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गुलामी की सोच से मुक्त युवा करेंगे भारत का नाम रोशन: अखिल भारतीय शिक्षा समागम के उद्घाटन में PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तीसरी वर्षगाँठ पर भारत की बात की। इस अवसर पर उन्होंने आज शनिवार (29 जुलाई 2023) को नई दिल्ली में अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन भी किया। छात्रों को सम्बोधित करते उन्होंने शिक्षा को देश का भाग्य बदलने वाली ताकत बताया। PM मोदी के मुताबिक नई शिक्षा नीति से छात्रों को देश के विकास में अधिक से अधिक भागीदारी करने में प्रेरणा मिल रही है।

नई दिल्ली के प्रगति मैदान में छात्रों को सम्बोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि देश जैसे-जैसे मजबूत हो रहा है, वैसे-वैसे यहाँ के बारे में जानने के लिए लोगों में उत्सुकता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद, कला और साहित्य के क्षेत्र में भारत अपार संभावनाओं वाला देश है।

PM मोदी ने शिक्षकों और अभिभावकों से अपील की है कि वो छात्रों को खुली हवा में उड़ने का अवसर दें। उन्होंने बताया कि ऐसा करने से छात्रों में कुछ नया करने की प्रेरणा आएगी। उन्होंने छात्रों के किताबों के दबाव से मुक्त होकर भविष्य को लेकर कुछ नया और बेहतर सोचने और उस दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत पर जोर दिया। बकौल PM समर्थ युवाओं का निर्माण सशक्त राष्ट्र के निर्माण की सबसे बड़ी गारंटी होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं को उनकी प्रतिभा के आधार पर परखने की अपील की। उन्होंने भाषा के आधार होने वाले निर्धारण को गलत बताया। PM मोदी ने मातृभाषा के सम्मान पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों की उनकी मातृभाषा में पढ़ाई होने से भारत के युवा टेलेंटेड हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि न्याय की असली लड़ाई अब शुरू होने जा रही है।

अपने सम्बोधन में आगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई पीढ़ी के युवा तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने इसे पूरा करने के लिए आने वाले 25 वर्ष बेहद अहम बताए। युवा पीढ़ी का मतलब प्रधानमंत्री ने उन युवाओं से बताया है, जो गुलामी की सोच से मुक्त हो कर नए-नए प्लान क्रियान्वयित करते रहें। साथ ही उन्होंने अपने दायित्वों को समझने वाले उन युवाओं को भी प्रोत्साहित करने की जरूरत पर बल दिया जो खेलों और विज्ञान में भारत का नाम रोशन कर सकें।

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने सभी युवाओं को शिक्षा के समान अवसर मिलने, संसाधनों पर सभी के समान अधिकार होने, बच्चों की रूचि के हिसाब से उन्हें विकल्प मिलने और स्थान वर्ग या क्षेत्र की वजह से किसी भी छात्र के शिक्षा से वंचित न होने की जरूरत पर जोर दिया।

‘मुहर्रम पर तिरंगे से अशोक चक्र गायब, तलवार के साथ उर्दू के शब्द’: BJP नेता ने शेयर किया फोटो, झारखंड पुलिस कह रही – क्लियर नहीं

मुहर्रम में झारखंड के पलामू से राष्ट्रीय ध्वज से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। आरोप है कि मुहर्रम के जुलूस के दौरान तिरंगे में अशोक चक्र के बदले उर्दू में कुछ लिख कर उसमें तलवार का चित्र छाप दिया गया। कुछ ही समय में ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की जा रही है। पुलिस ने इस मामले में जाँच करवाकर कार्रवाई की बात कही है। मामला शुक्रवार (28 जुलाई 2023) का है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला पलामू जिले के थानाक्षेत्र चैनपुर का है। यहाँ डालटनगंज कल्याणपुर इलाके में कंकरी मार्ग पर शुक्रवार को मुहर्रम का जुलूस निकला था। इस जुलूस में बज रहे DJ के साथ चल रहे कुछ लोगों के हाथ में तिरंगा जैसे झंडे भी थे। इस झंडे में बाकी सब कुछ राष्ट्रध्वज की तरह था लेकिन बीच में अशोक चक्र गायब था। अशोक चक्र की जगह उर्दू में कुछ शब्द लिखे हुए थे और उसके नीचे तलवार का चित्र बना हुआ था। आस-पास के लोगों ने इस तिरंगे की फोटो खींच ली।

कुछ ही देर में यह फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। ऑपइंडिया से बातचीत के दौरान एक इस्लामी जानकर मोहम्मद मौसूफ़ ने बताया कि झंडे के बीच में मुस्लिमों का कलमा तैय्यब लिखा हुआ है। इसको ‘ला इलाहा इलल्लाहु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाहि’ के तौर पर पढ़ते हैं। इसका हिंदी में अर्थ, “अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं और हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलैहि वसल्लम अल्लाह के रसूल हैं” होता है।

