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करण के लिए फरहिना बन गई खुशबू, इस्लाम छोड़ अपनाया हिन्दू धर्म: माँग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र पहन पहुँची कोर्ट

बिहार के मुजफ्फरपुर से एक मामला सामने आया है जिसमें जब मुहब्बत परवान चढ़ा तो मजहब की दीवार फाँद प्रेम कहानी कोर्ट पहुँच गया। दरअसल, मामला एक मुस्लिम लड़की के हिन्दू धर्म अपनाकर विवाह करने का है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अपने प्रेम को पाने के लिए मुस्लिम लड़की फरहिना ने इस्लाम छोड़कर हिन्दू धर्म अपनाने और करण नाम के हिंदू लड़के से शादी करने पर अड़ गई।

दरअसल, फरहिना ने करण से विवाह के लिए पहले हिन्दू धर्म अपनाकर खुशबू बनीं और फिर माँग में सिंदूर, गले में मंगलसूत्र पहने फरहिना सीधे कोर्ट पहुँच गई और सबके सामने कहा कि वो करण से ही शादी करेंगी और उसके साथ ही रहेगी। इस मामले में जो जानकारी रिपोर्ट में सामने आई है उसके अनुसार करण और फरहिना दोनों मुजफ्फरपुर के करजा थाना क्षेत्र के एक ही गॉँव के रहने वाले हैं। कहा जा रहा है करीब डेढ़ साल पहले दोनों के बीच प्यार हुआ और फिर दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। 

फरहिना के परिजनों ने लगाया अपहरण का आरोप 

हालाँकि, मुस्लिम लड़की फरहिना के परिजन उनके हिन्दू धर्म अपनाने और इस विवाह से खुश नहीं हैं। फरहिना के परिजनों ने अपहरण का मामला दर्ज कराया है। वहीं जैसे ही फरहिना को इस FIR की जानकारी हुई तो वह खुद थाना पहुँच गई, जहाँ से उसे कोर्ट ले जाकर बयान दर्ज करवाया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट में फरहिना ने कहा, “मैं और करण दोनों बालिग हैं और साथ रहना चाहते हैं।” गले में मंगलसूत्र पहने और माँग में सिंदूर लगाए फहरिना ने बताया कि दोनों पहले ही हिन्दू रीति से मंदिर में शादी कर चुके हैं। वहीं फरहिना ने इस मामले में मीडिया के सामने बताया कि उसके परिवार के लोग इस शादी के खिलाफ हैं, और बार-बार धमका रहे हैं जबकि यह मामला मीडिया और सोशल मीडिया में आ जाने से अब कई सामाजिक संगठन भी फरहिना के सपोर्ट में हर संभव मदद को आगे आएँ हैं। 

घर से भागकर की शादी 

परिजनों द्वारा लगाए जा रहे अपहरण के आरोप को नकारते हुए फरहिना खातून ने बताया कि हाल ही में दोनों घर से भाग गए थे, जिसके बाद उसके परिजनों ने करण और उसके परिवार के खिलाफ अपहरण का केस भी दर्ज करवा दिया है। जिसके बाद फरहिना ने खुद ही वकील से सम्पर्क कर थाने और कोर्ट में में जाकर अपने बयान में करण से शादी की बात कही।

ओवैसी की सभा में लगे ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे, AIMIM कैंडिडेट अब्दुल मोबीन पर FIR: प्रशासन ने बताया माहौल खराब करने वाली हरकत

झारखंड के गिरडीह जिले में बुधवार (30 अगस्त 2023) को AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की जनसभा में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए हैं। मौके पर मौजूद सरकारी कर्मचारी की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज कर मामले की जाँच कर रही है। ऑपइंडिया से बात करते हुए गिरडीह के प्रशासनिक अधिकारियों ने ओवैसी की सभा में पाकिस्तान समर्थक नारों की पुष्टि की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला डुमरी थाना क्षेत्र के KV हाईस्कूल मैदान का है। बुधवार को यहाँ असदुद्दीन ओवैसी अपने विधानसभा प्रत्याशी मौलाना अब्दुल मोबीन रिज़वी के समर्थन में जनसभा करने पहुँचे थे। सभा शुरू होने के कुछ देर बाद ही भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने नारेबाजी शुरू कर दी। दावा किया जा रहा है कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा सभा में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए गए। नारेबाजी के दौरान ओवैसी ने नारे लगा रहे व्यक्ति को टोकते हुए कहा, “तुम्हें ज़ाकिर लाया है क्या ?”

