Home Blog Page 1628

15 घरों में आग लगा दी, 6 की मौत… मणिपुर में फिर भड़क गई हिंसा, ‘असम राइफल्स’ और पुलिस के बीच बहस का वीडियो भी आया

मणिपुर में जारी हिंसा के बीच असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस का एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में मणिपुर पुलिस के जवान असम राइफल्स के जवानों पर कुकी उग्रवादियों से मिलीभगत का आरोप लगाते दिख रहे हैं। वहीं, शनिवार (5 अगस्त, 2023) को भड़की ताजा हिंसा के बाद पश्चिमी इंफाल जिले में 15 घरों में आग लगा दी। वहीं बिष्णुपुर और चुराचांदपुर जिले में 6 लोगों की मौत हो गई। साथ ही 16 लोग घायल हो गए।

असम राइफल्स और मणिपुर पुलिस के बीच बहस का यह वीडियो विष्णुपुर जिले का बताया जा रहा है। वीडियो में जवानों को बहस करते देखा जा सकता है। हिंदुस्तान टाइम्स ने स्थानीय मीडिया के हवाले से कहा है कि 9वीं राइफल्स ने कुछ कैस्पर बुलेट प्रूफ गाड़ियों के जरिए मैतेई बहुल विष्णुपुर और कुकी बहुल चुराचांदपुर को जोड़ने वाले रास्ते क्वाक्टा गोथोल रोड को ब्लॉक कर दिया था।

इसके बाद रास्ता खोलने को लेकर पुलिस और असम राइफल्स के जवानों के बीच शुरू हुई बातचीत बहस में बदल गई। इस दौरान रास्ता रोकने को लेकर मणिपुर पुलिस ने असम राइफल्स पर कुकी उग्रवादियों का साथ देने और पुलिस के काम में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया।

इस मामले में एक रक्षा अधिकारी का कहना है, “संयुक्त मुख्यालय द्वारा जारी आदेशों का पालन करते हुए वाहनों को बफर जोन में खड़ा किया गया था। प्रोटोकॉल के अनुसार, केंद्रीय बलों का काम बफर जोन पर सख्ती से कार्रवाई सुनिश्चित करना और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए किसी भी समुदाय के सदस्यों को एक-दूसरे की ओर जाने से रोकना है।”

मणिपुर में फिर भड़की हिंसा

मणिपुर में मैतेई और कुकी के बीच लंबे समय से हिंसा जारी है। जैसे ही लगता है कि अब हालात सामान्य हो रहे हैं, वैसे ही एक बार फिर हिंसा भड़क उठती है। शनिवार (5 अगस्त, 2023) को भड़की हिंसा के बाद इंफाल पश्चिम जिले के लैंगोल गेम्स गाँव में उपद्रवियों ने 15 घरों को आग लगा दी। साथ ही गोली लगने से एक व्यक्ति घायल हो गया, जिसे इलाज के लिए हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।

वहीं, विष्णुपुर जिले के क्वाक्टा इलाके के एक गाँव में उपद्रवियों ने हमला कर पिता-पुत्र समेत 3 लोगों की हत्या कर दी। रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि मारे गए लोगों में से 2 लोगों पर पहले धारदार हथियार से कई बार हमला किया था। इसके बाद पास से गोली मारकर हत्या कर दी गई। यही नहीं, विष्णुपुर जिले के ही तेराखोंगसांगबी में हुए हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई व पुलिस कमांडो सहित तीन अन्य लोग घायल हो गए। इसके अलावा, चुराचांदपुर के फुजांग और सोंग्दो गाँव में मोर्टार और ग्रेनेड से हुए हमले में 2 लोगों की मौत हो गई। वहीं कई अन्य घायल हुए।

‘औरंगजेब मज़हबी थे, मंदिर ढहाकर मस्जिद नहीं बनाएँगे’: ज्ञानवापी पर बोले इमाम, ओवैसी को सता रहा दूसरे ‘बाबरी’ का डर

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने रविवार (6 अगस्त, 2023) को तीसरे दिन भी ज्ञानवापी विवादित परिसर में पुरातात्विक सर्वेक्षण का काम कर रही है। आज भी सर्वे शाम 5 बजे तक चलेगा। इस बीच, मुस्लिम पक्ष ने सर्वेक्षण को लेकर झूठी खबरें प्रसारित किए जाने का आरोप लगाते हुए प्रक्रिया से अलग होने की धमकी दी है। इस मामले पर जहाँ ज्ञानवापी के जनरल सेक्रेटरी और मुख्य इमाम मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने औरंगजेब का बचाव करते हुए कहा है कि सर्वे में त्रिशूल या हिन्दू चिन्हों का मिलाना औरंगजेब के सेक्युलरिज्म की निशानी है। वहीं ओवैसी को दूसरी ‘बाबरी’ नजर आ रही है। 

ज्ञानवापी सर्वेक्षण के इस पूरे मामले में जैसे-जैसे ASI को हिन्दू मंदिर होने के प्रमाण मिल रहे हैं वैसे-वैसे मुस्लिम पक्ष की तरफ से धमकी और तरह-तरह के बयान सामने आ रहे हैं। इस पूरे मुद्दे पर आजतक ने ज्ञानवापी के जनरल सेक्रेटरी और मुख्य इमाम मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी ने बातचीत की है। जिसमें उन्होंने कहा, “वहाँ कई सालों से नमाज होती है। वह मस्जिद थी, मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी।”

नोमानी का दावा है, “हमारे यहाँ इस्लाम धर्म में यह कानून बना हुआ है। किसी गैर के इबादतगाह को और इबादतगाह तो बहुत बड़ी चीज हो गई किसी गैर के मकान पर भी नाजायज जबरन कब्जा करके मस्जिद बना दी जाए तो उसे हम मस्जिद नहीं मानते और उसमें नमाज पढ़ना सही नहीं माना जाता है। वहाँ मंदिर होने का, ढाँचे को गिराकर मस्जिद बनाने का कोई सवाल ही नहीं है। अगर उनकी आशंका है तो सर्वे रिपोर्ट आने दीजिए।”

हिन्दुओं के वहाँ मंदिर होने और उसे तोड़कर ज्ञानवापी विवादित ढाँचा बनाने की बात पर नोमानी ने कहा, “उनका दावा है तो उन्होंने अपनी संतुष्टि के लिए एएसआई के सर्वे की बात की है। कोर्ट ने उनकी बात मानी है। ठीक है। हमारे हिसाब से तो वह मस्जिद है। कोई ऐसी चीज है तो देखते हैं कि एएसआई के रिपोर्ट में क्या आता है।”

