हिंदू एवं भारत विरोधी अमेरिकी कॉन्ग्रेस की सदस्य इल्हान उमर की पिछले साल की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (Pok) की यात्रा को पाकिस्तान सरकार ने ही फंड किया था। ये बात एनुअल हाउस फाइनेंशियल डिस्क्लोजर रिपोर्ट में बताई गई है। इस खुलासे के बाद पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो गया है।
क्या है मामला
डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य इल्हान उमर पाकिस्तान की कट्टर समर्थक हैं और भारत विरोधी अपने रुख के लिए जानी जाती हैं। इल्हान ने पिछले साल अप्रैल 2022 में पाकिस्तान का दौरा किया था। डिस्क्लोजर रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान सरकार ने 18 से 24 अप्रैल तक की उनकी यात्रा के लिए फंड दिया था। इसमें यात्रा से लेकर खाने का पूरा खर्च शामिल था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इल्हान ने उस समय भारत विरोधी बयान दिया था। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ, विदेश राज्यमंत्री हिना रब्बानी खार और पूर्व पीएम इमरान खान से मुलाकात की थी। उस समय हुई उनकी बातचीत कश्मीर और इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दों पर केंद्रित थी।
बता दें कि इल्हान की इस यात्रा की भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी आलोचना की थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने इल्हान की यात्रा की निंदा करते हुए कहा था, “भारत की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है। यह यात्रा निंदनीय है।”
इतना नहीं, इल्हान इस साल अमेरिकी कॉन्ग्रेस में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त संबोधन में भी शामिल नहीं हुई थीं। इसके बजाय उन्होंने भारत में ‘रिकॉर्ड ऑफ रिप्रेशन’ नाम से मानवाधिकार समूहों के साथ मिलकर एक मीडिया ब्रीफिंग की थी।
तब उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अल्पसंख्यकों का दमन किया है। हिंसक हिंदू राष्ट्रवादी समूहों को बढ़ावा दिया है। पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया है। मैं पीएम मोदी के स्पीच में शामिल नहीं होऊँगी।”
Prime Minister Modi’s government has repressed religious minorities, emboldened violent Hindu nationalist groups, and targeted journalists/human rights advocates with impunity.
यह पहली बार नहीं है, जब इल्हान मर की विदेश यात्राओं पर विवाद हुआ है। नवंबर 2022 में भी जब उन्होंने कतर का दौरा किया था। तब कतर सरकार ने उनकी यात्रा का खर्च उठाया था। वो लगातार भारत और हिन्दू विरोधी बयान देती रहीं।
वहीं इज़रायली राष्ट्रपति इस्साक हर्ज़ोग के भाषण का बहिष्कार करने के उनके फैसले और उनका इज़रायल विरोधी रुख उनके विवादास्पद व्यक्तित्व को दर्शाता है। उमर पर यहूदी विरोधी होने का भी आरोप है। इसके चलते ही उन्हें शक्तिशाली अमेरिकी विदेश मामलों की समिति से हटा दिया गया था।
इल्हान की कुत्सित मानसिकता का पता इससे भी चलता है कि जब वह फीफा वर्ल्ड कप देखने गईं थीं, तब भी उनका सारा खर्च मुस्लिम देशों ने वहन किया था। इसका इजरायल वॉर रूम नाम के सोशल मीडिया हैंडल ने खुलासा किया है। अब यह सोचने वाली बात है कि एक अमेरिकी सांसद पर इतने सारे मुस्लिम देश पैसा क्यों खर्च कर रहे हैं।
#NEW financial disclosures show that @IlhanMN, who routinely attacks fellow Democrats for supporting the democratic Jewish state, took a free trip to the World Cup last year that was bankrolled by the Islamist slave state of Qatar. She also took a trip financed by the Pakistani… pic.twitter.com/sf0Gf9NaAe
गौरतलब है कि अमेरिकी कॉन्ग्रेस के सदस्यों को म्यूचुअल एजुकेशनल एंड कल्चरल एक्सचेंज एक्ट (MECEA) के तहत विदेशी सरकारों से यात्रा फंडिंग स्वीकार करने की अनुमति है, लेकिन उन्हें अपने एनुअल फाइनेंशियल डिस्क्लोजर स्टेटमेंट में इसके बारे में बताना आवश्यक है।
कौन हैं इल्हान उमर
अमेरिकी कॉन्ग्रेस सदस्य इल्हान उमर मिनिसोटा डेमोक्रेटिक-किसान-लेबर पार्टी की सदस्य हैं, जो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी से संबद्ध है। उमर साल 2019 में मिनिसोटा से चुनाव जीतकर अमेरिका के निचले सदन में आई थीं।
बता दें कि इल्हान उमर अमेरिकी कॉन्ग्रेस में पहुँचने वाली पहली सोमालियाई-अमेरिकी नागरिक हैं। वो मूलरूप से अफ्रीका की नागरिक रही हैं। साथ ही उमर अमेरिकी कॉन्ग्रेस में पहुँचने वाली दो मुस्लिम महिलाओं में से एक हैं।
हैडलाइन: भारत विरोधी अमेरिकी सांसद इल्हान उमर के Pok दौरे का पाकिस्तान ने ही उठाया था पूरा खर्च: डिस्क्लोजर रिपोर्ट से खुली पोल
हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई को जलाभिषेक यात्रा के दौरान मुस्लिमों की भीड़ द्वारा किए गए हमले को लेकर ट्रिब्यून इंडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में नया खुलासा हुआ है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि नल्हड़ की मस्जिद के एक इमाम द्वारा दिए गए फर्जी बयान ने नूहं के मुस्लिम बहुल क्षेत्र में हुई सांप्रदायिक हिंसा को भड़काने का काम किया। बता दें कि इस हिंसा की जाँच विशेष जाँच दल (एसआईटी) कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इमाम फजरू मियाँ ने कथित तौर पर 31 जुलाई को मुस्लिमों को झूठ बोलकर उकसाया था। उसने मस्जिद के लाउडस्पीकर पर फर्जी घोषणा की थी कि जलाभिषेक शोभायात्रा में भाग लेने वालों ने कुछ मुस्लिमों की दुकानों को लूट लिया है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने इमाम को पकड़ने के लिए तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मस्जिद के लाउडस्पीकरों पर किए गए फर्जी दावों के बाद इकट्ठा हुए मुस्लिमों की भीड़ ने लूटपाट, आगजनी और हिंसा शुरू कर दिया। विशेष जाँच दल (एसआईटी) के एक सदस्य ने बताया, “इस घोषणा ने ग्रामीणों के बीच गुस्से को भड़काने का काम किया, जिससे वे लोग भड़क गए। वे लोग पहले से ही सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे वीडियो के कारण उत्तेजित थे।” बाद में इन लोगों ने संगठित होकर पत्थर, हथियार इकट्ठे कर शोभायात्रा पर हमला बोल दिया।
