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20 साल बाद मणिपुर में दिखाई गई हिंदी फिल्म: सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी भी देखेंगे लोग, जनजातीय संगठन करा रहा है स्क्रीनिंग

देश में आजादी की 77वीं वर्षगाँठ पर हिंसा प्रभावित देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से सकारात्मक खबर आई है। यहाँ मंगलवार (15 अगस्त, 2023) की शाम 20 साल बाद कोई हिंदी फिल्म दिखाई जा रही है। ये फिल्म हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित चुराचाँदपुर जिले के रेंगकाई ( (लाम्का) एचएसए परिसर में दिखाई जा रही है।

हालाँकि, इसमें फिल्म के नाम का खुलासा नहीं किया गया। हिंदी फिल्म दिखाने का ये फैसला राज्य के आदिवासी छात्रों के संगठन ‘हमार स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एचएसए)’ का है। एचएसए ने सोमवार (14 अगस्त) को आधी रात के बाद स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी फिल्म दिखाने का बयान जारी किया। हालाँकि, संगठन ने अपने बयान में कुछ आपत्तिजनक बातें भी कही हैं।

‘आज़ादी’ की ऐलान करेंगे’

‘नॉर्थईस्ट नाउ न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एचएएस ने एक बयान में कहा कि संगठन देश के 77वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के उपलक्ष्य में मंगलवार (15 अगस्त) को मणिपुर में सार्वजनिक तौर से एक हिंदी फिल्म प्रदर्शित किया। कुल मिलाकर, चार हिंदी फिल्में प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनमें ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ और शाहरुख खान अभिनीत ‘कुछ कुछ होता है’ शामिल हैं।

बयान में ये भी कहा गया है, “हम उन राष्ट्र-विरोधी आतंकवादी समूहों से अपनी ‘आज़ादी’ का ऐलान करेंगे जिन्होंने स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार की घोषणा की है।” एचएसए के बयान में कहा गया है, “हमारा स्टूडेंट्स एसोसिएशन तुइथाफाई जेएचक्यू देश के स्वतंत्रता दिवस को चिह्नित करने के लिए सार्वजनिक तौर से हिंदी फिल्में प्रदर्शित करेगा। यह मैतेई आतंकवादी समूहों और मैतेई समर्थक मणिपुर राज्य सरकार के प्रति हमारी अवज्ञा और विरोध को दर्शाने के लिए है, जिन्होंने दशकों से जनजातीय समाज को अपने अधीन कर रखा है।”

बयान में आगे कहा गया है, “कानून और व्यवस्था बहाल करने में भारतीय सेना की कोशिशों को समर्थन देने के लिए ग्रामीणों को ‘सबक’ सिखाने के लिए 2006 में मैतेई आतंकवादी समूह यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट/कंगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी के कैडरों ने 20 से अधिक हमार महिलाओं, कुछ नाबालिगों के साथ बलात्कार किया गया था। अब, 2023 में, हम एक प्रमुख समुदाय से आने वाले मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मणिपुर राज्य-प्रायोजित हिंसा का सामना कर रहे हैं। स्वतंत्रता और न्याय के लिए हमारी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लेने के लिए हमारे साथ शामिल हों। यह उल्लेख किया जा सकता है कि मणिपुर में 20 साल से अधिक वक्त से हिंदी फिल्मों पर प्रतिबंध लगा हुआ है।”

2000 में लगा था हिंदी फिल्में दिखाने पर प्रतिबंध

मणिपुर में सक्रिय विभिन्न उग्रवादी संगठनों ने लोगों को मुख्य भूमि भारत से अलग-थलग करने की कोशिशों में राज्य में एक हिंदी फिल्म की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदी फिल्मों की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध सितंबर 2000 में विद्रोही संगठन रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट ने लगाया था।

उग्रवादी संगठनों की धमकी के डर से राज्य के सिनेमाघरों में ज्यादातर अंग्रेजी, कोरियाई और मणिपुरी फिल्में दिखाई जाती हैं। मणिपुर की राजधानी इंफाल में 1998 में दिखाई गई आखिरी हिंदी फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ थी। गौरतलब है कि मणिपुर दो दशकों से अधिक समय से उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित है। दो दशकों से अधिक समय में पहली बार, स्वतंत्रता दिवस पर जातीय संघर्ष प्रभावित मणिपुर में एक हिंदी फिल्म दिखाई जा रही है। 

एचएसए का कहना है कि मणिपुर में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की गई आखिरी हिंदी फिल्म 1998 में ‘कुछ कुछ होता है’ थी। राज्य सरकार ने इससे पहले इम्फाल में सीमित दर्शकों के लिए ‘कश्मीर फाइल्स’ और ‘रॉकेटरी’ की स्क्रीनिंग की थी। गौरतलब है कि मणिपुर दो दशकों से अधिक समय से उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित है। दो दशकों से अधिक समय में पहली बार, स्वतंत्रता दिवस पर जातीय संघर्ष प्रभावित मणिपुर में एक हिंदी फिल्म दिखाई जा रही है।

चुराचाँदपुर के एक स्थानीय छात्र अमरजीत सिंह ने नॉर्थईस्ट नाउ को बताया, “मुझे बहुत खुशी है कि आज एक हिंदी फिल्म दिखाई जाएगी। मुझे कभी भी सार्वजनिक रूप से कोई हिंदी फिल्म देखने का सौभाग्य नहीं मिला। मैं अपने मोबाइल फोन पर केवल हिंदी ब्लॉकबस्टर्स देख रहा हूं। यह पहली बार होगा जब मुझे इसे बड़ी स्क्रीन पर देखने का मौका मिलेगा।”

एशियन गेम्स से बाहर हुई विनेश फोगाट, अब उस महिला पहलवान को मौका जिनका ट्रायल जीतने के बाद भी ‘डायरेक्ट एंट्री’ से कट गया था पत्ता

विनेश फोगाट एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं लेंगी। घुटने में चोट के चलते उन्होंने अपना नाम वापस ले लिया है। विनेश फोगाट ने मंगलवार (15 अगस्त, 2023) को सोशल मीडिया के जरिए इसकी जानकारी दी। उनकी जगह अंतिम पंघाल अब एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।

