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बकरीद पर बच्चों को पहनाई इस्लामी टोपी, फिर करवाई नमाज की प्रैक्टिस: गुजरात के 2 स्कूलों की वीडियो वायरल, हिंदू संगठन भड़के

गुजरात में बकरीद के मौके पर स्कूलों में बच्चों से नमाज पढ़ाने की प्रैक्टिस कराने के 2 मामला सामने आए हैं। इनमें एक मामला कच्छ का है। दूसरा महेसाणा का है। दोनों ही जगह स्कूल में एक्टिविटी के नाम पर बच्चों से एक्टिविटी के नाम नमाज की प्रैक्टिस करवाई गई।

कच्छ की घटना मुंद्रा के पर्ल स्कूल की है। वहाँ स्कूली बच्चों के सिर पर नमाजी टोपी पहनाकर उसे नमाज की प्रैक्टिस करवाई गई। बाद में ये वीडियो स्कूल के पेज पर डाला गया जिससे ये पूरे सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। इसे देख लोग गुस्से में आ गए।

घटना के प्रकाश में आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जाँच के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि वह इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। अगर कुछ गलत पाया जाता है तो फिर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है या उसकी मान्यता भी रद्द हो सकती है। ये टीम जरूरी जाँच के लिए माता-पिता, बच्चों और स्कूल प्रबंधन से जाँच करेगी।

इस पूरे विवाद के बाद स्कूल ने इस संबंध में माफी माँग ली है। सोशल मीडिया से भी इस वीडियो को हटा दिया गया है। स्कूल की प्रिंसिपल प्रीति वाघवानी ने मीडिया को बताया, “ईद के त्योहार के मौके पर हमने स्कूली बच्चों के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया था, हम समाज के लिए अलग-अलग धर्मों के त्योहार मनाने के लिए इस तरह के कार्यक्रम करते हैं। हम स्कूल में बहुत सारी गतिविधियाँ करते हैं, लेकिन हमारा इरादा किसी को भी चोट पहुंचाना नहीं था। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि दूसरी बार ऐसी कोई गलती नहीं होगी।”

इसी तरह महेसाणा के एक प्राइवेट अंग्रेजी मीडियम स्कूल में भी ऐसी घटना सामने आई। जब इसकी सूचना बच्चों के अभिभावकों को लगी तो उन्होंने जमकर हंगामा काटा। वहीं हिंदू संगठन भी इस पर भड़क गए और स्कूल के बाहर प्रदर्शन हुई। बताया जा रहा है कि स्कूल में बच्चों को सिखाया जा रहा था कि नमाज कैसे पढ़ी जाती है। इस प्रैक्टिस की फोटोज भी अभिभावकों के पास थी। विरोध के नाम पर स्कूल के बाहर रामधुन और हनुमान चालीसा का पाठ हुआ।

मामले को तूल पकड़ता देख स्कूल के मालिक राशी गौतम ने कहा कि वे हिंदू हैं। उन्होंने मुस्लिम धर्म को बढ़ावा देने का कोई काम नहीं किया। देश में जो त्योहार मनाए जाते हैं वे बस उसकी जानकारी बच्चों को दे रहे थे इसीलिए स्कूल में बकरीद का सेलीब्रेशन रखा गया था। स्कूल ने इस हरकत पर माफी माँग ली है। हालाँकि वीएचपी ने माँग की है कि ऐसे आयोजन स्कूल में न किए जाएँ।

बता दें कि गुजरात के अलावा  खंडवा के सेंट पाॅयस सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बकरीद से पहले छात्रों से नमाज और कलमा पढ़वाने का मामला सामने आया है। मिशनरी स्कूल में 28 जून को हुई इस घटना की जाँच के आदेश एसडीएम ने दि

‘योगी जी ने सपना पूरा किया’: प्रयागराज में 76 गरीब परिवारों को UP के CM ने सौंपी घर की चाबी, गैंगस्टर अतीक अहमद से छुड़ाई गई जमीन पर बने हैं 2 रूम के फ्लैट

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (YP CM Yogi Adityanath) ने गैंगस्टर अतीक अहमद से जब्त की गई जमीनों पर फ्लैट बनाकर उसकी चाबियाँ गरीब लाभार्थियों को सौंप दी। सीएम योगी ने शुक्रवार (30 जून 2023) को प्रयागराज पहुँचकर पहले फ्लैट का निरीक्षण किया, उसके बाद उनका उद्घाटन करके उनकी चाबियाँ सौंपी। इस दौरान सीएम ने वहाँ पौधारोपण भी किया।

ये सारे फ्लैट मारे गए गैंगस्टर एवं नेता अतीक अहमद (Atiq Ahmad) से जब्त की गई जमीनों पर बनाई गई हैं। अतीक ने इन जमीनों को या तो कब्जा किया था या फिर अवैध कमाई से डरा-धमककर औने-पौने दामों पर खरीदा था। जिन लोगों को फ्लैट की चाबियाँ मिलीं, उन्होंने इस पर खुशी जाहिर की है।

