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दिल्ली के मुहर्रम जुलूस में पथराव, 10 पुलिस वाले घायल… पश्चिम बंगाल में मुहर्रम पर दुर्गा मंदिर का रास्ता ही बंद

पश्चिम बंगाल में मुहर्रम से एक दिन पहले शुक्रवार (28 जुलाई 2023) को बैरिकेड लगाकर एक दुर्गा मंदिर का रास्ता बंद करने का मामला सामने आया। यह मंदिर मालदा जिले के कालियाचक में स्थित है। बंगाल से दूर दिल्ली के नांगलोई में मुहर्रम पर ताजिया निकलने के दौरान कट्टरपंथी मुस्लिमों ने पथराव किया। इसके कारण पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुँचा।

दिल्ली पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए लाठीचार्ज किया। दिल्ली पुलिस के अधिकारी हरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि नांगलोई में ताजिये के जुलूस में 8-10 हजार लोग मौजूद थे। इनमें से 1-2 आयोजनकर्ता ताजिये का जो रूट पहले से तय था, उससे अलग जाना चाह रहे थे। पुलिस ने जब मना किया तो जुलूस में शामिल लोगों ने पुलिस पर पथराव किया। इसमें 10 पुलिस वाले घायल हुए हैं।

नमाज में व्यवधान के नाम पर आतंक, शादी-ब्याह में DJ नहीं बजने देने के नाम पर बवाल काटने वाली कट्टरपंथी मुस्लिम सोच पर अब लोग सवाल उठा रहे। लोग पूछ रहे कि 29 जुलाई 2023 को मुहर्रम के दिन न तो कोई हिंदू त्योहार था, न ही काँवड़ियों की बात थी… फिर सड़कों पर आतंक किसने मचाया, क्यों मचाया?

दिल्ली पुलिस ने आतंक मचा रही कट्टर इस्लामी भीड़ पर जम कर लाठियाँ बरसाई हैं। सवाल यह उठता है कि पत्थरबाजी वाली मानसिकता से ग्रसित भीड़ को जुलूस का परमिशन दिया ही क्यों जाता है? अगर दिया जाता है तो देश के ही दूसरे राज्य बंगाल में हिंदू मंदिरों की बैरिकेडिंग क्यों कर दी जाती है?

हिंदू मंदिर की बैरिकेडिंग वाली घटना को लेकर भाजपा ममता बनर्जी सरकार पर हमलावर है। इसके बाद हालाँकि बैरिकेड हटा दिए गए। पश्चिम बंगाल बीजेपी के कार्यकर्ता अमित ठाकुर ने ट्वीट कर लिखा, “यह चौंकाने वाली तस्वीर पश्चिम बंगाल के मालदा के कालियाचक की है। जहाँ मुहर्रम के जुलूस के लिए दुर्गा मंदिर को ब्लॉक कर दिया गया है। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की यही हालत है। I.N.D.I.A. के सेक्युलर लोग इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं?”

इस ट्वीट के साथ उन्होंने ‘कालियाचक थाना शरबजनिन दुर्गा मंदिर’ नामक मंदिर की तस्वीर भी शेयर की। तस्वीर में देखा जा सकता है कि बाँस की बल्लियाँ लगाकर मंदिर को पूरी तरह से ब्लॉक करने की कोशिश की गई थी।

इस मामले पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी के इशारे पर पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा मंदिर में बेरिकेडिंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, ”पश्चिम बंगाल पुलिस ने मुहर्रम की पूर्व संध्या पर कालियाचक में दुर्गा मंदिर को ब्लॉक करते हुए बैरिकेड लगाए। यह ममता बनर्जी की सेक्युलरिज्म का ब्रांड है। यह हिंदुओं को नीचा दिखाने और बदनाम करने के लिए हो रहा है। ममता बनर्जी सरकार ने हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बना दिया है।”

मालवीय ने यह भी कहा, “यह कानून व्यवस्था सँभालने में ममता बनर्जी की असफलता को दिखाता है। सीएम का ऐसा पक्षपातपूर्ण दृष्टिकोण सामाजिक एकजुटता को खत्म करता है और खाइयों को बढ़ाता है। उनकी राजनीति इसके बल पर ही फलती-फूलती है।”

पश्चिम बंगाल बीजेपी के विधायक शुभेंदु अधिकारी ने TMC सरकार की आलोचना करते हुए लिखा, “मैं शर्त लगाता हूँ कि उस इलाके की कोई भी मुहर्रम आयोजन समिति इस तरह के कदम की माँग नहीं कर सकती थी, जिससे सनातनियों को ठेस पहुँचे। सीधे तौर पर यह पश्चिम बंगाल पुलिस की ‘अतिसक्रियता’ है। ममता बनर्जी के शब्दकोश में ‘सेक्युलरिज्म’ ‘वोट बैंक की राजनीति’ का दूसरा नाम है। यही कारण है कि सरकार धार्मिक त्योहारों के दौरान ‘अतिसक्रियता की समस्या’ से ग्रस्त है। ममता बनर्जी सरकार में आम तौर पर कुछ ऐसा होता रहा है, जिससे सनातनियों की भावनाएँ आहत होती हैं।”

राज्य के मुख्य सचिव के तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हुए, शुभेंदु अधिकारी ने कहा, “ममता बनर्जी अपनी ओछी राजनीति के लिए जानबूझकर बैरिकेडिंग लगवा रही हैं और दोनों समुदायों के बीच दरार पैदा कर रही हैं। वह कलह पैदा करने और दोनों समुदायों के बीच सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं।”

हालाँकि बाद में शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि दुर्गा मंदिर के बाहर से बैरिकेड्स हटा दिए गए हैं।

वहीं, कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि मुहर्रम के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए हिंदुओं ने ही मंदिर के बाहर बैरिकेड्स लगाए थे।

बहरहाल, यहाँ यह बताना जरूरी है कि ममता बनर्जी ने मुहर्रम जुलूस को रास्ता देने के लिए साल 2016 और 2017 में माँ दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन पर रोक लगा दी थी।

पाकिस्तानी बॉयफ्रेंड की कहानी सीमा हैदर और अंजू जैसी फेमस होने के लिए: जयपुर में 17 साल वाली लड़की की खुली पोल, माँ-बाप पहुँचे थाने

पाकिस्तान से भारत आई सीमा हैदर और भारत से पाक गई अंजू लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं। इन दोनों को मिली मीडिया कवरेज देखने के बाद एक नाबालिग लड़की पाकिस्तान जाने की टिकट खरीदने के लिए जयपुर एयरपोर्ट पहुँच गई। एयरपोर्ट कर्मचारियों से लड़की ने कहा था कि वह पाकिस्तान की है और 3 साल से भारत में रह रही थी। वहीं दोबारा पूछताछ के दौरान वह बॉयफ्रेंड से मिलने जाने की बात कहने लगी। हालाँकि बाद में लड़की ने कहा कि फेक पॉपुलैरिटी हासिल करने के लिए उसने यह सब किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार (28 जुलाई, 2023) दोपहर करीब 2 बजे 17 वर्षीय लड़की 2 लड़कों के साथ जयपुर एयरपोर्ट पहुँची थी। जहाँ उसने एयरपोर्ट कर्मचारियों से पाकिस्तान जाने के लिए टिकट की माँग की। नाबालिग लड़की की बात सुन एयरपोर्ट कर्मचारियों को लगा कि वह मजाक कर रही है। हालाँकि इसके बाद उसने कहा कि वह पाकिस्तानी है और 3 साल पहले उसकी बुआ उसे भारत ले आई थी। तब से वह सीकर जिले के श्रीमाधोपुर में रह रही थी। अब उसका बुआ से झगड़ा हो गया है। इसलिए वह वापस पाकिस्तान जाना चाहती है।

