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समाजवादी पार्टी को बड़ा झटका, कद्दावर नेता दारा सिंह चौहान ने छोड़ी पार्टी: MLA पद से भी दिया इस्तीफा, मऊ-गाजीपुर-बलिया समेत कई जिलों में प्रभाव

साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष एकजुट होने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। लेकिन उनके नेताओं का पार्टी छोड़कर जाने का सिलसिला लगातार जारी है। अब समाजवादी पार्टी विधायक और कद्दावर नेता दारा सिंह चौहान ने पार्टी को बड़ा झटका देते हुए इस्तीफा दे दिया। उनके बीजेपी में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले वह बीजेपी छोड़ सपा में शामिल हुए थे।

दारा सिंह चौहान उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की घोसी विधानसभा क्षेत्र से विधायक थे। शनिवार (15 जुलाई, 2023) को उन्होंने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को भेजा था, जिसे स्वीकार कर लिया गया। दारा सिंह चौहान ओबीसी वर्ग का बड़ा चेहरा हैं। इसके अलावा अपने समाज के जातिगत समीकरणों में भी उनकी मजबूत पकड़ है। 

यही नहीं मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, देवरिया और बलिया समेत कई जिलों में उनका अच्छा प्रभाव है। दारा सिंह की सियासी पकड़ और आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए उनके इस्तीफे को अखिलेश यादव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

दारा सिंह ने अपने सियासी सफर की शुरुआत बसपा से की थी। साल 1996 से लेकर 2000 तक वह राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। यही नहीं बसपा के टिकट पर ही पर ही उन्होंने साल 2009 में घोसी से लोकसभा चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की थी। इसके बाद वह साल 2015 में भाजपा में शामिल हो गए। 

बीजेपी की टिकट से 2017 में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद योगी सरकार में उन्हें वन एवं पर्यावरण मंत्री बनाया गया था। हालाँकि, 2022 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने पलटी मारते हुए सपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद सपा की टिकट पर घोसी विधानसभा से विधायक बने थे। अब एक बार फिर उन्होंने पार्टी छोड़ी है। ऐसे में उनके भाजपा में वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि वह बीजेपी की टिकट पर घोसी विधानसभा या फिर गाजीपुर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।

बता दें कि गाजीपुर से बसपा सांसद रहे अफजाल अंसारी को एमपी-एमएलए कोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत 4 साल की सजा सुनाई थी। नियमानुसार 2 साल या उससे अधिक सजा होने पर सांसदी या विधायकी चली जाती है। ऐसे में गाजीपुर सीट बीते 3 महीने से खाली पड़ी है। इस सीट से होने वाले उपचुनाव या फिर आम चुनाव में दारा सिंह चौहान के उतरने की चर्चाएँ जोरों पर हैं। हालाँकि, दारा सिंह के इस्तीफे के बाद घोसी विधानसभा सीट भी खाली हो गई है। ऐसे में वह अपनी पूर्व सीट से भी चुनाव लड़ सकते हैं।

PM मोदी के UAE पहुँचने पर बुर्ज खलीफा पर दिखा भारत का तिरंगा: स्वागत खुद क्राउन प्रिंस ने किया, राष्ट्रपति से भी मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फ्रांस की सफल यात्रा के बाद यूएई में है। यहाँ वह पहले अबू धाबी हवाई अड्डे पर उतरे। जहाँ उनका स्वागत क्राउन प्रिंस एचएच शेख खालिद बिन मोहम्मद ने किया। इसके अलावा पीएम के स्वागत में जो सबसे खास चीज यूएई ने की वो बुर्ज खलीफा पर तिरंगे की तस्वीर को प्रदर्शित करके की।

सामने आई तस्वीरों में देख सकते हैं कि यूएई ने बुर्ज खलीफा पर तिरंगे के साथ प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर भी दुनिया की सबसे बड़ी इमारत पर दिखाई। साथ ही उसके साथ लिखा- ‘वेलकम ऑनरेबल प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी।’ इन तस्वीरों को देखने के बाद हर भारतीय सम्मानित महसूस कर रहा है।