जमीनों को अपने कब्जे में लेने के बाद योगी सरकार ने इन्हें गरीबों को आवंटित करने की बात कही थी। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यहाँ 76 फ्लैटों का निर्माण कराया गया। इसके बाद 9 जून 2023 को लॉटरी सिस्टम से लाभार्थियों का चुनाव किया गया।

सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, बीजेपी विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह और फूलपुर सांसद केशरी देवी पटेल उपस्थित थे। इसके अलावा, अन्य भाजपा के अन्य नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता वहाँ मौजूद थे। इस दौरान CM योगी ने भी 768 करोड़ रुपए के 226 परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास भी किया।

लाभार्थियों को मकान की चाबियाँ सौंपने से पहले जाहिदा फातिमा नाम की एक लाभार्थी भावुक हो गई। उन्होंने बताया, “मुझे बहुत खुशी है। यह मेरा और मेरी माँ का सपना था कि हमारा खुद का मकान हो। हम 30 साल से किराए के मकान में रह रहे हैं। हम योगी जी का जितना धन्यवाद करें, उतना कम है।”

इन फ्लैट्स में एक बेडरूम, एक लिविंग रूम, एक रसोईघर, एक टॉयलेट, बाथरूमू, बालकनी, बिजली, सीवेज और पार्किंग की सुविधा है। ये फ्लैट्स अनुसूचित जाति और जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, शारीरिक रूप से दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों को आरक्षण के आधार पर आवंटित किए गए हैं। इन 76 फ्लैट के लिए 6,000 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था।

प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के एक अधिकारी ने बताया कि लूकरगंज इलाके में चार मंजिल के दो टावर बनाए गए हैं। इनमें फ्लैट की कीमत 6 लाख रुपए है। लाभार्थियों को सिर्फ 3.5 लाख रुपए का भुगतान करना होगा। वहीं, केंद्र सरकार 1.5 लाख रुपए और राज्य सरकार 1 लाख रुपए की सब्सिडी देगी।

बता दें कि सितंबर 2020 में लूकरगंज में गैंगस्टर अतीक अहमद के कब्जे से 15,000 वर्ग फीट जमीन छुड़ाई गई थी। इसके बाद साल 2021 में सीएम योगी ने इस जमीन पर गरीबों के लिए फ्लैट बनाने का एलान किया था। 26 दिसंबर 2021 को सीएम योगी ने फ्लैट के निर्माण के लिए भूमि पूजन किया था। 

मुंबई की जिस सोसायटी में लाया गया था बकरा, वहाँ गणेश मंदिर का हो चुका है विरोध: मस्जिद की भी डिमांड कर चुके है मुस्लिम, शिंदे की शिवसेना ने मोहसिन को निकाला

बकरीद पर हलाल करने के लिए बकरा लाने को लेकर मुंबई के मीरा रोड स्थित जेपी इंफ्रा हाउसिंग सोसायटी में विवाद खड़ा हो गया था। अब इस मामले में बकरा लाने वाले मोहसिन शेख के खिलाफ सोसायटी की एक महिला ने एफआईआर दर्ज कराई है। शिंदे गुट वाली शिवसेना ने उसे पार्टी से भी निकाल दिया है। यह बात भी सामने आई है कि करीब एक साल पहले सोसायटी में मुस्लिमों ने गणेश मंदिर का विरोध किया था। मंदिर के पास ही मस्जिद बनाने की डिमांड रखी थी।

मोहसिन के खिलाफ IPC की धारा 354 (महिला की गरिमा भंग करने के इरादे से हमला), 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान) और 506 (आपराधिक कृत्य के लिए धमकी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसके खिलाफ सोसायटी के एक 63 साल की महिला ने शिकायत की है। मोहसिन पर छेड़छाड़ और छाती में धक्का मारने के आरोप लगाया है।

सोसायटी में रहने वाले गिगराज कुमावत का अनुसार मोहसिन शेख को हाल ही में शिंदे की शिवसेना ने वार्ड नंबर-8 का शाखा प्रमुख बनाया था। इस पद पर नियुक्ति के बाद सोसायटी के लोगों ने उसे बधाई भी दी थी। लेकिन राजनीतिक धौंस दिखाने के लिए वह सोसायटी में बकरा लेकर आ गया, जबकि इसके लिए न तो सोसायटी और न ही बिल्डर ने कोई अनुमति दी थी।

कुमावत ने बताया, “मोहसिन शेख ने सोसायटी के नियम तोड़े हैं। पहले बिल्डर ने बकरे रखने के लिए तमाम सुविधाओं के साथ एक शेड बनाकर दिया था। हालाँकि अब निर्माण कार्य के चलते वह शेड हटा दिया गया। इसके बाद बिल्डर ने मुस्लिमों को एक अलग जमीन पर बकरे रखने के लिए कहा था। बिल्डर ने वह जमीन किराए पर लेकर मुस्लिमों को दी थी। लेकिन मोहसिन सोसायटी के भीतर ही बकरे रखन चाहता था। उसने धमकी दी थी कि अगर सोसायटी के भीतर उसे जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई तो वह बकरों को अपार्टमेंट के अंदर ले आएगा।”

