17 साल के ईश्वर मारवाड़ी की हत्या के मामले में मुंबई पुलिस ने 32 साल के शफीफ अहमद अब्दुल मलिक शेख उर्फ शफी शेख को गिरफ्तार किया है। उसने 28 अगस्त को अपनी बीवी के ‘मुँहबोले भाई’ ईश्वर को हँसुए से काट डाला था। उसके शरीर के हिस्सों को बैग में भरकर ठिकाने लगाने के लिए घर के रसोईघर में छिपा रखा था।
मुंबई पुलिस डीसीपी हेमराज सिंह राजपूत के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि हँसुए से शफीक ने ईश्वर के शव के चार टुकड़े किए थे। सिर और हाथ को काट दिया था। उसके सिर पर हथौड़े से भी वार किया था। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई हँसुआ और हथौड़ा भी बरामद कर लिया है। कुछ रिपोर्टों में लाश के 5 टुकड़े किए जाने की बात कही गई है। वहीं मृतक का नाम ईश्वर आव्हाड बताया गया है।
ऑटो ड्राइवर शफीक अपने परिवार के साथ मुंबई के चेंबूर के RCF थाना क्षेत्र में रहता है। उसे अपनी बीवी के साथ ईश्वर के अवैध संबंधों का शक था। ईश्वर की शफीक के ससुराल से काफी नजदीकियाँ थी। कहा जा रहा है कि बचपन से उसका पालन पोषण शफीक अहमद के ससुर ने ही किया था। इसके कारण शफीक की बीवी उसे अपना भाई मानती थी। लेकिन शफीक को शक था कि ईश्वर के उसकी बीवी से अवैध संबंध हैं। साथ ही अपनी साली के साथ भी ईश्वर के व्यवहार को लेकर वह सशंकित था।
सोमवार को ईश्वर को लेकर शफीक अपने फ्लैट पर गया। हत्या कर उसकी लाश के टुकड़े कर दिए। ईश्वर के अचानक गायब होने के बाद शफीक के ससुर ने पुलिस को सूचना दी। जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि ईश्वर अंतिम बार शफीफ के साथ देखा गया था। इसके बाद जब उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि वह कई बार ईश्वर को अपनी बीवी से दूर रहने की हिदायत दे चुका था। लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। शफीक ने दोनों के बीच अफेयर होने का दावा किया है। पुलिस ने उसके खिलाफ IPC की धारा 302 (हत्या) और 201 (सबूत मिटाने) के तहत केस दर्ज किया है। शफीक इससे पहले 2013 में जय नारायण कोली की हत्या और डकैती के मामले में गिरफ्तार हुआ था। वह कई सालों तक जेल में भी रहा था। हालाँकि उसका दावा है कि 2013 के हत्याकांड में उसकी बेगुनाही साबित हो चुकी है।
झारखंड के लोहरदगा जिले में डेढ़ साल पहले शादी समारोह से एक युवती को किडनैप कर उसके साथ गैंगरेप करने वाले सरफराज, शहजादा और संझार अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। तीनों पर कोर्ट ने जुर्माना भी ठोका है। ये वारदात जनवरी 2022 में अंजाम दी गई थी। घटना के बाद तनाव को देखते हुए पुलिस ने इन तीनों को एक सप्ताह में गिरफ्तार कर लिया था।
इस मामले में कुल 14 लोगों की गवाही दर्ज की गई थी। जज अखिलेश कुमार तिवारी ने सभी गवाहों और सबूतों को ध्यान में रखते हुए दोषियों को उम्रकैद की सजा की सजा दी। इसके साथ ही उन पर 38 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। अलग-अलग धाराओं में इन्हें सजाएँ भी अलग-अलग मिली हैं।
सदर थाना इलाके के तिगरा बगीचा टोली निवासी सेराज अंसारी के पुत्र आरोपित संझार अंसारी, यासीन अंसारी के पुत्र आरोपित सरफराज अंसारी उर्फ बाबू और सिद्धिक अंसारी के पुत्र शहजादा अंसारी उर्फ छोटू को दोषी पाया गया।
24 जनवरी 2022 की रात को किया था गैंगरेप
ये वारदात लोहरदगा के सदर थाना क्षेत्र अंतर्गत तिगरा गाँव में 24 जनवरी 2022 की शाम को अंजाम दिया गया था। पीड़िता युवती अपनी सहेली की शादी समारोह में शामिल होने के लिए आई हुई थी। इसी दौरान तीनों आरोपितों ने मौका देखकर युवती को उठा लिया और नदी किनारे ले गए। वहाँ तीनों ने युवती के साथ गैंगरेप को अंजाम दिया।
इस दौरान आरोपितों ने पीड़िता को धमकी भी दी थी कि इस घटना के बारे में किसी को ना बताए। हालाँकि, पीड़िता डरी नहीं और परिजनों को साथ लेकर 26 जनवरी 2022 को महिला थाना पहुँचकर अज्ञात युवकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। गिरफ्तारी के बाद तीनों ने अपने अपराध कबूल कर लिए थे।
बताते चलें कि अभी चार दिन पहले यानी 25 अगस्त 2023 को झारखंड के सिमडेगा जिले की एक अदालत ने 8 साल की बच्ची से बलात्कार करने वाले मदरसे के एक इमाम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। उस पर 60 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था।
दरअसल, पिछले साल 11 दिसंबर 2022 को 8 साल की लड़की मदरसा में पढ़ने के लिए गई थी। क्लास खत्म होेने के बाद इमाम मोहम्मद अमीनुद्दीन अंसारी ने उसे एक सुनसान जगह पर ले जाकर दुष्कर्म किया। घर लौटने पर जब उसके माता-पिता को जानकारी मिली तो उन्होंने इस संबंध में कोलेबिरा थाने में दर्ज प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
आज से तीन महीने पहले एक शख्स ने स्वीडन के स्टॉकहोम की सबसे बड़ी सेंट्रल मस्जिद के सामने मुस्लिमों की मजहबी किताब कुरान को पैरों तले कुचलने के बाद जला दिया था। ये दिन 28 जून 2023 दिन बुधवार था। उसी दिन मुस्लिमों का त्योहार ईद-उल-अजहा यानी बकरीद था। इस घटना के बाद दुनिया भर में इसकी निंदा की गई थी।
यहाँ तक कि पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन NATO की में स्वीडन की सदस्यता देने की बात भी बिगड़ती नजर आई। इस घटना के बाद तुर्किए सहित दुनिया के तमाम मुस्लिम मुल्कों और इस्लामी संगठनों ने इसका कुरान जलाने का पुरजोर विरोध किया। जब शख्स ने कुरान जलाने का ऐलान किया था, तभी से उसका विरोध शुरू हो गया था।
हालाँकि, ऐसा नहीं था कि इससे पहले स्टॉकहोम में कुरान नहीं जलाई गई। इससे पहले भी कुरान जली थी, लेकिन इस बार खास बात कुरान जलाने शख्स को लेकर थी। ऐसा करने वाला इराकी मूल का शख्स था। धमकियों के बाद भी इराकी शरणार्थी सलवान मोमिका नाम का यह शख्स कुरान जलाने से पीछे नहीं हटा। उसने एक बार फिर ऐसा किया है।
37 साल के मोमिका ने राजधानी स्टॉकहोम में पाकिस्तानी दूतावास के सामने 28 अगस्त 2023 को कुरान की प्रति जलाई। इस दौरान एक पाकिस्तानी शख्स ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं रुका। यहाँ तक की इस पाकिस्तानी शख्स ने उससे कहा, “मैं बीमार हूँ, मैं रात को सो नहीं पाता।” इसके बाद भी मोमिका ने कुरान को आग लगा दी।
‘कुरान क्यों जला रहे हो?’