वहीं जब उनसे यह साफ़ सवाल किया गया कि क्या मंदिर तोड़कर मस्जिद नहीं बनाई गई? आप क्या मानते हैं? तो अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा, “ऐसा हो ही नहीं सकता। इस्लाम में इस तरीके का कोई नियम ही नहीं है। यह औरंगजेब की बनाई गई मस्जिद है। औरंगजेब से तो खासतौर पर इस तरीके का उम्मीद नहीं रखी जा सकती है। औरंगजेब का मामला बहुत अलग था। वह बहुत ही ज्यादा मज़हबी थे। तो उनसे कतई उम्मीद नहीं रखी जा सकती है कि वह मंदिर को ढहाकर मस्जिद बनवा दें। अलबत्ता, उन्होंने मस्जिदों के साथ-साथ मठों को जमीनें दी हैं। मंदिरों को जमीन दी हैं। आज भी बनारस में बड़े-बड़े मठों में आप औरंगजेब का फरमान देख सकते हैं।”

वहीं जब पिछले दो दिन के सर्वेक्षण में मिले त्रिशूल, स्वास्तिक, घंटा और फूल के निशान पर बात की गई तो नोमानी ने कहा, “जिस किसी पत्थर में कुछ ऐसा निशान दिख रहा है। फोटोग्राफ में ऐसा लगता हो कि त्रिशूल का निशान बना हो या स्वास्तिक का निशान हो तो यह सबूत है कि उनके अंदर सेक्युलरिज्म था। वो अपने साथ हिंदू भाइयों के तमाम मजाहिब को साथ लेकर चलते थे। यही वजह है कि वो मुसलमान होकर भी इस मुल्क में आए और उन्होंने 800 साल तक इतने बड़े मुल्क में हुकूमत की।”

ओवैसी को सता रहा दूसरे ‘बाबरी’ का डर 

ऑल इंडिया मजलिए-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) नेता असदुद्दीन ओवैसी ने भी ज्ञानवापी सर्वे को लेकर शनिवार (5 अगस्त, 2023) को कहा है कि उन्हें आशंका है कि कहीं दूसरा ‘बाबरी’ न हो जाए। ओवैसी ने कहा, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद बीजेपी-आरएसएस नैरेटिव सेट करेंगे। फिर क्या होगा आप जानते हैं।

ओवैसी ने कहा कि 23 दिसम्बर, 1949 को जब बाबरी मस्जिद में मूर्तियाँ रखी गईं, तो नमाज बंद हो गई। हम मस्जिद से महरूम हो गए। 6 दिसम्बर, 1992 को शिलान्यास की अनुमति दी गई और मस्जिद चली गई। हमें डर है कि एएसआई की रिपोर्ट के आने के बाद दूसरा (बाबरी मस्जिद) न हो जाए।  

ओवैसी की बातों से उनका डर साफ़ झलक रहा है। उनको अभी से यह चिंता सता रही है कि- सर्वे के बाद क्या होगा? उन्होंने सवाल किया कि सर्वे के बाद मस्जिद का रिलीजियस कैरेक्टर रहेगा या चेंज होगा? क्या नमाज़ बंद होगी? वहीं उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के बयान पर भड़के ओवैसी ने कहा कि तकलीफ है कि मुख्यमंत्री आदेश आने के पहले ही तरफदारी कर रहे हैं। 

खंडित मूर्तियाँ, नरसिंह की तस्वीर, फूल: सर्वे में कई हिंदू प्रतीकों एवं देवनागरी लिपी मिलने का दावा, ज्ञानवापी के मस्जिद के इमाम ने किया इनकार

वाराणसी के ज्ञावापी ढाँचे का सर्व रविवार (6 जुलाई 2023) को भी जारी है। हिंदू पक्ष ने अब तक हुए सर्वे को लेकर दावा किया है कि परिसर में खंडित मूर्तियाँ, टूटे हुए पिलर, खंडित कलाकृतियाँ, त्रिशूल के कई चिह्न और कलश आदि मिले हैं। हालाँकि, एक इमाम ने इस दावे को नकार दिया है।

सर्वे को लेकर सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि परिसर में देवनागरी लिपि भी देखी गई है। इसमें क्या लिखा हुआ है, इसके बारे में लिपि विशेषज्ञों ही बता सकते हैं। इसके अलावा, आधे पशु और आधे मनुष्य का चिह्न मिला है, जिसे नरसिंह की मूर्ति बताई जा रही है।

हालाँकि, जाँच करने वाली एजेंसी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण संस्थान (ASI) ने इन तस्वीरों की ना ही पुष्टि की है और ना ही खंडन किया है। वहीं, रविवार (6 जुलाई 2023) को ज्ञानवापी के तीनों गुंबदों के नीचे सर्वे का काम चल रहा है। तहखाने के साफ कराया जा रहा है। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।

हिंदू पक्ष की वादी सीता साहू और उनके अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी ने दावा किया है कि ASI की वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित जाँच में यह स्पष्ट हो जाएगा कि ज्ञानवापी के मुख्य गुंबद के नीचे जमीन के भीतर शिवलिंग दबाया गया है। एएसआई की टीम इसमें आईआईटी कानपुर की मदद लेगी। इसके लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) तकनीक का सहारा लिया जाएगा।

हिंदू पक्ष की मुख्य वादिनी राखी सिंह और उनके अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी ने बताया कि एएसआई की टीम ने शनिवार को ज्ञानवापी की मौजूदा इमारत की थ्री-डी इमेजिंग की। इमारत की थ्री-डी इमेजिंग के लिए ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (जीएनएसएस) की मदद ली गई।

इसके अलावा, ज्ञानवापी के आंतरिक हिस्से की मैपिंग और स्कैनिंग के साथ ही फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी का काम जारी रहा। जाँच में किसी भी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया गया है और ना ही खुदाई की गई है। एएसआई की टीम ज्ञानवापी के बाहर और अंदर के एक-एक कोने को देखकर अध्ययन के लिए साक्ष्य जुटा रही है।

वहीं, ज्ञानवापी के मुख्य इमाम मुफ्ती अब्दुल बातिन नोमानी का कहना है कि जो तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, वे ज्ञानवापी की नहीं हैं। नोमानी ने कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद थी और मस्जिद ही रहेगी। उन्होंने कहा कि मुस्लिम वहाँ हर जुमे को नमाज पढ़ने जाते हैं। उन्होंने वहाँ ऐसे कोई निशान नहीं देखे हैं।

