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कुनो नेशनल पार्क में चीतों की मौत असामान्य नहीं: आबादी बढ़ने से पहले घटेगी, 200+ चीतों की मौत का उदाहरण दे एक्सपर्ट्स ने बताई वजह

नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए 20 चीतों में से अब तक 6 की मौत हो चुकी है। इनके अलावा भारत में जन्म लेने वाले 4 शावकों में से तीन की मौत हो चुकी है। इस तरह से भारत में अब तक 9 चीतों की मौत हो चुकी है। ये संख्या अभी और भी बढ़ सकती है, क्योंकि ये ‘असामान्य’ नहीं है। चीतों की मौत ‘असामान्य’ नहीं किसी मीडिया रिपोर्ट के हवाले से नहीं है बल्कि एक्सपर्ट्स की राय है।

भारत की जलवायु में चीतों का सर्वाइव करना उनके लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे में जो एक्सपर्ट्स इन चीतों की देखरेख कर रहे हैं, चाहे वो भारत के हों या दक्षिण अफ्रीका के या फिर नामीबिया के, सभी का एक स्वर में कहना है कि अफ्रीकी महाद्वीप से यहाँ तक पहुँचे 20 चीतों में से 5 से 7 भी बच जाएँ तो ये बड़ी सफलता है।

चीतों की आबादी बढ़ने से पहले घटेगी

इस बारे में न्यूज18 के लिए सृष्टि चौधरी ने दक्षिण अफ्रीकी और नामीबियाई एक्सपर्ट्स से बातचीत कर एक रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जब 1966 में दक्षिण अफ्रीका में चीतों को बसाया जा रहा था, जब भी बड़ी संख्या में चीते मरे थे। इस प्रक्रिया को पूरा करने में 26 साल लगे थे और 200 से ज्यादा चीतों की मौत हो गई थी।

भारत में ये संख्या कम हो सकती है, क्योंकि उसके हिसाब से बेहतर प्लानिंग की गई है, लेकिन दूसरी तरफ दिक्कत जलवायु परिवर्तन और चीतों के जेनेटिक से जुड़ी है। पिछले एक माह में जिन 3 चीतों की मौत हुई हैं, उसमें से 2 की मौत इन्फेक्शन के चलते हुई है। ये इन्फेक्शन संभवत: उनके गले में बंधे कॉलर में होने की वजह से हो सकता है।

चीते की मौत के पीछे जेनेटिक समस्या भी हो सकती है। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीकी की जलवायु के हिसाब से वहाँ पले-बढ़े चीतों के जेनेटिक आधार पर बाल बढ़ जाते हैं। वहाँ के हिसाब से अप्रैल-मई का महीना शुष्क होता है और ठंड का मौसम होता है, लेकिन भारत में ये गर्मी का मौसम होता है। ऐसे में उनके बढ़े बालों की वजह से भी दिक्कत आई लगती है।

दक्षिण अफ्रीका-नामीबिया में दुनिया के 40% चीते

दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया में दुनिया के 40 प्रतिशत चीते रहते हैं। अकेले दक्षिण अफ्रीका में 60-70 चीते हर साल बढ़ते हैं। लेकिन भारत में चीतों का असली प्रजनन साल 2024 से शुरू हो सकता है, जिनके बचने की उम्मीद ज्यादा होगी।

अभी मादा चीता यहाँ के मौसम के हिसाब से खुद को ढालने में समय ले रही हैं। जिन चार शावकों का जन्म भारत में हुआ और उनमें से सिर्फ एक ही बचा है, एक्सपर्ट्स का कहना है कि वो बचा शावक खुद को भारत के हिसाब से ढाल लेगा, ये कहना अभी जल्दबाजी है। लेकिन साल 2024 में या उसके बाद जन्म लेने वाले शावकों के बचने की उम्मीद कहीं ज्यादा होगी।

ये भी पढ़ें : कूनो नेशनल पार्क में एक और चीते की मौत, मादा चीता साशा के बाद अब नर चीता उदय बीमारी के बाद चल बसा, वन प्रशासन ने बताया – 1 दिन पहले ठीक दिख रहा था

एक्सपर्ट्स की सलाह

भारत में ‘प्रोजेक्ट चीता’ से जुड़े एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब सरकार को कुनो नेशनल पार्क से आगे बढ़कर सोचना होगा। क्योंकि वो इलाका छोटा है। चीतों को आजाद माहौल देने के लिए हमें 8,000-10,000 वर्गमील तक की जगह बनानी होगी। अभी तक खुले पार्क में चीतों की आबादी बढ़ाने में किसी को भी सफलता नहीं मिली है।

कुनो नेशनल पार्क के अलावा भारत सरकार को मध्य प्रदेश के ही गाँधी सागर वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी और राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स नेशनल पार्क की तरफ भी देखना होगा। दोनों ही जगह नियंत्रित हैं। यहाँ बड़ी संख्या में हिरन, चीतल, बारहसिंघा जैसे जानवरों का बसेरा है, जिनकी उपस्थिति बड़े शिकारी जीवों के लिए आदर्श स्थिति की तरह है।

अभी कुनो में कैसे जी रहे चीते?

