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भगवा हुई ‘वन्दे भारत’ एक्सप्रेस ट्रेन तो भड़का जुबैर एन्ड गिरोह, रेल मंत्री बोले – राष्ट्रध्वज से प्रेरित है नया रंग, नई डिजाइन के साथ सुविधाएँ भी बढ़ीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की महत्वाकांक्षी रेल परियोजना वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन (Vande Bharat Express Train) का रंग बदल गया है। अब यह केसरिया रंग में नजर आएगी। इसको लेकर AltNews के मोहम्मद जुबैर जैसे लोग कटाक्ष कर रहे हैं।

रेलवे अधिकारियों ने घोषणा की है कि वंदे भारत एक्सप्रेस की 28वीं रेक को केसरिया रंग में रंगा जाएगा। केसरिया रंग वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन अभी शुरू नहीं हुई है। वे चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) में है। वहाँ पर सेमी-हाईस्पीड ट्रेनों का निर्माण किया जाता है।

वंदे भारत एक्सप्रेस की कुल 25 रेक अपने निर्धारित मार्गों पर परिचालन कर रहे हैं और दो रेक आरक्षित रखे हुए हैं। रंग बदलने को लेकर रेलवे अधिकारियों का कहना है, “इस 28वें रेक का रंग परीक्षण के आधार पर बदला जा रहा है।”

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार (8 जुलाई 2023) को चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री का दौरा किया। यहाँ पर उन्होंने सुविधा का निरीक्षण, दक्षिणी रेलवे में सुरक्षा उपायों की समीक्षा और वंदे भारत एक्सप्रेस में सुधार का आकलन किया।

निरीक्षण के बाद केंद्रीय मंत्री ने खुलासा किया कि स्वदेशी ट्रेन की 28वीं रेक का नया रंग भारतीय तिरंगे से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि वंदे भारत ट्रेनों में 25 सुधार लागू किए गए हैं। समीक्षा के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ‘एंटी-क्लाइंबर्स’ या ‘एंटी-क्लाइंबिंग डिवाइस’ नामक एक नई सुरक्षा सुविधा पर भी चर्चा की। इसे आगे सभी ट्रेनों में लगाया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा, “यह मेक इन इंडिया की एक अवधारणा है, (जिसका अर्थ है) भारत में हमारे अपने इंजीनियरों और तकनीशियनों द्वारा डिजाइन किया गया है। इसलिए वंदे भारत के संचालन के दौरान एसी, शौचालय आदि के संबंध में हमें फील्ड इकाइयों से जो भी फीडबैक मिल रहा है, उसके आधार पर डिज़ाइन में बदलाव किया जा रहा है।”

वंदे भारत ट्रेन की अब वाली ट्रेनों का रंग केसरिया करने को लेकर सोशल मीडिया पर लोग खुश हैं। विवेक सिंह नाम के यूजर ने लिखा, “शानदार! वंदे भारत ट्रेनों पर नई भगवा और ग्रे पेंट योजना का साइड लुक। यह पुराने रंग से भी ज्यादा सुंदर लग रहा है। रेलवे ने कहा- पुराना पेंट जिसमें ज्यादातर हिस्सा सफेद था, उसका रखरखाव करना मुश्किल है और उन्हें रोजाना साफ करना पड़ता था।”

वहीं, AltNews के मोहम्मद जुबैर जैसे लोग भगवा रंग देखकर ही भड़क गए हैं। इसको लेकर वे तरह-तरह का कटाक्ष कर रहे हैं। जुबैर ने एक ट्वीट किया, “इस वंदे भारत में हरा रंग ‘अच्छे दिन’ की तरह है।”

आतिशी के इलाके में 4 महीने पहले ₹16 करोड़ में बना था स्कूल, पहली ही बारिश में ढह गई दीवार: AAP के मॉडल की खुली पोल, कई वाहन मलबे में दबे

दिल्ली की शिक्षा मंत्री आतिशी मार्लेना के विधानसभा क्षेत्र कालकाजी में स्कूल की दीवार गिरने का मामला सामने आया। करीब 16 करोड़ रुपए की लागत से बनी स्कूल पहली ही बारिश नहीं झेल पाई। गनीमत रही कि इस दुर्घटना के समय स्कूल में बच्चे नही थे। अन्यथा वे बड़े हादसे का शिकार हो जाते। ऐसे में BJP स्कूल गिरने की घटना को भ्रष्टाचार का नतीजा बताते हुए केजरीवाल सरकार पर हमलावर है।

