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भगवान राम पर इकबाल मियाँ ने किए आपत्तिजनक पोस्ट, जिस लड़की ने निकाह से इनकार किया उसके नाम से बनाए थे अकाउंट: पुलिस ने दबोचा

गुजरात के वडोदरा में भगवान श्रीराम का अपमान करने के आरोप में इकबाल मियाँ मलिक को गिरफ्तार किया गया है। दरअसल, इकबाल मियाँ का निकाह मुस्लिम लड़की से तय हुआ था, लेकिन बाद में लड़की का निकाह कहीं और हो गया। इससे नाराज होकर इकबाल ने उस लड़की और उसकी ननद के नाम से सोशल मीडिया पर फर्जी अकाउंट बनाकर आपत्तिजनक पोस्ट किए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला वडोदरा के शिनोर थाना क्षेत्र का है। यहाँ रहने वाले एक युवक ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा था कि उसकी बहन और बीवी के नाम से स्नैपचैट और इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट हैं। इन अकाउंट से आपत्तिजनक पोस्ट किए जा रहे हैं। शिकायत में कहा था कि उसकी बहन ने इन फेक अकाउंट्स के स्क्रीनशॉट भेजे थे।

शिकायत के अनुसार, इन स्क्रीनशॉट में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की आपत्तिजनक फोटो थी। इस फोटो में आरोपित ने भगवान राम के हाथ में सुअर वाली इमोजी लगाई थी। साथ ही तस्वीर के नीचे आपत्तिजनक टेक्स्ट लिखा था। इसके अलावा, उसने उस लड़की का मोबाइल नंबर लिखकर लोगों को उस पर कॉल करने के लिए भी कह रहा था।

इस पूरे मामले में ऑपइंडिया ने शिनोर पुलिस स्टेशन के सब इंस्पेक्टर एआर महिदा से बातचीत की। उन्होंने कहा, “शिकायतकर्ता शिनोर तालुका के पुनियाड गाँव का रहने वाला है। आरोपित ने शिकायतकर्ता की बीवी के नाम से स्नैपचैट और इंस्टाग्राम पर तीन फर्जी अकाउंट बनाए थे। इन अकाउंट से वह शिकायतकर्ता की बीवी और बहन की फोटो शेयर करता था।”

सब इंस्पेक्टर महिदा ने आगे कहा, “आरोपित इकबाल मियाँ ने स्नैपचैट पर भगवान श्रीराम की फोटो का इस्तेमाल करते हुए आपत्तिजनक पोस्ट किया था। साथ ही शिकायतकर्ता की बहन का नंबर ‘वायरल’ करते हुए लिखा था, ‘जिस में हिम्मत है वह इस नंबर पर फोन करे’। युवक की शिकायत के बाद टेक्निकल रूप से इसकी जाँच शुरू की।”

उन्होंने कहा, “जाँच में स्नैपचैट के साथ ही इंस्टाग्राम अकाउंट भी मिले हैं। इन अकाउंट को चेक करते हुए एक मेल आईडी मिली है। मेल आईडी की जाँच में एक मोबाइल नंबर सामने आया। उक्त मोबाइल नंबर की जाँच की तो पता चला कि यह बकरोल गाँव के रहने वाले इकबाल मियाँ का है। आरोपित की पहचान होने के बाद एक टीम भेजकर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है।”

सब इंस्पेक्टर ने कहा, “उसके पास से बरामद फोन में सभी फर्जी अकाउंट और उससे पोस्ट की गई आपत्तिजनक सामग्री भी मिली। शिकायत करने वाले युवक की बीवी का निकाह आरोपित इकबाल मियाँ के साथ तय हुआ था, लेकिन इसके बाद लड़की की निकाह उससे नहीं हुआ। इससे गुस्साए इकबाल मियाँ ने लड़की से बदला लेने के लिए फेक अकाउंट बनाकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया।”

अब बर्थ सार्टिफिकेट से होंगे सारे काम, स्कूल में एडमिशन से लेकर आधार, वोटर कार्ड बनवाने में करेगा मदद: 1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम

1 अक्टूबर, 2023 से बर्थ सार्टिफिकेट यानी कि जन्म प्रमाण पत्र का रोल बढ़ने जा रहा है। मोदी सरकार द्वारा जारी नए नियम के अनुसार यदि आपके पास सिर्फ बर्थ सर्टिफिकेट है तब भी स्कूल में एडमिशन से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस, सरकारी नौकरी, वोटर आईडी, पासपोर्ट, आधार कार्ड, विवाह पंजीयन करा सकते हैं। वेरिफिकेशन के लिए इसका उपयोग सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर किया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केन्द्र सरकार ने 13 सितंबर को नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि बर्थ सर्टिफिकेट को सिंगल डॉक्यूमेंट के तौर पर लागू किया जा रहा है ताकि केंद्र और राज्य स्तर पर जन्म व मृत्यु डेटाबेस तैयार किया जा सके। इस नियम के लागू होने के बाद राज्य और केंद्र सरकार जन्म व मृत्यु के डेटा को आपस में आसानी से शेयर कर पाएँगी। साथ ही, सरकारी सेवाऍं और डिजिटल रजिस्ट्रेशन सही तरीके से हो सकेगा।

