है। इसलिए छुआछूत संवैधानिक नहीं हो सकती।
कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान 31 जुलाई को हुए नूहं हिंसा के मामले में पुलिस के शिकंजे में हैं। नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर हुए कातिलाना हमले की जाँच कर रही हरियाणा पुलिस की एसआईटी (SIT) को मामन खान के मोबाइल-लैपटॉप से पुख्ता सबूत मिले हैं। वहीं नूहं दंगा शांत हो जाने के बाद भी मामन खान के गुर्गे उन हिंदुओं को खोज-खोज कर पीट रहे हैं जिन्होंने हिंसा के दौरान आरोपित दंगाईयो की जानकारी पुलिस को दी थी। उनके खिलाफ FIR दर्ज कराया था।
ऐसा ही एक मामला इसी महीने 4 सितंबर, 2023 का है जिसमें मामन खान के गुर्गे शाहनवाज़ खान ने मेवात क्षेत्र के मूलथान गाँव की सरपंच के एक परिजन पर जानलेवा हमला कर दिया था। इस मामले में सरपंच ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया था कि शहनवाज विधायक मामन के साथ नूहं में हिन्दुओं की शोभायात्रा पर किए गए हमले में शामिल था। ऑपइंडिया के पास FIR की कॉपी मौजूद है जिसमें मामन खान के साथ दिखने वाले शहनवाज खान ने नंद किशोर प्रजापति को जान से मार डालने की भी धमकी दी थी। शहनवाज नूहं हिंसा में अपनी सूचना पुलिस को देने से नाराज था।
क्या है पूरा मामला
ऑपइंडिया के पास मौजूद FIR और शिकायत की कॉपी में 4 सितम्बर को घटी घटना का पूरा व्यौरा है। दरअसल, नूहं के बड़कली चौक और पूरे जिले में 31 जुलाई को दंगा हुआ था जिस पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दंगाइयों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इसी मामले में नगीना थाना में हरियाणा के फिरोजपुर झिरका से कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान के खिलाफ भी FIR दर्ज हुआ था। जिसमें 14 सितम्बर को ही मामन खान को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। वहीं कल शुक्रवार (15 सितम्बर, 2023) को कॉन्ग्रेस MLA खान को दो दिनों के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जहाँ पुलिस इसी मामले से जुड़े सबूतों और हिंसा को लेकर पूछताछ कर रही है। बता दें कि नूहं हिंसा की जाँच के हरियाणा की खट्टर सरकार ने विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है।
नगीना थाना में दर्ज सरपंच के FIR के अनुसार, पुलिस को नूहं हिंसा में पाकिस्तान और कुछ कट्टरपंथी संगठनों का हाथ होने का अंदेशा था। जिसमें मूलथान गाँव निवासी शहनवाज पुत्र समसुद्दीन के पाकिस्तान व अन्य कई कट्टरपंथियों के साथ मिलीभगत की बात सामने आई है। शहनवाज को मामन खान का सपोर्टर बताया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि मामन खान शहनवाज के हर अपराध में साथ देता है शहनवाज को पाकिस्तान और सऊदी अरब के कई व्हाट्सप्प ग्रुपों से जुड़ा हुआ भी बताया गया है।
शिकायत मे यह भी कहा गया है कि क्योंकि नन्द किशोर प्रजापति ने ही नूहं हिंसा में आरोपित शहनवाज के खिलाफ पुलिस मे शिकायत की थी इसलिए आरोपित उससे पहले से ही रंजिश रखता आया है।
शहनवाज खान के खिलाफ नगीना थाने में दर्ज FIR की कॉपी
अपनी शिकायत में नन्द किशोर के हवाले से कहा गया है, “आज 4 सितम्बर को शाम करीब 5 बजे मैं उस्मान की बैठक पर कुछ निजी काम से गया था तभी वहाँ पर शहनवाज आया और मुझ पपर जानलेवा हमला कर दिया और लात घूसों से मेरी पिटाई की। शहनवाज के पास अवैध कट्टा भी था लेकिन बचाओ-बचाओ का शोर सुनकर मौके पर कुछ साथी आ गए और किसी तरह मेरी जान बच पाई अन्यथा शहनवाज उस दिन मुझे मार ही डालता। क्योंकि, शहनवाज ने एक दिन धमकी देते हुए कहा था कि तुझे किसी दिन गोली मारूँगा और पूरे गाँव को हिन्दू विहीन कर दूँगा।”
बता दें कि इस FIR में शहनवाज को मामन खान के साथ दंगों मे शामिल होना बताया गया है। हरियाणा पुलिस से की गई शिकायत में नंदकिशोर ने यह बात साफ़-साफ़ कही है, “कॉन्ग्रेस विधायक मामन खान से नजदीकी के चलते शहनवाज के हौसले बुलंद हैं जिससे हिन्दू वहाँ डरे हुए हैं। क्योंकि, उसे कानून का डर नहीं है ऐसे मे कभी भी मेरे साथ अनहोनी हो सकती है।”
शिकायत में आरोपित शहनवाज पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की माँग की गई है। साथ ही नंदकिशोर ने अपने जान की हिफाजत के लिए अनुरोध किया है। FIR में शहनवाज और मामन खान के बीच के दंगे से एक महीने पहले के व्हाट्सप्प कॉल डीटेल वगैरह की जाँच कर इस मामले में कार्रवाई की माँग की गई है।