घटना दिल्ली के कालकाजी विधानसभा क्षेत्र के श्रीनिवासपुरी इलाके में स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालय झरिया मढ़िया गढ़ी की है। कहा जा रहा है कि स्कूल 4 महीने पहले ही बनकर तैयार हुआ था। इसके बाद भी यह साल भर भी नहीं चल सका। स्कूल की दीवार गिरने से वहाँ खड़े कई वाहन मलबे में दब गए। इसके अलावा बच्चों को घर से स्कूल लाने-ले जाने वाले रिक्शे के दबने की बात भी कही जा रही है।

इस घटना के बाद दिल्ली BJP के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मौके पर पहुँचकर हालात का जायजा लिया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा है, “पुराने बर्तन में कलई कैसे करते हैं यह आतिशी ने दिखा दिया है। स्कूल की पुरानी दीवार पर टाइल्स लगाकर यह दिखाया गया है कि दिल्ली का शिक्षा विभाग स्कूल बना रहा है। अरविंद केजरीवाल सरकार बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ कर रही है। यह भ्रष्टाचार का जीता-जागता नमूना है।”

उन्होंने आगे कहा है, “कल तेज बारिश आई। इस बारिश में पूरी दिल्ली तालाब बनी हुई थी। अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार का यह फेल्योर है। यहाँ अगर स्कूल खुला होता तो बच्चों के साथ क्या होता यह सोचकर रोंगटे खड़े होते हैं। स्कूल गिरने से जो वाहन दब गए हैं इसके लिए कौन जिम्मेदार है। आतिशी मार्लेना PWD और शिक्षा मंत्री हैं। यह उनका ही विधानसभा क्षेत्र है। इसके बाद भी वह यहाँ देखने नहीं आईं। ऐसी बेशर्म मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।”

वहीं, बीजेपी नेता और दिल्ली नगर निगम के पूर्व अध्यक्ष राजपाल सिंह का कहना है, “यदि स्कूल की छुट्टी के अतिरिक्त किसी अन्य दिन यह घटना हुई होती तो कितने बच्चे इसका शिकार हो जाते। इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। पुरानी दीवारों के ऊपर सिर्फ टाइल्स लगाने का काम हुआ है। स्कूल की दीवार गिरने से केजरीवाल मॉडल की पोल खुल गई है। इस घटना में यहाँ खड़े लोगों के वाहन को काफी नुकसान हुआ है।” इसके अलावा उन्होंने इस मामले में हुए भ्रष्टाचार की जाँच केंद्रीय जाँच एजेंसियों से कराने की माँग की।

इस घटना पर BJP सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने ट्वीट कर कहा है, “एक बात तो अब पूरी तरह से साफ हो गई है कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार भ्रष्टाचार में बुरी तरह लिप्त है। स्कूल की पुरानी दीवार पर लीपा-पोती ही कर करोड़ों रूपये इसके निर्माण में गबन कर लिया गया, शिक्षामंत्री आतिशी के क्षेत्र का यह हाल है तो बाकी जगह क्या होगा..?”

शौचालय में ब्लास्ट के बाद मोहम्मद आरिफ परिवार संग फरार, 15 किलोमीटर दूर तक सुनी गई आवाज: नेपाल से लगती है सीमा

भारत-नेपाल सीमा पर पड़ने वाले उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में ब्लास्ट होने की खबर है। शुक्रवार (7 जुलाई, 2023) को हुआ ये धमाका इतना तेज था कि 15 किलोमीटर दूर तक इसकी आवाज सुनाई पड़ी। घटनास्थल के आस-पास लोगों की खिड़कियों और दरवाजे के शीशे चटक गए। जिस जगह यह धमाका हुआ वह मोहम्मद आरिफ नाम के व्यक्ति के घर का शौचालय है जिसे काफी समय से प्रयोग नहीं किया जा रहा था। पुलिस की टीमें घटनास्थल पर पहुँच कर छानबीन में जुट गईं हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना बलरामपुर जिले के हर्रैया सतघरवा इलाके की है। यहाँ के गुगौली कला स्थित मजरे नई बाजार के निवासियों को शुक्रवार की रात अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई पड़ी। धमाका इतना तेज था कि 15 किलोमीटर दूर मौजूद लोगों को इसका आभास हुआ। जब लोग घटनास्थल पर पहुँचे तब उन्होंने पाया कि ब्लास्ट गाँव के ही मोहम्मद आरिफ उर्फ़ गुड्डू धनिया के लम्बे समय से बंद पड़े शौचालय में हुआ था। धमाके के चलते शौचालय दूरी तरह से ध्वस्त हो गया था। आस-पास के घरों में भी दरारें आ गईं थीं।