इसके लिए राज्य सरकार चीफ रजिस्ट्रार और रजिस्ट्रार की नियुक्ति करेगी। इसमें चीफ रजिस्ट्रार राज्य स्तर पर जन्म और मृत्यु का डेटा तैयार करेगा। वहीं रजिस्ट्रार ब्लॉक स्तर पर जानकारी एकत्रित करेगा। दरअसल, केंद्र सरकार ने मानसून सत्र के दौरान संसद के दोनों सदन में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2023 पेश किया था। बिल पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति से मंजूरी भी मिल चुकी है। ऐसे में अब सरकार ने इसके तहत बनाए गए नियमों को 1 अक्टूबर, 2023 से लागू करने का भी ऐलान किया है।

उल्लेखनीय है कि नया कानून लागू होने के बाद बर्थ और डेथ सार्टिफिकेट डिजिटल रूप में भी मिल सकेगा। अब तक इसे हार्ड कॉपी यानि कि कागज के रूप में ही दिया जाता था। लेकिन अब यह डिजिटल फॉर्मेट में भी मिल सकेगा। नए कानून को सीधे शब्दों में समझें तो अब तक जिस तरह आधार कार्ड काम करता था। यानि कि स्कूल में एडमिशन से लेकर अन्य सभी कामों में जहाँ आधार कार्ड का उपयोग किया जाता था। वहाँ अब बर्थ सार्टिफिकेट का उपयोग किया जा सकता है। चूँकि, अब तक दफ्तरों में आधार कार्ड समेत अन्य डॉक्यूमेंट की भी माँग की जाती थी। लेकिन अब बर्थ सार्टिफिकेट ही सिंगल डॉक्यूमेंट होगा।

मोनू मानेसर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की नीयत पर क्यों उठ रहे सवाल, क्या तुष्टिकरण की राजनीति के लिए हो रहा गोरक्षक का इस्तेमाल

नासिर-जुनैद के परिवारों को कन्हैया लाल के परिवार की तरह मुआवजा क्यों नहीं दिया गया

यह सवाल कॉन्ग्रेस की विधायक साफिया जुबेर ने राजस्थान की अपनी ही पार्टी की सरकार से पूछा था। नासिर और जुनैद भरतपुर के जिस घाटमीका गाँव का रहने वाला था, वहाँ के लोग हों या इनके परिजन, अशोक गहलोत की सरकार पर ‘खामोश रहने’ के लिए दबाव डालने, मोनू मानेसर पर कार्रवाई नहीं करने जैसे आरोप लगा रहे थे।

कुछ महीने पुराने इन तमाशों से आप समझ सकते हैं कि राजस्थान में विधानसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस का वोट बैंक उससे किस कदर खार खाए बैठा था। इसने गुटबाजी और सत्ता विरोधी लहर से जूझ रही कॉन्ग्रेस के लिए इधर कुआँ, उधर खाई वाली स्थिति पैदा कर दी थी। ऐसे में मोनू मानेसर की हरियाणा में हुई गिरफ्तारी और फिर उसका ट्रांजिट रिमांड मिलना राजस्थान की सरकार के लिए एक राहत भरी खबर थी।

अब मीडिया में सूत्रों के हवाले से जिस तरह की खबरें नासिर-जुनैद की कथित हत्या में मोनू मानेसर की संलिप्तता को लेकर आ रही हैं, उससे उन अंदेशों को बल मिल रहा है जो उसकी गिरफ्तारी के बाद से व्यक्त किए जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि चुनावों और वोट बैंक की नाराजगी को कम करने के इरादे से मीडिया में ऐसी बातों को ‘प्लांट’ किया जा रहा है जो शायद ही अदालत में राजस्थान पुलिस साबित कर सके।

वैसे भी मोनू मानेसर की गिरफ्तारी से कुछ दिन पहले ही राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) उमेश मिश्रा ने कहा था कि इस मामले में मोनू मानेसर की ‘सीधी संलिप्तता’ नहीं है। उनकी बातों से जाहिर था कि उसकी अप्रत्यक्ष भूमिका को लेकर भी राजस्थान पुलिस के पास कोई प्रमाण नहीं है।

मीडिया का दावा- नासिर और जुनैद हत्या की प्लानिंग मोनू मानेसर ने कबूली

मीडिया की रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि राजस्थान पुलिस की पूछताछ में मोनू मानेसर ने खुलासा किया है कि नासिर-जुनैद की हत्या का प्लान उनके अगवा होने से आठ दिन पहले ही बन गया था। उल्लेखनीय है कि नासिर और जुनैद के अपहरण का केस 15 फरवरी 2023 को दर्ज हुआ था। अगले दिन हरियाणा के भिवानी में दोनों के शव और जली हुई गाड़ी मिली।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर

रिपोर्टों के मुताबिक मोनू मानेसर ने बताया है कि जब नासिर-जुनैद को उठाया गया तो उनके पास गाय नहीं थी। कथित तौर पर अपहरणकर्ताओं ने मोनू मानेसर को फोन किया। इसके बाद दोनों को पीटकर अधमरी हालत में फिरोजपुर झिरका थाने ले जाया गया। पुलिस ने दोनों को लेने से इनकार कर दिया तो जंगल में ले जाकर गाड़ी समेत जला दिया। रिपोर्ट में मोनू मानेसर को इस हत्याकांड का ‘साजिशकर्ता’ बताया गया है। दावा किया गया है कि हत्या में शामिल एक शख्स ने नासिर और जुनैद की डिटेल उसे दी थी। इसके बाद मोनू मानेसर ने अन्य आरोपितों के साथ दोनों को उठाने की साजिश रची।

वोट बैंक को खुश करने के लिए किया जा रहा इस्तेमाल?

