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मुहर्रम के दिन मंदिर पर हुआ हमला, कार्रवाई के लिए अनशन पर बैठे BJP नेता को घसीटकर ले गई बिहार पुलिस: पत्रकारों को भी पीटा

बिहार के भागलपुर (Bhagalpur, Bihar)) जिले में माँ काली के मंदिर पर पत्थरबाजी को लेकर तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस मामले में कार्रवाई को लेकर अनशन कर रहे भाजपा नेता को पुलिस घसीटकर ले गई। वहीं, वीडियो बना रहे पत्रकारों एवं लोगों पर पुलिस ने लाठियाँ बरसाईं।

दरअसल, भागलपुर में मुहर्रम के दिन किए गए माँ काली के मंदिर पर हमला कर दिया था। हमले में मंदिर के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए। इसको लेकर इलाके में तनाव फैल गया था। तब से लोगों में उबाल है। भाजपा नेता रोहित कुमार ने पथराव का आरोप मुहर्रम के ताजिया जुलूस में शामिल लोगों पर लगाया था।

बिहार पुलिस की इस कार्रवाई की भाजपा ने निंदा की है। बिहार भाजपा ने ट्वीट करके लिखा, “मुहर्रम पर माँ काली का मंदिर क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। भागलपुर के पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष रोहित कुमार जी ने आमरण अनशन कर कार्रवाई की माँग की।”

भाजपा ने अपने ट्विटर हैंडल पर आगे लिखा, “महागठबंधन की पुलिस से कार्रवाई की माँग करने पर उल्टे उनको ही कल देर रात लाठीचार्ज करके गिरफ्तारी कर लिया। महागठबंधन सरकार ने तुष्टिकरण की राजनीति में लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों को ध्वस्त कर दिया।”

गुरुवार की देर रात करीब 10.45 बजे दंगा नियंत्रण बल के साथ धरना स्थल शहर के कचहरी चौक पर इंस्पेक्टर एसके सुधांशु पहुँचे। उन्होंने मेडिकल जाँच की जरूरत बताकर उन्हें अपने साथ ले जाने लगी। जब उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है तो दंगा नियंत्रण बल के जवानों ने उन्हें घसीटते हुए वैन में डाल दिया।

उसके बाद वहाँ वीडियो बना रहे लोगों पर पुलिस ने अंधाधुन लाठियाँ बरसा दीं। इस घटना की रिपोर्टिंग कर रहे कुछ पत्रकारों को भी पुलिस ने पीट दिया। जोगसर थाने ले जाने के कुछ देर बात रोहित को लोकनायक जयप्रकाश सदर अस्पताल में भर्ती करा दिया है। वहाँ सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए हैं।

मामला भागलपुर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के परबत्ती मोहल्ले का है। मोहल्ले में 30 जुलाई 2023 को ताजिया जुलूस निकाला गया। भाजपा नेता रोहित कुमार का आरोप है कि इस जुलूस में शामिल मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने रास्ते में पड़ने वाले काली मंदिर पर पत्थरबाजी की है। उन्होंने बताया कि मंदिर के मुख्य गेट को भी तोड़ने का प्रयास किया गया।

वहीं, काली महारानी पूजा समिति के कामेश्वर सिंह ने मीडिया से बात करते हुए मंदिर पर हमले के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मंदिर को क्षतिग्रस्त मुर्गियाचक की ताजिया जुलूस में शामिल लोगों ने किया है। इस घटना की जानकारी मिलते ही आस-पास के श्रद्धालु जमा हो गए।

आक्रोशित लोगों ने मंदिर पर हमले में शामिल आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। मंदिर के पास रहने वाले ग्रामीण सुरेश सहनी ने मीडिया को बताया कि मामले का संज्ञान जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को लेना चाहिए। वहीं, घटना की जानकारी मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुँचा।

इसके बाद से रोहित कुमार आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर अनशन कर रहे थे। हालाँकि, अभी तक आरोपितों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। भाजपा ने नीतीश कुमार और लालू यादव की पार्टी की गठबंधन वाली सरकार पर तुष्टिकरण का आरोप लगाया है।

गैंगरेप कर पिता के ही खेत में ही जला दी गई 14 साल की बच्ची, हड्‌डियाँ चुनने में लगे 6 घंटे: राजस्थान के भीलवाड़ा की घटना

राजस्थान के भीलवाड़ा में 14 साल की बच्ची को गैंगरेप के बाद कोयले की भट्टी में जलाने के मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। चार महिलाओं को भी हिरासत में लिया गया है। बच्ची के शरीर का कुछ हिस्सा मौके से करीब एक किलोमीटर दूर एक तालाब से भी मिला है। ऐसा आरोपितों ने अपना अपराध छिपाने और लोगों को गुमराह करने के लिए किया था।

