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‘पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाओ, वरना…’: सोनीपत के पार्षद निरंजन को जान से मारने की धमकी

सोनीपत में कुंडली नगरपालिका के एक वार्ड पार्षद निरंजन को ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने के लिए कॉल आए। कॉल पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। फोन कर धमकी देने वाले ने कहा कि वो पीओके (पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर) से बोल रहा है। यह धमकी भरा कॉल उन्हें सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम पर किया गया था। टेलीग्राम पर कॉल करके उन्हें धमकी मिलने का सिलसिला लगातार जारी है।

क्या है पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुंडली निवासी पार्षद निरंजन ने पुलिस को बताया कि ‘आईडी रेड’ नामक ग्रुप से उनके टेलीग्राम पर कॉल की गई। कॉल रिसीव करने पर दूसरी तरफ से कोई युवक उन्हें गालियाँ देने लगा। बार-बार कॉल कर जान से मारने की धमकी दी गई।

पार्षद निरंजन के अनुसार कॉल पर उन्हें धार्मिक अभद्र टिप्पणी भी की गई। इसके बाद उन्होंने बार-बार कॉल को डिस्कनेक्ट करना शुरू कर दिया। इसी बीच उनके नंबर को एक ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप का नाम ‘डॉट’ था। उसमें उन पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने का दबाव बनाया गया।

पार्षद का कहना है कि उन्होंने परेशान होकर अपने मोबाइल का इंटरनेट डाटा बंद कर दिया है। किसी हिंदूवादी संगठन के नाम का मैसेज करके पार्षद को इसका सदस्य बताकर गालियाँ भी दी गईं।  

‘पीओके से बोल रहा हूँ’  

पार्षद निरंजन ने बताया कि धमकी देने वाले ने कहा कि वो पीओके से बोल रहा है। कॉलर ने यह भी कहा कि वो यकीन दिलाने के लिए लोकेशन भी डाल सकता है। पार्षद ने हालाँकि यह बताया कि आरोपित हरियाणवी भाषा में बोल रहा था। लगातार मिल रही धमकियों की वजह से उन्होंने कहा कि मामला काफी गंभीर था, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया उन्होंने।

पार्षद निरंजन ने मामले की शिकायत कुंडली थाना पुलिस को दी। पुलिस ने इस मामले में धमकी देने का मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना कुंडली पुलिस ने पार्षद की शिकायत दर्ज कर धमकी देने वाले के खिलाफ धारा 506 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि वो मामले को लेकर जाँच में जुट गई है। 

जिस कानून के कारण बाल गंगाधर तिलक पर केस, अब वो खत्म: देश के खिलाफ युद्ध जैसे षड्यंत्रों पर सजा अब और भी कठोर

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार (11 अगस्त 2023) को भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक 2023 को लोकसभा में पेश किया। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने राजद्रोह कानून को खत्म कर दिया है।

दरअसल, राजद्रोह कानून (Sedition Law) को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 124A में परिभाषित किया गया है। इस कानून को अंग्रेजों ने बनाया था। देश में विध्वंसक एवं अलगाववादी गतिविधियों पर इस कानून का इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालाँकि, समय-समय पर इस कानून को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने उठाए थे सवाल

राजद्रोह कानून को विवादास्पद बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। दरअसल, राजद्रोह कानून को खत्म करने वाली कई याचिकाएँ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थीं। इन याचिकाओं की सुनवाई तक इस कानून के तहत केस दर्ज करने पर कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश एनवी रमन्ना के नेतृत्व वाली पीठ ने कहा था, “आईपीसी की धारा 124A (राजद्रोह) की कठोरता मौजूदा सामाजिक परिवेश के अनुरूप नहीं है। इस प्रावधान का पुन: परीक्षण पूरा होने तक सरकारों द्वारा कानून के उक्त प्रावधान का उपयोग जारी नहीं रखना उचित होगा।”

बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 1962 में राजद्रोह कानून की वैधता को बरकरार रखा था। इसके साथ ही इसका दायरा भी सीमित करने का प्रयास किया था, ताकि इसका दुरुपयोग नहीं किया सके। हालाँकि, जिस तरह देश में विभाजनकारी शक्तियाँ सक्रिय हैं, उसको देखते हुए केंद्र सरकार इसे खत्म करना नहीं चाहती थी।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के रिकॉर्ड के अनुसार, साल 2015 से 2020 के बीच देश में राजद्रोह के 356 मामले दर्ज हुए और 548 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हालाँकि, इस अवधि में राजद्रोह के 7 मामलों में गिरफ्तार किए गए सिर्फ 12 लोगों को दोषी करार दिया गया।

क्या है राजद्रोह कानून

राजद्रोह एक अपराध है और इसका भारतीय दंड संहिता की धारा 124A में उल्लेख किया गया है। यह कानून कहता है कि अगर कोई भी व्यक्ति राष्ट्रीय चिह्नों या संविधान का अपमान करता है या फिर उसे नीचा दिखाने का प्रयास करता है या फिर सरकार विरोधी बातें बोलता-लिखता हैं या अन्य लोगों को इसके लिए उकसाता है तो उस पर खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हो सकता है।

राजद्रोह संगीन और गैर-जमानती अपराध है। इसमें दोषी पाए जाने पर तीन साल तक के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। कारावास के साथ-साथ कोर्ट द्वारा दोषी पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इतना ही नहीं, राजद्रोह कानून के तहत आरोपित व्यक्ति को सरकारी नौकरी से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। वह कभी भी सरकारी नौकरी नहीं कर सकता है। उस व्यक्ति को पासपोर्ट नहीं जारी किया जाता है। इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर उसे हर समय अदालत में पेश होना पड़ता है।

राजद्रोह कानून का इतिहास

इस कानून का मसौदा मूल रूप से 1837 में ब्रिटिश इतिहासकार और राजनेता थॉमल मैकाले ने तैयार किया था। उस वक्त ब्रिटिश की औपनिवेशिक सरकार भारतीयों के आवाज को कुचलने के लिए इस कानून का प्रयोग करती थी। अंग्रेजों ने इस कानून का उपयोग कई स्वतंत्रता सेनानियों पर किया था।

भारतीय दंड संहिता-IPC को 1860 में औपनिवेशिक भारत में लागू किया गया था। हालाँकि, इसमें राजद्रोह से संबंधित कोई धारा नहीं थी। इसे 1870 में इस आधार पर पेश किया गया था कि इसे गलती से मूल IPC मसौदे से हटा दिया गया था।

इस कानून का सबसे पहला उपयोग स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के खिलाफ अंग्रेजों ने 1897 में किया था। इसके अलावा, 19 मार्च 1922 में महात्मा गाँधी के खिलाफ भी अंग्रेजों ने इस कानून का प्रयोग किया गया था। इसके साथ ही जवाहरलाल नेहरू और भगत सिंह के खिलाफ भी इस कानून का प्रयोग किया गया था।