इस मामले में यह बात भी सामने आई है कि मस्जिद के इमाम द्वारा अफवाह फैलाने के बाद कई दूसरे इमामों ने व्हाट्सएप ग्रुपों के साथ-साथ दूसरे मस्जिदों के माध्यम से भी इस अफवाह को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया। वहीं, अब इस खुलासे के बाद जाँच एजेंसियाँ भी उन आरोपितों को तलाश रही है, जो नूहं में शोभायात्रा के दौरान अफवाह फ़ैलाने में शामिल रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिदों से ऐलान कर हर बच्चे, महिला और पुरुष को हथियार लेकर बाहर आने को कहा गया। हिंदुस्तान-9 ने हाल ही में एक बच्चे का वीडियो भी साझा किया था, जिसने कहा था कि मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं के साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। एक अन्य महिला गवाह से, जिनसे उन्होंने बात की, थी कथित तौर पर कहा था कि भीड़ हथियार लहरा रही थी, गालियाँ दे रही थी और चिल्ला रही थी कि उनमें से किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
?Jihad-occupied Nuh (Mewat)
"Calls were made from Masjids that every child, woman, and man should come out with weapons." – Eyewitness
"Beh#enc#od tum nahi bachoge while shouting Allah-U-Akbar and Pakistan Jindabad" – Child eyewitness
हालाँकि, ऑपइंडिया एक ट्विटर यूजर द्वारा साझा की गई हिंदुस्तान-9 की रिपोर्ट में प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा किए गए दावों की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करती है।
हालाँकि, एक इमाम द्वारा मुस्लिमों को भड़काने के लिए मस्जिद के लाउडस्पीकरों का उपयोग करने की रिपोर्ट पहले की रिपोर्टों से बिल्कुल मेल खाती है, जिसमें कहा गया था कि मुस्लिमों ने जलाभिषेक यात्रा के दौरान हिन्दुओं पर हमले की योजना पहले ही बनाई थी और हमले के लिए पत्थरों और काँच की बोतलों को इकट्ठा करने के लिए कई व्हाट्सएप ग्रुप बनाए थे।
फिर भी, यह नया खुलासा लेफ्ट-लिबरल गैंग द्वारा नूहं हिंसा का दोष बिट्टू बजरंगी और मोनू मानेसर जैसे लोगों पर मढ़ने और उन्हें सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने के लिए दोषी ठहराने के प्रयासों के बिल्कुल विपरीत है। हाल के रहस्योद्घाटन में इमाम को कथित तौर पर गलत बयान देकर तनाव बढ़ाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि अब यह गिरोह इस नए खुलासे पर कैसे लीपापोती करते हैं।
बृजमण्डल शोभा यात्रा पर हमला
गौरतलब है कि 31 जुलाई को द्वारा आयोजित ‘बृज मंडल जलाभिषेक यात्रा’ के दौरान हरियाणा के नूहं जिले में हिंसा भड़क उठी। हरियाणा के मुस्लिम बहुल क्षेत्र नूहं में शोभायात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया था जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी।
मुरादाबाद में 13 अगस्त 1980 को ईद के दिन एक बड़ा दंगा हुआ था। इस दंगे के बारे में अब तक ये कहकर प्रचारित किया जाता रहा है कि इसके पीछे अप्रवासी हिंदू (विशेषत: पाकिस्तान से आए हिंदू) शामिल थे। इस दंगे के पीछे की वजह बताया जाता है कि ईदगाह में ‘नमाजियों के बीच सुअर’ छोड़े गए थे। इस दंगे में करीब 83 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 122 लोग घायल हो गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दंगे की जाँच रिपोर्ट विधानसभा में रखी तो इसका खुलासा हुआ।
हैरानी की बात ये है कि 1983 में बनाई गई जाँच कमेटी की रिपोर्ट को कभी न तो सार्वजनिक किया गया था, न ही सदन के पटल पर रखा गया था, क्योंकि इससे इस दंगे के असली ‘कर्ता-धर्ता’ लोगों की पहचान सार्वजनिक हो जाती। हालाँकि, 8 अगस्त 2023 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने न सिर्फ इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज एमपी सक्सेना की कमिटी वाली जाँच रिपोर्ट को विधानसभा पटल पर रखा, बल्कि दंगों के पीछे की साजिश की कॉन्ग्रेसी और मुस्लिम लीगी कनेक्शन को बेनकाब भी कर दिया।
यही नहीं, इसे हिंदू-मुस्लिम दंगा कहकर प्रचारित किया जाता रहा, जो कि पूरी तरह गलत है। जज एमपी सक्सेना ने अपनी जाँच रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि इन दंगों के लिए कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग ही जिम्मेदार थे, न कि हिंदू जनता। इस रिपोर्ट में कई अहम मुस्लिम नेताओं, इमाम, हिंदू नेताओं और उस समय मौजूद रहे पुलिस अधिकारियों के बयान दर्ज हैं, जो चीख-चीख कर ये कह रहे हैं कि इन दंगों के पीछे आरएसएस, बीजेपी और हिंदू नहीं, बल्कि मुस्लिम लीग और कॉन्ग्रेस के नेता जिम्मेदार थे। उस समय केंद्र और राज्य, दोनों में ही कॉन्ग्रेस की सरकार थी।
जस्टिस सक्सेना रिपोर्ट की कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है। 496 पन्नों की इस रिपोर्ट की अहम बातों को हम आपके सामने रख रहे हैं, जिसमें मुस्लिम लीग और कॉन्ग्रेस के नेताओं की प्लानिंग की जानकारी है।
कौन थे दंगों के पीछे के बड़े चेहरे?