झारखंड भाजपा नेता दीपक प्रकाश ने इस घटना पर नाराजगी जताई। 28 जुलाई को उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “पलामू जिले में मुहर्रम जुलूस में राष्ट्रध्वज के साथ छेड़छाड़ का मामला अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है, तिरंगा झंडा में अशोक चक्र हटाकर उर्दू शब्द लिखना संविधान के खिलाफ है और हमारे राष्ट्रध्वज तिरंगे का अपमान। आखिर हेमंत राज में ऐसी देश विरोधी ताकतें कैसे मजबूत हो रही हैं?” झारखंड भाजपा के एक अन्य नेता ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति का खतरनाक खेल बताया।

इस घटना पर पलामू के एडिशनल एसपी ऋषभ गर्ग ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस टीम भेज कर जाँच करवाई गई थी लेकिन कोई ख़ास जानकारी नहीं मिल पाई। साथ ही उन्होंने फोटो के पूरी तरह से क्लियर न होने की भी जानकारी दी। एडिशनल एसपी का कहना है कि मामले की जाँच करवाई जा रही है और सबूत पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुहर्रम से पहले हनुमान मंदिर के पास गोवंश, काट कर फेंका गया बछड़े को: एक्शन में UP पुलिस, साजिश की आशंका

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में मोहर्रम से पहले गोवंश के अवशेष मिलने से इलाके में तनाव का माहौल हो गया है। बछड़े के बताए जा रहे ये अवशेष एक मंदिर के पास बरामद हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। नाराज भीड़ ने जमकर नारेबाजी की। वहीं पुलिस ने मौके पर पहुँच कर हालात को सँभाला है। जल्द ही आरोपितों को खोज कर उन पर कड़ी कार्रवाई करने का भरोसा भी दिया गया। घटना शुक्रवार (28 जुलाई 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सोनभद्र जिले के थानाक्षेत्र रॉबर्ट्सगंज का है। यहाँ मौजूद सब्जी मंडी के पास एक प्राचीन हनुमान मंदिर है। शुक्रवार को इस मंदिर के पास कटे हुए गोवंश के टुकड़े पाए गए। थोड़ी ही देर में यह खबर आस-पास फैल गई तो लोग मौके पर जमा होने लगे। मामले की जानकारी होने पर हिन्दू संगठन के सदस्य भी वहाँ पहुँचे। उन्होंने जमकर नारेबाजी की, जिससे हालत तनावपूर्ण हो गए। मौके पर एडिशनल एसपी के नेतृत्व में पुलिस बल पहुँचा और लोगों को समझाने के प्रयास में जुट गया।

सोनभद्र के एडिशनल SP के मुताबिक हनुमान मंदिर के पीछे खाली जगह में गोवंश के अवशेष मिले थे, जिन्हें हटवा दिया गया है। इस मामले में प्रार्थना पत्र लेकर FIR दर्ज करवाई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि जिसने भी ऐसा कृत्य किया है, उसके खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को आशंका है कि यह घटना मोहर्रम से पहले माहौल को बिगाड़ने की साजिश हो सकती है। हालाँकि पुलिस का कहना है कि जनता सब जानती और समझती है, इसलिए फ़िलहाल स्थिति सामान्य है।

फिलहाल मंदिर की साफ़-सफाई करवा दी गई है। पुलिस की कई टीमें इस मामले की जाँच में जुट गई हैं। आस-पास के CCTV फुटेज खँगाले जा रहे हैं। रात में कई जगहों पर दबिश का भी दावा किया गया है। हालाँकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है।

हिंदू लड़कियों की अश्लील वीडियो बनाने वाली शैफ़ा, शबानाज़, आलिया को बेल… सवाल करने पर महिला भाजपा नेता गिरफ्तार

कर्नाटक पुलिस ने बेंगलुरु से भाजपा की एक महिला नेता को गिरफ्तार किया है। शकुंतला नाम की इस महिला नेता पर ट्विटर के माध्यम से मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के अपमान का आरोप है। यह गिरफ्तारी उडुपी वीडियो कांड से जुड़ी हुई है। पुलिस का आरोप है कि इस मामले में गुरुवार (25 जुलाई 2023) को भाजपा नेता ने इस घटना से CM सिद्धारमैया की बहू और बीवी को जोड़ने का प्रयास किया।

जिस घटना में साल भर तक हिंदू लड़कियों के वीडियो बनाए गए, कर्नाटक के गृहमंत्री ने उसे एक छोटी सी घटना बताया है। जिस घटना की चर्चा सड़क से संसद तक होनी चाहिए, उससे जुड़ी तीनों अरोपित छात्राओं को कोर्ट से भी जमानत मिल गई है। सवाल करने वाला लेकिन गिरफ्तार कर लिया जाता है।

