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‘मुस्लिम बन जा नहीं तो मार डालेंगे’: दलित महिला से घर में घुस कर गाली-गलौच, जातिसूचक टिप्पणी कर दी जान से मारने की धमकी

उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में दलित महिला के धर्मांतरण के आरोप में पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है। पीड़िता ने धर्मांतरित हो चुके अपने भाई, उसकी बीवी, बेटी और दामाद पर धर्मांतरण के लिए दबाव बनाने और घर में घुसकर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला अंबेडकर नगर के मालीपुर थाना क्षेत्र के तारा कला गाँव का है। यहाँ रहने वाली दलित महिला इंद्रावती ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि उसका भाई श्यामलाल करीब 40 साल पहले अपनी पत्नी को छोड़कर मुंबई चला गया था, जहाँ एक मौलाना ने उसका धर्मांतरण करा दिया और उसका नाम मोहम्मद हुसैन रख दिया।

इसके बाद श्याम लाल से मोहम्मद हुसैन नामक शख्स ने मुंबई की एक मुस्लिम महिला मुमताज शेख से निकाह कर लिया। दोनों को बेटी हुई तो उसका नाम हिना रब्बानी शेख रखा गया। हिना रब्बानी जब निकाह के लायक हुई तो मोहम्मद हुसैन ने वाराणसी में रहने वाले विक्की उर्फ विकास त्रिपाठी का धर्मांतरण कराकर पहले अब्दुल रहमान शेख बनाया फिर अपनी बेटी हिना शेख से निकाह करा दिया।

इंद्रावती का आरोप है कि उनकी माँ प्रतापी देवी की मौत के बाद श्यामलाल से मोहम्मद शेख बना शख्स अपने परिवार के साथ गाँव लौट आया। मोहम्मद शेख के साथ उसकी बीवी मुमताज शेख, बेटी हिना रब्बानी शेख और विकास त्रिपाठी से अब्दुल रहमान बना उसका दामाद भी आया था। ये सभी मिलकर इंद्रावती को नकदी और उसके नाम पूरी जमीन करने की बात करते हुए इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगे।

पुलिस को दी शिकायत में इंद्रावती ने कहा है कि भाई और उसके परिवार वालों के दबाव के आगे वह नहीं झुकी और उसने धर्मांतरण करने से इनकार कर दिया। इसके बाद मोहम्मद हुसैन ने बीवी, बेटी और दामाद के साथ मिलकर घर में घुसकर गाली-गलौच करते हुए जान से मारने की धमकी दी। साथ ही जाति सूचक टिप्पणी करते हुए अपमानित किया।

इस मामले में महिला की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मोहम्मद हुसैन उर्फ श्यामलाल, उसकी बीवी मुमताज, बेटी हिना रब्बानी शेख, और दामाद अब्दुल रहमान उर्फ विकास त्रिपाठी के विरुद्ध धर्मांतरण, एससी-एसटी, घर में घुसकर मारपीट करने समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चारों को गिरफ्तार किया।

जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ED की गिरफ्त में: कहा जाता था UPA सरकार के एविएशन मंत्री का दुलारा, ₹538 करोड़ के बैंक फ्रॉड की पूरी कहानी

जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में शुक्रवार (1 सितंबर, 2023) को गिरफ्तार किया। इस मामले में उन पर केनरा बैंक के साथ 538 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप हैं।

उन्हें पूछताछ के लिए ईडी दिल्ली से मुंबई लेकर आई थी और इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई। यहाँ उनसे कई घंटों पूछताछ की गई, लेकिन, जानकारी के मुताबिक, उन्होंने इस दौरान जाँच अधिकारियों को सहयोग नहीं किया। शनिवार (2 सितंबर, 2023) को ईडी गोयल को मुंबई में प्रीवेन्शन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की विशेष अदालत में पेश करने जा रही है। वहाँ ईडी उनकी हिरासत की माँग करेगी।

CBI की एफआईआर पर हुआ केस दर्ज

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 3 मई को जेट एयरवेज के नरेश गोयल, उनकी पत्नी अनीता और कंपनी के कुछ पूर्व अधिकारियों के खिलाफ पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराई थी। सीबीआई ने ये एफआईआर गोयल पर केनरा बैंक के कथित 538 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोप के बाद दर्ज कराई थी।

एफआईआर में सीबीआई ने गोयल के खिलाफ आपराधिक साज़िश रचने, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक कदाचार के आरोप लगाए हैं। इसमें कहा गया है कि बैंक को इसकी वजह से ही 538.62 करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा।

बैंक ने इस मामले में सीबीआई से संपर्क किया था। बैंक ने एजेंसी को कहा था कि उसने जेट एयरवेज (इंडिया) लिमिटेड (जेआईएल) को 848.86 करोड़ रुपए की क्रेडिट सीमा का कर्ज दिया था। इसमें नरेश गोयल ने 538.62 करोड़ रुपए चुकाए ही नहीं है।

केनरा बैंक ने 1 अप्रैल, 2011 से लेकर 19 जून, 2019 के बीच गोयल की कंपनियों से जुड़े खातों का फोरेंसिक ऑडिट किया। इसमें पैसों के डायवर्ट करने और धांधली की बात सामने आई। बैंक का आरोप है कि कंपनी के फॉरेंसिक ऑडिट में पता चला की गोयल ने अपनी अन्य कंपनियों को 1410.41 करोड़ रुपए कमीशन के तौर पर भुगतान किए थे।

इस तरह से उसने जेट एयरवेज का पैसा बाहर भेजा। इतना ही नहीं सहयोगी कंपनियों को कर्ज व अन्य निवेस के जरिए भी पेमेंट किया, लेकिन बैंक का पैसा नहीं चुकाया। ये रिपोर्ट बैंक ने 2021 में जारी की थी।

दो साल पहले ही जेआईएल का खाता फ्रॉड घोषित

सीबीआई के मुताबिक, जेआईएल के खाते को 29 जुलाई, 2021 में फ्रॉड घोषित कर दिया गया था। उसने जेट एयरवेज और उसके संस्थापकों पर धन की हेराफेरी का आरोप लगाया है। एजेंसी के मुताबिक, 1 अप्रैल, 2011 से 30 जून, 2019 के बीच, एयरलाइन ने पेशेवर और परामर्श खर्च पर 1152.62 करोड़ रुपए खर्च किए।

इतना ही नहीं, इस एयरलाइन से जुड़ी संस्थाओं के बीच 197.57 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेनदेन की पहचान की गई। ये भी सामने आया कि एयरवेज के महत्वपूर्ण प्रबंधकीय कर्मी भी कथित तौर पर इन संस्थाओं से जुड़े हुए थे।