यह घटना भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी थाना क्षेत्र के नरसिंहपुरा गाँव की है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार जिस खेत में लगी कोयले की भट्टी में बच्ची को जलाया गया, वह उसके पिता की ही है। आरोपितों ने चार महीने पहले ही भट्टी किराए पर लिया था। उनका बच्ची के घर भी आना-जाना था और परिवार के सदस्यों से भी वे परिचित थे। 3 अगस्त को एफएसएल की टीम को भट्टी की राख से बच्ची के शव के टुकड़े छाँटने में करीब 6 घंटे लगे।

इस मामले में पुलिस मुख्य आरोपित कान्हा, उसके भाई कालू, संजय और पप्पू उर्फ अमर को गिरफ्तार किया है। कथित तौर पर कान्हा और कालू ने बच्ची से रेप किया था। संजय और पप्पू ने लड़की के लाश को ठिकाने लगाने में उनकी मदद की थी। आरोपितों की माँ, पत्नी और बहन को भी हिरासत में लिया गया है।

गौरतलब है कि मृतक लड़की 3 अगस्त की सुबह अपनी माँ के साथ बकरियाँ चराने गई थी। दोपहर में माँ बकरी लेकर घर वापस आ गई। लेकिन लड़की घर नहीं पहुँची। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब लड़की घर नहीं पहुँची तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पाया। रात को कोयले की भट्टी जलती देख लोगों को अंदेशा हुआ और इसके बाद गैंगरेप कर हत्या किए जाने की बात सामने आई। पीड़ित पिता का कहना है कि यदि पुलिस ने समय से उनकी फरियाद सुन ली होती को उनकी बेटी आज जिंदा होती।

अगर किसी लड़की को ‘दिल’ दिया तो 5 साल तक जेल में पिसेंगे चक्की: सऊदी अरब और कुवैत में यह उत्पीड़न, बना कानून

दिल न लिया… दिल न दिया…, दिल दिया है जान भी देंगे… जैसे गानों की लाइनों से ‘ऐ दिल है मुश्किल’… वाला मामला हो गया है कुवैत और सऊदी अरब में। यहां वॉट्सऐप पर भी ‘दिल’ लेना-देना हो गया और इसकी रिपोर्ट कर दी गई तो आप सीधे पहुँच जाएँगे जेल। जी हाँ, सऊदी अरब के बाद अब कुवैत ने भी वॉट्सऐप पर ‘दिल का इमोजी भेजने’ को गैर-कानूनी घोषित कर दिया है। तो अगर किसी लड़की को आपने ‘दिल’ दिया और उसकी शिकायत उसने पुलिस में कर दी तो फिर आपको न सिर्फ जुर्माना भरना पड़ेगा, बल्कि जेल की हवा भी खानी पड़ेगी।

गल्फ न्यूज की रिपोर्ट में कुवैती वकील हया अल शलाही ने बताया है कि वॉट्सऐप पर ‘दिल भेजना’ न सिर्फ आपको 2 साल के लिए जेल भेज सकती है, बल्कि लगभग सवा पाँच लाख भारतीय रुपए यानि 2000 कुवैती दीनार तक का जुर्माना भी लग सकता है।

सोचिए जरा, वॉट्सऐप पर दिल का इमोजी भेजना आपको कितना महँगा पड़ सकता है। कुवैती अधिकारियों ने दिल की इमोजी को भेजना उत्पीड़न करने वाला कृत्य माना है, जिस पर सजा देने का भी प्रावधान कर दिया गया है।

सऊदी अरब में पहले से कानून

वॉट्सऐप पर ‘दिल भेजना’ सऊदी अरब में पहले से गैर-कानूनी है। यहाँ सजा 2 से 5 साल तक हो सकती है। हालाँकि सहमति से दोनों तरफ दिलों का आदान-प्रदान हो रहा है, तो कोई बात नहीं है। लेकिन अगर मोहतरमा बिगड़ गईं, तो फिर आपकी किस्मत पर आपको रोना ही पड़ेगा। वैसे ये नियम ‘लाल दिल’ पर ही है, साथ ही वॉट्सऐप के अलावा भी बाकी सभी सोशल मीडिया साइटों पर ये नियम लागू होता है।

हमारे यहाँ क्या होता है?

हमारे यहाँ हर इंसान दर्जनों वॉट्सऐप ग्रुप में जुड़ा रहता है। काम की भी बात आजकल वॉट्सऐप पर ही होती है। और हर रिएक्शन दिल वाला देता रहता है। जैसे कि हमारा खुद का भी। हम तो कोई खबर भी पसंद आने पर ग्रुप में सबके सामने दिल वाला इमोजी-रिएक्शन में डाल देते हैं। सोचिए, ऐसा गजब नियम हिंदुस्तान में आ गया तो?

