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चंद्रयान-3 के पीछे आधी आबादी का पूरा दम, 54 महिला इंजीनियर और वैज्ञानिक संग रितु कारिधाल के कंधों पर रही थी लॉन्चिंग की जिम्मेदारी

भारत के लिए आज (23 अगस्त) का दिन मील का पत्थर साबित हुआ है। मून मिशन चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी पोल की सतह पर लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान के उतारते ही पूरी दुनिया इस ऐतिहासिक पल की गवाह बन गई। दुनिया में भारत का झंडा बुलंद करने वाले इस मिशन का नेतृत्व पुरुषों ने किया, लेकिन लगभग 54 इंजीनियर और वैज्ञानिक महिलाओं ने इसमें सीधे तौर पर अहम जिम्मेदारी निभाईं।

चंद्रयान 2 और 3 मिशन के बीच सबसे साफ फर्क दोनों चंद्र मिशनों का नेतृत्व करने वाले लोगों का जेंडर है। चंद्रयान-2 मिशन में महज दो महिलाओं- प्रोजेक्ट डायरेक्टर एम. वनिता और मिशन डायरेक्टर रितु करिधाल श्रीवास्तव ने अहम भूमिका निभाई थी। हालाँकि, चंद्रयान-3 में महिलाओं की बड़ी तादाद है। इसके साथ ही देश इस बात की भी खुशी मना रहा है कि मून मिशन चंद्रयान-3 सफल रहा। इससे देश की आधी आबादी का दम भी दुनिया के सामने आ गया।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर न्यूज एजेेंसी IANS को बताया, “लगभग 54 महिला इंजीनियर और वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने सीधे चंद्रयान-3 मिशन में काम किया। वे विभिन्न केंद्रों पर काम करने वाली विभिन्न प्रणालियों की सहयोगी, डिप्टी प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर और प्रोजेक्ट मैनेजर हैं।”

चंद्रयान -3 मिशन में श्रीहरिकोटा रॉकेट बंदरगाह की अधिकारी पी. माधुरी भी अहम हिस्सा रहीं। उन्होंने रॉकेट लॉन्च के दौरान कमेंटेटर की भूमिका निभाई। दरअसल आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 14 जुलाई 2023 को चंद्रयान-3 लॉन्च हुआ था। इसका नेतृत्व देश की ‘रॉकेट वुमन’ रितु कारिधाल श्रीवास्तव ने किया था।

दरअसल दुनिया के सामने अंतरिक्ष में अपने दमखम दिखाने की शुरुआत देश की महिलाओं ने आज से 9 साल पहले ही कर दी थी। वो भी सितंबर का ही महीना था, जब भारतीय वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह की कक्षा में सैटेलाइट स्थापित किया था।

उस वक्त एक फोटो खासी वायरल हुई थी। इसमें बेंगलुरु में इसरो के दफ्तर में बालों में फूल लगाए खूबसूरत साड़ी पहने महिलाओं को जश्न मनाते हुए दिखाया गया था। इस फोटो ने यह साबित कर दिया कि खुशी मनाती ये सभी महिलाएँ वैज्ञानिक थीं। इस तस्वीर ने इस रूढ़िवादिता को चुनौती दे डाली कि भारत में रॉकेट साइंस पुरुषों के वर्चस्व का क्षेत्र है।

हालाँकि, इसरो ने कहा था कि फोटो में जश्न मनाने वाली महिलाएँ प्रशासनिक कर्मचारी थीं, लेकिन उसने यह भी कहा कि इस ग्रुप में मिशन पर काम करने और लॉन्च के वक्त नियंत्रण कक्ष में रही कई महिला वैज्ञानिक भी शामिल थीं। भारत को अंतरिक्ष में ले जाने वाली इन महिला वैज्ञानिकों में तब रितु कारिधाल, अनुराधा टीके और नंदिनी हरिनाथ शामिल थीं।

साभार: AFP

तब भी रितु कारिधाल मार्स ऑर्बिटर मिशन की डिप्टी ऑपरेशन डॉयरेक्टर थीं। इसरो की इस वरिष्ठ वैज्ञानिक ने मंगल ऑर्बिटर मिशन को साकार करने में अहम भूमिका निभाई थी। चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर रही थी। लखनऊ में पली-बढ़ी कारिधल आकाश देखने की शौकीन थीं।

रितु बचपन में भी चंद्रमा के आकार के बारे में सोचती थीं। वह सोचती थीं यह क्यों बढ़ता और घटता है। वो जानना चाहती थीं कि अंधेरे स्थानों के पीछे क्या है। विज्ञान की छात्रा रहीं रितु को भौतिकी और गणित पसंद था। स्टूडेंट लाइफ में ही उन्होंने नासा और इसरो प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी के लिए दैनिक अखबारों को खंगाल डाला था।

इससे जुड़ी अखबारों की कतरनें इकट्ठा करना उनका प्रिय शगल था। इसके साथ ही अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी किसी भी चीज़ के बारे में हर छोटी जानकारी पढ़ना उनका शौक रहा। बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में वो कहती हैं, “अपनी पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री लेने के बाद मैंने इसरो में नौकरी के लिए आवेदन किया और इस तरह मैं एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक बन गई।”