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ऑपइंडिया ने इस मामले में सहायक निर्वाचन अधिकारी डुमरी दिव्या से बात की। दिव्या ने हमें बताया कि सोशल मीडिया पर वायलर हो रहे वीडियो के अलावा मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी भी सभा की रिकॉर्डिंग कर रहे थे।

अधिकारी ने कहा कि सभा के बाद वीडियो की जाँच में प्रथम दृष्ट्या भीड़ में से किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारेबाजी की पुष्टि करते हुए दिव्या ने इसे आचार संहिता का उल्लंघन बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि मौके पर मौजूद ग्रामसेवक की तहरीर पर केस दर्ज करवाया गया है।

ग्रामसेवक राजेश्वर महतो ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में खुद के मौके पर मौजूद होने और पाक समर्थक नारेबाजी के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की पुष्टि की। इस मामले में गिरडीह प्रशासन द्वारा जारी प्रेसनोट में भी दर्शक दीर्घा से भी ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने की पुष्टि की गई है। गिरडीह के PRD विभाग के मुताबिक यह हरकत साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की साजिश है।

इस मामले में थाना डुमरी में AIMIM (ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन) प्रत्याशी अब्दुल मोबिन रिजवी और सभा के आयोजक मुजफ्फर हसन नूरानी को नामजद किया गया है। वहीं, अन्य अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धाराओं में FIR दर्ज हुई है।

AIMIM ने वीडियो को बताया एडिटेड

ऑपइंडिया से बात करते हुए केस में नामजद AIMIM प्रत्याशी मौलाना अब्दुल मोबीन रिज़वी ने वीडियो को एडिटेड बताया है। उन्होंने बिहार के एक न्यूज़ चैनल पर अपनी वीडियो को काट-छाँट कर वायरल करने का आरोप लगाया है। अब्दुल ने हमें बताया कि मोहम्मद शाकिर उनके प्रदेश अध्यक्ष हैं, जिनके समर्थन में ‘शाकिर साहब जिंदाबाद’ का नारा लगाया गया था।

बताते चलें कि झारखंड के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के देहांत के चलते डुमरी विधानसभा सीट खाली हुई है। यहाँ हो रहे उपचुनाव में AIMIM सहित तमाम पार्टियों ने चुनाव मैदान में अपनी दावेदारी ठोंकी है। इसको लेकर चुनावी प्रचार जारी है। यहाँ 5 सितंबर 2023 को मतदान होगा।

OCCRP की रिपोर्ट को अडानी समूह ने नकारा: कहा- हिंडनबर्ग ने भी की थी ऐसी ही निराधार बातें, जॉर्ज सोरोस की फंडिंग को बताया पीछे

खोजी पत्रकारों के ग्लोबल नेटवर्क ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) ने गुरुवार (31 अगस्त 2023) को अडानी समूह (Adani Group) को लेकर एक रिपोर्ट जारी की। आरोप लगाया गया है कि समूह ने मॉरीशस के Opaque Funds के जरिए अपनी ही कंपनियों के सूचीबद्ध शेयरों को खरीदने में लाखों डॉलर का निवेश किया।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अडानी परिवार और उनके साझेदारों के जरिए गुपचुप रुप से ये निवेश किए गए। इसके लिए OCCRP ने कई टैक्स हेवन और अडानी समूह के आंतरिक ईमेल की फाइलों की समीक्षा का हवाला दिया है। उसने कहा कि जाँच में कम-से-कम दो मामले पाए गए, जहाँ ‘रहस्यमय’ निवेशकों ने ऐसी ऑफशोर संस्थाओं के जरिए अडानी के स्टॉक को खरीदा और बेचा।

वहीं, OCCRP के आरोपों को अडानी समूह ने सिरे से खारिज कर दिया है। अडानी समूह का कहना है, “हम इन दोहराए गए आरोपों को साफ तौर पर खारिज करते हैं। ये खबरों पर आधारित रिपोर्ट्स गुणवत्ताहीन हिंडनबर्ग रिपोर्ट को दोबारा से जिंदा करने की विदेशी मीडिया के एक वर्ग की मिलीजुली कोशिश है।”

अडानी परिवार के साथ जुड़े रहस्यमयी निवेशक

रिपोर्ट में OCCRP ने दावा किया कि अडानी परिवार के साथ रहस्यमयी निवेशक- नासिर अली शबान अहली और चैंग चुंग-लिंग के लंबे वक्त तक कारोबारी रिश्ते रहे हैं। ये दोनों गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी की समूह की कंपनियों और फर्मों में निवेशक, निदेशक और शेयरधारक के तौर पर भी काम कर चुके हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, दस्तावेज़ों से पता चलता है कि शेयरों में निवेश करने वाली प्रभारी प्रबंधन कंपनी ने विनोद अडानी की कंपनी को अपने निवेश में सलाह देने के लिए भुगतान किया था। ओसीसीआरपी का कहना है कि अहली और चांग अडानी समूह के प्रमोटरों की ओर से काम कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, “अगर ऐसा है तो अडानी ग्रुप में उनकी हिस्सेदारी का मतलब होगा कि अंदरूनी लोगों के पास गैरकानूनी तरीके से 75 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी है।” इस रिपोर्ट में ये बात भी कही गई है कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि चांग और अहली का पैसा अडानी परिवार से आ रहा था, लेकिन इस बात के सबूत हैं कि अडानी के शेयरों में निवेश को परिवार की ओर से समन्वय किया गया।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “अडानी समूह का बाजार पूंजीकरण सितंबर 2013 में आठ अरब डॉलर था। ये बीते साल बढ़कर 260 अरब डॉलर हो गया। ये समूह परिवहन, रसद, प्राकृतिक गैस वितरण, कोयला व्यापार, उत्पादन, बिजली उत्पादन व ट्रांसमिशन, सड़क निर्माण, डेटा सेंटर और रियल एस्टेट समेत विभिन्न क्षेत्रों के कारोबार से जुड़ा है।”

