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‘महिला सशक्तिकरण पर दिया जा रहा विशेष ध्यान, G20 ने कूटनीति को जमीन से जोड़ा’: 77वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू – प्रकृति को समझते हैं जनजातीय समाज

इस दौरान उन्होंने देश के 77वें स्वतंत्रता दिवस पर देश के सभी नागरिकों को को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि यह दिन हम सब के लिए गौरवपूर्ण और पावन है। उन्होंने कहा कि उन्हें चारों ओर उत्सव का वातावरण देखकर बहुत प्रसन्नता हो रही है। राष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रसन्नता और गर्व की बात है कि कस्बों और गाँवों में, यानी देश में हर जगह – बच्चे, युवा और बुजुर्ग – सभी उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस के पर्व को मनाने की तैयारी कर रहे हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारे देशवासी बड़े उत्साह के साथ ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मना रहे हैं। स्वाधीनता दिवस के उत्सव पर उन्होंने अपने बचपन को भी याद किया। उन्होंने याद किया कि कैसे अपने गाँव के स्कूल में स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेने की उनकी खुशी, रोके नहीं रुकती थी। उन्होंने बताया कि जब तिरंगा फहराया जाता था तब हमें लगता था जैसे हमारे शरीर में बिजली सी दौड़ गई हो। देशभक्ति के गौरव से भरे हुए हृदय के साथ हम सब, राष्ट्रीय ध्वज को सलामी देते थे तथा राष्ट्रगान गाते थे।

राष्ट्रपति ने आगे बताया कि मिठाइयाँ बाँटी जाती थीं और देशभक्ति के गीत गाए जाते थे, जो कई दिनों तक हमारे मन में गूँजते रहते थे। उन्होंने कहा कि यह उनका सौभाग्य रहा कि जब वो, स्कूल में शिक्षक बनीं तो उन्हें उन अनुभवों को फिर से जीने का अवसर प्राप्त हुआ। उन्होंने समझाया की जब हम बड़े होते हैं, तो हम अपनी खुशी को बच्चों की तरह व्यक्त नहीं कर पाते, लेकिन साथ ही विश्वास जताया कि राष्ट्रीय पर्वों से जुड़ी देशभक्ति की गहरी भावना में तनिक भी कमी नहीं आती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हम केवल एक व्यक्ति ही नहीं हैं, बल्कि हम एक ऐसे महान जन-समुदाय का हिस्सा हैं जो अपनी तरह का सबसे बड़ा और जीवंत समुदाय है। उन्होंने कहा कि यह विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नागरिकों का समुदाय है। राष्ट्रपति ने आगे कहा कि जब हम स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाते हैं तो वास्तव में हम एक महान लोकतन्त्र के नागरिक होने का उत्सव भी मनाते हैं। हममें से हर एक की अलग-अलग पहचान है।

उन्होंने समझाया कि जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र के अलावा, हमारी अपने परिवार और कार्य-क्षेत्र से जुड़ी पहचान भी होती है। लेकिन हमारी एक पहचान ऐसी है जो इन सबसे ऊपर है, और हमारी वह पहचान है, भारत का नागरिक होना। हम सभी, समान रूप से, इस महान देश के नागरिक हैं। हम सब को समान अवसर और अधिकार उपलब्ध हैं तथा हमारे कर्तव्य भी समान हैं। उन्होंने इतिहास बताते हुए कहा कि लेकिन ऐसा हमेशा नहीं था। भारत लोकतंत्र की जननी है और प्राचीन काल में भी हमारे यहाँ जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक संस्थाएँ विद्यमान थीं। किन्तु लंबे समय तक चले औपनिवेशिक शासन ने उन लोकतान्त्रिक संस्थाओं को मिटा दिया था।

राष्ट्रपति ने कहा, “15 अगस्त, 1947 के दिन देश ने एक नया सवेरा देखा। उस दिन हमने विदेशी शासन से तो आजादी हासिल की ही, हमने अपनी नियति का निर्माण करने की स्वतंत्रता भी प्राप्त की। हमारी स्वाधीनता के साथ, विदेशी शासकों द्वारा उपनिवेशों को छोड़ने का दौर शुरू हुआ और उपनिवेशवाद समाप्त होने लगा। हमारे द्वारा स्वाधीनता के लक्ष्य को प्राप्त करना तो महत्वपूर्ण था ही, लेकिन उससे भी अधिक उल्लेखनीय है, हमारे स्वाधीनता संग्राम का अनोखा तरीका। महात्मा गाँधी तथा अनेक असाधारण एवं दूरदर्शी विभूतियों के नेतृत्व में, हमारा राष्ट्रीय आंदोलन अद्वितीय आदर्शों से अनुप्राणित था। गाँधीजी तथा अन्य महानायकों ने भारत की आत्मा को फिर से जगाया और हमारी महान सभ्यता के मूल्यों का जन-जन में संचार किया। भारत के ज्वलंत उदाहरण का अनुसरण करते हुए, हमारे स्वाधीनता संग्राम की आधारशिला – ‘सत्य और अहिंसा’ – को पूरी दुनिया के अनेक राजनीतिक संघर्षों में सफलतापूर्वक अपनाया गया है।”

उन्होंने आगे कहा, “स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर, मैं भारत के नागरिकों के साथ एकजुट हो कर सभी ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों को कृतज्ञतापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित करती हूँ। उनके असंख्य बलिदानों से, भारत ने विश्व समुदाय में अपना स्वाभिमान-पूर्ण स्थान फिर से प्राप्त किया। मातंगिनी हाजरा और कनकलता बरुआ जैसी वीरांगनाओं ने भारत माता के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। माँ कस्तूरबा, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के साथ कदम से कदम मिलाकर सत्याग्रह के मार्ग पर चलती रहीं। सरोजिनी नायडू, अम्मू स्वामीनाथन, रमा देवी, अरुणा आसफ़-अली और सुचेता कृपलानी जैसी अनेक महिला विभूतियों ने अपने बाद की सभी पीढ़ियों की महिलाओं के लिए आत्म-विश्वास के साथ, देश तथा समाज की सेवा करने के प्रेरक आदर्श प्रस्तुत किए हैं। आज महिलाएँ विकास और देश सेवा के हर क्षेत्र में बढ़-चढ़कर योगदान दे रही हैं तथा राष्ट्र का गौरव बढ़ा रही हैं। आज हमारी महिलाओं ने ऐसे अनेक क्षेत्रों में अपना विशेष स्थान बना लिया है जिनमें कुछ दशकों पहले उनकी भागीदारी की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।”

उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर प्रसन्नता होती है कि हमारे देश में महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आर्थिक सशक्तीकरण से परिवार और समाज में महिलाओं की स्थिति मजबूत होती है। साथ ही सभी देशवासियों से आग्रह किया कि वे महिला सशक्तीकरण को प्राथमिकता दें। मैं चाहूंगी कि हमारी बहनें और बेटियाँ साहस के साथ, हर तरह की चुनौतियों का सामना करें और जीवन में आगे बढ़ें। महिलाओं का विकास, स्वाधीनता संग्राम के आदर्शों में शामिल है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस, हमारे लिए अपने इतिहास से पुनः जुड़ने का अवसर होता है। यह हमारे वर्तमान का आकलन करने और भविष्य की राह बनाने के बारे में चिंतन करने का अवसर भी है। आज हम देख रहे हैं कि भारत ने न केवल विश्व मंच पर अपना यथोचित स्थान बनाया है, बल्कि अंतर-राष्ट्रीय व्यवस्था में अपनी प्रतिष्ठा को बढ़ाया भी है। उन्होंने कहा कि अपनी यात्राओं और प्रवासी भारतीयों के साथ बातचीत के दौरान, मैंने अपने देश के प्रति उनमें एक नए विश्वास तथा गौरव का भाव देखा है।

राष्ट्रपारी द्रौपदी मुर्मू ने 77वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर कहा कि भारत, पूरी दुनिया में, विकास के लक्ष्यों और मानवीय सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत ने अंतर-राष्ट्रीय मंचों पर अग्रणी स्थान बनाया है तथा G-20 देशों की अध्यक्षता का दायित्व भी संभाला है। उन्होंने कहा कि चूँकि G-20 समूह दुनिया की दो-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए यह हमारे लिए वैश्विक प्राथमिकताओं को सही दिशा में ले जाने का एक अद्वितीय अवसर है।

बकौल राष्ट्रपति, G-20 की अध्यक्षता के माध्यम से भारत, व्यापार और वित्त के क्षेत्रों में हो रहे निर्णयों को न्याय-संगत प्रगति की ओर ले जाने में प्रयासरत है। व्यापार और वित्त के अलावा, मानव विकास से जुड़े विषय भी कार्य-सूची में शामिल किए गए हैं। ऐसे कई मुद्दे हैं जो पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण हैं और किसी भौगोलिक सीमा से बंधे हुए नहीं हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत के प्रभावी नेतृत्व के साथ, G-20 के सदस्य-देश उन मोर्चों पर उपयोगी कार्रवाई को आगे बढ़ाएँगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारत की G-20 की अध्यक्षता में एक नई बात यह है कि कूटनीति को जमीन से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि एक अंतर-राष्ट्रीय राजनयिक गतिविधि में लोगों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए अपनी तरह का पहला अभियान चलाया गया है। उन्होंने उदाहरण गिनाया कि कैसे स्कूलों और कॉलेजों में G-20 से जुड़े विषयों पर आयोजित की जा रही गतिविधियों में विद्यार्थी उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। G-20 से जुड़े कार्यक्रमों के बारे में सभी नागरिकों में बहुत उत्साह देखने को मिल रहा है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आगे कहा, “सशक्तीकरण की भावना से युक्त इस उत्साह का संचार आज संभव हो पाया है, क्योंकि हमारा देश सभी मोर्चों पर अच्छी प्रगति कर रहा है। मुश्किल दौर में भारत की अर्थव्यवस्था न केवल समर्थ सिद्ध हुई है बल्कि दूसरों के लिए आशा का स्रोत भी बनी है। विश्व की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएं नाजुक दौर से गुजर रही हैं। वैश्विक महामारी के कारण हुए आर्थिक संकट से विश्व-समुदाय पूरी तरह बाहर नहीं आ पाया था कि अंतर-राष्ट्रीय पटल पर हो रही घटनाओं से अनिश्चितता का वातावरण और गंभीर हो गया है। फिर भी, सरकार कठिन परिस्थितियों का अच्छी तरह सामना करने में सक्षम रही है। देश ने चुनौतियों को अवसरों में बदला है और प्रभावशाली GDP विकास भी दर्ज की है। हमारे अन्नदाता किसानों ने हमारी आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्र उनका ऋणी है।”

उन्होंने ये भी कहा कि वैश्विक स्तर पर, मुद्रास्फीति यानी महँगाई चिंता का कारण बनी हुई है, लेकिन सरकार और रिजर्व बैंक इस पर काबू पाने में सफल रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने जन-सामान्य पर मुद्रास्फीति का अधिक प्रभाव नहीं पड़ने दिया है और साथ ही गरीबों को व्यापक सुरक्षा कवच भी प्रदान किया है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे वैश्विक आर्थिक विकास के लिए दुनिया की निगाहें आज भारत पर टिकी हुई हैं। आज भारत विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था बन गया है। विश्व में सबसे तेजी से बढ़ रही बड़ी अर्थ-व्यवस्था के रूप में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। हमारी आर्थिक प्रगति की इस यात्रा में समावेशी विकास पर जोर दिया जा रहा है।

उन्होंने समझाया कि निरंतर हो रही आर्थिक प्रगति के दो प्रमुख आयाम हैं। एक ओर, व्यवसाय करना आसान बनाकर और रोजगार के अवसर पैदा करके उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। दूसरी ओर, जरूरतमंदों की सहायता के लिए विभिन्न क्षेत्रों में पहल की गई है तथा व्यापक स्तर पर कल्याणकारी कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि वंचितों को वरीयता प्रदान करना हमारी नीतियों और कार्यों के केंद्र में रहता है। परिणामस्वरूप पिछले दशक में बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी से बाहर निकालना संभव हो पाया है। उन्होंने जानकारी दी कि इसी प्रकार जनजातीय समाज की स्थिति में सुधार लाने और उन्हें प्रगति की यात्रा में शामिल करने हेतु विशेष कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उन्होंने जनजातीय समाज के भाई-बहनों से अपील की कि आप सब अपनी परंपराओं को समृद्ध करते हुए आधुनिकता को अपनाएँ।

