कर्नाटक सरकार के मंत्री दिल्ली में AAP सरकार के मोहल्ला क्लिनिक देखने आए थे, जिसे लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसा माहौल बनाया जैसे वहाँ के नेता यहाँ सीखने के लिए आ रहे हैं। हालाँकि, गुरुवार (4 अगस्त, 2023) को रात होते-होते उनकी भद्द पिट गई। इसके कारण ये है कि कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडु राव ने मोहल्ला क्लिनिक के दौरे के बाद इसकी प्रशंसा करने से इनकार कर दिया और इसे बेहतर मॉडल भी नहीं माना।
ये सब तब हो रहा है, जब AAP और कॉन्ग्रेस विपक्ष के के नए गठबंधन I.N.D.I.A का हिस्सा है। कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री ने दिल्ली के मोहल्ला क्लिनिक को लेकर कहा कि इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है। साथ ही वो इससे निराश भी नजर आए। AAP ने इस पर आपत्ति जताते हुए दावा किया है कि एक फोन कॉल के बाद इस तरह का बयान दिया गया है। पंचशील पार्क स्थित मोहल्ला क्लिनिक में कर्नाटक की टीम के दौरे के समय दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज भी मौजूद थे।
उस समय दिनेश गुंडु राव ने कहा था कि वो इस योजना को समझने के लिए आए हैं कि ये कैसे काम करता है। उन्होंने कहा कि इसके बारे में उन्हें खूब सुनने को मिला था और वो इसे देखने के लिए आए हैं। हालाँकि, कुछ ही घंटों बाद उन्होंने कहा कि मोहल्ला क्लिनिक में लोग ही नहीं थे। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के ‘नम्मा क्लिनिक’ में इससे ज़्यादा सुविधाएँ मिलती हैं, साथ ही वहाँ मेडिकल टेस्टिंग के ज़्यादा विकल्प भी उपलब्ध हैं।
AAP ने अब अपने बयान में कहा है कि दिनेश गुंडु ही बता सकते हैं कि किसके फोन कॉल के बाद उन्होंने अपना बयान बदला। पार्टी ने कर्नाटक के ‘नम्मा क्लिनिक’ को लेकर कहा कि ये एक योजना की जगह बस एक दिया गया नाम है और वहाँ बुखार वगैरह जैसी बीमारियों की दवाएँ मिलती हैं। पार्टी ने ‘नम्मा क्लिनिक’ के इंफ़्रास्ट्रक्चर को ‘मोहल्ला क्लिनिक’ से बेहतर बताए जाने को भी गलत करार दिया। इससे विपक्ष के नए गठबंधन की एकता पर भी सवाल खड़ा हो गया है।
Visited a Mohalla Clinic in Delhi with hardly any people there.
Our Clinics in Karnataka have more facilities including a laboratory to do immediate tests for patients.
— Dinesh Gundu Rao/ದಿನೇಶ್ ಗುಂಡೂರಾವ್ (@dineshgrao) August 4, 2023
वहीं दिल्ली के कॉन्ग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि वो कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री को अरविंद केजरीवाल के शासन की असली सच्चाई दिखा सकते थे। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मुलाकात हुई होती तो वो शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, पर्यावरण, जल, सड़क, बस, इंफ़्रा और भ्रष्टाचार से जुड़ी सच्चाई उन्हें बताते, ताकि ये कॉन्ग्रेस के नए ढोल पीटने वालों तक पहुँचे। अब कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री ने भी कह दिया है कि वो मोहल्ला क्लिनिक का दौरा कर के निराश हैं।
जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में शुक्रवार (4 जुलाई 2023) को तीन सैनिक बलिदान हो गए। बलिदान हुए सैनिकों में एक वसीम अहमद डार भी थे। डार एक फुटबॉलर भी थे। उनकी मौत से इलाके में शोक की लहर है। वहीं, उनकी गर्भवती बीवी पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है।
वसीम डार साल 2014 में भारतीय सेना में शामिल हुए थे। वह इलाके में एक फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में मशहूर थे। डार की मौत की सूचना मिलते ही लोगों को गहरा सदमा लगा। इलाके के लिए उनके पहुँचकर उनकी पत्नी को सांत्वना दी। डार की साल 2021 में शादी हुई थी।
वसीम के छोटे भाई ज़ुबैर सरवर डार ने बताया, “उनकी पत्नी छह महीने की गर्भवती है।” उनकी शादी नवंबर 2021 में हुई थी। वह अपने पीछे माता, पिता, पत्नी, एक भाई और दो विवाहित बहनें छोड़ गए हैं। उन्होंने कहा, वसीम आखिरी बार ईद पर घर आया था।
एक फुटबॉलर होने के नाते जिला फुटबॉल एसोसिएशन ने भी वसीम की मौत पर दुख जताया है। एसोसिएशन ने लिखा, “वह न केवल एक बहादुर और समर्पित सैनिक थे, बल्कि एक प्रतिभाशाली फुटबॉलर भी थे, जिनमें खेल के प्रति जुनून था। वह दाचीगाम में इकरा फुटबॉल क्लब के लिए खेले।”
एसोसिएशन ने आगे लिखा, “उनके टीम के साथी और दोस्त उन्हें एक मिलनसार, शुद्ध दिल वाले व्यक्ति के रूप में याद करते थे, जिन्होंने कभी किसी को धोखा नहीं दिया। उन्होंने हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले फुटबॉल और जम्मू-कश्मीर के फुटबॉलरों का समर्थन किया है। फुटबॉल में उनका योगदान बहुत बड़ा है।”
बताते चलें कि आतंकियों की गतिविधियों की सूचना मिलने पर सेना की 34 राष्ट्रीय राइफल, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संयुक्त रूप से कुलगाम जिले के हालान वन इलाके में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया था। इसी दौरान सिक्योरिटी फोर्सेज की आतंकियों से मुठभेड़ हो गई। मुठभेड़ में 5 जवानों को गोली लगी है। इनमें तीन जवानों की मौत हो गई है।
इस दौरान आतंकी कुछ हथियार लेकर भी भागे हैं। इन आतंकियों को पकड़ने के लिए सेना ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया है। कहा जा रहा है कि आतंकियों की संख्या तीन है। अधिकारियों ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि समूह ने हाल ही में पीर पंजाल रेंज के माध्यम से घुसपैठ की है।