तुर्किए की अनादोलु न्यूज एजेंसी के मुताबिक, स्वीडन के पाकिस्तानी दूतावास के बाहर जब सलवान कुरान को आग के हवाले कर रहे थे तो पाकिस्तानी नागरिक मलिक शाहजा फूट-फूट कर रो पड़े। उन्होंने कहा, “मेरी बाइपास सर्जरी हुई है। बार-बार कुरान क्यों जला रहे हैं? मुझे ये सब देखकर रातों को नींद नहीं आती है।” दरअसल शाहजा यूरोप में कुरान की बेइज्जती से खासे दुखी थे।
सुरक्षा घेरे के पीछे खड़े शाहज़ा ने मोमिका को चिल्लाकर अपने इस काम पर दोबारा विचार करने के लिए कहा। रोते हुए उन्होंने कहा, “कृपया कुरान को मत जलाएँ। आप जो कर रहे हैं, वह ठीक नहीं है। मुझे अच्छा महसूस नहीं हो रहा है। मुझे नींद नहीं आ रही है।”
A Pakistani national, Malik Shahza, who was subjected to police intervention while he was trying to prevent the burning of the Qur'an in tears in the capital of Sweden, Stockholm, said that these attacks made him lose his sleep. pic.twitter.com/6YJVeDPLm7
शाहजा ने कहा, “मैं एक ऐसा शख्स हूँ, जिसकी बाईपास सर्जरी हुई है। आप लगातार कुरान को क्यों जला रहे हैं? आप पाकिस्तानी दूतावास, जिसे मैं अपना घर मानता हूँ, वहाँ क्यों आ रहे हैं और कुरान जला रहे हैं? मैं बीमार हूँ, मुझे नींद नहीं आ रही है। कृपया इसे खत्म करें। पुलिस इसकी मंजूरी क्यों दे रही है?”
इस मामले में पुलिस ने तुरंत दखल देकर शाहज़ा को चुप करा दिया और उसे थोड़ी देर के लिए हिरासत में लेकर इलाके से दूर ले गई। रिहा होने के बाद शहज़ा ने अनादोलु से कुरान जलाने की इन घटनाओं से उनके सेहत पर पड़ने वाले गहरे प्रभाव और कार्रवाई की गुहार के बारे में बात की।
उन्होंने कहा कि स्वीडिश राजनेताओं को कुरान जलाने की घटनाओं को रोकने की जरूरत है। दुनिया भर से विरोध में प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं और यह स्वीडन के लिए अच्छा नहीं है। हालाँकि, इससे मोमिका को कोई फर्क नहीं पड़ा। कुरान जलाने के काम के बाद पुलिस उन्हें एक बख्तरबंद वाहन में लेकर घटनास्थल से चली गई।
क़ुरान को बैन करने के पक्षधर हैं सलवान
सलवान मोमिका की उम्र 37 साल है और वो कई साल पहले इराक़ से भागकर स्वीडन आ गए थे। मोमिका फेसबुक पर खुद को ‘प्रबुद्ध राजनीतिज्ञ, विचारक, लेखक और एक आजाद नास्तिक’ बताते हैं। वह कई सोशल मीडिया साइटों- खासकर टिकटॉक और फेसबुक पर एक्टिव हैं।
हालाँकि, उनके सभी अकाउंट स्वीडन में शरणार्थी का दर्जा मिलने के बाद बनाए गए थे। मोमिका ने दर्जनों वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किए हैं, जिनमें अक्सर हैशटैग के रूप में अरबी में बहुसंख्यक मुस्लिम देशों के नाम होते हैं। वह कहते हैं कि उनका विरोध धर्म के बारे में उनकी भावनाओं को दर्शाता है।
उन्होंने स्टॉकहोम की ग्रैंड मस्जिद के बाहर कुरान जलाने के दूसरे दिन 30 जून गुरुवार को स्वीडिश अखबार एक्सप्रेसन से बात की थी। उस दौरान मोमिका ने कहा था कि उन्हें पता था कि उनकी कार्रवाई से भड़काऊ प्रतिक्रिया मिलेंगी और उन्हें मौत की हजारों धमकियाँ मिली हैं।
यह आग लगने से एक रात पहले मोमिका की पोस्ट किए एक वीडियो का स्क्रीनग्रैब है इसमें कहा गया था कि उसे स्वीडिश अधिकारियों से कुरान जलाने की मंजूरी है। उन्होंने अपने अनुयायियों से कहा कि वे ईद के पहले दिन स्टॉकहोम की भव्य मस्जिद के सामने उनसे मिलने आएं। साभार-द ऑब्जर्वर फ्रांस24
सलवान मोमिका ने ये भी कहा था कि वो आने वाले हफ्तों में वो स्टॉकहोम में इराकी दूतावास के सामने इराकी झंडा और कुरान जलाएँगे। उन्होंने इसे भी कर दिखाया। हालाँकि, मोमिका ने इस बात से इनकार किया कि उनकी हरकतें ‘नफरती जुर्म’ या ‘किसी समूह के खिलाफ आंदोलन’ थीं।
मोमिका ने अखबार को बताया था, “पुलिस को यह जाँच करने का हक है कि कुरान जलाना एक नफरती अपराध है या नहीं। वे सही हो सकते हैं और वे गलत भी हो सकते हैं।” उन्होंने कहा था कि आखिर में फैसला अदालत को करना होगा।
जून में कुरान जलाने के बाद मोमिका को लेकर ये भी बताया गया कि वह स्वीडिश अति-राष्ट्रवादी पार्टी का सदस्य था। इसके बाद इराक में मोमिका के अतीत के वीडियो सामने आने लगे। इस फ़ुटेज में उसे ईरान से घनिष्ठ संबंध रखने वाले एक इराकी मिलिशिया की वर्दी पहने हुए दिखाया गया है।
साभार द ऑब्जर्वर फ्रांस24
उन्होंने 2014 में इराक में एक राजनीतिक पार्टी, सिरियाक डेमोक्रेटिक यूनियन पार्टी और साथ ही उससे जुड़े मिलिशिया की स्थापना की थी। ये एक ऐसी मिलिशिया थी, जिस पर युद्ध अपराधों का आरोप लगा है। इसे कुख्यात आतंकी संगठन ‘इस्लामिक स्टेट’ (IS) से लड़ने के लिए स्थापित किया गया था। बाद में इसे इराक के कई अन्य समूहों के साथ जोड़ा गया।
इसमें शिया मुस्लिम वाले मिलिशिया भी शामिल थे। इसके अलावा, पड़ोसी ईरान का समर्थन करने वाले कुर्द मिलिशिया भी शामिल थे। ये अधिक नास्तिक और कम्युनिस्ट एजेंडे का समर्थन करते हैं। इराकी पत्रकारों ने लिखा कि मोमिका ने एक अन्य ईसाई मिलिशिया के नेता के साथ सत्ता संघर्ष के कारण देश छोड़ दिया।