ब्लास्ट के बाद मकान मालिक आरिफ परिवार सहित घर छोड़ कर कहीं फरार हो गया है। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और जाँच शुरू कर दी। विस्फोटक की जाँच के लिए सशस्त्र सीमा बल (SSB) की टीम भी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना बम ब्लास्ट की है जिसे आरिफ ने छिपा कर रखा था।

बलरामपुर पुलिस अधीक्षक IPS केशव कुमार के मुताबिक विस्फोट शौचालय के सेप्टिक टैंक में हुआ। घटनास्थल पर डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम को भी भेजा गया है। डॉग स्क्वायड किसी विस्फोटक को नहीं तलाश पाया जबकि फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कुछ सैम्पल जमा किए हैं। इन सैम्पल्स की जाँच करवाई जा रही है। घटना में किसी की जान नहीं गई और न ही कोई घायल हुआ है। पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।

‘मुस्लिम को पीटा, पैर चाटने को मजबूर किया’: एक बार फिर झूठ फैलाता पकड़ाया मोहम्मद जुबैर, जिसे पीड़ित बता रहा उसने भी की थी मारपीट

प्रोपगैंडा वेबसाइट ALTNews के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर (Mohammad Zubair) झूठ फैलाकर लोगों को भड़काने के लिए कुख्यात है। नूपुर शर्मा मामले में किस तरह मामले को तूल दिया और उसके कारण कन्हैया लाल जैसे लोगों की गला काट दी गई, इसे पूरी दुनिया में देखी। अब एक आपराधिक मामले को वह सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।

पुलिस द्वारा मामले में बयान देने के बावजूद अपने सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर झूठ फैला रहा है और दो समुदायों के बीच आग लगाकर एक बार फिर से अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है। इसको लेकर सोशल मीडिया जुबैर की जमकर आलोचना हो रही है और पुलिस से हस्तक्षेप करने की माँग की जा रही है।

दरअसल, मोहम्मद जुबैर ने शनिवार (8 जुलाई 2023) को एक वीडियो ट्वीट किया। वीडियो को ट्वीट करते हुए जुबैर ने लिखा, “मध्य प्रदेश के ग्वालियर का वीडियो। इसमें गोलू गुर्जर और उसके दोस्तों को मोहसिन को चप्पलों से पीटते हुए और गाली देते हुए पैरों को चाटने के लिए विवश करते हुए देखा जा सकता है।”

इस वीडियो को मोहम्मद जुबैर ने 8 जुलाई की सुबह 11:42 बजे पोस्ट किया था। इस वीडियो को 13 लाख लोगों ने देखा और 16.5 हजार लोगों ने लाइक किया। इसके बाद ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक ने 2:25 पर प्रतिक्रिया दी। इस प्रतिक्रिया को मोहम्मद जुबैर ने 3:56 बजे शेयर किया।

ग्वालियर एसपी ने पुलिस का जो बयान शेयर किया, उसमें लिखा है कि वायरल वीडियो का पुलिस ने संज्ञान लिया, जिसमें 4 चार लोग 2 लोगों के साथ कार में मारपीट कर रहे हैं। पुलिस ने चारों युवकों के खिलाफ अपहरण और मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस ने अपने बयान में कहा है कि इनमें से दो आरोपितों को पकड़ लिया गया है और बाकी दो आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस टीम को लगाया गया है। जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें मुख्य आरोपित भी शामिल है।

इसके बाद पुलिस ने आगे कहा, “वायरल वीडियो में देख रहे पीड़ित व उसके साथियों द्वारा पूर्व में दिनांक 21 मई 2023 को थाना डबरा क्षेत्र में आरोपितों के साथ मारपीट की गई थी, जिसमें थाना डबरा में अपराध पंजीबद्ध कर चालानी कार्यवाही की गई है।”

ग्वालियर एसपी के ट्वीट को शेयर करते हुए मोहम्मद जुबैर ने पुलिस के बयान को तोड़मरोड़ कर परोस दिया और एक बार फिर झूठ फैला दिया। मोहम्मद जुबैर ने लिखा, “अपडेट: 4 में 2 को गिरफ्तार कर लिया गया। वायरल वीडियो में दिख रहे पीड़ित (यानी मोहसिन) को आरोपितों ने पहले भी (21 जुलाई 2023) प्रताड़ित किया था।”