जाँच में पाया गया कि जेट एयरवेज ने व्यावसायिक और परामर्श व्यय में कुल 1152.62 करोड़ में से 420.43 करोड़ रुपए का भुगतान उन संस्थाओं को किया। जिनकी कारोबारी प्रकृति उनके चालान (Invoices) में मौजूद सेवा देने के विवरण से मेल नहीं खाती थी। एफआईआर में कहा गया है कि यहाँ तक कि गोयल परिवार के निजी खर्च, जैसे कर्मचारियों का वेतन, फोन बिल और वाहन खर्च आदि का पेमेंट भी जेआईएल से किया जाता था।

जब पड़े ईडी और सीबीआई के छापे

जेट एयरवेज और नरेश गोयल पर केनरा बैंक से धोखाधड़ी के आरोपों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद सीबीआई ने इस सिलसिले में नरेश गोयल के ठिकानों पर छापेमारी की। चार महीने पहले ही 5 मई, 2023 को सीबीआई ने जेट एयरवेज के संस्थापक के परिसरों और एयरलाइन के पुराने कार्यालयों पर छापे मारे थे। इसके बाद इस मामले में ईडी ने जुलाई 2023 में गोयल और उनके सहयोगियों से जुड़े आठ स्थानों की भी तलाशी ली थी।

जेट एयरवेज के मशहूर होने का दौर

ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले एनआरआई कारोबारी नरेश गोयल ने अपने कारोबार में जमीन से आसमान का सफर तय किया। उन्होंने साल 1992 में जेट एयरवेज स्थापित किया। उन्होंने महज दो बोइंग 737 के साथ देश की इस पहली निजी एयरलाइन ने शुरू हुई।

घरेलू स्तर पर इसकी उड़ाने 1995 में शुरू हुई थी। इसी ने पहली बार ऑफर्स के जरिए सस्ते हवाई टिकट देने की पहल की थी। इससे देखते ही देखते एयरलाइन की दुनिया में ये एक मशहूर ब्रांड बनकर उभरी और 2004 में इसने अंतराष्ट्रीय उड़ाने भी शुरू कर दी।

इस निजी एयरलाइन कंपनी का इस सेक्टर में 2016 तक जलवा था। फरवरी 2016 तक इसका देश के 21.2 प्रतिशत एयर पैसेंजर बाजार में एकछत्र राज था। एक दिन में ही दुनिया के 55 से भी अधिक जगहों तक के लिए जेट एयरवेज की लगभग 300 उड़ाने जाती थीं, लेकिन इसके ये अच्छे दिन ज्यादा दिन नहीं चले।

शुरू हुई दिवालिया होने की कहानी

इसकी शुरुआत साल 2006 से उस वक्त हुई जब जेट एयरवेज ने सहारा एयर लाइन 2250 करोड़ रुपए की सबसे बड़ी एविएशन डील को अंजाम दिया। इसे भी इस एयरलाइन के बुरे दिनों की शुरुआत के तौर पर देखा गया।

इसके साथ साल 2008 की मंदी के साथ ही कम किराए के लिए एविशन सेक्टर में एयरलाइन्स के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा ने जेट एयरवेज की कमर तोड़ने में कसर नहीं छोड़ी। घरेलू एविएशन सेक्टर को दरकिनार कर अतंरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान देने की वजह से जेट एयरवेज के हालात खराब होते चले गए।

रही-सही कसर एयरलाइंस सेक्टर के खराब हालातों ने पूरी कर दी। फिर ऐसा वक्त आया कि कंपनी को कर्ज लेने की नौबत आ गई और कर्ज की वजह से ये एयरवेज दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गई। ऐसे में खाड़ी देशों की एतिहाद एयरलाइन ने मदद के लिए आगे आई और इसके 24 फीसदी शेयर खरीदे, लेकिन कंपनी हालात फिर भी बिगड़ती चली गई।

जेट एयरवेज एसबीआई सहित कई बैंकों के कर्ज तले दबती चली गई। ऐसा भी वक्त आया कि उड़ानें बंद करनी पड़ी। मार्च 2019 में नरेश गोयल और उनकी पत्नी अनीता गोयल ने कंपनी बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स पद से इस्तीफ़ा दे दिया। इसके साथ ही अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज़ एयरलाइंस की उड़ानें बंद हो गईं।

साल 2019 में जब कंपनी ने अपनी उड़ाने बंद की। तब इस पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया सहित कई सरकारी कंपनियों का लगभग 8000 करोड़ रुपए का कर्ज था। इसके साथ जून 2019 में क़र्ज़दारों के समूह ने इसके दिवालिएपन की प्रकिया शुरू कर दी।

लंबी चली दिवालिया प्रक्रिया के बाद जून 2021 में यूएई के कारोबारी मुरारी लाल जालान और लंदन स्थित कालरॉक कैपिटल के बीच साझेदारी ने जेटएयरवेज का अधिग्रहण कर लिया। नरेश गोयल की कंपनी जेट एयरवेज़ (इंडिया) लिमिटेड साल 2005 से कैनरा बैंक से कर्ज़ लेती रही है। ये कर्ज जेट एयरवेज को स्टेट बैंक के नेतृत्व के कंसोर्टियम के तहत बैंकों ने दिए।

बैंक से ये कर्ज जेट एयरवेज़ ने लैंडिंग, नैविगेशन, एयरपोर्ट पर दी जाने वाली सुविधाओं, आयात किए जा रहे विमानों को किराए पर लेने के लिए सिक्योरिटी डिपोज़िट जैसे खर्चों के लिए लिया था। इसके साथ ही ये कर्ज रूट पर विमान उड़ाने और प्रमोशन के लिए था।

सीबीआई का आरोप है कि एयरलाइन ने पैसा इन मदों पर खर्च नहीं किया। जबकि जेट एयरवेज का कहना है कि अगस्त 2018 से कंपनी विमानों को उड़ानों के लिए आर्थिक दिक्कतों सामना कर रही है। कंपनी पर पड़े बोझ की वजह से वो वक्त पर कर्ज़ की अपनी किश्त नहीं चुका सकी।

केनरा बैंक की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक कर्ज़ का पैसा तीन तरीकों से निकाला गया था। पहला कमीशन पर होने वाले खर्च के तौर पर, दूसरा, गोयल की ही एक और कंपनी जेट लाइट (इंडिया) लिमिटेड में निवेश के लिए और तीसरा कंसल्टेन्सी फ़ीस देने के लिए।