मुरादाबाद में कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग दो बड़े खिलाड़ी थे। मुस्लिम लीग की जमात का नेतृत्व शमीम अहमद और हामिद हुसैन उर्फ अज्जी और उनके समर्थक कर रहे थे, जो उत्तर प्रदेश में मुस्लिम लीग को फिर से खड़ा करना चाहते थे। वहीं, कॉन्ग्रेसी हाफिज मोहम्मद सिद्दीकी की अगुवाई में काम कर रहे थे। इस रिपोर्ट में हिंदू पक्ष के 6 लोगों के लिखित बयान दर्ज हैं, जिसमें साफ-साफ लिखा है कि ये हिंसा अचानक नहीं, बल्कि पूर्व-नियोजित थी।
मुरादाबाद में भाजपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष हरिओम शर्मा का भी बयान इस रिपोर्ट में दर्ज है, जिन्होंने कहा था कि ये हिंसा बहुत बड़ी साजिश का महज एक हिस्सा भर ही थी। इस हिंसा के लिए मुस्लिम पक्ष को बाहरी देशों, इस्लामी संगठनों जैसे मुस्लिम लीग, जमीयत उलेमा-ए-हिंसा और तबलीगी-ए-इस्लाम ने फंडिंग की थी। इन्होंने नया इस्लामी राज्य बनाने के अभियान को गति देने के लिए यूपी के अलीगढ़ और मुरादाबाद को चुना था।
मुरादाबाद पीतल नगरी नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ पीतल से बने सामान अरब देशों को जाते थे, जिनकी नजर इस पूरे क्षेत्र को मुस्लिम बहुल क्षेत्र में परिवर्तित करना था। इसके लिए उन्होंने मुस्लिम लीग की सहायता से बिहार एवं पश्चिम बंगाल के मुस्लिमों को अवैध तरीके से अलीगढ़ से लेकर मुरादाबाद तक बसाया गया, ताकि उत्तर प्रदेश की जनसांख्यिकी को बदला जा सके। मुस्लिमों की बढ़ी आबादी की वजह से मुरादाबाद में लंबे समय तक सांप्रदायिक हिंसा होती रही।
हरिओम शर्मा ने अपने लिखित बयान में इस बात पर जोर डाला है कि कॉन्गेस और मुस्लिम लीग ने वोट बैंक और दबदबे की राजनीति के लिए कई गलत काम किए। इनमें 13 अगस्त 1980 के दंगे से तीन माह पहले से ही कई हिंसक वारदातों को अंजाम देने की साजिश भी शामिल थी।
दरअसल, रियाज नाम के एक मुस्लिम ने 1980 में एक दलित लड़की का अपहरण कर उसका गैंगरेप किया था। रियाज को मुस्लिम लीग नेता शमीम ने बचाने की कोशिश की। पुलिस ने बहुत कोशिश के बाद उस लड़की को बरामद कर उसे परिवार के हवाले कर दिया। पुलिस की इस कार्रवाई से मुस्लिम नाराज हो गए और दलितों के साथ उनकी तानातनी बढ़ गई।
इसी तरह, 31 मई को हुए चुनाव के दौरान हुई हिंसा में कॉन्ग्रेस के हाफिज मोहम्मद सिद्दीकी की तरफ से अप्रवासी मुस्लिमों और गुंडों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस दौरान सिद्दीकी के समर्थकों ने ‘आधी रोटी खाएँगे, पाकिस्तान बनाएँगे’ और ‘पंजाबियों को भगाएँगे, नया असम बनाएँगे’ जैसे नारे मुरादाबाद के टाउन हॉल के बाहर लगाए।
जस्टिस सक्सेना की रिपोर्ट का अंश
एक अन्य घटना में जावेद नाम के गुंडे ने जून 1980 में ठाकुर समाज के युवक से रोडरेज में झगड़ा किया था, जिसमें वो काफी चोटिल हो गया था। उसे पुलिस के लोग मौके से उठाकर थाने ले जा रहे थे, तभी उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। खुद को मुस्लिमों का सबसे बड़ा हमदर्द साबित करने के लिए मुस्लिम लीग के शमीम अहमद खान ने इसे पुलिस के हाथों हुई हत्या साबित करने की कोशिश की। रोक के बावजूद शमीम ने जावेद के शव के साथ कब्रिस्तान तक जुलूस निकाला।
इस जुलूस में कॉन्ग्रेस नेता मोहम्मद सिद्दीकी भी शामिल हुआ और भीड़ को भड़का कर पुलिस थाने पर हमला कराया, जिसमें पुलिसकर्मियों की पिटाई की गई। पूरे मुरादाबाद में ऐसे हमले हुए। एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (एडीएम) डीपी सिंह को पीट-पीट कर मार डाला गया, वो भी मुरादाबाद के एसपी और डीएम के सामने। शाम के समय इस्लामिक भीड़ ने गलशहीद पुलिस चौकी (आउटपोस्ट) पर हमला बोलकर 2 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी और हथियार लूट ले गए। थाने को भी आग लगा दिया। जिहादियों ने नारे लगाए कि वो ‘अधिकारियों को चैन से नहीं जीने देंगे’।
इसी कड़ी में अगला मामला उसी दलित समाज की बच्ची से जुड़ा था, जिसे मुस्लिमों ने अगवा कर रियाज ने गैंगरेप किया था। पुलिस पर हमले की घटनाओं के बाद बच्ची के परिजन डर गए और लड़की की शादी तय कर दी। 27 जुलाई को जब बारात इंदिरा चौक पहुँची तो मुस्लिम भीड़ ने उन पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान हथियारबंद मुस्लिमों की भीड़ ने दलितों के घरों में आग भी लगा दी। कई लोग घायल हो गए, जिसमें बनवारी नाम के युवक की मौत भी हो गई।
इस दौरान उन्होंने पुलिस की गाड़ी को भी आग लगाने की कोशिश की। इस मामले में दलित वाल्मीकि समुदाय ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन ताकतवर मुस्लिम दंगाईयों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में गवाह दयानंद गुप्ता ने बताया कि मुस्लिमों ने शहर भर में सुअरों को जहर देकर मारना शुरू कर दिया।
इन सब घटनाओं की वजह से मुरादाबाद में तनाव और गहरा गया। इसका फायदा मुस्लिम लीग और कॉन्ग्रेस के नेताओं ने 13 अगस्त 1980 को ईद के दिन उठाया। उन्होंने अपने समर्थकों के माध्यम से सुअरों वाली घटना को अंजाम दिया और पूरे मुरादाबाद को दंगों की चपेट में धकेल दिया।
भाजपा नेता हरिओम शर्मा ने उस दिन को याद करते हुए बयान में बताया है कि ईद के मौके पर ईदगाह के पास लगाए गए शिविरों में मुस्लिमों की भीड़ ने आग लगा दी। इसमें उन 2 शिविरों को छोड़ दिया गया, जिन्हें मुस्लिम लीग चला रही थी। उस दौरान मुस्लिम लीग के नेता अपने शिविरों (कैंप) के पास ही थे, जबकि उन्हें नमाज में शामिल होना था।
इस बात से साफ है कि वो दंगों के प्रति पहले से जानते थे और सारी साजिश उनकी रची हुई थी। हालाँकि, इस बात के कोई सबूत नहीं मिले कि ईदगाह में सुअर गए थे। इतना नहीं, इसके अलावा एक और अफवाह फैलाई गई कि पुलिस ने सैकड़ों मुस्लिमों को ईदगाह के अंदर मार दिया है।
जस्टिस सक्सेना की रिपोर्ट का अंश
इन अफवाहों की वजह से बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए मुस्लिमों ने ‘हिंदुओं और पुलिस वालों को मारने और उनके घरों को जलाने के लिए नारेबाजी’ की। उनके पास जो भी हथियार थे, उनसे भीड़ ने हिंदुओं पर हमले किए। इस दौरान सभी मुस्लिम नेता उस भीड़ के समर्थन में थे।
