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बेंगलुरु से एक दुखद खबर- कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व CM ओमन चांडी का निधन, एक पोस्टर- नीतीश कुमार को बताया PM उम्मीदवारी का ‘द अनस्टेबल’ दावेदार

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में विपक्षी दलों के जमावड़े का 18 जुलाई 2023 को दूसरा दिन है। 26 दलों के नेता इसमें शिरकत कर रहे हैं। सोनिया गाँधी ने सोमवार (17 जुलाई 2023) की रात इन नेताओं को डिनर दिया था। इस बीच बेंगलुरु में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चांडी का निधन हो गया है। हालाँकि इसका विपक्षी दलों के जुटान से कोई लेना-देना नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री काफी समय से बीमार थे और बेंगलुरु में ही उनका इलाज चल रहा था।

लेकिन बेंगलुरु की सड़कों पर कुछ पोस्टर दिखे हैं, जिसका इस जुटान से लेना-देना है। ये पोस्टर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ लगे थे। इन्हें अब पुलिस ने हटा दिया है। पोस्टर में बिहार के सुल्तानगंज में टूटे ब्रिज की तस्वीर के साथ नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी का ‘द अनस्टेबल’ दावेदार बताया गया है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले विपक्षी दलों का जुटान पटना में भी हुआ था। लेकिन वे अब तक न तो चेहरा और न नीति तय कर पाए हैं। कहा जाता है कि नीतीश कुमार पटना में चाहते थे कि उन्हें विपक्षी गठबंधन का संयोजक बनाया जाए। बिहार में बीजेपी को छोड़कर राजद, कॉन्ग्रेस और वाम दलों के साथ सरकार बनाने के उनके फैसले को भी प्रधानमंत्री बनने की उनकी हसरत से जोड़कर देखा जाता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नीतीश कुमार के विरोध में पोस्टर बेंगलुरु के चालुक्य सर्कल, विंडसर मैनर ब्रिज और हेब्बाल के पास एयरपोर्ट रोड पर  लगाए गए थे। पोस्टर में बिहार में पुल के गिरने की घटना का जिक्र था। नीतीश की बड़ी से फोटो के साथ ‘UNSTABLE PRIME MINISTERIAL CONTENDER’ लिखा हुआ था। इन पोस्टरों के वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आ गई। पोस्टरों को हटा दिया गया है। हालाँकि ये पोस्टर किसने लगवाए थे, इसकी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है।

18 जुलाई को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एनडीए की भी बैठक हो रही है। इसमें 38 दलों के नेता मौजूद रहेंगे। इसकी जानकारी देते हुए बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि NDA का गठबंधन सत्ता के लिए नहीं है। यह गठबंधन सेवा के लिए है, भारत को मजबूत करने के लिए है। बेंगलुरु में विपक्षी दलों के जुटान को उन्होंने ‘भानुमति का कुनबा’ बताते हुए उन्होंने कहा था कि उनके पास न तो नेता है और न ही नीयत है, न नीति है और न ही फैसला लेने की ताकत है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन को भ्रष्टाचार और घोटालों का टोला करार दिया था।

यदि सहारा में फँसा हुआ है आपका भी पैसा तो यह खबर आपके लिए है, जानिए मोदी सरकार के ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ से कैसे वापस मिलेगी मेहनत की कमाई

क्या सहारा इंडिया में आपने भी अपनी मेह​नत की कमाई निवेश की थी? क्या आपका भी पैसा डूब चुका है? यदि हां, तो अब आपके पैसे की वापसी का समय आ गया है। इसके लिए 18 जुलाई 2023 को मोदी सरकार ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ लॉन्च कर रही है। इसके जरिए सहारा के उन निवेशकों को पैसे वापस मिलेंगे, जिनके निवेश की समय सीमा पूरी हो चुकी है।

पैसा वापस पाने के लिए सहारा के चार कोऑपरेटिव सोसायटी के निवेशक आवेदन कर सकेंगे। ये चार सोसायटी हैं- सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, सहारायन यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसायटी लिमिटेड, हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड और स्टार्स मल्टीपर्पज कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सहारा इंडिया की कोऑपरेटिव सोसायटीज में करीब 10 करोड़ निवेशकों के पैसे फँसे हुए हैं।

दिल्ली के अटल अक्षय ऊर्जा भवन में केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह इस पोर्टल को लॉन्च करेंगे। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “सहारा की कोऑपरेटिव सोसायटीज में जिन लोगों के कई सालों से रुपए फँसे हुए थे, उनके लिए कल (18 जुलाई) एक विशेष दिन है। मोदी सरकार उन निवेशकों की जमा राशि को लौटाने के संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके अंतर्गत कल ‘सहारा रिफंड पोर्टल’ का शुभारंभ होगा। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सहकारिता मंत्रालय की कटिबद्धता से उन सभी लोगों को राहत मिलेगी, जिन्हें अपनी मेहनत की कमाई वापस आने का इंतजार है।”

इस पोर्टल पर बताया जाएगा कि निवेश किए गए पैसे कैसे वापस पाए जा सकते हैं। सहारा में जिनलोगों के पैसे फँसे हैं, उनमें ज्यादा संख्या बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के लोगों की बताई जाती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लॉन्च हो रहे पोर्टल में निवेशक अपना दावा ऑनलाइन पेश कर सकेंगे। पोर्टल पर एक लिंक होगा जिसे क्लिक करने के बाद सेबी सहारा ऑनलाइन एप्लीकेशन-2023 का वेब पेज खुलेगा। दावेदारों को उस फॉर्म में माँगी गई सभी जानकारियाँ भरनी होंगी।

बताते चलें कि केंद्र सरकार ने 29 मार्च 2023 को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि सहारा की 4 समितियों के निवेशकों को 9 माह में पैसे लौटा दिए जाएँगे। सुप्रीम कोर्ट में सहारा समूह के निवेशकों को राहत देने की अर्जी केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय ने लगाई थी। इस अर्जी के बाद उच्चतम न्यायालय ने ‘सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट’ से 5000 करोड़ रुपए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसायटीज (CRCS) में ट्रांसफर करने के निर्देश दिए थे।

कॉन्ग्रेस से जुड़े चिश्तियों की दरिंदगी पर छापी सीरीज, अस्पताल में घुसकर माँ के सामने गोलियों से भूना: वो पत्रकार जिसके बिना अधूरी है 250 लड़कियों से रेप की स्टोरी ‘अजमेर 92’

