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जिस जज ने राहुल गाँधी की सजा पर नहीं लगाई रोक, उन्हें गुजरात से पटना भेजने की सिफारिश: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने हाईकोर्ट के 9 जजों का किया ट्रांसफर

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने मोदी सरनेम मामले में राहुल गाँधी (Rahul Gandhi) की सजा पर रोक लगाने से इनकार करने वाले 2 जजों समेत हाईकोर्ट के 9 जजों के ट्रांसफर की सिफारिश की है। इसमें गुजरात दंगों से जुड़ी एफआईआर रद्द करने को लेकर तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई से हटने वाले न्यायमूर्ति समीर दवे भी शामिल हैं।

कॉलेजियम द्वारा गुजरात हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति हेमंत एम प्रच्छक, न्यायमूर्ति कुमारी गीता गोपी, न्यायमूर्ति समीर दवे, न्यायमूर्ति अल्पेश वाई कोगजे के ट्रांसफर की सिफारिश की गई है। इनमें से न्यायमूर्ति हेमंत एम प्रच्छक ने मोदी सरनेम मामले में राहुल गाँधी की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। वहीं, न्यायमूर्ति कुमारी गीता गोपी ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

इसके अलावा, न्यायमूर्ति समीर दवे ने गुजरात दंगों के मामले में फर्जी दस्तावेज गढ़ने को लेकर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की माँग वाली तीस्ता सीतलवाड़ की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। कॉलेजियम की सिफारिश के अनुसार, न्यायमूर्ति प्रच्छक को पटना हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति कुमारी गीता गोपी को मद्रास हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति अल्पेश वाई कोगजे को इलाहाबाद हाईकोर्ट और न्यायमूर्ति समीर दवे को राजस्थान हाईकोर्ट भेजने के लिए कहा गया है।

(फोटो साभार: SCI)

ट्रांसफर सिफारिश सूची में गुजरात हाईकोर्ट के जजों के अलावा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान को इलाहाबाद हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति अवनीश झिंगन को गुजरात हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति राज मोहन सिंह को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति अरुण मोंगा को राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए कहा गया है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह का ट्रांसफर मद्रास हाईकोर्ट करने की भी सिफारिश की गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इन जजों ने अपना तबादला रोकने या फिर अड़ोस-पड़ोस के राज्यों में करने का आग्रह सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम से किया था। हालाँकि, कॉलेजियम ने उनकी अपील को खारिज क दी थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कई जजों के तबादले की सिफारिश दोबारा सरकार को भेजी है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश संजय कौल, न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायाधीश बीआर गवई, न्यायाधीश सूर्यकांत ने 3 अगस्त 2023 को बैठक की थी और इसमें ट्रांसफर से जुड़ा फैसला लिया था। हालाँकि, इसे गुरुवार (10 अगस्त 2023) को वेबसाइट में अपलोड किया गया। इसमें कहा गया है कि यह सिफारिश न्याय के बेहतर प्रशासन के लिए की जा रही है।

मोदी सरनेम मानहानि मामला:

सूरत कोर्ट ने राहुल गाँधी को मोदी सरनेम मानहानि मामले में 2 साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद राहुल गाँधी सूरत सेशन कोर्ट गए, लेकिन वहाँ भी उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया था। राहुल की अपील से जस्टिस गोपी ने खुद को अलग कर लिया था।

इसके बाद यह मामला न्यायमूर्ति हेमंत एम प्रच्छक की बेंच के पास गया और उन्होंने सुनवाई की थी। अपने फैसले में प्रच्छक ने सेशन कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए राहुल गाँधी की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहाँ से फिलहाल उनकी सजा पर रोक लगी हुई है।

‘हमारे राहुल जी को लड़की का कमी नहीं है, 50 साल की बूढ़ी को क्या फ्लाइंग किस देंगे’: कॉन्ग्रेस की महिला MLA के गजब बोल

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर महिला सांसद को फ्लाइं​ग किस देने के गंभीर आरोप लगे थे। बीजेपी की महिला सांसदों ने इस हरकत को लेकर उन पर कार्रवाई की माँग भी की थी। अब कॉन्ग्रेस की एक महिला विधायक ने अपने पार्टी नेता के बचाव में अजीबोगरीब बयान दिया है। इस महिला विधायक के अनुसार राहुल गाँधी को फ्लाइंग किस देना होगा तो किसी लड़की को देंगे। 50 साल की बूढ़ी को क्यों देंगे?

कॉन्ग्रेस की इस महिला नेता का नाम है नीतू सिंह। वे बिहार के नवादा की हिसुआ से विधायक हैं। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा, “हमारे राहुल जी के पास लड़की की कमी नहीं है। अगर फ्लाइंग किस देना होगा तो किसी लड़की को देंगे। 50 साल के बूढ़ी को क्या फ्लाइंग किस देंगे। यह सब आरोप निराधार है।”

नीतू सिंह के बयान ने राहुल गाँधी का बचाव करने की जगह एक नया विवाद खड़ा कर दिया। भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने नीतू सिंह के इस बयान को शर्मनाक करार दिया है।

भाजपा महिला मोर्चा की मीडिया प्रभारी नीतू डबास (Neetu Dabas) ने ट्वीट कर कहा है, “कॉन्ग्रेस नेता हर बार अपने अमर्यादित व्यवहार से महिलाओं का अपमान करते हैं। ‘राहुल गाँधी के पास लड़कियों की कमी नहीं है, फ्लाइंग किस 50 साल की बुड्ढी को थोड़ी देंगे।’ यह संकीर्ण मानसिकता कॉन्ग्रेस विधायक नीतू सिंह की है। मतलब जो काम नेहरू करता था, वही अब राहुल गाँधी करता है। क्या इससे शर्मनाक कुछ और भी हो सकता है?”

वहीं, भाजपा नेता अभिषेक आचार्य ने लिखा, “ये हैं कॉन्ग्रेस विधायक नीतू सिंह। इनकी गिरी हुई मानसिकता और शब्द इतने निम्नस्तर के हैं कि सुप्रिया श्रीनेत की गंदी जीभ छोटी पड़ जाए। सही कह रही है, आपके राहुल जी को लड़कियों की कमी नही है। उनके कई वायरल वीडियो में हम देख भी चुके हैं और राहुल गाँधी बैंकॉक क्यों जाते हैं ये भी पता है।”

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी के कथित फ्लाइंग किस को लेकर भाजपा की 20 महिला सांसदों ने पत्र लिखकर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से शिकायत भी की है। टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार, इन सांसदों ने राहुल गाँधी की ‘फ्लाइंग किस’ से जुड़ा एक वीडियो भी शेयर किया है।

उठाकर ले गई पुलिस, DSP ने मुँह पर किया पेशाब, कॉन्ग्रेस MLA ने जीभ से साफ करवाए अपने जूते: राजस्थान के दलित का दावा

राजस्थान के जयपुर के जमवारामगढ़ में एक दलित के साथ मारपीट करने, उसके मुँह पर पेशाब करने और उससे जूते चटवाने का मामला सामने आया है। इस मामले में कॉन्ग्रेस विधायक गोपाल मीणा, डीएसपी शिवकुमार भारद्वाज सहित चार लोगों पर आरोप लगे हैं। पीड़ित का दावा है कि पुलिस उसे खेत से उठाकर ले गई और प्रताड़ित किया। कोर्ट के दखल के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। हालाँकि कॉन्ग्रेस विधायक ने इसे जमीनी विवाद बताते हुए आरोपों को खारिज कर दिया है।

रिपोर्ट के मुताबिक विधायक के आरोपित होने के कारण मामले की जाँच सीबी सीआईडी को दी गई है। आरोप है कि बिना नजराना दिए खेत में जाने पर दलित को प्रताड़ित किया गया। 51 वर्षीय पीड़ित ने बताया है कि उसके साथ यह घटना 30 जून 2023 को हुई थी। इस मामले में एफआईआर 27 जुलाई को दर्ज की गई। लेकिन मामला सार्वजनिक 10 अगस्त को हुई जब पीड़ित ने दिल्ली आकर मीडिया से बात की। उसने बताया कि कॉन्ग्रेस एमएलए और डीएसपी के खौफ की वजह से वह अब तक चुप था।

पीड़ित के अनुसार 30 जून की दोपहर वह अपने गाँव टोडालडी में अपनी पत्नी के साथ खेत में काम कर रहा था। इसी दौरान कुछ पुलिसवाले आए और उसे उठाकर ले गए। उसे अगवा कर एमएलए मीणा के घर ले जाया गया। वहाँ एक कमरे में बंद कर पुलिस ने उसकी पिटाई की। पीड़ित के अनुसार जब उसने छोड़ने की गुहार लगाई तो डीएसपी शिव कुमार भारद्वाज ने उसके मुँह पर पेशाब कर दी। कथित तौर पर डीएसपी ने उससे कहा कि जमवारामगढ़ के राजा (कॉन्ग्रेस विधायक मीणा) को नजराना दिए बिना टोडालडी में खेत में आने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई।

