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‘तुमलोग कॉन्ग्रेस की कठपुतली’: बबीता फोगाट ने बहन-बहनोई के ‘झूठ’ की खोली पोल, कहा – PM मोदी पर पूरा भरोसा

भाजपा सांसद बृजभूषणा शरण सिंह और पहलवानों के बीच चल रहे विवाद ने एक नया मोड़ ले लिया है। पहले महिला पहलवान साक्षी मलिक ने अपने पति सत्यव्रत के साथ मिल कर वीडियो जारी किया जिसमें उन्होंने प्रदर्शन की अनुमति लेने वालो में भाजपा नेत्री बबीता फोगाट का नाम बताया। अब बबीता फोगाट ने इन आरोपों का खंडन करते हुए साक्षी और सत्यव्रत पर विपक्ष के मोहरे होने का आरोप लगाया है। 18 जून (रविवार) को बबीता ने महिला पहलवानों की हरकत को देश को शर्मिंदा करने वाला बताया।

दरअसल एक दिन पहले 17 जून (शनिवार) को साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत ने सामूहिक रूप से एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में उन्होंने एक कागज दिखाते हुए बताने का प्रयास किया था कि उनके प्रदर्शन के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति लेने वालों में भाजपा बबीता फोगाट प्रमुख हैं। इसी के साथ वीडियो में भाजपा नेता तीर्थ राणा का भी नाम लिया। इस दौरान साक्षी मलिक कॉन्ग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा का बचाव भी करती नजर आईं। साक्षी और सत्यव्रत ने धरने में किसी भी तरह की राजनीति होने से इंकार किया था।

खुद पर लगे आरोपों के बाद बबीता फोगाट खुल कर सामने आ गईं। 18 जून (रविवार) को बबीता ने साक्षी मलिक के ट्वीट को कोट (Quote) कर के अपना जवाब लिखा। बबीता ने साक्षी और उनके पति सत्यव्रत कादियान के आरोपों को हास्यास्पद बताया। प्रदर्शन के लिए जिस कागज को साक्षी मलिक ने अपने वीडियो में दिखाया था उसकी प्रमाणिकता पर सवाल खड़े करते हुए बबीता ने उसमें अपनी कोई सहमति या हस्ताक्षर न होने का दावा किया। बकौल बबीता थोड़े समय बाद सच्चाई निकल कर सामने आएगी।

बबीता ने पहलवानों पर आरोप लगाया कि वो अपने मामले में उन नेताओं का साथ ले रहे हैं जिन पर पहले से बलात्कार के केस चल रहे हैं। नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन किए गए हंगामे और गंगा में मेडल बहाने जैसे प्रयासों को बबीता ने शर्मनाक कदम बताते हुए इसे देश की छवि को गिराने वाला काम बताया। उन्होंने पीएम पर भरोसा जताते हुए साक्षी और उनके पति पर कॉन्ग्रेस की कठपुतली बन जाने का भी आरोप लगाया। अपने ट्वीट में बबीता ने #OurPMOurPride के साथ #BetiBachaoBetiPadhao, #Bjpforindia, #BjpforBeti जैसे हैशटैग भी लगाए।

लोगों को ईसाई बनाने आए थे मिशनरी, गाँव की महिलाओं ने कर दी धुनाई: प्रेयर की आड़ में धर्मांतरण की थी साजिश

छत्तीसगढ़ के दुर्ग में धर्म परिवर्तन कराने आईं ईसाई मिशनरियों से जुड़ी महिलाओं के साथ तीखी नोक-झोंक की। यहाँ ईसाई मिशनरियों द्वारा आयोजित एक प्रार्थना सभा में दो महिलाओं को ईसाई धर्म में धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश कर रही थीं। इसकी जानकारी होने पर स्थानीय महिलाएँ भड़क उठी।

दुर्ग भिलाई के मोहन नगर थाना क्षेत्र के उरला गाँव की महिलाओं ने ईसाई मिशनरियों को पीट भी दिया। घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुँची और दोनों पक्षों को थाने ले आई। थाने पहुँचने के बाद दोनों पक्षों में समझौता हो गया और किसी ने कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई।

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उरला बस्ती की रहने वाली चित्रलेखा साहू ने अपने घर पर एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था। सभा के दौरान चित्रलेखा के साथ एक अधेड़ उम्र की महिला और एक युवती थी। ये दोनों महिलाएँ लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रोत्साहित करने लगीं।

इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों का एक समूह चित्रलेखा के घर पर पहुँच गया। भीड़ को देखकर चित्रलेखा घटनास्थल से तुरंग भाग निकली। इस दौरान धर्मांतरण के लिए प्रोत्साहित करने वाली दो अन्य महिलाओं को स्थानीय महिलाओं ने पकड़ लिया और उन्हें पीट दिया।

उराला बस्ती के निवासियों ने आरोप लगाया है कि ये महिलाएँ इलाके में प्रार्थना सभा की आड़ में लोगों का धर्म परिवर्तन कराने में लगी हुई थीं। यह आरोप लगाया गया है कि चित्रलेखा कीे साथ वाली महिलाएँ लालच देकर बैठक में भाग लेने वाले लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए उसका रहे थे।

घटना का वीडियो तब से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। मोहन नगर थाना प्रभारी विपिन रंगारी ने बताया कि उरला बस्ती में दो दिन पहले मारपीट की घटना हुई थी। उन्होंने कहा, “सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुँची और बाद में दोनों पक्षों को पुलिस स्टेशन ले गई। किसी भी पक्ष ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की।”