इसी वजह से केंद्रीय बैंक आरबीआई ने 29 जुलाई 2021 को कंपनी के अकाउंट को फर्ज़ी करार दिया। आरबीआई ने कहा कि इसके ज़रिए 728.6 करोड़ रुपए की धांधली की गई है। जिसमें से 538.62 करोड़ रुपए कैनरा बैंक के हैं, जबकि 190 करोड़ रुपए सिंडीकेट बैंक के है। गौरतलब है कि साल 2020 अप्रैल में सिंडीकेट बैंक का कैनरा बैंक में विलय हो गया था।

प्रफुल्ल पटेल जब आए थे नरेश गोयल के बचाव में

साल 2006 में, तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल नरेश गोयल के नेतृत्व वाली एयरलाइन जेट एयरवेज के बचाव में खुलकर सामने आए थे। इसके लिए उन्हें ‘नरेश गोयल का उड्डयन मंत्री’ कहा गया। उस वक्त एक केंद्रीय मंत्री के लिए एक निजी कंपनी के लिए वकालत करना और इस तरह खुले तौर पर बोलना हैरानी भरा था।

साल 2006 के नवंबर में तत्कालीन केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री और NCP नेता प्रफुल्ल पटेल सब दरकिनार कर नरेश गोयल की एयरलाइन्स जेट एयरवेज के बचाव में उतर आए थे। उन्होंने इस एयरलाइन के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। तब उन्होंने दावा किया था कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए प्रस्तावित उड़ान में ‘अनावश्यक देरी’ की जा रही है।

उनका कहना था कि ये देरी निराधार सुरक्षा चिंताओं के वजह से हुई। उन्होंने कहा था, “अगर जेट को भारत में सुरक्षा मंजूरी मिल गई है, तो हम गैर-जरूरी तौर पर इसमें देरी क्यों कर रहे हैं। गृह मंत्रालय से उचित मंजूरी के बाद भारत में परिचालन की मंजूरी मिलने के बाद, अमेरिका के लिए उसकी उड़ान में देरी क्यों हो रही है?”

वह इतने पर ही नहीं रुके थे। उन्होंने कहा था, “हमारे लिए, भारत की सुरक्षा चिंता बेहद महत्वपूर्ण है। यदि किसी एयरलाइन को घरेलू परिचालन के लिए सुरक्षा मंजूरी दे दी गई है, तो मुझे किसी अन्य देश के लिए इस पर संदेह करने का कोई कारण नहीं दिखता है।” दिलचस्प बात यह है कि उस समय, गोयल के स्वामित्व वाली एयरलाइन न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को और कुछ अन्य गंतव्यों के लिए बढ़ती उड़ानों के लिए सरकार से स्लॉट मांग रही थी।

पटेल के खिलाफ ये आरोप कुख्यात राडिया टेप में भी दर्ज किए गए थे। जहाँ जदयू के पूर्व राज्यसभा सांसद ने पटेल को ‘नरेश गोयल का मंत्री’ कहा था। आउटलुक पत्रिका में तब प्रकाशित खबर के अनुसार, लॉबिस्ट नीरा राडिया और जदयू संसद के बीच कथित बातचीत पटेल को लेकर बेहद तीखी थी।

इसमें राडिया को यह पूछते हुए सुना जाता है, “लेकिन उन्होंने (पटेल ने) सेक्टर को बर्बाद कर दिया है। मुझे खेद है…इस पर मेरी राय है। उन्होंने सेक्टर के साथ न्याय नहीं किया है।” फिर तत्कालीन संसद को जवाब देते हुए सुना जाता है, “मुझे लगता है कि उन्होंने नरेश गोयल (जेट एयरवेज) के लिए मंत्री के तौर में काम किया है।”

यह ऋषियों की देवभूमि है, मजार-भूमि नहीं’: उत्तराखंड में हथौड़ा मार-मार कर ध्वस्त किए गए 2 मजार, जमीन कब्ज़ा कर बनाई गई थी

उत्तराखंड के ऋषिकेश में मजारों को ध्वस्त किए जाने का मामला सामने आया है। इसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें मजारों को ध्वस्त करते हुए जय श्री राम के नारे भी लगाए जा रहे हैं।  देवभूमि रक्षा अभियान के सदस्यों की ओर से इस कार्रवाई को किए जाने की बात सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बताया जा रहा है कि ऋषिकेश में देवभूमि रक्षा अभियान के सदस्यों द्वारा ऋषिकेश में दो मजारों को ध्वस्त किया गया और उनका वीडियो भी फेसबुक पर लाइव किया गया। ऋषिकेश में मजारों पर की गई कार्रवाई का यह वीडियो 29 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में एक व्यक्ति को एक मजार की दीवारों पर हथौड़ा चलते हुए देखा जा सकता है।

मजारों को ध्वस्त करते हुए देवभूमि रक्षा अभियान का सदस्य कह रहा है कि ऋषिकेश में इन मजारों को बख्शा नहीं जाएगा। ऋषिकेश ‘ऋषियों’ की भूमि है, यह देवभूमि है, कोई ‘मजार भूमि’ नहीं है।  साथ ही  यह कहते हुए भी सुना जा सकता है कि राज्य में कहीं भी ऐसी मजार होगी, सभी अवैध मजारों को ध्वस्त कर दिया जाएगा। 

वहीं मीडिया रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शी स्थानीय लोगों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि पुलिस टीम की मौजूदगी में जेसीबी मशीनों और हथौड़ों से दो मजारों को ध्वस्त कर दिया गया। कहा जा रहा है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में इस समय अतिक्रमण विरोधी अभियान चल रहा है और इसके तहत कई अवैध मजारों को ध्वस्त किया गया है।

हालाँकि, वायरल वीडियो में जिस देवभूमि रक्षा अभियान संस्था द्वारा मजारों को तोड़ने की बात सामने आई है। उसके प्रमुख दर्शन भारती ने शुक्रवार को मीडिया में दिए बयान में कहा, “हमें उस जमीन के मालिकों से उन्हें ध्वस्त करने की लिखित अनुमति मिली थी, जहाँ मजार बनाया गया था। किसी ने उन्हें यह सोचकर गुमराह किया था कि मजारों को अनुमति देने से उनके घरों में समृद्धि आएगी।”

बता दें कि ऋषिकेश की इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड पुलिस एक्शन में आई है। पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 505 (किसी भी पूजा स्थल या धार्मिक पूजा या समारोहों के प्रदर्शन में शामिल किसी भी सभा में अपराध करना) के तहत मामला दर्ज किया है। 