दिलचस्प यह है कि मीडिया में ये सारे दावे पुलिस सूत्रों के हवाले से किए जा रहे हैं। 14 अगस्त 2023 को राजस्थान के डीजीपी ने कहा था कि इस घटना में मोनू मानेसर का सीधा हाथ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा था कि पर्दे के पीछे से उसकी भूमिका थी या नहीं, इसका पता लगाने की पुलिस कोशिश कर रही है। अब ऑपइंडिया को सूत्रों ने बताया है कि राजस्थान पुलिस पर इस घटना में मोनू मानेसर की संलिप्तता बताने का दबाव है। सवाल उठता है कि क्या यह दबाव विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है?

मोनू मानेसर को ट्रांजिट रिमांड पर राजस्थान ले जाए जाने के बाद ही विश्व हिन्दू परिषद (VHP) ने इसका अंदेशा जताया था। विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा था, “निर्दोष गौभक्त मोनू मानेसर को राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ समय पहले ही राजस्थान पुलिस ने निर्दोष माना था। चुनावों में मुस्लिम वोट बैंक के लिए गौभक्त मोनू की गिरफ्तारी हुई है, जो उन्हें बहुत भारी पड़ेगा।”

यहाँ हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गोरक्षा के कार्य से जुड़े होने के कारण इस्लामी कट्टरपंथियों को मोनू मानेसर नहीं सुहाता है। नूहं में हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिमों के हमले के बाद भी सारा दोष मोनू मानेसर के मत्थे मढ़ने को लेकर कैंपेन चला था।

मोनू मानेसर का इस्तेमाल विधानसभा चुनाव के दौरान तुष्टिकरण की राजनीति के लिए होने का अंदेशा बीजेपी को भी है। राजस्थान बीजेपी के प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने ऑपडिया से बातचीत में कहा, “डीजीपी पहले ही कह चुके हैं कि मोनू मानेसर की इस मामले में संलिप्तता नहीं है। बावजूद इस तरह के दावों का आना बताता है कि कहीं न कहीं ये पोलिटिकल मामला तो है ही। लेकिन पुलिस को निष्पक्ष तरीके से इस मामले की जाँच करनी चाहिए। वैसे भी राजस्थान में डेढ़ महीने बाद सत्ता बदलने वाली है। इस सरकार से किसी के लिए भी न्याय की उम्मीद करना बेकार है। बीजेपी की सरकार आएगी तो वह न्याय करेगी।”

मोनू मानेसर को लेकर किए जा रहे दावों की कोर्ट में प्रमाणिकता कितनी

सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्य रंजन स्वैन ने ऑपइंडिया को बताया कि कोर्ट में इकबालिया बयान सबूत नहीं माना जाता है। उन्होंने कहा, “पुलिस रिमांड या पुलिस जाँच अधिकारी के सामने आरोपित द्वारा दिया गया बयान कोर्ट में मान्य नहीं है। सीआरपीसी 1973 के सेक्शन 161 के तहत बयान का इस्तेमाल अनुसंधान के लिए किया जा सकता है।”

उल्लेखनीय है कि सेक्शन 161 के तहत पुलिस केस के सभी गवाहों और सबूतों की जाँच और उनका परीक्षण करती है। जाँच के दौरान पुलिस मामले के गवाहों के बयान भी लेती है। लेकिन धारा-161 के तहत पुलिस को दिया गया बयान शपथ नहीं माना जाता है।

वकील स्वैन ने बताया कि पुलिस अधिकारी के सामने दिया गया इकबालिया बयान आरोपित के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। यदि पुलिस कबूलनामे की वीडियोग्राफी भी करवाए तो भी वह सबूत नहीं माना जाएगा। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि मीडिया रिपोर्टिंग में किए जाने वाले दावों का कोई कानूनी औचित्य ही नहीं होता है।

गौरतलब है कि मोनू मानेसर को हरियाणा पुलिस ने फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट करने के आरोप में 12 सितंबर 2023 को गिरफ्तार किया था। उसे कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने के निर्देश दिए थे। बाद में ट्रांजिट रिमांड पर राजस्थान पुलिस को सौंप दिया।

हरियाणा पुलिस ने जो कुछ किया है, उसमें कानूनी प्रक्रिया का पालन हुआ है। बावजूद इसके एक धड़ा हरियाणा पुलिस की इस कार्रवाई को लेकर नाखुश भी है। यह स्वभाविक भी है क्योंकि गैर बीजेपी शासित राज्यों में एजेंसियों के कामकाज में बाधा डालने का फैशन भी हम इसी दौर में देख रहे हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कानून के शासन में भरोसा रखने वाली बीजेपी सरकारों के कामकाज को हम विपक्ष शासित राज्यों के रवैए के आधार पर परखें।

मोनू मानेसर का अब तक कानून की गिरफ्त से दूर रहना राजस्थान पुलिस की नाकामी है। इस प्रकरण में राजस्थान पुलिस पर जिस राजनीतिक दबाव में काम करने के आरोप लग रहे हैं, उसका जवाब देना भी राजस्थान पुलिस की ही जिम्मेदारी है। अब सवाल यह है कि क्या राजस्थान पुलिस उसी जिम्मेदारी से काम करेगी जैसा लोकतांत्रिक व्यवस्था में उससे उम्मीद की जाती है या फिर वह इस प्रकरण में पॉलिटकल आकाओं के निर्देश पर उस तरह काम करेगी जैसा उस पर आरोप लग रहे हैं। यह राजस्थान पुलिस भी जानती होगी कि इकबालिया बयान के आधार पर कोर्ट में मोनू मानेसर को दोषी साबित नहीं किया जा सकता। और उसे दोषी मानने योग्य सबूत पुलिस को अब तक नहीं मिले हैं यह पिछले दिनों खुद राजस्थान के डीजीपी बता चुके हैं।