कॉन्ग्रेस विधायक ने चटवाए जूते: दलित पीड़ित

पीड़ित दलित का आरोप है कि इसके बाद पुलिसकर्मी उसे एमएलए मीणा के घर के हॉल में लेकर गए। वहाँ एमएलए मीणा कुर्सी पर बैठे थे। उन्होंने पीड़ित से अपने जूते चाटने को कहा। कथित तौर पर एमएलए मीणा ने कहा, “जब तक मेरे जूते जीभ से साफ नहीं करेगा, तब-तक जाने नहीं दूँगा।” पीड़ित के अनुसार जूते चाटने के बाद ही उसे छोड़ा गया। साथ ही डीएसपी शिव कुमार भारद्वाज ने उसे फिर से टोडालडी के खेत में नहीं जाने की धमकी दी। कहा कि दोबारा वहाँ दिखे तो जान से मरवा देंगे और लाश का भी पता नहीं चलेगा।

एफआईआर नहीं दर्ज कर रही थी राजस्थान पुलिस

पीड़ित का यह भी आरोप है कि पुलिस ने उसका केस दर्ज करने से इनकार कर दिया था। उसने एसपी ग्रामीण से लेकर डीजीपी तक गुहार लगाई। लेकिन इसका भी फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फिर जमवारामगढ़ थाने में 27 जुलाई को एफआईआर दर्ज की गई।

कॉन्ग्रेस विधायक बोले- आरोप बेबुनियाद

एमएलए मीणा ने खुद पर लगे आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उनका कहना है यह मामला पूर्व डीजीपी नवदीप सिंह और उनकी पत्नी परम की जमीनी विवाद से जुड़ा है। कॉन्ग्रेस विधायक ने पीड़ित दलित को जानने से भी इनकार किया है।

मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए नेहरू ने किए थे ‘वन्दे मातरम’ के टुकड़े’: राहुल गाँधी को PM मोदी ने बताया कॉन्ग्रेस का इतिहास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अगस्त, 2023 को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी दलों को जमकर लताड़ लगाई। इसी दौरान उन्होंने संसद में दिए गए राहुल गाँधी के बयान ‘भारत माता की हत्या’ पर जवाब देते हुए वन्दे मातरम का इतिहास बताया। उन्होंने बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस ने वन्दे मातरम के टुकड़े कर बहुत पहले ही देश के विभाजन की नींव रख दी थी। 

वन्दे मातरम पर कॉन्ग्रेस ने कैंची क्यों चलाई थी? राजनीतिक वजह से, धार्मिक वजह से या किसी व्यक्ति को खुश करने के लिए? पूरी बात समझने के लिए वन्दे मातरम के इतिहास की तरफ मुड़ते हैं। समझते हैं कि यह कब पहली बार अस्तित्व में आया… कब इस पर किसी ने आपत्ति जताई और कब कॉन्ग्रेसियों ने इसे खंडित ही कर दिया।

वन्दे मातरम का इतिहास

वन्दे मातरम की रचना सबसे पहले बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा पाँच छंदों की कविता के रूप में 7 नवंबर 1875 को की गई थी। ऐसा माना जाता है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को वन्दे मातरम का आइडिया तब आया था, जब वह डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के रूप में अंग्रेजों की सेवा में थे।

इसी वन्दे मातरम को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 1882 में बंगाली उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित किया। 1896 में रवीन्द्र नाथ टैगोर ने इसे गीतबद्ध किया था। इसके बाद यह उस समय क्रांति का तराना बन गया था। हर क्रन्तिकारी, अमर बलिदानी के जुबान पर यही गीत थी। 

वन्दे मातरम के पाँचों छंद

क्रांतिगीत वन्दे मातरम का विरोध क्यों?

दरअसल, ‘वन्दे मातरम’ का देश विरोधी ताकतों और मुस्लिम लीग द्वारा विरोध शुरू किया गया। जिन आधारों पर विरोध शुरू किया गया, उसी रास्ते पर आगे चल कर देश का बँटवारा भी हुआ। पूरी बात समझने के लिए आपको जानना होगा कि कब और क्यों इसका विरोध शुरू हुआ? फिर नेहरू और कॉन्ग्रेस द्वारा कैसे सिर्फ मुस्लिमों के तुष्टिकरण के लिए इसे खंडित कर इसके एक छोटे हिस्से को राष्ट्रगीत घोषित किया गया?

एक समय था जब पूरा देश इस गीत को गुनगुना रहा था। श्री अरबिंदों ने तो इसे राष्ट्रवाद का मंत्र बता दिया था। लाला लाजपत राय ‘वंदे मातरम’ नाम से उर्दू साप्ताहिक निकाल रहे थे। मैडम भीकाजी कामा ‘वंदे मातरम’ लिखा भारतीय झंडा विदेश में लहरा चुकी थीं। तब मुस्लिम लीग क्या कर रहा था? वो कर रहा था इसका विरोध… 1908 से ही मुस्लिम लीग ने वन्दे मातरम का विरोध करना शुरू कर दिया था।

विरोध की वजह थी – इस गीत में मातृभूमि की वंदना और देवी-देवताओं का जिक्र। मुस्लिमों ने इस पर नाराजगी दिखानी शुरू कर दी। अमृतसर में हुए अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के दूसरे अधिवेशन में 30 दिसंबर 1908 को अध्यक्षीय भाषण देते हुए सैयद अली इमाम ने वंदे मातरम का विरोध किया। इसके बाद खिलाफत आंदोलन के जरिए यह भावना प्रबल होती गई कि वंदे मातरम इस्लाम विरोधी है।

वंदे मातरम और कॉन्ग्रेस

क्रांति का तराना वंदे मातरम अब विवादास्पद हो गया था क्योंकि मुस्लिमों का एक बड़ा वर्ग गीत में वर्णित देवी दुर्गा की स्तुति का विरोध कर रहा था। कॉन्ग्रेस भला पीछे कैसे रहती? मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए कॉन्ग्रेस ने तब जो काम किया, वो आज तक कर रही है।

वंदे मातरम को लेकर 1937 में कॉन्ग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति गठित की। इसमें मुस्लिम प्रतिनिधि के तौर पर मौलाना अबुल कलाम आजाद को शामिल किया गया। आजाद ने गीत को पढ़ा और पाया कि इसके शुरुआती दो छंद इस्लाम विरोधी नहीं हैं। उनके अनुसार, इन दो छंदों के बाद हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है।

समिति के विचार-विमर्श के बाद एक फैसला लिया गया। नेहरू के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस कार्यसमिति ने 26 अक्टूबर 1937 में एक लंबा बयान जारी कर इस गीत के टुकड़े कर दिए। फैसले के एक भाग को पढ़िए और समझिए:

“इसमें मुस्लिम बंधुओं का विरोध देख अपील की गई थी कि वंदे मातरम को आनंदमठ से अलग करके पढ़ा जाए और इसके केवल दो ही छंद इस्तेमाल हों, जिनमें हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख नहीं बल्कि मातृभूमि के सौन्दर्य और गुण की चर्चा है।”

वंदे मातरम को लेकर कॉन्ग्रेस ने जो फैसला लिया, उसका असर क्या हुआ? 5 छंद के गीत को काट कर सिर्फ 2 छंद कर देने से क्या मामला शांत हो गया? नहीं हुआ। बल्कि मुहम्मद अली जिन्ना जैसे कट्टरपंथी लोगों को और बल मिल गया। जिन्ना ने 1 मार्च 1938 को इस गीत के विरोध में फिर से एक मुहिम छेड़ा और द न्यू टाइम्स ऑफ लाहौर में लेख लिखा। कट्टरपंथी मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काना, जिन्ना के कट्टरपंथी विचारों को कॉन्ग्रेस द्वारा पोषित किया जाना ही भारत के विभाजन का मुख्य कारण बना।

आजादी के बाद वंदे मातरम और कट्टरपंथी मुस्लिम

आजादी के बाद 2 छंदों वाले टुकड़े किए गए वंदे मातरम को ही 24 जनवरी 1950 को देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रगीत घोषित किया। उन्होंने इस गीत को लेकर तब कहा था:

“वन्दे मातरम गीत, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, को जन-गण-मन के समान सम्मानित किया जाएगा और इसे समान दर्जा दिया जाएगा।”

सवाल यह है कि इस गीत पर कैंची चलाने के बाद भी कॉन्ग्रेसी मुस्लिमों का तुष्टिकरण कर पाए? अव्वल दर्जे से असफल हुए… क्योंकि कट्टरपंथी मुस्लिमों को तो छोड़िए, मुस्लिम विधायक-सासंद भी वंदे मातरम नहीं गाते/बोलते हैं।