‘ओम जय जगदीश हरे’ गाने वाली अफ़्रीकी-अमेरिकी गायिका PM मोदी के स्वागत कार्यक्रम में देंगी प्रस्तुति, योग दिवस पर UN के आयोजन में भी बिखेरेंगी छटा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 से 24 जून तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर होंगे। इस दौरान हॉलीवुड एक्ट्रेस और गायिका मैरी मिलबेन न्यूयॉर्क और वाशिंगटन डीसी में होने वाले कार्यक्रमों में प्रस्तुति देंगी। मिलबेन ‘जन गण मन’ और ‘ओम जय जगदीश हरे’ गाना गाकर भारत में भी काफी लोकप्रिय हो चुकी हैं। उन्होंने कहा है कि वह इस कार्यक्रम को लेकर काफी उत्साहित हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 21 जून को 9वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर मैरी मिलबेन संयुक्त राष्ट्र संघ मुख्यालय के नॉर्थ लॉन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में शिरकत करेंगी। इसके अलावा, उन्हें 23 जून को वाशिंगटन की रोनाल्ड रीगन बिल्डिंग में आयोजित होने वाले भारतीय समुदाय के कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए भी बुलाया गया है। दोनों ही कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में होंगे।

इस कार्यक्रम में प्रस्तुति के लिए आमंत्रित करने को लेकर मैरी मिलबेन ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा है, “मैं संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष साबा कोरोसी, राजदूत रुचिरा कामोबज और न्यूयॉर्क शहर के मेयर एरिक एडम्स के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका में होने वाले इस तरह के पहले कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करने के लिए उत्सुक हूँ।”

मिलबेन ने यह भी कहा है, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले सप्ताह होने वाली अमेरिकी यात्रा लेकर मुझे काफी उम्मीद और उत्साह है। यह यात्रा भारत और अमेरिका के बीच संबंध, दुनिया के दो सबसे बड़े लोकतंत्र और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण संबंधों के जश्न की तरह है। मैं इस निमंत्रण के लिए संचालन समिति को धन्यवाद देना चाहती हूँ।”

मैरी मिलबेन ने आगे कहा है, “इस साल जी20 शिखर सम्मेलन का आदर्श वाक्य एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य था। इसी आदर्श वाक्य के तहत हम अगले सप्ताह अमेरिका में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत करेंगे। यह आदर्श वाक्य अमेरिका और भारत के बीच महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक गठबंधन की भावना को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी के स्वागत के लिए वाशिंगटन डीसी में प्रवासी भारतीयों के इस कार्यक्रम में प्रस्तुति देना एक बड़ा सम्मान है।”

उन्होंने यह भी कहा, “अब लगातार चार अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए काम करने के बाद, मैं अमेरिका के बारे में काफी कुछ जानती हूँ। बीते कुछ समय से भारत और अमेरिका के बीच संबंध बहुत मजबूत हुए हैं। इसका श्रेय प्रधानमंत्री मोदी को जाता है। मैं और अमेरिका मोदी के स्वागत के लिए उत्साहित हैं।”

बता दें कि मैरी मिलबेन को अगस्त 2022 में भारत के 76वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रस्तुति देने के लिए बुलाया गया था। इसके साथ ही वह स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रस्तुति के लिए आमंत्रित की जाने वाली पहली अमेरिकी और अफ्रीकी-अमेरिकी कलाकार भी बन गई थीं। इसके अलावा, उनका ‘जन गण मन…’ और ‘ओम जय जगदीश हरे’ गाना भी भारत में काफी वायरल हो चुका है।

प्रधानमंत्री मोदी की पहली राजकीय यात्रा…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने 9 सालों के कार्यकाल में 7 बार अमेरिका जा चुके हैं। यह उनकी 8वीं यात्रा होगी। दोनों देशों के संबंधों को लेकर यह यात्रा काफी महत्वपूर्ण है। लेकिन इस यात्रा की खासबात यह है कि यह यात्रा PM मोदी की पहली राजकीय यात्रा है। ऐसे में दुनियाभर की नजर पीएम मोदी की इस यात्रा पर होगी। राजकीय यात्रा का मतलब यह है कि प्रधानमंत्री अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के आधिकारिक निमंत्रण पर अमेरिका की यात्रा पर जाएँगे।

अमेरिका की राजकीय यात्रा कई मायनों में बहुत खास होती है। प्रसिद्ध अमेरिकी इतिहासकार और डेविड एम रुबेनस्टीन नेशनल सेंटर फॉर व्हाइट हाउस हिस्ट्री के उपाध्यक्ष और अंतरिम निदेशक मैथ्यू कॉस्टेलो ने कहा है कि किसी भी राजकीय यात्रा को लेकर व्हाइट हाउस (अमेरिका का राष्ट्रपति भवन) 6 महीने पहले ही तैयारियाँ शुरू कर देता है।

बता दें कि अमेरिका में किसी भी राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 सालों का होता है। इसमें वह सिर्फ एक बार ही किसी भी नेता को राजकीय यात्रा के लिए निमंत्रण दे सकता है। जो बाइडेन ने यह सम्मान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। इस दौरे पर बाइडेन और मोदी के बीच उपहारों का आदान-प्रदान होगा। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को 21 तोपों की सलामी भी दी जा सकती है।

2 दिनों में ₹240 करोड़! दूसरे दिन ‘आदिपुरुष’ की कमाई में आई बड़ी गिरावट, जानें कैसे होगा हिट या फ्लॉप का निर्णय