मोहम्मद जुबैर ने पुलिस के बयान से उलट, पूरी तरह से झूठ फैलाया है। पुलिस ने कहा कि वायरल वीडियो में देख रहे पीड़ित व उसके साथियों (यानी मोहसिन और उसके साथियों) ने 21 मई 2023 को थाना डबरा क्षेत्र में आरोपितों (गोलू गुर्जर और उसके साथी) से मारपीट की थी।

पुलिस के बयान से साफ है कि यह मामला पूरी तरह मारपीट का है। पहले मोहसिन ने अपने साथियों के साथ मिलकर गोलू गुर्जर और उसके साथियों को मारा और बाद में गोलू गुर्जर को मौका मिला तो उसने मोहसिन के साथ मारपीट की। मारपीट की साधारण घटना को जुबैर ने सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की और वह भी झूठ बोलकर।

हालाँकि, ये ट्वीट अब जुबैर के हैंडल पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन उसके द्वारा फैलाए गए झूठ को 51 हजार से अधिक लोग देख चुके थे और 170 लोग रिट्वीट भी कर चुके थे। इस मामले को विजय पटेल नाम के पत्रकार ने अपने ट्विटर हैंडल पर भी उठाया है।

विजय पटेल ने लिखा, “मोहम्मद जुबैर ने कितनी चतुराई से प्रोपगैंडा फैलाने में जुटा है। जब पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामला व्यक्तिगत दुश्मनी का था और पीड़ित मोहसिन ने 21 मई को आरोपित गोलू की पिटाई की थी तो बेशर्म जुबैर ने अपना सांप्रदायिक ट्वीट हटाने के बजाय सिर्फ एक अपडेट पोस्ट किया। उसके पहले के ट्वीट के बाद कई लोग अभी भी उस वीडियो को सांप्रदायिक एंगल देकर शेयर कर रहे हैं।”

TMC सरकार से मिला हुआ है बंगाल का चुनाव आयोग? BSF का खुलासा – बार-बार माँगने के बावजूद नहीं दी बूथों की लिस्ट, मौजूद थी केंद्रीय बलों की 59000 टुकड़ियाँ

सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग पर पंचायत चुनाव 2023 के दौरान संवेदनशील पोलिंग स्टेशनों की जानकारी न देने का आरोप लगाया है। BSF के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय बलों द्वारा संवेदनशील पोलिंग स्टेशनों की जानकारी बार-बार और पत्र तक लिख कर माँगी गई लेकिन उस पर कोई जवाब नहीं आया। उन्होंने बताया कि BSF की तैनाती भी स्थानीय प्रशासन के आदेश के मुताबिक हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रविवार (9 जुलाई 2023) को सीमा सुरक्षा बल के DIG सुरजीत सिंह गुलेरिया ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि BSF ने बार-बार उन बूथों की जानकारी माँगी जो संवेदनशील हैं लेकिन बावजूद इसके राज्य चुनाव आयोग की तरफ से इस बावत आधी-अधुरी लिस्ट आई। गुलेरिया ने बताया कि केंद्रीय बलों को सिर्फ संवेनशील बूथों की सँख्या बताई गई। उस लिस्ट में उन बूथों की जगह या नाम आदि का कोई जिक्र नहीं था।

बीएसएफ के डीआइजी एसएस गुलेरिया ने आगे बताया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव ड्यूटी के लिए 25 राज्यों से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) और राज्य सशस्त्र पुलिस की 59,000 टुकड़ियां पहुंची थीं लेकिन इस बल का प्रयाग संवेदनशील मतदान केंद्रों पर ठीक से नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बूथों पर केंद्रीय व अन्य राज्यों के पुलिस बल की तैनाती स्थानीय प्रशासन के आदेश पर की गई है। DIG ने यह भी बताया कि राज्य चुनाव आयोग ने BSF को कुल संवेदनशील बूथों की सँख्या 4834 बताई थी लेकिन वास्तविक तादाद इस से कहीं अधिक है।

BSF के अनुसार पश्चिम बंगाल राज्य में 3317 ग्राम पंचायतों, 341 पंचायत समितियों और 20 जिला परिषदों के लिए चुनाव कराने के लिए कुल 61,636 मतदान केंद्र बने हैं। BSF ने शंकरपुर खारग्राम नाम की एक जगह का जिक्र अपने ट्वीट में किया है जहाँ क्रूड बम फेंक कर बूथ लूटने का प्रयास जवानों ने विफल कर दिया था। BSF के मुताबिक हमला एक भीड़ ने किया था।