ट्विटर से पैसे कमाने का आसान तरीका, बिना वीडियो बनाए भी पैसे देगा एलन मस्क का ‘X’: सरल शब्दों में समझें क्या-क्या करना होगा

अब आप सिर्फ ट्वीट कर के कमाई कर सकते हैं। दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति एलन मस्क के नियंत्रण में आने के बाद ट्विटर अब ‘X’ बन गया है और ट्वीट को पोस्ट कहा जाने लगा है, रीट्वीट को रिपोस्ट नाम दिया गया है, लेकिन ये बदलाव सिर्फ नाम बदलने तक ही सीमित नहीं है। अब ट्विटर आपकी कमाई का जरिया भी बन सकता है। ठहरिए, अगर आप सोच रहे हैं कि इसके लिए आपको वीडियो बनाना होगा तो आप गलत हैं। ज़रूरी नहीं कि ट्विटर पर कमाई के लिए आप वीडियो ही बनाएँ।

ट्विटर (X) ने बदले नियम, अब सिर्फ ट्वीट कर के करें कमाई

आगे बढ़ने से पहले ट्विटर के नए नियमों को समझ लेते हैं। ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) ने बताया है कि इस प्लेटफॉर्म पर अब ज़्यादा से ज़्यादा यूजर्स को पैसे कमाने का मौका मिलेगा। आप सोच रहे होंगे कि वो कैसे? जैसा कि पहले ही ऐलान किया जा चुका था, विज्ञापनों से आने वाले राजस्व की धनराशि ट्विटर अब अपने यूजर्स के साथ शेयर कर रहा है। जो इसके पात्र हैं, उन्हें इसकी पहली खेप उनके बैंक खातों में पहुँच भी चुकी है।

राजस्व को शेयर करने का मतलब ये हुआ कि ट्विटर को विज्ञापनों से जो पैसे आ रहे हैं, उनमें अब यूजर्स का भी हिस्सा होगा। YouTube वर्षों से ऐसा करते आ रहा है, तभी आप खबरों में देखते हैं कि फलाँ यूट्यूबर ने इस साल इतने रुपए की कमाई की। व्यूज के हिसाब से यूट्यूब पैसे देता है। वीडियो में जो विज्ञापन चलते हैं, उससे आने वाले पैसों का एक हिस्सा वीडियो क्रिएटरों को मिलता है। ट्विटर इस मामले में अलग है, वहाँ वीडियो ही नहीं बल्कि सिर्फ टेक्स्ट-तस्वीरें डाल कर भी कमाई की जा सकती है।

वापस आते हैं ट्विटर के नए नियमों पर। एड रेवेन्यू में शेयरिंग के लिए पात्रता को और आसान करते हुए ‘X’ ने ऐलान किया है कि जिन यूजर्स के ट्वीट्स के ‘इम्प्रेशन्स’ 5 मिलियन या उससे अधिक हैं पिछले 3 महीनों में, उन्हें अब विज्ञापन से आने वाले राजस्व में हिस्सेदारी पाने का मौका मिलेगा। पहले ये आँकड़ा 15 मिलियन यानी 1.5 करोड़ था, अब ये 50 लाख कर दिया गया है। यानी, तीन गुना कम कर दिया गया है इसे। इससे यूजर्स का एक बड़ा दायरा इससे जुड़ेगा।

कैसे देखें अपने ट्विटर हैंडल के आँकड़े?

अब आप सोच रहे होंगे कि आप कैसे पता लगाएँगे कि आपके ट्वीट्स के ‘इम्प्रेशन्स’ क्या हैं? इसके लिए ट्विटर का एक टूल है ‘ट्विटर एनालिटिक्स‘, जिस पर जाकर आप ये देख सकते हैं। एक और नियम आसान बनाया है ट्विटर ने। पिछले 1 महीने में आपने कितने ट्वीट्स किए, इम्प्रेशन्स क्या रहे हैं, आपकी प्रोफाइल कितने लोगों ने देखी, कितनी बार आपके हैंडल को मेंशन किया गया और आपके फॉलोवर्स में कितनी बढ़ोतरी हुई – ये सब आपको यहीं पर देखने को मिलेगा।

मौजूदा महीने के ‘इम्प्रेशन्स’ से लेकर आपके सारे ताज़ा ट्वीट्स की रीच तक, एक क्लिक में सारे आँकड़े आपके पास होंगे। ग्राफ के माध्यम से आपको आसानी से बता दिया जाएगा सब कुछ। ‘इम्प्रेशन्स’ का मतलब हुआ, आपके ट्वीट्स को कितनी बार देखा गया ट्विटर पर। किसी ने लाइक-रिपोस्ट नहीं किया, सिर्फ स्क्रॉल भी कर लिया देख कर तो वो भी ‘इम्प्रेशन्स’ में गिना जाता है। इतना ही नहीं, किसी व्यक्ति ने 10 बार आपकी ट्वीट को देखा तो भी इम्प्रेशन बढ़ेगा, ज़रूरी नहीं कि 10 व्यक्ति देखे तभी इम्प्रेशन 10 होगा।

फिर आपके मन में सवाल उठेगा कि ‘इम्प्रेशन’ तो समझ लिया लेकिन ये ‘इंगेजमेंट’ क्या बला है। इंगेजमेंट को लेकर कोई शर्त नहीं रखी है ट्विटर ने आपकी कमाई के लिए, लेकिन इसके बारे में जानना जरूरी है। किसी ने आपकी ट्वीट को क्लिक किया, लाइक किया, रिपोस्ट (रीट्वीट) किया, आपकी प्रोफाइल पर क्लिक किया, ट्वीट में मौजूद लिंक पर क्लिक किया, उसे कोट किया या फिर सेव किया – ये सब इंगेजमेंट में गिना जाएगा। इंगेजमेंट हमेशा इम्प्रेशन से कम ही रहता है।

ट्विटर ने नियमों को और आसान किया है। पहले नियम था कि अगर आपकी कमाई 50 डॉलर तक हो जाएगी तभी आप पैसे आपके बैंक खाते में डाले जाएँगे, लेकिन अब इसे घटना कर 10 डॉलर कर दिया गया है। ट्विटर ने कहा है कि इसका फायदा उठाने के लिए आपको ‘प्रीमियम सब्सक्रिप्शन’ के लिए साइनअप करना होगा। अर्थात, ट्विटर का ब्लू टिक खरीदना होगा। इसी बीच एलन मस्क ने एक नया ऐलान कर दिया जो और राहत देने वाला है।

उन्होंने बड़ी जानकारी दी है कि जिन भी ट्विटर हैंडल के ट्वीट्स 5 मिलियन से अधिक बार देखे जाएँगे ट्विटर पर, उन सबको ‘X प्रीमियम’ (ट्विटर ब्लू) फ्री में मिलेगा। लेकिन, इसमें एक पेंच है। जो हैंडल वेरिफाइड हैं, केवल उनके द्वारा ही आपके ट्वीट्स को 5 मिलियन बार देखा जाना चाहिए। कहीं बॉट्स का इस्तेमाल कर के फेक रीच न जेनेरेट किए जाने लगें, इसीलिए ये शर्त लगाई गई है। सीधे शब्दों में – आपके ट्वीट को 50 लाख बार देखा जाता है वेरिफाइड हैंडलों द्वारा, तो आपको ब्लू टिक फ्री और कमाई भी।

अब तक हमने क्या जाना? हमने जाना कि ट्विटर, जो अब ‘X’ हो गया, वो सिर्फ ट्वीट करने के लिए पैसे दे रहा है। शर्तें हैं – 3 महीने में 5 मिलियन व्यूज (वेरिफाइड हैंडलों द्वारा) आपके ट्वीट्स पर, ट्विटर के ब्लू टिक का सब्सक्रिप्शन और ‘Stripe’ पर आपका अकाउंट होना पेमेंट के लिए। हमने जाना कि ये पात्रता पूरी करने के बाद आपको ‘ट्विटर ब्लू’ भी फ्री में मिल जाएगा। कमाई 10 डॉलर पहुँचते ही इसे बैंक खाते में भेज दिया जाएगा।

ब्लू टिक लेने के लिए आपको वेब के माध्यम से आपको प्रति महीने 680 रुपए या फिर प्रतिवर्ष 6800 रुपए का भुगतान करना होता है। वहीं स्मार्टफोन में एप के माध्यम से ब्लू टिक का सब्सक्रिप्शन लेने के लिए आपको प्रति महीने 900 रुपए का फिर साल में 9000 रुपए का भुगतान करना होगा। इसके लिए चौथी शर्त है – आपको ‘Stripe’ नामक प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाना होगा और उसे अपने ट्विटर हैंडल से जोड़ना होगा।