फिल्म ‘अजमेर 92’ चर्चा में है। इसका ट्रेलर भी आया है जिसमें बताया गया है कि कैसे राजस्थान के अजमेर में ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के खादिमों के परिवार ने 250 हिन्दू लड़कियों का बलात्कार किया और उनकी नंगी तस्वीरें शहर भर में बाँट दी। तब स्थिति ये थी कि जब अजमेर की लड़कियों से कोई रिश्ता नहीं करना चाहता था। सब ये सोचते थे कि कहीं इसका भी बलात्कार हुआ होगा। इसे अंजाम देने वाले चिश्ती परिवार के लोग कॉन्ग्रेस के नेता थे, ऐसे में कोई कड़ी कार्रवाई भी नहीं हुई।

अप्रैल 1992 में संतोष गुप्ता नाम के एक स्थानीय पत्रकार ने इस मामले का खुलासा किया, तब जाकर सरकार जगी। हालाँकि, इस मामले में न्यायपालिका की सुस्ती देखिए कि अभी तक सुनवाई चल रही है। जिन लड़कियों का बलात्कार हुआ था, उनमें से कई दादी-नानी भी बन गई है। ऐसे में कौन पीड़ित महिला केस लड़ना चाहेगी? एक तो सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली चिश्तियों के कारण पहले ही पीड़िताएँ इस मामले में सामने नहीं आती थीं, या पलट जाती थीं – ऊपर से न्यायपालिका की सुस्ती।

11 से 20 साल तक की उम्र की स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों को कैसे पिछले कुछ वर्षों से ब्लैकमेलिंग और यौन शोषण का शिकार बनाया जा रहा था, इसका खुलासा संतोष गुप्ता ने अपने अख़बार में किया था। एक लड़की का इस्तेमाल कर के उसकी अन्य दोस्तों को फँसाया जाता था और फिर ये क्रम चलता ही चला जाता था। सोचिए, बलात्कारियों में कानून का कोई भय नहीं था। बलात्कारी उनकी जो नंगी तस्वीरें क्लिक करते थे, उससे ब्लैकमेल कर कई अन्य भी उन लड़कियों का बलात्कार करते थे।

अजमेर रेप स्कैंडल: दरगाह के चिश्ती थे शामिल, कॉन्ग्रेस कनेक्शन

ये अपराध तब सामने आया, जब जिस फोटो लैब में ये हैवान उन लड़कियों की तस्वीरें निकलवाते थे वहाँ से ये फोटोज लीक हो गईं। ‘नवज्योति न्यूज़’ अख़बार में संतोष गुप्ता ने पीड़िताओं की तस्वीरों को ब्लर कर के दुनिया को ‘अजमेर सेक्स स्कैंडल’ के बारे में बताया। राजस्थान के रिटायर्ड DGP ओमेंद्र भारद्वाज ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से बात करते हुए 2018 में बताया था कि कैसे आरोपितों के रसूख के कारण लड़कियाँ सामने आने या फिर शिकायत करने या गवाही देने के लिए तैयार ही नहीं थीं।

पीड़िताओं को इसके लिए मनाना पुलिस के लिए एक कठिन कार्य था। जिन 18 लोगों को वर्षों तक चली सुनवाइयों के बाद सज़ा मिली, उनमें दरगाह की देखरेख करने वाले खादिमों के परिवार के वो लोग भी थे जो खुद को ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती का वंशज बताते हैं। बता दें कि ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती को 12वीं सदी के उत्तरार्ध में अजमेर में पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ माहौल बनाने के लिए भेजा था। उसने मोहम्मद गौरी की जीत को इस्लाम की जीत करार दिया था।

पुलिस ने इस मामले में पहले 8, फिर 10 अन्य के विरुद्ध FIR दर्ज की थी। 1992 में ये मामला सामने आने के 6 वर्षों बाद 1998 में अजमेर के सेशन कोर्ट ने 8 दोषियों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई। 2001 में राजस्थान उच्च न्यायालय ने इनमें से 4 को दोषमुक्त कर दिया और बाकियों पर से भी कई चार्ज हटा दिए। 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने इनकी सज़ा घटा कर 3 वर्ष कर दी। इस मामले में एक फरार आरोपित सलीम चिश्ती तो 2012 में गिरफ्तार हुआ, 20 साल बाद।

2018 में एक अन्य हैवान सलीम गनी चिश्ती ने पुलिस के समक्ष आत्म-समर्पण किया। इस मामले का एक अन्य आरोपित तो अब तक फरार है और CBI ने उसके विरुद्ध रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी कर रखा है। इन सभी दोषियों में फारूक चिश्ती और नफीस चिश्ती मुख्य था, जिसने अजमेर में उस समय ‘स्थानीय सेलेब्रिटी’ जैसी छवि बना रखी थी। इनके पास धन-संपत्ति थी, हथियार थे, राजनीतिक रसूख था और दरगाह के कारण मजहबी प्रभाव था।

राजनीतिक और मजहबी छत्रछाया के कारण ही ये इस तरह की वारदातों को अंजाम देने में सफल होते थे। सोचिए, जिस फारूक चिश्ती ने सोफिया सीनियर सेकंडरी स्कूल की एक लड़की को शिकार बना कर इस काण्ड की शुरुआत की थी, वो बाद में अदालतों में खुद को मानसिक रूप से अस्वस्थ साबित कराने में सफल हो गया। इस मामले में फरार अल्मास महाराज अब तक अमेरिका में है, ऐसा माना जाता है। कई पीड़ितों ने अपने बयान बदल लिए थे।

इसके 2 मुख्य कारण थे – हर एक पीड़िता को डर था कि अगर गलती से भी उसकी पहचान सार्वजनिक हो जाती है तो इससे उसके भविष्य पर ग्रहण लग जाएगा और शादी-विवाह भी नहीं होगा। घर से निकलना दूभर हो जाएगा। दूसरा – हैवानों का राजनीतिक-मजहबी रसूख ऐसा था कि पीड़िताओं का परिवार भी डरता था। वैसे भी सामान्यतः इस देश का शांतिप्रिय नागरिक भले अन्याय सह ले लेकिन इन लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता क्योंकि ये वर्षों चलते हैं और न्याय की गारंटी भी नहीं होती।

हमने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में इसका उदाहरण देखा जब जिस व्यक्ति के अपहरण का मामला अभी सुनवाइयों में अटका था कि उसकी हत्या हो जाती है। उमेश पाल का अपहरण और हत्या कराने वाला सपा का पूर्व सांसद अतीक अहमद ही था। ऐसे ही मामला खींचता ही चला जाता है। जिस संस्थान में पीड़िता पढ़ती थी, उसे भी शक के निगाह से देखा जाता था। लड़कियों की आत्महत्या की खबरें आती थीं।