हरिओम शर्मा ने अपने बयान में कहा कि इन सब कामों के लिए मुस्लिम नेताओं को पाकिस्तान व अन्य बाहरी देशों से मदद मिली थी। खूब पैसे और हथियार इकट्ठे किए गए थे। बाद में दंगाइयों के घरों से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए, जो 13 अगस्त को ईदगाह के पास हुई हिंसा और उसके बाद की हिंसा में उपयोग किए गए थे।
आरोप-प्रत्यारोप का भी चला दौर
जब यह दंगा हुआ तो उस समय कॉन्ग्रेस के तत्कालीन नेता वीपी सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उस समय केंद्रीय मंत्री रहे योगेंद्र मकवाना इन दंगों का आरोप आरएसएस, जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी पर मढ़ते रहे। वहीं, इंदिरा गाँधी ने विदेशी शक्तियों (पाकिस्तान) और सांप्रदायिक पार्टियों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की।
उस समय टाइम्स ऑफ इंडिया के संपादक रहे गिरिलाल जैन ने उन दंगों के पीछे ‘असमाजिक तत्वों’ और मुस्लिमों को हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने इस बात के लिए आलोचना की कि मुस्लिम नेता असलियत बयान करने की जगह आरएसएस पर हिंसा का दोष मढ़ रहे हैं।
इस हिंसा के लिए वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मुस्लिम संगठनों को कटघरे में खड़ा किया। वहीं, पत्रकार और पूर्व सांसद एमजे अकबर ने अपनी किताब ‘Riot After Riot’ में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा है कि ‘ये हिंदू-मुस्लिम दंगा नहीं था, बल्कि कैल्कुलेटेड कोल्ड ब्लडेड नरसंहार था, जिसे कम्युनल पुलिस फोर्स ने अंजाम दिया था। अपनी संलिप्तता को छिपाने के लिए उन्होंने इसे हिंदू-मुस्लिम दंगे का नाम दिया।’
इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली के संवाददाता कृष्णा गाँधी ने इस नरसंहार के पीछे ‘मुस्लिम लीग के नेताओं द्वारा समर्थित अपराधियों के समूह’ को जिम्मेदार पाया। इन आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच इस दंगे की जाँच के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस एमपी सक्सेना को जाँच का जिम्मा सौंपा गया।
जस्टिस सक्सेना ने 496 पन्नों की अपनी जाँच रिपोर्ट मई 1983 में जमा की। इस रिपोर्ट में मुस्लिम लीग के नेताओं और वीपी सिंह को दंगों के लिए जिम्मेदार ठहराया। हालाँकि, पिछले 4 दशकों में इस रिपोर्ट की फाइलें एक जगह से दूसरी जगह भेजी जाती रहीं। ऐसा कम से कम 14 बार किया, लेकिन किसी भी सरकार ने इसे सार्वजनिक करने की जहमत नहीं उठाई।
योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य सरकार ने 43 साल पुरानी इस फाइल को खोलने का निश्चय किया। इस साल मई में राज्य की कैबिनेट ने जस्टिस एमपी सक्सेना कमीशन की रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश के सदन में रखने का फैसला लिया और 8 अगस्त को सदन में रखा गया।
इस रिपोर्ट ने उन सभी अवधारणाओं को खारिज कर दिया है, जिसमें मुरादाबाद के दंगों के पीछे गलत तरीके से राष्ट्रवादी शक्तियों को जिम्मेदार बताया जाता था। इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि मुरादाबाद के दंगों के पीछे सिर्फ और सिर्फ कॉन्ग्रेसी और मुस्लिम लीग जिम्मेदार थे।
टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने शुक्रवार (18 अगस्त) को ट्वीट कर अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी (GOP) के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी की तारीफ के पुल बाँधे। मस्क ने भारतीय अमेरिकी राजनेता रामास्वामी का दिल खोलकर समर्थन किया। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में कहा कि 2024 के राष्ट्रपति पद की दावेदारी के लिए रामास्वामी बहुत होनहार उम्मीदवार हैं।
अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा, “वह अपनी धारणाओं को साफ तौर पर जाहिर करते हैं।” मस्क की ओर से रामास्वामी के समर्थन में एक ही दिन में किया गया ये दूसरा ट्वीट है। अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल रामास्वामी का मुकाबला अपने प्रतिद्वंद्वी फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डेसेंटिस से है।
अब वहाँ पहली रिपब्लिकन प्राइमरी बहस में एक सप्ताह से भी कम समय बचा है। ऐसे में उन्होंने सार्वजनिक बैठकों और साक्षात्कारों के साथ अपना अभियान तेज कर दिया है। दरअसल रामास्वामी ने राजनीतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को आगे बढ़ाने की कॉर्पोरेट कोशिशों का विरोध कर अमेरिका के दक्षिणपंथी हलकों में अपना नाम कमाया है।
उन्होंने इस साल 21 फरवरी को फॉक्स न्यूज के एक शो में 2024 के राष्ट्रपति पद के लिए अपनी दावेदारी का ऐलान किया था। उस वक्त उन्होंने कहा था कि वे नए अमेरिका के ख्वाब को पूरा करने के लिए सांस्कृतिक आंदोलन शुरू करने के पक्षधर हैं।
रामास्वामी का कहना था कि वो मानते हैं कि अगर उनके पास एक दूसरे को बाँधे रखने के लिए कुछ बड़ा नहीं है तो विविधता का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने उच्च शिक्षा को मजबूत करने और चीन पर अमेरिका की आर्थिक निर्भरता को कम करने की बात भी कही।
महज 38 साल के मल्टी मिलेनियर बायोटेक कारोबारी अपनी उत्तेजक बयानबाजी से रिपब्लिकन पार्टी में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अपने फेसबुक अकाउंट के बायो में भी उन्होंने ‘अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार, कठोर सत्य बोलना, साहस संक्रामक है’ लिखकर अपने इरादे जाहिर किए हैं।
फोर्ब्स ने अप्रैल 2023 में उनकी कुल संपत्ति $630 मिलियन आँकी थी। उन्होंने ये संपत्ति आमदनी बायोटेक और वित्तीय कारोबार से अर्जित की है। यूँ ही एलन मस्क उनके मुरीद नहीं हैं। ‘वोक इंक’ किताब के इस लेखक की खासियतों की फेहरिस्त लंबी हैं। कारोबार से राजनीति में कदम रखने वाले विवेक गणपति रामास्वामी भारत के साथ भी गहराई से जुड़े हैं।
आप्रवासी भारतीय पेरेंट्स से मिली जीवन मूल्यों की शिक्षा
विवेक गणपति रामास्वामी का जन्म संयुक्त राज्य अमेरिका के सिनसिनाटी, ओहायो में भारतीय आप्रवासी माता-पिता के घर 9 अगस्त 1985 को हुआ था। वहीं वो पले-बढ़ें। उनके पिता वीजी रामास्वामी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कालीकट से ग्रेजुएट थे। वो जनरल इलेक्ट्रिक के लिए एक इंजीनियर और पेटेंट वकील के तौर पर काम करते थे।