उन्होंने कहा, “मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि आर्थिक विकास के साथ-साथ मानव विकास संबंधी सरोकारों को भी उच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मैं एक शिक्षक रही हूँ, इस नाते भी मैंने यह समझा है कि शिक्षा, सामाजिक सशक्तीकरण का सबसे प्रभावी माध्यम है। वर्ष 2020 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति से बदलाव आना शुरू हो गया है। विभिन्न स्तरों पर विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के साथ मेरी बातचीत से मुझे ज्ञात हुआ है कि अध्ययन की प्रक्रिया अधिक लचीली हो गई है। इस दूरदर्शी नीति का एक प्रमुख उद्देश्य प्राचीन मूल्यों को आधुनिक कौशल के साथ जोड़ना है। इससे, आने वाले वर्षों में, शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन होंगे और परिणामस्वरूप, देश में एक बहुत बड़ा बदलाव दिखाई देगा। भारत की प्रगति को, देशवासियों, विशेषकर युवा पीढ़ी के सपनों से शक्ति मिलती है। विकास की अनंत संभावनाएं देशवासियों की प्रतीक्षा कर रही हैं। स्टार्ट-अप से लेकर खेल-कूद तक, हमारे युवाओं ने उत्कृष्टता के नए आसमानों की उड़ान भरी है।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आज के नए भारत की महत्वाकांक्षाओं के नए क्षितिज असीम हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन नई ऊंचाइयों को छू रहा है और उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि कैसे इस वर्ष, ISRO ने चंद्रयान-3 लॉन्च किया है, जो चंद्रमा की कक्षा में प्रवेश कर चुका है, और कार्यक्रम के अनुसार उसका ‘विक्रम’ नामक Lander तथा ‘प्रज्ञान’ नामक रोवर अगले कुछ ही दिनों में चंद्रमा पर उतरेंगे।

उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए वह गौरव का क्षण होगा और उन्हें भी उस पल का इंतजार है। बकौल राष्ट्रपति, चंद्रमा का अभियान अन्तरिक्ष के हमारे भावी कार्यक्रमों के लिए केवल एक सीढ़ी है। हमें बहुत आगे जाना है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष अभियान में ही नहीं बल्कि धरती पर भी हमारे वैज्ञानिक और तकनीक देश का नाम रोशन कर रहे हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जानकारी दी कि अनुसंधान, नवाचार तथा उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए, अगले 5 वर्षों में 50,000 करोड़ रुपए की राशि के साथ सरकार द्वारा Anusandhaan National Research Foundation स्थापित किया जा रहा है। यह Foundation हमारे कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केन्द्रों में Research एवं Development को आधार प्रदान करेगा, उन्हें विकसित करेगा तथा आगे ले जाएगा।

उन्होंने कहा, “ज्ञान-विज्ञान में उत्कृष्टता प्राप्त करना ही हमारा लक्ष्य नहीं है बल्कि हमारे लिए वे मानवता के विकास के साधन हैं। एक क्षेत्र जिस पर पूरे विश्व के वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं को और अधिक तत्परता से ध्यान देना चाहिए वह है – जलवायु परिवर्तन। हाल के वर्षों में, बड़ी संख्या में extreme weather events हुए हैं। देश के कुछ हिस्सों में असाधारण बाढ़ का सामना करना पड़ा है। कुछ स्थान, सूखे की मार झेलते हैं। इन सब का एक प्रमुख कारण जलवायु परिवर्तन को भी माना जाता है। अतः पर्यावरण के हित में स्थानीय, राष्ट्रीय तथा वैश्विक स्तर पर प्रयास करना अनिवार्य है। इस संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में हमने अभूतपूर्व लक्ष्यों को प्राप्त किया है। अंतर-राष्ट्रीय सौर-ऊर्जा अभियान को भारत ने नेतृत्व प्रदान किया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में हमारा देश अग्रणी भूमिका निभा रहा है। विश्व समुदाय को हमने LiFE यानि Lifestyle for Environment का मंत्र दिया है।”

राष्ट्रपति ने ये भी कहा कि असामान्य मौसम की घटनाएँ सभी पर असर डालती हैं। लेकिन गरीब और वंचित वर्गों के लोगों पर उनका और अधिक प्रभाव पड़ता है। शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों को जल-वायु परिवर्तन की स्थितियों का सामना करने के लिए विशेष रूप से सक्षम बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोभ की संस्कृति दुनिया को प्रकृति से दूर करती है और अब हमें यह एहसास हो रहा है कि हमें अपनी जड़ों की ओर लौटना चाहिए। आज भी अनेक जनजातीय समुदाय ऐसे हैं जो प्रकृति के बहुत करीब और प्रकृति के साथ सौहार्द बनाकर रहते हैं। उनके जीवन-मूल्य और जीवन-शैली क्लाइमेट एक्शन के क्षेत्र में अमूल्य शिक्षा प्रदान करते हैं।

बकौल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जनजातीय समुदायों द्वारा युगों से अपना अस्तित्व बनाए रखने के रहस्य को एक शब्द में ही व्यक्त किया जा सकता है। वह शब्द है: हमदर्दी। जन-जातीय समुदाय के लोग प्रकृति को माता समझते हैं तथा उसकी सभी संतानों अर्थात वनस्पतियों और जीव-जंतुओं के प्रति सहानुभूति रखते हैं। उन्होंने कहा कि कभी-कभी दुनिया में हमदर्दी की कमी महसूस होती है, लेकिन इतिहास साक्षी है कि ऐसे दौर केवल कुछ समय के लिए ही आते हैं, क्योंकि करुणा हमारा मूल स्वभाव है। उन्होंने अपना अनुभव साझा किया कि महिलाएँ हमदर्दी के महत्व को और अधिक गहराई से महसूस करती हैं और जब मानवता अपनी राह से भटकती है तो वे सही रास्ता दिखाती हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे देश ने नए संकल्पों के साथ ‘अमृत काल’ में प्रवेश किया है तथा हम भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। आइए, हम सभी अपने संवैधानिक मूल-कर्तव्य को निभाने का संकल्प लें तथा व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर आगे बढ़ने का सतत प्रयास करें ताकि हमारा देश निरंतर उन्नति करते हुए कर्मठता तथा उपलब्धियों की नई ऊँचाइयाँ हासिल करे।

अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा संविधान हमारा मार्गदर्शक दस्तावेज है। संविधान की प्रस्तावना में हमारे स्वाधीनता संग्राम के आदर्श समाहित हैं। आइए, हम अपने राष्ट्र निर्माताओं के सपनों को साकार करने के लिए सद्भाव और भाई-चारे की भावना के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर विशेष रूप से सीमाओं की रक्षा करने वाले सेना के जवानों, आंतरिक सुरक्षा प्रदान करने वाले सभी बलों एवं पुलिस के जवानों तथा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दी।

कमलनाथ राज में विकास ठप था, सिंधिया ने टोका तो कहा सड़क पर आ जाओ निपट लेंगे: CM शिवराज ने बताई कॉन्ग्रेस में टूट की स्टोरी

मध्य प्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। अभी राज्य में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार चल रही है। 2018 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य की सत्ता कॉन्ग्रेस को मिली थी। लेकिन कुछ ही महीनों में ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस टूट गई और कमलनाथ की सरकार गिर गई। न्यूज एजेंसी एएनआई की संपादक स्मिता प्रकाश के पॉडकास्ट में सीएम शिवराज ने कॉन्ग्रेस में टूट की वजह बताई है।