ऐसा माना जाता है कि मोमिका ने एक समय मौलवी अल-सदर का समर्थन किया था और फिर इराक में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में भी भाग लिया था। ये भी सामने आया है कि स्वीडन की नागरिकता के लिए उनकी दरख़्वास्त नामंजूर होने के कुछ ही महीनों बाद मोमिका ने कुरान जलाने की घटना को अंजाम दिया था।
मूल रूप से उत्तरी इराकी राज्य निनावा के ईसाई संप्रदाय से ताल्लुक रखने वाले सलवान मोमिका अप्रैल 2018 में स्वीडन पहुँचे थे। उन्हें तीन साल बाद अप्रैल 2021 में शरणार्थी का दर्जा मिला। मोमिका के पास तीन साल का रेजीडेंसी परमिट है, जो अप्रैल 2024 में खत्म होगा।
क्या होगा मोमिका का?
इराक खुद मोमिका को स्वीडन से प्रत्यर्पित करना चाहता है, ताकि इराकी कानून के तहत उस पर मुकदमा चलाया जा सके। स्वीडन के उलट इराक में ईशनिंदा कानून है। इसके तहत उसे तीन साल तक की जेल की सजा हो सकती है। दूसरी तरफ स्वीडन में ईशनिंदा कानून नहीं है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देने वाला देश है।
बताते चलें कि जून के आखिर में स्वीडिश पुलिस ने कुरान जलाकर नफरत फैलाने के आरोप में मोमिका के खिलाफ प्रारंभिक आरोप दायर किया था। स्वीडिश पुलिस ने कहा था कि मोमिका ने एक मस्जिद के बाहर कुरान को जलाया। इसे एक समूह के खिलाफ उकसावे के रूप में समझा जा सकता है।
कुरान जलाने की घटनाओं के बाद मोमिका का जीवन कठिन हो गया है। उन्हें पहले भी कई बार जान से मारने की धमकी मिल चुकी है। मोमिका पहले स्टॉकहोम के बाहर एक छोटे शहर में रहते थे। लोकल मीडिया के मुताबिक, अब उन्हें एक ‘गुप्त स्थान पर’ सुरक्षित रखा जा रहा है।
कब-कब जलाई मोमिका ने कुरान?
डॉयचे वेले में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीडन के सरकारी मीडिया में बताया गया है कि जून में कुरान जलाने के लिए सलवान मोमिका ने इजाज़त माँगी थी। वो चाहते थे कि क़ुरान को बैन कर दिया जाए। इसको लेकर पूरी मुस्लिम दुनिया में बौखलाहट फैल गई थी। कई इस्लामी देशों ने विरोध में स्वीडन से अपने राजनयिक बुला लिए।
तब उन्होंने कहा था, ”मैं अभिव्यक्ति की आजादी की अहमियत पर ध्यान दिलवाना चाहता था। ये लोकतंत्र है और अगर वो ये कहेंगे कि हम ऐसा नहीं कर सकते हैं तो ये खतरे में है।” गौरतलब है कि स्वीडन में बोलने की आज़ादी का ऐतिहासिक और बुनियादी हक 1766 से चला आ रहा है और इसकी रक्षा करने के लिए इस देश के पास दुनिया का सबसे मजबूत कानून है।
पुलिस केवल तभी किसी विरोध प्रदर्शन को मंजूरी देने से इनकार कर सकती है, जब प्रदर्शन से सार्वजनिक स्थल पर बड़ी गड़बड़ी या प्रदर्शनकारियों को खतरा पैदा होने का अंदेशा हो। स्वीडन में कुरान जलाने की घटनाओं पर प्रधानमंत्री क्रिस्टर्सन ने कहा था कि वो इस तरह की घटनाओं से चिंति हैं, लेकिन इसकी इजाजत देने के लिए लगातार दरख़ास्त मिल रही थीं।
जून के बाद 20 जुलाई गुरुवार को स्टॉकहोम में इराकी दूतावास के बाहर खड़े मोमिका ने कुरान को लात मारी और इराकी झंडे से जूते साफ किए थे। उन्होंने प्रमुख इराकी मौलवी मुक्तदा अल-सद्र और ईरान के धार्मिक नेता मुहम्मद अली खामेनेई की तस्वीरों पर भी अपने पैर पोछे थे।
इसके विरोध में इराक की राजधानी बगदाद में प्रदर्शन हुए और स्वीडन के दूतावास में तोड़फोड़ एवं आगजनी की गई थी। विरोध में इराक ने स्वीडन के राजदूत को वापस भेज अपने राजनयिक को भी वापस बुला लिया था।
Iraq still needs a crash course in crisis management. This is such a disaster. One disturbed irrelevant individual who no longer resides in Iraq dragged the entire country into a diplomatic crisis with the EU. https://t.co/g9W6yJLzvA
समाचार एजेंसी एएफपी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार 31 जुलाई को स्वीडन की संसद के सामने सलवान मोमिका और सलवान नजेम ने कुरान को जलाने से पहले उसे पैरों से रौंदा था। तब मीडिया से नजेम ने कहा था कि वो दोनों चाहते हैं कि स्वीडन में इस्लामी किताब कुरान को बैन किया जाए। उन्होंने कहा था, “जब तक कुरान बैन नहीं किया जाता, मैं इसे बार-बार जलाऊँगा।”
ये घटना स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के कुरान जलाने वालों को चेतावनी देने के बाद हुई थी। इस दौरान वहाँ ये एक हफ्ते के अंदर तीसरा प्रदर्शन था। इस पर इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने स्वीडन और डेनमार्क की खासी आलोचना की थी।
दरअसल, तब डेनमार्क में भी डांस्के पैट्रियटर ने एक शख्स के कुरान जलाने और इराकी झंडे को पैरों से रौंदने का वीडियो जारी किया था। 28 अगस्त को फिर से सलवान मोमिका ने स्वीडन में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर कुरान जलाई है।
उर्दू अकादमी के लिए घोषित एक लाख रुपए की अनुदान राशि बढ़ाने के बजाए कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने इसे जारी रखा, जिससे मुस्लिम निराश हैं। उनका कहना है कि कॉन्ग्रेस को चुनाव के समय मुस्लिमों के वोट तो चाहिए होते हैं, जिसके लिए वो खूब इमोशनल अत्याचार भी करती है, लेकिन चुनाव जीतते ही वो मुस्लिमों को भूल जाती है। कर्नाटक के मुस्लिम उर्दू अकादमी की खराब हालत की वजह से कॉन्ग्रेस सरकार से बेहद नाराज हैं।