पुलिस ने कहा हो रही है कार्रवाई
गौरतलब है कि इस मामले में FIR 5 सितम्बर को ही दर्ज कर लिया गया था। वहीं ऑपइंडिया ने जब इस मामले में नगीना थाने के SHO जगबीर सिंह से बात की तो उन्होंने कार्रवाई की बात कही है। हालाँकि अभी तक शहनवाज खान की गिरफ्तारी नहीं हुई है, वह फरार बताया जा रहा है। पुलिस इस मामले में छानबीन कर रही है। पुलिस का कहना है कि FIR दर्ज हुई है और जल्द ही कानून सम्मत कार्रवाई होगी।
अफ्रीकी देश जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे में पुलिस ने एक आदमखोर व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। दरअसल, थांडोवेनकोसी नदलोवू नामक एक शख्स सोते हुए लोगों, खासकर मासूम बच्चों के सिर पर पत्थर मारकर उनकी हत्या कर देता था। इसके बाद बच्चों के शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर मांस पकाकर खा जाता था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जिम्बाब्वे पुलिस को एक ही हफ्ते में कई बच्चों की लाश मिली थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जाँच करते हुए 4 सितंबर 2023 को थांडोवेनकोसी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में 20 साल के इस हत्यारे ने दहलाने वाले खुलासे किए हैं।
उसने अपने बयान में कहा कि सो रहे बच्चों को वह ईंट से कुचल देता था। फिर धारदार काँच से उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े करता था। इसके बाद प्राइवेट पार्ट्स को अलग कर आँतों को शरीर से बाहर निकालता था। इसके बाद शरीर के नर्म अंगों को पाकर खाता था।
थांडोवेनकोसी नदलोवू पर 8 बच्चों की हत्या करने का केस चल रहा है। इसके अलावा कुछ बड़े लोगों पर भी हमले करने का आरोप है। नदलोवू ने 28 अगस्त से लेकर 4 सितंबर के बीच 5 बेघर बच्चों की हत्या। वहीं 3 बच्चों की हत्या उसने साल 2020 में की थी। वह आमतौर पर सड़क किनारे सो रहे बच्चों को अपना निशाना बनाता था।
बयान से पलट गया सीरियल किलर
बच्चों की हत्या कर उनके मांस पकाकर खाने की बात स्वीकारने के बाद अब थांडोवेनकोसी नदलोवू अपने बयान से पलट गया है। उसने कोर्ट में हत्या करने का अपराध तो स्वीकार कर लिया, लेकिन बच्चों का मांस खाने की बात से मुकर गया। उसने कोर्ट में कहा कि हत्या के बाद मांस खाने की बात स्वीकार करने के लिए उसे मजबूर किया गया था।
उसने कहा कि जाँच अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट की थी। इसलिए उसे मजबूरन यह बात स्वीकारनी पड़ी। फिलहाल पुलिस बच्चों की हत्या से जुड़े इस मामले की सभी एंगल से जाँच कर रही है। शुरुआत में कहा जा रहा था कि नदलोवू ने अपने महजबी कार्यों के लिए हत्या कर शवों के टुकड़े किए होंगे। हालाँकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
शिवसेना (उद्धव गुट) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर के एक बयान पर ट्वीट करते हुए अपनी अल्पज्ञानता जाहिर की है। उन्होंने यह ट्वीट भारत-पाकिस्तान के बीच क्रिकेट को लेकर किया जिसके बाद उनके क्रिकेट और अंग्रेजी के ज्ञान को लेकर लोगों ने काफी मजाक उड़ाया।
अनुराग ठाकुर ने कश्मीर के कोकेरनाग में हुए आतंकी हमले के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तब तक द्विपक्षीय क्रिकेट नहीं खेला जाएगा जब तक कि पाकिस्तान आतंकवाद और सीमा पार से हमले करना बंद नहीं करता, मुझे लगता है देश के लोगों की भावनाएँ भी यही हैं। इस बयान को समाचार एजेंसी ANI ने अपने ट्विटर अकाउंट से पोस्ट किया।
प्रियंका चतुर्वेदी ने अपनेआप को भारत-पाकिस्तान और क्रिकेट मामलों की ज्ञानी सिद्ध करने के लिए इस बयान पर तुरंत ही हास्यास्पद प्रतिक्रिया दी। प्रियंका चतुर्वेदी ने लिखा, “क्या दोनों टीमों (भारत और पाकिस्तान) के बीच वर्ल्ड कप के लिए अहमदाबाद में प्रस्तावित मैच को लोगों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए द्विपक्षीय मानकर खारिज कर दिया जा सकता है। उन्हें मंत्री के तौर पर इस बात की पुष्टि करनी चाहिए, BCCI (बोर्ड ऑफ़ क्रिकेट कंट्रोल) को भी इस मामले में बयान देना चाहिए।
प्रियंका के इस ट्वीट से ही उनकी विद्वता और अंग्रेजी तथा क्रिकेट के ज्ञान पर प्रश्न उठने लगे। गौरतलब है कि क्रिकेट विश्वकप अगले माह (अक्टूबर) से भारत में प्रस्तावित है। इसी के अंतर्गत 14 अक्टूबर को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच भी मैच होगा क्योंकि दोनों को एक ही ग्रुप में रखा गया है।