पत्रकार संतोष गुप्ता आज भी मानते हैं कि इस मामले में पुलिस-प्रशासन ने ‘कानून व्यवस्था बनाए रखने’ पर ज्यादा ध्यान दिया और आरोपितों पर कार्रवाई को कम। सोचिए, आज भी ऐसा होता है जब पुलिस मुस्लिम आरोपितों के नाम नहीं खोलती ताकि कोई वारदात न हो जाए। पत्थरबाजी, हिंसा और दंगों के भय से सांप्रदायिक मामलों को भी सामान्य बताया जाता है। ये पुलिस की मजबूरी भी है और एक खास कौम की मजबूती भी। पुलिस उसके सामने असहाय नजर आती है और ‘शांति समिति’ की बैठकों जैसे ड्रामे होते हैं। दिल्ली दंगा में हमने इसका चेहरा देखा था जब वही व्यक्ति दंगाई निकला जिसे लेकर पुलिस शांति की अपील करती फिर रही थी।

पत्रकार मदन सिंह को जानते हैं आप?

इस मामले में एक और पत्रकार का नाम आता है – मदन सिंह। उनके बारे में जानने से पहले हमें चलना होगा 7 जनवरी, 2023 को। ये वो दिन था जब राजस्थान का पुष्कर गोलीबारी से गूँज उठा था। एक रिजॉर्ट के बाहर ये गोलीबारी हुई। असल में ये हत्याकांड बेटों ने अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए अंजाम दिया था, 3 दशक बाद। मदन सिंह ही वो पत्रकार थे, जिनकी अजमेर स्थित JLN अस्पताल में हत्या कर दी गई थी। ये दृश्य भी आपको ‘Ajmer 92’ में दिखेगा।

इस हत्याकांड का आरोप लगा सवाई सिंह पर, जो बाद में बरी हो गया। सूर्यप्रताप सिंह ने उसे 30 साल 4 महीने बाद मार गिराया और कहा, “हमने अपने बाप की मौत का बदला ले लिया।” मदन सिंह ‘लहरों की बरखा’ नामक एक अख़बार के संपादक थे। उन्होंने भी पीड़ित लड़कियों से मिल कर उनके साथ हुई क्रूरता के दस्तानों को अपने अख़बार में जगह दी थी। उन्होंने अपने अख़बार में सीरीज चला कर न सिर्फ पुलिस-प्रशासन बल्कि शहर के कई सफेदपोशों को भी बेनकाब किया।

आज भी उनकी पत्नी आशा कँवर कहती हैं कि उनके पति को बेबस लड़कियों की रिपोर्ट छपने की सज़ा मिली थी। सोचिए, उनकी छानबीन कितनी तगड़ी थी कि 4 सितंबर, 1992 तक वो इस सीरीज की 76 किस्तें प्रकाशित कर चुके थे। उन्होंने इसकी अगली कड़ी कलर प्रिंट में छपने और कई सफेदपोशों को बेनकाब करने का ऐलान किया था। रात के 10 बज रहे थे। वो अपने स्कूटर में पेट्रोल भराने के लिए निकले। तभी श्रीनगर चौराहे पर एक एम्बेस्डर कार आकर रुकी।

कार में से ताबड़तोड़ गोलीबारी शुरू हो गई और इसका निशाना थे मदन सिंह। जान बचाने के लिए उन्होंने पास के एक नाले में छलाँग लगा दी। सोचिए, उस दौर की कानून व्यवस्था कैसी थी कि जिस JLN अस्पताल में उन्हें इलाज के लिए भर्ती कराया गया था वहीं रात के अँधेरे में कंबल ओढ़ कर आए अपराधियों ने उन पर गोलियाँ बरसाई और फिर भाग निकले। 5 गोलियाँ उन्हें लगीं। 3 दिन आबाद उन्होंने दम तोड़ दिया। ये वारदात तब हुई, जब उन्हें पुलिस सुरक्षा के साथ भर्ती कराया गया था।

उनकी माँ घीसी कँवर के सामने ये वारदात हुई, वो इस मामले की प्रत्यक्षदर्शी थीं। इस मामले में कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक डॉ राजकुमार जयपाल, पूर्व पार्षद सवाई सिंह और नरेंद्र सिंह सिंह समेत अन्य को आरोपित बनाया गया। उस समय मदन सिंह के बेटे धर्म प्रताप जहाँ 8 साल के थे वहीं सूर्य प्रताप की उम्र 7 साल थी। इस मामले में भी पुलिस ने लापरवाही की। गवाहों ने भी बयान बदले। इसके एक आरोपित को 2010 में शिव प्रताप ने 18 साल की उम्र में ही ठिकाने लगा दिया था।

सुधीर शिवहरे नामक आरोपित की पिटाई कर के उन्होंने उसके हाथ-पाँव तोड़ डाले थे और कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो गई थी। इसके एक दशक बाद 2020 में भी उन्होंने जयपाल और सवाई पर फायरिंग की थी लेकिन दोनों बच निकले थे। दोनों भाई इस मामले में गिरफ्तार हुए थे लेकिन उन्हें फिर जमानत मिल गई थी। सोचिए, मदन सिंह पर दो-दो बार गोलीबारी हुई लेकिन हाईकोर्ट ने भी आरोपितों को बरी कर दिया, माँ के बयान को विरोधाभासी बता दिया।

सवाई सिंह बेटे की शादी की कार्ड बाँट रहा था, तभी मारा गया। इस मामले में सूर्य प्रताप की पत्नी ने अपने पति पर फख्र जताते हुए कहा था कि अगर पुलिस ने उनके ससुर की हत्या के मामले में सही से कार्रवाई की होती और न्याय दिलाया होता, तब शायद ये घटना नहीं होती। इस पर आम लोगों, पुलिस-प्रशासन और न्यायपालिका – तीनों को मंथन करना चाहिए। सवाई सिंह के खिलाफ 22 मामले दर्ज थे, जिनमें से 5 जानलेवा हमलों के थे। पुलिस-कोर्ट कुछ नहीं कर पाई।

अजमेर सेक्स स्कैंडल और मदन सिंह हत्याकांड: दोनों मामलों में पुलिस की लीपापोती

अब बात करते हैं आरोपितों के राजनीतिक रसूख की। राजकुमार जयपाल विधायक था, ऐसे में 1992 में उसकी गिरफ़्तारी के वक्त सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई थी और उसकी जीप को घेर लिया था, जिससे पुलिस को उसे गिरफ्तार करने में खासी दिक्कत और देरी हुई थी। हत्या के समय मदन सिंह की उम्र मात्र 32 साल थी। उन्होंने अस्पताल में इलाज के दौरान भी अपने ऊपर हुए पहले हमले में जयपाल और सवाई का नाम लिया था, लेकिन उनके बयान को पुलिस ने नज़रंदाज़ किया।

