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आदित्य L-1 मिशन को सफल बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने परफ्यूम लगाना छोड़ दिया था, जानें इसके पीछे क्या है वजह

भारत ने सूर्य का अध्ययन करने वाले अपने पहले सोलर मिशन आदित्य एल-1 को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है। 2 सितंबर 2023 को लॉन्चिंग से पहले वैज्ञानिकों ने इस मिशन को सफल बनाने के लिए क्या-क्या किया, उनकी मेहनत के बारे में धीरे-धीरे जानकारी सामने आ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, आदित्य एल-1 की सफल लॉन्चिंग तक वैज्ञानिकों ने परफ्यूम लगाना छोड़ दिया था।

आदित्य एल-1 के मुख्य पेलोड पर काम करने वाले वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए परफ्यूम लागने की सख्त मनाही थी। मुख्य पेलोड विजिबल एमिशन लाइन कोरोनाग्राफ (VELC) का निर्माण निर्माण करने वाली इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) की टीम को परफ्यूम या किसी तरह का स्प्रे से दूर रहने के लिए कहा गया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, VELC को बेंगलुरु के पास होसकोटे में स्थित अत्याधुनिक वाइब्रेशन एंड थर्मोटेक फैसिलिटी सेंटर में बनाया गया था। यहाँ कंपोनेंट लेवल वाइब्रेशन डिटेक्टर्स और ऑप्टिकल एलिमेंट्स को इंटीग्रेट करने का काम किया गया था। इस काम को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद इसे प्रदूषण से रहित किया गया था।

इसे बनाने वाली टीम ने भविष्य के खोजकर्ताओं से मिलते-जुलते फुल-सूट रिहर्सल में इलेक्ट्रोस्टैटिक डिस्चार्ज और प्रदूरषण फैलाने वाली चीजों को क्लीन रूम से दूर रखने का अभ्यास किया था। इस दौरान क्लीन रूम में परफ्यूम लगाकर आना भी प्रतिबंधित था। टीम के हर एक सदस्य को अल्ट्रासोनिक क्लीनिंग प्रोसेस से होकर गुजरना पड़ता था।

VELC तकनीकी टीम के प्रमुख नागाबुशाना एस ने बताया, “क्लीनरूम को अस्पताल के ICU से 1 लाख गुना अधिक साफ रखना पड़ता था।” दरअसल, वैज्ञानिकों ने जो सूट पहना था, वे सेंसर और ऑप्टिक्स की रक्षा करने वाली ढाल थे। इसके कारण क्लीन रूम में किसी तरह का प्रदूषण नहीं पहुँच पाता था।

IIA के VELC तकनीकी टीम के सदस्य सनल कृष्णा ने कहा, “हमने यह सुनिश्चित करने के लिए HEPA (उच्च दक्षता वाले पार्टिकुलेट एयर) फिल्टर, आइसोप्रोपिल अल्कोहल और कड़े प्रोटोकॉल का पालन किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य पार्टिकल्स हमारी प्रक्रिया में व्यवधान ना डाले। एक भी पार्टिकल के डिस्चार्ज से हमारी कई दिनों की मेहनत बर्बाद हो सकती थी।”

इस दौरान वैज्ञानिकों ने मेडिकल स्प्रे का भी इस्तेमाल करने से परहेज किया। इसलिए मिशन के दौरान उन्हें परफ्यूम लगाना भी छोड़ना पड़ा था। आदित्य एल-1 को किसी भी कीमत पर सफल बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने कोई भी कसर नहीं छोड़ी और हर सावधानी बरती। इसका उत्साहजनक परिणाम भी सामने आया और आदित्य एल-1 सफलतापूर्वक अपने लक्ष्य की ओर बढ़ चला है।

मियाँ इश्तियाक, बीवी हिना, साले अजहर का घर, घर में 10 साल की बच्ची… नौकरानी वाले काम करवाते, सिगरेट से जलाते थे प्राइवेट पार्ट को

महाराष्ट्र के नागपुर में 10 साल की बच्ची को टॉर्चर करने के आरोप में एक पति-पत्नी और साले पर FIR दर्ज हुई है। तीनों पर आरोप है कि उन्होंने बच्ची को नौकरानी के तौर पर रखा था। घरेलू काम करवाने के अलावा बच्ची को न सिर्फ बेरहमी से पीटा गया बल्कि उसके नाजुक अंगों को भी जलाया गया है। आरोपित मियाँ-बीवी ताहा अनवर इश्तियाक और हिना हैं। वहीं साले का नाम अज़हर बताया जा रहा है।