आज़ादी के बाद 1948 में संविधान सभा की चर्चा के बाद ‘राजद्रोह’ को संविधान से हटा दिया गया। केएम मुंशी ने ‘राजद्रोह’ शब्द को हटाने के लिए एक संशोधन पेश किया, जिसे संविधान के मसौदे में शामिल किया गया था। उन्होंने तर्क दिया था कि यह भाषण और अभिव्यक्ति की संवैधानिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाता है।

इस प्रकार 26 नवंबर 1949 को जब संविधान अपनाया गया तो उसमें से ‘राजद्रोह’ शब्द खत्म हो गया और अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की पूरी आजादी दी गई। हालाँकि, आईपीसी में धारा 124A बरकरार रही। यह समय-समय पर बहस का मुद्दा बना रहा।

राजद्रोह कानून की जगह नया कानून लेगा

गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा कि राजद्रोह कानून को खत्म कर दिया जाएगा। हालाँकि, सरकार IPC में 124A के तहत आने वाले इस कानून को कुछ बदलाव के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 150 से रिप्लेस करेगी। वहीं, सरकार की आलोचना अब प्रस्तावित कानून का हिस्सा नहीं रहेगा।

यह कानून देश की संप्रभुता, एकता एवं अखंडता के खिलाफ काम करने वाले अलगाववादियों, सशस्त्र विद्रोह और विध्वंसक गतिविधियों को शामिल किया गया है। इसके लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। प्रस्तावित कानून में इन गतिविधियों को सरकार की आलोचना और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों से अलग कर अंतर स्पष्ट किया गया है।

विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि जो कोई भी देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की तैयारी या ऐसे इरादे से व्यक्तियों को एकत्र करता है, हथियार या गोला-बारूद इकट्ठा करता है, उसे न्यूनतम 10 साल और अधिकतम आजीवन कारावास की सजा होगी और उसे जुर्माना भी देना होगा।

खालिस्तानी आतंकी पन्नू के घर तिरंगा फहराने से पंजाब पुलिस ने रोका, एंटी-खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष ने कहा – ‘देश का अपमान’

इंटरनेशनल एंटी खालिस्तानी टेररिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरसिमरन मंड को पंजाब पुलिस ने तिरंगा फहराने से रोका। गुरसिमरन मंड शुक्रवार (11 अगस्त, 2023) को चंडीगढ़ में सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) वाले खालिस्तानी आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू के घर पर तिरंगा फहराने की कोशिश कर रहे थे। पंजाब पुलिस ने उन्हें तिरंगा फहराने से पहले ही रोक लिया, हिरासत में भी ले लिया। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, खालिस्तानी आतंकी पन्नू के घर पर तिरंगा फहराने से पंजाब पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद मंड ने कहा:

“यह देश का अपमान है क्योंकि पुलिस ने उन्हें एक घोषित आतंकवादी और अलगाववादी के घर पर तिरंगा फहराने से रोका।”

मंड ने आगे कहा, “भारत देश में तिरंगा फहराने पर रोक लगाना सही नहीं है। मैं विदेश जाकर भी पन्नू के घर पर तिरंगा फहराऊँगा।” हिरासत में लिए जाने से पहले तक हाथों में तिरंगा लेकर मंड ने अपने समर्थकों के साथ खालिस्तान और पन्नू के खिलाफ नारे भी लगाए। जानकारी के मुताबिक, बाद में उन्हें हिरासत से रिहा कर दिया गया। 

इस मामले में सेक्टर 11 पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने कानून व्यवस्था की स्थिति को ध्यान में रखते हुए लोगों को गुरपतवंत सिंह पन्नू के घर तक पहुँचने से रोका। उस घर में एक केयरटेकर के अलावा कोई नहीं रहता है।”

बता दें कि खालिस्तानी आतंकी पन्नू को भारत के खिलाफ नफरत फैलाने और लोगों, विशेषकर पंजाब के युवाओं को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उकसाने के लिए जाना जाता है।

गौरतलब है कि इससे पहले जून में कई खबरें सामने आईं थी कि पन्नू की अमेरिका में हत्या कर दी गई लेकिन बाद में पन्नू इन खबरों को खारिज करते हुए वीडियो रिलीज कर फिर से धमकी देते हुए दिखा। घोषित खालिस्तानी आतंकी पन्नू पंजाब विश्वविद्यालय से कानून में स्नातक है और 1990 के दशक के अंत में कनाडा चला गया था।

जुमे की नमाज पढ़ रहे थे लोग, ढह गई मस्जिद, 7 की मौत: नाइजीरिया में कई घायल

अफ्रीकी देश नाइजीरिया में नमाज पढ़ने के दौरान मस्जिद की छत गिरने से 7 नमाजियों की मौत हो गई है। जिस वक्त यह घटना हुई, उस समय मस्जिद में सैकड़ों लोग नमाज के लिए इकट्ठा हुए थे। दर्जनों लोग घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।

ज़ारिया अमीरात काउंसिल के प्रवक्ता अब्दुल्लाही क्वारबाई ने बताया कि देश के उत्तरी राज्य कडुना के ज़ारिया शहर में जुमे के दिन 11 अगस्त 2023 को सैकड़ों नमाजी दोपहर की नमाज के लिए जुटे थे। इसी दौरान शहर के केंद्रीय मस्जिद का एक हिस्सा ढह गया। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हो गए हैं।

अब्दुल्लाही ने कहा, “शुरुआत में चार शव मिले थे। जब बचाव दल ढही मस्जिद की तलाशी लेने लगा तो तीन अन्य शव मिले।” राज्य आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी ने 23 लोगों को अस्पताल भेजा है। अधिकारियों का कहना है कि इस मस्जिद का निर्माण 1830 के दशक में किया गया था। कडुना राज्य के गवर्नर उबा सानी ने घटना की जाँच के आदेश दिए हैं।

घटनास्थल पर रिकॉर्ड किए गए वीडियो में दिखाई दे रहा है कि मस्जिद की छत का एक बड़ा गिर गया। बताते चलें कि पिछले वर्ष पश्चिम अफ्रीकी इस देश में एक दर्जन से अधिक इमारतें गिरी थीं। कहा जाता है कि इमारतों के गिरने की वजह घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल और रख-रखाव में लापरवाही है।

‘भाईचारा’, ‘अच्छा मुस्लिम’ और डायरेक्टर के बेटे को छोड़ बाक़ी सब ठीक: ‘ग़दर 2’ से सनी देओल ने मनवाया लोहा, सीटियाँ-तालियाँ-नारों का माहौल बनाने वाली फिल्म