यह मैच एक टूर्नामेंट के अंतर्गत हो रहा है, इसलिए इसे द्विपक्षीय सीरीज नहीं कहा जा सकता। द्विपक्षीय सीरीज उसे कहते जब हैं जब दो देशों की टीमें अपने अपने बोर्ड द्वारा निर्धारित पहले से निश्चित किए गए स्थान पर आपस में मैच खेलती हैं। इसे द्विपक्षीय सीरिज कहा जाता है।
अधिकांश समय पर ऐसी स्थितियों में एक टीम दूसरे देश जाकर खेलती है। जबकि विश्वकप का आयोजन ICC (अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल) करती है। इसके अंतर्गत होने वाले मैच खेलकर टीमें टूर्नामेंट में आगे बढ़ती हैं। ऐसे में जब टूर्नामेंट और द्विपक्षीय सीरीज में मूलभूत अंतर है तो भला विश्वकप के मैच को द्विपक्षीय मैच कैसे माना जा सकता है। प्रियंका की इसी गलती को लेकर उनका मजाक उड़ाते हुए एक ट्विटर यूजर ने उन्हें ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी देखने की सलाह दी कि आखिर ‘बाईलेटरल’ शब्द का क्या अर्थ होता है।
प्रियंका चतुर्वेदी को जब यह सलाह दी गई कि वह सरकार और उसके मंत्रियों पर बयानबाजी करने के लिए तथ्यों का उपयोग करें तो वह और भड़क गईं। इस बार उन्होंने BCCI के सचिव जय शाह के एक पुराने बयान का हवाला दिया और दूसरे मुद्दे की बात करने की लगीं।
प्रियंका ने दावा किया कि अनुराग ठाकुर ने यह भी दावा किया था कि भारत और पाकिस्तान के बीच आखिरी बार द्विपक्षीय सीरीज 2012-13 में हुई थी और तब से दोनों टीमों के बीच मात्र एशिया कप या फिर विश्व ICC टूर्नामेंट के मुकाबलों में ही मैच हुए हैं। प्रियंका ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि भारत ने आखिरी बार पाकिस्तान का दौरा वर्ष 2006 में किया था।
इसके बाद राज्यसभा सांसद ने BCCI सचिव जय शाह द्वारा अगस्त में दिए गए एक बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत एशिया कप के लिए पाकिस्तान का दौरा नहीं करेगा क्योंकि दोनों देशों के बीच रिश्ते सामान्य नहीं हैं। भारत ने एशिया कप का हिस्सा बनने के लिए तभी हामी भरी थी कि भारत के मैच श्रीलंका में होंगे।
इन सब बातों को जोड़-घटा कर प्रियंका यह स्पष्ट नहीं कर सकीं कि वह कहना क्या चाहती हैं। हालाँकि, यह बात और है कि वह कई बातें एक साथ रखती गईं जिससे कुछ भी सिद्ध नहीं किया जा सकता।
इन सब बातों से इतर अगर भारत पाकिस्तान के साथ विश्व कप के लिए मैच नहीं खेलना चाहता है तो वह यह कर सकता है लेकिन इससे भारतीय टीम को पॉइंट्स का भी नुकसान होगा और पाकिस्तान को विजेता घोषित कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ICC इस मामले में भारतीय टीम पर जुर्माना भी लगा सकती है।
इन्हीं कारणों से ही भारत ICC द्वारा आयोजित किए जाने वाले टूर्नामेंट में पाकिस्तान से भिड़ता आया है जबकि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मैच सीरीज लम्बे समय से बंद हैं। खैर इन सब बातों से प्रियंका चतुर्वेदी को कोई फर्क नहीं पड़ता है और वह ना ही अपनी भूल सुधारने को राजी हुई और ना ही यह मानने को राजी हुईं कि उन्होंने समझने में गलती की है।
प्रियंका चतुर्वेदी का गणित से बैर
अंग्रेजी से अपने बैर के अलावा प्रियंका चतुर्वेदी का गणित से भी कुछ ख़ास अच्छा रिश्ता नहीं है। उन्होंने कई बार इसका प्रदर्शन भी किया है। प्रियंका ने कोरोना महामारी को देखते हुए किए गए लॉकडाउन के उपरान्त श्रमिकों के घर जाने को लेकर कहा था कि मोदी सरकार ने उनके लिए विशेष ट्रेन चलाकर अतिरिक्त कमाई की है।
प्रियंका का दावा था कि इन ट्रेनों के संचालन में रेलवे ने 2,142 करोड़ रुपए खर्च किए और 429 करोड़ रुपए उसको राजस्व प्राप्ति हुई। प्रियंका ने समझा कि रेलवे द्वारा प्राप्त किया गया राजस्व उसका लाभ है। वह यह अंतर नहीं कर पाई कि राजस्व और लाभ में बड़ा अंतर होता है। असल में रेलवे को इन ट्रेनों से 1713 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
इसके अलावा प्रियंका ने एक और मौके पर औद्योगिक विकास सूचकांक (IIP) के जून 2014 में -23.4 से जुलाई में -20.9 होने को अच्छे दिनों की विफलता घोषित किया था जबकि असल में यह बढ़त है।