लड़की की बात सुन एयरपोर्ट कर्मचारियों ने सीआईएसएफ को इसकी जानकारी दी। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर उसे पूछताछ की गई। डीसीपी ईस्ट ज्ञानचंद यादव का कहना है कि लड़की ने कहा था कि वह लाहौर के पास इस्लामाबाद की रहने वाली है। हालाँकि बाद में हुई पूछताछ में उसने कहा कि वह श्रीमाधोपुर की रहने वाली है। करीब एक साल पहले इंस्टाग्राम पर उसकी दोस्ती लाहौर में रहने वाले असलम लाहोरी से हुई थी। उसकी स्कूल की अन्य लड़कियाँ भी असलम की दोस्त हैं। असलम ने ही उसे एयरपोर्ट में क्या और कैसे बोलना है, यह सब सिखाया है। लड़की के बयान को सच मानकर पुलिस ने उसके फोन को कब्जे में लेकर जाँच शुरू कर दी थी।

डीसीपी ने आगे कहा है कि पुलिस पूछताछ में लड़की ने बताया था कि बस में उसे दो लड़के मिले थे, जो कि बुआ के गाँव के पास के रहने वाले हैं। उसने उन लड़कों से एयरपोर्ट आने के लिए मदद माँगी थी। इसलिए वह उसे छोड़ने एयरपोर्ट आए हैं। वहीं लड़कों का कहना था कि जिस बस से लड़की एयरपोर्ट आई थी, वह भी उसी बस में बैठे हुए थे। बस में उनकी बात लड़की से हुई थी। इसलिए वह उसे छोड़ने एयरपोर्ट आ गए।

लड़की की बातें सुनने के बाद पुलिस ने उसके घरवालों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। इंडिया टुडे ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि लड़की सीकर जिले के श्रीमाधोपुर की नहीं बल्कि रतनपुर गाँव की है। पुलिस ने लड़की के परिजनों को इसकी सूचना दी तो उनका कहना था कि लड़की कहाँ जा रही है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। इसके बाद पुलिस ने परिजनों को थाने आने के लिए कहा। माता-पिता को थाने में देख लड़की के हाव-भाव बदल गए।

इसके बाद उसने पुलिस से कहा कि सीमा हैदर और अंजू लगातार मीडिया में हैं। पूरा देश दोनों के बारे में जानता है। इसलिए लोकप्रिय होने के लिए उसने यह पूरा नाटक गढ़ा था। लड़की की इन बातों को सुनकर पुलिसकर्मी भी दंग रह गए। हालाँकि पुलिस अब भी लड़की से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह जानना चाहती है कि कहीं लड़की अब भी झूठ तो नहीं बोल रही।

Belated ITR: बाढ़, OTP, बीमारी… टैक्स देने वाले डेट बढ़ाने की कर रहे माँग, ₹5000 देकर 31 जुलाई के बाद भी है ऑप्शन

इनकम टैक्स रिटर्न यानी आईटीआर भरने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2023 है। यानी अब ITR भरने के लिए गिनती के दिन ही बचे हुए हैं। इस बीच सोशल मीडिया पर डेड लाइन बढ़ाने की माँग हो रही है। लोगों का कहना है कि इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट में समस्या होने के चलते उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

साथ ही देश के अधिकांश हिस्सों के बाढ़ प्रभावित होने व मौसम में बदलाव के चलते बीमार होने के कारण भी लोग ITR भरने के लिए डेट बढ़ाने की माँग कर रहे हैं। लेकिन यदि सरकार ने सख्ती दिखाते हुए डेट नहीं बढ़ाई तो लोगों को 5000 रुपए तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।

इनकम टैक्स विभाग की हेल्प डेस्क 31 जुलाई 2023 तक 24 घण्टे और 7 दिनों खुली हुई है। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए यूजर्स फोन कॉल से लेकर लाइव चैट व सोशल मीडिया समेत अन्य तरीकों से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

आकड़ों पर गौर करें तो 27 जुलाई 2023 तक 5.03 करोड़ से अधिक लोग अपना ITR भर चुके हैं। इनकम टैक्स विभाग लोगों से आखिरी तारीख का इंतजार न करने और जल्द से जल्द ITR फाइल करने की अपील कर रहा है।

वहीं, टैक्सपेयर्स अपनी समस्या सुनाते हुए #Extend_Due_Date के साथ ट्वीट कर कह रहे हैं कि टैक्स भरने के लिए उन्हें कुछ और दिन की मोहलत दी जाए। हालाँकि टैक्सपेयर्स की बढ़ी हुई संख्या और सरकार के रिएक्शन को देखते हुए डेड लाइन बढ़ाने की संभावना बेहद कम है। राजस्व सचिव संजय मल्होत्रा ​​ने भी हाल ही में कहा था कि 31 जुलाई 2023 से आगे समय सीमा बढ़ाने पर कोई विचार नहीं किया गया है।

एडवोकेट नीलेश कुशवाहा नामक यूजर ने लिखा, “माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी इनकम टैक्स पोर्टल ठीक से काम नहीं कर रहा है। कृपया आखिरी तारीख बढ़ा दीजिए।”

भरत शेन्द्रे नामक यूजर ने वित्त मंत्रालय, इनकम टैक्स विभाग और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को टैग करते हुए लिखा, “इनकम टैक्स पोर्टल लॉग इन करने के कुछ ही मिनट बाद सर्विस अनएविलेवल का एरर बता रहा है। दोबारा लॉग इन करने पर सेव किया हुआ आईटीआर दिखाई नहीं देता। हमें हर बार नए सिरे से ITR भरना पड़ रहा है। कृपया इसे जल्द-जल्द से ठीक करें।”

कपिल नामक यूजर ने लिखा, “इनकम टैक्स विभाग मैं बीते सालों के इनकम टैक्स रिटर्न डाउनलोड नहीं कर पा रहा हूँ। कृपया इस समस्या को जल्द से जल्द हल करें।”

उमाशंकर गुप्ता नामक यूजर ने सड़क में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति का वीडियो शेयर कर लिखा, “अब कोई बताए कैसे रिटर्न फाइल करें। जब हालत इतने बुरे हैं जयपुर राजस्थान में।”

निखिल नामक यूजर ने लिखा, “इनकम टैक्स पोर्टल पर नए रजिस्ट्रेशन के लिए ईमेल पर ओटीपी नहीं आ रहा है। साइट ठीक से काम नहीं कर रही है। लेकिन कहा जा रहा है कि पोर्टल ठीक से काम कर रहा है।”

हितेश शाह नामक यूजर लिखा, “पूरे भारत में भारी बारिश के कारण बुखार, आँखों में सूजन जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ व इंटरनेट कनेक्शन की समस्या है। इसलिए निवेदन है आखिरी तारीख बढ़ा दीजिए। यह जनता के पक्ष में है।”