वैसे एशियन गेम्स के लिए हुए ट्रायल में जीत अंतिम पंघाल को ही मिली थी। लेकिन विनेश को डायरेक्ट एंट्री मिलने के कारण उनका पत्ता कट गया था। विनेश के साथ बजरंग पुनिया को भी डायरेक्टर एंट्री मिली थी। इसको पंघाल सहित अन्य पहलवानों ने कोर्ट में भी चुनौती दी थी, लेकिन उनके हाथ निराशा ही लगी थी।

अब विनेश की नाम वापसी के साथ ही अंतिम पंघाल के एशियाई गेम्स में भाग लेने का रास्ता साफ हो गया है। विनेश को 13 अगस्त को चोट लगी थी। 17 अगस्त को उनकी सर्जरी होगी। विनेश फोगाट ने ट्वीट कर कहा है, “मैं एक अत्यंत दुखद समाचार शेयर करना चाहती हूँ। कुछ दिन पहले यानी 13 अगस्त 2023 को प्रशिक्षण के दौरान मेरे बाएँ घुटने में चोट लगी थी। स्कैन और जाँच के बाद डॉक्टर ने कहा है कि ठीक होने के लिए मुझे सर्जरी करानी पड़ेगी। 17 अगस्त को मुंबई में मेरी सर्जरी होगी।”

विनेश ने आगे लिखा है, “साल 2018 में जकार्ता में हुए एशियन गेम्स में मैंने स्वर्ण पदक जीता था। मेरा सपना था कि मैं एशियन गेम्स में फिर से गोल्ड मेडल जीतूँ। लेकिन चोट के चलते अब मैं एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाऊँगी। मैंने सभी संबंधित अधिकारियों को सूचित कर दिया है। ताकि एशियन गेम्स के लिए रिजर्व खिलाड़ी को भेजा जा सके। मैं सभी फैंस से अनुरोध करती हूँ कि सभी मुझे सपोर्ट करते रहें ताकि मैं जल्द ही मैट पर वापसी कर सकूँ और पेरिस 2024 ओलंपिक के लिए तैयारी कर सकूँ। आपका सपोर्ट मुझे बहुत ताकत देता है।”

एशियन गेम्स 23 सितंबर से 8 अक्टूबर 2023 के बीच होने हैं। वहीं विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के ट्रायल 25-26 अगस्त को पटियाला में होने हैं। लेकिन विनेश का ऑपरेशन 17 अगस्त को होगा। ऐसे में वह विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के ट्रायल में भी भाग नहीं ले पाएँगी। ज्ञात हो कि यह चैंपियनशिप 2024 में होने वाले पेरिस ओलंपिक के लिए पहले क्वालीफाइंग राउंड की तरह होगा।

नूँह के दंगाइयों को बचाने के लिए आगे आया ‘कारवाँ’: अभिषेक-प्रदीप और होमगार्डों की हत्याओं पर साधी चुप्पी, हिन्दुओं को ही बताया हमलावर

पत्रिका ‘कारवाँ’ ने रविवार (13 अगस्त, 2023) को मेवात की नूँह हिंसा पर एक ‘ग्राउंड रिपोर्ट’ प्रकाशित की। यह रिपोर्ट ‘कारवाँ’ के पत्रकार प्रभजीत सिंह द्वारा तैयार की गई है, जिसका शीर्षक ‘नूँह के गाँवों में रात को छापेमारी और मुस्लिम युवाओं की सामूहिक गिरफ्तारियों के बाद डर का माहौल’ दिया गया है। रिपोर्ट में 31 जुलाई को हुई जलाभिषेक यात्रा के दौरान नूँह और आसपास भड़की हिंसा की वजह बताने का प्रयास किया गया है।

जैसा कि इसका इतिहास रहा है, पुलवामा हमले में बलिदान CRPF जवानों की जाति बताने वाली इस वामपंथी विचारधारा की प्रचारक पत्रिका ने नूँह हिंसा का भी दोष हिंदुओं पर मढ़ दिया। प्रभजीत सिंह नूँह हिंसा के बाद के हालातों को समझने के लिए ग्राउंड पर गए थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में मुस्लिम समुदाय को पीड़ित दिखाने की पूरी कोशिश की। प्रभजीत के मुताबिक, हिंसा के बाद पुलिस ने सिर्फ मुस्लिमों पर FIR दर्ज किए हैं जिसकी वजह से नूँह गाँव मर्दों से खाली हो चुका है। अपनी रिपोर्ट में सिंह ने जनहस्तक्षेप समूह के कार्यकर्ताओं का हवाला भी दिया जिसमें पुलिस द्वारा मुस्लिमों पर एकतरफा अत्याचार कर आरोप लगाया गया है।

इस रिपोर्ट में आगे विस्तार से बताया गया है कि कैसे पुलिस मुस्लिमों को बिना वजह बताए उनके घरों से उठा रही है जबकि हिन्दुओं की तरफ से सिर्फ एक गिरफ्तारी हुई है। आगे 57 FIR का जिक्र करते हुए उसमें 220 गिरफ्तार लोगों में से अधिकांश को मुस्लिम बताया गया है। यह हास्यास्पद के साथ दुखद भी है कि ‘कारवाँ’ को यह आशा थी कि पुलिस उन हिन्दुओं पर FIR करेगी जिनका कोई दोष नहीं है। वास्तविकता यह है कि जिन लोगों ने हमला किया, हमले के लिए उकसाया वो चाहे किसी भी धर्म के हों, उनकी जाँच हरियाणा पुलिस कर रही है।

‘कारवाँ’ ने हिंसा के लिए हिंदुओं को जिम्मेदार बताया

प्रभजीत ने हिन्दुओं पर हुए इस हमले को साम्प्रदायिक संघर्ष के तौर पर दिखाने का प्रयास किया। उन्होंने मुस्लिमों से ‘बजरंग दल’ और ‘विश्व हिन्दू परिषद’ कार्यकर्ताओं के बारे में बात की। वह अपनी रिपोर्ट से न सिर्फ हिन्दुओं को हमलावर बल्कि मुस्लिमों को पीड़ित के तौर पर चित्रित करना चाहते थे। नूँह के टौरू रोड निवासी रफीक मोहम्मद के हवाले से ‘कारवाँ’ की रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2021 में VHP द्वारा शुरू की गई यात्रा का मकसद हिंसा भड़काना था।