ऐसे में यह मामला नासिर-जुनैद की कथित की हत्या की तह तक पहुँचने की जद्दोजहद कम और राजस्थान के मौजूदा राजनीतिक आका की तुष्टिकरण की राजनीति को हवा देने की कवायद अधिक दिखती है।

चित्रा त्रिपाठी, अर्नब गोस्वामी, रुबिका लियाकत, सुधीर चौधरी… जानिए उन 14 पत्रकारों के नाम जिनके कठिन सवालों से डर गई INDI गठबंधन

I.N.D.I. अलायंस अब न्यूज़ एंकरों को सीधे-सीधे बहिष्कार करेगी। गठबन्धन ने ऐसे 14 समाचार एंकरों की एक सूची जारी कर उनका खुलेआम ‘बहिष्कार’ करने का निर्णय लिया है। सूची की एक प्रति गुरुवार, (14 सितंबर, 2023 ) को कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा औपचारिक रूप से सोशल मीडिया एक्स पर साझा की गई थी। जिसके बाद चर्चा तेज है। 

विपक्षी दलों के गठबंधन की मीडिया समिति ने आज एक वर्चुअल मीटिंग करके TV न्यूज़ एंकरों की एक लिस्ट जारी की है। जिसमें विपक्ष ने इन एंकरों के बहिष्कार का निर्णय लिया है।  कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गठबंधन के निशाने पर आए समाचार एंकरों के नामों की सूची की एक प्रति साझा करते हुए लिखा, ये वह नाम है जिनके शो पर INDI अलायन्स न अपना कोई प्रतिनिधि भेजेगी और न ही पार्टी अपना कोई भी सन्देश प्रसारित कराएगी।  

सूचि में शामिल समाचार एंकरों के नाम : 

  1. अदिति त्यागी-भारत एक्सप्रेस
  2. अमन चोपड़ा-न्यूज़18
  3. अमीश देवगन-न्यूज़18
  4. आनंद नरसिम्हन-न्यूज़ 18
  5. अर्नब गोस्वामी- रिपब्लिक
  6. अशोक श्रीवास्तव-डीडी न्यूज
  7. चित्रा त्रिपाठी- आजतक
  8. गौरव सावंत – इंडिया टुडे
  9. नविका कुमार – टाइम्स नाउ
  10. प्राची पाराशर – इंडिया टीवी
  11. रुबिका लियाकत – भारत 24
  12. शिव अरूर – इंडिया टुडे
  13. सुधीर चौधरी-आज तक
  14. सुशांत सिन्हा

कल (13 सितंबर, बुधवार) एक दिलचस्प फैसले में, गठबंधन समन्वय समिति ने मीडिया पर उप-समिति को गठबंधन द्वारा बहिष्कार किए जाने वाले टीवी एंकरों के नामों पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। आई.एन.डी.आई. एलायंस ब्लॉक पार्टियाँ अपने प्रवक्ताओं को उप-समिति द्वारा चयनित एंकरों द्वारा आयोजित शो में नहीं भेजेंगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, आज INDI अलायंस ने एक ऑनलाइन बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा, “गठबंधन के समन्वय समिति ने मीडिया के उन एंकरों के नाम तय करने के लिए अधिकृत किया था, जिनके शो में INDI अलायंस में शामिल कोई भी पार्टी अपने प्रतिनिधियों को नहीं भेजेगी।” बता दें कि मीडिया के लिए बने वर्किंग ग्रुप में 19 सदस्य शामिल हैं।

गौरतलब है कि मीडिया के इस हिट-लिस्ट की घोषणा कॉन्ग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने की। वेणुगोपाल ने 13 सितंबर को विपक्षी गुट के सदस्यों द्वारा राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी सुप्रीमो शरद पवार के आवास पर एक साथ चुनाव लड़ने की रणनीति तैयार करने के लिए एक बैठक आयोजित करने के बाद एक संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि 28 सदस्यों वाली विपक्षी पार्टी के समन्वय समिति में 14 सदस्य हैं और उनमें से भी 12 ने इस बैठक में भाग लिया।

आमिर खान की जिस बीवी को भारत में लगता था डर, अब उसे फिल्मों की कमाई से हुआ दर्द: कहा- गलत मैसेज वाली फिल्में करोड़ों कमा रही

बॉलीवुड एक्टर आमिर खान की पूर्व बीवी किरण राव ने कहा है कि आजकल गलत मैसेज देने वाली फिल्में भी करोड़ों रुपए कमा रही हैं। ऐसी फिल्मों को कमाई करता देख उन्हें दुःख होता है। किरण राव ने यह भी कहा कि पूर्व शौहर आमिर खान के साथ उनका अद्भुत रिश्ता है। बताते चलें कि ये वही किरण राव हैं, जिन्होंने कहा था कि उन्हें भारत में डर लगता है।