इन सब परेशानियों के बावजूद इनकम टैक्स विभाग लोगों से जल्द से जल्द ITR फाइल करने की अपील कर रहा है।

मुहर्रम में मातम: 6 की मौत, कइयों की हालत गंभीर – ताजिया में लगे बिजली के झटके, मुस्लिमों की आपसी भिड़ंत में दर्जनों घायल

देश के अलग-अलग हिस्सों में मुस्लिम समुदाय द्वारा मुहर्रम का मातम मनाया जा रहा है। इस दौरान ताजिया के साथ जुलूस निकाले जा रहे हैं। कुछ हिस्सों में लापरवाही के चलते दुर्घटनाओं की भी सूचना है। इन दुर्घनाओं के चलते जुलूस में शामिल कुछ लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल हो गए हैं। घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है।

बोकारो में करंट से 4 की मौत, 14 घायल

पहला मामला झारखंड के बोकारो से है। यहाँ शनिवार (29 जुलाई 2023) को मातमी जुलूस के दौरान ताजिया हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गया। इस घटना से भीड़ में चल रहे कई लोगों को एक साथ करंट के झटके लगे। हादसे से जुलूस में अफरातफरी मच गई। करंट लगने की वजह से कुल 4 लोगों की मौत हो गई जबकि 14 अन्य घायल हो गए।

घायलों को अस्पताल ले जाया गया है, जहाँ कुछ लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रत्येक मृतक के परिवार को 2 लाख रुपए आर्थिक सहायता की घोषणा की है। हादसे का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गुजरात के धोराजी में 2 की मौत

झारखंड के बोकारो जैसा ही मामला गुजरात के राजकोट में आने वाले धोराजी इलाके से आया है। यहाँ रसूलपारा इलाके में शनिवार (29 जुलाई 2023) को निकल रहे ताजिया से हाईटेंशन लाइन टकरा गई। इस हादसे के बाद ताजिया में करंट उतर आया, जिससे 24 लोग झुलस गए। अब तक कुल 2 लोगों की मौत की सूचना है।

गंभीर रूप से लगभग 20 घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जिनमें 3 की हालत गंभीर है। धोराजी हादसे का भी वीडियो सामने आया है। यहाँ ताजिया ले जाते हुए उसका ऊपरी हिस्सा बिजली के तार से टकरा गया, जिससे हादसा हुआ।

गोपालगंज में 8 घायल

मुहर्रम के जुलूस में करंट से लोगों के घायल होने की घटना बिहार के गोपालगंज से भी सामने आई है। यहाँ 28 जुलाई 2023 (शुक्रवार) को उचकागाँव इलाके के धर्मपुर चक में ताजिया में लगा हरा बाँस ऊपर से गुजर रहे बिजली के तार से छू गया। इस वजह से ताजिया में करंट उतर आया, जिससे जुलूस में शामिल 8 लोग घायल हो गए। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, जहाँ उनकी स्थिति सामान्य बताई जा रही है।

संभल में 4 झुलसे

उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में भी करंट से मुहर्रम के मातमी जुलूस में शामिल लोगों के घायल होने की खबर है। यहाँ 28 जुलाई 2023 (शुक्रवार) को हजरतगढ़ी इलाके में रेलवे लाइन पार करते समय ताजिया का एक हिस्सा ओवरहेड तार से टकरा गया। बारिश की वजह से जमीन गीली थी, जिसके चलते जुलूस में शामिल लोगों को करंट का झटका लगा। हादसे में कुल 4 लोगों के घायल होने की खबर है, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। इस हादसे का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

लखनऊ में एक घायल

ताजिया के बिजली के तारों से टकराने की घटना लखनऊ में भी हुई है। यहाँ 29 जुलाई 2023 (शनिवार) को डालीगंज इलाके में पुरनिया रेलवे क्रॉसिंग के पास ताजिया बिजली के तार से टकरा गया। हादसे की वजह से जुलूस में शामिल लोगों में भगदड़ मच गई। अब तक 1 व्यक्ति के घायल होने की सूचना है, जिसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। इस हादसे का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गिरिडीह में एक ही समुदाय के 2 पक्ष भिड़े

झारखंड के गिरिडीह में मुहर्रम के मातम के दौरान 2 पक्षों में भिड़ंत की खबर है। यहाँ शनिवार (29 जुलाई 2023) को एक ही समुदाय के 2 गुट आपस में टकरा गए। यह भिड़ंत तिसरी थानाक्षेत्र के पालमरुआ इलाके में अड़सार मदरसे के पास हुई। हमले में लाठी-डंडों के प्रयोग के साथ पत्थरबाजी की भी खबर है।

हालात को काबू करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। दोनों तरफ से मिला कर लगभग 1 दर्जन लोग घायल हुए हैं। घायलों के नाम मोहम्मद शहजाद, मोहम्मद नूर आलम, मोहम्मद नसरूल, मोहम्मद बारीक, मोहम्मद जशीम, जाबिर, अरमान, इस्लाम और इरशाद आदि बताए जा रहे हैं। पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

वाराणसी में भिड़े शिया-सुन्नी

इन तमाम घटनाओं के साथ वाराणसी के जैतपुरा इलाके में शिया-सुन्नी की भिड़ंत की खबर है। यहाँ 29 जुलाई 2023 (शनिवार) को ताजिया ले जाने के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमला किया है। हमले में दोनों पक्षों के लगभग आधे दर्जन लोग घायल हुए हैं।

हालात सँभालने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने रैपिड एक्शन फ़ोर्स को लगाया है। पुलिस के वाहनों पर भी पथराव हुआ है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। इस विवाद का भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

‘ट्रू इंडोलॉजी’ बनाम देवेंद्र फडणवीस: हिंदुत्व के मुद्दे पर क्यों आमने-सामने? हिंदू एकता पर RSS की सोच क्या?

ट्विटर पर ‘ट्रू इंडोलॉजी’ नामक एक लोकप्रिय अकाउंट है। इस अकाउंट से करीब 1 साल पहले सावित्रीबाई फुले को लेकर कुछ बातें ट्वीट की गई थी। फुले को आमतौर पर भारत की ‘पहली महिला शिक्षक’ के रूप में जाना जाता है। ‘ट्रू इंडोलॉजी’ के इस ट्वीट में तथ्यों के साथ दावा किया गया था कि सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षक बताना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया था कि ब्रिटिश मिशनरियों ने स्कूल स्थापित करने में सावित्रीबाई फुले की मदद की थी।

सावित्रीबाई फुले को लेकर किए गए ये दोनों दावे तो इतिहास से जुड़ी जानकारी देने की तरह था। हालाँकि ‘ट्रू इंडोलॉजी’ ने अपने इस ट्वीट में अंग्रेजों द्वारा स्थापित स्कूलों में महिलाओं के यौन शोषण समेत अन्य शोषण का भी उल्लेख किया था। इसके चलते यह ट्वीट विवादों में आ गया। ‘ट्रू इंडोलॉजी’ द्वारा किए गए इन दावों को कुछ इस तरह देखा गया कि सावित्रीबाई फुले ने ब्रिटिश मिशनरियों को अपने स्कूल के माध्यम से भारतीय लड़कियों का शोषण करने में मदद की। हालाँकि ‘ट्रू इंडोलॉजी’ ने अपना अकाउंट डीएक्टिवेट करने से पहले खुद पर लगे इस आरोप को खारिज कर दिया था।