कुनो नेशनल पार्क अफ्रीका महाद्वीप से लाए गए चीतों के लिए आदर्श साबित हो रहा है। कुछ मौकों को छोड़कर अधिकतर चीते खुद से शिकार करके अपना पेट भर रहे हैं और धीरे-धीरे वो कुनो नेशनल पार्क के अभ्यस्त हो रहे हैं।

कुछ समय पहले हालाँकि धात्री नाम की मादा बाघिन की मौत हो गई थी। उसकी मौत की वजह संबंध बनाते समय नर चीते का हिंसक हो जाना था। ये एक सामान्य प्रक्रिया है। मादा चीते नर चीतों के संपर्क में सिर्फ प्रजनन के लिए ही आती हैं, उस समय नर चीते अक्सर हिंसक भी हो जाते हैं। दुनिया भर में मादा चीतों के मारे जाने की ये बड़ी आम समस्या सी है।

दक्षिण अफ्रीका-नामीबिया से आएँगे करीब 100 चीते?

एबीसी न्यूज के मुताबिक, भारत में अगले 10 सालों तक चीतों को दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से लाया जाता रहेगा। इनकी संख्या 100 तक हो सकती है। क्योंकि चीतों को जितनी ज्यादा संख्या में लाया जाएगा, उतनी ही तेजी से इन्हें जीने और प्रजनन के लिए तैयार किया जा सकेगा।

जितने चीते भारत आएँगे, इसमें से बड़ी संख्या में मौत भी होंगी, लेकिन भारत में प्रजनन की प्रक्रिया बढ़ने के बाद करीब एक दशक में इनकी संख्या बढ़ने लगेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि भारत का ये प्रोजेक्ट पूरी दुनिया में उदाहरण बनेगा।

त्रिशूल, प्रतिमा, कलश, स्तम्भ के अवशेष… ज्ञानवापी में ASI को क्या-क्या मिला? नमाज के कारण रोकना पड़ा सर्वे, चाबियाँ नहीं दे रहा था मुस्लिम पक्ष

ज्ञानवापी परिसर में लगातार दूसरे दिन शनिवार (5 अगस्त, 2023) को भी ASI ने सर्वे किया। इस दौरान कई अहम सबूत मिले। मुस्लिम पक्ष ने तहखाने की चाबी देने से इनकार कर दिया था, लेकिन बाद में किसी तरह टीम भीतर घुसने में कामयाब रही। दूसरे दिन करीब साढ़े 4 घंटे सर्वे का काम किया गया। परिसर में इस दौरान 61 लोग मौजूद रहे, जिसमें मुस्लिम पक्षकार भी थे। दोपहर के नमाज के लिए सर्वे का काम रोकना पड़ा, जिसके बाद ये फिर से शुरू किया।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ज्ञानवापी ढाँचे के भीतर खंडित मूर्तियाँ भी मिली हैं। वहीं मुस्लिम पक्ष दावा कर रहा है कि ऐसा कुछ नहीं मिला है। हिन्दू याचिकाकर्ता सीता साहू ने कहा है कि 4 फीट की आधा मनुष्य और आधा पशु की प्रतिमा मिली है। तहखाने में मंदिर के टूटे खण्डों के अवशेष मिलने का दावा भी किया गया है। तहखाने की वीडियोग्राफ़ी भी हुई है। सर्वे में 2 फ़ीट का त्रिशूल मिलने की बात भी कही जा रही है। 5 कलश भी मिले हैं।

बता दें कि पहले दिन मुस्लिम पक्ष ने सर्वे का बहिष्कार किया था, लेकिन दूसरे दिन उधर से भी लोग पहुँचे। मुस्लिम पक्ष के वकील मुमताज अहमद ने ASI के सर्वे से संतुष्ट होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हम टीम का सहयोग कर रहे हैं। जिला प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मुस्लिम पक्ष ने तहखाने की चाबियाँ दीं। बैरिकेटेड एरिया में सर्वे कराया गया। जाँच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी।

जो मूर्ति मिली है, उस पर कलाकृतियाँ मिलने की बात कही जा रही है। इस मूर्ति का कालखंड क्या है, इसका पता लगाया जा रहा है। कमल, त्रिशूल, कलश और मूर्तियों की आकृतियाँ मिली हैं – ऐसा कहा जा रहा है। ज्ञानवापी की पश्चिमी दीवार पर सूँड जैसी आकृति मिली है। नक्काशी और स्वस्तिक भी पाया गया है। एएसआई के एडिशनल डायरेक्टर जनरल डॉ. आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में सर्वे का काम 4 सप्ताह तक चलेगा।

जहाँ ASI की टीम टीम सीढ़ियों के सहारे गुंबद के भीतर पहुँची, वहीं एक टीम ने पश्चिमी दीवार का सर्वे किया। ‘TV9 भारतवर्ष’ के खबर की मानें तो दोनों पक्षों ने किसी भी तरह की धार्मिक आकृति मिलने की बात को नकार दिया है। फोटोग्राफी और वीडियोग्राफ़ी के अलावा मशीनों से साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। पिलरों की गिनती भी हो रही है। डायल टेस्ट इंडिकेटर से सतह का माप लिया जा रहा है। परिसर और उसके क्षेत्र की कोडिंग भी कराई गई है।