ओडिशा हाईकोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस एस मुरलीधर ने कहा था कि न चाहते हुए भी जज राजनीतिक विकल्प चुनते हैं, जबकि उन्हें लगता है कि वे तटस्थ हैं। अब उन्होंने कहा है कि हर प्रवासी श्रमिक को ‘बांग्लादेशी’ कहना खतरनाक है। इसके राष्ट्रीय सुरक्षा की समस्या बढ़ेगी।
भीमा कोरेगाँव केस के 2018 के फैसले में पक्षपाती होने का आरोप झेल चुके मुरलीधर ने कहा कि इस तरह के सामान्यीकरण से राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताएँ बढ़ेंगी और अप्रवासियों, शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार को जन्म देंगे।
न्यायमूर्ति मुरलीधर ने कहा, “हर प्रवासी के लिए बांग्लादेशी शब्द राज्य के दृष्टिकोण से एक खतरनाक शब्द है। हमेशा, राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता के तर्क सामने रखे जाते हैं और अप्रवासियों, शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के मामलों में तो इसे और भी अधिक जोर-शोर से पेश किया जाता है।”
उन्होंने याद दिलाया कि भारत हमेशा से प्रवासियों और आप्रवासियों का देश रहा है। उन्होंने आगे कहा, “केवल राजनीतिक और कानूनी सीमाएँ ही हैं जो उन्हें बांग्लादेशी, रोहिंग्या या अवैध प्रवासी करार देती हैं।”
रिटायर्ड चीफ जस्टिस एस मुरलीधर ने गुरुवार (14 सितंबर, 2023) को कहा था कि न चाहते हुए भी जज राजनीतिक विकल्प चुनते हैं, जबकि उन्हें लगता है कि वे तटस्थ हैं। दरअसल, ये दिल्ली हाई कोर्ट के वही पूर्व जज हैं जिन पर भीमा कोरेगाँव केस के 2018 के फैसले पर उन पर पक्षपाती होने का आरोप लगा था।
तब इस फैसले में उन्होंने अर्बन नक्सल गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमांड और हाउस अरेस्ट को रद्द कर दिया था। आज वही जज परोक्ष तौर पर ये कह रहे हैं कि अदालत के फैसलों में राजनीतिक चयन रहता है। ये बात उन्होंने एडवोकेट गौतम भाटिया की पुस्तक “अनसील्ड कवर्स: ए डिकेड ऑफ द कॉन्स्टिट्यूशन, द कोर्ट्स एंड द स्टेट” के लॉन्च पर कही।
राजधानी दिल्ली में ‘भारत मण्डपम्’ के बाद अब ‘यशोभूमि’ बन कर तैयार हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (17 सितंबर, 2023) को अपने जन्मदिन के मौके पर इसका उद्घाटन करने वाले हैं। इसका नाम ‘इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर’ है, जिसे ‘यशोभूमि’ के नाम से भी जाना जाएगा। इस सेंटर का पहला चरण बन कर तैयार हो गया है। मार्च 2025 तक ये पूरी तरह बन कर तैयार हो जाएगा। यहाँ 11,000 लोगों के बैठने की क्षमता है। चरणबद्ध तरीके से इसे बड़े आयोजनों के लिए भी खोला जाएगा।
ये पूरी परियोजना 8.90 लाख वर्ग मीटर में फैली हुई है। वहीं कंस्ट्रक्शन एरिया 1.80 लाख वर्ग मीटर का होगा। इसका इस्तेमाल विश्व स्तरीय बैठकों, सम्मेलनों और प्रदर्शनियों के लिए किया जाएगा। इसमें कन्वेंशन के लिए 15 और बैठकों के लिए 13 बड़े हॉल बनाए गए हैं। इस कन्वेंशन सेंटर को 73,000 वर्ग मीटर को बनाया गया है। इसमें मुख्य सभागार और ग्रैंड बॉलरूम भी बनाया गया है। देश की सबसे बड़ी LED स्क्रीन भी इसमें लगाए जाने की योजना है।
जब ‘यशोभूमि’ के सभी चरणों का काम पूरा हो जाएगा, तब ये एशिया का सबसे बड़ा कन्वेंशन सेंटर बन जाएगा। दिल्ली के प्रगति मैदान में स्थित ‘भारत मण्डपम्’, जहाँ G20 समिट का आयोजन किया गया, उससे ये दोगुना बड़ा होगा। इसे 25,703 करोड़ रुपए की लागत से तैयार किया जा रहा है। वहीं पहले चरण के काम में 5400 करोड़ रुपए लगे हैं। इसमें 2 एक्सहिबिशन हॉल भी हैं। इसके प्लेनरी हॉल में 6000 लोगों के बैठने की क्षमता है।
साथ ही भारत के सबसे अत्याधुनिक ऑटोमेटेड सिटिंग सिस्टम से भी ये लैस होगा। लकड़ी की फ्लोरिंग और दीवालों पर बने पैनल विशेष आकर्षण होंगे। द्वारका सेक्टर 25 में नए मेट्रो स्टेशन का भी उद्घाटन होगा, जिसे ‘यशोभूमि’ के नाम से ही जाना जाएगा। मेट्रो की एक्सप्रेस लाइन, जो IGI एयरपोर्ट तक जाती है, उससे भी ये जुड़ जाएगा। साथ ही एक्सप्रेस लाइन पर मेट्रो ट्रेनों की गति 90 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा हो जाएगी। ‘यशोभूमि’ का प्रदर्शनी हॉल भी विशेष आकर्षण होगा, जो 1.07 लाख वर्ग मीटर में बना है।
नई दिल्ली के द्वारका में निर्मित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (यशोभूमि) के कुछ मनोहारी दृश्य।
