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बहुविवाह को प्रतिबंधित करेगी असम सरकार, विशेषज्ञ समिति ने सौंपी रिपोर्ट: अब 4 बीवियाँ नहीं रख पाएँगे मुस्लिम मर्द, CM सरमा की दो टूक – महिला उत्थान के लिए ये ज़रूरी

असम में इस्लामी प्रथा का हवाला देकर बहुविवाह को अंजाम देने वाले मुस्लिम मर्दों पर नकेल कसने की तैयारी यहाँ की सरकार ने कर ली है। बहुविवाह को लेकर अध्ययन करने के लिए बनी सरकार की गठित विशेषज्ञ समिति की रविवार (6 अगस्त, 2023) को सौंपी गई रिपोर्ट से इसका रास्ता साफ हो गया है।

इस रिपोर्ट में निष्कर्ष निकला है कि इस्लाम में मुस्लिम पुरुषों के चार महिलाओं से शादी करने की मजहबी प्रथा अनिवार्य प्रथा नहीं है। हाईकोर्ट की रिटायर्ड जज रूमी कुमारी फुकन की अध्यक्षता में चार सदस्यों की समिति की इस रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि राज्य बहुविवाह को खत्म करने के लिए अपना कानून बना सकता है। अब सवाल ये उठता है कि देश के इस उत्तर पूर्वी राज्य में बहुविवाह प्रथा यानी पॉलीगेमी पर कानून बनाने की जरूरत क्यों आन पड़ी है?

इस सवाल का जवाब जानने के लिए राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के बीते महीने जुलाई में दिए इस बयान पर गौर करिए जिसमें उन्होंने कहा, “समान नागरिक संहिता या यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) का फैसला लंबित होने तक, हम पूरे यूसीसी के एक हिस्से को अपनाना चाहते हैं और वह है बहुविवाह। हम असम में बहुविवाह पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहते हैं, यूसीसी संसद का तय किया जाने वाला मामला है, लेकिन राज्य भी राष्ट्रपति की सहमति से इस पर फैसला ले सकता है।”

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 11 जुलाई, 2023 को कहा कि यूसीसी मुस्लिम महिलाओं का उत्थान करेगी और उन्हें पुरुषों के बराबर ला खड़ा करेगी। सरमा ने ये भी कहा था कि यूसीसी को केंद्र सरकार लागू करेगी और इसकी मदद से वो बहुविवाह पर रोक लगाने की भी कोशिश में है। उन्होंने कहा था, “यूसीसी का मतलब है कि बहुविवाह बंद हो और महिलाओं को संपत्ति में बराबर का अधिकार मिले। मुस्लिम महिलाओं के उत्थान के लिए बहुविवाह प्रथा को खत्म करना जरूरी है। इसके अलावा यूसीसी इन महिलाओं को पुरुषों के बराबर रखेगी।”

अब बात आती है कि यूसीसी से ऐसा क्या होगा जो मुस्लिमों महिलाओं के लिए फायदे का सौदा साबित होगा। दरअसल, हमारे देश में शादी, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने के मामलों में विभिन्न समुदायों में उनके धर्म, आस्था और विश्वास के आधार पर अलग-अलग क़ानून हैं।

हालाँकि, देश की आजादी के बाद से ही यूसीसी की माँग उठती रही है। इसके तहत पूरे देश में एक कानून लागू होगा। यूसीसी लागू होने से किसी धर्म, लिंग और लैंगिक झुकाव को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया जाएगा। भारत का संविधान भी यही कहता है कि राष्ट्र को अपने नागरिकों को ऐसे क़ानून देने की ‘कोशिश’ करनी चाहिए।

मसला ये है कि एक समान कानून की आलोचना देश की आलोचना में मुस्लिम समाज खासा मुखर रहा है और इसे लेकर कई विवादित बयान भी दिए जाते रहें हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार संविधान में यूसीसी को लागू करने के विचार को फिर से जीवंत कर रही है। यही वजह है कि बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश, असम जैसे राज्य इसे लेकर सकारात्मक रुख अपनाए हुए हैं।

यूसीसी की माँग मुस्लिम पर्सनल लॉ के कथित ‘पिछड़े’ क़ानूनों का हवाला देकर उठती रही है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तीन तलाक़ वैध था। इसके तहत मुस्लिम पुरुषों को तुरंत तलाक देने का हक था। देश में 2019 में सरकार ने इसे गैर-कानूनी घोषित कर दिया। इस फैसला का मुस्लिम महिलाओं ने दिल खोल के स्वागत किया था। यूसीसी को लेकर सरकार कहती है कि जब तक भारत में ये लागू नहीं हो जाता तब-तक देश में लैंगिक समानता की बात करना बेमानी है।

बात जब लैंगिक समानता पर आती है तो मुस्लिम पसर्नल लॉ बोर्ड इसके आड़े आता है। इसमें कई इसे लॉ हैं जो मुस्लिम औरतों को पुरुषों के दर्जे तक आने की राह में बाधा बनते हैं। इसमें से संपत्ति के अधिकार की ही बात करे तो मुस्लिम लॉ के मुताबिक, मुस्लिम परिवार में जन्‍मी बेटी को पिता की संपत्ति में अपने भाई के मुकाबले आधा हिस्सा ही मिलता है।

शरीयत कानून के तहत पारिवारिक संपत्ति के बँटवारे में मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले आधा हिस्सा देने के प्रावधान को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में बुशरा अली नामक महिला ने अर्जी दाखिल की है। इस पर अभी सुनवाई चल रही है। बुशरा कहना था कि संपत्ति के बँटवारे में उन्हें पुरुषों के मुकाबले आधी हिस्सेदारी मिली है और यह भेदभाव है।

इसी तरह मुस्लिम पर्सनल लॉ में शादी के लिए कोई न्यूनतम उम्र निर्धारित नहीं है। इस वजह से ये लॉ अक्सर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों के भी आड़े आता है।

बहुविवाह प्रथा कानून को लेकर क्या बोले असम के सीएम?