जिस दिन माँ की मौत, उसी दिन भूखे बेटे को कुरकुरे का पैकेट लेने पर नंगा कर पीटा और बाजार में घुमाया, फिर आँख में डाल दी लाल मिर्च

हिमाचल प्रदेश के शिमला से एक शर्मनाक हरकत सामने आई है। 31 जुलाई को राहुल सोनी नाम के दुकानदार ने दरिंदगी की हद पार कर दी। उसने कुरकुरे का एक पैकेट चुराने के आरोप में एक 15 वर्षीय लड़के को न सिर्फ नंगा कर पीटा और बाजार में घुमाया, बल्कि उसकी आँखों में लाल मिर्च का पाउडर भी डाल दिया।

इस घटना का तब पता चला, जब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। मामला हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल के टिक्कर बाजार का है। वहीं, आरोपित राहुल सोनी के पिता का नाम शिव कुमार बताया जा रहा है। 

बता दें कि इस मामले में पीड़ित कथित तौर पर नेपाली मूल का है। उसकी माँ की तबीयत खराब होने के बाद इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भूख लगने पर उसने दुकान से थोड़ा-सा स्नैक्स लेने की कोशिश की, लेकिन दुकानदार उसके साथ बेरहमी से पेश आया। जिस दिन यह दरिंदगी हुई, उसी दिन उसकी माँ की भी मृत्यु हो गई। 

आरोपित द्वारा इस मामले को दबाने की तमाम कोशिशें की गईं, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद लड़के के पिता नरेश कुमार को हिम्मत मिली। उन्होंने 4 अगस्त 2023 को आरोपित के खिलाफ रोहड़ू पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि मिठाई की दुकान के कर्मचारी ने उनके बेटे का रास्ता रोका, उसके साथ गंभीर रूप से मारपीट की और इसके बाद भी जब उसका मन नहीं भरा तो आँखों में मिर्च पाउडर डालकर सार्वजनिक रूप से नंगा कर घुमाया।

वहीं, इस मामले में रोहड़ू के पुलिस उपाधीक्षक रवींद्र नेगी ने शनिवार यानी 5 अगस्त 2023 को बताया कि पुलिस द्वारा मासूम के खिलाफ किए गए अपराध के संबंध में किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम की धारा 341, 323 और 75 के तहत FIR दर्ज की गई है। उन्होंने कहा, “जल्द से जल्द अपराधी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाएगी।”

हरियाणा पुलिस ने यूट्यूब चैनलों के दावों को नकारा: वीडियो में दिखाया था – ‘नल्हड़ मंदिर के आसपास की पहाड़ियों में बिखरे पड़े महिलाओं के कटे-फटे कपड़े’

हरियाणा के मेवात में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार हुआ है, कुछ यूट्यूब चैनलों ने ऐसा दावा किया। नल्हड़ मंदिर के पास लड़कियों और महिलाओं के कपड़े बिखरे पड़े मिले हैं, ऐसा भी इन वीडियो में दिखाया गया। हरियाणा पुलिस ने इन सभी दावों को नकार दिया है। नूहं के नलहड़ मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने भी इसे अफवाह ही बताया है।

हरियाणा पुलिस की प्रतिक्रिया से पहले ‘लीडिंग भारत टीवी’ ने अपने वीडियो में दावा किया कि एक पहाड़ी के पास महिलाओं, लड़कियों, छोटे-छोटे बच्चों के कपड़े फ़टे पड़े मिले। वहाँ खड़े लोगों से बात करके दावा किया गया कि कपड़े जबरदस्ती फाड़े गए मालूम होते हैं। यह भी दावा किया कि कई महिलाएँ गायब हैं।

‘हिंदुस्तान 9 UP’ नामक चैनल की ग्राउंड रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुस्लिम भीड़ ने दंगे किए। इनके वीडियो में एक स्थानीय व्यक्ति ने पूछा कि दंगाइयों में शामिल लोग अपनी पिछली पीढ़ियों के नाम जब लेंगे तो ज़रूर उनके पूर्वज हिन्दू रहे होंगे।

‘लीडिंग भारत टीवी’ की तरह ‘हिंदुस्तान 9 UP’ के वीडियो में भी एक बुजुर्ग शख्स ने दावा किया कि महिलाओं से बदसलूकी की गई है, उन्हें खींच कर ले जाया गया है। जो लोग इस वीडियो में बात कर रहे, उनका कहना है कि ड्रोन से घरों में सर्वे किया जाए, छतों पर पत्थर जमा करने वालों की पोल खोली जाए।

हरियाणा पुलिस ने ‘महिलाओं से बदसलूकी’ दावे को नकारा

‘महिलाओं से बदसलूकी’ संबंधी रिपोर्ट आने के बाद हरियाणा की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) ममता सिंह ने कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है क्योंकि वह खुद मौके पर मौजूद थीं।

दैनिक जागरण ने एक वीडियो पोस्ट किया। इसमें एडीजीपी ममता सिंह कह रही हैं:

“सोशल मीडिया पर एक नैरेटिव चल रही है कि जिस दिन श्रद्धालु नल्हड़ मंदिर में फँसे थे, इस दौरान वहाँ कुछ महिला भक्तों के साथ बलात्कार जैसे भयानक अपराध हुए। मैं आपको बताना चाहूँगी कि यह झूठ है, पूरी तरह अफवाह है। मैं यह आधिकारिक तौर पर कह रही हूँ क्योंकि मैं पूरी घटना के दौरान वहाँ मौजूद थी। किसी भी महिला के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। हम पहले ही साफ कर चुके हैं कि वहाँ वास्तव में क्या हुआ था।”

इसी वीडियो में उन्होंने आगे कहा कि ऐसे अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

नलहड़ मंदिर नूहं के पुजारी दीपक शर्मा ने बताया अफवाह

ऑपइंडिया ने इस पूरे मामले पर पुलिस के पक्ष के अलावा जहाँ से हिंसा की शुरुआत हुई, उस नलहड़ मंदिर के पुजारी से भी बात की। पुजारी दीपक शर्मा ने बताया कि एक नहीं बल्कि कई अफवाहें इस क्षेत्र में उड़ाई जा रही हैं। किसी एक महिला पत्रकार के भी पहाड़ो में फँसे होने की अफवाह उन्होंने बताई। साथ ही कहा कि चारों तरफ पुलिस और फोर्स भरी पड़ी है, तो ऐसा संभव ही नहीं है।

सड़क किनारे मिले महिलाओं के कपड़ों को लेकर नूहं के नलहड़ मंदिर के पुजारी दीपक शर्मा ने बताया कि संभवतः किसी ने सनसनी फैलाने के लिए फेंके होंगे या भगदड़ में किसी महिला के बैग आदि से छूट गए होंगे। उनके अनुसार इस मामले को भी पुलिस जाँच कर रही है।

नोट: इस रिपोर्ट को कुछ समय के लिए अनपब्लिश किया गया था। इसका कारण था लोकल मीडिया/यूट्यूब चैनलों द्वारा अपने वीडियो को डिलीट करना। इन्हीं वीडियो के आधार पर यह खबर बनी थी। इन वीडियो के सामने आने के बाद हरियाणा पुलिस की एडीजीपी ममता सिंह ने पुलिस-प्रशासन का पक्ष रखा था, वीडियो में किए गए दावों को खारिज किया था। हरियाणा पुलिस के पक्ष के अलावा नल्हड़ मंदिर के पुजारी से भी बातचीत कर अब दोबारा इस खबर को पब्लिश किया गया।

नूहं हिंसा का विरोध कर रहे 3 हिंदुओं को मारी गोली: ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हाकम-अकरम ने 20-25 लोगों संग किया हमला

ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान 31 जुलाई 2023 को नूहं में कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं पर हर तरफ से हमले कर दिए गए थे। सड़क से लेकर अस्पताल तक और यहाँ तक कि शिव मंदिर में जुटे लोगों पर गोलियाँ बरसाई गई थीं। इन हमलों के लिए लोगों को उकसाने में जावेद अहमद, मम्मन खाँ और आफताब जैसे AAP और कॉन्ग्रेस के नेताओं का नाम सामने आ रहा है।

इस बीच ये भी जानकारी मिली है कि गुरुग्राम से सटे सोहना में जब हिंदू समुदाय के कुछ लोग नूहं हिंसा का विरोध कर रहे थे, तब उन पर फायरिंग की गई थी। फायरिंग में तीन हिंदू युवकों को गोली लगी है, जिनका इलाज किया जा रहा है।

नूहं हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन करने पर जिन लोगों को गोली मारी गई है, उनके नाम है- वीरेंदर गुज्जर, मुनेश गुज्जर और एक उसका साथी है। जिन लोगों ने गोली चलाई है उनके नाम हैं- हाकम, वसीम, अकरम, यासीन और इनके साथी।

पीड़ितों के पड़ोसी ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया, “हमारे सोहना शहर के कुछ व्यापारी और बुजुर्ग लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान वहाँ छतों से पत्थर फेंके जाने लगे, गोलियाँ चलने लगीं। इसके बाद वहाँ भगदड़ मच गई।” उन्होंने कहा कि यह सब जावेद अहमद, मम्मन खां और आफताब ने कराया है।

स्थानीय गुंडे हाकम का नाम लेते हुए पड़ोसी ने बताया, “सबसे पहले पत्थर हाकम के घर से आया है। हाकम, वसीम, अकरम आदि के साथ-साथ 20-25 अन्य लोग पत्थर मार रहे थे और अल्लाह-हू-अकबर चिल्ला रहे थे। हाकिम नेतागिरी और दादागिरी करता है। इस पर पहले से ही केस चल रहे हैं।”

पीड़ितों के पड़ोसी ने कहा, “जहाँ पर हम प्रदर्शन कर रहे थे वह बॉर्डर इलाका है। वहाँ से एक तरफ मेवात का मुस्लिम बहुल इलाका है और दूसरी तरफ हिंदू हैं। यह सोहना का अंबेडकर चौक का इलाका है। यहीं पर हाकम के घर से गोलियाँ चलाई गई, जो हमारे बच्चों के पैरों में लगी हैं।”