फिल्म ‘आदिपुरुष’ के दूसरे दिन का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन निर्माता T-Series ने जारी कर दिया है। फिल्म ने जहाँ पहले दिन दुनिया भर में 140 करोड़ रुपए का कारोबार किया था, वहीं दूसरे दिन ‘आदिपुरुष’ ने 100 करोड़ रुपए बटोरे हैं। T-Series ने एक पोस्टर जारी कर के बताया कि 2 दिनों में फिल्म ने 240 करोड़ रुपए का वर्ल्डवाइड कमाई की है। हालाँकि, वीकेंड होने के बावजूद फिल्म का कलेक्शन गिरना इसके लिए ठीक नहीं है।

सबसे बड़ी बात ये है कि इसका बजट 500 करोड़ रुपए से भी अधिक है और फिल्म को भारत में इससे ज्यादा की नेट कमाई (ग्रॉस नहीं) करनी होगी, तब जाकर ये औसत कहलाएगी। इसीलिए, हिट या फ्लॉप के नेट कलेक्शन से ही डिसाइड होगा। पहले दिन फिल्म ने 87 करोड़ रुपए की डॉमेस्टिक नेट कमाई की थी, वहीं दूसरे दिन ये आँकड़ा 65 करोड़ रुपए रहा। इस तरह से 2 दिनों में फिल्म में 152 करोड़ रुपए की नेट कमाई की है।

फिल्म की कमाई प्रभास की ही ‘बाहुबली 2’ के सामने कहीं नहीं टिकती। जहाँ ‘बाहुबली 2’ की कमाई दिन प्रतिदिन बढ़ती चली गई थी और लंबी चली थी, विवादों में फँसी ‘आदिपुरुष’ का कलेक्शन गिरना अभी से शुरू हो गया है। रविवार (18 जून, 2023) को फिल्म कितना कमाती है, इस पर सभी की नजरें हैं। हो सकता है कि फिल्म अपने बजट का आधा वीकेंड पर निकाल ले। लेकिन, इसकी असली परीक्षा सोमवार से शुरू होगी।

लेखक मनोज मुंतशिर ने कहा है कि लोगों की आपत्तियों के बाद ‘आदिपुरुष’ के कुछ संवाद बदले जाएँगे। मनोज मुंतशिर का कहना है कि ‘आदिपुरुष’ में 4000 से भी ज़्यादा पंक्तियों के संवाद उन्होंने लिखे, कुछेक 5 पंक्तियों पर कुछ भावनाएँ आहत हुईं। उन्होंने दुःख जताते हुए कहा कि उन सैकड़ों पंक्तियों में जहाँ श्रीराम का यशगान किया, माँ सीता के सतीत्व का वर्णन किया, उनके लिए प्रशंसा भी मिलनी थी, जो पता नहीं क्यों मिली नहीं। बकौल मौज मुंतशिर, उनके ही ‘भाइयों’ ने उनके लिए सोशल मीडिया पर अशोभनीय शब्द लिखे।

डैम की सरकारी जमीन पर बन गईं अवैध मजारें, कइयों को प्रशासन ने किया ध्वस्त: भोपाल में अतिक्रमण का खेल, कौन कर रहा कुछ पता नहीं

मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार ने शनिवार (17 जून 2023) को राजधानी भोपाल (Bhopal, Madhya Pradesh) में बने अवैध मजारों पर हथौड़ा चलाया। प्रशासन ने अवैध रूप से बने चार मजारों को तोड़ दिया। चार साल पहले भी इसी तरह अतिक्रमण को हटाया गया था, लेकिन अतिक्रमणकारियों ने मजार को फिर से बना दिया।

भोपाल के कलियासोत डैम के पास बेशकीमती सरकारी जमीन पर चार मजारें बना दी गई थीं। इसके अलावा, दो अन्य मजारें भी हैं, जिनकी जाँच की जा रही है। भोपाल के कलेक्टर आशीष सिंह के आदेश पर इन 4 मजारों को तोड़ दिया गया।

कलेक्टर आशीष सिंह का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। इसके साथ ही कलेक्टर ने इस बात की भी जाँच करने का आदेश दिया है कि इन मजारों का निर्माण किसने किया, अनुमति किससे ली और इसके निर्माण का उद्देश्य क्या है। 

पिछले कुछ महीनों से डैम के एरिया में अज्ञात लोग आकर मजार बना दिए और चादर चढ़ा रहे थे। इसकी भनक नगर निगम प्रशासन को भी थी, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं की। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग नगर निगम को ट्रोल करने लगे।

सोशल मीडिया पर इन अवैध मजारों की तस्वीरें वायरल हो रही थीं। इसके बाद स्थानीय लोगों ने कलेक्टर से इसकी शिकायत की और कहा कि मजार बनाकर जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है। इसके बाद कलेक्टर ने इसका संज्ञान लिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहाँ पहले एक मजार थी, लेकिन सरकारी जमीनों पर कब्जे की नियत से कुछ समय में 7-8 मजारें बना दी गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाँध के पास आने के लिए ना रोड है और ना ही कोई आता-जाता है।

लोगों का कहना है कि चार पहले पहले भी इसी तरह अवैध मजारें बनाई गई थीं। तब इसकी शिकायत करने के बाद नगर निगम ने कार्रवाई किया था और इन मजारों को हटा दिया था। हालाँकि, बाद में इन्हें फिर से बना दिया गया। इनमें कुछ मजार तो बगल के आयुर्वेद कॉलेज की जमीन पर भी बना दी गई हैं।

कलियासोत डेम की झाड़ियों में जहाँ जाने से डर लगता है, वहाँ लैंड जिहाद का खेल गुप-चुप तरीके से खेला जा रहा है। कलियासोत बांध के पास ही एक नर्सरी है.यहां भी मज़ार नज़र आयी।