ये ‘Stripe’ क्या बला है? कैसे देखें कितने पैसे आ रहे

एक शंका बच गई। अब ये ‘Stripe’ क्या बला है? ‘Stripe’ एक आयरिश-अमेरिकन वित्तीय सेवाएँ देने वाला प्लेटफॉर्म है, जो सिर्फ पेमेंट गेटवे न होकर इससे भी अधिक काम करता है। मार्केटप्लेस के वित्तीय प्रबंधन से लेकर सब्स्क्रिप्शन्स को मैनेज करने तक, इसके माध्यम से सभी पैसों के लेनदेन वाले काम किए जा सकते हैं। इस पर अकाउंट बनाने के लिए आपको नाम, ईमेल, पैन और फोन नंबर वेरिफाई कराना पड़ेगा। आपको भारत के टैक्स से जुड़े नियमों का पालन करना होगा, इसके लिए एक फॉर्म आपसे भरवाया जाएगा।

आपका ‘Stripe’ अकाउंट आपके ट्विटर हैंडल से जुड़ जाएगा। आपको ट्विटर (X) पर नहीं दिखेंगे कि आपकी कमाई कितनी हो रही है, न ही ये एकालिटिक्स टूल पर दिखेगा। ये दिखेगा आपके स्ट्राइप अकाउंट पर। स्ट्राइप अकाउंट पर पैसे आएँगे, आप रोज की कमाई देख सकते हैं, कमाई के लक्ष्य सेट कर सकते हैं और फिर उसे अपने बैंक खाते में भेज सकते हैं। कितने पैसे आए, कितने खाते में भेजे गए – सारी हिस्ट्री आपको स्ट्राइप पर ही दिखेगी। आप पेटीएम और फोनपे का उपयोग करते हैं तो इसे समझने में कठिनाई नहीं होगी।

ट्वीट रिप्लाइज से पैसे कैसे कमाएँ? – जानें प्रक्रिया

इसके लिए आपको सबसे पहले ट्विटर के ‘Monetization’ वाले सेक्शन में जाना होगा। इस लिंक पर क्लिक कर के आप सीधे वहाँ तक पहुँच सकते हैं। वहाँ आपको ‘जॉइन एन्ड सेटअप पेआउट्स’ विकल्प दिखेगा, जिस पर क्लिक करने के बाद आपको स्ट्राइप पर अकाउंट बनाने के लिए कहा जाएगा। कुल मिला कर इसे ऐसे समझिए कि आपके कंटेंट या ट्वीट की रिप्लाई में एड दिखाने की एवज में आपको ये पैसे दिए जाएँगे।

‘Monetization’ वाले सेक्शन में जाएँ, फिर ‘Ads रेवेन्यू शेयरिंग’ में जाएँ

जितने ज्यादा लोग इस एड को देखेंगे उस हिसाब से आपके पैसे बढ़ेंगे। अगर किसी को ट्विटर के एड रेवेन्यू शेयरिंग सिस्टम से बाहर निकलना है तो वो पेड सपोर्ट से संपर्क कर के ऐसा कर सकता है। ये कार्यक्रम अब दुनिया के लगभग सभी देशों में उपलब्ध करा दिया गया है। ये क्रिएटर सब्सक्रिप्शन से बिलकुल अलग है। ज़रूरी नहीं है कि आपके पास केवल रीच बढ़ाने से ही पैसे आएँगे, इसके तहत अगर आप क्रिएटर नहीं हैं फिर भी आपकी कमाई हो सकती है।

कितने लोगों द्वारा आपके ट्वीट्स या रिप्लाइज में आने वाले विज्ञापन देखने पर कितनी कमाई होगी, ये ट्विटर ने अभी साफ़ नहीं किया है। कुछ दिनों बाद हो सकता है कि इस बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए कि इम्प्रेशन और कमाई का कोई रेश्यो है या नहीं। फ़िलहाल के लिए आपको कमाई करनी है तो ट्विटर ब्लू खरीद डालिए, 5 मिलियन ‘इम्प्रेशन्स’ पहुँचाइए, ‘ट्विटर एनालिटिक्स’ से आँकड़े चेक कीजिए, 500 फॉलोवर्स जुटाइए और ‘Stripe’ पर अकाउंट बना कर पैसे बैंक खाते में भेजिए।

गले में रुद्राक्ष की माला देख मस्जिद के पास भीड़ ने पूछा नाम, पीटकर किया लहूलुहान: मेरठ में डिलीवरी बॉय और उसके दोस्त पर हमला

उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक मस्जिद के पास जमा भीड़ ने दो हिंदू युवकों की पिटाई की। पीड़ितों में से एक जोमैटो का डिलीवरी बॉय और दूसरा उसका दोस्त है। मंगलवार (9 अगस्त, 2023) शाम वे डिलीवरी देने आए थे। इसी दौरान 30-40 लोगों की भीड़ ने मारपीट कर उनको लहूलुहान कर दिया। पीड़ितों के अनुसार भीड़ ने गले में रुद्राक्ष की माला देख उनसे नाम पूछा और मारपीट की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला मेरठ के लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के श्याम नगर इलाके का है। जोमैटो में डिलीवरी बॉय का काम करने वाले नवीन का कहना है कि उसे श्याम नगर में डिलीवरी देने जाना था। लेकिन उसे रास्ता पता नहीं था। इसलिए वह अपने दोस्त ऋतिक को साथ ले जा रहा था। जब वे हरी मस्जिद के पास पहुँचे तो वहाँ भीड़ लगी हुई थी। ऐसे में वह थोड़ा आगे जाकर डिलीवरी एड्रेस के बारे में पूछताछ करने लगा।

इसी दौरान मस्जिद के पास खड़े 30-40 लोग नवीन और ऋतिक के पास आ गए। इसके बाद भीड़ दोनों से उनका नाम-पता पूछने लगी। इस घटना के सामने आए वीडियो में पीड़ित अपना नाम व पता बताते देखे जा सकते हैं। वहीं जोमैटो डिलीवरी बॉय नवीन के गले में पड़ा आईकार्ड भी नजर आ रहा है। पीड़ित नवीन का कहना है कि वह उन लोगों के सामने हाथ जोड़ते हुए कह रहा था कि वह डिलीवरी बॉय है। ऑर्डर देने आया है। बार-बार अपना आईकार्ड भी दिखा रहा था। लेकिन भीड़ उसकी बात सुनने को तैयार नहीं थी। 

आरोप है कि दोनों से बातचीत करने के दौरान भीड़ ने ऋतिक के गले में पड़ी रुद्राक्ष की माला तोड़ दी। इसके बाद उनकी पिटाई शुरू कर दी। मुस्लिमों के हमले में ऋतिक नामक युवक बुरी तरह लहूलुहान हो गया। मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस मौके पर पहुँची। इसके बाद पीड़ितों को हॉस्पिटल ले जाया गया। इस मामले में स्थानीय लोगों का कहना है कि 2 बाइक से 4 लड़के आए थे। वे मस्जिद का वीडियो बना रहे थे। लोगों ने टोका तो अभद्रता करने लगे। इसके बाद मारपीट हुई। 

वहीं, पीड़ित युवकों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी। इस मामले में अब तक एक युवक की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई। लिसाड़ी गेट थाना प्रभारी संजय वर्मा का कहना है कि दो लड़के जोमैटो का ऑर्डर देने गए थे। किसी गलतफहमी के कारण उनके साथ मारपीट हुई। आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। 

खेलकूद की उम्र में योनि-वीर्य और संभोग पढ़ें बच्चे? ‘OMG 2’ में महाकाल के पुजारी का परिजन यौन शोषक, अरुण गोविल को नेगेटिव रोल

जब सितंबर 2012 में ‘OMG! Oh My God’ फिल्म आई थी, तब इसे दर्शकों का अच्छा-खासा प्यार मिला था। बढ़िया समीक्षा से लेकर अच्छी कमाई तक, फिल्म ने सब बटोरे। लेकिन, बाद में सामूहिक चेतना के विकास के साथ हिन्दुओं को इस बात का एहसास हुआ कि उनके साथ छल हुआ है। मूर्तिपूजा के प्रति घृणा फैलाने से लेकर मंदिरों को बदनाम करने तक, इस फिल्म ने हिन्दू विरोध के हर कार्य बखूबी किए थे। अब उसकी सीक्वल ‘OMG 2’ लेकर आ गए हैं।

अगर ‘OMG 2’ की समीक्षा की बात करें तो अक्षय कुमार की ओवरएक्टिंग के अलावे फिल्म के बाक़ी के स्टारकास्ट की परफॉर्मेंस अच्छी है। पंकज त्रिपाठी और यामी गौतम ने अपने किरदार बखूबी निभाए हैं। जज के रोल में पवन मल्होत्रा ने विशेष छाप छोड़ी है। संगीत के नाम पर हंसराज रघुवंशी का गाना ‘ऊँची-ऊँची वादी में’ अच्छा बन पड़ा है। डायलॉग्स बड़ी चालाकी से लिखे गए हैं। एक साधारण प्लॉट को एक लंबी स्क्रिप्ट में ढाल कर कहानी पिरोई गई है।

‘OMG 2’: मेनस्ट्रीम मीडिया द्वारा तारीफ़, ‘सेक्स एजुकेशन’ पर जोर

भारत में एक आदत रही है, पश्चिम का अनुसरण करना। वहाँ समलैंगिक आंदोलन करने लगें तो यहाँ समलैंगिकों के पक्ष में बातें कर के आधुनिक बनने की होड़ लग जाती है। वहाँ बच्चों को सेक्स के बारे में बताया जाने लगा तो यहाँ सवाल उठने लगते हैं कि सेक्स पर बात क्यों नहीं हो रही। मीडिया से एक छोटा सा सवाल – ‘सेक्स’ को बार-बार भारतीय समाज में ‘Taboo’ बताया जाता है, अर्थात इस पर बात नहीं की जाती, क्या इसे गलत साबित करने के लिए लोग माता-पिता के सामने सेक्स करना शुरू कर दें?

