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‘हिंदुओं में मुसलमानों का खौफ जरूरी’ : ’72 हूरें’ की रिलीज से पहले डायरेक्टर को कट्टरपंथी दे रहे गाली, माँ से रेप की धमकी

बहुप्रतीक्षित फिल्म ’72 हूरें’ की रिलीज से पहले इसके डायरेक्टर संजय पूरन सिंह चौहान को सोशल मीडिया पर धमकियाँ और गालियाँ दी जा रहीं हैं। यह फिल्म 26 /11 मुंबई आतंकी हमले पर आधारित है जो इस्लामी आतंकवाद के काले चेहरे को उजागर करेगी। इसी बात से नाराज कट्टरपंथियों ने फिल्म के निर्देशक की सोशल प्रोफ़ाइल पर न सिर्फ अपशब्द कहे हैं बल्कि उन्हें नुकसान पहुँचाने की भी कसमें भी खाई हैं।

राशिद खान नाम के एक व्यक्ति ने लिखा, “तुम्हारा टाइम आ गया है। मा*र चो&^।” “अपनी माँ को भेज, वेश्या की औलाद। तेरा धर्म ख़राब हो गया है और इसलिए अब तू हमारे मज़हब को अपमानित कर रहा है।”

इसी तरह एक अन्य मुस्लिम यूजर ने डायरेक्टर संजय पूरन सिंह चौहान की माँ को रेप की धमकी दी है। उसने संजय से पूछा है कि उन्होंने अपने कमेंट बॉक्स को बंद क्यों किया। खुद ही इसकी वजह बताते हुए यूजर ने इसे मुसलमानों का डर बताया और इस डर को अच्छी बात बताया।

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डायरेक्टर संजय को मुशर्रफ अहमद नाम के यूजर ने ‘सुअर’ और ‘हिजादा’ (हिजड़ा) कहा है। कुछ मुस्लिम यूजर्स ने डायरेक्टर संजय को गाली देने के बहाने हिन्दू आस्थाओं पर भी हमला किया। उन्होंने ‘गाय का पेशाब’ जैसे हिंदू-विरोधी अपशब्दों का इस्तेमाल किया। ध्यान रहे कि गोमूत्र पर टिप्पणी कर के पुलवामा आत्मघाती बम हमले के गुनहगार जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी आदिल अहमद डार ने कट्टरपंथियों के बीच खूब सुर्खियाँ बटोरी थीं।

दरअसल चरमपंथी अपनी कालपनिक दुनिया में रह कर अन्य धर्मों को कमतर बताते हैं। तमाम कट्टरपंथी हिंदुओं को मूर्तिपूजक और नर्क की आग में जलने योग्य बताते हैं। इसी विचारधारा के एक अन्य यूजर ने लिखा, “अरे, तब तुम जहन्नुम (नरक की आग) में जलोगे तब तुम्हे सच पता चलेगा। तुम बस इस्लाम के ख़िलाफ़ फ़िल्म बनाना चाहते हो तो कोई बात नहीं। बस तब तक इंतजार करें जब तक तुम्हारा अंत नहीं हो जाता।

शबनम नाम की एक यूजर ने ’72 हूरें’ के डायरेक्टर के मर जाने की दुआ की। उन्होंने जानबूझकर ‘हिंदू धर्म’ को ‘हिंदू-गंदवाद’ कह कहकर धार्मिक मान्यताओं का भी मजाक उड़ाया। इन तमाम कमेंट के अलावा कई कट्टरपंथियों ने संजय पूरन सिंह चौहान के इंस्टाग्राम पर कई बार ऑडियो और वीडियो कॉल कर उन्हें तंग किया।

इन यूजर्स के अलावा रानी चटर्जी नाम से प्रसिद्ध भोजपुरी अभिनेत्री सबीहा शेख फिल्म 72 हूरें को मुस्लिम विरोधी करार देते हुए इसे बनाने वालों पर निशाना साधा था। तब उन्होंने कहा था, “फिल्म में कुरान का गलत चित्रण किया गया है। कुरान किसी की जान लेना नहीं सिखाता। अगर 72 हूरें के निर्माता या डायरेक्टर ने कुरान पढ़ा होता तो वो ऐसे डायलॉग इस्तेमाल न करते।”

सबीहा शेख ने क़ुरान में किसी की जान लेने वाली लाइन दिखाने की चुनौती देते हुए इसे समाज में गलत संदेश देने वाली फिल्म करार दिया था।

गौरतलब है कि IMDb के अनुसार, ‘72 हूरें‘ वर्तमान समय में लोकप्रियता के आधार पर सबसे प्रतीक्षित फिल्म है। इसने ग़दर-2 को भी पीछे छोड़ दिया है। करीब 30.4 प्रतिशत दर्शक इस फिल्म के रिलीज होने का इंतजार कर रहे हैं। यह फिल्म 7 जुलाई, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। पवन मल्होत्रा और अमीर बशीर इस फिल्म की मुख्य भूमिका में हैं।

महाराष्ट्र की NCP के बाद अब जदयू और सपा की बारी? राजभर और चिराग ने की भविष्यवाणी, कुमारस्वामी बोले – कर्नाटक में भी होगा कोई अजित पवार

महाराष्ट्र में NCP में फूट पड़ गई है। पार्टी संस्थापक शरद पवार के भतीजे अजित नेता प्रतिपक्ष से उप-मुख्यमंत्री बन गए। कुल 9 NCP विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद अन्य राज्यों में भी इस तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कर्नाटक से लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश में भी नेताओं ने इस प्रकरण पर टिप्पणियाँ की हैं। उधर शरद पवार शक्ति प्रदर्शन में लगे हुए हैं। उन्होंने भाजपा पर जाति-धर्म की राजनीति कर समाज को बाँटने का आरोप मढ़ दिया और कहा कि वो नए सिरे से पार्टी को शुरू करेंगे।

राजनीतिक संगठन SSSB (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि महाराष्ट्र मत देखिए, यूपी को भी देखिए। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के कई सांसद-विधायक दल छोड़ कर सरकार के विस्तार में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग शपथ लेते भी दिखेंगे, जबकि कई लोकसभा के टिकट के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक जुगाड़ बिठा रहे हैं। उन्होंने भविष्यवाणी की कि यूपी में भी महाराष्ट्र वाला ही खेल होगा।

ओमप्रकाश राजभर ने कहा, “जो रवैया रहा है अखिलेश यादव का, उससे उनके नेता नाराज हैं। इन नेताओं को लगता है कि यहाँ उनका भविष्य नहीं है। मुस्लिम कई खेमों में बँट गए हैं, कई भाजपा के भी साथ हैं। जब सपा की सरकार थी, तब किसी मुस्लिम को डिप्टी CM तक नहीं बनाया गया। क्या सिर्फ भाजपा का डर दिखा कर वोट माँगेंगे? नौकरी बाँटने समय मुस्लिमों को नजरअंदाज किया गया। कई सपा विधायक मेरे से भी संपर्क में हैं।”