पुलिस उस समय तक कहती रही कि मदन सिंह फँसा रहे हैं राजकुमार जयपाल को। उधर शॉटगन और पिस्टल लेकर हत्यारे आए और उन्हें अस्पताल में ही गोली मार कर चले गए। मदन सिंह का दोष इतना ही था कि उन्होंने 9 साल की एक लड़की का दर्द साझा किया था, जिसके साथ एक बड़े कारोबारी के घर के लड़के ने प्रेम संबंध चलाया और बाद में दोस्तों के साथ मिल कर उसकी अश्लील तस्वीरें क्लिक कर ली। उस समय ‘इंडिया टुडे’ में बताया गया था कि 200 लड़कियों के साथ ऐसी वारदातें हो चुकी थीं।

इस रिपोर्ट में ये भी लिखा था कि पुलिस प्रशासन को इस हत्याकांड से एक वर्ष पहले ही इस सेक्स स्कैंडल के बारे में पता चल गया था, लेकिन हिंसा और दंगों के भय से नेताओं ने कार्रवाई न करने को कहा था। कानूनी कार्रवाई भी रोक दी गई थी। आखिर आरोपित दरगाह के खादिम के परिवार से जो थे! तब ‘नवज्योति’ के संपादक दीनबंधु चौधरी ने कहा था कि इस संबंध में फैसला लेना काफी कठिन था कि उन फोटोग्राफ्स को प्रकाशित किया जाए या नहीं।

मदन सिंह के बेटों ने हत्या के 31 साल बाद लिया था बदला

लेकिन, उनका कहना था कि इन्हें प्रकाशित किया गया क्योंकि पुलिस-प्रशासन को जगाने का इससे बेहतर कोई तरीका नहीं था। तब राज्य में भाजपा की सरकार थी। मामला सामने आते ही बंद और विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। तब भाजपा के स्टेट सेक्रेटरी रहे ओंकार सिंह लखोटिया ने माना था कि कार्रवाई बहुत देर से शुरू हुई। फारूक चिश्ती उस समय ‘अजमेर यूथ कॉन्ग्रेस’ का अध्यक्ष था। नफीस चिश्ती उपाध्यक्ष था तो अनवर चिश्ती जॉइंट सेक्रेटरी।

तब राजस्थान पुलिस ने मदन सिंह की हत्या को गैंगवॉर का नतीजा बता दिया था। बताया गया कि मदन सिंह के ऊपर पहले से ही कई मामले दर्ज थे। मदन सिंह 1983 से ही ‘लहरों की बरखा’ अख़बार चला रहे थे। उनके दो अन्य भाई सैम और रणवीर भी इसमें उनका साथ देते थे। तत्कालीन एसपी एमएन धवन ने इनलोगों को ‘अपराधी परिवार’ बता कर इतिश्री कर ली। उस समय अजमेर की तुलना तत्कालीन बिहार से होने लगी थी जहाँ आपराधिक घटनाएँ आम बात थीं।

कश्मीर की शाहीन अख्तर, पहले निकाह करती और फिर लूट कर हो जाती फरार: 12 ‘पीड़ित शौहर’ आए सामने, 27 मर्दों का शिकार होने के कयास

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक ऐसी महिला को गिरफ्तार किया है जो निकाह के बाद शौहर को लूटकर फरार हो जाती थी। इस महिला की पहचान शाहीन अख्तर के रूप में सामने आई है। 5 जुलाई 2023 को मोहम्मद अल्ताफ ने अपने साथ निकाह के नाम पर ठगी की शिकायत की थी। उसके बाद वह पकड़ी गई। अब तक 12 लोग उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने सामने आए हैं। लेकिन कहा जा रहा है कि निकाह कर वह कम से कम 27 मर्दों को लूट चुकी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राजौरी जिले के मोहम्मद अल्ताफ मीर ने शिकायत दर्ज कराते हुए पुलिस को अपने साथ हुई ठगी की कहानी सुनाई थी। इसके बाद पुलिस ने राजौरी जिले के ही नौशेरा से शाहीन अख्तर को गिरफ्तार किया। उसकी गिरफ्तारी की खबर सामने आने के बाद 12 अन्य लोगों ने भी इसी तरह की ठगी को लेकर थाने जाकर शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत करने पहुँचे सभी लोगों के पास एक ही महिला की फोटो मिलने के बाद पुलिस को मामले की गंभीरता का पता चला। आरोपित महिला के पीछे किसी बड़े रैकेट का होने की भी आशंका जताई जा रही है। यह भी कहा जा रहा है कि महिला द्वारा ठगी का शिकार हुए लोगों की संख्या बढ़ सकती है।

इस मामले में ठगी का शिकार हुए अब्दुल अहद मीर का कहना है, “मेरे बेटे को कुछ शारीरिक समस्याएँ हैं। एक स्थानीय बिचौलिए ने मुझसे कहा था कि वह मेरे बेटे का निकाह करवाएगा। इसके एवज में मुझे उसे 2 लाख रुपए देने होंगे। इसके बाद मैं कुछ रिशेतदारों के साथ राजौरी गया और होटल में रुक गया। हालाँकि बिचौलिया निकाह की बात टालता रहा। कुछ दिनों बाद, उसने कहा कि लड़की का एक्सीडेंट हो गया है और मुझे आधे पैसे लौटा दिए। कुछ घंटे बाद फिर से पैसे वापस माँगे और एक अन्य लड़की की फोटो दिखाई।”

अब्दुल अहमद मीर ने आगे कहा, “जब हम राजी हो गए तो रात में निकाह कराई गई। हम लोग उसी रात कश्मीर वापस लौट आए। कुछ दिनों बाद, महिला ने मेरे बेटे यानी अपने शौहर से कहा कि वह अस्पताल जाकर जाँच कराना चाहती है। लेकिन जब शौहर हॉस्पिटल गया तो वह सारा सामान लेकर भाग गई।”

एक अन्य पीड़ित के पिता ने कहा है, “हमने महिला को मेहर की गारंटी के रूप में 3 लाख 80 हजार रुपए व सोना दिया था।” एक अन्य पीड़ित के भाई अब्दुल रशीद ने बताया है कि बिचौलिए ने रात में महिला से मिलवाया था और रात में ही निकाह करवा दिया। ठगी का शिकार हुए राशिद नामक व्यक्ति ने कहा है, “निकाह के बाद वह केवल दस दिन ही घर पर रुकी। इसके बाद वह हॉस्पिटल गई और भाग खड़ी हुई।” ऐसा ही दावा अन्य पीड़ितों का भी है।