हरियाणा के नूहं जिले में 31 जुलाई को हुई हिंसा और दंगे के सिलसिले में अब तक 202 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 102 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस हिंसा में छह लोगों की मौत हुई और 88 लोग घायल हुए हैं। नूहं हिंसा पर अपने बयान में हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने इसे एक बड़ा गेम प्लान बताया है। उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र को जानकारी मिल रही है कि गोलीबारी की घटनाएँ पूर्व नियोजित थीं और पत्थर एकत्र किए गए थे।
#WATCH इसके पीछे एक बड़ा गेम प्लान है। लोग मंदिरों के बगल की पहाड़ियों पर चढ़ गए, उनके हाथों में लाठियां थीं और प्रवेश बिंदुओं पर इकट्ठा हो गए, यह सब एक उचित योजना के बिना संभव नहीं है। गोलियां चल रही थीं, कुछ लोगों ने हथियारों का भी इंतजाम कर रखा था। ये सब एक योजना का हिस्सा है।… pic.twitter.com/x9UzCaQwrQ
हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज का यह बयान शुक्रवार (4 अगस्त, 2023) को आया है। अनिल विज ने अपने बयान में कहा कि हरियाणा सरकार 31 जुलाई 2023 को एक धार्मिक जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच हुई हिंसा की गहन जाँच के बिना जल्द किसी नतीजे पर नहीं पहुँचेगी। विज ने कहा कि फ़िलहाल हालात में सुधार होने पर इंटरनेट सेवाएँ बहाल कर दी जाएँगी।
विज ने मीडिया से कहा, “हिंसा करने वाले लोग मंदिरों के बगल की पहाड़ियों पर चढ़ गए, उनके हाथों में लाठियाँ थीं और वे अंदर जाने के रास्तों पर इकट्ठा हो गए। यह सब एक साजिश के तहत बनी योजना के बिना संभव नहीं है।”
#WATCH कुल 102 FIR दर्ज की गई हैं। 202 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और 80 लोग एहतियातन हिरासत में हैं। हमें जानकारी मिल रही है कि गोलीबारी की घटनाएं पूर्व नियोजित थीं…छतों पर पत्थर जमा किये गए थे और लोगों ने पहाड़ियों पर जाकर गोलीबारी की। हम जानकारी एकत्र कर रहे हैं और… pic.twitter.com/sP0WKdQwbs
गृह मंत्री अनिल विज ने दावा किया, “मौके पर गोलियाँ चलाईं गईं थीं, किसी ने तो इनका इंतजाम किया होगा। गोलियाँ चल रही थीं। कहाँ से आए हथियार? यह सब एक योजना का हिस्सा है। हमें जानकारी मिल रही है कि गोलीबारी की साजिश रची गई थी… छतों पर पत्थर जमा किए गए थे और लोगों ने पहाड़ियों पर जाकर गोलीबारी की। हम जानकारी जुटा रहे हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।”
इससे पहले नूहं हिंसा में सोशल मीडिया की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में अनिल विज ने कहा कि इसको लेकर भी जाँच जारी है। सोशल मीडिया पर निगरानी रखने और स्कैनिंग के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाई गई है। ये समिति बीती 21 जुलाई से लेकर 31 जुलाई के दौरान सोशल मीडिया के फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सप्प प्लेटफॉर्म को स्कैन करेंगी। अगर इस दौरान किसी ने भी उत्तेजक पोस्ट डाली होगी तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं प्रदेश के गृह मंत्री ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर ऐसा कुछ भी न तो पोस्ट करें, न ही किसी को फॉरवर्ड करें जो भड़काऊ हैं। ऐसा इसलिए कि सोशल मीडिया जाँच एजेंसियों की निगाह है, जो भी दोषी पाए जाएँगे, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
चलेंगे बुलडोजर
गृह मंत्री अनिल विज ने कहा कि जरूरत होगी तो प्रशासन बुलडोजर चलाने से गुरेज नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि इसके पीछे जो भी मास्टर माइंड होगा उसको भी हिसाब देना होगा। गृहमंत्री ने कहा कि जनता को हुए नुकसान की भरपाई दंगाइयों की संपत्ति से की जाएगी। पुलिस लोगों के बयान दर्ज कर रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
हरियाणा के गृहमंत्री ने उन पत्रकारों से भी मदद की अपील की, जो 31 जुलाई से दंगों को कवर करने के लिए नूहं गए हैं। पत्रकारों से अधिकारियों को दंगों की जाँच में मदद करने के लिए वीडियो और फीड देने के लिए कहा गया। उन्होंने उन लोगों से भी यही अनुरोध किया जो उस जुलूस का हिस्सा थे, जहाँ सबसे पहले हिंसा भड़की थी।
बाहर से लाए गए थे लोग
इसी बीच खबर है कि अपनी जाँच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस रिमांड में चल रहे अलवर जिला के अशफाक और साबिर से पूछताछ की गई है। दोनों ने बताया कि खेड़ला चौक पर शोभायात्रा पर हमला होने को लेकर एक रात पहले ही एक वाट्सएप ग्रुप में मैसेज डाला गया था। जिसके बाद सभी दंगाई लोगों से नूहं पहुँचने के लिए कहा गया था।
जाँच में यह बात भी सामने आई है कि नल्हड़ मंदिर से लौट रही शोभायात्रा में शामिल लोगों पर खेड़ला चौक पर भी घेर कर हमला किया गया था। तभी भरतपुर और अलवर जिला से एक डंपर और एक बस में साइबर क्राइम थाने पर हमला करने के लिए मुस्लिम युवकों को लाया गया था। हिंसा के दौरान भीड़ ने साइबर थाने के बाहर और अंदर खड़े वाहनों में आग लगा दी थी। साथ ही करीब 20 पुलिस कर्मियों पर पथराव किया गया और उन्हें जान से मारने के लिए गोली भी चलाई गई।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नूहं के पुलिस अधीक्षक नरेंद्र सिंह बिजारणिया ने कहा कि उन्हें अब तक झड़पों के पीछे कोई मास्टरमाइंड होने का कोई संकेत नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि इसमें असामाजिक तत्वों का हाथ है। उनकी पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जाँच चल रही है। जाँच की दिशा भी तय है पर अधिक बताने से जाँच प्रभावित होगी। साइबर सेल उन संदेशों को खंगाल रही कि भड़काऊ वीडियो तथा व्हाट्सप्प मैसेज कहाँ से डाले गए हैं।
गौरतलब है कि हिंदुओं की शोभायात्रा जुलूस पर मुस्लिम भीड़ द्वारा हमला किए जाने के बाद नूहं में दो होम गार्ड और एक मौलवी सहित छह लोगों की मौत हो गई है।