इसरो में उन्हें अब लगभग 25 साल हो गए हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित मंगल मिशन सहित इसरो में कई प्रोजेक्ट पर काम किया है। इसने उन्हें और उनके सहयोगियों को सुर्खियों में ला दिया था। वह कहती हैं कि मार्स मिशन अप्रैल 2012 में शुरू हुआ और वैज्ञानिकों के पास मंगल ग्रह पर जाने के लिए केवल 18 महीने थे।

रितु इस मिशन की इसकी सफलता को टीम के कोशिशों की नतीजा बताती है। वह कहती है, “यह एक बहुत छोटी खिड़की थी यानी बहुत कम वक्त था, इसलिए उस समय में प्रोजेक्ट को साकार करना बड़ी चुनौती थी। हमारे पास अंतरग्रहीय मिशनों की कोई विरासत नहीं थी, इसलिए उस छोटी अवधि में हमारे पास करने के लिए बहुत कुछ था।”

दो छोटे बच्चों की माँ रितु कारिधाल कहती हैं कि काम और जिंदगी में संतुलन बनाए रखना आसान नहीं था, लेकिन “मुझे अपने परिवार, अपने पति और अपने भाई-बहनों से वह समर्थन मिला जिसकी मुझे ज़रूरत थी”।

भारत ने फतह किया चाँद: ‘चंद्रयान 3’ की सफल लैंडिंग से ISRO ने दुनिया में मनवाया भारत का लोहा, वीडियो कॉन्फ्रेंस से जुड़े रहे PM मोदी

ISRO का मिशन ‘चंद्रयान 3’ सफल हो गया है। ‘चंद्रयान 3’ की लैंडिंग सफल हो गई है। जैसे ही ‘चंद्रयान 3’ की लैंडिंग सफल हुई, ISRO का कंट्रोल रूम वैज्ञानिकों की तालियों से गूँज उठा। सफल लैंडिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों और देशों को संबोधित भी किया। बता दें कि वो ब्रिक्स समिट में गए हुए हैं, जहाँ वो एक के बाद एक बैठकों में हिस्सा ले रहे हैं। इसके बावजूद वो देशवासियों के साथ इस ख़ुशी में शरीक होने से खुद को नहीं रोक सके।

बता दें कि ISRO के ‘चंद्रयान 3’ का बजट मात्र 75 मिलियन डॉलर (615 करोड़ रुपए) ही था, जो अंतरिक्ष के विषय पर बनी हॉलीवुड की फिल्म ‘Interstellar’ (2014) के बजट से भी कम है। दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क ने भी इस पर टिप्पणी की है। बता दें कि ‘इंटरस्टेलर’ का बजट 165 मिलियन डॉलर था। एलन मस्क ने कहा है कि ये मिशन भारत के लिए काफी अच्छा है। बता दें कि ‘चंद्रयान 3’ को 14 जुलाई, 2023 को अंतरिक्ष के लिए लॉन्च किया गया था।

BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी लैंडिंग के कार्यक्रम से वर्चुअली जुड़े हुए थे। जहाँ ‘चंद्रयान 3’ के लैंडर का नाम विक्रम है, वहीं इसके रोवर का नाम प्रज्ञान है। बता दें कि इस मिशन के बारे में जानकारी ISRO के मुखिया रहे के सिवन ने 2020 में ही दे दी थी। उन्होंने बताया था कि जहाँ रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल में 250 करोड़ रुपए का खर्च आया है, वहीं वहीं लॉन्च सर्विस 365 करोड़ रुपए के खर्च से हुआ।

वहीं बता दें कि ‘चंद्रयान 2’ मिशन 978 करोड़ रुपए में पूरा किया था, लेकिन वो लैंड नहीं कर पाया था। उस दौरान भावुक के सिवन को सांत्वना देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो भी सामने आया था। जिस तरह से उन्होंने वैज्ञानिकों को ढाँढस बँधाया था, उसके बाद उनकी जम कर तारीफ़ हुई थी। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस कार्यक्रम से जुड़े प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस उपलब्धि पर मुस्कुराते हुए नजर आए। इसके बाद उन्होंने अपना संबोधन शुरू किया।

बड़ी बात ये है कि हाल ही में रूस का ‘लूना 25’ मिशन विफल हो गया था और दशकों बाद चाँद पर उतरने की उसकी ख्वाहिश सफल नहीं हो पाई थी। रूस का स्पेसक्राफ्ट चाँद की सतह से ही टकरा कर क्रैश हो गया था। इसके बाद ‘चंद्रयान 3’ की सफलता को लेकर देश भर में प्रार्थनाएँ हो रही थीं।

‘कमर और नितंब का आकार बताओ’: अजमेर के सोफिया स्कूल का फरमान, इसी स्कूल की छात्राएँ थी देश के सबसे बड़े सेक्स स्कैंडल की पीड़िताएँ