नाबालिग बच्ची को बचाते हुए पुलिस ने ताहा अनवर इश्तियाक को गिरफ्तार कर लिया है। आगे की जाँच की जा रही है। घटना गुरुवार (31 अगस्त 2023) की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना नागपुर के थानाक्षेत्र हुडकेश्वर की है। यहाँ पीपला-बेसा रोड पर अथर्व नगरी में 39 वर्षीय अनवर इश्तियाक और उसकी 26 वर्षीया बीवी हिना के साथ साला अजहर भी रहता था।

मियाँ-बीवी-साले तीनों पर आरोप है कि इन्होंने साल 2021 में पंजाब से 10 साल की बच्ची को बतौर घरेलू सहायिका 50 हजार रुपए में खरीदा था। इसके बाद तीनों आरोपित मिल कर पीड़िता को पिछले 4 वर्षों से प्रताड़ित कर रहे थे। आरोप है कि तीनों मिल कर न सिर्फ बच्ची को बुरी तरह से पीटते थे बल्कि उसके प्राइवेट पार्ट को भी जलाते थे।

पीड़ित बच्ची को कहीं भी बाहर निकलने नहीं दिया जाता था। उससे सारे घेरलू काम करवाए जाते थे। हिना का बेटा भी आए दिन बच्ची को गालियाँ दिया करता था। आदतन नशेड़ी इश्तियाक जलती सिगरेट से बच्ची के नाजुक अंगों को जलाता था।

बच्ची की प्रताड़ना का खुलासा तब हुआ, जब घटना के दिन गुरुवार को बिजली विभाग के कुछ लोग बिल न जमा होने पर इश्तियाक का कनेक्शन काटने पहुँचे। तब आरोपित खान का परिवार बच्ची को बाथरूम में बंद करके बेंगलुरु गया हुआ था। बच्ची द्वारा मदद की गुहार लगाने पर बिजली विभाग के कर्मचारियों ने दरवाजे को तोड़ कर उसे बाहर निकाला।

यहीं से घटना की सूचना पुलिस को दी गई। इसके बाद पुलिस ने बच्ची को अपने कब्ज़े में लिया। डरी-सहमी बच्ची सिर्फ खुद को पंजाब की रहने वाली बता पाई है। नागपुर पुलिस ने बेंगलुरु पुलिस से सम्पर्क किया, जहाँ हिना और इश्तियाक को हिरासत में ले लिया गया। दोनों को नागपुर पुलिस के हवाले कर दिया गया है।

पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया बच्ची के बेंगलुरु से आने की जानकारी मिली है। पुलिस द्वारा अब तक इश्तियाक की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है। इश्तियाक को एयरपोर्ट से पकड़ा गया है। बच्ची के ज़ख्मों का इलाज करवाने के साथ-साथ काउंसिलिंग भी करवाई जा रही है। पुलिस केस की जाँच कर रही है। पीड़िता के परिवार की भी तलाश की जा रही है।

‘सनातन धर्म और कुछ नहीं, जातियों में विभाजित समाज है’: हजरतबल दरगाह में सजदा करने वाले कार्ति चिदंबरम ने दिया ‘ज्ञान’, मनी लॉन्ड्रिंग में जा चुके हैं तिहाड़

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन द्वारा सनातन को मच्छर की तरह खत्म करने के बयान पर बवाल हो गया है। इस बीच कॉन्ग्रेस के नेता और पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम के बेटे कार्ति ने कहा कि सनातन धर्म और कुछ नहीं, बल्कि जातियों के बंटवारे पर आधारित समाज है। उन्होंने इसे अभिशाप बताया।

उदयनिधि के बयान पर जारी बहस के बीच कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “सनातन धर्म जातियों में विभाजन के लिए नियम के अलावा और कुछ नहीं है। इसकी वकालत करने करने वाले सभी अच्छे पुराने दिनों के लिए उत्सुक हैं! जाति भारत का अभिशाप है।”

उन्होंने आगे कहा, “तमिलनाडु की आम बोलचाल में ‘सनातन धर्म’ का अर्थ जाति पदानुक्रमित समाज है। ऐसा क्यों है कि हर कोई जो सनातन धर्म की वकालत कर रहा है, वह विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग से आता है और इस ‘पदानुक्रम’ का लाभार्थी है। किसी के खिलाफ ‘नरसंहार’ का कोई आह्वान नहीं किया गया था, यह एक शरारती फिरकी है।”