यशोभूमि की खासियत मीडिया रूम, VVIP लॉन्ज, अत्याधुनिक वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और सूचना केंद्र के अलावा टिकट काउंटर भी होगा। कन्वेंशन सेंटर का ग्रैंड वॉल रूम पत्ते के आकार का है। इसमें 2500 प्रतिनिधि एक साथ बैठ सकेंगे। ये कन्वेंशन सेंटर 8 फ्लोर का होगा। इससे थोड़ी ही दूर पर कई 5 स्टार होटल भी हैं। ये 221.27 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें पार्किंग के लिए भी एक कड़े क्षेत्र की व्यवस्था है। कनेक्टिविटी के लिहाज से भी ये सर्वश्रेष्ठ कन्वेंशन सेंटर होगा।8.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के एक मामले की जाँच प्रवर्तन निदेशालय या सीबीआई को सौंपने का आदेश नहीं मानने पर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। यह मामला पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले की महिला सहकारी समिति में हुए घोटाले से जुड़ा हुआ है। इसकी जाँच फिलहाल CID कर रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने जुर्माना लगाने के साथ ही ममता सरकार को कड़ी फटकार भी लगाई है।
न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय की एकल पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी। दरअसल, वर्ष 2020 में बंगाल के अलीपुरद्वार जिले की महिला सहकारी समिति में 50 करोड़ रुपए से अधिक के गबन का मामला सामने आया था। इस गड़बड़ी के कारण सहकारी समिति बंद हो गई थी और इसमें पैसा जमा करने वालों को भी उनकी धनराशि वापस नहीं मिल पाई थी।
न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय (चित्र साभार:ABP)
इस सम्बन्ध में मामला दर्ज करके जाँच राज्य की CID को सौंपी गई थी। सीआईडी इस मामले में बीते तीन वर्ष से जाँच कर रही है और अभी तक पाँच लोगों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है कि समिति से गबन किया गया पैसा कहाँ गया। सीआईडी की धीमी कार्रवाई से कलकत्ता हाईकोर्ट खफा हो गया और यह कदम उठाया है।
इससे पहले 24 अगस्त 2023 को इसी मामले में सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को आदेश दिया था कि इसकी जाँच सीआईडी से लेकर केन्द्रीय एजेंसियों ईडी और सीबीआई को सौंपे। कलकत्ता हाईकोर्ट ने बंगाल सरकार को यह भी आदेश दिया था कि केन्द्रीय एजेंसियों को सभी ब्यौरा तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जाए।
बंगाल सरकार द्वारा इस आदेश की अवहेलना की गई और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी को देखते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह जुर्माना लगाया और कहा कि यदि अब आदेश का पालन नहीं होता है तो वह राज्य के गृह सचिव को कोर्ट में तलब करेंगे। कोर्ट ने डाँट लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार गरीबों के पैसे के साथ खिलवाड़ कर रही है।
कोर्ट ने जुर्माने की रकम को दो हफ्ते में हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराने के लिए कहा है। इसके साथ ही इस केस से जुड़े सारे कागजात को 3 दिन के अंदर CID से लेकर केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का आदेश दिया है।
जस्टिस गंगोपाध्याय ने कहा कि जाँच शुरू हुए तीन साल हो चुके हैं, लेकिन CID को अभी भी नहीं पता है कि पैसा कौन ले गया। उन्होंने कहा, “कोर्ट के साथ खेल रहे हैं? CID को नहीं पता है, लेकिन मुझे पता है। ये वही लोग हैं, जो कभी साइकिल चलाकर गरीबों का पैसा खाते थे, वे अब कार से चल रहे हैं।”
बताते चलें कि न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय इससे पहले भी बंगाल की ममता बनर्जी की सरकार की गड़बड़ियों वाले कई मामलों में सुनवाई की थी। इसको लेकर सरकार सकते आ गई थी। इसी कारण से तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता उन पर अक्सर बयानबाजी करते रहते हैं।
हर साल की तरह गणेश चतुर्थी को लेकर तैयारियाँ जोरों पर है। मुंबई की गणेश चतुर्थी के तो क्या ही कहने! पंडाल की भव्यता को लेकर इस बार लेकिन पुणे बाजी मार सकता है। यहाँ का श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट का ‘अयोध्या के राम मंदिर’ वाला पंडाल खास है। महाराष्ट्र के पुणे में इस साल ‘गणेश उत्सव’ का 131वाँ साल भव्य तरीके मनाया जाएगा।
#WATCH | Maharashtra: A Ganesh pandal themed on Ayodhya's Ram Temple is being constructed in Pune ahead of Ganesh Chaturthi.