इसी रिपोर्ट में स्थानीय लोगों के हवाले से कहा गया है कि हर साल जुलूस निकालने वाले हिंदू राष्ट्रवादी नूँह में हिंसा भड़काने की कोशिश करते हैं। वो मुस्लिमों के खिलाफ नारे लगाते हैं और लगातार उनका अपमान भी करते हैं। रिपोर्ट में नूँह के टौरू रोड निवासी रफीक मोहम्मद के हवाले से कहा गया है कि हिन्दू संगठन से जुड़े लोग हाथों में तलवारें लेकर वाहनों से गुजरते हुए ‘जय श्री राम’ के नारे लगाते हैं। हालाँकि, यह स्पष्ट है कि मुस्लिमों ने सुनियोजित तरीके से हिंदुओं पर हमला किया। इस रिपोर्ट में ‘कारवाँ’ ने क्या हिंसा के पीछे हिंदू थे, अभिषेक की मौत क्यों हुई, नूँह हिंसा में मरने वालों में कोई मुस्लिम क्यों नहीं था, निजी और सरकारी में खासतौर पर पुलिस की ही गाड़ियाँ क्यों जलीं, साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन को चुन कर वहाँ किसने और क्यों हमला किया जैसे बहुत से सवालों को बिना जवाब के छोड़ दिया।

‘कारवाँ’ की इसी रिपोर्ट में आगे मोनू मानेसर पर यात्रा में शामिल होने का वीडियो बना कर मुस्लिमों को भड़काने का आरोप लगाया गया है। हालाँकि, वो इस यात्रा में शामिल नहीं हुए थे फिर भी उन्हें इस्लामवादियों ने बलि का बकरा बनाया और मुस्लिमों को भड़काने दोष मढ़ा। जबकि उनका वीडियो साल 2022 के अक्टूबर माह का था जिसे भ्रामक तौर पर नए वीडियो के तौर पर वायरल किया गया। बताते चलें कि इस साल फरवरी में राजस्थान पुलिस ने 2 गौ तस्करों की हत्या की FIR दर्ज की थी।

इन सभी के अलावा ‘कारवाँ’ का कहना है कि हिंदुओं ने नूँह के मुस्लिम बहुल इलाकों में तलवारें ले कर भड़काऊ नारे लगाते हुए रैली निकाली जिस से दोनों पक्षों में झड़प हुई। साथ ही इस रिपोर्ट में हिंदुओं द्वारा पलवल, गुरुग्राम, सोहना और अन्य आसपास के इलाकों में कई मस्जिदों पर हमले का भी दावा किया गया है। हालाँकि, ऑपइंडिया को अभी तक एक भी ऐसी FIR नहीं मिली है जिसमें नूँह हिंसा के लिए हिंदुओं को दोषी ठहराया गया हो।

दरअसल, ‘कारवाँ’ की रिपोर्ट अपने अजीब तथ्यों और तर्कों से पाठकों की आँखों में धूल झोंकने का एक प्रयास है। ये सीधे-सीधे वामपंथी विचारधारा से प्रेरित है जहाँ वो हिंसक मुस्लिम भीड़ को बचाने के लिए हिंसा का दोष उन हिन्दुओं पर मढ़ रहे हैं जो असल में पीड़ित हैं। ऐसी चालाकियाँ अक्सर वामपंथियों द्वारा अपनाई जाती रहीं हैं। यहाँ तक कि जीवित रहने के लिए आत्मरक्षा और हमलावरों को उनकी ही भाषा में जवाब देने पर भी सवालिया निशान खड़े कर दिये जाते हैं।

हमले के दौरान मुस्लिम भीड़ के कृत्यों को ‘कारवाँ’ ने छिपाया

हिंसा के बाद से अब तक दर्ज सभी FIR में भक्तों के साथ पुलिस ने भी बताया है कि कैसे नल्हड सहित आसपास के मंदिरों में जा रहे लोगों पर हमला हुआ। हमलावरों द्वारा अल्लाह-हू-अकबर के साथ पाकिस्तान जिंदाबाद के भी नारे लगाए गए। दंगाइयों ने न सिर्फ मंदिर बल्कि अस्पताल से लौट रही महिला एसीजेएम और उनकी बेटी पर भी हमला किया। पुलिस के वाहनों के साथ हिन्दुओं की दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया गया। कई FIR में महिला पुलिस बल पर भी हमले का जिक्र है। लेकिन ‘कारवाँ’ की रिपोर्ट में इन सभी अत्याचारों के बारे में कुछ भी नहीं लिखा गया है।

‘कारवाँ’ की इसी रिपोर्ट में अभिषेक की हत्या की वजह भी नहीं बताई गई। प्रभजीत सिंह को यह जानना जरूरी है कि अभिषेक और उनके भाई महेश नल्हड शिव मंदिर के आसपास के पहाड़ों से पुलिस और भक्तों पर गोली चला रहे दंगाइयों से खुद को बचाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान अभिषेक को गोली लगी और वह जमीन पर गिर गए। पीछे से आ रहे दंगाइयों में से एक ने तलवार से अभिषेक का गला काट दिया। अन्य दंगाइयों ने अभिषेक के सिर पर पत्थर मारे। अभिषेक ने अस्पताल पहुँचने से पहले ही दम तोड़ दिया था।

अभिषेक के अलावा ‘कारवाँ’ की रिपोर्ट में अल्लाह हु अकबर चिल्लाती भीड़ द्वारा 2 होमगार्डों की भी हत्या को नजरअंदाज किया गया। FIR से पता चला कि दंगाइयों ने पत्थरों से पहले पुलिस का रास्ता रोका फिर लाठी-डंडों, पत्थरों और अवैध हथियारों से उन पर हमला कर दिया। यदि हमला विहिप और बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने किया तो मुस्लिम भीड़ के पास ये सब कैसे आ गया ? कारवाँ को यह भी बताना होगा कि कि श्रद्धालुओं और पुलिसकर्मियों पर हमला करने के लिए मुस्लिम भीड़ को अवैध हथियार, कई टन पत्थर, सैकड़ों लाठियां-डंडे कहाँ से मिले।

