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करोड़ों काँवड़ बनाते हैं बढ़ई, अलीगढ़ की 1000 फैक्ट्रियों में मजदूरों को रोजगार, गरीब राज्य में भी ₹2000 करोड़ का कारोबार: काँवड़ यात्रा के विरोधियों को बताइए

भगवान शिव की भक्ति का महीना आ गया है, रिमझिम बारिश के साथ ही सावन ने दस्तक दे दी है। सावन आने के साथ ही काँवड़ यात्रा भी शुरू हो गई है। गंगा सहित विभिन्न पवित्र नदियों से जल लेकर लोग भगवान भोलेनाथ को अर्पित करने निकल पड़े हैं। झारखंड स्थित वैद्यनाथ धाम हो या फिर हरिद्वार, काँवड़ यात्रा की चहल-पहल से आध्यात्मिक स्थल व्यस्त हो गए हैं। लेकिन, इसके साथ ही शुरू हो गया है हिन्दू विरोधियों द्वारा अलग-अलग तरह का प्रोपेगंडा कर के काँवड़ यात्रा को बदनाम करने का प्रयास।

आपके सामने कई ऐसे लोग आएँगे जो कहेंगे कि भगवान शिव को जल चढ़ाना पानी की बर्बादी है। कोई ट्वीट कर के कह रहा है कि बच्चों के हाथों में काँवड़ की जगह किताब देनी चाहिए तो कोई काँवड़ियों पर गुंडागर्दी का आरोप लगा रहा है। अब कोई काँवड़ यात्रा की वैज्ञानिकता पर सवाल उठाएगा तो कोई पूछेगा कि इससे क्या फायदा होता है? कुछ इसे अंधविश्वास भी बताएँगे। हर साल ऐसा होता है, इस साल भी होगा, लेकिन इस बार हिन्दुओं को जवाबों से लैस रहना चाहिए।

सबसे पहले समझिए कि काँवड़ यात्रा से ये चिढ़ने क्यों? चिढ़ने वाले हैं वामपंथी, इस्लामी कट्टरपंथी और खुद को दलितों के ठेकेदार बताने वाले। असल में ये लोग काँवड़ यात्रा की भीड़ देख कर डरते हैं कि हिन्दुओं में भक्ति भावना आखिर बढ़ क्यों रही है। काँवड़ यात्रा में सभी जातियों के लोग साथ में कदम मिला कर चलते हैं, ये उन्हें बर्दाश्त नहीं होता। साथ ही काँवड़ यात्रियों को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा जो सुविधाएँ मिलती हैं, उसने जले पर नमाज का काम किया है।

काँवड़ बनाने वाले बढ़ई समाज को मिलता है रोजगार, करोड़ों काँवड़ बनते हैं हर साल

इस पर तो बात होती ही है कि कैसे काँवड़ यात्रा में जल चढ़ाने के लिए किसी गाँव या क़स्बा से पूरा समूह निकलता है तो उसमें सभी जाति के लोग शामिल होते हैं और सभी एक-दूसरे को ‘भोले’ (बिहार-झारखंड में ‘बम’) कह कर पुकारते हैं। कोई ‘बच्चा बम’ होता है तो कोई ‘महिला बम’। ध्यान दीजिए, ये Bomb वाला बम नहीं है, वो तो जिहादी बनते हैं। ये ‘बम-बम भोले’ वाला बम है। कोई ‘डॉक्टर बम’ होता है तो कोई ‘इंजीनियर बम’। ‘चाचा बम’ और ‘बाबा बम’ भी मिल जाएँगे आपको।

अब थोड़ा इस यात्रा की जड़ में चलते हैं। यात्रा के लिए सबसे पहली ज़रूरत क्या है – काँवड़। दूसरी ज़रूरत – भगवा कपड़े। तीसरी ज़रूरत – गंगाजल या अन्य पवित्र नदियों का जल। सबसे पहले काँवड़ पर आते हैं। ये काँवड़ बनती किस चीज से है? लकड़ी से। लकड़ियों का काम कौन करता है? बढ़ई, जिसे अंग्रेजी में Carpenter भी कहते हैं। यानी, सावन के एक महीने में (इस बार 2 महीना, क्योंकि ये ‘दोमास है’) बढ़ई समाज की इतनी आमदनी हो जाती है कि साल भर उनकी रोजी-रोटी चल सकती है।

एक नजर आँकड़ों पर डालते हैं। अगर आप मेरठ का उदाहरण लेंगे तो अकेले इस शहर में काँवड़ यात्रा से 500 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। इस बार 5 करोड़ तीर्थयात्री काँवड़ लेकर हरिद्वार आ सकते हैं। सोचिए, 5 करोड़ लोगों के पास 5 करोड़ काँवड़ भी तो होंगे। यानी, 5 करोड़ काँवड़ किसी न किसी ने बनाए होंगे? है न? किसी एक आदमी के बस का तो ये है नहीं। यानी, हजारों बढ़इयों को काँवड़ यात्रा में काम मिलता है, रोजगार मिलता है।

अगर हम कम से कम 300 रुपए भी रखें तो 5 करोड़ काँवड़ का दाम 1500 करोड़ रुपए बैठ जाता है। कई काँवड़ तो बहुत महँगे भी होते हैं, ऐसे में ये संख्या 2000 करोड़ रुपए के पार भी जा सकती है। ये भी हो सकता है कि कई काँवड़िए पिछले साल वाला काँवड़ ही इस्तेमाल करें, लेकिन आधे भी नए काँवड़ खरीदते हैं तो केवल काँवड़ का बिजनेस हजार करोड़ रुपए का बैठता है। ध्यान दीजिए, ये तो सिर्फ हरिद्वार जाने वाले काँवड़ियों का आँकड़ा है। कई अन्य भी धाम हैं, जहाँ ये यात्रा चलती है।

उदाहरण के लिए, अब झारखंड में स्थित वैद्यनाथ धाम को ले लीजिए। बिहार-झारखंड के अधिकतर लोग यहीं जल चढ़ाने आते हैं, कई तो हर साल। सामान्यतः भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा नदी से जल लिया जाता है और से शुरू होती है काँवड़ यात्रा। बिहार से हर साल 40 लाख के करीब लोग काँवड़ लेकर जाते हैं। दिल्ली NCR में ये आँकड़ा 30 लाख का है। सोचिए, वैद्यनाथ धाम में सावन में पहुँचने वाले इन 30 लाख काँवड़ियों से अर्थव्यवस्था को कितना लाभ पहुँचता होगा?