शिवराज सिंह ने बताया है कि कॉन्ग्रेस में टूट के पीछे बीजेपी की कोई भूमिका नहीं थी। कमलनाथ के शासनकाल में प्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया था। सचिवालय दलालों का अड्डा बन गया था। इसको लेकर जब ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सवाल उठाए तो कमलनाथ ने उनको सीधी चुनौती दी। इसके बाद कॉन्ग्रेस टूट गई। उन्होंने कहा कि जब सिंधिया जी ने अपने लोगों के साथ कॉन्ग्रेस छोड़ दी और हमारे पास आ गए तो प्रदेश के हित में हमने सरकार बनाने का फैसला किया।

कमलनाथ राज में दलालों का अड्डा बना गया था सचिवालय: शिवराज

स्मिता प्रकाश के सवाल के जवाब में शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “हमने कुछ नहीं किया। कमलनाथ के राज में हाहाकार मच गया था। वल्लभ भवन (सचिवालय) दलालों का अड्डा बन गया। चारों तरफ लूट का आलम था। हालत यह हो गई थी कि बिना लिए-दिए कुछ होता ही नहीं था। विकास के सारे काम ठप कर दिए और जब ऐसी चीजों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने टोका तो ये उनसे अकड़ गए। सड़क पर आ जाओ। निपट लेंगे। देख लेंगे।”

उन्होंने आगे कहा, “हम तो ये देखकर व्यथित हो रहे थे कि बड़ी मुश्किल से हम (BJP) प्रदेश की गाड़ी को विकास की पटरी पर लेकर आए और ये (कॉन्ग्रेस) पूरा सत्यानाश कर रहे हैं। उन्होंने अपने लोगों को भी हर्ट किया। सिंधिया अपने साथियों को लेकर आ गए। फिर हम क्या करते? एक तरफ इतनी निकम्मी और नकारा भ्रष्ट सरकार। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस पार्टी टूट गई। खुद फैसला कर रही है कि हमें सरकार में नहीं रहना है। तब प्रदेश के हित में हमने सरकार बनाई।”

बता दें कि साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को 114 सीटें मिली थी। भाजपा को 109 और बसपा को 2 सीटों पर जीत मिली थी। चुनाव के बाद कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे। लेकिन सिंधिया कैंप की बगावत के बाद मध्य प्रदेश में 23 मार्च 2020 को शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। सिंधिया कैंप के 22 कॉन्ग्रेसी विधायकों के इस्तीफे के बाद भाजपा बहुमत में आ गई थी।

‘तुम सब बोलो – मैं अल्लाह का गुलाम हूँ, वरना बम से उड़ा दूँगा प्लेन’: मोहम्मद की वजह से वापस लैंड करानी पड़ी फ्लाइट, 199 यात्रियों को निकाला गया

ऑस्ट्रेलिया से मलेशिया जाने वाले एक कमर्शियल विमान को सोमवार (14 अगस्त, 2023) को सिडनी लौटना पड़ा। एक आपात स्थिति आ जाने की वजह से ये फैसला लिया गया। मलेशिया एयरलाइन्स की फ्लाइट ‘MH122’ ने दोपहर के 1:40 बजे सिडनी से उड़ान भरी थी। कुलालम्पुर की यात्रा में वहाँ से 8 घंटे में तय की जाती है। हालाँकि, 2 घंटे बाद 3:47 बजे कट फ्लाइट को सिडनी के ही रनवे पर वापस उतारा गया।

एक यात्री ने ट्वीट किया कि विमान के भीतर कर्मचारियों और यात्रियों को धमकी दे रहा है। दावा किया गया कि पीठ पर बैग टाँगे हुए एक व्यक्ति ने पूरे विमान को बम से उड़ाने की धमकी दे डाली। बाद में क्रू ने जब उस बैग की जाँच की तो उसमें कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने इस मामले में 45 साल के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि एक व्यक्ति विमान में अचानक से आक्रमण हो उठा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा।

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने इसे आपात स्थिति मानते हुए तुरंत कार्रवाई की। इमरजेंसी व्हीकल्स के साथ फ्लाइट को रनवे पर वापस पार्क किया गया। इस एक घटना के कारण 32 घरेलू विमानों को रद्द करना पड़ा। बाक़ी विमानों में भी डेढ़ घंटे तक की देरी हुई। हालाँकि, किसी अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट को रद्द करने की नौबत नहीं आई। जिस विमान में बम होने की धमकी मिली, उसमें 199 यात्री और 12 क्रू मेंबर शामिल थे। विमान में लोगों को धमकाते व्यक्ति का वीडियो भी सामने आया है।

ऑस्ट्रेलिया की पुलिस ने बताया कि इमरजेंसी प्लान बना कर सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाला गया। वहीं मलेशिया एयरलाइंस ने कहा है कि व्यवधान पैदा करने वाले एक यात्री की वजह से ऐसा हुआ। कंपनी ने बताया कि सेफ्टी और कम्फर्ट को ध्यान में रखते हुए फ्लाइट को वापस लिया गया। फिर पुलिस पूरे एयरक्राफ्ट की बारीकी से जाँच की। यात्रियों को अगली उपलब्ध फ्लाइटों से भेजा गया। फ़िलहाल एयरपोर्ट पर आवागमन सामान्य है।

फ्लाइट में लोगों को धमकाते व्यक्ति का वीडियो भी सामने आया है। कई खबरों और ट्वीट्स में बताया गया है कि वो खुद को ‘अल्लाह का गुलाम’ बता रहा था। वीडियो में देखा जा सकता है कि सफ़ेद दाढ़ी वाला गांजा व्यक्ति ऊँगली दिखा कर धमकियाँ दे रहा है। ‘डेली मेल’ की खबर के अनुसार, उक्त व्यक्ति का नाम मोहम्मद है। क्रू मेंबर्स ने किसी तरह उसे अन्य यात्रियों से अलग किया। वो अन्य व्यक्तियों को भी कह रहा था, “तुम सब दोहराओ – मैं अल्लाह का गुलाम हूँ।”

लाल किले पर विशेष अतिथि होंगे सेंट्रल विस्टा के श्रम योगी, सरपंच और किसान भी होंगे: स्वतंत्रता दिवस पर 954 को पुलिस पदक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त 2023 को दिल्ली के लाल किले से 77वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इस पारंपरिक आयोजन के इस साल खास मेहमान श्रम योगी, किसान और सरपंच भी होंगे। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बताया है कि इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में देश भर से विभिन्न कार्यों से जुड़े करीब 1800 लोगों को उनके जीवनसाथी के साथ आमंत्रित किया गया है। यह पहल सरकार के ‘जनभागीदारी’ दृष्टिकोण के तहत की गई है।