फिल्म कंपेनियन ने किरण राव से बात की है। इसमें उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि सभी फिल्म निर्माता अच्छी फिल्में ही बनाते हैं। उनका इरादा अक्सर ही अच्छा होता है, लेकिन बॉक्स ऑफिस को लेकर अब नजरिया बदल गया है। फ़िल्म देखने वालों के पास अब बहुत सारे विकल्प मौजूद हैं। इसलिए जब कोई भी फिल्म बन रही होती है तो सभी प्रकार के दर्शकों तक पहुँचने की कोशिश होती है।” (इस बातचीत को वीडियो में 10 मिनट के बाद से सुना जा सकता है)

किरण राव ने गलत मैसेज देने वाली फिल्मों की कमाई पर दुःख जताते हुए कहा, “मुझे लगता है कि गलत मैसेज वाली फिल्में सैकड़ों करोड़ रुपए कमा रही हैं। यह देखकर मुझे दुःख होता है। फिल्म मेकर्स के पास मौका होता है कि वह किसी फिल्म को किस तरह बनाएँ, लेकिन कभी-कभी मुझे परेशान करती हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “हर फिल्म निर्माता का अपना लक्ष्य होता है, लेकिन यदि बड़ी फिल्मों को दर्शक पसंद करते और बॉक्स ऑफिस बहुत अधिक कमाई होती तो यह अच्छा होता। मैं यह नहीं कह रही हूँ कि सभी बड़ी फिल्में अच्छी नहीं होती हैं। लेकिन यदि बेहतर मैसेज देने वाली फिल्में सफल हों तो अच्छा लगता है।”

अपने पूर्व शौहर आमिर खान से संबंधों पर बात करते हुए किरण राव ने कहा, “आमिर मेरी फिल्म के प्रोड्यूसर हैं। मेरा उनके साथ अद्भुत रिश्ता है। मुझे मेरे परिवार और आमिर दोनों ने ही सपोर्ट किया है।” बता दें कि साल 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद 2015 में आमिर खान ने कहा था कि उनकी बीवी किरण राव ने उन्हें देश छोड़ने की सलाह दी है।

आमिर खान और किरण राव ने साल 2005 में निकाह किया था, लेकिन साल 2021 में दोनों ने अलग होने का फैसला करते हुए तलाक ले लिया था। शादी टूटने के बाद भी दोनों एक-दूसरे से मिलते रहे हैं। आमिर खान के प्रोडक्शन में बन रही फिल्म ‘लापता लेडिज’ का डायरेक्शन भी किरण राव ही कर रही हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले नसीरुद्दीन शाह ने भी ‘कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों की लोकप्रियता से खुद को परेशान बताया था। नसीरुद्दीन ने कहा था कि उन्होंने ‘द केरल स्टोरी’, ‘गदर 2’, ‘कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्में नहीं देखी हैं, लेकिन उन्हें पता है कि ये फिल्में किन मुद्दों पर बनाई गईं हैं। ऐसी फिल्मों का लोकप्रिय होना परेशान करनी वाली बात है।

‘जंगल-जमीन की हिफाजत करेंगे और वन संपदा से खुशहाली लाएँगे’: रायगढ़ में बोले PM मोदी, छत्तीसगढ़ के डिप्टी CM सिंहदेव ने जमकर तारीफ की

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विकास योजनाओं का शिलान्यास किया। इनमें 6400 करोड़ रुपए से अधिक की रेल परियोजनाएँ भी शामिल हैं। इस दौरान उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ विकास की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रहा है। आज यहाँ सिकल सेल एनीमिया के काउंसिलिंग कार्ड भी बाँटे गए।

भारत के विकास मॉडल से पूरी दुनिया प्रभावित

रायगढ़ के कोडातराई में आयोजित सभा में पीएम मोदी ने कहा कि आधुनिक विकास की तेज रफ्तार के साथ ही गरीब कल्याण के भी तेज रफ्तार का भारतीय मॉडल आज पूरी दुनिया देख रही है और उसकी सराहना कर रही है। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले जी-20 सम्मेलन के दौरान बड़े-बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष दिल्ली आए थे। ये सभी भारत के विकास और गरीब कल्याण के प्रयासों से प्रभावित होकर गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा, “आज दुनिया की बड़ी-बड़ी संस्थाएँ भारत की सफलता से सीखने की बात कर रही हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि आज विकास में देश के हर राज्य को, हर इलाके को बराबर प्राथमिकता मिल रही है। हमें मिलकर देश को आगे बढ़ाना है। छत्तीसगढ़ और रायगढ़ का ये इलाका भी इसका गवाह है। मैं आप सभी को इन विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ।”

छत्तीसगढ़ देश के विकास के पॉवरहाउस की तरह

रायगढ़ में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “मेरे परिवारजनों, छत्तीसगढ़ हमारे लिए देश के विकास के पावर हाउस की तरह है। देश को भी आगे बढ़ने की ऊर्जा तभी मिलेगी, जब उसके पावर हाउस अपनी पूरी ताकत से काम करेंगे। इसी सोच के साथ बीते 9 वर्षों में हमने छत्तीसगढ़ के बहुमुखी विकास के लिए निरंतर काम किया।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन नीतियों का परिणाम आज छत्तीसगढ़ में दिख रहा है। आज राज्य में केंद्र सरकार द्वारा हर क्षेत्र में बड़ी योजनाएँ पूरी की जा रही हैं। नई-नई परियोजनाओं की नींव रखी जा रही है और उन्हें समय पर पूरा किया जा रहा है।