अजमेर का सोफिया स्कूल एक बार फिर से चर्चा में है। जयपुर रोड पर स्थित सोफिया स्कूल ने सभी छात्राओं से उनके हिप्स और वेस्ट (कमर और नितंबों) का आकार पूछा है। ऐसा उसने स्पोर्ट्स एक्टिविटीज के नाम पर किया है। खास बात ये है कि बच्चों से मेडिकल सर्टिफिकेट भी माँगा गया है। दावा किया गया है कि ऐसा इसीलिए किया गया, क्योंकि उनके शरीर के हिसाब से खेलों में शामिल किया जा सके। सोफिया स्कूल की इस हरकत पर परिजनों ने नाराजगी जताई है, वहीं स्कूल का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं है बल्कि वो हर साल ये डाटा इकट्ठा करता रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अजमेर के सोफिया सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 2500 से ज्यादा बच्चे पढ़ाई करते हैं। इन सभी बच्चों को 7 दिन पहले हेल्फ और एक्टिविटी कार्ड के नाम से एक फॉर्म भरने को दिया गया। इसमें खेलों के नाम लिखे थे और नीचे की तरफ हेल्थ रिकॉर्ड के कॉलम में बिजन, कान, दाँत के साथ पल्स रेट, हाइट और हिप्स व वेस्ट का नाप भी बताना था। इस फॉर्म की वजह से बच्चे पशोपेश में हैं।

परिजनों का पूछना है कि स्कूल बच्चों की निजी जानकारी क्यों माँग रहा है? अभिभावक कह रहे हैं कि लंबाई, वजन ये सब चीजें सामान्य है, लेकिन हिप्स का साइज क्यों? स्कूल में स्पोर्ट्स एक्टिविटी के नाम पर ये क्या हो रहा है? उनका कहना है कि बच्चों को इस फॉर्म के हिसाब से मेडिकल रिपोर्ट भी जमा करनी है, जिसके लिए उन्हें अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

सोफिया स्कूल द्वारा जारी फॉर्म का नमूना देखिए:

सोफिया स्कूल द्वारा जारी फॉर्म का नमूना, जिसमें वेस्ट और हिप्स का साइज पूछा गया है। (फोटो साभार-भास्कर)

‘दैनिक भास्कर’ से बातचीत में स्कूल के प्रतिनिधि सुधीर तोमर ने बताया है कि इस फॉर्म का मकसद बॉडी मास्क इंडेक्स निकालना है, ताकि बच्चों को उनके शरीर के हिसाब से खेलों में शामिल जाए। ऐसा करने से उन्हें ही फायदा होगा। ये सभी जानकारियाँ डॉक्टर की रिपोर्ट पर आधारित होंगी। सोफिया स्कूल के बारे में बता दें कि ये अजमेर सेक्स स्कैंडल के समय भी चर्चा में रहा था। 80 के दशक के उत्तरार्ध और 90 के दशक की शुरुआत में ये मामला सामने आया था, जिसमें बलात्कारियों में दरगाह के चिश्ती परिवार के लोग और कॉन्ग्रेस नेताओं के नाम सामने आए।

याद दिला दें कि फारूक चिश्ती ने सोफिया सीनियर सेकंडरी स्कूल की एक लड़की को शिकार बना कर इस काण्ड की शुरुआत की थी, और बाद में वो बाद में अदालतों में खुद को मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित कराने में सफल हो गया। इसके बाद उस लड़की की दोस्तों को शिकार बनाया गया और इस तरह चेन जुड़ता चला गया और कई लड़कियाँ बलात्कार-ब्लैकमेलिंग के इस प्रकरण का शिकार हुईं।

दोस्त की बेटी को ड्रग्स भी देता था दिल्ली का अधिकारी, रेप के बाद पीड़िता से बोली थी खाखा की बीवी- तुमने ही उसे इशारे किए होंगे

दोस्त की बेटी से बलात्कार के आरोपित दिल्ली सरकार के निलंबित अधिकारी प्रेमोदय खाखा और उसकी बीवी सीमा को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस मामले में आए दिन नए खुलासे हो रहे हैं। पहली बार बलात्कार के बाद पीड़िता ने जब प्रेमोदय की बीवी सीमा रानी खाखा को इस बारे में जानकारी दी, तब उसने कहा था कि ‘तुमने ही उसे कुछ इशारे किए होंगे’। यह भी सामने आया है कि बलात्कार से पहले प्रेमोदय पीड़िता को ड्रग्स देता था।

मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आरोपित प्रेमोदय खाखा ने पहली बार 31 अक्टूबर 2020 को पीड़िता के साथ बलात्कार किया था। इस दौरान बलात्कार से पहले उसने लड़की को ड्रग्स दिया था। वहीं, दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रेमोदय खाखा बलात्कार करने से पहले हर बार पीड़िता को ड्रग्स देता था। वहीं, न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मताबिक, खाखा ने पहली बार रेप के दौरान पीड़िता को ड्रग्स दिया था।

हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता ने पुलिस से कहा है कि प्रेमोदय खाखा ने पहली बार उसका बलात्कार किया था, तब उसने इसकी जानकारी खाखा की बीवी सीमा को दी थी। हालाँकि, सीमा ने अपनी पति को कुछ भी कहने की बजाय पीड़िता से कहा था कि ‘तुमने ही कुछ ऐसा किया होगा और इशारे किए होंगे’। यही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि सीमा खाखा आए दिन उसके साथ मारपीट करती थी।

मामले की जाँच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की जानकारी न केवल प्रेमोदय की बीवी सीमा को थी, बल्कि उसके दोनों बच्चों को भी थी। प्रेमोदय खाखा की एक बेटी और बेटा है। इससे पहले खबर थी कि पीड़िता के गर्भवती होने पर सीमा खाखा ने अपने बेटे से गर्भपात करने की दवाइयाँ मँगाई थीं।