क्या कोई व्यक्ति या कोई महिला अपने माता-पिता या दादा-दादी के सामने सेक्स करने लगेगी तब ये कहा जाएगा कि अब भारत में सेक्स ‘Taboo’ नहीं रहा? सड़क पर खुलेआम सेक्स होने लगे, तब माना जाएगा कि भारतीय समाज आधुनिक हो गया है? क्या हम इसीलिए पिछड़े हैं, क्योंकि हमारे यहाँ महिला-पुरुष सार्वजनिक स्थलों पर सेक्स नहीं करते और बंद कमरे में करते हैं तो उसका लाइव प्रसारण नहीं करते? ‘इस पर बात होनी चाहिए’ – इसका मतलब क्या है आखिर?

खुद को आधुनिक दिखाने के लिए पत्रकारों और फिल्म समीक्षकों की जिस टोली ने फिल्म की स्क्रीनिंग में तालियाँ पीटीं और इसे भर-भर के स्टार दिए, शायद वो भी इसका समर्थन करते हैं कि सड़क पर हर व्यक्ति ये चिल्लाते हुए गुजरे कि वो मास्टरबेशन करता/करती है। बेटा अपने बाप से पूछे कि माँ के साथ आज का सेक्स कैसा रहा, दादा अपनी पोती से पूछे कि रात भर क्या-क्या हुआ पति के साथ – ये यही सब चीजें होंगी तब जाकर हमारा समाज आधुनिक साबित होगा?

हस्तमैथुन: ‘OMG 2’ के हिसाब से यही देश में सबसे बड़ा विषय

अब आते हैं फिल्म की असली समीक्षा पर। आज पूरी दुनिया का हर विकासशील व गरीब देश निर्धनता, प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से लड़ रहे हैं, क्या हस्तमैथुन के बारे में बच्चों को पढ़ाना उतना आवश्यक है क्या? क्या हस्तमैथुन इतना बड़ा टॉपिक हो गया है कि देश में घर-घर में इस पर बहस होनी चाहिए और स्कूलों के सिलेबस में शामिल कर के इसे छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाया जाना चाहिए। अक्षय कुमार और पंकज त्रिपाठी की पूरी फिल्म का यही सन्देश है।

कहानी की बात करें तो एक महाकाल की नगरी उज्जैन में शिवभक्त के बेटे का हस्तमैथुन करते हुए वीडियो वायरल हो जाता है और इसके बाद स्कूल पर मानहानि का केस ठोका जाता है। हस्तमैथुन इतना बड़ा विषय है कि भगवान शिव को स्वयं इसमें हस्तक्षेप करना पड़ता है और वो इस केस को लड़ने में अपने भक्त की मदद करते हैं। सेंसर बोर्ड के आदेश के कारण शिव वाले किरदार को शिव का गण बना दिया गया है। हालाँकि, अस्पताल में एक दृश्य में अक्षय कुमार भगवान शिव के रूप में दिखते हैं।

यहाँ सवाल ये उठता है कि CBFC के आदेश के बावजूद भगवान शिव के किरदार में अक्षय कुमार को क्यों दिखाया गया? वापस मास्टरबेशन पर आते हैं। ‘स्कूल के बाथरूम में एक बच्चे ने हस्तमैथुन किया’ – इस एक चीज को सही साबित करने के लिए पूरी फिल्म खपा दी गई है, वो भी हिन्दू ग्रंथों का हवाला देकर। हस्तमैथुन का वीडियो वायरल होना बड़ी बात नहीं है और खुले में कहना चाहिए कि हम हस्तमैथुन करते हैं – फिल्म एक तरह से यही सन्देश देती है।

अरुण गोविल का नेगेटिव किरदार, अपमानित किया?

एक अभिनेता का कार्य होता है कि अलग-अलग किरदार निभा कर ऐसा रच-बस जाए कि लोग उसे उन किरदारों से ही पहचानें। एक व्यक्ति का किसी फिल्म में हीरो तो किसी में विलेन बनना बड़ी बात नहीं है। हालाँकि, बात जब अरुण गोविल की आती है तो किस्सा थोड़ा अलग हो जाता है। फिल्म में स्कूल चेन का मालिक, जिसकी अखबार कंपनी भी है, उस उद्योगपति के किरदार में अरुण गोविल को डाला गया है। वही अरुण गोविल, जिन्होंने 80 के दशक में रामानंद सागर की ‘रामायण’ में भगवान श्रीराम का किरदार निभाया।

इस पर तो कई बार बातें हो चुकी हैं कि कैसे एयरपोर्ट वगैरह पर देखते ही लोग उनके पाँव छू लेते थे। ऐसा एक वीडियो हाल ही में वायरल हुआ जब एक महिला ने उनसे गमछा लेकर अपने बीमार पति को अस्पताल में ले जाकर दिया और कहा कि ये भगवान ने दिया है। ये वही अरुण गोविल हैं, जिन्हें सिगरेट पीते देख कर एक फैन निराश हो गया तो उन्होंने ये व्यसन छोड़ दिया। वहीं अरुण गोविल, जिन्होंने बीबीसी के स्टूडियो में राम बन कर परेड करने से इनकार कर दिया था।

ऐसे व्यक्ति को ‘सेक्स एजुकेशन’ के विरोधी उद्योगपति का किरदार दिया गया है जो अपने खिलाफ केस करने वाले को पैसों का लालच देता है और धमकी देकर चेक पर साइन कराता है। सवाल उठता है कि क्या ये जानबूझकर किया गया ताकि फिल्म की आलोचना न हो? अरुण गोविल की प्रतिष्ठा का गलत इस्तेमाल किया गया? या फिर उनकी छवि को बॉलीवुड का गिरोह विशेष बदलना चाहता है? ये चर्चा का विषय रहेगा कि अरुण गोविल को नकारात्मक रोल देने के पीछे क्या मंशा थी।

हिन्दू धर्मग्रंथों के हवाले से सेक्स और कामुकता की बातें

फिल्म में कामसूत्र से लेकर अन्य हिन्दू ग्रंथों का जिक्र भी किया गया है, जिनमें यौन संबंधों पर बातें की गई हैं। खजुराहो और अजंता-एलोरा की गुफाओं में बने चित्रों को दिखा कर हस्तमैथुन की पैरवी की गई है। कहा गया है कि गुरुकुलों में कामशास्त्र पढ़ाया जाता था। ‘पंचतंत्र’ में इस कामशास्त्र का जिक्र होने का दावा किया गया है। स्त्री की योनि में वीर्य डालने को लेकर क्या लिखा गया है, ये बताया गया है। स्त्री की सुंदरता के वर्णन के समय नितंबों की भी तारीफ़ की गई है, ये पढ़ कर सुनाया गया है।

ये सब बातें पच जाती हैं और हमें ये पता चलता है कि हमारा समाज प्राचीन काल में इतना खुला था कि लोगों को यौन संबंधों को लेकर सारी जानकारियाँ थीं, लेकिन क्या इससे ये साबित होता है कि छोटे-छोटे बच्चों को ये सब पढ़ना चाहिए? ये सही है कि महर्षि वात्स्यायन ने लिखा है कि यौवन अवस्था आने तक कामशास्त्र का ज्ञान होना चाहिए, लेकिन ये उस समय की बात है जब शादियाँ सामान्यतः आज के मुकाबले कम उम्र में ही होती थीं और यौन संबंध बनाने के लिए अध्ययन आवश्यक माना जाता था।

आधुनिक काल की बात करें तो विवाह के लिए भारत में लड़कियों के लिए 18 और लड़कों के लिए 21 वर्ष की उम्र कानूनी रूप से निश्चित की गई है। फिर क्या 5-10 साल की उम्र में ही यौन संबंधी शिक्षाएँ आवश्यक हैं? फिल्म में वकालत की गई है कि खुले रूप से सेक्स की शिक्षा दी जानी चाहिए और इसके लिए हिन्दू ग्रंथों का सहारा लिया गया है, लेकिन क्या आपने किसी भी प्राचीन कथा-कहानियों या प्रसंग में परिवार के लोगों को सेक्स पर आपस में चर्चा करते पढ़ा है? या फिर गली-नुक्कड़ में सेक्स पर चर्चा होते पढ़ा है?