बताते चलें कि शनिवार को पश्चिम बंगाल के हुए पंचायत चुनाव में पूरे प्रदेश में हिंसा हुई थी। इस हिंसा में 13 लोगों की मौत हो गई थी जबकि कई अन्य घायल हुए थे। मुर्शिदाबाद, कूच बिहार, मालदा, दक्षिण 24 परगना, उत्तरी दिनाजपुर और नादिया जैसे कई जिलों से बूथ कैप्चरिंग और मतदानकर्मियों पर हमलों की भी शिकायतें आई थीं। चुनाव खत्म होने के बाद मतपेटियों को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बने 339 स्ट्रांग रूम में सुरक्षित रख दिया गया था। इन स्ट्रांग रूम की रखवाली केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) को मिली है।

‘OTT पर गे और लेस्बियन कंटेंट की भरमार, चला गया स्वच्छ मनोरंजन का जमाना’: अमीषा पटेल के बयान पर भड़कीं उर्फी जावेद, कहा – 25 साल से काम नहीं मिल रहा तो…

OTT और बॉलीवुड कंटेंट को लेकर अभिनेत्री अमीषा पटेल और मॉडल उर्फी जावेद के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है। ‘ग़दर 2’ की अभिनेत्री ने कहा था कि OTT प्लेटफॉर्म्स गे और लेस्बियन कंटेंट्स से भरे पड़े हैं। अब उर्फी जावेद ने कहा है कि वो अमीषा पटेल के इस बयान से क्षुब्ध हैं। उर्फी जावेद ने शनिवार (8 जुलाई, 2023) को इंस्टाग्राम स्टोरीज के माध्यम से कहा कि पूछा कि ये Gayism और Lesbianism क्या होता है? उन्होंने पूछा कि क्या अपने बच्चों को इससे दूर रखना है?

उर्फी जावेद ने कहा कि जब अमीषा पटेल ने ‘कहो न प्यार है’ फिल्म किया, तो क्या उनका मतलब सिर्फ ‘स्ट्रेट’ लोगों से था? उर्फी जावेद ने लिखा कि जब सार्वजनिक हस्तियाँ बिना खुद को शिक्षित किए संवेदनशील मुद्दों पर इस तरह के बयान देती हैं तो उन्हें खासी परेशानी होती है। उर्फी जावेद ने व्यक्तिगत निशाना साधते हुए कहा कि अमीषा पटेल को 25 वर्षों से काम नहीं मिल रहा है, जिस कारण वो एक कड़वी व्यक्ति बन गई हैं। उर्फी जावेद ने अमीषा पटेल का वीडियो शेयर करते हुए ये टिप्पणी की।

बता दें कि 47 वर्षीय अमीषा पटेल ने कहा था कि लोग ‘क्लीन एंटरटेनमेंट’ की तलाश में हैं। उनका कहना था कि ऐसे कंटेंट डिजिटल स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही उन्होंने कहा था कि OTT के सभी बड़े प्लेटफॉर्म्स पर जो कंटेंट हैं उनमें समलैंगिक दृश्यों की भरमार है। उन्होंने कहा था कि अब वो जमाना चला गया, जब दादा-दादी अपने पोते-पोतियों के साथ बैठ कर सिनेमा देख सकते थे। OTT के दृश्यों के दौरान बच्चों को दूर रखना पड़ता है।

अमीषा पटेल ने कहा कि आजकल के कंटेंट्स ऐसे हैं कि आपको या तो अपने बच्चों की आँखों को कवर करना पड़ता है या फिर टीवी में लॉक लगाना पड़ता है। आजकल ऐसे कंटेंट आ रहे हैं कि आप नहीं चाहेंगे कि आपके बच्चे इसे देखें। हाल ही में अमीषा पटेल ने ‘ग़दर 2’ के निर्देशक अनिल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनकी कंपनी ने अभिनेता-अभिनेत्रियों का ख्याल नहीं रखा, Zee के हस्तक्षेप के बाद सबको पैसे मिले। हालाँकि, अनिल शर्मा ने अब मनमुटाव से इनकार किया है।

कुरान जलाने की घटना से स्वीडन पर भड़की यमन सरकार, स्वीडिश आयात पर प्रतिबंध लगाया: हूती विद्रोहियों ने कहा- बाकी इस्लामी देश भी ऐसा करें

यूरोपीय देश स्वीडन में इराकी मूल के एक व्यक्ति द्वारा मस्जिद के सामने कुरान जलाने का दुनिया भर में विरोध हो रहा है। अब यमन के हूती विद्रोहियों ने स्वीडिश सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। हूती विद्रोहियों का यमन के उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।

व्यापार मंत्री के हवाले से हूती द्वारा संचालित अल मसीरा टीवी ने कहा, “यमन पहला इस्लामी देश है, जिसने मुस्लिमों के सबसे पवित्र किताब के अपमान करने के बाद स्वीडिश वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया है।”