इस बार 1800 खास मेहमान

1800 विशेष अतिथियों में 50 ऐसे श्रमिक होंगे जो सेंट्रल विस्टा के निर्माण से जुड़े हैं। इनके अलावा 660 से अधिक वाइब्रेंट गाँवों के 400 से अधिक सरपंच, किसान उत्पादक संगठन योजना से जुड़े 250 लोग, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के 50-50 लाभार्थी, 50 खादी कार्यकर्ता, सीमा पर स्थित सड़कों के निर्माण, अमृत सरोवर और हर घर जल योजना से जुड़े लोगों के साथ-साथ 50-50 प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक, नर्स और मछुआरे शामिल हैं।

17 हजार से अधिक ई-निमंत्रण कार्ड

रक्षा मंत्रालय ने एक खास वेबसाइट के माध्यम से 17 हजार ई-आमंत्रण कार्ड जारी किए हैं। इसके साथ ही शीशगंज गुरुद्वारा से लेकर विजय चौक, इंडिया गेट, जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन, राजीव चौक मेट्रो स्टेशन, राष्ट्रीय युद्ध स्मारक जैसी 12 जगहों पर सेल्फी प्वाइंट भी बनाए गए हैं। ये सेल्फी प्वाइंट सरकार की योजनाओं के प्रचार-प्रसार की थीम पर बनाए गए हैं। सेल्फी प्रतियोगिता के 12 विजेताओं को 10-10 हजार रुपए का पुरस्कार भी दिया जाएगा।

954 पुलिसकर्मियों को पुलिस पदक

स्वतंत्रता दिवस, 2023 के अवसर पर कुल 954 पुलिस कर्मियों को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है। 01 सीआरपीएफ कर्मी को वीरता के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (पीपीएमजी) प्रदान किया गया है। 229 को पुलिस पदक (पीएमजी) प्रदान किया गया है। 82 को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक (पीपीएम) और 642 को सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक (पीएम) से सम्मानित किया गया है। 230 वीरता पुरस्कारों में से नक्सली प्रभावित क्षेत्रों के 125 कर्मियों, जम्मू-कश्मीर क्षेत्र के 71 कर्मियों और पूर्वोत्तर क्षेत्र के 11 कर्मियों को उनके वीरतापूर्ण कार्य के लिए सम्मानित किया जा रहा है।

पाकिस्तान में अंग्रेजी टीचर अब्दुल रऊफ को गोलियों से भून डाला, ईशनिंदा में मौलवियों ने बुलाया था: दावा – लेक्चर के दौरान की इस्लाम विरोधी बातें

पाकिस्तान के ग्वादर प्रांत में ईशनिंदा का आरोप लगा कर हत्या की खबर आई है। ईशनिंदा के आरोप में भाषा विभाग से जुड़े एक युवा शिक्षक की अज्ञात हथियारबंद लोगों ने गोली मरकर हत्या कर दी। मामला पाकिस्तान के केच जिले के तुरबत शहर का है।

पाकिस्तानी मीडिया पोर्टल ‘डॉन’ की खबर के अनुसार, पुलिस ने कहा कि 22 वर्षीय अंग्रेजी शिक्षक अब्दुल रऊफ को शनिवार (5 अगस्त, 2023) को मलिकाबाद इलाके में एक कब्रिस्तान के पास निशाना बनाया गया, जब वह कुछ लोगों के साथ इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए उलेमाओं की एक सभा में पेश होने जा रहा था।

मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भाषा केंद्र के छात्रों ने स्थानीय मौलवियों के पास शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें रऊफ पर एक व्याख्यान के दौरान ईशनिंदा करने का आरोप लगाया गया था। देखते ही देखते इस मामले ने सोशल मीडिया पर भी तूल पकड़ लिया। 

प्रिंसिपल सुधीर अहमद ने कहा कि उलेमा के एक समूह ने शुक्रवार (4 अगस्त, 2023) को भाषा केंद्र का दौरा किया और इस मुद्दे पर छात्रों और अंग्रेजी शिक्षक रऊफ की बात सुनी। तब  रऊफ ने आरोप से इनकार किया और जोर देकर कहा कि उन्होंने ईशनिंदा नहीं की है। साथ ही उन्होंने इस मुद्दे पर किसी भी आपत्तिजनक शब्द के लिए माफी माँगी। वहीं मौलवियों ने रऊफ को यकीन दिलाया था कि वे इस मुद्दे को सुलझा लेंगे और अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए मदरसे में होने वाली जिरगा में बुलाया था।

मुफ्ती शाह मीर ने कहा, “मैंने अब्दुल रऊफ को जिरगा में आमंत्रित किया, जहाँ तुर्बत के 100 से अधिक उलेमा मुद्दे को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने के लिए मौजूद थे, लेकिन अज्ञात नकाबपोश लोगों ने मदरसा पहुँचने से पहले ही उसकी हत्या कर दी।”

उन्होंने बताया कि हत्या के बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। हालाँकि, शिक्षक के परिवार ने पुलिस में कोई मामला दर्ज नहीं कराया है। बल्कि शव लेने के बाद सीधा दफनाने के लिए अपने पैतृक शहर नागोर क्षेत्र में ले गए। वहीं रिपोर्ट में या दावा किया गया है पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।

राजस्थान में 70 साल के संत की चाकू मारकर हत्या, आश्रम के फर्श पर पड़ा था शव: रस्सी से बँधे थे हाथ-पैर, मुँह और आँखों पर थी पट्टी

राजस्थान के नागौर में 70 साल के संत मोहन दास की चाकू मारकर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। उनका शव आश्रम के फर्श पर पड़ा था। खून बिखरे हुए थे। हाथ-पैर रस्सी से बँधे थे। मुँह और आँखों पर पट्टी थी। यह आश्रम कुचामन थाना क्षेत्र के रसाल गाँव में स्थित है। हरिराम बाबा की बगीची नामक इस आश्रम के भैरो बाबा मंदिर में संत मोहन दास 14 साल से सेवा कर रहे थे।

संत की हत्या की खबर लोगों को सोमवार (14 अगस्त, 2023) की सुबह पता चली। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार की सुबह करीब 8 बजे नर सिंह नाम का एक श्रद्धालु आश्रम गए। उन्हों संत मोहन दास को आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद जब वे मंदिर के पीछे बरामदे की तरफ गए तो वहाँ संत का शव बिस्तर के पास फर्श पर पड़ा मिला। शव के पास ही खून बिखरा हुआ था। उन्होंने तुरंत गाँव वालों को सूचना दी। इसके बाद करीब 8.30 बजे सुबह पुलिस मौके पर पहुँची।