जुलाई में किया था हाईवे प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा, “मैं जुलाई माह में विकास परियोजनाओं के लिए रायपुर आया था। तब विशाखापटनम से रायपुर और रायपुर से धनबाद इकोनॉमिक कोरिडोर जैसी परियोजनाओं के शिलान्यास का सौभाग्य मिला था। कई अहम नेशनल हाईवे का उपहार भी आपके राज्य को मिला था और आज छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क का नया अध्याय लिखा जा रहा है।”

पीएम ने कहा, “आज बिलासपुर से मुंबई रेल के विस्तार से बिलासपुर की व्यस्तता कम होगी। इसके साथ ही रेल कोरिडोर बन रहे हैं। इससे छत्तीसगढ़ के विकास में मदद मिलेगी। इन सभी प्रोजक्ट्स से रोजगार के नए अवसर भी पैदा भी हो रहे हैं। केंद्र सरकार के आज के प्रयासों से देश के पावर हाउस के रूप में छत्तीसगढ़ की ताकत भी कई गुना बढ़ती जा रही है।

जंगल-जमीन की हिफाजत भी, वन संपदा से खुशहाली भी

पीएम मोदी ने आगे कहा, “हमारा संकल्प है कि हम जंगल-जमीन की हिफाजत भी करेंगे और वन संपदा से खुशहाली के रास्ते भी खोलेंगे। आज वन-धन विकास योजना का लाभ देश के लाखों आदिवासी युवाओं को हो रहा है। इस साल दुनिया मिलेट ईयर भी मना रही है। आप कल्पना कर सकते हैं आने वाले वर्षों में हमारे श्रीअन्न, हमारे मिलेट्स कितना बड़ा बाजार तैयार कर सकते हैं। यानी आज एक और देश की जनजातीय परंपरा को नई पहचान मिल रही है तो दूसरी ओर प्रगति के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।”

केंद्र सरकार ने नहीं किया कोई भेदभाव: टीएस सिंहदेव

रायगढ़ की रैली में मंच पर मौजूद रहे छत्तीसगढ़ के उप-मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “संघीय व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में राज्य सरकारें काम करती हैं। मैंने ये महसूस किया कि केंद्र सरकार ने हमारा भरपूर सहयोग किया। हमने राज्य के लिए केंद्र सरकार से जो कुछ भी माँगा, कभी निराशा नहीं मिली। केंद्र सरकार ने हमारे साथ कोई भी भेदभाव नहीं किया।”

‘मुझे कुछ हुआ तो मोहम्मद जुबैर होगा जिम्मेदार’: वेंकटेश प्रसाद के मीडिया मैनेजर को इस्लामी कट्टरपंथी दे रहे धमकी, नुपूर शर्मा की तरह ही अमृतांशु गुप्ता बने निशाना

फेक न्यूज की फैक्ट्री मोहम्मद जुबैर ने कुछ दिन पहले ही पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद का सोशल मीडिया प्रोफाइल हैंडल करने वाले अमृतांशु गुप्ता की जानकारियाँ एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की थीं। इसके बाद अमृतांशु गुप्ता को ऑनलाइन शिकार बनाया जा रहा था।

अब अमृतांशु गुप्ता ने कहा है कि उन्हें न सिर्फ सोशल मीडिया पर, बल्कि फोन कॉल्स के माध्यम से भी जान से मारने की धमकी दी जा रही है। उन्होंने इस बारे में कुछ स्क्रीनशॉट्स भी शेयर किए हैं। अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा है कि अगर उन्हें कुछ भी होता है, तो उसका जिम्मेदार मोहम्मद जुबैर होगा।

अमृतांशु को मिल रही हैं फोन-सोशल मीडिया पर धमकियाँ

अमृतांशु गुप्ता ने कहा कि मोहम्मद जुबैर ने जानबूझकर उनके कुछ पुराने ट्वीट्स निकाले और उन्हें शेयर कर एंटी मुस्लिम साबित करने की कोशिश की। हालाँकि, अमृतांश के उन ट्वीट्स में इस्लामोफोबिक कंटेंट जैसा कुछ भी नहीं था। एक तो बाकायदा न्यूज लिंक का ट्वीट है। हालाँकि, फेक न्यूज पेडलर जुबैर इसे एंटी-मुस्लिम साबित करने की कोशिश रहा है। इसके बाद से उन्हें फोन और सोशल मीडिया पर धमकियाँ मिल रही हैं।

अमृतांशु ने लिखा, “मोहम्मद जुबैर ने मेरे ट्वीट्स की गलत व्याख्या करके यह सुनिश्चित कर दिया है कि मुझे धमकी भरे कॉल और धमकाने वाले मैसेज मिलें। मैं 14 वर्षों से ट्विटर पर हूँ, लेकिन उन्हें ‘मुस्लिम’ कीवर्ड के साथ 3 ट्वीट मिले। उनमें से 1 एचटी का लेख है, जिसमें पत्रकार पर व्यंग्यात्मक लेख था।”

मुझे कुछ हुआ, तो जिम्मेदार होगा मोहम्मद जुबैर

अमृतांशु ने लिखा है, “मेरे ट्वीट्स का गलत मतलब लोगों को समझाया गया और लोगों को मेरे खिलाफ भड़काया गया।” उन्होंने आरोप लगाया है कि जुबैर इस मामले को हिंदू बनाम मुस्लिम बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने यूपी पुलिस को टैग करते हुए लिखा है कि अगर उन्हें कुछ भी होता है तो उसका जिम्मेदार मोहम्मद जुबैर होगा।

