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‘मुगलों के अत्याचार से पीड़ित था समाज, संत रविदास ने लाई जागृति’: PM मोदी ने MP में भव्य मंदिर का किया शिलान्यास, 11 एकड़ में ₹100 करोड़ की लागत से बनेगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के सागर में संत रविदास के मंदिर का भूमिपूजन किया। 11.21 एकड़ में बनने वाले इस मंदिर को 100 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जा रहा है। पीएम मोदी ने शनिवार (12 अगस्त, 2023) को सीएम शिवराज सिंह चौहान और कई अन्य साधु-संतों की मौजूदगी में भूमिपूजन किया। संत रविदास रचित 41 पद सिखों के गुरु ग्रन्थ साहिब में भी हैं। साथ ही हिन्दुओं, खासकर दलित समाज उनमें विशेष आस्था रखता है।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने उपस्थित लोगों से कहा कि सागर की धरती, संतों का सानिध्य, संत रविदास जी का आशीर्वाद और समाज के हर वर्ग से, हर कोने से, इतनी बड़ी संख्या में आशीर्वाद देने आए हुए आप सब महानुभाव और सागर में समरसता का महासागर उमड़ा हुआ है। पीएम मोदी ने कहा कि देश की इसी साझी संस्कृति को और समृद्ध करने के लिए आज यहाँ संत रविदास स्मारक और कला संग्रहालय की नींव पड़ी है।

उन्होंने कहा कि संतों की कृपा से उन्हें इस पवित्र स्मारक के भूमिपूजन का पवित्र अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि वो काशी के सांसद हैं, इसलिए यह उनके लिए दोहरी खुशी का अवसर है। उन्होंने जानकारी दी कि इस शिलान्यास के एक-डेढ़ साल के बाद मंदिर बन जाएगा तो लोकार्पण के लिए भी वो ज़रूर आएँगे। उन्होंने सागर की धरती संत शिरोमणि पूज्य रविदास जी के चरणों में नमन और प्रणाम करने की बात कही। पीएम मोदी ने बताया कि संत रविदास स्मारक और संग्रहालय में भव्यता भी होगी और दिव्यता भी होगी।

उन्होंने कहा, “समरसता की भावना से ओत-प्रोत 20 हजार से ज्यादा गाँवों की 300 से ज्यादा नदियों की मिट्टी आज इस स्मारक का हिस्सा बनी है। रविदास जी ने उस कालखंड में जन्म लिया था जब देश पर मुगलों का शासन था। समाज, अस्थिरता, उत्पीड़न और अत्याचार से जूझ रहा था। उस समय भी रविदास जी समाज को जगा रहे थे, उसे उसकी बुराइयों से लड़ना सीखा रहे थे। आज यहाँ कोटा-बिना सेक्शन पर रेल मार्ग के दोहरीकरण का भी लोकार्पण हुआ है। नेशनल हाईवे पर दो महत्वपूर्ण मार्गों का शिलान्यास भी किया गया है।”

उन्होंने बताया कि विकास के ये काम सागर और आसपास के लोगों को बेहतर सुविधाएँ देंगी। उन्होंने वहाँ की जनता को इसके लिए बधाई भी दी। पीएम मोदी ने कहा कि देश पर जब मुगलों का शासन था तो समाज अस्थिरता, उत्पीड़न और अत्याचार से जूझ रहा था, उस समय भी रविदास जी समाज को जागृत कर रहे थे और वो उसकी बुराइयों से लड़ना सीखा रहे थे। पीएम मोदी ने कहा कि आजादी के अमृतकाल में हम देश को गरीबी और भूख से मुक्त करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा, “हमने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू की। 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन सुनिश्चित किया। जब कोरोना की महामारी आई तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई। गरीबों के लिए हर कोई आशंका जता रहा था कि समाज का यह तबका कैसे रह पाएगा। तब मैं यह तय कि चाहे जो हो जाए, मैं अपने गरीब भाई-बहनों को खाली पेट सोने नहीं दूँगा। पहले की सरकारों के समय जो योजनाएँ आती थी, वो चुनाव मौसम के हिसाब से आती थी, लेकिन हमारी सोच है कि जीवन के हर पड़ाव पर देश दलित, वंचित, पिछड़े, आदिवासी, महिलाएँ इन सबके साथ खड़ा हो।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश का दलित हो, वंचित हो, पिछड़ा और आदिवासी हो, हमारी सरकार इन्हें उचित सम्मान दे रही है, नए अवसर दे रही है। उन्होंने कहा कि न इस समाज के लोग कमजोर हैं, न इनका इतिहास कमजोर रहा है। बकौल पीएम मोदी, एक से एक महान विभूतियाँ समाज के इन वर्गों से निकलकर आई हैं। उन्होंने राष्ट्र के निर्माण में असाधारण भूमिका निभाई है, इसलिए आज देश इनकी विरासत को भी गर्व के साथ सहेज रहा है।