फिल्म ‘ग़दर 2’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। अभिनेता सनी देओल स्टारर इस फिल्म की समीक्षाएँ भी आ चुकी हैं। बड़ी संख्या में दर्शकों ने भी इसे पहले दिन देखा है। फिल्म में निर्देशक अनिल शर्मा के बेटे उत्कर्ष शर्मा, अमीषा पटेल, मनीष वाधवा और सिमरत कौर सहायक किरदारों में हैं। फिल्म की कहानी और एक्टिंग परफॉर्मेंस पर हम बाद में बात करेंगे, क्योंकि इस पर तो काफी कुछ लिखा-सुना जा चुका है। इसीलिए, सीधे मुद्दे पर आते हैं।

अगर आप ये सोच कर ‘ग़दर 2’ देखने जा रहे हैं कि इसमें बॉलीवुड का जो ट्रेंड रहा है उससे कुछ हट कर है, तो आप निराश होंगे। इसमें भी कथित भाईचारे का सन्देश दिया गया है। हिंदुस्तान के मुस्लिम को पाकिस्तानी पीटते हैं। पाकिस्तान में कई ऐसे मुस्लिम हैं जो हिन्दुस्तानियों की मदद करते हैं। इनमें महिलाएँ भी हैं। ये लोग सीधे-सादे दिखाए गए हैं, जो ‘मानवता’ के नाते भारतीयों की मदद करते हैं और मजहब आड़े नहीं आता।

‘अच्छा मुस्लिम’ और ‘भाईचारा’ की बातें डालने की ज़रूरत थी?

अगर आपको 2015 में आई फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ याद होगी तो आपको पाकिस्तान के ‘अच्छे मुस्लिमों’ के बारे में भी पता होगा। एक पत्रकार, जो हनुमान भक्त की मदद करता है। एक मौलवी, जो उसे पुलिस से बचाता है। उसी तरह ‘ग़दर 2’ में भी ऐसे किरदार हैं। एक दृश्य में सनी देओल कहते भी हैं कि अगर पाकिस्तानियों को भारत में रहने का मौका मिला तो आधा पाकिस्तान खाली हो जाएगा। ‘भाईचारा’ का सन्देश तो दिया गया है।

इसी तरह, सनी देओल के बेटे के किरदार में दिख रहे उत्कर्ष शर्मा पाकिस्तानी जनरल (मनीष वधावा) से कहते हैं कि उन्होंने शरीयत पढ़ी है और उनकी माँ (शकीना के किरदार में अमीषा पटेल) ने उन्हें कुरान भी पढ़ाया है। वो एक तरह से जताना चाहते हैं कि कुरान और शरीयत पाकिस्तानी कट्टरवादियों ने ठीक से नहीं पढ़ी, इसीलिए वो हिंसा करते हैं। जबकि विदेशों में कुरान जलाने वाले कहते हैं कि इसमें इस्लाम न मानने वालों की हत्या की बात कही गई है।

जहाँ तक शरीयत का सवाल है, इसके तहत अफगानिस्तान में महिलाओं को शिक्षा और नौकरी से वंचित कर दिया गया है। उन पर कोड़े बरसाए जाते हैं। शरीयत के हिसाब से भारत में भी मुस्लिमों के ‘पर्सनल लॉ’ हैं, जिसके तहत बेटियों को मृत पिता की संपत्ति में हिस्सा तक नहीं मिलता। ‘तीन तलाक’ जैसे महिला विरोधी नियम इसी कानून का हिस्सा थे, जिसे मोदी सरकार ने निरस्त किया। इसके तहत शौहर द्वारा 3 बार तलाक बोल या मैसेज में लिख तक देने से तलाक हो जाता था।

आज के समय में ‘अच्छा पाकिस्तानी मुस्लिम’ वाली थ्योरी शायद ही लोगों को पचे, क्योंकि राजस्थान के उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की रेकी करने वाला उनका मुस्लिम पड़ोसी ही था, जिसके बाद उनका गला काट डाला गया था। महाराष्ट्र के अमरावती में उमेश कोल्हे की हत्या करने वाला उनका मुस्लिम दोस्त ही था, जिनकी उन्होंने मदद की थी कभी। थोड़ा पीछे जाएँ तो कश्मीर में BK गंजू नामक इंजीनियर की हत्या का कारण उनका मुस्लिम पड़ोसी ही था, जिसने उनके छिपने के ठिकाने के बारे में बता दिया और आतंकियों ने उन्हें मार डाला।

‘ग़दर 2’ में एक जगह सनी देओल डायलॉग बोलते हैं, “अगर रसूल का इस्लाम पढ़ा होता तो दुनिया ‘गजवा-ए-हिन्द’ नहीं, बल्कि ‘जज्बा-ए-हिन्द’ होती।” जबकि इस्लामी कट्टरपंथी गजवा-ए-हिन्द का स्रोत हदीथ को ही मानते हैं। हदीथ के बारे में कहा जाता है कि इसमें पैगंबर मुहम्मद और उनके परिवार की ही बातें हैं। एक बात है कि फिल्म में ‘गजवा-ए-हिन्द’ की चर्चा के बाद कम से कम लोग सर्च तो करेंगे इंटरनेट पर कि ये है क्या।

यहाँ भी संक्षेप में बता देना आवश्यक है। इस्लामी कट्टरपंथी मानते हैं कि हदीथ में वर्णन है कि मुस्लिमों और गैर-मुस्लिमों के बीच भारत में एक बड़ा युद्ध होगा। इसीलिए, ये इस्लामी कट्टरपंथी और आतंकी पूरे दक्षिण एशिया में इस्लाम के शासन, या खलीफा के शासन के लिए हिंसा करते हैं। भारत में इस्लामी आक्रांताओं को शासन करने में कई वर्ष लग गए थे। इसके बाद उन्होंने सैकड़ों वर्षों तक राज किया, लेकिन हिन्दू खत्म नहीं हुए। इसीलिए, वो मानते हैं कि जंग जारी है, बाकी है।

इसी तरह, ‘ग़दर 2’ में पाकिस्तान का एक और बुजुर्ग मुस्लिम कहता है कि आज़ादी से पहले सब भाईचारे के साथ रहते थे। सनी देओल का डायलॉग है कि आज़ादी की लड़ाई मुस्लिमों ने भी लड़ी। फिर ‘मुस्लिम लीग’ क्या था? इस्लामी कट्टरपंथियों ने तो लड़ाई बहादुरशाह ज़फर को बादशाह बनाने के लिए लड़ी, खिलाफत के लिए लड़ी (जिसके बाद मोपला मुस्लिमों ने केरल में हिन्दुओं का नरसंहार किया), पाकिस्तान बनाने के लिए लड़ी।