The pandal is being set up by Shreemant Dagdusheth Halwai Sarvajanik Ganpati Trust. (15.09) pic.twitter.com/iFfwlG0y9K
जहाँ एक ओर अयोध्या राम मंदिर में 22 जनवरी, 2024 के प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी जोरों से चल रही है, वहीं इस भव्य मंदिर की रेप्लिका में पुणे में विध्नहर्ता-मंगलकर्ता भगवान गणेश विराजेंगे। इसके साथ ही मंगलवार 19 सितंबर से सब मंगल होने का ये सिलसिला चल पड़ेगा।
द्वार पर बजरंगबली करेंगे गणपति का स्वागत
अयोध्या के राम मंदिर की ये प्रतिकृति (रेप्लिका) बहुत भव्य और शानदार है। इसकी लंबाई 125 फीट, चौड़ाई 50 फीट और ऊँचाई 100 फीट है। इसको बनाने में लकड़ी, प्लाईवुड और अन्य कई तरह की चीजों का इस्तेमाल किया गया है। इस मंदिर रेप्लिका में 24 खंभे और 24 मेहराब हैं। इसमें एक शानदार मुख्य गुंबद 100 फीट से अधिक ऊँचा है और कुल ऊँचाई 108 फीट है।
ट्रस्ट के अध्यक्ष माणिक चव्हाण ने मीडिया को बताया था कि इस पंडाल की सजावट टीम में 100 कुशल कारीगर हैं। इसे बनाने का काम आर्ट डॉयरेक्टर अमन विधाते के पास, जबकि लाइटिंग का काम वाईकर बंधु के जिम्मे है। मंडप व्यवस्था की काले मांडववाले कर रहे हैं।
प्रवेश द्वार पर भगवान श्री राम और हनुमान जी की प्रतिकृतियों के अलावा वानरसेना की प्रतिकृतियाँ भी आकर्षक होंगी। इसमें बजरंग बली को हाथों में श्रीराम लिखा पत्थर उठाए बनाया गया है। इस रेप्लिका के साथ आप भी 19 सितंबर को बप्पा के स्वागत के लिए तैयार हो जाइए।
आपको बता दें कि इस उत्सव की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज के बचपन में उनकी माँ जीजाबाई के पुणे के ग्रामदेवता कसबा गणपति से हुई थी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने 1893 में इसे आजादी के आंदोलन से जोड़ दिया था। उन्होंने लोगों में एकता, देशभक्ति की भावना और आजादी की लड़ाई का अलख जगाने के लिए महाराष्ट्र में गणेश उत्सव मनाया था, जिसका सिलसिला आज तक चल रहा है।
गुजरात के खेड़ा जिले के ठासरा में शुक्रवार (15 सितंबर, 2023) को श्रावण के आखिरी दिन आयोजित भगवान शिव यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। यह हमला तब किया गया जब यात्रा मदरसे के पास से गुजर रही थी तभी अचानक से शिव यात्रा पर पथराव शुरू हो गया, जिससे वहाँ अफरा-तफरी मच गई और पुलिसकर्मियों समेत कई लोग घायल हो गए। अब इस मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
घटना के संबंध में ठासरा पुलिस स्टेशन में तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें से सभी की कॉपी ऑपइंडिया के पास उपलब्ध हैं। एफआईआर से पता चलता है कि कैसे मुस्लिम भीड़ ने पहले डीजे को लेकर जुलूस पर हमला कर दिया।
बता दें कि इस मामले में ठासरा पुलिस ने विजय परमार नाम के युवक की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की है। जिसमें बताया गया कि हर साल की तरह इस बार भी शुक्रवार को श्रावण मास की समाप्ति पर भगवान शिव की शोभा यात्रा निकाली गई, जिसके लिए कानूनी मंजूरी भी ले ली गई थी।
हर साल यह यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होती है और बाघी, बलियादेव मंदिर, रामचौक, टावर बाजार, हुसैनी चौक, होली चकला, तीनबत्ती और आशापुरी मंदिर में भगवान शिव की मूर्ति रखकर नागेश्वर मंदिर वापस लौटती है।
जानकारी के मुताबिक यात्रा सुबह 11:30 बजे शुरू हुई और ठासरा और आसपास के गाँवों से करीब 1000 हिंदू श्रद्धालु इसमें शामिल हुए। जिसमें महिला-पुरुष, बच्चे सभी शामिल थे। यात्रा में दो डीजे बुलाये गए थे तथा पूरे मार्ग पर ठासरा थाने से आवश्यक पुलिस बल उपलब्ध कराया गया था। यात्रा नागेश्वर महादेव मंदिर से शुरू होकर तय रूट के अनुसार ही बालीदेव मंदिर, रामचौक, टावर बाजार, हुसैनी चौक, होली चकला होते हुए करीब साढ़े तीन बजे तीनबत्ती पहुँची।