हिंदुस्तान में ऐसा होगा तो असली अपराधी-कैदी कहाँ जाएँगे? क्योंकि हम में से हर कोई दिल वाला इमोजी-रिएक्शन में जरूर डालता है। लेकिन अगर आप कुवैत या सऊदी अरब जा रहे हैं, तो ऐसा करने की भी मत सोचना। बाकी हिंदुस्तान में दिल पर गाने बनेंगे, लोग दिन भर सुनेंगे। दिल वाला रिएक्शन भेजते रहेंगे। भाई हो, दोस्त हो, पत्नी हो, प्रेमिका हो, मम्मी हों या डैडी, खूब भेजिए दिल।

‘शास्त्रों में तो हिंदू शब्द नहीं है’: पत्रकार राहुल देव के प्रोपेगेंडा की स्वामी रामभद्राचार्य ने श्लोकों से निकाली हवा, कहा- जिनको पढ़ना नहीं उनके लिए करिया अक्षर भैंस बराबर

एक बहुत पुराना लिबरल प्रोपेगेंडा है कि हिंदू शब्द का शास्त्रों में कहीं जिक्र नहीं है। बहुत बाद में आकर यह शब्द उपयोग किया जाने लगा है। लेकिन इस प्रोपेगेंडा को तुलसी पीठाधीश्वर जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने तार-तार कर दिया है। ‘वरिष्ठ पत्रकार’ राहुल देव को जवाब देते हुए उन्होंने शास्त्रों में हिंदू शब्द के जिक्र के कई प्रमाण देते हुए कहा कि जिनको नहीं पढ़ना है उनके लिए करिया अक्षर भैंस बराबर है।

स्वामी रामभद्राचार्य ने यह टिप्पणी समाचार चैनल टीवी 9 भारतवर्ष के ‘5 एडिटर्स’ नामक कार्यक्रम के दौरान की। राहुल देव ने उनसे पूछा कि क्या आप हिंदू राष्ट्र से भी सहमत हैं? क्या हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए? जवाब में स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा, “हिंदुस्थान है तो हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए।” आगे वे कहते हैं मैं हिंदुस्तान नहीं बोल रहा हूँ पत्रकार महोदय, जानकर मैं हिंदुस्थान बोल रहा हूँ। इसके बाद राहुल देव कहते हैं कि हमारे शास्त्रों में तो हिंदू शब्द नहीं है। इस पर स्वामी रामभद्राचार्य ने उनसे पूछा कि ये किसने कहा।

इसके बाद स्वामी रामभद्राचार्य ने एक मंत्र का पाठ करते हुए कहा कि कौथुमी संहिता में जहाँ सिन्धव: है, वहाँ हिन्दव: भी आया है। इसके बाद कुछ श्लोक सुनाकर उन्होंने बताया कि सुमेरू तंत्र में भी हिंदू शब्द आया है। इन श्लोकों की व्याख्या कर उन्होंने राहुल देव को समझाया कि शास्त्रों में हिंदू किसे कहा गया है। उनका निवास स्थान कहाँ से कहाँ तक है, इन सबके बारे में विस्तार से बताया गया है। आगे स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा, “हिंदू शब्द के लिए कम से कम सैकड़ों श्लोक सुमेरू तंत्र में ही दिए गए हैं। अब जिनको पढ़ना ही नहीं है उनके लिए हमारी अवधी भाषा में कहा गया है कि करिया अक्षर भैंस बराबर।”

आप नीचे के वीडियो में 3 मिनट 15 सेंकेंड के बाद स्वामी रामभद्राचार्य और राहुल देव के बीच के इस संवाद को सुन सकते हैं।

इस कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य से हिंदुओं के पुण्य स्थल पर इस्लामी आक्रांताओं के कब्जे का ​जिक्र करते हुए भी सवाल किया गया। जवाब में तुलसी पीठाधीश्वर ने कहा कि पहले अयोध्या, काशी और मथुरा ये तीन जगह तो हिंदुओं को मिलना ही चाहिए। इसके बाद शेष के लिए आगे देखेंगे। इसके बाद उनसे पूछा गया कि क्या धर्मगुरु ये भरोसा दिलाएँगे कि ये तीन जगह वापस मिलने के बाद हिंदू अन्य जगहों पर अपना दावा नहीं करेंगे। जवाब में स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि पहले ये तीन मिल जाएँ, फिर हम आगे बताएँगे। जब उनसे 1991 के प्लेसेज आफ वर्शिप एक्ट का हवाला देकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि कानून परिवर्तित भी होते रहे हैं। जो शाश्वत तौर पर हिंदुओं का है, वह उनको मिलना चाहिए।