दरअसल 25 जुलाई को कर्नाटक कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भाजपा पर इस मुद्दे में नमक-मिर्च लगा कर पेश करने का आरोप लगाया था। तब कॉन्ग्रेस ने उडुपी कॉलेज में छात्राओं की वीडियो शूटिंग वाली खबर को ‘फर्जी’ करार दिया था। इसी ट्वीट में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की राजनीति का जिक्र करते हुए कॉन्ग्रेस ने भाजपा द्वारा इस खबर में नमक-मिर्च लगा कर परोसने और कर्नाटक पुलिस द्वारा सही जाँच करके विरोधियों के मंसूबे नाकाम करने का दावा किया था।

इसी ट्वीट के जवाब में भाजपा महिला नेता शकुंतला ने 25 जुलाई को ही लिखा, “कॉन्ग्रेस के मुताबिक मुस्लिम छात्राओं द्वारा शौचालय में कैमरा लगा कर हिन्दू लड़कियों का वीडियो बनाना बच्चों का खेल है। सिद्धारमैया क्या आप सहमत हैं कि यह बच्चों का खेल है?”

शकुंतला ने ट्वीट में यह भी लिखा कि क्या CM सिद्धारमैया और उनकी पार्टी अपनी बहू और बीवी के साथ समान व्यवहार पर ऐसी ही प्रतिक्रिया देते? उन्होंने अपने ट्वीट में कॉन्ग्रेस के स्क्रीनशॉट को अटैच किया था। शकुंतला ने यही जवाब अपने फेसबुक पर भी शेयर किया था।

इस ट्वीट के वायरल होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता हनुमानथार्या द्वारा बेंगलुरु के हाई ग्राउंड पुलिस स्टेशन में शकुंतला के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस ने केस दर्ज करके शकुंतला को गिरफ्तार कर लिया है। बाद में शकुंतला को जमानत पर रिहा कर दिया गया।

गिरफ्तारी के दौरान शकुंतला भाजपा की महिला मोर्चा के साथ तमकुरु जिले के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय पर प्रदर्शन कर रही थीं। बताते चलें कि 27 जुलाई को भाजपा ने 3 मुस्लिम छात्राओं द्वारा हिन्दू लड़कियों का शौचालय में वीडियो बनाने के आरोप में राज्यव्यापी प्रदर्शन किया था।

जिन्होंने रखी राम मंदिर की पहली ईंट, उनसे जानिए कैसे बदला मिथिला के मुस्लिमों का ‘कैरेक्टर’: क्यों बात दरभंगा में शव के साथ अमानवीयता तक पहुँची

बिहार के कमतौल थाना क्षेत्र के धर्मपुर गाँव में बुजुर्ग श्रीकांत पासवान के शव के साथ अमानवीयता ने पहले लोगों को चौंकाया। फिर मोहर्रम से पहले दरभंगा जिले में 27 जुलाई से 30 जुलाई 2023 की शाम तक सोशल साइट्स की सेवाओं पर लगी पाबंदी ने। सोशल मीडिया में लोग बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बिहार पुलिस से इसका कारण पूछ रहे हैं। लेकिन जवाब मिल नहीं रहे। विश्व हिंदू परिषद (दक्षिण बिहार) के प्रांतीय अध्यक्ष कामेश्वर चौपाल (Kameshwar Choupal) के अनुसार यह स्थिति ‘तुष्टिकरण’ से बिहार खासकर मिथिला क्षेत्र के मुस्लिमों के कैरेक्टर में आए बदलाव और जाति में बँटे हिंदुओं की कमजोरी के कारण आई है। वे कहते हैं,

जो स्थिति है उसमें एक दिन कश्मीर की तरह मिथिला जलते हुआ अंगारे पर खड़ा मिलेगा।

बिहार विधान परिषद के सदस्य रह चुके चौपाल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य भी हैं। उन्होंने ही अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के नींव की पहली ईंट 9 नवंबर 1989 को रखी थी। ऑपइंडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “यह अचानक नहीं हुआ है। यह स्थिति पिछले कुछ दिनों में दरभंगा में हुई घटनाओं के कारण भी नहीं है। यह उस सेकुलर राजनीति का नतीजा है जो मुस्लिमों को पोषित होने के लिए खाद-पानी देने और हिंदुओं को जाति में बाँटकर कमजोर करने का काम करती है।”