बताते चलें कि सनातन धर्म पर ज्ञान देने वाले कार्ति चिदंबरम ने सितंबर 2021 में कश्मीर के हजरतबल दरगाह जाकर वहाँ सजदा किया था। इसकी तस्वीर भी उन्होंने बड़े गर्व के साथ ट्विटर पर डाली थी और कहा था कि कश्मीर के ‘हजरतबल में शुक्रवार की नमाज पढ़ा’।

कहा जाता है कि इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का यहाँ बाल रखा हुआ है। 1963-64 में मू-ए-मुकद्दस (पैगंबर मोहम्मद की दाढ़ी का बाल) चोरी हो गया था। हालांकि, बाद में यह रहस्यमयी ढंग से मिल भी गया था। उसके बाद से यह दरगाह चर्चित हो गया।

ये वही कार्ति चिदंबरम पर हैं, जिन पर भ्रष्टाचार के कई केस हैं। प्रवर्तन निदेशायल (ईडी) ने उन्हें 16 अक्टूबर 16 2019 को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया था। कार्ति पर आरोप है कि अपने पिता पी. चिदंबरम के केंद्र में मंत्री रहते समय कार्ति ने कई कंपनियों से पैसे लेकर उन्हें फायदा पहुँचाया है।

आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में 305 करोड़ रुपये का विदेशी धन प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने में अनियमितता बरतने का आरोप चिदंबरम पर है। उस समय वे केंद्र में वित्त मंत्री थे। सीबीआई ने 15 मई 2017 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद, ईडी ने 2017 में इस संबंध में धन शोधन का मामला दर्ज किया था।

मुस्लिमों के चेहल्लुम पर मुंगेर में 18 मंदिर और 8 महापुरुषों को खतरा: बिहार पुलिस ने बाँस-बल्ली से घेरा, BJP ने की हटाने की माँग

मुंगेर में मुस्लिमों द्वारा मनाए जाने वाले इमाम हुसैन के शहादत पर्व चेहल्लुम (चालीसवाँ) और श्री कृष्ण जन्माष्टमी को देखते हुए बिहार पुलिस के हाथ-पाँव फुले हुए हैं। चेहल्लुम पर मुस्लिमों द्वारा निकाले जाने वाले जुलुस को देखते हुए पहले से ही शहर के आठ महापुरुषों की मूर्तियों सहित 18 मंदिरों को सुरक्षा के लिहाज से बाँस-बल्ली से घेर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह दावा किया जा रहा है कि शुक्रवार (1 सितम्बर, 2023) को हुए शांति समिति की बैठक में मुस्लिमों द्वारा माँग की गई थी कि जिस रास्ते से चेहल्लुम का जुलूस निकलेगा उसमें पड़ने वाले सभी मंदिरों और मूर्तियों को सुरक्षित कर दिया जाए। ऐसी माँग की रूप रेखा एक दिन पहले ही गुरुवार (31 अगस्त, 2023) को हुए केंद्रीय पहलाम कमेटी के सचिव जफ़र अहमद की अध्यक्षता में सभी अखाडा समिति के सदस्यों की बैठक में लिया गया था। जिस पर अमल करते हुए सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने ये आदेश दिया था।

बता दें कि जिन महापुरुषों की प्रतिमा को बाँस-बल्ली से घेरा गया है, उसमें राजीव गाँधी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, महात्मा गाँधी, शिवा जी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, डॉ राजेंद्र प्रसाद और भगत सिंह हैं। इसके अलावा शहर के 18 अलग-अलग हिन्दू मंदिर भी शामिल हैं जिसकी घेराबंदी की गई है। मुस्लिमों की भीड़ से डरकर इस तरह की घेराबंदी को देखते हुए मुंगेर के आम लोगों में भी आक्रोश की बात सामने आई है। वहीं बीजेपी ने भी इसका विरोध किया है। 

वहीं, हिन्दू मूर्तियों और मंदिरों पर घेराव की तस्वीरें सामने आने के बाद शनिवार (2 सितम्बर, 2023) हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध किया। बीजेपी ने मुंगेर प्रशासन के इस आदेश का विरोध करते हुए अगले 24 घंटे के अंदर इसे हटाने की बात कही है। साथ ही सोमवार तक घेराव नहीं हटने पर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।

बीजेपी ने दी आंदोलन की चेतावनी

रिपोर्ट के अनुसार, मुंगेर से भाजपा विधायक प्रणव कुमार ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि चेहल्लुम को लेकर शहर में पहली बार महापुरुषों की प्रतिमा और मंदिरों को बाँस-बल्ली से घेरा जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा मुस्लिमों की माँग महापुरुषों को इस तरह से बंद कर देना सरासर गलत है। 