अडानी समूह पर ये नए आरोप लगभग 8 महीनों बाद लगाए गए हैं। इससे पहले 24 जनवरी को अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग ने उद्योगपति गौतम अडानी की कंपनी पर धोखाधड़ी, स्टॉक मूल्य में हेरफेर, ग्रुप की कंपनियों को ओवरवैल्यूड और टैक्स हेवन के गलत इस्तेमाल के आरोप लगाए थे। ये मामला देश की संसद में भी जमकर उछला था।

इस खुलासे के बाद अडानी समूह के शेयरों की कीमतों में लगभग 150 अरब बिलियन डॉलर की गिरावट दर्ज की गई थी। हालाँकि, तब अडानी समूह ने सभी आरोपों से इनकार किया था। ख़ुद को ‘शॉर्टसेलर’ बताने वाली हिंडनबर्ग पर भी मुनाफ़ा कमाने के लिए इस रिपोर्ट को जारी करने के आरोप लगते रहे हैं। ताजा आरोपों को भी इस समूह ने निराधार बताया है।

अडानी समूह को पहले से था अंदेशा

अडानी ग्रुप ने रिपोर्ट पर कहा कि OCCRP जैसी विदेशी मीडिया को अरबपति इन्वेस्टर जॉर्ज सोरोस और रॉक फेलर ब्रदर्स फंड से फंडिंग और समर्थन मिलती है। ये लोग इसे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं और हिंडनबर्ग रिपोर्ट वाले आरोप भी फायदे के लिए लगाए गए हैं।”

अडानी समूह का कहना है कि मॉरीशस के फंड का नाम पहले ही अमेरिकी शॉर्टसेलर हिंडनबर्ग रिपोर्ट में आ चुका है और ये आरोप न केवल निराधार और अप्रमाणित हैं, बल्कि हिंडनबर्ग के आरोपों से अलग नहीं हैं।

ये दावे एक दशक पहले के बंद हो चुके केसों पर आधारित हैं, तब राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) के जरिए अधिक चालान, विदेश में धन हस्तांतरण, संबंधित पार्टी लेनदेन और निवेश के आरोपों की जाँच की थी।

दरअसल कुछ दिन पहले रिपोर्ट आई थी कि खोजी पत्रकारों वासा 24 गैर-लाभकारी जाँच केंद्रों की ओर से गठित एक खोजी रिपोर्टिंग मंच कहने वाला ओसीसीआरपी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट्स लाने की तैयारी में है। यह यूरोप, अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में फैला हुआ है।

इसमें ये भी बताया गया था कि उसकी इस रिपोर्ट के निशाने पर बड़े भारतीय कॉरपोरेट घराने हैं वो इन पर इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट जारी करने के आखिरी चरण में है। इन पर रिपोर्ट्स की एक सीरीज पब्लिश की जाएगी। इसमें ये भी कहा गया था कि वो कारोबारी ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में पैसा लगाने वाले विदेशी निवेशकों के नामों का खुलासा कर सकता है।

ईरान के वेटलिफ्टर ने पोडियम पर इजरायल के खिलाड़ी से मिलाया हाथ, इस्लामी मुल्क ने लगाया आजीवन बैन: समिति को भी किया भंग

ईरान ने अपने एक सीनियर वेटलिफ्टर पर लाइफटाइम (आजीवन) बैन लगा दिया है। पोलैंड में आयोजित मास्टर वेट लिफ्टिंग चैंपियनशिप में मेडल लेने के दौरान इजरायली खिलाड़ी के साथ हाथ मिलाने के कारण ईरान ने ऐसा निर्णय लिया। इस खिलाड़ी का नाम मोस्तफा राजेई (Mostafa Rajaei) है, जो ईरानी झंडे के साथ पोडियम पर खड़े हुए थे। इस दौरान इजरायली खिलाड़ी मैक्सिम स्विर्स्की ने पोडियम के पीछे उनसे हाथ मिलाया और तस्वीरें खिंचाई। इस टूर्नामेंट में इजरायली खिलाड़ी मैक्सिम स्विर्स्की तीसरे स्थान पर रहे।

