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30 हिंदुओं का अपहरण, 2 मंदिर ध्वस्त: सीमा हैदर के नाम से पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों ने मचाया आतंक, हिंदू महिलाओं से रेप करने की दे चुके हैं धमकी

पाकिस्तान के सिंध में 30 हिन्दुओ को बंधक बनाए जाने की खबर है। इन बंधकों में महिलाएँ और बच्चे भी शामिल हैं। पाकिस्तान के मानवाधिकार कमीशन (HRCP) ने सभी बंधकों की रिहाई की मॉंग उठाई है। आरोप है कि घातक हथियारों से लैस डाकुओं के संगठित गिरोह ने इस घटना को अंजाम दिया है। घटना रविवार (16 जुलाई 2023) की है। इसी के साथ पिछले 24 घंटों में 2 हिन्दू मंदिरों को भी निशाना बनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान मानवाधिकार कमीशन ने रविवार को एक ट्वीट कर के बताया है कि उन्हें सिंध के कशमोर और घोटकी इलाके में लॉ एन्ड आर्डर बिगड़ने की जानकारी मिली है। यहाँ डाकुओं ने महिलाओं और बच्चों सहित 30 हिन्दुओं का अपहरण कर लिया है। HRCP के मुताबिक डकैतों ने आगे भी हिन्दुओं के धर्मस्थलों को निशाना बनाने की धमकी दी है। इसी ट्वीट में सिंध सरकार से अपहृत हिन्दुओं की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की माँग भी की गई है।

48 घंटों में 2 मंदिर ध्वस्त

बताते चलें कि पिछले 48 घंटों में पाकिस्तान में 2 हिन्दू मंदिरों को भी निशाना बनाय गया है। पहली घटना रविवार (16 जुलाई, 2023) की है। तब 8-9 की सँख्या में हमलवारों ने सिंध प्रांत के काशमोर बाजार इलाके में एक मंदिर पर रॉकेट लॉन्चर से हमला किया। इसके बाद वहाँ बने हिंदुओं के घरों को निशाना बनाकर अंधाधुंध गोलीबारी की। लोगों के घरों में दुबके होने की वजह से हमले में कोई हताहत नहीं हुआ।

इसके अलावा 15 जुलाई 2023 को कराची के 150 वर्ष पुराने मारी माता मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था। मंदिर को रात में ध्वस्त किया गया था जिसकी जानकारी हिन्दुओं को सुबह हुई। इस हरकत को करने से पहले इलाके की बिजली काट दी गई थी। मंदिर गिराने के लिए तमाम मशीनों के साथ बुलडोजर और मजदूर भी बुलाए गए थे।

सीमा हैदर का नाम ले कर दी गई थी धमकी

गौरतलब है कि 11 जुलाई 2023 को सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र के कुल कबायली डाकुओं ने सीमा हैदर को पाकिस्तान भेजने की अपील की थी। चेहरे को ढँके डाकुओं ने सीमा हैदर को अपने झकरानी कबीले का बताते हुए न लौटाने पर पाकिस्तान में हिन्दू महिलाओं से रेप की धमकी दी थी। बता दें कि 4 बच्चों की माँ सीमा हैदर को भारतीय सीमा में प्रवेश करने के आरोप में नोएडा पुलिस ने 3 जुलाई 2023 को गिरफ्तार किया था।

पाकिस्तान से आई सीमा हैदर को यूपी ATS ने उठाया, पूछताछ के लिए ले गई साथ: सचिन के घर पर पुलिस का पहरा बढ़ा

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने पाकिस्तान की महिला सीमा हैदर को हिरासत में ले लिया है। ATS की टीम सोमवार (17 जुलाई 202) को नोएडा में सचिन के गाँव रबूपुरा पहुँची और सीमा हैदर को अपने साथ ले गई। हिरासत के बाद सचिन के परिजनों ने अपने घर के दरवाजे बंद कर लिए हैं। पुलिस को सीमा हैदर के पाकिस्तानी जासूस होने का शक है। इस मामले पर केंद्रीय जाँच एजेंसियों की भी नजर है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीमा हैदर का एक भाई पाकिस्तान की पुलिस और चाचा वहाँ की फ़ौज में सूबेदार पद पर हैं। ऐसे में सीमा के ISI से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। ATS ने सीमा को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। ATS के अलावा IB और नोएडा पुलिस भी सीमा हैदर के केस पर काम कर रही है। सीमा हैदर के साथ उसके पति सचिन से भी पूछताछ की गई थी। वायरल हो रहे एक वीडियो में सादी वर्दी में एक महिला स्टाफ सीमा हैदर को अपने साथ ले जाते दिखाई पड़ रही है।

ATS की कार्रवाई के दौरान मीडिया की इंट्री बैन रही थी। फ़िलहाल सचिन के घर पर पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। घर आ कर मिलने-जुलने वालों पर भी रोक लगा दी गई है। बताया जा रहा है कि घर पर ATS के जाने के बाद सीमा हैदर किसी से बात नहीं कर रही थी। हालाँकि सचिन के घर वालों ने सीमा की तबियत खराब होना बात न करने की वजह बताया। इस बीच ख़ुफ़िया एजेंसियाँ नेपाल में सीमा हैदर की मूवमेंट की जानकारियाँ भी जुटा रही हैं। नेपाल में उन तमाम स्थानों की जाँच की जा रही है, जहाँ सीमा हैदर ठहरी थी। रुट के CCTV फुटेज भी उठाए जा रहे हैं।

गौरतलब है कि सीमा हैदर को वापस किए जाने का वीडियो बना कर पाकिस्तानी डाकुओं ने वहाँ की हिन्दू महिलाओं से बलात्कार की धमकी दी है। पिछले 48 घंटों में पाकिस्तान में 30 हिन्दुओं के अपहरण और 2 मदिरों पर हमले की भी खबर है।

बच्चे देखते रहे डूब गई माँ, कोई बेटी की बाइक स्टंटबाजी पर निहाल: REELS और लाइक्स के लिए न खतरों की परवाह, न मंदिरों की मर्यादा का ध्यान

सोशल मीडिया पर वीडियोज बनाकर फेमस होने का ट्रेंड आज समाज के हर वर्ग में फैला है। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक ऐसे कंटेंट की तलाश में रहते हैं जिससे उनकी वीडियो वायरल हो और लाइक्स की भरमार लग जाए। ये वीडियो बनाने की आदत जहाँ उनके फॉलोवर्स बढ़ा रही है। वहीं इसकी लत ऐसी है कि जानलेवा भी होती जा रही है।

हाल का एक मामला तो सभी ने सुना। एक जोड़ा था जो समुद्र की तेज लहरों के बीच बैठकर वीडियो बनवा रहा था। इतने में एक लहर ज्यादा तेज आई और साथ में दोनों पति-पत्नी को बहा ले गई। पति बच गया, लेकिन पत्नी डूब गई। मकसद शायद लहरों के बीच बैठ ऐसी वीडियो बनाने का ही हो जो वायरल हो सके। लेकिन किसने सोचा था कि वीडियो तो वायरल हो जाएगी मगर उसकी वजह से एक परिवार उजड़ जाएगा। बच्चे मम्मी-मम्मी करते रह जाएँगे।

ये कोई अकेला केस नहीं है जहाँ सोशल लाइक्स की चाह जानलेवा साबित हुई हो। इटावा की एक घटना में दो भाइयों की सोशल मीडिया के लिए वीडियो बनाने के चक्कर में मौत गई। इन लड़कों के नाम रेहान (17) और चांद (13) थे। अपनी नानी के चालीसवें में ये मामा के घर गए थे जहाँ इन्हें सिंगर नदी का प्रवाह देख रील बनाने की सूझी और दोनों नहाने के लिए वहाँ कूद पड़े। तभी रेहान का पैर फिसला और वह डूबने लगा। जब चांद ने बचाने की कोशिश की तो दोनों वहीं डूब गए।

कानपुर में एक अंश नाम के लड़के ने रील के चक्कर में अपनी जान गवाई। वो अपने 4 दोस्तों के साथ पांडू नदी के पास रील बनाने गया था। वहाँ जैसे ही वो कपड़े उतारकर नदी में कूदा। पानी का प्रवाह उसे अपने साथ बहा ले गया। इसी तरह महाराष्ट्र की भी एक घटना है जहाँ 4 युवक तालाब में नहाने के दौरान अपनी सेल्फी ले रहे थे और फिर वहीं उनमें से एक का पैर फिसला फिर बाकी तीनों भी उसे बचाने में मौत का शिकार हो गए।

ये केवल चंद मामले हैं जो आजकल में सुनाई दिए। इससे पहले भी ऐसी घटनाएँ होती रहीं हैं और अजीब बात ये है कि इन घटनाओं से सतर्क होने के बजाय लोग और ज्यादा ऐसी हरकते करते हुए मिलते हैं। कभी ट्रेन की पटरी पर मूविंग ट्रेन के पीछे खड़े होकर स्टंट दिखाना होता है तो कभी सड़कों पर बाइक उठाकर या लिटाकर…। एक लड़की अभी चर्चा में आई थी जिसने अपनी माँ से जिद्द करके पहले बाइक खरीदी और बाद में रील्स में पिस्तौल लेकर घूमती दिखी। पुलिस ने पकड़ा तो पता चला वो पिस्तौल जैसा लाइटर था।

मशहूर सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर ऐसा कंटेंट देने वाले ये नहीं समझ पाते हैं कि ये सबका उनके लिए और उन्हें देखने वाली ऑडियंस के लिए कितना खतरनाक है। सोचिए कि यदि कोई आमजन किसी इंफ्लूएंसर से इन्फलूएंस होकर ऐसे स्टंट बिन सेफ्टी के करने लगे तो उसका क्या होगा। क्या तब ये इंफ्लूएंसर किसी भी प्रकार की दुर्घटना का जिम्मा खुद पर लेंगे या फिर उन्हें इलाज के लिए पैसा देंगे?

सोशल मीडिया से अलग इसपर मिले रील्स बनाने की हुड़क लोगों में ऐसी है कि यहाँ लोग अपने शौक पूरा करने के लिए और दिखावे से भरी नकली जिंदगी जीने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं। लोगों को न जान की परवाह है न धार्मिक स्थलों की। ऐसे लोगों के कारण हाल में मंदिरों में फैसले लिए जा रहे हैं कि कोई कैमरा लेकर अंदर न जाए।

फॉलोवर्स बढ़ाने के लिए बच्चे और बुजुर्गों का हो रहा इस्तेमाल

ये इस प्लेटफॉर्म के दुष्परिणाम ही है कि यहाँ लड़कियों ने पहले फेमस होने के लिए छोटे कपड़ों को मॉडर्न होने का मतलब बताना शुरू किया और अब हालत ये हैं कि ऑन कैमरा ड्रेस बदलते भी उन्हें हिचक नहीं होती…। ऐसे ही छोटे बच्चे हैं जिनके अभिभावक उन्हें हर रोज तैयार कैमरा दिखा-दिखाकर ट्रेंड कर रहे हैं कि वो सोशल मीडिया फ्रेंडली हो जाएँ। कोई अपने बच्चों से एक्टिंग करवा रहा है तो कोई अजीब हरकतें। कुछ बच्चों के लिए ये प्लेटफॉर्म अवसर भी बनकर उभरा है लेकिन जिनके लिए नहीं उभरा उसे इसे मानसिक रोगी बना दिया है। लोग वीडियो के लिए अपने घर तक को छोड़ने के लिए तैयार होते जा रहे हैं।

सबसे अजीब बात ये देखने वाली है कि अब छोटे बच्चों के अलावा जो बच्चे पैदा हो रहे हैं उनके भी अपने अकॉउंट हैं। अरमान मलिक नाम का यूट्यूबर हाल में तीन बच्चों का पिता बना और अगले ही दिन इंस्टाग्राम पर उसके तीनों बच्चों के नाम पर इंस्टा पेज बन गया जिससे लाखो फॉलोवर जुड़ते गए। अब सोचिए कि वो तीन नवजात क्या कंटेंट बनाएँगे या कैसे वीडियो अपलोड करेंगे… लेकिन अब उनके माता-पिता के कारण उनके अपने फॉलोवर हैं जो उन्हें भर-भर कर लाइक दे देते है…।

क्वालिटी कंटेंट से ज्यादा क्रिंज पर भरोसा

तकनीक के दौर में सोशल मीडिया पर रील्स का ऑप्शन शुरुआत में भागती-दौड़ती जिंदगी में मनोरंजन देने के लिहाज से बनाया गया था। मगर अब इसके उद्देश्य अलग हो चुके हैं। किसी भी डिजटल प्लेटफॉर्म के लिए रील्स का उपयोग प्रचार के लिए जरूरी हो गया। वहीं आम जन की बात करें तो बहुत से लोगों को इसका इस्तेमाल करके फायदा भी हुआ है।

जैसे ये कहना गलत नहीं है कि इसके जरिए बहुत से लोग नए-नए मुकाम पा रहे हैं। किसी को फिल्मों में काम मिल रहा है तो किसी को विदेशों में अवार्ड। कोई मार्केटिंग से पैसे कमा पा रहा है तो कोई खुद के काम का प्रमोशन करके। लेकिन इन सब चीजों के साथ ये भी एक सच है कि मनोरंजन के लिए इस प्लेटफॉर्म की लत से लोग मानसिक रोगी हो रहे हैं। इस रोग में उन्हें लगता है कि बन अश्लीलता फैलाए, बिन जानलेवा स्टंट किए, बिन बच्चों-बुजुर्गों का इस्तेमाल किए वो आगे नहीं बढ़ सकते जबकि सच ये है कि तमाम क्रिएटर ऐसे हैं जो इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके क्वालिटी कंटेंट दे रहे है और उन्हें उसका फायदा भी है।

‘250 लड़कियों का बलात्कार’: आ गया ‘अजमेर 92’ का ट्रेलर, पर्दफाश करने वाले पत्रकार की भी कहानी; चिश्तियों की दरिंदगी 21 जुलाई से पर्दे पर

अजमेर में नब्बे के दशक में बड़े पैमाने पर हुए हिन्दू लड़कियों के बलात्कार की कहानी दिखाने वाली फिल्म ‘Ajmer 92’ का ट्रेलर आ गया है। ‘रिलायंस इंटरटेनमेंट’ के बैनर तले इस फिल्म का निर्माण हुआ है। ट्रेलर की शुरुआत में ही एक दृश्य है, जिसमें वक बुजुर्ग अपनी होने वाली बहू की तस्वीर 2 युवकों को देता है और पता लगाने के लिए कहता है कि कहीं उसका बलात्कार तो नहीं हुआ है। बता दें कि उस समय अजमेर में ऐसे हालात थे कि वहाँ की लड़कियों के रिश्ते भी नहीं हो पाते थे। फिल्म 21 जुलाई को रिलीज होगी।

इसके बाद ट्रेलर में आगे एक व्यक्ति कहता है कि लोग सिर्फ उतना जानते हैं जितना उन्होंने पढ़ा-सुना है, लेकिन असल में अजमेर में 1992 में क्या हुआ था, ये हकीकत मैं आपको बताता हूँ। अख़बार में एक खबर दिखाई गई है, जिसमें लिखा है – “लड़कियों ने किया शहर को गंदा।” इसके बाद एक व्यक्ति कहता है कि ये पत्रकार लोगों को जरा भी अक्ल नहीं है कि कैसी फोटो छापनी चाहिए और कैसी नहीं। इसके बाद एक लड़की पेड़ पर फाँसी के फंदे से झूलती हुई दिखती है।

पुलिस अधिकारी कहता है कि लड़की गर्भवती थी, इसका मतलब है कि वो अपनी मर्जी से गई और उसके साथ जोर-जबरदस्ती नहीं हुई। हालाँकि, बीच के दृश्यों में दिखाया जाता है कि कैसे उस लड़की पर अत्याचार हुआ और क्रूरता से उसका बलात्कार किया गया। फिल्म का निर्माण उमेश कुमार तिवारी ने किया है। इसके बाद मुस्लिमों को प्रदर्शन करते हुए दिखाया गया है, जो कहते हैं कि उनकी कौम को बदनाम किया जा रहा है। एक पत्रकार है, जो इस गिरोह के पीछे पड़ा है।

‘अजमेर 92’ के ट्रेलर में फिर उस नेता को धमकाते हुए दिखाया गया है जो कहता है, “उस पत्रकार को समझाइए। शहर की शांति न बिगाड़े वो।” इसके बाद पुलिस सबूत के लिए मदद का आश्वासन देती है। एक और लड़की को छत से गिर कर मरते हुए दिखाया गया है। फिर बताया जाता है कि इस केस को वापस लाना आसान नहीं है, क्योंकि इतनी पीड़ित लड़कियाँ हैं कि उनका जीना हराम हो जाएगा। इस पर पत्रकार कहता है, “जीना हराम तो अभी भी है न उनका। जब उनका मन करता है अपने फार्महाउस बुलाते हैं, उनका रेप करते हैं।”

ट्रेलर में और भी पीड़ित लड़कियों को दिखाया गया है जो इस कश्मकश में हैं कि वो अपने परिवार वालों को बताएँ या नहीं। एक को तो उसकी माँ ही हिदायत देती है कि वो आगे से इन बातों को जुबान पर न लाए। वहीं पुलिस अधिकारी की बेटी भी इस जुल्म का शिकार हो जाती है। फिर बताया जाता है कि ये सब 1987 से ही चल रहा है। आँकड़ा दिया गया है कि 250 लड़कियों का बलात्कार हुआ, उनकी नंगी तस्वीरों को शहर भर में बाँट दिया जाता था और जिनके हाथ वो तस्वीरें लगती थीं वो ब्लैकमेल कर उनका रेप करते थे।

ये तो थी फिल्म के ट्रेलर की बात। अब लड़कियों की ब्लैकमेलिंग और बलात्कार को अंजाम देने के इस मामले के मुख्य आरोपितों का नाम भी जान लीजिए। इनके नाम हैं- फारुक चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती थे। तीनों युवक कॉन्ग्रेस में भी महत्वपूर्ण पदों पर थे। अजमेर दरगाह के खादिम परिवारों से आते थे। उस समय मीडिया नहीं था तो लोगों को पता ही नहीं चल पाया कि कैसे इस खबर पर लीपापोती के प्रयास हुए ताकि एक दरगाह पर आने वाले हिंदुओं की संख्या कम न हो।

‘व्हीलचेयर, पैर कटा, किडनी ट्रांसप्लांट…’: सुप्रीम कोर्ट ने अब्दुल नसीर मदनी को गृहनगर में रहने की दी इजाजत, धमाकों का है आरोपित

अब्दुल नसीर मदनी अब केरल स्थित अपने गृह नगर में भी रह सकता है। जमानत की शर्तों में ढील देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी है। मदनी कोयंबटूर और बेंगलुरु बम धमाकों का मुख्य आरोपित है। इससे पहले उसे जिन शर्तों पर जमानत दी गई थी उनमें से एक यह भी था कि सुनवाई खत्म होने तक उसे बेंगलुरु में रहना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की बेंच ने सोमवार (17 जुलाई, 2023) को मदनी की जमानत शर्तों में ढील प्रदान की। मदनी की पैरवी पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने की। उन्होंने कहा कि ट्रायल खत्म होने के बाद मदनी के बेंगलुरु में ही रहने का कोई कारण नहीं है।

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल ने अपनी दलील में कहा, “वह (मदनी) व्हीलचेयर पर है। उसका पैर कट चुका है। किडनी ट्रांसप्लांट होना है। उसकी अम्मी की मौत हो चुकी है। पिता बीमार हैं। ट्रायल पूरा होने के बाद अब बहस चल रही है। मामले में कई आरोपित हैं और वे खुद कह चुके हैं दलीलें देने में दो साल लग जाएँगें।”

इस पर कोर्ट ने कहा, “हमारे संज्ञान में आया है कि गवाहों की जाँच पूरी हो चुकी है। संबंधित अदालत में मामले पर बहस चल रही है। बहस पूरी होने में समय लग सकता है। साथ ही सुनवाई के दौरान मदनी का उपस्थित होना जरूरी भी नहीं है। इसलिए यह अदालत 11 जुलाई 2014 को दिए गए आदेश में संशोधन करते हुए मदनी को केरल में अपने गृहनगर जाने और वहाँ रहने की अनुमति देती है।” साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है, “यह जानने के लिए कि मदनी अन्य सभी शर्तों का पालन कर रहा है या नहीं, उसे 15 दिनों में एक बार कोल्लम जिले के नज़दीकी पुलिस स्टेशन में पेश होना होगा। यदि अपने इलाज के लिए वह कोल्लम जिले के अलावा कहीं और जाता है तो उसे इस बारे में भी पुलिस को सूचना देनी होगी।”

बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल को मदनी को जमानत शर्तों में ढील देते हुए 17 जुलाई से 8 जुलाई तक केरल जाने की अनुमति दी थी। मदनी ने कोर्ट से केरल जाकर अपने माता-पिता से मिलने की अनुमति माँगी थी। केरल में मुस्लिम समुदाय ने उसका जबरदस्त स्वागत किया था। इतना ही नहीं, एक हीरो की तरह उसके वहाँ पहुँचने का मीडिया द्वारा लाइव टेलीकास्ट भी किया गया था।

ज्ञात हो कि 1998 में हुए कोयंबटूर बम ब्लास्ट केस और साल 2008 के बंगलुरु में हुए सीरियल बम ब्लास्ट में 58 निर्दोष नागरिकों की मौत हो गई थी। 200 से अधिक लोग घायल हो गए थे। दरअसल, साल 2009 में बांग्लादेश सीमा से लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में दोनों ने बेंगलुरु विस्फोट सहित कई बम धमाकों की जानकारी दी थी। इसके बाद कई संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में धमाकों से मदनी के तार भी जुड़े होने का पता चलने पर कर्नाटक पुलिस ने उसे अगस्त 2010 में गिरफ्तार कर लिया था।

मदनी केरल के पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) का अध्यक्ष है। मदनी ने 1989 में पीडीपी के अलावा इस्लामिक सेवा संघ की स्थापना की थी। इस्लामी सेवा संघ को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए साल 1992 में बैन कर दिया गया था। मदनी पर बाबरी विध्वंस के बाद समाज में नफरत फैलाने और पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध रखने का आरोप लगाया गया था।

बेंगलुरु की विपक्षी महफिल से शरद पवार गायब, लखनऊ में दारा सिंह चौहान ने थामा BJP का दामन: कुमारस्वामी-कुशवाहा से भी मिले झटके

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक बार फिर से विपक्षी एकता की महफ़िल सजने वाली है। मंगलवार (18 जुलाई, 2023) को सभी विपक्षी दलों की बैठक है, उससे एक दिन पहले डिनर की योजना है। उधर बिहार की ‘राष्ट्रीय लोक जनता दल (RLJD)’ के संस्थापक उपेंद्र कुशवाहा ने कहा है कि 2024 में नरेंद्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है, कोई ठोस एजेंडा न लाने पर जनता विपक्ष को भाव नहीं देगी। उधर NCP की टूट के बाद शरद पवार आज की इस बैठक में शामिल नहीं होंगे।

बैठक से पहले कॉन्ग्रेस ने केंद्र सरकार के दिल्ली अध्यादेश के विरोध का ऐलान किया, जिससे खुश होकर AAP ने भी इस बैठक में शामिल होने के लिए हामी भरी है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा कि यहाँ न तो ‘महा’ है और न ही ‘गठबंधन’, सिर्फ पीएम मोदी को नीचा दिखाने के लिए ये सब हो रहा है। ‘शिवसेना (UBT)’ से उद्धव ठाकरे और उनके बेटे आदित्य इस बैठक में पहुँचेंगे। उसी दिन NDA की भी बैठक है, जिसमें कई छोटे-बड़े दल एकत्रित होंगे।

इस पर निशाना साधते हुए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अकेले सब पर भारी होने की बात कही थी, फिर वो 30 दलों को क्यों जुटा रहे हैं? कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उप-मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार इस विपक्षी बैठक की मेजबानी करेंगे। कई नेता आज ही बेंगलुरु पहुँच रहे हैं। 23 जून को पहली बैठक पटना में हुई थी। उधर विपक्षी एकता ने नई दरार आई है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री KCR के बेटे KTR पर कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाया।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस नेता बालासाहब थोराट का कहना है कि शरद पवार 18 जुलाई की बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक में सोनिया गाँधी भी आने वाली हैं। अरविंद केजरीवाल भी आज ही पहुँच रहे हैं। उधर कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी ने भी विपक्षी एकता बैठक को झटका दिया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस इस बैठक को बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, लेकिन पार्टी राज्य में किसानों की आत्महत्या को लेकर जरा भी चिंतित नहीं है।

बड़ी बात ये कि उन्होंने इस दौरान भाजपा के साथ जाने से साफ़ इनकार भी नहीं किया। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के साथ गठबंधन की बात पर उन्होंने कहा कि ऐसा कहना बहुत जल्दबाजी होगी, क्योंकि चुनाव अभी भी 8-9 महीने दूर है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी को ये ग़लतफ़हमी हो गई है कि JDS खत्म हो गई है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 42 किसान आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन अब तक कॉन्ग्रेस सरकार ने एक अपील तक नहीं की है कि किसान ये दर्दनाक कदम न उठाएँ।

उधर मऊ और घोसी में अच्छा-खासा प्रभाव रखने वाले OBC नेता दारा सिंह चौहान सपा का दामन छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गए हैं, जिसके बाद अखिलेश यादव को झटका लगा है। प्रदेश मुख्यालय में यूपी भाजपा के अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी की मौजूदगी में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उन्होंने कहा कि भारत नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दुनिया के सभी देशों को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है और वो तीसरी बार प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि एक सिपाही के रूप में उनकी घर-वापसी हुई है।

विम्बलडन को मिला 20 साल का नया चैंपियन या टेनिस को मिला अगला सुपरस्टार? स्पेन के कार्लोस अल्कारेज के सचिन तेंदुलकर भी हुए मुरीद

स्पेनिश खिलाड़ी कार्लोस अल्कारेज (Carlos Alcaraz) टेनिस जगत के नए स्टार बनकर सामने आए हैं। 20 साल के अल्कारेज ने रविवार (16 जुलाई, 2023) रात 36 साल के नोवाक जोकोविच (Novak Djokovic) को हराकर विम्बलडन (wimbledon) मेंस सिंगल्स का खिताब अपने नाम कर लिया। युवा खिलाड़ी के हाथों मिली हार के बाद जोकोविच ने अल्कारेज की तारीफ की है। वहीं, अल्कारेज ने इस जीत को सपना सच होने जैसा बताया है।

क्या हुआ मैच में?

विम्बलडन मेंस सिंगल्स के फाइनल मुकाबले से पहले ही बहुत कम लोग ही कार्लोस अल्कारेज को जीत का दावेदार मान रहे थे। मैच के पहले सेट में नोवाक जोकोविच ने अल्कारेज को फटाफट अंदाज में 6-1 से हराकर यह जताने की कोशिश की थी कि वह 5वीं बार विम्बलडन का खिताब जीतने जा रहे हैं। लेकिन टाई ब्रेकर तक खिंचे दूसरे सेट में अल्कारेज ने जोकोविच को 7-6 से हरा दिया। इसके बाद तीसरे सेट में भी उन्होंने ने 6-1 से अपने नाम किया। लेकिन जोकोविच हार मानने को तैयार नहीं थे।

चौथे सेट में जोकोविच ने पूरी जान झोंकते हुए 6-3 से सेट अपने नाम किया। अब मैच 5वें और अंतिम सेट में जा पहुँचा था। एक युवा खिलाड़ी से पिछड़ने के बाद जोकोविच काफी फ्रस्टेटेड दिखाई दे रहे थे। इसी दौरान अल्कारेज ने एक और प्वाइंट अपने नाम किया। इससे झल्लाते हुए जोकोविच ने अपना रैकेट नेट पोल पर मारकर तोड़ दिया। हालाँकि उनका फ्रस्टेशन किसी काम नहीं आया और स्पेनिश स्टार कार्लोस अल्कारेज ने उन्हें 6-4 से हराकर विम्बलडन का खिताब अपने नाम कर लिया।

अल्कारेज ने दूसरी बार ग्रैंड स्लैम का खिताब अपने नाम किया है। इससे पहले साल 2022 में उन्होंने यूएस ओपन में भी शानदार जीत दर्ज की थी। कार्लोस अल्कारेज विंबलडन खिताब जीतने वाले तीसरे सबसे युवा खिलाड़ी हैं। इससे पहले साल 1985 में लीजेंड टेनिस स्टार बोरिस बेकर ने 17 साल की उम्र में और साल 1976 में बियोन बॉग ने 20 साल की उम्र में खिताब जीता था।

2003 में जन्मे अल्कारेज के लिए यह जीत इसलिए भी खास है, क्योंकि जब जोकोविच ने अपना पहला ग्रैंड स्लैम जीता था, तब वह महज 5 साल के थे। बता दें कि नोवाक जोकोविच ने साल 2008 में ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब अपने नाम कर पहला ग्रैंड स्लैम जीता था। जोकोविच अगर यह मैच जीत लेते तो यह उनकी विम्बलडन टूर्नामेंट की 5वीं खिताबी जीत होती। साथ ही मेन्स सिंगल में उनकी आठवीं जीत होती और किसी बड़े टूर्नामेंट में 24वीं जीत होती। लेकिन कार्लोस अल्कारेज ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया।

जोकोविच ने की अल्कारेज की तारीफ

मैच खत्म होने के बाद नोवाक जोकोविच ने कहा है, “ईमानदारी से कहूँ तो मैं अल्कारेज जैसे खिलाड़ी के खिलाफ कभी नहीं खेला। रोजर फेडरर और राफेल नडाल की ताकत और कमजोरियाँ दोनों हैं। लेकिन अल्कारेज पूरी तरह से एक बेहतरीन खिलाड़ी है। उसके पास ऐसी क्षमता है कि वह लंबे समय तक और सभी कोर्ट पर आगे बढ़ सकता है। मैंने इस कोर्ट पर कई मुकाबले जीते हैं। यहाँ हारने पर मुझे यकीन नहीं हो रहा कि आज मैं जीत नहीं पाया। अल्कारेज ने शानदार खेला। वह इस जीत के हकदार थे। अल्कारेज ने घास वाले कोर्ट पर बहुत कम मैच खेले थे। इसलिए मुझे लगा कि क्ले और हार्ड कोर्ट पर ही अल्कारेज अच्छा खेल सकते हैं। लेकिन उन्होंने जिस तरह से इस घास वाले कोर्ट में मैच खेला वह बेहद शानदार था।”

वहीं जीत के बाद कार्लोस अल्कारेज ने कहा है, “विम्बलडन जीतना मेरे लिए सपने के सच होने जैसा है। अगर मैं हार भी जाता तो, मुझे खुद पर गर्व होता। 20 साल के लड़के के लिए ऐसे मौके पर इस स्तर पर आकर खेलना, सबकुछ बहुत तेजी से हुआ है। खुद पर गर्व हो रहा है।”

इस जीत के बाद कार्लोस अल्कारेज को दुनियाभर से सराहना मिल रही है। कई लोगों का मानना है कि अब अगले एक-डेढ़ दशक तक टेनिस की दुनिया पर उनका राज दिखेगा। क्रिकेट के देवता कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का भी मानना है कि अल्कारेज की यह जीत नए सुपरस्टार का उदय है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “शानदार फाइनल देखने को मिला। दोनों एथलीटों ने उत्कृष्ट टेनिस का प्रदर्शन किया। हम टेनिस के अगले सुपरस्टार का उदय देख रहे हैं। रोजर फेडरर की तरह ही मैं अगले 10-12 वर्षों तक कार्लोस के करियर का भी अनुसरण करूँगा। बहुत-बहुत बधाई कार्लोस अल्कारेज।”

‘हनीमून पर जाऊँगा, और बच्चे पैदा करूँगा’: सऊदी अरब के 90 वर्षीय शख्स ने 5वीं बार किया निकाह, कहा – मजहब को बचाने के लिए शादी करें युवा, ये सुन्नत है

सऊदी अरब के एक 90 वर्षीय शख्स ने 5वीं बार निकाह किया है। साथ ही उसने अविवाहित लोगों को सलाह दी है कि वो भी ऐसा करें क्योंकि इस्लाम में इसे ‘सुन्नत’ (पैगंबर मोहम्मद द्वारा दी गई शिक्षा) कहते हैं। 90 वर्षीय नस्सेर बिन दहैम बिन वह्क अल मुर्शिदी अल कतैबी इसके साथ ही सऊदी अरब में निकाह करने वाले सबसे बुजुर्ग व्यक्ति बन गए हैं। उन्हें खूब मीडिया कवरेज भी मिल रही है। अफीफ प्रांत में उन्होंने अपनी 5वें निकाह कर जश्न मनाया, जिसमें कई अतिथि मौजूद रहे।

उनके वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। वीडियो में वो काफी खुश नजर आ रहे हैं, जिसके बाद उनके मुल्क के लोग उन्हें बधाइयाँ दे रहे हैं। यहाँ तक कि उनके पोते ने भी एक वीडियो में कहा, “मेरे दादाजी को उनकी 5वीं शादी के लिए बधाई। आपका विवेक जीवन सुखमय रहे।” ‘अरबिया टीवी’ से बात करते हुए नस्सेर बीम दहैम ने कहा कि जिन लोगों ने निकाह नहीं किया है उन्हें ज़रूर करना चाहिए क्योंकि ये ‘Sunnah’ है, इस्लाम में जायज है।

उन्होंने कहा, “मैं फिर से निकाह करना चाहता हूँ। शादीशुदा जीवन एक विश्वास का कार्य है और उपरवाले के सामने एक गौरव का स्रोत है। उसके सामने, जो इस पूरे संसार का मालिक है। इससे आके जीवन में आराम आता है, भौतिक समृद्धि आती है और ये मेरे अच्छे स्वास्थ्य का भी राज है। जो युवा लोग निकाह करने से हिचकते हैं, उन्हें मेरी सलाह है कि मजहब को बचाए रखने के लिए और एक अच्छा जीवन जीने के लिए वो निकाह ज़रूर करें।”

इतना ही नहीं, 90 वर्षीय नस्सेर बिन दहैम अब हनीमून पर भी जाने वाले हैं और इसे लेकर भी वो खासे उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि निकाह से शारीरिक आराम मिलता है और संतुष्टि मिलती है, आनंद मिलता है। पिछली शादियों से उनकी 4 संतानें हैं, जबकि एक की मौत हो चुकी है। उनके बच्चों के भी बच्चे हो गए हैं। नस्सेर का कहना है कि वो और बच्चे पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अगर मजहब को बचाए रखना है तो युवाओं को निकाह करना चाहिए।

कोई यूनिवर्सिटी का PRO, कोई पुलिस में तो कोई राजस्व विभाग में… J&K से वेतन लेकर पाकिस्तान की ड्यूटी: नौकरी से बर्खास्त, UAPA के तहत केस

फहीम असलम, मुरवत हुसैन मीर और अर्शिद अहमद ठोकर वेतन तो जम्मू-कश्मीर की सरकार से लेते थे। लेकिन काम पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और आतंकी संगठनों के लिए करते थे। तीनों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया है। इन पर यूएपीए के तहत केस चलेगा।

फहीम असलम कश्मीर यूनिवर्सिटी का PRO (जनसम्पर्क अधिकारी) था। वहीं अर्शिद अहमद पुलिस महकमे में तो हुसैन मीर राजस्व विभाग में तैनात था। तीनों पर आतंकी विचारधारा को बढ़ावा देने और आतंकियों के लिए पैसे जुटाने जैसे आरोप हैं। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा द्वारा तीनों को बर्खास्त किए जाने की जानकारी सोमवार (17 जुलाई 2023) को सार्वजानिक की गई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बर्खास्त किए गए तीनों सरकारी कर्मचारियों की लंबे समय से निगरानी की जा रही थी। फहीम असलम साल 2006 में कश्मीर यूनिवर्सिटी में बतौर संविदा कर्मचारी नियुक्त हुआ था। थोड़े समय बाद उसे नियमित कर दिया गया। ग्रेटर कश्मीर पर लिखे गए लेख और सोशल मीडिया हैंडल पाकिस्तान के प्रति उसकी वफादारी की पुष्टि करते हैं। इनमें 23 मई 2020 को लिखी एक पोस्ट शामिल है। इस पोस्ट में फहीम ने लिखा था, “एक सच्चाई जो कभी बदल नहीं सकती। कश्मीर हमेशा पाकिस्तान के साथ ईद मनाएगा। हम पाकिस्तान के साथ रहेंगे।” एक अन्य पोस्ट में फहीम ने कश्मीर में मारे गए आतंकियों की तारीफ की थी। यूनिवर्सिटी में उसकी नियुक्ति भी संदेहों के घेरे में है। तब इस पद के लिए न तो कोई विज्ञापन जारी हुआ था और न ही उसका पुलिस वेरिफिकेशन करवाया गया था।

बर्खास्त हुआ पुलिस कॉन्स्टेबल अर्शिद अहमद साल 2006 में भर्ती हुआ था। शुरुआत में वह जम्मू-कश्मीर पुलिस के सशत्र बल में था जो बाद में नागरिक पुलिस में ट्रांसफर हो गया था। सिपाही अर्शिद अहमद ठोकर कई सुरक्षा प्राप्त लोगों के गनर के रूप में भी काम कर चुका है। हुसैन मीर रेवेन्यू डिपार्टमेंट का मुलाजिम था। तीनों पर विदेशी आकाओं के इशारे पर काम करने का आरोप है। मना जा रहा है कि ये सभी भारत के खिलाफ लोगों को भड़का रहे थे।

पिता के नक्शेकदम पर अभिषेक बच्चन, प्रयागराज से सपा के टिकट पर लड़ेंगे चुनाव? – पार्टी ने किया खंडन, अभिनेता ने कहा – पता नहीं कहाँ से आईं ये बातें

कुछ दिनों से मीडिया में खबर चलाई जा रही थी कि अभिनेता अभिषेक बच्चन को समाजवादी पार्टी प्रयागराज लोकसभा क्षेत्र से 2024 में चुनावी मैदान में उतार सकती है। कहा जा रहा था कि इसके लिए कार्यकर्ताओं से फीडबैक भी लेना शुरू कर दिया गया है। अभिषेक बच्चन की माँ सपा से ही लगातार चौथी बार राज्यसभा सांसद बनी हैं, ऐसे में लोग जानना चाह रहे थे कि सच क्या है। अब पार्टी और अभिनेता, दोनों ने ही इन अटकलों का पूरी तरह से खंडन किया है।

समाजवादी पार्टी के मीडिया सेल ने इन अटकलों पर सफाई देते हुए कहा है, “सपा के पास बहुत से मजबूत दावेदारों की लंबी लाइन लगी हुई है। प्रयागराज से सपा बहुगुणा परिवार के ही किसी सदस्य को पार्टी सिंबल पर लड़ाने का विचार कर रही है। पूरे यूपी में BJP के सामने मजबूत प्रत्याशी उतारे जाएँगे ,सपा की मजबूती के कारण तमाम BJP नेतागण भी सपा से से टिकट के दावेदार हैं।” बता दें कि प्रयागराज की सीट पर फ़िलहाल भाजपा का कब्ज़ा है और रीता बहुगुणा जोशी सांसद हैं।

वहीं Koimoi से बात करते हुए अभिषेक बच्चन ने भी इन अटकलों पर हैरानी जताई है। फ़िलहाल विदेश में छुट्टियाँ मना रहे अभिषेक बच्चन ने कहा कि उन्हें इसका कोई आईडिया नहीं है कि ये बातें कहाँ से निकल कर सामने आई हैं। कुछ दिनों पहले भी एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ़ किया था कि वो एक अभिनेता हैं, राजनेता नहीं। उन्होंने कहा था कि उन्हें राजनीति समझ नहीं आती है, लेकिन आशा है कि आने वाले दिनों में वो अभिनय को और अच्छे से समझ पाएँगे।

याद दिला दें कि अभिताभ बच्चन ने भी 1984 में जब वो अपने स्टारडम के शिखर पर थे, तब उन्होंने राजीव गाँधी के कहने पर कॉन्ग्रेस के टिकट पर इलाहाबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। उन्होंने रीता बहुगुणा जोशी के पिता ‘लोक दल’ के हेमवंती नंदन बहुगुणा को हराया था, जो यूपी के सीएम भी रह चुके थे। उस दौर में अभिताभ बच्चन ने 2.97 लाख वोट लाकर इतिहास रच दिया था। लेकिन, बोफोर्स घोटाले में नाम आने के बाद उन्हें राजनीति छोड़नी पड़ी थी। उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।