नुपूर शर्मा की तर्ज पर अमृतांशु को शिकार बनाने की कोशिश

बता दें कि मोहम्मद जुबैर ने वेंकटेश प्रसाद से डाँट खाने के बाद अमृतांशु गुप्ता को निशाने पर लिया था। जुबैर ने अमृतांशु की डिटेल्स सोशल मीडिया पर शेयर कर दी थी, ताकि उसकी ट्रोल आर्मी अमृतांशु को अपना शिकार बना सके।

ये ठीक उसी तरह का पैटर्न है, जिसकी शिकार बीजेपी नेता नुपूर शर्मा को बनाया गया था। मोहम्मद जुबैर ने पूर्व भारतीय क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद के ट्विटर हैंडल को मैनेज करने वाले डिजिटल स्ट्रेटजिस्ट और सलाहकार अमृतांशु गुप्ता पर भी अपनी ट्रोल सेना उतार दी।

मंदिर पर भगवा झंडा लगाने की अनुमति देने से केरल हाई कोर्ट का इनकार, कहा- राजनीति के लिए नहीं हो सकता मंदिरों का इस्तेमाल

केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें मुथुपिलक्कडु श्री पार्थसारथी मंदिर के परिसर में भगवा झंडे लगाने की अनुमति माँगी गई थी। केरल हाई कोर्ट के जज राजा विजयराघवन वी ने कहा कि राजनीतिक वर्चस्व के लिए पवित्र मंदिर का उपयोग करना गलत है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस मामले में कुछ राजनीतिक दलों से जुड़े झंडों का उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। 

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मंदिर आध्यात्मिक शांति के प्रतीक हैं, उनकी पवित्रता और श्रद्धा सर्वोपरि है। ऐसे में पवित्र आध्यात्मिक आधारों को राजनीतिक चालबाज़ी या एकाधिकार के प्रयासों से कम नहीं किया जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं के कार्य और इरादे मंदिर में बनाए रखे जाने वाले शांत और पवित्र वातावरण के विपरीत है। 

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका मुथुपिलक्कडु श्री पार्थसारथी मंदिर के भक्तों की तरफ से दो व्यक्तियों द्वारा दायर की गई थी। उन्होंने मंदिर और उसके भक्तों के कल्याण के लिए 2022 में पार्थसारथी बक्थजन समिति नामक एक संगठन का गठन किया था। कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील पीटी शीशिश, ए अब्दुल रहमान, अपर्णा वी देवासिया और हेमंत एच ने पक्ष रखा। 

भक्तों का कहना है कि जब भी उन्होंने त्योहारों के दौरान मंदिर परिसर में भगवा झंडे लगाने का प्रयास किया तो विरोधियों ने उन्हें लगाने से मना कर दिया। हर बार उन्हें रोक दिया गया। इसलिए भक्तों ने अदालत से पुलिस को उन्हें सुरक्षा देने के लिए माँग की थी ताकि उन्हें परम्परानुसार झंडे लगाने से न रोका जाए।

वहीं भक्तों की याचिका का विरोध करते हुए केरल की कम्युनिस्ट सरकार के वकील अप्पू पीएस ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं को एक निश्चित राजनीतिक दल से जुड़े झंडों से मंदिर को सजाने की अनुमति देना मंदिर को राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई के लिए खुला छोड़ देना है। इस प्रकार की आज्ञा देना मंदिरों को युद्ध के मैदान के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति देने के समान होगा। 

यहाँ दरअसल, भगवा झंडे को राज्य में बीजेपी के झंडे से जोड़कर देखा जा रहा है। इसी सन्दर्भ में सरकारी वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की वजह से मंदिर परिसर में कई झड़पें हुई हैं, जिनमें से एक कई मामलों में FIR भी दर्ज है। इसके अलावा, मंदिर की प्रशासनिक समिति ने एक प्रस्ताव पारित कर कनिक्कावांची के 100 मीटर के दायरे में किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के झंडे, बैनर आदि लगाने पर रोक लगा दी है। 

केरल हाई कोर्ट में सरकारी वकील ने उच्च न्यायालय का 2020 का एक फैसला भी दिखाया जिसमें पुलिस को मंदिर परिसर से ऐसे सभी चिन्हों हटाने का आदेश दिया गया था। बता दें कि इस मामले में कोर्ट ने सरकारी वकील की दलीलों के आधार पपर भक्तों की याचिका को ख़ारिज करते हुए उन्हें मंदिरों में भगवा झंडा लगाने से मना कर दिया।

गौरतलब है कि केरल के अधिकांश मंदिरों पर केरल सरकार का अधिपत्य है। केरल सरकार ही मंदिरों की व्यवस्था संभालती है। 

‘कर्नल बेटा चला गया’: अनंतनाग में बलिदान हुए मनप्रीत सिंह ने ही किया था बुरहान वानी को ढेर; 2021 में मिला वीरता पदक; सेना से जुड़ा है पूरा परिवार

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में मंगलवार (12 सितंबर, 2023) को भारतीय सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में 3 अधिकारी वीरगति को प्राप्त हो गए थे। इनमें कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष धोंचक और DSP हुमायूँ भट्ट शामिल हैं। मुठभेड़ में 2 आतंकी भी मार गिराए गए थे। बलिदान हुए कर्नल मनप्रीत सिंह बलिदान होने से कुछ देर पहले ही अपने घरवालों से बात की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मूल रूप से पंचकुला के रहने वाले कर्नल मनप्रीत सिंह के परिवार में उनकी माँ, पत्नी और दो बच्चे हैं। उनका बेटा 6 साल, जबकि बेटी ढाई साल की है। पत्नी जगमीत ग्रेवाल टीचर हैं। वीरगति प्राप्ति की सूचना के बाद कर्नल मनप्रीत के घर और गाँव में माहौल गमगीन है।