क्या आप हरियाणा में शिक्षक हैं? क्या आप ज्यादा पैसे कमाना चाहते हैं? क्या आप नूहं से बाहर के हैं? अगर हाँ, तो हरियाणा सरकार ने कैबिनेट की बैठक में शिक्षक स्थानांतरण नीति, 2023 को मंजूरी दे दी है। इसमें नूहं और मोरनी में तैनाती पाने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहन भत्ता यानी अधिक वेतन मिलेगा।
ये वैसी दो जगहें हैं, जहाँ लोग कम ही जाना चाहते हैं। नूहं तो देश का सबसे पिछड़ा जिला है, ऐसे में कोई व्यक्ति गुरुग्राम न जाकर नूहं क्यों ही जाना चाहेगा? यही कारण है कि नूहं में तैनाती चाहने वाले शिक्षकों की संख्या बहुत कम है, जिसकी वजह से हरियाणा सरकार को ऐसी प्रोत्साहन नीति बनाने की जरूरत पड़ी है।
कैबिनेट बैठक में लिया गया फैसला
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि हरियाणा सरकार ने नूहं, मोरनी के साथ ही पलवल के हथीन ब्लॉक को भी इसमें शामिल किया है। इन क्षेत्रों में शिक्षकों की भारी कमीं है, क्योंकि शिक्षक इतने पिछड़े इलाकों में जाना ही नहीं चाहते।
इस बात का फैसला शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक में लिया गया, जिसमें स्थाई शिक्षकों के अलावा गेस्ट टीचर्स को भी ज्यादा पैसा मिलेगा। इसमें 10 प्रतिशत अतिरिक्त वेतन, डेली अलाउंस के रूप में अलग से दिया जाएगा। गेस्ट टीचर्स को 10 हजार रुपए प्रति माह मिलेंगे, बशर्ते आप कुछ शर्तों को पूरा करते हों।
हरियाणा सरकार ने रखी हैं कुछ शर्तें
हरियाणा के शिक्षकों के लिए पहले तो इन क्षेत्रों में जाने की हामी भरनी होगी। दूसरा कि वो इन जिलों के रहने वाले न हों और न ही उन्होंने शिक्षा इन क्षेत्रों में ली हों। शर्त के मुताबिक, वही लोग इस स्कीम का फायदा पाएँगे, जो पंचकुला के न हों (मोरनी क्षेत्र के लिए), पलवल और नूहं क्षेत्र के लिए वो इन दोनों जिलों के अलावा फरीदाबाद और गुरुग्राम से भी न हों। न ही 10वीं, 12वीं की शिक्षा इन जिलों से पाई हो।
बता दें कि शिक्षक स्थानांतरण नीति 2016 में लागू की गई थी, जिसमें 2017 में संसोधन भी किया गया था, लेकिन अब उसमें फिर से नई बातों को जोड़ा गया है।
नूहं हरियाणा का ही नहीं, बल्कि पूरे देश के सबसे पिछड़े जिले की पहचान रखता है। पलवल का हथीन ब्लॉक नूहं से सटा है, तो मोरनी पहाड़ी इलाका है। नूहं में करीब 79 प्रतिशत से अधिक आबादी मुस्लिम है। शिक्षा के मामले में लिटरेसी रेट 55% के आसपास है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर भी कुछ समस्याएँ आती हैं, यही वजह है कि बाहर से नूहं में आकर कोई रहना नहीं चाहता।
हिंसा की आग में जल रहा है नूहं
बता दें कि 31 जुलाई को हिंदुओं की धार्मिक यात्रा पर हमले के बाद से नूहं में तनाव का माहौल है। ये धार्मिक तनाव आसपास के कई जिलों में फैल गए थे, जिसमें आधा दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है, तो दर्जनों लोग घायल हैं। ऑप इंडिया इन मुद्दे पर विस्तार से कवरेज कर रहा है, उसे पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
स्कूल में बुरका/हिजाब वाला मामला अब त्रिपुरा भी पहुँच गया। सेपाहिजाला जिले के एक सरकारी स्कूल में इसको लेकर बवाल हुआ। मुस्लिम लड़कियों के हिजाब पहनने का समर्थन किया 10वीं कक्षा के एक छात्र ने। प्रधानाध्यापक के कमरे में तोड़फोड़ भी की। प्रतिक्रिया में भीड़ ने उस स्कूली छात्र को जम कर मारा।
शुक्रवार (4 अगस्त 2023) को मारपीट के इस मामले में बुरका/हिजाब का हिंसक समर्थन करने वाला 10वीं का छात्र घायल हो गया। यह घटना कोरोइमुरा हायर सेकेंडरी स्कूल में मुस्लिम समुदाय की लड़कियों द्वारा सिर पर स्कार्फ पहनने को लेकर हिंदू और मुस्लिम छात्रों के बीच हुई बहस के बाद झड़प के कारण हुई।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, स्कूल में पढ़ने वाले किशोर लड़के ने अपने प्रधानाध्यापक के कमरे में तोड़फोड़ की थी क्योंकि हेडमास्टर ने स्कूल में मुस्लिम लड़कियों को हिजाब के बजाय निर्धारित स्कूल ड्रेस पहनने के लिए कहा था। कहा जा रहा है कि इस विवाद के बाद, स्कूल के बाहर भीड़ जमा हो गई। हिजाब का समर्थन करने वाला छात्र जब स्कूल के बाहर आया तो उसे गुस्साई भीड़ ने कूट दिया।
स्कूल के प्रधानाध्यापक प्रियतोष नंदी ने इस मामले को लेकर बताया:
“मैंने हाल ही में स्कूल के अध्यापकों के साथ एक बैठक के बाद, सभी छात्रों को स्कूल ड्रेस पहन कर स्कूल आने का निर्देश दिया था। इसके बाद मुस्लिम समुदाय की छात्राओं ने कहा कि वे इस निर्देश का पालन नहीं कर सकतीं क्योंकि हिजाब पहनना एक मज़हबी मान्यता है।”
प्रधानाध्यापक ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी हाल ही में उनसे मुलाकात की थी। उन्होंने आग्रह किया था कि वे छात्रों के धर्म की परवाह किए बिना निर्धारित स्कूल ड्रेस में कक्षाओं में आने के लिए आदेश दें। इसके बाद जब मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब पहनकर अपनी कक्षाओं में गईं तो हिंदू छात्रों का एक समूह विरोध में भगवा रंग के कुर्ते में स्कूल पहुँच गया।
प्रधानाध्यापक प्रियतोष नंदी ने बताया कि उन्होंने भगवा कुर्ता पहनने वाले छात्रों से स्कूल यूनिफॉर्म के नियम का पालन करने को कहा था, लेकिन उन छात्रों ने कहा कि वे स्कूल ड्रेस तभी पहनेंगे जब मुस्लिम लड़कियाँ भी स्कूल के पोशाक में संस्थान में आएँगी।
सेपाहिजाला जिला पुलिस ने इस मामले को लेकर स्पष्ट किया कि यह घटना किसी भी तरह से किसी भी धार्मिक-सांप्रदायिक मुद्दे से संबंधित नहीं थी। पुलिस ने बताया कि इस संबंध में एक विशिष्ट मामला दर्ज किया गया है और जाँच जारी है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि हालाँकि छात्र पर हमले को लेकर इलाके में तनाव बरकरार है लेकिन स्थिति नियंत्रण में है। पुलिस ने जनता से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाह से बचने का आग्रह किया है।
इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस, कानून एवं व्यवस्था के सहायक महानिरीक्षक (एआईजी) ज्योतिषमान दास ने कहा, “घायल छात्र को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया। छात्र बिशालगढ़ पुलिस स्टेशन के अंतर्गत प्रभुरामपुर का रहने वाला बताया गया है।”
गौरतलब है कि त्रिपुरा की घटना पिछले साल कर्नाटक में उभरे ऐसे ही विवाद की याद दिलाती है। तब एक कॉलेज ने कक्षाओं के अंदर हिजाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस घटना के बाद मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित देश के अन्य हिस्सों में भी हिजाब को लेकर विवाद खड़े किए गए थे।
ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान 31 जुलाई 2023 को कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ ने हिंदुओं पर चौतरफा हमला कर दिया था। सड़क से लेकर मंदिर तक में उन पर फायरिंग की गई। अस्पताल में मरीजों एवं स्वास्थ्यकर्मियों से उनका धर्म पूछकर मारा-पीटा गया है। इस हिंसा में अब तक 7 लोगों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों घायल हैं।
हिंसा की जाँच कर रही SIT ने भी प्रथम दृष्ट्या इसे एक सुनियोजित षडयंत्र माना है। जाहिर सी बात है कि बिना नेतृत्व के एक समुदाय के हजारों व्यक्ति सड़कों पर रणनीति के तहत उतर कर हमला नहीं कर सकते। उनके पास अत्याधुनिक हथियार थे। ये हथियार भी उन्हें आसानी ने नहीं मिले होंगे। इन सब शंकाओं के तार जुड़ते नजर आ रहे हैं। इसके पीछे एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का नाम सामने आ रहा है।
इस राजनेता का नाम एक FIR में आया है। यह FIR बजरंग दल के कार्यकर्ता प्रदीप कुमार की हत्या से संबंधित है। प्रदीप कुमार नल्हड मंदिर पर हुए हमले में बच गए थे और पुलिस टीम अन्य हजारों लोगों के साथ उन्हें भी बचाकर नूहं के पुलिस लाइन तक लाई थी। हालाँकि, मंगलवार (1 अगस्त 2023) को नूहं पुलिस लाइन से जब वे अपने घर जा रहे थे, उसी दौरान दंगाई भीड़ ने घेर कर उन्हें मार डाला था।
प्रदीप कुमार के अलावा, उन्मादी भीड़ ने शक्ति सैनी और अभिषेक चौहान उर्फ अभिषेक राजपूत और होमगार्ड के दो जवानों की भी हत्या कर दी थी। इसमें अभिषेक चौहान अपने साथ आए महिलाओं और बच्चों को बचाते हुए मारे गए थे। दंगाइयों ने पहले उन्हें गोली मारी थी। उसके बाद उनका गला काटकर सिर को पत्थर से कुचल दिया था।
ऑपइंडिया के पास प्रदीप की हत्या के मामले में दर्ज एफआईआर उपलब्ध है। लगभग 200 से अधिक लोगों की हत्यारी भीड़ द्वारा उनकी हत्या के एक दिन बाद यानी, 2 अगस्त 2023 को एफआईआर दर्ज की गई थी। प्राथमिकी बजरंग दल के एक अन्य कार्यकर्ता पवन कुमार ने दर्ज कराई है। पवन मृतक प्रदीप के साथ थे।
ऑपइंडिया द्वारा हासिल की गई एफआईआर की कॉपी
पवन कुमार ने अपनी शिकायत में जावेद अहमद नामक व्यक्ति को मुख्य आरोपित बताया है। उन्होंने कहा कि भीड़ ने जावेद अहमद के आदेश पर प्रदीप कुमार और उनके साथ आए बजरंग दल के अन्य सदस्यों पर जानलेवा हमला किया था। गौरतलब है कि आरोपी जावेद अहमद आम आदमी पार्टी का नेता है।
शिकायतकर्ता पवन कुमार ने एफआईआर में कहा है कि 31 जुलाई की रात लगभग 10.30 बजे प्रदीप कुमार और बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं के साथ वह स्विफ्ट डिजायर कार से घर लौट रहे थे। इसी दौरान इस्लामवादियों की भीड़ ने उनकी कार पर जानलेवा हमला कर दिया। उनकी कार के पीछे बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं की दो कारें और एक पुलिस वैन साथ चल रही थी।
उन्होंने आगे कहा कि जब उनकी कार सोहना रोड पर पहुँची तो पुलिस ने बजरंग दल के सदस्यों को खुद ही आगे बढ़ने के लिए कहा। पुलिस ने उन्हें आश्वासन दिया कि सोहना क्षेत्र में तैनात पुलिस अधिकारियों ने सभी आवश्यक सुरक्षा जाँच कर ली है और रास्ता साफ है।
FIR के अनुसार, उन्होंने पुलिस की सुरक्षा के बिना कुछ ही दूरी तय की थी कि एक अपरिचित स्कॉर्पियो कार ने तेज रफ्तार से उनका पीछा करना शुरू कर दिया। उनकी कार कुंडली-मानेसर-पलवल एक्सप्रेसवे (KMP एक्सप्रेसवे) पर केवल एक या दो किलोमीटर ही चली होगी, तभी अचानक स्कॉर्पियो कार ने उन्हें रोक लिया।
पवन कुमार ने आगे कहा कि कुछ ही सेकंड में लगभग 150 इस्लामवादियों की भीड़ वहाँ आ गई और उनकी कार पर पथराव शुरू कर दिया। इसके कारण कार पर से उनका नियंत्रण हट गया और कार डिवाइडर से टकरा गई। जब कार रुकी तो उन्हें कार से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा। भीड़ का नेतृत्व कर रहा जावेद अहमद चिल्लाया, “उन सभी को मार डालो, जो होगा मैं संभाल लूँगा।”
पवन कुमार ने एफआईआर में कहा, “जावेद अहमद की शह पर लोहे की रॉड, पत्थर, बंदूकों और अन्य हथियारों से लैस 20-25 इस्लामवादी हमारी ओर बढ़े और हमें पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान एक व्यक्ति ने प्रदीप के सिर पर रॉड मार दी और वह नीचे गिर गए। वहाँ पर गोलियाँ चलने लगी। तभी पुलिस की गाड़ी वहाँ आ गई।”
शिकायतकर्ता ने एफआईआर में आगे कहा कि पुलिस ने उन्हें भीड़ से बचाया और अस्पताल लेकर जाने लगी तो उन्होंने देखा कि देखा कि इस्लामवादी प्रदीप कुमार को लगातार लोहे की छड़ों और लाठियों से पीट रहे थे। बाद में पुलिस ने प्रदीप कुमार को बचाया और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले गई, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया।
कौन है जावेद अहमद?