अगर बात की जाती है कि आज़ादी से पहले चारों ओर भाईचारा था, फिर काशी में नागा साधुओं और औरंगजेब के बीच हुए युद्ध को नज़रंदाज़ कर दिया जाएगा? अयोध्या को बचाने के लिए कई बार लड़ाइयाँ हुईं। सोमनाथ भी भयंकर युद्ध के बाद लूटा गया। बाबर ने कुरान-इस्लाम की बातें कर के ही अपनी फ़ौज में दिल्ली पर कब्जे के लिए जोश भरा। 30,000 मंदिरों को ध्वस्त कर दिया जाना कम से कम ‘भाईचारा’ की निशानी तो नहीं ही है।

एक्टिंग परफॉर्मेंस: सनी देओल ने मनवाया लोहा, ‘चाणक्य’ छाए

जहाँ तक एक्टिंग परफॉर्मेंस की बात है, इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि सनी देओल के पूरी फिल्म को अपने कंधे पर ढोया है। सनी देओल का चिल्लाना, चापाकल मोमेंट, बेटे पर बिगड़ना फिर प्यार, पत्नी के साथ रोमांस, नॉस्टैल्जिक संगीत, तोप-तलवार-चक्का वाले दृश्य, इमोशनल मोमेंट में रोना, डायलॉग्स को ऊर्जा के साथ परफॉर्म करना और आसानी से गोलियाँ चलाने से लेकर बमबारी तक वाले कारनामों को निभाना – वो इतनी सहजता से सब कुछ करते चले जाते हैं कि दिखता है कि उन्होंने कुछ खास प्रयास भी नहीं किया और सब कुछ परफेक्ट हो गया। ये इस अभिनेता की ताकत है।

दर्शकों को अपने साथ बाँध कर उसी जमाने में लेकर चले गए हैं जब ‘गदर’ आई थी – ये कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। सनी देओल को कभी उतना वर्सटाइल नहीं माना गया, क्योंकि उनका अपना एक अलग अंदाज रहा है। लेकिन, समय-समय पर उन्होंने ‘अर्जुन (1985)’, ‘अपने (2007)’ या ‘यमला पगला दीवाना (2011)’ जैसी फ़िल्मों के जरिए बताया है कि वो इसके साथ-साथ बहुत कुछ कर सकते हैं। उनके अंदाज़ को ही कई रूपों में ढाला जा सकता है।

इसी तरह ‘गदर 2’ में भी वो डायरेक्टर के सामने समर्पण करते हुए कहानी के हिसाब से अपने किरदार को जिते हुए दिखते हैं। ये दर्शकों का प्यार ही है कि वो उम्मीद करते हैं कि अगले दृश्य में ऐसा होगा और उसकी जरा सी झलक मिलते ही तालियाँ पीटते हैं, सीटियाँ बजती हैं। दक्षिण भारत के प्रमुख अभिनेताओं वाला चार्म सनी देओल में दिखता है, मतलब वो एक्शन वाले दृश्यों में कुछ भी कर सकते हैं और दर्शकों को अच्छा ही लगेगा।

22 साल बाद भी गदर का पर्यायवाची सिर्फ सनी देओल ही है। बॉलीवुड ने उनका सही इस्तेमाल न कर के बहुत कुछ मिस किया। आज जब ‘KGF’ जैसी फ़िल्में नाम कमाती हैं, सनी देओल इस दौरान में सक्रिय रह कर काफी कुछ ऐसा कर सकते थे। तालियाँ और सीटियाँ बजने वाले दृश्य भी कमर्शियल अथवा मास सिनेमा की पहचान है। सनी देओल के फैंस इस फिल्म से निराश नहीं होंगे। 67 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने अपना लोहा मनवाया है।

अगर बात उत्कर्ष शर्मा की करें, तो वो इस फिल्म में सिर्फ इसीलिए हैं क्योंकि वो निर्देशक अनिल शर्मा के बेटे हैं। फिल्म में उन्हें अच्छी-खासी फुटेज दी गई है। थिएटर में एक्टिंग करते हुए दिखाया गया है, वो कॉमेडी करते हैं, रोमांस करते हैं, गानों में डांस करते हैं, फैमिली ड्रामा का हिस्सा हैं, एक्शन के दृश्यों में सनी देओल के साथ पाकिस्तानियों को पीटते हैं, टॉर्चर के दृश्यों में वो पीड़ित हैं – यानी, उत्कर्ष शर्मा की रीलॉन्चिंग का पूरा प्रयास किया गया है।

आपको ‘जीनियस’ फ़िल्म याद है 2018 की? उसका निर्देशन भी अनिल शर्मा ने ही किया था। फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों, दोनों ने एकदम ही नकार दिया था। नवाजुद्दीन सिद्दीकी को विलेन बनाया गया था। मिथुन चक्रवर्ती एक महत्वपूर्ण किरदार में थे। बतौर संगीत निर्देशक हिमेश रेशमिया ने ‘तेरा फितूर’ (अरिजीत सिंह की आवाज में) और ‘दिल मेरी ना सुने’ (आतिफ असलम की आवाज में) जैसे अच्छे गाने बनाए जो चले भी।

फिर भी फ़िल्म पिट गई। उत्कर्ष शर्मा को 5 साल से कोई काम नहीं मिला। पिताजी ने ‘गदर 2’ के जरिए उन्हें रिलॉन्च करने की कोशिश की है। फ़िल्म भले चल जाए, उत्कर्ष शर्मा को फिर से तब तक कोई फ़िल्म नहीं मिलेगी जब तक अनिल शर्मा फिर से उन्हें लेकर कोई फ़िल्म नहीं बनाते हैं। वो ‘गदर 2’ की सबसे कामजोर कड़ी है। उनके दृश्य आपको बोरिंग लगेंगे। एंट्री वाले दृश्य में ही उनकी ओवरएक्टिंग नजर आ जाती है।

सिमरत कौर क्यूट लगी हैं और उन्हें 70 के दशक की एक लड़की के रूप में ढाला गया है और वो उस हिसाब से चुलबुली वाला किरदार निभाती भी हैं। हालाँकि, पाकिस्तान में उतना खुलापन अखरता है, जहाँ लड़कियाँ निर्णय लेती हैं कारोबार के मामले में और पिता के सामने बॉयफ्रेंड-शादी वगैरह की बातें कर सकती हैं। सनी देओल के साथ-साथ यहाँ एक और किरदार की बात करनी आवश्यक है। मुख्य विलेन, पाकिस्तानी जनरल के रोल में दिखे मनीष वाधवा।

