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‘अंग्रेजों ने रखा हमारे देश का नाम इंडिया’: CM सरमा, उधर विपक्ष के ‘INDIA’ में ‘D’ को लेकर नेताओं में कन्फ्यूजन, कोई कह रहा ‘डेमोक्रेटिक’ तो कोई ‘डेवलपमेंटल’

बेंगलुरु में हुई 26 विपक्षी दलों की बैठक के बाद गठबंधन के नए नाम का ऐलान हुआ। अब गठबंधन का नाम यूपीए की जगह इंडिया होगा। विपक्ष का दावा है कि इस नए नाम के साथ बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को हराया जा सकता है। हालाँकि गठबंधन के नामकरण को लेकर बीजेपी नेता विपक्ष पर तंज कस रहे हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा है, “हमारा संघर्ष इंडिया और भारत के इर्द-गिर्द केंद्रित है। अंग्रेजों ने हमारे देश का नाम इंडिया रखा। हमें खुद को औपनिवेशिक विरासतों से मुक्त करने की कोशिश करनी चाहिए। हमारे पूर्वज भारत के लिए लड़े और हम भारत के लिए काम करते रहेंगे। भारत के लिए भाजपा।”

BJP ने अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट पर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का वीडियो शेयर कर लिखा, “जिस ‘INDIA’ को दुनियाभर में बदनाम करते फिरते हैं, अपने अस्तित्व और परिवारों को बचाने के लिए उसके नाम का ही सहारा लेना पड़ा। और तो और, वो नाम भी सही से नहीं ले पा रहे हैं।” वीडियो में मल्लिकार्जुन खड़गे को INDIA का INDIL बोलते सुना जा सकता है।

बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने कहा है, “D का मतलब डेमोक्रेटिक या डेवलपमेंटल है? जो लोग इस जैसी सरल और छोटी सी बात पर आम सहमति नहीं बना पा रहे हैं। वे देश चलाने की उम्मीद कर रहे हैं। यह उन लोगों के लिए एक मजाक की तरह है, जो खुद की सेवा में लगे राजनीतिक उत्तराधिकारियों के इस समूह को गंभीरता से लेते हैं।”

दरअसल, गठबंधन के नए नाम को लेकर विपक्षी नेता के एक के बाद एक ट्वीट तो किए जा रहे थे। लेकिन उनमें INDIA के D को लेकर भारी कन्फ्यूजन दिखा। जैसे कि कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से किए गए ट्वीट में D का मतलब डेवलपमेंटल लिखा था। वहीं अखिलेश यादव ने डेमोक्रेटिक लिखा था। 

वहीं, भाजपा सांसद सुशील मोदी ने कहा है कि भ्रष्ट और परिवारवादी विपक्षी दलों के मंच का नाम ‘इंडिया’ रखने से इनकी खोटी नियत छिपने वाली नहीं है। इनके एलीट, पश्चिम प्रभावित और हिंदू विरोधी ‘इंडिया’ को करोड़ों गरीबों, पिछड़ों का संस्कृतिनिष्ठ भारत 2024 में मुँहतोड़ जवाब देगा। इंडिया बनाम भारत मैच में जीत भारत की होगी। चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद और चिटफंड घोटाले में लिप्त ममता बनर्जी जैसे दागी लोग जहाँ जुटे हैं, उस नए मॉल का नाम बदल लेने से खोटा माल खरा सोना नहीं हो जाएगा। 

‘हमने सरकारों का विरोध करने के लिए विदेशी मदद नहीं माँगी’: NDA की बैठक में PM मोदी ने याद किए विपक्ष वाले दिन, कहा – इन्हें अपने कार्यकर्ताओं की भी परवाह नहीं

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में NDA के 38 दलों की बैठक हुई। बैठकों को संबोधित करते हुए पीएम ने कहा कि NDA के 25 वर्षों की इस यात्रा के साथ एक और संयोग जुड़ा है। उन्होंने कहा कि ये वह समय है, जब हमारा देश आने वाले 25 वर्षों में एक बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कदम बड़ा रहा है। साथ ही स्पष्ट किया कि ये लक्ष्य विकसित भारत का है, आत्मनिर्भर भारत का है।

उन्होंने NDA का मतलब समझाया – N से ‘New India’, D से ‘Developed Nation’ और A से ‘Aspiration For People’। उन्होंने कहा कि हमारे देश में राजनीतिक गठबंधनों की एक लंबी परंपरा रही है, लेकिन जो भी गठबंधन नकारात्मकता के साथ बने वह कभी भी सफल नहीं हो पाए। उन्होंने याद किया कि कॉन्ग्रेस ने 90 के दशक में देश में अस्थिरता लाने के लिए गठबंधनों का इस्तेमाल किया। उसने सरकारें बनाईं और सरकारें बिगाड़ीं।