इमरजेंसी का काला दौर कोई नहीं भूल सकता: PM मोदी ने ‘मन की बात’ में साधा कॉन्ग्रेस पर निशाना; बताया- इस बार UN हेडक्वार्टर के योग कार्यक्रम में होंगे शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने रविवार (18 जून, 2023) को मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) के जरिए देश को संबोधित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने इंदिरा गाँधी द्वारा थोपे गए आपातकाल को भारतीय इतिहास का काल दौर बताया। उन्होंने यह भी कहा है कि देश को 2025 तक टी. बी. मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। इसके अलावा, PM ने मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए जापान की मियावाकी तकनीक और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर भी बात की।

यह प्रधानमंत्री मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम का 102वाँ एपिसोड था। इस कार्यक्रम में पीएम ने कहा है, “बड़े से बड़ा लक्ष्य हो या कठिन-से-कठिन चुनौती हो भारत के लोगों का सामूहिक बल, सामूहिक शक्ति, हर चुनौती का हल निकाल देता है। अभी दो-तीन दिन पहले आए चक्रवात बिपरजॉय ने कच्छ में कितना कुछ तहस-नहस कर दिया। लेकिन, कच्छ के लोगों ने जिस हिम्मत और तैयारी के साथ इतने खतरनाक चक्रवात का मुकाबला किया वह अभूतपूर्व है। दो दशक पहले आए भीषण भूकंप को लेकर कहा जाता था कि कच्छ के लोग नहीं उबर पाएँगे। लेकिन कच्छ के लोग वापस खड़े हो गए। मुझे विश्वास है कि इस चक्रवात से भी कच्छ के लोग बहुत तेजी से उबर जाएँगे।”

उन्होंने यह भी कहा है, “प्राकृतिक आपदाओं पर किसी का जोर नहीं होता। लेकिन, बीते वर्षों में भारत ने आपदा प्रबंधन की जो ताकत विकसित की है वह आज एक उदाहरण बन रही है। प्राकृतिक आपदाओं से मुकाबला करने का एक बड़ा तरीका है, प्रकृति का संरक्षण। मानसून के समय में इस दिशा में हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। यही कारण है कि आज देश, ‘Catch The Rain’ जैसे अभियानों के जरिए सामूहिक प्रयास कर रहा है।”

पीएम मोदी ने आगे कहा है, “ये नदी, नहर, सरोवर केवल जल-स्त्रोत ही नहीं होते हैं। बल्कि इनसे जीवन के रंग और भावनाएँ भी जुड़ी होती हैं। ऐसा ही एक दृश्य अभी कुछ ही दिन पहले महाराष्ट्र में देखने को मिला। ये इलाका ज्यादातर सूखे की चपेट में रहता है। पाँच दशक के इंतजार के बाद यहाँ निलवंडे डैम की नहर का काम अब पूरा हो रहा है। कुछ दिन पहले टेस्टिंग के दौरान नहर में पानी छोड़ा गया था। इस दौरान जो तस्वीरें आयी, वो वाकई भावुक करने वाली थी। गाँव के लोग ऐसे झूम रहे थे, जैसे होली-दिवाली का त्योहार हो।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा है कि भारत ने 2025 तक टी.बी. मुक्त भारत बनाने का संकल्प लिया। यह लक्ष्य बहुत बड़ा जरूर है। एक समय था जब टी.बी. का पता चलने के बाद परिवार के लोग ही दूर हो जाते थे। लेकिन आज के समय में टी.बी. के मरीज को परिवार का सदस्य बनाकर उनकी मदद की जा रही है। टी.बी. को जड़ से समाप्त करने के लिए, निक्षय मित्रों ने, मोर्चा संभाल लिया है। देश में बहुत बड़ी संख्या में विभिन्न सामाजिक संस्थाएँ निक्षय मित्र बनी हैं। इसी वजह से आज देश में 10 लाख से ज्यादा टी.बी. मरीजों को गोद लिया जा चुका है और ये पुण्य का काम करीब 85 हजार निक्षय मित्रों ने किया है।

पीएम ने यह भी कहा है कि अगर किसी जगह की मिट्टी उपजाऊ नहीं रही हो तो जापान की मियावाकी तकनीक उस क्षेत्र को फिर से हरा-भरा करने का बहुत अच्छा तरीका होती है। मियावाकी तकनीक से विकसित किए गए जंगल तेजी से फैलते हैं और दो-तीन दशक में जैव विविधता का केंद्र बन जाते हैं। अब इसका प्रसार बहुत तेजी से भारत के भी अलग-अलग हिस्सों में हो रहा है। कच्छ में भी 2001 के भूकंप में मारे गए लोगों की याद में मियावाकी पद्धति से स्मृति वन बनाया गया है। कच्छ जैसी जगह पर इसका सफल होना ये बताता है कि मुश्किल से मुश्किल प्राकृतिक परिवेश में भी ये तकनीक कितनी प्रभावी है।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा है कि इस बार विश्व के कोने-कोने में लोग अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं। इस वर्ष योग दिवस की थीम ‘योगा फॉर वसुधैव कुटुंबकम’ है। यानि ‘एक विश्व-एक परिवार’ के रूप में सबके कल्याण के लिए योग। हर बार की तरह, इस बार भी देश के कोने-कोने में, योग से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगें। उन्होंने आगे कहा है, “इस बार मुझे न्यूयॉर्क के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में होने वाले योग दिवस कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिलेग। मैं देख रहा हूँ कि सोशल मीडिया पर भी योग दिवस को लेकर गजब का उत्साह दिख रहा है।”