मिथिला की डेमोग्राफी भी बदली, मुस्लिमों का कैरेक्टर भी

चौपाल के अनुसार बिहार के मिथिला क्षेत्र में न केवल डेमाग्राफी तेजी से बदल रही है, बल्कि मुस्लिमों का कैरेक्टर भी बदला है। गाँव-गाँव में धर्मांतरण हो रहा है। यह है कॉन्ग्रेस की पुरानी प्लानिंग का नतीजा। अपनी बात आगे बढ़ाते हुए वे कहते हैं, “80 के दशक में जब मैथिली को संविधान की अष्टम अनुसू​ची में शामिल करवाने का संघर्ष चल रहा था, तब अचानक से एक कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री (डॉ. जगन्नाथ मिश्रा) ने उर्दू को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दे दिया। त्रि भाषा सूत्र से संस्कृत को बाहर कर उर्दू को शामिल कर दिया। मि​थिला के नौ जिलों को मुस्लिम प्रभावी बताकर इसकी शुरुआत की गई। नतीजा जिस स्कूल में दो भी उर्दू पढ़ने वाले बच्चे थे, उर्दू शिक्षक की बहाली हुई। लेकिन मैथिली की स्कूलों में पढ़ाई की कोई व्यवस्था नहीं थी। इस तुष्टिकरण ने एक तरफ मैथिल हिंदुओं को अपनी भाषा से काट दिया, दूसरी तरफ गैर मैथिली भाषी मुस्लिमों का बीज बो दिया।” वे कहते हैं,

आज आप देखिए मुस्लिम मैथिली नहीं बोलते हैं। कुछ दशक पहले तक उनकी बोली हमारी तरह थी। हमारी तरह वे कपड़े पहनते थे। आज उनका बच्चा पैदा होते ही टखने से ऊपर उठे पायजामे और सिर पर टोपी डाले दिखने लगता है।

तुष्टिकरण का चरम- MY समीकरण

चौपाल के अनुसार जो बीजारोपण कॉन्ग्रेस ने किया उसे लालू प्रसाद यादव ने खुलमखुल्ला MY (मुस्लिम+यादव) से फलने-फूलने दिया। यह राजनीतिक समीकरण तुष्टिकरण का चरम था। जब नीतीश कुमार आए तो उन्होंने भी जोड़ने का नहीं, तोड़ने का काम किया। उन्होंने देखा कि यादव जातीय तौर पर प्रबल है और उसके साथ मुस्लिम खड़ा है तो अपना राजनीतिक वर्चस्च स्थापित करने के लिए हिंदुओं की पिछड़ी, ​अति पिछड़ी जातियों को तोड़ने का काम किया। महादलित का झुनझुना उसकी ही उपज है। इन दोनों ने एक तरफ हिंदुओं के भीतर जाति विद्वेष भरा। जातीय आधार पर राजनीतिक गोलबंदी को हवा दी। दूसरी तरफ मुस्लिम तुष्टिकरण करते रहे। इस तुष्टिकरण की वजह से बिहार में तबलीगी जमात का असर बढ़ता गया। मुस्लिमों में कट्टरपंथ बढ़ता गया।

तबलीगी जमात ने सोच बदली, घुसपैठियों ने डेमोग्राफी

कामेश्वर चौपाल के अनुसार तबलीगी जमात और इस्लामिक मुल्कों से आए पैसों से मुस्लिमों की सोच बदली गई तो रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों ने डेमोग्राफी चेंज करने में भूमिका निभाई। आज कोसी से पूरब और पश्चिम का जो भाग है, उनमें किशनगंज में करीब 78, कटिहार में 65, पूर्णिया में 50 और मधुबनी-दरभंगा में 32 परसेंट मुस्लिम हैं। यह 2011 की जनसंख्या के आँकड़े हैं। यदि उसके बाद उनकी आबादी में हुए इजाफे को जोड़ दीजिए तो मिथिला क्षेत्र में मुस्लिमों की आबादी अब करीब 39 प्रतिशत होगी। आबादी में बहुत कम फासला रहने पर यह हाल है। जैसे ही उनकी आबादी बढ़ी तो मिथिला की हालत कश्मीर जैसी हो जाएगी। चौपाल के मुताबिक खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली पार्टियाँ इसकी जमीन तैयार कर रही हैं। असल में ये पार्टियाँ इस्लामी कट्टरपंथ के लिए स्लीपर सेल का काम कर रही हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों के लिए मिथिला आसान टारगेट क्यों

चौपाल के अनुसार मिथिला इस्लामी कट्टरपंथियों को आसान टारगेट इसलिए भी लगता है कि स्वतंत्रता के बाद से जाति का टैबलेट इस इलाके में काफी कारगर रहा है। वे कहते हैं, “पंडित को जगन्नाथ/ललित मिश्र ने खिलाया, यादव को लालू ने खिलाया, कुर्मी को नीतीश ने। आज कोई (मुकेश सहनी) मल्लाह को टैबलेट खिला रहा है तो वे पागल हो रहे हैं। इस टैबलेट का सब खुलमखुल्ला उपयोग कर रहे हैं। इस जाति के पॉलिटिक्स ने हिंदुओं को कमजोर कर दिया है। इसलिए मिथिला में अब कोई हिंदू नहीं दिखता। जिनको मुस्लिम का भय है, वही हिंदू है। बाकी अपनी जातीय पहचान के साथ जी रहे हैं। दूसरी तरफ 72 फिरके होने के बावजूद कोई मुस्लिम जातीय पहचान के साथ नहीं जी रहा। वो एक ही बात कहेगा हम मियां हैं।”