निकाह के चक्कर में ठगी का शिकार हुए लोगों के वकील का कहना है, “महिला और इसके गिरोह के लोगों ने कई लोगों को लूटा है। निकाह के दस्तावेज़ों में उसका नाम ज़हीन, इलयास और शाहीना है। लेकिन कोई भी उसका असली नाम नहीं जानता था। केवल बडगाम में ही उसने बिचौलिओं की मदद से कम से कम 27 लोगों से निकाह की है।”

विपक्ष के बेंगलुरु शो पर NDA का जुटान भारी: बोले नड्डा- दिल्ली बैठक में शामिल होंगे 38 दल, 26 दलों के मोदी विरोधी गठबंधन का नाम भी फाइनल नहीं

विपक्षी दलों के साथ-साथ अब भाजपा ने भी शक्ति-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ऐसा लग रहा है जैसे पक्ष और विपक्ष, दोनों ही मंगलवार (18 जुलाई, 2023) से 2024 लोकसभा चुनाव के लिए औपचारिक रूप से हल्ला-बोल करेगा। जहाँ बेंगलुरु में 26 पार्टियों के नेता डिनर पर मिल रहे हैं, वहीं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा ने साफ़ किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली राजग की बैठक में 38 दल शामिल होने वाले हैं।

UPA गठबंधन के पास न नेता, न नीयत, न नीति: नड्डा

मीडिया को संबोधित करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि NDA का गठबंधन सत्ता के लिए नहीं है, ये गठबंधन सेवा के लिए है, भारत को मजबूत करने के लिए है। उन्होंने कहा कि देश ने तय कर लिया है कि 2024 में प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में फिर एक बार NDA की सरकार बनाएँगे। साथ ही स्पष्ट किया कि हमारी एकता देश के हित के ऊपर आधारित है, अटूट है और अटल है। UPA के गठबंधन को ‘भानुमति का कुनबा’ बताते हुए उन्होंने कहा कि पास न तो नेता है और न ही नीयत है, न नीति है और न ही फैसला लेने की ताकत है।

उन्होंने कहा कि ये गठबंधन भ्रष्टाचार और घोटालों का टोला है। भाजपा अध्यक्ष ने “कहीं की ईंट, कहीं का रोड़ा, भानुमति ने कुनबा जोड़ा” कहावत का जिक्र करते हुए कहा कि यह 10 साल की UPA सरकार के भ्रष्टाचार और घोटालों का टोला है। उन्होंने कहा कि 9 साल के अंदर गाँव, गरीब, शोषित, पीड़ित, वंचित, दलित, युवा, महिला, किसान इन सबके प्रति स्कीम्स को फोकस किया गया है। इससे इनके सशक्तिकरण में हमें बहुत सफलता मिली है।

उन्होंने बड़ी जानकारी दी कि 18 जुलाई को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की बैठक शाम को आहुत की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले 9 सालों में एनडीए का जो डेवलमेंट का एजेंडा है, जो स्कीम्स हैं, जो नीतियाँ हैं, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रही हैं, इसमें NDA के सभी दलों ने रुचि दिखाई है। उन्होंने बताया कि कैसे ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ योजना के अंतर्गत लाभार्थियों के खाते में 28 लाख सीधे ट्रांसफर किए गए हैं।

विपक्षी गठबंधन का नाम और ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ अभी तय नहीं

उधर बेंगलुरु में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप-मुख्यमंत्री DK शिवकुमार ने विपक्षी गठबंधन के नेताओं का स्वागत किया। DMK नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, JDU नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, JMM नेता और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, AAP नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनकी ही पार्टी के पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, RJD नेता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव और उनके बेटे व बिहार के डिप्टी CM तेजस्वी यादव भी इस बैठक में उपस्थित हुए

बैठक में जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और NC नेता उमर अब्दुल्ला भी शामिल हुए, जिन्होंने कहा कि पटना में हुई बैठक सामान्य थी और आशा है कि यहाँ कुछ ठोस होगा। इस बैठक में विपक्षी गठबंधन के लिए ‘कॉमन मिनिमन प्रोग्राम’ ड्राफ्ट करने के लिए कमिटी बनाई जाएगी और सीट शेयरिंग फॉर्मूले के लिए कम्युनिकेशन कैसे होगा, इन बिंदुओं पर मंथन होगा। कॉन्ग्रेस महासचिव किसी वेणुगोपाल ने कहा कि गठबंधन का नया नाम क्या होगा, इस पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

क्या मुलायम जैसा ही होगा सचिन का हश्र: पबजी वाली सीमा हैदर इकलौती पाकिस्तानी महिला नहीं, लूडो वाली इकरा भी भारत में घुसी थी वाया नेपाल

पाकिस्तानी महिला सीमा हैदर का कहना है कि पबजी खेलते हुए वह नोएडा के रबूपुरा के सचिन के करीब आई। प्यार हुआ तो अपने चार बच्चों को लेकर पाकिस्तान से भारत आ गई। अब यूपी एटीएस ने उसे पूछताछ के लिए उठाया है। कहा जा रहा है कि वह गिरफ्तार की जा सकती है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सीमा हैदर का हाल इकरा जैसा होगा? क्या सचिन के इस कथित प्रेम कहानी का अंतिम पड़ाव जेल है, जैसा मुलायम सिंह यादव के साथ हुआ था?

दरअसल इकरा और मुलायम सिंह यादव की कथित प्रेम कहानी भी इसी साल जनवरी में सामने आई थी। हालाँकि इस कहानी को मीडिया में उतनी फुटेज नहीं मिली, जितनी सीमा और सचिन ने खाई है। लेकिन दोनों कहानी में कई समानता है। जैसे सीमा पबजी से सचिन के प्यार में आने के दावे कर रही है, वैसे ही पाकिस्तान की इकरा जिवानी को ऑनलाइन लूडो खेलते हुए मुलायम सिंह यादव से प्यार हो गया था। वह भी नेपाल के रास्ते ही भारत में दाखिल हुई थी। जब भेद खुला तो गिरफ्तारी हुई और बाद में वापस पाकिस्तान भेज दिया गया।