विधायक ने कहा कि हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार नवरात्रि होता है। उस दौरान न जाने कितने अखाड़ा दल सदस्यों द्वारा इस रास्ते से अखाड़ा निकाला जाता है, लेकिन कहीं किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती हैं। भाजपा विधायक ने कहा कि यदि रविवार तक सभी महापुरुषों पर लगाए गए बैरिकेडिंग को नहीं हटाया तो अगले दिन भाजपा जिला प्रशासन और राज्य की नीतीश सरकार के खिलाफ आंदोलन और प्रदर्शन करेगी, जिसका जिम्मेदार पूर्ण रूप से जिला प्रशासन होगा।

वहीं, बीजेपी और स्थानीय लोगों के विरोध को देखते हुए यह भी कहा जा रहा है कि प्रशासन द्वारा यह आदेश दिया गया है कि सभी महापुरुषों की प्रतिमा पर लगाया गया बाँस-बल्ली का  घेराव हटा दिया जाए।

क्या है चेहल्लुम 

बता दें कि कर्बला के मैदान में शहीद हुए इमाम हुसैन व उनके 71 अनुयायियों की शहादत के चालीस दिन बाद चेहल्लुम मनाया जाता है। इमाम हुसैन मोहर्रम की दसवीं पर शहीद हुए थे, चालीसवें पर मुस्लिम समुदाय के लोग उनके और उनके साथियों की शहादत को याद करते हुए मातम मनाते हैं। 

गौरतलब है कि इस बार मुंगेर में चेहल्लुम पर 28 लाइसेंस प्राप्त अखाड़ा दलों द्वारा इमाम हुसैन की शहादत की याद में चेहल्लुम का जुलुस निकालने की तैयारी है। 6 और 7 सितम्बर को जन्माष्टमी है और उसी रात 11 बजे से ही चेहल्लुम का जुलुस निकलना शुरू हो जाता है। इस साल 7 सितंबर को चेहल्लुम मनाया जाएगा और 8 सितंबर की सुबह विसर्जन किया जाएगा।

‘कानूनी कार्रवाई की धमकी से डरने वाले नहीं’: सनातन को मच्छर की तरह खत्म करने वाली बात पर कायम हैं तमिलनाडु के मंत्री उदयनिधि स्टालिन, कहा था- ईसाई होने पर गर्व

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार (2 सितंबर 2023) को कहा कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है। ईसाई होने पर गर्व करने वाले उदयनिधि ने कहा कि सनातन का सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। इतना ही नहीं, उदयनिधि ने कहा कि इसको लेकर अगर कोई कानूनी कार्रवाई की बात करता है तो वो इससे डरने वाले नहीं हैं।

दरअसल, उदयनिधि ने सनातन धर्म मिटाने की बात कही थी। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

उदयनिधि ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू, मलेरिया, कोरोना ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा, “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

सोशल मीडिया साइट पर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की लगातार माँग उठ रही है। इसी बीच ‘लीगल राइट्स ऑजरवेटरी- LRO’ नाम के एक एक्स हैंडल ने उदयनिधि पर कानूनी कार्रवाई की बात कही। LRO हैंडल ने लिखा, “हम चर्च के आदेश पर सनातन धर्म को बदनाम करने वाले गंदे मच्छरों को खत्म करने के लिए विभिन्न कानूनी उपाय तलाशेंगे! आप सज़ा से बचेंगे नहीं उदय स्टालिन।”

LRO के इस पोस्ट पर तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके सरकार में युवा कल्याण और खेल विकास मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने जवाब दिया और कहा कि वे अपनी बात पर कायम हैं। उदयनिधि ने कहा कि वो धमकी से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने खुद को परियार-कलैग्नार का अनुयायी बताते हुए कहा कि जो है, उसे उन्होंने सामने रखा है। इससे उनकी सनातन धर्म को रोकने की भावना बिल्कुल कम नहीं होगी।

उदयनिधि ने LRO के जवाब में कहा, “मैं किसी भी कानूनी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार हूँ। हम ऐसी भगवा धमकियों से डरने वाले नहीं हैं। हम पेरियार, अन्ना और कलैग्नार के अनुयायी हैं। हम माननीय मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के कुशल मार्गदर्शन में सामाजिक न्याय को बनाए रखने और एक समतावादी समाज की स्थापना के लिए हमेशा लड़ते रहेंगे। मैं आज, कल और सदैव यही कहूँगा- द्रविड़ भूमि से सनातन धर्म को रोकने का हमारा संकल्प रत्ती भर भी कम नहीं होगा।”