ज्ञानवापी के ASI सर्वे पर रोक लगाने से सप्रीम कोर्ट का इनकार, मुस्लिम पक्ष से कहा- इसमें दिक्कत क्या है, अयोध्या में भी हुआ था

वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचा परिसर में कोर्ट के निर्देश पर जारी सर्वे को लेकर मुस्लिम पक्ष को जबरदस्त झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने परिसर में जारी सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि ASI ने साफ कहा है कि पूरा सर्वेक्षण बिना किसी खुदाई और संरचना को कोई नुकसान पहुँचाए बिना पूरा किया जाएगा।

सर्वे जारी रखने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई सर्वे को हरी झंडी दे दी है। अब भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण टीम के द्वारा ज्ञानवापी ढाँचा परिसर में सर्वे जारी रहेगा।

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद CJI डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “अयोध्या मामले में भी ASI सर्वे हुआ था और हम सबूत के सारे ऑप्शन खुले रखेंगे। हम इस बात का ख्याल रखेंगे कि ढाँचे को कोई नुकसान न हो।”

इस पर सरकार की ओर पेश सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ASI ने हाईकोर्ट में एफिडेविट दिया है कि ढाँचे को कोई नुकसान नहीं होगा। उसका पालन किया। उन्होंने कहा कि अगर कभी भविष्य में खुदाई की जरूरत पड़ती है तो कोर्ट से परमिशन ली जाएगी।

खुदाई की बात सुनते ही मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश वकील ने कहा, “इसमें खुदाई की बात कहाँ से आ गई?” सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सर्वे हो गया, लेकिन ऑर्डर 7 रूल 11 की याचिका डिसमिस हो जाती है तो सर्वे की रिपोर्ट सिर्फ कागज का एक पन्ना बनकर रह जाएगी और उसकी कोई वैल्यू नहीं होगी। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “ऐसा भी कर सकते हैं कि सर्वे की रिपोर्ट को सील्ड कवर में रखा जाए और ऑर्डर 7 रूल 11 की याचिका की मेनटेनिबिलिटी तय होने के बाद ही उसे खोला जाए।’ ऑर्डर 7 रूल 11 पर कोर्ट अगले हफ्ते सुनवाई करेगा और इस बारे में नोटिस जारी किए गए हैं।”

बताते चलें कि वाराणसी के ट्रायल कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया था। मामला जब इलाहाबाद हाईकोर्ट में गया तो हाईकोर्ट ने गुरुवार को ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। इसके बाद शुक्रवार को सुबह 8 बजे से ही परिसर में सर्वे का काम चल रहा है। जुमे की नमाज पढ़ने के लिए ASI ने बीच में दो घंटे के लिए सर्वे को रोक दिया गया था। स्थिति को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट में ‘प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट’ का भी मुद्दा उठा है। मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील अहमदी ने कहा कि पूजा स्थल अधिनियम की धारा 2(बी) के तहत इसकी स्थिति में बदलाव नहीं किया जा सकता है। यह सेक्शन कन्वर्जन को परिभाषित करता है।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “आप सही हैं। एक्ट के 2(बी) रूपांतरण शब्द का उपयोग बहुत व्यापक अर्थ में है। एक्ट के तहत साफ है कि पूजास्थल का धार्मिक चरित्र नहीं बदलना चाहिए।” सीजेआई ने कहा कि सवाल यह है कि 15 अगस्त 1947 को उस स्थान का धार्मिक चरित्र क्या था?

उधर, ASI ने वाराणसी के जिला जज से सर्वे की रिपोर्ट जमा करने के लिए कुछ और समय की माँग की है। जिला कोर्ट ने 4 अगस्त को रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा था। हालाँकि, सर्वे का काम पूरा नहीं होने के कारण रिपोर्ट नहीं पेश किया जा सका।

जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में दायर प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि हाईकोर्ट में सुनवाई लंबित होने और रोक लगाए जाने के कारण सर्वे का काम समय पर पूरा नहीं हो सका है। भारतीय पुरातात्विक विभाग की ओर से केंद्र सरकार के अधिवक्ता अमित कुमार श्रीवास्तव और शंभू शरण सिंह ने अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले राहुल गाँधी को दी नसीहत, फिर सजा पर लगाई रोक: कहा- सार्वजनिक जीवन में बोलते हुए सावधान रहना चाहिए