‘ट्रू इंडोलॉजी’ का कहना है कि सावित्रीबाई फुले पर उनके ‘ट्विटर थ्रेड’ को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने केवल तथ्यों के साथ जानकारी दी थी, जिसे लोगों ने एक-दूसरे के साथ जोड़कर ऐसा समझ लिया, जो वह कभी कहना ही नहीं चाहते थे। तमाम दावों और बातों के बीच जानना बेहद दिलचस्प है कि सावित्रीबाई फुले के बारे में किए गए जिस ट्वीट को लेकर विवाद शुरू हुआ, वह एक साल से भी अधिक पुराना है।

एक और दिलचस्प बात यह है कि जब यह सब हो रहा था, तब महाराष्ट्र में एमवीए (एनसीपी, शिवसेना और कॉन्ग्रेस का गठबंधन) सरकार सत्ता में थी। अब वो सत्ता से बाहर हैं। एमवीए के कुछ घटक दलों के द्वारा इसे विवादित किया गया सत्ता से बाहर होने के बाद। ऐसे में इसमें हो रहे राजनीतिक खेल से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालाँकि इस मुद्दे पर हो रही राजनीति पर भाजपा की प्रतिक्रिया को भाजपा समर्थकों का एक वर्ग या ‘हिंदुत्व’ समर्थकों’ का एक वर्ग एक समान नजरों से देख रहा है।

महाराष्ट्र विधानसभा में बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि वह ‘ट्रू इंडोलॉजी’ को सजा देना चाहते हैं। दरअसल, कॉन्ग्रेस के एक नेता ने कहा था कि ‘ट्रू इंडोलॉजी’ को बाँध कर सरेआम परेड करानी चाहिए। गौरतलब है कि कभी चोरों की परेड निकालने पर ‘लिंचिस्तान’ का रोना रोने वाली कॉन्ग्रेस आज एक ट्विटर हैंडल के लिए तालिबानी सजा की माँग कर रही थी। इसी को लेकर जवाब देते हुए देवेंद्र फडनवीस ने कहा, “परेड को भूल जाओ, मैं कहता हूँ कि उन्हें सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दो। लेकिन सिर्फ यह कहने से कुछ हासिल नहीं होगा। हमें देश के कानूनों का पालन करना होगा।”

बेशक देवेंद्र फडणवीस ने यह बयान कानून का पालन करने की बात कहने के लिए दिया था। लेकिन हिंदुत्व समर्थकों का एक बड़ा वर्ग उनके इस बयान पर सवाल उठा रहा है कि ‘आखिर यह कैसा हिंदुत्व है?’

संघ और ‘संघी’

आरएसएस को एक तरह का ब्रांड बनाने में उन लोगों की बहुत बड़ी भूमिका रही है, जो ब्रांडिंग करना जानते थे और जिनके पास यह करने की ‘पावर’ थी। सीधे शब्दों में समझें तो ये वो लोग थे जो मीडिया, शिक्षाविद, ‘कार्यकर्ता’ हैं, जो किसी भी प्रकार का नैरेटिव सेट करने में माहिर हैं। कम्युनिस्ट और खासतौर से ‘हिंदू-विरोधी’ विचारधारा के लोग तब से लेकर आज तक नैरेटिव गढ़ने में टॉप पर हैं। इन लोगों ने आरएसएस को फासीवादी, कट्टरपंथी, रूढ़िवादी, सांप्रदायिक, हिंसक, पितृसत्तात्मक, जातिवादी, ब्राह्मणवादी करार दिया था।

RSS को बदनाम करने के लिए हर तरह का ठप्पा लगाने की कोशिश की गई। लेकिन आरएसएस ने इन सबका जवाब देना उचित नहीं समझा। संघ हमेशा से ही ‘अपना काम’ करते हुए आलोचनाओं को नजरअंदाज करता रहा है। ऐसे में इससे नफरत करने वालों ने अपने दिमाग में एक ऐसी तस्वीर बना ली है, जो सच्चाई से उलट है। देवेंद्र फडणवीस के बयान पर हिंदुत्व समर्थकों के एक वर्ग का गुस्सा, निराशा और हिंदुत्व को लेकर भाजपा/आरएसएस का क्या स्टैंड है, जैसे सवाल इसी भ्रम को दर्शाते हैं।

वास्तव में हिंदुत्व समर्थकों के इस वर्ग को यह लग रहा था कि कम्युनिस्टों ने आरएसएस पर जो आरोप लगाए थे, वह सच हो सकते हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि हिंदुत्व समर्थकों ने RSS को वो सब समझ लिया था, जो कम्युनिस्ट आज तक कहते आए हैं। लेकिन लगातार एक जैसा नरेटिव सामने आने पर कुछ बातें कभी-कभी सच लगने लगती हैं। यूँ तो कम्युनिस्ट किसी को भी केवल इसलिए फासीवादी करार दे देंगे क्योंकि वह हिंदू धर्मग्रंथों की कुछ व्याख्याओं (कभी-कभी मनगढ़ंत भी) से असहमत हो जाता है। वास्तव में, कम्युनिस्ट अपनी बात सिद्ध करने के लिए किसी को भी ‘संघी’ करार देते हैं। एक नजरिए से देखें तो आरएसएस को कम्युनिष्टों के प्रति आभार प्रकट करना चाहिए, क्योंकि कम्युनिस्टों ने कई ऐसे लोगों को ‘संघी बना दिया’ जो कभी शाखा गए ही नहीं।

ऐसे ‘संघियों’ और संघ के बीच हुई ‘दोस्ती’ टूटनी ही थी। यही हो रहा है। हिंदुत्व के प्रति आरएसएस (बड़े पैमाने पर देखें तो भाजपा भी) की समझ और दृष्टिकोण को समझना कथित नए-नए संघ समर्थकों के बस की बात नहीं। सच्चाई यह है कि यह अंतर हमेशा था। बीजेपी/आरएसएस ने राजनीति के कारण पूरी तरह से ट्रैक नहीं बदला है, लेकिन ज्यादातर सहानुभूति रखने वालों ने आरएसएस को वह मान लिया है, जो वह कभी था ही नहीं था। इसे साबित करने के लिए सिर्फ तीन शब्द हैं- सीता राम गोयल।

‘ट्रू इंडोलॉजी’ के मुद्दे पर आरएसएस की अधिकांश आलोचना लगभग चार दशक पहले सीता राम गोयल द्वारा संघ के बारे में की गई आलोचना की तरह ही है। इसलिए ईमानदारी से कहूँ तो आप आरएसएस पर हाल की कुछ घटनाओं (मोदी के नेतृत्व में भाजपा की राजनीतिक जीत) के बाद रास्ता बदलने या भटकने का आरोप नहीं लगा सकते। आपको संघ पर दशकों से गलत रास्ते पर चलने का आरोप मढ़ना चाहिए। हालाँकि वर्तमान परिस्थितियों को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि सीता राम गोयल का भूत संघ को परेशान करने के लिए वापस आ गया है।

सीता राम गोयल ने मोटे तौर पर आरएसएस को इस बात के लिए दोषी ठहराया है कि उसने मार्क्सवादियों, इस्लामवादियों और मैकाले द्वारा बनाए गए सिस्टम का वैचारिक मुकाबला करने के लिए एक देशी और मजबूत ढाँचा विकसित नहीं किया। वहीं आलोचकों का दूसरा वर्ग उम्मीद करता है कि आरएसएस उसकी चाह के हिसाब से ढल जाए। हालाँकि संघ ने हमेशा से ही आलोचना को दरकिनार कर अपना काम करते रहने की शैली अपनाई है। इसलिए इस बार जो हो रहा है, वह नया तो बिल्कुल भी नहीं है।