डीएमके नेता के इस आपत्तिजनक बयान को लेकर तमिलनाडु के भाजपा अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने उदयनिधि पर निशाना साधा है। अन्नामलाई ने उदयनिधि के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा कि तमिलनाडु अध्यात्म की भूमि है। उन्होंने इसे ईसाई मिशनरियों का विचार बताया और कहा कि उदयनिधि जैसे मंत्री इस तरह के कार्यक्रम में आकर दुर्भावना को बढ़ा रहे हैं।

के. अन्नामलाई ने कहा, “गोपालपुरम परिवार का एकमात्र संकल्प राज्य सकल घरेलू उत्पाद से अधिक संपत्ति जमा करना है। थिरु उदयनिधि स्टालिन आप, आपके पिता या उनके विचारक के पास ईसाई मिशनरियों से खरीदा हुआ विचार है और उन मिशनरियों का विचार आप जैसे मूर्खों को अपनी दुर्भावनापूर्ण विचारधारा को बढ़ावा देने के लिए तैयार करना था। तमिलनाडु अध्यात्म की भूमि है। सबसे अच्छा काम जो आप कर सकते हैं, वह है इस तरह के कार्यक्रम में माइक पकड़ना और अपनी निराशा व्यक्त करना!”

भाजपा नेता अमित मालवीय ने एक्स पोस्ट में लिखा, “तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के बेटे और डीएमके सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को मलेरिया और डेंगू से जोड़ा है। उनका मानना है कि इसका सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। संक्षेप में वह सनातन धर्म का पालन करने वाली भारत की 80 प्रतिशत आबादी के नरसंहार के लिए आह्वान कर रहे हैं। द्रमुक विपक्षी गुट का एक प्रमुख सदस्य और कॉन्ग्रेस का लंबे समय से सहयोगी है। क्या मुंबई बैठक में इसी पर सहमति बनी थी?”

बताते चलें कि उदयनिधि स्टालिन ने पिछले साल क्रिसमस के कार्यक्रम में शामिल होने पर कहा था, “मुझे अपने आप को ईसाई कहने पर गर्व है। आज सभी संघी जल रहे होंगे, क्योंकि तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री शेखरबाबू ‘हेलेलुजाह’ कह रहे हैं, उदयनिधि कह रहे हैं ‘मैं एक ईसाई हूँ’।”

रामनाथ कोविंद, अमित शाह, गुलाम नबी आज़ाद… ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर मोदी सरकार ने बनाई कमिटी, इन 8 नामों को मिली जगह

देश में अगले साल लोकसभा चुनाव होने हैं। वहीं मोदी सरकार की घोषणा के बाद वन नेशन, वन इलेक्शन पर बहस तेज हो गई है। इस मामले में केंद्र सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सदस्यों के नामों का ऐलान कर दिया है। 8 सदस्यीय समिति में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी और गुलाम नबी आजाद भी शामिल हैं। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक राष्ट्र, एक चुनाव को लेकर कानून मंत्रालय ने शनिवार (2 सितम्बर, 2023) को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। 

8 सदस्यीय समिति में कौन-कौन है शामिल 

बता दें कि केंद्र की मोदी सरकार ने शुक्रवार (1 सितम्बर, 2023) को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नेतृत्व में एक देश, एक चुनाव (One Nation, One Election) की जाँच के लिए एक कमेटी बनाई थी। वहीं अब कानून मंत्रालय ने समिति के सभी 8 सदस्यों की जानकारी दी है।

इस समिति में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, लोक सभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद, पूर्व वित्त आयोग के चैयरमैन एनके सिंह, संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरीश साल्वे, पूर्व चीफ सीवीसी संजय कोठारी सदस्य बनाए गए हैं। वहीं, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को कमेटी में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया है। 

संसद के विशेष सत्र में पेश हो सकता है विधेयक

गौरतलब है कि जब से केंद्र सरकार ने जी-20 शिखर सम्मेलन के बाद संसद का विशेष सत्र बुलाया है। तभी से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि मोदी सरकार एक देश, एक इलेक्शन बिल पेश कर सकती है। संसद का यह सत्र 18 से 22 सितंबर तक चलेगा।