उन्होंने कहा, “अगर मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाई भी जाएगी तो उसके निशान क्यों छोड़ देंगे। सब जाया कर देंगे। निशान क्यों बाकी रखेंगे।” उन्होंने कहा कि यह सब झूठ है और इसमें किसी तरह की सच्चाई नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके पूर्वजों ने कोई गलती नहीं की है। बता दें कि सीएम योगी ने ज्ञानवापी को लेकर कहा था कि मुस्लिमों को उनके पूर्वजों द्वारा की गई गलती को सुधारना चाहिए।

‘भारत का खाते हैं, हिन्दुओं पर हमले करते हैं’: VHP ने मेवात को बताया ‘मिनी पाकिस्तान’, हरियाणा के गृह मंत्री बोले – बहुत बड़ा था गेम प्लान

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने नूँह हिंसा को लेकर कहा है कि सब कुछ प्लानिंग के साथ हुआ है। बहुत बड़ा गेम प्लान है। इसकी जाँच की जा रही है। आरोपितों के इलाज के लिए बुलडोजर भी एक दवाई है। वहीं, आरोपितों के खिलाफ हो रही कार्रवाई से विश्व हिंदू परिषद संतुष्ट नजर नहीं आ रहा। विहिप का कहना है कि जिहादियों पर ऐसी कार्रवाई हो कि इनकी 10 पुश्तें भी यह याद रखें कि हिंदू तीर्थयात्रियों पर हमला नहीं करना है।

उधर हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने आज तक से हुई बातचीत में कहा है, “हिंसा के लिए जिस ढंग की प्लानिंग की गई। जिस प्रकार से मोर्चेबंदी की गई। मंदिर के ऊपर पहाड़ है। पहाड़ पर मोर्चे बनाए गए। एंट्री प्वाइंट्स पर मोर्चे बनाए गए। ये बिना योजना के थोड़े होता है। यह अचानक थोड़े होता है। हर आदमी के हाथ में लाठी थी। लाठियाँ फ्री बँट रहीं थी? किसी न किसी ने व्यवस्था की है लाठियों की। गोली चली है। कोई न कोई हथियार लेकर आया है। ये सारा प्लानिंग के साथ हुआ है। ये बहुत बड़ा गेम प्लान है। हम इसकी पूरी गहराई तक जा रहे हैं।”

विज ने आगे कहा है,”नूँह में हमारी पुलिस इस सिद्धांत पर काम कर रही है कि एक भी निर्दोष को सजा न मिले और एक भी दोषी नहीं छूटे। प्री-प्लान करके गोलियाँ चलाई गईं। पहाड़ों पर चढ़कर गोलिययाँ मारी गईं। छतों पर पत्थर इकट्ठे किए गए। हम एक-एक की जानकारी ले रहे हैं। उन सबके खिलाफ कार्रवाई करेंगे गिरफ्तारियाँ अभी और भी होंगी। जिसके ऊपर केस बनता है उसका इलाज करेंगे। इलाज में बुलडोजर भी एक दवाई है। वो भी जहाँ जरूरी होगा हम चलाएँगे। गिरफ्तार किए गए लोगों से जानकारी मिल रही है। सीसीटीवी फुटेज खँगाले जा रहे हैं।”

विश्व हिंदू परिषद के महासचिव सुरेंद्र जैन ने ईटीवी से हुई बातचीत में कहा है, “अपराधी को सजा मिलनी चाहिए। पूरे मेवात में आतंक का माहौल है, इसलिए उसे मिनी पाकिस्तान कहते हैं। इन हमलवारों ने भारत में रहते हुए पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए हैं। ये भारत में रहते हैं, भारत का खाते हैं, हिंदू व्यापार देता है तो व्यापार करते हैं। उन्हीं हिंदुओं को मारोगे? उन्हीं हिंदुस्तान को गाली दोगे? पुलिस पर हमला करेगा। एक्शन की शुरुआत हुई है, आगे और अधिक होना चाहिए। जिहादियों पर जो कार्रवाई हो रही वह नाकाफी है। पूरी जिहादी मानसिकता को कुचल देना चाहिए। उन्हें यह समझ आ जाना चाहिए कि भारत में रहकर पाकिस्तान जिंदाबाद नहीं कहा जा सकता। हिंदुओं की हत्याएँ नहीं की जा सकतीं।”

उन्होंने आगे कहा है, “हत्यारों के साथ जो व्यवहार होता है, वैसा ही इनके साथ भी हो। आने वाली 10 पुश्तें भी याद रखें और हिंदू तीर्थयात्रियों पर हमला न करें।” 31 जुलाई के दिन हुए हमले को याद करते हुए सुरेंद्र जैन ने कहा है, “चारों तरफ से रास्ते बंद थे। न तो पुलिस अंदर आ सकती थी और न ही अंदर फँसे लोग बाहर जा सकते थे। पहाड़ों पर चढ़े हुए जिहादियों ने ऊपर से गोलियाँ बरसानी शुरू की थी। कारगिल जैसा दृश्य बन गया था। फर्क बस इतना था। भारतीय सेना के पास हथियार थे। लेकिन हम (हिंदू) निहत्थे थे। ओवैसी, मदनी वर्क जैसे नेताओं को यह समझना चाहिए कि वे मुस्लिमों को किस ओर ले जा रहे हैं। ये अंधेरी गलियाँ हैं विनाश पर समाप्त होंगी।”

बता दें कि नूहं हिंसा के आरोपितों के खिलाफ सरकार लगातार कार्रवाई कर रही है। इस मामले में अब तक 600 से अधिक अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाया गया। वहीं, पूरे हरियाणा में करीब 104 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं, इस मामले में करीब 216 गिरफ्तारियाँ हुई हैं और 83 लोगों को हिरासत में लिया है।

भारत में शरिया लागू करने के मिशन पर आया फिरदौस कश्मीर से धराया, असम से भी बांग्लादेशी आतंकी गिरफ्तार: ‘काफिर के खिलाफ जिहाद’ का था इरादा

भारत में आतंक फैलाने के पड़ोसी देशों के मंसूबों पर पानी फेरने में देश की पुलिस को कामयाबी हासिल हुई है। जहाँ यूपी के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने जम्मू-कश्मीर से हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी फिरदौस अहमद डार की गिरफ्तारी की। वहीं असम में बांग्लादेशी आतंकी संगठन अंसारुल बांग्ला टीम (एबीटी) अब्दुस सुकुर अली की गिरफ्तारी की गई है।

भले ही पाकिस्तान लाख दलीलें दें कि वो भारत के साथ रिश्ते सही करना चाहता है, लेकिन उसकी नापाक फितरत का सबूत बार-बार इन आतंकियों के पकड़े जाने पर जगजाहिर होता है।