मंत्री ने स्वीडिश आयात को सीमित बताया और कहा कि इस निर्णय का प्रतीकात्मक मूल्य है। उन्होंने कहा कि जब हूती इस तरह का कदम उठा सकता है तो इस्लामी देश भी उठा सकते हैं। उन्होंने अन्य इस्लामी देशों से ऐसा ही कदम उठाने का आह्वान किया।

हूती विद्रोहियों ने साल 2014 के अंत में सऊदी अरब समर्थित सरकार को सना से हटा दिया था। हुतियों का उत्तरी यमन में नियंत्रण है। हालाँकि, सऊदी अरब के तत्वाधान में गठित राजनीतिक नेतृत्व परिषद (Political Leadership Council) को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है। इसे पिछले साल गठित किया गया था।

बताते चलें कि इस साल बकरीद के दिन स्वीडन शहर के स्टॉकहोम में स्थित सबसे बड़ी मस्जिद के सामने 37 वर्षीय सलवान मोमिका ने कुरान जलाया था। मोमिका इराक के रहने वाले हैं और कुछ साल पहले वे इराक के स्वीडन चले आए थे।

मोमिका ने कुरान को जलाने से पहले उसे पैरों से कुचला, पन्ने फाड़े और फिर आग के हवाले कर दिया था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। मोमिका ने इस प्रदर्शन को जल्दी ही दोहराने की बात कही है। उन्होंने कहा, “10 दिनों के भीतर मैं स्टॉकहोम में इराकी दूतावास के सामने इराकी झंडा और कुरान जलाऊँगा।”

मोमिका ने कुरान जलाकर प्रदर्शन की इजाजत स्वीडिश पुलिस से माँगी थी, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और आखिरकार इसकी इजाजत मिली। उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत इसकी इजाजत दी गई थी।

इस घटना को लेकर इस्लामी देशों ने स्वीडन के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई इस्लामी मुल्कों ने स्वीडन के राजदूत को तलब कर आपत्ति जाहिर की। वहीं, अंतरराष्ट्रीय इस्लामी संगठन (OIC) ने बैठक का आयोजन किया है।

वहीं, स्वीडन में स्टॉकहोम की मस्जिद के सामने बकरीद पर कुरान जलाने के एक सप्ताह बाद फिर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर प्रदर्शन की अनुमति माँगी गई है। कथित फ्री-स्पीच कार्यकर्ताओं ने यहूदियों की धार्मिक पुस्तक टोरा और ईसाइयों की धार्मिक पुस्तक बाइबिल को को जलाने की अनुमति के लिए पुलिस के समक्ष तीन आवेदन दिए हैं।

‘प्रधानमंत्री को जूते मारना चाहिए’… स्कूल प्ले में ये शब्द कहना ‘देशद्रोह’ नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट की टिप्पणी; अलाउद्दीन, अब्दुल, बिलाल और महताब को मिली राहत

कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार (5 जुलाई 2023) को जारी एक आदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में दर्ज देशद्रोह के केस में एक स्कूल के मैनेजमेंट को बड़ी राहत दी है। हाईकोर्ट ने माना कि प्रधानमंत्री पर की गई टिप्पणी अशोभनीय है, लेकिन ये देशद्रोह नहीं है। इस आदेश के चलते अलाउद्दीन सहित 3 अन्य लोगों पर दर्ज देशद्रोह की FIR रद्द कर दी गई है। इन सभी पर जनवरी 2020 में एक नाटक के मंचन के दौरान प्रधानमंत्री को जूते से मारने जैसी टिप्पणी के आरोप में देशद्रोह का केस दर्ज हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह आदेश जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की कोर्ट में सुनवाई के दौरान आया। बीदर के शाहीन स्कूल मैनेजमेंट के अलाउद्दीन, अब्दुल खालिक, मोहम्मद बिलाल इनामदार और मोहम्मद महताब ने अपने खिलाफ न्यू टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR को रद्द करने का आवेदन किया था। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हेमंत चंदनगौदर ने कहा कि स्कूल में नाटक के मंचन के दौरान बोले गए शब्द कि ‘प्रधानमंत्री को जूते से मारा जाना चाहिए’ न केवल गैर जिम्मेदाराना बल्कि अपमानजनक भी था लेकिन इसे देशद्रोह नहीं माना जा सकता है।