मुस्लिमों ने मदरसे का हवाला देकर बंद कराया डीजे
यात्रा के दौरान लगातार भक्ति गीत बजते रहे। शिकायत में कहा गया है कि जब जुलूस तीनबत्ती चौक स्थित मदरसे के पास पहुँचा, तो ठासरा नगर पालिका सदस्य मोहम्मद अबरार रियाजुद्दीन सैयद, अस्पाक मजिम्मियान बेलीम और लगभग पचास अन्य मुस्लिम समुदाय के लोग जुलूस के पास पहुँचे और आयोजकों से कहा, “हमारा मदरसा बगल में है, अपना डीजे बजाना बंद करो।” और इतना कहने के बाद ही मारपीट कर डीजे बंद कर दिया गया।
मदरसे और आसपास के घरों की छतों से हुआ पथराव
जैसा कि FIR में बताया गया है कि जब ये लोग लौट रहे थे, तो मदरसे और आसपास के घरों की छतों पर इकट्ठा हुए मुस्लिम पुरुषों और महिलाओं ने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, ‘हिन्दुओं को रोको… हिन्दुओं के जुलूस को रोको’ और ‘कोई हिन्दू जिन्दा नहीं जाना चाहिए। तभी पथराव शुरू हो गया था और जुलूस पर ईंटें और बड़े-बड़े पत्थर फेंके जाने लगे।
इस बीच जुलूस में साथ चल रहे पुलिसकर्मियों और यात्रा के नेताओं ने पथराव रोकने की पूरी कोशिश की लेकिन उत्तेजित मुस्लिमों की भीड़ ने पथराव नहीं रोका। इससे ठासरा थाने के कई पुलिसकर्मी और यात्रा में शामिल कई लोग घायल हो गए। तभी हालात बिगड़ने पर अन्य पुलिसकर्मियों का काफिला भी मौके पर पहुँच गया, जिसे देखकर पथराव करने वाले लोग मदरसे और आसपास के घरों की छतों से उतरकर भाग निकले।
17 के खिलाफ नामजद और पचास अन्य की भीड़ के खिलाफ शिकायत
ठासरा में शिव यात्रा पर हमले के बाद इस मामले में कुल 17 मुस्लिमों को नामजद किया गया है और बाकी 50 मुस्लिम लोगों पर धारा 143, 147, 148, 149, 153A, 295A, 323, 324, 504, 505, 506 के तहत मामला दर्ज किया गया है। ठासरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। जिनके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है उनके नाम इस प्रकार हैं :
मुहम्मद अबरार रियाज़ुद्दीन सैयद
अस्पाक मजिम्मियान बेलीम
ज़ैद अली मुहम्मद अली सैयद
अतीक मालेक
अहद सैयद
हारून पठान
रुकमुद्दीन रियाकतअली सैयद
फ़िरोज़ मजीत खान पठान
इदरीश
नावेद
जुनैद
तनवीर सैयद
फैजान सैयद
फ़ोम बैटरी
जाबिर खान इनायत खान पठान
मुर्गा
अल्ताफ खान मुख्तयार खान पठान
बता दें कि 15 सितंबर को, श्रावण के शुभ महीने के आखिरी दिन, गुजरात के खेड़ा जिले के ठासरा इलाके में भगवान शिव की बारात पर क्रूरता से हमला हुआ। खबरों के मुताबिक, जब हिंदू श्रद्धालु इलाके से जुलूस निकाल रहे थे तो एक मदरसे से पथराव किया गया। इस मामले में “शिवजी की सवारी” यात्रा के आयोजक विजय दास जी महाराज ने कहा कि हमला पूर्व नियोजित प्रतीत होता है। हमला इस तरह से किया गया कि इस शिव यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को यात्रा बीच में ही छोड़कर अपनी जान बचाकर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा। वहीं इस घटना में दो अधिकारी और एक पीएसआई समेत तीन पुलिस अधिकारियों को भी घायल हुए हैं।
गुजरात के खेड़ा में हिंदू त्योहारों पर पथराव आम बात
गौरतलब है कि खेड़ा गुजरात का वही इलाका है जहाँ पिछले साल नवरात्रि का उत्सव तब हिंसक हो गया था जब आरिफ और जहीर नाम के दो युवकों के नेतृत्व में मुस्लिम भीड़ ने हिंदू भक्तों पर पथराव किया था।