आतंकी फिरदौस को भारत में शरिया कानून लागू करने के मिशन पर भेजा गया था और वो यहाँ तेजी से आतंकी फौज में युवाओं की भर्ती को अंजाम दे रहा था। यूपी एटीएस की टीम ने उसकी गिरफ्तारी भी उसी के ट्रेंनिंग दिए संदिग्ध आतंकवादी अहमद रजा (24) के पकड़े जाने के ठीक एक दिन बाद कश्मीर में शुक्रवार (4 अगस्त, 2023) को अनंतनाग (जम्मू-कश्मीर) से की है।

एनआईए की मदद से यूपी एटीएस ने दबोचा फिरदौस

इंडिया टीवी’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी फिरदौस अहमद डार को राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) की मदद से गिरफ्तार किया गया। उसे गिरफ्तारी के बाद ट्रांजिट रिमांड पर उत्तर प्रदेश लाया गया। एटीएस अदालत ने डार से पूछताछ के लिए उसे शनिवार यानी 5 अगस्त को सुरक्षा एजेंसी की 14 दिन की हिरासत में भेजा है।

वो रविवार 6 अगस्त सुबह 10 बजे से 19 अगस्त शाम 6 बजे तक जाँच एजेंसी की हिरासत में रहेगा। एटीएस के एक सीनियर अधिकारी ने अदालत में उसकी हिरासत रिमांड की माँग की थी।

उन्होंने कहा कि डार ने अहमद रजा को अपने झाँसे में लेकर हिजबुल मुजाहिदीन में भर्ती करा था। फिरदौस से पहले पकड़ा गया आतंकी रजा कई मैसेजिंग एप्लिकेशन के जरिए से पाकिस्तानी हैंडलर अहसान गाजी के साथ लगातार सँपर्क में था।

भारत में शरिया कानून लागू करने के मिशन पर था भेजा गया

एटीएस के सीनियर अधिकारी बताया कि अहसान गाजी ने घाटी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने और भारत में शरिया कानून लागू करने के लिए डार को हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटकों की खेप मुहैया कराने का वादा किया था। डार को इस मिशन के लिए देश भर में लोगों की भर्ती करने के लिए भी कहा गया था।

आतंकी रजा का हिजबुल कैंप में ट्रेनिंग लेने का कबूलनामा

फिरदौस को पकड़वाने वाला मुरादाबाद का रहने वाला अहमद रजा ऊर्फ शाहरुख ऊर्फ मोहीउद्दीन पाकिस्तानी हैंडलर के साथ ही लगातार दो हिजबुल कमांडरों के संपर्क में था।

हिंदुस्तान टाइम्स‘ की रिपोर्ट के अनुसार, रजा ने 2022 में जम्मू-कश्मीर में दो जगहों पर हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी ली थी। एटीएस अधिकारी ने कहा कि उसने हिजबुल कैंप में ट्रेनिंग लेने और आतंकवादी संगठन में भर्ती के लिए शपथ लेने की बात कबूली है।

वो कुछ आतंकवादी गतिविधि को अँजाम देने का प्लान भी बना रहा था। एटीएस ने उसकी मोबाइल फोन गैलरी से कई जिहादी वीडियो, कई तरह के हथियारों और गोला-बारूद की तस्वीरें और इसके ट्रेनिंग मॉड्यूल बरामद करने का दावा किया।

एटीएस ने यह भी दावा किया कि उसे मुंबई की एक औरत अमीना ने हनीट्रैप में फँसा कर उससे फोन पर बातचीत के जरिए उसे आतंकी नेटवर्क में खींच लिया था। इससे पहले एटीएस ने आतंकी रजा की 14 दिन की कस्टडी रिमांड भी हासिल की थी।

एटीएस ने रिमांड की माँग करते हुए कहा कि आतंकी के नापाक इरादों और योजनाओं के बारे में अधिक जानकारी हासिल करने के लिए उसे जम्मू-कश्मीर, मुरादाबाद और सहारनपुर ले जाया जाएगा। वह कथित तौर पर हिज्बुल मुजाहिदीन से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, उसका पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान जाकर भारत में आंतकी हमला करने का इरादा था। वो वहाँ जाकर बद्री कमांडो की ट्रेनिंग लेना चाहता था।

रजा पाकिस्तान और अफगानिस्तान में लड़ रहे कई जिहादी संगठनों के मुजाहिदीनों से प्रभावित है। उसने हिंदुस्तान में काफिरों और काफिर सरकार के खिलाफ जिहाद करने को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया था। वो हिजुबल मुजाहिदीन के पीर पंजाल तंजीम से जुड़े अनंतनाग के रहने वाले सीनियर साथी फिरदौस डार के लगातार संपर्क में था। अहमद रजा का कहना है कि वो भारत के संविधान और सरकार को नहीं मानता।

क्या है हिज़बुल मुजाहिदीन?

अमेरिका ने 2017 में कश्मीर के सबसे बड़े सशस्त्र समूह हिज़बुल मुजाहिदीन के एक विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था और तत्काल प्रभाव से इस पर प्रतिबंध लगा दिए थे। कहा गया था कि देश में मौजूद इसकी संपत्ति को ज़ब्त किया जाएगा।

हिज़बुल मुजाहिदीन ने 1989 में भारत के ख़िलाफ़ कश्मीर में सशस्त्र विद्रोह शुरू किया था। साल 2017 की शुरूआत में अमरीका ने पाकिस्तान में मौजूद इस संगठन के कमांडर मोहम्मद यूसुफ़ शाह उर्फ़ सैयद सलाहुद्दीन को आतंकवाद घोषित किया गया था।

भारत कहता रहा है कि पाकिस्तान पर हिज़बुल विद्रोहियों को हथियार और ट्रेनिंग देता रहा है, जबकि पाकिस्तान इससे इनकार करता रहा है। माना जाता है कि हिज़बुल मुजाहिदीन पहला आतंकी संगठन है जिसमें जरूरी तौर पर कश्मीरियों को सदस्य बनाया गया और जिम्मेदारियाँ दी गईं।

इसे पाकिस्तान समर्थक माना जाता है और 1990 के दशक में कश्मीरी विद्रोहियों का सबसे बड़ा आतँकी ग्रुप माना जाता है। आज भी ये उन कुछ ग्रुप्स में से एक है जो कश्मीर में अपनी मौजूदगी बनाए हुए है। 1989 में बने इस सँगठन के कभी पाकिस्तानी ख़ुफ़िया सेवा आईएसआई के साथ नजदीकी रिश्ते हुआ करते थे।