आरएसएस और आंबेडकर/फुले

हर किसी के मन में यह सवाल उठ सकता है कि अगर आरएसएस इन आलोचनाओं को नजरअंदाज कर सकता है, तो वह सावित्रीबाई फुले के बारे में कही गई बातों को नजरअंदाज क्यों नहीं कर सकता? अब इसका उत्तर समझने के लिए आरएसएस और भाजपा के बीच अंतर को समझना होगा। अव्वल तो यह कि भाजपा किसी भी कीमत पर इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकती। इसका बड़ा कारण है कि सावित्रीबाई फुले को महाराष्ट्र में एक बड़ा आकर्षण माना जाता है। इसलिए भाजपा तो क्या कोई भी पार्टी इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकती। भाजपा का यह दृष्टिकोण किसी भी तरह से गलत नहीं है और आरएसएस की विचारधारा से भी अलग नहीं है। सच्चाई यह है कि संघ ने करीब 4 दशक पहले ही आंबेडकर और फुले को अपने साहित्य में स्थान देना शुरू कर दिया था। इसका मतलब यह नहीं है कि इससे पहले संघ ने इन दोनों को नकार दिया था।

पद्मश्री से सम्मानित आरएसएस विचारक और वरिष्ठ पत्रकार रमेश पतंगे ने अपनी किताब “मी, मनु अनी संघ” (मैं, मनु और संघ) में आपातकाल के दौरान जेल में डाले जाने के दिनों को याद करते हुए लिखा है कि उस दौर में ही उन्होंने आंबेडकर और फुले के बारे में अधिक पढ़ना शुरू किया था। मराठी में लिखी इस किताब में यह विस्तार से बताया गया है कि आंबेडकर कि फुले के जीवन और आरएसएस के उद्देश्य एक जैसे हैं। वास्तव में संघ उन्हें हिंदू समाज की बुराइयों (मुख्य रूप से छुआछूत और जातियों में ऊँच-नीच) को दूर करने वाले लोगों के रूप में देखता है। संघ का मानना है कि इन सबसे ‘हिंदू एकता’ को बल मिला है।

आरएसएस का हिंदुत्व

आरएसएस का हिंदुत्व किसी भी तरह के नियमों या परंपरा से बँधा हुआ नहीं है। बल्कि संघ हिंदू एकता और समरसता जैसे उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए परिस्थितियों के हिसाब से ढल जाता है। सीधे शब्दों में समझें तो संघ एक सुधारवादी संगठन है या समय के साथ परिवर्तन में विश्वास करता है और यह आगे भी ऐसा ही रहेगा।

संघ के दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता है या बदलाव हो गया है, जैसी बातें सिर्फ बातें ही हैं। वास्तव में संघ दशकों से ऐसे ही चला आ रहा है। एक ही दृष्टिकोण के साथ संघ की शाखाओं के विस्तार और समवैचारिक संगठन भाजपा का सत्ता में प्रभुत्व बढ़ा है। ऐसे में संघ को बदलाव की आवश्यकता पड़ेगी भी तो क्यों?

गौर करने वाली बात यह है कि सावित्रीबाई फुले पर ‘ट्रू इंडोलॉजी’ के ट्वीट जैसी घटना महाराष्ट्र में पहले भी हो चुकी है। रमेश पतंगे की किताब में भी इसका जिक्र है। इसके दो पैराग्राफ देखें तो इसमें लिखा है:

समरसता सम्मेलन समाप्त ही हुआ था कि ‘सोबत’ साप्ताहिक के दिसंबर अंक में हिंदुत्व की वकालत करने वाले लेखक डॉ. बाल गंगल द्वारा महात्मा फुले पर प्रकाशित एक लेख ने एक बार फिर महाराष्ट्र में उथल-पुथल मचा दी। इस लेख की हेडलाइन थी – ‘वह किस तरह का महात्मा है? वह फुले नामक बदबू है’ डॉ. गंगल ने महात्मा फुले की अभद्र भाषा और उनके बयानों को उनके लेखन से हटाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। ‘सोबत’ साप्ताहिक का किसी भी तरह से आरएसएस से कोई लेना-देना नहीं था। हालाँकि बाल गंगल एक स्वयंसेवक थे, लेकिन वे संघ के प्रवक्ता नहीं थे। तब भी, संघ को बदनाम करने के इरादे से ‘प्रगतिशील’ लोगों द्वारा एक हिंसक हंगामा खड़ा किया गया था।”

खुद को लेखकों की आजादी, अभिव्यक्ति की आजादी, व्यक्ति की आजादी का चैंपियन कहने वाले प्रगतिशील गिरोहों ने एक प्रसिद्ध मराठी साप्ताहिक ‘सोबत’ के संपादक जीवी बेहेरे और डॉ. बाल गंगल का मुँह बंद कर दिया। मैं भी, बौद्धिक आतंकवाद, धूर्तता और दोहरे व्यवहार की क्रूरता का सामना कर रहा था। ईर्ष्यालु और उन्मादी पाखंडी गिरोह बन गए थे। उन्हें प्रगतिशीलों के सरगना शरद पवार का आशीर्वाद प्राप्त था। ‘सोबत’ की प्रतियों को विभिन्न स्थानों पर जलाया गया। बाल गंगल को धमकियाँ दी गईं। सार्वजनिक स्थानों पर उनका घूमना मुश्किल हो गया था। ईरान के अयातुल्ला खुमैनी ने सलमान रुश्दी के खिलाफ फतवा जारी किया था। प्रगतिशील लोग खुमैनी की तरह ‘फतवा’ में विश्वास नहीं करते थे, लेकिन दोनों की मानसिकता एक जैसी थी। महात्मा फुले हमारे धार्मिक ग्रंथों की आलोचना कर सकते हैं, वह उनकी व्याख्या कर सकते हैं। उसी तरह, अगर कोई फुले की आलोचना करता है, तो उसे बौद्धिक आतंकवाद का शिकार क्यों होना चाहिए? उन्हें बौद्धिक जवाब क्यों नहीं दिया जाता?”

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है, इसे यहाँ क्लिक कर पढ़ा जा सकता है। हिंदी अनुवाद आकाश शर्मा ‘नयन’ ने किया है।

सेना के 40 जवानों के हत्यारे की भाषा कॉन्ग्रेसी मंत्री और पार्टी अध्यक्ष के बेटे की: गौमूत्र-गोबर पर कॉमेंट, हिंदुत्व पर निशाना

कॉन्ग्रेस नेता हिंदुओं का मजाक उड़ाने के लिए कुख्यात रहे हैं। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे का हिंदूफोबिक चेहरा एक बार फिर सामने आ गया। ट्विटर पर हो रही बहस के बीच अखबार/वेबसाइट पर विचार लिखने वाले लेखक चक्रवर्ती सुलीबेले का अपमान करने के लिए प्रियांक खड़गे ने ‘गौमूत्र’ का मजाक उड़ाकर विवाद खड़ा कर दिया।

दरअसल, कर्नाटक में उडुपी के एक कॉलेज के बाथरूम में कैमरा लगाए जाने को लेकर विवाद मचा हुआ है। इस मामले में सीएम सिद्धरमैया से सवाल करने के बाद शकुंतला एसएस नामक भाजपा कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया गया था। इसको लेकर चक्रवर्ती सुलीबेले ने प्रियांक खड़गे को प्रैंक खड़गे बताते हुए निशाना साधा था। सुलीबेले ने लिखा था,

“प्रैंक खड़गे और उनकी टीम कर्नाटक में बहुत अधिक एक्टिव है। सीएम के खिलाफ बोलोगे तो जेल जाओगे। अब उन्होंने कॉन्ग्रेस नेताओं के ‘मजाकिया’ बयान के खिलाफ पोस्ट करने के चलते भाजपा कार्यकर्ता शकुंतला एचएस को गिरफ्तार कर लिया है। अगर यह हिटलर सरकार नहीं है तो क्या है?”