पीएम मोदी ने ये भी बताया कि आज देश के 7 करोड़ भाई-बहनों को सिक्कल सेल एनिमिया से मुक्ति के लिए अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही कहा कि देश को 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के लिए काम हो रहा है। कालाजार और दिमागी बुखार का प्रकोप धीरे-धीरे कम हो रहा है। आज आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त इलाज की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने दशकों तक सरकारें चलाई वो गरीबों को पीने तक पानी की भी व्यवस्था नहीं की, यह काम भी उनकी सरकार जल जीवन मिशन के जरिए जोरों पर कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के कई राज्यों में जनजातीय समाज के गौरवशाली इतिहास को अमर करने के लिए म्यूजियम बन रहे हैं। भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन को देश ने जनजातीय गौरव दिवस के रुप में मनाने की परंपरा भी शुरू की है।

’20-30 लोगों (हिंदुओं) को टपकाना है’: अफजल ने नूहं दंगों के समय फैलाया था ये भड़काऊ मैसेज, पुलिस ने दबोच लिया

हरियाणा एसटीएफ और पुलिस की टीम 31 जुलाई को नूहं में हुई हिंसा के मामले में लगातार आरोपितों की धड़-पकड़ कर रही है। इसी कड़ी में इंटरनेट पर भड़काऊ वीडियो तथा ऑडियो मैसेज (20-30 लोगों को टपकाना है) डालने वाले अफजल को फिरोजपुर से गिरफ्तार कर लिया। आरोपित अफजल पर नूहं हिंसा में शामिल होने, आगजनी तथा तोड़फोड़ की घटना के वीडियो ‘मेवात का बदला’ नाम से इंटरनेट पर प्रसारित करने का आरोप है।

अफजल नूहं से सटे फिरोजपुर गाँव का रहने वाला है। उसके विरुद्ध साइबर सेल द्वारा 2 एफआइआर दर्ज की गई थी। सोशल मीडिया पर डाली जाने वाली भड़काऊ पोस्ट पर साइबर सेल की टीम द्वारा कुल 11 एफआईआर दर्ज की गई है। 

’20-30 लोगों को टपकाना है’

मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि घटना वाले ही दिन अफजल ने ही एक भड़काऊ मैसेज 2 वॉट्सऐप ग्रुपों में डाला था। इसमें संदेश था कि खेड़ला चौक पर 2-4 ही निपटे (2-4 हिंदू ही मारे गए) हैं, जब यात्रा भादस पहुँचेगी तो 20-30 लोगों (20-30 हिंदुओं) को टपकाना है।

रिपोर्ट में यह भी बताया जा रहा है कि नूहं दंगा की वीडियो तथा तस्वीर लेने वाले मीडियाकर्मियों के मोबाइल भी अफजल तथा उसके गैंग के दंगाइयों ने लूट लिए थे। वह खुद वीडियो बना कर अलग-अलग व्हाट्सप्प ग्रुप में फैला रहा था।

अब तक 218 गिरफ्तारी

नूहं दंगा मामले में हरियाणा एसटीएफ और पुलिस की टीमें हिंसा आरोपितों को लगातार पकड़ने में लगी हुई हैं। पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया ने सभी थाना प्रभारियों का निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध के बारे में पूरे सबूत होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

शुक्रवार (11 अगस्त, 2023) को भी 19 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद गिरफ्तार किए गए आरोपितों की संख्या 218 हो गई है। इसके अलावा 110 संदिग्ध अभी पुलिस की हिरासत में हैं। 

दंगाइयों के बचाव में कॉन्ग्रेस 

हरियाणा पुलिस की कार्रवाई पर कॉन्ग्रेसी विधायक आफताब अहमद और मोहम्मद इलियास आरोपितों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। दोनों मुस्लिम विधायक हरियाणा पुलिस द्वारा आरोपितों पर की जा रही कार्रवाई को निर्दोष लोगों पर कार्रवाई बताते हुए बचाव में आ गए हैं।

कॉन्ग्रेसी नेता बचाव तो कर रहे हैं लेकिन पुलिस अधीक्षक नरेंद्र बिजारणिया ने गाँवों और शहर के प्रभावशाली लोगों से दो टूक कह दिया था, “सभी को पता है किसका छोरा हिंसा में शामिल था, खुद पेश कर दो वरना हमें उठाना आता है।”

फिर से निकलेगी बृजमण्डल शोभायात्रा 

हरियाणा के नूहं में हिंदुओं की शोभायात्रा पर हुए हमले के बाद फिर से बृजमंडल शोभा यात्रा निकालने का दावा किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर पोस्टर रिलीज कर 28 अगस्त को फिर से बृजमंडल शोभा यात्रा निकालने का दावा किया गया है।

इस पोस्टर पर बजरंग दल, पलवल लिखा हुआ है। इसमें लिखा गया है कि बजरंग दल हरियाणा, पलवल के तत्वावधान में बृजमंडल (मेवात) जलाभिषेक यात्रा 28 अगस्त को सुबह 10 बजे नल्हड़ मंदिर नूहं से होकर सिंगार मंदिर पुन्हाना में संपन्न होगी। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नल्हड़ में स्थापित शिव मंदिर में जलाभिषेक होगा। 

साभार: दैनिक भास्कर

पुलिस ने इस यात्रा की इजाजत दी है या नहीं, इस पर फिलहाल कोई खबर नहीं है। फिलहाल, नूहं में कर्फ्यू और धारा 144 लगी हुई है। वहीं पुलिस भी इस तरह की अफवाह फैलाने वाली पोस्टों को लेकर अलर्ट है।