क्या हम सिर्फ इसीलिए बच्चों को सेक्स के बारे में बताने लगें, क्योंकि पश्चिमी देश ऐसा कर रहे हैं? पॉर्न प्लेटफॉर्म्स पर तो जानवरों तक के साथ सेक्स के वीडियो उपलब्ध हैं, तो क्या बच्चों को ये सब भी पढ़ाया जाना चाहिए? आज तक आपने किस बच्चे का हस्तमैथुन करते हुए वीडियो वायरल होते हुए देखा है? अपवाद छोड़िए, जो कभी हुआ ही नहीं, उसे फिल्म में आम समस्या बता कर पेश किया गया है। सनातन में ‘काम’ का अर्थ पुरुषार्थ से है, सिर्फ संभोग से नहीं।

दावा किया गया है कि ‘सेक्स एजुकेशन’ से बच्चों को सही-गलत का पता लगेगा। उन्हें बताया जाना चाहिए कि कोई महिला गर्भवती कैसे होती है, सेक्स कैसे किया जाता है। सेक्स के बारे में वयस्कों को तो बहुत ज्ञान होता है, कानून का भी ज्ञान होता है, फिर भी रेप की दुःखद घटनाएँ हो ही जाती हैं। इसके लिए शिक्षा से भी अधिक संस्कार की ज़रूरत है। मान लीजिए, किसी बच्चे को लड़कियों की योनि के बारे में पढ़ाया जाने लगा, जैसे कि फिल्म में दावा किया गया है कि होना चाहिए, फिर वो बच्चा अपनी बहन के शरीर से ही एक्सपेरिमेंट करने लगा तो?

फिल्म में कोर्टरूम के भीतर एक महिला से अपने पति के साथ सुहागरात का वर्णन करने को कहा जाता है। एक बहन बताती है कि कैसे उसके भाई ने हस्तमैथुन का जो कार्य किया वो सही था। एक शिवभक्त अपनी विरोधी वकील के नितंबों की सुंदरता का वर्णन करता है। ‘बच्चा कैसे पैदा होता है’ – इस पर पूरी की पूरी बहस हो जाती है कोर्ट में। भीड़ में युवक-युवतियाँ चिल्लाते हैं कि वो हस्तमैथुन करते हैं। क्या ये सब किसी भी हिसाब से एक सामान्य समाज का हिस्सा लग रहा है?

हिंदी भाषा का मजाक, ‘आधुनिकता मतलब नंगापन’ वाला सन्देश

फिल्म ‘OMG 2’ शुरू होते ही नग्न नागा साधुओं को दिखाया गया है। हंसराज रघुवंशी के गाने पर पंकज त्रिपाठी को परफॉर्म करते देखना थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन उनकी बाकी की एक्टिंग तगड़ी है। एक शिवभक्त, जिस रोल में पंकज त्रिपाठी हैं, वो घर आकर पूजा-पाठ कर रही अपनी पत्नी को चाय-पानी के लिए परेशान करता है। उसे मन्त्र पढ़ना छोड़ कर आना पड़ता है। फिल्म में पीड़ित बच्चे का सबसे अच्छा दोस्त ‘ज़हीर’ है, जो केस लड़ने के लिए अध्ययन में भी पंकज त्रिपाठी की मदद करता है।

पंकज त्रिपाठी फिल्म में शुद्ध हिंदी में बोलते हैं, यहाँ भी हिंदी भाषा का मजाक बना कर पेश किया गया है। जहाँ शुद्ध हिंदी की बात आती है, बॉलीवुड को कॉमेडी ही सूझता है। फिल्म से सवाल उठते हैं कि क्या नग्नता का प्रदर्शन ही आधुनिकता है? सनातन में तो यज्ञोपवीत के वक्त ये तक सिखाया जाता है कि अकेले में भी नग्न होकर स्नान न करें। फिर समाज में खुली नग्नता को हिन्दू धर्म का सहारा लेकर कैसे डिफेंड किया जा सकता है?

‘OMG 2’ की खासियत ये है कि ये सभी बातें इतनी चालाकी से कहती है कि दर्शक कुछ और सोच ही न पाएँ। हिन्दू धर्मग्रंथों का हवाला देना, अंग्रेजों द्वारा गुरुकुल परंपरा बंद किए जाने की आलोचना, बार-बार महाकाल की गूँज, उज्जैन नगरी और वहाँ के दृश्य, भगवान का किरदार, नंदी – इन सबका सहारा लेकर एक खास सन्देश देने का प्रयास किया गया है। आधुनिक होने का ये अर्थ तो नहीं है कि पश्चिम में जो हो रहा है, वही यहाँ किया जाए।

महाकाल के पुजारी के घर में यौन शोषण

‘OMG 2’ में गोविंद नामदेव महाकाल मंदिर के पुजारी के किरदार में हैं। ‘OMG’ का गुस्सैल पुजारी वाला किरदार आपको याद होगा, जो उन्होंने निभाया था और जिसके सहारे संतों को बदनाम किया गया था। इस बार दिखाया गया है कि उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर के पुजारी की छोटी सी बच्ची का यौन शोषण लड़की का मामा ही करता है। इससे पुजारी का मन बदल जाता है और वो ‘सेक्स एजुकेशन’ को लेकर जागृत हो जाता है।

इससे पहले पुजारी को ऐसे किरदार में दिखाया गया है जो एक उद्योगपति के साथ मिल कर शिवभक्त को धमकाता है। किसी मौलवी के घर में बलात्कारी दिखाए जाने वाला कोई दृश्य आपने देखा है बॉलीवुड की किसी फिल्म में? क्या किसी अन्य मजहब के पूज्य पुरुष हस्तमैथुन की वकालत करते हुए दिखाए जा सकते हैं? क्या ईसाई और मुस्लिम पुस्तकों का हवाला देकर ‘सेक्स एजुकेशन’ की पैरवी की जा सकती है? अगर ऐसा हुआ तो ‘सर तन से जुदा’ होने में शायद ही समय लगे।

किसी अन्य मजहब को लेकर ये सब किया गया होता तो ये ‘बेअदबी’ या ‘ईशनिंदा’ की कैटेगरी में आता। लेकिन अफ़सोस, हिन्दू धर्म को सेक्स-हस्तमैथुन से जोड़ने, ग्रंथों से बिना सन्दर्भ बताए योनि-वीर्य की बातें उद्धृत करने और भगवान शिव को हस्तमैथुन की पैरवी करने वाला दिखाने वाली फिल्म पर लोग तालियाँ पीटते हैं। शायद यही कारण है कि फिल्मों में ब्राह्मणों को जोकर, वैश्य समाज को सूदखोर और क्षत्रिय को अत्याचारी बताने का चलन रहा है।

‘OMG 2’ जैसी फिल्मों का इसीलिए विरोध होना चाहिए, क्योंकि इसमें एक सेक्स वर्कर को झुक कर देवी-देवता की तरह प्रणाम किया जाता है। क्योंकि, सेक्स वर्कर के पास सेक्स के लिए आने वाले पुरुषों को ‘यजमान’ कहा जाता है। कल को पॉर्न में दिखाए जाने वाले पोजीशनों को हिन्दू धर्म से जोड़ कर फिल्म बना दी जाए, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। या अगर समलैंगिक सेक्स या जानवरों के साथ सेक्स को भी जायज ठहराने के लिए राम-कृष्ण-शिव से जोड़ कर फ़िल्में बन जाएँ, तब हम विरोध नहीं कर पाएँगे, अगर अभी नहीं किया तो।

महिलाओं का सम्मान करना सिखाने के लिए ‘सेक्स एजुकेशन’ ज़रूरी नहीं

अगर किसी बच्चे को बताना है कि उसे लड़कियों या महिलाओं का सम्मान करना चाहिए, तो उसे योनि और वीर्य के बारे में बताने की ज़रूरत नहीं है। उसे ये बात सीधी भाषा में भी समझाई जा सकती है। बच्चे को सीधा बोला जा सकता है कि हस्तमैथुन बार-बार करने की चीज नहीं है और स्कूल में तो बिल्कुल भी नहीं – इसके लिए किसी हाथी-घोड़े वाले विज्ञान की आवश्यकता नहीं है। एक बच्चे को संभोग के बारे में क्यों बताया जाना चाहिए, जब उसे उस उम्र में ये सब करना ही नहीं है तो?