ऑपइंडिया को मिला मोहसिन का पोस्टर

कुमावत के अनुसार बकरों को लाने पर जब सोसायटी के लोगों ने आपत्ति जताई तो शुरुआत में पुलिस मोहसिन और उसकी बीवी यास्मीन खान का पक्ष ले रही थी। पुलिस ने अपार्टमेंट के अंदर बकरों को ले जाने की अनुमति दे दी थी। उनका कहना था कि सोसायटी के अंदर किसी को बकरे जाने से रोकने का कोई कानून नहीं है। हालाँकि सोसायटी में बकरा नहीं कटेगा इसका भरोसा पुलिस ने दिया था।

मोहसिन को शिवसेना ने पार्टी से किया बाहर

इस मामले में शिवसेना विधायक प्रकाश धुर्वे ने कहा है, “मोहसिन शेख को पार्टी से निकाल दिया गया है। गलत काम करने वालों की पार्टी में जगह नहीं है।” वहीं मोहसिन शेख ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया है कि उसने शिवसेना से खुद इस्तीफा दिया है। उसने कहा, “मैं इस मामले को राजनीतिक रंग नहीं देना चाहता। यह एक व्यक्तिगत मामला है और हजारों मुस्लिम मेरे साथ खड़े हैं। इसलिए मैंने पार्टी और पद से इस्तीफा दे दिया। मैं इसे सांप्रदायिक नहीं बनाना चाहता। मैं और मेरा मजहब दोनों शांतिप्रिय हैं। कुछ कट्टरपंथी दुश्मन इस घटना को धार्मिक रंग देकर देश की शांति बिगाड़ना चाहते हैं। अब वे अपनी गलती छिपाने के लिए राजनीति कर रहे हैं और मेरे खिलाफ FIR दर्ज करने के लिए पुलिस पर दबाव डाल रहे हैं।”

बता दें कि मोहसिन शेख के इस्तीफा देने के दावे से पहले ही एक स्थानीय निवासी ने कहा था कि शिवसेना ने उसे पार्टी से हटा दिया है। इसका वीडियो भी ऑपइंडिया के पास है। पार्टी ने भी उसे निकाले जाने की ही बात कही है।

‘मुस्लिमों ने की थी मस्जिद की माँग’

जेपी इंफ्रा निवासी गिगराज कुमावत का दावा है कि मोहसिन शेख समेत अन्य मुस्लिमों ने करीब एक साल पहले सोसायटी में गणेश मंदिर के उद्घाटन का विरोध किया था। उन्होंने कहा, “एक साल पहले सोसायटी में गणेश मंदिर का उद्घाटन किया गया था। उस समय भी मुस्लिम लोगों ने इसका विरोध किया था। उन्होंने मंदिर के पास के परिसर में एक मस्जिद बनाने की माँग की थी।” हालिया मामले को लेकर उन्होंने कहा है कि मोहसिन सोसायटी के नियमों का पालन नहीं कर रहा था। साथ ही वह यहाँ रह रहे लोगों को धमकी देकर अपना सियासी पावर दिखाने की कोशिश कर रहा था।

बता दें कि इस मामले में मोहसिन की पत्नी यास्मीन खान ने भी एक प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें उसने मारपीट का आरोप लगाया है। इसको लेकर कुमावत का कहना है, “ऐसा कुछ तो हुआ ही नहीं है। सोसायटी में हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। सबूतों के लिए उसके फुटेज देखे जा सकते हैं।”

क्या है मामला

मुंबई के मीरा रोड स्थित जेपी इंफ्रा हाउसिंग सोसाइटी में बकरीद से पहले 27 जून 2023 को मोहसिन शेख और उसकी बीवी यास्मीन खान बकरीद से पहले कुर्बानी के लिए दो सफेद बकरे अपार्टमेंट में ले जाते दिखे थे। CCTV में कैद इसका फुटेज सोशल मीडिया में वायरल भी है। हाउसिंग सोसायटी के निवासियों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि वे आवासीय परिसर में बकरों की कुर्बानी नहीं होने देंगे। 

मोहसिन और उसकी बीवी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस को बताया था कि उन्हें न सिर्फ गालियाँ दी गईं, बल्कि महिलाओं के लिए भी अपमानजनक शब्द बोले गए। ऑपइंडिया से बात करते हुए निवासियों ने मोहसिन की हरकतों को सोसायटी के लिए समस्या बताया था। उन्होंने कहा था कि मोहसिन ने सोसायटी के कई नियमों को तोड़ा है। पहले आम सहमति थी कि कुर्बानी के लिए कोई भी पशु को लेकर बिल्डिंग में नहीं आएगा। निवासियों ने खुद को पीड़ित बताते हुए मुस्लिम दम्पति पर कानूनी कार्रवाई की माँग की थी।

(मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से यहाँ क्लिक कर पढ़ सकते हैं)

ट्विटर पर ₹50 लाख जुर्माना, केंद्र सरकार के कहने पर भी नहीं हटाए थे ट्वीट: हाई कोर्ट ने कहा- आप किसान नहीं जो कानून नहीं पता हो

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार (30 जून 2023) को ट्विटर (Twitter) द्वारा फरवरी 2021 और 2022 के बीच केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए ब्लॉकिंग आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया और उस पर जुर्माना लगाया है। इस दौरान केंद्र ने सोशल मीडिया कंपनी को दस आदेशों में 39 यूआरएल को हटाने का निर्देश दिया था।

न्यायमूर्ति कृष्णा एस दीक्षित ने सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर पर 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है और इसे 45 दिन के भीतर जमा करने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि अगर कंपनी निश्चित अवधि में जुर्माना कर्नाटक राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण को नहीं करती है तो उसे प्रतिदिन 5,000 रुपए का फाइन देना होगा।

जस्टिस दीक्षित ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी ने समय पर ब्लॉक करने की केंद्र सरकार के निर्देश का पालन नहीं किया और ना ही उसका कारण बताया। कोर्ट ने कहा कि ट्विटर किसान या कानून से अपरिचित कोई सामान्य व्यक्ति नहीं है, बल्कि एक अरबपति कंपनी है।

न्यायाधीश ने कहा कि फैसले में लगभग आठ सवालों पर चर्चा की गई। इनमें ये शामिल था कि क्या उस ट्विटर यूजर को कारण बताया जाना चाहिए जिसके ट्वीट को ब्लॉक किया गया है और क्या ट्वीट को ब्लॉक करना एक अवधि के लिए होना चाहिए या क्या ट्वीट को अनिश्चित काल के लिए ब्लॉक किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति दीक्षित ने कहा कि वह केंद्र सरकार के रुख से सहमत हैं कि उसके पास न केवल ट्वीट्स को ब्लॉक करने की शक्ति है, बल्कि वह खातों को भी ब्लॉक कर सकती है। कोर्ट ने दोनों पक्षों की व्यापक दलीलें सुनने के बाद 21 अप्रैल को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

उधर, कोर्ट में सोशल मीडिया साइट ट्विटर ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार को सोशल मीडिया खातों को ब्लॉक करने के लिए सामान्य आदेश जारी करने का अधिकार नहीं है और आदेशों में कारण शामिल होने चाहिए, जिन्हें उपयोगकर्ताओं को सूचित किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही ट्विटर ने यह भी कहा गया है कि अवरुद्ध करने का आदेश केवल उस स्थिति में जारी किया जा सकता है, जहाँ सामग्री की प्रकृति सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत निर्धारित आधारों के अनुरूप हो। यदि ऐसे अवरुद्ध आदेशों में कारण दर्ज नहीं किए गए थे तो वह बाद में उस कारण के निर्मित होने की संभावना होगी।

सोशल मीडिया दिग्गज ने आगे तर्क दिया कि संविधान के अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालयों का रिट क्षेत्राधिकार) का आह्वान संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन तक ही सीमित नहीं है। इसलिए ट्विटर पर अदालत का दरवाजा खटखटाने पर कोई रोक नहीं है।

दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने तर्क दिया कि ट्विटर अपने यूजर की ओर से नहीं बोल सकता। इसलिए, उसके पास याचिका दायर करने का अधिकार नहीं है। केंद्र ने यह भी कहा कि चूँकि ट्विटर एक विदेशी इकाई है और सरकार के दस अवरोधक आदेश मनमाने नहीं थे, इसलिए कंपनी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 19 (भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार) के तहत मौलिक अधिकारों से पीछे नहीं हट सकती।

उच्च न्यायालय के समक्ष दायर अपनी याचिका में ट्विटर ने तर्क दिया कि अकाउंट ब्लॉकिंग एक असंगत उपाय है और संविधान के तहत यूजर के अधिकारों का उल्लंघन करता है। दरअसल, केंद्र सकार द्वारा निर्देशित कुल 1,474 खातों और 175 ट्वीट्स में से ट्विटर ने केवल 39 यूआरएल को ब्लॉक करने संबंधित निर्देश को चुनौती दी।

याचिका में कहा गया है कि विचाराधीन आदेश स्पष्ट रूप से मनमाने हैं, और प्रक्रियात्मक और मूल रूप से आईटी अधिनियम की धारा 69ए के अनुरूप नहीं हैं। ट्विटर ने यह भी तर्क दिया कि संपूर्ण खातों को ब्लॉक करने का निर्देश आईटी अधिनियम की धारा 69ए का उल्लंघन है।