31 जुलाई को हुई थी हिंसा

गौरतलब है कि 31 जुलाई को बृजमंडल जलाभिषेक शोभायात्रा के दौरान ही उस पर मुस्लिम दंगाइयों द्वारा हमला बोल दिया गया था। जिसमें 6 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है। लगभग 100 से ज्यादा घायल हुए हैं। दंगाइयों ने सैकड़ों गाड़ियाँ भी फूँक दी थीं। इसके बाद इलाके में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाते हुए करीब 750 से अधिक अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए। 

‘रामायण फर्जी है, पैसे कमाने के लिए बनाया गया मंदिर’: स्कूल टीचर ने छात्रों के सामने किया अपमान, हिंदू संगठनों के विरोध के बाद माँगी माफी

गुजरात के वडोदरा में रामायण को ‘फर्जी’ बताने और भगवान हनुमान की प्रतिमा को लेकर विवादित टिप्पणी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल का एक छात्र हनुमान जी के दर्शन के लिए गया था। इसलिए वह स्कूल नहीं आ सका। इस पर स्कूल टीचर ने रामायण और भगवान हनुमान को लेकर अपमानजनक बातें कही। इसको लेकर हिंदू संगठनों ने विरोध जताया और आरोपित टीचर के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला वडोदरा के मकरपुरा में स्थित न्यू एरा स्कूल का है। बजरंग दल तरसाली प्रखंड के संयोजक कृष्ण उदे सिंह का कहना है कि 7वीं क्लास का एक छात्र स्कूल नहीं गया था। अगले दिन टीचर ने पूछा कि उसने छुट्टी क्यों ली? इस पर छात्र ने कहा कि वह सालंगपुर घूमने गया था। इसके बाद टीचर ने सालंगपुर में स्थित हनुमान जी की प्रतिमा और रामायण को लेकर अभद्र टिप्पणी की।

टीचर का कहना था कि सालंगपुर में हनुमान जी की जो प्रतिमा है, उसे पैसे कमाने के लिए बनाया गया है। यही नहीं, टीचर ने रामायण को भी फर्जी बताया। इस मामले में बच्चे के पैरेंट्स का कहना है, “मेरा बेटा 7वीं मे पढ़ता है। स्कूल से घर आने के बाद उसने बताया कि क्लास रूम में उसका टीचर रामायण को फर्जी कहता है। यही नहीं, वह सालंगपुर में स्थित हनुमान जी के मंदिर को भी पैसा कमाने का जरिया बताता है। इसके बाद मैं स्कूल गया। वहाँ क्लास के अन्य छात्रों से इस बारे में बातचीत की। छात्रों ने मुझे बताया कि टीचर ने यह सब कहा था। इसके बाद मैंने शिकायत की।”

मामले की जानकारी हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं को मिली तो वे भी स्कूल पहुँच गए। इसके बाद उन्होंने आरोपित टीचर के सामने ही छात्र से बातचीत की। उसने टीचर के बयान की पुष्टि कर दी। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए आरोपित टीचर के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। मामला बढ़ता देख स्कूल मैनेजमेंट ने आरोपित टीचर से स्पष्टीकरण से माँग लिया। टीचर ने स्कूल मैनेजमेंट को लिखित में माफीनामा सौंप दिया। माफीनामा सामने आने के बाद अभिभावकों का कहना है कि वे टीचर के खिलाफ अब कोई भी कार्रवाई नहीं चाहते।

बडोदरा के जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है। कार्यालय के शिक्षा निरीक्षक का कहना है कि इस मामले में स्कूल के प्रिंसिपल के साथ फोन पर बात हुई है। यह सामने आया है कि छात्र के माता-पिता के साथ टीचर का समझौता हो गया है। हालाँकि, प्रिंसिपल को एक लिखित रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। डीईओ ने भी जाँच कर कार्रवाई की बात कही है।

सालंगपुर का हनुमान मंदिर

सालंगपुर गुजरात के बोटाद जिले में स्थित है। यहाँ कष्टभंजन हनुमान जी का मंदिर है। साथ ही भगवान हनुमान की 54 फीट ऊँची प्रतिमा भी है। इस मंदिर में भगवान हनुमान को महाराज के रूप में पूजा जाता है। वहीं, शनि देव स्त्री रूप में हनुमान जी के चरणों मे विराजमान हैं। ऐसी मान्यता है कि शनिदेव का प्रकोप बढ़ने के बाद लोगों ने भगवान हनुमान से बचाव के लिए प्रार्थना की थी। इस पर हनुमान जी ने शनिदेव को सजा देने का निश्चय किया। इससे शनिदेव डर गए।

हालाँकि, शनिदेव को पता था कि हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं। इसलिए वे किसी स्त्री को नहीं छुएँगे। ऐसे में हनुमान जी से बचने के लिए वह स्त्री रूप धारण करके उनके चरणों में गिर गए। इसके बाद हनुमान जी ने क्षमा कर दिया। चूँकि, हनुमान जी ने लोगों के कष्ट दूर किए थे। इसलिए इस मंदिर को कष्टभंजन हनुमान मंदिर कहा जाता है।

कट्टरपंथी मुस्लिमों से गाली खाकर तेज प्रताप यादव ने डिलीट किया एल्विश यादव को समर्थन वाला ट्वीट: तुष्टिकरण, डर या वोट… क्या हो सकता है कारण?