सुलीबेले ने प्रियांक खड़गे का नाम नहीं लिखा था। लेकिन इशारा तो उनकी ही तरफ था। इसलिए सुलीबेले के इस ट्वीट से प्रियांक भड़क गए। फिर क्या था, सुलीबेले के इस ट्वीट का बदला लेने के लिए उन्होंने ‘गौमूत्र’ का मजाक उड़ा दिया। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, ”कर्नाटक के युवाओं के साथ आपके द्वारा बहुत प्रैंक (मजाक) किया गया है। अब प्रैंक भूल जाइए और स्पष्ट बोलने वाला बनिए।”

प्रियांक ने आगे लिखा, “आपके जो फैंस गुमराह को चुके हैं, उनके लिए इन सवालों का जवाब दीजिए: आप अपने झूठ के साथ और कितने परेश मेस्ता का दावा करेंगे? सीबीआई रिपोर्ट पर इतनी चुप्पी क्यों है? आप कभी भी केसरी शॉल पहनकर विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे क्यों नहीं रहते और सिर्फ युवाओं को ही क्यों नेतृत्व करने देते हैं?”

खड़गे ने आगे पूछा, “आप खुद को यूट्यूबर और मोटिवेटर के रूप में आगे क्यों नहीं बढ़ा रहे हैं? आप चुनाव में कब खड़े होंगे, जीतेंगे और कर्नाटक के युवाओं को बचाएँगे? गरीब पिछड़े और दलित युवाओं का उपयोग करने के बजाय आप भाजपा नेताओं के बच्चों को धर्म की रक्षा के लिए अपने साथ आने के लिए कब मोटिवेट करेंगे? आपने भाजपा सरकार की “पुण्य कोटि दत्तु योजना” में कितनी गायों (गौमाताओं) को गोद लिया है?”

कॉन्ग्रेसी होने का प्रमाण देते हुए हिंदूफोबिक प्रियांक ने गौमूत्र का मजाक उड़ाया और लिखा, “आपने बीजेपी/आरएसएस फंड से कितनी गौशालाओं के निर्माण में मदद की है? क्या आप सहकर्मियों के सुझाव के अनुसार प्रतिदिन गौमूत्र पीते हैं और कभी-कभी गाय का गोबर खाते हैं?”

प्रियांक खड़गे ने धमकी देते हुए आगे लिखा, “वैसे आप 100% सही हैं, प्रैंक, फ्रैंक खड़गे या कोई और खड़गे और प्रत्येक कन्नड़ हमारे राज्य और संविधान की अखंडता और भविष्य की रक्षा के लिए खड़ा होगा। आप झूठ और गलत सूचना फैलाकर समाज को नुकसान पहुँचाते हैं, सरकार किताब के जरिए इससे निपटेगी।”

गौमूत्र का मजाक, आतंकी की भाषा

बता दें कि ‘गौमूत्र’ के नाम पर हिंदुओं से दिखाई गई घृणा कोई नई नहीं है। इस हिंदूफोबिक टिप्पणी का इस्तेमाल साल 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार ने किया था। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी डार ने एक वीडियो रिलीज किया था। वीडियो में उसने कहा था कि वह मूर्ति पूजा करने वाले (हिंदुओं) और गाय का पेशाब पीने वाले लोगों को अल्लाह के नाम पर मारना चाहता है। इसके बाद से वामपंथी, कॉन्ग्रेसी और कट्टर इस्लामी लोगों ने हिंदुओं का मजाक उड़ाने और उनका अपमान करने के लिए ‘गौमूत्र’ का उपयोग किया है।

‘गौरक्षकों को लात मारकर जेल में डालो’: प्रियांक खड़गे

इससे पहले प्रियांक खड़गे ने गौरक्षकों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को जेल में डालने की बात कही थी। प्रियांक खड़गे ने बजरंग दल का नाम लिए बिना कहा था, “जो लोग शॉल ओढ़कर कानून अपने हाथ में लेते हैं और कहते हैं कि वे इन दलों से हैं, उन्हें लात मारकर सलाखों के पीछे डाल दीजिए। अगर कोई स्वघोषित नेता है और सांप्रदायिक मुद्दों के नाम पर जहर उगलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मैं अनावश्यक सांप्रदायिक दंगे नहीं चाहता।”

प्रियांक खड़गे ने आगे कहा था, “जानवरों को लाने और ले जाने को लेकर कानून बहुत स्पष्ट है। अगर किसी के पास पर्याप्त दस्तावेज हैं तो उसे परेशान नहीं किया जाए। चाहे फिर वह ग्रामीण क्षेत्रों में हो या शहर की सीमा के भीतर हो।”

स्कूल ड्रेस में नाबालिग लड़की, मौलवी सलाउद्दीन अंसारी गलत ढंग से छू रहा… वीडियो वायरल होने पर बिहार पुलिस ने शुरू की जाँच

बिहार के सीवान जिले में शनिवार (29 जुलाई 2023) से एक मौलवी की अश्लील हरकतों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पीड़िता स्कूल की एक नाबालिग छात्रा बताई जा रही है। आरोपित मौलवी का नाम सलाउद्दीन अंसारी बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोपित मौलवी के खिलाफ काला जादू करने का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू कर दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला सीवान के आंदर बाजर थानाक्षेत्र का है। वायरल हो रहे वीडियो में मौलवी सलाउद्दीन अंसारी स्कूली ड्रेस में खड़ी छात्रा को गलत ढंग से छूता दिखाई दे रहा है। छात्रा की तरफ से भी कोई विरोध नहीं हो रहा है।

इलाके में वीडियो वायरल होने के बाद से लोगों में नाराजगी है। उन्होंने मौलवी को जादू-टोना करने वाला बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। लोगों का आरोप है कि मौलवी झाड़-फूँक के जरिए लड़कियों का शोषण करता है।

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार आंदर बाजर थाना क्षेत्र में पीर बाबा की एक मजार है। कुछ समय पहले ही यहाँ एक मौलवी आया था। वह लोगों को बुरी रूहों से बचाने का दावा करते हुए झाड़-फूँक का काम करने लगा। लोगों का कहना है कि मौलवी की बातों में आकर कई स्थानीय महिलाएँ मौलवी के पास जाने लगीं। मौलवी भी उन्हें कथित तौर पर राहत देने के नाम पर उनके सिर पर झाड़ू चलाता था। उन्हीं तमाम महिलाओं में वह पीड़िता छात्रा भी बताई जा रही है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