गौरतलब है कि इस मामले में एसपी (ग्रामीण) कमलेश उपाध्याय ने भी मजारों के तोड़े जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि मजारें ऋषिकेश में अमित ग्राम, गुमानीवाला में निजी भूमि पर बनाई गई थीं। जमीन मालिकों ने इसे हटाने की हामी भरी थी। लेकिन तोड़फोड़ करने वालों ने न तो पुलिस को सूचना दी और न ही पुलिस वहाँ मौजूद थी। हमने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। हम इस मामले में  वीडियो से आरोपितों की पहचान कर कार्रवाई कर रहे हैं। 

बीवी से अप्राकृतिक सेक्स करना चाहता था शौहर, नहीं मानी तो इस्त्री गर्म कर जला डाले दोनों कूल्हे: ट्रॉमा सेंटर में चल रहा इलाज

उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में एक व्यक्ति द्वारा अपनी बीवी के साथ हैवानियत की बात सामने आई है। उसने अप्राकृतिक संबंध बनाने से विरोध करने पर पत्नी के कूल्हों को गर्म प्रेस से जला डाला। जानकारी के मुताबिक, शौहर ने रात के समय अपनी बीवी के साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने की कोशिश की, जिसका बीवी ने विरोध किया। इस बात से शौहर इतना गुस्सा हुआ कि वो हैवान बन बैठा। उसके पहले तो बीवी को जमकर पीटा, फिर गर्म प्रेस से उसके दोनों कूल्हों को जला दिया।

अप्राकृतिक संबंध बनाने की सनक में बना हैवान

ये पूरा मामला रसूलपुर थाना इलाके का है, जहाँ फिजोराबाद के दक्षिण थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला का निकाह 5 साल पहले रसूलपुर क्षेत्र में रहने वाले युवक के साथ हुआ था। दोनों में विवाद चल रहा था, लेकिन समझौते के बाद महिला अपने शौहर के घर आ गई थी। इस बीच, 31 अगस्त की रात शौहर ने उसके साथ अप्राकृतिक संबंध बनाने की कोशिश की, जिसका उसने विरोध किया। इस बात से खफा उसके शौहर ने उसे खूब मारा-पीटा, फिर प्रेस गर्म कर उसके दोनों कूल्हों को जला दिया।

इस दौरान वो चीखती रही, लेकिन उसके हैवान शौहर पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

पीड़ित महिला के भाइयों ने अस्पताल में कराया भर्ती

महिला ने अपने भाइयों को किसी तरह से सूचना दी। इसके बाद गंभीर हालत में पीड़िता को थाना रसूलपुर ले जाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। इसके बाद महिला का मेडिकल कराने के लिए जब अस्पताल ले जाया गया, तब सब चौंक गए, क्योंकि महिला की हालत बेहद गंभीर थी। महिला को तुरंत ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका इलाज चल रहा है।

समझौते के बाद ससुराल आई थी महिला

इस मामले में पुलिस को दी गई शिकायत में लिखा है कि उसके शौहर के साथ झूठ बोलकर उसका निकाह कराया गया था, वो पहले ही एक बार निकाह कर चुका था। शिकायत में महिला ने कहा, “वो मुझे रोज परेशान करता था, जिसकी वजह से मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।” पारिवारिक न्यायालय में समझौते के बाद वो अपनी ससुराल आ गई थी।

महिला को निर्वस्त्र करने के मामले में महिला आयोग ने लिया संज्ञान: गहलोत सरकार से 5 दिन के भीतर माँगी जाँच रिपोर्ट, गठित किया इंक्वायरी कमीशन भी

राजस्थान के प्रतापगढ़ में पति व ससुराल पक्ष के लोगों द्वारा एक गर्भवती महिला को निर्वस्त्र घुमाने के मामले का राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने निष्क्रियता दिखाने के लिए राजस्थान पुलिस की निंदा और अशोक गहलोत सरकार से आरोपितों को गिरफ्तार कर 5 दिन के भीतर जाँच रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इसके अलावा, मामले की जाँच के लिए एक कमिटी का भी गठन किया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा है, “महिला आयोग राजस्थान के प्रतापगढ़ में हुई दर्दनाक घटना की कड़ी निंदा करता है। एक महिला के साथ छेड़छाड़ की गई, उसे निर्वस्त्र किया गया और वीडियो बनाया किया गया। दो दिन पहले हुई घटना के बावजूद पुलिस की निष्क्रियता स्वीकार नहीं की जा सकती।”

इस पोस्ट में आगे कहा गया है, “राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने राज्य के डीजीपी को दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आईपीसी की आवश्यक धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया है। हम 5 दिनों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट की माँग करते हैं।”

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले की जाँच के लिए महिला आयोग ने वुमेन एक्ट 1990 के सेक्शन 10 के तहत एक जाँच कमिटी का गठन किया है। इस जाँच कमिटी की प्रमुख डेलिना कोंगडुप को बनाया गया है। वहीं स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी राजस्थान की ओर से एक वकील को इस समिति का सदस्य बनाया गया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने एक्स पर लिखे पोस्ट में कहा, “हमने कल रात संज्ञान लिया है और जाँच के लिए एक टीम भेज रहे हैं। राजस्थान में ऐसी घटनाओं की संख्या बढ़ती जा रही है। राष्ट्रीय महिला आयोग घटनाओं पर संज्ञान ले रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि राज्य सरकार इन घटनाओं को कंट्रोल करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं कर रही है।”

इस मामले में पुलिस ने 21 साल की पीड़ता के पति समेत 7 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ धारा 294, 354, 365, 67 के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

क्या है मामला:

राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के धरियावद थाना क्षेत्र के पहाड़ा गाँव में एक महिला को निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाने का मामला सामने आया है। घटना 31 अगस्त की है। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया। इस मामले में मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पीड़ित महिला का एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा था। 31 अगस्त को महिला प्रेमी के साथ चली गई थी।

महिला के ससुराल वालों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने दोनों को पकड़ लिया। इसके बाद महिला को निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाया। इस मामले को लेकर भास्कर ने पुलिस के हवाले से लिखा है कि महिला 31 अगस्त को पड़ोस में रहने वाले एक युवक से मिलने गई थी। जानकारी मिलने पर ससुराल वाले भी वहाँ पहुँच गए। पहले तो उन लोगों ने महिला को पकड़कर उसके साथ मारपीट की। इसके बाद निर्वस्त्र कर गाँव में घुमाया।

घटना के वीडियो भी सामने आए हैं। वायरल वीडियो में महिला चीख रही है। चिल्ला रही है। खुद को छोड़ने के लिए गुहार लगा रही है। लेकिन पति उसके कपड़े उतरता जा रहा है। आसपास खड़े लोग भी उसके इसके लिए उकसाते नजर आ रहे हैं। कुछ लोग पास में खड़े होकर वीडियो बनाते भी दिखाई दे रहे हैं। महिला के पकड़े उतारने के आरोपितों ने उसे गाँव में घुमाया।