‘सभी चोर मोदी ही क्यों होते हैं’ वाले बयान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी (Congress Leader Rahul Gandhi) को बड़ी राहत दी है। इस आपराधिक मानहानि मामले में शीर्ष कोर्ट ने उनकी सजा पर रोक लगा दी। इसके साथ ही राहुल गाँधी को अयोग्य ठहराने वाले निर्णय पर भी रोक लग गई है। इस फैसले पर कॉन्ग्रेस ने खुशी जाहिर की है और कहा कि ‘यह नफरत के खिलाफ मोहब्बत की जीत है’।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत दंडनीय अपराध के लिए अधिकतम सजा दो साल की या जुर्माना या दोनों है। विद्वान ट्रायल जज ने अपने आदेश में अधिकतम दो साल की सजा सुनाई है। अवमानना की कार्यवाही में याचिकाकर्ता को चेतावनी के अलावा दो साल की अधिकतम सजा सुनाते समय विद्वान ट्रायल न्यायाधीश द्वारा कोई अन्य कारण नहीं बताया गया है।”

जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस संजय कुमार की तीन-सदस्यीय पीठ ने आगे कहा, “यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि विद्वान ट्रायल जज द्वारा दी गई दो साल की अधिकतम सजा के कारण ही जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के प्रावधान लागू हुए। अगर एक दिन कम सजा होती तो ये प्रावधान लागू नहीं होते।”

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने ट्रायल कोर्ट को लेकर आगे कहा, “विशेष रूप से जब अपराध गैर-समझौता योग्य, जमानती और संज्ञेय था, तो विद्वान ट्रायल जज से कम-से-कम यह अपेक्षा की जाती थी कि वह अधिकतम सजा देने के लिए कारण बताए। हालाँकि, विद्वान अपीलीय अदालत और उच्च न्यायालय ने आवेदनों को खारिज करने में काफी पन्ने खर्च किए हैं, लेकिन इन पहलुओं पर विचार नहीं किया।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा वह जानना चाहता है कि अधिकतम सज़ा क्यों दी गई। अगर जज ने 1 साल 11 महीने की सजा दी होती तो वह (राहुल गाँधी) अयोग्य नहीं ठहराए जाते। उधर, महेश जेठमलानी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी राहुल गाँधी को राफेल मामले में ‘चौकीदार चोर है’ कहने पर आगाह किया था, लेकिन उनके आचरण में कोई बदलाव नहीं आया है।

पीठ ने यह भी कहा कि धारा 8(3) के व्यापक प्रभाव को ध्यान में रखते हुए न केवल याचिकाकर्ता के अधिकार, बल्कि निर्वाचन क्षेत्र में उसे निर्वाचित करने वाले मतदाताओं के अधिकार भी प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता राहुल गाँधी का बयान ठीक नहीं था और सार्वजनिक जीवन वाले एक व्यक्ति को भाषण देते समय अधिक सावधान रहना चाहिए।

राहुल गाँधी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि शिकायतकर्ता पूर्णेश मोदी का मूल उपनाम ‘मोदी’ नहीं है और उन्होंने बाद में यह उपनाम अपनाया। उनका मूल उपनाम भुताला है। सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि राहुल गाँधी ने जिन लोगों का नाम लिया, उन्होंने केस नहीं किया। देखा जाए तो समस्या सिर्फ बीजेपी से जुड़े लोगों को ही हो रही है।

अपने आदेश में पीठ ने कहा, “राहुल की अपील सेशंस कोर्ट में पेंडिंग है, इसलिए हम केस पर टिप्पणी नहीं करेंगे। जहाँ तक राहुल की सजा पर रोक की बात है, ट्रायल कोर्ट ने राहुल को मानहानि की अधिकतम सजा दी है लेकिन इसका कोई विशेष कारण नहीं दिया है। इसलिए हम सेशंस कोर्ट में अपील लंबित रहने तक राहुल की सजा पर रोक लगा रहे हैं।”

स्वीडन के बाद डेनमार्क ने भी सीमा सुरक्षा सख्त, कुरान जलाने की घटनाओं से भड़के हुए हैं मुस्लिम देश

डेनमार्क ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा सख्त करने का फैसला किया है। ऐसा कुरान जलाए जाने की हालिया घटना के बाद उपजे सुरक्षा के खतरों को देखते हुए किया गया है। इससे पहले स्वीडन ने भी अपनी नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इसी तरह का फैसला लिया था। दोनों देशों में हाल में कुरान जलाने की कई घटनाएँ हुई है।

डेनमार्क के न्याय मंत्रालय ने कहा है कि हाल ही में कुरान जलाने के बाद सुरक्षा स्थिति प्रभावित हुई है। इसके बाद डेनिश पुलिस सीमा पर नियंत्रण सख्त कर रही है। डेनिश मंत्रालय ने गुरुवार (3 अगस्त, 2023) देर रात एक बयान में कहा, “विशिष्ट और वर्तमान खतरों को देखते हुए अधिकारियों का मानना है कि डेनमार्क की सीमा में कौन प्रवेश कर रहा है, इस पर ध्यान कें​द्रित करना आवश्यक है।” इसको ध्यान में रखते हुए 10 अगस्त, 2023 तक सख्त सीमा नियंत्रण लागू किया गया है।

अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, डेनमार्क और स्वीडन में इस्लाम विरोधी एक्टिविस्टों ने हाल के महीनों में कुरान की कई प्रतियों को विरोध-प्रदर्शनों में जला दिया था। इससे मुस्लिम बहुल देशों में आक्रोश भड़क गया है और ऐसे कृत्यों पर प्रतिबंध लगाने की माँग हो रही है। मुस्लिम देशों के आक्रोश को देखते हुए स्वीडन, डेनमार्क सहित कई देश सुरक्षा को पैदा हुए खतरों की समीक्षा में लगे हैं। इसी कड़ी में डेनमार्क ने आने वाले लोगों को अधिक जाँच के साथ सीमा में प्रवेश देने एवं सख्त सुरक्षा-व्यवस्था का निर्देश दिया है। दोनों देशों ने मुस्लिमों के आक्रोश को थामने के लिए कुरान जलाए जाने की निंदा भी की है। साथ ही इस बात का आश्वासन दिया है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए नए कानूनों पर विचार किया जाएगा।

इस तरह की भी खबरें हैं कि स्वीडन और डेनमार्क के नागरिक ऐसे किसी कानून के विरोध में हैं। उनका मानना है कि इससे संविधान में संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार कमजोर होगा। इससे पहले स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने कहा था कि उनके देश में ऐसा कोई कानून नहीं है जो कुरान या अन्य मजहबी किताबों को जलाने या उनका अपमान करने से रोकता हो। लेकिन हर वह चीज जो कानूनी तौर पर जायज है, उसे उचित नहीं ठहराया जा सकता। इस तरह की घटना भले कानूनी तौर पर सही हो पर भयावह हैं।

नूहं में रैपिड एक्शन फोर्स का बटालियन, हाईवे तक सीधी कनेक्टिविटी: हरियाणा सरकार ने उठाया बड़ा कदम

मेवात क्षेत्र के नूहं जिले में अब रैपिड एक्शन फोर्स की बटालियन परमानेंट तैनात रहेगी। बटालियन के लिए 50 एकड़ जमीन आवंटित की गई है। तैयारी पहले से चल रही थी, लेकिन राज्य सरकार ने जितनी आपत्तियाँ दर्ज कराई थीं, उन सबको निपटा लिया है। इस बारे में अब केंद्र सरकार को सूचित भी कर दिया है।

रैपिड एक्शन फोर्स की बटालियन को लेकर मामला जमीन की मंजूरी देने पर अटका था। अब राज्य सरकार ने नियम ही बदल दिया। चेंज ऑफ लैंड यूज का सर्टिफिकेट भी केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौंप दिया गया है। कुछ जरूरी चीजों की डिमांड आरएएफ ने की है, जिसके पूरा होते ही पूरी बटालियन यहीं बस जाएगी।

क्या है पूरा मामला

नूहं के इंद्री गांव में राज्य सरकार ने 50 एकड़ जमीन आरएएफ को दी है। इसके लैंड यूज सर्टिफिकेट का मामला लेकिन उलझा हुआ था, जिसे सुलझा लिया गया। इसको लेकर केंद्र सरकार ने कन्वर्जन फीस, स्क्रूटनी फीस सब कुछ चुका दिया है, जो 20-20 लाख के आसपास है।

आरएएफ ने राज्य सरकार से हाईवे तक सीधे कनेक्टिविटी माँगी है, पानी और बिजली की सप्लाई माँगी है, जिसे देने में राज्य सरकार को कोई समस्या नहीं होने वाली। इंद्री गाँव से केएमपी हाईवे यानि कुंडली-मानेसर-पलवल वाले हाईवे तक आरएएफ की सीधी पहुँच रहेगी। इन इलाकों में किसी भी समस्या पर आरएएफ वाले कुछ ही मिनटों में काबू पा लेंगे।

दंगों को कंट्रोल करने में आरएएफ वाले सबसे आग

रैपिड एक्शन फोर्स का मतलब ही है कि जहाँ व्यवस्था बिगड़ी हो, वहाँ व्यवस्था को संभाल लेना। कितनी भी बड़ी भीड़ क्यों न हो, आरएएफ वालों की लाठियों में इतना दम होता है कि वो दंगाइयों पर बिजली की गति से टूट पड़ते हैं। कई बार आरएएफ ने इसे साबित भी किया है।