PM ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी द्वारा लगाए आपातकाल को भारतीय इतिहास का काला दौर बताते हुए कहा है कि भारत लोकतंत्र की जननी है। हम अपने लोकतांत्रिक आदर्शों को सर्वोपरि मानते हैं। अपने संविधान को सर्वोपरि मानते हैं। इसलिए हम 25 जून को भी कभी भुला नहीं सकते यह वही दिन है जब हमारे देश पर आपातकाल थोपा गया था। यह भारत के इतिहास का काला दौर था। लाखों लोगों ने आपातकाल का पूरी ताकत से विरोध किया था।

उन्होंने यह भी कहा है, “लोकतंत्र के समर्थकों पर उस दौरान इतना अत्याचार किया गया, इतनी यातनाएँ दी गईं कि आज भी मन सिहर उठता है। मैं चाहूँगा कि आज जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो देश की आजादी को खतरे में डालने वाले ऐसे अपराधों का भी जरुर अवलोकन करें। इससे आज की युवा पीढ़ी को लोकतंत्र के मायने और उसकी अहमियत समझने में और ज्यादा आसानी होगी।”

महिला सब-इंस्पेक्टर ने टैक्सी वाले मोहम्मद ताबिश से शादी के लिए लगाई अर्जी, मनाने आए घर वालों को बेरंग लौटाया: भाई ने कहा – ब्रेनवॉश हुआ

बरेली जिले में UP पुलिस की एक हिन्दू महिला सब-इंस्पेक्टर के मुस्लिम युवक से शादी का आधिकारिक आवेदन पत्र वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। महिला दरोगा का नाम रेशु मलिक है जिन्होंने मोहम्मद ताबिश से शादी करने के लिए SDM कार्यालय में आवेदन दिया है। SDM ने इस आवेदन पर 16 जून, 2023 (शुक्रवार) तक सभी पक्षों की आख्या तलब की थी। महिला दरोगा के भाई ने इस पूरे मामले को लव जिहाद बताते हुए मोहम्मद ताबिश के खिलाफ कार्रवाई की माँग करते हुए आपत्ति दर्ज करवाई है।

रेशु मलिक मूल रूप से मेरठ की रहने वाली हैं। साल 2017 में वो UP पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर भर्ती हुई थीं। उनकी ट्रेनिंग मुरादाबाद में हुई थी। ट्रेनिंग के बाद से उनकी पोस्टिंग बरेली में हुई थी। जानकारी के मुताबिक, मोहम्मद ताबिश और सब इंस्पेक्टर रेशु मलिक ने SDM सदर के कार्यालय में 17 मई, 2023 को विशेष विवाह अधिनियम के तहत शादी का आवेदन दिया था। इस आवेदन पर SDM ने रेशु मलिक के घर नोटिस भिजवा कर उनका पक्ष माँगा था।

सभी पक्षों को 16 जून तक अपना जवाब लगाने का समय दिया गया था। ऑपइंडिया के पास यह पत्र मौजूद है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए रेशु मलिक के भाई सचिन ने बताया कि वह पत्र उन्हें मिला तो पूरा परिवार चौंक गया। बकौल सचिन इस से पहले उन्हें या परिवार में किसी को भी इस मामले में कोई जानकारी नहीं थी। सचिन ने हमें यह भी बताया कि उनके घर वाले रेशु के लिए उनकी जाट बिरादरी में कोई लड़का भी खोज रहे थे। यह नोटिस पाने के बाद सब इंस्पेक्टर रेशु मलिक का पूरा परिवार बरेली पहुँचा। सचिन मलिक ने ऑपइंडिया को बताया कि उन्होंने पूरे परिवार सहित अपनी बहन को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी।

सचिन का कहना है कि वो किसान परिवार से हैं जो हिन्दू धर्म में गहरी श्रद्धा रखता है। उन्होंने दावा किया कि पहले उनकी बहन भी धार्मिक स्वभाव की थी लेकिन बाद में उन्हें ताबिश ने बहला कर बरगला दिया।

ताबिश के बारे में सचिन ने बताया कि जब बरेली के बहेड़ी में उनकी बहन की पोस्टिंग बतौर चौकी प्रभारी थी, तब वहीं वो टैक्सी चलवाता था। शिकायत में मूल रूप से बरेली निवासी ताबिश को अधेड़ उम्र का बताते हुए सचिन ने आरोप लगाया है कि वह इस्लाम का हवाला दे कर महिला सब इंस्पेक्टर को मजारों पर ले जाया करता था। इस दौरान ताबिश पर रेशु मलिक को मुल्ला-मौलवियों से भी मिलाने और आपत्तिजनक तस्वीरें खींच कर ब्लैकमेल करने का भी आरोप है।

इसी शिकायत में ताबिश पर अन्य महिलाओं को भी प्रेम जाल में फँसा कर गंभीर अपराधों को अंजाम देने का आरोप है। सचिन मलिक ने अपनी बहन का ट्रांसफर किसी अन्य जिले में करने की माँग करते हुए ताबिश पर FIR दर्ज कर के जेल भेजने की माँग की है।

ऑपइंडिया से बात करते हुए सचिन ने बताया कि उन्होंने ताबिश और रेशु मलिक की शादी में आपत्ति दर्ज करवा दी है। इस आपत्ति पर अगली तारीख 4 जुलाई, 2023 को पड़ी बताई है। सचिन की शिकायत पर बरेली पुलिस ने मामले को SDM कोर्ट में लंबित बताया है।

योजना, तैयारी और समय पर कार्रवाई…. जानें विनाशकारी बिपरजॉय चक्रवात से कैसे बचा गुजरात, राज्य सरकार ने क्या-क्या कदम उठाए