उन्होंने इस दौरान विपक्षी दलों पर बसपा सुप्रीमो मायावती को नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में हुए सर्वे में भी बसपा को गेमचेंजर बताया गया है। उन्होंने कहा कि 13 प्रांतों में मायावती का जनाधार है और मायावती को साथ नहीं जोड़ना भी टूट का एक बड़ा कारण होगा। उन्होंने कहा कि गठबंधन में मायावती, कॉन्ग्रेस और जयंत सिंह – सब होने चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस भी मायावती को अपने मोर्चे में लेना चाहती है, टूट के जिम्मेदार अखिलेश यादव होंगे जिन्होंने मायावती को गठबंधन में नहीं लिया।

वहीं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और JDS नेता ने कहा कि महाराष्ट्र में जो डरावना प्रकरण हुआ है, उसके बाद उन्हें डर है कि कर्नाटक का अजित पवार कौन बन कर उभरेगा। कर्नाटक में कॉन्ग्रेस की सरकार है और वहाँ भी सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच अनबन की खबरें आती रहती हैं। JDS इससे पहले कॉन्ग्रेस के समर्थन से सरकार चला चुकी है। एचडी कुमारस्वामी फ़िलहाल कॉन्ग्रेस से नाराज चल रहे हैं।

उधर लोजपा (रामविलास) नेता चिराग पासवान ने भी बिहार में महाराष्ट्र जैसा प्रकरण होने की बात कही है। चिराग पासवान ने कहा कि नीतीश कुमार की जदयू के कई सांसद-विधायक उनके साथ संपर्क में हैं। वहीं सुशील मोदी ने भी जल्द जदयू के टूटने की बात कही है। उन्होंने कहा कि इसी डर से नीतीश कुमार अपने विधायकों-सांसदों से एक-एक कर के मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि जदयू नेता कभी भी राहुल गाँधी या तेजस्वी यादव को अपने नेता के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे।

महाराष्ट्र के झटके से विपक्ष की बैठक भी खिसकी, अब 17-18 जुलाई को बेंगलुरु में जुटान: कॉन्ग्रेस बोली- इसी मीटिंग में तय करेंगे एजेंडा

पटना में हुई विपक्ष की बैठक के बाद नीतीश कुमार से लेकर ममता बनर्जी, राहुल गाँधी, अखिलेश यादव यहाँ तक कि शरद पवार भी विपक्षी एकता की ढींगे हाँक रहे थे। लेकिन महाराष्ट्र की सियासत में मची उठापटक के बाद विपक्ष की बैठक पर ही संकट गहराता नजर आ रहा है। पहले यह बैठक 12-13 जुलाई को शिमला में होनी थी। फिर तारीख आगे बढ़ाकर 13-14 जुलाई को बेंगलुरु में तय की गई। अब यह बैठक 17-18 जुलाई को बेंगलुरु में ही होगी।

कॉन्ग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद केसी वेणुगोपाल ने ट्वीट कर कहा है, “पटना में आयोजित हुई विपक्षी दलों की बैठक की सफलता के बाद अब अगली बैठक 17-18 जुलाई 2023 को बेंगलुरु में होगी। हमने फासीवादी और अलोकतांत्रिक ताकतों को हराने के लिए अटूट संकल्प लिया है। देश को आगे बढ़ाने के लिए हमारे पास एक साहसिक दृष्टिकोण है।”

इससे पहले, नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा था कि 10 से 14 जुलाई तक बिहार विधानसभा का सत्र चलेगा। इसके बाद 20 जुलाई से 11 अगस्त तक संसद का मानसून सत्र है। ऐसे में विपक्ष की अगली बैठक अब मानसून सत्र के बाद होगी। 

चूँकि विपक्ष की बैठक बार-बार आगे बढ़ रही है। इसलिए ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि महाराष्ट्र में मचे सियासी खींचतान के चलते ही विपक्ष ने बैठक की तारीख आगे बढ़ाने का फैसला किया होगा। बता दें कि रविवार (2 जुलाई 2023) को एनसीपी नेता अजित पवार पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल समेत 9 विधायकों के साथ शिंदे सरकार में शामिल हो गए थे। इससे न केवल राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (NCP) के वजूद बल्कि विपक्ष की कथित एकता पर भी सवालिया निशान लगने शुरू हो गए हैं।

गौरतलब है कि बिहार की राजधानी पटना में 23 जून 2023 को विपक्ष की पहली बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में 15 विपक्षी पार्टियों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद विपक्षी पार्टियों की दूसरी बैठक 12 जुलाई को शिमला में होने वाली थी। इस बैठक को लेकर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि शिमला में बैठककर एजेंडा तैयार किया जाएगा। हालाँकि बाद में शरद पवार ने कहा कि विपक्ष की अगली बैठक 13-14 जुलाई को बेंगलुरु में होगी। मगर अब खबर है कि बेंगलुरु में होने वाली बैठक की नई तारीख आगे बढ़ाकर 17-18 जुलाई रखी गई है।

सबके परचम जलाने हैं ताकि धरती पर रहे एक ही परचम… जलते फ्रांस में विध्वंस की लपटें वही, जिस संत्रास को 1300 साल से झेल रहा भारत

फ्रांस जल रहा है। भारत को यह संत्रास झेलने का अनुभव 13 सौ साल पुराना है। कल नालंदा राख हुआ था। आज पेरिस शोलों के हवाले है। विध्वंस की लपटें वही हैं। स्थापित धर्म, परंपराओं और सत्ताओं को उलटने के एकसूत्रीय कार्यक्रम में लगी विक्षिप्त ऊर्जा बिल्कुल वही है। सबके परचम जलाने हैं ताकि एक ही परचम धरती पर बाकी रहे। और वो है इस्लाम का परचम।

एक विचार के रूप में इस्लाम की ऊर्जा का उदय मनुष्य जाति के इतिहास में ध्यान देने योग्य महाघटना है। ढाई हजार वर्षों में धरती पर अनेक नए विचार आए, जिन्होंने बाद में अपने अलग आवरणों में विशाल जनसमुदाय को अपने पीछे खड़ा किया। इस्लाम उनमें सबसे नया है, जो 14 सौ साल पहले अरब के रेतीले भूभाग में आया। आज 50 से अधिक देश उसके हैं और कोई देश ऐसा नहीं हैं, जहाँ तेजी से फैलते-पसरते उसे न देखा जा रहा हो। इस्लाम जहाँ है, समाचारों में है। भारत में कश्मीर, बंगाल होकर केरल तक समाचार माध्यमों में उसकी चर्चा अधिकतर नकारात्मक है और फ्रांस समेत ऐसा ही अन्य देशों में है।