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में आगे कहा कि IPC में देशद्रोह की धारा 124 तब ही लागू हो सकती है जब बोले गए शब्दों से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका हुई हो। कोर्ट में मुताबिक आरोपितों द्वारा बोले गए शब्दों से इस तरह के किसी इरादे का होना प्रमाणित नहीं हो पाया है। अदालत ने आगे कहा कि देश के नागरिकों को सरकार और उसके पदाधिकारियों द्वारा लिए गए फैसलों की आलोचना या टिप्पणी का अधिकार है बशर्ते उस से लॉ एन्ड आर्डर बिगड़ने जैसी स्थिति न बने।

क्या था मामला

गौरतलब है कि कर्नाटक के जिला बीदर स्थित शाहीन स्कूल में साल 2020 में एक नाटक का आयोजन करवाया गया था जिसमें पात्र के तौर पर क्लास 4 के बच्चों को रखा गया था। इस नाटक को CAA और NRC के विरोध पर आधारित रखा गया था। मंचन के दौरान प्रधानमंत्री को जूते मारने जैसे शब्द बोले गए थे। इस नाटक को साम्प्रदायिक सोच से प्रेरित बताते हुए नीलेश नाम के व्यक्ति ने बीदर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। इस शिकायत पर पुलिस ने IPC की धारा 504, 505 (2), 124 (ए) और 153 (ए) के तहत कार्रवाई की थी।

हालाँकि शाहीन ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन ने खुद पर लगे आरोपों से इंकार किया था। स्कूल मैनेजमेंट ने पुलिस पर अपने साथ देशद्रोहियों जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया था। साथ ही हाईकोर्ट में इस FIR को रद्द करने की याचिका दाखिल की गई थी।

आतंकी निज्जर की हत्या के विरोध में खालिस्तानियों का Kill India मार्च: मेलबर्न में की पत्रकार से बदसलूकी, लंदन में नहीं मिला जनसमर्थन, कनाडा में करारा जवाब

कनाडा में आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद खालिस्तान समर्थकों की तरफ से 8 जुलाई 2023 को अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई देशों में ‘किल भारत’ (Kill India) रैली आयोजित की गई। हालाँकि, ये मार्च और विरोध प्रदर्शन पूरी तरह विफल हो गए। इनमें भीड़ नहीं जुट पाई और प्रदर्शन पूरी तरह फ्लॉप हो गया।

निज्जर की हत्या के बाद खालिस्तान समर्थकों ने ऑस्ट्रेलिया में भारत के उच्चायुक्त मनप्रीत वोहरा और मेलबर्न में भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. सुशील कुमार को धमकी दी थी। इसके बाद खालिस्तान समर्थक 8 जुलाई 2023 को मेलबर्न में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर भारी संख्या में एकत्र हुए।

सेंट किल्डा रोड पर आयोजित विरोध प्रदर्शन में खालिस्तान समर्थकों ने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की की। इतना ही नहीं, उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और मौखिक रूप से धमकी भी दी गई। आखिर पुलिस को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा।

Kill India के पोस्टर में खालिस्तानियों ने ऑस्ट्रेलिया में पदस्थापित भारत के शीर्ष राजनयिकों को हरदीप सिंह निज्जर को हत्यारा बताया था और उन्हें पोस्टर पर दिखाया था। ऐसे पोस्टर पर बड़े पैमाने पर सर्कुलेट किया गया था और जगह-जगह लगवाए गए थे। पोस्टर में एके-47 राइफल के साथ ‘किल इंडिया’ लिखा हुआ है।

भारत ने प्रसारित हो रहे पोस्टरों में अपने राजनयिकों को मिल रही धमकियों पर चिंता जताई है। ऑस्ट्रेलिया टुडे के मुताबिक, इस मामले में मेलबर्न में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने विदेश मामलों और व्यापार विभाग (डीएफएटी) और ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस (एएफपी) के अधिकारियों के साथ दो अलग-अलग ब्रीफिंग की है।

निज्जर की 18 जून 2023 को ब्रिटिश कोलंबिया के सरे स्थित गुरुद्वारे की पार्किंग में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की सूची में खालिस्तानी आतंकवादी के रूप में अंकित था। इसको लेकर दुनिया भर में मार्च निकाला गया था। इसको देखते हुए अमेरिका में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए।

लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर खालिस्तान समर्थकों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में सिर्फ 30-40 लोगों ने हिस्सा लिया। रैली में भारतीय उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी और बर्मिंघम में भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. शशांक विक्रम की तस्वीरों के साथ हिंसा भड़काने वाले विवादास्पद पोस्टरों का इस्तेमाल किया गया था।

