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प्रधानमंत्री या तानाशाह? टीजर के साथ-साथ कंगना रनौत की ‘Emergency’ का रिलीज डेट भी आया, जयप्रकाश नारायण के किरदार में अनुपम खेर का दमदार रोल

अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपनी फिल्म ‘Emergency’ की रिलीज डेट की घोषणा कर दी है। फिल्म का टीजर वीडियो जारी करते हुए उन्होंने बताया कि ‘इमरजेंसी’ 24 नवंबर, 2023 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। वीडियो में आक्रोशित लोगों को पुलिस पर पत्थरबाजी करते हुए देखा जा सकता है, जिसके बाद 26 जून, 1975 को एक अंग्रेजी अख़बार में आपातकाल की घोषणा की खबर छपती है। फिल्म वास्तविक घटनाओं पर आधारित है।

बता दें कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने आपातकाल की घोषणा करते हुए सारे विपक्षी नेताओं को जेल में बंद कर दिया था। वीडियो में इसके बाद जयप्रकाश नारायण का किरदार निभा रहे अनुपम खेर की आवाज गूँजती है, “भारत के इतिहास की सबसे अँधेरी घड़ी आ चुकी है। सरकार राज नहीं, अहंकार राज है ये। ये हमारी नहीं, इस देश की मौत है। इस तानाशाही को रोकना होगा।” टीवी-रेडियो का ब्रॉडकास्टिंग प्रतिबंधित होते हुए दिखाया गया है। साथ ही एक टैगलाइन आता है – “देश की आवाज आजाद करो।”

स्वतंत्रता सेनानी जयप्रकाश नारायण आपातकाल के दौरान और उसके बाद भारत के सबसे बड़े बन कर उभरे थे, जिन्होंने विपक्षी गठबंधन को जीत दिलाई और इंदिरा गाँधी की हार हुई। पुलिस वालों को लोगों को बंदी बना कर कोड़े बरसाते हुए दिखाया गया है। ‘तानाशाही बंद करो’ का नारा लगाती हुई आक्रोशित जनता पर गोलीबारी की जाती है। साथ ही एक सवाल पूछा गया है कि प्रधानमंत्री या तानाशाह? अंत में कंगना रनौत की आवाज गूँजती है, जिन्होंने इंदिरा गाँधी का रोल अदा किया है।

इंदिरा गाँधी के किरदार में कंगना रनौत कहती हैं, “मुझे इस देश की रक्षा करने से कोई नहीं रोक सकता। क्योंकि, इंडिया इज इंदिरा, एंड इंदिरा इज इंडिया।” कंगना रनौत ने अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘मणिकर्णिका फिल्म्स’ के माध्यम से इसका निर्माण किया है। इसकी कहानी भी उन्होंने ही लिखी है, साथ ही निर्देशक भी वही हैं। कंगना रनौत ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “नेता या तानाशाह? हमारे इतिहास के सबसे अंधकारमय युग का साक्षी बनिए, जब हमारे एक नेता ने इस देश की आम जनता के खिलाफ ही युद्ध छेड़ दिया।”

दिल्ली में मोहम्मद जैद ने राहुल को चाकू मारा, चचेरे भाई पर भी किया हमला: तनाव के बाद बृजपुरी में पैरा मिलिट्री तैनात, पुलिस ने सांप्रदायिक एंगल नकारा

दिल्ली के बृजपुरी इलाके में मोहम्मद जैद नाम के एक शख्स ने शुक्रवार (23 जून 2023) को 19 साल के राहुल पर पर चाकू से हमला कर दिया। चाकू पेट के निचले हिस्से पर लगा है। इससे गहरे घाव बन गए हैं। इलाज के लिए राहुल को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना में पीड़ित के चेचरे भाई सोनू को भी चोटें आईं हैं। इलाके में तनाव को देखते हुए पुलिस तैनात है।

उत्तर-पूर्व दिल्ली के DCP जॉय तिर्की ने बताया, “जैद और राहुल दोनों एक-दूसरे को जानते हैं और उनके बीच पहले भी कई बार बहस हो चुकी है। आरोपित और पीड़ित एक ही इलाके के रहने वाले हैं। आरोपित फरार है, उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।” DCP तिर्की ने कहा कि आरोपित को खोजने में आरोपित का परिवार पुलिस की मदद कर रहा है।

जॉय तिर्की ने कहा कि य मामला सांप्रदायिक नहीं, बल्कि झड़प का है। इसलिए हिंदू-मुस्लिम एंगल ना दिया जाए। उन्होंने कहा, “मैं सभी से शांति बनाए रखने की अपील करूँगा, क्योंकि इसमें ऐसा कोई सांप्रदायिक कोण (हिंदी-मुस्लिम) नहीं है। यह युवाओं के बीच महज एक छोटी सी झड़प है।”

दयालपुर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस घटना के बारे में शुक्रवार (23 जून 2023) की रात 10 बजे मिली थी। आरोपित और पीड़ित दोनों एक ही इलाके के रहने वाले हैं। किसी बात पर दोनों के बीच विवाद हो गया और आरोपित ने चाकू निकाल कर घोंप दिया। आरोपित जैद वारदात के बाद से फरार है।

वहीं, उनके परिवार के सदस्यों ने कहा कि उन्हें अभी भी नहीं पता कि यह घटना क्यों घटी। पीड़िता की बहन मधु ने कहा, “हमें नहीं पता कि उन्हें (राहुल को) चाकू क्यों मारा गया।” इस घटना के बाद से इलाके में तनाव फैल गया है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए इलाके में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात की गई है।

डीसीपी जॉय तिर्की ने कहा, “सोनू के हाथ में कुछ चोटें आईं, जबकि राहुल के पेट के निचले हिस्से में आरोपित द्वारा चाकू मारने के बाद उसे जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया।” उन्होंने बताया कि 20 साल के मोहम्मद जैद के खिलाफ IPC की धारा 307 और 324 के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।

मुस्कान ने लगाई फाँसी, गिरफ्तार हुआ फैजान: सोशल मीडिया में ‘भगवा लव ट्रैप’ बता दीपक को फँसाना चाहते थे इस्लामवादी, प्रोपेगेंडा में शामिल था ‘द वायर’ का पत्रकार भी