सिर्फ 274 रुपए प्रति दिन पर चलती है उर्दू अकादमी
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस‘ से बातचीत में पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के सलाहकार रहे सैयद अशरफ ने उर्दू अकादमी का अध्यक्ष पद पिछले दो वर्षों से खाली रहने पर अपनी निराशा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि अकादमी के रखरखाव के लिए एक साल में 1 लाख रुपए दिए जाते हैं, जो बेहद कम है। अगर इन 1 लाख रुपयों को 365 के हिसाब से बाँट दें, तो प्रति दिन महज 274 रुपए ही उर्दू अकादमी के खर्च के नाम पर आते हैं। इन पैसों से उर्दू अकादमी कौन सी पुस्तकें प्रकाशित करेगी और किस तरह से साहित्य की सेवा करेगी?
अशरफ ने कहा कि बोम्मई सरकार ने एक लाख का भुगतान शुरू किया था, लेकिन मुस्लिमों के वोट के दम पर सत्ता में आने वाली कॉन्ग्रेस ने भी सिर्फ 1 लाख रुपए ही जारी किया है। उर्दू सिर्फ मुस्लिमों से ही नहीं जुड़ी, बल्कि देश के पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री धर्म सिंह भी उर्दू का प्रयोग करते थे। वो उर्दू में बोलते थे। लेकिन मौजूदा सरकार बहुत गलत कर रही है। उन्होंने कहा कि इस कॉन्ग्रेस सरकार से ऐसी उम्मीद तो बिल्कुल नहीं थी।
कॉन्ग्रेस के मुस्लिम मंत्री पर साधा निशारा
इस रिपोर्ट के मुताबिक, सैयद अशरफ राज्य के वक्फ और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बीजे जमीर अहमद खान से बेहद नाराज हैं। उन्होंने जमीर पर मुसलमान समुदाय के लिए बोलने में विफलता और उर्दू अकादमी को अतिरिक्त धन आवंटित करने में विफलता को लेकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जमीर के पास उर्दू का सर्टिफिकेट तो है, लेकिन वो सही मायने में विद्वान होते, तो इस दर्द को समझते।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या से मिलेंगे अशरफ
अशरफ ने कहा कि अगले एक-दो दिनों में मुख्यमंत्री सिद्धरमैया से एक प्रतिनिधिमंडल मुलाकात करेगा। उन्हें ज्ञापन सौंपा जाएगा और बताया जाएगा कि उर्दू अकादमी की क्या हालत है। इसकी प्रति कॉन्ग्रेस हाई कमान को भी भेजी जाएगी। इस मुद्दे पर शोधकर्ता आलम पाशा का कहना है कि मुस्लिमों के वोटों के लिए कॉन्ग्रेस खूब जोर लगाती है, लेकिन जब जरूरत पड़ती है, तो वो मुस्लिम समुदाय के साथ खड़ी नहीं होती।
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई, जिसे देश की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है – वहाँ विपक्ष के नए गठबंधन ‘I.N.D.I.A’ की बैठक होने वाली है। इससे पहले पटना और बेंगलुरु में 2 दौर की बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें 2 दर्जन से अधिक पार्टियों ने हिस्सा लिया। बताया गया है कि मुंबई की बैठक में संयोजक तय किए जाएँगे। विपक्ष के नए गठबंधन का संयोजक कौन होगा, एक से अधिक होंगे तो कौन-कौन होंगे – नाम का ऐलान किया जाएगा। इतना ही नहीं, अटकलें ये भी हैं कि प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार किसे बनाया जाए – इस पर भी चर्चा होनी है।
अब चूँकि सामने नरेंद्र मोदी हैं, इसीलिए प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष को ऐसा चेहरा लाना होगा जो लोकप्रिय हो। लेकिन, यहाँ पहले से ही बंदरबाँट की स्थिति है। बेंगलुरु में हुई बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में लालू यादव और नीतीश कुमार मौजूद नहीं थे। चर्चा चली कि नीतीश कुमार संयोजक न बनाए जाने से नाराज़ थे और लालू यादव को उम्मीद है कि नीतीश संयोजक बनने के बाद बिहार के CM का पद छोड़ेंगे, फिर वो अपने बेटे तेजस्वी यादव, जो फ़िलहाल उप-मुख्यमंत्री हैं, उन्हें इस कुर्सी पर बिठा पाएँगे।
चर्चा में बने रहने को बेचैन नेता
विपक्ष की इस बैठक से पहले नेताओं में बयानबाजी के लिए एक होड़ सी लग गई है। खासकर नीतीश कुमार और ममता बनर्जी लगातार चर्चा में बने रहना चाहते हैं। नीतीश कुमार ने मीडिया के सामने कहा, “नहीं-नहीं, हमको कुछ नहीं बनना है। हम तो आपको बराबर कह रहे हैं। दूसरे लोगों को बनाया जाएगा, हमारी कोई इच्छा नहीं है। हम तो सबको एकजुट करना चाहते हैं और सब मिल कर के करें। हमको कुछ व्यक्तिगत नहीं चाहिए। हम तो सबके हित में चाहते हैं, इसीलिए ये कभी मत सोचिए कि हमलोग कुछ चाहते हैं।”
राजनीति में बड़े पद पर बैठा नेताओं का बयान अपने-आप में एक सन्देश होता है। सन्देश कहाँ तक पहुँचाना होता है, ये उन्हें पता होता है। नीतीश कुमार मँझे हुए नेता हैं, पिछले 18 साल से बिहार की सत्ता पर काबिज हैं। संयोजक वाले सवालों पर उनके मन का मलाल बाहर आ जाता है। वो बार-बार ये कह रहे हैं कि उन्हें कुछ नहीं चाहिए, या फिर बात ये है कि वो खुद को निःस्वार्थ दिखा कर गठबंधन से वो लेना चाहते हैं जिसकी लालसा उन्होंने पाल रखी है? उन्हें अगर कुछ नहीं चाहिए, तो फिर बार-बार सफाई क्यों दे रहे?