चाकू घोंपकर संत की हत्या

पुलिस ने प्रारंभिक जाँच के बाद बताया हो कि हत्या रविवार (13 अगस्त, 2023) रात को हुई। उनके शरीर पर धारदार हथियार के कई निशान पाए गए हैं। मोहन दास के परिजनों ने हत्या के इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। मोहन दास के भतीजे त्रिलोक राम और बाकी परिजनों ने आरोपितों को जल्द से जल्द पकड़ने की माँग की। उनका कहना है कि जब तक पुलिस दोषियों को गिरफ्तार नहीं करती है, तब तक वे शव नहीं लेंगे।

भतीजे त्रिलोक राम ने पुलिस को बताया कि रविवार रात 8 बजे तक मोहन दास गाँव वालों के साथ बातचीत कर रहे थे। इसके बाद वह सोने के लिए अपने कमरे में चले गए। गाँव वाले भी बगीची से अपने घर की ओर चले गए। आश्रम में रात में उनके अलावा कोई नहीं था। सुबह नर सिंह से पता चला कि उनकी डेड बॉडी मिली है।

कौन-कौन है परिवार में 

संत मोहन दास के परिवार में पत्नी, 3 बेटे और 1 बेटी है, जो गाँव में रहते हैं। रात में वे अकेले ही आश्रम में रहते थे। दिन में उनके दो चेले साथ रहते थे, जो रात को गाँव की गोशाला में सोने चले जाते थे। सुबह 8 से शाम 8 बजे तक आश्रम में गाँव और आस-पास के लोगों का आना-जाना लगा रहता था। 

जाँच में जुटी पुलिस 

जिला एसपी प्रवीण कुमार ने बताया कि  शुरुआती जाँच में चोरी के मकसद से हत्या का मामला लग रहा है। संत के परिजनों ने शिकायत दी है। फिलहाल आरोपितों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है। जाँच की जा रही है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा।

नासिर-जुनैद को मोनू मानेसर ने नहीं जिंदा जलाकर मारा: राजस्थान के DGP ने बताया- हत्या में नहीं मिली सीधी संलिप्तता, गोरक्षक के पीछे पड़ा है जुबैर एन्ड गिरोह

राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) उमेश मिश्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कई सवालों के जवाब दिए हैं। उन्होंने राजस्थान पुलिस की कार्रवाइयों और राज्य में अपराध को लेकर स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने NCRB का हवाला देते हुए कहा कि अपराध में बढ़ोतरी का मतलब ये नहीं है कि पुलिस निष्क्रिय है। उन्होंने कहा कि अपराध के आँकड़े बढ़ने और इसके पंजीकृत होने की संख्या बढ़ने – दोनों में अंतर है। उन्होंने कहा कि 2022 की तुलना में इस साल अपराध में 0.6% की नगण्य वृद्धि हुई है।

उमेश मिश्रा ने कहा कि डकैती की घटनाओं में 25% की कमी आई है। उन्होंने कहा कि इस साल हत्या, अपहरण और लूट जैसी घटनाओं में कमी आई है। महिला अत्याचार के विषय में उन्होंने कहा कि पिछले साल के मुकाबले इसमें आंशिक कमी आई है। उन्होंने कहा कि कन्विक्शन प्रतिशत रेप के मामलों में राजस्थान पुलिस का 48% है, जबकि राष्ट्रीय औसत 30% है। उन्होंने बताया कि पॉक्सो के मामले में भी ये आँकड़ा 48% है।

राजस्थान पुलिस ने बढ़ाया कन्विक्शन रेट, अपराधियों मर भय: DGP

उन्होंने बताया कि 2019-23 में 1590 प्रकरणों में सज़ा हुई है, जिनमें 13 में फाँसी की सज़ा, 255 में आजीवन कारावास और 386 में 20 वर्ष की सज़ा दिलाई गई। उन्होंने बताया कि औसतन 54 दिनों में जाँच पूरी की जा रही है। दलित-जनजातीय समाज विरोधी अपराध के मामले में भी उन्होंने कहा कि औसतन 64 दिनों में जाँच पूरी कर ली जाती है और सज़ा का प्रतिशत 41% है, इसे और बेहतर किया जाएगा। उन्होंने इसे पड़ोसी राज्यों से बेहतर करार दिया।

उन्होंने राजस्थान पुलिस को संवेदनशील और प्रोफेशनल करार दिया। उन्होंने दावा किया कि अपराधियों में पुलिस का भय बढ़ा है। उन्होंने बताया कि 45 इनामी अपराधी गिरफ्तार किए हैं, जिसमें माफिया कमल राणा प्रमुख है। हिस्ट्रीशीटर्स के अर्थतंत्र पर प्रहार की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वैधानिक दायरे में रह कर 12 अपराधियों की संपत्तियाँ ध्वस्त की गई हैं। उन्होंने 56,000 से भी अधिक अपराधियों की गिरफ़्तारी की बात की, जिनमें 4475 सामान्य प्रकरण के अपराधी थे।

उन्होंने राजस्थान में गुंडों पर शिकंजा के लिए बने नए कानून के लागू होने पर पुलिस के और प्रभावशाली होने की बात कही। ड्रग्स को लेकर उन्होंने बताया कि 20 किलोग्राम हेरोइन, 24 किलोग्राम अफीम और कई अन्य मादक पदार्थ हाल के दिनों में जब्त किए गए हैं। उन्होंने बताया कि हत्या के 206 मामलों में 12 घंटे के भीतर अपराधी गिरफ्तार कर लिए गए, 24 घंटों के भीतर 173 और 7 दिनों के भीतर 274 अपराधी गिरफ्तार हुए।

उन्होंने बताया कि गैंगरेप के मामलों में भी 12 घंटे से कम समय में 26 एयर 24 घंटे में 72 अपराधी गिरफ्तार किए गए। कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि छोटी-मोटी घटनाएँ चलती रहती हैं, लेकिन किसी बड़े सांप्रदायिक घटना को होने से रोका गया है। उन्होंने बताया कि खूँखार अपराधी रोहित गोदारा देश से बाहर है और कई राज्यों में वॉन्टेड है, उसके गिरोह के लोग धराए हैं। उसे गिरफ्तार करने के लिए प्रयास चल रहा है।

मोनू मानेसर को लेकर राजस्थान पुलिस ने दिया जवाब

उन्होंने बताया कि 2 ऐसी घटनाएँ हुईं, जहाँ कई थानों की पुलिस ने लाइव चीज में अपराधियों को पकड़ा, वो मारे भी गए। इस दौरान NDTV की पत्रकार ने हिन्दू कार्यकर्ता और गोरक्षक मोनू मानेसर को लेकर सवाल पूछा। वीडियो में 26वें मिनट में आप ये देख सकते हैं। सवाल में दावा किया गया कि उन्हें लेकर राजस्थान-हरियाणा में राजनीतिक खींचातानी चल रही है। सवाल पूछा गया कि हरियाणा पुलिस से मोनू मानेसर को गिरफ्तार किए जाने की दिशा में क्या मदद मिली है?