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 19 जून 2023 को एक मुस्लिम महिला ने आत्महत्या कर ली। मृतक महिला मुस्कान ने कुछ साल पहले घर से भागकर दीपक नामक लड़के से शादी की थी। मुस्कान की मौत की खबर को सोशल मीडिया पर ‘भगवा लव ट्रैप’ बताकर तेजी से फैलाने की कोशिश को गई।

सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि दीपक ने घर वापसी कराने के उद्देश्य से मुस्कान से शादी की थी। इसके बाद अब उसकी हत्या कर दी। हालाँकि मामले की जाँच कर रही पुलिस ने पाया कि मुस्कान 1 साल पहले ही दीपक से अलग हो चुकी थी। दीपक से अलग होने के बाद से वह मोहम्मद फैजान नामक व्यक्ति के साथ रह रही थी।

इस्लामवादियों से लेकर वामपंथी लिबरलों तक ने सोशल मीडिया पर यह बताने की कोशिश की कि मुस्कान की मौत कारण ‘भगवा लव ट्रैप’ है। बता दें कि लव जिहाद की वास्तविकता पर पर्दा डालने के लिए इस्लामवादी मनगढ़ंत तरीके से ‘भगवा लव ट्रैप’ शब्द को फैलाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ के कथित पत्रकार जाकिर अली त्यागी, मुस्लिम कार्यकर्ता कासिफ अरसलान, शाहीन खान, पत्रकार सदफ आफरीन और कविश अजीज जैसे कई ट्विटर यूजर ने दीपक को तथाकथित ‘भगवा लव ट्रैप’ के तहत आरोपित घोषित करने की कोशिश की।

स्वराज्य की रिपोर्ट के मुताबिक, महिला ने आत्महत्या की थी। अलीगढ़ के कोतवाली एसएचओ ने भी आत्महत्या की पुष्टि की है। उन्होंने यह भी क्या है कि इस मामले में मोहम्मद फैजान नामक व्यक्ति ने गुरुवार (22 जून, 2023) को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। फैजान ने कोर्ट में कहा है कि मुस्कान उस पर निकाह के लिए दबाव डाल रही थी। लेकिन वह निकाह नहीं करना चाहता था।

मुस्कान के परिवार का शिकायती पत्र (बाएँ) मीडिया से बात करती मुस्कान की माँ (दाएँ) (फोटो साभार: स्वराज्य)

SHO का कहना है कि फैजान के मकान मालिक ने कहा है कि 19 जून की सुबह फैजान घर छोड़कर अपने एक रिश्तेदार से मिलने चला गया था। इसके बाद रात 10 बजे मुस्कान का शव छत से लटका हुआ मिला। स्वराज्य ने SHO रामवकील सिंह के हवाले से कहा है कि  मकान मालिक को फैजान के कमरे से दिनभर किसी तरह की आवाज नहीं आई। इसके बाद उसने रात करीब 10 बजे दरवाजे को हल्का सा थपथपाया। दरवाजे पर ठोकर लगते ही वह तुरंत खुल गया। जहाँ उन्होंने देखा कि मुस्कान का शव लटका हुआ था।

मुस्कान के अम्मी-अब्बू के बयान के सहारे गढ़ा ‘भगवा लव ट्रैप’

मुस्कान के अम्मी-अब्बू ने नगर कोतवाली में एक लिखित आवेदन दिया था। एसएचओ का कहना है कि मुस्कान के घर वालों ने बीते कुछ समय से उससे बात नहीं की थी। इसलिए उन्हें यह नहीं पता था कि मुस्कान दीपक को छोड़ कर किसी और के साथ रह रही थी। SHO का कहना है कि मुस्कान साल 2019 में दीपक के साथ भाग गई थी। लड़की नाबालिग थी, ऐसे में उसके घरवालों ने मुस्कान के अपहरण का अंदेशा जताते हुए FIR दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस ने उसे दीपक के पास से बरामद किया।

हालाँकि फिर कोर्ट में पेश होने के बाद मुस्कान ने बयान में कहा था कि दीपक ने उसका अपहरण नहीं किया था, बल्कि वह उसके साथ भागकर गई थी। इसके बाद कोर्ट ने दीपक को जमानत पर रिहा कर दिया था। कुछ समय बाद दोनों एक बार फिर भाग गए और साथ रहने लगे। SHO का कहना है कि फिलहाल यह साफ नहीं है कि दीपक और मुस्कान ने कानूनी तौर पर शादी की थी या नहीं।

शुरुआती जाँच में सामने आया है कि दीपक से अलग होने के बाद मुस्कान करीब ढाई साल से अलीगढ़ के ही फैजान के साथ रह रही थी। सर्किल ऑफिसर अभय कुमार पांडे का कहना है कि फैजान को फिलहाल आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में न्यायिक हिरासत में रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में ‘भगवा लव ट्रैप’ के दावे बेतुके हैं।

इस्लामवादियों ने साजिश के तहत गढ़ा ‘भगवा लव ट्रैप’

इस्लामी संगठन यह प्रोपेगेंडा फैलाने में लगे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) हिंदू पुरुषों को मुस्लिम महिलाओं को ‘फँसाने’ और फिर उन्हें हिंदू बनाने के लिए ट्रेनिंग देता है। मौलवी से लेकर राजनीतिक पार्टियों से जुड़े इस्लामवादी, पत्रकार सोशल मीडिया में ‘भगवा लव ट्रैप’ का नैरेटिव चलाने की कोशिश में रहते हैं।

बीते कुछ समय में ऐसी कई घटनाएँ सामने आईं हैं, जिनमें मुस्लिम लड़की के साथ हिंदू लड़के के होने मात्र से ही या तो उसे परेशान किया गया है या फिर बदसलूकी कर उसके साथ मारपीट की गई है। ‘भगवा लव ट्रैप’ के फर्जी एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस्लामवादी और लिबरल गिरोह किसी भी हद तक गिरने को तैयार हैं। फैजान के चलते मुस्कान की आत्महत्या को दीपक के साथ जोड़ना इसका जीता जागता सबूत है।

जिसने किया था हिन्दुओं के खिलाफ सशस्त्र जिहाद का ऐलान, उसके खानदान की निकली WSJ की पत्रकार सबरीना सिद्दीकी: अमेरिका में PM मोदी के सामने की थी भारत को बदनाम करने की कोशिश

अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और USA के राष्ट्रपति जो बायडेन की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान WSJ की पत्रकार सबरीना सिद्दीकी को सवाल पूछने का मौका मिला। इस दौरान उन्होंने अर्थव्यवस्था से लेकर भारत-अमेरिका संबंधों की बजाए भारत की नकारात्मक छवि बनाने की कोशिश करते हुए इस्लामी कट्टरपंथियों वाला प्रोपेगंडा चलाया। अपने सवाल में उन्होंने दावा किया कि भारत में मुस्लिमों की स्थिति अच्छी नहीं है। हालाँकि, पीएम मोदी से उन्हें करारा जवाब मिला।

अब सबरीना सिद्दीकिक का एक पुराना ट्वीट वायरल हुआ है, जिसके बाद उनका सर सैयद अहमद खान के साथ कनेक्शन सामने आया है। सर सैयद अहमद खान वही कट्टरपंथी हैं, जिन्होंने भारत के विभाजन की बात की थी। अंग्रेजों ने उन्हें वफादारी के लिए ‘सर’ की उपाधि से नवाजा था। सर सैयद अहमद खान कहते थे कि अंग्रेजों को अल्लाह ने राज़ करने के लिए भेजा है और मुस्लिमों के करीबी अगर कोई हो सकते हैं तो वो हैं ईसाई।

दरअसल, ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ की पत्रकार सबरीना सिद्दीकी का एक ट्वीट वायरल हुआ है, जो 2014 का है। उस साल भारत के स्वतंत्रता दिवस पर उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था, “अब जब पाकिस्तान और भारत के स्वतंत्रता दिवस बीत रहे हैं, मैं अपने पूर्वज सर सैयद अहमद खान की बहुत-बहुत एहसानमंद हूँ।” साथ ही उन्होंने ‘अलीगढ मूवमेंट’ की वेबसाइट का एक लिंक भी शेयर किया था। सर सैयद अहमद खान द्वारा शुरू किए गए अभियान को ही ये नाम दिया गया था।

मार्च 14, 1888 को मेरठ में दिए गए भाषण में सैयद अहमद खान ने कहा था– “हमारे पठान बंधु पर्वतों और पहाड़ों से निकलकर सरहद से लेकर बंगाल तक खून की नदियाँ बहा देंगे। अंग्रेज़ों के जाने के बाद यहाँ कौन विजयी होगा, यह अल्लाह की इच्छा पर निर्भर है। लेकिन जब तक एक राष्ट्र दूसरे राष्ट्र को जीतकर आज्ञाकारी नहीं बनाएगा तब तक इस देश में शांति स्थापित नहीं हो सकती।” सर सैयद अहमद खान ने हिन्दुओं के खिलाफ सशस्त्र जिहाद की घोषणा की थी।

सबरीना सिद्दीकी का वायरल ट्वीट, जो उन्होंने अगस्त 2014 में किया था

बता दें कि सबरीना सिद्दीकी के अम्मी-अब्बू पाकिस्तानी हैं। उन्होंने नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से स्नातक किया है और अपने शौहर के साथ अमेरिका में रहती हैं। वो व्हाइट हाउस को अपने मीडिया संस्थान के लिए कवर करती हैं। सबरीना सिद्दीकी अक्सर सोशल मीडिया पर भारत विरोधी आर्टिकल्स शेयर करती रहती हैं। अब लिबरल गिरोह उनकी प्रशंसा करने में लगा है। मोदी सरकार में मुस्लिम तुष्टिकरण क्यों बंद हो गया है – इन सभी की मुख्य चिंता यही है।

कभी बेचता था हॉट डॉग, अब पुतिन को तख्तापलट की धमकी: कौन है वैगनर ग्रुप का येवगेनी प्रिगोझिन, रूसी राष्ट्रपति के ‘खास’ से कैसे बना ‘बागी’

रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की निजी आर्मी वैगनर ने उनके खिलाफ बगावत कर दी है। वैगनर के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन ने खुलेआम सत्ता पलट करने की धमकी देते हुए रोस्तोव शहर के सैन्य मुख्यालयों और हवाई अड्डों समेत कई स्थलों पर कब्जा करने की बात कही है। इसके अलावा रूसी सेना के साथ उनकी झड़प की खबरें भी मीडिया में आ रही हैं।

रूस में बगावत की यह खबरें बेहद हैरान करने वाली है क्योंकि यूक्रेन के खिलाफ रूसी सेना के साथ जंग में इसी आर्मी ने पुतिन का साथ दिया था। उसके सामान्य तौर पर भी प्रिगोझिन के पुतिन से खास रिश्ते थे। दोनों में कॉमन बात यह थी कि उनका गृहनगर सेंट पीटर्सबर्ग ही था। जब पुतिन राष्ट्रपति बनकर अपने गृहनगर के लोगों से मिलते तो उन्हें खुशी होती और इसी बीच उनकी मुलाकात प्रिगोझिन से हुई।

प्रिगोझिन को पुतिन का करीबी कहा गया। लेकिन एक सच यह भी था कि उसका शुरुआती जीवन कई अपराधों को करके गुजरा। जैसे उसने 18 साल की उम्र में अंधेरी सड़क परएक महिला की गर्दन दबाकर उसे बेहोश किया था और उसके बाद उसकी गोल्ड ईयरिंग लेकर वहाँ से फरार हो गया था।

1981 में तो वो डकैती और लूटपाट की हरकतों के कारण उसे 13 साल के करीब जेल की सजा मिली। लेकिन सन् 1990 में जब वो रिहा हुआ तो फिर उसने हॉट-डॉग स्टैंड लगाया था। इसके बाद वो हॉस्पिटेलिटी इंडस्ट्री में रहा। उसे कई केटरिंग कॉन्ट्रैक्ट्स मिले। 1995 में उसने रेस्टोरेंट खोलने का निर्णय लिया और वाइन शॉप, फिर सेंट पीटर्सबर्ग के वासिलिव्स्की द्वीप पर अपने नए रेस्टोरेंट ओल्ड कस्टम्स हाउस खोला। धीरे-धीरे इस रेस्टोरेंट का इतना नाम हुआ कि यहाँ व्लादिमीर पुतिन भी आने लगे।

जब पुतिन का उससे संपर्क हुआ तो उसे ‘पुतिन का शेफ’ का नाम दे दिया गया। पुतिन ने प्रिगोझिन की कई जगह लोन आदि लेने में भी मदद की। इसके बाद उसने वैगनर फौज बनाई। वह सुडान, लिबिया मोजांबिया, यूक्रेन और सीरिया में हुए युद्ध अपराधों में भी शामिल रहा। बताया जाता है कि वैगनर की स्थापना के बाद प्रिगोझिन की ताकत बढ़ी तो उसमें पैसों का लालच भी भी गया।