अमरीकी विदेश मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये संगठन आधिकारिक तौर पर जम्मू कश्मीर के भारत से अलग हो कर पाकिस्तान में शामिल किए जाने का समर्थन करता है। अमेरिका के मुताबिक, ये संगठन पाकिस्तान की सबसे बड़े इस्लामी राजनीतिक दल जमाल-ए-इस्लामी का सशस्त्र ब्रांच है। इसका निशाना हमेशा से निशाना भारतीय सुरक्षा बल और जम्मू कश्मीर में मौजूद नेता हैं.ये कश्मीर में विद्रोहियों से मिल कर कई अभियानों को अंजाम देता रहा है।

काबुल के कसाई से है हिज़बुल मुजाहिदीन का करीबी रिश्ता

माना जाता है कि इस हिज़बुल मुजाहिदीन का नजदीकी रिश्ता अफग़ानिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री रहे और 80 के दशक में मुजाहिद्दीनों की अगुवाई करने वाले कबायली नेता गुलबुद्दीन हिकमतयार से भी रहा है। हिकमतियार बुचर ऑफ़ काबुल यानी काबुल का कसाई के नाम से भी मशहूर हैं।

एक वक्त में हिज़बुल लड़ाकों को अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद कैंपों में ट्रेनिंग दी जाती थी। हालाँकि, 1990 के दशक के आख़िर में तालिबान ने इन कैंपों को नेस्तनाबूद कर दिया। इसके बाद ये कैंप पाकिस्तान के हज़ारा इलाके और पाकिस्तानी के जबरन कब्जाए कश्मीर में चले गए।

अफ़ग़ानिस्तान में 90 के दशक में हुए गृह युद्ध में गुलबुद्दीन हिकमतयार का रोल काफी विवादित रहा। हिंसा के इस दौर में अफ़ग़ानों ने तालिबान का वेलकम किया था। ऐसे में हिकमतयार अलग-थलग पड़े और तालिबान के सत्ता में आते ही काबुल से भाग गए।

आईएसआई से है रिश्ता

शिकागो की एक अदालत में साल 2008 में हुए मुंबई बम धमाकों के सिलसिले में सरकारी गवाह डेविड हेडली ने कहा था कि इन हमलों में पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई और लश्कर-ए- तैयबा दोनों का हाथ था। हेडली का दावा था कि आईएसआई लश्कर,हिज़्बुल मुजाहिदीन और दूसरे आतंकी संगठनों को मदद देता था।

ये आतँकी सँगठन को 2001 में थोड़ा कमजोर पड़ा था जब भारतीय कश्मीर संगठन के शीर्ष क्षेत्र कमांडर माजिद डार ने भारतीय सेना के ख़िलाफ़ एकतरफा युद्धविराम का एलान कर डाला था। इससे पाकिस्तान में संगठन के चीफ सैयद सलाहुद्दीन सकते में आ गया था।

इस वजह से इस आतँकी सँगठन में पड़ी दरार बढ़ी और बाद में माजिद डार का कत्ल कर दिया गया। हालाँकि, सैयद सलाहुद्दीन इसका नियंत्रण करता हैं,लेकिन संगठन के रैंको में कमी आई है और विद्रोह जारी रखने की उसकी काबिलियत पर भी सवाल उठने लगे।

असम में बांग्लादेश का आतंकी संगठन एबीटी का आतंकी गिरफ्तार

अमूमन हर इस्लामिक आतँकी सँगठन का है जो भारत को टारगेट करता रहा है। बांग्लादेश का आतंकी संगठन अंसारुल बांग्ला टीम (एबीटी) भी इससे अछूता नहीं है। असम में शनिवार यानी 5 अगस्त को इसका एक आतँकी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के धुबरी जिले में पुलिस ने शनिवार को (एबीटी) के एक सदस्य को गिरफ्तार कर लिया। धुबरी पुलिस की टीम ने बिलासीपारा थाना क्षेत्र के नायेराल्गा से उसे सुबह हिरासत में लिया। पुलिस की पूछताछ उससे जारी रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट में कहा, “आतंकी अब्दुस सुकुर अली को भारत-बांग्लादेश सीमा के पास पकड़ा गया।”

हाल ही में सीएम बिस्वा ने कहा था कि असम में आतंकी मॉड्यूल को समय-समय पर नष्ट किया गया है और यह आगे भी जारी रहेगा। साल 2023 अप्रैल में धुबरी से एबीटी से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

बीते साल असम पुलिस ने एबीटी और भारतीय उपमहाद्वीप में अल कायदा (एक्यूएलएस)के नौ मॉड्यूल का खुलासा किया था और इससे जुड़े 53 लोगों को गिरफ्तार किया था। इन गिरफ्तारियों के बाद ऐसे प्राइवेट मदरसों को जमींदोज किया गया था जहाँ आतंकी संगठन से जुड़े शिक्षक युवकों को कट्टरपंथ का एबीसीडी पढ़ा रहे थे।

‘इस्लाम कबूल करो, वरना तुम्हारी बेटी को बेच दूँगा’: इम्तियाज ने धमकाया, आरोप – बेटी को बंधक बना कर रखा है

इंदौर में एक हिन्दू लड़की को इस्लाम कबूल करवाने को लेकर दबाव बनाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहाँ एक पिता ने विजय नगर थाने में शिकायत दर्ज करते हुए कहा है कि हैदराबाद के आईटी कंपनी में इंजीनियर सैय्यद इम्तियाज ने मेरी बेटी को बंधक बनाकर पहले उससे शादी कर ली, और अब वो धमकी दे रहा है कि अगर 2 लाख रुपए नहीं दिए तो बेटी का धर्म बदलवा दूँगा। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपित इम्तियाज को गिरफ्तार कर लिया है। 

क्या है पूरा मामला 

दरअसल, इंदौर की रहने वाली एक हिन्दू युवती नौकरी के लिए हैदराबाद गई थी। वहाँ उसकी एक मुस्लिम युवक इम्तियाज से जान पहचान हो गई और दोनों ने शादी कर ली। 

इस मामले में युवती के पिता दयाराम गौर का आरोप है कि हैदराबाद के रहने वाले इम्तियाज ने हिंदू धर्म की लड़की से साथ में काम करने के दौरान दोस्ती की। फिर उसे अपने प्यार के जाल में फँसा कर उसकी निजी तस्वीरें ले ली। इसके बाद उसे धर्म परिवर्तन कर निकाह करने पर मजबूर किया। इतना ही नहीं बल्कि इंदौर आकर लड़की के पूरे परिवार पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा और साथ ही लड़की के पिता से 2 लाख रुपए की माँग करने लगा। इम्तियाज ने लड़की के पिता को लड़की के अश्लील तस्वीर और वीडियो को वायरल करने की भी धमकी दी थी। 