आखिरकार गुजरात एक और संकट से बाहर निकल आया है। अरब सागर से उठा चक्रवात ‘बिपरजॉय’ गुरुवार (15 जून 2023) की रात तेज हवाओं और बारिश के साथ कच्छ तट से टकराया। इसने कच्छ और सौराष्ट्र के कुछ तटीय जिलों को प्रभावित किया। उस दौरान उसकी रफ्तार 115 से 125 किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी, जो खतरनाक मानी जाती है। भले ही इतना भयानक तूफान आया हो, लेकिन अग्रिम योजना और एहतियाती उपायों के कारण जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है।

प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता, लेकिन योजना बनाकर उनसे मजबूती से निपटा जा सकता है। गुजरात सरकार ने इस तूफान से लड़ने में न तो एडवांस प्लानिंग में कमी दिखाई और न ही किसी तरह की लापरवाही। सरकार के सभी विभाग, सभी एजेंसियाँ, जिलों के प्रभारी मंत्रीगण और खुद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पूरी ऊर्जा के साथ काम किया। नतीजा यह हुआ कि इतनी बड़ी प्राकृतिक आपदा भी गुजरात में कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुँचा पाई।

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को विभिन्न जिलों की जिम्मेदारी सौंपी थी

चक्रवात बिपरजॉय के गुजरात की ओर रुख करने के साथ ही गुजरात की सरकार हरकत में आ गई। 11 जून 2023 (रविवार) को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने एक आपात बैठक बुलाकर राज्य के वरिष्ठ मंत्रियों को तटीय जिलों की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनका काम था कि चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए जिला प्रशासन की योजना एवं आपदा प्रबंधन कार्य में मार्गदर्शन करना।

जिम्मेदारी मिलने के साथ ही सभी मंत्रियों को आवंटित जिलों में तत्काल पहुँचने के निर्देश दे दिए गए। कच्छ में ऋषिकेश पटेल और प्रफुल्ल पनसेरिया, मोरबी में कानू देसाई, द्वारका में हर्ष संघवी, राजकोट में राघवजी पटेल, पोरबंदर में कुंवरजी बावलिया, जामनगर में मुलुभाई बेरा, जूनागढ़ में जगदीश विश्वकर्मा और गिर सोमनाथ में परसोत्तम सोलंकी को जिम्मेदारी दी गई।

ये सभी मंत्री तुरंत अपने आवंटित जिलों में पहुँचे और काम शुरू कर दिया। जब तक चक्रवात उन जिलों से गुजर नहीं गया, तब तक वे वहाँ डटे रहे। गृह राज्यमंत्री हर्ष संघवी लगातार लोगों के बीच रहे। वे स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए थे और अधिकारियों से संपर्क में थे। इस दौरान चक्रवात आने पर भी वे तेज हवाओं और बारिश के बीच काम करते दिखे।

शिक्षा राज्यमंत्री प्रफुल्ल पनसेरिया भी सक्रिय रहे और व्यक्तिगत रूप से अभियान में शामिल हुए। ऋषिकेश पटेल के पास कच्छ की जिम्मेदारी थी। उन्होंने व्यवस्था के साथ निरंतर समन्वय बनाकर मार्गदर्शन भी किया और काम भी किया। अन्य मंत्रियों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

धर्मार्थ संगठन और हिंदू संगठन भी आगे आए

धर्मार्थ संस्थान और हिंदू मंदिर भी इस आपदा काल में आगे आए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद एवं बजरंग दल जैसे संगठन भी लोगों की सेवा में लगे रहे। स्वामी नारायण संस्था और अन्य संगठन भी पीछे नहीं हटे। विस्थापितों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था हो या अग्रिम तैयारी, सब मिलकर काम करें तो सब कुछ हासिल हो जाता है और गुजरात में ऐसा देखने को मिला।

एक लाख लोगों को स्थानांतरित किया गया

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की बैठक के बाद कुल 1.08 लाख से अधिक लोगों को खतरनाक जगहों से शिफ्ट किया गया। इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में पलायन करना बड़ी बात है। इस दौरान गर्भवती महिलाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया और अभियान चलाकर उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किया गया। निकासी के बाद भी अगर लोग फँसे हुए थे तो उन्हें एयरलिफ्ट किया गया।

चक्रवात से निपटने के लिए सरकार ने गुजरात के 9 तटीय जिलों कच्छ, देवभूमि द्वारका, जामनगर, मोरबी, पोरबंदर, गिर सोमनाथ, जूनागढ़, राजकोट और वलसाड और 1 केंद्र शासित प्रदेश दीव में एनडीआरएफ की कुल 19 टीमों को तैनात किया। वहीं, SDRF की 12 टीमों को 7 तटीय जिलों (कच्छ, देवभूमि द्वारका, जामनगर, मोरबी, पोरबंदर, गिर सोमनाथ, जूनागढ़) और पाटन-बनासकांठा में तैनात किया गया था। SDRF की 1 टीम को सूरत में रिजर्व रखा गया था।

स्वास्थ्य विभाग अलर्ट रहा

चक्रवात की चपेट में आने से पहले राज्य के संभावित प्रभावित क्षेत्रों में कुल 1005 चिकित्सा दल तैनात किए गए थे। प्रभावितों के लिए 202 ‘108 एंबुलेंस’ और 302 सरकारी एंबुलेंस सहित कुल 504 एंबुलेंस आवंटित की गई थीं। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में 3,851 क्रिटिकल बेड की भी व्यवस्था की गई। इन क्षेत्रों में कुल 197 डीजी सेट आवंटित किए गए थे।