2014 में प्रिगोझिन के कॉनकॉड समूह और रूसी रक्षा मंत्रालय के बीच मिलिट्री के लिए भोजन उपलब्ध करवाने को लेकर बातचीत शुरू हुई। हालाँकि, यह प्रोजेक्ट शुरू में असफल रहा। लेकिन 2015 में उसकी कंपनियों ने सेना को खिलाने के लिए 92 बिलियन रूबल से अधिक का कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया। 2014 में प्रिगोझिन ने ही पुतिन को निजी सैन्य कंपनियाँ स्थापित करने की सलाह दी थी। इसके बाद वो पुतिन का और करीबी हो गया।

रूसी सेना ने प्रिगोझीन के हमले को बताया- पागलपन

अब उसी प्रिगोझीन को लेकर खबरें हैं कि उसने कहा, “हम हमारे रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति को नष्ट कर देंगे। हम आगे बढ़ रहे हैं और अंत तक आगे बढ़ेंगे।” वहीं रूसी सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल व्लादिमीर अलेक्सेयेव ने प्रिगोझिन के कदम को पागलपन बताया और कहा कि इससे देश में गृह युद्ध का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा, “यह देश और राष्ट्रपति की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। …इस तरह की उकसावे की कार्रवाई केवल रूस के दुश्मन ही कर सकते हैं।”

2 महीने की चारधाम यात्रा में ही गंगोत्री-यमुनोत्री से निकले 700 किलो कपड़े, भीगी साड़ियाँ छोड़ कर जा रहीं महिलाएँ: कहीं-कहीं खाली बियर बोतलों के ढेर भी

उत्तराखंड के गंगोत्री और यमुनोत्री की साफ़-सफाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बड़ा संकट खड़ा हो गया है। भागीरथी नदी के किनारे कई तीर्थयात्री अपने पुराने कपड़े छोड़ कर चले जा रहे हैं। बता दें कि भागीरथी नदी गंगोत्री से निकलती है। यमुना नदी के किनारे भी यही हाल है। यमुनोत्री जाने वाले तीर्थयात्री भी यही काम कर रहे हैं। इस साल की चारधाम यात्रा के मात्र 2 महीनों में 7 क्विंटल कपड़ों को नदियों से निकाला गया है।

ये कचरा केवल गंगोत्री और यमुनोत्री से निकला है। बाकी जगह जहाँ तीर्थयात्री नहीं बल्कि पर्यटक आ रहे हैं, वहाँ भी स्थिति बुरी है। बड़ी मात्रा में बियर की बोतलें पड़ी हुई मिल रही हैं। गंगोत्री और यमुनोत्री में कपड़ा छोड़ देने की घटनाएँ तब हो रही हैं, जब कई साइनबोर्ड लगा कर चेतावनी लिखी गई है और लाउडस्पीकर से घोषणा की जाती है कि जो भी यहाँ अपना कपड़ा छोड़ता हुआ पाया जाएगा, उसे 1000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि इन चेतावनियों का कोई असर नहीं हो रहा है। गंगोत्री धाम के सेक्रेटरी सुरेश सेमवाल ने कहा कि भागीरथी से 4 क्विंटल कपड़े निकले हैं। रोज कर्मचारियों को वहाँ छोड़े गए कपड़ों को जमा करने के लिए भेजा जाता है। इसके बाद इन्हें नगर पंचायत को सौंप दिया जाता है, जो इसे डिस्पोज करने का काम करते हैं। यमुनोत्री में भी स्थिति अलग नहीं है। वैसे भी हर साल मई-जून ही यात्रा का पीक समय होता है, जब सबसे ज्यादा तीर्थयात्री आते हैं।

यमुनोत्री में 3 क्विंटल कपड़े निकाले गए हैं। इन कपड़ों में अधिकतर साड़ियाँ होती हैं, इसीलिए महिलाओं से बार-बार आग्रह किया जा रहा है कि वो ऐसा न करें। इससे सफाईकर्मियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। हालाँकि, वहाँ कपड़े छोड़ देना कोई परंपरा या प्रथा नहीं है। असल में कपड़े, खासकर साड़ियाँ पानी में भीगने के बाद भारी हो जाती हैं। कई पर्यटक भीगे कपड़ों के लिए थैले नहीं लाते। ऐसे में वो उन्हें वहीं छोड़ कर चलते बनते हैं।

‘बृजभूषण को हटाना है, कुश्ती फेडरेशन पर कब्जा करना है’: योगेश्वर दत्त ने बताया पहलवानों ने घर आकर दिया था ऑफर, कहा- ससुर को कोच बता विनेश ने दिलवाए ₹30 लाख

भारतीय कुश्ती संघ के निवर्तमान अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ धरने पर बैठने वाले पहलवानों को चैंपियनशिप के ट्रायल में छूट मिलने के बाद विवाद हो गया है। इस छूट को नए पहलवानों के साथ अन्याय बताया जा रहा है। इस फैसले पर सवाल उठाने वाले ओलंपियन योगेश्वर दत्त धरना देने वाले पहलवानों के निशाने पर आ गए हैं।

जो कोई इन पहलवानों के हाँ में हाँ नहीं मिला रहा है, उनको ये निशाने पर ले रहे हैं। चाहे वह सरकार हो, खेल मंत्री हों, दिल्ली पुलिस हो, भारतीय ओलंपिक संघ और उसकी अध्यक्ष पीटी उषा हों या योगेश्वर दत्त। ट्रायल में छूट के फैसले का विरोध करने पर विनेश फोगाट ने योगेश्वर दत्त को अपमानित करने की कोशिश की है। इसके बाद दत्त लाइव आए और कई खुलासे किए।

फर्जीवाड़ा कर पति के मामा को दिलवाई सरकारी ग्रांट

शुक्रवार (23 जून 2023) की रात को योगेश्वर दत्त अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लाइव आए और विनेश फोगाट के भ्रष्टाचार का खुलासा किया। योगेश्वर दत्त ने कहा कि विनेश फोगाट ने अपने पति के मामा को कोच बताकर हरियाणा सरकार से 25-30 लाख रुपए ग्रांट दिलाई।