बिग बॉस ओटीटी 2 (Bigg Boss OTT 2) के विनर का ऐलान सोमवार (14 अगस्त, 2023) को होना है। इसके लिए ऑनलाइन वोटिंग चल रही है। अब तक सामने आए वोटिंग के आँकड़ों में एल्विश यादव (Elvish Yadav) टॉप पर चल रहे हैं। तेज प्रताप यादव ने एल्विश यादव को ट्वीट कर समर्थन दिया था। मुस्लिम कट्टरपंथी इसे यादव-यादव समर्थन कह कर सजायाफ्ता कैदी लालू यादव के बेटे को गरिया रहे थे। तेज प्रताप यादव ने इस ट्वीट को अब डिलीट (अज्ञात कारणों से) कर दिया है।

चारा घोटाला का अपराधी और सजायाफ्ता कैदी लालू यादव ने बिहार की राजनीति में मुस्लिम-यादव समीकरण दिया था। लालू एक से जाति के नाम पर तो दूसरे से धर्म के नाम पर वोट पाता था। अपराधी लालू यादव का बेटा तेज प्रताप यादव अब मंत्री हैं, इनकी पार्टी भी लालू वाली ही है, राजनीति अभी भी मुस्लिम-यादव समीकरण (MY समीकरण) वाली ही। शायद यह एक कारण हो सकता है कि किसी अज्ञात व्यक्ति या वस्तु के प्रभाव में आकर एल्विश यादव को समर्थन तो तेज प्रताप ने कर दिया लेकिन कट्टरपंथी मुस्लिमों से गाली पड़ने के बाद MY समीकरण को याद कर वोट की भीख के लिए ट्वीट डिलीट मारा हो। यह एक कयास है, हकीकत तो सोशल मीडिया में तेजू भैया नाम से प्रिय नेता ही जानते होंगे।

ट्वीट डिलीट करने से पहले आरजेडी नेता और बिहार सरकार में मंत्री तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) ने इससे पहले एल्विश यादव का समर्थन करते हुए उन्हें वोट करने की अपील की थी। इसको लेकर कट्टरपंथी इस्लामी तेज प्रताप यादव को खरी-खोटी सुना रहे थे।

ट्वीट में तेज प्रताप यादव ने एल्विश यादव और अपनी फोटो के साथ एक पोस्टर शेयर किया था। इस पोस्टर के जरिए ही तेज प्रताप ने एल्विश यादव के लिए वोटिंग करने की अपील की थी। इस ट्वीट को तेज प्रताप ने #Elvishyadav, #Votforelvish, #ElvishTheBoss के साथ शेयर किया था। अब यह पोस्ट डिलीट किया जा चुका है।

तेज प्रताप यादव का एल्विश यादव को समर्थन करना और उनके लिए वोट की अपील करना कट्टरपंथी इस्लामी लोगों को अच्छा नहीं लगा। यूजर्स तेज प्रताप के लिए जातिवादी समेत तमाम तरह की बातें करते हुए उन्हें ट्रोल कर रहे हैं। इमरान शेख नामक यूजर ने लिखा, “तेज प्रताप यादव मतलब सिर्फ यादव होने से आपने इसका समर्थन किया। ये कितनी नफरत फैलाता है, क्या आपको नहीं पता?”

वसीम अहमद ने लिखा, “आ गए यादव-यादव एक हो गए। चाहे तुम्हारे खिलाफ ही क्यों ना हो चाहे ये मुस्लिम के खिलाफ ही क्यों ना हो, सभी मुस्लिम भाई से कहना चाहूँगा अनफॉलो करो इसको।”

मोहम्मद साहिल नामक यूजर ने लिखा, “तेज प्रताप यादव भैया जी, कहीं आपका दिमाग में ही बवासीर तो नहीं हो गया है। जाकर अपना इलाज करवाओ।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “ये तो गद्दारी है मेरे कौम वाले के साथ। मेरे मुस्लिम भाइयों अबकी बार कोई भी वोट मत देना आरजेडी को।”

फरहान रजा ने लिखा, “तेजू भैया थोड़ी बिहार की बेटी को भी सपोर्ट कर दो।”

आशिफ आमिल नामक यूजर ने लिखा, “ये तेज भैया को देखिए Bigboss का फाइनल चल रहा है। बिहार से मनीषा रानी और हरियाणा से एल्विश यादव फाइनल तक पहुँचे हैं। लेकिन बिहार के मंत्री और लालू यादव के बेटे सपोर्ट करते हैं एल्विश यादव को क्योंकि वो यादव है इनको बिहार से लेना देना ही नहीं, और खुद को सेक्युलर भी बताते हैं।”

वफ़ा अब्बास ने लिखा, “पहले मैं ये मानता था विपक्ष आप के बारे में गलत बोलता है। मगर अब पता चल गया है आप बिना जाँच पड़ताल के कुछ भी बोल देते हैं। कुछ भी लिख देते हैं। आप मंत्री के लायक नहीं हैं। तेजस्वी से कुछ सीखिए धर्म विशेष पर टिप्पणी करने वाले का आप साथ दे रहे हैं।”

माँ के सामने खींच कर ले गए, बलात्कार किया, मार कर लटका दिया… जुनैद-करीमुद्दीन समेत 4 को सज़ा: यूपी में 2 सगी दलित बहनों से हुई थी दरिंदगी