इस मामले में प्रतापगढ़ एसपी अमित कुमार ने कहा है कि मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस की 6 टीमों का गठन किया गया है। साथ ही धरियावद थाने में पूर्व में सेवाएँ दे चुके सभी कॉन्स्टेबल से लेकर बड़े अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया है। पीड़ित पक्ष द्वारा मुकदमा दर्ज कराया गया। आगे की कार्रवाई की जा रही है।

युसूफ के खौफ से सत्यम को किसी ने नहीं बचाया… जिस तुर्कपुरवा में सत्यम को मारा गया, वहाँ हिन्दुओं की आबादी न के बराबर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 28 अगस्त 2023 को सत्यम नाम के नाबालिग छात्र की हत्या कर दी गई थी। मुख्य आरोपित युसूफ सहित कुछ नाबालिगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। हिन्दू संगठनों के साथ मृतक के परिजन युसूफ पर NSA के साथ बुलडोजर की कार्रवाई माँग रहे हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए खीरी के स्थानीय निवासियों ने युसूफ को दबंग और आए दिन लोगों से मारपीट करने वाला बताया है। जिस मुस्लिम बहुल क्षेत्र तुर्कपुरवा में सत्यम की हत्या हुई, यहाँ जमीनों पर अवैध कब्ज़े का भी आरोप है। साथ ही आसपास के लोगों को भैंस और भेड़ चोरी जैसे अपराधों का सामना करना पड़ता है।

तुर्कपुरवा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्ज़े

ऑपइंडिया से बात करते हुए खीरी के स्थानीय निवासी व हिन्दू संगठन के एक पदाधिकारी ने बताया कि जिस तुर्कपुरवा में सत्यम को मारा गया, वहाँ हिन्दुओं की आबादी न के बराबर है। उन्होंने आरोप लगाया कि तुर्कपुरवा में कई मुस्लिमों ने सरकारी जमीनों पर अवैध कब्ज़े कर रखे हैं।

तुर्कपुरवा में मदरसा और 3 मस्जिदें

हिन्दू संगठन के पदाधिकारी ने ऑपइंडिया को बताया कि वर्तमान में जो भी मुस्लिम आबादी खीरी में दिखाई देती है, वो 5-6 साल पहले नहीं थी। उन्होंने एकतरफा आबादी बढ़ने का आरोप लगाते हुए इसकी प्रशासनिक जाँच की माँग की। वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी ने हमें बताया कि मुस्लिम बाहुल्य तुर्कपुरवा मुख्य सड़क पर लगभग 300 मीटर तक फैला हुआ है।

सड़क से हटकर भी यह एक गाँव के रूप में है जहाँ मजार, 3 मस्जिदें और मदरसा भी हैं। इस गाँव के एक किनारे कुछ अनुसूचित जाति के लोगों को छोड़ कर अंदर लगभग सभी मुस्लिम समुदाय के ही लोग हैं।

आस-पास के लोग पशु चोरी से परेशान

खीरी तुर्कपुरवा के आस-पास के निवासी चोरी जैसी घटनाओं से काफी परेशान हैं। इस चोरी में पशुओं की चोरी भी शामिल है। 18 जनवरी 2021 को तुर्कपुरवा के पड़ोसी गाँव कंचनपुर में राजेश कुमार ने पुलिस को शिकायत देते हुए बताया था कि उनकी लगभग 20 भेड़ों को रात में कोई चुरा ले गया था।

इन भेड़ों की कीमत लगभग 2 लाख रुपए आँकी गई थी। तब राजेश ने खुद को गरीब और कर्जदार बताया था और कहा कि इसके जरिए उनके परिवार का भरण-पोषण होता था। उन्होंने कहा था कि भेंड़े चोरी होने के बाद से वे बेरोजगार हो गए हैं।

राजेश कुमार की शिकायती पत्र

इस घटना से भी पहले 16 अप्रैल 2018 को समाजसेवी राजेंद्र मिश्रा ने खीरी और कोरांव सहित आसपास के क्षेत्रों में भैंसों चोरों के गैंग के सक्रिय होने का आरोप लगाया था। राजेंद्र मिश्रा की शिकायत पर प्रयागराज पुलिस ने अधीनस्थों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

हिन्दुओं के वोटों में बँटवारे से जीता युसूफ

खीरी के लोगों ने हमें बताया कि गाँव में लगभग 6500 वोट हैं। इनमें से 1500 वोट मुस्लिमों के हैं जो ज्यादातर तुर्कपुरवा में रहते हैं। मुस्लिमों के ही लगभग बराबर वोट SC समुदाय के लोगों के हैं। बाकी में सभी अन्य लोग हैं।

हमें बताया गया कि लगभग आधे दर्जन प्रत्याशी गाँव की प्रधानी के चुनाव में खड़े हुए थे, जिनमें एकमात्र मुस्लिम कैंडिडेट युसूफ था। स्थानीय निवासियों के मुताबिक, युसूफ को लगभग सभी मुस्लिमों का एकमुश्त वोट मिलने के साथ हिन्दुओं का भी वोट मिला।

स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनाव में किसी भी हिंदू प्रत्याशी को मुस्लिमों के वोट नहीं मिले। आखिरकार युसूफ ने अपने प्रतिद्वंद्वी अवनीश केसरवानी को लगभग 250 वोटों से हरा दिया था। युसूफ इससे पहले भी 2 बार ग्राम प्रधानी के लिए उम्मीदवार रह चुका था, लेकिन उसे हार मिली थी।

चुनाव जीत कर पहला काम मजार का विस्तार

खीरी के ग्रामीणों ने ऑपइंडिया को बताया कि मुख्य सड़क से लगभग सटकर ही एक मजार बनी हुई है। यह मजार पहले छोटे हिस्से में थी और आवाजाही यहाँ सामान्य थी। हमें बताया गया कि युसूफ ने चुनाव जीतकर सबसे पहले इस मजार का सौंदर्यीकरण करवाया।

युसून ने न सिर्फ मजार का रंग रोशन करवाया, बल्कि उसमें गेट ग्रिल आदि भी लगवा दी। युसूफ की प्रधानी में इस बार मुहर्रम में उसी मजार पर बड़ा मेला भी लगा था। यह मजार वैध जमीन पर बनी है या अवैध जमीन पर, इसके बारे में ग्रामीण जानकारी नहीं दे पाए।