विनेश फोगाट को लेकर योगेश्वर दत्त ने कहा, “आपका गुरु आपका ताऊ महावीर फोगाट है। आपको अभी हरियाणा सरकार से 25-30 लाख रुपए ग्रांट मिली थी, वह आपने कोच ओमप्रकाश दहिया को दिलवाई, जबकि वह आपका कोच नहीं है। आपने उसे कोच बनाकर उसे इतनी बड़ी ग्रांट दिलवा दी।”

योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “आपने उसे पैसे क्यों दिलवाए यह भी मैं बता देता हूँ। पूरे देशवासियों को पता होना चाहिए। जिस सोमबीर राठी से आपकी शादी हुई है, उनके मामा हैं ओमप्रकाश दहिया। इसलिए आपने अपने ताऊ को यहाँ पर छोड़ दिया और अपनी रिश्तेदारी निभाई। इन 25 लाख के लिए आपने क्या भूमिका सेट की, मुझे इसका नहीं पता।

रेलवे की नौकरी में फर्जीवाड़ा

योगेश्वर दत्त यहीं नहीं रूके। उन्होंने रेलवे में नौकरी में फर्जीवाड़ा का भी खुलासा किया। दत्त ने कहा, “आप सरकार से जाकर मिले और आपने अपनी ट्रांसफर मनमर्जी से रेलवे में करवाई। रेलवे में जो हमारे कुश्ती के सीनियर अर्जुन अवॉर्डी खिलाड़ी रहे हैं, उनका आपने ट्रांसफर करवाया और उनकी जगह पर आप खुद बैठ गए।”

ओलंपियन ने आगे कहा, “ऐसा कौन सा आंदोलन आपने किया कि आपके मन मुताबिक सारी बातें हो रही हैं? जिस लड़ाई को लेकर आप आए थे, वह लड़ाई कहाँ है आपकी? मेरी सभी खाप प्रतिनिधियों और किसान संगठनों से आग्रह है कि वह इस धरने की सच्चाई को जानिए। इस धरने के बाद से जो इन पहलवानों को बेनिफिट मिल रहा है, इसका क्या कारण है।”

धरना लीड करने पर हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष का लालच

योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “मुझे जंतर मंतर पर धरने का नेतृत्व करने के लिए कहा गया था। इसके लिए मुझे हरियाणा कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद का लालच भी दिया गया था। यह सारा खेल फेडरेशन पर कब्जे को लेकर किया गया है।”

योगेश्वर दत्त ने कहा कि जब पहलवानों के आरोपों के बाद जाँच कमिटी बनी थी, तब उसमें उन्हें सदस्य चुना गया था। उस समय 4 पहलवान और 3 कोच देर रात 9 बजे उनके घर पर आए और धरने को लीड करने के लिए कहा। दत्त ने कहा कि उन लोगों ने हरियाणा कुश्ती संघ का अध्यक्ष बनवाने का लालच देते हुए कहा कि बृजभूषण सिंह को हटाना है और फेडरेशन पर कब्जा करना है।

योगेश्वर दत्त आगे बताते हैं, “मैंने कहा था कि लड़कियों पर शोषण के मामले के बीच मुझे कोई पद नहीं चाहिए। इस बातचीत का मकसद सिर्फ यही था कि बृजभूषण सिंह को हटाना है।” उन्होंने कहा कि अभी जो कष्ट निवारण कमेटी बनी थी, उसी में से एक कोच उनके घर आया था। दत्त ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे उन पहलवानों और कोचों के नामों का खुलासा करेंगे।

धरने के लिए पहलवानों पर डलवाया गया दबाव

योगेश्वर दत्त ने कहा, “पहले धरने में आपने रवि दहिया, दीपक पूनिया समेत तमाम पहलवानों को किस तरह से बुलाया था, वह भी हमें पता है। उन पहलवानों पर कहाँ-कहाँ से आपने कितना दबाव डलवाया, यह सब भी हम जानते हैं। इस बार भी आपने खूब कोशिश की, लेकिन आप के आंदोलन में कोई नहीं आया। सभी को सच्चाई मालूम हो गई है। यह सच्चाई मुझे पहले दिन से ही पता थी।”

धरना देने वाले पहलवानों को लेकर दत्त ने आगे कहा, “आज हरियाणा का कोई भी पहलवान आपके साथ नहीं है। पहले भी कोई नहीं था। खाप पंचायतों और किसान संगठनों को जो आपने बताया, वह आपके बहकावे में आ गए। वे आपसे बिना कुछ पूछे आपके साथ लगे रहे। आज वे अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।”

पहलवानों के माँ-बाप पर बनाया गया दबाव

विनेश फोगाट ने आरोपों का जवाब देते हुए योगेश्वर दत्त ने कहा, “उन्होंने लगाए कि मैंने कई शिकायतकर्ता खिलाड़ियों और उनके माँ-बाप को फोन किया और उनसे शिकायत वापस लेने के लिए कहा। मैं विनेश से यही कहूँगा कि जिन लड़कियों के पास मैं गया, उन्हें सामने आना चाहिए। जिन पहलवानों के माँ-बाप को मैंने फोन किया, उन्हें भी सामने आना चाहिए।”

योगेश्वर दत्त ने कहा कि उनसे खुद मिलने के लिए कई खिलाड़ी और उनके माँ-बाप आए थे। उन्होंने कहा, “वे लो मुझसे बोले कि योगेश्वर जी, हमें इस मामले में फँसाया जा रहा है। हमें नहीं पता था कि यह ऐसे करेंगे। हमारी बेटियों को बहला-फुसलाकर यहाँ लेकर आए थे। तीसरी पहलवान ने भी यही बात कही थी कि हमें फेडरेशन में जाकर अपनी बातें मनवानी है, यह कहकर वहाँ ले जाया गया था और हमें जंतर मंतर पर ले जाकर बैठा दिया।”

योगेश्वर दत्त ने आगे बताया, “इसी पहलवान के पिता ने मुझे फोन करके बताया कि विनेश फोगाट ने उस पहलवान की मम्मी के पास फोन किया था और भला-बुरा कहते हुए कहा कि तुमने शिकायत से नाम वापस क्यों लिया? तुम पीछे क्यों हट गई?” योगेश्वर दत्त ने फिर जोर देकर कहा कि ये सारा खेल फेडरेशन पर कब्जे को लेकर था।