हालाँकि, अब अधिकारियों का दावा है कि प्रेमोदय और सीमा की बेटी को पीड़िता के साथ हो रहे दुष्कर्म की जानकारी थी। प्रेग्नेंट होने के बाद पीड़िता ने ही प्रेमोदय के बच्चों को इस बारे में बताया था। चूँकि दोनों ही बालिग हैं। ऐसे में पुलिस दोनों से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।

51 वर्षीय प्रेमोदय खाखा और उसकी बीवी सीमा को 22 अगस्त को एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। यह अवधि पूरी होने के बाद बुधवार (23 अगस्त 2023) को दोनों को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ दोनों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

इससे पहले प्रेमोदय खाखा की दिल्ली पुलिस ने पोटेंसी टेस्ट कराया था। आम बोलचाल की भाषा में इसे मर्दानगी की जाँच भी कहते हैं। इस टेस्ट के जरिए यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति नपुंसक है या नहीं, क्योंकि कई बार रेप के आरोपित खुद को नपुंसक बताकर बचने की कोशिश करते हैं।

दरअसल, प्रेमोदय खाखा की बीवी सीमा खाखा पर पीड़िता का गर्भपात कराने का आरोप है, लेकिन खाखा के वकील ने दावा किया है कि लड़की के गर्भवती होने के आरोप झूठे हैं। वकील ने दावा किया कि खाखा ने करीब 20 साल पहले ही नसबंदी करा लिया था।

क्या है मामला

खाखा पर नवंबर 2020 से लेकर जनवरी 2021 के बीच पीड़िता के यौन शोषण का आरोप है। 17 साल की पीड़िता का जब पहली बार शोषण हुआ तब वह 14 साल की थी। अक्टूबर 2020 में पीड़िता के पिता की मृत्यु हो गई थी। इस सदमे से उसे उबारने के लिए खाखा उसे अपने घर ले गया था। दोनों परिवार पहले से परिचित थे और पीड़िता खाखा को ‘मामा’ कह कर बुलाती थी।

अब पता चला है कि दोनों परिवार 1998 में चर्च के माध्यम से संपर्क में आए थे। वो चर्च में रविवार की प्रार्थना अटेंड करने गए थे, उसी दौरान इनकी मुलाकात हुई थी। कथित तौर पर पीड़िता के गर्भवती होने पर प्रेमोदय खाखा की बीवी सीमा ने उसे गर्भपात की गोलियाँ खिलाई। बाद में उसे पैनिक अटैक आने लगे। लड़की को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहाँ काउंसलिंग के दौरान उसने डॉक्टर को पूरी आपबीती सुनाई।

पुलिस ने पॉक्सो, यौन शोषण, जान से मारने की धमकी, जबरन गर्भपात, मारपीट समेत अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। खाखा के बारे में यह भी पता चला है कि उसके खिलाफ 3 अन्य महिलाओं ने भी वर्कप्लेस पर उत्पीड़न की शिकायत दी थी। आरोप है कि उसके विभाग ने इस मामले को रफा-दफा कर दिया। 

ऑपइंडिया के पास 23 फरवरी 2019 को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिल्ली के WCD विभाग को भेजा गया वो पत्र मौजूद है, जिसमें लिखा गया है कि जवाब माँगे जाने के बावजूद विभाग ने इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। सोशल मीडिया से पता चलता है कि प्रेमोदय खाखा कट्टर ईसाई है।

एक फेसबुक पोस्ट में दिल्ली सरकार के निलंबित अधिकारी प्रेमोदय खाखा ने लिखा है, “मेरी कोई आशा न होती यदि मैं इस बात से अनजान होता कि किसी ने मेरे सब कर्मों का फल क्रूस पर बलिदान होकर भुगत लिया।” उसने इंट्रो में बाइबिल का एक उद्धरण लगा रखा है।

बाइबिल के ‘जॉन’ में 14वें चैप्टर की 21वीं वर्स के इस उद्धरण का मतलब है, “जिसके पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूँगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूँगा।”

BRICS का मंच, फर्श पर रखे तिरंगे को उठा कर PM मोदी ने जेब में रखा: दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति ने भी देखा-देखी उठाया अपना झंडा, देखें वीडियो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS समिट में हिस्सा लेने के लिए दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग पहुँचे हुए हैं। उनका वहाँ भव्य स्वागत भी हुआ। इस दौरान एक वीडियो भी सामने आया है, जिसके बाद देश भर में उनकी जम कर प्रशंसा हो रही है। असल में मौका था BRICS के ग्रुप फोटो सेशन का। इसमें सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को मंच पर खड़े होकर तस्वीरें क्लिक करवानी थी। इस दौरान उन देशों के झंडे मंच पर नीचे रखे गए थे। जिस देश का झंडा जहाँ रखा हुआ था, वहाँ पर उस देश के नेता को खड़ा होना था।

इस दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा मंच पर पहुँचे। जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जमीन पर तिरंगा रखे हुए देखा, उन्होंने तुरंत आगे बढ़ कर उसे उठाया। उन्होंने भारत के राष्ट्रीय ध्वज को उठा कर अपने पॉकेट में रख लिया। उन्हें देख कर दक्षिण अफ़्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने भी अपने देश का झंडा नीचे से उठा लिया। फिर नीचे से एक कर्मचारी मंच पर पहुँचा, जिसे दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने अपने देश का झंडा दे दिया।

हालाँकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे तिरंगा नहीं दिया और उसे अपने पॉकेट में रखे रहे। शायद उन्हें डर था कि उक्त कर्मचारी भी तिरंगे को ले जाकर किसी ऐसी जगह न डाल दे, जहाँ उसका अपमान हो। बता दें कि भारत में भी तिरंगे झंडे को फर्श पर नहीं रखा जाता और इसे अपमान माना जाता है। भारत के राष्ट्रीय ध्वज के प्रति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान और संवेदनशीलता को देख कर लोगों ने उनकी तारीफ़ की। लोगों ने कहा कि चाहे प्रधानमंत्री मोदी जहाँ भी रहें, वो देश और देश के प्रतीकों के सम्मान के प्रति संवेदनशील रहते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही पिछले साल ‘हर घर तिरंगा’ अभियान की शुरुआत की थी और इस साल भी उन्होंने देशवासियों से आग्रह किया था कि वो अपने-अपने घरों में तिरंगा फहराएँ। इसके लिए राष्ट्रध्वज के नियमों में भी संशोधन किया गया था। ऐसे समय में जब देश ‘चंद्रयान 3’ की लैंडिंग को लेकर चाँद पर तिरंगा फहराने की बात कर रहा है, पीएम मोदी का ये वीडियो आने के बाद लोग उनकी प्रशंसा कर रहे हैं। पीएम मोदी भारत में भी कई कार्यक्रमों में प्लास्टिक वगैरह पड़ा देखते हैं तो उठा कर रख लेते हैं।

‘जबरन मुस्लिम बनाकर निकाह किया’: सौरभ ने बताया सोनिया अख्तर का ‘सच’, बच्चे को लेकर नोएडा आ गई है बांग्लादेशी महिला

अपने कथित पति को खोजने के लिए एक साल के बेटे को लेकर बांग्लादेश से नोएडा पहुँची, सोनिया अख्तर के मामले में नया मोड़ आया है। मामले की जाँच कर रही नोएडा पुलिस को 29 वर्षीय बांग्लादेशी इस महिला ने भारतीय पति सौरभ कांत तिवारी के इस्लाम धर्म अपनाने और निकाहनामे के दस्तावेज दिखाए।

दूसरी तरफ, ग्रेटर नोएडा के शिवालिक होम्स सोसायटी में रहने वाले सौरभ कांत तिवारी ने कहा कि निकाहनामा और धर्म परिवर्तन के दस्तावेजों पर सोनिया अख्तर और उसके परिवारवालों ने जबरदस्ती दस्तखत करवाए हैं। तिवारी ने ‘आजतक’ को बताया कि पुलिस पूछताछ के लिए उसे कई बार बुला चुकी है।

तिवारी ने कहा कि दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ने के बाद वे करीब आ गए थे। इसी दौरान सोनिया ने उसके आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बना लिए। आपत्तिजनक फोटो और वीडियो से उसे डरा-धमका कर निकाह का दबाव बनाया गया। इसके बाद अप्रैल 2021 में निकाह हुई।

सौरभ ने कहा कि दबाव में निकाह के बाद उससे एक करोड़ रुपए की माँग की गई। उसने कहा कि भारत में रह रही पत्नी और बच्चों के बारे में सोनिया को पहले से ही सब पता था। बांग्लादेश से नौकरी चली जाने के बाद सानिया को सब कुछ बताकर ही भारत लौटा था। इसके बावजूद फोटो और वीडियो के जरिए उनको ब्लैकमेल किया जा रहा है।

47 साल के शादीशुदा सौरभ कांत तिवारी ने यह भी कहा कि उसने बांग्लादेश में तलाक की अर्जी दी है, लेकिन इसके बाद भी सोनिया अख्तर यहाँ आकर उसे परेशान कर रही है। तिवारी का कहना है कि उसने भारत में कोई जुर्म नहीं किया है। इसके बावजूद भी पुलिस उस पर दबाव डाल रही है।

सौरभ कांत तिवारी का यह भी कहना है कि पुलिस उससे सोनिया अख्तर के रहने का इंतजाम करने के लिए कह रही है। तिवारी का कहना है कि बांग्लादेश की अदालत का जो भी फैसला होगा, उसे वह मानने के लिए तैयार हैं। अगर उन्हें बच्चे का खर्चा देने का आदेश हुआ तो वो भी पूरा करेगा।

इस पर सोनिया अख्तर के वकील ने कहा है कि बांग्लादेश में अपनी नौकरी के दौरान तिवारी ने सोनिया अख्तर से झूठ बोला था। उसने कहा था कि उसकी पहली पत्नी की मौत हो गई है और निकाह करके दोनों खुश रहेंगे। इसके बाद तिवारी ने धर्म परिवर्तन कर सोनिया से निकाह किया। वकील ने कहा कि सोनिया के बेटे की तबियत भी खराब है।

दरअसल सोमवार (21 अगस्त 2023) को सोनिया ने इस संबंध में नोएडा पुलिस को शिकायत दी थी। इस मामले की जाँच एसीपी महिला सुरक्षा कर रही है। दो दिन पहले बांग्लादेश की राजधानी ढाका की रहने वाली सोनिया अख्तर नोएडा के महिला थाने पहुँच गई थी। उसने दावा किया था कि 14 अप्रैल 2021 को उसकी सौरभ से निकाह हुआ था।