केंद्र सरकार ने अपने जवाब में कहा कि कुछ ट्विटर खातों को ब्लॉक करने के निर्देश राष्ट्रीय और सार्वजनिक हित में और लिंचिंग और भीड़ हिंसा की घटनाओं को रोकने के लिए जारी किए गए थे। सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि वह अपने नागरिकों को खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह इंटरनेट प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

इलाज के लिए एडमिट हुई प्रेगनेंट महिला, डॉ सहद उल्लाह ने प्राइवेट पार्ट की फोटोज खींचकर वायरल की: FIR दर्ज, आशा वर्कर प्रदर्शन पर उतरीं

असम के गुवाहाटी के नाजिरा गेलेकी प्राइमरी हेल्थ सेंटर में एक गर्भवती महिला के प्राइवेट पार्ट की फोटो क्लिक करके उसे लीक करने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि लक्ष्मीजन टी क्षेत्र की एक प्रेगनेंट महिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर सहाद उल्लाह के पास एडमिट हुई थी। उसी ने उस ईलाज के दौरान महिला के प्राइवेट पार्ट की फोटोज ली। इसके बाद ये फोटो हेल्थ सेंटर के ग्रुप में शेयर कर दी। धीरे-धीरे ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई।

जब लोगों को इस हरकत का पता चला तो डॉ सहाद उल्लाह के खिलाफ प्रदर्शन होने लगा। हेल्थ सेंटर की आशा वर्कर्स ने घटना के खिलाफ प्रोटेस्ट किया। एक आशा वर्कर ने बताया कि डॉ सहाद उल्लाह ने प्रेगनेंट महिला की फोटोज लेकर इसे वायरल किया जिससे पूरे महिला समुदाय का अपमान हुआ है।

इस संबंध में आशा वर्करों ने एक मेमोरेंडम ज्वाइंट डायरेक्ट्रेट ऑफ हेल्थ को भी दिया है ताकि इस मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई हो। दूसरी ओर असम टी ट्राइब स्टूडेंट एसोसिएशन ने डॉ उल्लाह के खिलाफ एफआईआर भी गेलेकी पुलिस थाने में करवाई है। उन्होंने इसे मेडिकल एथिक्स का उल्लंघन बताते हुए डॉक्टर पर कार्रवाई की माँग की है।

वहीं ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन ने शर्मनाक हरकत की निंदा करते हुए डॉक्टर को फौरन गिरफ्तार करने की माँग की है। उन्होंने बताया कि घटना का पता तब चला जब क्लिप वायरल हुई। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल पुलिस ही अब इस मामले में पीड़ित को न्याय दिला सकती है। महिला के पति ने भी डॉक्टर के विरुद्ध शिकायत दे दी है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले गाजियाबाद के खोड़ा में महिला के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था। इनमें से एक डॉ शाकिब को गिरफ्तार किया गया था जिसके बाद पता चला था कि इन लोगों ने महिला को इंजेक्शन देकर उसके साथ दरिंदगी की। जब महिला होश में आई तो वो निर्वस्त्र थी। उसने सवाल पूछे तो पता चला कि शाकिब ने महिला की अश्लील वीडियो बनाई है और अगर महिला ने मुँह खोला तो वो उसे वायरल कर देगा।

अमेरिका में मेरिट की जीत, नस्ल के आधार पर एडमिशन खत्म: आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ओबामा पति-पत्नी दुखी

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (29 जून 2023) को Affirmative Action जैसे एक तरह के आरक्षण पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया, जिसकी चर्चा दुनिया भर में हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालयो में नस्‍ल के आधार पर होने वाले एडमिशन को खारिज कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा है कि नस्‍ल को अब एडमिशन का आधार नहीं माना जाएगा। 

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने दशकों से चली आ रहीं उच्च शैक्षिक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह पलट दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राष्‍ट्रपति जो बाइडन (Joe Biden) और पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा (Barack Obama) दुखी हैं। इस फैसले से अश्‍वेत और एशियाई अमेरिकी छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने देश से सबसे पुराने निजी विश्वविद्यालय हार्वर्ड विश्वविद्यालय और चैपल हिल स्थित सबसे पुराने सरकारी विश्वविद्यालय उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय (UNC) की परंपराओं को खारिज कर दिया। इसके तहत एडमिशन के दौरान नस्‍ल को सबसे बड़ा कारक माना जाता था।

सुप्रीम कोर्ट ने दो अलग-अलग फैसलों में कहा कि ये प्रथाएंँ 14वें संशोधन में दिए गए समान सुरक्षा की गारंटी का उल्लंघन करती हैं। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने दो विश्वविद्यालयों की नस्ल-आधारित प्रवेश परंपराओं को खारिज करने के लिए अदालत की राय ली थी।

चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने 6-3 बहुमत से मिली राय के बाद अपने फैसले में इस परंपरा को पलट दिया। उन्‍होंने कहा कि ये परंपराएँ नस्ल को नकारात्मक तरीके से नियोजित करते हैं और इसमें नस्लीय रूढ़िवादिता शामिल है और तार्किक बिंदुओं की कमी है।