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बहुविवाह पर रोक के कानून को लेकर सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने मीडिया से रविवार 7 अगस्त को कहा, “समिति सर्वसम्मत है कि राज्य बहुविवाह को खत्म करने के लिए अपने खुद के कानून बना सकता है।”

रविवार को गुवाहाटी में एक संवाददाता सम्मेलन में सीएम ने कहा था, “उन्होंने (समिति) जो एकमात्र बिंदु कहा वह यह है कि विधेयक पर अंतिम सहमति राज्यपाल के बजाय राष्ट्रपति को देनी होगी, जो अन्य राज्य कानूनों पर आखिरी हस्ताक्षर करते हैं। “

मुख्यमंत्री ने ये भी कहा कि राज्य मंत्रिमंडल यह तय करेगा कि सितंबर सत्र के दौरान या जनवरी में विधानसभा में विधेयक पेश किया जाए या नहीं। उन्होंने कहा, “हम विधायकों को बिल पेश करने से पहले कुछ समय देना चाहते हैं ताकि वे इस पर बहस कर सकें। कानून निश्चित रूप से इस वित्तीय वर्ष के भीतर आएगा।”

हालाँकि, सरमा ने कहा कि यह अलग बात होगी अगर प्रस्तावित समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को राज्य के कानून से पहले देश में लागू किया जाए। उन्होंने ये भी कहा, “चूँकि मुस्लिम पर्सनल लॉ में शादी के लिए कोई न्यूनतम आयु परिभाषित नहीं है, इसलिए यह अक्सर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के प्रावधानों का खंडन करता है।”

सीएम ने बताया कि समिति ने राज्य सरकार को सुझाव दिया है कि पोक्सो एक्ट और मुस्लिम कानून के बीच विरोधाभास को रोकने के लिए पोक्सो एक्ट के तरह ही राज्य अधिनियम में कुछ प्रावधान किए जाएँ ताकि कई बहसों को खत्म किया जा सके।”

बीते महीने ही सीएम सरमा ने दावा किया था, कि पैगम्बर भी बहुविवाह का समर्थन नहीं करते थे, क्योंकि उनका मानना था कि मुस्लिम पुरुष की एक ही बीवी होनी चाहिए। उन्होंने ये भी कहा था कि बहुविवाह प्रथा पर प्रतिबंध किसी समुदाय के लिए नहीं होगा, बल्कि ये पूरी तरह से इस प्रथा पर प्रतिबंध होगा।

असम में बहुविवाह को लेकर क्यों है कानून की जरूरत ?

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के मुताबिक, बराक घाटी के तीन जिलों में बहुविवाह बहुप्रचलित है। हालाँकि पढ़े-लिखे तबके के बीच इसकी दर कम हैं, भले ही वो मुस्लिमों की स्थानीय आबादी ही क्यों न हो। उनका कहना था कि राज्य में बाल विवाह के खिलाफ चलाए गए अभियान में सामने आया कि बड़ी संख्या में बुजुर्गों ने बहुविवाह किया था और अधिकतर उनकी बीवियाँ छोटी उम्र की थीं और वो गरीब तबके से थीं।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आँकड़ों के आधार पर मुंबई स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेस की अप्रैल में एक रिपोर्ट जारी की गई थी। इसमें बताया गया था कि रोक के बाद भी भारत में बहुविवाह की प्रथा प्रचलन में है। इस रिपोर्ट में ये भी बताया गया था कि भारत में देश के अन्य राज्यों की तुलना में पूर्वोत्तर भारत में ये प्रथा आम है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा में बहुविवाह सबसे ज्यादा होते हैं।

‘मुझे यहाँ से हटा दो या बाल विवाह बंद करो’

इस साल 15 मार्च को विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सीएम हिंमत बिस्वा सरमा ने बाल विवाह पर अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि असम में बाल विवाह के खिलाफ सरकार के एक्शन प्लान में हर 6 महीने में अपराधियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, सीएम सरमा ने कहा था कि असम में बाल विवाह को रोकना होगा। तब उन्होंने ये तक कह डाला था, “दो विकल्प हैं- या तो मुझे यहाँ से हटा दो या बाल विवाह बंद करो, तीसरा कोई विकल्प नहीं है।”

गौरतलब है कि बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए इस साल की शुरुआत में असम सरकार ने एक अभियान चलाया था। तब सीएम ने कहा था, “असम में 2026 तक बाल विवाह के खिलाफ हम नया कानून लाने के बारे में विचार कर रहे हैं। इसमें जेल जाने का वक्त दो साल से बढ़ाकर 10 साल करने को लेकर हम चर्चा कर रहे हैं। हम अपराधियों के लिए रो रहे हैं लेकिन पीड़ित नाबालिग बच्चियों के लिए नहीं। राज्य में एक 11 वर्ष की नाबालिग बच्ची माँ बन गई है, यह स्वीकार्य नहीं है।”

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2023 में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा राज्य में बाल विवाह के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का एलान सुर्खियों में रहा था। तब बाल विवाह रोकथाम अधिनियम (पीसीएमए, 2006) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO, 2012) के तहत 2400 से अधिक गिरफ्तारियाँ की गई थीं।

हाल के वर्षों में कथित तौर पर 18 साल से कम उम्र में शादी करने वाली दुल्हनों के पति और पिता मुल्ला, काजी और पुजारी के साथ गिरफ्तार किए गए थे।

इसे लेकर मुस्लिमों ने खासा विरोध दर्ज किया था। असम सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध करने वालों में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी शामिल थे। उनका कहना था कि बीजेपी की सरकार मुस्लिमों के खिलाफ है। ओवैसी ने गिरफ्तारियों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आप लड़कों को जेल भेज देंगे तो लड़कियों का क्या होगा? उन्होंने सीएम सरमा से पूछा कि आपने असम में अब तक कितने स्कूल खोले हैं।

असम सरकार ने क्यों बनाई बहुविवाह पर स्टडी के लिए समिति?