इसके बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आरिंदम बागची ने बताया कि पीएम मोदी की यूएई पहुँचकर @cop28_UAE के अध्यक्ष और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के ग्रुप सीईओ के साथ सार्थक बैठक की। पीएम मोदी ने COP-28 को पूरा समर्थन करने का वादा किया और फिर उनकी मुलाकात यूएई के राष्ट्रपति से हुई। दोनों नेताओं ने इस मीटिंग के दोनों देशों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

बता दें कि अगस्त 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात की पहली यात्रा की थी। उसके बाद यूएई में ये पीएम की 5वीं यात्रा है।

पीएम ने यूएई जान से पहले कहा था- “मैं अपने मित्र, संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति और अबू धाबी के शासक महामहिम शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मिलने के लिए उत्सुक हूँ।” आगे उन्होंने कहा, “दोनों देश व्यापार, निवेश, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, शिक्षा, फिनटेक, रक्षा, सुरक्षा और मजबूत लोगों से लोगों के बीच संबंधों जैसे व्यापक क्षेत्रों में जुड़े हुए हैं। पिछले साल जायद और मैंने भविष्य में अपनी साझादारी के रोडमैप पर एग्री किया था। अब आगे संबंध मजबूत करने पर बात हो”

डोसा साथ सांभर न देने पर बिहार के रेस्टॉरेंट पर कोर्ट ने ठोका जुर्माना: कहा – ग्राहक को हुई मानसिक, शारीरिक और आर्थिक पीड़ा

बिहार में डोसा के साथ सांभर नहीं परोसने पर कोर्ट ने रेस्टोरेंट पर 3,500 रुपए का जुर्माना लगाया है। उपभोक्ता अदालत ने कहा कि सांभर नहीं परोसने से ग्राहक को मानसिक, शारीरिक और आर्थिक पीड़ा एवं परेशानी हुई है। जुर्माना भरने के लिए कोर्ट ने रेस्टोरेंट के मालिक को 45 दिन का समय दिया है।

मामला बिहार के बक्सर जिले का है। पेशे से वकील मनीष गुप्ता अपने जन्मदिन के अवसर पर 15 अगस्त 2022 का ऑर्डर दिया। डोसा की कीमत 140 रुपए का भुगतान करने के बाद वह पैकेट लेकर अपने घर लौट आए। जब उसे खोलकर देखा तो उसमें सांभर नहीं था।

इसके बाद मनीष गुप्ता रेस्टोरेंट गए और सांभर के बारे में बात की। हालाँकि, रेस्टोरेंट ने इस पर ध्यान नहीं दिया कहा, ‘140 रुपये में क्या रेस्टोरेंट खरीदोगे’। इसके बाद मनीष गुप्ता ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजा। नोटिस का भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला तो इसकी शिकायत उन्होंने जिला उपभोक्ता फोरम में की।

लगभग 11 महीने बाद बाद उपभोक्ता अदालत ने आवेदक मनीष गुप्ता को इस मामले में शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से पीड़ित बताया। इसके आधार पर अदालत ने रेस्टोरेंट पर 3500 रुपए का जुर्माना लगाया। इसमें मुकदमेबाजी के लिए 1500 रुपए और मूल जुर्माना की राशि 2000 रुपए है।

अदालत ने जुर्माना भरने के लिए ‘नमक’ नाम के इस रेस्टोरेंट को 45 दिन का समय दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर जुर्माने को समय पर नहीं भरा गया तो इस पर 8 प्रतिशत के हिसाब से ब्याज लगेगा और ब्याज सहित जुर्माने को भरना पड़ेगा।

सोमनाथ पर गजनवी के हमले का सच दिखाने के लिए आ रही है फिल्म: 50000+ हिन्दुओं ने दिया था बलिदान, 12 भाषाओं में रिलीज