उन्होंने कहा, “हमने एडमिशन प्रोग्राम को कभी भी इस तरह से चलाने की अनुमति नहीं दी है और हम आज भी ऐसा नहीं करेंगे। दूसरे शब्दों में कहें तो विद्यार्थियों के साथ एक व्यक्ति के रूप में उसके अनुभवों के आधार पर व्यवहार किया जाना चाहिए, नस्ल के आधार पर नहीं।”

पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनकी पत्नी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से दुखी हैं। ओबामा ने अपनी पत्नी के ट्वीट पर जवाब देते हुए कहा, “और अधिक न्यायपूर्ण समाज बनाने की दिशा में सकारात्मक पहल कभी भी पूर्ण उत्तर नहीं थी। लेकिन, उन छात्रों की पीढ़ियों के लिए, जिन्हें अमेरिका के अधिकांश प्रमुख संस्थानों से व्यवस्थित रूप से बाहर रखा गया था – इसने हमें यह दिखाने का मौका दिया कि हम इससे कहीं अधिक योग्य हैं।”

उन्होंने कहा कि सकारात्मक कार्रवाई नीतियों ने उन्हें और उनकी पत्नी मिशेल सहित छात्रों की पीढ़ियों को यह साबित करने की अनुमति दी कि हम उनके हैं। ये नीतियाँ यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक थीं कि नस्ल की परवाह किए बिना सभी छात्रों को सफल होने का अवसर मिले।

माँ बनने वाली हैं IAS टीना डाबी, सरकार से माँगी नॉन फील्ड पोस्टिंग: पाकिस्तानी हिंदुओं ने दिया था ‘दूधो नहाओ पूतो फलो’ का आशीर्वाद

राजस्थान के जैसलमेर की फेमस जिलाधिकारी टीना डाबी माँ बनने वाली हैं। जानकारी के मुताबिक सितंबर में टीना अपने बच्चे को जन्म देंगी। इससे पहले उन्होंने राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें जयपुर में फिलहाल नॉन फील्ड पोस्टिंग दी जाए। उसके बाद वो मैटरनिटी लीव पर भी जाएँगी।

बता दें कि टीना डाबी साल 2015 की आईएएस टॉपर थीं। उन्होंने 2018 में पहले आईएएस अतहर खान से निकाह किया था। लेकिन बाद में उनकी शादी टूट गई। दोनों ने अलग-अलग जगह शादी कर ली। टीना डाबी की दूसरी शादी पिछले साल अप्रैल में IAS अधिकारी प्रदीप गवांडे हुई है। इसके बाद वो मीडिया में पाकिस्तान से विस्थापित हुए हिंदुओं से बातचीत करने के लिए चर्चा में आईं।

उसी दौरान पाकिस्तानी बुजुर्ग महिलाओं ने कलेक्टर टीना डाबी को बेटा होने का आशीर्वाद दिया था। इस पर टीना ने मुस्कुराकर कहा था कि वह बेटा-बेटी में उन्हें कोई फर्क नहीं समझतीं। उस समय किसी को उनकी प्रेगनेंसी के बारे में नहीं पता था। सिर्फ ये खबर आई थी कि हिंदुओं से उन्हें संतान सुख का आशीर्वाद मिला है। लेकिन अब जब उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर नॉन फील्ड पोस्टिंग की माँग की तो इस बारे में सबको पता चल गया।

टीना डाबी ने अपनी प्रेगनेंसी की पुष्टि करते हुए बताया कि उन्होंने जयपुर में नॉन फील्ड पोस्टिंग के साथ ये भी माँग की है कि उन्हें काम के दौरान ज्यादा प्रेशन न मिले। मालूम हो कि टीना फिलहाल जैसलमेर की जिलाधिकारी हैं। कुछ दिन में ट्रांसफर लिस्ट आएगी तो शायद उसके बाद उन्हें जयपुर भेज दिया जाए। इसके लिए वह अभी से तैयारी कर रही हैं। उन्होंने अपने सामान को जयपुर भिजवा दिया है।

गौरतलब है कि टीना डाबी आईएएस टॉप करने के बाद और पुरानी शादी की वजह से सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रही थीं। सोशल मीडिया पर उन्हें 16 लाख लोग, ट्विटर पर 4 लाख, फेसबुक पर 4.23 लाख लोग फॉल करते हैं।

मेट्रो से DU गए PM मोदी: शताब्दी समारोह में ‘ऐसे प्रधानमंत्री कहाँ मिलते हैं’ कविता से स्वागत, बोले- यह केवल यूनिवर्सिटी ही नहीं, आंदोलन भी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (30 जून 2023) को दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के शताब्दी समारोह को संबोधित किया। इस दौरान विश्वविद्यालय के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह केवल एक यूनवर्सिटी ही नहीं, बल्कि आंदोलन भी है। उन्होंने अपने हालिया अमेरिकी दौरे का जिक्र करते हुए भारतीय शैक्षणिक संस्थानों की बढ़ती वैश्विक पहचान का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने दिल्ली विश्वविद्यालय के नाॅर्थ कैंपस के अकादमिक ब्लाॅक सहित तीन भवनों की आधारशिला भी रखी।