असम सरकार ने 12 मई को न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रूमी कुमारी फुकन की अध्यक्षता में चार सदस्यीय विशेषज्ञ समिति के गठन का एलान किया था। समिति के तीन अन्य सदस्यों में राज्य के महाधिवक्ता देवजीत सैकिया, वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता नलिन कोहली और वरिष्ठ अधिवक्ता नकीब-उर-जमां शामिल थे।

इस समिति को समान नागरिक संहिता के लिए राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 25 और मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) अधिनियम,1937 के प्रावधानों की जांच- पड़ताल का काम सौंपा गया था। शुरू में समिति को रिपोर्ट सौपने के लिए 60 दिनों का वक्त दिया गया था। बाद में इसका कार्यकाल 13 जुलाई से एक महीने बढ़ाकर 12 अगस्त कर दिया गया था।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा ने ट्वीट किया, “आज, असम में बहुविवाह को समाप्त करने के लिए कानून बनाने के लिए राज्य विधानमंडल की विधायी क्षमता की जाँच करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी। असम अब जाति, पंथ या धर्म से परे महिला सशक्तिकरण के लिए एक सकारात्मक पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के करीब है।”

‘केस वापस लो, वरना…’: छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाके में ‘प्रार्थना सभा’ के नाम पर ईसाई धर्मांतरण का खेल, वीडियो में देखें कैसे फँसाए जा रहे ग्रामीण

छत्तीसगढ़ के जिला बलराम में ईसाई धर्मांतरण का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार (6 अगस्त, 2023) को ग्राम कर्री चलगली के चौगई में कुछ बाहरी मिशनरी लोगों के द्वारा गाँव के लोगों को बहला-फुसलाकर तथा प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के दौरान ही यह मामला उजागर हो गया। 

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम कर्री चलगली के चौगई पारा में सोमारु नामक व्यक्ति के घर में कुछ बाहरी व्यक्ति की आने की सूचना प्राप्त हुई, तत्पश्चात् रनहत के हिन्दू कार्यकर्ता जब सुबह 7 बजे सोमारु के घर पहुँचे तो वहाँ स्थानीय लोगों के साथ कुछ अन्य बाहरी व्यक्ति भी मौजूद थे तथा उनके साथ बाइबिल पुस्तक भी मौके पर पाई गई। प्रार्थना सभा के नाम पर धर्मांतरण का मामला सामने आया।

इस पर हिन्दू कार्यकर्ता भड़क उठे और तत्काल धर्मांतरण के खेल को बंद कराया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। 

वहीं धर्मांतरण रुकवाने गए हिन्दू कार्यकर्ताओं को ईसाई मिशनरियों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। हिन्दू कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें स्थानीय लोगों ने बताया कि यहाँ पिछले तीन-चार दिनों से बाहरी व्यक्तियों का आना-जाना चल रहा था। इसके बाद रविवार को कर्री चलगली के चौगई में धर्मांतरण कराने की सूचना जैसे ही रनहत के हिन्दू कार्यकर्ताओं को लगी तो उन्होंने तत्काल मौके पर पहुँच कर विरोध किया तथा संबंधित पुलिस चौकी रनहत में इस घटना के बारे में जानकारी दी गई।

ऑपइंडिया को हिन्दू कार्यकर्ताओं ने बताया कि जब वे उस घर में पहुँचे जहाँ धर्मांतरण के लिए ग्रामीणों को बरगलाया जा रहा था तो उस कच्चे घर में करीब 30 से ज़्यादा ग्रामीण मौजूद थे। वहीं जानकारी के बाद चौकी प्रभारी रनहत द्वारा मौके पर पहुँचकर धर्मांतरण को बंद कराया गया और धर्मांतरित करा रहे लोगों को चौकी रनहत लाया गया। इसके बाद सम्बन्थित धाराओं के अनुसार कार्रवाई करते हुए आरोपितों को जेल भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि धर्मांतरण का यह कार्य छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में काफी दिनों से निर्बाध रुप से फल-फूल रहा है और यहाँ के भोले-भाले ग्रामवासी ईसाई मिशनरियों के झाँसे व प्रलोभन में आकर धर्मांतरित हो रहे हैं। वहीं ऑपइंडिया को रनहत के हिन्दू कार्यकर्ताओं ने बताया कि उन पर ईसाई मिशनरियों द्वारा सुलह कर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है नहीं तो उन्हें परिणाम भुगतने की धमकी भी दी जा रही है।

चीन के पैसे से चलता है अभिसार शर्मा वाला ‘न्यूजक्लिक’: अमेरिकी मीडिया का बड़ा खुलासा, समझें अर्बन नक्सलियों का पूरा नेटवर्क

अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में शनिवार (5 अगस्त, 2023) को एक लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख में अमेरिकी व्यवसायी के साथ चीनी सरकार के संबंध और ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को मिल रही फंडिंग को लेकर खुलासा किया गया।

‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, “यह बहुत कम लोगों को पता है कि गैर-लाभकारी संगठनों और शैल कंपनियों की आड़ में नेविल रॉय सिंघम चीन के सरकारी मीडिया के साथ मिलकर काम करता है और चीन के प्रोपेगेंडा को दुनिया भर में फैलाने के लिए फंडिंग कर रहा है। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने लेख में कहा है कि नेविल रॉय सिंघम भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में प्रगतिशील होने की वकालत करने के बहाने चीनी सरकार के मुद्दों को लोगों के बीच फैलाने में कामयाब रहा है।