अल्पसंख्यक संस्थानों ने तैयार किया आर्थिक आधार

मुस्लिमों के कैरेक्टर में बदलाव की एक बड़ी वजह चौपाल कॉन्ग्रेस के उस ‘कुकृत्य’ को भी बताते हैं, जिसने अल्पसंख्यकों के नाम पर मुस्लिमों को सुविधा से इतर ऐसी संवैधानिक व्यवस्था भी दी जिससे अल्पसंख्यक संस्थान के लिए ग्रांट का जुगाड़ हो सके। वे कहते हैं, “आप अपने किसी भी संस्थान में हिंदू धर्म-संस्कृति के बारे में नहीं पढ़ा सकते। लेकिन वहाँ कलमा और बाइबिल से ही पढ़ाई शुरू होती है। उनका काम है केवल संस्थान खड़ा कर देना। उनका संपोषण करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। इसके कारण इतने अल्पसंख्यक संस्थान खुले, जिससे उनका एक आर्थिक आधार तैयार हो गया है। मिथिला के ही इलाकों में आज देखिए अल्पसंख्यक के नाम पर कितने मेडिकल, डेंटल और टीचर ट्रेनिंग कॉलेज खुले हुए हैं। ये सारे संस्थान पैसा उगाही का केंद्र हैं।”

चौपाल की माने तो अल्पसंख्यक संस्थानों के नाम पर हो रही उगाही हो या इस्लामिक मुल्कों से आ रहा पेट्रो पैसा हो, घुसपैठिए हों या गाँव-गाँव हो रहा धर्मांतरण, इन सबका ही असर है कि हिंदुओं के धार्मिक आयोजनों पर पत्थर फेंकते-फेंकते बात अब शव के साथ अमानवीयता तक पहुँच गई है। उनके मजहबी जुलूसों से पहले नेटबंदी हो रही है।

उडुपी कॉलेज में गुप्त रिकॉर्डिंग करने वाली तीनों छात्राओं को जमानत, छात्राओं ने बताया था- 1 साल से मुस्लिम लड़कों को शेयर किए जा रहे थे वीडियो

कर्नाटक के उडुपी के नेत्र ज्योति कॉलेज में हिंदू छात्राओं का अश्लील वीडियो बनाने की आरोपित तीनों छात्राओं को सशर्त जमानत मिल गई है। एक मजिस्ट्रेट अदालत ने 20 हजार रुपए के मुचलके पर इन्हें जमानत दी है। इस मामले में उडुपी पुलिस ने आरोपित तीनों मुस्लिम छात्राओं के खिलाफ दो FIR दर्ज की थी। एक मामला टॉयलेट में छात्रा के बनाए गए वीडियो को डिलीट करने को लेकर तीन छात्राओं और कॉलेज प्रशासन से जुड़ा है। दूसरा मामला यूट्यूब चैनलों पर हिडन कैमरे वाला वीडियो अपलोड करने से जुड़ा है।

अतिरिक्त सिविल जज श्याम प्रकाश ने आरोपित छात्राओं की याचिका पर 28 जुलाई 2023 को सुनवाई की। आरोपित छात्राओं के वकील असदुल्ला काटपाडी ने दावा किया कि मामला राजनीति से प्रेरित है और शिकायत पीड़ित छात्रा ने दर्ज नहीं कराई है। अदालत ने इसके बाद तीनों को 20-20 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दे दी। साथ ही जाँच में सहयोग करने और सभी अदालती सुनवाई में भाग लेने का आदेश दिया।

बताते चलें कि कर्नाटक के उडुपी में स्थित प्राइवेट कॉलेज नेत्र ज्योति की महिला हॉस्टल के टॉयलेट में मोबाइल कैमरा मिलने के बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ था। कॉलेज में पढ़ने अलीमातुल शैफा, शबानाज़ और आलिया नाम की तीन मुस्लिम छात्राओं ने टॉयलेट में मोबाइल कैमरा लगा रखा था। इसमें हिंदू लड़कियों के प्राइवेट वीडियो रिकॉर्ड कर वे मुस्लिम लड़कों को भेजा करती थीं।

आरोप है कि उडुपी के नेत्रज्योति कॉलेज के महिला शौचालय में हिंदू लड़कियों के टॉपलेस वीडियो रिकॉर्ड किए गए और बाद में मुस्लिम समूहों के साथ साझा किए गए। कॉलेज प्रबंधन ने मामले की जाँच की और निष्कर्ष निकाला कि वीडियो डिलीट कर दिया गया था। इसके बाद मामला खत्म हो गया। लेकिन लोगों के आक्रोश के बाद उडुपी जिले के मालपे पुलिस स्टेशन में मामले का स्वत: संज्ञान लेकर FIR दर्ज की गई।