पड़ोसी ने बताया कि पीड़ितों को आर्ट्मिज अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वहाँ उनका इलाज कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने लड़कों को खतरे से बाहर बताया है। पीड़ितों की आर्थिक हालत के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इनके घरवाले बेहद गरीब हैं और इनके पिता खेती-मजदूरी करते हैं।

पीड़ित हिंदू का कहना है कि इतना सब कुछ होने के बाद पुलिस हिंदुओं के लड़कों को ही उठा कर ले गई। पुलिस ने आरोपितों में से किसी पर भी कार्रवाई नहीं की। हालाँकि, उन्होंने कहा कि पूछताछ के बाद पुलिस ने इन लड़कों को छोड़ दिया है।

भट्ठी से मिले हाथ के टुकड़े, सिर और छाती नदी से… राजस्थान में रेप के बाद नाबालिग लड़की को आरी से काट डाला, गुर्जर समाज का तगड़ा प्रदर्शन

राजस्थान के भीलवाड़ा स्थित नरसिंगपुर में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के बाद उसकी हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। 14 साल की लड़की के साथ रेप के बाद न सिर्फ उसकी हत्या कर दी गई, बल्कि शव को भट्ठी में डाल कर जला भी डाला गया। इस मामले में पुलिस ने 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 2 सगे भाई हैं। वहीं 5 अन्य आरोपित फरार हैं, जिनमें 2 महिलाएँ हैं। राज्य सरकार ने मृतका के परिजनों को 10 लाख रुपए देने का आश्वासन दिया है।

साथ ही इंदिरा आवास योजना के तहत घर दिए जाने की बात भी कही गई है। कॉन्ग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय सचिव धीरज गुर्जर ने खुद की तरफ से ढाई लाख रुपए मृतका के परिजनों को देने की बात कही है। हालाँकि, महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार पहले से ही निशाने पर है। पुलिस ने स्पेशल केस बना कर इस मामले की जाँच करने की बात कही है। सीएम गहलोत ने भी इसका संज्ञान लेकर कार्रवाई के आदेश अधिकारियों को दिए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने इस घटना की निंदा की है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि नाबालिग के अवशेष भट्ठी से प्राप्त होना बेटियों की सुरक्षा के लिए चिंतित राजस्थान की जनता का दर्द और बढ़ाने वाला है। भाजपा ने प्रदेश की चौपट कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। ताज़ा मामले में जहाँ नाबालिग को पीटा गया, वहीं फिर गला दबा कर उसकी हत्या कर दी गई। पहचान छिपाने के लिए कोयले की भट्ठी में शव डाल दिया गया और शव का बाकी हिस्सा नदी में फेंक दिया गया।

आरी से नाबालिग के गर्दन और हाथ के टुकड़े किए गए। नाबालिग लड़की के पिता के खेत में ही इस वारदात को अंजाम दिया गया, जिसे उन्होंने कोयला बनाने वालों को किराए पर दिया था। 300 किलोग्राम से ज़्यादा कोयले और राख बाहर निकालने पड़े, तब जाकर नाबालिग के शव के टुकड़े मिले। भट्ठी में पहले पानी डाल कर उसे ठंडा किया गया था, जिसके बाद नाबालिग के अधजले हाथ के टुकड़े और चाँदी का कड़ा मिला।

11 साल की उम्र में ही उक्त लड़की का बाल-विवाह हो गया था और उसी गाँव में उसका ससुराल भी है। वो बकरियाँ चराने के लिए बाहर निकली थी, तब ये घटना हुई। आरोपितों में से एक की उम्र 21 वर्ष और एक की उम्र 25 वर्ष है। उन्होंने नाबालिग के सिर पर वार कर के उसे बेहोश किया था। भट्ठी में से सिर और छाती के अधजले भाग निकाल कर नदी में फेंक दिए गए। इस घटना के बाद गुर्जर समाज में आक्रोश है। बड़ी संख्या में गुर्जर समुदाय के लोग कोटड़ी पहुँच रहे हैं।

भाजपा आलाकमान ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया है और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने सांसदों की एक समिति बनाई है, जो इस मामले की जाँच ग्राउंड पर जाकर करेगी। उधर गुर्जर समाज के लोग डीएम-एसपी को निलंबित करने की माँग कर रहे हैं। इलाके का घेराव करने के लिए राज्य भर से गुर्जर पहुँच रहे हैं। आरोपितों के परिजन और उनकी पत्नियाँ भी मृतका के शव को ठिकाने लगाने में लगे हुए थे।

पाकिस्तान में ही रहेगी अंजू, 2 महीने के लिए बढ़ा वीजा: भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू

अपने प्रेमी नसरुल्लाह के पास पाकिस्तान गई अंजू का भारत वापसी का कोई इरादा नहीं दिख रहा है। अंजू अब वहाँ पर फातिमा बन चुकी है और प्रेमी नसरुल्लाह के साथ निकाह कर चुकी है। वो जिस इलाके में रह रही है, उसी इलाके तक पाकिस्तानी प्रशासन ने उसे सीमित कर दिया है। मीडिया से भी बातचीत करने से मना कर दिया गया है, वर्ना तो उसके स्वागत में मानो पाकिस्तानी अपना सब कुछ ही निछावर कर रहे थे।