प्रधानमंत्री सुबह मेट्रो से सफर कर डीयू पहुँचे। इस दौरान उन्होंने मेट्रो में मौजूद छात्रों से बातचीत भी की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, “दिल्ली विश्वविद्यालय के कार्यक्रम के लिए मैं मेट्रो से जा रहा हूँ। युवाओं को अपने सह-यात्री के रूप में पाकर खुश हूँ।”

पीएम मोदी की मेट्रो यात्रा का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में उन्हें छात्रों के साथ बातचीत करते देखा जा सकता है। इस दौरान, छात्र काफी उत्साहित दिखाई दिए।

दिल्ली विश्वविद्यालय पहुँचने के बाद वाइस चांसलर प्रोफेसर योगेश सिंह ने ‘ऐसे प्रधानमंत्री कहाँ मिलते हैं…’ कविता के साथ PM मोदी का स्वागत किया। PM मोदी ने समारोह के संबोधित करते हुए कहा है, “इस विश्वविद्यालय ने अपने 100 वर्ष ऐसे समय में पूरे किए हैं, जब देश आजादी के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है। इस यूनिवर्सिटी का इतिहास बेहद खास है। यह सिर्फ एक यूनिवर्सिटी नहीं बल्कि एक आंदोलन है। इस यूनिवर्सिटी ने अपने लंबे इतिहास में हर आंदोलन को जिया है। बीते 100 सालों में डीयू ने अपने एहसासों और अपने मूल्यों को जीवंत रखा है।”

PM ने कहा, “कभी दिल्ली यूनिवर्सिटी में सिर्फ 3 ही कॉलेज थे। आज 90 से ज्यादा कॉलेज हैं। एक समय देश की अर्थव्यवस्था खस्ता हालत में थी। वहीं आज भारत की इकॉनमी टॉप-5 में पहुँच गई है। अब इस विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली लड़कियों की संख्या लड़कों से कहीं अधिक है। इसका मतलब यह है कि शिक्षण संस्थाओं की जड़ें जितनी गहरी होतीं हैं, देश की शाखाएँ उतनी ही अधिक ऊँचाइयों तक फैलती हैं।” PM ने यह भी कहा है कि अगले 25 सालों में देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे हो जाएँगे। उसी समय दिल्ली यूनिवर्सिटी अपनी स्थापना के 125 वर्ष मना रहा होगा। हमारा लक्ष्य 2047 तक देश को विकसित भारत का निर्माण करना है।

उन्होंने कहा कि हमारे एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स अब दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी गाइडिंग फोर्स और भारत की युवा शक्ति है। एक समय था जब स्‍टूडेंट्स किसी इंस्टीट्यूट में एडमिशन से पहले केवल प्‍लेसमेंट को प्राथमिकता देते थे। लेकिन अब युवा कुछ नया करना चाहता है। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में कुछ 100 स्‍टार्टअप थे। वहीं अब भारत में स्‍टार्टअप की संख्‍या 1 लाख पार कर गई है। AI और VR अब साइंस फिक्‍शन नहीं, हमारे जीवन का हिस्‍सा हैं। ड्राइविंग से लेकर सर्जरी तक, सभी कुछ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संभव हो रहा है।

कुरान जलाने के बाद स्वीडन के दूतावास में घुसे इराकी, झंडे में लगाई आग: भड़के 57 इस्लामी मुल्कों की सऊदी अरब में बैठक

बकरीद के दिन स्वीडन में मुस्लिमों के धार्मिक किताब कुरान जलाने की घटना (Quran Burning in Sweden) का इस्लामी मुल्कों में विरोध हो रहा है। कुरान की प्रति को यूरोपीय देश स्वीडन में रहने वाले एक इराकी नागरिक ने जलाया था। इस घटना के बाद गुरुवार (29 जून 2023) को इराक में दर्जनों प्रदर्शनकारी ने स्वीडन के दूतावास में घुस गए।

स्वीडन के स्टॉकहोम शहर के सबसे बड़ी मस्जिद के सामने कुरान को जलाने वाले शख्स का नाम सलवान मोमिका (Salwan Momika) है और उसकी उम्र 37 साल है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोमिका कई साल पहले इराक से भागकर स्वीडन आ गए थे।

मोमिका ने कुरान को जलाने से पहले उसे पैरों से कुचला, पन्ने फाड़े और फिर आग के हवाले कर दिया था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। मोमिका ने इस प्रदर्शन को जल्दी ही दोहराने की बात कही है। उन्होंने कहा, “10 दिनों के भीतर मैं स्टॉकहोम में इराकी दूतावास के सामने इराकी झंडा और कुरान जलाऊँगा।”