उनकी माँ गीता रामास्वामी, मैसूर मेडिकल कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट से ग्रेजुएट थीं। वो बजुर्गों की मनोचिकित्सक थीं। मूल रूप से उनका परिवार केरल से वास्ता रखता है। उनके माता-पिता केरल के पलक्कड़ जिले से आकर अमेरिका में बस गए थे। केरल के वडक्कनचेरी शहर में उनका पैतृक घर था।
बड़े होने के दौरान रामास्वामी अक्सर अपने परिवार के साथ डेटन, ओहियो के स्थानीय हिंदू मंदिर में जाया करते थे। उनके पियानो टीचर पारंपरिक ईसाई थे। वे ही उन्हें प्राइमरी से हाईस्कूल तक निजी तौर पर पढ़ाया था। इससे रामास्वामी के सामाजिक विचारों पर खासा असर पड़ा था। उनकी गर्मियों की छुट्टियाँ अक्सर माता-पिता के साथ भारत की यात्रा में बीतती थीं और वो अपनी इस भारतीय पहचान को बहुत गर्व से स्वीकार करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रामास्वामी ने जून में आयोवा में कहा था कि वह भारतीय अप्रवासियों की संतान हैं और उन्हें ‘विशेषाधिकार प्राप्त’ है। अपनी इस बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने ये भी कहा था कि उनके माता-पिता ऐसे हैं, जिनका ध्यान शिक्षा, उपलब्धि और जीवन के वास्तविक मूल्यों पर था।
इसी परवरिश की वजह से उन्हें हार्वर्ड और येल जैसे विश्वविद्यालयों में जाने और उनके वैज्ञानिक बनने की नींव पड़ी थी। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से जीव विज्ञान में स्नातक की डिग्री ली और बाद में हेज फंड की दुनिया में अपना नाम कमाया। उन्होंने येल लॉ स्कूल से डॉक्टर ऑफ लॉ की डिग्री ली।
बायोटेक कंपनी की स्थापना की
विवेक रामास्वामी ने साल 2014 में बायोटेक कंपनी रोइवंत साइंसेज की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने बायोटेक में निवेश किया और उच्च जोखिम वाली प्रिस्क्रिप्शन दवाओं को विकसित करने के विचार से प्रभावित हुए। उन्होंने अपना सारा ध्यान फार्मास्युटिकल दिग्गजों के रखे पेटेंट को खंगालने, व्यावसायिक वजहों से छोड़ दी गई दवाओं की खोज करने में लगा दिया।
न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, उन्होंने डेवनपोर्ट, आयोवा में एक निर्माण फर्म की सभा में कहा था, “मैंने कई दवाएँ विकसित कीं। इनमें से एक पर मुझे सबसे अधिक गर्व है, जो बच्चों के लिए एक थेरेपी है। हर साल 40 बच्चे इस आनुवंशिक बीमारी के साथ पैदा होते हैं और इलाज के बगैर 3 साल तक की उम्र में आते-आते मर जाते हैं।”
उन्होंने 2021 में रोइवंत के सीईओ का पद छोड़ दिया। हालाँकि, साल 2023 तक वो इसके अध्यक्ष बने रहे। वो 2022 में स्ट्राइव एसेट मैनेजमेंट के को-फाउंडर रहे। यह एक निवेश फर्म है जो राजनीतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों को आगे बढ़ाने की कॉर्पोरेट कोशिशों का विरोध करती है।
राजनीतिक दृष्टिकोण
रिपब्लिकन नेता रामास्वामी ने ये संकेत दिया है कि वो अपने चुनावी अभियान में नस्लवाद और कट्टरता के खिलाफ जोर देंगे। उन्होंने कहा था, “अमेरिका एक व्यवस्थित नस्लवादी राष्ट्र है। यदि आप काले हैं तो आप स्वाभाविक रूप से वंचित हैं। यदि आप श्वेत हैं तो आप स्वाभाविक रूप से विशेषाधिकार प्राप्त हैं।” उन्होंने कहा कि अमेरिका पीड़ितों से भरा पड़ा है।
उन्होंने अपने विपक्षी दल डेमोक्रेटिक पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वे मानते हैं कि सरकार को कारोबारों का नियंत्रित करने और अर्थव्यवस्था के प्रबंधन में एक छोटी भूमिका निभानी चाहिए। वे आम तौर पर आर्थिक उदारीकरण का समर्थन करते हैं और गरीबों की मदद के लिए आमदनी को फिर से बाँटने के कल्याणकारी कार्यक्रमों का विरोध करते हैं।
रिपब्लिकन पार्टी के इतिहास में अब तक के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामास्वामी ने कहा, “हम राष्ट्रीय पहचान के संकट के बीच में हैं। विश्वास, देशभक्ति और कड़ी मेहनत गायब हो गई है, केवल नए धर्मनिरपेक्षवाद जैसे कि कोविडवाद, जलवायुवाद और लैंगिक विचारधारा आदि अपना प्रभाव दिखा रही हैं।”
एलन ने की एक दिन में दो बार तारीफ
राजनीतिक टिप्पणीकार टकर कार्लसन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर रामास्वामी का पूरा इंटरव्यू शेयर किया और कहा, “विवेक रामास्वामी अब तक के सबसे कम उम्र के रिपब्लिकन राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं। वह सुनने लायक हैं।”
इसी पोस्ट पर एक्स के मालिक एलन मस्क ने कहा, “वह बहुत ही होनहार उम्मीदवार हैं।” इसे लिखे जाने तक मस्क की पोस्ट को 16 मिलियन से अधिक इंप्रेशन मिले हैं। एलन ने अपने एक ही दिन में दूसरे ट्वीट में अप्रत्यक्ष तौर से रामास्वामी के विचारों का समर्थन किया है। इसमें उन्होंने कहा कि ‘वह अपने विचारों को साफगोई से रखते हैं’।
रामास्वामी ने चीन को अमेरिका के सामने मौजूद ‘सबसे बड़ा खतरा’ बताया है और कहा है कि अगर वह सत्ता में आए तो बीजिंग के साथ ‘पूरी तरह से रिश्ते खत्म कर’ करेंगे। रिपब्लिकन नेता ने यह भी कहा है कि उनका मकसद प्रशांत क्षेत्र में व्यापार को पूरी तरह से फिर से शुरू करना और भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के साथ व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करना होगा।
इससे पहले, फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में रामास्वामी ने कहा था, “शी जिनपिंग तानाशाह हैं और चीन संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा है। मुझे लगता है कि मैं चीन से आर्थिक स्वतंत्रता के एलान के लिए साफ रास्ता अपनाने वाला सबसे स्पष्ट उम्मीदवार हूँ। यह हमारी नीति का पहला कदम होगा।”
बताते चलें कि एलन मस्क ने जून में चीन की यात्रा की थी और अपने व्यवसाय के विस्तार के बारे में कहा था। इसके बाद विवेक रामास्वामी ने एलन मस्क की आलोचना की थी। तब उन्होंने कहा था कि चीन टीम कुक जैसे लोगों का इस्तेमाल कठपुतलियों की तरह कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में एक मौलाना ने 15 अगस्त के दिन मस्जिद में माइक से एक विवादित बयान दिया, जो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में मौलाना आजादी को लेकर आपत्तिजनक बातें कहता हुआ दिख रहा है। इसके साथ ही वह मुस्लिमों के लिए मजहबी आजादी की माँग कर रहा है।