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के पिता ने कहा कि मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं। तो इम्तियाज ने धमकी दी कि तुम और तुम्हारी पत्नी सभी इस्लाम कबूल करो नहीं तो तुम्हारी बेटी को जान से मार दूँगा। पिता ने कहा कि वह मेरी बेटी से बात नहीं करने दे रहा। उसने जाते हुए कहा कि तुम्हारी बेटी ने इस्लाम कबूल कर लिया है। मेरी बात नहीं मानी तो तुम्हारी बेटी को कहीं भी बेच दूँगा। तुम कुछ नहीं कर पाओगे। 

वहीं इस मामले में टीआई रवीन्द्र गुर्जर के मुताबिक, युवती पिता दयाराम गौर की शिकायत पर पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर लिया है। धर्म परिवर्तन की धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पिता ने कहा कि अब पुलिस मेरी बेटी को वापस दिलवा दे। 

ऐसे हुई लड़की की इम्तियाज से दोस्ती

लड़की ने इंदौर के कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। जो पेशे से सॉफ्टवेर इंजीनियर है। हैदराबाद की कंपनी में उसका चयन हुआ था। वो नौकरी करने के लिए गई थी, जहाँ इसकी सैयद इम्तियाज से मुलाकात इस युवक से हुई थी। लड़की ने निकाह की बात अपने घरवालों से छुपाई थी। कहा जा रहा है कि अब तक लड़के ने लड़की को बंधक बना कर रखा हुआ था। 

फैज ने ‘करन’ बन युवती को फाँसा, धर्मांतरण से मना करने पर गला दबाया: अश्लील वीडियो से कर रहा था ब्लैकमेल, एसिड-चाकू के साथ धराया

पहचान बदलकर हिंदू महिलाओं की अस्मत से खिलवाड़ करने का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक बार फिर ये मामले सामने आया है। सैय्यद फैज ने करन बनकर एक हिंदू युवती से दोस्ती की और उसके साथ संबंध बनाए। इसके बाद अश्लील फोटो और वीडियो के जरिए धर्मांतरण कर निकाह करने के लिए ब्लैकमेल करने लगा।

मामला इंदौर के राजेन्द्र नगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, युवती राजपुर बड़वानी की रहने वाली है और फिलहाल खंडवा नाका क्षेत्र में रहती है। वह निजी कंपनी में नौकरी करती है। वहीं, आरोपित भी बड़वानी का रहने वाला है। आरोपित फैज से करीब चार साल पहले स्कूल आते-जाते समय परिचय हुआ था।

उस समय फैज ने अपना नाम करन राणावत बताया था। इस दौरान करन बने फैज ने युवती को शादी का झाँसा दिया। जनवरी 2020 में फैज अपने दोस्त के रूम पर ले गया और युवती के साथ शारीरिक संबंध बना लिए। इसके बाद से वह लगातार शोषण शारीरिक शोषण करने लगा।

इस दौरान उसने युवती के कई अश्लील फोटो और वीडियो भी खींच लिए। युवती ने उसकी मोबाइल में एक मस्जिद के सामने वाला उसका फोटो देख लिया था। जब युवती ने इसके बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह मुस्लिम है। जब युवती उससे दूरी बनाने लगी तो वह युवती को ब्लैकमेल करने लगा। वह जब मन करता युवती को अपने पास आने के लिए मजबूर करने लगा।

आरोपित फैज ने युवती को बताया कि उसके पास उसकी अश्लील फोटो और वीडियो हैं। अगर वह उसकी बात नहीं मानती है तो वह इन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा। फैज युवती पर धर्मांतरण कर मुस्लिम बनने और उससे निकाह करने का दबाव डालने लगा। वह युवती पर एसिड डालने की भी धमकी देता था।

इसी दबाव के लिए उसने शनिवार यानी 5 जुलाई 2023 की शाम को फैज ने युवती को इंदौर के रीजनल पार्क पर मिलने के लिए बुलाया था। यहाँ वह युवती पर धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा था। जब लड़की ने इससे इनकार किया तो उसका गला दबाने लगा और चेहरे पर एसिड फेंकने की धमकी देने लगा।

इस दौरान आसपास के लोगों के नजर फैज पर पड़ी। इसके बाद लोग मौके पर पहुँचकर उसे पकड़ लिया और जमकर धुनाई कर दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँचकर आरोपित को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने तलाशी ली तो उसकी कार से एक बड़ा चाकू, एसिड, ड्रग्स व अन्य आपत्तिजनक सामग्री मिली। इसके बाद पुलिस उसे अपने साथ थाने लेकर चली गई।

घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठनों के लोग पुलिस थाने के पास पहुँच गए। हिंदू कार्यकर्ताओं ने आरोपित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की। पुलिस ने युवती की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है।

इस पूरे मामले में अधिवक्ता अनिल नायडू ने बताया कि आरोपित के मोबाइल की तलाशी लेने पर उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कई और हिंदू युवतियों से चैट मिले हैं। वह इन हिंदू युवतियों से नाम बदलकर चैटिंग करता था।

नूहं में जिस चार मंजिला होटल से हुई थी पत्थरबाजी, उसपर भी चला बुलडोजर: अब तक 600 से अधिक अवैध निर्माण जमींदोज

हरियाणा की खट्टर सरकार ने शनिवार (5 अगस्त, 2023) को नूहं के सहारा फैमिली रेस्टोरेंट को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। मेडिकल चौक पर स्थित यह वही रेस्टोरेंट बताया जा रहा है, जहाँ से 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं की शोभायात्रा पर पत्थरबाजी की गई थी। नूहं हिंसा के कुछ वीडियो और फुटेज सामने आए हैं, उन फुटेज में भी यहाँ से पत्थरबाजी होती दिख रही है। यह भी कहा जा रहा है कि यहीं से नूहं में दंगों की शुरुआत हुई थी। 

वीडियो फुटेज में दिख रहा है कि चार मंजिला सहारा फैमिली रेस्टोरेंट के तीनों फ्लोर से पत्थर बरसाए जा रहे हैं। साथ ही रेस्टोरेंट के आसपास की बिल्डिंग और दुकानों की छतों से भी शोभायात्रा को निशाना बनाया गया था।