18 वर्ष से कम उम्र की लड़की के लिए भारत में सेक्स प्रतिबंधित है। फिर क्या 10 साल की उम्र में संभोग के बारे में पढ़ाना आवश्यक है? जैसा कि फिल्म में तर्क दिया गया है, लड़के-लड़कियों की नंगी तस्वीरें हर एक कक्षा में लटका कर उसके गुप्तांगों के बारे में पढ़ाना चाहिए। खेलने-कूदने की उम्र में बच्चे योनि-वीर्य पढ़ने लगेंगे तो उनके बचपन का क्या? जहाँ तक ‘गुड टच और बैड टच’ की बात है, बच्चों को सीधी भाषा में ये क्यों नहीं बताया जा सकता ये सब, बिना गुप्तांगों और संभोग की व्याख्या किए?

कहा ओलंपिक खिलाड़ियों से मिलने जा रहे चीन, किया कम्युनिस्ट पार्टी से समझौता: कर्नल राठौड़ ने बताया सोनिया-राहुल के बीजिंग दौरे का सच

केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का 10 अगस्त 2023 को आखिरी दिन था। प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले ही विपक्ष लोकसभा से भाग खड़ी हुई। मोदी सरकार ध्वनिमत से विजयी रही। इससे पहले चर्चा में शामिल होते हुए बीजेपी सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कॉन्ग्रेस और चीन के बीच गठजोड़ का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 2008 में जब भारतीय खिलाड़ी बीजिंग ओलंपिक में भाग ले रहे थे तब कॉन्ग्रेस नेता सोनिया और राहुल गाँधी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ बैठकों में व्यस्त थे। कर्नल राठौड़ ने इस ओलंपिक में पदक भी हासिल किया था।

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा, “मैं 2008 में चीन के बीजिंग ओलंपिक में शामिल था। हमें खबर लगी कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी हमसे मिलने आ रहे हैं। लेकिन ये हमसे मिलने नहीं आए और न ही हमसे मुलाकात हुई। इनकी थालियाँ तो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा परोसी जा रही थीं। वे चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से मिले। वे रिमोट कंट्रोल पर सरकार चलाते थे। अगर कोई सैनिक इस तरह की कोई कोशिश करता है तो उस पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाता। वे (सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी) उस समय सरकार चला रहे थे। उन पर देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।”

गौरतलब है कि 7 अगस्त 2008 को सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस और चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के बीच एक समझौता हुआ था। उस समय केंद्र में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए वन की सरकार चल रही थी। हाल ही में इस यूपीए का नाम बदलकर कॉन्ग्रेस ने अपने नेतृत्व वाले गठबंधन का नया नामकरण आईएनडीआईए (INDIA) रखा है।

कॉन्ग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने उच्च स्तरीय सूचनाओं के आदान-प्रदान और आपसी सहयोग के लिए 2008 में बीजिंग में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस समझौता ज्ञापन ने दोनों पक्षों को महत्वपूर्ण द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर एक-दूसरे से परामर्श करने का अवसर प्रदान किया।

दिलचस्प यह है कि इस एमओयू पर हस्ताक्षर तत्कालीन कॉन्ग्रेस महासचिव राहुल गाँधी ने किया था। चीनी पक्ष की ओर से हस्ताक्षर शी जिनपिंग ने किए थे जो तब अपनी पार्टी के उपाध्यक्ष और सीपीसी के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य थे। एमओयू पर हस्ताक्षर तत्कालीन कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और राहुल गाँधी की माँ सोनिया गाँधी की मौजूदगी में हुए थे।

एमओयू पर हस्ताक्षर से पहले सोनिया और उनके बेटे राहुल गाँधी ने आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए शी जिनपिंग और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ लंबी बैठक की थी। उल्लेखनीय है कि साल 2008 में सोनिया गाँधी अपने बेटे राहुल, बेटी प्रियंका, दामाद रॉबर्ट वाड्रा और दोनों के बच्चों को साथ लेकर ओलंपिक खेल देखने के नाम पर चीन गईं थीं। उससे एक साल पहले भी माँ-बेटे के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने चीन का दौरा किया था।

गौर करने वाली बात यह है कि 2008 में CCP और कॉन्ग्रेस के बीच समझौता ज्ञापन उस समय आया जब भारत में वामपंथी दलों ने कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली UPA-1 सरकार में विश्वास की कमी व्यक्त की थी। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट बताती है कि भले ही चीन उस समय के भारत के राजनीतिक परिदृश्य और वाम दलों के रुख से अवगत था, बावजूद उसने समझौता इसलिए किया क्योंकि शी जिनपिंग कॉन्ग्रेस, खासकर ने आगे बढ़कर कांग्रेस के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए क्योंकि सीसीपी कांग्रेस के साथ, खासकर गाँधी परिवार के साथ गहरे संबंध चाहते थे।

गुरुकुल पर हमले में बाहरी ही नहीं लोकल मुस्लिम भी थे शामिल, गौहत्या का है कनेक्शन: जिस भीड़ ने की शक्ति सैनी की हत्या, राजदीप ने उसे छिपाया

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं की ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा पर इस्लामी भीड़ ने हमला किया था। इस भीड़ ने वहाँ चुन-चुन कर हिन्दुओं, उनके प्रतिष्ठानों और संस्थाओं को निशाना बनाया था। इस दौरान नूहं के भादस में गुरुकुल पर भी हमला था। इसी मामले से शक्ति सैनी की हत्या की कड़ी भी जुड़ती है। इसी गुरुकुल पर हमला करने वालों को अपनी रिपोर्ट में ‘बाहरी’ बताकर राजदीप सरदेसाई मुस्लिमों का बचाव करने की कोशिश कर रहे थे।

ऑपइंडिया को जो जानकारी मिली है कि उसके अनुसार शक्ति सैनी को मुस्लिम भीड़ के हमले की जानकारी मिलने के बाद अपने भाई को बचाने मेवात के भादस स्थित गुरुकुल गए थे। उनके भाई यहाँ शिक्षक हैं। शक्ति गुरुकुल जाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन कथित तौर पर रास्ते में ही दंगाई मुस्लिम भीड़ ने उन्हें उठा लिया। दोबारा अगले दिन 1 अगस्त की सुबह उनकी मौत की खबर घरवालों को मिली।

ऑपइंडिया को प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि 31 जुलाई को 200-250 की मुस्लिम भीड़ ने दो बार गुरुकुल पर हमला किया था। पहले दोपहर के 2-2.30 के बीच हमला हुआ। यही से हमला कर लौट रही भीड़ ने बाद में कथित तौर पर बड़कली स्थित एक सरसों के तेल की फ़ैक्ट्री जला दी थी। यह फ़ैक्ट्री बीजेपी नेता शिवकुमार बंटी की बताई जा रही है। दंगाइयों ने बंटी के फ़ैक्ट्री में लूटपाट कर आग लगा दी। सैकड़ों कनस्तर तेल या तो लूट लिया गया या जला दिया गया। वहाँ कई टन खली भी मौजूद थी। आग इतनी भीषण थी कि दमकल विभाग इस पर अगली सुबह ही काबू पा सकी।

वहीं भादस के गुरुकुल पर हमले के मामले में बताया जा रहा है कि मुस्लिम भीड़ पेट्रोल बम, लाठी और हथियारों से लैश थी। उन्मादी भीड़ नारा-ए-तकबीर और अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगा रही थी। दंगाई भीड़ में छोटे बच्चे भी थे जो दो छोटे समूहों में आकर घटना स्थल पर इकट्ठे हुए थे। दंगाई अपनी गाड़ियों के नंबर प्लेट पर पहले से ही ग्रीस लगा कर आए थे, जिससे उनकी तैयारियों का पता चलता है।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गुरुकुल पर जब मुस्लिम भीड़ ने पहली बार हमला किया तो वहाँ 3 टीचर, 35 स्टूडेंट, आसपास के हिन्दुओं के अलावा नल्हड़ मंदिर के कई श्रद्धालुओं सहित करीब 150 लोग मौजूद थे। लोगों ने खुद को गुरुकुल के अंदर बंद कर लिया था, जबकि मुस्लिम भीड़ बाहर नारे लगा रही थी। उस समय कुछ स्थानीय लोगों और गुरुकुल में रहने वाले परिवारों के प्रतिरोध की वजह से मुस्लिम भीड़ पीछे हट गई थी। 

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, जब गुरुकुल पर हमला हुआ, तब वहाँ कोई पुलिस वाला नहीं था क्योंकि अधिकांश पुलिसकर्मी नल्हड़ मंदिर में श्रद्धालुओं को बचाने गए थे। शाम के करीब 6-6.30 बजे मुस्लिम भीड़ नेफिर से गुरुकुल पर हमला बोल दिया। हालाँकि, तब तक स्थानीय हिन्दू और आश्रम निवासी अपनी रक्षा को लेकर अलर्ट हो गए थे। इसके कारण थोड़े से प्रतिरोध के बाद मुस्लिम भीड़ को वापस लौटना पड़ा।