उत्तर प्रदेश लखीमपुर खीरी में 2 बहनों के अपहरण के बाद उनका बलात्कार किया गया था और फिर हत्या कर दी गई थी। अब इस मामले में 10 महीने बाद कोर्ट ने सज़ा सुनाई है। एडीजे पॉक्सो की अदालत ने 10 महीने और 27 दिन चली सुनवाई के बाद अपना फैसला दिया। 4 आरोपित इस मामले में दोषी पाए गए हैं। परिजनों सहित 15 लोगों ने इस मामले में गवाही दी, वहीं सबूतों से जुड़े 24 दस्तावेज भी पेश किए गए। इनमें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, आयु प्रमाण पत्र और कपड़े भी थे।

अदालत ने अपने 126 पन्नों के फैसले में इन सबका जिक्र किया है। दोनों बहनों की माँ की गवाही इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने बताया कि कैसे उनकी बेटी को उनके सामने ही खींच कर ले जाया गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी पता चला कि उनके शरीर पर चोटें थीं और हत्या गला दबा कर दी गई थी। एक आरोपित का FSL रिपोर्ट भी पॉजिटिव आया। हालाँकि, इस मामले में दलित उत्पीड़न की धाराएँ अदालत ने हटा दीं।

इसका कारण ये है कि पीड़िता अधिकतर आरोपितों को जानती ही नहीं थीं, ऐसे में जाति को आधार बना कर उत्पीड़न वाले आरोप को कोर्ट ने नकार दिया। इसीलिए, मामले एक नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ दर्ज किया गया था। इस मामले में जो किशोर हैं, उनके मुकदमे अलग चल रहे हैं। किशोरों में भी निर्भया कांड के बाद 2 श्रेणियाँ हैं – एक 16 वर्ष से कम उम्र वाले और एक 16-18 उम्र वर्ग के। बता दें कि ये वारदात 14 सितंबर, 2022 को हुई थी।

माँ के सामने ही दोनों सगी बहनों को उठा कर ले जाया गया था और रेप के बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। शव को पेड़ से लटका दिया गया था, ताकि ये आत्महत्या दिखे। इसके बाद पुलिस मुठभेड़ में 6 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। पता चला कि सुनील उर्फ़ छोटू के अलावा बाकी आरोपित पड़ोस के गाँव के ही थे। 15 सितंबर, 2022 को मुकदमा दर्ज हुआ और 15 दिनों के भीतर ही 28 सितंबर को पुलिस ने कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी थी।

इस घटना को लेकर राजनीति भी खूब हुई थी। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन में कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इलाके में कई दिनों तक तनाव रहा था। पहले आत्महत्या वाला एंगल चला, लेकिन बाद में मेडिकल जाँच में रेप-हत्या की पुष्टि हुई। दोनों बहनों में एक 10वीं तो दूसरी 7वीं कक्षा में पढ़ती थीं। इस मामले में जिन्हें दोषी साबित किया गया है, उनमें आरिफ और करीमुद्दीन नामक आरोपित भी शामिल हैं।

राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद दिल्ली सेवा बिल बना कानून, उपराज्यपाल की शक्तियाँ बढ़ीं: तीन अन्य बिल भी बने कानून

संसद के दोनों सदनों में पास होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली सेवा विधेयक सहित चार बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके बाद अब ये कानून बन गए हैं। दिल्ली सेवा बिल के कानून बनने के बाद दिल्ली का सेवा क्षेत्र उपराज्यपाल के अधीन आ गया है। बताते चलें कि सेवा क्षेत्र को दिल्ली सरकार के अधीन करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को केंद्र सरकार ने अध्यादेश के जरिए पलट दिया था।

विपक्ष के विरोध के बावजूद यह बिल लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया था। इसके बाद दिल्ली सेवा बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया था। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अब यह बिल कानून बन गया है। कानून बनते ही भारत सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है।

राज्य सभा ने 102 के मुकाबले 131 मतों से ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023’ को मंजूरी दी थी। लोकसभा ने इसे तीन अगस्त को पास कर दिया था। इसके अलावा, राष्ट्रपति ने तीन अन्य बिलों- डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन बिल, जन्म-मृत्यु पंजीकरण बिल, जन विश्वास बिल पर भी हस्ताक्षर किए। ये बिल भी इस सत्र में पास हुए थे।

दिल्ली सेवा कानून की प्रमुख बातें

  1. दिल्ली सरकार के अधिकारियों का तबादला और उनकी नियुक्ति राष्ट्रीय राजधानी सिविल सेवा प्राधिकरण (NCCSA) करेगा। इसके चेयरमैन मुख्यमंत्री हैं और दो अन्य सदस्य मुख्य सचिव और गृह सचिव हैं। इसमें बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
  2. दिल्ली विधानसभा द्वारा अधिनियमित कानून द्वारा बनाए गए किसी बोर्ड या आयोग के लिए नियुक्ति के मामले में NCCSA नामों के एक पैनल की सिफारिश उपराज्यपाल को करेगा।उपराज्यपाल अनुशंसित नामों के पैनल के आधार पर नियुक्तियाँ करेंगे।
  3. नए कानून के अनुसार मुख्य सचिव तय करेंगे कि कैबिनेट का निर्णय सही है या गलत।
  4. अगर किसी विभाग के सचिव को लगता है कि मंत्री का आदेश कानूनी रूप से गलत है तो वो इसे मानने से इंकार कर सकता है।
  5. सतर्कता सचिव अब दिल्ली सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे। वह उपराज्यपाल द्वारा बनाए गए प्राधिकरण के तहत जवाबदेह होंगे।
  6. उपराज्यपाल को यह शक्ति दी गई है कि वो कैबिनेट के किसी भी निर्णय को पलट सकते हैं।
  7. दिल्ली में कार्यरत अधिकारियों पर नियंत्रण मुख्यमंत्री के बजाय उपराज्यपाल का होगा।