पाकिस्तान के हैदराबाद में रहने वाली इकरा जिवानी का कहना था कि ऑनलाइन लूडो खेलते हुए वह 2019 में बेंगलुरु में रहने वाले मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आई। दोनों लूडो गेम खेलते और बातें करते। इसी दौरान दोनों में प्यार हो गया। 10वीं पास मुलायम सिंह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ का रहने वाला है। वह बेंगलुरु में एक प्राइवेट फर्म में सिक्योरिटी गार्ड का काम करता था। वहीं इकरा अंडर ग्रेजुएट है और पाकिस्तान में कोचिंग में पढ़ाती थी। प्यार परवान चढ़ा तो मुलायम सिंह ने इकरा को नेपाल के रास्ते भारत लाने की योजना बनाई। 

मुलायम इकरा को भारत लाना चाहता था। लेकिन इकरा के पास न तो पैसे थे और न ही भारत आने का वीजा। इसलिए उसने पहले तो अपने गहने बेचे फिर दोस्तों से पैसे उधार लिए। इसके बाद 19 सितंबर 2022 को इकरा अपने घर से कॉलेज के लिए निकली, लेकिन वापस घर नहीं लौटी। वह पाकिस्तान से फ्लाइट पकड़कर दुबई गई और फिर वहाँ से नेपाल के काठमांडू पहुँची। यहाँ मुलायम सिंह यादव पहले ही उसका इंतजार कर रहा था। दोनों ने नेपाल में ही शादी कर ली। इसके बाद मुलायम उसे लेकर बेंगलुरु चला आया। इकरा की पहचान छिपाने के लिए मुलायम ने उसका नाम बदलकर रवा रख दिया। यही नहीं, इसी नाम से उसका आधार कार्ड बनवाकर भारतीय पासपोर्ट के लिए भी आवेदन कर दिया।

कैसे हुआ खुलासा

इकरा ने मुलायम सिंह यादव से शादी तो कर ली थी, लेकिन वह फिर भी नमाज पढ़ती थी। उसे नमाज पढ़ते पड़ोसियों ने देख लिया। हिंदू के घर में नमाज पढ़ रही लड़की को देखकर लोगों को शक हुआ। मामला पुलिस के पास पहुँचा और पूछताछ के दौरान सच सामने आ गया। इसके बाद पुलिस ने 23 जनवरी 2023 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इकरा को बेंगलुरु के महिला गृह में रखा गया था। महिला गृह के अधिकारियों की माने तो इकरा उन लोगों से अक्सर कहती थी कि वह अपनी जिंदगी अपने पति मुलायम के साथ रहकर गुजारना चाहती है। वह मुलायम से बात करने की अनुमति और पाकिस्तान न भेजने की बात कहती थी।

हालाँकि इसके बाद 19 फरवरी 2023 को भारत-पाकिस्तान सीमा से इकरा को पाकिस्तान के इमिग्रेशन अफसरों को सौंप दिया गया था। जहाँ से अधिकारियों ने उसे उसके अम्मी-अब्बू के पास पहुँचा दिया। वहीं, मुलायम सिंह यादव के खिलाफ जालसाजी, फॉरेनर एक्ट और आईपीसी की संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। यह मामला अब भी कोर्ट में है। क्या सचिन का हश्र भी अंत में मुलायम जैसा होगा? क्या सीमा को उसके बच्चों के साथ पाकिस्तान को सौंप दिया जाएगा?

‘ऐसा थप्पड़ मारूँगा कि आने वाले बच्चे भी बहरे पैदा होंगे’: जिस दलित लड़की का रेप-मर्डर, उसके परिजनों को धमकाने का राजस्थान पुलिस पर आरोप

राजस्थान में करौली में एक दलित लड़की की कथित तौर पर एकतरफा प्यार में रेप के बाद हत्या कर दी गई। पीड़ित परिजनों ने पुलिस पर भी धमकाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शुरुआत में थाने में उनकी सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने उन्हें पीटने की धमकी दी। इन आरोपों के बाद दो पुलिसकर्मी लाइन हाजिए किए गए हैं।

दलित लड़की को अगवा कर रेप और हत्या करने के आरोप में गोलू मीणा को गिरफ्तार किया गया है। लड़की का शव कुएँ में डाल दिया गया था। पीड़िता और आरोपित दोनों ही दलित समुदाय से हैं। यह घटना 11-12 जुलाई 2023 की दरम्यानी रात की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला करौली जिले के नादौती इलाके का है। यहाँ का रहने वाला गोलू मीणा और मृतका एक-दूसरे से लम्बे समय से परिचित थे। बताया जा रहा है कि दोनों के घर वालों को उनका रिश्ता मंजूर नहीं था। इस बीच 4 माह पहले लड़की का परिजनों ने रिश्ता कहीं और तय कर दिया। यह बात गोलू मीणा और लड़की, दोनों को नागवार गुजरी थी। पुलिस का कहना है कि 11-12 जुलाई 2023 की रात लड़की गोलू मीणा के पास उसके घर गई थी। यहाँ दोनों के बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ।

बताया जा रहा है कि झगड़े के बाद गोलू मीणा ने लड़की को अपने पास रखी बंदूक से गोली मार दी। लड़की की जान निकलने के बाद उसका शव बाइक पर रख कर गाँव के ही एक कुएँ में फेंक दिया और मौके से भाग निकला। पुलिस ने गोलू मीणा को शनिवार (15 जुलाई 2023) को जयपुर से गिरफ्तार किया था। गोलू से हुई पूछताछ के बाद उसके साथी को भी पकड़ा गया है। हालाँकि लड़की के परिवार का आरोप है कि रेप के बाद हत्या की गई। वे एसिड से जलाने का भी आरोप लगा रहे हैं। इन आरोपों की जाँच हो रही है।

वैसे अभी तक हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद नहीं हो पाया है। गोलू मीणा का पिता नहना भी पुलिस की हिरासत में है। इस बीच मृतका के घर वालों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि शुरू में जब वे थाने में शिकायत लेकर गए थे, तब उनकी सुनवाई नहीं हुई। कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी ने लड़की की माँ से कहा, “तुम यहाँ से चुपचाप चली जाओ, तुम्हारी बेटी तो घूम घाम कर अपने आप ही वापस आ जाएगी।” जब पीड़ित परिजन अपनी माँग पर डटे रहे तब उन्हीं के परिवार के एक सदस्य को जेल भेजने की धमकी देने का आरोप भी पुलिस पर है। एक अन्य पुलिसकर्मी ने पीड़ितों से कहा, “ऐसा थप्पड़ मारूँगा कि आने वाले बच्चे भी बहरे पैदा होंगे।”

करौली की SP ममता गुप्ता ने इस मामले का संज्ञान लिया है। रविवार (16 जुलाई) को उन्होंने शिवलाल मीणा और प्रेमचंद नाम के 2 पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जाँच चल रही है। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात की है।