राजेई पर लगाया लाइफ टाइम बैन

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी सरकार ने राजेई के अपराध को ‘अक्षम्य’ बताते हुए सभी खेल सुविधाओं में ही एंट्री करने पर बैन लगा दिया। ईरान के वेटलिफ्टिंग फेडरेशन ने बताया कि हैमद सालेहिनिया, जिन्होंने वेटलिफ्टिंग टीम का नेतृत्व किया था, उन्हें भी पद से हटा दिया गया है। इतना ही नहीं, फेडरेशन ने कहा कि वेटरन वेटलिफ्टरों का प्रतिनिधित्व करने के लिए बनाई गई एक समिति को भी भंग कर दिया गया है।

फेडरेशन ने क्रांति के नेता से मांगी माफी

वेटलिफ्टिंग फेडरेशन के चीफ सजद अनोशीरवन ने “क्रांति के नेताओं, शहीदों के परिवारों और ईरान के सभी लोगों से माफी” माँगने के साथ ही वादा किया कि अब से ऐसा कभी नहीं देखने को मिलेगा। आयोजकों के मुताबिक, पोलैंड के क्राकोव में आयोजित इस मास्टर वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 47 देशों के 1,000 से अधिक एथलीटों ने भाग लिया था।

अवि कनेर नाम के एक्स (अब ट्विटर) यूजर ने लिखा, “ईरानियन वेटलिफ्टर मोस्तफा राजेई को मुल्ला टेरर देश ने लाइफ टाइम बैन कर दिया है, क्यों? क्योंकि उन्होंने इजरायली खिलाड़ी मैक्सिम स्विर्स्की के साथ हाथ मिला कर उनका अभिवादन स्वीकारा था।”

इजरायली खिलाड़ियों के साथ खेलने पर भी मनाही

बता दें कि ईरान इजरायल को एक देश के रूप में नहीं मानता है और ईरानी और इजरायली एथलीटों के बीच किसी भी संपर्क की सख्ती से मनाही करता है। पिछले सालों में कई बार ईरानी खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं से बाहर होना पड़ा है, क्योंकि उनका सामना इजरायली खिलाड़ियों से हो सकता था। इसकी वजह से कई खिलाड़ियों को टूर्नामेंट से नाम वापस लेने पड़े हैं, तो कई बार वो मेडिकल ग्राउंड का बहाना बनाकर खेलने से इनकार कर देते हैं।

बलिदानी की पत्नी के लिए लोगों ने जमीन पर बिछाई हथेलियाँ, उस पर चलकर पति की प्रतिमा का किया अनवारण: रक्षाबंधन पर ‘भाइयों’ ने पेश की मिसाल, Video वायरल

रक्षाबंधन के त्यौहार को इस बार मध्यप्रदेश के रतलाम में भाइयों ने खास बना दिया। दरअसल, रक्षाबंधन के अवसर पर बुधवार (30 अगस्त, 2023) को रतलाम के गुणावद में तिरंगा‎यात्रा निकालकर लांस नायक कन्हैयालाल जाट की प्रतिमा का अनावरण किया गया। इसे ‘राष्ट्र शक्ति स्थल स्मारक’ का नाम दिया गया। ऐसे में प्रतिमा के अनावरण को जाती हुई वीरांगना बहन के क़दमों में युवा भाइयों ने अपनी हथेलियाँ बिछा दीं।

इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। सिक्किम में बलिदान हुए कन्हैयालाल जाट के प्रतिमा के अनावरण के इस दृश्य को खूब सराहा जा रहा है। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बलिदानी की पत्नी वीरांगना ‎सपना जाट को प्रतिमा स्थल (राष्ट्र शक्ति स्थल) तक लाने के लिए‎ शहीद समरसता मिशन के सदस्यों और गाँव वालों ने उनके पैरों तले अपनी हथेलियाँ बिछा दीं। वायरल वीडियो में शहीद पति की ‎तस्वीर हाथ में लिए वीरांगना हथेलियों पर पाँव ‎रखते हुए प्रतिमा तक पहुँची और अनावरण ‎किया।

प्रतिमा के अनावरण के समय एक भावुक पल भी आया जब बलिदानी पति कन्हैयालाल की प्रतिमा को देखते ही वीरांगना सपना ‎उससे लिपटकर रो पड़ीं। ऐसे भावुक पल में उन्होंने अपने आँसू सँभालते हुए कहा, “ऐसा लग ‎रहा है कि शहीद समरसता मिशन के भाइयों ने ‎मुझे मेरा जीवन, मेरा पति लौटा दिया है।‎”

बता दें कि गुणावद के बलिदानी सपूत ‎कन्हैयालाल जाट 21 मई 2021 को ‎सिक्किम में बलिदान हुए थे। वहीं उनके सम्मान में इस राष्ट्र शक्ति‎स्थल का निर्माण शहीद समरसता मिशन द्वारा 4 लाख के जनसहयोग से ‎किया गया है।

बलिदानी के पैतृक गाँव में प्रतिमा के अनावरण के अवसर पर शहीद समरसता मिशन की प्रदेश संरक्षक वीरांगना प्रतिभा यादव ने बताया, ‘मिशन विगत 16 साल से शहादत के सम्मान में बलिदानियों के लिए कार्य कर रहा है। इसका नेतृत्व देश के लिए जीने-मरने वाले परिवारों के हाथों में है। यह बलिदानियों के सपनों के समरस राष्ट्र निर्माण की चलने वाली सतत प्रक्रिया है।”