इस्लाम की ऊर्जा किन कामों में बहते हुए संसार भर में ‘लोकप्रियता’ बटोर रही है? भारत को लें तो ‘द केरल स्टोरी’ में हजारों लड़कियों के धर्मांतरण के दुष्चक्र में वह काम आ रही है। दो साल पहले ‘कश्मीर फाइल्स’ में उसने कश्मीरी हिंदुओं के सफाए की झलक दिखाई थी। अजमेर की लड़कियों पर फिल्म आई तो दरगाह के दूसरे दर्शन हो जाएँगे। फिल्में छोड़िए, मीडिया में देखिए।

आतंकी और अलगाववादी संगठनों की ऐसी हरियाली फसल किसी और विचार परंपरा में नहीं है। कोई बौद्ध बम बाँधकर फटता नहीं मिलेगा, किसी जैन को एके-47 लहराते नहीं देखा, कोई पारसी पत्थरबाजी करते हुए नहीं देखा गया। दस हजार साल की लंबी यात्रा से गुजरकर आया कोई हिंदू दिन में पाँच बार लाउडस्पीकरों पर यह शोर करते हुए नहीं मिलेगा कि उसका विचार ही सर्वश्रेष्ठ है, इसके बराबर कोई नहीं है। वे सब शांतिपूर्वक अपनी उपासनाओं में लगे हैं। जीवनयापन के लिए दूसरे आवश्यक काम उन्हें दिन भर व्यस्त रखते हैं। आस्था के विचार चौबीस घंटे भीतर-बाहर जोर नहीं मारते रहते।

एक विचार के रूप में इस्लाम का डिजाइन धमाकेदार है। जैसे धम्म से आकर बीच सभा में कोई धमककर बैठ जाए! केवल बैठ ही नहीं जाए, सबका ध्यान इस विषय में भी चाहे कि सबके बीच उसे ‘सर्वश्रेष्ठ’ की आदरपूर्ण दृष्टि से सिर झुकाकर ही देखा जाए। न केवल देखा जाए, बल्कि माना भी जाए। बिना किसी प्रश्न या तर्क के। धम्म से आ टपकने को अशिष्टता मानने की सोचिए ही मत।

दावे स्वयंभू हैं, रोचक हैं, ध्यान देने योग्य हैं और निस्संदेह टकराव का प्रथम बिंदु भी। अंतिम होने का दावा सबसे ऊपर है। अंतिम पुस्तक, अंतिम पैगंबर। प्रलय तक अब कोई दूसरा संभव नहीं। एकमात्र सर्वश्रेष्ठ ईश्वर उनका है, जिसे अरबी में अल्लाह का संबोधन है। अरबी न आती हो तो उसे अपनी भाषा में भी कुछ और नहीं कह सकते। कलमा किसी ईश्वर या अल्लाह की स्तुति नहीं है। वह द्वार पर आकर सरेंडर की शपथ है कि अल्लाह सबसे महान है, सबसे बड़ा है और मोहम्मद उसके पैगंबर हैं।

करोड़ों लोगों द्वारा दिन में पाँच बार दोहराई जाने वाली इस्लाम के विचार की इस आधारभूत गलाफाड़ पंक्ति में शांति या करुणा, भक्ति या काव्य, अध्यात्म या अनुभूति का सौंदर्य खोजना रेत से पानी निकालना होगा। यह केवल एक दोहराई जाने वाली शपथ है, जिसमें अपना कोई अनुभव नहीं है। बुद्धि का उपयोग किए बिना केवल रटी हुई एक मशीनी प्रक्रिया।

अगर आप इसे नहीं मानते हैं तो दोजख की आग आपके लिए ही सुलगाई गई है। जिसने मान लिया वह दोजख से मुक्त और जन्नत का अधिकारी हो गया। जिसने नहीं माना या जिसने दूसरे ईश्वर या किताब को माना, वह काफिर है, मुशरिक है। यानी अपराधी है। अपराध की सजा तय है। काफिर होने की सजा, संसार के सारे गैर मुस्लिमों के लिए है। इस्लाम के इस महादर्शन को भले ही वे जानते हों या नहीं। करोड़ों निर्दोष नागरिक अपराधी ठहरा दिए गए हैं। यह एक भयभीत करने वाला विचार है, जहाँ अल्लाह के खौफ का जिक्र, उसकी मोहब्बत से बहुत ज्यादा हैं।

दीन की दावत, मूर्तिपूजा या बहुदेववादी होने के गंभीर अपराध से मुक्त होने का एक आकर्षक प्रस्ताव है। एक दीनदार मुस्लिम धीमी या तीव्र गति से इस एकसूत्रीय एजेंडे पर है कि अधिक से अधिक लोगों को दीन के दायरे में लाकर इस बात का पुण्य कमाए कि उसने एक कम्बख्त काफिर को मुस्लिम बनाकर दोजख की आग से बचा लिया। एक सुनियोजित योजना के अंतर्गत पूर्णत: समर्पण के भाव से जो जहाँँ है, दावत का गुलदस्ता लिए ही घूम रहा है। जैसे कोई मछलीमार जाल लेकर किनारे पर बैठा हो।

अपनी लंबी भारत यात्राओं के समय मेरे अनेक ट्रेवल एजेंट और ड्राइवर मुस्लिम थे। यूपी की एक यात्रा में मेरा ड्राइवर पटौदी का था, जो सैफ अली खान की एक छोटी पारिवारिक रियासत रही। पटौदी की प्रसिद्धि में मंसूर, शर्मिला और सैफ बड़े कारण हैं। क्रिकेट और सिनेमा के शिखर पुरुष और वैवाहिक संबंध। लगभग तीस साल आयु का वह ड्राइवर पटौदियों से बहुत असंतुष्ट था, जो केवल नाम के नवाब थे और जिन्होंने साधारण मुस्लिमों के लिए कभी कुछ नहीं किया। न अच्छे स्कूल बनवाए, न अस्पताल। विवश होकर उस जैसे अनेक युवा दिल्ली और यूपी में टैक्सियाँ चला रहे हैं।

उन दिनों मैं कुरान का अध्ययन कर रहा था। बातचीत के मेरे लहजे में उस ड्राइवर ने इस्लाम के प्रति मेरी जिज्ञासा और भारत में इस्लाम के प्रति मेरे किताबी ज्ञान की भनक पकड़ी। अब वह दीनहीन ड्राइवर पटौदी के मुस्लिमों की दुर्दशा और नवाब परिवार के प्रति क्रोध को छोड़कर दीन की दावत पर उतारू हो गया।

‘गणेशजी में आदमी के शरीर पर हाथी का सिर, शिवलिंग की पूजा, बंदर तो बंदर है कैसे हनुमानजी, राम भगवान हैं तो उनकी पत्नी को कोई कैसे उठा ले गया, कृष्ण की रासलीलाएँ, इतने सारे देवी-देवता, पत्थर में भगवान, पत्थर तो पत्थर है!’ उसकी आँखें चमक रही थीं। मैं मुस्कुराकर सुन रहा था।