रिपोर्टों में कहा गया था कि आरिफ और जहीर के साथ आई मुस्लिम भीड़ ने नवरात्रि उत्सव के दौरान हंगामा किया था। इससे पहले, यह बताया गया था कि कैसे खेड़ा में एक मुस्लिम शिक्षक ने छात्रों को नवरात्रि उत्सव के दौरान गरबा करने के बजाय मुहर्रम-शैली के शोक में अपनी छाती पीटने और ‘या हुसैन’ का नारा लगाने के लिए कहा था। ऐसी भी खबरें आई थी कि जहाँ मुस्लिम पुरुषों ने फर्जी नामों के तहत नवरात्रि स्थल में प्रवेश करने की कोशिश की थी। साथ ही कुछ इलाकों में स्थानीय मुस्लिमों ने नवरात्रि मनाने का विरोध भी किया था।
असम में हिमंता विस्वा सरमा की सरकार ने बाल विवाह को खत्म करने के लिए जरूरी कार्रवाई शुरू किया है। इसके तहत राज्य के हैलाकांडी जिले में कम-से-कम 17 फर्जी काजी को गिरफ्तार किया है। ये काजी बच्चों का निकाह कराते थे। इन्हें जिले के अलग-अलग जगहों से पकड़ा गया है।
पकड़े गए काजियों की पहचान अजीरुद्दीन लश्कर, फरीजुद्दीन लश्कर, असदुल्ला लश्कर, अब्दुल जलाल लश्कर, नुरुल हक लश्कर, अफताबुद्दीन लश्कर, अब्दुल सलाम बरभुइया, अबु बकर बरभुइया, सरीफुद्दीन बरभुइया, कैसर अहमद, मुफ्ती अबुल हुसैन, अब्दुस्सलाम मजूमदार, मुजाकिर हुसैन मजूमदार, उबैदुल्लाह चौधरी और सईदुल हक के रूप में हुई है।
एक अधिकारी ने कहा कि इन काजियों के पास निकाह कराने के लिए जरूरी प्रमाण पत्र नहीं है। इसके साथ ही वे जिले में बाल विवाह में संलिप्त पाए गए हैं। दरअसल, काजी इस्लाम में निकाह कराने का काम करते हैं। इन काजियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस ने उनके कब्जे से दस ‘कबुलनामा’ जब्त किए हैं।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि गिरफ्तार लोगों में से एक आरोपित ने जिले में अवैध रूप से 150-200 निकाह करवाए हैं। इनमें से कुछ बाल विवाह भी शामिल हैं। हैलाकांडी के ASP समीर बरुआ ने बताया कि पुलिस ने आरोपितों से कई निकाह रजिस्टर जब्त किए हैं। इसके अलावा भी कई दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं।
बताते कि इस महीने की शुरुआत में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि दिसंबर 2023 तक राज्य में बहुविवाह प्रथा को खत्म कर दिया जाएगा। इसके साथ ही 2026 तक बाल विवाह को पूरी तरह खत्म करने की बात कही। उन्होंने कहा कि 1 सितंबर से बाल विवाह के खिलाफ फिर कार्रवाई की जाएगी।
असम सरकार बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने के लिए दिसंबर में राज्य विधानसभा में एक विधेयक पेश कर सकती है। ख्यमंत्री सरमा ने घोषणा की है कि इसे अगले 45 दिनों में अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके लिए उन्होंने एक कमिटी भी गठित की है। उस कमिटी ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी है।
सिलचर में मीडिया से बातचीत करते हुए सीएम सरमा ने कहा, “मसौदा तैयार किया जा रहा है और दिसंबर तक असम में बहुविवाह खत्म हो जाएगा। 15 सितंबर के बाद राज्य में बाल विवाह पर गिरफ्तारी का एक और दौर देखने को मिलेगा।” सीएम ने कहा कि राज्य में बाल विवाह के खिलाफ हर 6 महीना पर कार्रवाई की जाएगी।
इसके पहले फरवरी 2023 में असम सरकार ने बाल विवाह कराने वालों पर बड़ी कार्रवाई की थी। इस संबंध में राज्य में अब तक 4 हजार से ज्यादा केस रजिस्टर किए गए हैं। वहीं 2200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इस कार्रवाई पर AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी और AIUDF के चीफ मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने सवाल उठाया था।
उस दौरान सीएम सरमा ने कहा था कि अब तक पूरे प्रदेश में बाल विवाह से संबंधित 4074 केस दर्ज किए गए हैं। कुल 8134 आरोपितों की पहचान की गई है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी और हमें लगभग 3500 लोगों को गिरफ्तार करना होगा।