मेवात क्षेत्र दंगों के लिए बदनाम है। आए दिन खबरों में यह क्षेत्र गलत कारणों से चर्चा में रहता है। इस इलाके में आरएएफ की परमानेंट बटालियन और हाईवे तक उनकी सीधी कनेक्टिविटी का मतलब यह निकाला जा सकता है कि अपराधी/आतंकी टाइप लोगों में पुलिस-प्रशासन का खौफ रहेगा।

अभी भोंडसी में तैनात है आरएएफ की बटालियन

नूहं में आरएएफ की वही बटालियन तैनात होगी, जो अभी भोंडसी के पुलिस कॉम्प्लेक्स में है। ये आरएएफ की 2nd IRB बटालियन है, जो दंगों पर काबू पाने में महारत रखती है। आसपास के इलाकों में सबसे पहले यही बटालियन पहुँचती है। अब इसे नूहं के इंद्री गाँव में ही तैनात कर दिया जाएगा।

आपको बता दें कि 2014 में मेवात के तौरू में सांप्रदायिक हिंसा हुई थी। इसके बाद ही RAF के स्थायी स्टेशन की सैद्धांतिक मँजूरी दे दी गई थी। लेकिन तब से लेकर अब तक यह मामला लटका हुआ था।

ये भी पढ़ें : नूहं में लोकल दंगाइयों को मिला था राजस्थान से आए हमलावरों का साथ, सरपंच ने कैमरे पर किया सनसनीखेज खुलासा

नूहं हिंसा में अब तक क्या कुछ हुआ

नूहं में 31 जुलाई की दोपहर के बाद हिंदुओं की धार्मिक यात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया। हिंदुओं को मंदिर परिसर से लेकर तमाम जगहों पर निशाना बनाया गया। होम गार्ड के जवानों, दर्शनार्थियों को जान से मार दिया गया। बजरंग दल के कार्यकर्ता को न सिर्फ गोली मारी गई, बल्कि उसका गला भी रेत दिया गया।

इस मामले में अब तक 95 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं। करीब 150 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। कुछ को कोर्ट में पेश किया गया है, तो उनमें से 23 को पुलिस कस्टडी में भी भेज दिया गया है। इस पूरे मामले में हिंसा भड़काने वाले वीडियो तैयार करने वाले तीन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंशर्स पर भी एफआईआर दर्ज की गई है।

ज्ञानवापी ढाँचे में सर्वे का काम फिर शुरू, मुस्लिम पक्ष ने किया बहिष्कार: जुमे की नमाज को लेकर ASI ने कुछ घंटों के लिए सर्वेक्षण रोका, भारी संख्या में पुलिस बल तैनात

इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय के बाद वाराणसी के ज्ञानवापी ढाँचा परिसर में सर्वे का काम आज शुक्रवार (4 जुलाई 2023) से फिर शुरू हो गया है। इस दौरान सुरक्षा के भारी इंतजाम किए गए है। सर्व का काम सुबह लगभग 8 बजे शुरू हुआ था। इस दौरान मैपिंग, चार्टिंग और डॉक्यूमेंटेशन का काम किया गया। इसके बाद नमाज के लिए काम रोक दिया गया।

आज होने वाला सर्वे दो चरणों में हो रहा है। सुबह 8 बजे से शुरू होकर 12 चलने वाला सर्वे का काम पूरा हो गया है। इसके के मैपिंग और चार्टिंग किया गया और सर्वे में मिले प्रतीकों का डॉक्यूमेंटेशन का काम किया गया। दूसरे चरण के सर्वे का काम 2:30 बजे से फिर शुरू होगा, जो शाम को 5 बजे तक चलेगा। इस दौरान ASI के 61 सदस्य शामिल होंगे।

आज के सर्वे के पहले चरण में ज्ञानवापी के पहले दिन के सर्वे में ASI की टीम ने हिंदू धर्म चिह्नों को इकट्ठा करके एक जगह स्टोर किया। इन प्रतीकों की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की गई। सर्वे के लिए ASI की 43 सदस्यीय टीम को चार हिस्सों में बाँटा गया था और परिसर को चार भाग में बाँटकर अलग-अलग हिस्सों में लगाया गया था।

सर्वे के दौरान हिंदू पक्ष के लोग शामिल रहे, जबकि मुस्लिम पक्ष ने इसका बहिष्कार कर दिया। मुस्लिम पक्ष ज्ञानवापी नहीं पहुँचा। वहीं, आज जुमा होने कारण इलाके को सील कर दिया गया है और भारी संख्या में सिक्योरिटी फोर्सेज को तैनात किया गया है। जुमे की नमाज को देखते हुए ASI ने सर्वे का काम दो चरणों में किया।