आपको ‘चंद्रगुप्त मौर्य’ याद हैं? ये सीरियल 2011 में आता था, ‘इमेजिन टीवी’ पर। अगले साल ही ये चैनल ही बंद हो गया था। इस सीरियल में ‘चाणक्य’ का जो किरदार था, वो कइयों के जेहन में ऐसा बैठा कि आज तक बैठा ही हुआ है। सीरियल को पूरा भी नहीं किया जा सका था। मनीष वाधवा ने एक इंटरव्यू के दौरान बोला भी था कि उन्हें शिखा खोलने का मौका नहीं मिला, इसका उन्हें दुःख है।

शायद ही कोई ऐसा अभिनेता आज तक हुआ हो, जिसकी दूर-दूर तक भी अमरीश पुरी के साथ तुलना की जा सके। बच्चन-शाहरुख-रणवीर ‘डॉन’ हो सकते हैं, लेकिन ‘मोगैम्बो’ कोई नहीं हो सकता। गिन-चुन कर यही कोई 7 फिल्में की होंगी मनीष वाधवा ने, लेकिन सीरियलों में काम करने का अच्छा अनुभव है इनका। सीरियलों में अच्छे अभिनय के बावजूद उन्हें वैसा मौका नहीं मिला अपनी प्रतिभा को दिखाने का।

‘गदर 2’ में पाकिस्तानी जनरल के रूप में वो जमे हैं। खासकर उन्होंने अपने हाव-भाव और डायलॉग बोलने का जो स्टाइल आत्मसात किया है इस फ़िल्म के लिए, वो अंत तक उसका अनुसरण करते रहे हैं। वो चाणक्य के अलावा कंस, अजातशत्रु, बाजीराव पेशवा, महर्षि विश्वामित्र और रावण का किरदार भी निभाया है सीरियलों में। चन्द्रगुप्त मौर्य का किरदार निभा चुके आशीष शर्मा ने ऑपइंडिया के साथ एक इंटरव्यू के दौरान जो बताया था, शायद यही इसका कारण हो कि उन्हें मनीष वाधवा ज्यादा फिल्मों में नहीं दिखे।

उन्होंने कहा था कि बॉलीवुड के निर्माता-निर्देशक सीरियल के कलाकारों को ‘Stale’ कह कर संबोधित करते हैं, यानी बासी। उन्हें फिल्मों में लेने से हिचकते हैं। शाहरुख खान या सुशांत सिंह राजपूत जैसे अभिनेता जबकि सीरियलों से ही आए। कहानी की बात करें तो ‘ग़दर 2’ में कुछेक ट्विस्ट और मोड़ रखने की कोशिश की गई है। कुछ नया या खास नहीं है कहानी में, लेकिन जो भी है वो देखने में अच्छा लगता है। हाँ, ‘रिकॉल वैल्यू’ में फिट बैठती है ये।

‘ग़दर 2’ प्योर थिएटर दिलम: सीटियाँ, तालियाँ, नारे

कई दृश्य पुरानी ‘ग़दर (2001)’ के डाले गए हैं इसमें, या यूँ कहें कि याद दिलाए गए हैं। संगीत में ज़्यादा छेड़छाड़ नहीं किया गया है, ये अच्छी बात है। उदित नारायण की आवाज फिट बैठती है अब भी। ‘एक मोड़ आया’ गाने में बेटे आदित्य उनका अच्छा साथ देते हैं। कहीं-कहीं म्यूजिक लाउड है, कहीं-कहीं संस्कृत श्लोक हैं वीर रास वाले अंदाज़ में, लेकिन वो अखरते नहीं। कुल मिला कर फिल्म थिएटर में देखने लायक है। देखनी चाहिए।

अमीषा पटेल का बहुत ज्यादा रोल नहीं है। गानों के अलावा अधिकतर दृश्यों में वो कभी बेटे तो कभी पति के लिए रोती हुई ही दिखती हैं। उनका अभिनय सामान्य ही है, लेकिन गानों में मेकअप काफी ज़्यादा किया गया है। फिल्म निर्देशक उन्हें एक उम्रदराज माँ दिखाना चाहते थे या फिर मेकअप के साथ युवा नायिका, यहाँ थोड़ा कन्फ्यूजन का मामला है। अब नजरें ‘ग़दर 2’ के बॉक्स ऑफिस कलेक्शंस पर हैं, क्योंकि ‘ग़दर’ के फुटफॉल्स का रिकॉर्ड अब तक नहीं टूटा है।

‘ग़दर 2’ में पाकिस्तानियों की अच्छी धुलाई हुई है, उनकी फ़ौज का मजाक बनाए जाने से लेकर बांग्लादेश के गठन तक, डायलॉग्स में सब कुछ है। खासकर मास बेल्ट के लोगों को ये खासा पसंद आएगा। सीटियाँ बज रही हैं, तालियाँ पीटी जा रही हैं, ‘भारत माता की जय’ के नारे लग रहे हैं। कुल मिला कर माहौल बनाने वाली फिल्म है, अपने प्रीक्वल की तरह। पाकिस्तानियों को तो ये बिलकुल भी पसंद नहीं आएगी, लेकिन चोरी-छिपे वो देखेंगे मनोरंजन के लिए।

सुदर्शन न्यूज के रेजिडेंट एडिटर को गुरुग्राम पुलिस ने किया गिरफ्तार, हरियाणा सरकार से सुरेश चव्हाणके ने पूछे 9 सवाल

सुदर्शन न्यूज के रेजिडेंट एडिटर को गुरुग्राम पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आज (11 अगस्त 2023 ) सुदर्शन न्यूज़ ने ट्वीट कर कहा था कि उसके रेजिडेंट एडिटर मुकेश कुमार का अपहरण कर लिया गया है। वहीं, अब गुरुग्राम पुलिस ने यह साफ़ कर दिया है कि उन्हें एक ‘असत्य और भ्रामक’ ट्वीट के मामले में गिरफ्तार किया गया है। बता दें कि एक दिन पहले 10 अगस्त 2023 को गुरुग्राम पुलिस ने मुकेश कुमार पर ट्वीट को लेकर केस दर्ज किया था। 

वहीं, गुरुग्राम पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सुदर्शन न्यूज़ के CMD और संपादक सुरेश चव्हाणके ने ट्ववीट किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, “गुरुग्राम पुलिस ने मुकेश कुमार जी को ‘राष्ट्रीय एकता को ख़तरा’ के लिए गिरफ़्तार करने की जानकारी देने वाली प्रेस नोट, उनको गुंडों की तरह उठाने के 7 घंटे बाद जारी की है। यह गिरफ़्तारी ग़ैरक़ानूनी और ग़लत है। सुदर्शन न्यूज़ मुकेश कुमार जी के साथ है और गिरफ़्तारी को मीडिया के स्वतंत्रता पर आक्रमण मानता है।”

इसके साथ ही सुरेश चव्हाणके ने एक और ट्वीट किया। इसमें उन्होंने हरियाणा पुलिस से कुछ सवाल किए हैं। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, “मेवात में जिहादी झुंड के सामने लाचार हरियाणा पुलिस द्वारा मुकेश कुमार को गिरफ़्तार करने पर मेरे कुछ प्रश्न।” अपने ट्वीट के साथ उन्होंने #ReleaseMukeshKumar भी यूज़ किया है। उन्होंने ट्वीट में ये सवाल पूछे हैं-

1- मुकेश जी जैसे वरिष्ठ पत्रकार को गुरुग्राम पुलिस ने गुंडों की तरह कैसे उठाया?