बता दें कि विपक्षी दल मोदी सरकार के एक देश, एक चुनाव (One Nation, One Election) विधेयक के विरोध में हैं। ऐसे में मोदी सरकार के लिए संसद के दोनों सदनों से इस बिल को पारित कराना बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इसके लिए देश के आधे राज्यों की सहमति जरूरी है। अब तो यह समय ही बताएगा कि संसद के विशेष सत्र में ये विधेयक पेश होगा या नहीं। 

‘चंद्रयान 3’ और आदित्य L-1 के बाद अब गगनयान की बारी, अक्टूबर में होगी पहली टेस्ट उड़ान: केंद्रीय मंत्री ने बताया – अंतरिक्ष विज्ञान में आत्मनिर्भर बनेगा भारत

भारत के पहले सूर्य मिशन, आदित्य-L1 के सफल प्रक्षेपण के बाद, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि अगला कदम गगनयान के पहले परीक्षण उड़ान को शुरू करना होगा। उन्होंने कहा कि यह उड़ान अक्टूबर के महीने में हो सकती है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि आदित्य-L1 के सफल प्रक्षेपण से पता चलता है कि भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक प्रमुख खिलाड़ी बन रहा है।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह मिशन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश के प्रयासों का परिणाम है। आज भारत हरेक मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे रहा है।

गगनयान को लेकर जितेंद्र सिंह ने कही ये अहम बात

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि गगनयान के पहले परीक्षण उड़ान में कोई भी अंतरिक्ष यात्री शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि इस उड़ान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरिक्ष यान सुरक्षित रूप से उड़ सके और सभी प्रणालियाँ ठीक से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गगनयान के पहले मानवयुक्त मिशन के लिए तैयारी जोरों पर है। उन्होंने कहा कि इस मिशन में भारतीय अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में उतरेंगे और कुछ वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि गगनयान के सफल होने से भारत को अंतरिक्ष में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह मिशन भारत को अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेगा।

क्या है गगनयान?

गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित किया जा रहा है। इस मिशन के तहत, तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। वे तीन दिनों के लिए अंतरिक्ष में रहेंगे और कुछ वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे।

अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण जारी

गगनयान मिशन के लिए तैयारी जोरों पर है। ISRO ने इस मिशन के लिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों का चयन कर लिया है। इन अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण चल रहा है। गगनयान मिशन के पहले मानव रहित परीक्षण उड़ान का लक्ष्य 2023 के अंत में रखा गया है। पहले मानवयुक्त मिशन का लक्ष्य 2024 के अंत में रखा गया है।

‘डेंगू-मलेरिया की तरह है सनातन धर्म, इसे खत्म करना होगा’: MK स्टालिन के मंत्री बेटे ने उगला ज़हर, ‘सनातन को खत्म करने’ के लिए तमिलनाडु में कार्यक्रम

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने शनिवार (2 सितंबर, 2023) को कहा कि सनातन धर्म मलेरिया और डेंगू की तरह है और इसलिए इसे खत्म किया जाना चाहिए, न कि केवल इसका विरोध किया जाना चाहिए। वह सनातन धर्म को मिटाने के लिए आयोजित एक सम्मेलन में बोल रहे थे।

ट्विटर पर वायरल हो रहा बयान

एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किए जा रहे उनके भाषण की एक वीडियो क्लिप में उन्हें यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सनातन धर्म को खत्म करने के लिए इस सम्मेलन में मुझे बोलने का मौका देने के लिए मैं आयोजकों को धन्यवाद देता हूँ। मैं सम्मेलन को ‘सनातन धर्म का विरोध’ करने के बजाय ‘सनातन धर्म को मिटाओ‘ कहने के लिए आयोजकों को बधाई देता हूँ।”

‘सनातनम को खत्म करना हमारा पहला काम’

उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “कुछ चीजें हैं जिनका हमें उन्मूलन करना है और हम केवल विरोध नहीं कर सकते। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये सभी चीजें हैं जिनका हम विरोध नहीं कर सकते, हमें इन्हें मिटाना है। सनातन ​​भी ऐसा ही है। विरोध करने की जगह सनातन ​​को ख़त्म करना हमारा पहला काम होना चाहिए।”

उन्होंने सवालिया लहज़े में पूछा कि “सनातन ​​क्या है? सनातन ​​नाम संस्कृत से आया है। सनातन ​​समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन ​​का अर्थ ‘स्थायित्व’ के अलावा और कुछ नहीं है, जिसे बदला नहीं जा सकता। कोई भी सवाल नहीं उठा सकता। सनातन ​​का यही अर्थ है।”