‘पता नहीं उनके मन में क्या चल रहा है’: 24 घंटे में 2 बार मिले पवार चाचा-भतीजा, प्रफुल्ल पटेल बोले- हम NDA की बैठक में होंगे शामिल

NCP का बागी गुट लगातार पार्टी के संस्थापक शरद पवार को मनाने में लगा हुआ है। महाराष्ट्र की राजनीति में तब नया मोड़ आ गया था, जब 40 विधायकों का समर्थन लेकर नेता प्रतिपक्ष अजित पवार ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल होने का निर्णय लिया और राज्य के उप-मुख्यमंत्री बने। उनके कोटे से कुल 9 मंत्रियों ने शपथ ली। अब मुंबई स्थित YB चव्हाण सेंटर में लगातार दूसरे दिन अजित पवार अपने चाचा को मनाने के लिए पहुँचे।

उनके साथ राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल और और सुनील तटकरे भी थे। बागी नेताओं ने शरद पवार से अनुरोध किया कि वो NCP को एक रखें। प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि शरद पवार ने सबकी बातें सुनी, लेकिन कुछ कहा नहीं। एक दिन पहले भी ये बागी नेता इसी जगह पर शरद पवार से मिलने पहुँचे थे, उस दौरान भी उन्होंने कुछ प्रतिक्रिया नहीं दी थी। अब फिर से लगातार दूसरे दिन भी मुलाकात हुई है। अब तक शरद पवार ने इस पर कोई बयान नहीं दिया है।

बताया जा रहा है कि ये नेता शरद पवार को इस बात के लिए मनाने के लगे हुए हैं कि वो महाराष्ट्र में भाजपा, शिवसेना (बालासाहेब ठाकरे) और NCP की सरकार को समर्थन दें, लेकिन वो मानने के लिए तैयार नहीं हैं। उधर शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि विश्वासघात करने वालों के लिए पार्टी के दरवाजे नहीं खुलने चाहिए। शरद पवार मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को विपक्षी दलों की बैठक में जाएँगे, ऐसा बताया जा रहा है। लेकिन, वो आज के विपक्षी डिनर में शामिल नहीं होंगे।

ये भी सामने आया है कि अजित पवार के साथ 30 विधायक भी थे जिन्होंने शरद पवार से मुलाकात की। प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि शरद पवार ने उनलोगों की बातों को गंभीरता से सुना, लेकिन पता नहीं उनके दिमाग में क्या चल रहा है। असल में बागी विधायक चाहते हैं कि सीनियर पवार का आशीर्वाद उनके ऊपर बना रहे, क्योंकि महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों का एक बड़ा वर्ग शरद पवार का वोट बैंक रहा है। प्रफुल्ल पटेल और अजित पवार मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को NDA की बैठक में मौजूद रहेंगे।

कुमार विश्वास की पत्नी पर FIR, DG ने बताया- बिचौलिए ने लिया नाम: RPSC घूस कांड में कॉन्ग्रेस के पूर्व मंत्री समेत 4 को गिरफ्तार कर चुकी है ACB

मशहूर कवि व पूर्व AAP नेता कुमार विश्वास की पत्नी और राजस्थान लोक सेवा आयोग की सदस्य मंजू शर्मा के खिलाफ FIR दर्ज हुई। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने यह कार्रवाई अधिशासी अधिकारी (EO) परीक्षा में ओएमआर शीट बदलवाने के बदले घूस लेने के आरोप में की। हालाँकि एसीबी के डीजी ने उन्हें मौखिक रूप से क्लीन चिट दे दी है। इस मामले में पुलिस कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व राज्य मंत्री गोपाल केसावत समेत अन्य लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित अधिशासी अधिकारी (ईओ) की भर्ती परीक्षा में घूस लेने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो सख्त रुख अपना रहा है। एसीबी ने इस मामले में कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा के अलावा आयोग की सदस्य संगीता शर्मा और संगीता आर्य के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की है। इनमें से संगीता आर्य राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार और पूर्व मुख्य सचिव निरंजन आर्य की पत्नी हैं।

इस मामले में राजस्थान एसीबी के कार्यवाहक डीजी हेमंत प्रियदर्शी ने कहा है कि एक शिकायतकर्ता को विश्वास में लेने के लिए एक बिचौलिए ने कुमार विश्वास की पत्नी मंजू शर्मा का नाम लिया था। यही नहीं एक बिचौलिए ने शिकायतकर्ता से यह भी कहा था कि कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे गोपाल केसावत लोक सेवा आयोग की सदस्य संगीता आर्य और मंजू शर्मा को जानते हैं। केसावत इन दोनों के जरिए लोगों को पास करा सकते हैं।

हालाँकि एसीबी के डीजी हेमंत प्रियदर्शी ने मंजू शर्मा समेत राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्यों को मौखिक रूप से क्लीन चिट दे दी है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में लोक सेवा आयोग का किसी भी स्तर का कोई व्यक्ति शामिल नहीं है। 

क्या है मामला

एडवोकेट ह‍रदीप सिंह सुंदरिया अभ्यर्थी विकास व एक अन्य व्यक्ति ने 7 जुलाई 2023 को सीकर के एंटी करप्शन ब्यूरो में एक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में कहा गया था कि अधिशासी अधिकारी यानि ईओ की भर्ती परीक्षा में विकास नामक अभ्यर्थी को मेरिट में लाने के लिए अनिल कुमार नामक बिचौलिए ने आरपीएससी सदस्‍य मंजू शर्मा व आरपीएससी चेयरमैन के नाम से 40 लाख रुपए की माँग की थी। 

शिकायत में यह भी कहा गया था कि बिचौलिए के साथ रिजल्ट आने से पहले 25 लाख रुपए और बाद में 15 लाख रुपए देने का सौदा हुआ था। अनिल ने ओएमआर शीट देखकर यह भी कहा था कि अभ्यर्थी के 62 प्रश्न सही और 20 गलत हैं। इसके बाद एसीबी ने बिचौलियों और कॉन्ग्रेस नेता गोपाल केसावत को दलालों संग रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

ACB के ट्रैप से हुई गिरफ्तारी

भर्ती के लिए 40 लाख रुपए की घूस की माँग को लेकर शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो ने जाल बिछाया था। शुक्रवार (14 जुलाई 2023) को एसीबी ने जाल के तहत ही बिचौलिए अनिल कुमार और ब्रह्मप्रकाश को 18.50 लाख रुपए की रिश्वत दिलाई थी। इसके बाद एसीबी दोनों पर निगरानी रख रही थी। शुक्रवार रात को ही दोनों आरोपित एक अन्य बिचौलिए रविन्द्र शर्मा को 7 लाख 50 हजार रुपए देने पहुँचे थे। जहाँ एसीबी ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया था। तीनों आरोपितों से हुई पूछताछ में गोपाल केसावत सहित अन्य लोगों का नाम सामने आया था।