याद कीजिए, नीतीश कुमार ने ही गठबंधन के लिए प्रयास शुरू किया था और इसके लिए वो दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता और भुवनेश्वर से लेकर चेन्नई तक गए थे। क्या आज ये मानने वाली बात है कि कोई नेता इस तरह के ताबड़तोड़ दौरे बिना खुद के हित की सोचे हुए करेगा? वो भी एक ऐसे पिछड़े राज्य का नेता, जहाँ न रोजगार है और न ही उद्योग। ऐसे राज्य का मुखिया, जहाँ न शिक्षा है न स्वास्थ्य। हाँ, अपराध का बोलबाला ज़रूर है। नीतीश कुमार अपने राज्य को छोड़ कर विपक्षी गठबंधन पर ही बयानबाजी कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें चर्चा में बने रहना है। एक खास सन्देश देना है साथियों को।
अब आ जाते हैं ममता बनर्जी की तरफ, जो चर्चा में बने रहने के लिए इस कदर बेचैन हैं कि ऐसा लग रहा है कि ‘चंद्रयान 3’ की सफल लैंडिंग के बाद वो किसी मानसिक समस्या से जूझ रही हैं। सबसे पहले ममता बनर्जी ने अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय राकेश शर्मा को ‘राकेश रोशन’ बता दिया, जिसके बाद मीम्स की बौछार हो गई। राकेश रोशन फिल्म निर्देशक हैं और एलियंस को लेकर ‘कोई मिल गया’ (2003) बना चुके हैं। इसमें उनके बेटे हृतिक मुख्य अभिनेता थे। लोग कहने लगे कि ममता बनर्जी ने ‘चंद्रयान 3’ के लाइव टेलीकास्ट की जगह यही फिल्म देख ली होगी।
इसके बाद उन्होंने एक बयान में कहा कि ‘जब इंदिरा गाँधी चाँद पर गई थीं…’, जिसके बाद वो फिर से मजाक बनीं। इंदिरा गाँधी कब चाँद पर गई थीं ये तो नहीं पता, इतना ज़रूर पता चल गया है कि ममता बनर्जी खुद को विपक्ष का सबसे बड़ा नेता दिखाने के लिए हर मुद्दे पर कुछ न कुछ अजीबोगरीब बयान देकर खुद को मीडिया में बनाए रखना चाहती हैं। अब उन्होंने कह दिया है कि महाभारत काजी नज़रुल इस्लाम ने लिखा था। अब तक तो हम यही जानते आए थे कि महाभारत की रचना वेद व्यास ने की थी।
पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी जानबूझकर हिन्दू धर्म से जुड़े तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही हैं। वैसे हिन्दू धर्म के खिलाफ बोलना भाजपा विरोधी दलों का दुलारा बनने की एक योग्यता तो है ही, लेकिन इससे ये गारंटी नहीं मिलती कि आपको संयोजक बनाया ही जाएगा विपक्षी गठबंधन का। मुंबई पहुँचते ही ममता बनर्जी ने रक्षाबंधन पर अमिताभ बच्चन के घर जाकर राखी बाँधी। जया बच्चन पश्चिम बंगाल में TMC के लिए चुनाव प्रचार भी कर चुकी हैं। इन सबसे साफ़ है कि ममता बनर्जी लगातार मीडिया की सुर्खियाँ बनी रहना चाहती हैं।
A memorable day!
Today, Hon'ble CM @MamataOfficial was graciously hosted by @SrBachchan and Mrs. Jaya Bachchan along with their family at their residence in Mumbai.
She had a joyous time meeting them and extended her wishes and blessings.
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) August 30, 2023
हाल ही में लालू यादव ने भी बयान दिया कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गला दबाने जा रहे हैं मुंबई। उन्होंने कहा कि हम सब पीएम मोदी के गले के ऊपर चढ़े हुए हैं। लालू यादव को खुद के लिए तो कोई पद नहीं चाहिए, हाँ, उनकी नज़र बेटे तेजस्वी यादव के लिए बिहार की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर ज़रूर है। ये जगह उन्हें तभी मिलेगी जब नीतीश कुमार इसे खाली करेंगे। नीतीश से खाली कैसे करवाना है, इस जुगत में लालू यादव ज़रूर लगे होंगे। कहाँ से कैसे खेल करना है, लालू यादव इन सबमें दक्ष रहे हैं।
अब AAP के मुखिया अरविंद केजरीवाल को ही ले लीजिए। AAP की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने कारण गिना दिए कि क्यों केजरीवाल को पीएम उम्मीदवार होना चाहिए। इसके बाद संजय सिंह और आतिशी मर्लेना जैसों ने बयान दिया कि उनकी ऐसी कोई माँग नहीं है। ये भी दबाव बनाने और अपनी बात कहने का एक तरीका है। कभी वाराणसी से सांसद का चुनाव लड़ कर नरेंद्र मोदी से बुरी तरह हारने वाले अरविंद केजरीवाल की प्रधानमंत्री वाली हसरत छिपी हुई नहीं है।
असल में इन नेताओं को लगता है कि मीडिया पीएम मोदी को ज्यादा दिखाती है, इसीलिए वो पीएम हैं। जबकि सच्चाई ये है कि मोदी लोकप्रिय पीएम हैं, इसीलिए मीडिया को उन्हें दिखाना पड़ता है। वरना पीएम मोदी तो देश को संबोधित करते हैं तो पूरा देश उन्हें सुनता है। मीडिया को चलाना ही पड़ता है। ये सारे नेता राष्ट्रीय स्तर पर खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं, क्योंकि इनका अपने राज्य से बाहर कोई वजूद नहीं। इन्हें कोई और रास्ता नहीं दिखता खुद को चर्चा में बनाए रखने का।