नेविल रॉय सिंघम के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के साथ मजबूत संबंध हैं। वह चीन की ‘स्मोक लेस’ वार नीति को सफल बनाने में सबसे आगे रहा है। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपने लेख में यह भी कहा है, “चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने शासन काल में सरकारी मीडिया तंत्र का तेजी विस्तार किया है। इसके लिए चीन ने विदेशी मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के प्रभावशाली लोगों को अपने प्रचार तंत्र में शामिल किया है। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से चीनी प्रोपेगेंडा को स्वतंत्र मीडिया सामग्री के रूप में दिखाना है।”

NYT ने यह भी कहा है, “इसका यह नतीजा सामने आ रहा है कि धुर वामपंथी संगठन उभर रहे हैं। ये संगठन चीनी सरकार की बातों को दोहराते हैं या इनके विचार चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से मेल खाते हैं। यही नहीं चीन का सरकारी मीडिया भी इन संगठनों की बात करता दिखाई देता है।” अपनी जाँच में, न्यूयॉर्क टाइम्स ने पाया है कि नेविल रॉय सिंघम ने भारत में स्थित ‘न्यूजक्लिक’ नामक वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल को भी फंडिंग की है। अमेरिकी अखबार ने पाया है कि न्यूजक्लिक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुद्दों पर बात करता दिखाई दिया है।

नई दिल्ली स्थित कॉर्पोरेट फाइलिंग से भी पता चलता है कि नेविल रॉय सिंघम के नेटवर्क ने प्रोपेगेंडा पोर्टल न्यूज़क्लिक को फंडिंग की थी। इसके तहत न्यूजक्लिक ने अपनी कवरेज को चीनी सरकार के मुद्दों से जोड़ते हुए एक वीडियो में कहा था, “चीन का इतिहास श्रमिक वर्गों को प्रेरित करता रहा है।”

‘न्यूज़क्लिक’ को मिली विदेशी फंडिंग का ईडी ने भी किया था खुलासा

9 फरवरी 2021 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने न्यूजक्लिक के संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ के घर पर छापा मारा था। ईडी के सूत्रों के अनुसार, न्यूज़क्लिक को एक अमेरिकी कंपनी से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के तहत 10 करोड़ रुपए मिले थे। दिलचस्प बात यह है कि पुरकायस्थ को इस बात का पता ही नहीं था कि अमेरिकी कंपनी ने उनकी कंपनी के खाते में पैसा क्यों ट्रांसफर किया। वास्तव में, अमेरिकी कंपनी से मिले फंड के बदले उन्होंने क्या काम किया था वह उस बारे में कोई सबूत नहीं दे पाए थे।

आगे की जाँच में पता चला कि अमेरिका स्थित एक अन्य कंपनी ने न्यूज़क्लिक को 20 करोड़ रुपए दिए और इसे ‘एक्स्पोर्ट रेमिटेंस’ के रूप में बताया गया था। यह फंड इसलिए ट्रांसफर किया गया था क्योंकि न्यूजक्लिक ने पीपल्स डिस्पैच नामक पोर्टल पर कंटेंट अपलोड किया था।

सूत्रों से यह भी पता चला है कि न्यूजक्लिक के संस्थापक पुरकायस्थ ने रखरखाव के नाम पर 1.5 करोड़ रुपए भी लिए थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपने कार्यालय में रखरखाव के लिए 9वीं कक्षा पास इलेक्ट्रीशियन को काम पर रखा था। यही नहीं उन्होंने जो पैसा लिया था वह बिना किसी कागजी कार्यवाही के उन्हें मिला था। ऐसे में वह इस लेन देन के बारे में ED को कुछ भी नहीं बता पाए थे।

जुलाई 2021 में, ED ने बताया था कि ‘न्यूज़क्लिक’ के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच से पता चला है कि इसके प्रमोटरों को करीब 38 करोड़ रुपए प्राप्त हुए थे। इस फंडिंग के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े होने का संदेह है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच कर रहे एक अधिकारी ने खुलासा किया था कि ‘न्यूज़क्लिक’ का नेविल रॉय सिंघम नामक श्रीलंकाई-क्यूबा स्थित व्यवसायी के साथ वित्तीय लेनदेन था।

सिंघम ने ही कथित तौर पर विदेश से 2018 से 2021 के बीच ‘पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड’ को 38 करोड़ रुपए दिए थे। ‘न्यूजक्लिक’ को मिले पैसों की जाँच करने वाले अधिकारियों का कहना है कि नेविल रॉय सिंघम कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (CCP) के प्रोपेगेंडा फैलाने वाली शाखा के लिए काम करता है।

‘हर हर शम्भू’ से फेमस हुईं यूट्यूबर फ़रमानी नाज के भाई की हत्या: नमाज के बाद डिनर कर निकला था घूमने, 3 बाइक सवारों ने चाकुओं से गोद डाला

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की यूट्यूबर और गायिका फरमानी नाज, जो ‘हर हर शंभू’ गाने को री-क्रिएट कर फेमस हुईं थी, उनके चचेरे भाई को चाकुओं से गोद कर मौत के घाट उतार दिया गया है। मृतक का नाम खुर्शीद था और वो पेशे से मजदूर था। बता दें कि फरमानी नाज को ‘हर हर शंभू’ गाने के बाद कट्टरपंथियों से धमकियाँ भी मिली थीं, साथ ही इस गाने की ऑनरशिप को लेकर विवाद भी हुआ था।

बाद में पता चला कि ये गाना मूल रूप से अभिलिप्सा पांडा ने लिखा और गाया था, जिसके बाद फ़रमानी ने अपने यूट्यूब चैनल से इस गाने को हटा दिया था।