2 – गिरफ्तार करने पुलिस यूनिफ़ॉर्म में क्यों नहीं गई ?

3 – मेवात के जिहादियों के झुंड को गिरफ़्तार करने से काँपने वाली पुलिस पत्रकार से गुंडागर्दी कैसे कर रही है?

4- हिंदू महिलाओं के अत्याचारी खुले घुम रहे हैं और डरपोक पुलिस मुकेश कुमार के एक ट्वीट पर FIR कर रही है?

5 – एक अधिकारी के ईगो के आगे हरियाणा सरकार नतमस्तक है?

6- इस गिरफ्तारी पर राष्ट्रवादी पत्रकार क्यों मौन हैं?

7- यही गिरफ्तारी गैर भाजपा राज्य से होती तो वह क्या करते ?

8- पत्रकारों के संगठन और मानवाधिकार वाले कहाँ हैं?

9- क्या मेवात के हिंदुओं की बात करना हरियाणा सरकार की नजर में अपराध है?

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में गुरुग्राम पुलिस ने मुकेश कुमार की गिरफ़्तारी के बारे में जानकारी देते हुए एक पत्र जारी किया। इसमें लिखा है कि बेबुनियाद, असत्य एवं भ्रामक तथ्यों के आधार पर मुकेश कुमार द्वारा एक ट्वीट किया गया था। इस मामले में संज्ञान लेते हुए गुरुग्राम की साइबर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में एक केस दर्ज किया था। उसी मामले में साइबर थाना ने मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया है।

‘इंस्पेक्टर थाने में कराते है गंदा काम…’: डिप्टी सीएम को भेजी चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल, जाँच कर सख्त कार्रवाई के आदेश

सोशल मीडिया पर यूपी के एक ऐसे मामले की चर्चा हो रही है, जिसको लेकर पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल, सोशल मीडिया पर डिप्टी सीएम और एसएसपी को भेजा गया एक पत्र वायरल हुआ है, जिसमें कहा गया है कि एक इंस्पेक्टर थाने में गंदा काम करते है।

इंस्पेक्टर पर आरोप भी अजीबो-गरीब है। दैनिक भास्कर के पत्रकार सचिन गुप्ता ने इसको लेकर ट्वीट में कहा, “इंस्पेक्टर को बवासीर है, इसलिए सरकारी आवास में हस्तमैथुन कराते हैं। छुट्टी देने के बहाने नए पुलिसकर्मियों से ये काम कराते हैं। रात में निवस्त्र होकर घर से बाहर निकल आते हैं।” सोशल मीडिया पर यही दावे किए जा रहे हैं। 

दरअसल, ऐसे आरोपों वाली चिट्ठी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और एसएसपी को भेजी गई है। इसके बारे में कहा जा रहा है कि थाने के सामूहिक पुलिसकर्मियों ने यह चिट्ठी दी है। हालाँकि, पत्र में जो आरोप लगाए गए हैं, उसको लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ लोग इसे किसी शरारती तत्व की हरकत भी बता रहे हैं। 

SP ने बताया मामला 

चिट्ठी के सामने आने के बाद एसपी क्राइम ब्रांच मुकेश प्रताप सिंह ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, “सोशल मीडिया पर एक पत्र वायरल हो रहा है। इस पत्र में भेजने वाले किसी व्यक्ति का नाम नहीं है। एक थाने के इंस्पेक्टर के ऊपर गंभीर आरोप लगाए गए है।”

उन्होंने कहा, “इस संबंध में चार दिन पहले एक प्रार्थना पत्र प्राप्त हुआ था, जिसे अनूप सिंह के नाम से दिया गया था। उसका पता नहीं चल सका है कि वह कहाँ रहता है। पत्र के माध्यम से इंस्पेक्टर की छवि खराब करने का प्रयास किया गया है।”

SP का कहना है कि इस बात का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पत्र को किसने वायरल किया है। एसपी क्राइम ने इस पत्र के सामने आने के बाद जाँच के निर्देश दिए हैं। वहीं, पुलिस का कहना है कि साजिश करने वालों को जल्द ही बेनकाब किया जाएगा। उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सम्बंधित थाने के सभी पुलिसकर्मियों ने आरोपों को बताया झूठा 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जिस थाने के थानेदार पर आरोप लगाया गया है, उसी थाने के इंस्पेक्टर क्राइम ने इसका खंडन किया है। उन्होंने बताया, “थाना प्रभारी नियमित विभाग और जनता की समस्याओं को सुनते है। उनका आवास थाना परिसर में ही है, लेकिन कोई भी अधिकारी, कर्मचारी व जनता का कोई आदमी उनके आवास पर नहीं जाता है। उनकी छवि खराब करने के लिए किसी ने झूठा प्रार्थना पत्र दिया है।”

मंतशा काजमी हॉस्टल की लड़कियों की अश्लील फोटो-वीडियो भेजती थी मोहम्मद आमिर को: गाजीपुर कॉलेज में ‘उडुपी कांड’

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर के राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में छात्राओं के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया है। दरअसल, BHMS प्रथम वर्ष की छात्रा मंतशा काजमी अपने साथ रह रही दूसरी छात्राओं की आपत्तिजनक फोटो और वीडियो बनाती थी। इसके बाद BHMS के ही द्वितीय वर्ष के अपने सीनियर मोहम्मद आमिर को भेजती थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंतशा काजमी और मोहम्मद आमिर पर यह आरोप है कि ये दोनों प्राइवेट हॉस्टल में रह रही प्रथम वर्ष की छात्राओं की आपत्तिजनक वीडियो और फोटो बनाकर छात्राओं को ब्लैकमेल करते थे। मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन ने भी इसकी जाँच की। जाँच में इस घटना की पुष्टि हुई है।

जाँच में सही पाए गए आरोप 

ब्लैकमेलिंग के इस मामले में पीड़ित छात्राओं ने बीते 7 अगस्त 2023 को कॉलेज प्रशासन को सामूहिक तौर से एक पत्र देकर शिकायत की थी। साथ ही छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के साथ-साथ पुलिस प्रशासन से भी इसकी शिकायत की थी। शिकायत के बाद हुई जाँच में आरोप सही पाए गए हैं। कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए आरोपित छात्र आमिर और मंतशा काज़मी को 6 माह के लिए निलंबित कर दिया है। 