चुनाव से पहले ही बिखरता दिख रहा है विपक्ष का नया गठबंधन
हाल ही में सुभासपा ने सपा का साथ छोड़ आकर NDA का दामन थाम लिया। अभी जिस महाराष्ट्र में ‘I.N.D.I.A.’ की बैठक होनी है, वहीं की पार्टी NCP के 2 फाड़ हो चुके हैं। कभी शरद पवार को मोदी विरोधी राजनीति के प्रमुख चेहरे के रूप में देखने वाले लोग आज उनकी सियासी अस्पष्टता के कारण उन्हें कोस रहे हैं। शरद पवार के भतीजे अजित ने कई विधायकों-सांसदों के साथ बगावत कर दी। कभी शरद राव भाजपा के साथ कभी न जाने की कसम खाते हैं तो कभी अजित पवार को पार्टी का नेता बताते हैं।
नए गठबंधन में इस बगावत के बाद उनकी भूमिका कम हो गई है। पश्चिम बंगाल के धुपगुड़ी में उपचुनाव हो रहा है। वहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी ने CPM के साथ गठबंधन किया है। वहीं TMC ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है। यहाँ कहाँ गया गठबंधन? अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का दौरा कर के अपनी ‘गारंटियों’ के बारे में प्रचार किया। दोनों ही राज्यों में भाजपा-कॉन्ग्रेस में मुख्य लड़ाई होती है। राजस्थान में भी उनकी पार्टी ने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है।
ये कैसा गठबंधन है जिसके नेता महँगे होटलों में बैठक करते समय खुद को एक दिखाते हैं और जमीन पर आपस में लड़ते हैं? इसी तरह केरल में आ जाइए। वहाँ पुथुप्पली में उपचुनाव हो रहा है। यहाँ CPM और कॉन्ग्रेस आपस में लड़ रही है। इस साल 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, लोकसभा चुनाव से पहले ही इस नए गठबंधन की परीक्षा होनी है। फ़िलहाल तो इंतजार इस बैठक के निष्कर्षों का है। संयोजक कौन होता है, कोऑर्डिनेशन कमिटी में किसे-किसे जगह मिलती है।
राजस्थान के टोंक में एक मंदिर के महंत की हत्या कर दी गई है। इसके बाद इलाके में बवाल हो गया है। महंत का नाम सियाराम दास बाबा भूरिया बताया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत ने कॉन्ग्रेस की सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजस्थान में अपराधियों के निशाने पर साधु-महात्मा हैं।
जिले के मालपुरा स्थित डिग्गी में महंत सियाराम दास बाबा भूरिया महादेव मंदिर के महंत थे। बताया जा रहा है कि देर रात अज्ञात बदमाशों ने इस घटना को अंजाम दिया और मौके से फरार हो गए। जब बुधवार की सुबह लोग पूजा-पाठ करने के लिए मंदिर पहुँचे तो उन्होंने बाबा को अचेतावस्था में देखा पाया। नजदीक जाकर देखने पर उनके आसपास खून बिखरा हुआ था।
हालात को देखते हुए लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुँच गए। उन्होंने शव को कब्जे में ले लिया और मामला दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। एफएसएल और MIU की टीम सबूत इकट्ठा कर रही है। अपराधियों की पहचान के लिए इलाके के आसपास के सीसीटीवी को भी चेक किया जा रहा है। आसपास के लोगों से भी इसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है कि।
बताया जा रहा है कि जिस वक्त अपराधियों ने इस घटना को अंजाम दिया, उस वक्त महंत सियाराम दास मंदिर में अकेले थे। सियाराम करौली जिले के नादौती के रहने वाले थे। वो लगभग 50 सालों से मंदिर में अकेले रह रहे थे। वे अपना खाना खुद ही बनाते थे और वहीं आश्रम में रहकर पूजा पाठ करते थे। वो लगभग 93 साल के थे। उनकी हत्या से संत समाज में नाराजगी है। वहीं, कस्बावासियों ने विरोध में बाजार को बंद कर दिया है।
पुलिस के मुताबिक, बाबा के सिर में किसी भारी नुकीली चीज से वार किया गया है। इसके कारण उनके सिर से काफी खून बह गया। बाबा का शव आश्रम के बरामदे में पड़ा मिला था। पुलिस ने आश्रम का करीब 500 मीटर का एरिया सील कर दिया है। पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात किस वक्त हुई और इसे अंजाम देने वाले कौन थे? फिलहाल पुलिस को कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
इस घटना को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा, “बहुत दु:खद है कि टोंक क्षेत्र के महंत संत सियाराम दास बाबा जी की निर्मम हत्या कर दी गई। राजस्थान में साधु-संत अपराधियों के निशाने पर क्यों हैं? देश में कहीं और ऐसा नहीं देखा गया।”
बहुत दुखद है कि टोंक क्षेत्र के ख्यात महंत संत सियाराम दास बाबा जी की निर्मम हत्या कर दी गई। राजस्थान में साधु-संत अपराधियों के निशाने पर क्यों हैं?