द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक गुजरात के सोमनाथ मंदिर को इस्लामिक आक्रांता महमूद गजनवी के आक्रमण से बचाने के लिए हजारों लोगों ने बलिदान दिया था। इसी ऐतिहासिक गाथा को लेकर ‘द बैटल स्टोरी ऑफ सोमनाथ’ (THE BATTLE STORY OF SOMNATH) नाम से एक फिल्म आ रही है। फ़िल्म को 12 भाषाओं में रिलीज किया जाएगा।

‘द बैटल स्टोरी ऑफ सोमनाथ’ का प्रोडक्शन 2 इडियट फिल्म्स के बैनर तले होगा। फिल्म के प्रोड्यूसर मनीष मिश्रा और को-प्रोड्यूसर रंजीत शर्मा हैं। वहीं फिल्म की कहानी और डायरेक्शन का जिम्मा अनूप थापा के हाथों में है। अनूप थापा इससे पहले ‘ये मर्द बेचारा’ और ‘शुक्र दोष’ जैसी फिल्मों का डायरेक्शन कर चुके हैं।

फिल्म क्रिटिक तरण आदर्श ने ‘द बैटल स्टोरी ऑफ सोमनाथ’ को लेकर एक वीडियो शेयर किया है। वीडियो में बताया गया है कि सतयुग में भगवान चंद्रदेव ने सोने से सोमनाथ मंदिर का निर्माण किया था। इसके बाद त्रेता में रावण ने पीतल से इस मंदिर का निर्माण कराया। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इस मंदिर को लड़की से बनवाया। लेकिन इसके बाद 1025 ईस्वी पूर्व महमूद गजनवी ने मंदिर में आक्रमण किया। मंदिर को बचाने के लिए आम लोगों ने लड़ाई लड़ी। इस लड़ाई में 50 हजार से अधिक लोगों ने बलिदान दिया। इसके बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल ने इस मंदिर के पुनर्निर्माण का बेड़ा उठाकर इसे भव्य रूप दिया।

डायरेक्टर अनूप थापा ने इस फिल्म को लेकर कहा है कि इसकी कहानी महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर पर किए गए हमलों को लेकर है। लेकिन यह फिल्म अन्य ऐतिहासिक फिल्मों की कहानी से हटकर नजर आएगी। यह फिल्म दर्शकों के सामने भारतीय इतिहास की ऐसी गाथा को पेश करने जा रही है, जिसे या तो भुला दिया गया फिर या कुछ इतिहासकारों द्वारा गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया। हर भारतीय को इस ऐतिहासिक घटना के बारे में जानकारी होनी चाहिए।

हालाँकि इस फिल्म की स्टार कास्ट और रिलीज डेट को लेकर कोई भी जानकारी अब तक सामने नहीं आई है। लेकिन फिल्म के ऐलान होने के साथ ही जल्द ही इसके टीजर आने के कयास भी लगाए जा रहे हैं। यह फिल्म हिंदी और तेलगु में निर्मित होने के साथ ही कुल 12 भाषाओं में रिलीज होगी।

ज्ञात हो कि इस्लामिक आक्रांता महमूद गजनवी ने भारत में 17 बार आक्रमण किया था। इसमें से सबसे बड़ा हमला सोमनाथ मंदिर पर हुए हमले को ही माना जाता है। गजनवी ने मंदिर पर आक्रमण कर हजारों बेकसूर लोगों की हत्या कर दी थी। यही नहीं उसने मंदिर में जमकर लूटपाट मचाने के बाद मंदिर को तोड़ दिया था। 

आजम खान को 2 साल की सज़ा, हेट स्पीच में अदालत ने दोषी ठहराया: वीडियो हुआ था वायरल, बेल पर निकल उड़ा रहे हैं आम की दावत

भड़काऊ भाषण के मामले में अदालत ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को दोषी करार देते हुए 2 साल जेल की सज़ा सुनाई है। इसके बाद वो फिर से जेल जा सकते हैं। आजम खान पर कई मामले चल रहे हैं, जिस कारण उनका विधायक का पद भी चला गया था और रामपुर में उपचुनाव हुए थे। वो फ़िलहाल जमानत पर बाहर हैं। रामपुर की MP-MLA कोर्ट ने उन्हें ये सज़ा सुनाई है। ये मामला 2019 लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान शहजाद नगर का है।