युसूफ के खौफ से सत्यम को किसी ने नहीं बचाया

हमने स्थानीय लोगों से सवाल किया कि पिट रहे सत्यम को बचाने कोई सामने क्यों नहीं आया? इसके जवाब में स्थानीय निवासियों ने बताया कि यूसुफ का खीरी में इतना खौफ है कि गाँव में कोई भी उसके किसी भी काम में अड़ंगा डालने की हिम्मत नहीं करता। लोगों ने उसे दबंग बताते हुए कहा कि युसूफ पर पहले भी भी मारपीट के केस दर्ज है।

अब तक युसूफ पर कुल 5 केसों के सामने आने का दावा किया गया है। माना यह भी जा रहा है कि युसूफ पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है। युसूफ के परिवार में ट्रकें आदि चलती हैं, लेकिन लोगों ने युसूफ का मुख्य काम सरकारी कार्यालयों में दलाली आदि का बताया। पत्रिका की रिपोर्ट में भी युसूफ के थाने में धाक और पुलिसकर्मियों पर पैसे लुटाने की बात कही है।

इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि उसके द्वारा दी गई कारों से थानेदार चलता है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि पिछले बकरीद पर युसूफ ने थाने पर पुलिसकर्मियों को दावत दी थी। उस पर सरकारी फंड का दुरूपयोग करने और शिकायत करने वालों को फर्जी केस में फँसाने के भी आरोप हैं। इसमें जिले के कुछ अन्य अधिकारी उसके मददगार बताए गए हैं।

प्रशासनिक ढिलाई से लोग नाखुश

ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्हें युसूफ की अवैध सम्पत्तियों पर बुलडोजर चलने की प्रतीक्षा है। लोगों ने कहा कि जिलाधिकरी प्रयागराज ने कड़ी कार्रवाई के लिए जो 48 घंटे का समय दिया था, वो अब पूरा हो चुका है। एक बार फिर से प्रशासन द्वारा 48 घंटे का समय लेने की जानकारी सामने आई है।

हालाँकि, कुछ लोगों ने यह भी बताया कि प्रशासनिक अधिकारी युसूफ के अपराधों और उसके द्वारा अर्जित सम्पत्तियों आदि का लेखा-जोखा निकाल रहे हैं। इसके आधार पर ही उस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बताते चलें कि प्रयागराज के खीरी में 16 साल के सत्यम शर्मा की 28 अगस्त 2023 को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। हत्या की वजह सत्यम द्वारा आरोपितों की अपनी चचेरी बहन से छेड़खानी का विरोध बताया जा रहा है। सत्यम की चचेरी बहन ने अपने भाई को बचाने के लिए मोहम्मद यूसुफ का पैर पकड़कर रहम की भीख माँगी थी।

जमीन घोटाले में CM हेमंत सोरेन को ED का तीसरा समन: जाँच एजेंसी ने कुर्क की ₹161 करोड़ की संपत्ति, अब तक 14 गिरफ्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार (2 सितम्बर, 2023) को भूमि घोटाले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को फिर से समन जारी किया है, जिसमें उन्हें 9 सितंबर को पूछताछ के लिए अपने जोनल कार्यालय में उपस्थित होने के लिए कहा गया है। यह उन्हें जारी किया गया तीसरा समन है। वहीं ED  ने ‘जमीन हड़पने और धोखाधड़ी’ के इस मामले से जुड़े धनशोधन जाँच के तहत एक दिन पहले ही बड़ी कार्रवाई की है। जाँच एजेंसी ने इस मामले में राँची में 161 करोड़ रुपए से अधिक के तीन भूखंड भी कुर्क किए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 14 अगस्त को पहला समन नहीं लिया और ईडी को एक पत्र भेजकर कहा कि वह समन वापस ले लें या वह एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने समन को राजनीति से प्रेरित बताया था। जवाब में, ईडी ने फिर से एक समन जारी कर उन्हें 24 अगस्त को उसके सामने पेश होने के लिए कहा। सोरेन ने फिर से एक पत्र भेजकर इसे उपस्थित होने से मना कर दिया और कहा कि उन्होंने उन्हें जारी किए गए समन को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की है।

इस बीच ईडी ने भी 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल की है जिस पर अभी सुनवाई होनी है। बता दें कि कैविएट किसी व्यक्ति को उसके खिलाफ कोई भी निर्णय लेने से पहले उसकी बात सुनने का अधिकार देता है क्योंकि कोई भी अदालत किसी व्यक्ति का पक्ष सुने बिना उसके खिलाफ कोई निर्णय नहीं दे सकती है या उसके खिलाफ कोई आदेश जारी नहीं कर सकती है।

हालाँकि, जमीन घोटाले के मामले में ईडी ने तीसरा समन जारी किया क्योंकि उसे पता चला कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी याचिका पर शीर्ष अदालत में सुनवाई कराने में कोई तत्परता नहीं दिखा रहे थे।

161.64 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क 

गौरतलब है कि ईडी झारखंड में मनी लॉन्ड्रिंग के दो बड़े मामलों की जाँच कर रही है। पहला मामला साहिबगंज में अवैध खनन से जुड़ा है, जिसमें पिछले साल 17 नवंबर को सीएम से पूछताछ हुई थी। दूसरा मामला राज्य की राजधानी में एक कथित भूमि घोटाले से संबंधित है जिसके लिए ED द्वारा सोरेन को दो बार समन जारी किया गया है। 

ईडी ने एक बयान में कहा, “राँची में चेशायर होम रोड, पुगरू और सिरम में 161.64 करोड़ रुपए के वाणिज्यिक मूल्य के तीन भूखंडों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। इन भूखंडों में भूमि राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से भू-माफिया के पक्ष में धोखाधड़ी से बदलाव किया गया।”

आईएएस अधिकारी सहित 14 आरोपितों की हो चुकी है गिरफ्तारी 

बता दें कि यह इस मामले में जारी किया गया दूसरा कुर्की आदेश है। इसके साथ ही मामले में 236 करोड़ रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है। वहीं एजेंसी ने इस मामले में आईएएस अधिकारी छवि रंजन और दो व्यवसायी, कोलकाता के अमित अग्रवाल और राँची में शॉपिंग मॉल के मालिक बिष्णु अग्रवाल सहित 14 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी छवि रंजन भी शामिल हैं। रंजन पूर्व में राज्य समाज कल्याण विभाग के निदेशक और राँची के उपायुक्त रह चुके हैं।

46 साल की अम्मी का 21 साल के हुसैन से अवैध संबंध, बनाया पोर्न वीडियो… लीक होने के डर से टिकटॉक स्टार बेटी के साथ किया डबल मर्डर