एफआईआर में शिकायतकर्ता ने कई बार उल्लेख किया कि बजरंग दल कार्यकर्ता प्रदीप कुमार पर हमले और हत्या के पीछे मुख्य आरोपित जावेद अहमद नामक व्यक्ति है। चूँकि एफआईआर में केवल आरोपित के नाम का उल्लेख किया गया था, इसलिए ऑपइंडिया ने उसके बारे में कुछ और जानकारी प्राप्त करने के प्रयास में शिकायतकर्ता पवन कुमार से बात की।
पवन कुमार ने ऑपइंडिया को बताया कि जावेद अहमद कोई और नहीं, बल्कि हरियाणा के सोहना निर्वाचन क्षेत्र से आम आदमी पार्टी का नेता है। उन्होंने कहा कि जावेद ने ही भीड़ को जुटाया था और प्रदीप कुमार एवं बजरंग दल के अन्य कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला करने के लिए उकसाया था।
पवन कुमार ने हमें आगे बताया, “इस्लामी भीड़ ने उसके उकसाने पर ‘अल्लाह हू अकबर’ और ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए हम पर और वहाँ मौजूद अन्य निहत्थे हिंदुओं पर हमला कर दिया।”
जब हमने पवन कुमार से पूछा कि क्या उन्हें यकीन है कि AAP नेता इस्लामवादियों का नेतृत्व कर रहा था तो उन्होंने हाँ में जवाब दिया। उन्होंने दावा किया कि वह जावेद को अच्छी तरह पहचानते हैं, क्योंकि उन्होंने अक्सर जावेद और उसके परिवार के सदस्यों को हरियाणा के सोहना के इलाके में घूमते देखा है।
पवन कुमार से बात करने के बाद हमने आरोपित जावेद अहमद के बारे में कुछ और जानकारी जुटाने के लिए खोजबीन शुरू की। खोजबीन के दौरान ऑपइंडिया को 2 अगस्त 2022 को आम आदमी पार्टी, हरियाणा इकाई द्वारा जारी एक प्रेस नोट मिला, जिसमें जावेद अहमद को AAP के अल्पसंख्यक सेल के राज्य समन्वयक के रूप में नियुक्त करने की घोषणा की गई थी।
टोपी में जावेद अहमद
जावेद अहमद पहले सोहना विधानसभा से बसपा का उम्मीदवार था। हालाँकि, 14 मार्च 2022 को दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में वह AAP में शामिल हुआ था।
आम आदमी पार्टी द्वारा 2022 में पंजाब विधानसभा का चुनाव जीतने के बाद हरियाणा के कई पूर्व मंत्री, विधायक और उनके सहयोगी AAP पार्टी में शामिल हुए थे। जावेद अहमद भी इनमें से एक था। वह बहुजन समाज पार्टी छोड़कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गया था।
हरियाणा से कई नेता आम आदमी पार्टी में हुए शामिल।
समालखा से पूर्व निर्दलीय विधायक रविंद्र मछरौली आम आदमी पार्टी में हुए शामिल।
सोहना से BSP से चुनाव लड़ 40,000 वोट लेने वाले जावेद अहमद आम आदमी पार्टी में हुए शामिल। pic.twitter.com/CcRKmbJNNy
साल 2020 में हरियाणा के बल्लभगढ़ में निकिता तोमर की दिन दहाड़े हत्या कर दी गई थी। निकिता की दिन-दहाड़े हत्या करने वाला तौसीफ उससे निकाह करना चाहता था। जब निकिता इसके लिए तैयार नहीं हुई तो उसने अपने साथी रेहान के साथ मिलकर निकिता की बीच सड़क पर गोली मारकर हत्या कर दी थी। तौसीफ इसी जावेद अहमद का भतीजा है।
इस हत्याकांड में जावेद अहमद से भी जाँच एजेंसियों ने पूछताछ की थी। पुलिस ने हत्याकांड के मुख्य आरोपित तौसीफ के अब्बू जाकिर हुसैन, अम्मी असमीना और चाचा जावेद अहमद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कराया था। हालाँकि, कोर्ट ने जावेद को अग्रिम जमानत दे दी थी।
राजनीतिक रूप से रसूखदार है जावेद का परिवार
जावेद अहमद का परिवार काफी रसूखदार है। जावेद का चाचा कबीर अहमद विधायक रह चुके हैं। वही, उसका चचेरा भतीजा आफताब अहमद मेवात जिले की नूहं सीट से कॉन्ग्रेस विधायक है। इतना ही नहीं, आफताब अहमद के अब्बू और जावेद अहमद का भाई खुर्शीद अहमद हरियाणा के पूर्व मंत्री रह चुके हैं।
जावेद अहमद ने पिछली बार सोहना विधानसभा से मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए गया था। हारने के बाद भी इस परिवार का रूतबा कम नहीं है और अक्सर विवादों में रहता है।
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के रहने वाले प्रदीप कुमार गुरुग्राम में बजरंग दल इकाई के पदाधिकारी थे। अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला होने के कारण वह छोटे-मोटे काम करते थे। बजरंग दल की गुरुग्राम इकाई से जुड़े लोगों ने कहा कि पुलिस शव परीक्षण और अन्य कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने के बाद मृतक के शव को सीधे उसके पैतृक गाँव बागपत भेजेगी।
31 जुलाई 2023 को जब हरियाणा के नूहं में हिंदु पर हमला हुआ तो ऑपइंडिया और कई अन्य प्लेटफार्मों पर खुलासा किया गया कि छतों से उन पर पथराव किया गया था। कट्टरपंथी मुस्लिम लड़के और पुरुष पहाड़ी इलाके में चले गए थे और वहीं से मंदिर हिंदुओं पर गोलीबारी कर रहे थे। इनमें 14 साल के बच्चे तक शामिल थे।
पहाड़ की चोटियों से उन पर एसिड की बोतलें फेंकी गईं और कई महिलाओं को परेशान किया गया। हिंसा के दौरान, कई महिलाओं और बच्चों (जिनकी संख्या लगभग 3000 थी) ने मंदिर में शरण ली थी और पुलिस ने उन्हें कुछ घंटों बाद ही बचा लिया था। हमले के दौरान मंदिर परिसर के आसपास मौजूद लोगों पर एके-47 से फायरिंग की गई थीं।