उसने पुलिस को बताया था कि सौरभ जनवरी 2017 से दिसंबर 2021 तक ढाका के कल्टी मैक्स एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड में ज़ॉब करता था। सोनिया ने कहा कि निकाह के बाद सौरभ उसे छोड़कर भारत आ गया। वैध कागजातों के साथ भारत आई सोनिया का कहना है कि वह अपने पति के साथ रहना चाहती है। उसने पुलिस को अपने और बेटे के पासपोर्ट, वीजा और सिटिजन कार्ड भी दिए हैं।

‘अब नौकरी के साथ-साथ छोकरी भी खोजूँ क्या’: CM भूपेश बघेल ने मजाक में उड़ाया बेरोजगारी का सवाल, जन्मदिन पर ‘बाबा’ के चरण में झुके

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार (22 अगस्त, 2023) को सरगुजा का दौरा किया। ये दौरा इसीलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरगुजा वहाँ के राजपरिवार से आने वाले TS सिंहदेव का इलाका है, जिन्हें हाल ही में उप-मुख्यमंत्री भी बनाया गया है। सिंहदेव CM पद के भी दावेदार रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का जन्मदिन भी है। मुख्यमंत्री ने केक काटा और टीएस सिंहदेव के पाँव छुए। लेकिन, जब एक छात्र ने नौकरी को लेकर सवाल पूछा तो राज्य के मुखिया ने इसे मजाक में उड़ा दिया।

एक युवक ने सीएम भूपेश बघेल से सवाल किया कि प्रदेश में एग्रीकल्चर और फिशरी के पदों पर भर्तियाँ नहीं निकल रही हैं, इस कारण नौकरी नहीं लग पा रही है। साथ ही उसने ये भी कहा कि नौकरी न लगने के कारण उसकी शादी भी नहीं हो पा रही है। इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मुस्कुराते हुए पूछा कि अब नौकरी के साथ-साथ छोकरी भी खोजूँ क्या? साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि इन पदों पर जल्द ही भर्तियाँ निकाली जाएँगी। सीएम बघेल ‘गढ़बो नवा छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में युवाओं से चर्चा कर रहे थे।

कार्यक्रम में पहुँचे जलोधर ग्वाल ने छत्तीसगढ़ी भाषा में अपनी कविता सुनाई। उन्होंने इस कविता के सहारे किसानों द्वारा लगातार अनाज उगाए जाने और उनके मेहनत करने के साथ-साथ नशा का त्याग करने का भी सन्देश दिया। कई छात्रों ने भी इस दौरान अलग-अलग विषय पर कविताएँ सुनाईं। सीएम बघेल ने सुरगुजा संभाल के सभी जिलों में शासकीय बीएड कॉलेज खोले जाने की घोषणा की। सीएम बघेल ने बताया कि प्रदेश में 377 अंग्रेजी माध्यम के ‘स्वामी आत्मानंद स्कूल’ हैं।

छत्तीसगढ़ में हाल ही में भाजपा ने गोबर घोटाले का भी मामला सामने आया था। इस साल वहाँ चुनाव भी होने हैं। इससे पहले कॉन्ग्रेस पार्टी को झटका भी लगा है। लगभग 120 कॉन्ग्रेस के नेता भाजपा में जाकर शामिल हो गए हैं। कुछ दिनों पहले ही 50 से भी अधिक कार्यकर्ताओं ने भाजपा का दामन थामा था। पार्टी अंदरूनी कलह से भी जूझ रही है। भाजपा ने आरोप लगाया है कि सीएम बघेल के हालिया कार्यक्रम में रटा-रटाया स्क्रिप्ट ही दोहराया गया और पहले ही तय हो गया था कि कौन क्या बोलेगा।

नूहं के मुस्लिमों के पास ममता बनर्जी ने सांसद भेजा, हरियाणा से बंगाल आए लोगों को देंगी ₹5 लाख कर्ज: हिंदुओं को नहीं मिली जलाभिषेक यात्रा की अनुमति

हरियाणा के मेवात इलाके के नूहं में 31 जुलाई 2023 को इस्लामी भीड़ ने हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हमला कर दिया था। इसके बाद वहाँ बड़े पैमाने पर हिंसा फैल गई थी। अब तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने नूहं हिंसा को लेकर राजनीति शुरू कर दी है। दूसरी ओर, नूहं प्रशासन ने अधूरी जलयात्रा को पूरा करने करने के लिए विश्व हिंदू परिषद को अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

दरअसल, ममता बनर्जी ने पार्टी के राज्यसभा सांसद समीरुल इस्लाम नूहं भेजा था। यही नहीं ममता बनर्जी ने नूहं हिंसा के बाद हरियाणा से बंगाल लौटे लोगों को 5 लाख रुपए के लोन देने का ऐलान किया। ममता बनर्जी की यह कोशिश बंगाल हिंसा और वहाँ की लचर कानून व्यवस्था से ध्यान हटाने की कोशिश मानी जा रही है। की।

TMC के राज्यसभा सांसद और पश्चिम बंगाल प्रवासी श्रमिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष समीरुल इस्लाम ने अपनी नूहं यात्रा को लेकर कहा है कि उन्होंने नूहं के कई इलाकों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मौलवियों और विभिन्न राज्यों के मुस्लिम प्रवासी श्रमिकों सहित कम से कम 100 लोगों से मुलाकात की।