तब चुनावी भाषण में उन्होंने भड़काऊ बयान दिया था, जिसके बाद तत्कालीन वीडियो निगरानी टीम प्रभारी (ADO) अनिल कुमार चौहान ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। सोशल मीडिया पर भी उनका ये भाषण वायरल हुआ था। उन्होंने न सिर्फ तत्कालीन जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों के लिए, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए भी आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। अक्टूबर 2022 में भी हेट स्पीच के एक अलग मामले में उन्हें सज़ा हो चुकी है।

हालाँकि, बाद में सेशन कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था। 2019 का लोकसभा चुनाव सपा और बसपा ने साथ मिल कर लड़ा था। आजम खान को रामपुर से प्रत्याशी बनाया गया था। रामपुर के भाजपा विधायक ने आजम खान को सज़ा सुनाए जाने की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह तो होना ही था। हमने हमेशा सत्य का साथ दिया हैं। मुझे विश्वास था कि सत्य की जीत होगी। अब इस फैसले के बाद आजम खान की जुबान पर ताला लगेगा।”

हाल ही में आजम खान को सपा प्रमुख अखिलेश यादव के साथ आम की दावत उड़ाते हुए देखा गया था। साथ में एक अन्य मुस्लिम सांसद शफीकुर्रहमान बर्क भी थे। वो भी उलूल-जलूल बयानों के कारण चर्चा में रहते हैं। ये सभी नेता मलिहाबाद में ‘मैंगो मैन’ कहे जाने वाले कलीमुल्लाह खान के घर पहुँचे थे। इस दौरान अखिलेश यादव ने कई आरोप लगाते हुए भाजपा सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कोरोना से लेकर किसानों तक के मुद्दे पर सरकार विरोधी बयान दिए।

जमीन पर गिरकर गिड़गिड़ा रहा युवक, मुस्कुराती रहीं सपा की नगरपालिका अध्यक्ष शाहीन बेगम: वीडियो वायरल, पीड़ित ने बताया क्या हुआ था

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में नगर पालिका अध्यक्ष शाहीन बेगम के पैरों के सामने सिर रखे युवक का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में युवक शाहीन बेगम से माफी माँग रहा है। वहीं, शाहीन बेगम मुस्कुराती नजर आ रही हैं। माफी माँग रहे युवक की पहचान राजाराम के रूप में हुई। वह नगर पालिका में सफाई कर्मी है। दावा किया जा रहा है कि युवक दलित वर्ग से है।

वायरल वीडियो हरदोई जिले के पिहानी का है। यहाँ समाजवादी पार्टी की टिकट से चुनाव जीती शाहीन बेगम नगर पालिका अध्यक्ष हैं। वीडियो को लेकर दावा है कि युवक हाथ जोड़े और पैरों के आगे सिर झुकाकर माफी माँगता नजर आ रहा है। वहीं शाहीन बेगम मुस्कुराती नजर आ रही है। इसी दौरान एक व्यक्ति सिर झुकाए युवक को जोर से बोलने के लिए कहता है। इस पर युवक तेज आवाज में बोलकर माफी माँगते हुए दोबारा गलती न करने की बात कह रहा है। इसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष शाहीन बेगम युवक को उठने के लिए कहती दिखाई दे रही हैं।

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो शेयर करते हुए तुषार श्रीवास्तव नामक यूजर ने लिखा है, “ये है नगर पालिका अध्यक्ष शाहीन बेगम और सामने एक गिड़गिड़ाता हुआ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी। लेकिन चैयरमैन साहिबा की मुस्कुराहट मुगलों के सजदा और पैबोस प्रथा के जरिये इस लोकतांत्रिक समाज को चिढ़ा रहा है कि हम तो भाई ऐसे ही है ऐसे ही रहेंगे। काश कि ऐसी ही मुस्कुराहट हलाला और तीन तलाक के खिलाफ दिखती।”