इस्लामी भीड़ की हिंसा जितनी ही सामान्य है उस पर पर्दा डालने के लिए चलाया जाने वाला ‘मुस्लिम विक्टिम’ नैरेटिव। हरियाणा के मेवात के नूहं में हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर हमले के बाद भी ऐसा देखने को मिला। स्वयंभू बुद्धिजीवियों की यह जमात इस्लामी कट्टरपंथियों और आतंकियों की हिंसा को ही नहीं छिपाता, बल्कि वह पिच भी तैयार करता है ताकि भविष्य में ऐसी कोई घटना होने पर उनका बचाव किया जा सके।
2024 के आम चुनाव अभी कुछ महीने दूर हैं। लेकिन हिंदुओं और मोदी से घृणा करने वाली इस जमात की कोशिशें शुरू हो गईं हैं। इसी कड़ी में अब यह कोशिश हो रही है कि यदि अयोध्या के राम मंदिर को कभी आतंकी निशाना बनाए तब भी उनको क्लीनचिट दी जा सके। इसकी शुरुआत पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने की और अब इस थ्योरी को वकील प्रशांत भूषण ने आगे बढ़ाया है।
Prashant Bhushan says he has credible information that there will be a terror attack on Ayodhya Ram Mandir.
NIA, IB should ask @pbhushan1 more details about the plan.
Same claim was made by Satyapal Malik. How are these people so sure?
जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक की ‘भविष्यवाणी’ के बाद सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण ने भी उस साजिश के सिद्धांत को दोहराया है जिसके अनुसार अयोध्या के राम मंदिर पर हमला होगा। इस थ्योरी को आगे बढ़ाते हुए ऐसा प्रोपेगेंडा गढ़ने की कोशिश हो रही है कि 2024 का लोकसभा चुनाव जीतने के लिए लहर पैदा करने के मकसद से मोदी सरकार खुद इस तरह के हमले करवाएगी।
इस सप्ताह की शुरुआत में सत्यपाल मलिक ने इस ‘साजिश’ का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार लोकसभा चुनाव से पहले राम मंदिर पर हमला करा सकती है। पूर्व राज्यपाल मलिक ने कहा, “मुझे कई आशंकाएँ हैं। वे (2024 आम) चुनाव से पहले कुछ न कुछ करेंगे। ये उनकी फितरत है। उन्होंने गुजरात और देश में ऐसा किया है। वे राम मंदिर पर ग्रेनेड फेंक सकते हैं। वे बीजेपी के किसी बड़े नेता की हत्या करा सकते हैं। पाकिस्तान के साथ सुनियोजित संघर्ष भी हो सकता है।”
अब सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण भी इस ‘साजिश’ में कूद पड़े हैं। उनका कहना है कि मंदिर पर हमला होगा और पीओके में बालाकोट 2.0 होगा। एक वायरल वीडियो में प्रशांत भूषण को कहते हुए सुना जा सकता है, “मेरे पास जो सूचना आ रही है, और सूचना एक सोर्स से नहीं कई सोर्स से, वह भी विश्वसनीय सोर्स से आ रही है कि पुलवामा 2.0 और बालाकोट 2.0 की तैयारी चल रही है। जो मुझे सूचना मिली है उसकी न मैं पुष्टि कर सकता हूँ और न ये बता सकता हूँ कि यह जानकारी किन लोगों से मिली है, लेकिन इसके अनुसार पुलवामा 2.0 जो होगा वह अयोध्या मंदिर पर कोई अटैक होगा, जो कि जैश-ए-मोहम्मद या अलकायदा द्वारा होगा। या करवाया जाएगा। बालाकोट 2.0 जो होगा वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में ग्राउंड मूवमेंट होगा। अबकी बार सिर्फ बमबारी नहीं। जो सुनने में आ रहा है, विश्वस्त सूत्रों से सुनने में आ रहा है इस बार थोड़े से सैनिक भी भेजे जाएँगे। इसलिए नहीं भेजे जाएँगे कि हम पीओके पर कब्जा कर लें। लेकिन ये दिखाने के लिए कि जैसे बालाकोट में दिखाने की कोशिश हमने पाकिस्तान के ऊपर बम गिरा दिए। भले वे बम कहाँ गिरे, उससे किसी को कुछ हुआ कि नहीं, यह किसी को कुछ पता नहीं।”
सत्यपाल मलिक और प्रशांत भूषण ने अपनी इन साजिश के सिद्धांतों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया है। “विश्वसनीय जानकारी” और “विश्वसनीय स्रोत” जैसे चालाकी भरे शब्दों में लपेट कर इसे परोस दिया। लेकिन इनके बयानों के निहितार्थ बेहद गंभीर हैं। एक तरफ उन्होंने पुलवामा हमला करने वाले आतंकियों को क्लीनचिट दे दी है, दूसरी तरफ भारतीय बालाकोट की विश्वसनीयता पर सवाल कर भारतीय सेना के पराक्रम पर सवाल उठाया है। साथ ही आतंकियों को यह मौका दिया है कि भविष्य में इस तरह का कोई हमला होने के बाद इसे सरकार की ही साजिश के तौर पर प्रचारित किया जा सके। यह एक तरह से आतंकियों को अयोध्या के राम मंदिर पर हमले के लिए प्रोत्साहित करने जैसा है।
किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध, किसी भी व्यक्ति की अपनी पसंद हो सकती है। राजनीतिक दलों पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि वे चुनाव जीतने की कोशिश में कुछ भी कर सकते हैं। लेकिन अपनी राजनीतिक कुंठा की वजह से इस तरह की साजिशों को हवा देना राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरे पैदा करता है। राजनीतिक विरोध के इस चलन का उपचार उसी सख्ती से होना चाहिए जिस सख्ती से 2014 के बाद से आतंकवाद का उपचार किया जा रहा है।
ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान हरियाणा के नूहं में 31 जुलाई 2023 को कट्टरपंथी मुस्लिमों की भीड़ द्वारा हिंदुओं पर किए गए हमले का एक नया मामला सामने आया है। दंगाइयों ने नल्हड़ महादेव मंदिर में शरण लिए हिंदुओं पर फायरिंग तो की ही थी, अलवर अस्पताल में पहुँचकर वहाँ के स्वास्थ्यकर्मियों और मरीजों से धर्म पूछ-पूछकर उन्हें मारा-पीटा।
दरअसल, पथराव के दौरान विरोध करने वाले एक युवक का भीड़ ने पीछा किया और खेड़ला चौक के पास स्थित अलवर अस्पताल में जमकर उत्पात मचाया। इस दौरान उन्मादी भीड़ के हाथों में लाठी-डंडे और अन्य हथियार थे। भीड़ ने युवक को जमकर पीटा। युवक जब भागने में कामयाब रहा तो उसकी कार में तोड़फोड़ करके आग के हवाले कर दी गई।
This is shocking!
In Nuh, Muslim Mob entered in a hospital and separated Hindu and Muslim patients and workers. They beat doctor and his 3-year-old daughter. They also beat a pregnant lady. pic.twitter.com/eKgf2Z7FMt
इस दौरान हमलावरों ने उसकी कार के बगल में खड़ी एक डॉक्टर की कार को भी आग के हवाले कर दिया। इसके साथ ही युवक की कार में रखे तीन लाख की रकम लूट ली। अस्पताल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिए, ताकी उनकी पहचान ना हो सके। दंगाई अस्पताल की छत पर चढ़ गए और सड़क पर आए पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाने लगे।
वहीं, पचास से अधिक दंगाई अस्पताल के अंदर गए और धर्म पूछकर मरीजों, स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों के साथ मारपीट की। आतंकी संगठन ISIS की तर्ज पर कट्टरपंथियों ने अस्पताल के मुस्लिम कर्मचारियों को एक तरफ कर दिया और बाकी हिंदू कर्मचारियों, डॉक्टरों और मरीजों के साथ मारपीट की।
कट्टरपंथियों ने एक डॉक्टर की तीन साल की बच्ची को भी डंडे से पीटा। दंगाइयों ने अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला के हाथ-पैर पर डंडे से कई वार किए। महिला ने बचने का प्रयास किया तो उसे धक्का देकर गिरा दिया। दंगाई भीड़ के उत्पात के बाद अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टर इतने डरे हुए हैं कि कोई कुछ भी नहीं बोल रहा है।
वहीं, अस्पताल के बाहर मचाए गए उत्पात का दृश्य बाहर लगे कैमरे में कैद हो गए हैं। पुलिस ने फुटेज के आधार पर ही दो आरोपितों की पहचान की है। इनमें एक का नाम नासिर तथा दूसरे का नाम अंजुम है। दोनों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के जोगी नवादा इलाके में शाहनूरी मस्जिद के पास मुस्लिमों ने काँवड़ियों के एक जत्थे पर पथराव किया। 23 जुलाई 2023 को घटी इस घटना में करीब एक दर्जन काँवड़िया और कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। लेकिन, आदत से मजबूर ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद ज़ुबैर ने मुस्लिम भीड़ की पत्थरबाजी पर पर्दा डालने के लिए घटना का एक क्रॉप्ड वीडियो साझा किया ताकि यह भ्रम फैलाया जा सके कि मुस्लिम भीड़ ने काँवड़ियों पर हमला नहीं किया, बल्कि हिन्दू ही पत्थरबाजी कर रहे थे।
संदिग्ध ‘फैक्ट चेकर’ की इस कोशिश की लोकप्रिय ट्विटर यूजर्स अंकुर सिंह ने पूरा वीडियो साझा कर हवा निकाल दी। जिसमें स्पष्ट रूप से दिखता है कि पहले मुस्लिम भीड़ ने पथराव किया था और इसके बाद काँवड़ियों ने आत्मरक्षा में पथराव कर उन्हें जवाब दिया। अब इस मामले में दर्ज की एफआईआर भी जुबैर के चेहरे पर एक तमाचे की तरह है। इसमें भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि काँवड़ियों पर हमले की शुरुआत मुस्लिम भीड़ ने की थी।
मीडिया पोर्टल ऑर्गेनाइजर ने 2 अगस्त, 2023 को इस मामले में दर्ज एफआईआर की एक कॉपी शेयर की। इसमें स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि बरेली के जोगी नवादा इलाके में शाहनूरी मस्जिद के पास जमा मुस्लिमों ने ही पहले बिना किसी उकसावे के हमला किया। यह हमला तब किया गया जब शांतिपूर्ण तरीके से काँवड़ यात्रा मस्जिद के पास से गुजर रही थी।
आर्गेनाइजर द्वारा साझा की गई एफआईआर 24 जुलाई को बारादरी पुलिस स्टेशन में सब-इंस्पेक्टर अमित कुमार द्वारा दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में कुमार ने कहा है कि वे अपनी टीम के साथ शाहनूरी मस्जिद के आसपास गश्त कर रहे थे। यात्रा का तय रूट गोसियन गौटिया से शाहनूरी मस्जिद, वंकंडीनाथ मंदिर से सुरेश शर्मा नगर, सैटेलाइट चौराहे से कालीबाड़ी, चौपाल, लाल फाटक से होते हुए अंत में कछला घाट तक था।
एफआईआर में कहा गया है कि गश्ती दल ने 23 जुलाई की दोपहर नमाज के बाद पहले नमाजियों को मस्जिद से बाहर निकाला और फिर उसके बाद काँवड़ियों को मस्जिद की तरफ से जुलूस ले जाने की अनुमति दी। लेकिन जैसे ही डीजे के साथ जुलूस शाहनूरी मस्जिद पर पहुँचा भीड़ इकट्ठा हो गई। देखते ही देखते काँवड़ियों पर चारो तरफ से पथराव होने लगा।