मैंने कहा, एक हिंदू के जीवन में इन सब मान्यताओं का महत्व एक सीमा तक है। बहुत लोग नहीं भी मानते। बहुत आपकी तरह आलोचना में ही जीते हैं। कोई अंतर नहीं पड़ता। गणेश जी की रूप-आकृति या वानर हनुमान के कारण हमारी रोजमर्रा की जिंदगी तबाह नहीं होती। हमारे देवता हमारे मित्र हैं। हम उनके साथ बहुत खुश हैं, क्योंकि उन्होंने किसी के लिए डराने का टेंडर नहीं भरा और न ही किसी को नर्क की आग जलाकर बैठे हैं। आप अपने, अपनी कौम और अपने नवाब साहब के हाल देखिए। और अल्लाह को अपने हिसाब की दुनिया ही चाहिए तो वही एक झटके में सब वैसा ही क्यों नहीं कर देता?

एक अल्लाह और उसके एक पैगंबर का महान विचार लेकर कोई मुसलमान जीवन और अध्यात्म की किस ऊँचाई पर पहुँचा? कैसा जीवन उसे मिला? वह स्वयं कितना सुखी और संपन्न है? उसने कैसे कर्म किए, उसके क्या परिणाम हुए? उसे कैसा वर्तमान मिला और उसने कैसा भविष्य बनाया? अगर वह आज दुर्दशा में है तो क्यों है और उसी अनुपात में कोई हिंदू, जैन, बौद्ध, पारसी या सिख ‘मूर्ति, अग्नि या ग्रंथ पूजा का अक्षम्य अपराध’ करते हुए भी उससे अधिक सुखी और दानी समाज क्यों हैं? आपकी एक किताब ने आपको कौन से मार्ग से किस मंजिल पर पहुँचाया और दूसरे अपनी कई किताबों से कहाँ पहुँचे या भटके, ये कौन तय करेगा?

वह चकरा गया। गंतव्य तक आते-आते वह इस बात पर ठहर चुका था कि सारे धर्म एक जैसे हैं। कुछ लोग ही गफलत पैदा करते हैं। अब वह एक विचार के रूप में इस्लाम के पीछे पागल हुए अपने जैसे लोगों की हालत पर अधिक तटस्थ होकर गौर कर रहा था। उसे यह ठीक लगा कि अगर अल्लाह या ईश्वर जैसा कोई सर्वशक्तिमान कहीं भी है तो उसकी दृष्टि में तो सारे मनुष्य एक बराबर ही होने चाहिए। वह क्यों किसी को डराएगा या किसी के पीछे पड़ने के लिए अनंतकाल की मानसिक और हिंसक दासता में अपने अनुयायियों को धकेलेगा।

जिन मुस्लिम दानिशमंदों ने एक विचार के रूप में इस्लाम के प्रलयंकारी प्रभाव और स्वभाव को समझा, वे चतुराई से स्वयं को ‘एथीस्ट’ कहते हुए किनारे लगे। लेकिन हाल ही के वर्षों में बात बदली है। आज ‘छिटके हुए इस्लामी’ अपने चेहरे पर एथीस्ट की क्रीम नहीं पोतते, वे ‘एक्स-मुस्लिम’ का गाढ़ा लेप लगाकर खुलेआम सामने आए हैं। इनमें से कई अपनी मूल सनातन पहचान में भी लौटने का साहस कर रहे हैं। उन्हें उनके सवालों के कोई जवाब नहीं मिले और वे नेत्रहीनों की तरह थोपी गई उधार मान्यताओं को ढोना मूर्खतापूर्ण मानते हैं। उनकी नजर में यह पीढ़ियों से भोगी जा रही घृणित गुलामी ही है।

दिल्ली प्रकाशन की पत्रिकाओं में दशकों तक विज्ञापन छपे- ‘वेदों में क्या है और हिंदू समाज के पथभ्रष्टक तुलसीदास।’ प्रकाशक का नाम था- विश्वनाथ। शायद ही किसी हिंदू ने इसे सिर काटने लायक गुस्ताखी माना हो। क्या जावेद अख्तर जैसे स्वयंभू एथीस्ट कभी अपनी अगली नज्म का शीर्षक ऐसा कुछ रख सकते हैं- ‘कुरान में क्या है?’ आदिपुरुष के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने भी यही टिप्पणी की है। कम से कम भारत में वे ऐसा कभी नहीं करेंगे। वे जानते हैं कि अगले ही दिन विचार की वह प्रलयंकारी ऊर्जा बांद्रा की किस बदबूदार गली से डरावने नारों का शोर लगाती हुई आकर क्या हाल कर डालेगी?

मजहबी आवरण में विचार का यह घातक वास्तु विचारणीय है। ध्यान देने योग्य यह भी है कि इस्लाम की महिमा दूसरों के गले उतारने पर हर समय उतारू कितने मुस्लिम संगठन आपको किसी नदी की सफाई, व्यापक वृक्षारोपण, भू-जल संरक्षण, ग्राम या नगर सुधार, पर्यावरण या ट्रैफिक सुधार, महिला शिक्षा, बाल विवाह, परदा प्रथा, प्राकृतिक आपदा, सामाजिक कुरीतियों, रोजगार के स्टार्ट अप या नवाचार जैसे मानव हितैषी रचनात्मक कामों में लगे दिखाई देते हैं?

इस्लाम का डिजाइन अपने अनुयायियों की पूरी ऊर्जा किसी मस्जिद, मदरसे, दरगाह, वक्फ, नमाज, हिजाब, किताब, कलमा, अल्लाह, रसूल, तौहीन, गुस्ताखी में ही लगाए रखता है। ओवरडोज हमेशा हानिकारक है। भले ही वह मजहब का ही क्यों न हो। और हानि सदा दूसरों की है। फिलहाल फ्रांस को ही देख लीजिए।

सिग्नल और ट्रैफिक ऑपरेशन की गलती से बालासोर ट्रेन हादसा, रेलवे की जाँच में सामने नहीं आई ‘साजिश’: CBI जाँच को देखते हुए सार्वजनिक नहीं की जाएगी रिपोर्ट

ओडिशा के बालासोर में हुए भीषण ट्रेन हादसे की CRS जाँच पूरी हो गई। इस जाँच में हादसे के पीछे किसी भी साजिश से इनकार किया गया। साथ ही सिग्नल और ट्रैफिक ऑपरेशन विभाग में तैनात कर्मचारियों की गलती को हादसे की वजह बताया गया। सीबीआई भी इस मामले की जाँच कर रही है। इसलिए रेलवे सीआरएस रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करेगा।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है, “बालासोर में हुए ट्रेन हादसे की CRS रिपोर्ट रेलवे द्वारा सार्वजनिक नहीं की जाएगी। चूँकि इस मामले की जाँच सीबीआई भी कर रही है। ऐसे में सीआरएस रिपोर्ट से सीबीआई जाँच प्रभावित हो सकती है। दोनों रिपोर्ट के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सूत्रों का कहना है कि सीआरएस रिपोर्ट में सामने आया है कि सिग्नलिंग और यातायात विभाग के कर्मचारियों की मानवीय भूल के कारण यह हादसा हुआ।”

सीआरएस ने बुधवार (28 जून, 2023) को अपनी रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि सिग्नल मेंटनेंस करने वाले अधिकारी ने नियम के तहत काम किया। उसने मेंटनेंस करने से पहले और उसके बाद क्रमशः डिस्कनेक्शन और रीकनेक्शन मेमो स्टेशन मास्टर को सौंपा था। इसका मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह सही था। लेकिन रेलवे ट्रैक से ट्रेन को निकलने की अनुमति देने से पहले सिग्नलिंग सिस्टम की जाँच के लिए सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया था।

यही नहीं, मेंटेनेंस अधिकारी द्वारा रीकनेक्शन मेमो जारी किए जाने के बाद बाद भी सिग्नलिंग स्टाफ काम कर रहा था। ऐसे में दुर्घटना के लिए स्टेशन के सिग्नलिंग विभाग के साथ ही ट्रैफिक ऑपरेशन विभाग भी जिम्मेदार है। रिले रूम में जाने के लिए बने प्रोटोकॉल में भी खामियाँ पाई गईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रिले रूम इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिग्नलिंग सिस्टम का सेंटर होता है। सारी चीजें यहीं से ऑपरेट होती हैं। इसकी जवाबदेही सिग्नलिंग विभाग और स्टेशन मास्टर दोनों की होती है।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कोरोमंडल एक्सप्रेस को मेन लाइन से जाने के लिए ग्रीन सिग्नल दिया गया था। लेकिन ट्रेन की दिशा बताने वाला ट्रैकिंग सिस्टम ट्रेन को लूप लाइन में जाने का सिग्नल दे रहा था। इसी वजह से यह हादसा हो गया। 

बता दें कि 2 जून, 2023 की शाम करीब 6:55 मिनट पर ओडिशा के बालासोर जिले के महानगा गाँव के पास कोरोमंडल एक्सप्रेस पटरियों से उतर गई थी। इसके बाद वह ट्रेन लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से टकरा गई। मालगाड़ी से टक्कर होने के बाद कोरोमंडल एक्सप्रेस के कुछ डिब्बे बगल वाली पटरी पर चले गए। इस पटरी पर दूसरी दिशा से यशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट ट्रेन आ गई और कोरोमंडल एक्सप्रेस के डिब्बों में जाकर टकरा गई। 

8 सिद्धियों में पारंगत 280 साल जीने वाला योगी, जिन्हें रामकृष्ण परमहंस ने कहा था – काशी के चलते-फिरते शिव: नदी में करते थे साधना, जहर भी बेअसर

भारत सिद्ध पुरुषों की भूमि रही है। यहाँ एक से बढ़ कर एक संत और योगी हुए हैं। किसी ने अपनी निश्छल भक्ति से लोगों के दिलों में जगह बनाई, तो किसी की चर्चा चमत्कारों के कारण खूब हुई। किसी ने ऐसी रचनाएँ की कि सैकड़ों वर्षों तक लोग उन्हें पढ़ते रहे तो किसी ने योग की ऐसी सिद्धि प्राप्त की कि उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं रहा। इन्हीं में से एक थे त्रैलंग स्वामी, जिन्हें स्वयं रामकृष्ण परमहंस ने ‘काशी के चलते-फिरते शिव’ कहा था। उनके चमत्कारों की चर्चा तब आम थी।

त्रैलंग स्वामी को गणपति सरस्वती के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा काशी में ही गुजारा। आश्चर्यजनक बात ये है कि ये लगभग 280 वर्षों तक जीवित रहे। सन् 1737 से लेकर 1887 तक इन्होंने वाराणसी को अपना निवास स्थान बनाया। इनके पिता का नाम नृसिंह राव तो माता का नाम विद्यावती था। 52 वर्ष की उम्र तक ये अपने माता-पिता की सेवा में ही लगे रहे, उन दोनों के निधन के बाद वो आध्यात्मिक खोज के लिए निकले। स्थानीय श्मशान भूमि में उन्होंने 20 वर्षों की कड़ी साधना की।

वो एक अन्य सिद्ध योगी लाहिड़ी महाशय के परम मित्र बने। दोनों योगियों को कई बार साथ में ध्यान में बैठे देखा गया था। त्रैलंग स्वामी को कई बार धोखे से विष दे दिया गया, लेकिन उन्हें इससे कभी कोई नुकसान नहीं हुआ। वो अक्सर गंगा नदी की बहती धारा पर बैठ कर साधना करते दिखाई देते थे। इतना ही नहीं, त्रैलंग स्वामी कई बार गंगा की धारा के भीतर भी घुस जाते थे और कई दिनों बाद किसी अन्य स्थान पर निकलते थे। भीषण गर्मी में भी मणिकर्णिका घाट की तपती शिलाओं पर बैठ तपस्या करते थे।

ये सब सिर्फ सुनी-सुनाई बातें नहीं हैं, बल्कि लिखित में भी दर्ज हैं। उन्हें कभी-कभी ही लोगों ने भोजन ग्रहण करते देखा होगा, लेकिन उनका शरीर विशाल था और उनका वजन भी बहुत अधिक था। वो प्रायः नग्न ही रहते थे, लेकिन उन्हें अपनी ही नग्नता का आभाष नहीं रहता था। 19वीं सदी की बात है, जब अंग्रेज आ चुके थे। उस दौरान उन्हें नग्न अवस्था में देख कर पुलिस ने जेल में बंद कर दिया। जेल में ताला लगा था, लेकिन त्रैलंग स्वामी को छत पर आराम करते हुए देखा गया

उन्हें फिर से पकड़ कर जेल में कैद कर दिया गया और पुलिस का पहरा बढ़ा दिया गया, लेकिन इसके बावजूद वो जेल की छत पर टहलते हुए नजर आए। उनके बारे में एक कथा प्रचलित है कि एक बार एक नास्तिक व्यक्ति उनके लिए बाल्टी भर चूना लेकर आ गया और दही बता कर उन्हें पिला दिया। आश्चर्य कि उन्हें कुछ नहीं हुआ, लेकिन वो व्यक्ति ही छटपटाने लगा। वो स्वामीजी से अपनी जान की भीख माँगने लगा। तब त्रैलंग स्वामी ने समझाया कि तुम्हारा जीवन मेरे जीवन से एकाकार है।

उन्होंने बताया कि जैसे अणु-परमाणु में ईश्वर विराजमान है, ऐसे ही उनके भी पेट में है और उन्हें इसका आभास है, इसीलिए उन्हें कुछ नहीं हुआ। उन्होंने उस व्यक्ति को क्षमा कर के आगे से बुरे कर्म न करने की चेतावनी दी। एक बार काशी नरेश की तलवार उन्होंने नदी में फेंक दी थी। जब वो गुस्सा हुए तो उन्होंने नदी से वैसी ही 2 तलवारें निकाल कर पहचानने को कहा कि उनकी कौन सी है। वो नहीं पहचान पाए। तब त्रैलंग स्वामी ने समझाया कि जो तुम्हारा है उसे तुम नहीं पहचान पा रहे, तो जो तुम्हारा नहीं है उसके लिए इतना क्रोध?

इससे पहले वैराग्य और परमात्मा पर चर्चा चल रही थी, ऐसे में त्रैलंग स्वामी ने धिक्कारते हुए कहा कि अब सारा वैराग्य खत्म हो गया? उनकी महिमा ऐसी थी कि स्वयं रामकृष्ण परमहंस ने उनके दर्शन किए थे। सड़क पर ही दोनों गले मिले। शिष्यों से परमहंस ने कहा कि ये काशी के चलते-फिरते शिव हैं, स्वयं विश्वनाथ हैं। बताया जाता है कि सन् 1881 में एक एकादशी के दिन उन्होंने अपने प्राण का त्याग किया था। उन्होंने नेपाल से लेकर कई अन्य स्थानों का भ्रमण किया था। स्वामी विवेकानंद ने भी उनके दर्शन किए थे।

स्वामी विवेकानंद ने त्रैलंग स्वामी को प्रणाम कर के उनकी चरणधूलि अपने माथे से लगाई। आज भी जब आप वाराणसी के पंचगंगा घाट पर जाएँगे तो वहाँ वेणीमाधव मंदिर के पास ही त्रैलंग स्वामी का आश्रम है, जहाँ उनकी प्रतिमा और शिवलिंग स्थापित है। त्रैलंग स्वामी के बारे में एक और खास बात ये है कि वो अधिकतर मौन व्रत में रहा करते थे। रामकृष्ण परमहंस ने उनसे सवाल किया था कि ईश्वर एक है या अनेक? इशारों में ही उन्होंने इस गूढ़ प्रश्न का उत्तर दे दिया था।

उन्होंने समझाया था कि अगर समाधिस्थ होकर देखा जाए तो ईश्वर एक है, लेकिन जब तक मैं-तुम, जीव-जगत और नाना प्रकार के ज्ञान विद्यमान हैं, तब तक वो अनेक हैं। रामकृष्ण की उनमें इतनी श्रद्धा थी कि वो एक बार खीर बना कर ले गए थे और उन्हें अपने हाथों से खिलाया था। अपनी पुस्तक ‘Autobiography of a Yogi‘ में परमहंस योगानंद भी त्रैलंग स्वामी के बारे में लिखते हैं। उन्होंने बताया है कि अगर आज जीसस क्राइस्ट न्यूयॉर्क की सड़कों पर उतर कर अपनी अलौकिक शक्तियों का प्रदर्शन करने घूमें, तो लोगों में वही विस्मय और श्रद्धा का जन्म होगा जो वाराणसी की गलियों में लोगों के मन में त्रैलंग स्वामी के प्रति था।

उन्होंने पुस्तक में एक घटना के बारे में बताया। एक बार उनके मामा ने त्रैलंग स्वामी को लोगों से घिरे बैठे देखा। उन्होंने किसी तरह वहाँ पहुँच कर भक्ति भाव से उनका चरण स्पर्श किया। उन्हें ये देख कर आश्चर्य हुआ कि उनका जीर्ण रोग उसी क्षण समाप्त हो गया था। त्रैलंग स्वामी भूख-प्यास और मान-अपमान से परे हो गए थे। लेखक एवं फोटोग्राफर रॉबर्ट अरनेट ने लिखा है कि त्रैलंग स्वामी के चमत्कारों को किस्से-कहानियाँ कह कर ख़ारिज नहीं किया जा सकता, लोगों ने अपनी आँखों से सब देखा है।

उमाचरण मुखोपाध्याय ने त्रैलंग स्वामी की जीवनी लिखी है, जिनमें उनकी शिक्षाओं के बारे में भी बताया गया है। त्रैलंग स्वामी बंधन को इस दुनिया से जुड़ाव का कारण मानते थे। उनका कहना था कि संसार का पूरी तरह त्याग कर देना ईश्वर में स्वयं को स्थापित कर देना ही मुक्ति है। उन्होंने कहा था कि जब किसी चीज की इच्छा ही नहीं रह जाती है, सारी इच्छाओं का त्याग कर के मनुष्य स्वर्ग का अनुभव करता है। उन्होंने इन्द्रियों को मनुष्य का दुश्मन बताते हुए कहा था कि अगर वो नियंत्रित हैं, तभी आपके मित्र हैं।

आप शायद शरद पवार जी को जानते नहीं… महिला पत्रकार से बोले देवेंद्र फडणवीस, जिस BJP नेता का महाराष्ट्र में सबने माना लोहा उनका जवाब

देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis)। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री। वर्तमान में राज्य के उप मुख्यमंत्री (Maharashtra Deputy CM)। पहले एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व में शिवसेना (Shiv Sena) में हुई टूट और अब अजित पवार (Ajit Pawar) की अगुवाई में राष्ट्रवादी काॅन्ग्रेस पार्टी (NCP) में पड़ी फूट के पीछे इस बीजेपी नेता की महत्वपूर्ण भूमिका होने की बात कही जाती है। एक इंटरव्यू में फडणवीस ने माना है कि इस उम्र में भी शरद पवार (Sharad Pawar) राजनैतिक तौर पर पूरी तरह सक्रिय हैं। ये उनकी ही क्षमता है जिसकी वजह से एक-दूसरे को पसंद नहीं करने वाले विपक्षी दल भी हाल में एक साथ नजर आए हैं।

फडणवीस ने यह बात न्यूज एजेंसी एएनआई की संपादक के स्मिता प्रकाश के पाॅडकाॅस्ट (ANI Podcast with Smita Prakash) में कही है। यह पाॅडकाॅस्ट 3 जुलाई 2023 की शाम 5 बजे जारी किया जाएगा। यह पाॅडकाॅस्ट ऐसे समय में सामने आया है, जब महाराष्ट्र में नया सियासी उलटफेर देखने को मिला है। अजित पवार महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री बन गए हैं। उनके सहित नौ एनसीपी नेता महाराष्ट्र की शिंदे सरकार का हिस्सा बने हैं। अजित पवार का कहना है कि NCP के 40 विधायक उनके साथ हैं। वहीं शरद पवार पार्टी पर कब्जा कायम रखने की कोशिशों में लगे हैं। इसी क्रम में सतारा में उन्होंने शक्ति प्रदर्शन किया है।

एएनआई ने पाॅडकाॅस्ट का जो वीडियो जारी किया है, उसमें स्मिता प्रकाश फडणवीस से पूछती हैं कि 2019 में क्या हुआ? किसने किसको धोखा दिया? जवाब में फडणवीस कहते हैं कि धोखा उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) ने दिया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में बीजेपी और शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला था। लेकिन उद्धव ठाकरे के ध्यान में आया कि नंबर्स इस प्रकार हैं कि वे बीजेपी को छोड़कर दूसरे लोगों के साथ चले जाएँ तो उनकी सरकार बन सकती है। इसी महत्वाकांक्षा के चलते उन्होंने काॅन्ग्रेस और एनसीपी से बातचीत शुरू की। स्पष्ट बहुमत के बावजूद वे 10 दिन तक हमें टाल रहे। इससे हमें पता चल गया कि उन्होंने तय कर लिया है कि वे चीफ मिनिस्टर बनेंगे।

फडणवीस ने कहा, “इस बीच एनसीपी की ओर से कुछ लोगों ने हमसे बातचीत की। उन्होंने कहा कि हमें साथ में आना चाहिए। हमने शरद पवार जी के साथ मीटिंग की। शरद पवार जी ने इस बात को माना कि महाराष्ट्र में स्थायी सरकार देंगे। बीजेपी और एनसीपी साथ में आएँगे। लेकिन एक सुबह पवार साहब पीछे हट गए। उस समय अजीत पवार ने कहा कि इतने आगे जाने के बाद मैं वापिस नहीं आ सकता हूँ।” उल्लेखनीय है कि 23 नवंबर 2019 की सुबह-सुबह देवेंद्र फडणवीस और अजीत पवार ने शपथ ली थी। लेकिन 72 घंटे में दोनों का इस्तीफा भी हो गया था।

पाॅडकाॅस्ट के जारी वीडियो में स्मिता प्रकाश ने विपक्षी एकता को लेकर भी फडणवीस से सवाल किया है। उन्होंने उन्होंने पूछा कि गाॅडफादर जैसी भूमिका में दिखने वाले शरद पवार स्वास्थ्य कारणों से अब बैक स्टेज जाते दिख रहे हैं। ऐसे में विपक्षी एकता में एनसीपी का क्या वजूद है? जवाब में फडणवीस ने कहा, “आप शायद शरद पवार जी को जानते नहीं है। विपक्षी एकता को ड्राइव करने वाले पवार साहब ही हैं। सारे विपक्षी दल जो एक-दूसरे का मुँह भी नहीं देख सकते, ऐसे लोगों को भी एक-दूसरे के सामने बैठाने की पवार साहब में क्षमता है। उनके साथ स्वास्थ्य की समस्या है, पर वे फिट हैं। इस उम्र में भी वे राजनीतिक तौर पर पूरी तरह अलर्ट हैं।”

मणिपुर में अमित शाह के प्रयासों ने दिखाया रंग, प्रदर्शनकारियों ने 2 महीने बाद हाईवे खोला: केंद्रीय बल होगी तैनात, SC ने माँगी डिटेल रिपोर्ट

पिछले लम्बे समय से हिंसाग्रस्त रहे मणिपुर से एक राहत की खबर आई है। रविवार (2 जुलाई 2023) को कुकी समुदाय से जुड़े 2 संगठनों ने लगभग 2 महीनों से बंद नेशनल हाइवे को खोलने का फैसला किया है। इस फैसले के पीछे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा किए गए शांति प्रयास बताए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार ने 3 जुलाई (सोमवार) को सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि मणिपुर के हालात में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख़ तय की है।

2 जुलाई को यूनाइटेड पीपुल्स फ्रंट (UPF) और कुकी नेशनल ऑर्गेनाइजेशन (KNO) ने हाईवे से जाम हटाने की घोषणा एक प्रेसनोट के जरिए की है। प्रेसनोट में बताया गया है कि 3 मई 2023 से कुकी समुदाय को जातीय हिंसा का सामना करना पड़ा है जिसमें सैकड़ों लोग घायल और हजारों विस्थापित हुए है। बताया गया है कि इस विवाद से राज्य के साम्प्रदायिक सौहार्द को काफी नुकसान पहुँचा है। इस पत्र में मणिपुर के अधिकारीयों से जान-माल की सुरक्षा की अपील की गई है।

पत्र में आगे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की कोशिशों को देखते हुए NH2 पर कांगुई (कांगपोकपी) में नाकाबंदी को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के पीछे राज्य में शांति और सद्भाव बहाल करना है। साथ ही लोगों की जरूरतों पर भी ध्यान देना है। यह फैसला तमाम नागरिक समाज संगठनों, ग्राम प्रधानों, युवाओं और महिला नेताओं के साथ लम्बी बातचीत के बाद लिया गया है। संगठन ने मणिपुर में केंद्रीय बलों की तैनाती की सराहना की और कहा कि जब पूरे प्रदेश में सुरक्षा बहाल हो जाएगी तो कुकी संगठन अपने लोगों को वहाँ से हटा लेंगे।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की है। उच्चतम न्यायालय ने सरकार द्वारा उठाए गए उन कदमों की जानकारी माँगी है जिस से मणिपुर में शाँति बहाली के साथ लोगों के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए 10 जुलाई 2023 की तारीख तय की गई है। इस से पहले केंद्र व राज्य सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश सॉलिसिटर जनरल ने बताया था कि मणिपुर के हालातों में सुधार हो रहा है।

‘खून बहाना और लोगों को काटना ही उनकी विचारधारा’: फ्रांस में दंगों के बीच मौलाना तौहिदी का पुराना वीडियो वायरल, चेताते हुए कहा था- कट्टरपंथ का कूड़ा बटोर रहे पश्चिमी देश अंजाम भुगतेंगे

फ्रांस में चल रहे दंगों के बीच सोशल मीडिया पर इस्लामी मौलाना मोहम्मद तौहिदी का एक पुराना बयान वायरल है। इस बयान में वह चेतावनी दे रहे हैं कि कैसे किसी देश में इस्लामी प्रवासियों को जगह देना खतरनाक होता है। इंटरव्यू 9 सितंबर 2022 का है। इसमें उन्होंने बता रखा है कि कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों को मुस्लिम देश जगह नहीं देते, लेकिन उन्हीं कट्टरपंथियों का पश्चिमी देश स्वागत करते हैं और बाद में उन्हें अंजाम भुगतना पड़ता है।