करुणानिधि के पोते और फिल्मी सितारे हैं उदयनिधि

बता दें कि उदयनिधि स्टालिन डीएमके के मुखिया एमके स्टालिन के बेटे हैं। वो तमिल सिनेमा के एक्टर भी हैं, प्रोड्यूसर भी हैं और वितरक भी। आने वाले समय में वो कमल हासन की फिल्म ‘इंडियन 2’ को भी प्रोड्यूस कर रहे हैं। इस समय वो युवा और खेल विकास मामलों के मंत्री हैं। उनकी पार्टी डीएमके विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A. में भी शामिल है, तो राज्य में वो कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ती, सरकार बनाती रही है। उनके दादा का नाम एम करुणानिधि था, जो तमिलनाडु के कई बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।

‘₹10000 का निवेश आज ₹300 करोड़ का, लाखों प्रत्यक्ष नौकरियाँ दी’: उदय कोटक ने ‘कोटक महिंद्रा’ बैंक के CEO पद से दिया इस्तीफा, 38 साल इस पद पर रहे

दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने 38 साल की पारी के बाद कोटक महिंद्रा बैंक के सीईओ का पद छोड़ दिया है। उन्होंने एक भावुक चिट्ठी लिखकर अपने इस फैसले की घोषणा की। चिट्ठी में उन्होंने कहा कि 1985 में, उन्होंने और उनके दो साथियों ने एक छोटे से कार्यालय में कोटक महिंद्रा फाइनेंस की स्थापना की थी। आज, यह भारत का तीसरा सबसे बड़ा निजी बैंक है।

ग्राहकों-कर्मचारियों को कहा थैंक यू

उदय कोटक ने कहा कि उन्होंने हमेशा इस बैंक को एक विश्व स्तरीय बैंक बनाने का लक्ष्य रखा है और हमेशा ग्राहकों को सर्वोत्तम सेवा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया है। उदय कोटक ने कहा कि उन्होंने बैंक के कर्मचारियों को भी सम्मान और विश्वास दिया है। बैंक के कर्मचारी ही बैंक की सफलता के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वह बैंक के बोर्ड और शेयरधारकों के आभारी हैं, जिन्होंने हमें हमेशा अपना समर्थन दिया है।

कोट महिंद्र बैंक का भविष्य उज्जवल

उदय कोटक ने कहा कि वह बैंक के उज्जवल भविष्य के लिए आशावादी हैं। इस बैंक के पास एक मजबूत टीम है जो इसे आगे ले जाएगी। उन्होंने कहा कि वह बैंक के लिए अपनी सेवाओं को जारी रखेंगे। वह गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में बैंक के साथ जुड़े रहेंगे। उदय कोटक ने कहा कि बैंक प्रस्तावित उत्तराधिकारी के लिए आरबीआई की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। उन्होंने बताया कि अंतरिम में उनके सहयोगी दीपक गुप्ता – वर्तमान में संयुक्त एमडी, अनुमोदन के अधीन एमडी और सीईओ के रूप में कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि विरासत को आगे बढ़ाने के लिए हमारे पास एक उत्कृष्ट प्रबंधन टीम है।

38 साल पहले हुई थी शुरुआत

उदय कोटक ने कहा कि संस्थापक चले जाते हैं, लेकिन संस्था निरंतर फलती-फूलती रहती है। उन्होंने कहा, “काफी समय पहले, मैंने जेपी मॉर्गन और गोल्डमैन सैक्स जैसे नामों को वित्तीय दुनिया पर हावी होते देखा और भारत में ऐसी संस्था बनाने का सपना देखा। इसी सपने के साथ मैंने 38 साल पहले फोर्ट, मुंबई में 300 वर्गफुट के कार्यालय में 3 कर्मचारियों के साथ कोटक महिंद्रा की शुरुआत की थी। मैंने अपने सपने को जीते हुए, इस यादगार यात्रा के हर हिस्से को गहराई से सँजोया है।”

दिग्गज बैंकर ने कहा, “अब हम एक प्रतिष्ठित बैंक और वित्तीय संस्थान हैं, जो विश्वास और पारदर्शिता के बुनियादी सिद्धांतों पर बनाया गया है। हमने अपने हितधारकों के लिए मूल्य बनाया है और 1 लाख से अधिक प्रत्यक्ष नौकरियाँ प्रदान की हैं। 1985 में हमारे साथ ₹10,000 का निवेश आज लगभग ₹300 करोड़ का होगा।”