इसके बाद एसीबी ने कुल 18.50 लाख रुपए में से 7.5 लाख रुपए शिकायतकर्ता को वापस देते हुए जयपुर में राजस्थान राज्य विमुक्त, घुमंतू व अर्द्धघुमंतू कल्याण बोर्ड के पूर्व चेयरमैन और कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रहे गोपाल केसावत ​को देने के लिए कहा था। जब गोपाल केसावत शिकायतकर्ता से यह पैसा ले रहे थे तब एसीबी ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था। 

‘मारो, काटो, ज़िंदा मत जाने देना’: मस्जिद से निकली भीड़ ने हिन्दू युवकों पर किया हमला, गुजरात में ‘The Kerala Story’ का स्टेटस लगाने पर बवाल

फिल्म ‘The Kerala Story’ में दिखाया गया था कि कैसे केरल में हिन्दू लड़कियों को फँसा कर उनका ब्रेनवॉश किया जाता है और फिर उन्हें आतंकी संगठन ISIS में सेक्स स्लेव बना कर भेज दिया जाता है। वामपंथी-इस्लामी गिरोह द्वारा फिल्म का खूब विरोध किया गया, लेकिन छोटे बजट की ये फिल्म दुनिया भर में 300 करोड़ से भी अधिक रुपए कमाने में कामयाब रही। बड़ी बात ये है कि इसके बावजूद अब तक इस फिल्म को लेकर विवाद जारी है।

ताज़ा मामला गुजरात के पाटन जिले के बालिसाना से आया है। यहाँ ‘The Kerala Story’ के समर्थन में स्टेटस लगाने पर हिन्दू युवकों पर जानलेवा हमला कर दिया गया। मुस्लिम भीड़ ने मामला शांत होने के बाद भी 5 हिन्दू युवकों पर हमला बोल दिया। हमले में धारदार हथियारों और लोहे के रॉड का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 3 युवक घायल हो गए हैं। राधनपुर में उनका इलाज चल रहा है। तनाव के कारण गाँव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।

कक्षा 10 के छात्र को मस्जिद में बुलाया, माफ़ी माँगने को मजबूर किया

बताया जाता है कि कुछ दिन पहले 10वीं कक्षा के एक छात्र ने व्हाट्सएप्प पर ‘द केरल स्टोरी’ के समर्थन में स्टेटस लगाया था। उसने फिल्म का पोस्टर शेयर किया था। इसके बाद बालिसाना के ही एक मुस्लिम युवक ने उसे गाली दी। बच्चे को जबरन स्थानीय मस्जिद में बुलाया गया और इस स्टेटस के लिए माफ़ी माँगने के लिए मजबूर किया गया। उसने माफ़ी भी माँग ली, इसके बावजूद मामला नहीं थमा।

एक पीड़ित ने बताया कि रविवार (16 जुलाई, 2023) को रात के भोजन के बाद जब वो अपने दोस्तों के पास जा रहा था, तभी मस्जिद के पास भीड़ इकट्ठी हो गई। पहले उसका नाम पूछा गया, फिर ‘मारो, काटो, ज़िंदा मत जाने देना’ चिल्लाती हुई भीड़ उस पर पिल पड़ी। अब्दुल कादरी ने लोहे की पाइप से युवक के सिर पर वार कर दिया, जिससे वो जमीन पर गिर पड़ा। तोफीक हुसैन, नजीरमियान शेख और शेख साहद मोहम्मद ने मिल कर उसकी पिटाई की।

पाटन के बालिसाना में हिन्दू युवकों को पीट-पीट कर किया घायल

पीड़ित ने बताया है कि भीड़ उस दौरान चिल्ला रही थी – “माथे में मारो, बचना नहीं चाहिए, मर जाना चाहिए ये”। उसकी छाती और पैर पर भी वार किए गए। उसे बचाने के लिए जब उसके दोस्त आए तो उन्हें भी पीटा गया। घटना के बाद हिन्दू समाज आक्रोशित है। VHP के मेहसाणा संभाग के मंत्री हितेश ठक्कर ने ऑपइंडिया से कहा कि कुछ इलाकों को योजनाबद्ध तरीके से इस्लामी बनाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने बताया कि इन गाँवों में एक बड़ी मुस्लिम आबादी अवैध रूप से रह रही है।

हिन्दू संगठनों ने चेताया, कहा – यहाँ ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’

VHP और ‘बजरंग दल’ ने संदेह जताया है कि यहाँ कुछ लोग घुसपैठियों को बसने में मदद कर रहे है, ऐसे में उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इन इलाकों में आईडी कार्ड्स के जाँच की भी ज़रूरत जताई। उन्होंने कहा कि इस वारदात में शामिल आरोपितों का परेड निकाला जाना चाहिए और उन्हें पीड़ितों से माफ़ी माँगनी चाहिए। इन संगठनों ने कहा है कि इन इलाकों के हिन्दुओं के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।

हितेश ठक्कर ने इस दौरान बड़ा खुलासा किया कि इन इलाकों में एक साजिश के तहत नौकरी या धन का लालच देकर हिन्दू लड़कियों को फँसाने की भी कई घटनाएँ सामने आई हैं। ‘लव जिहाद’ की घटनाएँ बढ़ रही हैं। मेहसाणा डिवीजन के बजरंग दल संयोजक सुनील राजपुरोहित ने भी ऑपइंडिया को बताया कि ये हमला पूर्व-नियोजित साजिश के तहत हुआ है। उन्होंने कहा कि बालिसाना में रोहिंग्या मुस्लिम सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर अवैध कब्जा कर रहे हैं।

उन्होंने ‘लव जिहाद’ और ‘लैंड जिहाद’ के आरोप लगाते हुए चेताया कि अगर आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो हिन्दू संगठन सड़क पर उतरेंगे। गौरतलब है कि हिंदू युवकों पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने 10 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 307, 326, 323, 143, 147, 148, 504, 506 (2), 294 (बी) और जीपीए के तहत मामला दर्ज किया है। आरोपितों में अब्दुल कादर, तोफीक हुसैन शेख, साहद मोहम्मद हसब शेख, आरिफ अब्दुल शेख, इलियास इब्राहिम शेख, फैजरा अली शेख, सिकंदर अब्दुल, खलील दिलावर और अब्दुल कादरी उर्फ ​​भैलू मास्टर का बेटा शामिल हैं।