लोगों का यह भी आरोप है कि पीड़ित छात्रा पिछले कई दिनों से मौलवी के यौन शोषण का शिकार हो रही थी। किसी ने चुपके से मौलवी की वीडियो बना कर वायरल कर दी।

वायरल वीडियो की पुष्टि करते हुए आंदर थाना प्रभारी कुमार वैभव ने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है। ETV से बात करते हुए थाना प्रभारी ने बताया कि जाँच पूरी होने के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

धनुष की Captain Miller बनाएगी रिकॉर्ड? टीजर को 24 घंटे में सिर्फ यूट्यूब पर 2+ करोड़ व्यूज, एक्शन से भरपूर होगी फिल्म

साउथ के सुपर स्टार धनुष के 40वें जन्मदिन (28 जुलाई 2023) पर उनकी अपकमिंग फिल्म ‘कैप्टन मिलर’ का टीजर (Captain Miller Teaser) रिलीज हुआ। एक्शन से भरपूर इस टीजर को काफी पसंद किया जा रहा है। बीते 24 घण्टे में टीजर को यूट्यूब पर 20 मिलियन (2 करोड़) से अधिक बार देखा जा चुका है। साथ ही कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह टॉप पर ट्रेंड कर रहा है।

सत्य ज्योति फिल्म्स के बैनर तले बन रही ‘कैप्टन मिलर’ एक पीरियड-एक्शन वॉर ड्रामा फिल्म है। इसे अरुण मथेश्वरम डायरेक्ट कर रहे हैं। इससे पहले वह ‘रॉकी’ और ‘सानी कायिधाम’ जैसी एक्शन क्राइम फिल्म डायरेक्ट कर चुके हैं। ‘कैप्टन मिलर’ का टीजर देखकर ऐसा लग रहा है कि यह फिल्म भी एक्शन से भरपूर होगी। फिल्म 15 दिसंबर 2023 को एक साथ देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

‘कैप्टन मिलर’ की कहानी अंग्रेजों के शासन के समय की है। टीजर देखने से पता चलता है कि ब्रिटिश सरकार के लिए मिलर एक खतरनाक अपराधी है, जिस पर 10 हजार रुपए का इनाम रखा गया है।

1 मिनट 33 सेकंड के टीजर में धनुष लंबे बाल और दाढ़ी के साथ एकदम अलग लुक में नजर आ रहे हैं। उन्होंने अपने हाथ में एक काला धागा बाँध रखा है। इसके अलावा, राइफल, पिस्टल और कुल्हाड़ी से दुश्मनों का खात्मा करते दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा टीजर में बंदूक की गोलियों के बीच उड़ते ट्रक और कमाल के एक्शन साथ ही हाई-वोल्टेज ड्रामे का मिक्सअप भी देखने को मिल रहा है।

सेंथिल त्यागराजन और अर्जुन त्यागराजन के प्रोडक्शन में तैयार हो रही ‘कैप्टन मिलर’ में धनुष लीड में तो नजर आएँगे ही। उनके अलावा इस फिल्म में प्रियंका मोहन, निवेदिता सतीष, शिवराजकुमार, संदीप किशन, जॉन कोकेन, एडवर्ड सोनेनब्लिक और डेनियल बालाजी भी नजर आने वाले हैं। फिल्म का टीजर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

दो बार नेशनल अवार्ड विजेता धनुष ने साल 2022 में फिल्म ‘द ग्रे मैन’ के साथ हॉलीवुड में डेब्यू किया था। ‘कैप्टन मिलर’ से पहले वह आखिरी बार तमिल फिल्म ‘वाथी’ में दिखाई दिए थे। ‘कैप्टेन मिलर’ के साथ ही धनुष जल्द ही आनंद एल राय की हिंदी फीचर फिल्म ‘तेरे इश्क में’ भी नजर आएँगे।

‘मोरारी बापू ने मोदी सरकार को बताया फेल, दिए 100 में से 30 नंबर’: गुजराती अखबार ने छापी खबर, जानिए पूरी सच्चाई

प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू फिलहाल अपने 1008 शिष्यों के साथ देश के 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पर हैं। यह यात्रा वो एक ट्रेन से कर रहे हैं। 22 जुलाई से हरिद्वार से शुरू हुई इस यात्रा के हर पड़ाव पर रामकथा का आयोजन किया गया है। अंत में यह यात्रा गुजरात के तलगाजर्दा में खत्म होगी। इसी यात्रा में पिछले सप्ताह मोरारी बापू ने मीडिया से बात की। इसमें ABP न्यूज़ भी शामिल है। अब ABP न्यूज़ के इसी इंटरव्यू के आधार पर दावा किया जा रहा है कि मोरारी बापू ने मोदी सरकार को असफल करार दिया है।

मोरारी बापू, मोदी सरकार और ‘खबर’

गुजरात में राजकोट के सांध्य दैनिक ‘हेडलाइन’ के शुक्रवार (28 जुलाई 2023) के संस्करण के पहले पन्ने पर इस बावत खबर छपी। इस खबर की हेडलाइन थी, “‘हे राम! मोरारी बापू के मुताबिक मोदी सरकार विफल।” इसी खबर के अंदर ABP न्यूज़ के इंटरव्यू का हवाला देते हुए कहा गया था कि मोरारी बापू ने मोदी सरकार को 100 में से 30 नंबर दिए हैं। कुल मिला कर खबर का मकसद यह बताना था कि मोरारी बापू ने अपने आकलन में मोदी सरकार को पासिंग मार्क भी नहीं दिए।

अखबार की कटिंग वायरल

इसी रिपोर्ट में मोरारी बापू के साथ PM मोदी की फोटो भी लगाई गई थी। फोटो में प्रधानमंत्री मोदी चिंतित नजर आ रहे हैं। एबीपी न्यूज के इंटरव्यू का हवाला देते हुए रिपोर्ट में मोरारी बापू के हवाले से कहा गया, “पहले मैं एक टीचर था। 100 में से 35 अंक पासिंग मार्क थे। तब इम्तिहान में जिसे भी 30 अंक मिलते थे, वह 5 नंबर जोड़ कर पास हो जाता था।” दावा किया जा रहा है कि मोदी सरकार के मूल्याँकन पर उन्होंने कहा कि वो मोदी सरकार को 30 नंबर देते हैं। अख़बार के प्रिंट की कटिंग सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

ये है असलियत

असल में मोरारी बापू का यह इंटरव्यू गुरुवार (27 जुलाई 2023) को एबीपी न्यूज पर प्रसारित हुआ था। इस साक्षात्कार में पत्रकार ने मोरारी बापू से धर्म, राजनीति सहित कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की थी। इसी इंटरव्यू में मोरारी बापू ने पासिंग मार्क का जिक्र किया था लेकिन इस दौरान उन्होंने कहीं भी PM मोदी या भाजपा सरकार का नाम नहीं लिया। हाँ, उन्होंने देश के वर्तमान राजनैतिक हालात पर जरूर बात की। इस इंटरव्यू को ABP न्यूज़ पर प्रकाशित भी किया गया है।