रतनपुरी थाना इलाके में हुई वारदात

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार (5 अगस्त, 2023) को 18 वर्षीय खुर्शीद नमाज पढ़कर गाँव के बाहर घूमने निकल गया था, जहाँ उस पर तीन लोगों ने चाकुओं से हमला कर दिया। ये हमला मोहम्मदपुर माफी गाँव में हुआ, जो रतनपुरी पुलिस थाने के अंतर्गत आता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वो शनिवार की शाम 7.30 बजे नमाज के बाद घर आया और डिनर करके 7.45 बजे घूमने निकला था।

तभी उसे मोटरसाइकिल पर सवार तीन लोगों ने चाकुओं से गोद डाला। उसे जब तक परिवार के लोग अस्पताल लेकर पहुँचे, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

परिजनों ने अस्पताल में काटा हल्ला, भारी संख्या में पुलिस तैनात

इस हत्याकांड के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने खतौली के अस्पताल में जमकर हल्ला काटा। इसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस ने काफी समझा-बुझाकर नाराज परिजनों और ग्रामीणों को शांत कराया और हमलावरों को जल्द से जल्द पकड़ने का आश्वासन दिया है। इस मामले में मुजफ्फरनगर पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया है कि रतनपुर पुलिस थाने में इस बाबत मामला दर्ज किया जा चुका है और कई टीमों को जाँच के साथ ही अपराधियों को पकड़ने के लिए लगा दिया गया है।

पिछले साल फरहानी के परिवार के 8 लोग गए थे जेल

बता दें कि पिछले साल फरहानी नाज के परिवार के 8 सदस्यों को लूट का 200 क्विंटल सरिया बरामद करते हुए जेल भेजा था, जिसमें उसके पिता, सगे भाई और जीजा भी शामिल थे।हालाँकि, उस मामले में खुर्शीद शामिल नहीं था। वो फरहानी का चचेरा भाई था। इस मामले में ऑपइंडिया से फोन के माध्यम से स्थानीय पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई। बात होते ही खबर को अपडेट किया जाएगा।

‘हर हर शंभू’ को लेकर हुआ था विवाद

जिस गाने को गाकर फरमानी नाज चर्चा में आई थी, उस पर काफी विवाद हुआ था। इस गाने के ओरिजनल कंपोजर और राइटर जीतू शर्मा ने नाज के खिलाफ शिकायत की थी और बताया था कि गाने को ओरिजनली अभिलिप्सा पांडा ने गाया था। ये गाना कृष्णभक्त अच्युति गोपी द्वारा लिखी ‘भजमन राधे राधे’ से प्रेरित था। लेकिन नाज ने इस गाने को रिलीज करते हुए कहा था कि वो ‘हर हर शंभू’ की असली गायिका हैं।

हालाँकि, इस विवाद के बाद उनपर मुस्लिम कट्टरपंथियों की ओर से काफी दबाव डाला गया था। देवबंद के कट्टरपंथियों ने इसे शरिया और इस्लाम के खिलाफ बताया था।

मौसेरी बहन से होना था निकाह, अपनी दूसरी ‘बहन’ के साथ भाग गया दूल्हा: रिश्तों की ऐसी भूल-भुलैया, पुलिस को भी करनी पड़ रही माथापच्ची

उत्तर प्रदेश के बरेली से ऐसा मामला सामने आया है, जो हैरान करने वाला है। यहाँ एक मुस्लिम लड़के का अपनी मौसेरी बहन के साथ रोमांटिक रिलेशनशिप चल रहा था। उस लड़के ने वही रिलेशनशिप अपनी दूसरी मौसेरी बहन यानी उनकी छोटी बहन के साथ भी बना लिया। लेकिन, घर वाले मान नहीं रहे थे। आखिरकार लड़के और उसकी ‘बड़ी प्रेमिका बहन’ के बीच रिश्ते के लिए घर वाले मान गए और निकाह की तारीख भी तय कर दी गई।

निकाह की तारीख रखी गई 6 अगस्त। लेकिन उसके बाद जो कुछ हुआ, वो अब पुलिस थानों के चक्कर और आपसी सर-फुटव्वल के रूप में सामने आ रहा है।

मौसेरी बहन के साथ तय हुई थी शादी, लेकिन फरार हो गया दूल्हा

ये पूरा मामला बरेली के नवाबगंज का है। वहाँ 6 अगस्त को दोनों ही परिवारों में खुशियाँ छाई हुई थीं। जश्न का माहौल था। दोनों ही तरफ रिश्तेदार आ गए। निकाह की तैयारियाँ जोरों पर थी। कुछ रश्में दूल्हे के परिवार और रिश्तेदारों ने दूल्हे के साथ कर भी ली। लेकिन जब बारात के जाने का समय आया, तो दूल्हा ही गायब मिला। खोज-खबर की जाने लगी, तो दुल्हन की बहन भी गायब मिली।

डीएनए की रिपोर्ट में बताया गया है कि दुल्हन के साथ ही दूल्हा उसकी बहन के साथ भी रोमांटिक रिलेशनशिप में था और निकाह वाले दिन वो उसी के साथ फरार हो गया। वहीं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि दूल्हा अपनी मौसेरी बहन के साथ भागा है, दुल्हन और फरारी वाली लड़की के बीच के रिश्ते को लेकर कुछ नहीं कहा जा रहा है।

फिर क्या हुआ?