रवि शुक्ला नामक यूजर ने लिखा, “पिहानी नगर पालिका की चेयरमैन शाहीन बेगम पर ब्राम्हण वाद हुआ हावी। हिन्दू दलित सफाईकर्मी से अपने पैरों पर रगड़वाई नाक। समाजवादी पार्टी से चेयरमैन है शाहीन बेगम, कुछ दलित चिंतक आएँगे कि ये हमारा आपस का मामला है।”

बलराम सिंह चौहान ने लिखा, “यूपी, हरदोई के पिहानी नगर पालिका परिषद अध्यक्ष शाहीन बेगम ने किया शर्मसार। मामूली बात पर सफाई कर्मी राजाराम से पैरों में गिर कर मँगवाई माफी, शाहीन बेगम के आगे नाक रगड़ता रहा दलित सफाई कर्मी, वीडियो वायरल।”

हालाँकि वीडियो में माफी माँगते हुए दिखाई दे रहा युवक राजराम का कहना है कि न तो उससे कोई गलती हुई थी और न ही शाहीन बेगम ने उसे माफ़ी माँगने के लिए कहा है। राजराम ने एक पत्र लिखकर पिहानी कोतवाली पुलिस को बताया है कि वह शाहीन बेगम को माँ की तरह मानता है। हमेशा ही उनके सामने लेटकर उनसे आशीर्वाद लेता है। किसी ने झूठे तथ्यों के साथ वीडियो वायरल किया है। इस वीडियो के साथ किए जा रहे दावों में कोई सच्चाई नहीं है।

हरदोई पुलिस भी इस मामले में शिकायत न मिलने की बात कह रही है। पुलिस ने ट्विटर पर लिखा, “संदर्भित प्रकरण की जाँच करने पर ज्ञात हुआ कि उक्त व्यक्ति से जबरन माफी मँगवाने की कोई बात प्रकाश में नहीं आई है और न ही उक्त व्यक्ति द्वारा इस संदर्भ में कोई शिकायत/कार्यवाही की माँग की गई है।”

‘PM मोदी को फ्रांस ने दिया जो सर्वोच्च सम्मान, वो SRK और थरूर को भी मिल चुका है’: सोशल मीडिया में कॉन्ग्रेस-AAP का प्रोपेगंडा, जानें सच

फ्रांस दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहाँ के सर्वोच्च सम्मान ‘द ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया। फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा उन्हें ये सम्मान दिया गया। नरेंद्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं, जिन्हें ये सम्मान मिला है। ये सम्मान नागरिक या सैन्य सेवा में दिया जाता है। फ्रांस के सामाजिक या आर्थिक समर्थन के लिए किसी विदेशी को भी ये सम्मान दिए जाने का प्रावधान है। पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रीय दिवस (Bastille Day) पर मुख्य अतिथि रहे।

हालाँकि, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में अक्सर होता रहा है, इस सम्मान पर गर्व करने की बजाए सोशल मीडिया में प्रोपेगंडा फैलाने वाले कुछ लोगों ने दावा करना शुरू कर दिया कि ये सम्मान मिलना बड़ी बात नहीं है। इसके लिए तर्क दिए जाने लगे कि 10 लाख लोगों को ये सम्मान दिया जा चुका है। ये भी कहा जाने लगा कि ये सम्मान तो अभिनेता शाहरुख़ खान और पूर्व केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर को भी मिल चुका है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के नेशनल मीडिया पैनलिस्ट सुरेंद्र राजपूत ने भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के लिए आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए ये दावा किया।

यूपी कैडर के रिटायर्ड IPS अधिकारी विजय शंकर ने तो दावा कर दिया कि शाहरुख खान, शशि थरूर, मनीष अरोड़ा, रुचिर गुप्ता, कमल हासन, अमर्त्य सेन और जुबिन मेहता को भी ये सम्मान मिल चुका है।