उदय कोटक ने लिखा इमोशनल पत्र

उदय कोटक के इस फैसले को भारतीय बैंकिंग उद्योग में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है। बता दें कि कोटक महिंद्रा बैंक में प्रमोटर की हिस्सेदारी 26% के करीब है। नवंबर 2021 के दौरान, आरबीआई के नियमों के कारण प्रमोटर की हिस्सेदारी को लेकर उदय कोटक से टकराव की स्थिति बन गई थी। बाद में, आरबीआई ने प्राइवेट बैंकों में प्रमोटर की हिस्सेदारी 15% से बढ़ाकर 26% कर दी थी।

‘बच्चों को खाना कैसे खिलाएँगे?’: कंगाल पाकिस्तान में बिजली बिल देने को तैयार नहीं लोग, पूरे मुल्क में सड़क पर चल रहा प्रदर्शन 

पाकिस्तान के कई शहरों में पिछले कई दिनों से बहुत ज्यादा बिजली बिलों को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। पेशावर, कराची, लाहौर, मुल्तान, रावलपिंडी, सभी में लोगों ने बिजली की बढ़ी हुई दरों के खिलाफ सड़क जाम करते, टायर जलाते और नारे लगाते देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि वहाँ आम लोगों के घरों में भी लाखों के बिल आ रहे हैं। बता दें कि आज शुक्रवार, 2 सितम्बर, 2023  को जमात-ए-इस्लामी (जेआई) के आह्वान पर बिजली दरों के मुद्दे पर देशव्यापी हड़ताल है। वहीं खैबर पख्तूनख्वा में भी बढ़ी हुई बिजली बिल के खिलाफ सड़क जाम कर भारी प्रदर्शन हो रहा है।

दरअसल, सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की मंजूरी के बिना बिजली की कीमतों में कटौती करने से इनकार करने के बाद पाकिस्तान में बिजली के बिल बहुत ज़्यादा बढ़ गए हैं। वहीं लोग कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवर उल हक़ के समझाने के बाद भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरकर बिजली का बिल जलाते हुए प्रदर्शन कर रहे हैं। लोगों ने बिजली कंपनियों के कार्यालयों पर हमला भी किया।

अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, टैक्सी ड्राइवर नूरुल अमीन कहना है,  “हम महँगाई की बाढ़ में डूब गए हैं। बिजली के ये बिल बहुत ज़्यादा है, अगर मैंने इस महीने बिजली का बिल भर दिया तो मैं अपने तीन बच्चों को खाना नहीं खिला पाउँगा।”

पेशे से नाई मोहम्मद करामात ने बताया कि अगस्त के लिए 60,000 पाकिस्तानी रुपए (लगभग 200 डॉलर) का बिल आया है, जो उनके बस के बाहर का है। 

वहीं इस मामले में पिछले दिनों पाकिस्तान के अंतरिम सूचना मंत्री मुर्तजा सोलांगी ने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय ने लोगों को राहत देने के लिए प्रस्तावित उपायों की एक सूची को अंतिम रूप दे दिया है और इसे मंजूरी के लिए संघीय कैबिनेट की बैठक में पेश किया जाएगा

इससे पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री, अनवर उल हक काकर ने एक आपातकालीन बैठक की थी और बिजली दरों में कटौती के लिए अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर ठोस कदम उठाने का निर्देश दिया था।  हालाँकि, अभी तक पाकिस्तान सर्कार कोई हल नहीं निकाल पाई है और पाकिस्तानी एक सप्ताह से ज़्यादा समय से सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं उनके मंत्रिमंडल ने कहा है कि बिलों में कटौती से आईएमएफ का भारी ऋण खतरे में पड़ जाएगा इसलिए फिलहाल राहत के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। 

काकर ने 27 अगस्त को कहा था कि वह आम आदमी का प्रतिनिधित्व करते हैं, पीएम हाउस और पाकिस्तान सचिवालय में बिजली की खपत को कम करने के लिए उपाय किए जाएँगे। उन्होंने आगे कहा था , “अगर इसके लिए मेरे कमरे का एयर कंडीशनर भी बंद करना पड़े तो बंद कर दीजिए।'”

गौरतलब है कि IMF ने कंगाल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से जुलाई में पाकिस्तान को ऊर्जा सब्सिडी समाप्त करने और 3 बिलियन डॉलर के ऋण के लिए निर्धारित राजस्व लक्ष्य पूरा करने के लिए कठिन शर्तें रखी थीं, जिसकी वजह से पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार असहाय नजर आ रही है।