दूल्हे और दुल्हन की बहन, जो कि दूल्हे की भी मौसेरी बहन है, जब फरार हुए तो दुल्हन के घरवाले बड़े नाराज हुए। पुलिस में शिकायत कर दी। अब नवाबगंज पुलिस माथापच्ची कर रही है। दुल्हन के घरवालों ने दूल्हे पक्ष पर केस दायर कर दिया है। वहीं, अमर उजाला की रिपोर्ट कह रही है कि दूल्हा इस रिश्ते से खुश नहीं था, क्योंकि लड़की के साथ उसके संबंधों पर हल्ला कट चुका था और उसकी छोटी बहन के साथ उसके अफेयर के बारे में किसी को पता ही नहीं था।

रोका होने के बाद दूल्हा मुकर गया था, जिसपर छोटी बहन के संबंधों से अनजान दुल्हन के परिजनों ने दुष्कर्म का केस दर्ज करा दिया था।

पंचायत के बाद माना था दूल्हा, आखिरी समय में दे गया गच्चा

दुष्कर्म के केस के बाद पंचायत बैठी और फिर से दोनों के परिजन मान गए, लेकिन दूल्हे के दिल में क्या है, सब इससे अनजान थे और दुल्हन की बहन का इलू-इलू तो अभी छिपा ही हुआ था। खैर, निकाह की तारीख आई, तो दूल्हा अपने घर पर हुई रश्मों में शामिल हुआ, लेकिन बारात के जाने से ठीक पहले फरार हो गया। ‘अमर उजाला’ की रिपोर्ट की मानें तो जिसके साथ लड़का भागा है, वो पीलीभीत की है।

खैर, रिश्ते में भाई-बहन वाला मामला तो है, लेकिन कौन किसका भाई है और कौन किसकी बहन, ये अभी ठीक से क्लियर हो नहीं पा रहा है। फिलहाल, नवाबगंज पुलिस में दुल्हन के पिता ने अपने साढू यानी दूल्हे के पिता के खिलाफ तहरीर दी है और अब इस मामले की जाँच पुलिस कर रही है।

बहाल हुई राहुल गाँधी की संसद सदस्यता, अविश्वास प्रस्ताव में कर सकेंगे वोटिंग: कॉन्ग्रेस नेताओं ने खड़गे के मुँह में मिठाई ठूँस कर मनाया जश्न

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की संसद सदस्यता बहाल कर दी गई है। याद दिला दें कि मोदी सरनेम को लेकर उन्होंने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद सूरत की अदालत ने उन्हें 2 साल की सज़ा सुनाई थी और गुजरात हाईकोर्ट ने इस सज़ा को बरकरार रखा था। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें तात्कालिक राहत मिली, जिसने इस सज़ा पर फ़िलहाल के लिए रोक लगा दी है। इससे पहले राहुल गाँधी की संसद सदस्यता चली गई थी और उन्हें बँगला भी खाली करना पड़ा था।

अब राहुल गाँधी की सांसदी वापस बहाल हो गई है, जिसके बाद वो न सिर्फ संसद के मॉनसून सत्र में हिस्सा ले सकेंगे बल्कि अविश्वास प्रस्ताव में वोटिंग भी कर सकेंगे। लोकसभा के सेक्रेटेरिएट जनरल उत्पल कुमार सिंह ने एक पत्र जारी कर के इस पर औपचारिक मुहर लगाई। इसके बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष अधीर रंजन चौधरी ने मिठाई खा कर जश्न मनाया। चौधरी ने खड़गे के मुँह में मिठाई दी।

इसके वीडियो भी सामने आया है। लोकसभा सेक्रेटेरिएट ने भी राहुल गाँधी की संसद सदस्यता की बहाली का फैसला जारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का ही हवाला दिया है। सोनिया गाँधी के आवास के बाहर भी जश्न का माहौल रहा, जहाँ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को नृत्य करते हुए देखा गया। खड़गे ने कहा है कि इस फैसले से जनता को राहत मिली है। हालाँकि, बता दें कि राहुल गाँधी की सज़ा पर स्थायी रोक नहीं लगी है। सुप्रीम कोर्ट अभी इस पर सुनवाई करेगा।

हालाँकि, कई लोग तंज कसते हुए ये भी कह रहे हैं कि राहुल गाँधी की संसद सदस्यता की बहाली से न सिर्फ कॉन्ग्रेस, बल्कि भाजपा और अन्य विरोधी खेमों में भी ख़ुशी की लहर है। राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाते हुए कहा था कि उनकी संसद सदस्यता चले जाने के कारण वायनाड का प्रतिनिधित्व खत्म हो गया है। कई राजनीतिक विश्लेषक ये भी मान रहे हैं कि इससे विपक्षी गठबंधन के अन्य प्रधानमंत्री उम्मीदवार के दावेदारों को भी झटका लगेगा।

फूल बरसे, ज़िंदाबाद और ‘रिहा करो’ के नारे, जमा हुई बड़ी भीड़… बिहार में कुछ यूँ हुआ मनीष कश्यप का स्वागत

यूट्यूबर मनीष कश्यप को तमिलनाडु पुलिस बिहार लेकर पहुँची है। उन्हें बेतिया में एक अदालत में पेश किया गया है। पश्चिम चम्पारण के मझौलिया में स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक से बदसलूकी और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में उनके खिलाफ सुनवाई हो रही है। SDPO महताब आलम ने भी पुष्टि की है कि इसी मामले में मनीष कश्यप को तमिलनाडु से बेतिया लाया गया है। तमिलनाडु में उनके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई हो रही है।

इस दौरान समर्थकों ने बेतिया में मनीष कश्यप का जम कर स्वागत किया। रेलवे स्टेशन से लेकर कोर्ट तक पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर दी। इस दौरान समर्थकों ने मनीष कश्यप के ऊपर फूल बरसा कर उनका स्वागत किया। तमिलनाडु की पुलिस सप्तक्रांति एक्सप्रेस से मनीष कश्यप को लेकर बिहार पहुँची। स्टेशन पर उनका स्वागत करने के लिए समर्थकों की बड़ी भीड़ इकट्ठी हो गई। मनीष कश्यप को मदुरै स्थित जेल में बंद कर के रखा गया है।