वीडियो बनाने के लिए ज़िम्मेदार अलीमतुल शैफ़ा, शबानाज़ और आलिया नाम के तीन मुस्लिम छात्रों के साथ-साथ नेत्रज्योति कॉलेज के प्रबंधन बोर्ड पर सबूत नष्ट करने का आरोप है। पुलिस ने IPC की धारा 509, 204, 175 और 34 के तहत मामले दर्ज किए हैं।  ‘TV9 कन्नड़’ के साथ एक इंटरव्यू में इसी कॉलेज की छात्राओं ने बताया था कि मुस्लिम लड़कियाँ पिछले 1 साल से हिन्दू छात्राओं के वीडियो बना रही थीं और मुस्लिम लड़कों के साथ साझा कर रही थीं।

छात्राओं ने बताया था, “पिछले एक साल से ये सब हो रहा था। कॉलेज के बाहर मुस्लिम लड़के कार में इंतजार करते रहते थे। हिन्दू लड़कियों का वीडियो रिकॉर्ड करने के बाद मुस्लिम लड़कियाँ उन्हें जाकर अपना फोन दे देती थीं। दोपहर में लंच के समय मोबाइल फोन्स की अदला-बदली होती थी। कॉलेज मैनेजमेंट के सामने इसकी शिकायत की गई थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। 18 जुलाई, 2023 को पीड़िता ने कॉलेज प्रबंधन से फिर शिकायत की।”

लड़कियों ने बताया था कि मैनेजमेंट ने इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। 2 दिन बाद 20 जुलाई को कॉलेज की अन्य छात्राओं को इस बारे में पता चला और वो धरना प्रदर्शन पर बैठ गईं। छात्राओं ने बताया कि तीनों आरोपित मुस्लिम लड़कियों ने मोबाइल फोन में वीडियो डाल कर ऊच्चीला से आए मुस्लिम लड़कों को दिया था। ये लड़के पल्सर बाइक और कार से आते थे।

बहन नरगिस से निकाह करना चाहता था इरफान, इनकार करने पर लोहे के रॉड से मार डाला: पार्क में बेंच के नीचे पड़ी मिली लाश

दिल्ली के मालवीय नगर में इरफान ने अपनी मौसेरी बहन नरगिस की हत्या कर दी। वह नरगिस से निकाह करना चाहता था। लेकिन इनकार किए जाने पर उसने नरगिस के सिर पर लोहे की रॉड से तब तक वार किए, जब तक उसकी मौत नहीं हो गई। घटना शुक्रवार (28 जुलाई, 2023) की है। नरगिस की लाश एक पार्क में बेंच के नीचे पड़ी मिली थी। इरफान को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नरगिस और इरफान की अम्मी सगी बहनें हैं। घरवालों ने दोनों की शादी भी तय कर दी थी। लेकिन इरफान डिलीवरी बॉय का काम करता था। उसका यह काम नरगिस के घरवालों को पसंद नहीं था। इसलिए उन्होंने शादी से इनकार कर दिया। इसके बाद नरगिस ने भी इरफान से बात करना बंद कर दिया। उसका नंबर भी ब्लॉक कर दिया था।

एक ओर जहाँ इरफान की नरगिस से शादी टूट गई। वहीं इरफान के छोटे भाई की शादी तय हो गई। इससे वह और परेशान हो गया। वह लगातार नरगिस से मिलने की कोशिश करता था। लेकिन मुलाकात नहीं हो पा रही थी। इरफान को पता था कि नरगिस मालवीय नगर में स्टेनो की कोचिंग करती है। इसलिए वह उससे मिलने उसकी कोचिंग पर पहुँच गया। नरगिस को बातचीत करने के बहाने पास के पार्क में ले गया।

यहाँ पहले से ही उसकी बाइक खड़ी थी। इस बाइक में एक बैग था। इसी बैग में इरफान ने लोहे का रॉड छिपा रखा था। पार्क में नरगिस से इरफान निकाह की बात कहने लगा। लेकिन नरगिस ने इनकार कर दिया। इससे नाराज होकर इरफान ने अपने बैग से रॉड निकाली और नरगिस के सिर पर लगातार वार करने शुरू कर दिए।

इससे नरगिस जमीन पर गिर गई। इसके बाद भी इरफान नहीं रुका। वह नरगिस के सिर पर ताबड़तोड़ वार करता रहा। इससे उसकी मौत हो गई। इसके बाद नरगिस और खून लगी रॉड को मौके पर छोड़कर इरफ़ान फरार हो गया। हत्या की सूचना मिलने पर पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की जाँच करते हुए इरफान को गिरप्तार कर लिया। नरगिस के पिता ने इरफान को मौत की सजा देने की माँग की है। उन्होंने कहा है, “मेरी एक ही लड़की थी। मैं उसे छोड़ूँगा नहीं।”

‘मुस्लिम बनो नहीं तो जान से मार देंगे’: तिलक लगाकर स्कूल आए हिंदू छात्र को पीटा, तनाव के बाद राजस्थान के गाँव में भारी पुलिस बल तैनात