गौरतलब है कि इस मिशन के लिए शहीद ‎समरसता मिशन के लोगों ने ‘राष्ट्र शक्ति स्थल’ स्मारक का निर्माण ‘वन चेक‎ वन साइन फॉर शहीद’ अभियान चलाकर‎ वीरांगना सपना जाट के बैंक अकाउंट में ही‎ डिजिटल माध्यम से धनराशि इकठ्ठा कर किया। 

कॉन्ग्रेस ने पोस्टर से राहुल गाँधी को निकाला, केजरीवाल की हुई एंट्री: दिल्ली के CM का चेहरा गायब करने पर हुआ था विवाद, मुंबई में जुटान

बीजेपी ​विरोधी 28 विपक्षी दलों के गुट इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इनक्लूसिव अलायंस (INDIA) के नेताओं का मुंबई में जमावड़ा लगा है। 31 अगस्त और 1 सितंबर को ये नेता भविष्य की रणनीतियों पर विचार करेंगे। उससे पहले गुट में शामिल दलों के बीच भी शह-मात का खेल चल रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार से लेकर संयोजक पद तक के लिए दावेदारी पेश की जा रही है, दूसरी ओर कॉन्ग्रेस के पोस्टर से राहुल गाँधी ही गायब हो गए हैं।

दरअसल, कॉन्ग्रेस ने 30 अगस्त 2023 को एक पोस्टर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी किया था। इसमें दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का चेहरा नहीं था। इसको लेकर विवाद पैदा होने पर पार्टी ने वह पोस्टर डिलीट कर दिया और जो नया पोस्टर जारी किया उसमें उसके पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी नहीं हैं।

शुरुआती पोस्टर में राहुल के साथ उनकी माँ सोनिया गाँधी, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, नीतीश कुमार, लालू यादव, ममता बनर्जी, हेमंत सोरेन जैसे विपक्षी नेता नजर आ रहे थे। राहुल गाँधी इस पोस्टर में सबसे आगे दिख रहे थे। लेकिन इसमें केजरीवाल को जगह नहीं दी गई थी। इसको लेकर विवाद पैदा होने पर कॉन्ग्रेस ने यह पोस्टर डिलीट कर दिया।

इसके बाद कॉन्ग्रेस ने ‘द पावर आफ INDIA’ शीर्षक से नया पोस्टर जारी किया। इस पोस्टर पर लिखा हुआ है- द वॉयस ऑफ इंडिया इज INDIA। इस पोस्टर से राहुल गाँधी को निकालकर केजरीवाल को जगह दी गई है।

साथ ही इसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया, केरल के सीएम पिनराई विजयन, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, हिमाचल प्रदेश के सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और पंजाब के सीएम भगवंत मान भी नजर आ रहे हैं।

गौरतलब है कि विपक्षी दलों के इस गुट के भीतर का मतभेद केवल इस पोस्टर से ही जाहिर नहीं हुआ है। कहा जाता है कि नीतीश कुमार गुट के संयोजक बनना चाहते हैं। कॉन्ग्रेस चाहती है कि राहुल गठबंधन का चेहरा बनें। वहीं, आप केजरीवाल तो उद्धव ठाकरे की शिवसेना अपने पार्टी नेता को प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने की इच्छा जाहिर कर चुकी है। यहाँ गठबंधन के बंधन के बिखरने के आसार पहले ही दिखने लगे हैं।

इतना ही नहीं आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का दौरा कर के अपनी ‘गारंटियों’ का प्रचार किया। गौरतलब है कि इन दोनों ही राज्यों में भाजपा-कॉन्ग्रेस में मुख्य लड़ाई होती है। वहीं आप ने राजस्थान में भी अपनी पार्टी ने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है।

इस विपक्षी गठबंधन की पहली बैठक जून में पटना में हुई थी, इसमें 15 राजनीतिक पार्टियाँ शामिल हुई थीं। वहीं बेंगलुरु में जुलाई में हुई दूसरी बैठक में ‘इंडिया’ नाम फाइनल किया गया था। उस बैठक में गठबंधन के दलों की संख्या बढ़कर 26 हो गई थी।

जम्मू-कश्मीर में कभी भी करा सकते हैं चुनाव, लेकिन पूर्ण राज्य का दर्जा देने की तारीख नहीं बता सकते: सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार, कहा- सब हालात पर निर्भर

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 29 अगस्त 2023 को केंद्र सरकार से पूछा था कि जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा कब बहाल किया जाएगा? वहाँ चुनाव कब कराए जाएँगे? इस पर केंद्र ने जवाब दाखिल कर बताया कि इसके लिए कोई निश्चित तारीख नहीं बताई जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने मामले में केंद्र सरकार से विस्तृत रिपोर्ट माँगी थी। इस पर केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 31 अगस्त 2023 दिन गुरुवार को कोर्ट में बताया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने के लिए तैयार है, लेकिन इसे पूर्ण राज्य का दर्जा कब बहाल किया जाएगा, इसको लेकर समयसीमा नहीं दे सकती।

सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का केंद्रशासित प्रदेश बने रहना एक अस्थायी घटना है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव कराने के लिए तैयार है, लेकिन चुनाव का समय चुनाव आयोग तय करेगा। इसके साथ ही आयोग यह भी तय करेगा कि यह चुनाव पंचायत स्तर से शुरू किया जाए या जिला स्तर से। यह आयोग का काम है।

उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थायित्व बहाल करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कदम उठाए हैं। साल 2019 से पहले की अपेक्षा जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में 42.5 प्रतिशत की कमी आई है। घुसपैठ की घटनाओं में 90.20 प्रतिशत और पत्थरबाजी जैसी घटनाओं में 92 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, केंद्रशासित प्रदेश में सुरक्षाबलों के हताहत होने के मामलों में 69.5 प्रतिशत की कमी आई है।

उन्होंने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश में हालत कितनी सामान्य है, इसके आधार पर केंद्र सरकार उसे पूर्ण राज्य का दर्जा देने के बारे में विचार करेगी। केंद्र ने कहा कि वह केंद्रशासित प्रदेश में चुनाव कराने के लिए किसी भी समय तैयार है। इसके लिए केंद्र सरकार मतदाता सूची को अपडेट करने का काम लगभग पूरा हो चुका है।

एसजी मेहता ने कहा, “मैं पूर्ण राज्य में परिवर्तन के लिए सटीक समय अवधि देने में असमर्थ हूँ, लेकिन केंद्रशासित प्रदेश केवल एक अस्थायी घटना है। सिर्फ जनवरी 2022 में यहाँ 1.8 करोड़ पर्यटक आए और 2023 में 1 करोड़ पर्यटक आए। ये वे कदम हैं, जो केंद्र द्वारा उठाए जा रहे हैं। केंद्र ये कदम केवल तब तक उठा सकता है, जब तक यह केंद्रशासित प्रदेश है। केंद्र चुनाव के लिए तैयार है, लेकिन राज्य और केंद्रीय चुनाव आयोग को यह तय करना होगा कि इसे कब आयोजित करना है और किस स्तर से शुरू करना है।”

तुषार मेहता ने आगे कहा, “चुनाव पर सबसे अधिक प्रभाव पत्थरबाजी की घटनाओं और बंद/हड़ताल से पड़ा। साल 2018 में पथराव की 1761 घटनाएँ हुई थीं। अब यह शून्य है। सिर्फ पुलिस और सुरक्षा कदमों के कारण नहीं, बल्कि अन्य कदमों जैसे कि युवाओं को लाभप्रद रोजगार देना, जो अलगाववादी ताकतों द्वारा गुमराह किए जाते थे। 2018 में अलगाववादी समूहों द्वारा आयोजित बंद की संख्या 52 थी। अब यह शून्य है।”

नाम- बदनाम, पता- कब्रिस्तान… अमे​जन अधिकारी की हत्या में दिल्ली पुलिस ने समीर और बिलाल को पकड़ा: शूटआउट एट लोखंडवाला देखकर बनाई गैंग

ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन के मैनेजर हरप्रीत गिल की हत्या की गुत्थी सुलझ गई है। दिल्ली के भजनपुरा इलाके में गिल की मंगलवार (29 अगस्त 2023) की रात गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने बताया है कि ट्रैफिक विवाद में इस घटना को अंजाम दिया गया था। मुख्य आरोपित मोहम्मद समीर और उसके साथी बिलाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। दोनों की उम्र 18 साल है।

पूछताछ में दोनों ने हत्याकांड में सोहैल, मोहम्मद जुनैद और अदनान के शामिल होने की भी जानकारी दी है। ये तीनों फिलहाल फरार हैं। मोहम्मद समीर 10 केसों में पहले से नामजद है। शूट आउट एट लोखंडवाला फिल्म से प्रभावित होकर वह 20 से 25 लोगों का माया गैंग चलाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार की रात सभी 5 आरोपितों ने बिलाल के घर पर पार्टी की थी। वहाँ से वे 2 अलग-अलग स्कूटरों पर सवार हो कर भजनपुरा की तरफ आ रहे थे। वे भजनपुरा के सुभाषनगर इलाके की संकरी गली नंबर 8/4 में घुसे। ठीक उसी समय अमेजन कम्पनी के सीनियर मैनेजर 36 वर्षीय हरप्रीत गिल अपने रिश्तेदार के साथ दूसरी तरफ से आ रहे थे। आमने-सामने आ जाने की वजह से रास्ता जाम हो गया। सामने से हटने के मुद्दे पर हरप्रीत और मोहम्मद समीर की बहस हो गई।