वहीं, कनाडा के वैंकूवर में भी पिछले महीने एक खालिस्तान समर्थक नेता की हत्या कर दी गई थी। इसके विरोध में दर्जनों लोगों ने टोरंटो में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराया।

कनाडा के ब्रैंपटन शहर में खालिस्तान समर्थकों ने भारत माता मंदिर के बाहर भारतीय राजनयिकों की हत्या की धमकी देने वाली तस्वीरें लगा दी थी। इस दौरान खालिस्तान के नारे लगाते हुए भारत में अलग देश की माँग की गई। वहीं, भारतीय समुदाय के लोगों ने कनाडा में इस पर विरोध जताया।

टोरंटो के अलावा, खालिस्तान समर्थकों ने ओटावा में भारतीय उच्चायोग के बाहर खालिस्तान समर्थक रैली आयोजित की। प्रदर्शनकारी खालिस्तानी झंडे ले रखे थे और ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए। अपने पोस्टर में उन्होंने भारतीय राजनयिकों को मारने का आह्वान किया था।

बता दें कि सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने इस मार्च और विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। निज्जर की हत्या के बाद से पन्नू को अपनी जान का डर सता रहा है और वह अंडरग्राउंड हो गया है।

पनवेल रेलवे स्टेशन पर बीचोबीच पढ़ी गई नमाज: वायरल वीडियो देख MNS ने उठाई महाआरती की माँग, रेलवे अधिकारियों ने मना किया

महाराष्ट्र के पनवेल रेलवे स्टेशन पर नमाज पढ़ने की एक वीडियो 7 जुलाई को सोशल मीडिया पर सामने आई थी। वीडियो देखने के बाद इस पर कई हिंदुओं ने सवाल उठाए। वहीं नवनिर्माण सेना ने वीडियो देख उसी जगह महा आरती करने की बात की। हालाँकि प्रशासन ने उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी।

वीडियो में दिखाई दे रहा है कि पनवेल रेलवे स्टेशन पर खड़े होकर 4-5 लोगों द्वारा नमाज पढ़ी जा रही थी। जिसे किसी यात्री ने रिकॉर्ड करके सोशल मीडिया पर डाला और बाद में ये वीडियो तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

मामला संज्ञान में आने के बाद रेलवे ने केस में जाँच करने को कहा है। रेलवे अधिकारियों ने स्वीकार किया कि वीडियो पनवेल स्टेशन का है, लेकिन जाँच होने तक कोई बयान देने से इनकार कर दिया। वहीं एमएनएस नेता इस बात से नााराज हैं कि जब नमाज पढ़ने पर अभी कोई एक्शन नहीं हुआ तो आखिर आरती से क्या दिक्कत है।

नवी मुंबई के पनवेल स्टेशन पर नमाज अदा करने की घटना के बाद स्थानीय मनसे (महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना) के नेता योगेश चिली ने कहा था, “भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है। सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार किया जाता है। अगर मुसलमानों को मंच पर नमाज अदा करने की अनुमति है, तो हिंदुओं को भी महाआरती करने की अनुमति दी जानी चाहिए। मैं पनवेल के सभी हिंदुओं से अपील करता हूँ कि वे 7 जुलाई 2023 को शाम 7 बजे पनवेल रेलवे स्टेशन प्लेटफॉर्म पर महाआरती में शामिल हों।”

हालाँकि, रेलवे अधिकारियों ने उन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बाद मनसे के कई सदस्यों ने रेलवे अधिकारियों से मुलाकात कर महाआरती की अनुमति माँगी। लेकिन उनके प्रयासों के बावजूद, रेलवे अधिकारी अपने इनकार करते रहे।

योगेश चिले को रेलवे फोर्स ने कहा, “जय हिंद सर, 5 जुलाई 2023 को पांच लोगों का एक समूह रात आठ बजकर 36 मिनट पर एक लोकल ट्रेन से पनवेल स्टेशन आया। वे ट्रेन नंबर 22150 (पुणे एर्नाकुलम एक्सप्रेस) में सवार होने के लिए पनवेल स्टेशन आए थे, जो अगले दिन सुबह 03.17 बजे स्टेशन पर आई थी। जब वे पनवेल स्टेशन पर अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, तब उन्होंने डीलक्स पे के पास रात 09.12 बजे नमाज अदा करना शुरू कर दिया और स्टेशन क्षेत्र में बाथरूम का उपयोग किया। इसके बाद उन्हें स्टेशन क्षेत्र में इंतजार करते और ट्रेन नंबर 22150 में शांतिपूर्वक चढ़ते हुए देखा गया।”