राजस्थान के अलवर जिले के एक स्कूल में तिलक लगाकर आने पर हिंदू छात्र की पिटाई का मामला सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार पहले स्कूल के मुस्लिम छात्रों ने मारपीट की फिर उसके परिजन ने भी स्कूल में घुसकर हिंदू छात्र की पिटाई कर दी। गुरुवार (27 जुलाई, 2023) को हुई इस घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर तनाव का माहौल है। मामले में पुलिस ने 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला अलवर जिले के चौमा गाँव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल का है। मामले की शुरुआत मंगलवार (25 जुलाई, 2023) को हुई। इस दिन मुस्लिम छात्रों ने हिंदू छात्र के तिलक लगाकर स्कूल आने का विरोध किया। इसके अगले दिन यानी बुधवार (26 जुलाई, 2023) को कई हिंदू छात्र तिलक लगाकर स्कूल पहुँच गए। मुस्लिम छात्रों ने फिर इसका विरोध किया। बढ़ते विरोध को देखते हुए स्कूल के प्रिसिंपल ने दोनों पक्षों को बातचीत से समझाने की कोशिश की।

प्रिंसिपल का कहना था कि तिलक लगाने पर किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन गुरुवार (27, जुलाई 2023) को सुबह करीब 9 बजे तिलक लगाने को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया। मामले की शुरुआत दो छात्रों के बीच हुई थी। बाद में कुछ अन्य छात्र भी इसमें शामिल हो गए। आरोप है कि तिलक लगाने को लेकर 7-8 मुस्लिम छात्रों ने 11वीं में पढ़ने वाले हिंदू छात्र को धमकी दी थी। यही नहीं आरोपित मुस्लिम छात्रों ने पीड़ित हिंदू छात्र के माथे से तिलक हटाने की भी कोशिश की।

इससे परेशान होकर पीड़ित छात्र मामले की शिकायत प्रिंसिपल से करने जा रहा था। इसी दौरान मुस्लिम छात्रों ने उसे घेरकर उसके माथे का तिलक हटा दिया और फिर उसके साथ जमकर मारपीट की। मामला यहीं शांत नहीं हुआ। इस मामले की जानकारी आरोपित छात्र के परिजन यूसुफ मेव को मिली तो वह स्कूल में आ धमका। इसके बाद उसने भी पीड़ित छात्र के साथ मारपीट की और फरार हो गया। पीड़ित का कहना है कि आरोपित छात्र और उसके परिजन द्वारा उसे इस्लाम कबूलने को लेकर धमकी दी गई है। कहा गया है कि कि अगर वह मुस्लिम नहीं बना तो उसे जान से मार दिया जाएगा।

स्कूल में हुई इस घटना को लेकर पीड़ित के परिजनों ने स्थानीय रामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित के बयान और शिकायत के आधार पर पुलिस ने IPC की धारा 143, 323, 341, 506, 295(क) के तहत 6 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में पुलिस का कहना है कि विवाद को लेकर दोनों पक्षों के बीच बातचीत चल रही है। तनाव को बढ़ने से रोकने और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए गाँव में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।

तिलक लगाने पर स्कूल से निकाला

बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ में तिलक लगाने और रुद्राक्ष पहनने को लेकर स्कूल से एक छात्रा को निकालने का मामला सामने आया था। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि छात्रा से त्रिपुंड छोटा करने के लिए कहा गया था। लेकिन वह नहीं मान रही थी। स्कूल का माहौल खराब कर रही थी। इसके अलावा दूसरे धर्म के छात्रों पर कमेंट भी करती थी। मामले की जानकारी मिलने पर अधिकारियों ने जाँच कर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी। 


आयुर्वेद की शरण में पहुँचे राहुल गाँधी, 121 साल पुरानी वैद्यशाला में करा रहे हैं घुटने का इलाज; ‘भारत जोड़ो यात्रा’ से शुरू हुआ था दर्द

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी (Congress Leader Rahul Gandhi) केरल के मलप्पुरम में अपने घुटने का इलाज करा रहे हैं। यहाँ वह 121 साल पुराने आयुर्वेदिक संस्थान कोट्टक्कल आर्य वैद्यशाला में भर्ती हैं। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान उन्हें घुटने में दर्द की शिकायत हुई थी। बीते एक सप्ताह से इलाज करवा रहे राहुल गाँधी को वैद्यशाला से शनिवार (29 जुलाई 2023) को छुट्टी मिलेगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कोट्टक्कल आर्य वैद्यशाला के पी. मदनवनकुट्टी वेरियर और के. मुरलीधरन के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक टीम राहुल गाँधी के इलाज में जुटी हुई है। इलाज से पहले राहुल गाँधी ने आर्य वैद्यशाला परिसर में बने श्री विश्वंभर मंदिर में पूजा-अर्चना भी की थी। 