वामपंथी संस्थान यह भी नहीं बता पाया कि कैसे नूँह के वार्ड नंबर-9 में एक समुदाय विशेष के दंगाइयों ने 35 से 40 भक्तों को बंधक बना लिया था जिन्हें मुक्त कराने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। इस रिपोर्ट में यह भी नहीं बताया गया कि दंगाइयों ने भाजपा नेता शिवकुमार की तेल मिल को कैसे जला कर 1.5 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान किया। इतनी वारदातें तो किसी पहाड़ की छोटी सी चोटी भर के समान हैं। हालाँकि इसके बावजूद अपने एजेंडे में फिट न होने के चलते कारवाँ इन घटनाओं को रिपोर्ट में शामिल नहीं करेगा।

नूँह शोभा यात्रा पर हमला

31 जुलाई 2023 को हरियाणा मेवात के नूँह क्षेत्र में सैकड़ों मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ ने बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा में शामिल हिंदू श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया। अब तक मिले आँकड़ों के मुताबिक कुल 6 लोगों की मौत हुई है। इस हिन्दू विरोधी हिंसा जाँच के दौरान ऑपइंडिया को 25 से अधिक FIR और शिकायतें मिली हैं। इसमें हिंसा के दौरान क्या हुआ, इसकी स्पष्ट तस्वीर सामने आई है। FIR,, शिकायतों और गवाहों से मिली जानकारी के आधार पर ये प्रतीत होता है कि हमला पूर्व नियोजित था। ऑपइंडिया को जलाभिषेक यात्रा से 2 दिन पहले मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ भड़काने वाले कई वीडियो भी मिले हैं।

मुस्लिमों का दावा है कि ये दंगे गौ रक्षक मोनू मानेसर की वजह से हुए। मुसलमानों को भड़काने के लिए मानेसर के पुराने वीडियो प्रसारित किए गए और कहा गया कि वह उस दिन नूहं जा रहे हैं। जबकि जिस वीडियो को सबसे अधिक वायरल किया गया वो अक्टूबर 2022 का है। इन सभी के अलावा नूँह के साइबर थाने पर हमला हुआ, पुलिसकर्मी घायल हुए, होमगार्डों की हत्या हुई। दंगाइयों द्वारा अभिषेक और प्रदीप नाम के बजरंग दल कार्यकर्ताओं का कत्ल किया गया। शक्ति सैनी नाम के एक अन्य युवक को भी इसी हिंसा के दौरान मार डाला गया।

जम्मू-कश्मीर में आतंकी के भाई के हाथ में तिरंगा देख शेहला रशीद ने माना मोदी सरकार का लोहा, कहा- मानवाधिकार में हुआ सुधार: लाल चौक पर मना स्वतंत्रता का जश्न

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में छात्र संघ की उपाध्यक्ष रहीं शेहला रशीद ने मोदी सरकार की जम कर तारीफ़ की है। 77वें स्वतंत्रता दिवस पर मंगलवार (15 अगस्त, 2023) को उन्होंने एक ट्वीट के माध्यम से बताया कि कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में जम्मू कश्मीर में हालात सुधरे हैं। लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकवादी जावेद के भाई रईस मट्टू द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराए जाने की खबर पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने ये बात कही।

रईस मट्टू को अपने घर की बालकनी से तिरंगा झंडा लहराते हुए देखा गया था। रईस ने कहा है कि उन्होंने अपनी मर्जी से ऐसा किया, उनके ऊपर किसी का कोई दबाव नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिल से झंडा लहराया है। उन्होंने कहा कि हकीकत यही है, यही उनकी सोच है, मैं लोगों को पैगाम दे रहा हूँ – सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा, हम बुलबुले हैं इसके ये गोलिस्ताँ हमारा। उन्होंने बताया कि जम्मू कश्मीर में विकास हो रहा है।

रईस मट्टू ने जानकारी दी कि वो 14 अगस्त, 2023 के दिन पहली बार दुकान पर बैठे हैं। पहले 2-3 दिन तक बंद चलता रहता था। उन्होंने बताया कि कैसे पिछली राजनीतिक पार्टियाँ खेल खेलती थीं और गरीब इसमें पिस रहे थे। रईस ने ये भी कहा कि वो भी को कह रहे हैं कि वो तिरंगे झंडे के तले आएँ, अब सबके साथ न्याय हो रहा है, जो गलत है सिर्फ उसे ही पकड़ा जाता है। अपने भाई के संबंध में उन्होंने बताया कि वो 2009 में आतंकवादी बन गया था।

रईस का कहना है कि जावेद मट्टू अभी ज़िंदा है या मर गया है, इस बारे में भी परिवार को कुछ नहीं पता। उन्होंने अपील की कि अगर वो ज़िंदा है तो वापस आ जाए। उन्होंने कहा, “अब हालात बदल गए हैं। पाकिस्तान तो खुद भिखारी मुल्क है। वो क्या देगा हमें? हम हिंदुस्तानी थे, हिंदुस्तानी हैं और हिंदुस्तानी रहेंगे।” उन्होंने अपने भाई से भी अपील की कि अगर वो ज़िंदा है तो आतंक का रास्ता छोड़ कर वापस आ जाए।

इस वीडियो पर टिप्पणी करते हुए मानवाधिकार कार्यकर्ता शेहला रशीद ने कहा, “ये स्वीकार करने में कितना ही असहज क्यों नहीं हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार और उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा के शासनकाल में जम्मू कश्मीर में मानवाधिकार रिकॉर्ड में सुधार हुआ है। विशुद्ध रूप से उपयोगितावादी गणना करें तो सरकार के रुख के कारण जानें बची हैं। यही मेरा दृष्टिकोण है। इस ट्वीट पर लोगों ने कहा कि यही तो ‘अच्छे दिन’ का उदाहरण है।

बता दें कि ये वही शेहला रशीद हैं, जो कभी पीएम मोदी के खिलाफ ज़हर उगला करती थीं। उन्होंने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का भी रुख किया था। हालाँकि, अब उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली है। उन्होंने भारतीय सेना पर रात को घर में घुस कर लड़कों को उठाने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद उन पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति भी LG ने दी थी। उनके अब्बा अब्दुल रशीद शोरा ने उन पर देशविरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए करोड़ों की फंडिंग लेने की शिकायत दर्ज कराई थी।

एक ऐसा समय था जब स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस जैसे मौकों पर जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर के लाल चौक पर मायूसी छाई रहती थी तो कभी पाकिस्तान का झंडा दिखता था। अब लाल चौक तिरंगे के रंग में रंग जाता है। आज भी आज़ादी के जश्न में डूबे लोग वहाँ तिरंगा लेकर पहुँचे, नृत्य किया। कुछ लोग तो खुद को ही तिरंगे में रंग कर पहुँचे। बड़ी संख्या में महिलाओं को भी लाल चौक पर जुटे हुए देखा गया, जो नाच-गा कर जश्न मना रही थीं।