देश में कहीं और ऐसा नहीं देखा गया। संत समाज की अवहेलना गहलोत सरकार की तुष्टिकरण नीति का हिस्सा है।
उन्होंने आगे कहा, “संत समाज की अवहेलना गहलोत सरकार की तुष्टिकरण नीति का हिस्सा है। अपना वोट बैंक बनाए रखने के लिए कॉन्ग्रेस साधु-संतों को प्रताड़ित करने वाले असामाजिक तत्वों को प्रोत्साहित करती है। यह ऐसा पाप है जिसका दंड अवश्वसंभावी है, शीघ्र ही जिसे सनातन धर्म को आघात पहुँचा रहे अधर्मियों को भुगतना होगा।”
बताते चलें कि कुछ दिन पहले नवगठित डीडवाना कुचामन जिले में एक संत की हत्या कर दी गई थी। कुचामन थाना इलाके में स्थित रसाल गाँव में हरिराम बाबा की बगीची के संत मोहनदास की निर्दयतापूर्वक मौत के घाट उतार दिया गया था।शव के हाथ-पाँव बँधे हुए थे और उनकी आँखों पर भी पट्टी बंधी हुई थी। इस घटना के कारण इलाके में तनाव फैल गया था।
उत्तर प्रदेश में शिवसेना और ‘क्रांति सेना’ के प्रदेश महासचिव मनोज सैनी ने मुजफ्फरनगर में बुधवार (30 अगस्त, 2023) को सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को जूते से मारने वाले को 1100 रुपए का ईनाम देने की घोषणा की। सैनी ने मौर्य के बयान पर कहा, “जो स्वामी प्रसाद मौर्य को जूते से मारेगा, उसे हम 1100 रुपए देंगे।” वहीं दूसरी तरफ मुरादाबाद के कॉन्ग्रेसी नेता गंगा राम शर्मा ने कहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य की जीभ काटकर जो लाएगा, उसे 10 लाख रुपए वो ईनाम में देंगे।
‘प्रति जूता 1100 का ईनाम, साथ ही सार्वजनिक सम्मान’
बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्य लगातार हिंदू धर्म के विरोध में टिप्पणियाँ कर रहे हैं। उनके इन्हीं बयानों की वजह से मनोज सैनी ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्या को जूते मारने वाले व्यक्ति को वो 1100 रुपए देंगे। उन्होंने कहा कि जूते मारने वाले व्यक्ति को वो सार्वजनिक तौर पर सम्मानित भी करेंगे। यही नहीं, उन्होंने मौर्य के खिलाफ सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए तहरीर भी दी है।
‘धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले स्वामी को भेजा जाए जेल’
मनोज सैनी ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य पहले भी हिंदुओं के पवित्र ग्रंथ रामचरितमानस के बारे में गलतबयानी कर चुके हैं, उनके बयानों से हमारी धार्मिक भावनाएँ आहत हुई हैं। ऐसे में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। उन्होंने स्वामी प्रसाद के मुजफ्फरनगर में घुसने पर कड़ा विरोध करने की घोषणा भी की।
वहीं, मुरादाबाद में कांग्रेस नेता पंडित गंगा राम शर्मा ने रामचरितमानस पर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा की गई टिप्पणी के बाद उनकी जीभ काटकर लाने वाले को 10 लाख रुपए नगद ईनाम देने की घोषणा की है। उनका लिखा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
मुरादाबाद: कांग्रेस नेता पंडित गंगा राम शर्मा ने रामचरितमानस पर सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा की गई टिप्पणी के बाद उनकी जीभ काटकर लाने वाले को 10 लाख रुपये नगद इनाम देने की घोषणा की है। सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता का पत्र हुआ वायरल। #Congress#SwamiPrasadMauryapic.twitter.com/OfClRGv5R9
गंगाराम शर्मा मुरादाबाद जिला कॉन्ग्रेस कमेटी में मानवाधिकार विभाग के प्रमुख हैं। उनकी तरफ से पत्र जारी किया गया है, जिसमें लिखा है, “सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य हिंदू धर्म को अपमानित करने के मकसद से हिंदू धर्म की धार्मिक पुस्तक रामचरितमानस की चौपाइयों की निंदा करते रहते हैं। इसलिए पंडित गंगाराम शर्मा ने स्वामी प्रसाद मौर्य की जीभ काटने वाले को दस लाख रुपए का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।”
बता दें कि स्वामी प्रसाद मौर्या लगातार हिंदू धर्म के खिलाफ भड़काऊ बयान देते रहते हैं। कुछ दिन पहले उन्होंने एक वीडियो जारी कर कहा था कि हिंदू धर्म एक धोखा है। उन्होंने कहा था कि हिंदू धर्म कोई धर्म है ही नहीं, बल्कि ये तो ब्राह्मण धर्म है। उन्होंने हिंदू धर्म को दलितों-आदिवासियों के खिलाफ बताया था।
गुजरात के अहमदाबाद में मुस्लिम लड़की और हिंदू युवक के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। हिंदू युवक मुस्लिम लड़की के साथ कहीं जा रहा था। इसी दौरान इस्लामिक कट्टरपंथियों ने दोनों को पकड़ लिया और गाली-गलौच करते हुए मारपीट की। इस घटना का वीडियो सोशल पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मामला अहमदाबाद के दानीलिमडा इलाके में स्थित चिराग हाई स्कूल के पास का बताया जा रहा है। वीडियो में लड़की बुर्के से अपने चेहरे को ढँकती नजर आ रही है। लेकिन इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ बुर्का हटाकर उसके साथ मारपीट कर रही है। साथ ही उन्हें वीडियो बनाने के लिए कहते सुना जा सकता है। लोगों को यह भी कहना था कि वह इस बारे में लड़की और लड़के के माँ-बाप को बताएँगे।
वडोदरा के बाद आज फिर अहमदाबाद में एक ओर मॉरल पुलिसिंग का मामला सामने आया। दानीलिमडा में कुछ कट्टरपंथीयों ने हिंदु लड़के के साथ जा रही मुस्लिम लड़की को रास्ते मे रोककर दोनों के साथ मारपीट कर उनका विडियो बनाया। @AhmedabadPolice तत्काल कड़क कार्यवाही करे।@dgpgujarat@Bajrangdal_Guj… pic.twitter.com/C8fNuSagCi
वहीं हिंदू युवक भी खड़ा नजर आ रहा है। मुस्लिम भीड़ उसके साथ भी गाली-गलौच करते हुए मारपीट कर रही है। लड़का जब फोन लगाने की कोशिश करता है तो एक युवक उसे जान से मारने की धमकी देता हुआ फोन छीनने की धमकी दे रहा है। मुस्लिम भीड़ हिंदू युवक पर लगातार थप्पड़ मारकर पूछ रही है कि वह लड़की को लेकर कहाँ जा रहा था और उसका नाम क्या है? वीडियो वायरल होने के बाद लोग गुजरात पुलिस से कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। खबर लिखे जाने तक कार्रवाई की खबर नहीं है।