इसी इंटरव्यू में रिपोर्टर ने मोरारी बापू से भारत की वर्तमान राजनैतिक दशा पर सवाल किया। पत्रकार ने मोरारी बापू से पूछा कि वो वर्तमान हालातों से संतुष्ट हैं या इसमें बदलाव की जरूरत है। सवाल के जवाब पर मोरारी बापू ने कहा, “मैं दूसरों के बारे में या इस दिशा में कुछ नहीं कहूँगा लेकिन युवाओं के बीच एक राजधर्म स्थापित करने की जरूरत है।”

मोरारी बापू ने राजधर्म को प्रेम, सत्य और करुणा के रूप में बताया। इसी इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा, ”मैं प्राइमरी स्कूल का शिक्षक था। 100 अंकों का पेपर 35 अंकों के साथ पास किया जाता था। कभी-कभी 30 नंबर पाने वाले कमजोर छात्र को हम 5 ग्रेस अंक दे देते थे।”

इस जवाब के बाद पत्रकार ने पूछा कि मौजूदा हालत में आप 100 में से 30 नंबर देंगे या 35? इसके जवाब में मोरारी बापू ने कहा, ”मैंने जो आकलन किया है, उसके हिसाब से मैं 30 नंबर दे सकता हूँ। अगर भगवान 5 अंक की कृपा करें तो यह पास हो जाएगी।”

यहाँ पत्रकार और मोरारी बापू में से किसी ने भी सरकार का जिक्र नहीं किया। दोनों मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा कर रहे थे। हालाँकि इंटरव्यू की हेडलाइन में लिखा गया है – “मोरारी बापू ने मोदी को कितने नंबर दिए” लेकिन उन्होंने इंटरव्यू में कहीं भी प्रधानमंत्री या मोदी सरकार का जिक्र नहीं किया।

खुद ABP न्यूज़ ने बाद में यह स्पष्ट किया कि मोरारी बापू ने इंटरव्यू के दौरान किसी राजनीतिक दल या प्रधानमंत्री मोदी का नाम नहीं लिया। ABP ने यह भी माना कि पहले प्रकाशित इंटरव्यू में अंक दिए जाने वाला प्रकाशन गलती से छपा था। कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार को 100 में से 35 अंक देने वाले सोशल मीडिया पर वायरल प्रिंट कटिंग असलियत से परे है।

72 मौत पर तकलीफ नहीं… बम ब्लास्ट से जुड़े आतंकियों के लिए कॉन्ग्रेसी मुस्लिम नेता दुखी, अपने ही सीनियर सचिन पायलट से पूछा सवाल

साल 2008 में जयपुर में हुए सीरियल ब्लास्ट के सभी आरोपितों को राजस्थान हाई कोर्ट ने बरी कर दिया था। हाई कोर्ट के फैसले को गहलोत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इसको लेकर सूबे के कॉन्ग्रेस नेता अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। कॉन्ग्रेस के मुस्लिम नेताओं ने सचिन पायलट का काफिला रोक कर उनसे सवाल-जवाब किए।

दरअसल, सचिन पायलट विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं। इसको लेकर वह अपने विधानसभा क्षेत्र टोंक के दौरे पर थे। इस दौरान भीड़ ने उनका काफिला रोक कर अपनी समस्याएँ बतानी शुरू कर दी। इस दौरान कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव मोहसिन रशीद ने सचिन पायलट से जयपुर ब्लास्ट के आरोपितों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर सवाल किए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में मोहसिन रशीद कह रहे हैं, “सर मुस्लिम खुश नहीं हैं इस शहर के।”

इस पर सचिन पायलट मजहब की बात नहीं करने और पार्टी का काम करते रहने की नसीहत देते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, नासिर-जुनैद के मुद्दे पर न बोलने के लिए मोहसिन रशीद ने सचिन पायलट को घेरा। भीड़ को देखते हुए इसके बाद सचिन पायलट उसे अपना भाई बताते हुए साथ मिल काम करने की बात कह रहे हैं। वहीं मोहसिन रशीद कहते हैं, “सर, उम्मीद थी न हमें, जिन लोगों को हाई कोर्ट ने बरी कर दिया। आपने उनके लिए कह दिया सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए।” इसके बाद सचिन पायलट उसे गलतफहमी फैलाने की बात कह कर कार में बैठ वहाँ से चले जाते हैं।

यह वीडियो मोहसिन रशीद ने ही अपने फेसबुक अकाउंट से शेयर किया। इसके बाद BJP नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने भी इस वीडियो का एक क्लिप शेयर किया। इसके साथ उन्होंने लिखा है, “2 दिन पहले सचिन पायलट टोंक गए थे, तो शान्तिप्रिय समुदाय के लोग उन्हें घेर कर पूछ रहे हैं कि जब जयपुर बम धमाकों के आतंकियों को हाईकोर्ट ने रिहा कर दिया तो उसके खिलाफ आपकी सरकार सुप्रीम कोर्ट क्यों गई?”

उन्होंने आगे लिखा, “कॉन्ग्रेस राज में इन लोगों की कितनी हिम्मत हो जाती है, जयपुर बम धमाकों में 72 लोग मारे गए थे, 200 से ज्यादा घायल थे। तो सुनो कॉन्ग्रेस सरकार तो तुम्हारी ही है। उसने तो हाईकोर्ट में भी इनके खिलाफ पैरवी के लिए AAG नहीं भेजा था। सुप्रीम कोर्ट भी पहले नहीं गई, जिन लोगों ने इन आतंकियों की वजह से अपने परिवारजन खोए वो सुप्रीम कोर्ट गए, जन दबाव में कॉन्ग्रेस सरकार बाद में गई।”

दरअसल, जयपुर ब्लास्ट के सभी 4 आरोपितों को निचली अदालत ने साल 2019 में फाँसी की सजा सुनाई थी। लेकिन इसी साल मार्च में हाई कोर्ट ने फैसला पलटते हुए सभी आरोपितों को बरी कर दिया था। इस मामले में कई हिंदू संगठनों व भाजपा ने गहलोत सरकार पर कमजोर पैरवी करने का आरोप लगाया था। यहाँ तक कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि राजस्थान सरकार के एडवोकेट जनरल के पास सुनवाई के लिए समय नहीं था। इसलिए जयपुर ब्लास्ट के आरोपित छूट गए। कुल मिलाकर देखें तो इस मामले में राजस्थान सरकार लगातार लोगों के निशाने पर रही है।

यहाँ तक कि आरोपितों के बरी होने के बाद करीब 40 दिन बाद राजस्थान सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। वहीं, हाई कोर्ट का फैसला आने के करीब 15 दिन के भीतर ही पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुँचकर आरोपितों को बरी करने के फैसले को चुनौती दे दी थी। शुरुआत में राजनीतिक हल्कों में इस बात की चर्चा थी कि राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी। हालाँकि लगातार बढ़ते विरोध के बाद गहलोत सरकार को मजबूरन सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा था।

जयपुर ब्लास्ट के आरोपितों को पहले फाँसी की सजा… फिर हुए बरी

18 मई साल 2008 को जयपुर में सिलसिलेवार तरीके से 8 ब्लास्ट हुए थे। इन सीरियल ब्लास्ट में 71 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं 185 लोग घायल हुए थे। इस मामले में जाँच और ट्रायल के बाद साल 2019 में जयपुर की जिला कोर्ट ने 4 आरोपितों को दोषी ठहराते हुए फाँसी की सजा दे दी थी। लेकिन फिर 29 मार्च 2023 को राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसला पलटते हुए आरोपितों को बरी कर दिया था।