आम आदमी पार्टी भला इस झूठ को फैलाने में कैसे आगे रहती। AAP के प्रवक्ता सर्वेश मिश्रा ने अमित मालवीय को ‘झूठ का सौदागर’ बताते हुए शाहरुख़ खान और शशि थरूर को ये पुरस्कार मिलने का दावा किया।

इसी तरह, देखिए कैसे कई अन्य सोशल मीडिया हैंडलों ने भी इस प्रोपेगंडा को आगे बढ़ाया:

फ्रांस में PM मोदी को जो सम्मान, वही SRK और शशि थरूर को भी मिला? जानें सच

अब आपको सच्चाई बताते हैं। असल में फ्रांस में ‘The National Order of the Legion of Honour’ सम्मान की 5 कैटेगरी है। इसे इसी तरह से समझ लीजिए जैसे भारत में पद्म पुरस्कार में पद्मश्री, पद्मभूषण और उससे ऊपर पद्मविभूषण आता है। फ्रांस के उक्त पुरस्कार की शुरुआत सन् 1802 में फ्रांस के शासक नेपोलियन बोनापार्ट ने की थी। इसे 5 हिस्सों में बाँटा गया है – Knight, Officer, Commander, Grand Officer और Grand Cross.

पहले तीन हिस्सों को जहाँ रैंक में गिना जाता है, वहीं उसके बाद से दोनों हिस्सों को टाइटल में गिना जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जो सम्मान मिला, वो ‘द लीजन ऑफ ऑनर’ का ‘ग्रैंड क्रॉस’ है, अर्थात ये फ्रांस का सर्वोच्च सम्मान है। अब बात करते हैं शाहरुख़ खान और शशि थरूर की। शाहरुख़ खान को जुलाई 2014 में ‘Knight’ कैटेगरी में ये सम्मान मिला था, जो ‘द लीजन ऑफ ऑनर’ के 5 हिस्सों में सबसे निचला वाला है। फ्रेंच में इसे ‘Chevalier‘ कहा जाता है।

बता दें कि कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर को भी अगस्त 2022 में यही सम्मान मिला था। इसके बावजूद कहा जा रहा है कि जो SRK और शशि थरूर को मिला था, वही सम्मान पीएम नरेंद्र मोदी को दिया गया। पीएम मोदी से पहले ये सम्मान सिर्फ 2 भारतीयों को मिला है – पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह (पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के दादा) को 1930 में और कपूरथला के महाराजा जगतजीत सिंह को 1926 में मिला था।

न स्कर्ट, न छोटा टॉप, न कटी-फटी जींस… द्वारकाधीश मंदिर में भी लागू हुआ ड्रेस कोड: प्रशासन ने कहा- श्रद्धालुओं की शिकायत के बाद लिया फैसला

गुजरात के द्वारका में स्थित भगवान श्री कृष्ण के मंदिर में जाने के लिए अब ड्रेसकोड लागू हो गया है। शुक्रवार को प्रशासन द्वारा लगाए गए पोस्टर को मंदिर के बाहर चिपकाकर यह सूचना दी गई। पोस्टर में बताया गया कि मंदिर परिसर में छोटे कपड़े पहनकर प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। यहाँ भारतीय संस्कृति के अनुरूप ही भक्तों को कपड़े पहनने होंगे।

पोस्टर में कहा गया, “श्री द्वारकारधीश जगत मंदिर में आने वाले सभी वैष्णवों से अनुरोध है कि वे भारतीय संस्कृति के अनुकूल कपड़े पहनें या जगत मंदिर की गरिमा बनाए रखने वाले कपड़े पहनकर ही मंदिर परिसर में प्रवेश करें।”