हालाँकि, प्रशासन का कहना है कि यह बिल्डिंग अवैध रूप से बनाई गई है। इसके मालिकों को साल 2016 से ही नोटिस दिया जा रहा है, लेकिन वे जवाब नहीं दे रहे थे। प्रशासन का कहना है कि अब इसको लेकर कार्रवाई की जा रही है। 

ड्यूटी मजिस्ट्रेट विनेश कुमार ने बताया कि यह वही बिल्डिंग है, जिसको हिंसा वाले दिन दंगाइयों द्वारा इस्तेमाल किया गया था। यह बिल्डिंग अवैध रूप से बनाई गई है। इसलिए इस बिल्डिंग को तोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभी और भी ऐसी बिल्डिंग की पहचान हुई है, उन्हें भी इसी तरीके से तोड़ा जाएगा।

इस कार्रवाई के समय एसडीएम नूहं अश्वनी कुमार अतिरिक्त उपायुक्त रेनू सोगन, नायब तहसीलदार सहित भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। वहीं, आज गुरुग्राम के तिगहर गाँव में ‘हिन्दू समाज’ के महापंचायत को ध्यान में रखते हुए भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। 

जिला प्रशासन की कार्रवाई रविवार को भी जारी है। हरियाणा पुलिस उन सभी अवैध निर्माणों को गिरा रही है, जहाँ से शोभायात्रा के दौरान पुलिस बल और श्रद्धालुओं पर पथराव किया गया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 600 से ज्यादा अवैध निर्माण ध्वस्त किए जा चुके हैं। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।

बताते चलें कि हरियाणा के नूहं, पलवल, गुरुग्राम, फरीदाबाद आदि जगहों पर हुई हिंसा को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूरे हरियाणा में करीब 104 एफआईआर दर्ज की गई हैं। वहीं, इस मामले में करीब 216 गिरफ्तारियाँ हुई हैं और 83 लोगों को हिरासत में लिया है। वहीं, रोहिंग्या बस्ती पर भी बुलडोजर चला है।

बता दें कि नूहं हिंसा के बाद हरियाणा सरकार सख्ती के साथ दंगाइयों के अवैध निर्माणों पर कार्रवाई कर रही है। सरकार का ये एक्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। नूहं में बने सहारा होटल को जहाँ जमींदोज कर दिया गया। वहीं शनिवार को ही एक और तीन मंजिला मकान को जमींदोज किया गया था जहाँ से मुस्लिम दंगाइयों ने पत्थरबाजी की थी। 

वहीं, गुरुग्राम में हिंदू महापंचायत को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया है। जगह-जगह चेकिंग की जा रही है। दरअसल, विश्व हिंदू परिषद ने कहा कि नूहं में हिंसा के कारण अधूरी रह गई जलाभिषेक यात्रा को पूरा किया जाएगा। इसी साल साल के महीने में इसे पूरा करने के लिए पंचायत में तारीख तय की जाएगी।

नूहं में 31 जुलाई को हिन्दुओं की बृज मंडल शोभा यात्रा निकली थी जिस पर दंगाइयों द्वारा पथराव किया गया था। इस हमले में 6 लोगों की मारे जाने और दर्जनों लोग घायल हुए थे। घायलों में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। 

अंतरिक्ष के बाद अब समुद्र की गहराइयों में उतरेगा भारत, 6 किलोमीटर गहराई में जाने के लिए बनाया ‘MATSYA 6000’, वैज्ञानिक जाकर करेंगे अध्ययन

अंतरिक्ष के साथ-साथ भारत ने समुद्र की अनंत गहराइयों में भी मिशन की शुरुआत करने का निर्णय लिया है। समुद्र की गहराई के रहस्यों पर से पर्दा उठाने के लिए भारत द्वारा शुरू किए जाने वाले अपने पहले समुद्री ‘समुद्रयान मिशन’ में तीन लोगों को 6,000 मीटर की गहराई तक भेजा जाएगा।

समुद्रयान परियोजना भारत का पहला मानवयुक्त समुद्री मिशन है, जो समुद्र की गहराई में जाकर संसाधनों एवं जैव विविधता का अध्ययन एवं मल्यांकन करेगा। इसे केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा शुरू किए किया गया है। इस मिशन की 2026 तक पूरे होने की संभावना है।

इस मिशन में सबमर्सिबल वाहन का उपयोग किया जाएगा। इसका उपयोग केवल एक्सप्लोरेशन के लिए किया जाएगा, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को न्यूनतम या शून्य क्षति पहुँचेगी। इस मिशन पर चेन्नई का राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) काम कर रहा है।

समुद्रयान मिशन पर काम करने के लिए जिस वाहन को तैयार किया जा रहा है, उसे ‘MATSYA 6000’ नाम दिया गया है। बता दें कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 29 अक्टूबर 2021 को इस मिशन को लॉन्च किया था।

इस मिशन के लॉन्च के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और चीन जैसे देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो गया है। इन देशों ने समुद्र की गहराई में अध्ययन करने के लिए खूब काम किया है। इस मिशन से समुद्र में भारत की क्षमता बढ़ेगी।

केंद्र ने पाँच वर्षों के लिए 4,077 करोड़ रुपए के कुल बजट पर गहरे महासागर मिशन को मंजूरी दी थी। तीन वर्षों (2021-2024) के लिए पहले चरण की अनुमानित लागत 2,823.4 करोड़ रुपए है। इसमें समुद्र में 6 किलोमीटर की गहराई में जाकर तीन व्यक्ति वहाँ की पारिस्थितिकी तंत्र का अध्ययन करेंगे।

बताते चलें कि आमतौर पर पनडुब्बियाँ केवल 200 मीटर गहराई तक ही जाती हैं। हालाँकि, इस मिशन के लिए पनडुब्बी को बेहतर तकनीक के साथ बनाया जा रहा है। इससे स्वच्छ ऊर्जा, पेयजल और नीली अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री संसाधनों का पता लगाने के लिए और अधिक विकास के रास्ते खुलेंगे।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय को उम्मीद है कि 1000 से 5,500 मीटर के बीच गहराई पर स्थित गैस हाइड्रेट्स, पॉलिमेटेलिक मैंगनीज नोड्यूल्स, हाइड्रो-थर्मल सल्फाइड और कोबाल्ट क्रस्ट्स जैसे संसाधनों की खोज में सहायता मिलेगी। इसके अलावा, निकल, कोबाल्ट, मैंगनीज आदि खनिज मिलने की संभावना है।

सबमर्सिबल को 12 घंटे की परिचालन क्षमता और 96 घंटे तक आपातकालीन सहनशीलता का वाली प्रणालियों के साथ विकसित किया गया है। सबमर्सिबल वाहन MATSYA 6000 समुद्र तल पर 6 किलोमीटर की गहराई में 72 घंटे तक तैरने में सक्षम है।