दरअसल, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुआई वाली पाँच सदस्यीय संविधान पीठ ने 11 मई 2023 को फैसला सुनाते हुए कहा था कि दिल्ली में जमीन, पुलिस और कानून-व्यवस्था को छोड़कर बाकी सारे प्रशासनिक फैसले लेने के लिए दिल्ली की सरकार स्वतंत्र होगी। अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर-पोस्टिंग भी कर पाएगी।

कोर्ट के फैसले के एक हफ्ते बाद 19 मई को केंद्र सरकार एक अध्यादेश ले आई। केंद्र ने ‘गवर्नमेंट ऑफ नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली ऑर्डिनेंस, 2023’ लाकर प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति और तबादले का अधिकार वापस उपराज्यपाल को दे दिया था।

इस अध्यादेश के तहत राष्ट्रीय राजधानी सिविल सर्विसेज अथॉरिटी का गठन किया गया। दिल्ली के मुख्यमंत्री, दिल्ली के मुख्य सचिव और गृह सचिव को इसका सदस्य बनाया गया। मुख्यमंत्री इस अथॉरिटी के अध्यक्ष होंगे और बहुमत के आधार पर यह प्राधिकरण फैसले लेगा। प्राधिकरण के सदस्यों के बीच मतभेद होने पर दिल्ली के उपराज्यपाल का फैसला अंतिम माना जाएगा।

‘तिरंगे को सलामी मत दो, राष्ट्रगान मत गाओ’: मौलाना के फतवा का विरोध करने वाले 3 मुस्लिम युवकों ने पी फिनाइल, कहा – किया जा रहा है प्रताड़ित

गुजरात के पोरबंदर में 3 मुस्लिम युवकों ने फिनाइल पी ली है। इंस्टाग्राम पर वीडियो बना कर उन्होंने आरोप लगाया गया है कि उनके ही समुदाय के कुछ लोग उन्हें प्रताड़ित कर रहे थे। असल में तिरंगा झंडा को लेकर एक मौलवी ने फतवा जारी किया। इस फतवे को उन युवकों ने ख़ारिज कर दिया था। इन तीनों मुस्लिम युवकों का आरोप है कि उन्हें इसी वजह से बदनाम किया जा रहा है। साथ ही उन्हें समाज से बाहर किए जाने की कोशिश भी चल रही है, ऐसा आरोप है।

तीनों लड़कों ने शरीयत कानून का हवाला देकर ये बताने की कोशिश की गई है कि मौलाना का फतवा गलत है, उसका आदेश सही नहीं है। ‘देश गुजरात’ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि कुछ दिनों पहले मौलाना की एक ऑडियो क्लिप वायरल हुई थी, जिसमें उसने कहा था कि मुस्लिमों को राष्ट्रीय ध्वज फहराना चाहिए लेकिन इसे सलामी देना जायज नहीं है। मौलाना हाफिज वासिफ रज़ा के इस फैसले का विरोध करने 6 मुस्लिम युवक ही उसके पास गए।

उस ऑडियो क्लिप को लेकर मौलाना से इन युवकों ने सवाल पूछा। बताया जा रहा है कि मौलाना ने तब कबूल किया कि ये आवाज उसकी ही है और उसने ही बयान दिया है। इस पर मुस्लिम युवकों ने उसे बताया कि पैगंबर मुहम्मद ने मुस्लिमों को देशभक्ति का सन्देश दिया है। इस ऑडियो के खिलाफ 2 अगस्त को विरोध प्रदर्शन भी किया गया था। पुलिस में दी गई शिकायत में ‘दारुल उलूम संस्थान’ ने मौलाना के साथ मारपीट का आरोप भी लगाया है।

साथ ही मौलाना और कुछ मुस्लिम नेताओं को जान से मारने की धमकी देने की बात भी शिकायत में कही गई है। केस दर्ज होने के बाद शकाली कादरी, सोहेल इब्राहिम और इम्तियाज हारून ने इंस्टाग्राम पर अपना दर्द बयाँ करते हुए फिनाइल पी लिया। पोरबंदर के एसपी भगीरथ सिंह ने इस वीडियो को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजे जाने की बात बताई है। अब ‘दारुल उलूम गौसे’ इस ऑडियो क्लिप को फर्जी बता रहा है।

क्लिप में मौलाना ने राष्ट्रगान गाने के खिलाफ भी फतवा जारी किया था। संस्था ने दावा किया है कि इन तीनों युवकों के खिलाफ पहले से ही केस दर्ज हैं और तिरंगा झंडा को लेकर उसके मौलाना ने कुछ कहा ही नहीं है। फिनाइल पीने का जो वीडियो सामने आया है, जो लकड़ी बन्दर नामक इलाके की घटना है। इसके बाद परिजनों-दोस्तों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। गुजरात पुलिस ने अस्पताल पहुँच कर तीनों ही युवकों के बयान रिकॉर्ड किए।