  • सर्वे के दौरान परिसर की खुदाई नहीं होगी। इसके लिए ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा और रेडियो वेव की फ्रीक्वेंसी के जरिए पता लगाया जाएगा कि जमीन या दीवार के अंदर क्या है। इसके अलावा, कार्बन डेटिंग से भी साक्ष्यों की जाँच की जाएगी। सर्वे का काम 5-6 तक चल सकता है।

हिंदू पक्ष के सोहनलाल आर्य ने कहा कि पिछले सर्वेक्षण के दौरान परिसर के अंदर शिव और पार्वती की मूर्तियाँ, वराह (विष्णु का शूकर अवतार), घंटियाँ, त्रिशूल और कई अन्य साक्ष्य सहित कई कलाकृतियां मिली थीं। यह दर्शाता है कि यह स्थान एक मंदिर है।

    बताते दें कि वाराणसी की स्थानीय कोर्ट ने ASI को सर्वे करके 4 अगस्त 2023 को रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा था। हालाँकि, मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट और फिर हाईकोर्ट पहुँच गया, जिसके कारण इसमें विलंब हो गया। ऐसे में हलफनामा दायर करके कोर्ट से और वक्त माँगा गया है।

    उधर, मुस्लिम पक्ष ने सर्वे जारी रखने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एक बार सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमिटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा, “हमने सर्वे के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है, जिसकी आज सुनवाई होनी है। इसकी जानकारी वाराणसी के अधिकारियों को दी गई है। शीर्ष अदालत के आदेश तक सर्वे को रोका जाए।”

    ‘इलियास’ ने ‘यश’ बनकर 16 साल की हिंदू लड़की को फँसाया, कई बार रेप किया: माँ की शिकायत पर गुजरात पुलिस ने दबोचा  

    अहमदाबाद के इसानपुर में लव जिहाद का मामला सामने आया है। एक मुस्लिम युवक ने हिंदू नाम रखकर 16 साल की नाबालिग को अपने प्यार में फँसाया और उसके साथ बार-बार बलात्कार किया। पीड़िता की माँ की शिकायत पर आरोपित इलियास को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अहमदाबाद के इसानपुर में 16 साल की एक हिंदू लड़की सगीरा इलियास नाम के मुस्लिम युवक के संपर्क में आई। मुस्लिम युवक ने अपनी असली पहचान छिपाकर उस अपना नाम ‘यश’ बताया और उससे दोस्ती कर ली। इसके बाद उसने लड़की को भरोसे में लिया और झूठ बोलकर कई बार उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए।

    कुछ समय बाद जब उस हिंदू नाबालिग को आरोपित के असली नाम पता चला तो उसे अपने साथ हुए धोखे का पता चला। पीड़िता ने सारी बात अपनी माँ को बताई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता की माँ इस संबंध में शिकायत दर्ज कराने के लिए इसानपुर पुलिस स्टेशन पहुँची और आरोपित इलियास के खिलाफ बलात्कार और POCSO सहित अन्य धाराओं के तहत शिकायत दर्ज कराई।

    आरोपित इलियास गिरफ्तार 

    रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता की शिकायत दर्ज होते ही इसानपुर पुलिस हरकत में आ गई. कुछ ही घंटों में पुलिस ने इलियास को गिरफ्तार कर लिया। एसीपी मिलाप पटेल ने बताया है, “16 वर्षीय पीड़िता की माँ ने इसानपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने कहा है कि उनकी बेटी एक कपड़े की दुकान पर काम करती थी। यहाँ इलियास नाम के लड़के अपना नाम यश बताकर उससे दोस्ती की और जबरन शारीरिक संबंध बनाए। शिकायतकर्ता द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर पुलिस ने इलियास के खिलाफ शिकायत दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आगे की जाँच कर रही है।”

    उस वक्त का वीडियो भी वायरल हो रहा है जब इसानपुर पुलिस आरोपित इलियास को गिरफ्तार करने गई थी। वीडियो में हिंदुओं का एक बड़ा समूह आरोपित को घेरती नजर आ रही है। वहीं पुलिस आरोपित इलियास को उत्तेजित भीड़ से बचाकर थाने ले जाती दिख रही है। 

    सूरत में ओजैर आलम ने अर्जुन सिंह बनकर एक हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फँसाया

    हालाँकि, गुजरात में लव जिहाद का यह एकलौता मामला नहीं है। इससे पहले भी सूरत शहर से लव जिहाद का मामला सामने आ चुका है। इस मामले में भी ओजैर आलम नाम के एक मुस्लिम युवक ने अपनी पहचान छिपाकर एक हिंदू लड़की को फँसाया था। इतना ही नहीं, उसने ‘अर्जुन सिंह’ के नाम से फर्जी आधार कार्ड भी बनवा रखा था और हिंदू नाम से कारोबार भी कर रहा था। इस मामले में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने उसे पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया था।