यह मंदिर आयुर्वेद के जनक और और देवताओं के चिकित्सक भगवान धन्वंतरि को समर्पित है। भगवान धन्वंतरि को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। केरल के मलप्पुरम स्थित वैद्यशाला में इलाज कराने के लिए आने वाले सभी रोगी सबसे पहले इस मंदिर में जरूर दर्शन करते हैं।

ज्ञात हो कि घुटने का इलाज कराने के लिए राहुल गाँधी 22 जुलाई 2023 को कोट्टक्कल पहुँचे थे। इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, विधायक अनिल कुमार और मलप्पुरम जिला कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष वीएस जॉय भी उनके साथ थे। राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा की थी। इसी दौरान उनके घुटनों में दर्द होना शुरू हो गया था।

केरल के कोटक्कल में स्थित आर्य वैद्यशाला की वेबसाइट के अनुसार, यह संस्थान एक सदी से भी अधिक पुराना है। साल 1902 में वैद्यरत्नम पीएस वारियर ने इसकी स्थापना की थी। आरंभ में यह वैद्यशाला एक छोटे क्लीनिक के रूप में शुरू हुई थी। अब यह बड़े संस्थान में बदल चुका है।

इसकी दवाइयों की माँग भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी है। कोट्टक्कल, कांजीकोड और नंजनगुड में आर्य वैद्यशाला की मेडिसिन मैनुफैक्चरिंग यूनिट हैं, जिसमें 550 से भी ज्यादा आयुर्वेदिक दवाओं का निर्माण किया जाता है।

‘महाराष्ट्र नहीं छोड़ सकते, पासपोर्ट जमा करो’: भीमा-कोरेगाँव मामले में अर्बन नक्सल वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा को SC से जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने अर्बन नक्सली वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा को जमानत दे दी है। जमानत के साथ ही कोर्ट ने कई तरह की शर्तें भी लगाई हैं। दोनों को भीमा-कोरेगाँव हिंसा की साजिश रचने और प्रतिबंधित माओवादी संगठन के साथ संबंध रखने के आरोप में साल 2018 में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद से दोनों जेल में थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस सुधांशु धूलिया ने शुक्रवार (28 जुलाई 2023) को सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए कहा है कि बेशक उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं लेकिन केवल आरोपों के चलते जमानत देने से इनकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट द्वारा यह भी टिप्पणी की गई कि गंभीर आरोपों को देखते हुए मामले की सुनवाई चलते रहने तक आरोपितों को हिरासत में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि दोनों आरोपित 5 साल से हिरासत में हैं, इसलिए उन्हें सशर्त जमानत दी जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा को विशेष NIA कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों के साथ जमानत दी है। इन शर्तों में कहा गया है कि मुकदमा चलने तक दोनों महाराष्ट्र नहीं छोड़ सकते। दोनों आरोपितों को अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा। साथ ही NIA को अपना पता और मोबाइल नंबर देना होगा।

कोर्ट के निर्देश के अनुसार जमानत के दौरान केवल 1 ही मोबाइल का उपयोग आरोपित कर सकते हैं। दोनों आरोपितों को इस बात का ध्यान रखना होगा कि उनके मोबाइल फोन हमेशा चार्ज रहें। साथ ही वे अपने फोन की लोकेशन चालू रखेंगे ताकी उनकी लाइव-ट्रैकिंग NIA को मिल सके। दोनों को हर सप्ताह जाँच अधिकारी को रिपोर्ट करना होगा।

बता दें कि वर्नोन गोंजाल्विस और अरुण फरेरा साल 2018 से मुंबई की तलोजा जेल में बंद हैं। मुंबई हाई कोर्ट ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालाँकि सह-आरोपित सुधा भारद्वाज को जमानत मिल गई थी। इसी के खिलाफ गोंसाल्विस और फरेरा ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जहाँ से उन्हें भी जमानत मिल गई।

क्या है भीमा-कोरेगाँव मामला:

भीमा-कोरेगाँव में 1 जनवरी 2018 को हिंसा भड़की थी। इस हिंसा से एक दिन पहले 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद ने एक बैठक बुलाई थी। पुणे पुलिस का दावा है कि भीमा-कोरेगाँव हिंसा के तार सीधे तौर पर एलगार परिषद से जुड़े हुए हैं। पुलिस का यह भी मानना है कि गोंजाल्विस और परेरा व अन्य के कारण ही भीमा-कोरेगाँव में हिंसा भड़की थी।

पुणे पुलिस के अनुसार ये दोनों प्रतिबंधित माओवादी संगठन में भर्ती के लिए के लिए लोगों को उकसा रहे थे और सीपीएम (माओवादी) के लिए कैडर तैयार कर रहे थे। यही नहीं ये दोनों 4 ऐसे संगठनों से जुड़े थे, जो प्रतिबंधित माओवादी संगठन के मुखौटे के रूप में काम करते हैं।