‘चू%या, पागल, बेवकूफ’: भागलपुर कोर्ट में जज का वीडियो वायरल, वकीलों ने चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी

बिहार के भागलपुर कोर्ट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें काला कोट पहना व्यक्ति लोगों को चीख-चिल्ला रहा है और अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा है। इस व्यक्ति को जज सूचित बाजपेई (Suchit Bajpai) बताया जा रहा है। एडवोकेट संघ ने जज का बहिष्कार करते हुए इस संबंध में पटना के चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखी है।

इस वीडियो में न्यायिक अधिकारी को ‘चु#या, बेवकूफ, पागल’ आदि कहते हुए सुना जा सकता है। बताया जा रहा है कि न्यायिक अधिकारी की बहस कोर्ट रूम में एक एडवोकेट के साथ हो रही है। यह वीडियो 10 दिन पुराना बताया जा रहा है।

भागलपुर के जिला बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं का कहना है कि वे प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी सूचित बाजपेयी के अत्याचार से परेशान हैं। इस घटना के बाद अधिवक्ताओं ने कोर्ट का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में विधिक संघ सभागार में अधिवक्ताओं ने बैठक भी बुलाई थी।

अधिवक्ताओं का कहना है कि दंडाधिकारी कार्य करने की प्रणाली में किसी न किसी कारण आवेदन पर नुक्स निकालकर उसे रद्द करने की कोशिश करते हैं और बिना कारण विलंब करने का प्रयास करते हैं। इसके बाद अधिवक्ता अनिल कुमार झा उनसे बात करने की कोशिश की तो दोनों के बीच बहस हो गई।

अधिवक्ताओं का कहना है कि अधिवक्ता संघ द्वारा इनकी शिकायत जिला जज एवं अन्य न्यायिक पदाधिकारी को लिखित रूप से की गई थी। इसके बावजूद दंडाधिकारी अपने कार्य प्रणाली में सुधार नहीं करते हैं हर रोज कर्मचारियों को मानसिक प्रताड़ना देते रहे हैं।

बैठक में बार एसोसिएशन के सभी अधिकारियों और सदस्यों ने भागलपुर कोर्ट में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी सूचित बाजपेई के व्यवहार की निंदा की। उन्होंने कहा कि सभी जज द्वारा अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों के साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए दुर्व्यवहार किया जाता है।

बार एसोसिएशन के 93 अधिवक्ताओं ने अध्यक्ष जयकरण गुप्ता से शिकायत की थी। इसकी सूचना पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और बिहार विधिक संघ को दी गई। जिला विधिक संघ के महासचिव ने कहा कि अगर उनकी माँगें जल्द से जल्द पूरी नहीं की जाती है तो वे सभी आगे आंदोलन करेंगे।

‘OMG 2’ से 4 गुना ज़्यादा ‘ग़दर 2’ की कमाई: सिंगल स्क्रीन्स में सनी देओल की आँधी, सुपस्टार रजनीकांत की ‘जेलर’ ने 2 दिनों में कमाए ₹152 करोड़

सनी देओल की फिल्म ‘ग़दर 2’ और अक्षय कुमार की फिल्म ‘OMG 2’ का ओपनिंग डे बॉक्स ऑफिस कलेक्शन सामने आ गया है। एक ही दिन शुक्रवार (11 अगस्त, 2023) को दोनों फिल्मों की रिलीज होने के कारण इस क्लैश पर सभी की नज़रें थीं। इस टकराव की विजेता ‘ग़दर 2’ बन कर उभरी है, जिसने भारत में 40 करोड़ रुपए की नेट कमाई कर के इतिहास रच दिया है। शाहरुख़ खान की ‘पठान’ के बाद ये इस साल की दूसरी सबसे बड़ी ओपनर बन गई है।

हालाँकि, हमें ये भी याद रखना चाहिए कि ‘पठान’ के आँकड़े विवादित थे। ‘ग़दर 2’ को सबसे अच्छी प्रतिक्रिया मास बेल्ट से मिली है, यानी सिंगल स्क्रीन्स से सबसे ज़्यादा कमाई हो रही है। मल्टीप्लेक्स और नेशनल चेन्स (PVR, INOX, Cinepolis) में तो फिल्म ने अच्छा प्रदर्शन किया ही है लेकिन छोटे सिनेमाघर एकदम से हाउसफुल हैं। पिछले एक दशक में हिंदी बेल्ट में इस तरह की प्रतिक्रिया नहीं देखी गई। सनी देओल ने एक तरह से डूबते बॉलीवुड को सहारा दिया है।

अब आते हैं अक्षय कुमार की ‘OMG 2’ पर। ये भी एक सीक्वल है, जिसका पहला हिस्सा 2012 में आया था। इसी तरह ‘ग़दर’ भी 2001 में आई थी। ‘OMG 2’ ने डोमेस्टिक नेट कमाई के मामले में किसी तरह 10 करोड़ रुपए की कमाई का आँकड़ा पार कर लिया है। फिल्म को समीक्षकों से अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। रिलीज से पहले जो विवाद था, वो अब नहीं दिख रहा है। दर्शकों ने भी इसे अच्छी कंटेंट वाली फिल्म बनाया है। हालाँकि, इसका बजट 150 करोड़ रुपए है।

