Tuesday, July 23, 2024
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स्कूल नहीं जा सकेंगी 10 साल से ज़्यादा उम्र की छात्राएँ, अफगानिस्तान में एक और तालिबानी फरमान: तीसरी कक्षा से आगे नहीं पढ़ सकेंगी लड़कियाँ

तालिबान सरकार के फैसले पर दुनिया भर में हो रही आलोचना को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह अफगानिस्तान का निजी मामला है और इसमें दूसरे देशों को दखल नहीं देना चाहिए।

अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है। तालिबान एक के बाद एक फैसले थोपता जा रहा है। अब नया फरमान तालिबान की ओर से जारी हुआ है कि 10 साल से अधिक उम्र की बच्चियाँ स्कूल नहीं जा पाएँगी। बीबीसी पर्सियन के हवाले से एनडीटीवी ने इस बारे में एक रिपोर्ट लिखी है, जिसमें बताया गया है कि अफगानिस्तान के कुछ प्रांतों में 10 साल से अधिक उम्र की बच्चियों को स्कूल जाने से मना कर दिया गया है।

इस रिपोर्ट में आगे लिखा गया है कि अफगानिस्तान के गजनी प्रांत में शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने स्कूलों और ट्रेनिंग सेंटरों को निर्देश दिए हैं कि 10 वर्ष से अधिक उम्र की बच्चियों का प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है। यहाँ मजहबी शिक्षा और मार्गदर्शन मंत्रालय (पहले-महिला मामलों के मंत्रालय) ने कई राज्यों के बालिका विद्यालयों के हेडमास्टर्स को बता दिया है कि तीसरी कक्षा के ऊपर की सभी छात्राओं को घर भेज दिया जाए। छठीं कक्षा की एक छात्रा, जो कि पूर्वोत्तर अफगानिस्तान में की है, उसके बीबीसी को बताया, “हमसे कहा गया है कि जो लड़कियाँ लंबी हैं और 10 साल से अधिक उम्र की हैं, उन्हें स्कूल आने की इजाजत नहीं है।”

पिछले साल से उच्च शिक्षा पर बैन लगा चुका है तालिबान

उच्च शिक्षा मंत्री नेदा मोहम्मद नदीम ने अपने आदेश में कहा था कि आप सभी को सूचित किया जाता ​है कि अगली सूचना तक महिलाओं को देश के किसी भी विश्वविद्यालय में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसे तुरंत लागू करें। बता दें कि दूसरी बार अफगानिस्तान की सत्ता में वाले तालिबान ने खुद को बदलने को वादा किया था, लेकिन उसने अपने तालिबानी फैसलों से एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बदलने वाला नहीं है।

उसके आदेश को संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने भी परेशान करने वाला इस कदम बताया था। उन्होंने कहा, “यह कल्पना करना मुश्किल है कि महिलाओं की शिक्षा और उनकी भागीदारी के बिना कोई देश कैसे विकास कर सकता है। उन सभी चुनौतियों से कैसे निपट सकता है, जो उसके सामने हैं।”

तालिबान ने कहा था-सज-धज कर कॉलेज जाती थी, मर्दों से मिलती थी लड़कियां

अफगानिस्तान के उच्च शिक्षा मंत्री निदा मोहम्मद नदीम ने मामले पर सार्वजनिक तौर पर चर्चा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों में लड़के-लड़कियों के मेल जोल को रोकने के लिए यह प्रतिबंध जरूरी था। अफगानिस्तान के एक टीवी चैनल पर साक्षातकार के दौरान उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुछ ऐसे विषय पढ़ाए जा रहे थे जो इस्लाम के खिलाफ हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लड़कियों के विश्वविद्यालयों में लगे प्रतिबंध के लिए कई और कारण बताए गए हैं।

बताया गया है कि छात्राएँ तालिबानी ड्रेस कोड का पालन नहीं कर रहीं थीं। छात्राएँ इस तरह सज-धज कर पढ़ने जाती थीं मानो शादी समारोह में जा रही हैं। संगठन का कहना है कि यूनिवर्सिटी में औरतें और मर्द स्वतंत्र रूप से मिल रहे थे। तालिबान सरकार के फैसले पर दुनिया भर में हो रही आलोचना को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह अफगानिस्तान का निजी मामला है और इसमें दूसरे देशों को दखल नहीं देना चाहिए।

तालिबान के विरोध में महिला प्रोफेसर ने फाड़ी थी लाइव शो में अपनी डिग्रियाँ

बता दें कि अगस्त 2021 में अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद से तालिबान ने महिलाओं पर तमाम तरह के बैन लगाए हैं। न तो वो उच्च शिक्षा हासिल कर सकती थी और न ही काम कर सकती थी। उन्हें नौकरियों से हटा दिया गया था। यहां तक कि न्यूज एंकर्स के लिए भी तालिबान ने आदेश जारी करते हुए कहा था कि वो हिजाब पहनें वर्ना, उन्हें बैन कर दिया जाएगा। तालिबान की इन हरकतों के खिलाफ एक महिला प्रोफेसर ने अपनी डिग्रियां लाइव टीवी शो पर फाड़ दी थी और तालिबान को जमकर लानतें भेजी थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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