नोकझोंक के बाद समीर और उसके साथियों ने हरप्रीत पर फायर झोंक दिया। गोली हरप्रीत के दाएँ कान की तरफ से सिर में घुसी और दूसरी तरफ से निकल गई। हरप्रीत को लोक नायक जयप्रकाश अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू की तो घटना के पीछे मोहम्मद समीर और उसकी माया गैंग का हाथ निकला। गुरुवार (31 अगस्त) को पुलिस ने भजनपुरा के पास सिग्नेचर ब्रिज से बिलाल और मोहम्मद समीर को गिरफ्तार किया।

पुलिस की पूछताछ में समीर ने हत्याकांड में शामिल अपने बाकी 3 साथियों के नाम 23 वर्षीय बावर्ची उर्फ़ सोहैल, 20 वर्षीय बिरयानी उर्फ़ मोहम्मद जुनैद और 19 वर्षीय डॉन उर्फ़ अदनान को बताया। उत्तर-पूर्वी दिल्ली पुलिस के DCP जॉय एन तिर्की ने बताया कि फिलहाल तीनों आरोपित फरार चल रहे हैं। पुलिस इन सभी की तलाश में दबिश दे रही है।

शूट आउट एट लोखंडवाला देख कर बनाई गैंग

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में बालिग हुए मोहम्मद समीर ने अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल में अपना नाम बदनाम और पता कब्रिस्तान लिखा है। 18 साल के समीर पर 10 केस दर्ज हैं, जिसमें 4 हत्या के हैं। बाकी मुकदमे हत्या के प्रयास, लूट और अवैध हथियार रखने के हैं। समीर ने बालिग होने से पहले ही अपराध शुरू कर दिया था। शूटआउट एट लोखंडवाला फिल्म देख कर उसने अपनी माया गैंग तैयार की थी। मोहम्मद समीर खुद को अपनी गैंग के लोगों से माया भाई कहलवाता था। इंस्टाग्राम पर समीर अवैध हथियारों के साथ अक्सर अपनी फोटो शेयर करता था। वो और उसके साथी आए दिन फायरिंग कर दहशत फैलाया करते थे।

बरेली के मिशनरी स्कूल की मुस्लिम टीचर ने छात्रों की राखी कैंची से काटी, कहा- हिंदू धर्म का प्रचार यहाँ नहीं होगा: विरोध के बाद माँगी माफी

उत्तर प्रदेश के बरेली के एक मिशनरी स्कूल में छात्रों की राखी कैंची से कटवाने का मामला सामने आया है। कथित तौर पर छात्रों से कहा गया कि स्कूल में हिंदू धर्म का प्रचार-प्रसार नहीं किया जा सकता है। अभिभावाकों और हिंदू संगठनों के विरोध के बाद स्कूल ने माफी माँग ली है।

इस स्कूल का नाम होली फैमिली कॉन्वेंट स्कूल है। स्कूल बरेली के आंवला सर्किल क्षेत्र के भमोरा रोड पर स्थित है। छात्रों की राखी काटने की घटना सोमवार (28 अगस्त 2023) की है। रिपोर्टों के अनुसार कुछ छात्र सोमवार को राखी बाँधकर स्कूल आए थे। इसकी जानकारी मिलने के बाद एक शिक्षिका ने कैंची मँगवाकर छात्रों की राखी और कलावा काट दी

प्रदर्शनकारियों ने इसके लिए शगुफ्ता अंसारी नाम की एक शिक्षिका को जिम्मेदार बताया है। बताया है कि वह इस स्कूल में बच्चों को विज्ञान पढ़ाती है। हिंदू संगठनों से जुड़े लोगों ने ऑपइंडिया को बताया है कि इस स्कूल का संचालन केरल का कोई ईसाई करता है। हालाँकि उसके बारे में विस्तार से वे हमें जानकारी नहीं दे पाए।

स्कूल से घर जाने के बाद छात्रों ने राखी काटे जाने की घटना के बारे में अपने अभिभावकों को बताया। पीड़ित छात्रों के परिजन अगले दिन 29 अगस्त को शिकायत ले कर स्कूल पहुँचे। मामले की जानकारी हिन्दू संगठनों को हुई तो वे भी अभिभावकों के साथ विरोध-प्रदर्शन में शामिल हो गए। स्कूल के सामने हो रहे हंगामे की सूचना पर पुलिस पहुँची। इस बीच स्कूल प्रशासन ने अपनी गलती मानी और लिखित तौर पर भविष्य में दोबारा ऐसी गलती न होने का आश्वासन दिया। लिखित आश्वासन के बाद हिन्दू संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन खत्म कर दिया।

विरोध-प्रदर्शन में शामिल हरेंद्र फौजी ने मिशनरी स्कूलों पर धर्म परिवर्तन का एजेंडा चलाने का आरोप लगाया। होली फैमिली स्कूल में हुई घटना को भी उन्होंने इसी का हिस्सा बताया। एक अन्य प्रदर्शनकारी आशीष ने कहा कि स्कूल के अंदर क्रिसमस का सेलिब्रेशन 15 दिनों तक चलता है। लेकिन इसका हिन्दू समाज विरोध नहीं करता। अब भविष्य में किसी हिंदू छात्र को प्रताड़ित किया गया तो स्कूल बंद करवा दिया जाएगा।