मौलाना, इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का उदाहरण देते हुए पूछते हैं कि ये IRGC जैसे संगठन मुस्लिम देशों में नहीं चल पाते लेकिन ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में स्वतंत्र होकर अपना काम करते हैं। ये लोग टोरंटो में खुलेआम अपना झंडा फहरा देते हैं। आखिर किसी को कैसे नहीं पता चला कि उनकी विचारधारा ही खून बहाना और लोगों को काटने की हैं।

इस्लामी कट्टरपंथ पर बात करते हुए उन्होंने समझाया कि जब घर का सामान खरीदा जाता है तो कुछ कूड़ा निकलता है। इसके कूड़े को लोग बाहर फेंकते हैं और नगर निगम उसे उठाता है। कूड़ा घर में रखने वाली चीज नहीं है इसले बीमारी और कीटाणु पनपते हैं। इसी तरह समाज में भी कूड़ा है। आपके सामने हत्यारे, अपराधी और घिनौनी मनासिकता है जो कहती है कि आप महिला हैं इसलिए घर पर रहें या फिर आप अपनी पूरी बॉडी को ढककर रखें क्योंकि वो प्राइवेट पार्ट है। कुछ कहते हैं ये यहूदी है ये ईसाई है इनके साथ ऐसा होना चाहिए। ये मानसिकता घिनौनी है और इसका सम्मान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “इस्लामी देशों में कोई संकट नहीं है। मुस्लिम देश सब अच्छा कर रहे हैं। सिर्फ कुछ जगह दिक्कत हैं। पर मैं कहूँगा संकट आप लोगों पर हैं। आप मुस्लिम देश जाते हैं। वहाँ का वो कचरा उठा लाते हैं जिन्हें खुद मुस्लिम देश निकालकर बाहर करना चाहते हैं या जेल में रखकर उन्हें समाज से दूर करना चाहते हैं। आप उन्हीं लोगों को सस्ते में उठा लाते हैं लेकिन इन इस्लामी कट्टरपंथियों को काम नहीं करना।”

तौहिदी ने ये भी साफ कहा कि इस मामले में पोलैंड की नीतियाँ बहुत सही हैं। वहाँ कोई इस्लामी कट्टरपंथ नहीं है और न ही कोई आतंकी हमला वहाँ हुआ हैं। क्योंकि जैसे ही उन्हें लगा कि ये समस्या वाली चीज है उन्होंने उस पर शिकंजा कस लिया। उसी के उलट फ्रांस हैं। वहाँ कट्टरपंथी आते हैं। संसाधनों का इस्तेमाल करते हैं। वाशिंगटन जाकर संसद तक में बैठ जाते हैं। फिर ईरान का समर्थन करते हैं। हिजाब पहनकर कॉन्ग्रेस के लगाए प्रतिबंधों के खिलाफ जाते हैं। क्यों? क्योंकि उनकी शुरुआती विचारधारा ही सड़ी हुई है। इसलिए जब कोई पश्चिमी देश उन्हें अपने यहाँ रहने देता है तो ऐसा ही है कि आप उन्हें अपने आप बिस्तर बिछाकर उन्हें लाकर सुला दें। यही पश्चिम देशों की परेशानी है। सवाल होता है कि क्या इससे कट्टरपंथी ताकतवर और पश्चिमी देश कमजोर हो रहे हैं तो जवाब है हाँ यही बात है।

जाति-धर्म के नाम पर समाज में पैदा की जा रही खाई’: NCP में टूट के बाद शरद पवार का शक्ति प्रदर्शन, बागियों को अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर-EC को पत्र

महाराष्ट्र में शरद पवार की NCP में बगावत हो गई और पार्टी संस्थापक शरद पवार के भतीजे अजित ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल होने का फैसला लिया। इसके बाद उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया गया। उन्होंने पार्टी सिंबल और नाम पर भी दावा ठोक दिया है। उनके साथ छगन भुजबल और प्रफुल्ल पटेल जैसे वरिष्ठ नेता भी हैं। इधर इस बगावत के एक दिन बाद सोमवार (3 जुलाई, 2023) को शरद पवार भी समर्थकों के बीच पहुँचे और उन्हें संबोधित किया, शक्ति-प्रदर्शन किया।

अजित पवार के ही आवास पर एक बैठक हुई, जिसमें सत्ता की साझेदारी के फॉर्मूले पर चर्चा की गई। इस बैठक में इस पर मंथन हुआ कि किसे कौन सा मंत्रालय दिया जाएगा। बता दें कि NCP से कुल 9 मंत्री बने हैं। शरद पवार ने बागी विधायकों को अयोग्य घोषित किए जाने के लिए स्पीकर और चुनाव आयोग को भी लिखा है। NCP की तरफ से लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि 1999 में पार्टी की स्थापना करने वाले शरद पवार अब भी पार्टी के मुखिया हैं। अजित पवार ने 53 में से 40 विधायकों के समर्थन का दावा किया है।

शरद पवार की बेटी और NCP की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने कहा है कि इस फूट से विपक्षी एकता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वो एक बहन के रूप में बड़े भाई अजित पवार से प्यार करती रहेंगी। कॉन्ग्रेस ने इस प्रकरण में शरद पवार का साथ देने का ऐलान किया है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि जनता की अदालत में शरद पवार अब लड़ाई लड़ेंगे। इधर शरद पवार ने सभी विधायकों को 5 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है, जिसके बाद नोटिस जारी किया जाएगा।

महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, जो सैकड़ों करोड़ रुपयों की वसूली के काण्ड में फँसे हुए हैं, उन्होंने शरद पवार के शक्ति-प्रदर्शन में उनका साथ देते हुए कहा कि देश भर में पवार साहेब पार्टी को आगे ले जा रहे हैं। वहीं शरद पवार ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि समाज में खाई पैदा की जा रही है, जाति-धर्म के नाम पर दरार पैदा की जा रही है। उन्होंने कहा कि हमलोग उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र की सेवा कर रहे थे, लेकिन कुछ लोगों ने हमारी सरकार गिरा दी। देश में कई जगह ऐसा हुआ।

NCP संस्थापक शरद पवार ने 5 जुलाई को पार्टी के सभी पदाधिकारियों एवं जन-प्रतिनिधियों की बैठक बुलाते हुए नई शुरुआत की बात की है। उन्होंने राज्य की जनता से अपील की कि वो एकजुट होकर ताकत दिखाए। मातोश्री में उद्धव ठाकरे भी अपनी पार्टी के पदाधिकारियों के साथ बैठक कर रहे हैं। शरद पवार को देश के कई बड़े विपक्षी नेताओं ने फोन कर समर्थन दिया, जिनमें सोनिया गाँधी और ममता बनर्जी शामिल हैं। डिंपल यादव ने सुप्रिया सुले से बात की। जयंत पाटिल शरद पवार के साथ हैं।