अंजू को गिफ्ट में फ्लैट मिला है, तमाम अन्य बहुमूल्य वस्तुएँ भी मिली हैं। वो अब अपने हिंदुस्तानी पति को धमकाती भी है। कुछ दिन पहले तक वो वापस हिंदुस्तान आने की बात कर रही थी, लेकिन अब उसका नया शौहर नसरुल्लाह कहता है कि अंजू अब वहीं रहेगी, क्योंकि उसे पता है कि हिंदुस्तान जाने पर उसका क्या अंजाम होगा।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान ने अंजू का वीजा दो माह के लिए बढ़ा दिया है। इसके लिए वो इस्लामाबाद गई थी। उसके नए शौहर नसरुल्लाह का कहना है कि अंजू का वीजा अगली बार एक साल के लिए बढ़ जाएगा। इसके बाद पाकिस्तान में हमेशा के लिए सेटल होने का प्लान बना लेगी।

बताया जा रहा है कि हिंदुस्तान में मामूली पढ़ी-लिखी अंजू एक कंपनी में डाटा एंट्री ऑपरेटर का काम करती थी, लेकिन पाकिस्तान में अब वो नसरुल्लाह की ही कंपनी में ज्वॉइन करने की योजना बना रही है। ताकि जिंदगी अच्छे से गुजर जाए।

एबीपी न्यूज ने वीडियो में दिखाया है कि अंजू पाकिस्तान में भारत के खिलाफ बोल रही हैं। पाकिस्तान की तारीफें कर रही हैं। अंजू वीडियो में बोल रही है कि वो पाकिस्तान में काफी आजाद है, फ्री होकर शॉपिंग कर रही है।

ऊपरी दीर तक ही सीमित कर दी गई है अंजू

जी न्यूज की खबर की मानें तो अंजू पर एक तरफ तो तोहफों की बारिश हो रही है, तो दूसरी तरफ उसे ऊपरी दीर के इलाके तक ही रहने के लिए बोला गया है। उसके शौहर नसरुल्लाह का कहना है कि अंजू के नाबालिग बच्चों को पाकिस्तान भेज देना चाहिए, ताकि वो अपनी माँ के साथ रह सकें। धीरे-धीरे अंजू यहीं ऊपरी दीर में ही बस जाएगी और स्थानीय रीति-रिवाजों के साथ पूरी जिंदगी गुजर करेगी।

ये भी पढ़ें : इस्लाम कबूलने के बाद अंजू पर तोहफों की बौछार, पाकिस्तानी बिजेनसमैन ने दिए जमीन और पैसे: वीडियो वायरल

सचिन-सीमा के जवाब में नसरुल्लाह-फातिमा?

भारत आई सीमा हैदर के बाद पाकिस्तान पहुँची अंजू की कहानी को पाकिस्तान में हमेशा सीमा हैदर का जवाब ही माना गया। ये अलग बात है कि सीमा अवैध तरीके से भारत में आ गई, तो अंजू बाकायदा वीजा लेकर पाकिस्तान पहुँची और अब आईएसआई उस पर इतनी मेहरबान है कि उसका वीजा 2 महीने के लिए बढ़ा दिया है। पहले ये माना जा रहा था कि वीजा खत्म होने के बाद उसे हिंदुस्तान आना ही पड़ेगा, लेकिन कम से कम अगले 2 माह तक उसे हिंदुस्तान आने की कोई चिंता नहीं होने वाली।

फेसबुक की दोस्ती से शुरू हुई थी कहानी

बता दें कि अंजू राजस्थान के भिवाड़ी में अपने पति और 2 बच्चों के साथ रहती थी। साल 2020 में फेसबुक के जरिए उसकी दोस्ती पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के दीर बाला जिले में रहने वाले नसरुल्लाह से हुई थी। दोनों के बीच बीते 3 साल से बातचीत हो रही थी।

दोस्ती इतनी बढ़ी कि वह नसरुल्लाह से मिलने पाकिस्तान पहुँच गई और अब निकाह की खबरें आम हैं। अंजू और नसरुल्लाह का निकाहनामा भी सामने आ चुका है। इससे ही खुलासा हुआ था कि उसने इस्लाम कबूल कर अपना नाम फातिमा रखा है।

ज्ञानवापी का दरवाजा खुला… लेकिन तहखाने की चाबी देने से मुस्लिम पक्ष का इनकार

वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर के बगल में स्थित ज्ञानवापी विवादित ढाँचे में शनिवार को दूसरे दिन भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) टीम पहुँची। सुबह 9 बजे से ही सर्वेक्षण शुरू हो गया है। सर्वे का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या यह एक हिंदू मंदिर विश्वेश्वर महादेव को तोड़कर बनाया गया है। वहीं दो दिन से अपनी जिद पर अड़ा मुस्लिम पक्ष भी सर्वे में शामिल होने को तैयार हो गया है लेकिन तहखाने की चाभी देने से इनकार कर रहा है।