भारत के पास 7,517 किलोमीटर लंबी तटरेखा, जो नौ तटीय राज्यों और 1,382 द्वीपों का घर है। भारत ने साल 2047 तक विकसित देशों की वर्ग में आने का गोल सेट किया है। इसके लिए भारत अपनी शक्ति और क्षमता का लगातार प्रदर्शन कर रहा है। 

सुनियोजित था नूहं में साइबर थाने पर हमला, सबूत मिटाने के लिए 2 KM उल्टा चले दंगाई, 115 राउंड फायरिंग कर पुलिस ने बचाई जान

हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को हिन्दुओं की शोभायात्रा के दौरान भड़की हिंसा की विस्तृत जाँच अभी जारी है। हिंसा के दौरान नूहं के साइबर पुलिस थाने पर भी हमला किया गया था। इस हमला सुनियोजित था। हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने भी इसके सुनियोजित होने की बात कही है

अब हरियाणा पुलिस ने कहा है कि यह हमला अप्रैल माह में नूहं में साइबर अपराधियों पर हुई छापेमारी के बाद जुटाए गए सबूतों को नष्ट करने के लिए किया गया था। इस हिंसा के तार 28 अप्रैल को नूहं के 14 गाँवों में हुई पुलिस रेड, 11 FIR और नूहं को साइबर ठगी का अड्डा बनाने वाले अपराधियों से जुड़ते नजर आ रहे हैं।

बता दें कि अप्रैल में नूहं में हुई साइबर सेल की कार्रवाई, भारत में अपनी तरह की अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी थी। इसमें कुल 5,000 जवान और अधिकारी शामिल हुए थे और नूहं जिले के 14 गाँवों में अड्डा जमाए 320 साइबर अपराधियों के ठिकानों पर छापा मारा था। इसमें 100 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस छापेमारी के दौरान 126 लोग हिरासत में लिए गए थे, जिनमें से 66 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, 25 साइबर अपराधियों को छापेमारी से पहले और बाद की अवधि में गिरफ्तार किया गया थी। 

इस दौरान हरियाणा पुलिस द्वारा 66 मोबाइल डिवाइस और 5 माइक्रो एटीएम मशीनों सहित बड़ी संख्या में आईटी डिवाइस जब्त किए गए। इसमें 739 फर्जी सिम कार्ड, 307 फर्जी बैंक खाते और 199 यूपीआई हैंडल के विवरण सहित कई फर्जी दस्तावेजों बरामद हुए थे।

इस मामले में बिछौर और पुन्हाना थाने में 29 अप्रैल को 11 FIR दर्ज हुई थी। इन सभी FIR से संबंधित इन्वेस्टिगेशन नूहं साइबर पुलिस स्टेशन में की जा रही थी। इसलिए इन मामलों के ज्यादातर रिकॉर्ड नूहं के इसी साइबर थाने में रखा हुआ था।

3 थाने छोड़कर दंगाई मुस्लिम भीड़ ने आखिर साइबर थाना ही क्यों जलाया

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, साइबर थाने पर हमला कैसे सुनियोजित था इसके सबूत इस बात से भी मिलते हैं कि दंगाई भीड़ ने 3 पुलिस थानों को छोड़कर 2 किलोमीटर उल्टी दिशा में जाकर साइबर थाने पर हमला किया।

दरअसल, 31 जुलाई को नूहं के नल्हड़ शिव मंदिर से ब्रज मंडल शोभा यात्रा शुरू हुई। जिन पर दंगाइयों ने सबसे पहले हमला तिरंगा पार्क के पास किया। यही वो जगह है, जहाँ मुस्लिम दंगाई भीड़ ने श्रद्धालुओं पर पथराव किया। पथराव के बाद हिंसा शुरू हो गई।

इसके बाद तिरंगा पार्क से सिर्फ 500 मीटर दूर नल्हड़ मेडिकल कॉलेज की तरफ जाने वाले रोड पर सिटी थाना, सदर थाना और महिला थाना है और दंगाई मुस्लिम भीड़ मेडिकल कॉलेज से होते हुए शिव मंदिर तक भी गई थी। ये भीड़ तीनों थानों के सामने से गुजरी, लेकिन किसी को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया।

दंगाई भीड़ दोपहर 3 बजे तिरंगा पार्क से उलटी दिशा में करीब 2 किलोमीटर गे और नूहं की अनाज मंडी में पहुँचकर साइबर क्राइम थाने पर हमला कर दिया। साइबर थाने के CCTV फुटेज में भी साफ नजर आ रहा है कि दंगाइयों की भीड़ ने लूटी गई बस से पहले थाने के गेट को तोड़ने की कोशिश की और फिर बैक करके दीवार को टक्कर मारकर तोड़ दिया।

दंगाई भीड़ ने पुलिस पर चलाई गोलियाँ 

मामले में दर्ज FIR के मुताबिक, दंगाइयों ने थाने में मौजूद पुलिस के जवानों पर अवैध हथियारों से फायरिंग की। बाहर खड़ी 10 गाड़ियों और एक बाइक में आग लगा दी। भीड़ पुलिसकर्मियों को जिन्दा जलाना चाहती थी। वहीं पुलिस ने भी अपने बचाव में जवाबी फायरिंग की, लेकिन दंगाई ज्यादा थे और पुलिस फ़ोर्स कम।

बता दें कि दंगाई भीड़ ने न सिर्फ थाने में आग लगाई, बल्कि कूलर, इन्वर्टर, बैटरी और पुलिसवालों के पैसे भी लूट ले गए। पुलिस के मुताबिक, दंगाइयों ने रिकॉर्ड जलाने की भी कोशिश की, लेकिन कामयाब नहीं हुए। जवाबी कार्रवाई करने पर वे भाग गए। हमले के दौरान थाने में मौजूद PSI सूरज के मुताबिक, दंगाइयों से बचने के लिए पुलिस ने भी 115 राउंड फायर किए।

गौरतलब है कि दंगाई भीड़ ने जिस तरह तिरंगा पार्क के पास 3 थानों को छोड़कर 2 किमी दूर जाकर साइबर थाना जलाया, इससे शक और बढ़ जाता है कि नूहं का यह दंगा सुनियोजित था। वहीं हमले की FIR में थाने में मौजूद पुलिसवालों ने भी बताया है कि भारी संख्या में अटैक करने वाली दंगाई भीड़ रिकॉर्ड लूटने की कोशिश में थी।