समीरुल इस्लाम ने कहा, “मैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश के बाद नूहं आया था। वह प्रवासी मजदूरों, विशेष रूप से मुस्लिमों की दुर्दशा को लेकर चिंतित हैं। उनकी रातों की नींद हराम हो रही है। प्रवासी समुदाय अभी भी दहशत में है। मेरे माध्यम से, उन्होंने मुख्यमंत्री को एक अनुरोध भेजा है और साथ खड़े रहने का आग्रह किया।”

ममता बनर्जी ने इस्लाम को नूहं दौरे खत्म कर दिल्ली लौटने पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। टेलीग्राफ ने रिपोर्ट में तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक सूत्र के हवाले से कहा है कि समीरुल को नूंह भेजना ममता बनर्जी की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा था। इसके जरिए वह खुद को मुस्लिमों के साथ दिखाकर वोट बैंक को अपने पक्ष में लाना चाहती हैं।

इसके अलावा, ममता बनर्जी ने नूहं हिंसा के बाद हरियाणा से बंगाल आए लोगों को ₹5 लाख का कर्ज देने का ऐलान किया। बताया जा रहा है कि नूहं हिंसा के बाद 150 प्रवासी श्रमिक और उनका परिवार बंगाल के मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर में लौट आया है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद समीरुल इस्लाम ने आगे कहा, “जो लोग हरियाणा से लौटे हैं और यहाँ अपना खुद का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, हम उनके लिए 5 लाख रुपये के कर्ज की व्यवस्था करेंगे। कर्ज के लिए हमसे संपर्क करने के लिए हम उनका स्वागत करते हैं।”

नूहं प्रशासन ने नहीं दी शोभायात्रा की अनुमति

दूसरी ओर, नूहं प्रशासन ने हिंदू संगठनों को अधूरी जलभिषेक यात्रा निकालने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। दरअसल, 13 अगस्त 2023 को हिंदू संगठनों ने पलवल के पोंडरी गाँव में महापंचायत बुलाई थी। इसमें बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा को 28 अगस्त 2023 को पूरा करने का ऐलान किया गया था।

इस यात्रा को लेकर विश्व हिंदू परिषद ने नूहं प्रशासन से अनुमति माँगी थी। हालाँकि, प्रशासन ने मंगलवार (22 अगस्त 2023) को इस यात्रा के लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया। पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारनिया ने कहा है कि जलाभिषेक यात्रा निकालने के लिए आवेदन आया था, लेकिन इस आवेदन को खारिज कर दिया गया है।

बच्ची के कपड़ों में हाथ डाल कहता था आरिफ हुसैन- मुस्लिम बनो, नहीं तो तेरी माँ को बेच दूँगा: 8वीं की छात्रा ने पुलिस से की शिकायत

इंदौर के बाणगंगा थाने में एक 15 साल की बच्ची अपनी नानी के साथ पुलिस के सामने खुद को अपने अपने परिवार को बचाने की फरियाद लेकर पहुँची। बच्ची ने खुद को, अपनी भाई-बहनों और अपनी माँ को बचाने के लिए विनती की। बच्ची 8वीं में पढ़ती है। 4 महीने पहले बच्ची की माँ अपने बच्चों को लेकर प्रेमी आरिफ हुसैन के घर चली गई थी।

बच्ची का कहना है कि आरिफ हुसैन उसकी माँ की गैर-मौजूदगी में उसके कपड़ों में हाथ डालता था और कहता था कि वो निकाह कर के उसकी बीवी बन जाए। वो कहता था कि अगर बीवी की जगह बेटी ही बने रहना है, तो धर्म-परिवर्तन करके मुस्लिम बन जाए। साथ ही उसने धमकाया कि ऐसा न करने पर या फिर ये बातें किसी को बताने पर वो उसके भाई-बहनों को काटकर नाले में फेंक देगा। उसे और उसकी माँ को मुंबई में बेच देगा।

यही नहीं, आरिफ हुसैन उसकी माँ को मुंबई घुमाने ले गया था। वो उसकी माँ को हिजाब पहनाता था। बच्ची ने किसी तरह से अपनी नानी के साथ संपर्क किया और सारी आपबीती बताई। इसके बाद परिवार आरिफ के घर पहुँचा और बच्चों को मुक्त कराकर घर भेज। नानी अपनी नातिन के साथ सीधे पुलिस स्टेशन पहुँची और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के अनुसार, बाणगंगा पुलिस थाने के इंस्पेक्टर नीरज बिरथरे ने बताया है कि 15 साल की लड़की, जो आठवीं कक्षा में पढ़ती है, उसने आरिफ हुसैन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। इधार्मिक स्वंत्रता अधिनियम, बच्ची के यौन उत्पीड़न के मामले में पॉक्सो एक्ट और छेड़छाड़ की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरिफ हुसैन की तरफ की तरफ से दावा किया गया है कि लड़की की माँ और आरिफ ने निकाह कर लिया था, लेकिन बाद में लड़की की माँ की शादी कहीं और हो गई थी। उसके साथ मारपीट होती थी, जिसकी वजह से वो दोबारा आरिफ के पास भाग आई और यहीं रह रही थी।