बेटी को कँधे पर बिठाकर जा रहा था पिता, साथियों के साथ आया तारिक और गोली मारकर चला गया: Video वायरल

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर का एक एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक व्यक्ति कँधे पर एक बच्ची को बिठाकर जाता दिख रहा है। अचानक से एक व्यक्ति उसे गोली मारता है और बाइक पर इंतजार कर रहे अपने साथियों के साथ भाग जाता है। इसके बाद मौके पर चीख-पुकार मच जाती है।

जिस व्यक्ति को गोली मारी गई है, उसकी पहचान शोएब के तौर पर हुई है। वह अपनी बेटी को कँधे पर बिठाकर जा रहा था। उसका इलाज चल रहा है। गोली मारने वाले की पहचान तारिक के तौर पर हुई है। वह फरार है। उसके बाइक सवार साथियों गुफरान और नदीम को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना में इस्तेमाल हथियार भी बरामद हो गया है। घटना रविवार (13 अगस्त 2023) की है।

मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है। मामले में शिकायतकर्ता सलीम अहमद ने बताया कि रविवार को वे अपने भतीजे शोएब के साथ एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। कार्यक्रम खत्म होने के बाद शाम 7:30 पर सब घर लौट रहे थे। शोएब के कँधे पर उसकी डेढ़ साल की बेटी बैठी हुई थी। तभी रास्ते से काले रंग की बाइक पर तारिक, नदीम और गुफरान आए। तारिक बाइक से उतर गया, जबकि गुफरान और नदीम थोड़ी दूर आगे बढ़कर खड़े हो गए। दोनों ने तारिक को भड़काते हुए शोएब को गोली मारने के लिए कहा।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि गुफरान और नदीम के ललकारने पर तारिक ने तमंचे से पैदल चल रहे शोएब पर फायर कर दिया। गोली लगने से शोएब बच्ची सहित जमीन पर गिर पड़ा। आसपास के लोगों को जमा होते देख तीनों आरोपित बाइक से धमकी देते हुए भाग निकले। शोएब को नाजुक हालात में अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। उसे बेहतर इलाज के लिए पहले बरेली और बाद में दिल्ली रेफर कर दिया गया।

ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस ने नदीम, तारिक और गुफरान पर IPC की धारा 307, 34 और 506 के तहत केस दर्ज किया है। सोमवार (14 अगस्त 2023) को पुलिस ने बताया कि गुफरान और नदीम को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस को रात लगभग 8:35 पर दोनों आरोपितों की लोकेशन शाहजहाँपुर नगर निगम कार्यालय पर मिली थी। हमले में प्रयोग किया तमंचा, 2 जिन्दा कारतूस, घटना में प्रयोग हुई बिना नंबर की बाइक भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। वहीं तारिक की तलाश में दबिश दी जा रही है।

पुलिस प्रेसनोट

भाई से निकाह न होने पर थी नाराजगी

ऑपइंडिया से बात करते हुए शिकायतकर्ता सलीम ने बताया कि फ़िलहाल शोएब की हालत गंभीर बनी हुई है। हमले की वजह पूछने पर उन्होंने कहा कि शोएब का निकाह चाँदनी से हुआ है। बचपन में चाँदनी के निकाह की बातचीत तारिक के भाई मुशरान से हँसी-मजाक में हुआ करती थी। बकौल सलीम चाँदनी का निकाह शोएब से हो जाने के चलते तारिक नाराज रहता था। तारिक कई लोगों से इसे अपनी बेइज्जती बताते हुए बदला लेने की धमकी दिया करता था। हमले की वजह भी सलीम ने इसी को बताया है।

पुलिस हिरासत में नदीम और गुफरान

खुद को अभिषेक बताता है नदीम

ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान सलीम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपित नदीम खुद को अभिषेक भी कहता है। हालाँकि सलीम यह नहीं बता सके कि नदीम के खुद को अभिषेक कहने की वजह क्या है। पुलिस को दी गई शिकायत में भी सलीम ने आरोपित के तौर पर नदीम उर्फ़ अभिषेक लिखा है।

वंदे भारत पर पत्थर फेंकने वाला फिरोज खान पकड़ा गया, बोला- मजे के लिए ट्रेन पर करता था पत्थरबाजी, काँच टूटते देख अच्छा लगता था

मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में ट्रेन में पथराव करने का एक आरोपित पुलिस के हत्थे चढ़ा है। आरोपित की पहचान फिरोज खान के रूप में हुई है। उसने भोपाल से दिल्ली जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस पर पथराव किया था। गिरफ्तारी के बाद फिरोज ने अपना अपराध कबूल लिया है। साथ ही कहा है कि वह शौक के चलते ट्रेन पर पत्थर फेंकता था।

इस मामले में जानकारी देते हुए ग्वालियर रेलवे सुरक्षा बल के इंस्पेक्टर संजय कुमार आर्य ने कहा है कि रविवार (13 अगस्त, 2023) सुबह करीब 10 बजे बानमोर रेलवे स्टेशन के पास ट्रेन पर पथराव की सूचना मिली थी। यह पथराव भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन से दिल्ली के हजरत निज़ामुद्दीन की ओर जाने वाली ट्रेन संख्या 20171 वंदे भारत एक्सप्रेस पर हुआ था। पथराव के चलते वंदे भारत एक्सप्रेस के शीशे टूट गए थे। इससे यात्रियों के दिल में भी डर बैठ गया था।

उन्होंने आगे कहा है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद रेलवे पुलिस ने आरोपितों को पकड़ने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान एक जगह पर सीसीटीवी फुटेज में आरोपित नजर आया। इसके बाद पुलिस ने फिरोज खान को रविवार रात गिरफ्तार कर लिया गया। फिरोज के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पूछताछ में फिरोज खान ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। साथ ही कहा है कि ट्रेन पर पथराव करने में उसे बहुत मजा आता है। जब उसके पत्थर से ट्रेन का काँच टूटकर बिखरता है तो उसे अच्छा लगता है। इसलिए वह ट्रेन पर पत्थरबाजी करता था। उसे डर था कि ट्रेन पर पत्थर फेंकते हुए कोई देख न ले, इसलिए वह रात के अँधेरे में पत्थरबाजी करता था। फिरोज खान ने वंदे भारत एक्सप्रेस के अलावा कई अन्य ट्रेनों में पत्थरबाजी करने की बात भी कबूल की है।