ANI की रिपोर्ट के अनुसार, ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के मुस्लिम पक्ष के वकील एजाज अहमद ने कहा, “आज मस्जिद ताला खोल दिया गया है। एएसआई की टीम मस्जिद में प्रवेश गई है, वजूखाने को छोड़कर मस्जिद के अंदर भी सर्वे हो रहा है।” वहीं इस मामले में अब नया विवाद तब खड़ा हो गया जब मुस्लिम पक्ष ने अपने कब्जे का तहखाना खोलने के लिए से मना कर दिया। मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वो तहखाने की चाबी क्यों दें? उनको (एएसआई की टीम) जहाँ खोलना है, वह खोल लेंगे।

बता दें कि शुक्रवार (4 अगस्त, 2023) को जब मंदिर में तमाम हिन्दू प्रतीक दीवारों और छतों पर मिल रहे थे, तो भी तहखाने में सर्वे नहीं हो पाई थी, क्योंकि मुस्लिम पक्ष ने ताला नहीं खोला था और चाबी भी नहीं दी थी। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि आज ASI टीम तहखाने तक पहुँच सकती है और जल्द ही ASI की टीम तहखाने के रहस्यों से पर्दा हटाएगी। 

आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार सर्वे का विरोध कर रही अंजुमन इंतजामिया मस्जिद कमेटी के ज्वाइंट सेक्रेट्री मोहम्मद यासीन ने कहा, “हम सर्वे में शामिल नहीं थे क्योंकि हम कानूनी प्रक्रिया का इंतजार कर रहे थे लेकिन अब जब कोर्ट ने सर्वे पर रोक लगाने से इनकार कर दिया तो हम एएसआई सर्वे में पूरा सहयोग करेंगे।”

वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने बताया कि आज डिटेल मेथड के जरिए काम किया जाएगा, जो आगे के सर्वे का रूप तय करेगा। वहीं मुस्लिम पक्ष के सहयोग पर उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष सहयोग नहीं बल्कि कोर्ट के आदेश की वजह से मजबूर है। वाराणसी के जिला जज के न्यायालय ने ASI सर्वे की मियाद बढ़ाकर 4 हफ्ते कर दी है।  

वहीं शुक्रवार को जब ASI ने जब पहले दिन सर्वेक्षण शुरू किया तो शीर्ष पुरातत्व निकाय ने ज्ञानवापी परिसर की दीवारों और स्तंभों पर उकेरे गए त्रिशूल, स्वास्तिक, घंटी और फूल जैसे हिन्दू प्रतीकों की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की। इस सर्वे में  ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) के माध्यम से सभी मूर्तियों और विवादित ढाँचे के तह तक जाँच की जा रही है। ज्ञानवापी परिसर के चारों कोनों पर डायल टेस्ट इंडिकेटर भी लगाए गए, जिससे परिसर के विभिन्न हिस्सों की गहराई और ऊँचाई मापी गई।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पहले दिन के सर्वे में विवादित ढाँचे की निर्माण शैली और अंदर मिले हिन्दू मंदिरों में पाए जाने वाले प्रत्येक डिज़ाइन की प्राचीनता को दर्ज किया गया और सर्वेक्षण में विवादित संरचना के गुंबदों और स्तंभों पर उकेरी गई संरचनाओं को भी शामिल किया गया। पहले दिन, सर्वेक्षण लगभग सात घंटे तक चला। 

गौरतलब है कि गुरुवार (3 अगस्त, 2023) को, उच्च न्यायालय ने मस्जिद समिति के अनुरोध को खारिज कर दिया। इसमें जिला अदालत के उस आदेश को रोकने की माँग की गई थी, जिसमें एएसआई को यह निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद मंदिर पर बनाई गई है।

बता दें कि ज्ञानवापी मस्जिद तब सुर्खियों में आई जब महिलाओं के एक समूह ने ज्ञानवापी विवादित परिसर में स्थित विश्वेश्वर महादेव की पूजा की अनुमति के लिए वाराणसी की निचली अदालत का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि यहाँ पहले एक मंदिर हुआ करता था।

जिला अदालत ने इस याचिका के आधार पर 2022 में परिसर के वीडियो सर्वेक्षण का आदेश दिया। सर्वेक्षण के दौरान, एक संरचना की खोज की गई जिसके बारे में याचिकाकर्ताओं का दावा था कि वह एक ‘शिवलिंग’ है। लेकिन ज्ञानवापी प्रबंधन समिति ने कहा कि संरचना ‘वज़ुखाना’ में एक फव्वारे का हिस्सा थी, जो पानी से भरा क्षेत्र है जहाँ लोग प्रार्थना करने से पहले अपने हाथ-पैर धोते हैं।

ताजिया रखने के लिए हिंदू समाज ने दी थी जगह, कानपुर में मुस्लिम समाज ने दीवार खड़ी कर कब्जा किया, नाम रखा इमाम चौकी

उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो ‘सांप्रदायिक सौहार्द्र’ पूरे सिद्धांत को ही ध्वस्त करके रख देती है। जिस जगह पर कभी हिंदुओं ने मुस्लिमों को तजिया रखने की अनुमति दी, उसे मुस्लिम समाज अपना बताने लगा है। इतना ही नहीं, उस जमीन पर दिवार भी खड़ी कर दी गई है।