विनेश फोगाट कई बार ले चुकी हैं छूट

योगेश्वर दत्त ने कहा कि विनेश फोगाट पहले भी कई बार छूट ले चुकी हैं। उन्होंने कहा कि 2017 में इंडोनेशिया गेम्स के लिए उनका ट्रायल नहीं लिया गया था। इसके अलावा, विनेश फोगाट ने फेडरेशन से कहा कि 48 की जगह 53 किलोग्राम वर्ग में उनका चयन किया जाए और फेडरेशन ने वह भी किया। योगेश्वर दत्त ने कहा कि इन सब सहूलियत मिलने के बाद भी वह इंडोनेशिया गेम्स खेलने नहीं गईं।

दत्त ने कहा, “जिस खिलाड़ी का 53 वेट था, उसका वेट 48 करना पड़ा और वह वेट चेंज की वजह से हार गई। इस वजह से दोनों वेट कैटेगरी में भारत को कुछ नहीं मिला। इसके बावजूद भी आप पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। बस आपको शोकॉज नोटिस देकर छोड़ दिया गया। शोकॉज नोटिस भी दिया या नहीं, यह भी मुझे पक्का नहीं पता।”

दत्त के अनुसार, साल 2018 के एशियन गेम्स के ट्रायल भी विनेश फोगाट ने नहीं दिए थे। फेडरेशन पर दबाव डालकर वह बिना ट्रायल के ही एशियन गेम्स के लिए गई थीं।” उन्होंने आगे कहा, “जहाँ तक मेरा मानना है कि फेडरेशन ने आपका दबाव इसलिए माना, क्योंकि आप अच्छी खिलाड़ी थीं। इसका मैं कोई और मतलब नहीं निकाल सकता।”

योगेश्वर दत्त ने आगे कहा, “2019 ओलिंपिक क्वालीफिकेशन टूर्नामेंट में आप हंगरी गई थीं। बिना कोच के आप गई थीं। यह सभी चीजें हमें ओवरसाइट कमेटी से पता लगी हैं। वहाँ पर किसी भारतीय कोच के साथ आप नहीं रहीं, उनसे अलग रहीं।”

उन्होंने आगे कहा, “2022 के विश्व चैंपियनशिप प्रतियोगिता में भी आपने ट्रायल न करवाने की जिद की थी। कहा था कि मुझे बिना ट्रायल के भेजो, लेकिन आप की ट्रायल ली गई। आपकी ट्रायल इसलिए हुई, क्योंकि आपके वेट में अंतिम नाम की लड़की थी, जो आपके बराबर की थी। उसके साथ आप की ट्रायल हुई।”

बताते चलें कि योगेश्वर दत्त ने यह खुलासा तब किया है, जब उन्होंने इन पहलवानों को मिली ट्रायल से छूट पर सवाल उठाया था। इसके बाद विनेश फोगाट ने इन्हें बृजभूषण सिंह की थाली का झूठा खाने वाला, महिला पहलवानों के नाम मीडिया में लीक करने वाला, कुश्ती का गद्दार सहित कई आरोप लगाए थे। इसके बाद योगेश्वर दत्त ने इन सब बातों का खुलासा किया है।

अमेरिका के बाद मिशन मिस्र पर PM मोदी: इसी देश के पहले राजदूत थे वह मुस्लिम पत्रकार, जिससे नेहरू की बहन ने घर से भाग किया था निकाह

अमेरिका में अपनी ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जिस मिस्र की राजकीय यात्रा के लिए रवाना हुए हैं वहाँ के पहले भारतीय राजदूत का नाम स्यूद हुसैन था। स्यूद को वामपंथी आज एक सेकुलर मुस्लिम के तौर पर बताते हैं। वहीं रिपोर्ट्स बताती हैं कि स्यूद शराब और औरतों के आदी थे। उनकी कब्र भी मिस्र में ही है। मिस्र में भारत के पहले राजदूत बनने से पहले उनकी पहचान पत्रकार, लेखक, बैरिस्टर के तौर पर होती थी। हालाँकि बाद में पंडित जवाहरलाल नेहरू की बहन विजया लक्ष्मी पंडित के साथ उनकी प्रेम कहानी के कारण उन्हें याद किया गया। विजया के साथ उनकी प्रेम कहानी पर विराम लगाने के पीछे तथाकथित धर्मनिरपेक्ष नेहरू परिवार था जिनका साथ महात्मा गाँधी ने भी दिया था।

कैसे शुरू हुई विजया और स्यूद की प्रेम कहानी

शीला रेड्डी ने अपनी पुस्तक ‘मिस्टर एंड मिसेज जिन्ना: द मैरिज दैट शुक इंडिया’ में ऐतिहासिक पहलुओं का जिक्र किया है। इसमें उन्होंने कहा कि मोतीलाल नेहरू द्वारा धर्मनिरपेक्षता का चोला ओढ़ना सिर्फ एक दिखावा था। उन्होंने अपनी पुस्तक में बताया कि कैसे वह एक मुस्लिम व्यक्ति के साथ अपनी बेटी के प्रेम संबंधों के विरोध में थे।

मोतीलाल नेहरू की बड़ी बेटी और जवाहरलाल नेहरू की बहन, ‘नन’ जिन्हें विजया लक्ष्मी पंडित के नाम से भी जाना जाता है। विजया ऑक्सफोर्ड में पढ़े मुस्लिम पत्रकार और एक अंग्रेजी अखबार इंडिपेंडेंट के युवा संपादक स्यूद हुसैन दिल दे बैठी थीं। दोनों एक दूसरे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे। जब मोतीलाल नेहरू को उनके अफेयर के बारे में पता चला, तब तक बहुत देर हो चुकी थी, क्योंकि दोनों परिवार वालों से छिप कर निकाह कर चुके थे। इस प्यार की शुरुआत तब हुई थी, जब मोतीलाल ने अपने भव्य निवास आनंद भवन में स्यूद को रहने के लिए आमंत्रित किया था।

बात उन दिनों की है जब नेहरू कथित तौर पर हुसैन की देशभक्ति से काफी प्रभावित हुए थे। वे अपना समाचार पत्र लॉन्च करने के लिए एक संपादक की तलाश कर रहे थे। उन्होंने अपने अंग्रेज मित्र और बॉम्बे क्रॉनिकल के संस्थापक संपादक बीजी हॉर्निमन के कहने पर युवा पत्रकार हुसैन को काम पर रख लिया था। हालाँकि, स्यूद ने इंग्लैंड में पढ़ाई की और वह अपने घर के सबसे लाडले थे। ऐसे में उन्हें इलाहाबाद में रहने ने काफी दिक्कतें आ रही थी। वह यहाँ बीमार हो गए थे, जिसके बाद मोतीलाल नेहरू ने उन्हें आनंद भवन में रहने के लिए आमंत्रित किया था।