क्राइम तक की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कुछ अन्य आरोपितों को भी पकड़ा था। लेकिन काउंसलिंग के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। ग्वालियर पुलिस ने स्थानीय बिरला नगर से भी कुछ नाबालिगों को हिरासत में लिया था। काउंसिलिंग के बाद पुलिस ने उन्हें भी परिजनों को सौंप दिया। 20 वर्षीय फिरोज अब भी पुलिस की गिरफ्त में है।

‘यही औकात रह गई है हमारी’: स्वतंत्रता दिवस पर बुर्ज खलीफा में नहीं दिखा झंडा तो निराश हुए पाकिस्तानी, 15 अगस्त पर तिरंगे से जगमग हुई दुनिया की सबसे ऊँची इमारत

14 अगस्त को पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा था। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी वायरल हुआ। वीडियो में कई पाकिस्तानी दुनिया की सबसे ऊँची बिल्डिंग बुर्ज खलीफा के पास इकट्ठा होकर उसमें अपना झंडा दिखाए जाने का इंतजार करते नजर आ रहे हैं।

वीडियो में एक लड़की कह रही है, “12 बजकर 1 मिनट हो चुके हैं। लेकिन, दुबई वालों ने कहा है कि बुर्ज खलीफा में पाकिस्तान का झंडा नहीं लहराया जाएगा। यह औकात रह गई है हमारी।” वीडियो आगे बढ़ने पर पाकिस्तानी ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते लगाते दिखाई दे रहे हैं। लेकिन, बुर्ज खलीफा पर पाकिस्तान का झंडा नजर नहीं आया।

वहीं, 15 अगस्त, 2023 को एक पाकिस्तानी यूट्यूबर सना अमजद ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो में बुर्ज खलीफा में पाकिस्तान का झंडा न दिखाने और पाकिस्तान को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ न देने से नाराज नजर आ रहे हैं। सना अमजद ने भी कहा है, “यूएई ने 14 अगस्त को पाकिस्तान का झंडा बुर्ज खलीफा पर दिखाने से इनकार कर दिया। वहाँ रहने वाले पाकिस्तानी बुर्ज खलीफा के पास इकट्ठा हुए थे। वे इंतजार कर रहे थे कि 12 बजने पर बुर्ज खलीफा में पाकिस्तान का झंडा दिखाया जाएगा। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से ऐसा नहीं हुआ। इससे दुबई में रहने वालों को बेइज्जती महसूस हो रही है।”

यूट्यूबर सना अमजद से बात करते हुए भी पाकिस्तानियों ने निराशा व्यक्त की। साथ ही पाकिस्तान के हालात को लेकर दुःख जताया। साथ ही यह भी कहा कि 15 अगस्त को निश्चित रूप से बुर्ज खलीफा में भारत का झंडा नजर आएगा। बुर्ज खलीफा पर पाकिस्तान का झंडा न दिखाए जाने से दुखी और निराश पाकिस्तानियों का कहना है कि भारत और यूएई के बीच अच्छे संबंध दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों के कारण हैं। वहीं अपनी माली हालत के चलते पाकिस्तान और यूएई के संबंध खराब हो चुके हैं। सना अमजद ने यह भी कहा कि न केवल भारत के स्वतंत्रता दिवस पर बल्कि आमतौर पर भी बुर्ज खलीफा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो दिखाई जाती है।

14 अगस्त को बुर्ज खलीफा में अपने देश का झंडा न दिखाए जाने से परेशान पाकिस्तानियों के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे थे। ऐसे में कई भारतीय यूजर्स पाकिस्तान को ट्रॉल करने लगे। दुःख और निराशा से भरे पाकिस्तानियों के वीडियो भारत में भी जमकर शेयर हुए। वीडियो शेयर कर कई मीमर्स ने पाकिस्तानियों को ट्रॉल किया। एक यूजर ने ‘PKMKB’ के साथ बुर्ज खलीफा की फोटो शेयर की। वहीं, एक अन्य ने पाकिस्तान को बिखारी बताते हुए लिखा कि यूएई का कहना है, “हम दुबई में बिखारियों को प्रमोट नहीं करते।”


हालाँकि, बाद में बुर्ज खलीफा के इंस्टाग्राम पर पाकिस्तान को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए एक वीडियो शेयर किया गया। वीडियो में बुर्ज खलीफा पर पाकिस्तान का झंडा देखा जा सकता है। हालाँकि, वीडियो में 76वाँ स्वतंत्रता दिवस लिखा नजर आ रहा है। जबकि पाकिस्तान और भारत 76वाँ नहीं बल्कि 77वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। बुर्ज खलीफा पर 76वें स्वतंत्रता दिवस दिखाए जाने को लेकर कहा जा रहा है कि या तो ऐसा गलती से हुआ होगा या फिर पिछले साल का वीडियो शेयर किया गया होगा।

बुर्ज खलीफा द्वारा शेयर किए गए वीडियो को लेकर कई पाकिस्तानी यूजर्स का कहना था कि पाकिस्तान 76वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। हालाँकि, पाकिस्तान की सरकार आधिकारिक तौर पर भारत की तरह ही 77वाँ स्वतंत्रता दिवस मना रही है। देखें तो 1947 से लेकर अब तक 77 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

पाकिस्तानी राष्ट्रपति के आधिकारिक हैंडल ने भी 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर स्थानीय नागरिकों को शुभकामनाएँ दी हैं। इस बीच यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि बुर्ज खलीफा द्वारा पुराना वीडियो शेयर किया गया है या फिर टेक्नीशियन की गलती से 76 लिख गया है।

बुर्ज खलीफा द्वारा अपलोड किए गए वीडियो में ’76 वाँ स्वतंत्रता दिवस’ दिखाया गया

भारतीय तिरंगे से जगमगाया बुर्ज खलीफा

एक ओर जहाँ बुर्ज खलीफा में पाकिस्तानी झंडा नजर न आने को लेकर पाकिस्तानी नागरिक निराश नजर आ रहे थे। वहीं भारत के स्वतंत्रता दिवस पर पूरा बुर्ज खलीफा तिरंगे के कलर में जगमगाता नजर आया। इस दौरान भारत का राष्ट्रगान बजता हुआ भी सुना जा सकता है।