टिकटॉक की बहुत फेमस स्टार है महक बुखारी। ब्रिटेन में रहती है। पाकिस्तानी मूल की है। इनकी अम्मी है अंसरीन। अब ये दोनों माँ-बेटी आजीवन जेल में रहेंगी। क्यों? क्योंकि इन दोनों ने साजिश रच कर साकिब और मोहम्मद हाशिम इजाजुद्दीन को मार डाला। इस दिलचस्प केस से जुड़ा है पोर्न वीडियो मामला।

लेस्टरशायर कोर्ट ने दोनों को पिछले महीने अगस्त में अंसरीन के प्रेमी साकिब हुसैन और मोहम्मद हाशिम इजाजुद्दीन के दोहरे हत्याकांड का दोषी ठहराया। लेस्टर क्राउन कोर्ट में तीन महीने की सुनवाई में 28 घंटे के विचार-विमर्श के बाद जूरी ने ये फैसला लिया था। शुक्रवार (1 सितंबर, 2023) को इस मामले में सज़ा सुनाने का ऐलान किया गया।

टिकटॉकर और ब्रिटिश पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महक बुखारी को अम्मी अंसरीन के पोर्न वीडियो लीक होने की आशंका थी। उसे डर था कि इनके लीक होने से सोशल मीडिया पर उसकी फैन फॉलोविंग पर असर पड़ सकता है। यही सोचकर दोनों माँ-बेटी ने पोर्न वीडियो लीक करने की धमकी देने वाले साकिब हुसैन की हत्या की साजिश रची थी।

इस दोहरे हत्याकांड के लिए महक बुखारी को कम से कम 31 साल 8 महीने और अम्मी अंसरीन को न्यूनतम 26 साल 9 महीने की आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। दोनों ने हत्या की इस साजिश को कार हादसा दिखाने की पुरजोर कोशिश की थी। मौत से पहले साकिब के इमरजेंसी नंबर पर की गई कॉल रिकॉर्डिंग और घटना के दिन के सीसीटीवी फुटेज शो कोर्ट में पेश किए गए। इस आधार पर ही आरोपितों को सजा सुनाई गई।

क्या है मामला?

फरवरी 2022 में लेस्टर के पास हुए कार हादसे में 21 साल के साकिब हुसैन और उनके हमउम्र दोस्त हाशिम इजाजुद्दीन की मौत हो गई। उनकी कार तेज रफ्तार से एक पेड़ से जा टकराई थी। इससे उसके दो टुकड़े हो गए थे। मौत से कुछ पल पहले ही साकिब ने इमरजेंसी नंबर 999 को भी कॉल की थी।

इमरजेंसी कॉल में साकिब ने कहा था कि उनका पीछा कर रही दो कारों में सवार बालाक्लावा (नकाब) पहने हमलावरों ने उनकी कार को सड़क पर टक्कर मार दी। कॉल के दौरान बैचेन हुसैन कह रहा था, “कुछ लोग मेरा पीछा कर रहे हैं, वे मुझे मारने की कोशिश कर रहे हैं, मैं मरने जा रहा हूँ सर, मुझे बस मदद की ज़रूरत है। वे कार को पीछे से बहुत तेजी से मार रहे हैं, कृपया मैं आपसे विनती कर रहा हूँ। मैं मरने जा रहा हूँ।”

इसके बाद कॉल अचानक खत्म होने से पहले एक चीख सुनाई दी। दरअसल दोनों इस हादसे का शिकार एक साजिश के तहत हुए थे, जो 24 साल की ब्रिटिश पाकिस्तानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर महक बुखारी ने रची थी। मृतक साकिब हुसैन ने उसकी 46 साल की अम्मी अंसरीन बुखारी का साथ चल रहे संबंध का खुलासा करने की धमकी दी थी।

मुकदमे के दौरान, लेस्टर क्राउन कोर्ट की जूरी के सामने ये बात आई थी कि हुसैन ने लंबे वक्त से अंसरीन से चल रहे अपने अफेयर का खुलासा करने लिए सेक्स टेप को इस्तेमाल करने की धमकी दी थी। इस वजह से ही महक ने साकिब हुसैन को मारने की साजिश रची थी।

लेस्टर क्राउन कोर्ट में तीन महीने की सुनवाई के दौरान पता चला कि माँ-बेटी का ये जोड़ा उस समूह का हिस्सा था, जिसने पिछले साल फरवरी में मृतकों को टेस्को कार पार्क में ले जाने का लालच दिया था और फिर 100 मील प्रति घंटे की रफ्तार से उनका पीछा किया था। इस दोहरे हत्याकांड में आठ आरोपित थे।

इनमें से जूरी सदस्यों ने साथी आरोपितों रेखन कारवान और रईस जमाल को भी इस हत्याकांड में दोषी पाया था। इनके अलावा बर्मिंघम की 23 साल की नताशा अख्तर, 28 साल का अमीर जमाल और लेस्टर के 23 साल के सनाफ गुलाम मुस्तफा को हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया, लेकिन उन्हें मानव संहार का दोषी ठहराया गया। इस मामले में लेस्टर के रहने वाले 21 साल के सह-अभियुक्त मोहम्मद पटेल को हत्या या मानव संहार का दोषी नहीं पाया गया।

जज ने सुनाई माँ- बेटी को खरी-खरी

शुक्रवार (1 सितंबर 2023) दोपहर को सजा सुनाते हुए जज टिमोथी स्पेंसर केसी ने कहा कि एक मशहूर शख्स के तौर पर अपने करियर के दौरान महक बुखारी की दिखावटी शोहरत ने उन्हें पूरी तरह से आत्म-मुग्ध बना दिया था।

उन्होंने कहा, ”टिकटॉक और इंस्टाग्राम इस मामले के केंद्र में हैं। यही वजह है कि महक आपने यूनिवर्सिटी छोड़ दी। यदि आपने ऐसा नहीं किया होता, तो अब आप एक युवा ग्रेजुएट होते और आपकी पूरी जिंदगी बाँहें फैलाए आपका स्वागत करती। अब, आप अपने आप को अपने सभी बेहतरीन सालों के लिए जेल में बंद पाएँगे।”

मुकदमे के दौरान ये भी पता चला कि जब महक बुखारी की अम्मी अंसरीन ने अपने रिश्ते को खत्म करने की कोशिश की तो हुसैन ने इसका विरोध किया था। उसने धमकी दी थी कि अगर उसने 3,000 पौंड (लगभग 3.12 लाख रुपए) का भुगतान नहीं किया तो वह उसके पति को उनकी अश्लील तस्वीरें भेज देगा। उसने दावा किया था कि ये पैसा उसने अंसरीन पर खर्च किया था।

ऐसे बिछाया था हत्या का जाल

महक बुखारी के टिकटॉक पर लगभग 129,000 फॉलोअर्स हैं। वहाँ वह फैशन और सुंदरता के बारे में पोस्ट करती थी। तीन महीने की कोर्ट की सुनवाई में खुलासा हुआ कि महक ने ही साकिब हुसैन की हत्या का जाल बिछाया था।