इसके अलावा, स्वास्थ्य विभाग ने संभावित प्रभावित क्षेत्रों में दवाओं और रसद की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की। प्रभावित जिलों के अस्पतालों में शत-प्रतिशत डीजल जनरेटर की व्यवस्था की गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा संभावित प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की सूची उनके प्रसव की अनुमानित तिथि के साथ बनाई और 1,152 गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।

इंसान के साथ-साथ जानवरों का भी रखा गया ख्याल

चक्रवात से सबसे ज्यादा बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है, लेकिन इससे निपटने के लिए ऊर्जा विभाग अभी से सक्रिय हो गया है। राज्य के 8 जिलों के कुल 3,751 गाँवों में 1,127 टीमों को तैनात किया गया और करीब 889 टीमों को स्टैंडबाय पर रखा गया है। इसी तरह वन विभाग ने भी प्रभावित जिलों में गिरे पेड़ों को हटाने के लिए कुल 237 टीमों को तैनात किया था।

आपदा से पहले न केवल इंसानों का ख्याल रखा गया था, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया गया था कि गिर के शेरों और अभयारण्य के अन्य जानवरों को नुकसान न पहुँचे। इसके लिए एशियाई शेरों के क्षेत्र में तेजी से बचाव कार्य करने और गिरे हुए पेड़ों को हटाने के लिए कुल 184 टीमों को तैनात किया गया था।

कच्छ अभयारण्य क्षेत्र में आवश्यक उपकरणों के साथ 13 परिचालन टीमों और 6 विशेष वन्यजीव बचाव दलों को भी तैनात किया गया था। सड़क एवं भवन निर्माण विभाग ने संभावित प्रभावित क्षेत्रों में 328 जेसीबी मशीन, 276 डंपर, 204 ट्रैक्टर, 60 लोडर और 234 अन्य उपकरणों सहित 132 टीमों को आवश्यक उपकरणों के साथ तैयार रखा।

पीएम मोदी की भी लगातार थी नजर

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल लगातार दो दिनों से राज्य आपातकाल संचालन केंद्र में रूके रहे। इस दौरान वे स्थिति पर नजर बनाए रखे और निर्देश देते रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बैठक की और चक्रवात से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी ली। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से टेलीफोन पर बातचीत कर तैयारियों की जानकारी ली। गृहमंत्री अमित शाह भी सक्रिय रहे और स्थिति पर नजर रखे। इसके अलावा, केंद्रीय एजेंसियाँ ​​भी सक्रिय रहीं।

गुजरात सरकार ने ‘जीरो कैजुअल्टी’ अप्रोच के साथ काम किया और इसमें उसे सफलता भी मिली। हालाँकि, इतना बड़ा तूफान तट से टकराया और तेज हवाएँ चलीं तथा जमकर बारिश हुई, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई। इस तरह सरकार ने लोगों को सुरक्षित रखने में सफलता प्राप्त की।

पुनर्निर्माण का काम भी जोरों पर शुरू

चक्रवात का प्रभाव कम होने के बाद पुनर्निर्माण का काम जोर-शोर से शुरू हो गया। कुछ ही घंटों में अधिकांश सड़कों को खोल दिया गया। उन हजारों गाँवों में बिजली बहाल कर दी गई, जहाँ बिजली की आपूर्ति बंद हो गई थी। जहाँ मरम्मत की आवश्यकता थी, वहाँ उस काम को पूरा किया गया।

गुजरात ने अतीत में भी प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है और मजबूत बनकर उभरा है। इस बार भी सरकार की समयबद्ध योजना, तैयारी और गंभीर प्रदर्शन के कारण राज्य ने सफलतापूर्वक बिपरजॉय चक्रवात का सामना किया। इस तरह राज्य एक और आपदा से सफलतापूर्वक बाहर निकल आया।

(सांख्यिकीय डेटा सौजन्य- सूचना विभाग, गुजरात सरकार)

हिन्दू एक होंगे तभी हिन्दू राष्ट्र बनेगा: कॉन्ग्रेस ने अपनी ही महिला MLA के बयान से किया किनारा, भाजपा ने ‘पाखंड’ बताया

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस विधायक खुले मंच से हिन्दू राष्ट्र का समर्थन किया है। अनीता योगेंद्र शर्मा नाम की महिला विधायक ने यह समर्थन शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती की धर्मसभा में किया। अनीता शर्मा के इस बयान पर भाजपा ने कॉन्ग्रेस को बहुरूपिया और पाखंडी पार्टी करार दिया है। वहीं कॉन्ग्रेस ने खुद को इस बयान से अलग कर लिया है और इसे अनीता शर्मा का निजी मत बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती का 81वाँ जन्म दिन मनाया जा रहा है। इस मौके पर एक धर्मसभा आयोजित की गई है। इस धर्म सभा में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ में शनिवार (17 जून 2023) को कॉन्ग्रेस विधायक अनीता योगेंद्र शर्मा भी पहुँची थीं जो धरसिवा विधानसभा से निर्वाचित हुई हैं। थोड़े समय बाद तमाम साधु-संतों के बीच उन्हें बोलने के लिए मंच पर बुलाया गया।