रिपोर्ट के अनुसा, मोहम्मद आमिर जिला प्रतापगढ़ का रहने वाला है। वहीं, छात्रा मंतशा काजमी सीतापुर की रहने वाली है। कॉलेज के प्रभारी प्रिंसिपल डॉक्टर बीएन साहनी ने बताया कि आपत्तिजनक फोटो और वीडियो का यह मामला गंभीर है। आरोपितों के मोबाइल से सारे वीडियो और फोटो डिलीट करा दिए गए हैं। 

एक्शन में गाजीपुर पुलिस 

वहीं, इस मामले में गाजीपुर के एसपी ओमवीर सिंह ने कहा, “इस मामले में शिकायत मिली है। एसपी सिटी को जाँच की जिम्मेदारी दी गई है। फिलहाल आरोपित छात्र और छात्रा के मोबाइल में फिलहाल कोई ऐसा फोटो-वीडियो नहीं देखा गया है। संभवतः उन्होंने अपने मोबाइल को फॉर्मेट कर दिया हो। रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

कर्नाटक के उडुपी में भी आया था ऐसा ही मामला

बता दें कि कर्नाटक के उडुपी स्थित एक कॉलेज में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। कॉलेज के बाथरूम में कैमरा लगाकर हिन्दू लड़कियों का वीडियो बनाए घटना सामने आई थीं। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि मुस्लिम लड़कियाँ वीडियो बनाकर अपने समुदाय के लड़कों को भेजती थीं।

इस मामले में भी ‘नेत्र ज्योति कॉलेज’ कॉलेज की छात्राओं ने कई अन्य खुलासे किए थे। ‘TV9 कन्नड़’ के साथ एक इंटरव्यू में उसी कॉलेज की छात्राओं ने बताया था कि मुस्लिम लड़कियाँ पिछले 1 साल से हिन्दू छात्राओं के वीडियो बना रही थीं और मुस्लिम लड़कों के साथ साझा कर रही थीं।

छात्राओं ने बताया था, “पिछले एक साल से ये सब हो रहा था। कॉलेज के बाहर मुस्लिम लड़के कार में इंतजार करते रहते थे। हिन्दू लड़कियों का वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद मुस्लिम लड़कियाँ उन्हें जाकर अपना फोन दे देती थीं। दोपहर में लंच के समय मोबाइल फोन्स की अदला-बदली होती थी। कॉलेज मैनेजमेंट के सामने इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की।”

‘मैं भारत में जन्म लेकर धन्य हुई’: BBC इंटरव्यू में पत्रकार अमाना अंसारी ने पश्चिमी मीडिया को दिखाया आईना, मुस्लिमों के साथ भेदभाव को सिरे से किया खारिज

भारतीय शोधकर्ता एवं पत्रकार अमाना बेगम अंसारी ने पश्चिमी मीडिया को देश में मुस्लिमों के साथ भेदभाव पर नसीहत देने पर आड़े हाथों लिया है। उन्होंने बीबीसी को भी इस बात पर खरी-खरी सुनाई। दरअसल, बीबीसी ने भारत की खराब तस्वीर पेश करने के अपने रवैये के चलते हाल ही में मणिपुर हिंसा पर चर्चा के लिए एक इंटरव्यू की मेजबानी की थी।

बीबीसी में इंटरव्यू लेने वाले शख्स ने मणिपुर प्रकरण का इस्तेमाल इस तरह की हिंसक घटनाओं पर भारत की छवि और कड़े कदम उठाने की उसकी काबिलियत पर सवाल खड़े करने के उद्देश्य से किया था। बीबीसी पत्रकार ने हिंसा की कुछ छिटपुट घटनाओं का इस्तेमाल करके इस बात को बारीकी से आगे बढ़ाने का भी कोशिश की कि पीएम मोदी के कार्यकाल में भारत एक बहुसंख्यकवादी देश है, जो नियमित तौर से अल्पसंख्यकों, खासकर मुस्लिमों पर जुल्म ढाता है।

शोधकर्ता और नीति विश्लेषक अमाना बेगम अंसारी भी इस कार्यक्रम का हिस्सा थीं। इस दौरान उन्होंने भारत विरोधी प्रचार और दावों का भंडाफोड़ करते हुए बीबीसी को करारा जवाब दिया। बीबीसी के साथ इंटरव्यू वाली 2 घंटे 53 मिनट की क्लिप में अंसारी भारत के बारे में पक्षपाती धारणा के लिए पश्चिमी मीडिया पर निशाना साधती नजर आ रही हैं।

अंसारी ने कहा कि हिंसा की कुछ अलग घटनाओं के आधार पर भारत के बारे में पश्चिमी मीडिया गलत धारणा बना रहा है। अंसारी ने तर्क दिया कि पश्चिमी देशों को कोई भी फैसला लेने से पहले भारत की जटिलताओं को समझना चाहिए। इसमें वह यूपी का उदाहरण देते हुए कहती हैं कि पिछले 10 साल में वहाँ अपराध दर में 60 फीसदी से अधिक की गिरावट आई है।

इंटरव्यू के दौरान अमाना अंसारी ने कहा, “पश्चिमी मीडिया में अधिकार की एक अजीब भावना है, जो उन्हें यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि उन्हें भारत के आंतरिक मामलों पर उपदेश देने और उसमें दखलअंदाजी करने का पूरा हक है।”

उन्होंने कहा कि पश्चिमी मीडिया, भारत में कई प्रचार आउटलेटों और कॉन्ग्रेसी जैसे विपक्षी दलों के अटूट समर्थन के साथ भारत के मुस्लिमों के खिलाफ ‘भेदभावपूर्ण’ और ‘पूर्वाग्रह से युक्त’ होने की तस्वीर दिखाने की लगातार कोशिश करता रहा है। उन्होंने कहा कि यह काम बीते 10 साल से अधिक हो रहा है, जब से पीएम नरेंद्र मोदी सत्ता में आए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ये अंतरराष्ट्रीय आउटलेट ‘डरा हुआ मुस्लिम’ की झूठी एवं मनगढ़ंत कहानी को बढ़ावा देते हुए अपने भारत विरोधी और हिंदू विरोधी पूर्वाग्रहों को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा उतावले रहते हैं। हाल ही में मणिपुर में हुई हिंसा में अपने इस काम को आगे बढ़ाने के लिए इन्हें चारा मिल गया है।

मणिपुर हिंसा के बारे में पूछे गए सवालों का दृढ़ता से जवाब देते हुए उन्होंने कहा, “जब पश्चिमी दुनिया भारत की ओर देखती है तो उन्हें यह समझना चाहिए कि हम छह प्रमुख वैश्विक आस्थाओं (धर्मों) को समाहित करते हैं। पश्चिम यह समझ पाता कि विविधता क्या है, तब से हम विविधता में रहते आ रहे हैं।”