बताया जाता है कि शाम को हुए दूसरे हमले की जानकारी मिलने के बाद ही शक्ति सैनी घर से गुरुकुल के लिए निकले थे। कथित तौर पर मुस्लिम भीड़ ने उन्हें रास्ते से ही अगवा कर लिया। अगले दिन उनकी लाश मिली। शक्ति के एक भाई के अनुसार, “वे अपने भाई को बचाने गुरुकुल गए थे जो वहाँ टीचर हैं। लेकिन वे खुद ही मुस्लिम भीड़ के शिकार हो गए।” इस मामले में दर्ज FIR में उनके भाई ने बताया है कि पूरी घटना का विवरण दिया है।

गुरुकुल पर हमले के साजिशकर्ता का नाम सामने नहीं आया है। लेकिन स्थानीय विधायक मम्मन खान का घर गुरुकुल से करीब 50 मीटर ही दूर है। दावा है कि गुरुकुल पर हमला होते ही उनका परिवार घर से निकल गया। गौर करने वाली बात यह है कि नूहं हिंसा के बाद से मम्मन खान विवादों में हैं। हरियाणा विधानसभा में मोनू मानेसर को लेकर दिया गया उनका बयान भी मुस्लिमों को भड़काने की एक वजह बताई जा रही है।

गुरुकुल पर हमले का एक सिरा भादस गाँव के ही अख्तर के बेटे आमीन से भी जुड़ा है। उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आमीन के भाई राशिद पर गोकशी के 2 केस पहले से ही दर्ज हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि राशिद को गो रक्षकों ने ही पकड़ कर पुलिस के हवाले किया था। उस समय जब उसके घर पर छापेमारी हुई थी तो गो मांस भी बरामद हुआ था।

राजदीप सरदेसाई ने फैलाया झूठ, गाँव वालों ने बताई हकीकत

गुरुकुल के पुजारी से बात करते हुए राजदीप सरदेसाई बार-बार यही पूछ रहे थे कि हमला करने वाले बाहरी थे। पुजारी ने आस-पास के गाँव वाले जवाब को अनसुना करके वो फिर बचाने वाले मुस्लिम सरपंच की ओर बात ले गए।

हकीकत ये है कि जिस भादस गाँव में गुरुकुल है, उसी गाँव के अख्तर के बेटे अमीन को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आमीन का भाई राशिद गोहत्यारा है। उस पर गोकशी के 2 केस पहले से ही दर्ज हैं।

राजदीप सरदेसाई के अनुसार नूहं में हिंदुओं पर हमले को लेकर केवल दो सिद्धांत हैं: 1. बजरंग दल ने मेवातियों को भड़काया और उन्होंने जवाबी कार्रवाई की। 2. मेवाती मुस्लिम गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ जवाबी हमला करने का इंतजार कर रहे थे।

हकीकत यह है कि हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पहुँचने से पहले ही दंगाई मुस्लिम भीड़ गुरुकुल पर हमला कर चुकी थी। अगर बजरंग दल की जवाबी कार्रवाई और गौरक्षकों द्वारा फैलाई गई नफरत के खिलाफ ही दंगा किया गया तो बड़कली चौक पर दंगा जलाभिषेक यात्रा पहुँचने से पहले कैसे हो गई? गुरुकुल पर पहला हमला 2 से 2:30 बजे दोपहर के समय क्यों हुई? उस समय तो जलाभिषेक यात्रा आई भी नहीं थी।

अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले ही लोकसभा छोड़ गया विपक्ष, ध्वनि मत से जीती मोदी सरकार: प्रधानमंत्री ने नेहरू से लेकर राहुल तक की खोल दी गाँठ

केंद्र की नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन ‘I.N.D.I.A.’ द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव 10 अगस्त 2023 को लोकसभा में गिर गया। मोदी सरकार ने ध्वनि मत से अविश्वास प्रस्ताव जीत लिया। इस दौरान सदन में विपक्षी दल अनुपस्थित रहे। इस दौरान पीएम मोदी ने विपक्षी गठबंधन से लेकर कॉन्ग्रेस, इंदिरा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू और कॉन्ग्रेस के गठन तक पर चर्चा की। उन्होंने राहुल गाँधी से लेकर अधीर रंजन चौधरी तक पर निशाना साधा।

पीएम मोदी ने कहा, “विपक्ष के साथियों की एक बात के लिए तारीफ करना चाहता हूँ। मैंने कहा था कि 2023 में अविश्वास प्रस्ताव लेके आओ। वो लोग लेकर आए। मेरी बात मानी उन्होंने, लेकिन मुझे दुख इस बात का है कि उनको पाँच साल मिले। थोड़ी तैयारी करते। वे मुद्दे खोज नहीं पाए। इन्होंने देश को निराश किया है।”

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “2028 में फिर कोशिश कीजिएगा। जब 2028 में प्रस्ताव लेके आएँ तो तैयारी करके आना। ऐसी घिसी-पिटी बातें लेकर मत आना। देश को लगे कि कम-से-कम आप विपक्ष के योग्य हो। आपने वो योग्यता भी खो दी।”

अपने भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने मिजोरम पर हवाई हमला, असम और चीन से युद्ध का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा, “5 मार्च 1966 को कॉन्ग्रेस ने मिजोरम में असहाय नागरिकों पर अपनी वायुसेना से हमला करवाया था। क्या मिजोरम के लोग भारत के नागरिक नहीं थे? आज भी पाँच मार्च को पूरा मिजोरम शोक मनाता है।”

कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उसने इस सच को छिपाया। कभी घाव भरने की कोशिश नहीं की। इस वक्त इंदिरा गाँधी पीएम थीं। अकाल तख्त पर हमला सबको याद है, लेकिन ऐसे हमले पहले ही शुरू हो गए थे। इंदिरा गाँधी ने कच्चातीवू द्वीप को 1974 में श्रीलंका को दे दिया। बताते चलें कि शुुरू में 285 एकड़ की यह भूमि रामनाथपुरम के अधीन हुआ करती थी।

चीन के हमले को याद करते हुए पीएम ने कहा कि देश पर चीन का हमला हो रहा था। उस समय लोगों को मदद की आस थी, लेकिन ऐसी विकट घड़ी में पंडित नेहरू ने कहा था कि ‘my heart goes out to the people of Assam’ पीएम मोदी ने कहा कि नेहरू ने वहाँ के लोगों को भाग्य भरोसे छोड़ दिया था।

सदन में बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि लोहिया ने नेहरू पर आरोप लगाते हुए कहा था कि नेहरू जान बूझकर नॉर्थ ईस्ट का विकास नहीं कर रहे। पीएम ने कहा कि जहाँ पर एक-दो लोकसभा सीट होती थीं, वहाँ कॉन्ग्रेस का ध्यान नहीं रहता था। मणिपुर की मौजूदा स्थिति के लिए उन्होंने कॉन्ग्रेस दोषी ठहराया।

कॉन्ग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस की महफिल में जो दरबारी हाजिर नहीं होता था, उसे कुछ नहीं मिलता था। कॉन्ग्रेस ने परिवारवाद के कारण बीआर अंबेडकर, जगजीवन राम, चौधरी चरण सिंह, चंद्रशेखर जैसे लोगों को प्रताड़ित किया। कॉन्ग्रेस ने परिवार से बाहर वाले प्रधानमंत्रियों की तस्वीर सदन तक में नहीं लगाई थी।

इस दौरान पीएम मोदी ने कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाली I.N.D.I.A पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा, “मैं विपक्ष के साथियों के प्रति संवेदना व्यक्त करना चाहता हूँ। आपने अभी बेंगलुरु में करीब दो दशक पुराने UPA का क्रियाक्रम, अंतिम संस्कार कर दिया है। लेकिन, एक तरफ ये क्रियाकर्म कर रहे थे तो दूसरी तरफ जश्न भी मना रहे थे। यह खंडहर पर नया प्लास्टर लगाने जैसा था।”

राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “वर्षों से एक ही फेल प्रोडक्ट बार-बार लॉन्च करते हैं। उसकी हर बार लॉन्चिंग फेल हो जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि उसका मतदाताओं के प्रति उसकी नफरत भी आसमान छूने लगती है।” उन्होंने आगे कहा, “जिन लोगों को सिर्फ नाम का सहारा है, उनके लिए कुछ पंक्तियाँ है-  दूर युद्ध से भागते नाम रखा रणधीर, भाग्यचंद की आज तक, सोई है तकदीर।”

पीएम मोदी ने कहा कि विरोधी दलों को देश को लेकर कोई चिंता नहीं रही। पीएम ने कहा, “आज देश विश्व की पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। जब 2028 में ये लोग अविश्वास प्रस्ताव लाएँगे, तब भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा।”

इस बीच, कॉन्ग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी को ‘घोर कदाचार’ के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह निलंबन तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि संसद की विशेषाधिकार समिति अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती।