टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने डेब्यू टेस्ट मैच में शतक जड़ फैंस का दिल एक बार फिर जीत लिया। यशस्वी के शतक से खुश हो उनके पिता काँवड़ यात्रा के लिए निकल पड़े हैं। वहीं दूसरी ओर उनका परिवार यशस्वी की इच्छा पूरी करते हुए पुराने मकान को छोड़ नए घर में शिफ्ट हो गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच में यशस्वी जायसवाल के शतक लगाने से बेहद से उनके पिता भूपेंद्र जायसवाल बेहद खुश हुए। इसके बाद वह उत्तर प्रदेश के भदोही से काँवड़ लेकर उत्तराखंड के बैजनाथ धाम को निकल चुके हैं। उनकी काँवड़ लिए फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। बताया जा रहा है कि भूपेंद्र जायसवाल उत्तर प्रदेश से उत्तराखंड तक पैदल यात्रा करेंगे।
Yashasvi Jaiswal's father went on a kanwar yatra travelling on foot from UP to Uttarakhand to pray for Yashasvi's success. pic.twitter.com/hxchthQgI6
काँवड़ यात्रा के लिए निकलने से पहले भूपेंद्र जायसवाल ने कहा है कि उनकी भोलेनाथ से प्रार्थना है कि उनका दोहरा शतक मारे। बेशक यशस्वी जायसवाल पहले टेस्ट मैच में दोहरे शतक से चूक गए हों। लेकिन 20 जुलाई से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट मैच में उनके पास दोहरा शतक जड़ने का एक और मौका होगा।
यशस्वी की जिद के आगे झुका परिवार
यशस्वी जायसवाल टेस्ट सीरीज के लिए वेस्टइंडीज दौरे पर हैं। जब वह अपने टेस्ट करियर की शुरुआत कर शतक की ओर बढ़ रहे थे तब उनका परिवार यशस्वी की इच्छा पूरी करने में जुटा हुआ था। दरअसल, यशस्वी पुराने मकान को छोड़कर नए घर में शिफ्ट होना चाहते थे। वह हमेशा से ही घरवालों से नए घर में शिफ्ट होने की बात करते थे। हालाँकि, अब उनका परिवार किराए के मकान से मुंबई में 5BHK के एक फ्लैट में शिफ्ट हो गया है।
इंडियन एक्सप्रेस से हुई बातचीत में यशस्वी के भाई तेजस्वी ने कहा है, “यशस्वी हमसे लगातार यह कहता था कि प्लीज जल्दी शिफ्ट हो जाओ। अब मैं इस घर में नहीं रहना चाहता। टेस्ट मैच के दौरान भी वह हमसे घर शिफ्टिंग को लेकर सवाल कर रहा था। पूरी जिंदगी में उसकी एक ही इच्छा था कि अपना घर हो। सबको पता है कि वह किन परिस्थितियों में रहा है। वह मुंबई में खुद का घर होने के महत्व को समझता है।”
बॉलीवुड एक्ट्रेस काजोल (Kajol) ने कहा है कि उन्होंने कभी भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि लोग क्या कहेंगे। काजोल ने यह भी कहा है कि उन्हें पालने वाली माँ, नानी और दादी ने उन्हें सिखाया है कि जिंदगी में कभी भी कोई और मायने नहीं रखता। इसके अलावा उन्होंने कहा है कि हर किसी को अपनी जिंदगी की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। न कि समाज पर छोड़ना चाहिए। इससे पहले उन्होंने नेताओं की अशिक्षा पर बयान दिया था, जिस पर काफी चर्चा हुई थी।
एएनआई को दिए इंटरव्यू में काजोल ने कहा है, “मैंने अपने जीवन में कभी भी इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि लोग क्या कहेंगे। मेरा पालन-पोषण एक अद्भुत माँ ने किया। मेरी परवरिश एक ऐसी माँ ने की जो समाज को लेकर बिल्कुल भी परवाह नहीं करती थीं। दरअसल, मेरी मातृ वंशावली अद्भुत है। मेरी परदादी से लेकर मेरी दादी और मेरी माँ तक सभी ने हमेशा ही मेरा साथ अच्छा व्यवहार किया है। उन लोगों ने मुझे उदाहरण देकर मुझे सिखाया है कि जिंदगी में कोई भी मायने नहीं रखता। तुम्हारी जिंदगी तुम्हारी खुद की जिम्मेदारी है और उसमें किसी और की राय मायने नहीं रखती।”
#WATCH | Actor Kajol says, "I have never paid heed to 'log kya kahenge' in my life. I was raised by a wonderful mother who did not give two hoots about society. Actually, I had a wonderful maternal lineage. From my great-grandmother to my grandmother and my mother, every one of… pic.twitter.com/Ill0kReS1X
काजोल ने आगे कहा है, “सबसे पहले तो अपनी जिंदगी की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए क्योंकि आपका कोई भी काम खुद का है। इस समाज को तय नहीं करना है। जिस तरह आपने अपने जीवन को बना लिया है। आखिर में समाज उसी को स्वीकार कर लेता है। यही मेरी परदादी और मेरी माँ का भी कहना था। यह बेहद दिलचस्प है कि दोनों की जिंदगी और विचार एकदम अलग थे। वास्तव में मेरी माँ आज तक अपने हिसाब से जीती हैं। मैं अपनी जिंदगी को भी उनके जैसा बनाने की कोशिश कर रही हूँ।”
बता दें कि इस समय काजोल अपनी वेब सीरीज ‘द ट्रायल: प्यार कानून धोखा’ के प्रमोशन में जुटी हुईं हैं। यह वेब सीरीज शुक्रवार (14 जुलाई, 2023) से डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर स्ट्रीम कर रही है। सुपर्ण एस वर्मा के डायरेक्शन वाली यह वेब सीरीज में काजोल के अलावा जिशू सेनगुप्ता, अली खान, शीबा चड्ढा जैसे एक्टर नजर आ रहे हैं। ‘द ट्रायल’ की कहानी एक ऐसी महिला वकील (काजोल) के जीवन पर आधारित है, जिसका पति सेक्सुअल फेवर के आरोप में जेल चला जाता है।
Kya dhokha khakar bhi, apne pati ke liye duniya se ladna sahi hai?
इसके बाद उसकी पूरी संपत्ति जब्त कर ली जाती है। महिला वकील और उसके बच्चे सड़क पर आ जाते हैं। हालाँकि बात तब और बिगड़ जाती है जब महिला वकील के पति का वकील भी धोखा देने पर उतारू हो जाता है। इसके बाद महिला वकील लॉ फर्म शुरू करते हुए केस में आगे बढ़ती है। इस सीरीज में 8 एपिसोड हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले एक इंटरव्यू में काजोल ने कहा था, “हमारे यहाँ ऐसे राजनेता हैं, जिनका कोई शैक्षिक बैकग्राउंड नहीं है। मुझे माफ कीजिए लेकिन ये खुले तौर पर कहना पड़ेगा। हमलोगों पर वैसे नेता शासन कर रहे हैं, जिनमें से अधिकतर के पास वो दृष्टि नहीं है। शिक्षा से ये संभव होता है कि आप अलग-अलग व्यूपॉइंट को देखते हैं। मेरे फैंस काफी अच्छे हैं, मैं जो भी करती हूँ, पहनती हूँ, उसका वो समर्थन करते हैं और मुझसे प्यार करते हैं।”
हालाँकि, इस बयान के बाद लोगों के काजोल के शैक्षिक बैकग्राउंड की बातें करनी शुरू कर दी। बता दें कि काजोल स्कूल ड्रॉपआउट हैं, जिन्होंने मात्र 16 वर्ष की उम्र में ‘बेखुदी (1992)’ में काम करना शुरू कर दिया था और स्कूल की पढ़ाई छोड़ दी थी। इसके बाद वो कभी वापस स्कूल नहीं जा पाईं। वो पंचगनी स्थित सेंट जोसफ स्कूल में पढ़ती थीं। उनका परिवार पहले से ही फिल्मों से जुड़ा हुआ था। सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा था कि धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलना ही शिक्षित होने की निशानी नहीं होती।
गुजरात हाईकोर्ट ने गोधरा में ट्रेन में हिन्दुओं को जलाने के दोषी एक शख्स को पैरोल देते हुए कहा है कि इसे सज़ा की अवधि के भीतर गिना जाना चाहिए, पेरोल देने का ये अर्थ नहीं है कि सज़ा को निलंबित कर दी गई है। जस्टिस निशा एम ठाकोर ने हसन अहमद चरखा को 15 दिनों की पैरोल देते हुए ये टिप्पणी की। वो फ़िलहाल साबरमती एक्सप्रेस में महिलाओं-बच्चों समेत 59 रामभक्तों को ज़िंदा जलाए जाने के मामले में उम्रकैद की सज़ा काट रहा है।
मार्च 2011 में सेशन कोर्ट द्वारा उसे सज़ा सुनाए जाते समय इसकी पुष्टि की गई थी कि वो एक पूर्व-नियोजित आपराधिक साजिश का हिस्सा था, जिसके तहत खतरनाक हथियारों और विस्फोटक रसायनों से लैस भीड़ ने ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’, ‘हिंदुस्तान मुर्दाबाद’ और ‘हिन्दू काफिरों को जला दो’ जैसे नारे लगाते सांप्रदायिक दुर्भावना से हुए साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन पर पत्थरबाजी की और पेट्रोल डाल कर उसे आग के हवाले कर दिया।
59 मौतों के आल्वा 48 लोग इस घटना में घायल भी हुए थे। गुजरात सरकार ने कहा कि दोषी की जमानत याचिका पेंडिंग है, ऐसे में उसे पैरोल नहीं दी जा सकती। लेकिन, हाईकोर्ट ने इसे मानने से इनकार कर दिया। उसने अपनी बीवी के जरिए 60 दिनों की पैरोल की माँग की थी। उसने दावा किया कि उसकी बहनों के बेटे और बेटी की शादी है, ऐसे में मामा के रूप में उसका इसमें मौजूद रहा ज़रूरी है। उसकी जमानत याचिका फ़िलहाल सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।
Convict Hassan Ahmed Charkha, Who Was Part Of Mob Shouting "Hindu Kafiron Ko Jala Dalo" In Godhra Train Burning Case Gets Parole By Gujarat High Court. Hassan got parole earlier as well, court has noted in 2018 that he did not surrender in time twicehttps://t.co/uYWUotwjG0
हालाँकि, गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि पैरोल की अवधि भी सज़ा के तहत ही गिनी जाएगी। 2011 में स्पेशल SIT कोर्ट ने हसन के अलावा 19 अन्य को भी इस मामले में सज़ा सुनाई थी। साथ ही 11 अन्य को भी इस मामले में फाँसी की सज़ा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने आजीवन कारावास की सज़ा को बरक़रार रखा था, जिसके खिलाफ दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। गोधरा में रामभक्तों को जलाए जाने के बाद गुजरात भर में हिंसा भड़क गई थी।
फ्रांस की यात्रा के बाद यूएई पहुँचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने जोरदार स्वागत किया। इस दौरान राष्ट्रपति ने पीएम मोदी की कलाई पर फ्रेंडशिप बैंड बाँधकर दोस्ताना रिश्ते का भी इजहार किया। PM मोदी के सम्मान में आयोजित भोज में पूरी तरह से शाकाहारी भोजन परोसा गया। प्रधानमंत्री के यूएई दौरे में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए।
It is always gladdening to meet HH Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan. His energy and vision for development are admirable. We discussed the full range of India-UAE ties including ways to boost cultural and economic ties. @MohamedBinZayedpic.twitter.com/XCBWW8cP38
इस मुलाकात और फ्रेंडशिप बैंड बाँधने की फोटो शेयर करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, “राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात हमेशा सुखद रहती है। विकास के लिए उनकी ऊर्जा और दृष्टिकोण सराहनीय है। हमने सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को बढ़ावा देने के तरीकों सहित भारत-यूएई संबंधों पर विस्तार से चर्चा की।” यूएई के राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फ्रेंडशिप बाँधने का वीडियो भी सामने आया।
परोसा गया शाकाहारी भोजन
यूएई के राष्ट्रपति भवन कसर-अल-वतन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में भोज का आयोजन किया गया। इस भोज के मेन्यू कार्ड में लिखा हुआ था, “सभी भोजन शाकाहारी हैं और वनस्पति तेलों से तैयार किए गए हैं। इनमें किसी भी प्रकार के डेयरी या अंडा उत्पाद शामिल नहीं हैं।” भोज में सलाद के रूप में गेहूँ और खजूर था। इसे स्थानीय सब्जियों के साथ परोसा गया था। साथ ही मसाला सॉस में भूनी हुई सब्जियाँ परोसी गईं। इसके अलावा, फूलगोभी और गाजर तंदूरी के साथ काली दाल और स्थानीय गेहूँ परोसा गया। मीठे में विभिन्न प्रकार के स्थानीय मौसमी फल परोसे गए।
प्रधानमंत्री के इस दौरे पर दोनों देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने तथा भारत और यूएई की तेज भुगतान प्रणालियों को जोड़ने को लेकर समझौता हुआ। इसके अलावा यूएई में आईआईटी-दिल्ली का कैंपस खोलने समेत कई मुद्दों पर सहमति बनी।
यूएई के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दौरे को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने हिंदी में एक ट्वीट कर लिखा, “मुझे आज अबू धाबी में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने का मौका मिला। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों की चल रही प्रगति, सतत वैश्विक विकास को बढ़ावा देने में हमारे साझा हित और हमारे देशों और हमारे लोगों के बीच सहयोग को और बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की।”
मुझे आज अबू धाबी में भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत करने का मौका मिला। हमने अपने द्विपक्षीय संबंधों की चल रही प्रगति, सतत वैश्विक विकास को बढ़ावा देने में हमारे साझा हित और हमारे देशों और हमारे लोगों के बीच सहयोग को और बढ़ावा देने के तरीकों पर चर्चा की। pic.twitter.com/iojtJsVe9v
वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यूएई यात्रा को सफल बताते हुए ट्वीट कर कहा है, “यूएई की सफल यात्रा का समापन हुआ। हमारे देश और पृथ्वी को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कई मुद्दों पर एक साथ काम कर रहे हैं। मैं यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान को गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूँ।” प्रधानमंत्री का यूएई दौरे का समापन हो चुका है। वह शनिवार (15 जुलाई 2023) को ही भारत लौटने के लिए रवाना हो चुके हैं।
Concluding a productive UAE visit. Our nations are working together on so many issues aimed at making our planet better. I thank HH Sheikh Mohamed bin Zayed Al Nahyan for the warm hospitality. @MohamedBinZayed
नक्सली संगठन PLFI (पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया) का मुखिया रहा दिनेश गोप फ़िलहाल जेल में बंद है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) उसकी करोड़ों की संपत्ति की जाँच कर रहा है। उसकी दोनों पत्नियाँ भी जेल में हैं, जिनसे पूछताछ की जाएगी। उसने अपनी दोनों पत्नियों के माध्यम से ही अच्छी-खासी रकम को कई जगहों पर निवेश कर रखा है। हीरा देवी और शकुंतला कुमारी से पूछताछ करने के लिए जाँच एजेंसी को इसके लिए अनुमति भी प्राप्त हो गई है।
बता दें कि दिनेश गोपी अक्सर लेवी के पैसे उठाता था, लेकिन वो इसे कहाँ इन्वेस्ट करता था इस संबंध में ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाया है। इस महीने की शुरुआत में हुई पूछताछ में उसने रंगदारी में मिले रुपयों के निवेश का थोड़ा सा हिसाब-किताब दिया है, लेकिन ये पर्याप्त नहीं है। उसका करोड़ों रुपए का अवैध निवेश है। राँची स्थित PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग) कोर्ट ने उसकी दोनों बीवियों से इस संबंध में पूछताछ कर जानकारी हासिल करने की अनुमति दे दी है।
याद दिला दें कि दिनेश गोप को NIA के विशेष दस्ते ने उसकी दोनों पत्नियों को कोलकाता से 30 जनवरी, 2022 को गिरफ्तार किया था। उसके पास से लाखों रुपए भी बरामद किए गए थे। उसकी दोनों पत्नियों को बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद कर के रखा गया है। वहीं इस साल 21 मई को दिनेश गोप भी नेपाल से धरा गया। बिहार, झारखंड और ओडिशा में उसके ऊपर 102 मामले दर्ज हैं। 2 दशक तक उसने आतंक फैला कर रखा और करोड़ों रुपयों की उगाही की।
प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीएलएफआई (पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया) के सुप्रीमो दिनेश गोप के करोड़ों के अवैध निवेश पर ईडी (#ED) की टीम अब उसकी दो पत्नियों हीरा देवी और शकुंतला कुमारी से पूछताछ करेगी। रांची (#Ranchi) स्थित पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग) कोर्ट ने इनसे दो… pic.twitter.com/aHQnRdW5fO
अब तक 2 दर्जन बैंकों में उसके निवेश का पता चला है, जो उसने अपनी दोनों पत्नियों के माध्यम से ही कर रखा है। उसकी पत्नियों के बैंक खातों से 19.93 लाख रुपए जब्त हुए थे। 2 दर्जन से अधिक बैंक खातों के जरिए 2.50 करोड़ रुपए के लेनदेन का पता चला था। शेल कंपनियों से लेकर रिश्तेदारों तक एक नाम पर ये लेनदेन किए गए। मेसर्स भाव्या इंजीकॉन, मेसर्स शिव आदि शक्ति मिनरल्स, मेसर्स शक्ति समृद्धि इंफ्रा और पलक इंटरप्राइजेज जैसी कंपनियों के माध्यम से ये सब किया गया। शकुंतला अपने सहयोगी सुमंत के साथ मिल कर इन्हें चला रही थी।
क्या आपने रॉबर्ट ओपेनहाइमर का नाम सुना है? वही रॉबर्ट ओपेनहाइमर, जिन पर हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन फिल्म लेकर आए हैं। ‘Oppenheimer’ नाम की ये फिल्म रॉबर्ट ओपेनहाइमर के जीवन पर ही आधारित है। असल में ये वही शख्स थे, जिन्हें ‘परमाणु बम का जनक’ कहा जाता है। अमेरिका के फिजिसिस्ट रॉबर्ट ओपेनहाइमर परमाणु बम बनाने के लिए बनाई गई ‘लॉस एलामोस लेबोरेटरी’ के डायरेक्टर थे। उन्होंने हारवर्ड, कैम्ब्रिज, गोटेंगेन और कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी।
द्वितीय विश्वयुद्ध के समय उक्त लैब को ‘मैनहटन प्रोजेक्ट’ के तहत विकसित किया गया था। पहले न्यूक्लियर टेस्ट को ‘ट्रिनिटी’ नाम दिया गया था। वो 16 जुलाई, 1945 का दिन था जब ये कराया गया था। जब ये टेस्ट हुआ, उस समय रॉबर्ट ओपेनहाइमर एक बंकर में बैठे हुए थे, जबकि वहाँ से 10 किलोमीटर दूर न्यू मेक्सिको स्थित जोर्नाडा डेल मुर्टो के रेगिस्तान में ये परीक्षण हुआ था। बताया जाता है कि इस परियोजना, जिसे ‘Project Y’ भी नाम दिया गया था, पर काम करने के दौरान उनका वजन काफी घट गया था और वो पतले हो गए थे।
J. Robert Oppenheimer, परमाणु परीक्षण और भगवद्गीता का एक श्लोक
इस प्रोजेक्ट के लिए उन्होंने 3 साल लगातार जो मेहनत की थी, उस कारण ऐसा हुआ था। टेस्ट वाले दिन वो ठीक से सो भी नहीं पाए थे। बताया जाता है कि जब पहला परमाणु ब्लास्ट हुआ, तब उसने सूरज की रोशनी को भी फीका कर दिया। 21 किलोटन TNT के साथ किया गया ये ब्लास्ट उस समय तक कहीं देखा-सुना नहीं गया था। ब्लास्ट के बाद जब मशरूम के आकर का घना धुआँ आकाश में उठा, तब जाकर रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने राहत की साँस ली। 160 किलोमीटर दूर तक ब्लास्ट का कंपन सुनाई दिया।
उनके दोस्त इसीडोर रबी ने बताया था कि उसके बाद उन्होंने एक दूसरी से रॉबर्ट ओपेनहाइमर को देखा था, उनके शब्दों में कहें तो वो कार से जब निकले तो उनकी चाल एक अकड़ वाली थी, उसमें एक एहसास था कि उन्होंने कर दिखाया। उन्होंने इसकी तुलना दोपहर के सूर्य से की थी। लेकिन, क्या आपको पता है कि इस पहले परमाणु बम ब्लास्ट के बाद रॉबर्ट ओपेनहाइमर के दिमाग में क्या गूँजा था। असल में वो भगवद्गीता से प्रेरित थे। उन्हें इस हिन्दू ग्रन्थ से प्रेम था।
1960 के दशक में उन्होंने इसका खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि जब दुनिया का पहला परमाणु ब्लास्ट सफल रहा, तब उनके मन में भगवद्गीता से भगवान श्रीकृष्ण के ये शब्द गूँजे – “अब मैं मृत्यु बन गया हूँ, संसारों का विध्वंस करने वाला।” भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण अपने प्रिय मित्र अर्जुन की शंकाओं का जवाब देते हैं, उन्हें युद्ध करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसी दौरान वो अपना विकराल रूप प्रकट करते हैं और विष्णु के रूप में बताते हैं कि वो कौन हैं। उक्त श्लोक इस प्रकार है:
इसका हिंदी अर्थ कुछ इस प्रकार होगा, “मैं प्रलय का मूल कारण और महाकाल हूँ जो जगत का संहार करने के लिए प्रवृत्त हुआ हूँ। तुम्हारे युद्ध में भाग लेने के बिना भी युद्ध की व्यूह रचना में खड़े विरोधी पक्ष के योद्धा मारे जाएँगे।” श्रीकृष्ण ने इसमें खुद को काल बताया है। सृष्टि की सभी घटनाएँ अंततः काल के ही गर्भ में समा जाती हैं। यहाँ उन्होंने परमेश्वर का वो रूप दिखाया है, जो भक्षण करने वाला है। वो हर एक जीव और वस्तु को नष्ट करने में सक्षम हैं।
भगवद्गीता का ये श्लोक ही रॉबर्ट ओपेनहाइमर को याद आया था, जब उनका परमाणु परीक्षण सफल रहा। बड़ी बात ये है कि इस परीक्षण के बाद काफी दिनों तक वो अवसादग्रस्त रहे थे। उन्हें पता था कि आगे इस परमाणु बम का क्या इस्तेमाल होने वाला है। एक दिन तो वो जापानी लोगों को लेकर चिंतित भी थे। उन्होंने कहा था, “ये बेचारे लोग…”। लेकिन, 15 दिन बाद फिर से सब भूल कर वो वापस अपने काम में लग गए। उन्होंने बताया कि परमाणु बम को ज़्यादा ऊँचे पर नहीं फोड़ा जाए, नहीं तो टार्गेट अच्छे से क्षतिग्रस्त नहीं होगा।
साथ ही उन्होंने बारिश या धुंध में भी इसे डेटोनेट न करने की सलाह दी। हिरोशिमा पर जब परमाणु बम गिराए जाने की खबर आई, तब उसके बाद उन्होंने अपने साथियों के बीच इसका जश्न मनाया और मुट्ठी बाँध कर हाथ हवा में लहरा कर प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनके साथ काम करने वाली जेमी बर्नस्टीन का कहना था कि ये प्रोजेक्ट उनके अलावा किसी और से सफल नहीं हो पाता। उन्होंने यहाँ तक लिखा है कि अगर रॉबर्ट ओपेनहाइमर प्रोजेक्ट के डायरेक्टर नहीं होता तो परमाणु बम का इस्तेमाल हुए बिना द्वितीय विश्व युद्ध खत्म हो जाता।
रॉबर्ट ओपेनहाइमर और उनका जीवन
वो न सिर्फ थ्योरेटिकल फिजिक्स के विद्वान थे, बल्कि एक बुद्धिजीवी और नेतृत्वकर्ता के रूप में भी उन्होंने पहचान बनाई। 1904 में न्यूयॉर्क में जन्मे रॉबर्ट ओपेनहाइमर जर्मन-यहूदी माता-पिता की संतान थे। उनका परिवार टेक्सटाइल कारोबार में उन्नति कर के समृद्ध बन गया था। एक बड़े अपार्टमेंट में उनका परिवार रहा करता था, जिसमें 3 नौकरानियाँ और 1 ड्राइवर भी था। बचपन में वो काफी शर्मीले हुआ करते थे। 9 वर्ष की उम्र में ही वो ग्रीक और लैटिन चिंतन साहित्य पढ़ते थे।
यही वो समय था जब ‘Mineralogy’ (खनिज पदार्थों और उनकी भौतिक-रासायनिक स्थितियों का अध्ययन) में उनकी रुचि जगी और उन्होंने अपने अध्ययन को लेकर ‘न्यूयॉर्क मिनरालॉजिकल क्लब’ को पत्र भेजने शुरू किए। ये इतने गहरे होते थे कि क्लब ने वयस्क समझ कर उन्हें प्रेजेंटेशन के लिए आमंत्रित भी कर दिया। हार्वर्ड में स्नातक करने के दौरान भी उन्होंने लिखा था कि वो कैसेथीसिस, कविताएँ सब लिखते हैं, चाय परोसते हैं और लैब्स में भी काम करते हैं।
कैम्ब्रिज में पोस्ट ग्रेजुएशन के दौरान तो उन्होंने अपने ट्यूटर के टेबल पर एक ज़हर इंजेक्ट किया हुआ सेब ही रख डाला था, लेकिन संयोग से ये उसने खाया नहीं। हालाँकि, उन्हें मनोवैज्ञानिक डॉक्टर को दिखाने की शर्त पर वहाँ से निकाला नहीं गया। उन्होंने 1925 में लिखा था कि इन लैब्स में काम करते हुए वो कुछ नया सीख नहीं पा रहे हैं। उस दौरान उन्हें आत्महत्या के भी ख्याल आते। उसी दौरान पेरिस दौरे में उनके एक दोस्त फ्रांसिस फर्ग्युसन ने बताया था कि उसने उनकी गर्लफ्रेंड को प्रोपोज़ किया है।
इस पर दोनों के बीच खूब मारपीट हुई थी और रॉबर्ट ओपेनहाइमर की गर्दन पर जख्म हो गया था। वो रोए भी थे। रॉबर्ट ओपेनहाइमर का कहना था कि उन्हें ऐसे लोग पसंद हैं जो कई सारी चीजों को करने में असाधारण हों, लेकिन साथ ही उनके चेहरे आँसू से भी सने हों। उनके जीवन में बड़ा मोड़ तब आया, जब 1926 में उनकी मुलाकात जर्मनी स्थित ‘Göttingen यूनिवर्सिटी’ में ‘इन्टीटूटे ऑफ थ्योरेटिकल फिजिक्स’ के डायरेक्टर से हुई। प्रोफेसर ने उनकी प्रतिभा को पहचान कर यूनिवर्सिटी में रिसर्च का मौका दिया।
यहाँ उनकी मुलाकात इस क्षेत्र के प्रतिभावान वैज्ञानिकों से भी हुई, जिनमें से कई उनके दोस्त बने तो कइयों ने ‘लॉस एलामोस लेबोरेटरी’ में उनकी टीम में काम किया। आपके मन में एक सवाल ज़रूर आ रहा होगा कि रॉबर्ट ओपेनहाइमर को भगवद्गीता से इतना लगाव क्यों था। ये सब शुरू हुआ 1930 के दशक में, जब वो Humanities के क्षेत्र में भी थोड़ा-बहुत अलग से काम कर रहे थे। इसी दौरान उनका परिचय प्राचीन हिन्दू ग्रंथों से हुआ और इनसे वो खासे प्रभावित हुए।
परमाणु बम से तबाही देख बदला मन? हिन्दू ग्रन्थ में ली शरण
इस दौरान उन्होंने निश्चय किया कि वो भगवद्गीता का अनुवाद किए बिना इसे पढ़ेंगे। चूँकि मूल रूप से ये ग्रन्थ संस्कृत में है, इसीलिए उन्होंने संस्कृत भी सीखनी शुरू कर दी। रॉबर्ट ओपेनहाइमर के भीतर मनोविज्ञान की समझ भगवद्गीता के बाद ही अच्छी तरह से विकसित हुई। यही कारण है कि ‘प्रोजेक्ट वाई’ के दौरान वो नैतिकता को सोच-विचार कर जिस कश्मकश में रहे, उससे निपटने में उन्हें सफलता मिली। कर्तव्य, नियति और फल की परवाह किए बिना कर्म करना – ये उन्होंने वहाँ से सीखा और दुष्परिणामों के बारे में सोचना बंद कर दिया।
हालाँकि, भगवद्गीता का ये सन्देश बिलकुल भी नहीं है कि निर्दोषों की हत्या की जाए या उनका नरसंहार किया जाए। रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने उस दौरान कहा था कि युद्ध ऐसी परिस्थिति है, जिसमें इस दर्शन को लागू किया जा सकता है। लेकिन, युद्ध के बाद उनमें बदलाव आया और वो परमाणु हथियारों को आक्रामकता, अप्रत्याशित आक्रमण और आतंक के औजार बताने लगे। उन्होंने हथियारों की इंडस्ट्री को ही शैतानी करार दिया। उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन से कहा कि मेरे हाथ पर खून लगे हैं।
उन्हें ढाँढस बँधाने के लिए ट्रूमैन ने कह दिया कि खून आपके नहीं, मेरे हाथों में लगे हैं। रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने वैज्ञानिकों से एक बार कहा भी था वैज्ञानिक तो सिर्फ अपना कर्तव्य कर रहे हैं, हत्याओं की जिम्मेदारी तो राजनेताओं की होगी। एक तरह से ऐसा भी हो सकता है कि परमाणु बम बनाने और इसके दुष्परिणामों के बारे में सोच कर उन्होंने भगवद्गीता की शरण ली और अपने काम को सही ठहराने का प्रयास किया, लेकिन अंत में उन्हें समझ आया कि उन्होंने क्या किया है।
युद्ध के कुछ वर्षों बाद उसी अमेरिका ने उन पर जाँच बिठा दी, जिसे उन्होंने परमाणु बम बना कर दिया था। उनकी सुरक्षा व्यवस्था में कमी कर दी गई। तब उनकी तरफ से कुछ विशेषज्ञों ने अख़बारों में लिखा कि वो गद्दार नहीं हैं। रॉबर्ट ओपेनहाइमर किशोरावस्था से ही काफी स्मोकिंग करते थे, इस कारण उन्हें बाद में टीबी का भी सामना करना पड़ा। अपनी मृत्यु से 2 दिन पहले उन्होंने कहा था कि दोबारा एक ही गलती को न दोहराने के कारोबार का नाम ही विज्ञान है।
वो सन् 1933 का समय था, जब प्रत्येक गुरुवार को रॉबर्ट ओपेनहाइमर भगवद्गीता पढ़ने जाते थे। बर्कली में उन दिनों आर्थर राइडर नाम के एक संस्कृत शिक्षक हुआ करते थे, जिनसे वो पढ़ने जाते थे। उनका कहना था कि राइडर से ही उन्हें नीतिशास्त्र का ज्ञान मिला, उन्होंने सीखा कि जो लोग कठिन कार्य करते हैं उन्हें सम्मान प्राप्त होता है। हिन्दू धर्म में उन्होंने दुनियादारी से खुद को अलग कर के देखने की भावना उन्होंने सीखी। एक बार उन्होंने अपने एक मित्र से कहा था, “मैंने ग्रीक को भी पढ़ा है। लेकिन हिन्दुओं में गहराई है। ”
तत्कालीन हैदराबाद प्रांत में निजामशाही के दौरान रजाकारों द्वारा हिंदुओं के खिलाफ की गई हिंसा पर आधारित फिल्म रजाकार (‘Razakar- The Silent Genocide of Hyderabad) मूवी का पोस्टर लॉन्च हो गया है। इसे तेलंगाना के पूर्व भाजपा अध्यक्ष बंदी संजय कुमार ने शनिवार (15 जुलाई 2023) को रिलीज किया।
इस पोस्टर में दिखाया गया है कि एक हिंदू को राइफल की आगे लगी चाकू पर मार कर लटका दिया गया है। पोस्टर में यह भी दिखा रहा है कि उसके अगल-बगल घोड़ों पर कुछ लोग खड़े हैं, जो संभवत: रजाकारों के सैनिक हैं।
— Bandi Sanjay Kumar (@bandisanjay_bjp) July 14, 2023
फिल्म का पोस्टर रिलीज करने के दौरान करीमनगर के सांसद बंदी संजय कुमार, पूर्व सांसद एपी जितेंद्र रेड्डी, गुडुर नारायण रेड्डी और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल सी विद्यासागर राव जैसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता मौजूद रहे। फिल्म के स्टारकास्ट भी इस मौके पर मौजूद रहे।
इस फिल्म के निर्माता भाजपा नेता गुडुर नारायण रेड्डी (Gudur Narayan Reddy) हैं। नारायण रेड्डी करीब चार दशक तक कॉन्ग्रेस से जुड़े रहे थे। वे तीन साल पहले ही भाजपा में शामिल हुए हैं। फिल्म को यता सत्यनारायण ने लिखा और निर्देशित किया है। अभिनेत्री वेदिका की भी इसमें भूमिका है। इस फिल्म को हिंदी, तेलुगु, तमिल, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज करने की योजना है।
कार्यक्रम में बोलते हुए निर्देशक रेड्डी ने कहा कि यह फिल्म धार्मिक संघर्ष पर आधारित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ना ही इस फिल्म को किसी के बीच असंतोष पैदा करने के लिए बनाया गया है। उन्होंने कहा कि शेख बंदगी, मकदूम मोइनुद्दीन और पत्रकार शोएबुल्ला खान जैसे लोगों का हवाला दिया और कहा कि इन लोगों ने उस समय सत्ता प्रतिष्ठान के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
यता सत्यनारायण ने कहा, “यह मुक्ति के संघर्ष से प्रेरित फिल्म है। यह 800 नायकों की कहानी है। यह वह कहानी है, जिसने हैदराबाद को आजादी दिलाई। नारायण रेड्डी हमेशा मुझसे यह फिल्म करने के लिए कहते रहे हैं। मैंने कहा कि देखते हैं। यह कोई धार्मिक इतिहास नहीं है, यह हमारा इतिहास है। अगर हम रजाकर की फिल्म नहीं देखते हैं, तो हमारे जीवन का कोई मतलब नहीं है।”
महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल विद्यासागर राव ने कहा, “उस समय इसमें 8 जिले थे। महाराष्ट्र में 5 जिले और कर्नाटक के 3 जिले हैदराबाद में शामिल थे। ब्रिटिश सरकार ने सबको मिलाकर एक देश बनाने का फैसला किया तो निज़ाम ने एक स्वतंत्र राज्य की घोषणा कर दी। निजाम ने दो लाख लोगों की एक मजबूत रजाकारों की सेना बनाई। कई अपराध किए।”
उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश को आजादी मिलने के 17 महीने बाद हैदराबाद को आजादी मिली। इस्लाम अलग है और रजाकार अलग हैं। रजाकारों के खिलाफ लड़ने वालों में मुस्लिम भाई भी शामिल थे। मौलाना और तबरेज खान जैसे कई लोगों ने हैदराबाद की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी। आने वाली पीढ़ियों को ऐसा इतिहास जानने की जरूरत है। हमें रजाकारों की फिल्म देखनी चाहिए और इसे प्रोत्साहित करना चाहिए।”
फिल्म के निर्माता गुडुरु नारायण रेड्डी ने कहा, “मैंने यह फिल्म अपने दादाजी की प्रेरणा से बनाई है। निजाम के शासनकाल के दौरान रजाकारों के अत्याचार को रोकने वाला कोई नहीं था। जब सरदार वल्लभ भाई पटेल ने यहाँ सेना भेजी, तब राजवी ने हमारे गाँव में घुसने की कोशिश की। तब मेरे दादाजी ने उसे गाँव में प्रवेश करने से रोक दिया। राजवी और मेरे दादाजी के बीच एक बड़ा वाकयुद्ध हुआ। हमारे कई बुजुर्गों ने मुझे इसके बारे में बताया। मैंने एक भारतीय के रूप में रजाकार नाम की फिल्म बनाई। मैंने किसी का अपमान करने के लिए यह फिल्म नहीं बनाई।”
कौन थे रजाकार
अंग्रेजों के शासनकाल में हैदराबाद के नवाब बहादुर यार जंग ने मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (MIM) नाम की एक पार्टी बनाई थी। उन्होंने रजाकारों की फौज बनाई थी, जिसमें आम मुस्लिम शामिल थे। यह फौज भी नवाब की सेना की ही तरह थी। इस सेना की कमान निजाम के पास ना होकर बहादुर यार जंग के पास थी।
बहादुर यार जंग के बाद रजाकारों की की जिम्मेदारी कासिम रिजवी ने संभाली। इनका मूल मकसद देश की आजादी के बाद हैदराबाद को पाकिस्तान की तरह ही एक इस्लामिक राज्य बनाना था। केएम मुंशी ने अपनी किताब ‘द एंड ऑफ एन इरा’ में लिखा है कि कासिम रिजवी कहता था, “हम महमूद गजनवी की नस्ल के हैं। अगर हमने तय कर लिया तो हम लाल किले पर आसफजाही झंडा फहरा देंगे।”
आजादी की प्रक्रिया के दौरान भारत के तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने हैदराबाद के निजाम मीर उस्मान अली खान से विलय को लेकर बातचीत की। हालाँकि, इस प्रस्ताव को ठुकरा कर निजाम ने 3 जून 1947 को फरमान जारी कर हैदराबाद को आजाद मुल्क घोषित कर दिया। कहा जाता है कि हैदराबाद के निजाम को रजाकारों के मुखिया कासिम रिजवी ने भरोसा दिया था कि वह भारतीय सेना का मुकाबला कर सकता है।
हैदराबाद को अलग इस्लामी मुल्क बनाने के रजाकार अत्याचारों की सीमा लाँघ गए। रजाकारों ने बहुसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाया। उनका कत्ल किया। हजारों महिलाओं का बलात्कार किया गया। भारत में विलय की जो भी माँग करता, उसे वे रजाकारों में शामिल कट्टरपंथी मुस्लिम निशाना बनाते। इसको लेकर हैदाराबाद में दंगे भड़क उठे और हिंदुओं के लिए जीना मुश्किल होने लगा। रिजवी ने हैदराबाद की सत्ता अपने हाथ में ले ली।
आखिरकार 13 सितंबर 1948 को सरदार पटेल ने हैदराबाद को भारत में मिलाने के लिए ऑपरेशन पोलो की अनुमति दी। यह सैन्य कार्रवाई पाँच दिनों तक चली। इसमें 1373 रजाकार और हैदराबाद रियासत के 807 जवान मारे गए। वहीं, भारतीय सेना के 66 जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गए। अंत में सरेंडर करने के बाद हैदराबाद का भारत में विलय हो गया।
इसके बाद रिजवी को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया और मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पर प्रतिबंध लगा दिया गया। लगभग एक दशक तक जेल में रखने के बाद कासिम रिजवी को इस शर्त पर रिहा कर दिया गया कि वह 48 घंटों में पाकिस्तान चला जाएगा। रिजवी को पाकिस्तान ने अपने शरण दे दी थी।
बिहार की राजधानी पटना में विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेता की मौत हो गई थी। इस मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत 6 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई। BJP नेता कृष्णा सिंह कल्लू ने यह शिकायत दर्ज कराई। भाजपा का आरोप है कि पुलिस की लाठीचार्ज में पार्टी कार्यकर्ता की मौत हुई थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ता विजय कुमार सिंह की मौत और लाठीचार्ज को लेकर भाजपा नेता कृष्णा सिंह कल्लू ने पटना की सिविल कोर्ट में शिकायत दी है। इस शिकायत में कृष्णा सिंह ने सीएम नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, पटना एसएसपी राजीव मिश्रा और कलेक्टर चन्द्रशेखर सिंह समेत 6 लोगों पर आरोप लगाए हैं। यह शिकायत भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302, 307, 341, 323 के तहत दर्ज की गई है।
क्या है मामला
बिहार में शिक्षक अभ्यर्थी अपनी माँगों को लेकर सरकार का विरोध कर रहे हैं। राजधानी पटना के गाँधी मैदान में गुरुवार (13 जुलाई 2023) को शिक्षक अभ्यर्थियों के समर्थन में भाजपा कार्यकर्ता भी प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। इसके कई वीडियो भी सामने आए थे। इसके बाद BJP नेता सुशील मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि पुलिस की लाठीचार्ज में पार्टी नेता की मौत हो गई। इसको लेकर बीजेपी लगातार नीतीश सरकार पर हमलावर है। मीडिया ने भी इस मुद्दे को कवर किया था।
हालाँकि बाद में पुलिस ने कहा था कि विजय कुमार सिंह की मौत लाठीचार्ज से नहीं हुई। पुलिस ने ‘हल्का बल’ प्रयोग किया था। यही नहीं एससपी राजीव कुमार मिश्रा ने इस मामले की जाँच के दौरान मृतक विजय सिंह के साथी भरत प्रसाद चंद्रवंशी के बयान के आधार पर इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जाँच की। इससे यह सामने आया था कि विजय सिंह दोपहर में 1: 22 पर गाँधी मैदान के जेपी गोलंबर से निबंधन कार्यालय छज्जूबाग की तरफ जा रहे हैं जो डाकबंगला रोड से अलग है। 1: 27 पर उसी रास्ते में उन्हें दुर्गा अपार्टमेंट के सामने खाली रिक्शा दिखता है और यहाँ से रिक्शा लेकर वो 5 मिनट दूरी पर स्थित तारा अस्पताल पहुँचते हैं।
एसएसपी के अनुसार, विजय सिंह के साथ जो भी हुआ वो इन्हीं 5 मिनटों में छज्जूबाग क्षेत्र में हुआ। वे डाकबंगला के पास नहीं थे। जहाँ दोपहर के लगभग एक बजे भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल का प्रयोग हुआ। वहीं छज्जूबाग क्षेत्र में कोई पुलिस बल नहीं था। इसलिए विजय सिंह की मौत लाठीचार्ज से नहीं हुई।
इस पूरे मामले में BJP नीतीश सरकार पर हमलवार है और इस्तीफे की माँग कर रही है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने नीतीश कुमार की तुलना जनरल डायर से की है। उन्होंने कहा है, “अंग्रेजों ने साइमन कमीशन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ जैसा किया था बिहार सरकार ने भी वैसा ही किया है। पटना की सड़कों पर जिस तरह की बर्बरता की गई वह जनरल डायर की याद दिलाती है। वास्तव में, बिहार में जंगलराज 3.0 आ गया है।” ज्ञात हो कि साल 1919 में पंजाब के अमृतसर में स्थित जलियावाला बाग में साइमन कमीशन का विरोध कर रहे लोगों पर जनरल डायर ने ताबड़तोड़ गोलियाँ चलवाईं थीं। इस घटना में सैकड़ों लोग काल के गाल में समा गए थे।
मोदी सरनेम से जुड़े मानहानि मामले कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने शनिवार (जुलाई 15, 2023) को गुजरात हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपनी याचिका दाखिल की।
मालूम हो कि इससे पहले राहुल गाँधी ने गुजरात उच्च न्यायालय में अपील की थी कि मानहानि केस में उन्हें सजा ही न मिले। मगर बीती 7 जुलाई को केस की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने उनकी पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया था। अब इसी आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
गौलरतब है कि मानहानि केस में राहुल गाँधी को 2 साल की सजा सूरत कोर्ट द्वारा सुनाई गई थी। इसके बाद उन्होंने जमानत की गुहार लगाई और गिरफ्तारी से बच गए। हालाँकि उनकी सांसदी वापस नहीं आई।
बता दें कि 13 अप्रैल 2019 को राहुल गाँधी ने कहा था, “नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी इन सभी के नाम में मोदी लगा हुआ है। सभी चोरों के नाम में मोदी क्यों लगा होता है।” इस बयान के बाद भाजपा नेता पूर्णेश मोदी ने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ सूरत में मामला दर्ज कराया था। उनपर आरोप था कि उन्होने ऐसी टिप्पणी करके मोदी सरनेम वालों को बदनाम किया।
इस केस में राहुल गाँधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 के तहत केस दर्ज करवाया था। ये धाराएँ आपराधिक मानहानि से संबंधित है। करीब 4 साल बाद मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राहुल गाँधी को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। अदालत ने राहुल गाँधी को 2 साल की जेल और 15000 रुपए जुर्माना की सजा सुनाई थी। हालाँकि उन्हें तुरंत जमानत देते हुए ऊपरी अदालत में अपील के लिए 30 दिनों का समय दिया था।
अपने प्रेमी के साथ रहने के लिए चार बच्चों के साथ पाकिस्तान से भारत आई सीमा हैदर को लेकर भारत और पाकिस्तान में हंगामा बरपा हुआ है। भारत में उसे एक जासूस की नजर से देखा जा रहा है तो पाकिस्तान इसे अपनी तौहीन मानकर उस पर तरह-तरह के आरोप लगाकर लौटाने की माँग कर रहा है। इस बीच सीमा की एक कथित सहेली और और एक बॉयफ्रेंड का बयान सामने आया है।
पाकिस्तान का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में एक शख्स बुर्का पहनी हुई एक महिला से बातचीत करता है। महिला खुद को सीमा की सहेली बता रही है। बुर्के वाली महिला कहती है कि सीमा को सबसे अधिक क्रिकेट पसंद है। वह गेम की बहुत बड़ी साइको है। इसके साथ ही उसने सीमा को धोखेबाज भी बताया।
पाकिस्तान से भारत आई #सीमा_हैदर की बचपन की दोस्त को सुनिये। उसे मैच ज्यादा पसंद है,सिगरेट भी पीती है। और कई लड़को को उसने फंसा रखखी है।
महिला ने वीडियो में कहा कि उसे मालूम था कि सीमा हैदर भारत जा रही है। महिला ने कहा कि जब उसे ये पता चला कि सीमा मुस्लिम होकर हिंदू धर्म कबूल कर रही है तो उसने सीमा हैदर का असल चेहरा सबके सामने लाने की सोची। यह महिला खुद को सीमा की बचपन की सहेली बताती है।
महिला कहती है कि जब सीमा उसका यह वीडियो देखेगी तो उसके पाँव तले जमीन खिसक जाएगी। सीमा हैदर ने दीन (इस्लाम) को धोखा दिया है, इसलिए वह उसका पोल खोल रही है। महिला ने कहा कि सीमा हैदर हिंदुओं के साथ भी धोखा कर रही है। वह कुछ भी कर सकती है। मुस्लिम के बाद जैसे हिंदू बनी, इसके बाद वह कुछ और भी बन सकती है। वह ईसाई भी बन सकती है।
इससे पहले पाकिस्तान के एक लड़के ने खुद को सीमा हैदर का पूर्व प्रेमी बताया था। खुद को ओसामा बताने वाले लड़के ने कहा कि सीमा हैदर के पाकिस्तान में कई लड़कों से संबंध थे। उसने कहा कि सीमा हैदर के मूसा, आरिफ, असलम, सयान आदि कई लड़कों से संबंध थे। उसने सचिन मीणा को सलाह देते हुए कहा कि जैसे सीमा ने उसे धोखा दिया, वैसे ही उसे भी दे सकती है।
ओसामा ने बताया कि सीमा अपने सभी बॉयफ्रेंड से बहुत सफाई से झूठ बोलती थी। उसने उसे बेहद शातिर बताया। ओसामा ने कहा कि सीमा को क्रिकेट का बहुत शौक है और वह भारत-पाकिस्तान सीरीज को गँवाने का मौका कभी भी नहीं छोड़ती थी। उसने कहा कि सीमा को सचिन तेंदुलकर बहुत पसंद है। इसलिए वह सचिन नाम के लड़के के साथ गई है।
सीमा हैदर की चर्चा की चर्चा होने के बाद पाकिस्तान की शहबाज शरीफ की सराकर ने भी इसका संज्ञान लिया है। पाकिस्तान सरकार ने भारत सरकार से माँग की है कि सीमा हैदर को लेकर मीडिया में आ रही खबरों को सत्यापित करे। इसके साथ ही उसने सीमा के लिए काउंसलर सुविधा उपलब्ध कराने की माँग की है।
इस बीच ग्रेटर नोएडा में सचिन मीणा के साथ रह रही सीमा ने कहा कि अब वह हिंदुस्तानी है और उसका पति गुलाम हैदर नहीं, बल्कि सचिन मीणा है। पाकिस्तानियों के सामने आ रहे वीडियो का सीमा ने भी एक वीडियो के जरिए जवाब दिया है।
वीडियो में सीमा कहती है, “मेरा यह वीडियो पाकिस्तानियों के लिए है। जितनी चाल चलनीहैं, चल लो। जितने भी इल्जाम लगाने हैं, लगा लो। यहाँ की एजेंसी हर बात को क्लियर कर रही है। जैसे ही मुझे यहाँ क्लियर किया जाएगा, मैं अपने पति सचिन के साथ ही रहूँगी। उनके साथ जिऊँगी और उनके साथ ही मरूँगी।”
सीमा ने आगे कहा, “कोई कितना भी कह ले, ऐसा हो नहीं सकता, क्योंकि मेरा प्यार, मेरा सब कुछ मेरे सचिन ही हैं। इन्हें मुझ पर भरोसा है और मुझे इन पर भरोसा है। और हाँ, मैं हिंदू हूँ। मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हूँ। भारत में आई हूँ। देख लेना, एक दिन सब मानेंगे मेरी मोहब्बत को।”