कर्नल मनप्रीत के पिता लखमीर सिंह सेना से बतौर सिपाही भर्ती हुए थे और हवलदार के रूप में रिटायर हुए थे। साल 2014 में उनकी मौत हो गई। वहीं, कर्नल मनप्रीत के दादा स्वर्गीय शीतल सिंह, उनके भाई साधु सिंह और त्रिलोक सिंह सेना से रिटायर्ड थे। उनके चाचा भी सेना से रिटायर हैं।

मीडिया से बात करते हुए कर्नल सिंह की माँ ने कहा, “मेरा कर्नल शहीद हो गया। मेरे दिल का टुकड़ा शहीद हो गया। रविवार को मेरी बात हुई थी। तब मनप्रीत ने कहा था कि मैं सो कर उठा हूँ मम्मी, तुम भी आराम कर लो।” कर्नल सिंह अगले महीने अपने बेटे के जन्मदिन पर घर आने का वादा किया था।

मनप्रीत के ससुर जगदेव सिंह ने कहा, “हम इस समय बहुत ज्यादा दुःखी हैं। मनप्रीत 3 साल पहले प्रमोशन पाकर कर्नल बने थे। पिछले साल उन्हें सेना मेडल मिला था।” तीन भाई-बहनों में सबसे बड़े मनप्रीत सिंह का पार्थिव शव 14 सितंबर 2023 को शाम तक मोहाली लाया जा सकता है।

मोहाली से उनका शव अंतिम संस्कार के लिए उनके पैतृक गाँव भारांजिया ले जाया जा सकता है। मनप्रीत के बहनोई वीरेंद्र ने मुठभेड़ के दिन ही उनसे 6:45 शाम के आसपास फोन पर बात करने की बात कही। तब जवाब में मनप्रीत सिंह ने कहा, “अभी मैं कॉर्डन में हूँ। बाद में बात करता हूँ।”

मनप्रीत के भाई संदीप सिंह ने बताया कि 6 दिन पहले उनके भाई ने एक काम सौंपा था। उसी काम के सिलसिले में उन्होंने घटना के दौरान अपने भाई को कॉल किया। हालाँकि, तब मनप्रीत सिंह का फोन नहीं उठा और कुछ ही देर बाद उनके वीरगति की खबर आई।

41 वर्षीय कर्नल सिंह उस बटालियन का नेतृत्व कर रहे थे, जो आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही थी। मनप्रीत सिंह 12वीं सिख लाइट इन्फेंट्री से थे। आतंकियों को मार गिराने के लिए उन्हें साल 2021 में वीरता पदक दिया गया था। साल 2016 में आतंकवादी बुरहान वानी को भी उन्होंने ढेर किया था। कर्नल मनप्रीत साल 2003 में CDS की परीक्षा पास कर ट्रेनिंग के बाद 2005 में लेफ्टिनेंट बने थे।

बिहार में अब दैनिक जागरण के पत्रकार पर बाइक सवारों ने की फायरिंग, इससे पहले घर में घुसकर एक की कर दी गई थी हत्या

बिहार में एक बार फिर पत्रकार पर हमले की घटना सामने आई है। लखीसराय जिले में दैनिक जागरण के पत्रकार अवध किशोर यादव गुरुवार (14 सितंबर 2023) की सुबह अपनी बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान बाइक सवार 3 बदमाशों ने उन पर फायरिंग कर दी। इस हमले में अवध किशोर बाल-बाल बच गए।

रिपोर्ट के अनुसार, अवध किशोर दैनिक जागरण के पत्रकार हैं। वह अपने गाँव धीरा से हलसी जा रहे थे। हलसी-सिकंदरा रोड पर पहुँचते ही बाइक सवार हमलावरों ने उन पर गोली चला दी, लेकिन हमलावरों को गोली चलाते देख अवध किशोर बचने के लिए झुक गए। ऐसे में गोली उनके बगल से निकल गई।

गोलीकांड की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची। घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज के सहारे आरोपितों की फोटो हासिल कर पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पत्रकार अवध किशोर का कहना है कि 9 साल पहले 5 जुलाई 2014 को बदमाशों ने उनके पिता कामेश्वर यादव की हत्या कर दी थी। अवधकिशोर इसके गवाह हैं।

अवध किशोर का कहना है कि उनके पिता की हत्या के मामले में मुख्य आरोपित रंजीत को आजीवन कारावास की सजा हुई है। वह करीब एक महीने पहले जमानत पर बाहर आया है। अवध किशोर को आशंका है कि रंजीत ने ही उनकी हत्या की प्लानिंग की थी। हालाँकि, वे हमलावरों को पहचान नहीं पाए।

एक महीने के भीतर दूसरे पत्रकार पर हमला

बता दें कि बिहार में एक महीने के भीतर यह दूसरे पत्रकार पर हमला है। इससे पहले 18 अगस्त 2023 को अररिया जिले में दैनिक जागरण के ही पत्रकार विमल कुमार यादव के घर में घुसकर 4 आरोपितों ने उनके सीने में कई गोलियाँ मार दी थीं। इससे मौके पर उनकी मौत हो गई थी। विमल कुमार अपने भाई शशिभूषण की हत्या के इकलौते गवाह थे।