इन तमाम बातों के बीच यह तो स्पष्ट है कि 14 अगस्त को रात 12 बजे के तुरंत बाद बुर्ज खलीफा में पाकिस्तानी झंडा नहीं दिखाया गया था। इससे पाकिस्तानी नाराज थे। ऐसा संभव है कि सोशल मीडिया पर पाकिस्तानियों की प्रतिक्रिया देखने के बाद बुर्ज खलीफा पर पाकिस्तान के झंडा वाला वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया हो।

स्वतंत्रता दिवस पर भी राजनीति से बाज नहीं आई कॉन्ग्रेस, लाल किला नहीं पहुँचे खड़गे: सफाई में बोले- आँखों में तकलीफ, पार्टी ऑफिस में फहराना था झंडा

देश के 77वें स्वतंत्रता दिवस पर भी कॉन्ग्रेस राजनीति से बाज नहीं आई। लाल किले पर आयोजित पारंपरिक समारोह में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे नहीं पहुँचे। बाद में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि आँखों से संबंधित समस्या होने और पार्टी ऑफिस में समय से राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए उन्होंने इससे दूरी बनाई। लेकिन कॉन्ग्रेस मुख्यालय में अपने संबोधन के दौरान बीजेपी और केंद्र सरकार पर आरोप लगाने से वे खुद को दूर नहीं रख पाए।

खड़गे ने कहा, “मुझे आँखों में थोड़ी दिक्कत है। प्रोटोकॉल के मुताबिक मुझे सुबह 9:20 पर अपने घर पर झंडा फहराना था। इसके बाद मुझे पार्टी दफ़्तर पर झंडा फहराना था। इसलिए मैं वहाँ ​नहीं पहुँच सका।” आगे उन्होंने कहा, “सुरक्षा इतनी कड़ी है कि वे पीएम के निकलने से पहले किसी और को वहाँ से जाने नहीं देते। मुझे लगा कि मैं यहाँ समय पर नहीं पहुँच पाऊँगा, साथ ही मैंने सुरक्षा स्थिति और समय की कमी के कारण वहाँ न जाना ही बेहतर समझा।”

कॉन्ग्रेस मुख्यालय में केंद्र सरकार पर लगाए आरोप

खड़गे ने कॉन्ग्रेस मुख्यालय में ध्वाजारोहण किया। इस दौरान सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी सहित अन्य कॉन्ग्रेस नेता भी मौजूद रहे। इस मौके पर भी कॉन्ग्रेस आरोप प्रत्यारोप वाली राजनीति को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र, संविधान और संस्थान तीनों पर बहुत बड़ा खतरा है। संसद में विपक्ष के नेताओं के माइक बंद कर दिए जाते हैं और बाहर कहा जाता है कि हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र हैं। संसद में जब मैं खुद ही बात करने के लिए उठता हूँ, तो मेरा माइक बंद हो जाता है। एक तरफ हम लोकतंत्र का ढोल बजाते हैं, तो दूसरी तरफ हमारा मुँह बंद कर दिया जाता है।”

मिली भारत की नागरिकता, अब नहीं रहे कनाडा के सिटीजन: अक्षय कुमार के लिए खास बना 77वाँ स्वतंत्रता दिवस, 2019 में किया था आवेदन

बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार (Akshay Kumar) को कनाडा की नागरिकता की वजह से अक्सर उनके आलोचकों द्वारा ट्रॉल किया जाता रहा है। आखिरकार देश के 77वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्हें भारत की नागरिकता मिल गई है।

अपनी इस खुशी का इजहार उन्होंने सोशल मीडिया पर गृहमंत्रालय से जारी हुए नागरिकता के दस्तावेजों सहित पोस्ट कर किया है। ‘ओएमजी 2 (OMG 2)’ एक्टर ने ट्विटर पर लिखा, “दिल और नागरिकता, दोनो हिंदुस्तानी। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ! जय हिन्द!”

भारतीय नागरिकता के लिए 2019 में किया आवेदन

‘OMG 2’ एक्टर अक्षय कुमार ने कुछ वक्त पहले एक इंटरव्यू में जानकारी दी थी कि उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए 2019 में ही आवेदन किया था और जल्द उन्हें देश की नागरिकता मिल जाएगी।

लगभग 33 साल पहले उन्होंने साल 1990 में भारत की नागरिकता छोड़ दी थी। इस दौरान उनकी फ़िल्में भारत में नहीं चल रही थी। इस वजह से उन्होंने कनाडा की नागरिकता ले ली थी। उस दौरान वो काम की वजह से वो कनाडा में रहने की सोचते रहे थे। इसके बाद बॉलीवुड में भी उनका करियर परवान चढ़ने लगा और उन्होंने कनाडा जाने का अपना फैसला छोड़ दिया।

उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान खुद ही कनाडा की नागरिकता लेने की बात की थी। उन्होंने कहा था, “जब मेरी फिल्में नहीं चल रही थीं, तब सोचा था कि जाकर कहीं और काम करूँगा। कनाडा में मेरा एक दोस्त था। वो कह रहा था कि इधर आ जा। मैंने सोचा यहाँ किस्मत नहीं चल रही तो वहाँ चला गया।”

इस दौरान ही उन्होंने वहाँ की नागरिकता के लिए आवेदन किया था और उन्हें वहां कि नागरिकता मिल गई। उन्होंने बताया था कि इसके बाद बॉलीवुड में उनकी फिल्में चल निकली। फिर उन्होंने सोचा कि वो यहीं (भारत में) रहेंगे।

कनाडा के नागरिक थे अक्षय कुमार

बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार भारत की नागरिकता मिलने से पहले कनाडा के नागरिक थे। इसे लेकर उन्हें कई बार अक्सर ट्रॉलिंग का शिकार होना पड़ा है। लंबे वक्त तक नागरिकता को लेकर वो भारत में आलोचकों के निशाने पर रहे हैं।