काँवड़ यात्रा की अर्थव्यवस्था फाइव स्टार होटलों या फिर विमानों वाली नहीं है। ये पैसा आम लोगों की जेब से निकलता है और आम लोगों की जेब में जाता है, खासकर गरीब तबके की, व्यापारियों की। जैसे, सड़क पर स्थित ढाबों, छोटे होटलों, धर्मशालाओं और रेस्टॉरेंट्स में कारोबार बढ़ जाता है। बिहार जैसे गरीब राज्य में भी केवल भागलपुर में इस साल इससे 500 करोड़ रुपयों का कारोबार अनुमानित है। मधेपुरा और कटिहार जैसे जिलों में भी 20 करोड़ का कारोबार तो हो ही जाएगा।

अगर पूरे बिहार की बात करें तो वहाँ 2000 करोड़ रुपए का कारोबार अपेक्षित है। सोचिए, एक गरीब राज्य की अर्थव्यवस्था में इस तरह के कारोबार से फायदा होगा या नहीं होगा? जमुई और मुंगेर जैसे जिलों में भी 30-35 करोड़ रुपए के कारोबार की संभावना है इस काँवड़ यात्रा के दौरान। फलाहार बेचने वाले कौन लोग होते हैं? फुटकर दुकानदार ही होते हैं न? पूजा सामग्रियाँ बेचने वाला सामान्य कारोबारी ही होते हैं न? सावन के अंत में रक्षाबंधन और फिर उसके बाद दशहरा, दीवाली और छठ के बारे में तो पता ही है।

अकेले अलीगढ़ में घुँघरू-घंटी की 1000 फैक्ट्रियाँ, मजदूरों को मिलता है काम

हम बात कर रहे थे काँवड़ की। काँवड़ बनाने के लिए चाहिए बाँस, लकड़ी, रंगीन कागज, कपड़ा और घंटी या घुँघरू। अगर आप उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ या एटा में जाएँगे तो पाएँगे वहाँ सैकड़ों परिवारों की आमदनी केवल घंटी और घुँघरू बनाने पर ही निर्भर होती है और वो इस सीजन में अच्छी कमाई करते हैं। अलीगढ़ को ताला उद्योग के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन ये घुँघरू-घंटी उद्योग के लिए भी लोकप्रिय है। काँवड़िए पाँवों में घुँघरू बाँधते हैं, घंटी काँवड़ में लगा दी जाती है।

इनका अपना एक महत्व है, क्योंकि कहा जाता है कि ये तीर्थयात्रियों को साँप-बिच्छू जैसे खतरनाक जीवों से बचाए रखते हैं। सोचिए, अकेले अलीगढ़ में ऐसे 1000 कारखाने हैं जहाँ हजारों मजदूरों को रोजगार मिलता है काँवड़ यात्रा के मौसम में और इससे पहले। सामान्यतः घंटी-घुँघरू पीतल के होते हैं। कच्चे माल की गलाई के बाद ढलाई, घिसाई, पॉलिश, पैकिंग इत्यादि का काम किया जाता है। बड़ी बात तो ये है कि यहाँ कई मुस्लिम मजदूर भी हैं, अर्थात काँवड़ यात्रा मुस्लिमों को भी रोजगार देती है।

जिस तरह काँवड़ बनाने वाले बढ़ई लोगों और घुँघरू-घंटी बनाने वाले मजदूरों को रोजगार मिलता है, ठीक उसी तरह से कपड़ों का कारोबार भी सावन के महीने में खूब परवान चढ़ता है। टेंट हाउस, डीजे संचालक, हलवाइयों और जेनेरेटर मालिकों की बुकिंग बढ़ जाती है। ये बहुत अमीर लोग नहीं होते, बल्कि गाँव-समाज और शहर के ही लोग होते हैं जिनका स्थानीय कारोबार होता है। शिवभक्त भंडारा करते हैं, ऐसे में प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होने वाले खाद्य पदार्थों की बिक्री भी बढ़ जाती है।

टीशर्ट, निक्कर, पटका, तौलिया या फिर बटुआ – ये सब की बिक्री भी छोटे दुकानदार ही करते हैं। ‘महाकाल’ लिखे टीशर्ट्स हों या फिर भगवान शिव की तस्वीर वाले, इनकी माँग बढ़ जाती है और बिक्री भी। सबसे बड़ी बात, मंदिर के आसपास फल और बेलपत्र बेचने वाले बहस ही गरीब लोग होते हैं और केवल इन दोनों का कारोबार करोड़ों का होता है। सावन के महीने में जल के साथ बेलपत्र चढ़ाया ही चढ़ाया जाता है। प्रसाद में फल लोग लेते ही हैं। महिलाओं की श्रृंगार की वस्तुएँ भी खूब बिकती हैं।

इनमें सिंदूर सबसे प्रमुख होता है, क्योंकि सुहागिनें इसे एक-दूसरे को लगाती हैं और माँ पार्वती को भी अर्पित करती हैं। कोरोना काल में काँवड़ यात्रा नहीं निकल पाई थी तो कई कारोबारी और ऐसे फुटकर दुकानदार मायूस हो गए थे, उन पर आर्थिक संकट आ गया था। दिल्ली-मेरठ रोड से हरिद्वार जाने वाले काँवड़िए जाते हैं, ऐसे में सबसे ज्यादा कमाई यहीं होती है। इसीलिए, अगर कोई काँवड़ यात्रा का विरोध कर रहा है तो वो अप्रत्यक्ष रूप से गरीबों का विरोध कर रहा है।

काँवड़ यात्रा का विरोध मतलब महीने भर फूल-बेलपत्र बेचने वाली मंदिर के पास बैठी गरीब महिलाओं का विरोध। काँवड़ मतलब हर साल 5 करोड़ से भी अधिक काँवड़ियों के लिए काँवड़ बनाने वाली बढ़इयों का विरोध। काँवड़ यात्रा का विरोध मतलब भगवा कपड़े बेचने वाले छोटे कारोबारियों का विरोध। काँवड़ यात्रा का विरोध मतलब प्रसाद सामग्री या पूजा सामग्री बेचने वाले फुटकर दुकानदारों का विरोध। काँवड़ यात्रा का विरोध मतलब घुँघरू-घंटी की हजारों फ़ैक्ट्रियों में काम करने वाले गरीबों का विरोध।

ऐसे समय में, जब हमारे देश के अधिकतर मंदिरों पर सरकार का कब्ज़ा है और उनसे प्राप्त हुए पैसों का इस्तेमाल सरकार विभिन्न कार्यों में करती है, इसके बावजूद ये मंदिर विपत्ति के काल में स्वेच्छा से गरीबों की मदद करने का निर्णय लेते हैं – तब भी हिन्दू धर्म के खिलाफ इस तरह की अपमानजनक बातें करना अपराध नहीं तो और क्या है? काँवड़ यात्रा श्रद्धा का प्रतीक है, हिन्दू परंपरा है – विरोध न करने के लिए एक यही वजह काफी होनी चाहिए थी, अर्थव्यवस्था वगैरह की बात तो बाद में आती है।

भारत की भूमि पर भारतीय संस्कृति की परंपरा का इतना विरोध क्यों?

आप सोचिए, इस भारत भूमि पर भारत में उपजी संस्कृति की परंपरा का विरोध होता है। भगवान परशुराम या भगवान श्रीराम को प्रथम काँवड़ियों के रूप में मान्यता मिली है, साधु-संत सदियों से काँवड़ यात्रा निकालते रहे हैं, ऐसे में भला कैसे किसी को अधिकार मिल जाता है कि प्राचीन भारतीय इतिहास में जिस परंपरा की जड़ हो उस पर बिना सिर-पैर की बातें कर के कुठाराघात करने का? भगवान के दरबार में सभी भक्त एक होते हैं, जात-पात या धन मायने नहीं रखता – हिन्दू विरोधियों को काँवड़ यात्रा से इसीलिए चिढ़ होती है।

कुछ हिन्दू विरोधी ये कारण लेकर आ सकते हैं कि काँवड़ यात्रा से टॉल टैक्स की वसूली में कमी आ जाती है या फिर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के कारण सामानों की ढुलाई में समस्या आती है, लेकिन इनसे हुआ नुकसान जितना होता होगा उससे कई गुना काँवड़ यात्रियों के कारण कारोबार पैदा हो जाता है। वैसे भी माल ढुलाई वाले अधिकतर ट्रक वगैरह रात में ही सफर करते हैं। स्थानीय लोग काँवड़ियों की सेवा के लिए खुद कैम्प बना-बना कर जगह-जगह लगे रहते हैं।

जो लोग सड़क पर नमाज के विरोध में चूँ तै नहीं करते, वही काँवड़ यात्रा के विरोध में शिक्षा और विज्ञान जैसी बातें करने लगते हैं। नमाजियों द्वारा तो सड़क घेर कर घंटों ट्रैफिक रोक लिया जाता है, इससे तो कोई कारोबार भी जेनरेट नहीं होता, फिर क्यों ऐसा किया जाता है? कई बार मस्जिदों से निकली भीड़ दंगे करती है, पत्थरबाजी करती है – इसके विरोध में क्यों कोई कुछ नहीं बोलता? जुमे के दिन सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ती है, इसके कारण पर चर्चा हुई आज तक कभी?

जहाँ तक शिक्षा की बात है, सनातन में अध्यात्म और विज्ञान तो एक-दूसरे के पूरक हैं, दुश्मन नहीं। यहाँ धरती को चपटी नहीं बताया गया है, बल्कि हजारों वर्ष पूर्व ग्रहों-नक्षत्रों के बारे में सटीक जानकारी दी गई है। यहाँ दिन-मास-पहर सभी की गणना के तौर-तरीके वैदिक युग से ही उपलब्ध हैं। गणित और खगोल के सिद्धांत हिन्दू धर्म के प्राचीन साहित्य में मिलते हैं। फिर हिन्दू धर्म के सामने विज्ञान कैसे खड़ा हो गया? दोनों तो साथ में चलते हैं न। योग या ध्यान प्रक्रिया विज्ञान नहीं तो क्या है।

दुकानदार तौसीफ हुसैन ने मजदूर को ज़िंदा जलाया: पेट्रोल डाल कर लगा दी आग, 4 साल से उसके पास कर रहा था काम

कर्नाटक के मंगलुरु में एक दुकानदार द्वारा मामूली सी बात पर अपने एक कर्मचारी की हत्या करने का मामला सामने आया है। दुकान मालिक तौसीफ हुसैन ने अपने ही कर्मचारी गजयान उर्फ़ जग्गू के ऊपर पेट्रोल डाल कर उससे ज़िंदा जला डाला। गजयान पिछले 4 वर्षों से उसकी दुकान में काम कर रहा था। ये घटना मूलिहितलू इलाके में शनिवार (8 जुलाई, 2023) को हुई है। बाद में दुकानदार इसे करंट लगने से हुआ हादसा बताने लगा, ताकि किसी को उस पर शक न हो।

32 वर्षीय तौसीफ हुसैन को कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पहले तो वो बहाने बनाता रहा कि ये घटना इलेक्ट्रोक्युशन से हुई है। लेकिन, सख्ती से पूछताछ में उसने सब उगल दिया। सिटी पुलिस कमिश्नर कुलदीप कुमार आर जैन ने बताया कि आसपास के लोगों से पूछताछ के दौरान जो सूचनाएँ पता चलीं, उनके आधार पर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। बताया जा रहा है कि गजयान से उसकी मामूली झड़प हुई थी, जिसके बाद उसने इस वारदात को अंजाम दिया।

पेट्रोल से जलाए जाने के बाद कर्मचारी को स्थानीय अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने बताया है कि इस मामले में केस दर्ज कर के आगे की जाँच शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि हमेशा की तरह जब कर्मचारी काम पर गया तो सुबह के 7:30 बजे मालिक के साथ उसकी किसी बात पर झड़प हो गई। हत्या के बाद तौसीफ हुसैन ने पुलिस को गुमराह करने के लिए सारे तिकड़म आजमाए, लेकिन वो नाकाम रहा।

वेनलॉक अस्पताल में पीड़ित को मृत घोषित किया गया। इस मामले में धारा-302 (हत्या) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। मोहम्मद तौसीफ ग्रॉसरी की दुकान चलाता है। मंगलुरु साउथ की पुलिस इस घटना की जाँच कर रही है। बता दें कि कर्नाटक के बेलगावी में जैन मुनि की हत्या कर उनके शव के टुकड़े-टुकड़े किए जाने की घटना के बाद से ही राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जैन मुनि हत्याकांड में 2 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

‘राहुल गाँधी को ये मौत का खेला क्यों मंजूर है?’: बंगाल में हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने पीटा, नालियों में पड़ी मिलीं मतपेटियाँ

पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव चुनाव के दौरान भीषण हिंसक घटनाएँ हुईं। हालाँकि इसके बाद भी लोकसभा चुनावों से पहले कॉन्ग्रेस ममता बनर्जी के साथ गठबंधन करने को आतुर दिखाई देती है। इसको लेकर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गाँधी को निशाने पर लेते हुए पूछा है कि आखिर उन्हें मौत का खेला क्यों स्वीकार है। वहीं, हिंसक घटनाओं को लेकर बीजेपी ने चुनाव आयोग के कार्यालय के साथ ही राज्य के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया। बैलेट बॉक्स से छेड़छाड़ और बूथ कैप्चरिंग के आरोपों के बीच मुर्शिदाबाद में मत पेटियाँ नाली पर पड़ी मिली। 

स्मृति ईरानी ने कहा है, “पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव में हुई लोकतंत्र की हत्या सब लोग देख रहे हैं। जहाँ लोकतांत्रिक मूल्यों और अपने अधिकारों को जताने के लिए लोग मारे जा रहे हैं। उसी TMC के साथ गाँधी परिवार गठबंधन कर रहा है। मेरा गाँधी परिवार से यह विशेष प्रश्न है कि जो लोग पश्चिम बंगाल में कहर मचा रहे हैं और लोगों को मात्र इसलिए मौत के घाट उतार रहे हैं क्योंकि वो वोट डालना चाहते हैं। ऐसे लोगों के साथ कॉन्ग्रेस हाथ मिला रही है। प्रश्न यह उठता है कि मौत का यह खेला राहुल गाँधी को क्यों स्वीकार है?”

भाजपा का प्रदर्शन

बंगाल के पंचायत चुनाव में हुई मारपीट, हत्या, बूथ कैप्चरिंग समेत अन्य गतिविधियों के लिए BJP सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही है। लेकिन चुनाव आयोग को लेकर BSF के बयान बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में स्थित चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर जमकर विरोध-प्रदर्शन किया। दरअसल, बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने चुनाव आयोग पर संवेदनशील पोलिंग स्टेशनों की जानकारी न देने का आरोप लगाया है। इसके बाद से चुनाव आयोग भी संदेह के घेरे में है।

इसके अलावा, इस चुनाव के दौरान हुई तमाम अनियमितताओं को लेकर BJP ने बंगाल के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया। पूर्व मेदिनीपुर जिले के नंदकुमार ब्लॉक में बैलेट पेपर्स के साथ हुई छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। हालाँकि, ममता बनर्जी की पुलिस को यह रास नहीं आया। पुलिसकर्मी BJP कार्यकर्ताओं को पीटते हुए दिखाई दिए। इसमें से एक वीडियो में कई पुलिसकर्मी एक प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता को घेरकर उस पर जमकर लाठी बरसाते नजर आए।

मुर्शिदाबाद में नाली में मिलीं मत पेटियाँ

पंचायत चुनाव की वोटिंग के दौरान बंगाल के मुर्शिदाबाद में बड़े पैमाने पर हिंसक घटनाएँ हुई थीं। इसी मुर्शिदाबाद में 3 मत पेटियाँ एक नाली में पड़ी मिली हैं। इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि बंगाल में कानून व्यवस्था पूरी तरह से लचर है। पंचायत जैसे छोटे चुनाव में यदि इस तरह की घटनाएँ सामने आ रहीं हैं तो साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में हिंसक घटनाएँ और भी बड़े पैमाने पर हो सकती हैं।

बंगाल के हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग अपने घरों से बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं है। मुर्शिदाबाद के ही एक स्थानीय व्यक्ति ने मीडिया से बात करते हुए कहा है, “चुनाव के बाद यहाँ हालात ठीक नहीं हैं। आम जनता डर के कारण बाहर नहीं आ रही। लोग दहशत में हैं। जो लोग बाहर आते हैं TMC कार्यकर्ता उन्हें धमकी देते हैं।”

‘ईसाइयों का कभी नहीं हो सकता भारत से सफाया’: केरल कैथोलिक बिशप क्लेमिस के बोल, मणिपुर हिंसा पर PM से कहा- चुप्पी तोड़ो

पिछले ढाई महीनों से पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर हिंसा की आग में जल रहा है। इसमें अब केरल का ईसाई संगठन कूद पड़ा है। केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (KCBC) के अध्यक्ष कार्डिनल मार बेसिलियोस क्लेमिस ने इस धार्मिक चश्मे से देखते हुए कहा कि किसी को ये नहीं सोचना चाहिए कि वह भारत से ईसाई धर्म को खत्म कर सकता है।

साइरो-मलंकारा कैथोलिक चर्च के आर्कबिशप क्लेमिस (Cardinal Mar Baselios Cleemis) ने रविवार (9 जुलाई 2023) को केरल में कही। दरअसल, मणिपुर में जारी हिंसा को लेकर कॉन्ग्रेस विधायक के नेतृत्व में एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। केरल में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में आर्कबिशप बोल रहे थे।

क्लेमिस ने केंद्र सरकार से पूछा कि मणिपुर में दो समुदायों के बीच 65 दिनों से दंगे हो रहे हैं, लेकिन जो सरकार सर्जिकल स्ट्राइक करने के लिए जानी जाती है, वह इन दंगों को नियंत्रित करने में सक्षम क्यों नहीं है। केरल के अन्य ईसाई बिशपों ने इस मामले में केंद्र की मोदी सरकार से हस्तक्षेप करने की माँग की है।

आर्कबिशप क्लेमिस ने कहा, “हमारे संविधान में लिखा धर्मनिरपेक्षता कोई सजावटी शब्द नहीं है, बल्कि एक अधिनियमित दर्शन है। हमारा महान संविधान ,जो किसी भी धर्म को मानने और आचरण करने का अधिकार देता है, उसे छुपाया क्यों जा रहा है? मणिपुर में शांति बहाल करने में हस्तक्षेप करना चाहिए।”

एर्नाकुलम जिले के मुवत्तुपझा में कॉन्ग्रेस विधायक मैथ्यू कुझालनदान द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में बोलते हुए क्लेमिस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। पीएम मोदी के लिए यह दुनिया को संदेश देने का सबसे अच्छा मौका है कि भारत में लोकतंत्र कायम है।

बताते चलें कि मणिपुर में मेइती समुदाय अपने लिए अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जा देने की माँग कर रहा है। इस माँग को लेकर उसने 3 मई 2023 को आदिवासी आदिवासी एकजुटता मार्च निकाला गया था। इसके बाद राज्य में हिंसा भड़क उठी।

आदिवासी कुकी और मेइती समुदाय आमने-सामने आ गए और एक-दूसरे को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस हिंसा में अब तक लगभग 125 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, 3000 से अधिक लोग घायल हो गए हैं। हिंसा को देखते हुए हजारों परिवार अपने घरों से विस्थापित हो गए हैं।

फ्री में नहीं मिला जामुन, इसलिए जनजातीय महिला की पूरी टोकरी फेंकी: बिहार पुलिस के जवान पर लगा आरोप, जमुई पुलिस ने बताई ‘हकीकत’ कुछ अलग

बिहार के जमुई में एक पुलिस जवान पर जामुन बेच रही जनजातीय महिला की टोकरी फेंकने का आरोप लगा है। आरोपित की पहचान कैदी वाहन चालक महेश सिंह के रूप में हुई। पीड़ित महिला का आरोप है कि महेश उससे कमीशन के तौर पर मुफ्त में जामुन माँग रहा था। लेकिन उसने जामुन देने से मना कर दिया। ऐसे में महेश ने उसकी टोकरी उठाकर फेंक दी। हालाँकि आरोपित पुलिस जवान और जमुई पुलिस ने आरोपों का खंडन किया है।

मामला जमुई के कचहरी चौक का है। इस इलाके में जामुन समेत कई तरह दुकानें हैं। जनजातीय महिलाएँ रोज की तरह सड़क किनारे जामुन बेच रहीं थीं। आरोप है पुलिस जवान महेश सिंह महिलाओं के पास आया और उनसे कमीशन के तौर पर जामुन माँगने लगा। चूँकि महिलाएँ जंगल से जामुन चुनकर जमुई लाकर बेचती हैं और यही इन महिलाओं की रोजी-रोटी का साधन है, इसलिए उन्होंने महेश सिंह को जामुन देने से इनकार दिया।

इस पर आरोपित पुलिस जवान महेश सिंह ने उसकी जामुन की टोकरी उठाकर सड़क पर फेंक दी। इससे पूरे जामुन सड़क पर ही बिखर गए। भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़िता महिला का कहना है कि महेश सिंह आए दिन एक-दो किलो जामुन फ्री में लेकर चला जाता था। घटना वाले दिन भी वह यही करना चाहता था। उसने जबरदस्ती जामुन उठाने की कोशिश की थी। मना करने पर उसने पूरी जामुन सड़क पर फेंक दिया।

वहीं एक अन्य महिला का कहना है कि महेश सिंह जामुन खाकर बहुत सारी जामुन साथ ले जाता था। घटना के दिन जब ऐसा हुआ तो महिला ने विरोध किया। इस पर महेश ने कहा कि वह उन्हें जामुन नहीं बेचने देगा। उसने गालियाँ देकर मारपीट की फिर जामुन फेंक दिया। कहा जा रहा है कि पुलिस कर्मी की ऐसी हरकत को देखकर मौके पर भीड़ इकट्ठा हो गई थी। ऐसे में मामले को रफा दफा करने के लिए पुलिस जवान ने पीड़ित महिला को 400 रुपए देकर मामला शांत करा दिया।

वहीं, पुलिस जवान चालक महेश सिंह ने अपनी सफाई में कहा है कि उसने कभी किसी की एक भी जामुन नहीं खाया। उसने तो सिर्फ महिला को कहा था कि इस रास्ते से कैदी वाहन गुजरता है। इसलिए अपनी जामुन हटा लो। लेकिन उसने नहीं हटाई। इस पर महेश ने खुद ही टोकरी हटा दी। इस पूरे मामले में डीएसपी अभिषेक सिंह ने कहा है कि यदि आरोपित पुलिस जवान इस तरह की हरकत की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे घटनाक्रम में जमुई पुलिस ने आरोपित महेश सिंह को पूरी तरह पाक साफ बताया है। पुलिस का कहना है कि आरोपित महेश सिंह कैदी वाहन से उतरकर जामुन की टोकरी हटा रहा था। लेकिन जल्दबाजी में टोकरी उसके हाथ से छूटकर गिर गई, इससे जामुन भी बिखर गए।

जैन मुनि के शव के टुकड़े बरामद, हजारों लोगों की मौजूदगी में यज्ञ पूजा और अंतिम संस्कार: BJP ने कर्नाटक सरकार से की जाँच की माँग, आचार्य लोकेश बोले – अब तो जागो…

कर्नाटक के बेलगावी में जैन मुनि की निर्मम हत्या और उनके शव को टुकड़ों में काटने के मामले को भारतीय जनता पार्टी ने गहन जाँच की माँग की है। इस केस में भाजपा के राज्य अध्यक्ष नलिन कुमार पटेल ने कहा कि अपराध से जुड़े हर पहलू की पड़ताल होनी चाहिए और राज्य में संत-मुनियों को सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।

पुलिस ने अब तक जैन मुनि की हत्या केस में 2 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों की पहचान नारायण बसप्पा माडी और हसन दलायथ (इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार) के तौर पर हुई है। इनका कहना है कि इन्होंने पैसे के विवाद पर हत्या को अंजाम दिया। हालाँकि लोग चाहते हैं कि इस मामले पर अच्छे से जाँच करके सच्चाई का पता लगाया जाए।

इस हत्या की जानकारी होने पर आचार्य लोकेश मुनि ने भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया। उन्होंने कहा, “जागो जैनों जागो, कम से कम अब तो जागो! जैन कब तक श्वेतांबर दिगम्बर में बँटे रहोगे।”

उन्होंने कहा, “स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार जैनाचार्य काम कुमार नंदी जी की कर्नाटक में हत्या कर, शरीर को कई भागों में काटकर, फेंक दिया।अमेरिका में उपवास रखकर जैन व भारतीय समुदाय की ओर से कर्नाटक के राज्यपाल मुख्यमंत्री से अपील करता हूँ कि दोषियों को कठोर दंड के साथ संतों की सुरक्षा के लिए अविलंब उचित कदम उठाए।”

गौरतलब है कि 15 सालों से अहिंसा पर्मोधर्म का प्रचार करने वाले हिरेकोड़ी जैन आश्रम के कामकुमार नंदी महाराज (51) की दो दिन पहले निर्ममता से हत्या करके उनके शव को टुकड़ों में काट दिया गया था। पुलिस की छानबीन में शव में कुछ टुकड़े बरामद होने के बाद उनका अंतिम संस्थकार जैन मठों के महास्वामी के नेतृत्व में किया गया।

संस्कार से पहले श्मशान भूमि का शुद्धिकरण करके यज्ञ पूजा हुई। उसके बाद वहाँ सामूहिक प्रार्थना की गई। बाद में नंदी महाराज द्वारा उपयोग किए जाने वाले कमंडल को नारियल के पेड़ से बाँध दिया गया और फिर अंतिम संस्कार पूरा किया गया। इस दौरान अन्य धर्मों के हजारों श्रद्धालु वहाँ मौजूद थे। लोगों ने माँग उठाई की स्वामी जी की नृशंस हत्या करने वाले आरोपितों की फाँसी की सजा दी जाए।

बताा दें कि बेलगाम जिले के चिक्कोड़ी इलाके में जैन मुनि 108 कामकुमार नंदी जी महाराज नंदी पर्वत आश्रम में पिछले 15 वर्षों से रह रहे थे। गुरुवार को नंदी महराज अचानक लापता हो गए। उनके शिष्यों ने पहले उन्हें अपने स्तर से खोजने का प्रयास किया लेकिन वो नहीं मिले। आखिरकार आश्रम के शिष्यों ने पुलिस में नंदी महराज की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस ने केस दर्ज कर के जाँच शुरू की तो शक एक संदिग्ध पर हुआ।

जब संदिग्ध को हिरासत में ले कर पूछताछ की गई तो उसने जैन मुनि की हत्या की बात स्वीकार कर ली। आरोपित मृतक का परिचित है। बताया जा रहा है कि आरोपित ने जैन मुनि से कुछ रुपए उधार लिए थे। काफी दिनों तक न लौटा पाने के बाद जैन मुनि ने अपने पैसे वापस माँगने शुरू किए तो इसी पर आरोपित ने जैन मुनि नंदी महाराज की जान ले ली। आरोपित ने घटना में अपने साथ एक अन्य व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी दी है। पुलिस ने हत्या में शामिल उस दूसरे व्यक्ति को भी गिरफ्तार कर लिया है।

दोनों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने जैन मुनि की हत्या कर के लाश टुकड़ों में काट दी। बाद में दोनों ने उन टुकड़ों को कटकाबावी गाँव के पास नदी में फेंकने की जानकारी दी। दोनों की निशानदेही पर पुलिस शव को खोजने का प्रयास कर रही है। हालाँकि, अभी तक पुलिस को सफलता नहीं मिल पाई है। एहतियातन आश्रम में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। मृतक जैन मुनि का जन्म 6 जून 1967 को कर्नाटक के ही बेलगाम जिले में हुआ था। बचपन में उनका नाम भ्रामप्पा था।

‘इस्लाम छोड़ कर हिन्दू बन गया हूँ’: रोशन अली ने मंदिर में की हिन्दू महिला से शादी, गाँव पहुँच जबरन इस्लामी धर्मांतरण और निकाह

उत्तर प्रदेश के हरदोई से लव जिहाद का एक अनोखा मामला सामने आया है। रोशन अली नाम के मुस्लिम युवक ने एक हिंदू महिला को फँसाने के लिए इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने का नाटक किया। उसने हिंदू रीति-रिवाज से मंदिर में शादी भी की और फिर लड़की को इस्लाम कबूल कर निकाह करने के लिए मजबूर किया। इसको लेकर हिंदू संगठनों ने सवाल उठाया है।

पुलिस ने बताया कि हरदोई जिले के सुरसा थाना क्षेत्र के रामपुर गाँव के निवासी नसीरुद्दीन का बेटा रोशन अली दिल्ली में रहकर फूल बेचने की दुकान पर काम करता था। दिल्ली में उसकी मुलाकात तिलक नगर के विष्णु गार्डन इलाके की रहने वाली लक्ष्मी बंसल नाम की लड़की से हुई।

धीरे-धीरे दोनों में प्यार हो गया और दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। रोशन अली ने लड़की के परिजनों को अपना परिचय रोशन लाल के रूप में दिया। इसी बीच परिवार को पता चला कि रोशन वास्तव में मुस्लिम है और उसका नाम रोशन लाल नहीं, रोशन अली है। इसके बाद उन लोगों ने शादी से मना कर दिया।

लड़की से शादी करने के लिए रोशन अली ने अपनी इच्छा से इस्लाम छोड़ने और हिंदू धर्म अपनाने के लिए कहा। इस पर लड़की के परिजन तैयार हो गए। रोशन अली दिल्ली के आर्य समाज मंदिर गया और हिंदू धर्म अपना लिया। उसने अपना नाम रोशन लाल रख लिया। 

रोशनी अली के हिंदू धर्म अपनाने के बाद लड़की के परिवार वालों की सहमति से उसने लक्ष्मी बंसल से दिल्ली के उसी आर्य समाज मंदिर में शादी कर ली। इसके बाद वह लगभग दो महीने तक हिंदू के रूप में लड़की को पत्नी बनाकर रखने का दिखावा किया।

दो महीने बाद 5 जुलाई 2023 को रोशन अली अपनी पत्नी लक्ष्मी बंसल को यूपी के हरदोई स्थित अपने गाँव ले गया। वहाँ उसने लड़की को इस्लाम में धर्मांतरित करने का दबाव डाला। आखिरकार उसने लड़की को धर्मांतरण के बाद मुस्लिम बनाकर इस्लामिक रीति-रिवाजों के अनुसार निकाह किया।

इस घटना की खबर स्थानीय लोगों को जब मिली तो उन्होंने इसकी शिकायत बजरंग दल के सदस्यों से की। बजरंग दल के सदस्यों ने इस मामले में हरदोई पुलिस से संपर्क किया और रोशन अली के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 

हिंदू संगठन ने रोशन अली पर परिवार वालों को बिना बताए हिंदू महिला का जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाया। बजरंग दल के सदस्यों ने हिंदू परिवार के साथ धोखाधड़ी करने वाले रोशन अली और उसके परिवार को गिरफ्तार कर कड़ी सजा देने की माँग की।

बढ़ते बवाल के बीच हरदोई पुलिस ने रोशन अली और लड़की को थाने लेकर आई। इसके बाद लड़की के परिजनों को सूचित कर उन्हें थाने बुलवाया। पूछताछ के दौरान लड़की ने अपने घर वालों के साथ जाने के बजाय, रोशन अली के साथ ही रहने की इच्छा जताई।

इस बीच, रोशन अली ने कबूल किया कि उसने लड़की से शादी करने के लिए धोखा दिया और हिंदू धर्म अपनाने का नाटक किया था। उसने बताया कि गाँव आकर उसने लड़की का धर्मांतरण कराया और उसका नाम रोशनी रख दिया। उसने कहा कि दोनों परिवारों को खुश रखने के लिए ऐसा किया।

हरदोई के अपर पुलिस अधीक्षक नृपेंद्र का कहना है कि सुरसा पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। पूरे मामले में घटना के हर पहलू की जाँच की जा रही है। आरोप सिद्ध होने पर विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

‘लव जिहादियों’ के झाँसे में नहीं आई नाबालिग हिन्दू छात्रा तो किडनैप कर नेपाल में बेच दिया, बारी-बारी से 4 मुस्लिम युवकों ने किया रेप

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से ‘लव जिहाद’ की घटना सामने आई है। यहाँ इंटरमीडिएट में पढ़ने वाली एक छात्रा को फँसाने की कोशिश की गई, लेकिन जब वो जाल में नहीं फँसी तो चाकू के बल पर उसका अपहरण कर लिया गया। ‘लव जिहाद’ गिरोह के चंगुल में फँसी छात्रा का एक आरोपित ने बलात्कार किया और दूसरे ने इसका वीडियो शूट कर लिया। वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे ब्लैकमेल किया गया। कहा जाने लगा कि वो इस्लाम अपना कर मुस्लिम बन जाए।

जब उसने इस्लाम अपनाने से इनकार कर दिया तो व्हाट्सएप्प के माध्यम से उसे धमकी दी गई कि उसके शरीर के 36 टुकड़े कर दिए जाएँगे और उसके परिवार को भी मार डाला जाएगा। शारीरिक और मानसिक शोषण के कारण छात्रा को स्कूल जाना छोड़ना पड़ा। इसके बावजूद धमकियाँ मिलनी बंद नहीं हुई। शनिवार (1 जुलाई, 2023) को 4 मुस्लिम युवकों ने उसे नशीला पदरश सुँघाया और उसे नेपाल ले गए। वहाँ चारों ने बारी-बारी से उसका बलात्कार किया।

जब लड़की फिर भी मुस्लिम बनने को राजी नहीं हुई तो उसे मानव तस्करी गिरोह को बेच दिया गया। वहाँ उसे यातनाएँ दी जाने लगी। गैंग में फँसी एक दूसरी लड़की ने उसे भागने में मदद की। किसी तरह छात्रा ने उनके चंगुल से निकल सोनौली सीमा पर पहुँच कर घर वालों को फोन किया। वो घर पहुँचने में कामयाब रही। जिस नेपाली महिला को इस लड़की को बेचा गया था, वो गिरोह की परिचित थी और लड़कियों ने जिस्मफरोशी का धंधा कराती थी। हाटा नगर की पीड़िता इंटर की पढ़ाई के साथ-साथ कम्प्यूटर भी सीख रही थी।

उसे भूखे-प्यासे कैद में रखा गया था। इसकी घटना की शुरुआत तब हुई, जब अरमान खान नामक युवक नाबालिग हिन्दू छात्र के पीछे पड़ गया। कई दिनों तक लालच देने के बावजूद वो झाँसे में नहीं आई और उसे पता चला कि सरमन मुस्लिम है तो उसने दूरी बना ली। पुलिस ने मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। स्थानीय भाजपा विधायक मोहन वर्मा ने पीड़िता को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है। जहाँ पीड़ित परिवार का घर है, वहाँ मुस्लिम बहुतायत में हैं। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी न्याय की गुहार लगाई है।

नाम – जेम्स स्कूल, काम – ईसाई प्रेयर के नाम पर धर्मांतरण: जुटा ली थी 400 लोगों की भीड़, छोटे-छोटे बच्चों का भी किया जाता था ब्रेनवॉश

झारखंड के कोडरमा जिले में कॉन्वेंट स्कूल में धर्मांतरण का मामला सामने आया। आरोप है कि स्कूल में 400-500 लोगों को इकट्ठा कर ईसाई मजहब की प्रार्थना कराई जा रही थी। जानकारी मिलने पर स्थानीय लोगों ने हंगामा करते हुए पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 14 लोगों को हिरासत में लेकर मामले की जाँच शुरू कर दी है। घटना शनिवार (8 जुलाई 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामला कोडरमा जिले के तिलैया थाना क्षेत्र के जेम्स इंग्लिश स्कूल का है। जहाँ कोडरमा और आसपास के इलाकों के अलावा बिहार के गया और नवादा से भी बड़ी संख्या में लोग स्कूल में जुटे थे। इस कारण स्कूल के बाहर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी। इससे स्थानीय ग्रामीणों को स्कूल में धर्मांतरण कार्यक्रम होने का संदेह हुआ।

इसके बाद लोगों ने स्कूल के बाहर हँगामा करते हुए मामले की जानकारी पुलिस को दी। इस पर पुलिस ने स्कूल से 11 पुरुषों और 3 महिलाओं समेत कुल 14 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले भी स्कूल में इस तरह की प्रार्थना सभाएँ होती थीं। पुलिस प्रशासन ने स्कूल प्रबंधन को इस प्रकार की किसी भी गतिविधि में शामिल न होने के लिए कहा था। हालाँकि, इसके बाद भी यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इसके अलावा ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन पर धर्मांतरण के लिए छोटे बच्चों का ब्रेनवॉश करने का आरोप लगाया। इस प्रार्थना सभा में शामिल होने आई एक नाबालिग लड़की का कहना है कि वह बीते 4-5 महीने से प्रार्थना सभा में आ रही है। यहाँ आने से उसे बहुत फायदा मिल रहा है। उसने दावा किया कि स्कूल में धर्म परिवर्तन नहीं जीवन परिवर्तन होता है।

वहीं इस पूरे मामले में कोडरमा एसपी प्रवीण पुष्कर का कहना है कि जेम्स स्कूल में धर्मांतरण की सूचना मिली थी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर 14 लोगों को हिरासत में लिया है। सभी से पूछताछ की जा रही है। लोग प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए आए थे। हालाँकि, अब तक धर्मांतरण की पुष्टि नहीं हो पाई है। पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई होगा। तिलैया थाना प्रभारी भी शुरुआती जाँच के आधार पर धर्मांतरण न होने की बात कर रहे हैं। स्कूल के प्रिंसिपल मानवील ने कहा है कि स्कूल के 50 साल पूरे होने पर प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी। धर्मांतरण नहीं हो रहा था। बल्कि लोग अपनी इच्छा से यहाँ आए थे। 

पोस्टरों से गायब किए गए तेजस्वी यादव, होर्डिंग्स में सिर्फ नीतीश ही नीतीश: बिहार में फिर होगा खेला? चिराग पासवान से मिले केंद्रीय मंत्री

क्या बिहार की राजनीतिक फिजाँ एक बार फिर से बदलने वाली है? ये सवाल इसीलिए उठ रहे हैं, क्योंकि नालंदा के ऐतिहासिक शहर राजगीर में लगने वाले मलमास के मेले के पोस्टर से राज्य के उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को ही गायब कर दिया गया है। पोस्टरों में सिर्फ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही दिख रहे हैं, ऐसे में चर्चा स्वाभाविक है कि क्या महागठबंधन की दोनों बड़ी पार्टियों राजद और जदयू में एक बार फिर से सब ठीक नहीं चल रहा है? शनिवार (8 जुलाई, 2023) को खुद सीएम नीतीश ने तैयारियों का निरीक्षण किया।

ये मेला मंगलवार (18 जुलाई, 2023) से शुरू हो रहा है। पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स में सिर्फ नीतीश ही नीतीश हैं, तेजस्वी का कहीं कोई अता-पता नहीं है। इन पोस्टरों में बिहार सरकार के लोगो तो लगा ही है, साथ ही मेले में श्रद्धालुओं को मिलने वाली सुविधाओं का जिक्र भी किया गया है। राजद कोटे से शिक्षा मंत्री बने चंद्रशेखर यादव और ACS अधिकारी केके पाठक के बीच चल रहे तनाव को इस तनातनी की वजह बताया जा रहा है। सीएम नीतीश मेले की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को निर्देश देते दिखे।

उन्होंने इस दौरान ऐसी सख्त सुरक्षा व्यवस्था रखने को कहा कि कोई चाह कर भी किसी प्रकार की गड़बड़ी न कर पाए। मेला परिसर में प्रशिक्षित पुलिस बलों को तैनात करने का निर्देश भी दिया गया। आवागमन की सुविधा के लिए राजगीर के हर रास्ते को दुरुस्त करने का निर्देश भी सीएम नीतीश ने दिया। मेले की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया गया है। बता दें कि नालंदा सीएम नीतीश कुमार का गृह जिला भी है। गेस्ट हाउस मैदान में टेंट सिटी का भी निर्माण हुआ है।

उधर बिहार में लोजपा (रामविलास) की भी एक बड़ी आंतरिक बैठक से पहले केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय चिराग पासवान से मिले। उन्होंने चिराग पासवान को मजबूत नेता बताते हुए कहा कि वो अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वो पहले भी NDA का हिस्सा रहे हैं और आगे भी रहेंगे। इससे अंदेशा लगाया जा रहा है कि चिराग मोदी सरकार में मंत्री बनेंगे। चिराग पासवान ने हाल ही में हुए उपचुनाव में भाजपा के लिए प्रचार किया था। अब देखना ये है कि बिहार में कौन सा ऊँट किस करवट बैठता है।