गौरतलब है कि इससे पहले वडोदरा पुलिस ने मुस्लिम युवकों के ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया था, जो हिंदू लड़कों के साथ मेलजोल रखने वाली मुस्लिम लड़कियों को निशाना बनाते थे और उन्हें ब्लैकमेल करते थे। ये लोग बाकायदा व्हाट्सएप्प ग्रुप बनाकर इन लड़कियों का वीडियो रिकॉर्ड करते थे और उनके परिवारों को भी ब्लैकमेल करते थे। इस मामले में मुस्तकिन, नजूमियाँ और साहिल शेख नाम के तीन मुस्लिम युवक गिरफ्तार हुए हैं।
ये लोग बेहद शातिर तरीके से काम करते थे, ये किसी ग्रुप को तीन-चार माह चलाते थे, फिर उसे डिलीट करके नया ग्रुप बना लेते थे। पुलिस को ऐसा ही एक ग्रुप ‘आर्मी ऑफ मेहँदी’ नाम से मिला, जिसके तीन एडमिन को गिरफ्तार कर लिया गया है। उनकी पहचान मुस्तकिन इम्तियाज शेख, बुरानवाला नजूमियाँ सैयद और साहिल शाहबुद्दीन शेख के रूप में की गई है।
इस मामले में IPC की धारा 153ए, 201 और 505 के तहत मामला दर्ज किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपितों के फोन जब्त कर उन्हें लैब में जाँच के लिए भेजा गया है, ताकि पूरे मामले का खुलासा हो सके। पुलिस ने बताया कि उन्हें यह भी जानकारी मिली है कि ये आरोपी शहर में मॉब लिंचिंग जैसी घटनाओं को अंजाम देने की भी साजिश रच रहे थे। पुलिस इस मामले में गंभीरता से जाँच कर रही है ताकि सांप्रदायिक शांति बनी रहे।
पश्चिम बंगाल विधानसभा के उपाध्यक्ष के करीबी और तृणमूल कॉन्ग्रेस के पूर्व नेता रियाजुल हक ने अपने निकाह की सालगिरह पर बीवी को AK-47 राइफल गिफ्ट कर दी है। इसकी फोटो भी उसने सोशल मीडिया पर शेयर की थी। भाजपा ने राज्य में तालिबान शासन को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए इसकी जाँच की माँग की है।
रियाजुल ने 28 अगस्त 2023 दिन सोमवार को बीवी सबीना यास्मीन को AK-47 रायफल गिफ्ट दिया था। जब विवाद बढ़ा तो रियाजुल हक ने सफाई दी है। उसने कहा है कि इसमें कुछ भी गलत नहीं है। उस पर गलत आरोप लगाए जा रहे हैं। यह असली एके-47 नहीं, बल्कि नकली बंदूक है। रियाजुल ने आगे कहा है कि लोग इसको लेकर सवाल कर रहे थे। इसलिए सोशल मीडिया से फोटो डिलीट कर दी।
रियाजुल हक रामपुर हाट ब्लॉक में टीएमसी की अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का अध्यक्ष था, लेकिन मई 2023 में उसने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। गौरतलब है कि टीएमसी के पूर्व नेता रियाजुल हक को पश्चिम बंगाल की रामपुर हाट सीट से विधायक और विधानसभा उपाध्यक्ष आशीष बनर्जी का करीबी भी माना जाता है। ऐसे में भाजपा हमलावर है।
बीरभूम के भाजपा जिला अध्यक्ष ध्रुबो साहा ने कहा है, “रियाजुल को बंदूक कहाँ से मिली, इसकी जाँच होनी चाहिए। मैंने उसका फेसबुक पोस्ट देखा। वह एक पूर्व टीएमसी नेता और राज्य के डिप्टी स्पीकर का करीबी है। इससे क्या संदेश जाता है? क्या यह तालिबान शासन को बढ़ावा है? क्या वह अगली पीढ़ी को जिहादी बनने के लिए प्रेरित करने की कोशिश कर रहे हैं?”
बता दें कि AK-47 एक घातक हथियार है। इस असॉल्ट राइफल का उपयोग भारतीय सेना और पैरामिलिट्री द्वारा किया जाता है। ऐसे में यदि TMC के पूर्व नेता रियाजुल हक नेअपनी बीवी को असली AK-47 गिफ्ट की है तो यह न केवल चर्चा, बल्कि जाँच का भी विषय है।
नूहं हिंसा के बाद गिरफ्तार किए गए गोरक्षा बजरंग फोर्स के अध्यक्ष राजकुमार उर्फ बिट्टू बजरंगी को कोर्ट से जमानत मिल गई है। बिट्टू बजरंगी की जमानत याचिका पर 30 अगस्त 2023 दिन बुधवार को नूहं की कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप दुग्गल की कोर्ट में सुनवाई हुई। उनके वकीलों ने कोर्ट में दलील की कि ये मामला बाद में बनाया गया है, क्योंकि एफआईआर हिंसा से 15 दिन बाद दर्ज हुई थी और बिट्टू बजरंगी को उनके घर के पास से गिरफ्तार किया गया था।
15 दिन बाद दर्ज हुई थी एफआरआर
अधिवक्ता एलएन पराशर तथा सोमदत्त शर्मा ने बिट्टू बजरंगी की ओर से जमानत याचिका मंगलवार को लगाई थी, जिस पर बुधवार को बहस हुई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना, जिसमें पुलिस के जाँच अधिकारी और सरकारी वकील ने बिट्टू बजरंगी को जमानत देने का विरोध किया। हालाँकि, कोर्ट ने बिट्टू के वकील एलएन पराशर की दलील सुनने के बाद उनकी आपत्तियों को खारिज कर जमानत दे दी।
फिलहाल, बिट्टू बजरंगी फरीदाबाद की नीमका जेल में बंद हैं। उनकी जमानत याचिका पर बहस करने वाले बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एवं न्यायिक सुधार संघर्ष समिति के अध्यक्ष एडवोकेट एलएन पाराशर ने कहा है कि कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद बिट्टू को जेल से निकालने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
हिंसा में नहीं मिला बजरंगी का कोई कनेक्शन
बता दें कि फरीदाबाद और नूहं की पुलिस ने बिट्टू बजरंगी को दो अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया था। फरीदाबाद पुलिस ने उनकी सोशल मीडिया पोस्ट पर उन्हें गिरफ्तार किया था, तो नूहं पुलिस ने एएसपी से झड़प के आरोप में उन्हें गिरफ्तार किया था। बाद में हरियाणा की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) ममता सिंह ने बताया था कि बजरंगी पर हथियार छीनने और पुलिस से झड़प का मामला दर्ज है।
फरीदाबाद से बजरंगी को किया गया था गिरफ्तार
गौरतलब है कि नूहं पुलिस ने 15 अगस्त 2023 को फरीदाबाद स्थित घर से बिट्टू बजरंगी को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई नूहं जिले की एएसपी उषा कुंडू की शिकायत पर दर्ज एफआईआर के आधार पर हुई थी। एफआईआर में कुंडू ने कहा था कि 31 जुलाई 2023 को 15 से 20 व्यक्तियों का एक समूह नल्हड़ मंदिर की ओर जा रहा था।
इस समूह के लोगों में से कुछ के हाथ में तलवारें और त्रिशूल जैसे हथियार थे। इनसे पुलिसकर्मियों ने हथियार लेने की कोशिश की तो वे नारेबाजी करने लगे और हाथापाई पर उतर आए। हालाँकि, इनसे हथियार लेने में पुलिस कामयाब रही, लेकिन बाद में बिट्टू बजरंगी और उसके साथी सरकारी गाड़ी से फिर हथियार छीनकर ले गए।