नेहरू ने तुड़वाया बेटी का रिश्ता

जैसे ही हुसैन और विजया ने एक ही छत के नीचे रहना शुरू किया, दोनों एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए। जब तक मोतीलाल को पता चला कि उनकी बेटी हुसैन से प्यार करती है, तब तक दोनों ने छिपकर निकाह कर लिया था। यह बात मोतीलाल नेहरू को अच्छी नहीं लगी। उन्हें इस रिश्ते से एक ही शिकायत थी कि हुसैन एक मुसलमान थे। हिन्दू-मुस्लिम एकता की कथित मिसाल कायम करने वाले के परिवार के सदस्यों की बात आई, तो उनके लिए इस सच को अपनाना बेहद मुश्किल हो रहा था कि उनकी बेटी एक मुस्लिम व्यक्ति से प्यार करती थी और उसने गुपचुप तरीके से निकाह कर लिया था।

रेड्डी ने अपनी किताब में यह भी लिखा है कि किस तरह से इन दोनों को अपना रिश्ता खत्म करने के लिए मजबूर किया गया था। विजया ने बाद में बताया था कि कैसे हुसैन के साथ अपने रिश्ते को खत्म करने के लिए उसके परिवार वालों ने उन पर दबाव बनाया था। इसका एक ही कारण था कि वह एक मुस्लिम थे और धर्म से बाहर जाकर शादी करना गलत था।

रेड्डी ने आगे लिखा, “मैंने सोचा कि उस समय जिन लोगों ने हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम की। एक ऐसा परिवार जिसके सबसे अधिक मुस्लिम दोस्त थे। उन्हें अपनी बेटी का धर्म से बाहर जाकर निकाह करना स्वीकार्य होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ वे रूढ़िवादी विचारधारा के थे।”

यही नहीं मोतीलाल नेहरू ने अपनी बेटी का रिश्ता खत्म करने के लिए महात्मा गाँधी की भी मदद ली थी। गाँधी ने कथित तौर पर नन से कहा था, “सरूप (शादी से पहले उनका दिया गया नाम), अगर मैं आपकी जगह होता तो मैं खुद को कभी भी स्यूद हुसैन के करीब नहीं आने देता। उसे केवल मित्रता रखने की अनुमति ही देता।”

गाँधी ने जवाहर लाल नेहरू की बहन को समझाते हुए कहा था कि मान लीजिए कि स्यूद ने कभी मेरी तारीफ की होती, या मुझसे प्यार का इजहार किया होता, तो मैं कभी भी उसके प्रति आकर्षित नहीं होता। मैं कहता, ”स्यूद, जो आप कह रहे हैं वह सही नहीं है। तुम मुसलमान हो और मैं हिंदू। हमारे लिए यह सब ठीक नहीं है। तुम मेरे भाई हो, लेकिन एक पति के रूप में मैं तुम्हें कभी नहीं स्वीकार सकती।”

रूस में प्राइवेट आर्मी की बगावत, 25000 फौजियों वाले वैगनर ग्रुप का शहरों पर कब्जे का दावा: माॅस्को में सड़कों पर टैंक और बख्तरबंद गाड़ियाँ

पिछले एक साल से यूक्रेन के साथ युद्ध लड़ रही रूस की सेना ने बगावत कर दी है। रूस के प्रभावशाली सैन्य ठेकेदार वैगनर ग्रुप के मालिक येवगेनी प्रिगोझिन ने रूसी रक्षा मंत्री को हटाने के लिए सशस्त्र विद्रोह का आह्वान किया। रक्षा मंत्रालय ने प्रिगोझिन के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैगनर ग्रुप के सैनिकों ने रोस्तोव शहर पर कब्जा कर लिया है। किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश नहीं की।

रूस की फेडरल सिक्योरिटी सर्विस (FSB) की नेशनल एंटी टेरेरिज्म कमेटी (NATC) ने सैनिकों से अपील की है कि वे प्रिगोझिन के आदेश मानने से इनकार कर दें। एफएसबी ने प्रिगोझिन की बगावत को रूसी सेना की पीठ में छुरा घोंपने जैसा बताया है। राष्ट्रपति व्लाडिमीर पुतिन को इसके बारे में जानकारी दे दी गई है।

रूस ने इस खतरे को बेहद गंभीरता से लिया है। राजधानी मॉस्को और दक्षिणी क्षेत्र के लिए रूसी सैन्य मुख्यालय रोस्तोव-ऑन-डॉन में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सड़कों पर स्नाइपर्स को तैनात कर दिया है। इसके अलावा, मास्को एवं रोस्तोव की सड़कों पर टैंक आदि गश्त कर रहे हैं। अगर प्रिगोझिन गिरफ्तार हो जाते हैं, उन्हें 20 साल तक की सजा हो सकती है।

प्रिगोझिन ने शनिवार (24 जून 2023) को तड़के दावा किया कि उनकी सेनाएँ यूक्रेन से रूस में प्रवेश कर चुकी हैं और रोस्तोव तक पहुँच गई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें चौकियों पर युवा सिपाहियों के किसी प्रतिरोध का सामना नहीं करना पड़ा। बता चलें कि रोस्तोव मुख्यालय वाली दक्षिणी क्षेत्र कमान यूक्रेन युद्ध की अगुवाई कर रही है।

शुक्रवार (23 जून 2023) की देर रात को सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई एक वीडियो में प्रिगोझिन न कहा था, “हम हमारे रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति को नष्ट कर देंगे। हम आगे बढ़ रहे हैं और अंत तक आगे बढ़ेंगे।” प्रिगोझिन ने यह भी कहा कि उनकी सेना ने एक रूसी सैन्य हेलीकॉप्टर को मार गिराया, जिसने एक नागरिक काफिले पर गोलीबारी की थी।

प्रिगोझिन ने यह भी दावा किया कि रूसी जनरल स्टाफ के प्रमुख जनरल वालेरी गेरासिमोव ने वैगनर के काफिले पर हमला करने के लिए युद्धक विमानों को भेजा। बताते चले कि प्रोगोझिन के दावों की पुष्टि नहीं हुई है। हालाँकि, सामने आए वीडियो में टैंक सहित बख्तरबंद वाहन सड़कों पर जाते हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे वैगनर थे या सैन्य कमान के।