इसके अलावा बरेली के पुलिस अधीक्षक (एसपी) शहर राहुल भाटी ने भी कहा कि काँवड़िए कछला घाट से जल लेने जा रहे थे, तभी शाहनूरी मस्जिद और आसपास के घरों से काँवड़ यात्रा पर पथराव किया गया। इसके अलावा, उस दिन के वीडियो भी वायरल हुए जिनमें मुस्लिम भीड़ को काँवड़ियों पर पथराव करते देखा जा सकता था। लेकिन, ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक ने बड़ी चतुराई से मुस्लिमों का अपराध को छुपाने के लिए इसे क्रॉप कर शेयर किया।
जुबैर के क्रॉप्ड वीडियो के बाद ट्विटर यूजर्स अंकुर सिंह ने एक पूरा वीडियो साझा किया जो मूल रूप से सुदर्शन न्यूज़ द्वारा शेयर किया गया था। वीडियो में मुस्लिम भीड़ को काँवड़ियों पर पथराव करते देखा जा सकता है। इसे साझा करते हुए अंकुर सिंह ने लिखा, “इस वीडियो के शुरुआत का हिस्सा क्यों काट दिया मोहम्मद जुबैर। क्योंकि उसमें साफ दिख रहा था कि पहले पत्थर कौन चला रहा था? जैसे ही जवाब में हिंदुओं ने पत्थर चलाया, जुबैर वह हिस्सा काट कर प्रोपेगेंडा चलाने लगा। काँवड़ियों पर थूक और पत्थर फेंकने वालों को जुबैर बचाने आ जाता इसीलिए ऐसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। आग इस जैसे लोग लगा रहे।”
इसी वीडियो के शुरुआत का हिस्सा क्यों काट दिया @zoo_bear ?
क्योंकि उसमें साफ दिख रहा था कि पहले पत्थर कौन चला रहा था? जैसे ही जवाब में हिंदुओं में पत्थर चलाया, जुबैर वह हिस्सा काट कर प्रोपेगंडा चलाने लगा।
दरअसल, ज़ुबैर ने वीडियो के उस शुरुआती हिस्से को काट दिया था, जिसमें मुस्लिम भीड़ को काँवड़ियों पर पथराव करते हुए साफ़ देखा जा सकता था ताकि यह सुनिश्चित न हो सके कि असल में मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं पर हमला किया था। उस हिस्से को काटकर और मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई हिंसा पर लीपापोती करने के लिए फैक्ट चेक की आड़ में उन तथ्यों को छुपाने का प्रयास किया जिससे मुस्लिम भीड़ बेनकाब हो रही थी। यहाँ यह स्पष्ट है कि मुस्लिम भीड़ ने ही पथराव शुरू किया और बाद में काँवड़ियों द्वारा किया गया पथराव आत्मरक्षा का प्रयास था।
बरेली में काँवड़ियों पर पथराव
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के बरेली शहर के जोगी नवादा इलाके में शाहनूरी मस्जिद के पास रविवार (23 जुलाई) की दोपहर को मुस्लिमों की भीड़ ने काँवड़ियों पर पथराव किया था। जानकारी के मुताबिक, उस समय काँवड़िए गंगा नदी से पवित्र जल लाने के लिए बदायूँ जा रहे थे। काँवड़ियों को पास के वंकंडीनाथ मंदिर में जलाभिषेक करना था। लेकिन रास्ते में ही उन्हें मुस्लिम भीड़ की पत्थरबाजी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस हमले में पूर्व पार्षद उस्मान अली और उसके समर्थक शामिल थे।
बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के जस्टिस राहुल बी देव ने भरी अदालत में इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कोर्ट में मौजूद सभी लोगों से माफी भी माँगी और इस्तीफे का ऐलान कर दिया। जस्टिस राहुल बी देव साल 2022 में उस समय चर्चा में आ गए थे, जब उन्होंने जीएन साईबाबा को न सिर्फ रिहा करने का आदेश दिया था, बल्कि उनके खिलाफ केस को ही खारिज करते हुए आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया था। अब उन्होंने भरी कोर्ट में मौजूद वकीलों व अन्य स्टाफ को संबोधित करते हुए कहा कि अगर उनकी वजह से किसी को ठेस पहुँची हो, तो वो माफी चाहते हैं। क्योंकि अब वो ये पद छोड़ रहे हैं और फिर वो कोर्ट से चले गए।
जनसत्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस राहुल बी देव ने इस्तीफा देते हुए कहा कि उनके मन में किसी के प्रति कोई गुस्सा नहीं है। किसी तरह का कोई मलाल लेकर वो नहीं जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर वो किसी को भी कभी ठेस पहुंचाए हों, तो उसके लिए वो क्षमाप्रार्थी हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था फैसला, लगाई थी फटकार
राहुल बी देव साल 2017 से बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच के जज हैं। वो साल 2016 में महाराष्ट्र सरकार के महाधिवक्ता रहे थे। लेकिन शहरी नक्सली बी एन साईबाबा केस में उन्होंने सभी सबूतों, गवाहों की अनदेखी करते हुए उनके खिलाफ केस को ही खारिज कर दिया था और आजीवन कारावास की सजा को रद्द करके उनकी रिहाई के आदेश दे दिए थे।
जज राहुल बी देव के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी, तो सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ उनके फैसले को पूरी तरह से पलट दिया, बल्कि नसीहत भी दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने अभूतपूर्व फैसला करते हुए उनके दिए निर्णय को ही रद्द कर दिया था।
जस्टिस राहुल बी देव का कार्यकाल अभी काफी बाकी था। वो 4 दिसंबर 2025 को रिटायर होते, लेकिन अभूतपूर्व कदम उठाते हुए उन्होंने कोर्ट में ही अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। आज तक के इतिहास में शायद किसी जज ने कोर्ट में ही इस्तीफा नहीं दिया।