इंदौर में ही इलियास कुरैशी ने 8 साल के बच्चे का कराया था खतना

बता दें कि कुछ समय पहले ही इंदौर में 8 साल के जैन बच्चे का खतना कर दिया गया था। उस मामले में इलियास कुरैशी ने 8 साल के जैन बच्चे की माँ को फाँस लिया था। उसे भी जिहादी बना दिया था। उसने बच्चे का खतना करवा कर नाम बदल दिया और बाकायदा मदरसे में पढ़ने भेजा करता था। पुलिस ने उस मामले में इलियास कुरैशी और उसकी प्रेमिका को भी गिरफ्तार कर लिया था।

‘लिंग परिवर्तन संवैधानिक अधिकार’: यूपी पुलिस की महिला कॉन्स्टेबल को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी राहत, बोला- DGP एप्लिकेशन पर तुरंत लें निर्णय

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की एक महिला कॉन्स्टेबल के जेंडर बदलने की राह आसान कर दी है। हाईकोर्ट ने बीते सप्ताह कहा है कि हर शख्स को, चाहे वो महिला हो या पुरुष, संविधान की तरफ से सर्जरी के जरिए अपने लिंग को बदलने (Changing Gender) का अधिकार प्राप्त है। दरअसल, कॉन्स्टेबल ने इसको लेकर कोर्ट में याचिका दायर की थी।

जस्टिस अजीत कुमार की बेंच ने कॉन्स्टेबल नेहा की याचिका पर राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) को उसकी सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी (SRS) यानी सेक्स चेंज कराने संबंधी एप्लिकेशन का निपटारा करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने यूपी सरकार और डीजीपी को चार हफ्ते में इस पर जवाब देने के लिए कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 21 सितंबर 2023 को होगी।

जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित है महिला कॉन्स्टेबल

लाइव लॉ के मुताबिक, इस केस में जस्टिस अजीत कुमार की बेंच ने कहा, “यदि आधुनिक समाज में भी हम अपनी पहचान बदलने के किसी शख्स के इस अधिकार को स्वीकार नहीं करते हैं तो इससे हम लिंग पहचान के विकार सिंड्रोम को बढ़ावा देंगे।” बेंच ने ये टिप्पणी यूपी पुलिस की एक अविवाहित महिला कॉन्स्टेबल की दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

याचिकाकर्ता का कहना है कि वह जेंडर डिस्फोरिया (Gender Dysphoria) से पीड़ित है और यौन संबंध बनाने के लिए उसे सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी (एसआरएस) कराने की जरूरत है, ताकि वो खुद को पुरुष की शारीरिक संरचना और पहचान में ढाल सके।

दरअसल, जेंडर डिस्फोरिया वो शारीरिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति को यह महसूस होता है कि उसका प्राकृतिक लिंग उसकी लैंगिक पहचान से मेल नहीं खाता है। इस वजह से ही कॉन्स्टेबल नेहा सिंह को भी खुद के महिला के शरीर में पुरुष होने का एहसास होता है।

इसको लेकर कोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि उसकी मुवक्किल ने यूपी पुलिस महानिदेशक लखनऊ को 11 मार्च 2023 को एप्लिकेशन दी थी। इसमें उसने सेक्स चेंज सर्जरी के लिए आवश्यक मंजूरी देने के लिए कहा था, लेकिन उस बारे में कोई फैसला नहीं लिया गया। इस वजह से उसे कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण बनाम भारत संघ और अन्य, 2014 5 एससीसी 438 के फैसले का हवाला दिया। इस फैसले में लिंग पहचान को व्यक्ति की गरिमा का अनिवार्य अंग माना गया है। उन्होंने कहा कि इसके मुताबिक याचिकाकर्ता के आवेदन को रोकना पुलिस विभाग के लिए सही नहीं था।

आखिर में, अदालत ने राजस्थान हाईकोर्ट के हालिया फैसले का भी हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने एक फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर को लिंग बदलने की सर्जरी के बाद सेवा रिकॉर्ड में अपना नाम और लिंग बदलवाने की मंजूरी दी थी।

इन सब बातों पर गौर करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि किसी को लिंग डिस्फोरिया है और उसकी शारीरिक बनावट को छोड़कर उसमें विपरीत लिंग की भावना और लक्षण इतने अधिक हैं कि वो शरीर के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व का गलत तरीके आकलन करता है। ऐसे हालातों में व्यक्ति के पास “सर्जिकल हस्तक्षेप के जरिए अपना लिंग बदलवाने का संवैधानिक तौर पर मान्यता प्राप्त अधिकार” होता है।

कोर्ट ने इस केस में सभी बातों को ध्यान में रखते हुए याचिकाकर्ता के आवेदन को रोकने के लिए पुलिस महानिदेशक की ओर से कोई आधार नहीं पाया। इसे देखते हुए कोर्ट ने सख्ती के साथ डीजीपी को याचिकाकर्ता महिला कॉन्स्टेबल के लंबित आवेदन को सुनवाई के दौरान जिक्र किए फैसलों को नजर में रखते हुए निपटाने का निर्देश दिया।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से एक उचित हलफनामा दाखिल करने को भी कहा है। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में राज्य सरकार बताए कि क्या उसने एनएएलएसए मामले में सुप्रीम कोर्ट के जारी निर्देशों के अनुपालन में ऐसा कोई एक्ट बनाया है और यदि ऐसा है तो उसे रिकॉर्ड पर भी लाया जा सकता है।