इस्लामी धर्मग्रंथ जलाने के विरोध में इराक के शिया नेता मुक्तदा अल-सद्र (Muqtada al-Sadr) के समर्थक दूतावास की इमारत में घुस गए और करीब 15 मिनट तक अंदर रहे। सुरक्षाबलों की तैनात करने ही वे वहाँ से निकल गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने स्वीडिश राजदूत को हटाने की माँग की।

इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पर्चे भी बाँटे। इन पर्चों में अरबी और अंग्रेजी में लिखा था, “हमारा संविधान कुरान है। हमारा नेता अल-सद्र है।” दूतावास की ओर जाने वाले गेट पर भी ‘हाँ, कुरान के लिए हाँ’ लिखा गया था। अल-सद्र के समर्थकों ने LGBTQ समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले इंद्रधनुषी झंडों को भी आग लगा दी।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मौलवी ने सुझाव दिया था कि यह कुरान जलाने का समर्थन करने वालों को उकसाने का सबसे अच्छा तरीका होगा। वहीं, स्वीडन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि उसे स्थिति के बारे में जानकारी है और दूतावास के सभी कर्मचारी सुरक्षित हैं।

इराक के विदेश मंत्रालय ने कहा कि कुरान जलाने जैसी हरकतें दुनिया भर के मुस्लिमों की भावनाओं को भड़काने वाली हैं। वहीं, सऊदी अरब ने भी कुरान जलाने की निंदा की है। सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इसे इस्लाम पर ‘घृणित और बार-बार होने वाले हमलों’ का हिस्सा बताया।

वहीं, 57 सदस्यीय इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) ने कहा कि वह स्थिति पर चर्चा के लिए एक आपातकालीन बैठक आयोजित करेगा। वार्ता संभवत: रविवार (2 जुलाई 2023) को सऊदी अरब के जेद्दा में होगी।

बताते चलें कि मोमिका ने कुरान जलाकर प्रदर्शन की इजाजत स्वीडिश पुलिस से माँगी थी, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और आखिरकार इसकी इजाजत मिली। उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत इसकी इजाजत दी गई थी।

जिस समय यह प्रदर्शन किया जा रहा था, उस वक्त लगभग 200 लोग वहाँ दर्शक के तौर पर खड़े थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाए और प्रदर्शनकारियों को पत्थर फेंकने की कोशिश की। पत्थर फेंकने वाले को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

जिस मस्जिद के सामने यह प्रदर्शन किया गया, उसके निदेशक एवं इमाम महमूद खल्फी ने कहा कि ईद अल-अधा के दिन मस्जिद के सामने विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने के कारण वे निराश थे। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस चाहती तो इस प्रदर्शन को कहीं और करने के लिए कह सकती थी।

बकरीद की शाम 10वीं की छात्रा के घर में घुस गया परवेज, लड़की के परिजनों और पड़ोसी की पिटाई से हुई मौत: 3 गिरफ्तार, गाजियाबाद की घटना

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र में एक लड़की के घर में घुसे परवेज की पिटाई से मौत का मामला सामने आया है। 10वीं में पढ़ने वाली यह लड़की कथित तौर पर उसकी प्रेमिका थी। पकड़े जाने पर लड़की के परिजनों और पड़ोसी ने उसकी पिटाई की। इससे उसकी मौत हो गई। घटना बकरीद की शाम यानी गुरुवार (29 जून 2023) की है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामला खोड़ा थाना क्षेत्र के वंदना विहार इलाके का है। गुरुवार शाम करीब 7 बजे परवेज अपनी कथित प्रेमिका से मिलने उसके घर में घुस गया। इसी दौरान लड़की के पिता और उसकी माँ भी घर पहुँच गए। उन्होंने परवेज और अपनी बेटी को एक साथ देख लिया। इसके बाद उसकी पिटाई शुरू कर दी। 

इसी दौरान लड़की का चचेरा भाई और पड़ोस में रहने वाला एक अन्य व्यक्ति भी वहाँ पहुँच गया। मारपीट के दौरान परवेज के सिर समेत अन्य हिस्सों में चोटें आई। वह बुरी तरह घायल हो गया। परवेज के सिर पर लोहे की रॉड से हमला करने की बात भी कही जा रही है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। परवेज को हॉस्पिटल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

शुरुआती पूछताछ में लड़की के परिजनों का कहना था कि उन्होंने चोरी के शक में परवेज के साथ मारपीट की है। हालाँकि पुलिस की जाँच में सामने आया कि मामला प्रेम प्रसंग का है। परवेज और लड़की एक साल से एक-दूसरे को जानते थे। दोनों को एक साथ देखने के बाद परिजनों ने पिटाई कर दी। वहीं, स्थानीय लोगों का कहना है कि परवेज पहले भी लड़की से मिलने उसके घर आया करता था। इस मामले में पुलिस ने मृतक परवेज के परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करते हुए लड़की के पिता, उसके चचेरे भाई और पड़ोसी को गिरफ्तार कर लिया है।