उन्हें सोशल मीडिया पर भी कनाडा कुमार कहकर ट्रॉल किया जाता रहा है। ‘आज तक‘ को दिए एक इंटरव्यू में इसे लेकर उन्होंने अपना दर्द बयाँ किया था। उन्होंने इसमें कहा था कि जब लोग उनकी कनाडाई नागरिकता की वजह जाने बगैर कुछ भी कहते हैं तो उन्हें काफी बुरा लगता है।

अक्षय कुमार को एक साथ मिली दो खुशखबरी

इन दिनों वो अपनी फिल्म ‘ओएमजी 2’ को लेकर सुर्खियों में हैं। अक्षय कुमार और पंकज त्रिपाठी की फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। फिल्म ने सोमवार (14 अगस्त) को शुक्रवार (11 अगस्त) से ज्यादा कमाई की है। ‘बॉलीवुड हंगामा’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘ओएमजी 2’ ने सोमवार को 11-12 करोड़ रुपए कमाए हैं। इसके बाद बाद अक्षय कुमार की फिल्म का चार दिनों का टोटल कलेक्शन 54 करोड़ रुपए हो गया है।

इसके साथ ही उनकी खुशी में चार चाँद उनको मिली भारत की नागरिकता ने लगा दिए है। इस खुशी के बीच वो फिल्म में शंकर भगवान को लेकर फिल्माए गए दृश्यों के विरोध का गम भी भूल गए हैं। इस फिल्म में वो शिवजी के गण की रोल में हैं। फिल्म में महाकाल के पुजारी के परिजन को यौन शोषक दिखाया गया है। इसे लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध किया था।

भ्रष्टाचार-परिवारवाद-तुष्टिकरण पर वार, लाल किले से PM मोदी ने खींच दी 2024 की लड़ाई की लकीर: 5 साल की ‘गारंटी’ दे माँग लिया वापसी का भी ‘आशीर्वाद’

15 अगस्त 2023 को भारत अपनी स्वतंत्रता की 77वीं वर्षगाँठ मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से राष्ट्र को संबोधित किया। यह बतौर प्रधानमंत्री उनका 10वाँ और उनके दूसरे कार्यकाल का आखिरी स्वतंत्रता दिवस संबोधन था। भले 15 अगस्त पर लाल किले से प्रधानमंत्री का संबोधन पारंपरिक होता हो, लेकिन पीएम मोदी ने इसके जरिए ही 2024 के आम चुनावों की लड़ाई की पिच भी तैयार कर दी है। साथ ही इन चुनावों के अंतिम नतीजों के संकेत भी दे दिए हैं।

90 मिनट के इस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने सरकार के कामकाज का हिसाब दिया। आँकड़ों के साथ उपलब्धियाँ गिनाई। ग्रामीण क्षेत्र में दो करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने का स्वप्न दिखाया। ‘विश्वकर्मा योजना’ लाने की घोषणा की। अगले 5 साल में भारत को दुनिया की तीन सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में शामिल करने की गारंटी दी। मध्यमवर्ग के ‘अपना घर’ के स्वप्न को साकार करने के लिए बैंक लोन में रियायत का वादा किया। विपक्ष का नाम लिए बिना परिवारवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण को ‘बीमारी’ बताते हुए भारतीय लोकतंत्र को इनसे मुक्ति दिलाने की अपील की।

एक तरफ उन्होंने विपक्षी दलों के ‘परिवारवाद’ पर निशाना साधा, दूसरी तरफ ‘परिवारजन’ संबोधन से देश के लोगों को यह बताने की कोशिश की कि उनके लिए पूरा देश ही परिवार है। वे जो कुछ कर रहे हैं इसी परिवार के लिए कर रहे हैं। यही कारण है कि उनके संबोधन के दौरान 48 बार ‘परिवारजन’ शब्द का जिक्र आया। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि 2024 की राजनीतिक लड़ाई में यह शब्द बार-बार सुनाई पड़ सकता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में 12 बार युवा तो 35 बार महिलाओं का जिक्र किया। साथ ही अपनी सरकार की मजबूती को बताने के लिए 43 बार सामर्थ्य और 19 बार संकल्प शब्द का उपयोग किया।

एक तरफ प्रधानमंत्री ने 1000 साल की गुलामी की चर्चा करते हुए राष्ट्रवाद के एजेंडे को धार दी। वहीं दूसरी तरफ लोगों को यह भी बताने की कोशिश की कि उनका आज का फैसला भारत के अगले हजार साल की तकदीर लिखेगा। संकेतों में उन्होंने आम चुनावों के लिए जनता से आशीर्वाद की अपील की। साथ ही देश के मूड का संकेत देते हुए यह भी कहा, “2047 के सपने को साकार करने का सबसे बड़ा स्वर्णिम पल आने वाले 5 साल हैं। अगली बार 15 अगस्त को इसी लाल किले से मैं आपको देश की उपलब्धियाँ, आपके समार्थ्य, आपके संकल्प उसमें हुई प्रगति, उसकी जो सफलता है, उसके गौरवगान उससे भी अधिक आत्मविश्वास के साथ, आपके सामने में प्रस्तुत करूँगा।”

2014 और 2019 में मिले जनादेश का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने 2024 में वापसी के एक और संकेत देते हुए यह भी कहा, “जिसका शिलान्यास हमारी सरकार करती है, उसका उद्घाटन भी हम अपने कालखंड में ही करते हैं। इन दिनों मैं जो शिलान्यास कर रहा हूँ, उनका उद्घाटन भी मेरे नसीब में है।”

दिलचस्प यह है कि हाल ही में संपन्न हुए संसद के मॉनसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने जिन-जिन मुद्दो पर हंगामा कर सदन की कार्यवाही में व्यवधान डाला था, एक-एक कर उन सभी मुद्दों पर देश के सामने प्रधानमंत्री ने लाल किले से अपनी सरकार का पक्ष रखा है। ऐसे में भले आज 2024 के आम चुनाव दूर दिख रहे हों, उससे पहले कई राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी होने हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि इन सभी राजनीतिक लड़ाइयों की लकीर पीएम ने अपनी ओर से खींच दी है। अंतिम नतीजे तो 2024 में ही पता चलेंगे, लेकिन यह आगे बढ़कर लड़ाई की दशा और दिशा तय करने की नरेंद्र मोदी की काबिलियत ही है कि वे गुजरात से लेकर केंद्र तक अजेय बने हुए हैं। इतने सालों बाद भी विपक्ष उनके सामने निस्तेज और दिशाहीन दिखता है।