बेतिया में जैसे ही मनीष कश्यप को लेकर तमिलनाडु पुलिस पहुँची, ‘मनीष कश्यप ज़िंदाबाद’ और ‘मनीष कश्यप को रिहा करो’ के नारों से इलाका गूँज उठा। उन्हें एसपी ऑफिस में ले जाकर रखा गया, फिर कोर्ट में पेश किया गया। एसपी ऑफिस के बाहर भी यूट्यूबर की एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ बेताब दिखी। बता दें कि बेतिया में मनीष कश्यप पर 7 आपराधिक मामले दर्ज हैं। 5 मामलों में उनके खिलाफ चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है।

इससे पहले 4 बार उन्हें पेश किए जाने का आदेश कोर्ट ने दिया था, लेकिन तमिलनाडु पुलिस उन्हें लेकर नहीं पहुँची थी। मनीष कश्यप ने तमिलनाडु में बिहारियों के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाते हुए कई वीडियो बनाए थे। बेतिया पहुँचे मनीष कश्यप के परिजनों ने भी उनसे मुलाकात की। एसपी कार्यालय के आसपास भी पुलिस के अतिरिक्त जवानों को तैनात किया गया है। मनीष कश्यप के समर्थकों ने बिहार सरकार पर बदले की भावना से कार्रवाई का आरोप लगाया है।

400 किलो का ताला, खोलने के लिए 4 फ़ीट की चाबी… राम मंदिर के लिए अलीगढ़ के भक्त ने बनाया, राम-सीता की तस्वीर भी

अयोध्या में भगवान राम का विशाल एवं भव्य मंदिर बन रहा है, जो अगले साल से खुल सकता है। इस भव्यतम मंदिर के लिए तालों के लिए मशहूर अलीगढ़ में 400 किलो का ताला एक भक्त ने बनाया है। ये ताला हाथ से बना है और पूरी तरह से अटूट है। खास बात ये है कि इस 400 किलो को ताले को खोलने के लिए बनी चाबी भी 4 फिट लंबी है। इस पूरे ताले की लंबाई करीब 10 फिट है, तो 4.5 फिट चौड़ाई और 9.5 इंच मोटाई है।

इसे बनाने वाले सत्य प्रकाश शर्मा का कहना है कि भगवान राम के भव्य मंदिर के लिए ये उनकी तरफ से भेंट है। इस ताले पर उन्होंने भगवान राम और माता सीता की तस्वीरें भी लगाई हैं।

इस विशाल ताले को बनाने वाले परिवार से मिलिए से मिलिए

ये ताला बनाया है अलीगढ़ के रहने वाले सत्य प्रकाश शर्मा और उनकी पत्नी रुक्मिणी ने। रुक्मिणी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पहले हमने 6 फिट का ताला बनाया था, लेकिन लोगों ने कहा कि जब मंदिर विशाल है, तो ताला भी विशाल होना चाहिए। इसके बाद हमने 10 फिट का ताला बनाने का फैसला किया। उनके पति और ताला कारीगर सत्य प्रकाश ने कहा कि उनके पूर्वज एक सदी से भी ज्यादा समय से हाथों से ही ताला बनाते आ रहे हैं।

वो खुद करीब 45 वर्षों से ये काम कर रहे हैं। लेकिन ऐसा मौका अब जाकर आया है, जब उन्हें अपने काम से संतुष्टि मिली है।

महीनों तक की है मेहनत

सत्य प्रकाश शर्मा ने बताया कि इस ताले को बनाने में महीनों का समय लगा है। इसे इस साल की शुरुआत में अलीगढ़ के सालाना जलसे में भी रखा गया था, जिसमें कुछ बदलाव हो रहे हैं। अभी इसमें सजावट और थोड़े बदलाव की जरूरत पड़ रही है, जिसमें वो जुटे हुए हैं। इस ताले पर उन्होंने अपनी पत्नी के साथ अपनी भी तस्वीर लगाई है, तो भगवान राम और माता सीता की तस्वीर मुख्य रूप से लगाई गई है। ताले में बदलाव का काम आखिर तक पूरा कर लिया जाएगा और अयोध्या भेजने का इंतजाम किया जाएगा।

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने क्या कहा?

इस ताले के बारे में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकारी से मीडिया ने संपर्क ने किया, तो उन्होंने कहा कि इसके बारे में विचार जिम्मेदार लोगों तक बढ़ाया जाएगा। चूँकि भगवान राम के लिए दुनिया के कोने-कोने से लोग इच्छानुसार दान कर रहे हैं, ऐसे में इस पर भी विचार किया जाएगा। क्योंकि अभी ये भी समझना होगा कि इस ताले का इस्तेमाल कहाँ किया जाए। बता दें कि राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने शुक्रवार को बयान दिया है कि अगले साल जनवरी माह में भगवान राम के मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह का आयोजन किया जाएगा।

इसके लिए 21 जनवरी, 22 जनवरी और 23 जनवरी की तारीखों पर विचार किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निमंत्रण भेजा जाएगा।

बाल रूप में विराजमान होंगे रामलला

गौरतलब है कि इससे पहले 16 जुलाई को चंपत राय ने कहा था कि मंदिर के गर्भगृह में स्थापित होने वाली मूर्ति भगवान राम के 5 वर्षीय बालक रूप की है। प्रतिमा भूतल में मौजूद रहेगी। इन प्रतिमाओं का निर्माण भी अयोध्या में शुरू हो गया है जिसे अक्टूबर तक पूरा कर लिए जाने की उम्मीद है। राम मंदिर की चौखट मार्बल की है। इसके दरवाजे महाराष्ट्र से आई लकड़ी के बने हैं जिन पर अयोध्या में ही नक्काशी करवाई जा रही है।