इसके जवाब में राजस्थान के डीजीपी उमेश मिश्रा ने बताया कि राजस्थान पुलिस की एक टीम नूँह भी गई थी। उन्होंने कहा कि वो हरियाणा पुलिस पर कोई आरोप नहीं लगाना चाहेंगे, राजस्थान पुलिस का प्रोफेशन तरीका है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रमुख मुद्दा है वो इंटेलिजेंस का है, ये होगा तो वो पकड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस घटना (नासिर-जुनैद की हत्या) में जो सीधी तरह शामिल हैं, एक अपराधियों का इनर सर्कल होता है, इस घटना में जो प्रत्यक्षतः शामिल थे, उनमें वो नहीं हैं।

DGP ने आगे बताया, “एक दूसरी जो भूमिका होती है बैकग्राउंड से, उसकी तफ़तीश जारी है। हम उसके लिए कोशिश भी कर रहे हैं। हम ये नहीं कह सकते कि हरियाणा पुलिस कितना सहयोग कर रही है और कितना नहीं – कई चीजें सार्वजनिक नहीं की जाती। लेकिन, ये सच है कि अब तक मोनू मानेसर हमारे सामने नहीं आया है। दूसरे अपराधियों को लेकर भी हमने हरियाणा पुलिस से निवेदन किया है। हो सकता है उनके पास भी कोई इंटेलिजेंस न हो, हम कोई टिप्पणी करने से बचेंगे।”

उन्होंने कहा कि जब तक अपराधी गिरफ्तार न हो, हम ये नहीं कह सकते कि जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है। उन्होंने पड़ोसी राज्यों पर भरोसा जताने की बात करते हुए कहा कि उन्हें मदद मिली भी है और सीनियर लेवल पर वार्ता होती रहती है। क्या राजस्थान पुलिस की टीम वहाँ जाएगी? इस पर डीजीपी ने कहा कि ऐसे डिटेल्स प्रेस कॉन्फ्रेंस में उजागर नहीं किए जा सकते। बता दें कि नासिर और जुनैद के ज़िंदा जलने के केस में मोनू मानेसर का हाथ होने का आरोप लगाया गया था।

नासिर और जुनैद के ज़िंदा जलने की घटना, गौ-तस्करी का था आरोप

ये दोनों राजस्थान के भरतपुर के पहाड़ी थाना क्षेत्र के घाटमीका गाँव के रहने वाले थे। आरोप है कि नासिर और जुनैद का अपहरण किया गया, फिर बोलेरो में ज़िंदा जला कर मार डाला गया।इस मामले में रिंकू सैनी को मुख्य आरोपित बनाया गया, जिसे गिरफ्तार भी कर लिया गया है। इस मामले में राजस्थान पुलिस ने 30 आरोपितों की सूची तैयार की थी। इनमें से 3 के खिलाफ चार्जशीट भी दायर कर दी गई थी। भरतपुर के गोपालगढ़ में ये केस दर्ज हुआ था।

15 फरवरी, 2023 को अपहरण का मामला दर्ज हुआ और अगले दिन हरियाणा के भिवानी में दोनों के शव और जली हुई गाड़ी मिली। नासिर-जुनैद के भाई जाबिर के एकाध बार टावर पर चढ़ कर आत्महत्या की धमकी भी दी थी, जिसके लिए उसे हिरासत में भी लिया गया था। बताया गया कि ये दोनों गायों की तस्करी करते थे। राजस्थान पुलिस के हवाले से ये भी चला कि कुछ आरोपित यूपी-हरियाणा चले गए, जहाँ पंचायतों ने उनकी रक्षा की। इसी मामले में मोनू मानेसर का नाम भी आया था।

इस्लामी कट्टरपंथी गिरोह ने इस घटना में मोनू मानेसर के शामिल होने को लेकर खूब हो-हल्ला मचाया था। मोहम्मद ज़ुबैर ने भी एक के बाद एक कई ट्वीट कर के कहा था कि मोनू मानेसर का नाम आरोपितों की सूची में है। इसके बाद उसने मोनू मानेसर के पिछले वीडियो को शेयर करना शुरू कर दिया। साथ ही गोरक्षकों के खिलाफ भी ज़हर उगला। अब राजस्थान पुलिस खुद कह रही है कि इस घटना में मोनू मानेसर की सीधी संलिप्तता नहीं थी।

अहमदाबाद के पौराणिक मंदिर में घुसा, कपड़े उतारे-डांस किया और तोड़ दी देवताओं की मूर्तियाँ: घटना CCTV में कैद

गुजरात के अहमदाबाद में दूधेश्वर श्मशान घाट के पास स्थित काल भैरव के मंदिर में तोड़फोड़ की घटना हुई है। यह पौराणिक मंदिर रिवर फ्रंट के पास है। इस घटना में कई देवताओं की मूर्तियों को तोड़ दिया गया। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर साबरमती रिवरफ्रंट ईस्ट पुलिस जाँच कर रही है। इस घटना के बाद से इलाके में तनाव व्याप्त है।

तोड़फोड़ की इस घटना में भैरव बाबा की मूर्ति की आँख निकाल दी गई। हनुमान जी का गदा तोड़ दिया गया। भगवान शिव की मूर्ति को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। पुलिस ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के आरोप में आईपीसी की धारा 295, 153-ए (2) के तहत शिकायत दर्ज की है।

8 अगस्त की रात की घटना

सीसीटीवी फुटेज की जाँच से पता चला है कि ये घटना 8 अगस्त को रात 8.50 से लेकर 9.50 के बीच हुई है। इस बारे में ईटीवी भारत और न्यूज 18 गुजरात ने रिपोर्ट प्रकाशित की है। घटना को लेकर पुलिस के पास शिकायत दूसरे दिन आई। ऑप इंडिया के पास एफआईआर की कॉपी मौजूद है।

एक ही व्यक्ति ने दिया वारदात को अंजाम

मंदिर के पीछे स्थित एक कंपनी के सीसीटीवी कैमरे में मंदिर में तोड़फोड़ की घटना दर्ज हो गई। अज्ञात व्यक्ति ने तोड़फोड़ करते समय अपने कपड़े भी उतारे और डांस भी किया। वो मंदिर के गुंबद पर भी चढ़ा था। उसने बाबा काल भैरव के वाहन की मूर्ति भी उठाकर दूर फेंक दी थी।

‘तानाशाह सरकार के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन करे जनता’: CJI चंद्रचूड़ के नाम पर बयान वायरल, सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ये फर्जी, करेंगे कार्रवाई

भारत के मुख्य न्यायाधीश DY चंद्रचूड़ के नाम से एक बयान वायरल हो रहा है, जिस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने भी संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट के PRO के इस बयान को फर्जी बताते हुए कहा है कि इसे वायरल करने वालों पर कानून के हिसाब से कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके संज्ञान में आया है कि एक सोशल मीडिया पोस्ट CJI डीवाई चंद्रचूड़ की फाइल फोटो के साथ वायरल की जा रही है, जिसमें जनता को सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन के लिए उकसाया गया है।

इस पोस्ट में लिखा गया है, “हम भारत के संविधान और लोकतंत्र को बचाने के लिए आना सर्वश्रेष्ठ दे रहे हैं। लेकिन, इसके लिए आपका सहयोग भी काफी आवश्यक है। सभी लोगों को एकजुट होना चाहिए, सड़कों पर उतरना चाहिए और सरकार से अपने अधिकारों को लेकर सवाल करने चाहिए। ये तानाशाह सरकार लोगों को डराएगी-धमकाएगी, लेकिन आपको डरना नहीं है। आपको साहसी बन कर सरकार से सवाल पूछना है। मैं आपके साथ हूँ। – DY चंद्रचूड़ (चीफ जस्टिस)”

अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ये पोस्ट न सिर्फ फर्जी है, बल्कि गलत इरादे वाला और शरारतपूर्ण भी है। न तो CJI ने इस तरह का कोई बयान दिया है और न ही ऐसा कोई पोस्ट जारी किया गया है – ये भी सुप्रीम कोर्ट ने साफ़ कर दिया है। इस संबंध में जाँच एजेंसियों के साथ तालमेल कर के उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है, ये जानकारी भी सर्वोच्च न्यायालय की तरफ से दी गई है। कइयों ने ‘सुप्रीम कोर्ट ज़िंदाबाद’ लिख कर इस पोस्ट को शेयर किया।

सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल अतुल कुरहेकर ने कहा कि हिंदी और अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में व्हाट्सएप्प के माध्यम से CJI डीवाई चंद्रचूड़ के नाम और ये बयान शेयर किया जा रहा है, जो पूरी तरह फर्जी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी इसे फर्जी बताते हुए कहा कि कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कोई CJI ऐसा नहीं करेगा, खासकर डीवाई चंद्रचूड़ जैसे प्रेरक मुख्य न्यायाधीश। इससे साफ़ हो गया है कि इस मैसेज को मोदी विरोधी एजेंडे के तहत शेयर किया जा रहा है।

कॉन्ग्रेस की ‘मोहब्बत की दुकान’ से अब मतदाताओं को ‘श्राप’, बोले पार्टी सांसद सुरजेवाला- जो BJP को वोट देते हैं वे राक्षस हैं…

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने इन दिनों ‘मोहब्बत की दुकान’ खोल रखी है। इस दुकान से नफरत की बिक्री तेजी से हो रही है। पहले लोकसभा में ​अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गाँधी ने खुद ‘भारत माता की हत्या’ जैसी भाषा बेची। अब उनकी राह पर चलते हुए उनके करीबी पार्टी नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बीजेपी समर्थकों को राक्षस बता दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा के कैथल में रविवार (13 अगस्त, 2023) को आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद सुरजेवाला ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और उसके समर्थक राक्षस हैं। जो बीजेपी को वोट देते हैं वे भी राक्षस हैं। मैं महाभारत की इस भूमि से आज उन्हें श्राप देता हूँ।” 

सुरजेवाला के बयान को अपमानजनक बताते हुए बीजेपी ने पलटवार किया है। हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने कहा है, “केवल राक्षस प्रवृत्ति के परिवार में जन्मा व्यक्ति ही ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के बारे में सोच सकता है। मुझे लगता है कि यह असंसदीय भाषा है। हम इस पर जरूर संज्ञान लेंगे।”

सुरजेवाला के बयान का वीडियो साझा करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्वीट कर कहा है, “बार-बार शहजादे को लॉन्च करने में असफल कॉन्ग्रेस पार्टी अब जनता-जनार्दन को ही गाली देने लगी। प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के विरोध में अंधेपन के शिकार हो चुके कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सुरजेवाला को कह रहे हैं- भाजपा को वोट और सपोर्ट करने वाली देश की जनता ‘राक्षस’ है।”

उन्होंने लिखा है, “एक तरफ 140 करोड़ देशवासियों के प्रधानसेवक मोदी जी हैं, जिनके लिए जनता ही जनार्दन का स्वरुप है तो दूसरी ओर कॉन्ग्रेस पार्टी है जिसके लिए जनता राक्षस का रूप है। देश की जनता इस फर्क़ को बखूबी समझती है और देश की जनता खुद इनके नफरत की मेगा शॉपिंग मॉल पर ताला लगाने का काम करेगी।”

वहीं बीजेपी आईटी हेड अमित मालवीय ने ट्वीट कर कहा है, “राहुल गाँधी के खास सुरजेवाला भाजपा को वोट देने वालों को राक्षस कह रहे हैं। श्राप भी दे रहे हैं। कॉन्ग्रेस, उसके आलाकमान और दरबारियों की इसी मानसिक स्थिति की वजह से पार्टी और उसके नेता जनाधार खो चुके हैं। लेकिन अभी तो इन्हें जनता के दरबार में और जलील होना है।”

रणदीप सुरजेवाला के विवादित बयान पर हरियाणा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ओपी धनखड़ और प्रदेश प्रभारी बिप्लब देव की भी प्रतिक्रिया सामने आई है। ओपी धनखड़ ने कहा है, “शायद भगवान ने रणदीप सुरजेवाला की मति (बुद्धि ) हर ली है, जा को मैं दारूण दुख देऊ, ताकि मति पहले हर लेऊ। जनता जनार्दन ईश्वर का विराट रूप है। मतदाता ईश्वर को राक्षस प्रवृत्ति का कहना घोर अपमानजनक है।”

बिप्लव देव ने कहा, “कॉन्ग्रेस के लिए जनता उस समय राक्षस बन जाती है जब वह उसे वोट न दे। ऐसे अहंकार को कुरुक्षेत्र ने महाभारत में भी हराया था, अगले चुनाव में भी हराएगी।”