अंसारी ने इस गलत धारणा की निंदा की कि भारतीय मुस्लिमों पर हमला हो रहा है या देश में मुस्लिम नरसंहार हो रहा है। दरअसल इस धारणा का इस्तेमाल पश्चिमी मीडिया लगातार भारत को बदनाम करने के लिए बढ़ावा देते आ रहा है। इस दौरान बीबीसी पत्रकार ने पीएम मोदी के हिंदू राष्ट्रवाद के विचार पर सवाल उठाया।

इस पर मोदी सरकार का जोरदार बचाव करते हुए अंसारी ने कहा, “यह बहुआयामी नजरिया है। जब हम हिंदुओं के बारे में बात करते हैं तो हम हिंदू संस्कृति के बारे में भी बात करते हैं। भारत हिंदू संस्कृति का प्रतीक है। मेरे जैसे कई भारतीय मुसलमान, कभी हिंदू थे और बाद में परिवर्तित हो गए थे। हमें इस वास्तविकता को स्वीकार करना चाहिए।”

उन्होंने गैर-धर्मनिरपेक्ष इस्लामी देशों के मुकाबले भारत में मिलने वाली आजादी का हवाला देते हुए कहा कि वह अपनी भारतीय मुस्लिम पहचान को अहमियत देती हैं। पत्रकार अंसारी ने इस इंटरव्यू के दौरान कहा, “मैं भारत में जन्म लेकर धन्य महसूस कर रही हूँ। मैं एक मुस्लिम-बहुल देश में पैदा होने की कल्पना करूँ तो मैं भारत में जो आजादी को महसूस कर रही हूँ वह वहाँ संभव नहीं हो पाएगी।”

साल 2022 में कर्नाटक में छिड़ी बुर्का बहस के दौरान अमाना अंसारी उन बहुत कम महिलाओं में से एक थीं, जिन्होंने इस प्रथा के खिलाफ जोरदार ढंग से अपनी बात रखी थी। इस घटना का सेक्युलरों और इस्लामवादियों ने पूरे दिल से बचाव और समर्थन किया और इसे निजी आजादी का मुद्दा बना डाला था।

चर्च में माइकल मैथ्यू ने फाड़ी हनुमान चालीसा, बोला- ‘बाइबिल अच्छी है, तुम भी ईसाई बन जाओ’: 6 लोगों के खिलाफ FIR

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक चर्च के भीतर हनुमान चालीसा फाड़ने का मामला सामने आया है। आरोप है कि माइकल मैथ्यू नामक व्यक्ति ने बाइबिल को सर्वश्रेष्ठ बताते हुए हनुमान चालीसा फाड़ दी। इस घटना को लेकर मौके पर मौजूद हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया। पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। वहीं, कुछ हिरासत में भी लिए गए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला इंदौर के हीरा नगर थाना क्षेत्र का है। यहाँ एक चर्च में गुरुवार (10 अगस्त 2023) को प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी। इस सभा में इंदौर के आसपास के इलाके के लोगों के अलावा दूसरे प्रदेशों के लोग भी शामिल हुए थे। प्रार्थना सभा के दौरान ही हनुमान चालीसा फाड़ी गई।

इस मामले में पुलिस को दी अपनी शिकायत में राजकुमार सेन नामक व्यक्ति ने कहा है कि वह गुरुवार सुबह करीब 7 बजे अपने घर के बाहर टहल रहा था। इसी दौरान ऑटो रिक्शा से आए लोगों ने उनसे चर्च जाने का रास्ता पूछा। इस पर उन्होंने रास्ता बता दिया। साथ ही पूछा कि वे क्यों और कहाँ से आए हैं? इस पर उन लोगों ने कहा कि वे गुजरात के दाहोद से हैं और सिलाई का काम सीखने आए हैं।

चर्च का रास्ता पूछने वाले लोगों की बातों पर राजकुमार सेन को शक हुआ। ऐसे में उन्होंने इसकी जानकारी अपने अन्य साथियों को दी। इसके बाद राजकुमार अपने अन्य साथियों सहित चर्च पहुँचे। वहाँ दूसरे जिलों के रजिस्ट्रेशन वाले कई वाहन खड़े दिखाई दिए। अंदर जाकर देखा तो चर्च में रहने वाले माइकल मैथ्यू के हाथों में हनुमान चालीसा थी।

माइकल मैथ्यू चर्च आए लोगों से ईसाई मजहब से जुड़ी बातें कर रहा था। इसके बाद वह हनुमान चालीसा फाड़ने लगा। इस पर राजकुमार सेन व उनके अन्य साथियों ने विरोध जताया। विरोध जताने पर वहाँ मौजूद लोग भड़क गए और राजकुमार सेन एवं उनके साथियों को बाहर निकालने लगे।

जोमेन जोसफ, अभिषेक नेत्राम, सेम जोसेफ, बैजू बी और रेखा समेत अन्य लोग उन्हें बाहर निकाल रहे थे, लेकिन राजकुमार बाहर जाने को तैयार नहीं थे। ऐसे में उनके बीच बहस शुरू हो गई। बहस के दौरान ही ईसाइयों द्वारा उन्हें कहा गया कि ‘बाइबिल अच्छी है, तुम भी इसे बन जाओ’। वे लगातार ईसाई मजहब अपनाने को लेकर बातें कर रहे थे। 

मामले की सूचना मिलने पर हिंदू संगठन के साथ पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी गई। इसके बाद पुलिस ने आरोपित माइकल मैथ्यू, जोमेन जोसफ, अभिषेक नेत्राम, सेम जोसेफ, बेबूजी और रेखा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है।

गत रविवार सामने आया था धर्मांतरण का मामला

बता दें कि इससे पहले रविवार (6 अगस्त 2023) को इंदौर के हीरा नगर थाना क्षेत्र के मंगल नगर में धर्मांतरण का मामला सामने आया था यहाँ किराए के एक मकान में इंदौर समेत आसपास के इलाके के हिंदुओं को इकट्ठा किया गया था। हिंदू संगठनों का आरोप है कि इस मकान में प्रत्येक रविवार प्रार्थना सभी आयोजित की जाती है।

रविवार (6 अगस्त, 2023) को भी प्रार्थना सभा के नाम पर 200 लोगों को इकट्ठा कर धर्मांतण कराया जा रहा था। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने मौके पर जाकर देखा तो ईसाई मजहब के लोग हिंदुओं से यीशु की प्रार्थना करवा रहे थे। प्रार्थना सभा में शामिल लोगों में से अधिकांश हिंदू थे। वहाँ से ईसाई मजहब से जुड़ी किताबें और पोस्टर बरामद हुए थे।