मंदिर के बाहर गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी में लिखे गए पोस्टर के अलावा बोर्ड पर लिखा है कि मंदिर दर्शन की जगह है, खुद की प्रदर्शनी की नहीं। मंदिर में आने वाले सभी भक्तों से निवेदन है कि वे सादे कपड़े पहनकर ही मंदिर में प्रवेश करें। छोटे कपड़े, हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी टॉप, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट, फ्रॉक और रिप्ड जींस जैसे कपड़े पहने हुए लोगों को मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ड्रेस कोड के बारे में द्वारकाधीश मंदिर के ट्रस्टी पार्थ तलसाणिया ने बताया कि यह फैसला मंदिर आने वाले कई श्रद्धालुओं की शिकायत मंदिर प्रशासन ने लिया। उन्होंने बताया कि मंदिर में छोटे कपड़े पहनने वालों को लेकर कई लोगों ने कहा था कि ऐसे कपड़े पहनने से दूसरे भक्तों का ध्यान भटकता है। इसी के चलते देश के की मंदिरों में अब ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है।

गौरतलब है कि हाल में मथुरा के राधा रानी मंदिर में भी ड्रेस कोड लागू किया गया था। उससे पहले उत्तराखंड के 3 मंदिरों में ड्रेस कोड लागू किया था। इसके अलावा राजस्थान में, जम्मू कश्मीर में, यूपी, मध्य प्रदेश समेत कई राज्य के मंदिरों में ऐसे नियम को लागू किया गया है। मंदिरों में तो स्पष्ट लिखा गया कि शॉर्ट, मिनिस्कर्ट, कैपरी पहनकर मंदिर में बिलकुल नहीं आ सकते।

उमेश पाल की हत्या में शामिल थे अतीक अहमद के सारे बेटे, जो नाबालिग थे उन्हें सौंपा था रेकी का काम: यूपी पुलिस की चार्जशीट में खुलासा

विधायक राजू पाल हत्याकांड के गवाह रहे उमेश पाल की हत्या के मामले में प्रयागराज पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में कहा गया है कि उमेश पाल की हत्या में मृतक माफिया अतीक अहमद के दो नाबालिग सहित सभी पाँच बेटे शामिल थे। असद अहमद, अली अहमद, मोहम्मद उमर और दोनों नाबालिग बेटों को आरोपित बनाया गया है।

उत्तर पुलिस द्वारा दाखिल दूसरी चार्जशीट में पुलिस ने कुल 8 लोगों को आरोपित बनाया है। इनमें अतीक के दो नाबालिग बेटों के अलावा, अतीक के नौकर राकेश उर्फ लाला, ड्राइवर कैश अहमद के साथ मोहम्मद अरशद कटरा, नियाज अहमद, इकबाल अहमद और नौकर शाहरुख का नाम शामिल है।

प्रयागराज के एसटी-एससी कोर्ट में दाखिल की गई इस चार्जशीट में पुलिस ने अतीक के बहनोई डॉक्टर अखलाक अहमद और उसके वकील खान सौलत हनीफ का नाम भी शामिल किया है। इन दोनों ने हत्या के आरोपितों को अपने घर में पनाह दी थी और उन्हें भगाने में आर्थिक सहित कई मदद दी थी।

चार्जशीट में वकील सौलत ने अतीक अहमद की अवैध कारोबार एवं संपत्तियों के बारे में जो बताया है, उसका भी जिक्र किया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि सौलत हनीफ ने अपने आईफोन से उमेश पाल के साथ-साथ उसकी पत्नी जया पाल की तस्वीर भी असद को भेजी थी।

चार्जशीट में पुलिस ने 11 फरवरी को बरेली जेल में अतीक अहमद के भाई अशरफ के साथ शूटरों की हुई मुलाकात का सीसीटीवी फुटेज लगाया है। इसके अलावा, 7 अन्य फोटो भी दिया गया था। 13 और 15 फरवरी को नैनी जेल में अली से सदाकत, मोहम्मद गुलाम और गुड्डू मुस्लिम की मुलाकात की चार तस्वीरें भी चार्जशीट में सबूत के तौर पर लगाई गई हैं।