अब आते हैं इस वीकेंड रिलीज हुई भारत की सबसे बड़ी फिल्म पर। ये फिल्म तमिल भाषा में है मूलतः। इसमें सुपरस्टार रजनीकांत हैं। फिल्म का नाम है ‘Jailer’, जिसने पहले ही दिन दुनिया भर में 95 करोड़ रुपए की कमाई कर के इतिहास रच दिया है। दूसरे दिन इसने 56 करोड़ रुपए की कमाई की है। कुल मिला कर इसने 152 करोड़ रुपए का ग्रॉस कारोबार कर लिया है। शनिवार को ये फिल्म 200 करोड़ रुपए के आँकड़े को पार कर जाएगी।

उधर तेलुगु फिल्मों की बात करें तो चिरंजीवी की ‘भोला शंकर’ रिलीज हुई है, लेकिन इसे उतनी अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली है। फिल्म ने पहले दिन इसने 20 करोड़ रुपए तो कमा लिए लेकिन समीक्षकों-दर्शकों ने इसे नकार दिया है। ये फिल्म अजीत कुमार की ‘वेदालम’ (2015) की रीमेक है। अभी रविवार को छुट्टियाँ रहेंगी, स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को छुट्टियाँ रहेंगी। ऐसे में भारत के बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ा तूफ़ान आने वाला है।

लव जिहाद (पहचान छिपाकर शादी) अब बड़ा गुनाह, भारतीय न्याय संहिता में 10 साल की सजा का प्रावधान: रेप-गैंगरेप में मृत्युदंड

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद में पेश किए गए तीन विधेयकों में महिलाओं के साथ होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने की कोशिश की गई है। इसमें महिला या बच्चों से दुष्कर्म पर कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही धर्म छिपाकर किसी महिला से शादी करने वालों को भी कठोर सजा भुगतना होगा।

जानकारों का मानना है कि देश में बढ़ रही लव जिहाद और धर्म एवं पहचान छुपाकर शादी करने के मामलों को देखते हुए इस कानून का प्रस्ताव रखा गया है। इससे लव जिहाद जैसे मामलों में निपटने में सहायता मिलेगी। इसमें पहचान छिपाकर, रोजगार या प्रमोशन का लालच देकर शादी करने को लेकर प्रावधान किया गया है।

फिलहाल कोई भी व्यक्ति छल से झूठे वादे करके किसी महिला से यौन संबंध बनाता है तो इसे रेप की कैटेगरी में नहीं रखा जाता है। हालाँकि, अब ऐसा नहीं होगा और इसके लिए दंड का प्रावधान होगा। ऐसे व्यक्ति को दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

भारतीय दंड संहिता यानी IPC में इसके लिए कोई प्रावधान नहीं था। इस संबंध में IPC की धारा 90 में कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी जानकारी छिपाकर यौन संबंध बनाता है तो उसे सहमति से बनाया गया यौन संबंध नहीं कहा जा सकता है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में 1860 के भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) को बदलने के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) विधेयक पेश किया और कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों से संबंधित प्रावधानों पर विशेष ध्यान दिया गया है।

उन्होंने कहा, “इस विधेयक में महिलाओं के खिलाफ अपराध और उनके सामने आने वाली कई सामाजिक समस्याओं का समाधान किया गया है। पहली बार, शादी, रोजगार, पदोन्नति और झूठी पहचान के झूठे वादे के तहत महिलाओं के साथ संबंध बनाना अपराध की श्रेणी में आएगा।”

संसद में विधेयक को पेश करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि ऐसे लोग भी थे, जो यौन संबंध बनाने के लिए गलत पहचान दिए थे। अब ऐसे अपराधों के लिए नरेंद्र मोदी की सरकार कानून ला रही है।

बताते चलें कि ऐसे मामले अक्सर आते रहते हैं, जहाँ शादी का वादा करके महिला से यौन संबंध बना लिए जाते हैं और फिर वह व्यक्ति अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर उस महिला को धोखा देता है। इसके लिए अब कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है।

विधेयक में कहा गया है कि हत्या के अपराध के लिए मौत की सजा या आजीवन कारावास की सजा होगी। बलात्कार के अपराध के लिए कम से कम 10 साल की जेल या प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा होगी और सामूहिक बलात्कार के लिए कम से कम 20 साल की कैद या शेष अवधि के लिए कारावास की सजा होगी।

बिल के अनुसार, यदि किसी महिला की बलात्कार के बाद मृत्यु हो जाती है या इसके कारण महिला लगातार बेहोश रहती है तो दोषी को कठोर कारावास की सजा दी जाएगी, जिसकी अवधि 20 वर्ष से कम नहीं होगी। उसे शेष प्राकृतिक जीवन तक उम्रकैद या मृत्युदंड तक बढ़ाया जा सकता है।

जो कोई 12 वर्ष से कम उम्र की लड़की के साथ बलात्कार करेगा, उसे कठोर कारावास से दंडित किया जाएगा, जिसकी अवधि 20 वर्ष से कम नहीं होगी। उसे बचे हुए प्राकृतिक जीवन तक उम्रकैद और जुर्माने अथवा मृत्यु तक बढ़ाया जा सकता है।