प्रिगोझिन ने कहा कि रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु के साथ बैठक के बाद गेरासिमोव के आदेश पर यूक्रेन में वैगनर फील्ड शिविरों पर रॉकेट, हेलीकॉप्टर गनशिप और तोपखाने हमला किया गया था। ये हमले वैगनर को नष्ट करने के उद्देश्य से किए गए थे।

वैगनर सेना ने यूक्रेन में रूस के युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसने बखमुत शहर पर कब्ज़ा करने में सफलता हासिल की है, जहाँ सबसे खूनी और सबसे लंबी लड़ाई हुई है। हालाँकि, प्रिगोझिन ने रूस के सैन्य अधिकारियों की आलोचना करते हुए उस पर अक्षमता और अपने सैनिकों को हथियारों और गोला-बारूद से वंचित करने का आरोप लगाया है।

प्रिगोझिन का रक्षा मंत्रालय के साथ विवाद वर्षों पुराना है। उन्होंने कहा कि उनकी कमान में 25,000 सैनिक हैं और उनके सैनिक सशस्त्र विद्रोह में रक्षा मंत्री सर्गेई शोइगु को दंडित करेंगे। उन्होंने रूस की सेना से प्रतिरोध नहीं करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा, “यह सैन्य तख्तापलट नहीं है, बल्कि न्याय का मार्च है।”

रूस की सरकार ने इसे विद्रोह माना है। रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि पुतिन को स्थिति के बारे में सूचित किया गया था और सभी आवश्यक उपाय किए जा रहे थे। मॉस्को के मेयर ने शनिवार सुबह घोषणा की कि आतंकवाद विरोधी उपाय चल रहे हैं। इसलिए लोग सड़कों आना या किसी कार्यक्रम के आयोजन को प्रतिबंधित कर दिया गया है।

रूसी रक्षा मंत्रालय के उस आदेश को प्रिगोझिन ने मानने से इनकार कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि सैन्य ठेकेदार 1 जुलाई से पहले मंत्रालय के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर करें। शुक्रवार देर रात एक बयान में उन्होंने कहा कि वह समझौता करने के लिए तैयार थे, लेकिन उन्होंने विश्वासघात किया।

प्रिगोझिन ने कहा, “उन्होंने हमारे पीछे के शिविरों पर रॉकेट हमला किया और बड़ी संख्या में हमारे साथी मारे गए। हमले का निर्देश देने के लिए शोइगु व्यक्तिगत रूप से रोस्तोव-ऑन-डॉन में रूसी सैन्य मुख्यालय गए और फिर वहाँ से कायरतापूर्ण ढंग से भाग गए। देश के सैन्य नेतृत्व द्वारा की जा रही बुराई को रोका जाना चाहिए।” हालाँकि, रक्षा मंत्रालय ने प्रिगोझिन के दावों का खंडन किया।

रूसी सेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल व्लादिमीर अलेक्सेयेव ने प्रिगोझिन के कदम को पागलपन बताया और कहा कि इससे देश में गृह युद्ध का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा, “यह देश और राष्ट्रपति की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। …इस तरह की उकसावे की कार्रवाई केवल रूस के दुश्मन ही कर सकते हैं।”

जो ‘मराठा मंदिर’ हिंदी सिनेमा की शान, उसके डायरेक्टर भी ‘आदिपुरुष’ पर भड़के: कहा- इनको जेल भेजो, भगवान भी इन्हें माफ नहीं करेगा

आदिपुरुष फिल्म की जगह-जगह भद्द पिटने के बाद अब सिनेमाघर वाले भी इस फिल्म के मेकर्स को जमकर गाली बक रहे हैं। गेटी गैलैक्सी और मराठा मंदिर सिनेमा के एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर व फिल्म वितरक मनोज देसाई ने इस पर बयान दिया है।

मनोज देसाई ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “हमें लिखा फिल्म सुपर हिट होगी, लेकिन रामायण को उस तरह नहीं लिखा गया। फिल्म ने जैसे भगवान राम और रावण को प्रदर्शित किया है ये बिलकुल अस्वीकार्य है। कृति सैनन को कोई सीता कैसे बना सकता है। हर जगह फिल्म कैंसिल हो रही है। इस फिल्म को जिन्होंने बनाया है उन्हें तो जेल हो जानी चाहिए।”

देसाई कहते हैं, “आज या कल तो सिनेमा हॉलों से ये फिल्म हटी जाएगी। लेकिन इसके कारण हमको बहुत नुकसान हुआ है। हर थिएटर में नुकसान हुआ है। इन्होंने डॉयलॉग बदले लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। लोग बहुत नाराज हैं। हमने टिकट भी सस्ती कर दी है फिर भी कोई इसे देखने नहीं आ रहा।” वह कहते हैं कि फिल्ममेकर्स ने कौन सी सीट हनुमान जी के लिए खाली रखी। सारी सीटें ही खाली हैं।

बता दें कि आदिपुरुष फिल्म के मेकर्स को ये फिल्म बनाने के कारण बहुत आलोचना झेलनी पड़ रही है। मेकर्स ने पहले दावा किया था कि जो रामायण लोगों ने पढ़ी-सुनी है वही रामायण वो लेकर आए हैं। हालाँकि जब फिल्म रिलीज हुई तो पूरी फिल्म पर सिर्फ और सिर्फ सवाल उठे। न स्क्रीनप्ले को बेहतर बताया गया और न ही इसके डॉयलॉग्स को।

फिल्म ने रिलीज के आठवें दिन 3.25 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया है। कुल मिलाकर फिल्म ने 263.15 करोड़ का बॉक्स ऑफिस पर कलेक्शन किया है। वहीं दुनियाभर में इस फिल्म की कमाई 400 करोड़ रुपए पार होने के बावजूद फिल्म अपनी लागत नहीं निकाल पाई है। हाल ये है कि सिनेमाघर के मालिक भी अब फिल्म के मेकर्स को गाली दे रहे हैं।

मनोज देसाई ने तो ये भी कहा है कि वो आदिपुरुष को सिर्फ इसलिए चला रहे हैं क्योंकि उसे चलाना उनकी मजबूरी है। वो कहते हैं कि आदिपुरुष को जिन्होंने बनाया उन्हें भगवान भी माफ नहीं करने वाला है। उन्होंने माँग की है कि मेकर्स इस फिल्म को बनाने के लिए जनता से माफी माँगें।