पीएम मोदी ने कहा कि जब हम विपक्ष में थे तब भी हमने हमेशा सकारात्मक राजनीति की और हमने कभी जनादेश का अपमान नहीं किया। उन्होंने याद किया कि कैसे उनलोगों ने सरकारों का विरोध करने के लिए कभी भी विदेशी मदद नहीं माँगी। उन्होंने कहा कि हम विपक्ष में रहे लेकिन देश के विकास में न रोड़े अटकाए और न ही रुकावट बने। प्रधानमंत्री ने कहा कि 1998 में NDA का गठन हुआ था, लेकिन सिर्फ सरकारें बनाना और सत्ता हासिल करना NDA का लक्ष्य नहीं था।

उन्होंने साफ़ किया कि NDA किसी के विरोध में नहीं बना था, NDA किसी को सत्ता से हटाने के लिए नहीं बना था, बल्कि NDA का गठन देश में स्थिरता लाने के लिए हुआ था। पीएम मोदी ने कहा कि जब गठबंधन सत्ता की मजबूरी का हो, जब गठबंधन भ्रष्टाचार की नीयत से हो, जब गठबंधन परिवारवाद की नीति पर आधारित हो, जब गठबंधन जातिवाद और क्षेत्रवाद को ध्यान में रखकर किया गया हो तो वो गठबंधन देश का बहुत नुकसान करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “2014 से पहले की गठबंधन सरकार का उदाहरण हमारे सामने है। प्रधानमंत्री के ऊपर एक आलाकमान, पॉलिसी पैरालिसिस, निर्णय लेने में अक्षमता, अव्यवस्था और अविश्वास, खींचतान और भ्रष्टाचार, लाखों-करोड़ों के घोटाले। NDA सरकार ने बीते 9 वर्षों में भ्रष्टाचार के हर रास्ते को बंद करने के लिए हर संभव प्रयास किया। पहले सत्ता के गलियारे में जो बिचौलिए घूमते थे, उन्हें बाहर कर दिया। जनधन, आधार और मोबाइल की त्रिशक्ति से गरीबों का हक छीनने से रोका है।”

पीएम मोदी ने कहा कि हमने देश सेवा में सभी के योगदान को स्वीकार किया, उसे सराहा, उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की ये मूल भावना NDA की कार्यशैली में आपको हर जगह दिखेगी। बकौल पीएम मोदी, अपने राजनीति स्वार्थ के लिए ये लोग पास-पास तो आ सकते हैं, लेकिन साथ नहीं आ सकते। उन्होंने याद दिलाया कि इन्हें अपने कार्यकर्ताओं की भी परवाह नहीं है, ये अपने कार्यकर्ताओं से उम्मीद करते हैं कि जीवन भर जिनका विरोध किया उनका अचानक से सत्कार करने लग जाएँ।

पीएम मोदी ने ये भी कहा कि जो लोग आज मोदी को कोसने में इतना समय लगा रहे हैं, अच्छा होता, वह देश के लिए सोचने में, गरीब के लिए सोचने में अपना समय लगाते। हम उनके लिए प्रार्थना ही कर सकते हैं।

गठबंधन का नाम ‘INDIA’ रख कर फँस गए विपक्षी दल? इस नाम से कुछ भी नहीं हो सकता है रजिस्टर, समझें क्या कहता है कानून

विपक्षी गठबंधन ने कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुई बैठक के बाद UPA को अलविदा कहते हुए ‘INDIA (Indian National Developmental Inclusive Alliance)’ नाम एक एक नया गठबंधन बनाया है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कह दिया कि 2024 लोकसभा चुनाव की लड़ाई अब ‘INDIA बनाम NDA’ की होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या देश के नाम का इस्तेमाल इस तरह से किया जा सकता है?

इसके लिए हमें सबसे पहले कानून को देखना पड़ेगा। अगर सिर्फ बोलचाल के लिए ही गठबंधन बनाया गया है तो वो ‘INDIA’ इसका नाम रख सकते हैं या फिर कहने-सुनने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन जैसे ही बात रजिस्ट्रेशन वगैरह की आएगी तो ये संभव नहीं हो पाएगा। चूँकि बताया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में गठबंधन का एक सचिवालय भी होगा, इसीलिए हो सकता है कि आगे चल कर गठबंधन के नाम पर ही चुनावी अभियान से लेकर वेबसाइट वगैरह भी लॉन्च की जाए।

भारत में अगर किसी नए राजनीतिक दल का गठन करना है तो इसके लिए आवदेन चुनाव आयोग के दफ्तर ‘निर्वाचन सदन’ में देना होता है। इसके बाद चुनाव आयोग इस दल को रजिस्टर करता है और उसे चुनाव चिह्न प्रदान करता है। लेकिन, बात ये भी है कि गठबंधन का नाम बिना रजिस्ट्रेशन के भी कागज पर हो सकता है और मुँहजबानी हो सकता है, इसे रजिस्टर कराने की कोई अनिवार्यता नहीं है। UPA, NDA, MVA या फिर ‘महागठबंधन’ – इन सबका इस्तेमाल खूब होता है लेकिन किसी सरकारी पंजीकरण की ज़रूरत नहीं पड़ती।

लेकिन, अगर विपक्षी गठबंधन सिर्फ ‘INDIA’ नाम के साथ किसी भी संस्था, वेबसाइट, कंपनी या संगठन को रजिस्टर कराने जाता है तो उसे मुँह की खानी पड़ सकती है। उसे इस नाम के आगे-पीछे ज़रूर कुछ जोड़ना पड़ेगा, क्योंकि संविधान के हिसाब से ये हमारे देश का नाम है। इसकी तह तक जाने के लिए हमें ‘THE EMBLEMS AND NAMES (PREVENTION OF IMPROPER USE) ACT, 1950’ को समझना पड़ेगा। आइए, देखते हैं कि ये कानून क्या कहता है।

ये कानून कहता है कि कुछ खास नाम, प्रतीक और चिह्न ऐसे हैं जिन्हें रजिस्टर नहीं कराया जा सकता है। इनमें 20 ऐसे चीजों की सूची दी गई है जिनका इस्तेमाल रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं किया जा सकता। जैसे, आप ‘इंडिया टीवी’ हो सकते हैं, ‘NDTV इंडिया’ हो सकते हैं या फिर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ हो सकते हैं, लेकिन ‘इंडिया’ नहीं हो सकते, ‘भारत’ नहीं हो सकते। आप भारत के किसी राजकीय चिह्न या प्रतीक को भी रजिस्टर नहीं करा सकते।

वो 20 चीजें हैं – UN का नाम, चिह्न और सील, WHO का नाम, चिह्न या सील, भारत के राष्ट्रीय ध्वज, भारत देश या इसके किसी भी राज्य या सरकारी संगठन का नाम, प्रतीक या मुद्रा, राष्ट्रपति-राज्यपाल का नाम, चिह्न या सील, ऐसा कोई नाम जिससे लगे कि सरकार या सरकारी संस्थाओं के अंतर्गत आता हो, राष्ट्रपति, राष्ट्रपति भवन व राजभवन का नाम या तस्वीर, महात्मा गाँधी या भारत के किसी भी प्रधानमंत्री की तस्वीर (इन्हें कैलेंडरों के लिए इस्तेमाल में लाया जा सकता है, लेकिन इसका कमर्शियल प्रयोग नहीं होना चाहिए), किसी भी सरकार सम्मान या मेडल का नाम-चिह्न, ‘इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गेनाइजेशन’ का नाम-चिह्न-सील, ‘इंटरपोल’ शब्द, ‘World Meteorological Organisation’ का नाम-प्रतीक-मुद्रा, ‘Tuberculosis Association of India’ का नाम-प्रतीक-सील, ‘International Atomic Energy Agency’ का नाम-प्रतीक-सील, ‘अशोक चक्र’ और ‘धर्म चक्र’ जैसे नाम या फिर उनकी तस्वीर, संसद-विधानसभा या फिर किसी भी अदालत का नाम-तस्वीर-चिह्न, ‘रामकृष्ण मठ’ या ‘रामकृष्ण मिशन’ का नाम-चिह्न, ‘शारदा मठ’ या ‘रामकृष्ण शारदा मिशन’ का नाम-चिह्न, ‘भारत स्काउट्स एन्ड गाइड्स’ का नाम-प्रतीक।

ये कानून कहता है कि ऊपर जो भी वर्णित हैं उनका इस्तेमाल किसी भी संस्था, कंपनी या समूह के रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं किया जा सकता। आपका ट्रेडमार्क या फिर डिजाइन इस तरह का नहीं हो सकता जो ऊपर वर्णित है (जैसे अशोक चक्र या राष्ट्रीय ध्वज), इनका कोई पेटेंट भी नहीं कराया जा सकता। ये भी बताया गया है कि इसमें केंद्र सरकार का निर्णय अंतिम होगा। आप ‘रिपब्लिक’ या ‘सदर-ए-रियासत’ नाम का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते रजिस्ट्रेशन के लिए।

यही कारण है कि अर्णब गोस्वामी ने अपने चैनल का नाम सिर्फ ‘रिपब्लिक’ नहीं, बल्कि ‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ और ‘रिपब्लिक भारत’ रखा। अब आपके मन में एक सवाल ज़रूर आ रहा होगा कि भारत में ‘India.com’ नाम की भी तो वेबसाइट है और इसका रजिस्ट्रेशन कैसे हो गया? इसके लिए बता दें कि इसकी रजिस्टर्ड कंपनी का नाम ‘Indiadotcom Digital Pvt Ltd’ है, सिर्फ ‘INDIA’ नहीं। ये सिर्फ ‘India’ नहीं हो सकता है, इस नाम से कोई कंपनी रजिस्टर का भी नहीं सकता।

‘India.com’ को भी 2011 में लॉन्च किया गया था। उस समय अधिकतर विदेशी कंपनियाँ ही थीं जो डोमेन बेचने और होस्टिंग का काम करती थीं। लेकिन, अब कई भारतीय कंपनियाँ भी ये काम करने लगी हैं और हो सकता है कि आज की तारीख़ में इसे रजिस्टर करने में दिक्कतें आतीं। तब इंटरनेट को लेकर नियम-कानून कच्चे चरण में ही थे। ‘.com’ को छोड़ कर अगर ‘.in’ की बात करें तो अधिकतर भारतीय वेब डोमेन बेचने वाली या होस्टिंग की कंपनियाँ ही इसे बेचती हैं, लेकिन वो ‘India.in’ नहीं बेचतीं।

जहाँ तक विपक्षी गठबंधन के नए नाम ‘INDIA’ का प्रश्न है, अधिवक्ता शशांक शेखर झा ने भी इस तरह ट्वीट कर के इशारा किया है। उन्होंने लिखा है, “भारत का ‘संप्रतीक और नाम (अनुचित प्रयोग निवारण)’ अधिनियम, 1950 के तहत विपक्षी दल अपने गठबंधन का नाम ‘INDIA’ नहीं इस्तेमाल में ला सकते। चुनाव आयोग को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।” लेकिन, बात ये है कि जब तक इसे रजिस्टर नहीं कराया जाता तब तक सब ठीक है। अगर सचिवालय होगा, कैम्पेन लॉन्च होगा – तो रजिस्टर कराया जाएगा? तो फिर किस नाम से? क्या कोई बदलाव होगा?

‘मर जाओगी तो सरकार से मुआवजा मिलेगा’: बेटे की कॉलेज फीस के लिए बस के सामने कूद कर माँ ने की आत्महत्या, किसी ने किया था गुमराह

तमिलनाडु के सलेम में बेटे की कॉलेज फीस भरने के लिए एक माँ ने अपनी जान दे दी। महिला की पहचान पपाथी कि रूप में हुई। वह कलेक्ट्रेट में सफाई का काम करती थी। कहा जा रहा है कि मृतक महिला को किसी ने कहा था कि यदि वह मर जाएगी तो उसके बच्चों को सरकार मुआवजा देगी। इस पूरी घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। घटना 28 जून 2023 की है।

घटना के वीडियो में एक महिला को सड़क किनारे पैदल चलते देखा जा सकता है। लेकिन बस आते देखते ही महिला सड़क के बीच जाकर बस के ठीक सामने आ जाती है। तेज रफ्तार बस की ठोकर लगते ही महिला नीचे गिर गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि महिला की मौके पर ही मौत हो गई। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पपाथी 15 सालों से अपने पति से अलग होकर रह रही थी। वह अकेले ही अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही थी। बच्चे की फीस न भर पाने के चलते वह डिप्रेशन में थी। 

इसी दौरान किसी व्यक्ति ने उसे गुमराह करते हुए कहा था कि यदि वह मर जाएगी तो सरकार उसके परिवार को मुआवजे के तौर पर 45,000 रुपए देगी। बच्चे की फीस भरने के लिए महिला को आत्महत्या का रास्ता सही नजर आया। इसके बाद बस के सामने आकर जान दे दी। कुछ रिपोर्ट्स में पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि हादसे के दिन ही महिला ने एक अन्य बस के सामने आकर जान देने की कोशिश की थी। लेकिन तब वह बाइक से टकरा गई थी। लेकिन दूसरे प्रयास में उसकी जान चली गई।

इस मामले में पुलिस का कहना है कि मृतक महिला पपाथी के बच्चे कॉलेज में हैं। बेटी इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर में है। एक बेटा पॉलिटेक्निक कॉलेज में आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहा है। वह गरीब पृष्ठभूमि से आती है और किसी ने उसे इस बारे में गुमराह किया है। मामले की जाँच की जा रही है। हालाँकि, मृतक महिला पपाथी के बेटे ने फीस भरने को लेकर आत्महत्या करने की खबरों का खंडन किया है।

‘ये सिर्फ कला नहीं भारत की संस्कृति और धर्म का हिस्सा’: अमेरिका ने लौटाई 105 प्राचीन कलाकृतियाँ, PM मोदी के दौरे का असर

अमेरिका ने भारत की 105 प्राचीन कलाकृतियों को वापस लौटा दिया। अमेरिका के इस फैसले को पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा की सफलता के रूप में देखा जा रहा है। ये सभी कलाकृतियाँ भारत से चोरी या तस्करी कर अमेरिका ले जाई गई थीं। भारत की धरोहरों को वापस करने के लिए सोमवार (17 जुलाई, 2023) को न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। 

अमेरिका में भारत के राजदूत तरनजीत सिंह संधू ने इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा है कि जिन प्राचीन कलाकृतियों को भारत भेजा जा रहा है, वे केवल कला नहीं बल्कि भारत की विरासत, संस्कृति और धर्म का हिस्सा हैं। जब यह खोई हुई विरासत घर लौटेगी, तो इसका बहुत ही भावुकता के साथ स्वागत किया जाएगा। इन धरोहरों को जल्द ही भारत ले जाया जाएगा।

भारत की प्राचीन धरोहरों को वापस करने को लेकर जारी की गई एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सभी 105 कलाकृतियाँ पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन कलाकृतियों में 47 पूर्वी भारत से हैं। वहीं, 27 दक्षिण भारत से, 22 मध्य भारत से, 6 उत्तर भारत से और 3 पश्चिमी भारत से हैं। दूसरी-तीसरी शताब्दी से लेकर 18वीं-19वीं शताब्दी तक की ये कलाकृतियाँ टेराकोटा, पत्थर, धातु और लड़की से बनी हुई हैं। इनमें से 50 कलाकृतियाँ धर्म से जुड़ी हुई हैं। वहीं शेष अन्य भारत के सांस्कृतिक मूल्यों का बखान करती हैं।

वहीं इन मूर्तियों को भारत लौटने को लेकर भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने कहा है, “हम भारत की कला संग्रह को लौटाने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत से कई बार चोरी होकर या फिर अवैध तरीके तस्करी कर कलाकृतियाँ बेची जाती हैं। यह बिल्कुल सही समय है। इन्हें भारत वापस जाने की जरूरत है। यह सांस्कृतिक समझौता के तहत भी हो रहा है। पीएम मोदी और राष्ट्रपति बायडेन ने राजकीय यात्रा के दौरान घोषणा की थी। हम आने वाले महीनों में इस पर पूरी बातचीत पूरी करने जा रहे हैं। ताकि यह सिर्फ एक साल की दोस्ती बनकर न रह जाए। बल्कि हमारी दोस्ती और रिश्ते का स्थायी हिस्सा बन जाए।”

मैनहट्टन डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी कार्यालय के चीफ ऑफ स्टाफ जॉर्डन स्टॉकडेल ने कहा है कि एक दशक से अधिक समय से एजेंसी ने होमलैंड सिक्योरिटी के साथ मिलकर दुनिया भर से कलाकृतियों को अवैध रूप से लूटने और बेचने के लिए तस्कर सुभाष कपूर और उसके सह-साजिशकर्ताओं की जाँच की है। साल 2022 में अमेरिका ने 300 से अधिक प्राचीन कलाकृतियाँ भारत वापस भेजीं थीं। इसके बाद भी यहाँ भी 1400 से अधिक बरामद कलाकृतियाँ बरामद हुई हैं।

गौरतलब है कि गत माह अमेरिका की राजकीय यात्रा के दौरान पीएम मोदी ने सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी में मदद करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडन को धन्यवाद दिया था। उन्होंने कहा था कि भारत से चोरी हुई 100 से अधिक कलाकृतियाँ अमेरिका भारत को सौंप रहा है। बता दें कि PM मोदी की साल 2016 की अमेरिकी यात्रा के दौरान अमेरिका ने भारत को 16 प्राचीन कलाकृतियाँ सौंपी थीं। इसके बाद साल 2021 में अमेरिका ने 157 वस्तुएँ भारत को दी थीं। 

कंपनी ने देर रात काम पर लगाई रोक-ओवरटाइम किया बंद, पैदा होने लगे ज्यादा बच्चे: जापान के हाथ लगा जन्म दर बढ़ाने का ‘फॉर्मूला’

जापान में लोग काफी समय से ज्यादा बच्चे पैदा करने में रूचि नहीं दिखा रहे। जन्म दर बढ़ाने के लिए सरकार ने कई तरह के कदम उठाए। फिर भी नतीजे निराशाजनक रहे। लेकिन जापान की एक कंपनी ने कुछ ऐसा कर दिखाया है जिससे जन्म ​दर बढ़ने की जापान की उम्मीदों को नया बल मिला है। इस कंपनी ने अपने वर्क कल्चर में बदलाव करते हुए देर रात काम पर रोक लगा दी। ओवरटाइम खज्म कर दिया। इससे न केवल कंपनी का टर्न ओवर बढ़ा, बल्कि कर्मचारियों के बच्चों की संख्या भी बढ़ी है।

इस कंपनी का नाम है इटोचू कॉर्प। साल 2010 में इस कंपनी के सीईओ बने मसाहिरो ओकाफूजी ने कई बड़े फैसले लिए। जहाँ एक ओर ओवर टाइम और नाइट शिफ्ट ओर जोर दिया जा रहा है, वहीं मसाहिरो ने रात 8 बजे के बाद कंपनी में काम करने पर रोक लगा दी। साथ ही बहुत जरूरी नहीं होने पर ओवर टाइम सिस्टम भी खत्म कर दिया।

कंपनी के सुरक्षाकर्मी और एचआर विभाग के कर्मचारी इस नीति को सुनिश्चित करने के लिए खुद रात के आठ बजे ही कंपनी का राउंड लगाते। जो भी कर्मचारी मिलता उसे घर जाने को कहते।देर रात काम की जगह कर्मचारियों से सुबह थोड़ा जल्दी आकर काम करने के लिए कहा जाने लगा। कंपनी ने सुबह जल्दी आकर काम करने वाले लोगों को अधिक पैसा भी देना शुरू कर दिया।लेकिन मसाहिरो ओकाफूजी के सीईओ बनने के बाद एचआर से लेकर गार्ड्स तक कर्मचारियों को 8 बजते ही घर जाने के लिए कहना शुरू कर देते थे। इसके बदले में कर्मचारियों को सुबह थोड़ा जल्दी आकर काम करने के लिए कहा जाता था। रात में जल्दी घर जाना और सुबह जल्दी ऑफिस आना तक तो फिर भी ठीक था। लेकिन कंपनी ने सुबह जल्दी आकर काम करने वाले लोगों को अधिक पैसा देना शुरू कर दिया। फिर क्या था कर्मचारी दिन में मन लगाकर काम करते और रात को टाइम से अपने घर पहुँच जाते।

एक दशक बाद यानी कि साल 2021 में जब कंपनी ने आँकड़े देखे तो पता चला कि प्रत्येक कर्मचारी के काम में 5 गुना की बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं कंपनी के इस फैसले ने जापान की जन्म दर दोगुनी करने का ख्वाब भी जिंदा कर दिया। दरअसल, इस फैसले के बाद कंपनी मैनेजमेंट के सामने आया कि अपेक्षाकृत अधिक महिला कर्मचारियों ने मैटर्निटी लीव ली। साथ ही बच्चों को जन्म देने के बाद वे काम पर वापस भी आ गईं। इन आँकड़ों से कंपनी का मैनजमेंट हैरान रह गया।

जापान की सरकार जन्म दर बढ़ाने के लिए तमाम संसाधनों और प्रचार के कई तरीकों का उपयोग कर रही थी। यहाँ तक कि बच्चे पैदा करने पर पैसे भी दिए जा रहे थे। इसके बाद भी जन्म दर में बढ़ोतरी नहीं हो रही थी। लेकिन कंपनी के एक फैसले ने सब कुछ बदलकर रख दिया। अब कंपनी की प्रत्येक महिला कर्मचारी के पास औसतन दो बच्चे हैं। वहीं जापान की वर्तमान जन्म दर 1.3 है। इसका मतलब साफ है कि कंपनी की महिलाएँ बच्चे पैदा करने में देश की अन्य महिलाओं से कहीं अधिक आगे निकल गईं। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि वह तो प्रोडक्शन बढ़ाने निकले थे। उन्हें नहीं पता था कि इससे देश के लोगों का प्रोडक्शन बढ़ जाएगा।

इसके अलावा कंपनी ने कोरोना महामारी के दौर में भी कर्मचारियों को कई बड़ी छूट दी थी। मसलन कर्मचारी सप्ताह में दो दिन घर से काम कर सकते थे। इसके अलावा वर्किंग ऑवर यानी काम करने के घंटे भी 8 से घटाकर 6 कर दिए गए थे। माना जा रहा है कि इससे भी जनसंख्या वृद्धि में सहायता मिली है।

एशियन गेम्स के लिए विनेश फोगाट को नहीं देना होगा ट्रायल, बजरंग पुनिया को भी डायरेक्ट एंट्री: जीजा-साली पर ‘मेहरबानी’ को कोर्ट में चुनौती देंगे अन्य पहलवान

एशियन गेम्स में पहलवानों बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को डायरेक्ट एंट्री मिल गई है। इसका मतलब है कि अब उन्हें एशियन गेम्स में एंट्री के लिए ट्रायल नहीं देना पड़ेगा। ‘इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA)’ के पैनल ने ये निर्णय लिया है। हाल ही में हुए पहलवानों के आंदोलन में इन दोनों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया था। WFI (भारतीय कुश्ती संघ) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ जंतर-मंतर पर पहलवान सड़क पर उतरे थे।।

जहाँ बजरंग पूनिया ओलंपिक में मेडल जीत चुके हैं, वहीँ विनेश फोगाट ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में मेडल जीता था। बताया जा रहा है कि IOA ने ये फैसला नेशनल चीफ कोचों की सहमति के बिना ही ले लिया है। संस्था के एड-हॉक पैनल द्वारा जारी किए गए सर्कुलर में बताया गया है कि पुरुषों के फ्रीस्टाइल 65 किलोग्राम वर्ग में और महिलाओं के 53 किलोग्राम वर्ग में पहले से ही सिलेक्शन किया जा चुका है। 3 रेसलिंग स्टाइल्स के बाकी के अन्य 6 कैटेगरी में ट्रायल लिया जाएगा।

पैनल के इस सर्कुलर में बजरंग पूनिया या विनेश फोगाट का नाम नहीं लिखा हुआ है, लेकिन पैनल के सदस्य अशोक गर्ग ने इसकी पुष्टि की है कि बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट को ट्रायल से छूट दी गई है। एशियन गेम्स के लिए खिलाड़ियों के चयन हेतु ट्रायल 4 दिनों बाद ही शुरू होने वाला है। ये टूर्नामेंट 23 सितंबर से चीन के हांगझोउ में खेला जाना है। दिल्ली के IG स्टेडियम में 22 जुलाई से महिलाओं का और 23 जुलाई से पुरुष खिलाड़ियों का ट्रायल लिया जाएगा।

जहाँ बजरंग पूनिया फ़िलहाल किर्गिस्तान के इसिक कुल में ट्रेनिंग ले रहे हैं, वहीं विनेश फोगाट हंगरी के बुडापेस्ट में ट्रेनिंग ले रही हैं। IOA के इस फैसले के बाद कुछ खिलाड़ियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। उधर सांसद बृजभूषण शरण सिंह को 25,000 रुपए के निजी मुचलके पर दिल्ली में एडिशनल मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह ने जमानत दे दी है। बता दें कि विनेश फोगाट रिश्ते में बजरंग पूनिया की साली लगती हैं। उनकी चचेरी बहन संगीता फोगाट उनकी पत्नी हैं।

दीनी तालीम लेने आया 8 साल का बच्चा, कुकर्म करने लगा मौलाना और उसका भतीजा: थाने पहुँचकर मासूम ने खुद बताई 2 महीने से चल रही दरिंदगी

दीनी तालीम लेने आए आठ साल के बच्चे से कुकर्म करने के आरोप में एक मदरसे के मौलाना और उसके भतीजे को गिरफ्तार किया गया है। घटना उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर की है। आरोपितों की पहचान 40 वर्षीय मौलाना अफजाल और उसके भतीजे सलमान के तौर पर हुई है। पीड़ित जिस मदरसे का छात्र है, मौलाना अफजाल भी वहीं का हाफिज है।

आरोप है कि बच्चे के साथ दो महीने से अप्राकृतिक दुष्कर्म हो रहा था। 17 जुलाई 2023 को पुलिस ने आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बुलंदशहर के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र स्थित मदरसे का पीड़ित छात्र खुद 16 जुलाई को पुलिस चौकी पहुँचा था। उसने पुलिस को अपने साथ हुई दरिंदगी के बारे में बताया। आरोपित बुलंदशहर के डिबाई थानाक्षेत्र के गाँव दानपुर के रहने वाले है।

पीड़ित छात्र ने पुलिस को बताया कि शनिवार (15 जुलाई 2023) को भी हाफिज और उसके रिश्तेदार ने कुकर्म किया था। पुलिस ने FIR दर्ज करने के बाद बच्चे का मेडिकल परीक्षण करवाया। इसके बाद दोनों आरोपित फरार हो गए थे। 17 जुलाई 2023 को दोनों पकड़े गए।

मदरसे से जुड़े कुछ लोग इस घटना को संदिग्ध बता रहे हैं। एक स्थानीय यूट्यूब चैनल से बात करते हुए मुफ़्ती खालिद ने दावा किया कि पीड़ित के मेडिकल में ‘कुछ ख़ास’ नहीं आया है। खालिद के मुताबिक जब तक इल्जाम अदालत से साबित नहीं हो जाता तब तक किसी को मुल्जिम नहीं ठहराया जा सकता। वहीं मदरसे से ही ताल्लुक रखने वाले बुजुर्ग हाजी इलियास ने पीड़ित छात्र के आरोपों को झूठ बताया। हाजी के मुताबिक बच्चा पहले भी कई बार ऐसे आरोप लगा चुका है। वह मदरसे से भाग भी चुका है। हाजी इलियास ने पीड़ित छात्र को मानसिक तौर पर कमजोर ठहराने की भी कोशिश की।

पोल्ट्री फार्म की आड़ में आतंकी ट्रेनिंग: MP में ‘अल सुफा’ के ठिकानों पर NIA की छापेमारी, रची गई थी जयपुर में सीरियल ब्लास्ट की साजिश

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आतंकी संगठन ‘अल सुफ़ा’ से जुड़े लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान जयपुर को दहलाने की साजिश रचने वाले आतंकी इमरान खान की संपत्ति जब्त कर उस पर कुर्की नोटिस चस्पा किया। इस कार्रवाई में एनआईए की टीम के साथ रेवेन्यू और लोकल पुलिस भी मौजूद रही। NIA ने यह कार्रवाई सोमवार (17 जुलाई 2023) को की।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार को एनआईए की टीम रतलाम जिले के जुलवानिया गाँव पहुँची। जाँच एजेंसी ने छापामार कार्रवाई करने के बाद अल सुफ़ा के आतंकी इमरान खान का पोल्ट्री फार्म जब्त कर लिया। आरोप है कि इमरान व उसके अन्य साथी आतंकी गतिविधियों की साजिश के लिए इसी पोल्ट्री फार्म का उपयोग करते थे। इसके अलावा नए आतंकियों को आईडी बनाने के लिए ट्रेनिंग भी यहीं दी जाती थी।

बता दें कि 30 मार्च, 2022 को राजस्थान एटीएस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने चित्तौड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा से विस्फोटक के साथ अल सुफा के 3 आतंकियों को गिरफ्तार किया था। ये आतंकी जयपुर के अलग-अलग इलाकों में सीरियल ब्लास्ट कर दहशत फैलाने की फिराक में थे। इन आतंकियों से पूछताछ के बाद इनका रतलाम कनेक्शन सामने आया था।

इसके बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान की जाँच और रक्षा एजेंसियों ने छापेमारी कर कई आरोपितों को गिरफ्तार किया था। इन सभी का मास्टरमाइंड इमरान खान भी पुलिस के हत्थे चढ़ा था। इमरान ही आतंकियों को बम बनाने से लेकर अन्य तरह की ट्रेनिंग करता था। छापेमारी में इमरान के घर और अन्य ठिकानों से कई संदिग्ध चीजें बरामद हुईं थीं। मामले की जाँच पूरी कर इस मामले में 11 आरोपितों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। इन सभी पर सीरियल ब्लास्ट कर जयपुर को दहलाने की साजिश रचने का आरोप है।

एनआईए की जाँच में सामने आया है कि ‘अल सुफ़ा’ जिहादी मानसिकता के साथ काम कर रहा था। ‘अल सुफ़ा’ के आतंकियों ने आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए इलाके के अन्य युवाओं को प्रेरित किया था।

गौरतलब है कि अल सुफा ISIS से प्रेरित आतंकी संगठन है। साल 2012 में इस रतलाम से ही इसकी शुरुआत हुई थी। उस समय इसमें 40-50 आतंकी थे। लेकिन बाद में इस्लाम के नाम पर बरगलाकर यह संख्या बढ़ाने की कोशिश की गई। इस संगठन के लोगों ने साल 2014 में रतलाम के महू रोड बस स्टैंड पर बजरंग दल के नेता कपिल राठौड़ और उनकी होटल पर काम करने वाले पुखराज की हत्या कर दी थी। सितम्बर 2017 में इसी से जुड़े लोगों ने रतलाम में ही तरुण सांखला की गोली मार कर हत्या कर दी थी। 

बृजभूषण शरण सिंह को दिल्ली पुलिस ने क्यों नहीं किया गिरफ्तार, सामने आई वजह: कोर्ट से WFI अध्यक्ष को अंतरिम जमानत

महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें दो दिनों की अंतरिम जमानत दे दी है। यही राहत WFI के असिस्टेंट सेक्रेटरी विनोद तोमर को भी मिली है। इस मामले में दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में तोमर का भी नाम था। उन पर महिला पहलवानों को अकेले बृजभूषण के पास भेजने का आरोप है। दोनों की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई 20 जुलाई 2023 को होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने 25000 रुपए के निजी मुचलके पर दोनों को अंतरिम जमानत प्रदान की है। बृजभूषण शरण सिंह के वकील ने कोर्ट से मीडिया ट्रायल रोकने की भी माँग की थी। लेकिन राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस पर किसी भी प्रकार का आदेश जारी करने से इनकार करते हुए हाई कोर्ट में अपील करने को कहा।

इस मामले में बृजभूषण शरण सिंह की गिरफ्तारी नहीं होने की वजह भी सामने आ गई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में इसका कारण बताया है। कहा है कि 108 में से मात्र 15 ने पहलवानों के आरोपों की पुष्टि की है। डिजिटल डिवाइस की फोरेंसिक रिपोर्ट भी अभी तक पुलिस को नहीं मिली है। मोबाइल रिकॉर्ड का विश्लेषण भी बाकी है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट की उस गाइडलाइन का भी जिक्र किया गया है जिसमें सात साल तक की सजा के मामलों में गिरफ्तारी से बचने के निर्देश दिए गए थे।

बता दें कि दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में 6 मामलों का जिक्र किया है। बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ ‘भारतीय दंड संहिता (IPC)’ की धारा-506 (आपराधिक धमकी), 354 (किसी महिला की इज्जत को भंग करना) और 354A (यौन प्रताड़ना) के अलावा 354D (पीछा करना) के तहत आरोप तय किए गए हैं। अगर बृजभूषण शरण सिंह दोषी साबित होते हैं तो उन्हें 5 साल तक की सज़ा सुनाई जा सकती है। 108 गवाहों से पूछताछ के बाद ये चार्जशीट तैयार की गई थी। 15 पहलवानों, रेफरियों और कोचों ने इसमें आरोपों की पुष्टि की थी।