जिस जमीन को लेकर मुस्लिम समुदाय बवाल कर रहा है, वह हिंदुओं की है। जाँच में पता चला है कि आज से 36 साल पहले भारी बारिश के कारण मुस्लिमों को तजिया रखने की जगह नहीं मिली तो हिंदुओं ने यहाँ तजिया रखने की इजाजत दी थी।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, स्थान देने के बाद बाद से इसी जगह पर तजिया का आयोजन किया जाने लगा। अब बशीरगंज स्थित इस जमीन पर मुस्लिम पक्ष अपना दावा जताने लगा है और इसका नाम भी इमाम चौकी कर दिया है। जबकि यहाँ इमाम चौकी का कोई वजूद नहीं है।

पुलिस की जाँच में सामने आया है कि पहले ताजिया बशीरगंज पाकड़ के पेड़ के नीचे रखे जाते थे। 36 साल पहले वर्षा की वजह से वह स्थान पानी में डूब गया, तब स्वामी श्री शिव नारायण जी संत समाज गुरुद्वारा सेवा समिति ने अपने परिसर में ताजिया रखने की इजाजत दी थी।

अगले दो साल भी बारिश हुई तो ताजिया यहीं रखी गई। इस दौरान अखाड़ा वालों ने कोई एतराज नहीं किया। इताजिया अखाड़ा परिसर में रखा गया, जिसमें अब भी हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। सके बाद से मुस्लिम समाज ने यहीं ताजिया रखना शुरू कर दिया।

इस स्थान का नाम भी इमाम चौकी कर दिया गया। तब से यह स्थान इमाम चौकी कहलाने लगा। बाद में वहाँ एक दीवार खड़ी करके इमाम चौकी कहलाने वाली उस जमीन को अखाड़ा से अलग कर दिया गया। समिति के पास चार बीघा में फैला एक अखाड़ा, गुरुद्वारा, छह कमरे और एक बगीचा है।

इस मामले में संयुक्त पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश ने बताया कि गुरुद्वारा सेवा समिति का नेतृत्व गणेश दास सोनकर के हाथों में है। वर्ष 2020-21 में समिति का नवीनीकरण किया गया है। अगर अखाड़ा समिति ताजिया रखने की इजाजत नहीं देता है तो उन्हें पुराने स्थान पर भेजा जाएगा।

बता दें कि पिछले दिनों इमाम चौकी के पास लगे एक पोस्टर को फाड़ने पर विवाद हो गया था। इसको लेकर इलाके में तनाव फैल गया था। इसके बाद पुलिस कमिश्नर ने मामले में जाँच के आदेश दिए थे। जाँच के बाद अब स्थिति साफ हो गई है।

3 साल की जेल, 1 लाख रुपए का जुर्माना… पाकिस्तान के पूर्व PM इमरान खान को सुनाई गई सज़ा, चुनाव लड़ने पर भी 5 साल का प्रतिबंध

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशखाना मामले में 3 साल जेल की सज़ा सुनाई गई है। साथ ही उन पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। पाकिस्तान की विपक्षी पार्टी PTI के नेता के समर्थकों में इस फैसले के बाद बड़ी नाराज़गी देखी जा रही है। शनिवार (5 अगस्त, 2023) को उन्हें सज़ा सुनाई गई। कोर्ट ने शॉर्ट जजमेंट सुनाते हुए कहा कि उन्हें अगले 5 वर्षों के लिए किसी भी आधिकारिक पद पर रहने से भी प्रतिबंधित किया जाता है।

इस मामले में अभी विस्तृत आदेश की कॉपी आनी बाकी है। दोपहर के 12:30 बजे अदालत ने ये फैसला सुनाया। बचाव पक्ष अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसकी गैर-मौजूदगी में ही सज़ा सुनाई गई। एडिशनल सेशन जज हुमायूँ दिलबर ने ये फैसला सुनाया। PTI के चेयरमैन इमरान खान सुनवाई में उपस्थित नहीं थे और न ही उनके वकील ख्वाजा हरीस भी उपस्थित नहीं थे। उनके एक सहयोगी ने उनकी तरफ से पेश होकर समय की माँग की

इस मामले में अभी विस्तृत आदेश की कॉपी आनी बाकी है। दोपहर के 12:30 बजे अदालत ने ये फैसला सुनाया। बचाव पक्ष अदालत में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसकी गैर-मौजूदगी में ही सज़ा सुनाई गई। एडिशनल सेशन जज हुमायूँ दिलबर ने ये फैसला सुनाया। PTI के चेयरमैन इमरान खान सुनवाई में उपस्थित नहीं थे और न ही उनके वकील ख्वाजा हरीस भी उपस्थित नहीं थे। उनके एक सहयोगी ने उनकी तरफ से पेश होकर समय की माँग की।

इमरान खान के वकील ने बताया कि उनका परिवार NAB केस में व्यस्त है, उनकी और उनकी बीवी की जमानत की सुनवाई चल रही है। इमरान खान की अनुपस्थिति के कारण पहले ही आदेश रिजर्व कर लिया गया था। बता दें कि तोशखाना केस इमरान खान द्वारा प्रधानमंत्री रहते विदेशी अतिथियों से गिफ्ट लेने के संबंध में है। आरोप है कि उन्होंने इन गिफ्ट्स का निजी इस्तेमाल किया और सरकारी खजाने में नहीं डाला गया।