इस हत्याकांड में करीब 11 लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस की जाँच के बाद चार्जशीट में अतीक के दो नाबालिग बेटों के नामों का भी जिक्र किया गया है। बता दें कि 24 फरवरी को उमेश पाल की प्रयागराज में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद अतीक के दोनों नाबालिग बेटों को पुलिस ने उठाया था। दोनों को रिमांड होम में रखा गया है।

इन दोनों नाबालिग लड़कों ने उमेश पाल के घर की रेकी की थी। अतीक अहमद के दो अन्य बेटे उमर और अली फिलहाल जेल में बंद हैं। वहीं, एक बेटा असद अहमद पुलिस एनकाउंटर में मारा जा चुका है। असद हत्या को अंजाम देने के बाद फरार हो गया था और पुलिस लगातार उसकी खोजबीन कर रही थी।

आरोपितों में छह मारे जा चुके हैं। इनमें से अतीक, उसका भाई अशरफ, बेटा असद सहित छह आरोपित मारे जा चुके हैं। वहीं, अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन, अशरफ की बीवी और गुड्डू मुस्लिम अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस उन्हें तलाश कर रही है।

उमेश पाल हत्या मामले में उनकी पत्नी जया पाल ने 25 फरवरी को प्रयागराज के धूमनगंज थाने में FIR दर्ज कराई थी। इसमें अतीक अहमद, उसके भाई अशरफ, पत्नी शाइस्ता, बेटों, गुड्डू मुस्लिम, साबिर, अरमान, मोहम्मद गुलाम व अन्य को नामजद किया था।

इस एफआईआर के बाद IPC की धारा 147, 148, 149, 302, 307, 305, 34, 120बी के अलावा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3, क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धारा 7, एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

‘आरोपित को है चुप रहने का अधिकार, बोलने के लिए नहीं बना सकते दबाव’: सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी, कहा – चुप रहने का मतलब जाँच में असहयोग नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक आरोपित को चुप रहने का अधिकार होता है और जाँचकर्ता उस पर दबाव नहीं बना सकते कि वो बोले या फिर अपने अपराध को कबूल करे। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (13 जुलाई, 2023) को एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि संविधान हर एक व्यक्ति को अधिकार देता है कि वो खुद को अपराधी साबित किए जाने का विरोध करे। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने इस मामले की सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया।

दोनों जजों ने कहा कि जाँच में सहयोग करने का ये अर्थ नहीं होता है कि अपराध को कबूल कर लेना। साथ ही सवाल दागा कि भला आरोपित चुप क्यों नहीं रह सकता? उन्होंने कहा कि जाँच एजेंसियाँ सिर्फ इसीलिए किसी आरोपित के विरुद्ध मामले नहीं चला सकती, क्योंकि वो जाँच के दौरान चुप रहता है। जजों ने सवाल किया कि इस बर्ताव को असहयोग कैसे कहा जा सकता है? ये अपराधी मामला उत्तर प्रदेश का है, जिस पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान अनुच्छेद 20(3) का जिक्र किया। बता दें कि इसके तहत एक आरोपित को अधिकार मिलता है कि अगर वो चाहे तो खुद पर चल रहे आपराधिक मामले में खुद गवाह नहीं बन सकता और जाँच के दौरान चुप्पी साधे रख सकता है और बचाव में भी कुछ नहीं कह सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मूलभूत कानून बताया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये अभियोजन पक्ष का दायित्व है कि वो शक के आधार से आगे निकल कर आरोपित को दोषी साबित करे।

सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि दोष साबित होने तक आरोपित निर्दोष होता है। ये मामले दहेज़ का है। पति-पत्नी दोनों डॉक्टर हैं। पत्नी ने अपने पति पर दहेज़ उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। साथ ही आरोप लगाया था कि उसके साथ मारपीट की गई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फरवरी में गिरफ़्तारी से पहले दायर जमानत याचिका ख़ारिज कर दी थी। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने मई में उसे गिरफ़्तारी से राहत प्रदान की। महिला के वकील ने आरोप लगाया था कि आरोपित जाँच में सहयोग नहीं कर रहा है।