मौलाना ने कहा, “ऐसी आजादी पर हम कल भी लात मारते थे, आज भी लात मारते हैं।” मौलाना का नाम अब्दुर्रहमान जामई बताया जा रहा है। वहीं, मौलाना के इस विवादित बयान का वीडियो सामने आने के बाद हिन्दू संगठनों में रोष है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से आरोपित मौलाना के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।
हरदोई में मौलाना अब्दुर्रहमान जामई का विवादित वीडियो वायरल,15 अगस्त पर दी गई जहरीली तकरीर,गोपामाऊ की लाल पीर मस्जिद के मदरसे में माइक पर पढ़ा विवादित बयान,मौलाना ने कहा "ऐसी आजादी पर हम कल भी लात मारते थे आज भी लात मारते हैंASP ने कहा मामले में जांच कर कार्यवाई हो रही@Uppolicepic.twitter.com/GjA69bwJtd
मौलाना अब्दुर्रहमान जामई ने अपने विवादित बयान में कहा, “इस्लाम के जनाजे निकाले जा रहे हैं। कुर्बानी पर पाबंदी लगाई जा रही है। कब्रिस्तान के ऊपर कब्जा किया जा रहा है। लाउडस्पीकर पर अजान पढ़ने पर मुकदमा हो रहा है। कुरान को बदलने का प्रयास किया जा रहा है। यह कैसी जम्हूरियत है, यह कैसी आजादी है।”
मौलाना अब्दुर्रहमान यहीं नहीं रुका। उसने आगे कहा, “यह तो मुसलमानों के मजहबी मामलों में घुसपैठ है। अगर आजादी इसी का नाम है तो हम ऐसी आजादी के तलबगार नहीं हैं। ऐसी आजादी पर हम कल भी लात मारते थे, आज भी लात मारते हैं।”
#Hardoi स्वतंत्रता दिवस पर मदरसे में मौलाना अब्दुर्रहमान जामई द्वारा दी गई #HateSpeech वायरल, आजादी को लात मारने की कही बात, मुसलमान को भड़काने की पूरी तरह की कोशिश, पुलिस ने #CrPC के तहत की कार्रवाई, हरदोई के कस्बा गोपामऊ के लालपीर मस्जिद के मदरसे का मामल @hardoipolicepic.twitter.com/c08fvIVFYN
वायरल वीडियो में अब्दुर्रहमान जामई यह भी कहता दिख रहा है, “हमें मजहबी आजादी चाहिए। हमें कुरान की आजादी चाहिए। हमें इबादत और गाँव की हिफाजत चाहिए। हमें इज्जत और आबरू की हिफाजत चाहिए। हमें इस्लाम की हिफाजत चाहिए। इस जम्हूरी मुल्क में किसी के मामलात में घुसपैठ हो रही है। आज हिंदुस्तान में यही हो रहा है। “
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मौलाना ने यह विवादित तकरीर गोपामऊ की लाल पीर मस्जिद के अंदर स्थित मदरसे में 15 अगस्त को दिया था। वहीं, हिन्दू संगठन वीडियो सामने आने के बाद से भड़के हुए हैं। हिन्दू संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जिला प्रशासन ने मौलाना के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की तो वे लोग आंदोलन करेंगे।
गौरतलब है कि हरदोई पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान में लेते हुए मामले की जाँच शुरू कर दी है। हरदोई के अपर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश सिंह ने कहा कि मौलाना अब्दुर्रहमान जामई का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस पर तथ्यों की जाँच करके कार्रवाई की जा रही है।
भारत तकनीक की दुनिया में तेजी से आत्मनिर्भरता की तरफ कदम बढ़ा रहा है। इसका उदाहरण देश का 3D प्रिंटिंग तकनीक का इस्तेमाल कर बनाया गया पहला 3D पोस्ट ऑफिस है। बेंगलुरु स्थित इस डाकघर को 3डी प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस नाम दिया गया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार (18 अगस्त 2023) को किया।
यह डाकघर बेंगलुरु के कैंब्रिज लेआउट में 1,100 वर्ग फुट के क्षेत्र में फैला हुआ है। इसे 3डी कंक्रीट प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके बनाया गया है, जिसमें त्रि-आयामी संरचनाएँ बनाने के लिए कंप्यूटर के जरिए डिजाइन का उपयोग करता है।
इसे सिर्फ 23 लाख रुपए में बनाया गया है, जो पारंपरिक डाकघर भवन की लागत से लगभग 30-40% कम है। यह अधिक टिकाऊ और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति प्रतिरोधी भी है। इसके साथ ही देश में 3D प्रिंटिंग निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है।
IT मंत्री ने शेयर किया 3डी पोस्ट ऑफिस का वीडियो
केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस 3डी पोस्ट ऑफिस का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि ये आत्मनिर्भर भारत की ताकत है कि भारत का पहला 3डी प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस तैयार है। इसका नाम कैंब्रिज लेआउट पोस्ट ऑफिस रखा गया है।
The spirit of Aatmanirbhar Bharat! ??India’s first 3D printed Post Office.
अश्विनी वैष्णव ने इसके उद्घाटन के समय कहा, “बेंगलुरु शहर हमेशा से भारत की नई तस्वीर पेश करता रहा है। ये 3डी डाकघर आज के भारत की भावना है। विकास की भावना… यही वो भावना है, जिसके साथ भारत प्रगति कर रहा है। अपनी तकनीक को विकसित करने और उस पर विश्वास करने की भावना ही असली भावना है। ये सब तभी संभव हो पाया है, जब देश का नेतृत्व निर्णायक व्यक्ति (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) के हाथों में है, जिन्हें अपने लोगों पर भरोसा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया नवाचार और प्रगति का प्रमाण
इस पोस्ट ऑफिस की तस्वीरें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी साझा की है। उन्होंने लिखा, “बेंगलुरु में भारत का पहला 3डी प्रिंटेड पोस्ट ऑफिस देखकर हर भारतीय को गर्व होगा। ये हमारे देश के नवाचार और प्रगति का एक प्रमाण है। ये आत्मनिर्भर भारत की भावना का भी प्रतीक है। उन सभी लोगों को बधाई जिन्होंने डाकघर को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की है।”
Every Indian would be proud to see India's first 3D printed Post Office at Cambridge Layout, Bengaluru. A testament to our nation's innovation and progress, it also embodies the spirit of a self-reliant India. Compliments to those who have worked hard in ensuring the Post… pic.twitter.com/Y4TrW4nEhZ
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पोस्ट ऑफिस बेंगलुरू के कैम्ब्रिज लेआउट में स्थित है। इस पर 21 मार्च 2023 से काम शुरू हुआ था और 3 मई को काम पूरा भी कर लिया गया। इसे बनाने में सिर्फ 44 दिन का समय लगा। इसका डिजाइन आईआईटी मद्रास ने तैयार किया है। वहीं, लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने 3डी कंक्रीट पेंटिंग तकनीकी का इस्तेमाल कर इसे तैयार किया है।