स्कूल में बाइबिल की पढ़ाई, लेकिन जय श्री राम प्रतिबंधित

विरोध-प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले बरेली के सामाजिक कार्यकर्ता ओमेंद्र पाल से ऑपइंडिया को बताया कि स्कूल में कई हिन्दू बच्चों को उनकी मर्जी के खिलाफ स्कूल में बाइबिल पढ़ाई जाती है। लेकिन जय श्रीराम बोलना प्रतिबंधित है। उन्होंने स्कूल का प्रबंधक केरल के किसी ईसाई को बताया। उनके अनुसार बच्चों की राखियाँ उतरवाने वाली टीचर मुस्लिम है। उसके शौहर कपड़ा व्यवसायी हैं।

हिन्दू संगठन से जुड़े सुनील सौरभ ने बताया कि शगुफ्ता मैडम ने स्कूल की मैनेजमेंट कमेटी में शामिल सिस्टर एंजोज के कहने पर छात्रों की राखी काटे थे। ओमेंद्र पाल का यह भी कहना है कि होली फैमिली स्कूल में अक्सर छात्रों को कलावा और तिलक लगाने पर टोका जाता है। माफीनामे पर स्कूल की उप प्रधानाचार्या सिस्टर सोफी मारिया के हस्ताक्षर हैं। ऑपइंडिया के पास माफीनामे की कॉपी मौजूद है।

तिलक लगाने-कलावा बाँधने से छात्रों को नहीं रोक सकते, हिंदू छात्राओं को हिजाब के लिए मजबूर नहीं कर सकते: दमोह स्कूल केस में हाई कोर्ट

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि हिंदू छात्रों को तिलक लगाने या कलावा बाँधने से स्कूल में नहीं रोका जा सकता। इसी तरह हिंदू या जैन छात्राओं को हिजाब जैसे इस्लामी पोशाक पहनने को मजबूर नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने यह टिप्पणी 30 अगस्त 2023 को दमोह के गंगा जमुना हायर सेकेंडरी स्कूल से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की।

इस सुनवाई के दौरान जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की एकल बेंच ने स्कूल के प्रबंधकों को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत भी दी। 31 मई 2023 को इस के 11 सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

जस्टिस दिनेश कुमार पालीवाल की सिंगल बेंच ने स्कूल कमेटी के सदस्यों आसफा शेख, अनस अतहर और रुस्तम अली को जमानत देते हुए कहा, “स्कूल में छात्रों को अपने धर्म से जुड़ी चीजें जैसे कलावा पहनने और माथे पर तिलक लगाने से नहीं रोकना चाहिए। अन्य धर्म के छात्रों को ऐसी किसी भी सामग्री या भाषा को पढ़ने या अध्ययन करने के लिए मजबूर नहीं किया जाए जो मध्य प्रदेश शिक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित या अनुमोदित नहीं है।”

अपने निर्देशों में जस्टिस पालीवाल ने कहा, “स्कूल प्रशासन अन्य धर्म यानी हिंदू और जैन आदि की छात्राओं को स्कूल परिसर या क्लास रूम में कहीं भी सिर पर स्कार्फ (हिजाब) पहनने के लिए मजबूर नहीं करेगा। यह निर्देशित किया जाता है कि वे जमानत में जिक्र की गई सभी शर्तों का भी पालन करेंगे।”

क्या है मामला?

दमोह का यह स्कूल टॉपर छात्राओं का हिजाब में पोस्टर जारी करने के बाद विवादों में आया था। इसके बाद जब स्कूल की जाँच कराई तो कई तरह की अनियमितताएँ सामने आई। पता चला कि इस स्कूल के ड्रेस कोड में हिजाब शामिल है। वहीं तिलक-कलावा पर पाबंदी थी। छात्र-छात्राओं के लिए उर्दू पढ़ना अनिवार्य था। प्रेयर में दुआ होती थी। स्कूल में आने का एक रास्ता पास की मस्जिद से भी था। यह बात भी सामने आई थी कि स्कूल की कई शिक्षिकाओं का इस्लामी धर्मांतरण हुआ था। इन तथ्यों के सामने आने के बाद मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने स्कूल की मान्यता रद्द कर दी थी।

उल्लेखनीय है कि जब गैर मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनाने का मामला सामने आया था तो स्कूल प्रबंधन ने सफाई देते हुए इसे ‘स्कार्फ’ बताया था। साथ ही कहा था कि इसे पहनना जरूरी नहीं है। बाद में प्रबंधन ने इसके लिए खेद भी जताया था। लेकिन मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निर्देश पर जब मामले की जाँच आगे बढ़ी तो इस स्कूल की पोल-पट्टी खुलती गई।