दिसंबर तक पूरा हो जाएगा पहले चरण का काम

चम्पत राय ने फिनिशिंग टच जैसे छोटे-मोटे काम दिसंबर तक पूरा हो जाने की उम्मीद जताई थी। साथ ही कहा था कि अनुमान के मुताबिक मंदिर निर्माण में 21 लाख ग्रेनाइट, घनपुट, सैंड स्टोन और मार्बल प्रयोग हो रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि मंदिर के हर हिस्से को ऐसी मजबूती से बनाया जा रहा है जिसे लगभग 1 हजार वर्ष तक मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी।

‘चंद्रयान 3’ ने भेजा चाँद का वीडियो: चन्द्रमा की कक्षा में घुस चुका है भारत का स्पेसक्राफ्ट, अब तक 3 लाख किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा

ISRO ने ‘चंद्रयान 3’ को उसकी कक्षा में स्थापित करने में सफलता पाई है। इतना ही नहीं, भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ने रविवार (6 अगस्त, 2023) को एक वीडियो भी जारी किया, जिसमें देखा जा सकता है कि ‘चंद्रयान 3’ से चाँद कैसा दिख रहा है। ‘लूनर ऑर्बिट इंसर्शन (LOI)’ के दौरान स्पेसक्राफ्ट द्वारा चाँद का ये वीडियो लिया गया है। ये वीडियो शनिवार को बनाया गया। रविवार की देर रात ‘चंद्रयान 3’ को एक बड़ी प्रक्रिया से गुजरना है।

वहीं शनिवार को शाम 7 बजे के करीब ‘चंद्रयान 3’ ने LOI की प्रक्रिया पूरी की। इसके साथ ही अब ये स्पेसक्राफ्ट स्टेबल लूनर ऑर्बिट में पहुँच गया है। इसे 14 जुलाई, 2023 को ‘सतीश धवन स्पेस सेंटर’ से लॉन्च किया गया था। इसके लिए LVM-3 रॉकेट का इस्तेमाल किया गया था। पृथ्वी और चाँद के बीच ‘चंद्रयान 3’ 3 लाख किलोमीटर से भी अधिक की यात्रा कर चुका है। इसने पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करते हुए चाँद की तरफ ट्रांस-लूनर यात्रा की शुरुआत की थी।

‘चंद्रयान 3’ द्वारा जारी किए गए वीडियो में चाँद के सतह की तस्वीर देखी जा सकती है, जो नीले और हरे रंग में है। साथ ही इस पर कई छोटे-छोटे गड्ढे भी दिखाई दे रहे हैं। 9 अगस्त को जो अगला बड़ा ऑपरेशन परफॉर्म किया जाएगा, उसके तहत चाँद से इसकी दूरी और कम की जाएगी। फ़िलहाल ये 170 km x 4,313 km की दूरी पर स्थित है। 9 अगस्त को दोपहर 1 बजे से लेकर 2 बजे के बीच इस बड़ी प्रक्रिया को पूरी की जाएगी।

23 अगस्त को इस अभियान का सबसे बड़ा दिन आएगा, जब स्वदेशी इंजन पर आधारित ‘चंद्रयान 3’ को चाँद की सतह पर उतारने की कोशिश की जाएगी। ‘चंद्रयान 3’ फ़िलहाल ठीक स्थिति में है और और सॉफ्ट लैंडिंग के रास्ते में कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। अगर लैंडिंग सफल हो जाती है तो अमेरिका, रूस (तब सोवियत यूनियन) और चीन के बाद भारत पहला ऐसा देश होगा जो ये करने में सक्षम हो जाएगा।

ग्रुप एडमिन शहाबुद्दीन अंसारी गिरफ्तार, मुस्लिम फरार… CM योगी पर की थी अभद्र टिप्पणी, नगपालिका के नाम से चल रहा था व्हाट्सएप्प ग्रुप

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ व्हाट्सएप पर अभद्र टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने ग्रुप एडमिन को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान शहाबुद्दीन अंसारी के रूप में हुई। वहीं टिप्पणी करने वाला व्यक्ति मुस्लिम अंसारी अब भी फरार चल रहा है।

मामला भदोही जिले का है। यहाँ मुस्लिम अंसारी नामक व्यक्ति ने सीएम योगी आदित्यनाथ पर अपमानजनक टिप्पणी की थी। इस टिप्पणी का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। बाद में इस मामले में एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद अब पुलिस ने मामले की जाँच करते हुए व्हाट्सएप ग्रुप एडमिन शाहबुद्दीन अंसारी को गिरफ्तार कर लिया।

इस मामले में कोतवाली थाना प्रभारी अजय कुमार सेठ ने कहा है कि सोशल मीडिया पर 4 अगस्त को सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ एक टिप्पणी वायरल हुई थी। इस मामले में शहाबुद्दीन अंसारी नामक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, अभद्र टिप्पणी करने वाला व्यक्ति मुस्लिम अंसारी अब भी फरार है। पुलिस को 4 अगस्त को ही शिकायत प्राप्त हुई थी।

शिकायत के आधार पर सहाबुद्दीन अंसारी और मुस्लिम अंसारी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC), आईटी एक्ट (IT Act), क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद मामले की जाँच कर आरोपित की गिरफ्तारी की गई। पुलिस का कहना है कि व्हाट्सएप ग्रुप का नाम ‘नगर पालिका परिषद भदोही’ है। इसमें भदोही नगर पालिका परिषद के लगभग सभी पार्षद जुड़े हुए हैं। इस ग्रुप का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना था। हालाँकि यह पार्षदों का व्हाट्सएप ग्रुप नहीं था।