लार्सन एंड टुब्रो ने इससे पहले भी 3डी बिल्डिंग बनाए हैं, जिसमें तमिलनाडु के कांचीपुरम में भारत की पहली 3डी-प्रिंटेड इमारत भी शामिल है। इसमें स्वदेशी रूप से उपलब्ध नियमित निर्माण सामग्री का उपयोग करके एक अद्वितीय इन-हाउस विकसित कंक्रीट मिश्रण शामिल था। नवंबर 2019 में एलएंडटी टीम ने 240 वर्ग फुट 1 बीएचके को 3डी-प्रिंट किया था।
उत्तर प्रदेश के एटा स्थित एक इंटर कॉलेज में छात्रों ने जमकर बवाल काटा है। छात्रों का आरोप है कि एक शिक्षक उन्हें कलावा पहनने और तिलक लगाने से रोकता है। छात्रों के बवाल के बाद स्कूल प्रशासन को झुकने पर मजबूर होना पड़ा है और ऐसा करने वाले शिक्षक को लिखित में माफी माँगनी पड़ी है।
मामला एटा के राजा का रामपुर थाना इलाके का है, जहाँ एक निजी स्कूल का संचालन होता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्कूल का नाम आरबीएल आर्या इंटर कॉलेज है। इसके प्रधानाचार्य और शिक्षक पर आरोप है कि वो छात्रों को कलावा पहनने से मना करते हैं। टीका लगाने पर भी टीका-टिप्पणी करते हैं और बच्चों को धार्मिक नारे लगाने से रोकते हैं। प्रधानाचार्य का नाम मनोज और अध्यापक का नाम प्रवीण कुमार बताया जा रहा है।
स्कूल से निकालने की धमकी
छात्रों का कहना है कि उन पर दबाव बनाया जाता है कि वो ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ का नारा न लगाएँ, वर्ना उन्हें स्कूल से निकाल दिया जाएगा। यही नहीं, बच्चों ने जब शिक्षक प्रवीण कुमार की शिकायत प्रधानाचार्य से की तो उन्होंने भी अध्यापक प्रवीण का पक्ष लिया। प्रधानाचार्य ने छात्रों से कहा कि वो ये बात बाहर न बताएँ, वर्ना रेस्टिकेट कर दिए जाएँगे।
अध्यापक ने माँगी माफी
इस पूरे मामले को लेकर छात्रों ने थाने का घेराव कर दिया। इसके बाद पुलिस ने उनकी बातें सुनीं। पुलिस जब स्कूल पहुँची तो आरोपित प्रधानाचार्य और शिक्षक दोनों ही नदारद मिले। स्कूल के प्रबंधक ने बताया है कि आरोपित शिक्षक ने लिखित में माफी माँगी है और इस बात को आगे न बढ़ाने का अनुरोध किया है।
प्रकरण में जांच कर आवश्यक कार्यवाही करने हेतु जिला विद्यालय निरीक्षक को निर्देशित कर दिया गया है।
इस मामले में अलीगंज के सीओ सुधांशु शेखर ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि अभी लिखित में शिकायत नहीं मिली है, लेकिन ऐसी कोई शिकायत आएगी तो हम कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी।
दिल्ली में I. N. D.I. A. गठबंधन में मची रार खत्म होते नहीं दिख रही है। अलका लांबा के बयान से कॉन्ग्रेस के पल्ला झाड़ने के बाद अब पार्टी के पूर्व सांसद संदीप दीक्षित ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर हमला किया है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे ने अरविंद केजरीवाल घटिया राजनीति करने वाला करार दिया है। साथ ही कहा है कि AAP विश्वास के लायक नहीं है।
ANI से बात करते हुए संदीप दीक्षित ने कहा है, “हमने यह नहीं कहा था कि सातों सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। आम आदमी पार्टी नासमझ है तो मैं क्या करूँ? यदि वे भाषा नहीं समझते। हिंदी समझ में नहीं आती तो क्या करूँ मैं? हमने यह कहा है कि सभी 7 सीट पर तैयारी करेंगे। तैयारी तो हर पार्टी करेगी। फिर गठबंधन होता है नहीं होता है, उस हिसाब से तय करेंगे कौन किस सीट पर लड़ेगा।”
#WATCH | Delhi: "We did not say that we will fight on all seven seats. We said we will prepare for the seven seats. Every party prepares irrespective of a coalition. When a coalition is formed then it will be decided who will contest on which seat. Our meeting was to strengthen… pic.twitter.com/dTQnr2g7p6
गौरतलब है कि अलका लांबा ने कहा था कि कॉन्ग्रेस ने दिल्ली की सभी सात लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इसके बाद आप ने कहा था कि फिर I. N. D.I. A. गठबंधन की अगली बैठक में जाने का कोई मतलब नहीं है। इस पर जब संदीप दीक्षित से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, “वे शामिल हों न हों। मैं बार-बार कहता हूँ वे निर्रथक हैं। उनका कोई अर्थ नहीं है। दिल्ली में 6-7 सीट हैं, जहाँ वे प्रभाव रखते हैं। 542 सीटों में वो 1% सीट में प्रभाव करते हैं। अब वो आएँ या न आएँ वो जानें।”
उन्होंने आगे कहा, “वैसे भी भी हम लोग तो यह कह रहे थे कि एक बार जब लोकसभा-राज्यसभा में वोटिंग हो जाएगी तो आम आदमी पार्टी बाहर भागने का रास्ता ढूँढ़ेगी। आपको याद होगा अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि AAP गठबंधन से हट जाएगी। इसलिए हो सकता है केजरीवाल उनकी सुन रहे हों। उन्हें अक्सर उन्हीं से तो डायरेक्शन मिलता है। हम लोग जो बार-बार कह रहे हैं कि यह बीजेपी की B पार्टी है। यह केजरीवाल ने खुद ही सिद्ध कर दिया।”
संदीप दीक्षित ने AAP की राजनीति को घटिया करार देते हुए कहा है कि कॉन्ग्रेस का स्टैंड यह है कि इस पार्टी पर भरोसा नहीं कर सकते। इसकी जो राजनीति है वो बहुत गलत और घटिया है। उसमें भ्रष्टाचार है, शिष्टाचार कहीं नहीं है। उनकी झूठ बोलने की आदत है। उसमें राष्ट्रवाद को गलत तरीके से इस्तेमाल करने की आदत है। देश का विकास करने की जगह मुफ्त करने की राजनीति करना दिखाई देता है। चोरी-चकारी भरी हुई है। केजरीवाल ऐसी राजनीति करते हैं, जिसका कोई साथ नहीं देना चाहता।
दरअसल, कॉन्ग्रेस प्रवक्ता प्रियंका लांबा ने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी, वर्तमान अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व अन्य नेताओं के साथ हुई बैठक के बाद कहा था कि कॉन्ग्रेस दिल्ली की सभी 7 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अलका लांबा के इस बयान के बाद आम आदमी पार्टी नेता प्रियंका कक्कड़ ने I.N.D.I.A. गठबंधन की अगली बैठक में जाना समय की बर्बादी करार दिया था। इसके बाद कॉन्ग्रेस डैमेज कंट्रोल में जुट गई थी। दिल्ली कॉन्ग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया ने अलका लांबा के बयान का खण्डन कर दिया था। उन्होंने कहा था कि लांबा अपरिपक्व प्रवक्ता हैं और ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