इस अवसर पर विधायक अनीता योगेंद्र शर्मा ने कहा, “शंकराचार्य महराज जी का जो आशीर्वाद है उसे आप सब संभाल कर रखना। हम सब आज हिन्दू राष्ट्र बनाने के लिए संकल्पित हुए हैं। मैं आप सभी से निवेदन करती हूँ कि जो मुहिम जगतगुरु शंकराचार्य ने चलाई है उसमें जो सहयोग बन सके उसे मिल कर किया जाए। हम जहाँ भी हैं वहाँ हिन्दू के लिए बात करें। हम हिन्दू एक हों तभी हिन्दू राष्ट्र बन सकता है।” कॉन्ग्रेस विधायक ने अंत में जगतगुरु शंकरचार्य की जयघोष के साथ अपने भाषण का समापन किया।

भाजपा ने कॉन्ग्रेस विधायक के हिन्दूराष्ट्र वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी है। छत्तीसगढ़ के प्रवक्ता गौरीशंकर ने इसे कॉन्ग्रेस का पाखंड बताया। उन्होंने कहा कि जब कॉन्ग्रेस ने देश को राम मय देखा तो ऐसी बयानबाजी उनके नेता करना शुरू कर दिए हैं। हालाँकि कॉन्ग्रेस ने अपनी विधायक के बयानों से किनारा कर लिया है। कॉन्ग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने इसे अनीता योगेंद्र शर्मा का निजी बयान बताया। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी भारत के धर्मनिरपेक्ष ढाँचे में विश्वास करती है और वो संविधान को ही सर्वोपरि रखती है।

बदले जाएँगे ‘आदिपुरुष’ के डायलॉग्स! विरोध के बाद मनोज मुंतशिर का ऐलान, बोले – हम एक-दूसरे के विरुद्ध खड़े हो गए तो सनातन हार जाएगा

लेखक मनोज मुंतशिर ने कहा है कि लोगों की आपत्तियों के बाद ‘आदिपुरुष’ के कुछ संवाद बदले जाएँगे। बता दें कि रामायण पर आधारित इस फिल्म में हनुमान जी को ‘जलेगी भी तेरे बाप की’ जैसे डायलॉग्स बोलते हुए दिखाया गया है। एक ट्वीट में मनोज मुंतशिर ने लोगों के विरोध का जिक्र करते हुए सफाई पेश की। उन्होंने कहा कि रामकथा से पहला पाठ जो कोई सीख सकता है, वो है हर भावना का सम्मान करना। उन्होंने कहा कि सही या ग़लत, समय के अनुसार बदल जाता है, भावना रह जाती है।

मनोज मुंतशिर का कहना है कि ‘आदिपुरुष’ में 4000 से भी ज़्यादा पंक्तियों के संवाद उन्होंने लिखे, कुछेक 5 पंक्तियों पर कुछ भावनाएँ आहत हुईं। उन्होंने दुःख जताते हुए कहा कि उन सैकड़ों पंक्तियों में जहाँ श्रीराम का यशगान किया, माँ सीता के सतीत्व का वर्णन किया, उनके लिए प्रशंसा भी मिलनी थी, जो पता नहीं क्यों मिली नहीं। बकौल मौज मुंतशिर, उनके ही ‘भाइयों’ ने उनके लिए सोशल मीडिया पर अशोभनीय शब्द लिखे।

उन्होंने कहा, “मेरे अपने, जिनकी पूज्य माताओं के लिए मैंने टीवी पर अनेकों बार कविताएँ पढ़ीं, उन्होंने मेरी ही माँ को अभद्र शब्दों से संबोधित किया। मैं सोचता रहा, मतभेद तो हो सकता है, लेकिन मेरे भाइयों में अचानक इतनी कड़वाहट कहाँ से आ गई कि वो श्रीराम का दर्शन भूल गए जो हर माँ को अपनी माँ मानते थे। शबरी के चरणों में ऐसे बैठे, जैसे कौशल्या के चरणों में बैठे हों। हो सकता है, 3 घंटे की फ़िल्म में मैंने 3 मिनट कुछ आपकी कल्पना से अलग लिख दिया हो, लेकिन आपने मेरे मस्तक पर सनातन-द्रोही लिखने में इतनी जल्दबाज़ी क्यों की, मैं जान नहीं पाया।”

मनोज मुंतशिर ने लोगों ने सवाल पूछा कि क्या आपने ‘जय श्री राम’ गीत नहीं सुना, ‘शिवोहम’ नहीं सुना, ‘राम सिया राम’ नहीं सुना? उन्होंने दावा किया कि’आदिपुरुष’ में सनातन की ये स्तुतियाँ भी तो उनकी ही लेखनी से जन्मी हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ‘तेरी मिट्टी’ और ‘देश मेरे ’भी तो उन्होंने ही लिखा है। मनोज मुंतशिर शुक्ला ने लोगों से कहा कि मुझे आपसे कोई शिकायत नहीं है, आप मेरे अपने थे, हैं और रहेंगे। उन्होंने चेताया कि हम एक दूसरे के विरुद्ध खड़े हो गए तो सनातन हार जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमने ‘आदिपुरुष’ सनातन सेवा के लिए बनाई है, जो लोग भारी संख्या में देख रहे हैं और उन्हें विश्वास है आगे भी देखेंगे। लेखक ने फ़ीस इस पोस्ट का कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि उनके लिए जनभावनाओं से बढ़ कर कुछ भी नहीं है। उन्होंने कहा कि अपने संवादों के पक्ष में वो अनगिनत तर्क दे सकते हैं, लेकिन इससे लोगों की पीड़ा कम नहीं होगी। उन्होंने ऐलान किया, “मैंने और फ़िल्म के निर्माता-निर्देशक ने निर्णय लिया है, कि वो कुछ संवाद जो आपको आहत कर रहे हैं, हम उन्हें संशोधित करेंगे, और इसी सप्ताह वो फ़िल्म में शामिल किए जाएँगे।”