अभियोजकों ने कहा कि ऑक्सफ़ोर्डशायर के बैनबरी के हुसैन को महक बुखारी ने परिवार से मिलने के लिए उन्हें 3,000 पौंड वापस करने की बात कहकर बुलाया था। इस दौरान उन पर घात लगाकर हमला किया गया और फिर दो कारों से उनका पीछा किया गया। इसी दौरान एक पेड़ से टकराने के बाद इजाजुद्दीन की कार दो हिस्सों में बंट गई और उसमें आग लग गई।

जिस ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने पर कॉन्ग्रेस सरकार ने बहाया था खून, वहाँ अब होगा गणेश उत्सव: BJP शासित महानगरपालिका ने दी अनुमति, कॉन्ग्रेस-AIMIM ने किया विरोध

कर्नाटक के हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका (HDMP) ने उसी ईदगाह में गणेशोत्सव समारोह को मनाने की मंजूरी दी है, जिसे लेकर कभी दो-दो मुख्यमंत्रियों को अपनी कुर्सी गँवानी पड़ी थी। इसी ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने पहुँचे राष्ट्रभक्तों को साल 1994 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार ने गोलियों से भुनवा दिया था। उस गोलीकांड में 5 राष्ट्रभक्तों की मौत हो गई थी। लेकिन हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका (एचडीएमपी), जहाँ भाजपा सत्ता में है, उसने इस साल भी ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव के आयोजन की मंजूरी दी है।

कॉन्ग्रेस-एआईएमआईएम ने किया तीखा विरोध

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हुबली-धारवाड़ महानगरपालिका की दूसरी छमाही में सूचीबद्ध अतिरिक्त विषयों की सूची में ईदगाह मैदान में गणेशोत्सव का मुद्दा आखिरी था। इस बार जैसे ही चर्चा की शुरुआत हुई, कॉन्ग्रेस और AIMIM के पार्षदों ने इसका तीखा विरोध किया। दोनों दलों के पार्षदों का कहना था कि पूर्व सूचना के बगैर ही इस मुद्दे को उठाया गया, जिसके बाद उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हालाँकि, हंगामे के बीच महापौर वीणा बराडवाड ने गणेशोत्सव को मंजूरी दे दी।

भाजपा ने कॉन्ग्रेस-एआईएमआईएम के विरोध को किया खारिज

ये निर्णय गुरुवार (31 अगस्त, 2023) को लिया गया। इस मामले पर हंगामे के बीच भाजपा के पार्षदों ने कहा कि अतिरिक्त विषयों को चर्चा में शामिल करना महापौर का विशेषाधिकार है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। बता दें कि पिछले साल भी ईदगाह मैदान पर ही गणेशोत्सव मनाया गया था। ये मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक गया था, लेकिन हाई कोर्ट ने सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए गणेशोत्सव को मंजूरी दे दी। इस मैदान को लेकर तनातनी काफी पुरानी है।

तिरंगा फहराने से रोकने के लिए कॉन्ग्रेस सरकार ने बहाया था खून

हुबली के ईदगाह मैदान पर तिरंगा फहराने को लेकर अतीत में बड़ा विवाद हो चुका है। साल 1994 में इस विवाद को तत्कालीन कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री वीरप्पा मोईली ने अयोध्या के राम मंदिर विवाद से जोड़ते हुए कहा था कि यहाँ गोलियाँ चलेंगी। उन्होंने तिरंगा फहराने की कोशिश करने वाले राष्ट्रभक्तों पर गोलियाँ भी चलवाईं, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई थी, वहीं 100 से अधिक लोग घायल हो गए थे। इसी मामले में घटना के सालों बाद उमा भारती को मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद गँवाना पड़ा था। वो पूरा घटनाक्रम आप यहाँ पर पढ़ सकते हैं।

‘ब्रिटेन ईसाई देश नहीं’: चर्च ऑफ इंग्लैंड के आधे से अधिक पादरियों ने माँगी समलैंगिकों की शादी की अनुमति, 64% बोले- LGBT के बीच सेक्स पाप नहीं

ब्रिटेन स्थित ‘चर्च ऑफ इंग्लैंड’ के आधे से अधिक पादरियों ने समलैंगिक विवाह का समर्थन किया है। साथ ही समलैंगिकों की शादी कराने की अनुमति के लिए चर्च के कानून में परिवर्तन की भी माँग की है। वहीं, 75 प्रतिशत से अधिक पादरियों का कहना है कि ब्रिटेन को अब ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए।

द टाइम्स ने चर्च ऑफ इंग्लैंड के पादरियों का एक सर्वे किया है। इस सर्वे में 53.4% पादरियों ने समलैंगिक विवाह का समर्थन किया है। साथ ही समलैंगिक शादी कराने का समर्थन किया। वहीं, 36.5% पादरियों ने इसका विरोध किया है।

उल्लेखनीय है कि साल 2014 में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने के बाद इंग्लैंड के ‘एंग्लिकन पादरियों’ से इस बारे में सवाल किया गया था। तब, 51% पादरियों ने समलैंगिक विवाह को गलत बताया था। वहीं, 39% पादरियों ने इसका समर्थन किया था।

गौरतलब है कि साल 2022 में लैंबेथ सम्मेलन आयोजित हुआ था। इस सम्मेलन में दुनिया भर के एंग्लिकन पादरी शामिल हुए थे। इस दौरान कैंटरबरी के आर्कबिशप ने साल 1998 में दिए एक बयान की पुष्टि करने को लेकर कहा था कि समलैंगिक संबंध पाप करने की तरह है। इसको लेकर उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी।

हालाँकि, अब किए गए सर्वे में सामने आया है कि इंग्लैंड के 64.5% पादरियों का कहना है कि समलैंगिक संबंधों को पाप या उनके मजहबी ग्रन्थों के खिलाफ नहीं माना जाना चाहिए। यही नहीं, 27.3% पादरियों ने समलैंगिकों के लिए शुचिता की धारणा को नकार दिया। साथ ही 37.3% पादरियों ने कहा है कि वह समलैंगिकों के बीच यौन संबंधों से उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं है।

द टाइम्स के इस सर्वे में यह भी सामने आया है कि 75% पादरियों का मानना है कि ब्रिटेन को अब ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए। वहीं, 64 फीसदी पादरियों ने कहा है कि ब्रिटेन को ऐतिहासिक रूप से ईसाई देश तो कहा जा सकता है, लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए इसे ईसाई देश नहीं कहा जाना चाहिए।