हरियाणा के पलवल के मुंडकटी थाना अंतर्गत गाँव सराय में एक हिंदू परिवार पर जानलेवा हमला किया गया है। इसके साथ ही उसे गाँव छोड़ने की भी धमकी दी गई है। मुस्लिम बहुल इस गाँव में रहने वाले इस हिंदू परिवार के घर कई आरोपित लाठी, डंडा, फरसा और देशी कट्टा लेकर घुस गए और वारदात को अंजाम दिया। हिंदू परिवार ने रोहिंग्या विरोधी मैसेज शेयर किया था, जिसके कारण उन्हें निशाना बनाया गया।
दरअसल, रोहिंग्या घुसपैठियों की नागरिकता रोकने के लिए हिन्दू परिवार के एक सदस्य ने फेसबुक पर पोस्ट डाला था। इसके बाद हिंदू परिवार से मारपीट की गई और गाँव छोड़ने के लिए कहा गया। पुलिस शिकायत के अनुसार, गाँव के दिलशाद, इरशाद, जहीर और कई अन्य लोग लाठी-डंडों, फरसा और कट्टे से लैस होकर दीपक के घर में जबरन घुस गए और तोड़फोड़ करने लगे।
वहीं, इस मामले की जानकारी देते हुए मुंडकटी थाना प्रभारी सचिन कुमार ने बताया कि सराय गाँव निवासी दीपक ने 15 अगस्त 2023 को एक घटना के बारे में शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में मुंडकटी थाना पुलिस ने आर्म्स एक्ट, मारपीट, जान से मारने की धमकी समेत कई अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
शिकायत के अनुसार, कमजोर आर्थिक स्थिति और गाँव में हिंदू परिवारों की संख्या कम होने के कारण आरोपितों ने परिवार पर कई बार हमले किए। इन हमलों से पीड़ित हिन्दू परिवार को डरा हुआ है। शिकायतकर्ता पीड़ित ने कहा कि परिवार पर पहले भी हमले हो चुके हैं और विवादों को सुलझाने के उनके सभी प्रयास बेकार गए हैं।
थाना प्रभारी सचिन कुमार ने कहा कि घटना के संबंध में जहीर, दिलशाद और इरशाद के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वहीं संदिग्धों को पकड़ने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं और शीघ्र ही उनकी गिरफ्तारी की उम्मीद है।
गौरतलब है कि यह घटना भी हरियाणा के नूहं में जलाभिषेक यात्रा पर मुस्लिमों के हमले की तरह ही है। नूहं भी एक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जो बिगड़ती कानून व्यवस्था, गाय तस्करी और विभिन्न सामाजिक बुराइयों के लिए कुख्यात है। नूहं में ही 31 जुलाई को शोभायात्रा पर कट्टरपंथी मुस्लिम भीड़ द्वारा हमला किया गया था, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई थी।
पाकिस्तान पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने एक इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तान के खिलाड़ी भारत के पैसे से पलते हैं। अपनी बेबाकी के लिए जाने जाने वाले शोएब अख्तर ने कहा कि इंडिया के पैसे से ही पाकिस्तान के घरेलू क्रिकेटर्स को फीस मिल पाती है।
शोएब अख्तर को क्रिकेट से संन्यास लिए लंबा वक्त हो चुका है, लेकिन वो अक्सर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं। भारतीय खेल पत्रकार बोरिआ मजूमदार को दिए करीब 25 मिनट के इंटरव्यू में उन्होंने यह बात कही। BCCI (क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ऑफ़ इंडिया) के पैसे से पाकिस्तानी क्रिकेटरों का खर्चा चलता है। इसे इंटरव्यू में 7 मिनट 30 सेकंड पर सुना जा सकता है।
EXCLUSIVE: Full Interview ?#ShoaibAkhtar, former Pakistan pace ace, features in the first of the interviews lined up in this special Asia Cup and World Cup series of #BackstageWithBoria.
शोएब ने कहा कि बीसीसीआई के जरिए आईसीसी के पास आता और ICC (इंटरनेशनल क्रिकेट कॉउंसिल) रेवेन्यू शेयरिंग के तहत पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भेजती है। उसी पैसे के दम पर ही पाकिस्तान में घरेलू क्रिकेटर्स को मैच की फीस मिल पाती है।
EXCLUSIVE and EXPLOSIVE- @shoaib100mph “Let's face the truth. India generates maximum money for cricket and ICC actually uses the money, which comes from India. It is that money, which is then given to us in Pakistan, which helps fund our domestic cricket.”
शोएब ने कहा, “मैं हमेशा अपने मन की बात कहता आया हूँ और आप इसे जानते हैं। मैं पहले दिन से कह रहा हूँ कि पाकिस्तानी टीम को भारत का दौरा करना चाहिए और जहाँ भी कहा जाए वहाँ खेलना चाहिए। हेडलाइन ये नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तानी टीम भारत आई, बल्कि ये कि पाकिस्तान भारत आया।”
उन्होंने कहा, “भारत विश्व क्रिकेट के लिए सबसे अधिक पैसा देता है और आईसीसी वास्तव में उस पैसे का उपयोग करता है, जो भारत से आता है। यह वह पैसा है, जो हमें पाकिस्तान में दिया जाता है। इससे हमारे घरेलू क्रिकेट को फंड करने में मदद मिलती है। तो एक तरह से यह भारतीय पैसा है, जो हमारे क्रिकेट की मदद कर रहा है।”
शोएब अख्तर ने भारत-पाकिस्तान मुकाबले पर बोलते हुए कहा, “वर्ल्ड कप 2023 सबसे अलग और रोमांचक होगा, क्योंकि मुझे अब 50 ओवर क्रिकेट का भविष्य नजर नहीं आ रहा है। मैं चाहता हूँ कि भारत इस विश्व कप से खूब पैसे बनाए।”
शोएब अख्तर ने एशिया कप में भारत-पाकिस्तान मैच को लेकर कहा, “इस सीरीज में भी एक बार फिर दबाव टीम इंडिया पर ही होगा, क्योंकि भारतीय मीडिया की वजह से टीम इंडिया पर काफी दबाव बनता है। हर बार ऐसा ही होता है। भारत पाकिस्तान से इसलिए नहीं हारता कि टैलेंटेड खिलाड़ी उसके पास नहीं है, बल्कि मीडिया का बहुत दबाव रहता है।”
उन्होंने कहा, “पिछली बार भी एशिया कप के दौरान भारतीय मीडिया ने टीम इंडिया पर काफी दबाव बना दिया था। पूरे स्टेडियम को नीले रंग में रंग दिया गया था। ये कहा जा रहा था कि टीम इंडिया पाकिस्तान को आसानी से हरा देगी। इस वजह से हमारे ऊपर प्रदर्शन का कोई दबाव नहीं था। इसका नतीजा ये हुआ कि भारत दबाव में बिखर गया और हम खुलकर खेले और मैच जीत गए थे।”
वर्ल्ड कप 2023 से खूब पैसा कमाएगी BCCI
वहीं, 2023 वर्ल्ड कप पर बात करते हुए शोएब अख्तर ने कहा, “यह वर्ल्ड कप सुपरहिट होने वाला है। बीसीसीआई इस वर्ल्ड कप से भी काफी पैसा कमाएगी। इससे बीसीसीआई की आर्थिक स्थिति और ज्यादा मजबूत हो जाएगी।”
बता दें इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन भारत में होगा। यह आयोजन 5 अक्टूबर 2023 से होने वाला है। इस टूर्नामेंट में भारत-पाकिस्तान की टक्कर 14 अक्टूबर को होगी। दोनों टीमें सेमीफाइनल या फाइनल तक पहुँची तो वहाँ भी भारत-पाकिस्तान की टक्कर देखने को मिल सकती है।